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07_मई,_2020_दैनिक_सामयिकी_All_Exams.pdf
4.7 MB
07 मई, 2020 दैनिक सामयिकी (All Exams).pdf
https://youtu.be/Zjdu-mUH8s0
सुप्रभात🌞
दिन की शुरुआत करें
सुविचार के साथ🌻
#ThursdayMotivation
#ThursdayThoughts
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Daily Current Affairs #235/07 May 2020/Current Affairs In Hindi and English/GK Today By Umesh Sir : https://utkarshapp.page.link/iQfw
Utkarsh Classes
सुर्खियों में रहे "किम-जोंग-उन" कहाँ के शासक/तानाशाह/राष्ट्राध्यक्ष है ?
कल के प्रश्न का उत्तर -
किम-जोंग-उन --
जन्म - 8 जनवरी 1984 (आयु 36 वर्ष),
जन्मस्थान - प्योंगयेंग, उत्तर कोरिया
पिता - किम जोंग इल
किम जोंग उन उत्तरी कोरिया के सर्वोच्च नेता हैं। किम जोंग उन ने स्वयं को 28 दिसम्बर 2011 को अपने आपको तानाशाह बना लिया और उसकी आधिकारिक घोषणा की।
ये अपने तानाशाही आदेशों के लिए भी जाने जाते हैं जैसे - सजा प्राप्त लोगों को भूखे कुतों के सामने फेंकना।
किम को उनकें "परमाणु कार्यक्रम" की आक्रमक परवर्ती अख्तियार करने के कारण ज्यादा जाना गया था।
हाल ही में तानाशाह किम जोंग-उन को गंभीर रूप से बीमार बताया गया था और उनकी हालत बेहद नाजुक बताई जा रही थी क्योंकि किम जोंग उन को लेकर अटकलें और तेज उस वक्त हो गई जब वह देश के स्थापना दिवस और अपने स्वर्गीय दादा के 108वें जन्मदिन पर होने वाले कार्यक्रम में भी 15 अप्रैल को दिखाई नहीं दिए थे।
किम-जोंग-उन --
जन्म - 8 जनवरी 1984 (आयु 36 वर्ष),
जन्मस्थान - प्योंगयेंग, उत्तर कोरिया
पिता - किम जोंग इल
किम जोंग उन उत्तरी कोरिया के सर्वोच्च नेता हैं। किम जोंग उन ने स्वयं को 28 दिसम्बर 2011 को अपने आपको तानाशाह बना लिया और उसकी आधिकारिक घोषणा की।
ये अपने तानाशाही आदेशों के लिए भी जाने जाते हैं जैसे - सजा प्राप्त लोगों को भूखे कुतों के सामने फेंकना।
किम को उनकें "परमाणु कार्यक्रम" की आक्रमक परवर्ती अख्तियार करने के कारण ज्यादा जाना गया था।
हाल ही में तानाशाह किम जोंग-उन को गंभीर रूप से बीमार बताया गया था और उनकी हालत बेहद नाजुक बताई जा रही थी क्योंकि किम जोंग उन को लेकर अटकलें और तेज उस वक्त हो गई जब वह देश के स्थापना दिवस और अपने स्वर्गीय दादा के 108वें जन्मदिन पर होने वाले कार्यक्रम में भी 15 अप्रैल को दिखाई नहीं दिए थे।
👍1
कोरोना महामारी के संक्रमण के प्रसार के कारण सुर्खियों में रहे "WHO के महानिदेशक" है-
Anonymous Quiz
64%
टैड्रोस ऐडरेनॉम ग़ैबरेयेसस
17%
सौम्या स्वामीनाथन
14%
जेन एलिसन
4%
पीटर सलामा
👍1
🚀 आज का प्रश्न 🚀 #DailyQuiz : 7 मई, 2020
☞ इस प्रश्न का सही ज़वाब अगले दिन के प्रश्न के साथ दिया जाएगा ।
✅ साथ ही सही जवाब जानने के लिए आप हमारे यूट्यूब चैनल पर आज की CURRENT AFFAIRS की क्लास देख सकते हैं। ☟
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#CurrentAffairs
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गुरुदेव रबीन्द्रनाथ जी टैगोर की जयन्ती पर शत शत नमन...
#Gurudev #RabindranathTagore #rabindranathtagorejayanti
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" 'अंतःकरण चतुष्ट्य' ही हमारी सफलता के चार द्वार हैं"
मनोबुद्धिरहंकारश्चित्तम् करणमन्तरम्।
संशयो निश्चयो गर्व: स्मरणं विषया इमे।।
वेदान्त में अंतःकरण के चार रूप बताये हैं।
1. मन 2. बुद्धि 3.अहंकार 4. चित्त
◆ मन से वितर्क और संशय उत्पन्न होता है।
◆ बुद्धि निश्चय करती है।
◆ अहंकार से गर्व की अभिव्यक्ति होती है।
◆ चित्त में स्मरण होता है।
किसी भी सफलता में इन चारों का सम्मिलित रूप से बहुत बड़ा योगदान होता है।
प्रथम :मन का योगदान
सफलता के लिए मन के बहुत सारे संशयों को दूर करना होता है। मन के सभी प्रवाहों को नियन्त्रित करना होता है। अपने अनुभवों से जितने संदेहों को दूर किया जा सकता है, करना चाहिए। "आप अपने मन को नियन्त्रित कर सकते है" इस वाक्य में यदि आपको कोई संदेह नहीं है तो समझ लो आपकी सफलता की यात्रा शुभ-संकेतों के साथ प्रारम्भ हो चुकी है। मन ही हमें आलस्य के लिए प्रेरित करता है। मन ही हमें परिश्रम के लिए प्रेरित करता है। आपके मन ने मान लिया आप कुछ नहीं कर सकते तो फिर वास्तव में कुछ नहीं कर सकते। आपके मन ने मान लिया कि आप दुनियाभर में एक हलचल ला सकते है तो लाकर ही रहेंगे। आज के दिन इस बात की परीक्षा लेना कि कहाँ पर आप मन से हारे हो और कहाँ पर आप मन के बूते जीते हो। शाम को सोने से पहले दिनभर का विश्लेषण आपको स्पष्ट कर देगा कि आपका मन आपके नियन्त्रण में है या नहीं।
द्वितीय: बुद्धि का योगदान
बुद्धि आपको कुछ निश्चय करने के लिए प्रेरित करती है। सो जाऊँ या जागूं? पत्थर फेंकूं या ना फेंकू? बैठ कर रोऊँ या मुस्कुरा कर चल दूँ? यह मित्र या वह मित्र? यह पुस्तक या वह पुस्तक? इन जैसी हजारों परिस्थितियां प्रतिदिन हमारे सामने आती है। उनमें शत प्रतिशत आपका निर्णय हो सकता है सही साबित नहीं हो। हर निर्णय को करते समय हमने यदि बुद्धि को जाग्रत अवस्था में रखा तो गलती की संभावना बहुत कम रहती है। निश्चय करते समय अपनी क्षमता, दृढ़ता और विवेक को मस्तिष्क में अवश्य धारण करें।
तृतीय: अहंकार का योगदान
अहंकार एक नकारात्मक अवधारणा है। इसकी अनुपस्थिति सफलता के लिए सहायक है। अहंकार अनावश्यक बड़बोलेपन के लिए प्रेरित करता है। अहंकार आपको छोटे कद का होने पर भी बड़े होने का भ्रम देता है। अहंकार सफलता रूपी समुन्द्र से मीलों पहले मिला हुआ छोटा सा कीचड़मय तालाब है जहाँ के कीचड़ से सनकर भारी हुआ शरीर आपको ऐसा भार देता है जो आपको आगे बढ़ने में बाधा भी देगा, आपको विद्रूप भी करेगा तथा उसमें जैसे जैसे और शुष्कता बढ़ेगी आपको भयंकर कष्ट प्रतीत होंगे। सुन्दर भावनाओं की प्रवाहशील नदी में विश्वास की नाव में बैठकर थोड़ा थोड़ा चप्पू चलाते रहिए, आप समुद्र तक पहुंच जायेंगे।
चतुर्थ: चित्त का योगदान
चित्त स्मरण के लिए है। यह सफलता के लिए अन्तिम लेकिन सबसे प्रभावी मंत्र है। क्या भूलना और क्या याद रखना जिसको आ गया उसे हिमालय पर जाकर तपस्या करने की जरूरत नहीं है। छोटी छोटी सफलताओं, छोटी छोटी उपलब्धियों, अपने द्वारा किये गए छोटे छोटे अच्छे कामों का स्मरण कीजिए बस अभिमान मत पालिए। अपने अच्छे दिनों में अपने बुरे समय को कभी मत भूलिये। बुरे और अच्छे सभी अनुभवों को स्मरण में रखो लेकिन उन बातों को स्थाई रूप से स्मरण में डाल दो जो आपको अपने अच्छे और बुरे दौर में सीखने को मिली है। खुद का कमाया हुआ या अनुभव किया गया ज्ञान खरा सोना है दुनियां की किसी खदान में उससे कीमती कुछ नहीं मिलेगा।
@अर्जुन सिंह साँखला
मनोबुद्धिरहंकारश्चित्तम् करणमन्तरम्।
संशयो निश्चयो गर्व: स्मरणं विषया इमे।।
वेदान्त में अंतःकरण के चार रूप बताये हैं।
1. मन 2. बुद्धि 3.अहंकार 4. चित्त
◆ मन से वितर्क और संशय उत्पन्न होता है।
◆ बुद्धि निश्चय करती है।
◆ अहंकार से गर्व की अभिव्यक्ति होती है।
◆ चित्त में स्मरण होता है।
किसी भी सफलता में इन चारों का सम्मिलित रूप से बहुत बड़ा योगदान होता है।
प्रथम :मन का योगदान
सफलता के लिए मन के बहुत सारे संशयों को दूर करना होता है। मन के सभी प्रवाहों को नियन्त्रित करना होता है। अपने अनुभवों से जितने संदेहों को दूर किया जा सकता है, करना चाहिए। "आप अपने मन को नियन्त्रित कर सकते है" इस वाक्य में यदि आपको कोई संदेह नहीं है तो समझ लो आपकी सफलता की यात्रा शुभ-संकेतों के साथ प्रारम्भ हो चुकी है। मन ही हमें आलस्य के लिए प्रेरित करता है। मन ही हमें परिश्रम के लिए प्रेरित करता है। आपके मन ने मान लिया आप कुछ नहीं कर सकते तो फिर वास्तव में कुछ नहीं कर सकते। आपके मन ने मान लिया कि आप दुनियाभर में एक हलचल ला सकते है तो लाकर ही रहेंगे। आज के दिन इस बात की परीक्षा लेना कि कहाँ पर आप मन से हारे हो और कहाँ पर आप मन के बूते जीते हो। शाम को सोने से पहले दिनभर का विश्लेषण आपको स्पष्ट कर देगा कि आपका मन आपके नियन्त्रण में है या नहीं।
द्वितीय: बुद्धि का योगदान
बुद्धि आपको कुछ निश्चय करने के लिए प्रेरित करती है। सो जाऊँ या जागूं? पत्थर फेंकूं या ना फेंकू? बैठ कर रोऊँ या मुस्कुरा कर चल दूँ? यह मित्र या वह मित्र? यह पुस्तक या वह पुस्तक? इन जैसी हजारों परिस्थितियां प्रतिदिन हमारे सामने आती है। उनमें शत प्रतिशत आपका निर्णय हो सकता है सही साबित नहीं हो। हर निर्णय को करते समय हमने यदि बुद्धि को जाग्रत अवस्था में रखा तो गलती की संभावना बहुत कम रहती है। निश्चय करते समय अपनी क्षमता, दृढ़ता और विवेक को मस्तिष्क में अवश्य धारण करें।
तृतीय: अहंकार का योगदान
अहंकार एक नकारात्मक अवधारणा है। इसकी अनुपस्थिति सफलता के लिए सहायक है। अहंकार अनावश्यक बड़बोलेपन के लिए प्रेरित करता है। अहंकार आपको छोटे कद का होने पर भी बड़े होने का भ्रम देता है। अहंकार सफलता रूपी समुन्द्र से मीलों पहले मिला हुआ छोटा सा कीचड़मय तालाब है जहाँ के कीचड़ से सनकर भारी हुआ शरीर आपको ऐसा भार देता है जो आपको आगे बढ़ने में बाधा भी देगा, आपको विद्रूप भी करेगा तथा उसमें जैसे जैसे और शुष्कता बढ़ेगी आपको भयंकर कष्ट प्रतीत होंगे। सुन्दर भावनाओं की प्रवाहशील नदी में विश्वास की नाव में बैठकर थोड़ा थोड़ा चप्पू चलाते रहिए, आप समुद्र तक पहुंच जायेंगे।
चतुर्थ: चित्त का योगदान
चित्त स्मरण के लिए है। यह सफलता के लिए अन्तिम लेकिन सबसे प्रभावी मंत्र है। क्या भूलना और क्या याद रखना जिसको आ गया उसे हिमालय पर जाकर तपस्या करने की जरूरत नहीं है। छोटी छोटी सफलताओं, छोटी छोटी उपलब्धियों, अपने द्वारा किये गए छोटे छोटे अच्छे कामों का स्मरण कीजिए बस अभिमान मत पालिए। अपने अच्छे दिनों में अपने बुरे समय को कभी मत भूलिये। बुरे और अच्छे सभी अनुभवों को स्मरण में रखो लेकिन उन बातों को स्थाई रूप से स्मरण में डाल दो जो आपको अपने अच्छे और बुरे दौर में सीखने को मिली है। खुद का कमाया हुआ या अनुभव किया गया ज्ञान खरा सोना है दुनियां की किसी खदान में उससे कीमती कुछ नहीं मिलेगा।
@अर्जुन सिंह साँखला
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https://youtu.be/zpNiYLOigtQ
सुप्रभात🌞
दिन की शुरुआत करें
सुविचार के साथ🌻
#FridayMotivation
#Friday
📢 UTKARSH NEET-JEE ONLINE CLASSES यूट्यूब चैनल पर JEE और NEET का फ्री ONLINE CRASH कोर्स आज से शुरू हो चुका है ।
✅ Live Classes के लिए चैनल subscribe करें 👇
https://www.youtube.com/channel/UCp1T3Oi6gaNy7cngeEfQ09g
सुप्रभात🌞
दिन की शुरुआत करें
सुविचार के साथ🌻
#FridayMotivation
#Friday
📢 UTKARSH NEET-JEE ONLINE CLASSES यूट्यूब चैनल पर JEE और NEET का फ्री ONLINE CRASH कोर्स आज से शुरू हो चुका है ।
✅ Live Classes के लिए चैनल subscribe करें 👇
https://www.youtube.com/channel/UCp1T3Oi6gaNy7cngeEfQ09g
08_मई,_2020_दैनिक_सामयिकी_All_Exams.pdf
4.8 MB
08 मई, 2020 दैनिक सामयिकी (All Exams).pdf
Daily Current Affairs #236/08 May 2020/Current Affairs In Hindi and English/GK Today By Umesh Sir : https://utkarshapp.page.link/tzG6
कल के प्रश्न का उत्तर-
टैड्रोस ऐडरेनॉम गैबरेयेसस (वर्तमान में WHO के महानिदेशक) :-
जन्म - 3 मार्च 1965
जन्मस्थान - असमारा, इरीट्रिया
नागरिकता - इथियोपियाई
साल 2017 में डॉक्टर टैड्रोस ऐडरेनॉम गैबरेयेसस ने वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के महानिदेशक का पद संभाला था। वर्तमान में इन पर इस पद पर रहते हुए कोरोना महामारी में चीन की तरफ झुकाव के आरोप लग रहे है।
पूर्व में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मलेरिया की रिसर्च पर काम किया था। इसके लिए उन्हें American Society of Tropi-cal Medicine and Hygiene के द्वारा 'यंग इन्वेस्टिगेटर ऑफ द ईयर' से सम्मानित किया था।
वह इथियोपिया की सरकार में 2005 से 2012 तक स्वास्थ्य मंत्री और 2012 से 2016 तक विदेश मंत्रालय के मंत्री रहे।
टैड्रोस ऐडरेनॉम गैबरेयेसस की गिनती प्रसिद्ध डॉक्टर्स में होती है। इससे पहले वह अफ्रीका के पहले नॉन फिजिशियन डॉक्टर के रूप में काम कर चुके हैं।
टैड्रोस ऐडरेनॉम गैबरेयेसस (वर्तमान में WHO के महानिदेशक) :-
जन्म - 3 मार्च 1965
जन्मस्थान - असमारा, इरीट्रिया
नागरिकता - इथियोपियाई
साल 2017 में डॉक्टर टैड्रोस ऐडरेनॉम गैबरेयेसस ने वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के महानिदेशक का पद संभाला था। वर्तमान में इन पर इस पद पर रहते हुए कोरोना महामारी में चीन की तरफ झुकाव के आरोप लग रहे है।
पूर्व में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मलेरिया की रिसर्च पर काम किया था। इसके लिए उन्हें American Society of Tropi-cal Medicine and Hygiene के द्वारा 'यंग इन्वेस्टिगेटर ऑफ द ईयर' से सम्मानित किया था।
वह इथियोपिया की सरकार में 2005 से 2012 तक स्वास्थ्य मंत्री और 2012 से 2016 तक विदेश मंत्रालय के मंत्री रहे।
टैड्रोस ऐडरेनॉम गैबरेयेसस की गिनती प्रसिद्ध डॉक्टर्स में होती है। इससे पहले वह अफ्रीका के पहले नॉन फिजिशियन डॉक्टर के रूप में काम कर चुके हैं।
निम्नलिखित युग्मों में से कौनसा युग्म चीन व संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपतियों के युग्म को दर्शाता है ?
Anonymous Quiz
89%
शी जिनपिंग - डोनाल्ड ट्रंप
5%
शी जिनपिंग - माइकल आर. पेंस
2%
माइकल आर. पेंस - इमरान खान
4%
डोनाल्ड ट्रंप - के.पी. ओली