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ये काम कर लिया को आपके प्रत्याशी की जीत पक्की है।
शब्द शिल्प शृंखला-68
"सुन्दर सी जिंदगी..."
बेमतलब के चोचले पालने से बड़ा नहीं बना जाता है। चटक-मटक वाली जिन्दगी की एक खूबी है कि वो पलक झपकते ही लोगों की नज़रों में घर कर जाती है लेकिन उतनी ही जल्दी नज़रों से उतर भी जाती है। किफ़ायती अंदाज़ में भी महँगी सी जिन्दगी जी सकते हैं।
आपका मस्तिष्क उपजाऊ है तो वो आपकी सबसे बड़ी जायदाद है। आसमाँ के तारे तोड़ने की उलझनों में उलझने के बजाय, किसी बगिया में चंपा, चमेली और मोगरा को बिना तोड़े किसी शाम उनकी सुगन्ध में नहा लीजिए। किसी दिन शृंगार पेटी को एक तरफ सरकाकर कुछ विचारों से मन को सजाओ और खुले दिल से सफर पर निकलो। आपकी अज्ञानता भी लोगों का दिल जीत लेगी। आप के साथ बिताये पल को लोग लतीफ़े की तरह दूसरों को सुनायेंगे। सादगी वाला शृंगार दुनिया में बिखरा पड़ा है उसको बटोरने के लिए निखालिस शिशुओं की क्रीड़ाएँ देखो, ममत्व पट से पोंछे जा रहे आँसू देखो, बाबा के अरमानों को पूरा करने के लिए घर आँगन में टहलती हुई, अल्फाजों का रियाज़ करती हुई, बिटिया को देखो।
मटकी के पानी को पंचामृत के अंदाज़ में बड़ी नाजुकी से घूंट-घूंट पियो। पुराने एल्बम को निकालकर कुछ हीरे से दिखनेवाले चेहरों को याद करो। यादों की एक मूसलाधार झड़ी लग जायेगी। खुशी या गम के आँसू आँखों को इस कदर धो देंगे कि खुमारी का काजल फिर कभी आंखों पर जंचेगा ही नहीं।
मन का मन ही मन शृंगार करो। आपकी नज़रों में खटकने वाले तिलों को हटाओ मत। कुछ और भी छुपे हुए दिली रहस्य है उनको पहचान कर सादगी और अदब से निखारो। बहुमूल्य सादगी इतनी जादुई है कि आपके तिल भी कद्रदानों की कपोल कल्पना में आकाशीय पिण्डों से रहस्यमयी लगेंगे।
शब्द शिल्प:
डॉ अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य, लक्की इन्सटिट्यूट अॉफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
"सुन्दर सी जिंदगी..."
बेमतलब के चोचले पालने से बड़ा नहीं बना जाता है। चटक-मटक वाली जिन्दगी की एक खूबी है कि वो पलक झपकते ही लोगों की नज़रों में घर कर जाती है लेकिन उतनी ही जल्दी नज़रों से उतर भी जाती है। किफ़ायती अंदाज़ में भी महँगी सी जिन्दगी जी सकते हैं।
आपका मस्तिष्क उपजाऊ है तो वो आपकी सबसे बड़ी जायदाद है। आसमाँ के तारे तोड़ने की उलझनों में उलझने के बजाय, किसी बगिया में चंपा, चमेली और मोगरा को बिना तोड़े किसी शाम उनकी सुगन्ध में नहा लीजिए। किसी दिन शृंगार पेटी को एक तरफ सरकाकर कुछ विचारों से मन को सजाओ और खुले दिल से सफर पर निकलो। आपकी अज्ञानता भी लोगों का दिल जीत लेगी। आप के साथ बिताये पल को लोग लतीफ़े की तरह दूसरों को सुनायेंगे। सादगी वाला शृंगार दुनिया में बिखरा पड़ा है उसको बटोरने के लिए निखालिस शिशुओं की क्रीड़ाएँ देखो, ममत्व पट से पोंछे जा रहे आँसू देखो, बाबा के अरमानों को पूरा करने के लिए घर आँगन में टहलती हुई, अल्फाजों का रियाज़ करती हुई, बिटिया को देखो।
मटकी के पानी को पंचामृत के अंदाज़ में बड़ी नाजुकी से घूंट-घूंट पियो। पुराने एल्बम को निकालकर कुछ हीरे से दिखनेवाले चेहरों को याद करो। यादों की एक मूसलाधार झड़ी लग जायेगी। खुशी या गम के आँसू आँखों को इस कदर धो देंगे कि खुमारी का काजल फिर कभी आंखों पर जंचेगा ही नहीं।
मन का मन ही मन शृंगार करो। आपकी नज़रों में खटकने वाले तिलों को हटाओ मत। कुछ और भी छुपे हुए दिली रहस्य है उनको पहचान कर सादगी और अदब से निखारो। बहुमूल्य सादगी इतनी जादुई है कि आपके तिल भी कद्रदानों की कपोल कल्पना में आकाशीय पिण्डों से रहस्यमयी लगेंगे।
शब्द शिल्प:
डॉ अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य, लक्की इन्सटिट्यूट अॉफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण 30 अप्रैल, 2019 के
Current Affairs के प्रश्नों को हमारे एप e-utkarsh
में हल करने के लिए
क्लिक करें:- http://bit.ly/2Lahc6F
30 अप्रैल, 2019 अंग्रेजी भाषा के प्रमुख समाचार पत्रों में
प्रकाशित महत्वपूर्ण खबरों का हिन्दी भाषा में
वीडियों विश्लेषण देखने के लिए
क्लिक करें:- https://youtu.be/CuCi64ailOg
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शब्द शिल्प शृंखला-69
"आत्मार्पित रहें"
सफलता के लिए अपने मिज़ाज़ में मौजूद ताजगी को कायम रखें। सीढ़ी के पहले पायदान से 25 वें पायदान तक चढ़ते-चढ़ते आपकी बाजुओं में ताकत कमजोर हो सकती है, पर इरादा मजबूत रहना चाहिए। इरादा मजबूत हो तो कठिन परिस्थितियों में कलेजे की बड़ी हुई धडकनों से भी ऊर्जा मिलने लगती है। जब भी उलझनों भरी झपकियां आने लगे; याद रखना, घुमन्तू नींद आपको भरमाने आयी है। नींद की खिदमत के लिए दरवाजा तभी खोलें जब आपको लगे कि मैं आज का सारा काम कर चुका हूं। ऐशपरस्ती की जिन्दगी में बहुत जल्दी आत्मा ठंडी पड़ जाती है, कुछ नीरस मगर निहायत ही जरूरी कामों की कड़ाई से पालना करो।
चौकस रहें। आपके आस पास की व्यवस्था में आपको भटकाने और काम में जुटाने वाले दोनों तरह के लोग और तत्व मौजूद हैं। जीत तय करने वाले लोगों और चीजों को चुनें। रविवार से रविवार तक के सफर के हासिल को खुद के सामने पेश करें। सात कालखंडों में बंटे सप्ताह में किस दिन आपने जिन्दगी के साथ न्याय नहीं किया अगले सप्ताह उस दिन दिन-रात को एक कर दो।
सफलता चाहने वाले नागरिकों के संविधान की उद्देशिका एक वाक्य में खत्म हो जाती हैं "हम सफलता की चाह रखने वाले लोग सफलता हासिल करने तक निष्ठापूर्वक आत्मार्पित रहेंगे" अगर उपर्युक्त कथन स्वतःस्फूर्त उपज है और होशोहवास में कहा गया है तो आप एक छोटा या बड़ा इतिहास का पन्ना जरूर बनायेंगे।
कुछ लोग क्या से क्या हो गए देखते देखते।
और कुछ लोग क्या से क्या हो गए देखते देखते।
दुनिया फटी आँखों से आपको देखने लगे इसके लिए इरादों की सुई में अरमानों का धागा पिरोकर अपने फटे हाल की बड़ी सफाई से समय रहते सिलाई कर दो।
शब्द शिल्प:
डॉ अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य, लक्की इन्सटिट्यूट अॉफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
"आत्मार्पित रहें"
सफलता के लिए अपने मिज़ाज़ में मौजूद ताजगी को कायम रखें। सीढ़ी के पहले पायदान से 25 वें पायदान तक चढ़ते-चढ़ते आपकी बाजुओं में ताकत कमजोर हो सकती है, पर इरादा मजबूत रहना चाहिए। इरादा मजबूत हो तो कठिन परिस्थितियों में कलेजे की बड़ी हुई धडकनों से भी ऊर्जा मिलने लगती है। जब भी उलझनों भरी झपकियां आने लगे; याद रखना, घुमन्तू नींद आपको भरमाने आयी है। नींद की खिदमत के लिए दरवाजा तभी खोलें जब आपको लगे कि मैं आज का सारा काम कर चुका हूं। ऐशपरस्ती की जिन्दगी में बहुत जल्दी आत्मा ठंडी पड़ जाती है, कुछ नीरस मगर निहायत ही जरूरी कामों की कड़ाई से पालना करो।
चौकस रहें। आपके आस पास की व्यवस्था में आपको भटकाने और काम में जुटाने वाले दोनों तरह के लोग और तत्व मौजूद हैं। जीत तय करने वाले लोगों और चीजों को चुनें। रविवार से रविवार तक के सफर के हासिल को खुद के सामने पेश करें। सात कालखंडों में बंटे सप्ताह में किस दिन आपने जिन्दगी के साथ न्याय नहीं किया अगले सप्ताह उस दिन दिन-रात को एक कर दो।
सफलता चाहने वाले नागरिकों के संविधान की उद्देशिका एक वाक्य में खत्म हो जाती हैं "हम सफलता की चाह रखने वाले लोग सफलता हासिल करने तक निष्ठापूर्वक आत्मार्पित रहेंगे" अगर उपर्युक्त कथन स्वतःस्फूर्त उपज है और होशोहवास में कहा गया है तो आप एक छोटा या बड़ा इतिहास का पन्ना जरूर बनायेंगे।
कुछ लोग क्या से क्या हो गए देखते देखते।
और कुछ लोग क्या से क्या हो गए देखते देखते।
दुनिया फटी आँखों से आपको देखने लगे इसके लिए इरादों की सुई में अरमानों का धागा पिरोकर अपने फटे हाल की बड़ी सफाई से समय रहते सिलाई कर दो।
शब्द शिल्प:
डॉ अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य, लक्की इन्सटिट्यूट अॉफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
👍1
लू लगने से मृत्यु क्यों होती है ?
हम सभी धूप में घूमते हैं फिर कुछ लोगों की ही धूप में जाने के कारण अचानक मृत्यु क्यों हो जाती है ?
👉 हमारे शरीर का तापमान हमेशा 37° डिग्री सेल्सियस होता है, इस तापमान पर ही हमारे शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम कर पाते है ।
👉 पसीने के रूप में पानी बाहर निकालकर शरीर 37° सेल्सियस टेम्प्रेचर मेंटेन रखता है, लगातार पसीना निकलते वक्त भी पानी पीते रहना अत्यंत जरुरी और आवश्यक है ।
👉 पानी शरीर में इसके अलावा भी बहुत कार्य करता है, जिससे शरीर में पानी की कमी होने पर शरीर पसीने के रूप में पानी बाहर निकालना टालता है । (बंद कर देता है )
👉 जब बाहर का टेम्प्रेचर 45° डिग्री के पार हो जाता है और शरीर की कूलिंग व्यवस्था ठप्प हो जाती है, तब शरीर का तापमान 37° डिग्री से ऊपर पहुँचने लगता है ।
👉 शरीर का तापमान जब 42° सेल्सियस तक पहुँच जाता है तब रक्त गरम होने लगता है और रक्त में उपस्थित प्रोटीन पकने लगता
है ।
👉 स्नायु कड़क होने लगते हैं इस दौरान सांस लेने के लिए जरुरी स्नायु भी काम करना बंद कर देते
हैं ।
👉 शरीर का पानी कम हो जाने से रक्त गाढ़ा होने लगता है, ब्लडप्रेशर low हो जाता है, महत्वपूर्ण अंग (विशेषतः ब्रेन) तक ब्लड सप्लाई रुक जाती है ।
👉 व्यक्ति कोमा में चला जाता है और उसके शरीर के एक-एक अंग कुछ ही क्षणों में काम करना बंद कर देते हैं, और उसकी मृत्यु हो जाती है ।
👉गर्मी के दिनों में ऐसे अनर्थ टालने के लिए लगातार थोड़ा-2 पानी पीते रहना चाहिए और हमारे शरीर का तापमान 37° मेन्टेन किस तरह रह पायेगा इस ओर ध्यान देना चाहिए ।
Equinox phenomenon: इक्विनॉक्स प्रभाव आने वाले दिनों में भारत को प्रभावित करेगा ।
कृपया 12 से 3 बजे के बीच घर, कमरे या ऑफिस के अंदर रहने का प्रयास करें ।
तापमान 40 डिग्री के आस पास विचलन की अवस्था मे रहेगा ।
यह परिवर्तन शरीर मे निर्जलीकरण और सूर्यातप की स्थिति उत्पन्न कर देगा ।
(ये प्रभाव भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर सूर्य चमकने के कारण पैदा होता है) ।
कृपया स्वयं को और अपने जानने वालों को पानी की कमी से ग्रसित न होने दें ।
किसी भी अवस्था में कम से कम 3 लीटर पानी जरूर पियें । किडनी की बीमारी वाले प्रति दिन कम से कम 6 से 8 लीटर पानी जरूर लें ।
जहां तक सम्भव हो ब्लड प्रेशर पर नजर रखें । किसी को भी हीट स्ट्रोक हो सकता है ।
ठंडे पानी से नहाएं । इन दिनों मांस का प्रयोग छोड़ दें या कम से कम
करें ।
फल और सब्जियों को भोजन मे ज्यादा स्थान दें ।
हीट वेव कोई मजाक नही है ।
एक बिना प्रयोग की हुई मोमबत्ती को कमरे से बाहर या खुले मे रखें, यदि मोमबत्ती पिघल जाती है तो ये गंभीर स्थिति है ।
शयन कक्ष और अन्य कमरों मे 2 आधे पानी से भरे ऊपर से खुले पात्रों को रख कर कमरे की नमी बरकरार रखी जा सकती है ।
अपने होठों और आँखों को नम रखने का प्रयत्न करें ।
हम सभी धूप में घूमते हैं फिर कुछ लोगों की ही धूप में जाने के कारण अचानक मृत्यु क्यों हो जाती है ?
👉 हमारे शरीर का तापमान हमेशा 37° डिग्री सेल्सियस होता है, इस तापमान पर ही हमारे शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम कर पाते है ।
👉 पसीने के रूप में पानी बाहर निकालकर शरीर 37° सेल्सियस टेम्प्रेचर मेंटेन रखता है, लगातार पसीना निकलते वक्त भी पानी पीते रहना अत्यंत जरुरी और आवश्यक है ।
👉 पानी शरीर में इसके अलावा भी बहुत कार्य करता है, जिससे शरीर में पानी की कमी होने पर शरीर पसीने के रूप में पानी बाहर निकालना टालता है । (बंद कर देता है )
👉 जब बाहर का टेम्प्रेचर 45° डिग्री के पार हो जाता है और शरीर की कूलिंग व्यवस्था ठप्प हो जाती है, तब शरीर का तापमान 37° डिग्री से ऊपर पहुँचने लगता है ।
👉 शरीर का तापमान जब 42° सेल्सियस तक पहुँच जाता है तब रक्त गरम होने लगता है और रक्त में उपस्थित प्रोटीन पकने लगता
है ।
👉 स्नायु कड़क होने लगते हैं इस दौरान सांस लेने के लिए जरुरी स्नायु भी काम करना बंद कर देते
हैं ।
👉 शरीर का पानी कम हो जाने से रक्त गाढ़ा होने लगता है, ब्लडप्रेशर low हो जाता है, महत्वपूर्ण अंग (विशेषतः ब्रेन) तक ब्लड सप्लाई रुक जाती है ।
👉 व्यक्ति कोमा में चला जाता है और उसके शरीर के एक-एक अंग कुछ ही क्षणों में काम करना बंद कर देते हैं, और उसकी मृत्यु हो जाती है ।
👉गर्मी के दिनों में ऐसे अनर्थ टालने के लिए लगातार थोड़ा-2 पानी पीते रहना चाहिए और हमारे शरीर का तापमान 37° मेन्टेन किस तरह रह पायेगा इस ओर ध्यान देना चाहिए ।
Equinox phenomenon: इक्विनॉक्स प्रभाव आने वाले दिनों में भारत को प्रभावित करेगा ।
कृपया 12 से 3 बजे के बीच घर, कमरे या ऑफिस के अंदर रहने का प्रयास करें ।
तापमान 40 डिग्री के आस पास विचलन की अवस्था मे रहेगा ।
यह परिवर्तन शरीर मे निर्जलीकरण और सूर्यातप की स्थिति उत्पन्न कर देगा ।
(ये प्रभाव भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर सूर्य चमकने के कारण पैदा होता है) ।
कृपया स्वयं को और अपने जानने वालों को पानी की कमी से ग्रसित न होने दें ।
किसी भी अवस्था में कम से कम 3 लीटर पानी जरूर पियें । किडनी की बीमारी वाले प्रति दिन कम से कम 6 से 8 लीटर पानी जरूर लें ।
जहां तक सम्भव हो ब्लड प्रेशर पर नजर रखें । किसी को भी हीट स्ट्रोक हो सकता है ।
ठंडे पानी से नहाएं । इन दिनों मांस का प्रयोग छोड़ दें या कम से कम
करें ।
फल और सब्जियों को भोजन मे ज्यादा स्थान दें ।
हीट वेव कोई मजाक नही है ।
एक बिना प्रयोग की हुई मोमबत्ती को कमरे से बाहर या खुले मे रखें, यदि मोमबत्ती पिघल जाती है तो ये गंभीर स्थिति है ।
शयन कक्ष और अन्य कमरों मे 2 आधे पानी से भरे ऊपर से खुले पात्रों को रख कर कमरे की नमी बरकरार रखी जा सकती है ।
अपने होठों और आँखों को नम रखने का प्रयत्न करें ।
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परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण 01 मई, 2019 के
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01 मई, 2019 अंग्रेजी भाषा के प्रमुख समाचार पत्रों में
प्रकाशित महत्वपूर्ण खबरों का हिन्दी भाषा में
वीडियों विश्लेषण देखने के लिए
क्लिक करें:- https://youtu.be/Fzc8fs-BPbI
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शब्द शिल्प शृंखला-70
"धूम मचा दो..."
एक दिन शान्त बैठकर अपने भीतर का जायजा लो कि आपकी जिन्दगी का सबसे बड़ा मक़सद क्या है। फिर ख्याल करो कि आप उसकी तरफ निढाल होकर खिसक रहे हो या जी जान से उसके लिए जुटे हुए हो। खैर बीते वक्त की बात छोड़ो! अपने उस सपने की तरफ वाकई कूच करना चाहते हो?
खुद पर बेइंतिहा इख़्तियार कर और आत्मा को जोश से अनुप्राणित कर अपने सपने साधने वाले सामान को उठाओ और चल पड़ो। "भाई ये रास्ता मुश्किल है" "तुमसे नहीं होगा" जैसी अनाप-शनाप को अनसुना कर दो। मकसद पूरा करने में आपकी मदद आपसे ज्यादा कोई नहीं कर सकता। अपने सिमटे हुए ख्यालों को इकट्ठा कर खुद को एक सौग़ात देना चाहते हो तो अपने अद्भुत हुनर को निखारने के लिए अपने चंद भौतिक सुखों का तत्काल त्याग कर दो। सुखों का दरिया अब भी बहेगा लेकिन उसका स्वाद, रंग, रूप अलग होगा। कुछ कुछ आपके सपने से मिलता जुलता। केवल सोचते ही रहने से तो रोज़ मकसद से एक कदम दूर होते जा रहे हो। जहाँ भी पसंद हो वहाँ वो चार चीज़ें लिख दो जो आप पाना चाहते है। हर सुबह उठकर मौन प्रतिज्ञा की तरह उन्हें पढ़ाे और पूरे दिन के सफर का मानचित्र और मार्ग आपको समझ आ जायेगा। हर शाम जब सोने लगो जब आपको पता होना चाहिए कि कल का अलार्म कितने बजे का और क्यों लगाना है?
लगन की पराकाष्ठा होगी तो आपके अस्तित्व का धूम-धड़ाका मीलों दूर तक सुनाई देगा। लेकिन ये वो संधिकाल है जब किसी तारीफ़ से फूल कर कुप्पा हुए बगैर आप अपनी जिम्मेदारी के प्रति और संजीदा हो जाते है। हर तारीफ एक चेतावनी है कि लोग अब इससे नीचा आपको देखना ही नहीं चाहते हैं। आपके भीतर एक 'सेंसर बोर्ड' है उसके निर्णय आपके जीवन की पटकथा को हिट कराएंगे। निर्णय अच्छे और सोच समझकर लें।
इसी जुनून से चलते रहे तो किसी दिन अपनी 'सफ़ल जिंदगी' को देखकर आप खुद ही गुनगुनाने लगोगे "हाँ तुम बिल्कुल वैसी हो जैसा मैंने सोचा था..."
शब्द शिल्प:
डॉ अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य, लक्की इन्सटिट्यूट अॉफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
"धूम मचा दो..."
एक दिन शान्त बैठकर अपने भीतर का जायजा लो कि आपकी जिन्दगी का सबसे बड़ा मक़सद क्या है। फिर ख्याल करो कि आप उसकी तरफ निढाल होकर खिसक रहे हो या जी जान से उसके लिए जुटे हुए हो। खैर बीते वक्त की बात छोड़ो! अपने उस सपने की तरफ वाकई कूच करना चाहते हो?
खुद पर बेइंतिहा इख़्तियार कर और आत्मा को जोश से अनुप्राणित कर अपने सपने साधने वाले सामान को उठाओ और चल पड़ो। "भाई ये रास्ता मुश्किल है" "तुमसे नहीं होगा" जैसी अनाप-शनाप को अनसुना कर दो। मकसद पूरा करने में आपकी मदद आपसे ज्यादा कोई नहीं कर सकता। अपने सिमटे हुए ख्यालों को इकट्ठा कर खुद को एक सौग़ात देना चाहते हो तो अपने अद्भुत हुनर को निखारने के लिए अपने चंद भौतिक सुखों का तत्काल त्याग कर दो। सुखों का दरिया अब भी बहेगा लेकिन उसका स्वाद, रंग, रूप अलग होगा। कुछ कुछ आपके सपने से मिलता जुलता। केवल सोचते ही रहने से तो रोज़ मकसद से एक कदम दूर होते जा रहे हो। जहाँ भी पसंद हो वहाँ वो चार चीज़ें लिख दो जो आप पाना चाहते है। हर सुबह उठकर मौन प्रतिज्ञा की तरह उन्हें पढ़ाे और पूरे दिन के सफर का मानचित्र और मार्ग आपको समझ आ जायेगा। हर शाम जब सोने लगो जब आपको पता होना चाहिए कि कल का अलार्म कितने बजे का और क्यों लगाना है?
लगन की पराकाष्ठा होगी तो आपके अस्तित्व का धूम-धड़ाका मीलों दूर तक सुनाई देगा। लेकिन ये वो संधिकाल है जब किसी तारीफ़ से फूल कर कुप्पा हुए बगैर आप अपनी जिम्मेदारी के प्रति और संजीदा हो जाते है। हर तारीफ एक चेतावनी है कि लोग अब इससे नीचा आपको देखना ही नहीं चाहते हैं। आपके भीतर एक 'सेंसर बोर्ड' है उसके निर्णय आपके जीवन की पटकथा को हिट कराएंगे। निर्णय अच्छे और सोच समझकर लें।
इसी जुनून से चलते रहे तो किसी दिन अपनी 'सफ़ल जिंदगी' को देखकर आप खुद ही गुनगुनाने लगोगे "हाँ तुम बिल्कुल वैसी हो जैसा मैंने सोचा था..."
शब्द शिल्प:
डॉ अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य, लक्की इन्सटिट्यूट अॉफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण 02 मई, 2019 के
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02 मई, 2019 अंग्रेजी भाषा के प्रमुख समाचार पत्रों में
प्रकाशित महत्वपूर्ण खबरों का हिन्दी भाषा में
वीडियों विश्लेषण देखने के लिए
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May 3rd, 2019
Daily Current Affairs Quiz,
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dated May 3rd, 2019
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Political Parties in India- National, State and Regional - Elections in India
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- निर्मल गहलोत (निदेशक,उत्कर्ष समूह)
सीबीएसई 12th के रिज़ल्ट के संदर्भ में
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आज सीबीएसई का 12th का रिज़ल्ट आया है और 500 में से 499 अंक लाने वाली बेटियों के फ़ोटो भी आए हैं । जो बच्चे अभी 12th में हुए हैं उन्हें तो उनके माता-पिता ने इन बच्चियों के अख़बार में आए फ़ोटो दिखा ही दिए हैं, साथ ही साथ जो 11th में प्रवेश पाए हैं, उन बच्चों को भी आज पैरेंट्स से स्पष्ट या घूमा-फिराकर यही अंकीय प्रतिस्पर्द्धा में टॉप रहने का व्याख्यान या नसीहतें ज़रूर मिली हैं ।
मानकर चलिएगा कि बहुत सारे विद्यार्थियों को ये समझा दिया जाएगा कि केवल उच्च अंक लाना ही कामयाबी का प्रतीक सूत्र है ।
मेरी नज़र से कुछ चिंतनीय बिन्दू आपके सामने रखूँगा। मेरे इन व्यक्तिगत विचारों पर सहमति या असहमति आपकी सोच-समझ, रूचि और जानकारी पर निर्भर करती है और मैं आपके पक्ष का सम्मान करता हूँ ।
सबसे पहली बात तो यह है कि अगर सारे पेपर पूर्णतया वस्तुनिष्ठ हों तो भी किसी हद तक माना जा सकता है कि शत-प्रतिशत अंक भी प्राप्त किए जा सकते हैं मगर जहाँ पेपर में सभी प्रकार के प्रश्न आते हैं और जहाँ सबजेक्टिव एप्रोच से भी उत्तर दिया जाता है, वहाँ शत-प्रतिशत अंक आना मेरी व्यक्तिगत राय में ना तो मुमकिन है और ना ही उचित । सारे विषयों में इस हद तक त्रुटिविहीन प्रदर्शन कैसे हो सकता है ? कैसे मूल्याँकनकर्ताओं को ये लगा कि किसी निबंध/पत्र या ह्यूमेनिटी के प्रश्नों के उत्तर इस क़दर शब्द-दर-शब्द उत्कृष्ट हो सकते हैं कि शत-प्रतिशत नम्बर मिलें ? वैज्ञानिकी विषयों में फिर भी समझ आता है मगर हिंदी, अंग्रेज़ी या अन्य साहित्य और ह्यूमेनिटी के अन्य विषयों में कैसे संभव हो सकता है ?
इस क़दर की उत्कृष्टता अगर बच्चों में आ गई है तो फिर ये फ़ख़्र की नहीं चिंता की बात है - बच्चों के लिए, शिक्षा व्यवस्था, पेपर निर्माण और मूल्याँकन के लिहाज़ से ।
दूसरा बिन्दू यह है कि ये अंकों की दौड़ क्यों? अख़बार में ये फ़ोटो, फिर स्कूल के पोस्टर/पैम्फ़्लेट्स/फ़्लेक्सेज़ में बड़ी-बड़ी तस्वीरें और इस बात का दावा कि उनके स्कूल ने ऐसा कर दिया है । यक़ीन मानिए इससे विज्ञापनीय लाभ है, स्कूल का फ़ेस वेल्यू बढ़ना है, फ़ीस बढ़ना है मगर अफ़सोस कि इन सबके साथ-साथ बच्चों पर अपेक्षाओं का अनचाहा बोझ भी डल रहा है। अंकों की गलाकाट प्रतियोगिता के लिए ट्यूशन, कोचिंग का आर्थिक भार माता-पिता के बटुए पर बढ़ रहा है और बच्चों के लिए 12th आते ही एक क़िस्म से असामाजिक हो जाने की अनुचित अपेक्षा भी जन्म ले लेती है ।
किस बात के लिए है ये सारी जद्दोजहद ? सामान्य समझ और आसपास के परिवेश पर बात रख पाने की अभिव्यक्ति को जानना ऐसे सौ फ़ीसदी अंकों से बेहतर है ।
देश के सारे अच्छे और उच्च सेवाओं की परीक्षाओं में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता माँगी जाती है और इम्तिहान एवं साक्षात्कार में सामान्य समझ, वैचारिक स्पष्टता और सभी विषयों में अच्छी सामान्य जानकारी का मूल्याँकन किया जाता है। कहीं भी शत-प्रतिशत अंक की ना तो दरकार है और ना ही ऐसा होना पर किसी प्रतियोगी परीक्षा से उन्मुक्ति । बल्कि सुखद हक़ीक़त तो यह है कि ऐसी परीक्षाओं में पिछले सालों के चयनित अभ्यर्थियों का शैक्षणिक रेकार्डस देखिए, अपवाद को छोड़ दें तो अधिकांशत ये चयनित अभ्यर्थी स्कूली और महाविद्यालयी शिक्षा में औसत से थोड़ा ऊपर वाले अंक भार वाले ही निकलेंगे ।
ये उच्च अंक लाने की अंधी दौड़ आर्थिक बोझ का दुश्चक्र तो है ही, साथ ही साथ बढ़ती संवादहीनता के दौर में बच्चों का एक या दो साल खा जाना है । किताबी कीड़ा हो जाने से लाख गुना बेहतर एक जागरूक शिक्षित बच्चा होना है ।
तीसरी चिंता है इस महत्त्वाकांक्षा की लड़ाई में बच्चों की रचनात्मकता ख़त्म होने लग जाती है और अवसाद शुरू हो जाता है । ज़्यादा से ज़्यादा अंक लाने है, पड़ौसी से ज़्यादा लाने है, अपने रिश्तेदार के बच्चे से ज़्यादा अंक लाने है......उससे ज़्यादा लाने हैं, इससे ज़्यादा अंक लाने हैं ......!!! क्या है ये ? रटंत पद्धति से क्या दे देंगे हम बच्चों को ? कौनसी जिद्द है ये?
मेहरबानी करनी होगी बच्चों पर । हम उन्हें बोर्ड की कक्षा के लिहाज़ से अपेक्षाकृत गंभीर होने के लिए कहें, हम उन्हें अच्छे प्रदर्शन के लिए कहें मगर अंकों की दौड़ में मत उलझाएं । आप समझाइए कि 11th या 12th क्यों दसवीं तक की कक्षाओं से ज़्यादा गांभीर्य माँगती है मगर अंकों का प्रतिशत उनकी समझ का पैमाना ना बनाएँ ।
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आज सीबीएसई का 12th का रिज़ल्ट आया है और 500 में से 499 अंक लाने वाली बेटियों के फ़ोटो भी आए हैं । जो बच्चे अभी 12th में हुए हैं उन्हें तो उनके माता-पिता ने इन बच्चियों के अख़बार में आए फ़ोटो दिखा ही दिए हैं, साथ ही साथ जो 11th में प्रवेश पाए हैं, उन बच्चों को भी आज पैरेंट्स से स्पष्ट या घूमा-फिराकर यही अंकीय प्रतिस्पर्द्धा में टॉप रहने का व्याख्यान या नसीहतें ज़रूर मिली हैं ।
मानकर चलिएगा कि बहुत सारे विद्यार्थियों को ये समझा दिया जाएगा कि केवल उच्च अंक लाना ही कामयाबी का प्रतीक सूत्र है ।
मेरी नज़र से कुछ चिंतनीय बिन्दू आपके सामने रखूँगा। मेरे इन व्यक्तिगत विचारों पर सहमति या असहमति आपकी सोच-समझ, रूचि और जानकारी पर निर्भर करती है और मैं आपके पक्ष का सम्मान करता हूँ ।
सबसे पहली बात तो यह है कि अगर सारे पेपर पूर्णतया वस्तुनिष्ठ हों तो भी किसी हद तक माना जा सकता है कि शत-प्रतिशत अंक भी प्राप्त किए जा सकते हैं मगर जहाँ पेपर में सभी प्रकार के प्रश्न आते हैं और जहाँ सबजेक्टिव एप्रोच से भी उत्तर दिया जाता है, वहाँ शत-प्रतिशत अंक आना मेरी व्यक्तिगत राय में ना तो मुमकिन है और ना ही उचित । सारे विषयों में इस हद तक त्रुटिविहीन प्रदर्शन कैसे हो सकता है ? कैसे मूल्याँकनकर्ताओं को ये लगा कि किसी निबंध/पत्र या ह्यूमेनिटी के प्रश्नों के उत्तर इस क़दर शब्द-दर-शब्द उत्कृष्ट हो सकते हैं कि शत-प्रतिशत नम्बर मिलें ? वैज्ञानिकी विषयों में फिर भी समझ आता है मगर हिंदी, अंग्रेज़ी या अन्य साहित्य और ह्यूमेनिटी के अन्य विषयों में कैसे संभव हो सकता है ?
इस क़दर की उत्कृष्टता अगर बच्चों में आ गई है तो फिर ये फ़ख़्र की नहीं चिंता की बात है - बच्चों के लिए, शिक्षा व्यवस्था, पेपर निर्माण और मूल्याँकन के लिहाज़ से ।
दूसरा बिन्दू यह है कि ये अंकों की दौड़ क्यों? अख़बार में ये फ़ोटो, फिर स्कूल के पोस्टर/पैम्फ़्लेट्स/फ़्लेक्सेज़ में बड़ी-बड़ी तस्वीरें और इस बात का दावा कि उनके स्कूल ने ऐसा कर दिया है । यक़ीन मानिए इससे विज्ञापनीय लाभ है, स्कूल का फ़ेस वेल्यू बढ़ना है, फ़ीस बढ़ना है मगर अफ़सोस कि इन सबके साथ-साथ बच्चों पर अपेक्षाओं का अनचाहा बोझ भी डल रहा है। अंकों की गलाकाट प्रतियोगिता के लिए ट्यूशन, कोचिंग का आर्थिक भार माता-पिता के बटुए पर बढ़ रहा है और बच्चों के लिए 12th आते ही एक क़िस्म से असामाजिक हो जाने की अनुचित अपेक्षा भी जन्म ले लेती है ।
किस बात के लिए है ये सारी जद्दोजहद ? सामान्य समझ और आसपास के परिवेश पर बात रख पाने की अभिव्यक्ति को जानना ऐसे सौ फ़ीसदी अंकों से बेहतर है ।
देश के सारे अच्छे और उच्च सेवाओं की परीक्षाओं में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता माँगी जाती है और इम्तिहान एवं साक्षात्कार में सामान्य समझ, वैचारिक स्पष्टता और सभी विषयों में अच्छी सामान्य जानकारी का मूल्याँकन किया जाता है। कहीं भी शत-प्रतिशत अंक की ना तो दरकार है और ना ही ऐसा होना पर किसी प्रतियोगी परीक्षा से उन्मुक्ति । बल्कि सुखद हक़ीक़त तो यह है कि ऐसी परीक्षाओं में पिछले सालों के चयनित अभ्यर्थियों का शैक्षणिक रेकार्डस देखिए, अपवाद को छोड़ दें तो अधिकांशत ये चयनित अभ्यर्थी स्कूली और महाविद्यालयी शिक्षा में औसत से थोड़ा ऊपर वाले अंक भार वाले ही निकलेंगे ।
ये उच्च अंक लाने की अंधी दौड़ आर्थिक बोझ का दुश्चक्र तो है ही, साथ ही साथ बढ़ती संवादहीनता के दौर में बच्चों का एक या दो साल खा जाना है । किताबी कीड़ा हो जाने से लाख गुना बेहतर एक जागरूक शिक्षित बच्चा होना है ।
तीसरी चिंता है इस महत्त्वाकांक्षा की लड़ाई में बच्चों की रचनात्मकता ख़त्म होने लग जाती है और अवसाद शुरू हो जाता है । ज़्यादा से ज़्यादा अंक लाने है, पड़ौसी से ज़्यादा लाने है, अपने रिश्तेदार के बच्चे से ज़्यादा अंक लाने है......उससे ज़्यादा लाने हैं, इससे ज़्यादा अंक लाने हैं ......!!! क्या है ये ? रटंत पद्धति से क्या दे देंगे हम बच्चों को ? कौनसी जिद्द है ये?
मेहरबानी करनी होगी बच्चों पर । हम उन्हें बोर्ड की कक्षा के लिहाज़ से अपेक्षाकृत गंभीर होने के लिए कहें, हम उन्हें अच्छे प्रदर्शन के लिए कहें मगर अंकों की दौड़ में मत उलझाएं । आप समझाइए कि 11th या 12th क्यों दसवीं तक की कक्षाओं से ज़्यादा गांभीर्य माँगती है मगर अंकों का प्रतिशत उनकी समझ का पैमाना ना बनाएँ ।
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मौलिक रहने दीजिए । अख़बार पढ़ने दें । अपनी रूचि को यथासमय पनपने दें । उन्हें वो होने दें, जो वे हैं और होना चाहते हैं । फिर जितने नम्बर लाएँ, वो सिर-माथे है। एक-दो प्रतिशत कम-ज़्यादा होंगे तो जिंदगियाँ ख़त्म नहीं होंगी मगर दिया गया अवसाद ख़त्म कर सकता है, और कुछ नहीं करेगा ये अवसाद, तनाव और अंकों की गलाकाट प्रतियोगिता तो इतना ज़रूर कर देगा कि स्वाभाविक और मौलिक व्यक्तित्व को नहीं पनपने देगा ।
सौ फ़ीसदी या इसके आसपास अंक प्रतिशत पाने वाले बच्चे काफ़ी कम होते हैं मगर इनको सनसनी बनाकर जो माहौल बनाया जाता है वह बच्चों के बहुत बड़े वर्ग के लिए कई प्रतिभाओं का गला घोंट देता है ।
बच्चों को आत्मविश्वास में शत-प्रतिशत अंक लाने को कहिए, रचनात्मकता और मौलिकता में भी । ये ज़्यादा ज़रूरी है । वे अपना सर्वश्रेष्ठ दे पाएँ, ऐसा माहौल देना है मगर वो शत-प्रतिशत लाएँ, ऐसी जिद्द का बोझ नहीं देना है ।
बच्चों का बच्चा बने रहना बचा रहे बस !
Dr. JK Soni (IAS)
#cbseresult #cbsetoppers #marksarenoteverything #nomarksfightplease #talentversusmarks #nopressureformarks
सौ फ़ीसदी या इसके आसपास अंक प्रतिशत पाने वाले बच्चे काफ़ी कम होते हैं मगर इनको सनसनी बनाकर जो माहौल बनाया जाता है वह बच्चों के बहुत बड़े वर्ग के लिए कई प्रतिभाओं का गला घोंट देता है ।
बच्चों को आत्मविश्वास में शत-प्रतिशत अंक लाने को कहिए, रचनात्मकता और मौलिकता में भी । ये ज़्यादा ज़रूरी है । वे अपना सर्वश्रेष्ठ दे पाएँ, ऐसा माहौल देना है मगर वो शत-प्रतिशत लाएँ, ऐसी जिद्द का बोझ नहीं देना है ।
बच्चों का बच्चा बने रहना बचा रहे बस !
Dr. JK Soni (IAS)
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परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण 04 मई, 2019 के
Current Affairs के प्रश्नों को हमारे एप e-utkarsh
में हल करने के लिए
क्लिक करें:- http://bit.ly/2DLGrGA
04 मई, 2019 अंग्रेजी भाषा के प्रमुख समाचार पत्रों में
प्रकाशित महत्वपूर्ण खबरों का हिन्दी भाषा में
वीडियों विश्लेषण देखने के लिए
क्लिक करें:- https://youtu.be/BNStUbKJrI8
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04 मई, 2019 अंग्रेजी भाषा के प्रमुख समाचार पत्रों में
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आज 4 मई के करंट अफेयर्स के प्रश्नों का अंग्रेजी में वीडियों देखने के लिए क्लिक करें https://www.youtube.com/watch?v=FY5Bd2tx88M
इस प्रकार के Daily Current Affairs (Date Wise) उत्कर्ष क्लासेज के नये यूट्यूब चैनल UTKARSH in ENGLISH पर रात्रि 8 बजे लाइव किए जाते हैं यदि आप इन लाइव कक्षाओं एवं नये वीडियों के अपलोड से अपडेट रहना चाहते हैं तो आज ही उत्कर्ष के नये यूट्यूब चैनल UTKARSH in ENGLISH को Subscribe करें
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Daily Current Affairs Quiz | 04th May 2019 Current Affairs | For UPSC, RPSC, SSC, Railway
#Daily_Current_Affairs_Quiz | #04th_May_2019_Current_Affairs | For UPSC, RPSC, SSC, Railway & other exam 04 May 2019 Quiz Test Link:- http://bit.ly/2Vf8tF5 Y...