परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण 25 अप्रैल, 2019 के
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25 अप्रैल, 2019 अंग्रेजी भाषा के प्रमुख समाचार पत्रों में
प्रकाशित महत्वपूर्ण खबरों का हिन्दी भाषा में
वीडियों विश्लेषण देखने के लिए
क्लिक करें:- https://youtu.be/hPug0C4M2w8
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शब्द शिल्प शृंखला-64
"घड़ी"
आपने कोई ऐसा सपना पाल रखा है जो आपकी नज़र में मुश्किल है मगर हासिल किया जा सकता है। वही सपना दुनिया की नज़र में बहुत मुश्किल और नामुमकिन भी हो सकता है।
ये परेशानी मत पालिए कि आप और दुनिया दोनों अलग अलग सोचते हैं। आप दोनों अलग अलग हैं यह प्रकृति का अकाट्य सच है। एक बार हवा में उछल कर खुशी मनाओ कि सपने देखने के मामले में आप और दुनियां की आपस में बनती नहीं है।
मशविरा देने वाले उतना और वैसा ही दे सकते है जितना और जैसा उन्होंने किसी से लिया है। आपके विरले सपने को और किसी इंसान ने हासिल कर रखा है उससे सलाह जरूर लो; लेकिन अपने भीतर के सलाहकार को सबसे ज्यादा तवज्जो दो।
दुर्दशा वाले जूते दुनिया आपके पांवों में डाले इससे तो अच्छा है आप नंगे पांव ही कूच कर लो। अपने इरादे रूपी तकिये को सिरहाने रखकर कसकर पकड़ कर सोएं ताकि जगते ही पहली चीज़ आपकी अपनी हो।
दीवार पर लगी घड़ी बरसों से संगिनी रही आपको देख रही है। उसे ये भी मालूम है कि आज आपको नींद बहुत सता रही है। क्या वो आपकी नींद से सहानुभूति रखकर रुक जाती है?
व्यर्थ की भावनाओं में बहकर रुक जाने पर लोग घड़ी के पास कान लगाकर घड़ी की धड़कनों को सुनेंगे। हमारी धड़कनों को हम ही सुनते रहें तो बेहतर है। दूसरे सुने तो चिन्ता का विषय है। भावुकता की धाराओं में बहकर किनारे से छिटको मत।
अपने भीतर के 'सेल' जब पुराने होने लगे उन्हें वक्त गवाएं बगैर बदल दीजिए। चाबी भरनी हो भर दीजिए। कहीं सेकंड वाले कांटे की गति रखिए। कहीं मिनट वाले कांटे की तरह धीरे मगर संभल कर चलो। कहीं घंटे वाले कांटे की तरह एक कदम भी चलो मगर गंभीरता से। स्थिर भाव से अपना दायित्व निभाते रहो।
उठकर पहली नज़र आपकी घड़ी पर पड़ी है तो आप सही वस्तु से प्रेरित होकर उठे हो।
शब्द शिल्प:
डॉ अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य, लक्की इन्सटिट्यूट अॉफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
"घड़ी"
आपने कोई ऐसा सपना पाल रखा है जो आपकी नज़र में मुश्किल है मगर हासिल किया जा सकता है। वही सपना दुनिया की नज़र में बहुत मुश्किल और नामुमकिन भी हो सकता है।
ये परेशानी मत पालिए कि आप और दुनिया दोनों अलग अलग सोचते हैं। आप दोनों अलग अलग हैं यह प्रकृति का अकाट्य सच है। एक बार हवा में उछल कर खुशी मनाओ कि सपने देखने के मामले में आप और दुनियां की आपस में बनती नहीं है।
मशविरा देने वाले उतना और वैसा ही दे सकते है जितना और जैसा उन्होंने किसी से लिया है। आपके विरले सपने को और किसी इंसान ने हासिल कर रखा है उससे सलाह जरूर लो; लेकिन अपने भीतर के सलाहकार को सबसे ज्यादा तवज्जो दो।
दुर्दशा वाले जूते दुनिया आपके पांवों में डाले इससे तो अच्छा है आप नंगे पांव ही कूच कर लो। अपने इरादे रूपी तकिये को सिरहाने रखकर कसकर पकड़ कर सोएं ताकि जगते ही पहली चीज़ आपकी अपनी हो।
दीवार पर लगी घड़ी बरसों से संगिनी रही आपको देख रही है। उसे ये भी मालूम है कि आज आपको नींद बहुत सता रही है। क्या वो आपकी नींद से सहानुभूति रखकर रुक जाती है?
व्यर्थ की भावनाओं में बहकर रुक जाने पर लोग घड़ी के पास कान लगाकर घड़ी की धड़कनों को सुनेंगे। हमारी धड़कनों को हम ही सुनते रहें तो बेहतर है। दूसरे सुने तो चिन्ता का विषय है। भावुकता की धाराओं में बहकर किनारे से छिटको मत।
अपने भीतर के 'सेल' जब पुराने होने लगे उन्हें वक्त गवाएं बगैर बदल दीजिए। चाबी भरनी हो भर दीजिए। कहीं सेकंड वाले कांटे की गति रखिए। कहीं मिनट वाले कांटे की तरह धीरे मगर संभल कर चलो। कहीं घंटे वाले कांटे की तरह एक कदम भी चलो मगर गंभीरता से। स्थिर भाव से अपना दायित्व निभाते रहो।
उठकर पहली नज़र आपकी घड़ी पर पड़ी है तो आप सही वस्तु से प्रेरित होकर उठे हो।
शब्द शिल्प:
डॉ अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य, लक्की इन्सटिट्यूट अॉफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
👍1
प्रिय साथियो,
नमस्कार !!
आईएएस डॉ जितेंद्र कुमार सोनी, अध्यक्ष उत्कर्ष पूर्व छात्र परिषद की किताब एडियोस *ADIOS* को स्वयं पढ़ने के बाद जिस तरह की तारीफ़ मैंने की थी और अब जिस ढंग से यह बहुत तेज़ी से लोकप्रिय हो रही है, उस हिसाब से अब तो आप सब को ये Amazon से मंगवाकर पढ़ ही लेनी चाहिए ।
कई बार सोचता हूँ कि बाज़ार में हम दोस्तों के साथ कॉफ़ी या समोसा लेते वक़्त आराम से दो-सौ तीन सौ रूपए ख़र्च कर देते हैं और वहीं हिंदी की किसी किताब को सौ-डेढ़ सौ रूपए ख़र्च करके नहीं मंगवाते हैं । इसका नुक़सान यह होता है कि धीरे-धीरे प्रकाशक अपने हाथ पीछे खींचने लगता है और फिर कमतर किताबें बाहर आती हैं । साहित्य का बने रहना बहुत ज़रूरी है ।
आप इस किताब को जरूर पढ़िएगा और मुझे भरोसा है कि पढ़कर आप लेखक की संवेदनशीलता, समझ और अवलोकन सामर्थ्य की तारीफ़ जरूर करेंगे ।
लिंक फिर से रहा हूँ। अभी तो आग्रह है और यदि आपने किताब ख़रीदकर प्रतिक्रिया नहीं दी तो फिर बार-बार यही संदेश डालूँगा जब तक आप इसे मँगवा नहीं लेंगे। 😊😊😊
https://www.amazon.in/gp/product/9388820118/ref=cx_skuctr_share?smid=A10J7673ETRROZ&fbclid=IwAR08fsAU3kTgUZvyuwJez51S8JfUludatMGtkRhwZWHAxxR33kgsFFJkIO8
———-
This book *ADIOS* is written by Sahitya Academy Yuva Purskar winning writer Dr. Jitendra Kumar Soni, IAS.
Now it’s available on Amazon.
Please buy, read and review.
नमस्कार !!
आईएएस डॉ जितेंद्र कुमार सोनी, अध्यक्ष उत्कर्ष पूर्व छात्र परिषद की किताब एडियोस *ADIOS* को स्वयं पढ़ने के बाद जिस तरह की तारीफ़ मैंने की थी और अब जिस ढंग से यह बहुत तेज़ी से लोकप्रिय हो रही है, उस हिसाब से अब तो आप सब को ये Amazon से मंगवाकर पढ़ ही लेनी चाहिए ।
कई बार सोचता हूँ कि बाज़ार में हम दोस्तों के साथ कॉफ़ी या समोसा लेते वक़्त आराम से दो-सौ तीन सौ रूपए ख़र्च कर देते हैं और वहीं हिंदी की किसी किताब को सौ-डेढ़ सौ रूपए ख़र्च करके नहीं मंगवाते हैं । इसका नुक़सान यह होता है कि धीरे-धीरे प्रकाशक अपने हाथ पीछे खींचने लगता है और फिर कमतर किताबें बाहर आती हैं । साहित्य का बने रहना बहुत ज़रूरी है ।
आप इस किताब को जरूर पढ़िएगा और मुझे भरोसा है कि पढ़कर आप लेखक की संवेदनशीलता, समझ और अवलोकन सामर्थ्य की तारीफ़ जरूर करेंगे ।
लिंक फिर से रहा हूँ। अभी तो आग्रह है और यदि आपने किताब ख़रीदकर प्रतिक्रिया नहीं दी तो फिर बार-बार यही संदेश डालूँगा जब तक आप इसे मँगवा नहीं लेंगे। 😊😊😊
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परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण 26 अप्रैल, 2019 के
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26 अप्रैल, 2019 अंग्रेजी भाषा के प्रमुख समाचार पत्रों में
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26 अप्रैल, 2019 अंग्रेजी भाषा के प्रमुख समाचार पत्रों में
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शब्द शिल्प शृंखला-65
"फैसला करो..."
चंद फैसलों ने हमारी जिंदगी में बहुत बड़ा फर्क उत्पन्न कर दिया है। पसोपेश में पड़कर फैसला नहीं लेना, नावाजिब देरी करना या गलत फैसला लेना, ये तीनों समृद्ध विरासतों को भी धराशायी कर देते हैं।
फैसला नहीं लेना घातक है। लेकिन ताव में आकर झल्लाहट भरे फैसले लेना भी ठीक नहीं। कई बार हमारे ख्वाबों की क्यारी में कुछ पौधे जलाभाव में छटपटा कर प्राण त्याग देते हैं। अगर आपके विचारों में खुश्की ना होती तो जलाभाव भी नहीं होता, क्यारी भी खुशहाल होती। बस्ती के बीच जब घनघनाहट के साथ गजर बजता है, कुछ लोग "ये क्या शोर है" कहकर करवट बदलकर चादर को कस कर ओढ़ लेते हैं। कुछ लोग गजर का शुक्रिया अदा कर अपनी कर्मस्थली पर जाने के लिए उमंग के साथ रोज के अनुष्ठान के लिए तैयार होने लग जाते है।
फैसला लेने में नावाजिब देरी करना दोपहर में सूर्यनमस्कार करने जैसा है। गली में मुर्गा बांग देकर, घर में चिड़िया चहककर, सूरज खिड़की में झाँककर ताकीद करते हैं कि जीवन में ताजपोशी चाहते हो या समस्याओं का ताबीज़ से हल।
कुदरत का खेल देखो। हर जर्रा नियम में बंधा है। धूप बादलों को लाने का फैसला लेती है। बादल बरसात को लाने का फैसला लेते है। बरसात हरियाली को लाती है। हरियाली खुशियां लाती है।
अतिउल्लास में या उदासी में कुछ फैसले हम गलत ले लेते है। कोई बात नहीं, होता है। उन फैसलों को सही साबित कर दो; नहीं तो खुद से या औरों से माफी मांग कर गाड़ी को तुरंत पटरी पर लाने के लिए फिर से एक अच्छा फैसला तुरंत कर लो।
'अकर्मण्यता' घातक है, ऐसा शास्त्रोक्त भी है।
शब्द शिल्प:
डॉ अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य, लक्की इन्सटिट्यूट अॉफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
"फैसला करो..."
चंद फैसलों ने हमारी जिंदगी में बहुत बड़ा फर्क उत्पन्न कर दिया है। पसोपेश में पड़कर फैसला नहीं लेना, नावाजिब देरी करना या गलत फैसला लेना, ये तीनों समृद्ध विरासतों को भी धराशायी कर देते हैं।
फैसला नहीं लेना घातक है। लेकिन ताव में आकर झल्लाहट भरे फैसले लेना भी ठीक नहीं। कई बार हमारे ख्वाबों की क्यारी में कुछ पौधे जलाभाव में छटपटा कर प्राण त्याग देते हैं। अगर आपके विचारों में खुश्की ना होती तो जलाभाव भी नहीं होता, क्यारी भी खुशहाल होती। बस्ती के बीच जब घनघनाहट के साथ गजर बजता है, कुछ लोग "ये क्या शोर है" कहकर करवट बदलकर चादर को कस कर ओढ़ लेते हैं। कुछ लोग गजर का शुक्रिया अदा कर अपनी कर्मस्थली पर जाने के लिए उमंग के साथ रोज के अनुष्ठान के लिए तैयार होने लग जाते है।
फैसला लेने में नावाजिब देरी करना दोपहर में सूर्यनमस्कार करने जैसा है। गली में मुर्गा बांग देकर, घर में चिड़िया चहककर, सूरज खिड़की में झाँककर ताकीद करते हैं कि जीवन में ताजपोशी चाहते हो या समस्याओं का ताबीज़ से हल।
कुदरत का खेल देखो। हर जर्रा नियम में बंधा है। धूप बादलों को लाने का फैसला लेती है। बादल बरसात को लाने का फैसला लेते है। बरसात हरियाली को लाती है। हरियाली खुशियां लाती है।
अतिउल्लास में या उदासी में कुछ फैसले हम गलत ले लेते है। कोई बात नहीं, होता है। उन फैसलों को सही साबित कर दो; नहीं तो खुद से या औरों से माफी मांग कर गाड़ी को तुरंत पटरी पर लाने के लिए फिर से एक अच्छा फैसला तुरंत कर लो।
'अकर्मण्यता' घातक है, ऐसा शास्त्रोक्त भी है।
शब्द शिल्प:
डॉ अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य, लक्की इन्सटिट्यूट अॉफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
Shabd Shilpa-66
"Confidence"
It doesn't come overnight but when it comes, it brings a vast change in life. Only a privileged few are blessed with this. It's a meticulous and untiring journey which leads us to this metaphysical phenomena.
How you sip at your glasswater does give others an idea to judge your schooling at table right from childhood. While at the podium, you often raise your complains that you are mercilessly being stared by the audience. That also persistently with two eyes! I understand it's no comfortable a zone for a naive. Still you carry all the game changing buttons in your mind. Brighten up your eyes and start thinking that it's "once in a lifetime" event to address such big assembly. Suddenly some chemicals in mind would prompt you to make something out of it. Words accompanied with confidence would bring all the magic in simplest of the words but they have to come out with incessant supply of confidence. But you have to minutely be sure of your fumbles which audiences were never sure of.
But confidence never comes overnight. Confident hands, confident eyes, confident legs and confident tongue all these may carry unmeasurable strength, but they all have to do one-fourth inch journey in mind to travel from dark caves to open sky zone in mind.
Be yourself but which 'self' is going to be yours?
Shabd Shilpa
Dr Arjun Singh Sankhla
Principal, Lucky Institute of Professional Studies, Jodhpur.
"Confidence"
It doesn't come overnight but when it comes, it brings a vast change in life. Only a privileged few are blessed with this. It's a meticulous and untiring journey which leads us to this metaphysical phenomena.
How you sip at your glasswater does give others an idea to judge your schooling at table right from childhood. While at the podium, you often raise your complains that you are mercilessly being stared by the audience. That also persistently with two eyes! I understand it's no comfortable a zone for a naive. Still you carry all the game changing buttons in your mind. Brighten up your eyes and start thinking that it's "once in a lifetime" event to address such big assembly. Suddenly some chemicals in mind would prompt you to make something out of it. Words accompanied with confidence would bring all the magic in simplest of the words but they have to come out with incessant supply of confidence. But you have to minutely be sure of your fumbles which audiences were never sure of.
But confidence never comes overnight. Confident hands, confident eyes, confident legs and confident tongue all these may carry unmeasurable strength, but they all have to do one-fourth inch journey in mind to travel from dark caves to open sky zone in mind.
Be yourself but which 'self' is going to be yours?
Shabd Shilpa
Dr Arjun Singh Sankhla
Principal, Lucky Institute of Professional Studies, Jodhpur.
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शब्द शिल्प शृंखला-67
"कैसे चुनूँ ?"
लोकतंत्र का मेला है। लोक लुभावन चित्रामों से मैदान सज़ा है। कहीं बाँसुरी तो कहीं भोंपू की चिल्ल-पों सुनाई दे रही हैं। क्या खरीदूं? कहाँ जाऊं? क्या खाऊँ? के प्रश्न हर जेहन में हैं।
वो बड़े झूले वाला दस चक्कर लगवा कर भी उतारेगा वहीं जहाँ से चढ़े थे।
कुचक्री सी एक मशीन वाला कुछ रुपये लेकर आपका भाग्य बताने का वादा भी करेगा।
खिलौने बेचने वाला आपके साथ खिलवाड़ कर आपको भी खिलौना बना सकता है।
बर्फ की चुस्की सतरंगी मिठास से भरी है, वहाँ भीड़ ज्यादा है। मौसमी का पोषक मगर कड़वा जूस पीने गाहे बगाहे कोई ग्राहक आ जाता है।
कुछ लोग एक दूसरे का पाँव कुचलते निकल रहे है। डमरूवाला बंदरिया को नचा रहा है, हमारा मनोरंजन तो हुआ पर सीखा कुछ नहीं। आत्म-विभोर गुब्बारे वाले ने रबर के आवरण में हवा भरकर बेच दी।
"हर माल दस रुपये" की घोषणा वाले ने मानो एकात्म भाव से सामाजिक लूट मचा ली।
मुंशी प्रेमचंद के 'हामिद' ने जो 'अमीना' के लिए चिमटा खरीदा था, वो तो अब मेलों में मिलना ही बंद हो गया।
मेले के मुख्यचौक में आपका भाग्य बताने की एक मशीन लगी है। कानों पर सिर्फ आप सुन सको ऐसा 'ईयर फोन' लगा कर वो बटन दबाना जिस पर मशीन बोले कि यह बटन भाग्य सुनाने का नहीं भाग्य बनाने का है।
बटन को दबाने की रस्म निभाना जरूर।
शब्द शिल्प:
डॉ अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य, लक्की इन्सटिट्यूट अॉफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
"कैसे चुनूँ ?"
लोकतंत्र का मेला है। लोक लुभावन चित्रामों से मैदान सज़ा है। कहीं बाँसुरी तो कहीं भोंपू की चिल्ल-पों सुनाई दे रही हैं। क्या खरीदूं? कहाँ जाऊं? क्या खाऊँ? के प्रश्न हर जेहन में हैं।
वो बड़े झूले वाला दस चक्कर लगवा कर भी उतारेगा वहीं जहाँ से चढ़े थे।
कुचक्री सी एक मशीन वाला कुछ रुपये लेकर आपका भाग्य बताने का वादा भी करेगा।
खिलौने बेचने वाला आपके साथ खिलवाड़ कर आपको भी खिलौना बना सकता है।
बर्फ की चुस्की सतरंगी मिठास से भरी है, वहाँ भीड़ ज्यादा है। मौसमी का पोषक मगर कड़वा जूस पीने गाहे बगाहे कोई ग्राहक आ जाता है।
कुछ लोग एक दूसरे का पाँव कुचलते निकल रहे है। डमरूवाला बंदरिया को नचा रहा है, हमारा मनोरंजन तो हुआ पर सीखा कुछ नहीं। आत्म-विभोर गुब्बारे वाले ने रबर के आवरण में हवा भरकर बेच दी।
"हर माल दस रुपये" की घोषणा वाले ने मानो एकात्म भाव से सामाजिक लूट मचा ली।
मुंशी प्रेमचंद के 'हामिद' ने जो 'अमीना' के लिए चिमटा खरीदा था, वो तो अब मेलों में मिलना ही बंद हो गया।
मेले के मुख्यचौक में आपका भाग्य बताने की एक मशीन लगी है। कानों पर सिर्फ आप सुन सको ऐसा 'ईयर फोन' लगा कर वो बटन दबाना जिस पर मशीन बोले कि यह बटन भाग्य सुनाने का नहीं भाग्य बनाने का है।
बटन को दबाने की रस्म निभाना जरूर।
शब्द शिल्प:
डॉ अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य, लक्की इन्सटिट्यूट अॉफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
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ये काम कर लिया को आपके प्रत्याशी की जीत पक्की है।
शब्द शिल्प शृंखला-68
"सुन्दर सी जिंदगी..."
बेमतलब के चोचले पालने से बड़ा नहीं बना जाता है। चटक-मटक वाली जिन्दगी की एक खूबी है कि वो पलक झपकते ही लोगों की नज़रों में घर कर जाती है लेकिन उतनी ही जल्दी नज़रों से उतर भी जाती है। किफ़ायती अंदाज़ में भी महँगी सी जिन्दगी जी सकते हैं।
आपका मस्तिष्क उपजाऊ है तो वो आपकी सबसे बड़ी जायदाद है। आसमाँ के तारे तोड़ने की उलझनों में उलझने के बजाय, किसी बगिया में चंपा, चमेली और मोगरा को बिना तोड़े किसी शाम उनकी सुगन्ध में नहा लीजिए। किसी दिन शृंगार पेटी को एक तरफ सरकाकर कुछ विचारों से मन को सजाओ और खुले दिल से सफर पर निकलो। आपकी अज्ञानता भी लोगों का दिल जीत लेगी। आप के साथ बिताये पल को लोग लतीफ़े की तरह दूसरों को सुनायेंगे। सादगी वाला शृंगार दुनिया में बिखरा पड़ा है उसको बटोरने के लिए निखालिस शिशुओं की क्रीड़ाएँ देखो, ममत्व पट से पोंछे जा रहे आँसू देखो, बाबा के अरमानों को पूरा करने के लिए घर आँगन में टहलती हुई, अल्फाजों का रियाज़ करती हुई, बिटिया को देखो।
मटकी के पानी को पंचामृत के अंदाज़ में बड़ी नाजुकी से घूंट-घूंट पियो। पुराने एल्बम को निकालकर कुछ हीरे से दिखनेवाले चेहरों को याद करो। यादों की एक मूसलाधार झड़ी लग जायेगी। खुशी या गम के आँसू आँखों को इस कदर धो देंगे कि खुमारी का काजल फिर कभी आंखों पर जंचेगा ही नहीं।
मन का मन ही मन शृंगार करो। आपकी नज़रों में खटकने वाले तिलों को हटाओ मत। कुछ और भी छुपे हुए दिली रहस्य है उनको पहचान कर सादगी और अदब से निखारो। बहुमूल्य सादगी इतनी जादुई है कि आपके तिल भी कद्रदानों की कपोल कल्पना में आकाशीय पिण्डों से रहस्यमयी लगेंगे।
शब्द शिल्प:
डॉ अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य, लक्की इन्सटिट्यूट अॉफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
"सुन्दर सी जिंदगी..."
बेमतलब के चोचले पालने से बड़ा नहीं बना जाता है। चटक-मटक वाली जिन्दगी की एक खूबी है कि वो पलक झपकते ही लोगों की नज़रों में घर कर जाती है लेकिन उतनी ही जल्दी नज़रों से उतर भी जाती है। किफ़ायती अंदाज़ में भी महँगी सी जिन्दगी जी सकते हैं।
आपका मस्तिष्क उपजाऊ है तो वो आपकी सबसे बड़ी जायदाद है। आसमाँ के तारे तोड़ने की उलझनों में उलझने के बजाय, किसी बगिया में चंपा, चमेली और मोगरा को बिना तोड़े किसी शाम उनकी सुगन्ध में नहा लीजिए। किसी दिन शृंगार पेटी को एक तरफ सरकाकर कुछ विचारों से मन को सजाओ और खुले दिल से सफर पर निकलो। आपकी अज्ञानता भी लोगों का दिल जीत लेगी। आप के साथ बिताये पल को लोग लतीफ़े की तरह दूसरों को सुनायेंगे। सादगी वाला शृंगार दुनिया में बिखरा पड़ा है उसको बटोरने के लिए निखालिस शिशुओं की क्रीड़ाएँ देखो, ममत्व पट से पोंछे जा रहे आँसू देखो, बाबा के अरमानों को पूरा करने के लिए घर आँगन में टहलती हुई, अल्फाजों का रियाज़ करती हुई, बिटिया को देखो।
मटकी के पानी को पंचामृत के अंदाज़ में बड़ी नाजुकी से घूंट-घूंट पियो। पुराने एल्बम को निकालकर कुछ हीरे से दिखनेवाले चेहरों को याद करो। यादों की एक मूसलाधार झड़ी लग जायेगी। खुशी या गम के आँसू आँखों को इस कदर धो देंगे कि खुमारी का काजल फिर कभी आंखों पर जंचेगा ही नहीं।
मन का मन ही मन शृंगार करो। आपकी नज़रों में खटकने वाले तिलों को हटाओ मत। कुछ और भी छुपे हुए दिली रहस्य है उनको पहचान कर सादगी और अदब से निखारो। बहुमूल्य सादगी इतनी जादुई है कि आपके तिल भी कद्रदानों की कपोल कल्पना में आकाशीय पिण्डों से रहस्यमयी लगेंगे।
शब्द शिल्प:
डॉ अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य, लक्की इन्सटिट्यूट अॉफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण 30 अप्रैल, 2019 के
Current Affairs के प्रश्नों को हमारे एप e-utkarsh
में हल करने के लिए
क्लिक करें:- http://bit.ly/2Lahc6F
30 अप्रैल, 2019 अंग्रेजी भाषा के प्रमुख समाचार पत्रों में
प्रकाशित महत्वपूर्ण खबरों का हिन्दी भाषा में
वीडियों विश्लेषण देखने के लिए
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Current Affairs के प्रश्नों को हमारे एप e-utkarsh
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30 अप्रैल, 2019 अंग्रेजी भाषा के प्रमुख समाचार पत्रों में
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शब्द शिल्प शृंखला-69
"आत्मार्पित रहें"
सफलता के लिए अपने मिज़ाज़ में मौजूद ताजगी को कायम रखें। सीढ़ी के पहले पायदान से 25 वें पायदान तक चढ़ते-चढ़ते आपकी बाजुओं में ताकत कमजोर हो सकती है, पर इरादा मजबूत रहना चाहिए। इरादा मजबूत हो तो कठिन परिस्थितियों में कलेजे की बड़ी हुई धडकनों से भी ऊर्जा मिलने लगती है। जब भी उलझनों भरी झपकियां आने लगे; याद रखना, घुमन्तू नींद आपको भरमाने आयी है। नींद की खिदमत के लिए दरवाजा तभी खोलें जब आपको लगे कि मैं आज का सारा काम कर चुका हूं। ऐशपरस्ती की जिन्दगी में बहुत जल्दी आत्मा ठंडी पड़ जाती है, कुछ नीरस मगर निहायत ही जरूरी कामों की कड़ाई से पालना करो।
चौकस रहें। आपके आस पास की व्यवस्था में आपको भटकाने और काम में जुटाने वाले दोनों तरह के लोग और तत्व मौजूद हैं। जीत तय करने वाले लोगों और चीजों को चुनें। रविवार से रविवार तक के सफर के हासिल को खुद के सामने पेश करें। सात कालखंडों में बंटे सप्ताह में किस दिन आपने जिन्दगी के साथ न्याय नहीं किया अगले सप्ताह उस दिन दिन-रात को एक कर दो।
सफलता चाहने वाले नागरिकों के संविधान की उद्देशिका एक वाक्य में खत्म हो जाती हैं "हम सफलता की चाह रखने वाले लोग सफलता हासिल करने तक निष्ठापूर्वक आत्मार्पित रहेंगे" अगर उपर्युक्त कथन स्वतःस्फूर्त उपज है और होशोहवास में कहा गया है तो आप एक छोटा या बड़ा इतिहास का पन्ना जरूर बनायेंगे।
कुछ लोग क्या से क्या हो गए देखते देखते।
और कुछ लोग क्या से क्या हो गए देखते देखते।
दुनिया फटी आँखों से आपको देखने लगे इसके लिए इरादों की सुई में अरमानों का धागा पिरोकर अपने फटे हाल की बड़ी सफाई से समय रहते सिलाई कर दो।
शब्द शिल्प:
डॉ अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य, लक्की इन्सटिट्यूट अॉफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
"आत्मार्पित रहें"
सफलता के लिए अपने मिज़ाज़ में मौजूद ताजगी को कायम रखें। सीढ़ी के पहले पायदान से 25 वें पायदान तक चढ़ते-चढ़ते आपकी बाजुओं में ताकत कमजोर हो सकती है, पर इरादा मजबूत रहना चाहिए। इरादा मजबूत हो तो कठिन परिस्थितियों में कलेजे की बड़ी हुई धडकनों से भी ऊर्जा मिलने लगती है। जब भी उलझनों भरी झपकियां आने लगे; याद रखना, घुमन्तू नींद आपको भरमाने आयी है। नींद की खिदमत के लिए दरवाजा तभी खोलें जब आपको लगे कि मैं आज का सारा काम कर चुका हूं। ऐशपरस्ती की जिन्दगी में बहुत जल्दी आत्मा ठंडी पड़ जाती है, कुछ नीरस मगर निहायत ही जरूरी कामों की कड़ाई से पालना करो।
चौकस रहें। आपके आस पास की व्यवस्था में आपको भटकाने और काम में जुटाने वाले दोनों तरह के लोग और तत्व मौजूद हैं। जीत तय करने वाले लोगों और चीजों को चुनें। रविवार से रविवार तक के सफर के हासिल को खुद के सामने पेश करें। सात कालखंडों में बंटे सप्ताह में किस दिन आपने जिन्दगी के साथ न्याय नहीं किया अगले सप्ताह उस दिन दिन-रात को एक कर दो।
सफलता चाहने वाले नागरिकों के संविधान की उद्देशिका एक वाक्य में खत्म हो जाती हैं "हम सफलता की चाह रखने वाले लोग सफलता हासिल करने तक निष्ठापूर्वक आत्मार्पित रहेंगे" अगर उपर्युक्त कथन स्वतःस्फूर्त उपज है और होशोहवास में कहा गया है तो आप एक छोटा या बड़ा इतिहास का पन्ना जरूर बनायेंगे।
कुछ लोग क्या से क्या हो गए देखते देखते।
और कुछ लोग क्या से क्या हो गए देखते देखते।
दुनिया फटी आँखों से आपको देखने लगे इसके लिए इरादों की सुई में अरमानों का धागा पिरोकर अपने फटे हाल की बड़ी सफाई से समय रहते सिलाई कर दो।
शब्द शिल्प:
डॉ अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य, लक्की इन्सटिट्यूट अॉफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
👍1
लू लगने से मृत्यु क्यों होती है ?
हम सभी धूप में घूमते हैं फिर कुछ लोगों की ही धूप में जाने के कारण अचानक मृत्यु क्यों हो जाती है ?
👉 हमारे शरीर का तापमान हमेशा 37° डिग्री सेल्सियस होता है, इस तापमान पर ही हमारे शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम कर पाते है ।
👉 पसीने के रूप में पानी बाहर निकालकर शरीर 37° सेल्सियस टेम्प्रेचर मेंटेन रखता है, लगातार पसीना निकलते वक्त भी पानी पीते रहना अत्यंत जरुरी और आवश्यक है ।
👉 पानी शरीर में इसके अलावा भी बहुत कार्य करता है, जिससे शरीर में पानी की कमी होने पर शरीर पसीने के रूप में पानी बाहर निकालना टालता है । (बंद कर देता है )
👉 जब बाहर का टेम्प्रेचर 45° डिग्री के पार हो जाता है और शरीर की कूलिंग व्यवस्था ठप्प हो जाती है, तब शरीर का तापमान 37° डिग्री से ऊपर पहुँचने लगता है ।
👉 शरीर का तापमान जब 42° सेल्सियस तक पहुँच जाता है तब रक्त गरम होने लगता है और रक्त में उपस्थित प्रोटीन पकने लगता
है ।
👉 स्नायु कड़क होने लगते हैं इस दौरान सांस लेने के लिए जरुरी स्नायु भी काम करना बंद कर देते
हैं ।
👉 शरीर का पानी कम हो जाने से रक्त गाढ़ा होने लगता है, ब्लडप्रेशर low हो जाता है, महत्वपूर्ण अंग (विशेषतः ब्रेन) तक ब्लड सप्लाई रुक जाती है ।
👉 व्यक्ति कोमा में चला जाता है और उसके शरीर के एक-एक अंग कुछ ही क्षणों में काम करना बंद कर देते हैं, और उसकी मृत्यु हो जाती है ।
👉गर्मी के दिनों में ऐसे अनर्थ टालने के लिए लगातार थोड़ा-2 पानी पीते रहना चाहिए और हमारे शरीर का तापमान 37° मेन्टेन किस तरह रह पायेगा इस ओर ध्यान देना चाहिए ।
Equinox phenomenon: इक्विनॉक्स प्रभाव आने वाले दिनों में भारत को प्रभावित करेगा ।
कृपया 12 से 3 बजे के बीच घर, कमरे या ऑफिस के अंदर रहने का प्रयास करें ।
तापमान 40 डिग्री के आस पास विचलन की अवस्था मे रहेगा ।
यह परिवर्तन शरीर मे निर्जलीकरण और सूर्यातप की स्थिति उत्पन्न कर देगा ।
(ये प्रभाव भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर सूर्य चमकने के कारण पैदा होता है) ।
कृपया स्वयं को और अपने जानने वालों को पानी की कमी से ग्रसित न होने दें ।
किसी भी अवस्था में कम से कम 3 लीटर पानी जरूर पियें । किडनी की बीमारी वाले प्रति दिन कम से कम 6 से 8 लीटर पानी जरूर लें ।
जहां तक सम्भव हो ब्लड प्रेशर पर नजर रखें । किसी को भी हीट स्ट्रोक हो सकता है ।
ठंडे पानी से नहाएं । इन दिनों मांस का प्रयोग छोड़ दें या कम से कम
करें ।
फल और सब्जियों को भोजन मे ज्यादा स्थान दें ।
हीट वेव कोई मजाक नही है ।
एक बिना प्रयोग की हुई मोमबत्ती को कमरे से बाहर या खुले मे रखें, यदि मोमबत्ती पिघल जाती है तो ये गंभीर स्थिति है ।
शयन कक्ष और अन्य कमरों मे 2 आधे पानी से भरे ऊपर से खुले पात्रों को रख कर कमरे की नमी बरकरार रखी जा सकती है ।
अपने होठों और आँखों को नम रखने का प्रयत्न करें ।
हम सभी धूप में घूमते हैं फिर कुछ लोगों की ही धूप में जाने के कारण अचानक मृत्यु क्यों हो जाती है ?
👉 हमारे शरीर का तापमान हमेशा 37° डिग्री सेल्सियस होता है, इस तापमान पर ही हमारे शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम कर पाते है ।
👉 पसीने के रूप में पानी बाहर निकालकर शरीर 37° सेल्सियस टेम्प्रेचर मेंटेन रखता है, लगातार पसीना निकलते वक्त भी पानी पीते रहना अत्यंत जरुरी और आवश्यक है ।
👉 पानी शरीर में इसके अलावा भी बहुत कार्य करता है, जिससे शरीर में पानी की कमी होने पर शरीर पसीने के रूप में पानी बाहर निकालना टालता है । (बंद कर देता है )
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है ।
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हैं ।
👉 शरीर का पानी कम हो जाने से रक्त गाढ़ा होने लगता है, ब्लडप्रेशर low हो जाता है, महत्वपूर्ण अंग (विशेषतः ब्रेन) तक ब्लड सप्लाई रुक जाती है ।
👉 व्यक्ति कोमा में चला जाता है और उसके शरीर के एक-एक अंग कुछ ही क्षणों में काम करना बंद कर देते हैं, और उसकी मृत्यु हो जाती है ।
👉गर्मी के दिनों में ऐसे अनर्थ टालने के लिए लगातार थोड़ा-2 पानी पीते रहना चाहिए और हमारे शरीर का तापमान 37° मेन्टेन किस तरह रह पायेगा इस ओर ध्यान देना चाहिए ।
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(ये प्रभाव भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर सूर्य चमकने के कारण पैदा होता है) ।
कृपया स्वयं को और अपने जानने वालों को पानी की कमी से ग्रसित न होने दें ।
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अपने होठों और आँखों को नम रखने का प्रयत्न करें ।
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परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण 01 मई, 2019 के
Current Affairs के प्रश्नों को हमारे एप e-utkarsh
में हल करने के लिए
क्लिक करें:- http://bit.ly/2V55aAa
01 मई, 2019 अंग्रेजी भाषा के प्रमुख समाचार पत्रों में
प्रकाशित महत्वपूर्ण खबरों का हिन्दी भाषा में
वीडियों विश्लेषण देखने के लिए
क्लिक करें:- https://youtu.be/Fzc8fs-BPbI
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शब्द शिल्प शृंखला-70
"धूम मचा दो..."
एक दिन शान्त बैठकर अपने भीतर का जायजा लो कि आपकी जिन्दगी का सबसे बड़ा मक़सद क्या है। फिर ख्याल करो कि आप उसकी तरफ निढाल होकर खिसक रहे हो या जी जान से उसके लिए जुटे हुए हो। खैर बीते वक्त की बात छोड़ो! अपने उस सपने की तरफ वाकई कूच करना चाहते हो?
खुद पर बेइंतिहा इख़्तियार कर और आत्मा को जोश से अनुप्राणित कर अपने सपने साधने वाले सामान को उठाओ और चल पड़ो। "भाई ये रास्ता मुश्किल है" "तुमसे नहीं होगा" जैसी अनाप-शनाप को अनसुना कर दो। मकसद पूरा करने में आपकी मदद आपसे ज्यादा कोई नहीं कर सकता। अपने सिमटे हुए ख्यालों को इकट्ठा कर खुद को एक सौग़ात देना चाहते हो तो अपने अद्भुत हुनर को निखारने के लिए अपने चंद भौतिक सुखों का तत्काल त्याग कर दो। सुखों का दरिया अब भी बहेगा लेकिन उसका स्वाद, रंग, रूप अलग होगा। कुछ कुछ आपके सपने से मिलता जुलता। केवल सोचते ही रहने से तो रोज़ मकसद से एक कदम दूर होते जा रहे हो। जहाँ भी पसंद हो वहाँ वो चार चीज़ें लिख दो जो आप पाना चाहते है। हर सुबह उठकर मौन प्रतिज्ञा की तरह उन्हें पढ़ाे और पूरे दिन के सफर का मानचित्र और मार्ग आपको समझ आ जायेगा। हर शाम जब सोने लगो जब आपको पता होना चाहिए कि कल का अलार्म कितने बजे का और क्यों लगाना है?
लगन की पराकाष्ठा होगी तो आपके अस्तित्व का धूम-धड़ाका मीलों दूर तक सुनाई देगा। लेकिन ये वो संधिकाल है जब किसी तारीफ़ से फूल कर कुप्पा हुए बगैर आप अपनी जिम्मेदारी के प्रति और संजीदा हो जाते है। हर तारीफ एक चेतावनी है कि लोग अब इससे नीचा आपको देखना ही नहीं चाहते हैं। आपके भीतर एक 'सेंसर बोर्ड' है उसके निर्णय आपके जीवन की पटकथा को हिट कराएंगे। निर्णय अच्छे और सोच समझकर लें।
इसी जुनून से चलते रहे तो किसी दिन अपनी 'सफ़ल जिंदगी' को देखकर आप खुद ही गुनगुनाने लगोगे "हाँ तुम बिल्कुल वैसी हो जैसा मैंने सोचा था..."
शब्द शिल्प:
डॉ अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य, लक्की इन्सटिट्यूट अॉफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
"धूम मचा दो..."
एक दिन शान्त बैठकर अपने भीतर का जायजा लो कि आपकी जिन्दगी का सबसे बड़ा मक़सद क्या है। फिर ख्याल करो कि आप उसकी तरफ निढाल होकर खिसक रहे हो या जी जान से उसके लिए जुटे हुए हो। खैर बीते वक्त की बात छोड़ो! अपने उस सपने की तरफ वाकई कूच करना चाहते हो?
खुद पर बेइंतिहा इख़्तियार कर और आत्मा को जोश से अनुप्राणित कर अपने सपने साधने वाले सामान को उठाओ और चल पड़ो। "भाई ये रास्ता मुश्किल है" "तुमसे नहीं होगा" जैसी अनाप-शनाप को अनसुना कर दो। मकसद पूरा करने में आपकी मदद आपसे ज्यादा कोई नहीं कर सकता। अपने सिमटे हुए ख्यालों को इकट्ठा कर खुद को एक सौग़ात देना चाहते हो तो अपने अद्भुत हुनर को निखारने के लिए अपने चंद भौतिक सुखों का तत्काल त्याग कर दो। सुखों का दरिया अब भी बहेगा लेकिन उसका स्वाद, रंग, रूप अलग होगा। कुछ कुछ आपके सपने से मिलता जुलता। केवल सोचते ही रहने से तो रोज़ मकसद से एक कदम दूर होते जा रहे हो। जहाँ भी पसंद हो वहाँ वो चार चीज़ें लिख दो जो आप पाना चाहते है। हर सुबह उठकर मौन प्रतिज्ञा की तरह उन्हें पढ़ाे और पूरे दिन के सफर का मानचित्र और मार्ग आपको समझ आ जायेगा। हर शाम जब सोने लगो जब आपको पता होना चाहिए कि कल का अलार्म कितने बजे का और क्यों लगाना है?
लगन की पराकाष्ठा होगी तो आपके अस्तित्व का धूम-धड़ाका मीलों दूर तक सुनाई देगा। लेकिन ये वो संधिकाल है जब किसी तारीफ़ से फूल कर कुप्पा हुए बगैर आप अपनी जिम्मेदारी के प्रति और संजीदा हो जाते है। हर तारीफ एक चेतावनी है कि लोग अब इससे नीचा आपको देखना ही नहीं चाहते हैं। आपके भीतर एक 'सेंसर बोर्ड' है उसके निर्णय आपके जीवन की पटकथा को हिट कराएंगे। निर्णय अच्छे और सोच समझकर लें।
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परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण 02 मई, 2019 के
Current Affairs के प्रश्नों को हमारे एप e-utkarsh
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क्लिक करें:- http://bit.ly/2VK8srY
02 मई, 2019 अंग्रेजी भाषा के प्रमुख समाचार पत्रों में
प्रकाशित महत्वपूर्ण खबरों का हिन्दी भाषा में
वीडियों विश्लेषण देखने के लिए
क्लिक करें:- https://youtu.be/66zs1S3YqUw
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May 3rd, 2019
Daily Current Affairs Quiz,
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Current Affairs on our
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please click : http://bit.ly/2ZSq2JH
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channel, Utkarsh in English
dated May 3rd, 2019
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उत्कर्ष क्लासेज के एप e-utkarsh पर सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अतिमहत्वपूर्ण साप्ताहिक समसामयिकी (22 से 28 अप्रैल, 2019) के तथ्यों को अपलोड किया गया हैं जिसका लिंक हैं : https://eutkarsh.page.link/27QVnJ5fVLi6Kf2D7 जरूर पढ़े व शेअर करें। आप पढ़ते हुए हाईलाईट कर सकते हैं,स्वयं के नोट्स बना सकते हैं,विडियो जोड़ सकते हैं एवं यदि आपने अभी तक e-utkarsh एप को Install नहीं किया हैं तो अपनी तैयारी को सुदृढ़ करने के लिए आज ही Install करें ।
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