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विश्व रेड क्रॉस दिवस (World Red Cross Day)

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विश्व रेड क्रॉस दिवस, अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट आंदोलन के सिद्धांतों की याद में मनाया जाता है।

इसको विश्व रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट दिवस के रूप में भी जाना जाता है।


विश्व रेड क्रॉस दिवस 8 मई को हेनरी डुनेंट की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो रेड क्रॉस की अंतर्राष्ट्रीय समिति के संस्थापक थे। जिन्हें साल 1901 में शांति का नोबेल पुरस्कार मिला था I


इस दिन लोग इस मानवतावादी संगठन तथा उसकी ओर से मानवता की सहायता हेतु दिए गए अभूतपूर्व योगदान को श्रद्धांजलि देने के रूप याद करते हैं।

आज कोविड-19 महामारी (Corona Pandemic) में रेड क्रॉस आंदोलन की और भी अधिक आवश्यकता हो गई है ।

यह दिवस आधिकारिक तौर पर 1984 में वर्ल्ड रेडक्रॉस और वर्ल्ड क्रिसेंट डे के रूप में मनाया जाने लगा I

जिस तरह से रेडक्रॉस संस्था ने अपने लंबे इतिहास में बिना किसी एक देश के प्रति निष्ठा दिखाकर मानवता के प्रति निष्ठा दिखाई है , आज कोरोना महामारी में उसी की सबसे ज्यादा जरूरत है।
यह उन लोगों को समर्पित है जो भोजन की कमी, कई प्राकृतिक आपदाओं, युद्ध के साथ-साथ एक महामारी की बीमारी से पीड़ित हैं।
World thalassemia day

हर साल 8 मई को दुनियाभर में विश्व थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को थैलेसीमिया बीमारी के प्रति जागरूक करना है।

थैलेसीमिया बीमारी से जुड़े कुछ तथ्य :-
● यह एक आनुवंशिक रोग है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है।

● इस रोग में आरबीसी ( जिसे रेड ब्लड सेल्स कहते हैं ) की संख्या में बड़ी तेजी से गिरावट होने लगती है, साथ ही आरबीसी के नए सेल्स नहीं बनते हैं, जिससे शरीर में खून की कमी होने लगती है। इसके बाद व्यक्ति कई अन्य बीमारियों की चपेट में आने लगता है।

● इस रोग से बचने के लिए रोगी को पर्याप्त मात्रा में विटामिन और आयरन युक्त चीजों का सेवन करना होता है

● कई मौकों पर रोगी के रक्त को बदला जाता है और सर्जरी कर पित्ताशय की थैली को हटाया जाता है।

● भारत में हर साल 10 हजार से अधिक बच्चे जन्मजात थैलेसीमिया के रोगी होते हैं। ये आंकड़े विश्व में सबसे अधिक हैं।

● अगर किसी बच्चे को थैलेसीमिया की शिकायत होती है तो उसे ताउम्र इसका उपचार कराना पड़ता है।
महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई, 1540 को कुंभलगढ़ दुर्ग (राजसमंद) में महाराजा उदयसिंह एवं माता राणी जीवत कंवर के घर में हुआ था।
महाराणा प्रताप उदयपुर, मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश के राजा थे।
इनके कुल देवता एकलिंग महादेव हैं।
इन्हें बचपन और युवावस्था में कीका नाम से भी पुकारा जाता था। यह नाम इन्हें भीलों से मिला था ।
भीलों की बोली में कीका का अर्थ 'बेटा' होता है ।

महाराणा प्रताप के पास एक सबसे प्रिय घोड़ा था, जिसका नाम 'चेतक' था।
महाराणा प्रताप की वीरता की कहानियों में चेतक का एक विशेष स्थान है।

चेतक की फुर्ती, रफ्तार और बहादुरी की कई लड़ाइयाँ जीतने में महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है।

एक पहाड़ी पर महाराणा प्रताप का दर्शनीय स्मारक स्थित है।

यहाँ मुख्य रूप से रक्त तलाई, शाहीबाग, प्रताप गुफा, घोड़े चेतक की समाधि एवं ऊंची पहाड़ी पर महाराणा प्रताप के दर्शनीय स्थल हैं।

मेवाड़ की शौर्य-भूमि धन्य है जहां वीरता और दृढ़ प्रण वाले प्रताप का जन्म हुआ। जिन्होंने इतिहास में अपना नाम अजर-अमर कर दिया। उन्होंने धर्म एवं स्वाधीनता के लिए अपना बलिदान दिया इनकी वीरता की कथा से भारत की भूमि गौरवान्वित है।

महाराणा प्रताप और मुगल बादशाह अकबर के बीच 18 जून,1576 में लड़ा गया हल्दीघाटी का युद्ध काफी चर्चित है, क्योंकि अकबर और महाराणा प्रताप के बीच यह युद्ध महाभारत युद्ध की तरह विनाशकारी सिद्ध हुआ था।
इस युद्ध के बाद मेवाड़, चित्तौड़, गोगुंदा, कुंभलगढ़ और उदयपुर पर मुगलों का कब्जा हो गया।

1597 ई. को महाराणा प्रताप का देहांत हो गया।

30 वर्षों के संघर्ष और युद्ध के बाद भी अकबर, महाराणा प्रताप को न तो बंदी बना सका और न ही अपने अधीन कर सका।

महान वो होता है जो अपने देश, जाति, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए किसी भी प्रकार का समझौता न करे और लगातार संघर्ष करता रहे।
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https://youtu.be/Jk9hKeYiv08
तैयार रहें आज शाम 7:30 बजे उत्कर्ष के ऑनलाइन कवि सम्मेलन का हिस्सा बनने के लिए।