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By Kumar Gaurav Sir

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"लक्ष्य के लिए महासंग्राम"
21_अप्रैल,_2020_दैनिक_सामयिकी_All_Exams.pdf
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21 अप्रैल, 2020 दैनिक सामयिकी (All Exams).pdf
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"यहाँ बच्चे रोते हैं तो सुर में और पत्थर लुढ़कते हैं तो ताल में"

ग्वालियर में एक मशहूर कहावत है कि "यहाँ बच्चे रोते हैं तो सुर में, पत्थर लुढ़कते है तो ताल में" ग्वालियर बैजू बावरा और तानसेन जैसे गायकों की कर्मस्थली रहा है इसी कारण यह कहावत मशहूर हुई है।

1486 में ग्वालियर से 45 किलोमीटर दूर ग्राम बेहट में मकरंद पांडे के यहाँ तानसेन उर्फ (तन्ना, तनसुख, त्रिलोचन) का जन्म हुआ था।

कहते है तानसेन ने तीन गुरुओं से संगीत सीखा था। उन्होंने गुरु हरिदास से, ग्वालियर के राजा मानसिंह की पत्नी मृगनयनी से और सूफी संत मोहम्मद गौस से संगीत सीखा था।

कहते है उनकी राग मेघ-मल्हार, दीपक और भीमपलासी से क्रमशः बादल बरसने, दीपक जलने और पत्थर पिघलने लग जाते थे। उस वक्त उनकी टक्कर का पूरे साम्राज्य में एक और गायक 'बैजू बावरा' था जिनको भी ध्रुपदगायकी में तानसेन जैसी महारथ हासिल थी। कलावती बैजू की प्रेयसी थी और उसके प्रेम में पागल होने के कारण ही लोगों ने उन्हें 'बैजू बावरा' कहा था।

तानसेन की पत्नी का नाम 'हुसैनी' था जो महारानी मृगनयनी की दासी थी। उनके चार पुत्र और एक पुत्री थी। उन्होंने संगीतसार, रागमाला और श्रीगणेश स्तोत्र नामक तीन ग्रंथ भी रचे थे।

बाँधवगढ़ (रीवा) के राजा रामचन्द्र ने तानसेन से प्रभावित होकर उनको अपने दरबार में गायक नियुक्त कर दिया। लेकिन उनकी ख्याति देशभर में थी। एक बार अबुलफजल ने अकबर के दरबार में तानसेन की तारीफ कर दी। फिर क्या था, अकबर ने तानसेन को 60 वर्ष की उम्र में ही सही पर अपने दरबार का नवरत्न बना कर ही चैन पाया।

1585 में तानसेन की मृत्यु आगरा में हो गयी। तानसेन की समाधि उनके गुरु मोहम्मद गौस के कब्र पास ही ग्वालियर में स्थित है।

एक बार अकबर ने तानसेन से मजाक किया था कि तुम्हारे गुरु कृष्णभक्त हरिदास को मैंने वृन्दावन में गाते हुए सुना, तुमसे भी कितना मधुर गाते है वे। तानसेन ने कहा, "हुजुर! वे पूरे ब्रह्मांड के बादशाह के लिए गाते है और मैं धरती के एक टुकड़े पर राज करने वाले बादशाह के लिए; फर्क तो होगा ना।"

@अर्जुन सिंह साँखला
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पृथ्वी दिवस-
पृथ्वी दिवस पूरे विश्व में 22 अप्रैल को मनाया जाता है। पृथ्वी दिवस को पहली बार सन् 1970 में मनाया गया था।

पृथ्वी दिवस का उद्देश्य - लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरुक बनाना । 
परम पूजनीय, प्रातः स्मरणीय, ब्रह्मर्षि श्री खेताराम जी महाराज के 108 वें जन्मोत्सव पर शुभकामनाएं।
सभी के अच्छे स्वास्थ्य की कामना के साथ श्री चरणों मे कोटिशः नमन ।
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