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06_अगस्त,_2020_दैनिक_सामयिकी_All_Exams.pdf
1.4 MB
🔰 दैनिक समसामयिकी
📝 उत्कर्ष बुलेटिन
➡️ 06 अगस्त 2020
(10 महत्वपूर्ण खबरें एवं उन पर आधारित 10 प्रश्न) 👁️‍🗨️ PDF
Rajasthan_Current_Affairs by #63 by Narendra Choudhary.pdf
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Rajasthan Current Affairs #63 06 AUGUST 2020 Know Your Rajasthan नरेंद्र चौधरी सर द्वारा राजस्थान करेंट अफेयर्स की क्लास के इन सभी प्रश्नों के विस्तृत व्याख्या सहित हल के लिए व क्लास के वीडियो को देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें 👇
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भूगोल'
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Current Affairs । 06 August 2020 । English.pdf
1.5 MB
Current Affairs । 06 August 2020 । English.pdf
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📝 राजस्थान समसामयिकी
➡️ Rajasthan Current Affairs #63
⏰ 05:00 PM से 06:00 PM बजे तक
🔰 Know Your Rajasthan
➡️ By Narendra Choudhary Sir
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https://youtu.be/jnwWt-0OjDc
Daily_Current_Affairs_#313_07_August_2020_GK_Today_in_Hindi_&_English.pdf
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Daily Current Affairs #313 07 August 2020 कुमार गौरव सर द्वारा डेली करेंट अफेयर्स की क्लास के इन सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों की विस्तृत व्याख्या सहित हल व अन्य ज्ञानवर्धक जानकारी के लिए व क्लास के वीडियो को देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें 👇
https://youtu.be/TL6k-V5Hr8E
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07_अगस्त,_2020_दैनिक_सामयिकी_All_Exams.pdf
1.4 MB
07 अगस्त, 2020 दैनिक सामयिकी (All Exams).pdf
_UTKARSH_August_2020_Monthly_Current_Affairs_Magazine_for_Civil.pdf
33.7 MB
( UTKARSH ) August 2020 : Monthly Current Affairs Magazine for Civil Services.pdf

🔰 प्रिय विद्यार्थियों,
आपको अगस्त माह की मासिक पत्रिका उपलब्ध करवा दी गई है। ध्यातव्य है कि यह पत्रिका सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी के लिये बेहद उपयोगी पत्रिका है।

पत्रिका के इस अंक में दो नए खंड जोड़े गए हैं। पहला खंड कुछ महत्त्वपूर्ण अंग्रेज़ी समाचारपत्रों के हिंदी में अनूदित लेखों के संग्रह के रूप में है जबकि दूसरा खंड भारत-2020 का सार-संग्रह है। ये दोनों ही खंड सिविल सेवा परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं, अतः इन्हें सम्मिलित किया गया है।

आपसे निवेदन है कि आप इस पत्रिका का नियमित रूप से अध्ययन करते रहें। इससे समसामयिक खंडों पर आपकी मज़बूत पकड़ बनेगी।
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Rajasthan_Current_Affairs_#64_Know_Your_Rajasthan_By_Narendra_Choudhary.pdf
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Rajasthan Current Affairs #64 07 AUGUST 2020 Know Your Rajasthan नरेंद्र चौधरी सर द्वारा राजस्थान करेंट अफेयर्स की क्लास के इन सभी प्रश्नों के विस्तृत व्याख्या सहित हल के लिए व क्लास के वीडियो को देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें 👇
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➡️ Rajasthan Current Affairs #64
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➡️ By Narendra Choudhary Sir
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08_अगस्त,_2020_दैनिक_सामयिकी_All_Exams.pdf
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08 अगस्त, 2020 दैनिक सामयिकी (All Exams).pdf
Current Affairs । 08 August 2020 । English.pdf
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Current Affairs । 08 August 2020 । English.pdf
"क्यों आया नई शिक्षानीति में तक्षशिला का उल्लेख?"

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के ड्राफ्ट में सैकड़ों बार हमारे प्राचीन गौरवमय शिक्षाकेंद्र नालन्दा एवं तक्षशिला का उल्लेख आया। आइये आज तक्षशिला के उस गौरवमय स्वरूप को जानते हैं।

तक्षशिला विश्वविद्यालय महाभारत काल से ही प्रख्यात था। यहीं पर धौम्य ऋषि के शिष्य उपमन्यु, आरुणि और वेद ने शिक्षा प्राप्त की थी। भारतीय शिक्षा और संस्कृति का सुप्रसिद्ध केंद्र तक्षशिला भारत के उत्तर पश्चिमी छोर पर गांधार प्रदेश की गौरवशालिनी राजधानी के रूप में प्रतिष्ठित थी। लगभग 1000 वर्षों तक तक्षशिला की ख्याति देश-विदेश में व्याप्त रही और सुदूर प्रदेशों के सैकड़ों विद्यार्थी प्रतिवर्ष तक्षशिला के शिक्षा शिविरों में प्रविष्ट होते रहते थे।

घने जंगलों, दुर्दम्य पहाड़ों, हिंसक जंतुओं, वर्षा, धूप, बिजली, बवंडर, आंधी-तूफान की परवाह न कर चंपा, मगध, कौशल आदि दूरस्थ प्रांतों के उदीयमान छात्र इस ज्ञान कुंज की ओर सतत आकृष्ट होते रहते थे।

जातकों में ऐसे पिपासु छात्रों की यात्राओं की अनेक कथाएं भरी हैं। भारत के अतिरिक्त मध्य एशिया, अफगानिस्तान, यूनान, सीरिया, फारस आदि देशों से भी बहुसंख्यक विद्यार्थी विशेषत: विज्ञान की शिक्षा के लिए तक्षशिला में शिक्षा ग्रहण करते थे। सातवीं सदी ईस्वी पूर्व में ही तक्षशिला को शिक्षा केंद्र के रूप में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हो गई थी। छठी सदी ईस्वी पूर्व में सुप्रसिद्ध व्याकरण पाणिनि ने अपनी अष्टाध्यायी के स्वप्न यहीं देखे थे। कुछ दिन बाद मौर्य साम्राज्य के महात्म्य तथा अर्थशास्त्र के सुप्रसिद्ध लेखक चाणक्य ने भी अर्थशास्त्र के प्रारंभिक पाठ्य यहीं ग्रहण किए थे। बुद्ध के समसामयिक राजगृह के सुप्रसिद्ध वैद्य जीवक ने ओषधिशास्त्र की शिक्षा यहीं प्राप्त की थी।

अपने वैभव के लम्बे इतिहास में तक्षशिला को कई बार दुर्दिन भी देखने पड़े। अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण तक्षशिला को स्वभावत: विदेशी आक्रांताओं के निर्मम प्रहार सहने पड़े। ई. पूर्व छठी शताब्दी में पारसियों के द्वारा, ईसवी पूर्व दूसरी शताब्दी में भारतीय यूनानियों के द्वारा, ईसवी पूर्व प्रथम शताब्दी में शकों के द्वारा तथा कुषाणों के द्वारा यह क्रमशः अधिकृत हुई।

आक्रमणों तथा विदेशी प्रभुत्व में तक्षशिला की क्या दुर्दशा हुई होगी यह सहज ही अनुमान किया जा सकता है। इसके खंडहरों की खुदाई से यह स्पष्ट है कि विद्वानों की यह नगरी अनेक बार उजड़ी तथा बसी। आक्रमण की पाशविक बर्बरता में स्वभावतः यह विध्वंश कर दी जाती होगी तथा राज्य स्थापना के पश्चात यह पुनः विजेताओं के द्वारा बसाई जाती होगी। खंडहरों के पर्यवेक्षण से यही निष्कर्ष निकलता है।

ऐसे संकट काल में तक्षशिला के शिक्षा केंद्र कुछ समय तक अवश्य ही विश्रृंखल हो जाते थे, किंतु नगरी के पुनरुत्थान के पश्चात फिर यह नई ज्योति से जगमग होने लगते थे। यहां के शिक्षालयों का गौरव को इतना महान था कि लगातार भूचाल के पश्चात भी ये मिट नहीं सके, न मिटाये जा सके। हां, इनके स्वरूप में कुछ परिवर्तन अवश्य हुए जोकि अवश्यंभावी थे।

फारसी संसर्ग तथा आधिपत्य के कारण भारत की राष्ट्रीय लिपि 'ब्राह्मी' तक्षशिला से निष्कासित हुई। भारतीय यूनानियों के लगभग सवा 100 वर्ष के लंबे आधिपत्य में तक्षशिला के पाठ्य विषय तथा कार्यक्रम दोनों में ही यथेष्ट रूपांतर हुए। दो सुसमृद्ध सभ्यताओं के सम्मिलन में पारस्परिक आदान-प्रदान अपेक्षित ही था। तक्षशिला के शिक्षा केंद्रों में ग्रीक भाषा की शिक्षा दीक्षा होने लगी तथा यूनानी लेखक एवं दार्शनिक सम्मानित होने लगे। राज्य भाषा होने के कारण यूनानी भाषा का व्यावहारिक महत्व था। इस तथ्य से तक्षशिला के शिक्षालय स्वभावत: विमुख नहीं रह सकते थे।

इनके छात्रों में ऐसे भी थे जो कि उन्होंने राज्य में उच्च पदों की आकांक्षा रखते थे। इनकी आवश्यकता की पूर्ति भी शिक्षा केंद्रों को करनी थी। यूनानी कला कौशल भी तक्षशिला में संभवतः सिखाये जाने लगे थे। यहां के पाठ्य विषयों के 18 शिल्पों में यूनानी शिल्पकला भी सम्मिलित थी। किंतु तक्षशिला का रंग रूप अधिकतर भारतीय ही रहा। अपनी मूल मातृभूमि से भारतीय यूनानी लगभग विच्छिन्न से हो गए थे और फलत: उनकी सभ्यता और संस्कृति यूनान की अपेक्षा भारत से ही अधिक प्रभावित रही।

इस प्रकार तक्षशिला में यूनानी प्रभाव विशेष ना पड़ सका। शकों तथा कुषाणों के पास कुछ ऐसी संस्कृति की बातें न थी जिन्हें तक्षशिला को सीखना होता। संस्कृति क्षेत्र में इन्होंने भारत की अधीनता ही स्वीकार की और इसलिए तक्षशिला के आंतरिक स्वरूप में इन विजेताओं के कारण कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन लक्षित ना हुआ।

तक्षशिला की कीर्ति का श्रेय उसकी संस्था को ना था बल्कि तक्षशिला के उन शिक्षकों को था जिनके पांडित्य का यश देश विदेश में था। ये शिक्षक किसी एक विषय अथवा विषय समूह के पूर्ण ज्ञाता तथा विशेषज्ञ होते थे। अपन
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