🇮🇳 BHARAT KO JAANO 2.0 🏆
''खेल वही , Approach नई''👇🏻
https://youtu.be/Or9ipdxuUBA
#NirmalSirLIVE
ज्ञान-पुरस्कार-मनोरंजन का Combo Dose ?
यह कैसे खेला जाएगा ? क्या नियम होंगे ? आप कैसे भाग लेंगे ? किस तरह यह पिछली प्रतियोगिता से अलग व रोमांचक होने वाला है।
सम्पूर्ण जानकारी के साथ निर्मल सर लाइव आ चुके हैं।
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क्या आपने Quiz #1 में participate किया ?
यदि नहीं तो अभी इस लिंक 👇🏻
https://utkarsh.com/prizequiz/
पर क्लिक करें और एक Simple से प्रश्न के सही जवाब दें।
50 Lucky winners जीतेंगे Cash prize रोजाना और उनमें से कुछ चयनित लोग खेलेंगे #LiveQuizShow निर्मल सर के साथ ।
💐अग्रिम शुभकामनाएं 💐
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"प्राचीन भारत की अद्भुत चौसठ कलाएं"
प्राचीन भारत में पाठ्यक्रम जितना विस्तृत होता था आज उसका 1% भी नहीं है। वेद, वेदाङ्ग, उपनिषद और सैंकड़ों अन्य ग्रंथों के साथ हर विद्यार्थी को आश्रम में 64 कलाएं भी सिखायी जाती थी। 'शुक्रनीतिसार' ग्रन्थ में शुक्राचार्य ने बताया कि कलाएं तो अनगिनत है पर एक विद्यार्थी को वर्णित 64 कलाएं तो सीखनी ही चाहिए।
1. नृत्य करना जानना 2. वाद्ययंत्रों का निर्माण करना एवं उन्हें बजाने की जानकारी 3. स्त्री पुरुषों को सुचारु रूप से वस्त्र एवं अलंकार पहनाना 4. अलग अलग रूप धारण करना 5. सुंदर रीति से बिस्तर बिछाना एवं पुष्पों को अनेक प्रकार से गूंथना 6. द्यूत (जुआ, चौपड़) क्रीड़ा जानना 7. अनेक प्रकार के आसनों द्वारा सुरत-क्रीड़ा का ज्ञान 8. पुष्परस से आसव या शराब बनाना 9. कहीं भी चुभे काँटे को निकालना या पीड़ा कम करना 10. मसालों से अन्न पकाना 11. वृक्ष लगाना और उनका संरक्षण करना 12. धातुओं को खान से खोद कर निकालना 13. ईख से गुड़ एवं अन्य पदार्थ बनाना 14. धातुओं से औषधि बनाना 15. मिश्रित धातुओं के मिश्रण को अलग करना 16. धातुओं का मिश्रण करना 17. समुद्र आदि से नमक बनाना 18. पैंतरा बदलते हुए शस्त्र चलाना 19. मल्लयुद्ध 20. हाथों से प्रहार करना 21. अस्त्रों को फेंकना एवं युद्ध की व्यूहरचना करना 22. हाथी, घोड़े और रथों से युद्ध लड़ना 23. विभिन्न प्रकार के बैठने के आसनों को जानना 24. रथ हाँकने का काम 25. मिट्टी, लकड़ी, पत्थर और धातु के बर्तन बनाना 26. चित्रकला 27. तालाब, बावड़ी महल कुएं आदि बनाना 28. घड़ी का निर्माण करना 29. विशेष वाद्ययंत्रों का निर्माण 30. रंगों से वस्त्रों को रंगना 31. जल, वायु और अग्नि के संयोग से उत्पन्न वाष्प का उपयोग करना 32. जल आवागमन के साधनों का निर्माण करना 33. तन्तुओं से रस्सी बनाना 34. तन्तुओं से वस्त्र रचना 35. रत्नों की पहचान एवं उनका उपयोग 36. सोने चांदी की असलियत जानना 37. कृत्रिम रत्नों का निर्माण 38. सोने चांदी के आभूषण बनाना 39. चमड़े को मुलायम कर उसका उपयोग करना 40. मृत पशुओं के शरीर पर से चमड़ा निकालना 41. दूध निकालना, जमाना, मथना आदि 42. कुर्ता आदि कपड़ों की सिलाई 43. तैरना सीखना 44. बर्तनों को मांजना 45. वस्त्रों को धोना 46. क्षुरकर्म (हजामत बनाना) 47. तिलहनों से तेल निकालना 48. हल चलाना 49. पेड़ पर चढ़ना 50. सेवा करने का ज्ञान 51. बाँस, ताड़, खजूर आदि से पात्र बनाना 52. कांच के बर्तन बनाना 53. खेतों को सींचना 54. जल को आवश्यक स्थान पर ले जाना 55. लोहे के अस्त्र शस्त्र बनाना 56. हाथी घोड़े इत्यादि पर बैठने की काठी बनाना 57. शिशुओं का संरक्षण 58. शिशुओं का पोषण 59. बच्चों के लिए खिलौने बनाना 60. अपराधियों को दण्ड देने का ज्ञान 61. भिन्न भिन्न देशों की लिपि को लिखना 62. पान के पत्ते की रक्षा एवं उसका उपयोग 63. आदान 64. प्रतिदान।
सभी कलाओं को सीख लिया लेकिन अन्तिम दो कलाओं को नहीं सीखा तो सब कुछ व्यर्थ था। 'आदान' का मतलब किसी काम को फुर्ती से करना 'प्रतिदान' का मतलब काम के महत्व को समझकर उसे चिरकाल तक धैर्यपूर्वक करना।
आदान और प्रतिदान का ध्यान दैनिक जीवन में बेहद जरूरी है।
@अर्जुन सिंह साँखला
प्राचीन भारत में पाठ्यक्रम जितना विस्तृत होता था आज उसका 1% भी नहीं है। वेद, वेदाङ्ग, उपनिषद और सैंकड़ों अन्य ग्रंथों के साथ हर विद्यार्थी को आश्रम में 64 कलाएं भी सिखायी जाती थी। 'शुक्रनीतिसार' ग्रन्थ में शुक्राचार्य ने बताया कि कलाएं तो अनगिनत है पर एक विद्यार्थी को वर्णित 64 कलाएं तो सीखनी ही चाहिए।
1. नृत्य करना जानना 2. वाद्ययंत्रों का निर्माण करना एवं उन्हें बजाने की जानकारी 3. स्त्री पुरुषों को सुचारु रूप से वस्त्र एवं अलंकार पहनाना 4. अलग अलग रूप धारण करना 5. सुंदर रीति से बिस्तर बिछाना एवं पुष्पों को अनेक प्रकार से गूंथना 6. द्यूत (जुआ, चौपड़) क्रीड़ा जानना 7. अनेक प्रकार के आसनों द्वारा सुरत-क्रीड़ा का ज्ञान 8. पुष्परस से आसव या शराब बनाना 9. कहीं भी चुभे काँटे को निकालना या पीड़ा कम करना 10. मसालों से अन्न पकाना 11. वृक्ष लगाना और उनका संरक्षण करना 12. धातुओं को खान से खोद कर निकालना 13. ईख से गुड़ एवं अन्य पदार्थ बनाना 14. धातुओं से औषधि बनाना 15. मिश्रित धातुओं के मिश्रण को अलग करना 16. धातुओं का मिश्रण करना 17. समुद्र आदि से नमक बनाना 18. पैंतरा बदलते हुए शस्त्र चलाना 19. मल्लयुद्ध 20. हाथों से प्रहार करना 21. अस्त्रों को फेंकना एवं युद्ध की व्यूहरचना करना 22. हाथी, घोड़े और रथों से युद्ध लड़ना 23. विभिन्न प्रकार के बैठने के आसनों को जानना 24. रथ हाँकने का काम 25. मिट्टी, लकड़ी, पत्थर और धातु के बर्तन बनाना 26. चित्रकला 27. तालाब, बावड़ी महल कुएं आदि बनाना 28. घड़ी का निर्माण करना 29. विशेष वाद्ययंत्रों का निर्माण 30. रंगों से वस्त्रों को रंगना 31. जल, वायु और अग्नि के संयोग से उत्पन्न वाष्प का उपयोग करना 32. जल आवागमन के साधनों का निर्माण करना 33. तन्तुओं से रस्सी बनाना 34. तन्तुओं से वस्त्र रचना 35. रत्नों की पहचान एवं उनका उपयोग 36. सोने चांदी की असलियत जानना 37. कृत्रिम रत्नों का निर्माण 38. सोने चांदी के आभूषण बनाना 39. चमड़े को मुलायम कर उसका उपयोग करना 40. मृत पशुओं के शरीर पर से चमड़ा निकालना 41. दूध निकालना, जमाना, मथना आदि 42. कुर्ता आदि कपड़ों की सिलाई 43. तैरना सीखना 44. बर्तनों को मांजना 45. वस्त्रों को धोना 46. क्षुरकर्म (हजामत बनाना) 47. तिलहनों से तेल निकालना 48. हल चलाना 49. पेड़ पर चढ़ना 50. सेवा करने का ज्ञान 51. बाँस, ताड़, खजूर आदि से पात्र बनाना 52. कांच के बर्तन बनाना 53. खेतों को सींचना 54. जल को आवश्यक स्थान पर ले जाना 55. लोहे के अस्त्र शस्त्र बनाना 56. हाथी घोड़े इत्यादि पर बैठने की काठी बनाना 57. शिशुओं का संरक्षण 58. शिशुओं का पोषण 59. बच्चों के लिए खिलौने बनाना 60. अपराधियों को दण्ड देने का ज्ञान 61. भिन्न भिन्न देशों की लिपि को लिखना 62. पान के पत्ते की रक्षा एवं उसका उपयोग 63. आदान 64. प्रतिदान।
सभी कलाओं को सीख लिया लेकिन अन्तिम दो कलाओं को नहीं सीखा तो सब कुछ व्यर्थ था। 'आदान' का मतलब किसी काम को फुर्ती से करना 'प्रतिदान' का मतलब काम के महत्व को समझकर उसे चिरकाल तक धैर्यपूर्वक करना।
आदान और प्रतिदान का ध्यान दैनिक जीवन में बेहद जरूरी है।
@अर्जुन सिंह साँखला
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⚠️ विशेष सूचना 📣
तकनीकी कारणों से भारत को जानो प्रतियोगिता रद्द की जाती है।विस्तार में कारण कल 20 अप्रेल,सोमवार को प्रात: 10 बजे बताउंगा।
- निर्मल गहलोत ‘उत्कर्ष’
तकनीकी कारणों से भारत को जानो प्रतियोगिता रद्द की जाती है।विस्तार में कारण कल 20 अप्रेल,सोमवार को प्रात: 10 बजे बताउंगा।
- निर्मल गहलोत ‘उत्कर्ष’
#DailyCurrentAffairs #gktoday
(18-19 अप्रैल) By Kumar Gaurav Sir
★ फूल-पत्ती वाली क्लास व 'भारत दर्शन' ★
✅ विशेष : हरियाणा राज्य
✅ Today In History
"लक्ष्य के लिए महासंग्राम"
(18-19 अप्रैल) By Kumar Gaurav Sir
★ फूल-पत्ती वाली क्लास व 'भारत दर्शन' ★
✅ विशेष : हरियाणा राज्य
✅ Today In History
"लक्ष्य के लिए महासंग्राम"
20_अप्रैल,_2020_दैनिक_सामयिकी_All_Exams.pdf
5.7 MB
20 अप्रैल, 2020 दैनिक सामयिकी (All Exams).pdf
https://youtu.be/8JFzFDL9cG8
★ फूल-पत्ती वाली क्लास व 'भारत दर्शन' ★
#DailyCurrentAffairs #gktoday
✅ विशेष : #हरियाणा राज्य
✅ Today In History
By Kumar Gaurav Sir
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By Kumar Gaurav Sir
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Daily Current Affairs #220 | 20 April 2020 | Current Affairs In Hindi | GK Today By Kumar Gaurav sir
#Daily_Current_Affairs #GK_Todayप्रिय मित्रों‚प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्न पत्र में समसामयिकी यानि करेंट अफेयर्स का विशेष महत्त्व होता है । इसी को ध्...
https://youtu.be/8JFzFDL9cG8
🌄🌻 सुप्रभात 🌻🌄
GOOD MORNING
🙏आप का दिन शुभ हो 🙏
#mondaythoughts
#MondayMotivation #TogetherAtHome
🌄🌻 सुप्रभात 🌻🌄
GOOD MORNING
🙏आप का दिन शुभ हो 🙏
#mondaythoughts
#MondayMotivation #TogetherAtHome
"जब 'दक्षिणी भारत का ताज' पैसों की कमी के कारण वैसा नहीं बन पाया"
आगरा शहर में करीब 42 एकड़ परिसर में बना ताजमहल ई. सन् 1632 से 1653 के बीच बेगम मुमताज महल की याद में शाहजहाँ द्वारा बनवाया गया।
महाराष्ट्र के औरंगाबाद में अपनी पहली और खास बेगम दिलरास बानो बेगम की स्मृति में औरंगजेब ने 'बीबी का मकबरा' बनवाया था। इसे 'दक्कनी ताज' के नाम से भी जाना जाता है।
हालांकि कलाकृतियों को बनाने के मामले में बादशाह औरंगजेब फिस्सडी ही था। उसकी लाल किले में बनवाई गई 'मोती मस्जिद' कलात्मक रूप से एक अच्छी कृति मानी है। बड़ी ऐतिहासिक धरोहर के रूप में औरंगजेब के हिस्से में 'बीबी का मकबरा' ही आता है। ताजमहल बन जाने के करीब पच्चीस वर्ष बाद बेगम की बीमारी के कारण असमय मृत्यु हो जाने पर औरंगजेब ने उस जमाने में मकबरे को बनाने के लिए 7 लाख रुपये का बजट जारी किया।
ताजमहल उस्ताद अहमद लाहौरी की देखरेख में बना था और उनके पुत्र का नाम अता-उल्लाह था। औरंगजेब ने मकबरा बनाने का काम अता-उल्लाह और इंजीनियर हंसपत राय को दिया था। 1660 से 1669 के बीच चारबाग में स्थित इस मकबरे को बनाने के लिए जयपुर के पास की खदानों से खूब मार्बल गया। लेकिन पैसों के अभाव में मार्बल के बजाय कई जगह पर प्लास्टर ही काम में लिया गया। औरंगजेब की मृत्यु के बाद उसके सबसे बड़े पुत्र आजम शाह ने इसे पूर्ण करवाया। हालांकि अपने आप में यह भव्य इमारत है लेकिन ताजमहल की भव्यता के सामने यह फीकी नजर आती है।
दोनों बादशाहों को अपनी बेगमों से कितनी मुहब्बत थी ये तो इतिहासकार ही बतायेंगे पर मुफलिसी की मुहर एक बादशाह पर लग गई। बाप का रुतबा बाप का ही रहा।
साहिर लुधियानवी की कुछ प्रसिद्ध पंक्तियां है।
"ये चमन-ज़ार ये जमुना का किनारा ये महल
ये मुनक़्क़श दर ओ दीवार ये मेहराब ये ताक़
इक शहंशाह ने दौलत का सहारा ले कर
हम ग़रीबों की मोहब्बत का उड़ाया है मज़ाक़"
मुहब्बत को दौलत से तौलने वाले दोनों बादशाह आज मिट्टी के रूप में हैं, लेकिन जमना के किनारे से आया हवा का हर ठंडा झोंका और चारबाग के पेड़ों से छनकर आयी बयार आज भी खुशनुमा है, जिन्दा है, वो कहाँ से आकर कहाँ जाती है? क्यों जाती है? उसको कौन बादशाह चलाता है? आपको पता चले तो मुझे भी बताना।
@अर्जुन सिंह साँखला
आगरा शहर में करीब 42 एकड़ परिसर में बना ताजमहल ई. सन् 1632 से 1653 के बीच बेगम मुमताज महल की याद में शाहजहाँ द्वारा बनवाया गया।
महाराष्ट्र के औरंगाबाद में अपनी पहली और खास बेगम दिलरास बानो बेगम की स्मृति में औरंगजेब ने 'बीबी का मकबरा' बनवाया था। इसे 'दक्कनी ताज' के नाम से भी जाना जाता है।
हालांकि कलाकृतियों को बनाने के मामले में बादशाह औरंगजेब फिस्सडी ही था। उसकी लाल किले में बनवाई गई 'मोती मस्जिद' कलात्मक रूप से एक अच्छी कृति मानी है। बड़ी ऐतिहासिक धरोहर के रूप में औरंगजेब के हिस्से में 'बीबी का मकबरा' ही आता है। ताजमहल बन जाने के करीब पच्चीस वर्ष बाद बेगम की बीमारी के कारण असमय मृत्यु हो जाने पर औरंगजेब ने उस जमाने में मकबरे को बनाने के लिए 7 लाख रुपये का बजट जारी किया।
ताजमहल उस्ताद अहमद लाहौरी की देखरेख में बना था और उनके पुत्र का नाम अता-उल्लाह था। औरंगजेब ने मकबरा बनाने का काम अता-उल्लाह और इंजीनियर हंसपत राय को दिया था। 1660 से 1669 के बीच चारबाग में स्थित इस मकबरे को बनाने के लिए जयपुर के पास की खदानों से खूब मार्बल गया। लेकिन पैसों के अभाव में मार्बल के बजाय कई जगह पर प्लास्टर ही काम में लिया गया। औरंगजेब की मृत्यु के बाद उसके सबसे बड़े पुत्र आजम शाह ने इसे पूर्ण करवाया। हालांकि अपने आप में यह भव्य इमारत है लेकिन ताजमहल की भव्यता के सामने यह फीकी नजर आती है।
दोनों बादशाहों को अपनी बेगमों से कितनी मुहब्बत थी ये तो इतिहासकार ही बतायेंगे पर मुफलिसी की मुहर एक बादशाह पर लग गई। बाप का रुतबा बाप का ही रहा।
साहिर लुधियानवी की कुछ प्रसिद्ध पंक्तियां है।
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ये मुनक़्क़श दर ओ दीवार ये मेहराब ये ताक़
इक शहंशाह ने दौलत का सहारा ले कर
हम ग़रीबों की मोहब्बत का उड़ाया है मज़ाक़"
मुहब्बत को दौलत से तौलने वाले दोनों बादशाह आज मिट्टी के रूप में हैं, लेकिन जमना के किनारे से आया हवा का हर ठंडा झोंका और चारबाग के पेड़ों से छनकर आयी बयार आज भी खुशनुमा है, जिन्दा है, वो कहाँ से आकर कहाँ जाती है? क्यों जाती है? उसको कौन बादशाह चलाता है? आपको पता चले तो मुझे भी बताना।
@अर्जुन सिंह साँखला