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कोरोना महामारी के संक्रमण को रोकने के लिए "पूर्णतः लॉकडाउन" करने वाला प्रथम राज्य हैं-
Anonymous Quiz
9%
केरल
2%
गोवा
78%
राजस्थान
11%
महाराष्ट्र
"कठिन समय में निराशा को हावी न होने दें, गहरी रात में ही सितारे पूरी चमक के साथ निखरते हैं"

'Unlock Yourself while the world is locked down'

हमको पता नहीं था हमें अब पता चला,
इस मुल्क में हमारी हकूमत नहीं रही,

आज दुष्यन्त कुमार की ये पंक्तियां याद आती है तो प्रकृति के सामने इंसान को झुकता हुआ देखकर मेरे खुद के वहम भी दूर हो गए।

छोटी सी आलपिन के सिरे पर 500 मिलियन विषाणु रह सकते है। उन में से एक विषाणु पूरी मानव सभ्यता पर खतरा बन सकता है, यह हमारी पीढ़ी ने पहली बार अनुभव किया।

ऐतरेय ब्राह्मण में कहा गया है कि "श्रद्धा सत्यमित्युत्तम मिथुनम्" अर्थात् श्रद्धा और सत्य का जोड़ा बहुत उत्तम है। बिना सत्य को समझे श्रद्धा निरर्थक है। सत्य को समझाने के लिए भी कभी कभी जीवन में कठिनाइयां आती है।

दिनकर ने अपने अंदाज में कभी लिखा था।

"मैंने अपने आपको
क्षमा कर दिया है।
बन्धु, तुम भी मुझे क्षमा करो।
मुमकिन है, वह ताजगी हो,
जिसे तुम थकान मानते हो।
ईश्वर की इच्छा को
न मैं जानता हूँ,
न तुम जानते हो।"

यह सच है कि अभी हमें उस ईश्वर या प्रकृति की इच्छा के बारे में कुछ पता नहीं है।

आज घरों में बन्द होकर कुँवर बैचेन की कुछ पंक्तियों से प्रेरणा लेकर घर में ही एक संसार खोजने का प्रयास कर रहा हूँ।

जागा रहा तो कर लिए मैंने बहुत सारे काम,
ऐ नींद ! तेरे न आने का शुक्रिया।

आती नहीं तुम राह में तो बनाता क्यों मैं सीढ़ियां,
दीवारों मेरी राह में आने के लिए शुक्रिया।

आजकल की भागदौड़ की जिन्दगी में घर केवल चारदीवारों से घिरा आकार रह गए है। ऐसे दौर में जिन्दगी और घर का बिखरा हुआ सारा सामान फिर से सजा दीजिए।

किसी से शिकायतें मत कीजिए कि आप कुछ जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। नीरज ने कहा है।

"जितना कम सामान होगा
उतना सफर आसान होगा"

याद रखें सुई का आगे का भाग छेद करता है तो पीछे का भाग फटे कपड़े की सिलाई भी करता है। बस धैर्य रखें।

शेक्सपियर ने लिखा है "Sweet are the uses of adversity" अर्थात् "कठिनाइयों के मधुर उपयोग सम्भव है"

तो.....घरों में...

1. खूब सारा ज्ञान अर्जित करें।

2. संगीत सुनकर, ठहाके लगाकर, अच्छी पुस्तकें पढ़कर, बड़े बूढ़ों से बतिया कर, बच्चों के साथ खेलकर खुद को भावनात्मक रूप से मजबूत करें।

3. बहुत कहते थे ना कि वक्त नहीं मिलता, लो मिला है गर ईच्छाशक्ति है तो।

4. याद रखो, नींद उतनी हो जितनी जरूरी है। आँखे खुली रखो।

5. सावधानी बरतें पर ख़ौफजदा न हो, आंखों से न दिखने वाला 'कोरोना' जिंदादिल लोगों के दिमाग में पनपने वाले पर न दिखने वाले केमिकल से ही हारेगा।

6. प्रोफेशनल लाइफ को जंग नहीं लगने दें। उसको ज्ञान और कौशल वर्धन कर और निखारें।

7. छोटी और संकीर्ण सोच वाले लोगों की संकुचित बातें, पोस्ट एक सेकंड के लिए भी न पढ़ें। स्वयं सकारात्मक लेखन करें।

8. घर में बच्चों को जितना सिखा सकते है उतना अच्छा सिखाएं।

9. "वक्त बदलता रहता है" अच्छा हो या बुरा। अच्छे में विनम्र बनों। बुरे में मानसिक रूप से मजबूत।

10. 'कोरोना' सूर्य के आभामंडल को कहा जाता है। वक्त तो नहीं ठहरा है लेकिन जिन्दगी थोड़ी सी ठहरी है तो वक्त है आगे का रूटमैप बनाने का। खुद को और दुनियां को समझने का। अनुशासित रहकर साझा लड़ाई लड़ने का। मानवता का संकट समझदारी से टालने का। अपना आभामंडल मजबूत करने का।

लेखक:

अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य,
लक्की इंस्टिट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
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सामान्य ज़ुकाम, सामान्य फ्लू व कोरोना महामारी में अंतर जिनको जानना आपके लिए जरूरी है।🙏
जल है तो कल है
विश्व जल दिवस 22 मार्च
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हाल ही में किस देश ने कोरोना वायरस के पहले "रैपिड कोरोना वायरस टेस्ट" को मंजूरी प्रदान की है ?
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38%
भारत ने
40%
संयुक्त राज्य अमेरिका ने
12%
चीन ने
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इटली ने
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Data point.
हाल ही में किस देश ने कोरोना महामारी के प्रकोप के मद्देनजर "2020 टोक्यो ओलंपिक्स" में ऐथेलीट नहीं भेजने का फ़ैसला किया है-
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भारत ने
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संयुक्त राज्य अमेरिका ने
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कनाडा ने
देश की स्वतंत्रता के लिए प्राण न्योछावर करने वाले महान क्रांतिवीरों को शत शत नमन
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राजस्थान में #lockdown के चलते लाईब्रेरियन ,फॉर्मासिस्ट
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अब क्या होनी चाहिए आपकी आगे की रणनीति जानने के लिए
मिलिए निर्मल सर से Live आज शाम 5 बजे
आज कितना चले हो अपनी मंजिल की ओर?

बिना चले कभी मंजिले पास आई है क्या? या तो आपका दिमाग चला है, या कलम चली है, या कदम चले हैं या आज कोई नक्शा बना है, पर जरूरी यह है कि आप किसी दिशा में चले जरूर हो।

निदा फाजली साहब ने फरमाया है।

"दुनियां जिसे कहती हैं जादू का खिलौना है।
मिल जाये तो मिट्टी है, खो जाये तो सोना है।।
अच्छा सा कोई मौसम तन्हा सा कोई आलम।
हर वक्त का रोना तो बेकार का रोना है।।"

कामयाब लोगों के पास अनगिनत सपनें और योजनाएं होती है खुद को मुकाम पर पहुँचाने की। आपका प्रयास सोने जितना बहुमूल्य है, उपलब्धियों को मिट्टी ही रहने दो। मित्रों! एक हज़ार साल की मानव सभ्यता का इतिहास पढ़ा, उसमें एक भी 'सफलता' ऐसी नहीं थी जो रोते रोते ऐसे ही मिल गयी। हर दिन कुछ कदम आगे से आगे चलना पड़ा। जिस दिन रुके, उस दिन दो कदम पीछे धकेल दिए गये।

प्रोफेसर शहरयार ने ठीक ही कहा है।

एक बूँद जहर के लिए फैला रहे हो हाथ।
देखो कभी खुद अपने बदन को निचोड़ के।।
कुछ भी नहीं जो ख्वाब की तरह दिखाई दे।
कोई नहीं जो हमको जगाये झिंझोड़ के।।

सफल लोगों की एक खास बात यह है कि वे घटनाओं को अपने नियंत्रण में रखते हैं। वे यूँ ही भाग्य भरोसे कुछ भी नहीं छोड़ते। खुद की मस्ती भरी अल्हड़ इच्छाओं को भी।

शकील बदायुनी का एक मशहूर शेर है

"ऐ इश्क ये सब दुनियां वाले बेकार की बातें करते हैं।
पायल के गमों का इल्म नहीं, झंकार की बातें करतें हैं।।"

कामयाब लोग कामयाबी की राह में चलते चलते इतने पक्के हो जाते है कि वे किसी महफ़िल में बैठे भी होंगे तो पायल में झंकार ही ढूंढेंगे। कुछ और लोग शायद पायल से घायल हो।
उन्हें पता होता है कि वे कहाँ भटक गए। वे तुरन्त आगे बढ़ने की मुख्य धारा से पुनः जुड़ जाते हैं। ऐसा भी मत करना कि आप उन दिलदार लोगों को बिना दिल का समझ लो। उनके इरादों में दूसरों के घरों में जलने वाले चूल्हे की भी फिक्र होती ही है।

और हाँ, ये ऐसे शूरवीर होते है जो कष्टों से बचने के बजाय उनमें ही आनंद ढूँढ़ लेते है। उन्हें आप कोल्हू के बैल की तरह व्यस्त रहते हुए भी मुस्कुराता हुआ पायेंगे। वे शिवरूप होते हैं।
सुभाषितसुधानंदलहरी में कहा भी गया है।

सुधास्वादनवेलायां बहवः सन्ति देवता:।
कालकूटे समायाते शेष: शेषविभूषण:।

अर्थात् अमृत के आस्वादन के समय तो बहुत सारे देवता उपस्थित हो जाते हैं लेकिन कालकूट गरल के आने पर केवल शंकर शेष रह जाते हैं।

फिर वही प्रश्न आज शाम तक कितना चले हो मंजिल की ओर?

लेखक:

अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य,
लक्की इंस्टिट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज,
जोधपुर।
विश्व मौसम विज्ञान दिवस (23 मार्च)...
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