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बिजौलिया किसान आंदोलन के तृतीय चरण का नेतृत्व किसने किया था?
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साधु सीतारामदास
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माणिक्यलाल वर्मा
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विजयसिंह पथिक
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रामनारायण चौधरी
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जीरो टॉलरेन्स

जीवन कुछ नियमों में बंधा है। उनकी अनुपालना कीजिए और आप वैसा बन जाएंगे जैसा आप चाहते हैं। अपने मस्तिष्क को वैसे ही सेट कीजिये जैसे आप किसी घड़ी को सेट करते हैं। जब अलार्म बजता है तो आप जाग जाइये या उस वक्त तक आपका कोई पहले से तय किया गया कार्य पूर्ण हो जाना चाहिए। भविष्य में आपकी राह में किस तरह का धरातल आयेगा; अपने चलने का कौशल उसके अनुसार विकसित कर लीजिए।

माना आपकी मांसपेशियां मजबूत होनी चाहिए लेकिन आपकी इच्छाशक्ति उससे भी ज्यादा मजबूत होनी चाहिए। दोनों को मजबूत करने के तौर तरीके अलग है लेकिन ध्यान दोनों पर देना होगा। केवल सोचते रहने से तो आप असाधारण बनने से रहे, बनना है तो अपनी दिनचर्या भी असाधारण बना लीजिए, अपना रास्ता, दोस्त, किताबें, स्थान व कार्य करने के तरीके इत्यादि भी असाधारण चुनिए।

सदैव शत प्रतिशत उम्मीद के साथ ही काम को शुरू कीजिए कि आप उसमें सफल होंगे। उसके बाद वैसे चलिए जैसे ट्रैन पटरी पर चलती है। यह भी मान कर चलिए कि हर चीज को ढलने में वक्त लगता है, उतावलापन ठीक नहीं। यह भी मान कर चलिए कि सब कुछ आपके मन मुताबिक नहीं होगा। यह भी मान कर चलिए ऐसी विपरीत परिस्थितियों में ही चैंपियंस निखरते हैं।

समस्या यह नहीं है कि हम बड़ी योजना बनाते है और हार जाते हैं समस्या यह है कि हम उस योजना जितना बड़ा बनने का प्रयास नहीं करते हैं। और सरल भाषा में कहूँ तो खुद की लापरवाहियों के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' का भाव खुद में विकसित कर दीजिए। साफ मतलब कि अपनी किसी लापरवाही के लिए खुद को धिक्कारना और मन बदल कर फिर से अधिक सजग होकर काम पर लग जाना।

दिन ढले एक लिस्ट बनाना कि आज किन किन मोर्चों पर आपने मजबूत रहकर ज़ीरो टॉलरेन्स की नीति अपनाई और क्या फायदा रहा। अगले दिन भी वैसा ही करके आपकी ट्रैन पटरी पर शानदार गति पकड़ लेगी।

✒️डॉ अर्जुन सिंह साँखला
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शोर में संगीत तलाशो

जब लोग बारिश में भीगने से बचने के लिए कोई आसरा तलाशें, तब तुम उन आसमानी बूँदों के चित्ताकर्षक दृश्य में पारलौकिक छुअन तलाशना। स्मृति जब दुःख कारण बनने लगे तो विस्मृति का सहारा लेकर मन का सुकून तलाशना। विस्मृति जब कचोटने लगे तो सुखद स्मृतियों के मंदिर में एक फेरा दे आना।

जब लोग भूतप्रेत से डरकर भागे, तुम पराभौतिकी में अनुसन्धान के उन विषयों को और अधिक जानने के लिए ऐसे अद्भुत पल को खोना मत। लोग जब तुम्हें तमाम नकारात्मकताओं के भाषण सुनाएँ, तुम उनका तरजुमा अपने मन से वैसा करना कि मन खराब ना हो। लोग जब खुद का जीवन मिटाने की बात करें तब उनको बताना कि तुम्हारी इस जिस्मानी सोच का शिकार एक धड़कता दिल भी हो जायेगा; तुमने उसका शोर सुना, संगीत नहीं।

लोग जब पुस्तकें पढ़ने या ज्ञान हासिल करने को कष्टकारी बताएँ, तुम उनको उनके कीचड़ में छोड़कर नजरअंदाज कर बहती नदी की तरह नई जमीन तलाशने आगे बढ़ जाना। लोग जब 'करूँ या ना करूँ' की उहापोह में डांवांडोल हों, तुम अपने चार काम निपटाकर पाँचवे की योजना बना लेना।

दोस्तों, तुजुर्बेकार की हैसियत से कह रहा हूँ जिन्दगी में हार, पीड़ाएं और समस्याएं होते हुए भी जिंदगी हर दूसरे तीसरे मोड़ पर बहुत खूबसूरत तोहफे पेश करती है। बगीचे के फूलों में ही सुख है यह भ्रम तब दूर हुआ जब एक काँटे ने मदद कर काँटे को निकाल दिया।

ब्रह्मज्ञानी बने बिना भी मुझे समझ आता है कि मेरी कार ने मुझे इतना सुख नहीं दिया जितना बचपन की साईकिल ने दिया। मैं जितना बड़ा हुआ मेरे अन्दर दुनिया में फैली नेगेटिव बातें भी बड़ी हुई।

अच्छी जिन्दगी जीने का सरल सूत्र है कि शोर में संगीत सुनो। बाकी संसार मोहमाया है, यह ज्ञान कोई न भी दे तो एकदिन खुद ही समझ आ जायेगा।

✒️डॉ अर्जुन सिंह साँखला
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पुलिस स्मृति दिवस (Police Commemoration Day) 👮
•भारत में हर साल 21 अक्टूबर को 'पुलिस स्मृति दिवस' मनाया जाता है।
•यह दिन उन बहादुर पुलिसकर्मियों को याद करने और सम्मान देने के लिए मनाया जाता है, जिन्होंने कर्तव्य के पथ पर अपने प्राणों की आहुति दी।
•'पुलिस स्मृति दिवस' वर्ष 1959 की उस घटना की याद दिलाता है जब लद्दाख के हॉट स्प्रिंग क्षेत्र में चीनी सैनिकों द्वारा बीस भारतीय पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया था, जिसमें दस पुलिसकर्मी शहीद हुए थे और सात को कैद कर लिया गया था। तीन सप्ताह बाद चीन ने शहीदों के शव भारत को सौंपे।
•जनवरी 1960 में, देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिरीक्षकों के वार्षिक सम्मेलन में 21 अक्टूबर को 'स्मृति दिवस' के रूप में घोषित किया गया था।
•पुलिसकर्मियों के बलिदान और राष्ट्रीय सुरक्षा एवं एकता बनाए रखने में उनकी उत्कृष्ट भूमिका के सम्मान में, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने पुलिस स्मृति दिवस 2018 के अवसर पर चाणक्यपुरी, नई दिल्ली में स्थित 'राष्ट्रीय पुलिस स्मारक' (NPM) को राष्ट्र को समर्पित किया।
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