#DailyCurrentAffairs #gktoday
(18-19 अप्रैल) By Kumar Gaurav Sir
★ फूल-पत्ती वाली क्लास व 'भारत दर्शन' ★
✅ विशेष : हरियाणा राज्य
✅ Today In History
"लक्ष्य के लिए महासंग्राम"
(18-19 अप्रैल) By Kumar Gaurav Sir
★ फूल-पत्ती वाली क्लास व 'भारत दर्शन' ★
✅ विशेष : हरियाणा राज्य
✅ Today In History
"लक्ष्य के लिए महासंग्राम"
20_अप्रैल,_2020_दैनिक_सामयिकी_All_Exams.pdf
5.7 MB
20 अप्रैल, 2020 दैनिक सामयिकी (All Exams).pdf
https://youtu.be/8JFzFDL9cG8
★ फूल-पत्ती वाली क्लास व 'भारत दर्शन' ★
#DailyCurrentAffairs #gktoday
✅ विशेष : #हरियाणा राज्य
✅ Today In History
By Kumar Gaurav Sir
★ फूल-पत्ती वाली क्लास व 'भारत दर्शन' ★
#DailyCurrentAffairs #gktoday
✅ विशेष : #हरियाणा राज्य
✅ Today In History
By Kumar Gaurav Sir
YouTube
Daily Current Affairs #220 | 20 April 2020 | Current Affairs In Hindi | GK Today By Kumar Gaurav sir
#Daily_Current_Affairs #GK_Todayप्रिय मित्रों‚प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्न पत्र में समसामयिकी यानि करेंट अफेयर्स का विशेष महत्त्व होता है । इसी को ध्...
https://youtu.be/8JFzFDL9cG8
🌄🌻 सुप्रभात 🌻🌄
GOOD MORNING
🙏आप का दिन शुभ हो 🙏
#mondaythoughts
#MondayMotivation #TogetherAtHome
🌄🌻 सुप्रभात 🌻🌄
GOOD MORNING
🙏आप का दिन शुभ हो 🙏
#mondaythoughts
#MondayMotivation #TogetherAtHome
"जब 'दक्षिणी भारत का ताज' पैसों की कमी के कारण वैसा नहीं बन पाया"
आगरा शहर में करीब 42 एकड़ परिसर में बना ताजमहल ई. सन् 1632 से 1653 के बीच बेगम मुमताज महल की याद में शाहजहाँ द्वारा बनवाया गया।
महाराष्ट्र के औरंगाबाद में अपनी पहली और खास बेगम दिलरास बानो बेगम की स्मृति में औरंगजेब ने 'बीबी का मकबरा' बनवाया था। इसे 'दक्कनी ताज' के नाम से भी जाना जाता है।
हालांकि कलाकृतियों को बनाने के मामले में बादशाह औरंगजेब फिस्सडी ही था। उसकी लाल किले में बनवाई गई 'मोती मस्जिद' कलात्मक रूप से एक अच्छी कृति मानी है। बड़ी ऐतिहासिक धरोहर के रूप में औरंगजेब के हिस्से में 'बीबी का मकबरा' ही आता है। ताजमहल बन जाने के करीब पच्चीस वर्ष बाद बेगम की बीमारी के कारण असमय मृत्यु हो जाने पर औरंगजेब ने उस जमाने में मकबरे को बनाने के लिए 7 लाख रुपये का बजट जारी किया।
ताजमहल उस्ताद अहमद लाहौरी की देखरेख में बना था और उनके पुत्र का नाम अता-उल्लाह था। औरंगजेब ने मकबरा बनाने का काम अता-उल्लाह और इंजीनियर हंसपत राय को दिया था। 1660 से 1669 के बीच चारबाग में स्थित इस मकबरे को बनाने के लिए जयपुर के पास की खदानों से खूब मार्बल गया। लेकिन पैसों के अभाव में मार्बल के बजाय कई जगह पर प्लास्टर ही काम में लिया गया। औरंगजेब की मृत्यु के बाद उसके सबसे बड़े पुत्र आजम शाह ने इसे पूर्ण करवाया। हालांकि अपने आप में यह भव्य इमारत है लेकिन ताजमहल की भव्यता के सामने यह फीकी नजर आती है।
दोनों बादशाहों को अपनी बेगमों से कितनी मुहब्बत थी ये तो इतिहासकार ही बतायेंगे पर मुफलिसी की मुहर एक बादशाह पर लग गई। बाप का रुतबा बाप का ही रहा।
साहिर लुधियानवी की कुछ प्रसिद्ध पंक्तियां है।
"ये चमन-ज़ार ये जमुना का किनारा ये महल
ये मुनक़्क़श दर ओ दीवार ये मेहराब ये ताक़
इक शहंशाह ने दौलत का सहारा ले कर
हम ग़रीबों की मोहब्बत का उड़ाया है मज़ाक़"
मुहब्बत को दौलत से तौलने वाले दोनों बादशाह आज मिट्टी के रूप में हैं, लेकिन जमना के किनारे से आया हवा का हर ठंडा झोंका और चारबाग के पेड़ों से छनकर आयी बयार आज भी खुशनुमा है, जिन्दा है, वो कहाँ से आकर कहाँ जाती है? क्यों जाती है? उसको कौन बादशाह चलाता है? आपको पता चले तो मुझे भी बताना।
@अर्जुन सिंह साँखला
आगरा शहर में करीब 42 एकड़ परिसर में बना ताजमहल ई. सन् 1632 से 1653 के बीच बेगम मुमताज महल की याद में शाहजहाँ द्वारा बनवाया गया।
महाराष्ट्र के औरंगाबाद में अपनी पहली और खास बेगम दिलरास बानो बेगम की स्मृति में औरंगजेब ने 'बीबी का मकबरा' बनवाया था। इसे 'दक्कनी ताज' के नाम से भी जाना जाता है।
हालांकि कलाकृतियों को बनाने के मामले में बादशाह औरंगजेब फिस्सडी ही था। उसकी लाल किले में बनवाई गई 'मोती मस्जिद' कलात्मक रूप से एक अच्छी कृति मानी है। बड़ी ऐतिहासिक धरोहर के रूप में औरंगजेब के हिस्से में 'बीबी का मकबरा' ही आता है। ताजमहल बन जाने के करीब पच्चीस वर्ष बाद बेगम की बीमारी के कारण असमय मृत्यु हो जाने पर औरंगजेब ने उस जमाने में मकबरे को बनाने के लिए 7 लाख रुपये का बजट जारी किया।
ताजमहल उस्ताद अहमद लाहौरी की देखरेख में बना था और उनके पुत्र का नाम अता-उल्लाह था। औरंगजेब ने मकबरा बनाने का काम अता-उल्लाह और इंजीनियर हंसपत राय को दिया था। 1660 से 1669 के बीच चारबाग में स्थित इस मकबरे को बनाने के लिए जयपुर के पास की खदानों से खूब मार्बल गया। लेकिन पैसों के अभाव में मार्बल के बजाय कई जगह पर प्लास्टर ही काम में लिया गया। औरंगजेब की मृत्यु के बाद उसके सबसे बड़े पुत्र आजम शाह ने इसे पूर्ण करवाया। हालांकि अपने आप में यह भव्य इमारत है लेकिन ताजमहल की भव्यता के सामने यह फीकी नजर आती है।
दोनों बादशाहों को अपनी बेगमों से कितनी मुहब्बत थी ये तो इतिहासकार ही बतायेंगे पर मुफलिसी की मुहर एक बादशाह पर लग गई। बाप का रुतबा बाप का ही रहा।
साहिर लुधियानवी की कुछ प्रसिद्ध पंक्तियां है।
"ये चमन-ज़ार ये जमुना का किनारा ये महल
ये मुनक़्क़श दर ओ दीवार ये मेहराब ये ताक़
इक शहंशाह ने दौलत का सहारा ले कर
हम ग़रीबों की मोहब्बत का उड़ाया है मज़ाक़"
मुहब्बत को दौलत से तौलने वाले दोनों बादशाह आज मिट्टी के रूप में हैं, लेकिन जमना के किनारे से आया हवा का हर ठंडा झोंका और चारबाग के पेड़ों से छनकर आयी बयार आज भी खुशनुमा है, जिन्दा है, वो कहाँ से आकर कहाँ जाती है? क्यों जाती है? उसको कौन बादशाह चलाता है? आपको पता चले तो मुझे भी बताना।
@अर्जुन सिंह साँखला
#DailyCurrentAffairs #gktoday
By Kumar Gaurav Sir
★ फूल-पत्ती वाली क्लास व 'भारत दर्शन' ★
✅ विशेष : दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश
✅ Today In History
"लक्ष्य के लिए महासंग्राम"
By Kumar Gaurav Sir
★ फूल-पत्ती वाली क्लास व 'भारत दर्शन' ★
✅ विशेष : दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश
✅ Today In History
"लक्ष्य के लिए महासंग्राम"
https://youtu.be/QJ_-v2Ttcqc
★ फूल-पत्ती वाली क्लास व 'भारत दर्शन' ★
By Kumar Gaurav Sir
#DailyCurrentAffairs #gktoday
✅ विशेष : दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश
✅ Today In History
★ फूल-पत्ती वाली क्लास व 'भारत दर्शन' ★
By Kumar Gaurav Sir
#DailyCurrentAffairs #gktoday
✅ विशेष : दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश
✅ Today In History
YouTube
Daily Current Affairs #221 | 21 April 2020 | Current Affairs In Hindi | GK Today By Kumar Gaurav sir
#Daily_Current_Affairs #GK_Todayप्रिय मित्रों‚प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्न पत्र में समसामयिकी यानि करेंट अफेयर्स का विशेष महत्त्व होता है । इसी को ध्...
21_अप्रैल,_2020_दैनिक_सामयिकी_All_Exams.pdf
5.6 MB
21 अप्रैल, 2020 दैनिक सामयिकी (All Exams).pdf
हाल ही में कोरोना संक्रमण से मुक्त होने वाले देश के प्रथम दो राज्य है-
Anonymous Quiz
9%
राजस्थान-गोवा
70%
मणिपुर - गोवा
6%
पंजाब - कर्नाटक
15%
केरल - अरुणाचल प्रदेश
https://youtu.be/QJ_-v2Ttcqc
🌄🌻 सुप्रभात 🌻🌄
GOOD MORNING
🙏आप का दिन शुभ हो 🙏
#Motivation
#TuesdayMotivation
#TuesdayThoughts
🌄🌻 सुप्रभात 🌻🌄
GOOD MORNING
🙏आप का दिन शुभ हो 🙏
#Motivation
#TuesdayMotivation
#TuesdayThoughts
आज सिविल सेवा दिवस पर हम उन सभी ब्रेवहार्ट सिविल सेवकों को सलाम करते हैं, जो भारत के लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर #CoronaWarriors के रूप में लड़ रहे हैं। जय हिंद 🇮🇳
#civilServiceday #CivilServicesFightCOVID19
#civilServiceday #CivilServicesFightCOVID19
"यहाँ बच्चे रोते हैं तो सुर में और पत्थर लुढ़कते हैं तो ताल में"
ग्वालियर में एक मशहूर कहावत है कि "यहाँ बच्चे रोते हैं तो सुर में, पत्थर लुढ़कते है तो ताल में" ग्वालियर बैजू बावरा और तानसेन जैसे गायकों की कर्मस्थली रहा है इसी कारण यह कहावत मशहूर हुई है।
1486 में ग्वालियर से 45 किलोमीटर दूर ग्राम बेहट में मकरंद पांडे के यहाँ तानसेन उर्फ (तन्ना, तनसुख, त्रिलोचन) का जन्म हुआ था।
कहते है तानसेन ने तीन गुरुओं से संगीत सीखा था। उन्होंने गुरु हरिदास से, ग्वालियर के राजा मानसिंह की पत्नी मृगनयनी से और सूफी संत मोहम्मद गौस से संगीत सीखा था।
कहते है उनकी राग मेघ-मल्हार, दीपक और भीमपलासी से क्रमशः बादल बरसने, दीपक जलने और पत्थर पिघलने लग जाते थे। उस वक्त उनकी टक्कर का पूरे साम्राज्य में एक और गायक 'बैजू बावरा' था जिनको भी ध्रुपदगायकी में तानसेन जैसी महारथ हासिल थी। कलावती बैजू की प्रेयसी थी और उसके प्रेम में पागल होने के कारण ही लोगों ने उन्हें 'बैजू बावरा' कहा था।
तानसेन की पत्नी का नाम 'हुसैनी' था जो महारानी मृगनयनी की दासी थी। उनके चार पुत्र और एक पुत्री थी। उन्होंने संगीतसार, रागमाला और श्रीगणेश स्तोत्र नामक तीन ग्रंथ भी रचे थे।
बाँधवगढ़ (रीवा) के राजा रामचन्द्र ने तानसेन से प्रभावित होकर उनको अपने दरबार में गायक नियुक्त कर दिया। लेकिन उनकी ख्याति देशभर में थी। एक बार अबुलफजल ने अकबर के दरबार में तानसेन की तारीफ कर दी। फिर क्या था, अकबर ने तानसेन को 60 वर्ष की उम्र में ही सही पर अपने दरबार का नवरत्न बना कर ही चैन पाया।
1585 में तानसेन की मृत्यु आगरा में हो गयी। तानसेन की समाधि उनके गुरु मोहम्मद गौस के कब्र पास ही ग्वालियर में स्थित है।
एक बार अकबर ने तानसेन से मजाक किया था कि तुम्हारे गुरु कृष्णभक्त हरिदास को मैंने वृन्दावन में गाते हुए सुना, तुमसे भी कितना मधुर गाते है वे। तानसेन ने कहा, "हुजुर! वे पूरे ब्रह्मांड के बादशाह के लिए गाते है और मैं धरती के एक टुकड़े पर राज करने वाले बादशाह के लिए; फर्क तो होगा ना।"
@अर्जुन सिंह साँखला
ग्वालियर में एक मशहूर कहावत है कि "यहाँ बच्चे रोते हैं तो सुर में, पत्थर लुढ़कते है तो ताल में" ग्वालियर बैजू बावरा और तानसेन जैसे गायकों की कर्मस्थली रहा है इसी कारण यह कहावत मशहूर हुई है।
1486 में ग्वालियर से 45 किलोमीटर दूर ग्राम बेहट में मकरंद पांडे के यहाँ तानसेन उर्फ (तन्ना, तनसुख, त्रिलोचन) का जन्म हुआ था।
कहते है तानसेन ने तीन गुरुओं से संगीत सीखा था। उन्होंने गुरु हरिदास से, ग्वालियर के राजा मानसिंह की पत्नी मृगनयनी से और सूफी संत मोहम्मद गौस से संगीत सीखा था।
कहते है उनकी राग मेघ-मल्हार, दीपक और भीमपलासी से क्रमशः बादल बरसने, दीपक जलने और पत्थर पिघलने लग जाते थे। उस वक्त उनकी टक्कर का पूरे साम्राज्य में एक और गायक 'बैजू बावरा' था जिनको भी ध्रुपदगायकी में तानसेन जैसी महारथ हासिल थी। कलावती बैजू की प्रेयसी थी और उसके प्रेम में पागल होने के कारण ही लोगों ने उन्हें 'बैजू बावरा' कहा था।
तानसेन की पत्नी का नाम 'हुसैनी' था जो महारानी मृगनयनी की दासी थी। उनके चार पुत्र और एक पुत्री थी। उन्होंने संगीतसार, रागमाला और श्रीगणेश स्तोत्र नामक तीन ग्रंथ भी रचे थे।
बाँधवगढ़ (रीवा) के राजा रामचन्द्र ने तानसेन से प्रभावित होकर उनको अपने दरबार में गायक नियुक्त कर दिया। लेकिन उनकी ख्याति देशभर में थी। एक बार अबुलफजल ने अकबर के दरबार में तानसेन की तारीफ कर दी। फिर क्या था, अकबर ने तानसेन को 60 वर्ष की उम्र में ही सही पर अपने दरबार का नवरत्न बना कर ही चैन पाया।
1585 में तानसेन की मृत्यु आगरा में हो गयी। तानसेन की समाधि उनके गुरु मोहम्मद गौस के कब्र पास ही ग्वालियर में स्थित है।
एक बार अकबर ने तानसेन से मजाक किया था कि तुम्हारे गुरु कृष्णभक्त हरिदास को मैंने वृन्दावन में गाते हुए सुना, तुमसे भी कितना मधुर गाते है वे। तानसेन ने कहा, "हुजुर! वे पूरे ब्रह्मांड के बादशाह के लिए गाते है और मैं धरती के एक टुकड़े पर राज करने वाले बादशाह के लिए; फर्क तो होगा ना।"
@अर्जुन सिंह साँखला