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BHARAT KO JANO
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#Covid19 के प्रकोप के समय व #LockDown के दौरान उत्कर्ष क्लासेज ने आपको सपरिवार घर पर ज्ञानात्मक मनोरंजन उपलब्ध कराने का की जिम्मेदारी उठाई है जिससे कि प्रधानमंत्री जी के निवेदनानुसार आप परिवार सहित घर पर ही बैठे रहें।
इसके हेतु उत्कर्ष के UTKARSH App पर भारत को जानो प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है जिसमें प्रतिदिन भारत के सामान्य ज्ञान विज्ञान पर आधारित 50 प्रश्नों का एक #Test लिया जाता है।
आज रात्रि 12:00 बजे से सायं 6:00 बजे तक Test #8 जारी रहेगा।

अभी इस प्रतियोगिता में भाग लें 👇🏻
https://utkarshapp.page.link/CeBP4ebg5j98UQyu7
और रोजाना #Cash #Prizes जीतें!💸
जन्मदिवस विशेष : 5 अप्रैल
👉🏻 जगजीवन राम 'बाबू जी'

गरीबों, वंचितों और पीड़ितों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले स्वतंत्रता सेनानी बाबू जगजीवन राम की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।

#Babu #JagjivanRam #Infographics #Utkarsh
"एक दीप हौंसले के लिए"


सितारों से सजी
एक निशा जवां हो रही थी।
चाँदनी की छटा
सारे जहाँ को भिगो रही थी।
दिल में दफन हुआ
दर्द का दर्दुर
आंसुओं को पावस
समझ गाने लगा है।

चाँदनी की निर्मलता पर
तम छाया जा रहा था।
हावी होकर सबके दिल को
खाया चला जा रहा था।
दामिनी का दम लेकर
दीप निकले दहलीजों से,
तमस देखो कैसे
अचेत होने लगा है।

मौके ऐसे बार बार
देखो कभी आते नहीं
कोई भी प्रलोभन हमें
कभी भी सुहाते नहीं,
दरकार है जब देश की
दिगंतो में एक दीप की,
तो रंग तुम्हें वहाँ क्यों
याद आने लगा है।

@अर्जुन सिंह साँखला
🚀 महत्वपूर्ण दिवस : 5 अप्रैल
👉🏻 राष्ट्रीय समुद्री दिवस

#ImportantDay #Infograpgics #Utkarsh
आप सभी द्वारा प्रज्ज्वलित किया जाने वाला एक-एक दीया कोरोना के अंधकार पर प्रहार कर एक नया विश्वास पैदा करने वाला साबित होगा।

इसलिए आज रात 9 बजे
देश की एकता व अखण्डता के नाम दीया, मोमबत्ती, टॉर्च अथवा मोबाईल-फ़्लैश लाइट जलाकर #CoronaWarriors का मनोबल अवश्य बढ़ाएं।

- निर्मल गहलोत 'उत्कर्ष'

#9pm9minute #IndiaFightsCorona #9बजे9मिनट
"जब चंद्रयात्रियों को 'क्वारंटाइन' करने का कोई लाभ मनुष्यता को नहीं मिला"

1969 से 1972 के वर्षों में 10 लुनार मॉड्यूल्स धरती से चन्द्रमा पर भेजे गए जिनमें से 6 ने मानव को चन्द्रमा पर उतारा।

आज तक 12 मानव चन्द्रमा की सतह पर कदम रख चुके हैं और 12 ऐसे मानव भी है जिन्होंने चाँद पर कदम नहीं रखा लेकिन चन्द्रमा के सबसे निकट जाकर उसके चारों ओर ऑर्बिट में चक्कर लगाया।

चन्द्रमा पर पैर रखने वाले 12 यात्रियों में डेविड स्कोट की घड़ी जिसको उन्होंने चंद्र यात्रा में पहन रखा था उसे धरती पर की गई एक नीलामी में 2015 में 1.625 मिलियन डॉलर में बेचा गया था।

इन सब में जुलाई 1969 के अपोलो-11 के मिशन की कहानी सबसे प्रेरक और रोचक है। अपोलो-11 तीन अन्तरिक्ष यात्रियों को लेकर चन्द्रमा पहुंचा था जिनके नाम थे नील आर्मस्ट्रॉन्ग, बज्ज एल्ड्रिन, माइकल कॉलिन्स।

नील आर्मस्ट्रॉन्ग और बज्ज एल्ड्रिन में से कोई भी चंद्रमा पर पहला कदम रख कर मानव इतिहास के सुनहरे अक्षरों में अपना नाम दर्ज करवा सकता था।

नील ने पहला कदम चन्द्रमा की सतह पर रखा। बज्ज एल्ड्रिन ने कुछ सेकण्ड्स बाद ही दूसरा इंसानी कदम चाँद की सतह पर रखा। तीसरा इंसान कॉलिन्स बस तरसता रहा कि कदम रखूं लेकिन अपोलो को चाँद के ऑर्बिट में चक्कर लगाने की जिम्मेदारी के चलते वो दुनियां के सबसे 'एकांतिक इंसान' के रूप में धरती से लाखों किलोमीटर दूर अकेले ही चक्कर लगाते रहे। वो इस जिम्मेदारी के कारण आज भी एक 'भूले बिसरे अन्तरिक्ष यात्री' के रूप में जाने जाते है।

लेकिन मेरी नजर में तीनों बराबर के हीरो थे और बाकी तो दुनियां का बना बनाया भ्रम है। नील चाँद पर कदम रखने वाले पहले इंसान बने। एल्ड्रिन चाँद पर खुशी से चहलकदमी करते इन्सान को सबसे नजदीक से देखने वाले पहले पहले इन्सान थे। कॉलिंस इन दो महान लोगों की जान को सलामत रखने का जतन करते हुए चाँद की परिक्रमा करने वाले पहले इंसान थे। किसी मिशन को अंजाम तक पहुँचाने वाला हर व्यक्ति हीरो होता है। बराबर हिस्सेदार हीरो। उसमें कोई छोटा बड़ा नहीं होता।

धरती पर जब वे लौटे तो उन्हें 21(यात्रा के आठ दिन मिलाकर) दिन की अवधि तक 'क्वारंटाइन' रखा गया और उन्हें उतारा भी कहीं एकांत में प्रशांत महासागर में गया था। उसकी वजह यह थी कि कहीं उनके साथ चाँद के वातावरण से कोई 'पैथोजन' (जीवाणु) तो नहीं आ गए है जो पूरी मानवता के लिए घातक हो सकते हैं।

उस वक्त तो उस जीवाणु का पता नहीं चला लेकिन 'अनावश्यक श्रेय' लेने का यह कीड़ा मनुष्यता को लग चुका था। लोगों को 'कॉलिन्स' नज़र ही नहीं आता है।

लेखक:

अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य,
लक्की इंस्टिट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
कोरोना के विरुद्ध जंग का बिगुल बजाएं,
आओ मिलकर दीया जलाएं ।

#9pm9minute #IndiaFightsCorona #9बजे9मिनट
प्यारे साथियों,
फूल पत्ती वाले सवालों की श्रृंखला में कल प्रातः 5:30 बजे आपके अपने कुमार गौरव सर लेकर आ रहे हैं -
- नवीनतम प्रमुख नियुक्तियों संबंधी महत्वपूर्ण प्रश्न
तो क्या आप सभी कल सुबह की इस क्लास के लिए तैयार हो ?

https://youtu.be/xDtl0dcRqFI
#KumarGauravSirLiveNow

प्यारे साथियों,
फूल पत्ती वाले सवालों की श्रृंखला में आज की क्लास में आपके अपने कुमार गौरव सर लेकर आ रहे हैं -
- नवीनतम प्रमुख नियुक्तियों संबंधी महत्वपूर्ण प्रश्न
तो इन्तजार किस बात , आजाओ 👇🏻

https://youtu.be/xDtl0dcRqFI
https://youtu.be/xDtl0dcRqFI

सुप्रभात 🌻🌄
आप का दिन शुभ हो 🙏
#GoodMorning #HappyMorning
#MondayMotivation
#MotivationalQuote
अहिंसा परमो धर्म:

आप सभी को भगवान महावीर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।

#MahavirJayanti
#महावीरजयंती
प्रिय अभ्यर्थियों,
आगामी ऑफ़लाइन बैच के विद्याथियों ( जिन्होंने उत्कर्ष में एडमिशन ले लिया लेकिन जिनके बैच अभी प्रारम्भ नहीं हुए हैं ) के साथ निर्मल सर आज दोपहर 12 बजे UTKARSH App में लाइव परिचर्चा करेंगे।

👉🏻 इस लाईव परिचर्चा में हिस्सा लेने के लिए Click करें 👇🏻 https://bit.ly/2JChrE2 (ध्यान रखें की My Library में जाकर पहले रिफ्रेश जरूर करें )

👉🏻 इस #LIVE परिचर्चा के बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी/शिकायत को https://utkarsh.com/student-support/ पर  दर्ज करा सकते हैं, अथवा support@utkarsh.com पर mail करें अथवा हमारे Utkarsh के कॉल-सेंटर नम्बर –  9509936602, 9509936611, 9509936614, 9509936601, 9509936610 or 6377200493 (9:00AM to 6:00PM) पर कॉल करें।
विद्यार्थियों की बेहद माँग पर हनुमान जयंती(8 अप्रेल ) को केवल एक दिन के लिए उत्कर्ष ऐप में सभी ऑनलाइन कोर्सेस पर 85% तक की भारी छूट दी जायेगी। ऐसे विद्यार्थी जो धनाभाव के कारण पहले कोर्स नहीं ले सके, उनके लिए यह सुनहरा अवसर है।
Anonymous Poll
49%
हाँ सर, 8 अप्रेल का बेसब्री से इंतज़ार है।
37%
मैं तो पहले से ही उत्कर्ष ऐप से पढ़ रहा हूँ।
14%
मैंने पहले भी एक और कोर्स ख़रीदा था अब एक और खरीदूँगा।
𝗕𝗛𝗔𝗥𝗔𝗧 𝗞𝗢 𝗝𝗔𝗔𝗡𝗢

#Test_8 Detailed Solution and Live Lottery @7:30 PM

प्रिय अभ्यर्थियों,
UTKARSH App पर चल रही *भारत को जानो* प्रतियोगिता का टेस्ट-8 आज शाम 6 बजे तक आप दे सकते हैं।
अभी टेस्ट देने के लिए क्लिक करें 👇🏻
https://utkarshapp.page.link/CeBP4ebg5j98UQyu7

इस टेस्ट का विस्तृत हल व लाइव लॉटरी निकालने निर्मल सर आज शाम 7:30 बजे आप सभी से यूट्यूब व फेसबुक पर लाइव रूबरू होंगें 👇🏻

https://youtu.be/t1F8ekEnG5k
𝐇𝐚𝐧𝐮𝐦𝐚𝐧 𝐉𝐚𝐲𝐚𝐧𝐭𝐢
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वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में अपना सहयोग देते हुए उत्कर्ष लाया है आप सभी अभ्यर्थियों की विशेष मांग पर एक दिवसीय #FlashSale ।

इस #हनुमान_जयंती ( 8 अप्रैल ) के शुभ अवसर पर 7 अप्रैल रात 12 बजे से 8 अप्रैल रात 12 बजे तक उत्कर्ष एप के सभी ऑनलाइन कोर्सेज पर मिलेगी 85 % तक की भारी छूट ।

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यह खुशखबरी अपने मित्रों व परिचितों के साथ जरूर साझा करें ।

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"और मैं आत्मसुख के लिए खूब रोया..."

ध्यानमूलं गुरोर्मूर्ति: पूजामूलं गुरो: पदम्।
मंत्र मूलं गुरोर्वाक्यं मोक्षमूलं गुरो: कृपा।।

शरद पूर्णिमा की एक सांझ ढली तो चन्द्रमा की अलौकिक सी चाँदनी चारों दिशा में छिटकने लगी। पूर्वी आकाश से वृक्षों के झुरमुट में से चन्द्रमा की छवि झलक रही थी। निष्कलंक, तेजस्वी और मंद मंद मुस्कुराते उस चाँद को देखकर मुझे मेरे गुरु की अद्भुत छवि का स्मरण हो आया।

अतीत के कुछ चित्र मस्तिष्क पर उभरने लगे। किशोरावस्था में विश्वविद्यालय की शिक्षा पाना एक भौतिक इच्छा मात्र थी। मेरे अधिकांश मित्रों जैसा मैं भी था। मित्रों की दृष्टि में युवतियों का सलज, निर्मल, सरस नैसर्गिक सौन्दर्य निथरता था तो उनके मन में सौन्दर्य का मलीन रूप ही मन के पैंदे में बैठता। "मैं दोस्तों से अलग था" यह झूँठ मैं बोलना नहीं चाहता हूँ।

श्रावण मास के एक प्रातःकाल आकाश मेघों से ढक गया। विश्वविद्यालय परिसर उस दिन जनशून्य था। मुझे स्मरण है मैं एक पेड़ के नीचे खड़ा था। एक पाटलवर्ण युवती ने उधर से निकलते हुए अपने सौंदर्य की सार्थकता परखने के लिए पलकभर मुझपर दृष्टिपात किया तो मानो कड़कती बिजली के साथ मन में हर्ष की मूसलाधार वर्षा हुई।

थोड़ी देर बाद आसमान से भी मूसलाधार वर्षा होने लगी। मैं भीगने लगा। उन दिनों मेरे एक गुरुवर साइकिल लेकर आते थे। साइकिल को खड़ा करने का 'स्टैंड' टूटा होने के कारण वे साइकिल को परिसर की दीवार के सहारे खड़ा कर देते थे। वे गुरुवर तरबतर होकर उस दिन परिसर में पहुँचे थे। विभाग में अपनी हाजिरी लगाकर बाहर आकर मुझे आवाज लगाई। मुझे याद है मैं सहमा सा उनके पास पहुँचा था। उन्होंने पूरे भीगे शरीर के साथ ही उस कक्षा में पढ़ाना शुरू किया जिसमें आम दिनों में पचास विद्यार्थी बैठते थे। उस दिन में अकेला था। उस दिन पाठ्यवस्तु में शकुन्तला अपने पिता के गृह से विदा हो रही थी। ऋषि कण्व से भी अधिक भावुक कंठ से उन्होंने भावों के संसार में डूब कर उस पाठ को पढ़ाया था।

पानी से तरबतर गुरुवर के उस मनोमुग्धकारी सौम्य रूप को देखकर समझ में आया कि क्यों आचार्य द्रोण को एकलव्य ने अंगूठा दे दिया, क्यों महर्षि धौम्य शिष्य आरुणि रात भर जल में सोता रहा, क्यों उपमन्यु ने गुरु के आदेश पर भोजन त्याग दिया, क्यों मुनि सांदीपनि के आश्रम में कृष्ण सुदामा एक से थे, क्यों गुरु को ब्रह्मा, विष्णु, महेश व साक्षात परब्रह्म कहा गया, क्यों कवि कालिदास ने अध्यापक को ' सुतीर्थ' की संज्ञा दी।

कुछ महीनों बाद गुरुवर की सेवा निवृत्ति थी। सभी व्याख्यातागणों ने अपने अनुभव सुनाये। अन्त में गुरुवर का उद्बोधन था। उनके चेहरे पर सनातन मुस्कुराहट लेकिन बोलते बोलते उनकी आँखों से अश्रुधारा भी बह रही थी। उस दिन उनके मुख से निकला हर शब्द अमरकोष बन गया। मेरा मन इतना कभी न रोया होगा। उनके उस अद्भुत स्वरूप का वर्णन मेरी अल्पज्ञ मति नहीं कर सकती। उस दिन एक युग का अवसान हुआ था।

कार्यक्रम समापन पर मालाओं से मंडित गुरुवर अपनी साइकिल पर लौट गए। परिसर भवन को सहारा देता वो खम्भा और खम्बे को सहारा देती वो साइकिल कल नहीं आयेगी यह सोच कर मैं दुनियां से नज़रें बचाकर भारी मन से रोता हुआ चल पड़ा।

वह ईश्वरीय बिछोह आज भी मुझे अश्रु मुक्ति का सुख देता है।

लेखक:

अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य,
लक्की इंस्टिट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।