प्रिय अभ्यर्थियों,
21 दिवसीय देशव्यापी लॉकडाउन के कारण आपकी तैयारी बाधित न हो इसके लिए उत्कर्ष एप आपके साथ है।
#StayAtHome #StudyAtHome
आज ही अपना मनपसन्द कोर्स खरीदें
और लगभग 85% तक की बचत करें।
उत्कर्ष ऐप के संग , अपने सपनों को साकार करें।
Video link:- https://youtu.be/gSbLtrEjquk
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Study Online At Home in LockDown Days | नवरात्रि महाबचत धमाका | Up to 85% OFF | Utkarsh App
प्रिय अभ्यर्थियों,
21 दिवसीय देशव्यापी लॉकडाउन के कारण आपकी तैयारी बाधित न हो इसके लिए उत्कर्ष एप आपके साथ है।
#StayAtHome #StudyAtHome
इस वीडियो में आप जानेंगे उत्कर्ष ऐप के ऑनलाइन कोर्सेज के विशेष फीचर्स और #NavRatri_MahaBachat_Dhamaka के बारें में…
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Lock Down है ? घर में रहें
उत्कर्ष ऐप के साथ तैयारी करते रहें 👇🏻
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क्या आप और आपके परिवारजन 21 दिन तक घर में रहकर कोरोना के विरुद्ध लड़ाई में देश के साथ है?
Anonymous Poll
97%
बिल्कुल 100 % साथ है।
2%
बिल्कुल नहीं है।
1%
कभी हैं कभी नहीं।
https://youtu.be/CVFrRqY4Yz4
☑#CurrentAffairs तथा #StaticGK का बेहतरीन संगम : एक नवीन ऊर्जा के साथ
प्यारे साथियों ,
दिए गए लिंक पर क्लिक करके जल्दी आजाओ
आज की समसामयिकी की क्लास प्रारम्भ हो चुकी है☺
उत्कर्ष की करंट अफेयर्स की क्लास क्यों है परीक्षा के लिए रामबाण ?
👉🏻 केवल परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण समाचारों , मुद्दों और तथ्यों का समावेश
👉🏻 ग्राफ़िक्स और माइंड मैप्स की सहायता से समझाना।
👉🏻 मोटिवेशन वाक्य के साथ ऊर्जा से भरपूर सेशन
👉🏻 बीते कल की क्लास का महत्वपूर्ण रिवीजन
🔄 जल्दी से फेसबुक और व्हाट्सएप के सभी ग्रुप्स और मित्रों के साथ शेयर कीजिए इस क्लास को
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Daily Current Affairs #207/27 March 2020/Current Affairs In Hindi & English/GK Today by Umesh Sir
प्रिय मित्रों‚
प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्न पत्र में समसामयिकी यानि करेंट अफेयर्स का विशेष महत्त्व होता है । इसी को ध्यान में रखते हुए दैनिक समसामयिकी का विस्तृत कवरेज करने वाली डेली करंट अफेयर्स (#Daily_Current_GK_by_Utkarsh ) की यह शृंखला शुरू…
प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्न पत्र में समसामयिकी यानि करेंट अफेयर्स का विशेष महत्त्व होता है । इसी को ध्यान में रखते हुए दैनिक समसामयिकी का विस्तृत कवरेज करने वाली डेली करंट अफेयर्स (#Daily_Current_GK_by_Utkarsh ) की यह शृंखला शुरू…
27_मार्च,_2020_दैनिक_सामयिकी_All_Exams.pdf
5.4 MB
27 मार्च, 2020 दैनिक सामयिकी (All Exams).pdf
Utkarsh Classes
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार वर्तमान में भारत में कोरोना से संक्रमित लोगों की सर्वाधिक संख्या किस राज्य में है?
कल के प्रश्न का उत्तर - भारत में कोरोना महामारी के सर्वाधिक संक्रमित व्यक्ति महाराष्ट्र में है।
समझे नक्शे से, किस राज्य में कितने संक्रमित व्यक्ति है ।
समझे नक्शे से, किस राज्य में कितने संक्रमित व्यक्ति है ।
कोरोना महामारी के मद्देनजर "प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना" के तहत कितनी राशि के पैकेज को मंजूरी प्रदान की गई है ?
Anonymous Quiz
26%
3.5 लाख करोड़
57%
1.7 लाख करोड़
11%
2.6 लाख करोड़
7%
1.3 लाख करोड़
#सबसे_बड़ा_धमाका 📣
“21 दिनों तक घर में रहो,घर में रहो व सिर्फ एक ही काम करो कि घर में ही रहो”
क्यों रहो घर पर यह प्रधानमंत्री जी व मुख्यमंत्री जी ने बहुत डिटेल में समझा दिया।
#घर_में_रहकर_क्या_करो ?
यह आपको आज रात 8 बजे निर्मल गहलोत बतायेगा 😊
कल से लॉकडाउन की अवधि समाप्त होने तक घर में आपको आपके पूरे परिवार सहित व्यस्त रखकर #सीखने_खेलने_जीतने का गौरवशाली अवसर देने वाला हूँ।पूरे 5 दिन-रात मैने व मेरी टीम ने इस पर तैयारी की है।ऐसी धमाकेदार योजना व आईडिया लेकर आउंगा कि आपके मुँह से निकलेगा कि “वाह ,#मजा आ गया” ।
तो क्या आप तैयार हैं आज रात 8 बजे विस्तार से जानने के लिए ?
“21 दिनों तक घर में रहो,घर में रहो व सिर्फ एक ही काम करो कि घर में ही रहो”
क्यों रहो घर पर यह प्रधानमंत्री जी व मुख्यमंत्री जी ने बहुत डिटेल में समझा दिया।
#घर_में_रहकर_क्या_करो ?
यह आपको आज रात 8 बजे निर्मल गहलोत बतायेगा 😊
कल से लॉकडाउन की अवधि समाप्त होने तक घर में आपको आपके पूरे परिवार सहित व्यस्त रखकर #सीखने_खेलने_जीतने का गौरवशाली अवसर देने वाला हूँ।पूरे 5 दिन-रात मैने व मेरी टीम ने इस पर तैयारी की है।ऐसी धमाकेदार योजना व आईडिया लेकर आउंगा कि आपके मुँह से निकलेगा कि “वाह ,#मजा आ गया” ।
तो क्या आप तैयार हैं आज रात 8 बजे विस्तार से जानने के लिए ?
LOCKDOWN 🔐 SPECIAL
आज रात 8 बजे मैं YouTube & Facebook पर आपसे लाईव रूबरू होकर लॉकडाउन के दौरान घर बैठकर परिवार सहित सीखने,खेलने व जीतने का सुनहरा अवसर लेकर आने वाला हूं।आपके क्या लगता है ?
आज रात 8 बजे मैं YouTube & Facebook पर आपसे लाईव रूबरू होकर लॉकडाउन के दौरान घर बैठकर परिवार सहित सीखने,खेलने व जीतने का सुनहरा अवसर लेकर आने वाला हूं।आपके क्या लगता है ?
Anonymous Poll
89%
Yes Sir Hame Believe he ki Aaj aap koi bada dhamaka karne vale ho.
11%
Koi Dhamaka Nahi hoga...Khodenge pahad niklegi chuhiya.
Utkarsh Classes pinned «LOCKDOWN 🔐 SPECIAL
आज रात 8 बजे मैं YouTube & Facebook पर आपसे लाईव रूबरू होकर लॉकडाउन के दौरान घर बैठकर परिवार सहित सीखने,खेलने व जीतने का सुनहरा अवसर लेकर आने वाला हूं।आपके क्या लगता है ?»
आज रात 8 बजे मैं YouTube & Facebook पर आपसे लाईव रूबरू होकर लॉकडाउन के दौरान घर बैठकर परिवार सहित सीखने,खेलने व जीतने का सुनहरा अवसर लेकर आने वाला हूं।आपके क्या लगता है ?»
"हज़ारों वर्ष पहले भारत ने चीन को संक्रमित किया था: लेकिन संक्रमण अच्छा था"
पाँचवी और सांतवी शताब्दी में क्रमशः तीन चीनी यात्री भारत आये थे फाहियान, ह्वेनसांग एवं इत्सिंग। ये सभी भारतवासियों की रीति-नीति तथा उनकी प्रथा परिपाटियों तथा शिक्षा की जानकारी लेने भारत आये थे। वर्षों की कठिन पैदल यात्रा से ये भारत पहुँचे थे और पुनः चीन जाकर उन्होंने बौद्ध धर्म एवं यहाँ की शिक्षा व्यवस्था का वर्णन किया तो उसके बाद यहाँ चीनी यात्रियों की बाढ़ सी आ गयी।
पाटलिपुत्र के बौद्ध विहारों में तीन वर्ष रहकर फाहियान ने संस्कृत लिखना-पढ़ना सीखा तथा अनेक संस्कृत ग्रंथों का अध्ययन किया। पाटलिपुत्र, वैशाली, कुशीनगर, वाराणसी, चंपा, गया जैसे अनेक शिक्षा केन्द्र थे। यहाँ की सामाजिक व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था देखकर फाहियान की आँखे फटी की फटी रह गयी थी।
जब भारत में सम्राट हर्षवर्धन का आधिपत्य था। भारत तक पहुँचने की उसकी 16 वर्षों की कठिन यात्रा में उसे बहुत कठिनाइयां झेलनी पड़ी। घने जंगलों गगनचुंबी हिममंडित चोटियों तथा जलहीन तप्त मरुभूमियों आदि को पार करता हुआ वह भारत पहुंच सका था। मार्ग में उसे 5 दिन-रात तो पानी की एक बूंद भी पीने को नहीं मिली।
नालंदा विश्वविद्यालय में कई वर्ष विद्यार्थी के रूप में उसने व्यतीत किये और यहीं से धर्माचार्य की उपाधि प्राप्त की तथा विश्वविद्यालय का उपकुलपति नियुक्त हुआ। उस समय भारत बौद्ध और ब्राह्मण शिक्षा का प्रमुख केन्द्र था। उस वक्त भारत में बहुत बड़ी संख्या में शिक्षा के केन्द्र थे। नालन्दा में 10000 से अधिक छात्र और आचार्य थे।
उस समय नालन्दा विश्वविख्यात था। नालन्दा ग्राम महावीर तथा बुद्ध दोनों ही का प्रिय पात्र था। जैन धर्म ग्रंथों के अनुसार महावीर ने यहां 14 वर्षा ऋतुएं व्यतीत की थी। स्वयं भगवान बुद्ध ने नालंदा के वन में रहकर कई बार धर्म का उपदेश दिया था। नालन्दा में दिन ही नहीं देर रात तक अध्ययन अध्यापन चलता रहता था।
शिक्षक और शिक्षित का पारस्परिक व्यवहार इतना अच्छा था कि विश्वविद्यालय के 700 वर्ष के इतिहास में एक भी उदाहरण ऐसा नहीं मिलता है जिसमें छात्रों की ओर से शिक्षकों के प्रति किसी प्रकार की अवज्ञा अथवा अवहेलना हुई हो। पुस्तकालयों में लाखों अद्भुत पुस्तकें थी।
विश्वविद्यालय के प्रमुख द्वार पर द्वार पंडित नियुक्त थे जिनका कार्य था विश्वविद्यालय में प्रवेश करने वाले विद्यार्थियों की जांच करना। वस्तुतः ये द्वार पंडित विश्वविद्यालय की विद्वता के संरक्षक थे।
इत्सिंग को भारत यात्रा की प्रेरणा ह्वेनसांग से ही प्राप्त हुई। अपने साथियों के आगे पीछे होने से इत्सिंग कुछ ढीला सा हो रहा था किंतु ह्वेनसांग ने उसे उत्साहित किया और कहा "निश्चिंतता पूर्वक पुण्य भूमि के दर्शन करो" उसने समुद्र मार्ग से भारत के लिए 691 में प्रस्थान किया। सुमात्रा होते हुए वह भारत आया तथा नालन्दा में 10 वर्ष रहकर उसने यहाँ का अलौकिक ज्ञान का भंडार प्राप्त किया।
इन तीनों चीनी यात्रियों ने भारत से इतना पाया कि उन्हें लगा वे धरती पर किसी स्वर्गमयी भूमि पर रहे हो।
और इस प्रकार भारत से प्राप्त ज्ञान अणुओं का संक्रमण पूरे चीन एवं वहाँ से विश्वभर में फैल गया।
फिर सदियों बाद उस चीन से एक विषाणु निकला जिसने विश्वभर को संक्रमित कर दिया।
भारत ने सदैव अच्छाई का 'संक्रमण' विश्वभर में किया है।
इसी कारण यजुर्वेद में भारतीय संस्कृति के लिए कहा गया है "सा संस्कृति या विश्ववारा"
लेखक
अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य
लक्की इंस्टिट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
पाँचवी और सांतवी शताब्दी में क्रमशः तीन चीनी यात्री भारत आये थे फाहियान, ह्वेनसांग एवं इत्सिंग। ये सभी भारतवासियों की रीति-नीति तथा उनकी प्रथा परिपाटियों तथा शिक्षा की जानकारी लेने भारत आये थे। वर्षों की कठिन पैदल यात्रा से ये भारत पहुँचे थे और पुनः चीन जाकर उन्होंने बौद्ध धर्म एवं यहाँ की शिक्षा व्यवस्था का वर्णन किया तो उसके बाद यहाँ चीनी यात्रियों की बाढ़ सी आ गयी।
पाटलिपुत्र के बौद्ध विहारों में तीन वर्ष रहकर फाहियान ने संस्कृत लिखना-पढ़ना सीखा तथा अनेक संस्कृत ग्रंथों का अध्ययन किया। पाटलिपुत्र, वैशाली, कुशीनगर, वाराणसी, चंपा, गया जैसे अनेक शिक्षा केन्द्र थे। यहाँ की सामाजिक व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था देखकर फाहियान की आँखे फटी की फटी रह गयी थी।
जब भारत में सम्राट हर्षवर्धन का आधिपत्य था। भारत तक पहुँचने की उसकी 16 वर्षों की कठिन यात्रा में उसे बहुत कठिनाइयां झेलनी पड़ी। घने जंगलों गगनचुंबी हिममंडित चोटियों तथा जलहीन तप्त मरुभूमियों आदि को पार करता हुआ वह भारत पहुंच सका था। मार्ग में उसे 5 दिन-रात तो पानी की एक बूंद भी पीने को नहीं मिली।
नालंदा विश्वविद्यालय में कई वर्ष विद्यार्थी के रूप में उसने व्यतीत किये और यहीं से धर्माचार्य की उपाधि प्राप्त की तथा विश्वविद्यालय का उपकुलपति नियुक्त हुआ। उस समय भारत बौद्ध और ब्राह्मण शिक्षा का प्रमुख केन्द्र था। उस वक्त भारत में बहुत बड़ी संख्या में शिक्षा के केन्द्र थे। नालन्दा में 10000 से अधिक छात्र और आचार्य थे।
उस समय नालन्दा विश्वविख्यात था। नालन्दा ग्राम महावीर तथा बुद्ध दोनों ही का प्रिय पात्र था। जैन धर्म ग्रंथों के अनुसार महावीर ने यहां 14 वर्षा ऋतुएं व्यतीत की थी। स्वयं भगवान बुद्ध ने नालंदा के वन में रहकर कई बार धर्म का उपदेश दिया था। नालन्दा में दिन ही नहीं देर रात तक अध्ययन अध्यापन चलता रहता था।
शिक्षक और शिक्षित का पारस्परिक व्यवहार इतना अच्छा था कि विश्वविद्यालय के 700 वर्ष के इतिहास में एक भी उदाहरण ऐसा नहीं मिलता है जिसमें छात्रों की ओर से शिक्षकों के प्रति किसी प्रकार की अवज्ञा अथवा अवहेलना हुई हो। पुस्तकालयों में लाखों अद्भुत पुस्तकें थी।
विश्वविद्यालय के प्रमुख द्वार पर द्वार पंडित नियुक्त थे जिनका कार्य था विश्वविद्यालय में प्रवेश करने वाले विद्यार्थियों की जांच करना। वस्तुतः ये द्वार पंडित विश्वविद्यालय की विद्वता के संरक्षक थे।
इत्सिंग को भारत यात्रा की प्रेरणा ह्वेनसांग से ही प्राप्त हुई। अपने साथियों के आगे पीछे होने से इत्सिंग कुछ ढीला सा हो रहा था किंतु ह्वेनसांग ने उसे उत्साहित किया और कहा "निश्चिंतता पूर्वक पुण्य भूमि के दर्शन करो" उसने समुद्र मार्ग से भारत के लिए 691 में प्रस्थान किया। सुमात्रा होते हुए वह भारत आया तथा नालन्दा में 10 वर्ष रहकर उसने यहाँ का अलौकिक ज्ञान का भंडार प्राप्त किया।
इन तीनों चीनी यात्रियों ने भारत से इतना पाया कि उन्हें लगा वे धरती पर किसी स्वर्गमयी भूमि पर रहे हो।
और इस प्रकार भारत से प्राप्त ज्ञान अणुओं का संक्रमण पूरे चीन एवं वहाँ से विश्वभर में फैल गया।
फिर सदियों बाद उस चीन से एक विषाणु निकला जिसने विश्वभर को संक्रमित कर दिया।
भारत ने सदैव अच्छाई का 'संक्रमण' विश्वभर में किया है।
इसी कारण यजुर्वेद में भारतीय संस्कृति के लिए कहा गया है "सा संस्कृति या विश्ववारा"
लेखक
अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य
लक्की इंस्टिट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
89% V/S 11% 📣
कौन जीतेंगे आज ? 😊
मैने आज सुबह Telegram पर सर्वे कराया था जिसमें 89% ने यह माना है कि निर्मल सर आज 27 मार्च को रात को 8 बजे YouTube लाईव के दौरान वास्तव में कोई बड़ा धमाका करने वाले हैं,जिससे पूरा परिवार ‘सीखे,खेले व जीते’ वाला स्लोगन सार्थक होगा परंतु 11% ने यह माना हैकि ये “खोदा पहाड़ निकली चुहिया” वाली बात ही साबित होगी।
दोनों तरह के विचारों का स्वागत है,परंतु आज रात 8 बजे देखने की बात यह हैकि 89% की बात सही साबित होती है या 11% की ।
आपका स्नेह व विश्वास बना रहे।
- निर्मल गहलोत ‘उत्कर्ष’
कौन जीतेंगे आज ? 😊
मैने आज सुबह Telegram पर सर्वे कराया था जिसमें 89% ने यह माना है कि निर्मल सर आज 27 मार्च को रात को 8 बजे YouTube लाईव के दौरान वास्तव में कोई बड़ा धमाका करने वाले हैं,जिससे पूरा परिवार ‘सीखे,खेले व जीते’ वाला स्लोगन सार्थक होगा परंतु 11% ने यह माना हैकि ये “खोदा पहाड़ निकली चुहिया” वाली बात ही साबित होगी।
दोनों तरह के विचारों का स्वागत है,परंतु आज रात 8 बजे देखने की बात यह हैकि 89% की बात सही साबित होती है या 11% की ।
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