"सड़क इतनी सूनी शेरशाह के जमाने में भी नहीं थी"
वक्त बहुत तेजी से बदलता है फिर वो वक्त अच्छा हो या बुरा। एक अनन्त यात्रा है जिन्दगी। ई. पूर्व के उस जमाने में चंद्रगुप्त मौर्य ने जनता को 'उत्तरापथ' नाम रखकर जनता को एक सड़क की सौगात दी थी। 1542 ई. में फरीद खान उपनाम 'शेरशाह सूरी' ने जनता के लिए दरियादिली दिखाते हुए प्राचीन 'उत्तरापथ' कहलाने वाली सड़क को सुधरवाया और 'सड़क-ए-आजम' या 'बादशाही सड़क' के नाम से पुनर्निर्माण करवाया। पश्चिम में अफगानिस्तान के काबुल से लेकर बांग्लादेश के चटगांव तक 2500 किलोमीटर यह सड़क आज भी भारत की प्राणरेखा मानी जाती है।
16 वीं सदी में पक्की सड़क बनवाना, पेड़ लगवाना, हर कोस पर 'कोस मीनार' बनवाना, यात्रियों के आराम के लिए खूब सारी सरायें बनवाना एक सम्राट की उदार सोच थी।
ज्ञात अज्ञात इतिहास में दक्षिण एशिया की यह सबसे बड़ी सड़क आम जनता के लिए पूरी की पूरी कभी नहीं रुकी।
बस यूँ ही ख्याल आया कि जिन्दगी कितना कुछ इन सड़कों जैसी ही है। ' मुट्ठी भर बाजरे' के लोभ चक्कर में अक्सर हम अक्सर सोने के महल गवां देते हैं।
ये पत्थर गड़े मकानों को हम खुद अपना मानते है पर असल में ये जिन्दगी की सड़क पर बनी सरायें हैं। जिन्दगी की राहों में दर्रे, नदियां, पहाड़ सब आते हैं, थोड़ा विश्राम कर इन सब को पार कर आगे बढ़ना होता है।
वक्त के साथ 'उत्तरापथ' नाम की सड़क 'बादशाही सड़क' के नाम से मशहूर हुई। अंग्रेजों ने उसका नाम 'ग्रांड ट्रंक रोड' कर दिया और थोड़ा और वक्त बदला उसका नाम आज 'नेशनल हाईवे' हो गया। आगे का भी अब कोई भरोसा नहीं कि यही रहेगा। यह भी कोई स्थापित सत्य नहीं है कि ये 'जीवन की नदियां' कहलाने वाली रोड कभी नहीं रुकती।
जैसे सड़क के किनारे लगे पेड़ों के नीचे बैठकर हम थोड़ा सुस्ताते है, आगे का नक्सा देखते है, पोटली से ठंडा पानी पीते है और उस उर्जा पाकर रास्ते पर फिर से आगे बढ़ जाते है बस ऐसा ही कुछ वक्त अभी चल रहा है।
लेखक
अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य,
लक्की इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
वक्त बहुत तेजी से बदलता है फिर वो वक्त अच्छा हो या बुरा। एक अनन्त यात्रा है जिन्दगी। ई. पूर्व के उस जमाने में चंद्रगुप्त मौर्य ने जनता को 'उत्तरापथ' नाम रखकर जनता को एक सड़क की सौगात दी थी। 1542 ई. में फरीद खान उपनाम 'शेरशाह सूरी' ने जनता के लिए दरियादिली दिखाते हुए प्राचीन 'उत्तरापथ' कहलाने वाली सड़क को सुधरवाया और 'सड़क-ए-आजम' या 'बादशाही सड़क' के नाम से पुनर्निर्माण करवाया। पश्चिम में अफगानिस्तान के काबुल से लेकर बांग्लादेश के चटगांव तक 2500 किलोमीटर यह सड़क आज भी भारत की प्राणरेखा मानी जाती है।
16 वीं सदी में पक्की सड़क बनवाना, पेड़ लगवाना, हर कोस पर 'कोस मीनार' बनवाना, यात्रियों के आराम के लिए खूब सारी सरायें बनवाना एक सम्राट की उदार सोच थी।
ज्ञात अज्ञात इतिहास में दक्षिण एशिया की यह सबसे बड़ी सड़क आम जनता के लिए पूरी की पूरी कभी नहीं रुकी।
बस यूँ ही ख्याल आया कि जिन्दगी कितना कुछ इन सड़कों जैसी ही है। ' मुट्ठी भर बाजरे' के लोभ चक्कर में अक्सर हम अक्सर सोने के महल गवां देते हैं।
ये पत्थर गड़े मकानों को हम खुद अपना मानते है पर असल में ये जिन्दगी की सड़क पर बनी सरायें हैं। जिन्दगी की राहों में दर्रे, नदियां, पहाड़ सब आते हैं, थोड़ा विश्राम कर इन सब को पार कर आगे बढ़ना होता है।
वक्त के साथ 'उत्तरापथ' नाम की सड़क 'बादशाही सड़क' के नाम से मशहूर हुई। अंग्रेजों ने उसका नाम 'ग्रांड ट्रंक रोड' कर दिया और थोड़ा और वक्त बदला उसका नाम आज 'नेशनल हाईवे' हो गया। आगे का भी अब कोई भरोसा नहीं कि यही रहेगा। यह भी कोई स्थापित सत्य नहीं है कि ये 'जीवन की नदियां' कहलाने वाली रोड कभी नहीं रुकती।
जैसे सड़क के किनारे लगे पेड़ों के नीचे बैठकर हम थोड़ा सुस्ताते है, आगे का नक्सा देखते है, पोटली से ठंडा पानी पीते है और उस उर्जा पाकर रास्ते पर फिर से आगे बढ़ जाते है बस ऐसा ही कुछ वक्त अभी चल रहा है।
लेखक
अर्जुन सिंह साँखला
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लक्की इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
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सबके काम की बात है,पूरा पढ़ें
☛ 21 Days 🔐 में
#सीखो 🙋🏻♂️ #खेलो 🏹 #जीतो 🏆
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प्रिय स्नेहीजन,
#कोरोना_वायरस से भारत को बचाने के लिए 21 दिन का #लॉकडाउन हुआ है इस अवधि में घर बैठे ज्ञानवर्धक मनोरंजन के उद्देश्य से #डिजिटल_शिक्षा में कम समय में ही पूरे भारत में ख्याति अर्जित कर चुके 𝗨𝗧𝗞𝗔𝗥𝗦𝗛 𝗔𝗽𝗽
में 𝗕𝗛𝗔𝗥𝗔𝗧 𝗞𝗢 𝗝𝗔𝗔𝗡𝗢 प्रतियोगिता प्रारंभ की गई है। इस प्रतियोगिता के उद्देश्य की पूर्ति का अनुमान इस बात से भी लगाया जा सकते है कि इससे सम्बंधित तीनों वीडियो यूट्यूब पर 𝑻𝒐𝒑 𝑻𝒓𝒆𝒏𝒅𝒊𝒏𝒈 लिस्ट 🔥 में जगह बनाये हुए हैं।
☛ यह एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड ही है कि किसी भी एजुकेशनल चैनल के 3 वीडियोज एक साथ #यूट्यूब पर 𝑻𝒐𝒑 𝑻𝒓𝒆𝒏𝒅 🔥कर रहे हों।
☛ 𝗕𝗛𝗔𝗥𝗔𝗧 𝗞𝗢 𝗝𝗔𝗔𝗡𝗢 , समसामयिकी ज्ञान-विज्ञान व धर्म-संस्कृति पर आधारित एक प्रतियोगिता है, जो 𝗨𝗧𝗞𝗔𝗥𝗦𝗛 𝗔𝗽𝗽
पर सभी के लिए #Free में उपलब्ध है।
☛ 𝗕𝗛𝗔𝗥𝗔𝗧 𝗞𝗢 𝗝𝗔𝗔𝗡𝗢 प्रतियोगिता के बारे में आपके कुछ सामान्य प्रश्नों के जवाब
✅ हम इस प्रतियोगिता में भाग कैसे ले पाएंगे ?
- 𝗨𝗧𝗞𝗔𝗥𝗦𝗛 𝗔𝗽𝗽 Play Store व App Store से डाउनलोड करके रजिस्ट्रेशन करने के बाद इस लिंक पर क्लिक करें - https://utkarshapp.page.link/6csNnHpJqyVSU1FT8
( ध्यान रहे लिंक पर क्लिक करने के बाद आप उत्कर्ष ऐप में इस ईबुक की इंडेस्क्स को रिफ्रेश जरूर करते रहें ताकि Latest Test आपको वहां Show हो सके )
✅ रोजाना एक टेस्ट होगा जिसको आप रात्रि 12 बजे से सायं 6 बजे तक कभी भी 50 प्रश्नों के एक सामान्य टेस्ट को 30 मिनिट का समय निकालकर दे सकते हैं।
✅ विजेता कौन व कैसे निर्धारित होंगे ?
- प्रतिदिन 100 विजेता होंगे , जिन्हें ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया (रोजाना सायं 7 बजे उत्कर्ष क्लासेस के फेसबुक पेज व यू्ट्यूब चैनल पर लाईव) से चयनित किया जाएगा।
( इस Daily Test में 50 प्रतिशत या इससे अधिक अंक अर्जित करने वाले सभी प्रतिभागी ऑनलाइन लॉटरी के लिए पात्र होंगे)
✅ विजेताओं को पुरुस्कार स्वरूप क्या मिलेगा ?
- प्रतिदिन सभी 100 विजेताओं को 500-500 रुपये की राशि उनके बैंक खाते में जमा करवाई जाएगी।
( बैंक खाता जानकारी विजेताओं को SMS के माध्यम से फॉर्म भरवाकर ली जाएगी)
☛ यह बताते हुए मैं बहुत हर्ष का अनुभव कर रहा हूँ कि 𝗕𝗛𝗔𝗥𝗔𝗧 𝗞𝗢 𝗝𝗔𝗔𝗡𝗢 प्रतियोगिता इन दिनों भारत की जनता के लिए भारत के बारे में सामान्य ज्ञान-विज्ञान, धर्म-संस्कृति की जानकारी के साथ-साथ पूरे परिवार के लिए मनोरंजन का भी एक प्रमुख साधन बन गया है क्योंकि इस प्रतियोगिता के दौरान प्रतिदिन रात्रि 7 बजे मैं स्वयं इस प्रतियोगिता के सभी 50 प्रश्नों का विस्तृत हल लेकर 𝙐𝙏𝙆𝘼𝙍𝙎𝙃 𝘾𝙇𝘼𝙎𝙎𝙀𝙎 𝙅𝙊𝘿𝙃𝙋𝙐𝙍 के #Youtube चैनल पर आप सभी से लाइव रूबरू होता हूँ।
☞ इस प्रतियोगिता के सम्बंध में अपने सुझाव/विचार हमें prizequiz@utkarsh.com पर मेल करें।
☞ 𝗕𝗛𝗔𝗥𝗔𝗧 𝗞𝗢 𝗝𝗔𝗔𝗡𝗢 प्रतियोगिता का आपका और आपके परिवार का अनुभव-कथन का 2 मिनट तक का वीडियो आप हमें 9509936601 पर व्हाट्सएप्प भी कर सकते हैं ।
( कुछ चयनित व सबसे बेहतरीन वीडियो प्रतिदिन सायं 7:30 बजे लाइव के दौरान यूट्यूब पर चलाई जाएगी।)
☛ आशा करता हूँ आप सभी #𝘓𝘰𝘤𝘬𝘋𝘰𝘸𝘯 के इन चुनौतीपूर्ण दिनों में घर पर ही हैं और रहेंगे...साथ ही पूरे परिवार सहित उत्कर्ष की 𝗕𝗛𝗔𝗥𝗔𝗧 𝗞𝗢 𝗝𝗔𝗔𝗡𝗢 प्रतियोगिता में जरूर भाग ले लेंगे व अपना ज्ञानात्मक मनोरंजन करेंगे।
तो इंतजार किस बात का ? क्लिक करें इस लिंक को व आज का टेस्ट देवें - https://utkarshapp.page.link/6csNnHpJqyVSU1FT8
☛ रोजाना कई पोस्ट आप शेयर/फोरवर्ड करते हैं,यकीन मानिए यह पोस्ट जिसके पास भेजेंगे वह आपको दिल से धन्यवाद देगा
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- निर्मल गहलोत 'उत्कर्ष'
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- निर्मल गहलोत 'उत्कर्ष'
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भारत को जानो - All India Test Series
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उत्कर्ष द्वारा UTKARSH App पर आयोजित 𝗕𝗛𝗔𝗥𝗔𝗧 𝗞𝗢 𝗝𝗔𝗔𝗡𝗢 प्रतियोगिता के Test-3( 31.03.2020 ) के सभी भाग्यशाली विजेताओं को उत्कर्ष परिवार की ओर से बधाई और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं💐
Test-3 के 100 lucky Winners की सूची 👇🏻
Test-3 के 100 lucky Winners की सूची 👇🏻
प्यारे साथियों
📢 Kumar Gaurav Sir Is Back
फूल पत्ती के 5 सवाल के साथ
कल सुबह 5 बजे ✅👇🏻
Link:- https://youtu.be/xTG5uR9ANss
📢 Kumar Gaurav Sir Is Back
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कल सुबह 5 बजे ✅👇🏻
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Daily Current Affairs #212/02 April 2020/Current Affairs In Hindi and English/GK Today by Umesh Sir : https://utkarshapp.page.link/yH92
E-Utkarsh
Utkarsh - Daily YouTube Live Classes (April Month)
Next-gen learning platform which offers Smart eBooks and Online courses(with printed notes,class notes,offline class videos) for competitive exams such as IAS | RAS | SCHOOL LECTURER | TEACHER GRADE 2 | REET LEVEL 1 & 2 | SI | PATWAR | GRAMSEVAK | CONSTABLE…
02_अप्रैल,_2020_दैनिक_सामयिकी_All_Exams.pdf
5.2 MB
02 अप्रैल, 2020 दैनिक सामयिकी (All Exams).pdf
आपने निर्मल सर को बना दिया ट्रेंडिंग गुरू 📣
🇮🇳 भारत को जानो 🇮🇳
कल की क्लास भी ट्रेंडिंग (Trending #11 ) में है।चार क्लास ली है अब तक व चारों की चारों क्लास ट्रेंडिंग में।आज भी YouTube के टॉप-50 विडियो में आपके भाई के 3 विडियो #Trending में चल रहे हैं,जो अत्यधिक दुर्लभ होता है।इतने स्नेह व विश्वास के लिए दिल की गहराईयों से आपका व खासतौर से आपके परिवारजनों का हार्दिक आभार।आपने तो हीरो बना दिया यार 😔🙏
- निर्मल गहलोत ‘उत्कर्ष’
🇮🇳 भारत को जानो 🇮🇳
कल की क्लास भी ट्रेंडिंग (Trending #11 ) में है।चार क्लास ली है अब तक व चारों की चारों क्लास ट्रेंडिंग में।आज भी YouTube के टॉप-50 विडियो में आपके भाई के 3 विडियो #Trending में चल रहे हैं,जो अत्यधिक दुर्लभ होता है।इतने स्नेह व विश्वास के लिए दिल की गहराईयों से आपका व खासतौर से आपके परिवारजनों का हार्दिक आभार।आपने तो हीरो बना दिया यार 😔🙏
- निर्मल गहलोत ‘उत्कर्ष’
"हमने ऐसे जीना उस खेजड़ी से सीखा है"
बाबा नागार्जुन की एक कविता की ये अग्रिम पंक्तियां मुझे बहुत प्यारी लगती है। हालांकि मेरी सलाह है कि एक बार आपको उनकी पूरी कविता पढ़नी चाहिए।
"जो नहीं हो सके पूर्ण काम
मैं उनको करता हूँ प्रणाम"
अभावों के दौर का वो बचपन याद करता हूँ तो रोमांचित हो जाता हूँ। जब हर घाव का ईलाज पेड़ की छाल के उस 'घासे' से हो जाता था। यहाँ तक कि पेट का दर्द भी 'घासे' को पानी में मिलाकर पिलाने से दूर होता था। भैंस के पास खड़े खड़े धारोष्ण दूध को हमने वर्षों तक पिया। गाँव के तालाबों पर मटमैले पानी को कई बार पालतू मवेशियों के साथ पिया था।
स्कूल में गुड़ रोटी का टिफ़िन भी बड़े नाज़ से 'आधी छुट्टी' में स्कूल के पीछे इमली के पेड़ के सबसे ऊँचे डालों पर बैठकर खाया है।
घर का सबसे बड़ा 'मिष्ठान्न' शक्कर का एक डिब्बा होता था जिसमें से चोरी करके शक्कर खाया करते थे।
दादी ने नीम के कई प्रयोगों से सैकड़ों मर्ज ठीक किये थे। खेजड़ी के खोखों, प्याज, लहसुन और 'दूध के बफारों' से कई बार कई रोगों का ईलाज हो जाया करता था। घाव पर बीड़ी पत्ता और आक का दूध लगाकर उसके ठीक हो जाने को लेकर शत प्रतिशत आश्वस्त हो जाते थे।
हर मौहल्ले में एक नस चटकाने वाले मामा, हड्डी ठीक करने वाली दादी, झाड़ा देने वाली 'भू', आँख से फूस निकालने वाले काका और 'गोला पेचुटी' ठीक करने वाली दादी होती थी।
अपने खेतों में खेजड़ी के नीचे सोते सोते कई बार सोचा है। ये भयंकर अकाल में भी सूखती क्यों नहीं है? बडेरों ने बताया "इसकी जड़ें पाताल लोक तक जाती है इसलिए यह कभी नहीं सूखती" हमने ऐसे पेड़ की छांव में अपने अस्तित्व को संभालना सीखा जो कभी हारता नहीं है। जिसकी जड़ों को इस दुनियां का कोई तूफान आज तक नहीं उखाड़ पाया।
हमने रेत के बवंडरों में किरकिरी को रोटी के साथ खाया है। हमने खुशियों की तलाश जो कुछ था उसी में किया। हमने खेत के धोरों पर उगाए धनिये और पुदीने की खुशबू में नशा ढूंढा है। छाछ पर भुरकाया जीरा हमारी सबसे बड़ी 'लक्ज़री' थी।
नहा कर धूप में शरीर सुखाते थे। रईसी ऐसी मानों सूरज को नौकर रखा हुआ हो। बिना खिलौने के 'पकङ्म्पकडायी' के खेलों ने इतना हँफ़ाया की आज भी स्पन्दित जीवन में उसकी ताजगी फेंफड़ों में महसूस होती है।
ऐसे जीवन से हमने जीवन को हृदय की कोमलता से कठोर बनाया है और शरीर की कठोरता से हृदय को कोमल रखा है।
जीवन के 14 वर्ष कठोरता से बिताने वाले भगवान राम के बारे में भवभूति की उत्तररामचरितम् में कहा गया है।
वज्रादपि कठोराणि मृदुनि कुसुमादपि।
लोकोत्तराणाम् चेतांसि को नु विज्ञातुमर्हति।।
महापुरुषों के वज्र से भी कठोर तथा पुष्प से भी कोमल हृदयों को भला कौन जान सकता है।
ऐसे ही अलौकिक महापुरुष भगवान राम के प्राकट्य दिवस पर भावों की एक वन्दन माला मेरे मानस पर उतरे उनके चित्र को समर्पित।
लेखक
अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य,
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बाबा नागार्जुन की एक कविता की ये अग्रिम पंक्तियां मुझे बहुत प्यारी लगती है। हालांकि मेरी सलाह है कि एक बार आपको उनकी पूरी कविता पढ़नी चाहिए।
"जो नहीं हो सके पूर्ण काम
मैं उनको करता हूँ प्रणाम"
अभावों के दौर का वो बचपन याद करता हूँ तो रोमांचित हो जाता हूँ। जब हर घाव का ईलाज पेड़ की छाल के उस 'घासे' से हो जाता था। यहाँ तक कि पेट का दर्द भी 'घासे' को पानी में मिलाकर पिलाने से दूर होता था। भैंस के पास खड़े खड़े धारोष्ण दूध को हमने वर्षों तक पिया। गाँव के तालाबों पर मटमैले पानी को कई बार पालतू मवेशियों के साथ पिया था।
स्कूल में गुड़ रोटी का टिफ़िन भी बड़े नाज़ से 'आधी छुट्टी' में स्कूल के पीछे इमली के पेड़ के सबसे ऊँचे डालों पर बैठकर खाया है।
घर का सबसे बड़ा 'मिष्ठान्न' शक्कर का एक डिब्बा होता था जिसमें से चोरी करके शक्कर खाया करते थे।
दादी ने नीम के कई प्रयोगों से सैकड़ों मर्ज ठीक किये थे। खेजड़ी के खोखों, प्याज, लहसुन और 'दूध के बफारों' से कई बार कई रोगों का ईलाज हो जाया करता था। घाव पर बीड़ी पत्ता और आक का दूध लगाकर उसके ठीक हो जाने को लेकर शत प्रतिशत आश्वस्त हो जाते थे।
हर मौहल्ले में एक नस चटकाने वाले मामा, हड्डी ठीक करने वाली दादी, झाड़ा देने वाली 'भू', आँख से फूस निकालने वाले काका और 'गोला पेचुटी' ठीक करने वाली दादी होती थी।
अपने खेतों में खेजड़ी के नीचे सोते सोते कई बार सोचा है। ये भयंकर अकाल में भी सूखती क्यों नहीं है? बडेरों ने बताया "इसकी जड़ें पाताल लोक तक जाती है इसलिए यह कभी नहीं सूखती" हमने ऐसे पेड़ की छांव में अपने अस्तित्व को संभालना सीखा जो कभी हारता नहीं है। जिसकी जड़ों को इस दुनियां का कोई तूफान आज तक नहीं उखाड़ पाया।
हमने रेत के बवंडरों में किरकिरी को रोटी के साथ खाया है। हमने खुशियों की तलाश जो कुछ था उसी में किया। हमने खेत के धोरों पर उगाए धनिये और पुदीने की खुशबू में नशा ढूंढा है। छाछ पर भुरकाया जीरा हमारी सबसे बड़ी 'लक्ज़री' थी।
नहा कर धूप में शरीर सुखाते थे। रईसी ऐसी मानों सूरज को नौकर रखा हुआ हो। बिना खिलौने के 'पकङ्म्पकडायी' के खेलों ने इतना हँफ़ाया की आज भी स्पन्दित जीवन में उसकी ताजगी फेंफड़ों में महसूस होती है।
ऐसे जीवन से हमने जीवन को हृदय की कोमलता से कठोर बनाया है और शरीर की कठोरता से हृदय को कोमल रखा है।
जीवन के 14 वर्ष कठोरता से बिताने वाले भगवान राम के बारे में भवभूति की उत्तररामचरितम् में कहा गया है।
वज्रादपि कठोराणि मृदुनि कुसुमादपि।
लोकोत्तराणाम् चेतांसि को नु विज्ञातुमर्हति।।
महापुरुषों के वज्र से भी कठोर तथा पुष्प से भी कोमल हृदयों को भला कौन जान सकता है।
ऐसे ही अलौकिक महापुरुष भगवान राम के प्राकट्य दिवस पर भावों की एक वन्दन माला मेरे मानस पर उतरे उनके चित्र को समर्पित।
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अर्जुन सिंह साँखला
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NIRMAL SIR IS LIVE NOW..🎥
आज के इस लाइव सेशन में निर्मल सर Test-5 के सभी 50 प्रश्नों का विस्तृत हल बताएंगे और साथ ही ऑनलाइन Test-4 Live लॉटरी के माध्यम से 100 लकी विजेताओं की घोषणा भी करेंगे।
Link:- https://youtu.be/0b45QdbRkDI
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प्रिय अभ्यर्थियों,
कोरोना का प्रभाव, कभी नहीं ला पायेगा आपकी तैयारी में अभाव
बस यही हमारा प्रयास, कि आप पहुंचे अपनी मंजिल के और पास
विश्व में कोरोना के प्रभाव के चलते एक संकट का दौर चल रहा है। लेकिन हर रात का एक सवेरा होता ही है। दिनांक 8 अप्रैल को हनुमान जयन्ती है। हमारी मान्यताओं में हनुमान जी संकटमोचक के रूप में जाने जाते है और हम उम्मीद करते हैं कि जल्दी ही ये संकट दूर होगा।
लॉकडाउन के इस दौर में प्रतिभागी अभी कई परीक्षाओं की घर बैठे जमकर तैयारी कर रहे हैं। फेसबुक , यूट्यूब व ईमेल के माध्यम लगातार संदेश मिल रहे है कि अभी वे सभी घर बैठे पढ़ना चाह रहे हैं उनके लिए एक दिन का ऑफर लेकर आए हैं क्योंकि आपका उत्कर्ष इन संकट के दिनों में है आपके साथ ।
हनुमान जयंती पर अब सारे संकट दूर होंगे। क्योंकि उत्कर्ष ऐप के सभी ऑनलाइन कोर्सेज पर अविश्वसनीय भारी छूट!
मात्र एक दिन (8 अप्रैल) के लिए 85% तक की #महाछूट!
अधिक जानकारी के लिए जुड़े रहें।
प्रिय अभ्यर्थियों,
कोरोना का प्रभाव, कभी नहीं ला पायेगा आपकी तैयारी में अभाव
बस यही हमारा प्रयास, कि आप पहुंचे अपनी मंजिल के और पास
विश्व में कोरोना के प्रभाव के चलते एक संकट का दौर चल रहा है। लेकिन हर रात का एक सवेरा होता ही है। दिनांक 8 अप्रैल को हनुमान जयन्ती है। हमारी मान्यताओं में हनुमान जी संकटमोचक के रूप में जाने जाते है और हम उम्मीद करते हैं कि जल्दी ही ये संकट दूर होगा।
लॉकडाउन के इस दौर में प्रतिभागी अभी कई परीक्षाओं की घर बैठे जमकर तैयारी कर रहे हैं। फेसबुक , यूट्यूब व ईमेल के माध्यम लगातार संदेश मिल रहे है कि अभी वे सभी घर बैठे पढ़ना चाह रहे हैं उनके लिए एक दिन का ऑफर लेकर आए हैं क्योंकि आपका उत्कर्ष इन संकट के दिनों में है आपके साथ ।
हनुमान जयंती पर अब सारे संकट दूर होंगे। क्योंकि उत्कर्ष ऐप के सभी ऑनलाइन कोर्सेज पर अविश्वसनीय भारी छूट!
मात्र एक दिन (8 अप्रैल) के लिए 85% तक की #महाछूट!
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