👌💐दुनिया के फैसले से अपना फैसला मत बदलो।।
बल्कि
अपने फैसले से दुनिया को बदल दो।।👍
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ह्रदय(Heart)-
Heart हमारे शरीर का सबसे व्यस्त अंग है। यह Cardiac mussel का बना होता है।
◾✍ Heart हल्का गुलाबी रंग का होता है। इसकी भार लगभग 300 ग्राम होता है। यह दोनों फेफड़ो(Lungs) के मध्य होता है। Heart का एक तिहाई भाग दाहिनीं तरफ शेष भाग बायीं तरफ होता है।
{शेष आप लोगो को Heart के बारे में नोट्स भेज दिया जायेगा}
Heart हमारे शरीर का सबसे व्यस्त अंग है। यह Cardiac mussel का बना होता है।
◾✍ Heart हल्का गुलाबी रंग का होता है। इसकी भार लगभग 300 ग्राम होता है। यह दोनों फेफड़ो(Lungs) के मध्य होता है। Heart का एक तिहाई भाग दाहिनीं तरफ शेष भाग बायीं तरफ होता है।
{शेष आप लोगो को Heart के बारे में नोट्स भेज दिया जायेगा}
UP Board 10th & 12th (NEET/JEE)
ह्रदय(Heart)- Heart हमारे शरीर का सबसे व्यस्त अंग है। यह Cardiac mussel का बना होता है। ◾✍ Heart हल्का गुलाबी रंग का होता है। इसकी भार लगभग 300 ग्राम होता है। यह दोनों फेफड़ो(Lungs) के मध्य होता है। Heart का एक तिहाई भाग दाहिनीं तरफ शेष…
इसकी फुल details apko uper mil jayegi स्क्रॉल करके देख लीजिए
आंतरिक ओर बाहरी दोनों सरंचना दोनों मिल जाएगी चित्र के साथ
आंतरिक ओर बाहरी दोनों सरंचना दोनों मिल जाएगी चित्र के साथ
अब आप लोगो का जीव विज्ञान में जैव प्रक्रम 1 चलेगा। बहुत आसान है। मै लगातार नोट्स भेजता रहूँगा।
तो चलिए शुरू करते हैं।
@nitinashishyadav
तो चलिए शुरू करते हैं।
@nitinashishyadav
जैव प्रक्रम(Life Process)-
प्रत्येक जीवधारी को जीवित रहने के लिए स्वयं में कुछ क्रियाओ को करना पड़ता है।
अतः वे सभी क्रियाएँ जो जीव को जीवित बनाये रखने के लिए आवश्यक होती हैं, उन्हें जीवन की प्रक्रियाएं अर्थात जैव प्रक्रम कहते है।
जैसे- पोषण, श्वसन, परिवहन,उत्सर्जन इत्यादि।
✴ जीवित रहने के लिए जैव शारीर के अंदर कुछ ऐसी क्रियाएँ होती हैं,जिनमे संश्लेषण होता है तथा कुछ क्रियाएँ ऐसी होती हैं,जिनमे विखंडन होता है।
(1) - उपचयी अभिक्रिया(Anabolic Reaction)--
वे अभिक्रियाएँ जिनमे सरल कार्बनिक पदार्थो से जटिल कार्बनिक पदार्थो का निर्माण होता है।
जैसे-- प्रकाश संश्लेषण
(2)-- अपचयी अभिक्रिया(Catabolic Reaction)--
जैव शारीर के अंदर होने वाली वे अभिक्रिया जिनमे जटिल कार्बनिक यौगिकों के विखंडन से सरल अणुओ का निर्माण होता है,उसे अपचयी अभिक्रिया कहते हैं।
जैसे-- श्वशन,पाचन।
{अब आप लोग अपने Chapter के खास Topic के करीब हो। आगे का नोट्स भी मिल जायेगा}
@nitinashishyadav
प्रत्येक जीवधारी को जीवित रहने के लिए स्वयं में कुछ क्रियाओ को करना पड़ता है।
अतः वे सभी क्रियाएँ जो जीव को जीवित बनाये रखने के लिए आवश्यक होती हैं, उन्हें जीवन की प्रक्रियाएं अर्थात जैव प्रक्रम कहते है।
जैसे- पोषण, श्वसन, परिवहन,उत्सर्जन इत्यादि।
✴ जीवित रहने के लिए जैव शारीर के अंदर कुछ ऐसी क्रियाएँ होती हैं,जिनमे संश्लेषण होता है तथा कुछ क्रियाएँ ऐसी होती हैं,जिनमे विखंडन होता है।
(1) - उपचयी अभिक्रिया(Anabolic Reaction)--
वे अभिक्रियाएँ जिनमे सरल कार्बनिक पदार्थो से जटिल कार्बनिक पदार्थो का निर्माण होता है।
जैसे-- प्रकाश संश्लेषण
(2)-- अपचयी अभिक्रिया(Catabolic Reaction)--
जैव शारीर के अंदर होने वाली वे अभिक्रिया जिनमे जटिल कार्बनिक यौगिकों के विखंडन से सरल अणुओ का निर्माण होता है,उसे अपचयी अभिक्रिया कहते हैं।
जैसे-- श्वशन,पाचन।
{अब आप लोग अपने Chapter के खास Topic के करीब हो। आगे का नोट्स भी मिल जायेगा}
@nitinashishyadav
सुविचार
मिलता तो बहुत है
इस जिंदगी में,
बस हम गिनती उसी
की करते है,
जो हासिल न हो सका
सुप्रभात
Magic. ...✍
मिलता तो बहुत है
इस जिंदगी में,
बस हम गिनती उसी
की करते है,
जो हासिल न हो सका
सुप्रभात
Magic. ...✍
UP Board 10th & 12th (NEET/JEE) pinned «जैव प्रक्रम(Life Process)- प्रत्येक जीवधारी को जीवित रहने के लिए स्वयं में कुछ क्रियाओ को करना पड़ता है। अतः वे सभी क्रियाएँ जो जीव को जीवित बनाये रखने के लिए आवश्यक होती हैं, उन्हें जीवन की प्रक्रियाएं अर्थात जैव प्रक्रम…»
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UP Board 10th & 12th (NEET/JEE)
जैव प्रक्रम(Life Process)- प्रत्येक जीवधारी को जीवित रहने के लिए स्वयं में कुछ क्रियाओ को करना पड़ता है। अतः वे सभी क्रियाएँ जो जीव को जीवित बनाये रखने के लिए आवश्यक होती हैं, उन्हें जीवन की प्रक्रियाएं अर्थात जैव प्रक्रम…
➡पोषण(Nutrition)--
भोजन से पोषक पदार्थो का प्राप्त करना ही पोषण कहलाता है।
✴दूसरे शब्दों में कह सकते हैं,की पोषण वह क्रिया है,जिसके द्वारा कोई जीव कार्य करने हेतु तथा वृद्धि के लिए आवश्यक पदार्थो को ऊर्जा के लिए प्राप्त करता है।
➡कोई भी जीव निम्नलिखित आवश्यकताओ के पूर्ति के लिए पोषण का प्रयोग करता है।
(1)-- ऊर्जा की प्राप्ति~~~
सभी जीवधारी को ऊर्जा की आवश्यकता होती है। भोजन से को ग्लूकोज़ की प्राप्ति होती है तथा कोशिकीय श्वसन के पश्चात ग्लूकोज से ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
(2)---टूटी फूटी कोशिकाओ की मरम्मत~
विटामिन व् खनिज,लवण तथा प्रोटीन शरीर में टूट-फुट की मरम्मत करता है ।
(3)---रोगों से रक्षा~~~
विटामिन,खनिज तथा प्रोटीन शरीर के प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनती है।
{शेष अब अगले नोट्स में}
@nitinranker
भोजन से पोषक पदार्थो का प्राप्त करना ही पोषण कहलाता है।
✴दूसरे शब्दों में कह सकते हैं,की पोषण वह क्रिया है,जिसके द्वारा कोई जीव कार्य करने हेतु तथा वृद्धि के लिए आवश्यक पदार्थो को ऊर्जा के लिए प्राप्त करता है।
➡कोई भी जीव निम्नलिखित आवश्यकताओ के पूर्ति के लिए पोषण का प्रयोग करता है।
(1)-- ऊर्जा की प्राप्ति~~~
सभी जीवधारी को ऊर्जा की आवश्यकता होती है। भोजन से को ग्लूकोज़ की प्राप्ति होती है तथा कोशिकीय श्वसन के पश्चात ग्लूकोज से ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
(2)---टूटी फूटी कोशिकाओ की मरम्मत~
विटामिन व् खनिज,लवण तथा प्रोटीन शरीर में टूट-फुट की मरम्मत करता है ।
(3)---रोगों से रक्षा~~~
विटामिन,खनिज तथा प्रोटीन शरीर के प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनती है।
{शेष अब अगले नोट्स में}
@nitinranker
Good morning every one
हमने अभी जीवविज्ञान में पोषण के शुरुआती टॉपिक के बारे में जान लिया है।
अब आगे जो है वो बहुत महत्वपूर्ण है।
अब आगे है-- पोषण के प्रकार:
{ जल्द ही नोट्स भेज दिया जायेगा। }
हमने अभी जीवविज्ञान में पोषण के शुरुआती टॉपिक के बारे में जान लिया है।
अब आगे जो है वो बहुत महत्वपूर्ण है।
अब आगे है-- पोषण के प्रकार:
{ जल्द ही नोट्स भेज दिया जायेगा। }
रिश्ते हमेशा "तितली" जैसे होते है
जोर से पकड़ो तो "मर" जाते है
छोड़ दो तो "उड़" जाते हैं
और प्यार से पकड़ो तो उँगलियों पर
अपना "रंग" छोड़ जाते है..
जिंदगी की सुंदरता इस बात मैं नहीं है कि हम कितने खुश रहते है,
बल्कि इस बात मैं है कि कितने लोग हमसे खुश रहते है.....
जोर से पकड़ो तो "मर" जाते है
छोड़ दो तो "उड़" जाते हैं
और प्यार से पकड़ो तो उँगलियों पर
अपना "रंग" छोड़ जाते है..
जिंदगी की सुंदरता इस बात मैं नहीं है कि हम कितने खुश रहते है,
बल्कि इस बात मैं है कि कितने लोग हमसे खुश रहते है.....
पोषण के प्रकार---
पोषण विधि के आधार पर पोषण 2 प्रकार के होते हैं।
1)----स्वपोषी पोषण(Autotrophic nutrition)---
पोषण की वह विधि जिसमे कोई जीव स्वयं को पोषित करता है।स्वपोषी के अंतर्गत समस्त हरे पेड़ पौधे आते हैं।अतः हम कह सकते हैं की पोषण की वह विधि जिसमे हरे पेड़ पौधे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा स्वयं को पोषित करता है,स्वपोषी पोषण कहलाता है।
2)---परपोषी पोषण(Heterotrophic nutrition)----
जीवो में होने वाला ऐसा पोषण जिसमे कोई जीव पोषण क्रिया के लिए दूसरे जीव पर निर्भर रहता है,परपोषी पोषण कहलाता है।
{अब आगे आप लोग प्रकाश संश्लेषण के बारे में पढ़ेंगे}
धन्यवाद्
@nitinranker
पोषण विधि के आधार पर पोषण 2 प्रकार के होते हैं।
1)----स्वपोषी पोषण(Autotrophic nutrition)---
पोषण की वह विधि जिसमे कोई जीव स्वयं को पोषित करता है।स्वपोषी के अंतर्गत समस्त हरे पेड़ पौधे आते हैं।अतः हम कह सकते हैं की पोषण की वह विधि जिसमे हरे पेड़ पौधे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा स्वयं को पोषित करता है,स्वपोषी पोषण कहलाता है।
2)---परपोषी पोषण(Heterotrophic nutrition)----
जीवो में होने वाला ऐसा पोषण जिसमे कोई जीव पोषण क्रिया के लिए दूसरे जीव पर निर्भर रहता है,परपोषी पोषण कहलाता है।
{अब आगे आप लोग प्रकाश संश्लेषण के बारे में पढ़ेंगे}
धन्यवाद्
@nitinranker
🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿
*👇👇 आज का प्रेरक प्रसंग 👇👇*
*!! सोच का फर्क !!*
~~~~~~~~~~~~~
एक गरीब आदमी बड़ी मेहनत से एक - एक रूपया जोड़ कर मकान बनवाता है. उस मकान को बनवाने के लिए वह पिछले 20 वर्षों से एक - एक पैसा बचत करता है ताकि उसका परिवार छोटे से झोपड़े से निकलकर पक्के मकान में सुखी से रह सके.
आखिरकार एक दिन मकान बन कर तैयार हो जाता है. तत्पश्चात पंडित से पूछ कर गृह प्रवेश के लिए शुभ तिथि निश्चित की जाती है. लेकिन गृहप्रवेश के 2 दिन पहले ही भूकंप आता है और उसका मकान पूरी तरह ध्वस्त हो जाता है. यह खबर जब उस आदमी को पता चलती है तो वह दौड़ा दौड़ा बाजार जाता है और मिठाई खरीद कर ले आता है. मिठाई लेकर वह घटनास्थल पर पहुंचता है जहां पर काफी लोग इकट्ठे होकर उसके मकान गिरने पर अफसोस जाहिर कर रहे थे.
ओह बेचारे के साथ बहुत बुरा हुआ, कितनी मुश्किल से एक - एक पैसा जोड़कर मकान बनवाया था. इसी प्रकार लोग आपस में तरह तरह की बातें कर रहे थे.
वह आदमी वहां पहुंचता है और झोले से मिठाई निकाल कर सबको बांटने लगता है. यह देखकर सभी लोग हैरान हो जाते हैं. तभी उसका एक मित्र उससे कहता है, कहीं तुम पागल तो नहीं हो गए हो, घर गिर गया, तुम्हारी जीवन भर की कमाई बर्बाद हो गई और तुम खुश होकर मिठाई बांट रहे हो.
वह आदमी मुस्कुराते हुए कहता है, तुम इस घटना का सिर्फ नकारात्मक पक्ष देख रहे हो इसलिए इसका सकारात्मक पक्ष तुम्हें दिखाई नहीं दे रहा है. ये तो बहुत अच्छा हुआ कि मकान आज ही गिर गया. वरना तुम्हीं सोचो अगर यह मकान 2 दिनों के बाद गिरता तो मैं मेरी पत्नी और बच्चे सभी मारे जा सकत थे. तब कितना बड़ा नुकसान होता.
*शिक्षा:-*
यदि वह व्यक्ति नकारात्मक दृष्टिकोण से सोचता तो शायद वह Depression का शिकार हो जाता. लेकिन केवल एक सोच के फर्क ने उसके दुःख को परिवर्तित कर दिया. ईश्वर जो भी करता है, अच्छा ही करता है।
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
*👇👇 आज का प्रेरक प्रसंग 👇👇*
*!! सोच का फर्क !!*
एक गरीब आदमी बड़ी मेहनत से एक - एक रूपया जोड़ कर मकान बनवाता है. उस मकान को बनवाने के लिए वह पिछले 20 वर्षों से एक - एक पैसा बचत करता है ताकि उसका परिवार छोटे से झोपड़े से निकलकर पक्के मकान में सुखी से रह सके.
आखिरकार एक दिन मकान बन कर तैयार हो जाता है. तत्पश्चात पंडित से पूछ कर गृह प्रवेश के लिए शुभ तिथि निश्चित की जाती है. लेकिन गृहप्रवेश के 2 दिन पहले ही भूकंप आता है और उसका मकान पूरी तरह ध्वस्त हो जाता है. यह खबर जब उस आदमी को पता चलती है तो वह दौड़ा दौड़ा बाजार जाता है और मिठाई खरीद कर ले आता है. मिठाई लेकर वह घटनास्थल पर पहुंचता है जहां पर काफी लोग इकट्ठे होकर उसके मकान गिरने पर अफसोस जाहिर कर रहे थे.
ओह बेचारे के साथ बहुत बुरा हुआ, कितनी मुश्किल से एक - एक पैसा जोड़कर मकान बनवाया था. इसी प्रकार लोग आपस में तरह तरह की बातें कर रहे थे.
वह आदमी वहां पहुंचता है और झोले से मिठाई निकाल कर सबको बांटने लगता है. यह देखकर सभी लोग हैरान हो जाते हैं. तभी उसका एक मित्र उससे कहता है, कहीं तुम पागल तो नहीं हो गए हो, घर गिर गया, तुम्हारी जीवन भर की कमाई बर्बाद हो गई और तुम खुश होकर मिठाई बांट रहे हो.
वह आदमी मुस्कुराते हुए कहता है, तुम इस घटना का सिर्फ नकारात्मक पक्ष देख रहे हो इसलिए इसका सकारात्मक पक्ष तुम्हें दिखाई नहीं दे रहा है. ये तो बहुत अच्छा हुआ कि मकान आज ही गिर गया. वरना तुम्हीं सोचो अगर यह मकान 2 दिनों के बाद गिरता तो मैं मेरी पत्नी और बच्चे सभी मारे जा सकत थे. तब कितना बड़ा नुकसान होता.
*शिक्षा:-*
यदि वह व्यक्ति नकारात्मक दृष्टिकोण से सोचता तो शायद वह Depression का शिकार हो जाता. लेकिन केवल एक सोच के फर्क ने उसके दुःख को परिवर्तित कर दिया. ईश्वर जो भी करता है, अच्छा ही करता है।
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
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प्रकाश संश्लेषण(Photosynthesis)--
प्रकाश संश्लेषण हरे पेड़ पौधों में भोजन निर्माण की एक प्रक्रिया है।जिसमे सूर्य के प्रकाश का रासयनिक ऊर्जा में रूपांतरण होता है।हरे पेड़ पौधे वायुमंडल से कार्बन डाई ऑक्साइड लेते हैं,मृदा से जल का अवशोषण करते हैं व क्लोरोफिल तथा प्रकाश की उपस्थिति में ग्लूकोज़ के रूप में भोजन बनाते हैं।
@nitinranker
प्रकाश संश्लेषण हरे पेड़ पौधों में भोजन निर्माण की एक प्रक्रिया है।जिसमे सूर्य के प्रकाश का रासयनिक ऊर्जा में रूपांतरण होता है।हरे पेड़ पौधे वायुमंडल से कार्बन डाई ऑक्साइड लेते हैं,मृदा से जल का अवशोषण करते हैं व क्लोरोफिल तथा प्रकाश की उपस्थिति में ग्लूकोज़ के रूप में भोजन बनाते हैं।
@nitinranker
प्रकाश संश्लेषण का कार्य स्थल-
प्रकाश संश्लेषण का कार्य स्थल हरितलवक(Chloroplast) होता है। हरितलवक Outer तथा Inner membrane से घिरी हुई संरचना होती है।हरितलवक में उपस्थित तरल द्रव्य को Stroma कहते हैं। Stroma में सिक्के जैसी Thylkoid का समूह Grannum होता है।
Thylkoid के mambrane पर क्लोरोफिल्स पिग्मेंट(Pigment) होते हैं।
ये Pigment quantasome युक्त होते हैं,जिसके कारण ये सूर्य के प्रकाश के तरंगो को अवशोषित करते हैं।
प्रकाश संश्लेषण का कार्य स्थल हरितलवक(Chloroplast) होता है। हरितलवक Outer तथा Inner membrane से घिरी हुई संरचना होती है।हरितलवक में उपस्थित तरल द्रव्य को Stroma कहते हैं। Stroma में सिक्के जैसी Thylkoid का समूह Grannum होता है।
Thylkoid के mambrane पर क्लोरोफिल्स पिग्मेंट(Pigment) होते हैं।
ये Pigment quantasome युक्त होते हैं,जिसके कारण ये सूर्य के प्रकाश के तरंगो को अवशोषित करते हैं।