❤️(ii) झाग प्लवन विधि (Froth floatation method)-
इस विधि के द्वारा मुख्यतः सल्फाइड अयस्कों [जैसे-कॉपर पायराइट (CuFeS2), सिल्वर ग्लान्स (Ag2S) तथा गैलेना (PbS)] का सान्द्रण किया जाता है। जब सल्फाइड अयस्कों को तेल और जल के मिश्रण में डालते हैं, तब सल्फाइड अयस्क उनमें उपस्थित अशुद्धियों की तुलना में तेल द्वारा शीघ्र भीगते हैं तथा सल्फाइड अयस्कों में उपस्थित अशुद्धियाँ सल्फाइड अयस्कों की तुलना में पानी द्वारा शीघ्र भीगती हैं। इस प्रकार तेल और पानी में बने हुऐ सल्फाइड अयस्क के निलम्बन (suspension) में जब वायु प्रवाहित करते हैं, तब सल्फाइड अयस्क के कण झाग बनकर ऊपरी सतह पर आ जाते हैं तथा अशुद्धियाँ नीचे बैठ जाती हैं। इस विधि को फेन उत्प्लावन विधि भी कहते हैं।
@upbordnotes
इस विधि के द्वारा मुख्यतः सल्फाइड अयस्कों [जैसे-कॉपर पायराइट (CuFeS2), सिल्वर ग्लान्स (Ag2S) तथा गैलेना (PbS)] का सान्द्रण किया जाता है। जब सल्फाइड अयस्कों को तेल और जल के मिश्रण में डालते हैं, तब सल्फाइड अयस्क उनमें उपस्थित अशुद्धियों की तुलना में तेल द्वारा शीघ्र भीगते हैं तथा सल्फाइड अयस्कों में उपस्थित अशुद्धियाँ सल्फाइड अयस्कों की तुलना में पानी द्वारा शीघ्र भीगती हैं। इस प्रकार तेल और पानी में बने हुऐ सल्फाइड अयस्क के निलम्बन (suspension) में जब वायु प्रवाहित करते हैं, तब सल्फाइड अयस्क के कण झाग बनकर ऊपरी सतह पर आ जाते हैं तथा अशुद्धियाँ नीचे बैठ जाती हैं। इस विधि को फेन उत्प्लावन विधि भी कहते हैं।
@upbordnotes
👍1
❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️
परावर्तनी भट्टी (Reverberatory Furnace)👇
यह भट्टी अग्निसह ईंटों (fire proof bricks) की दीवारों से बनी होती है। इसके मुख्यत: तीन भाग होते हैं
(i) भट्टी (Furnace)—यह ईंधन (fuel) के जलाने की जगह होती है। वायु की उपस्थिति में भट्टी में रखा ईंधन जलाया जाता है,
(ii) चूल्हा (Hearth)-इस भाग में जिस पदार्थ को गर्म करना होता है, उसे रखा जाता है। गर्म करने वाले पदार्थ को घान (charge) कहते हैं।
(iii) चिमनी (Chimney)—इस भाग से बनी हुई गर्म गैसें (hot gases) जो बेकार होती हैं निकल जाती हैं।
गर्म करने वाले पदार्थ को जिसे घान (charge) कहते हैं, चूल्हे में रख कर भट्टी को जला देते हैं। गर्म गैसें निकलती हैं और चूल्हे पर रखे घान को गर्म कर देती हैं। घान (charge) को इतना गर्म करते हैं कि उसकी नमी निकल जाये अथवा वायु की उपस्थिति में घान (charge) का ऑक्सीकरण (oxidation) हो जाये परन्तु घान पिघलने न पाये। इस भट्टी में निस्तापन (calcination) तथा भर्जन (roasting) की क्रियाएँ भली-भाँति कराई जाती हैं। इस भट्टी में ईंधन का तथा गर्म किये जाने वाले पदार्थ का सीधा सम्पर्क नहीं होता है। अतः इसे ऑक्सीकरण अथवा अपचयन दोनों क्रियाओं के लिए उपयोग कर सकते हैं। इस भट्टी की यही विशेषता है।
ताँबा, लेड, टिन आदि धातुओं का निस्तापन (calcination) एवं भर्जन (roasting) इसके द्वारा किया जाता है।
@upbordnotes
परावर्तनी भट्टी (Reverberatory Furnace)👇
यह भट्टी अग्निसह ईंटों (fire proof bricks) की दीवारों से बनी होती है। इसके मुख्यत: तीन भाग होते हैं
(i) भट्टी (Furnace)—यह ईंधन (fuel) के जलाने की जगह होती है। वायु की उपस्थिति में भट्टी में रखा ईंधन जलाया जाता है,
(ii) चूल्हा (Hearth)-इस भाग में जिस पदार्थ को गर्म करना होता है, उसे रखा जाता है। गर्म करने वाले पदार्थ को घान (charge) कहते हैं।
(iii) चिमनी (Chimney)—इस भाग से बनी हुई गर्म गैसें (hot gases) जो बेकार होती हैं निकल जाती हैं।
गर्म करने वाले पदार्थ को जिसे घान (charge) कहते हैं, चूल्हे में रख कर भट्टी को जला देते हैं। गर्म गैसें निकलती हैं और चूल्हे पर रखे घान को गर्म कर देती हैं। घान (charge) को इतना गर्म करते हैं कि उसकी नमी निकल जाये अथवा वायु की उपस्थिति में घान (charge) का ऑक्सीकरण (oxidation) हो जाये परन्तु घान पिघलने न पाये। इस भट्टी में निस्तापन (calcination) तथा भर्जन (roasting) की क्रियाएँ भली-भाँति कराई जाती हैं। इस भट्टी में ईंधन का तथा गर्म किये जाने वाले पदार्थ का सीधा सम्पर्क नहीं होता है। अतः इसे ऑक्सीकरण अथवा अपचयन दोनों क्रियाओं के लिए उपयोग कर सकते हैं। इस भट्टी की यही विशेषता है।
ताँबा, लेड, टिन आदि धातुओं का निस्तापन (calcination) एवं भर्जन (roasting) इसके द्वारा किया जाता है।
@upbordnotes
👌💐दुनिया के फैसले से अपना फैसला मत बदलो।।
बल्कि
अपने फैसले से दुनिया को बदल दो।।👍
बल्कि
अपने फैसले से दुनिया को बदल दो।।👍
ह्रदय(Heart)-
Heart हमारे शरीर का सबसे व्यस्त अंग है। यह Cardiac mussel का बना होता है।
◾✍ Heart हल्का गुलाबी रंग का होता है। इसकी भार लगभग 300 ग्राम होता है। यह दोनों फेफड़ो(Lungs) के मध्य होता है। Heart का एक तिहाई भाग दाहिनीं तरफ शेष भाग बायीं तरफ होता है।
{शेष आप लोगो को Heart के बारे में नोट्स भेज दिया जायेगा}
Heart हमारे शरीर का सबसे व्यस्त अंग है। यह Cardiac mussel का बना होता है।
◾✍ Heart हल्का गुलाबी रंग का होता है। इसकी भार लगभग 300 ग्राम होता है। यह दोनों फेफड़ो(Lungs) के मध्य होता है। Heart का एक तिहाई भाग दाहिनीं तरफ शेष भाग बायीं तरफ होता है।
{शेष आप लोगो को Heart के बारे में नोट्स भेज दिया जायेगा}
UP Board 10th & 12th (NEET/JEE)
ह्रदय(Heart)- Heart हमारे शरीर का सबसे व्यस्त अंग है। यह Cardiac mussel का बना होता है। ◾✍ Heart हल्का गुलाबी रंग का होता है। इसकी भार लगभग 300 ग्राम होता है। यह दोनों फेफड़ो(Lungs) के मध्य होता है। Heart का एक तिहाई भाग दाहिनीं तरफ शेष…
इसकी फुल details apko uper mil jayegi स्क्रॉल करके देख लीजिए
आंतरिक ओर बाहरी दोनों सरंचना दोनों मिल जाएगी चित्र के साथ
आंतरिक ओर बाहरी दोनों सरंचना दोनों मिल जाएगी चित्र के साथ
अब आप लोगो का जीव विज्ञान में जैव प्रक्रम 1 चलेगा। बहुत आसान है। मै लगातार नोट्स भेजता रहूँगा।
तो चलिए शुरू करते हैं।
@nitinashishyadav
तो चलिए शुरू करते हैं।
@nitinashishyadav
जैव प्रक्रम(Life Process)-
प्रत्येक जीवधारी को जीवित रहने के लिए स्वयं में कुछ क्रियाओ को करना पड़ता है।
अतः वे सभी क्रियाएँ जो जीव को जीवित बनाये रखने के लिए आवश्यक होती हैं, उन्हें जीवन की प्रक्रियाएं अर्थात जैव प्रक्रम कहते है।
जैसे- पोषण, श्वसन, परिवहन,उत्सर्जन इत्यादि।
✴ जीवित रहने के लिए जैव शारीर के अंदर कुछ ऐसी क्रियाएँ होती हैं,जिनमे संश्लेषण होता है तथा कुछ क्रियाएँ ऐसी होती हैं,जिनमे विखंडन होता है।
(1) - उपचयी अभिक्रिया(Anabolic Reaction)--
वे अभिक्रियाएँ जिनमे सरल कार्बनिक पदार्थो से जटिल कार्बनिक पदार्थो का निर्माण होता है।
जैसे-- प्रकाश संश्लेषण
(2)-- अपचयी अभिक्रिया(Catabolic Reaction)--
जैव शारीर के अंदर होने वाली वे अभिक्रिया जिनमे जटिल कार्बनिक यौगिकों के विखंडन से सरल अणुओ का निर्माण होता है,उसे अपचयी अभिक्रिया कहते हैं।
जैसे-- श्वशन,पाचन।
{अब आप लोग अपने Chapter के खास Topic के करीब हो। आगे का नोट्स भी मिल जायेगा}
@nitinashishyadav
प्रत्येक जीवधारी को जीवित रहने के लिए स्वयं में कुछ क्रियाओ को करना पड़ता है।
अतः वे सभी क्रियाएँ जो जीव को जीवित बनाये रखने के लिए आवश्यक होती हैं, उन्हें जीवन की प्रक्रियाएं अर्थात जैव प्रक्रम कहते है।
जैसे- पोषण, श्वसन, परिवहन,उत्सर्जन इत्यादि।
✴ जीवित रहने के लिए जैव शारीर के अंदर कुछ ऐसी क्रियाएँ होती हैं,जिनमे संश्लेषण होता है तथा कुछ क्रियाएँ ऐसी होती हैं,जिनमे विखंडन होता है।
(1) - उपचयी अभिक्रिया(Anabolic Reaction)--
वे अभिक्रियाएँ जिनमे सरल कार्बनिक पदार्थो से जटिल कार्बनिक पदार्थो का निर्माण होता है।
जैसे-- प्रकाश संश्लेषण
(2)-- अपचयी अभिक्रिया(Catabolic Reaction)--
जैव शारीर के अंदर होने वाली वे अभिक्रिया जिनमे जटिल कार्बनिक यौगिकों के विखंडन से सरल अणुओ का निर्माण होता है,उसे अपचयी अभिक्रिया कहते हैं।
जैसे-- श्वशन,पाचन।
{अब आप लोग अपने Chapter के खास Topic के करीब हो। आगे का नोट्स भी मिल जायेगा}
@nitinashishyadav
सुविचार
मिलता तो बहुत है
इस जिंदगी में,
बस हम गिनती उसी
की करते है,
जो हासिल न हो सका
सुप्रभात
Magic. ...✍
मिलता तो बहुत है
इस जिंदगी में,
बस हम गिनती उसी
की करते है,
जो हासिल न हो सका
सुप्रभात
Magic. ...✍
UP Board 10th & 12th (NEET/JEE) pinned «जैव प्रक्रम(Life Process)- प्रत्येक जीवधारी को जीवित रहने के लिए स्वयं में कुछ क्रियाओ को करना पड़ता है। अतः वे सभी क्रियाएँ जो जीव को जीवित बनाये रखने के लिए आवश्यक होती हैं, उन्हें जीवन की प्रक्रियाएं अर्थात जैव प्रक्रम…»
I want to start Google meet online class.
Are you accept it ?
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Not yet
1%
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UP Board 10th & 12th (NEET/JEE)
जैव प्रक्रम(Life Process)- प्रत्येक जीवधारी को जीवित रहने के लिए स्वयं में कुछ क्रियाओ को करना पड़ता है। अतः वे सभी क्रियाएँ जो जीव को जीवित बनाये रखने के लिए आवश्यक होती हैं, उन्हें जीवन की प्रक्रियाएं अर्थात जैव प्रक्रम…
➡पोषण(Nutrition)--
भोजन से पोषक पदार्थो का प्राप्त करना ही पोषण कहलाता है।
✴दूसरे शब्दों में कह सकते हैं,की पोषण वह क्रिया है,जिसके द्वारा कोई जीव कार्य करने हेतु तथा वृद्धि के लिए आवश्यक पदार्थो को ऊर्जा के लिए प्राप्त करता है।
➡कोई भी जीव निम्नलिखित आवश्यकताओ के पूर्ति के लिए पोषण का प्रयोग करता है।
(1)-- ऊर्जा की प्राप्ति~~~
सभी जीवधारी को ऊर्जा की आवश्यकता होती है। भोजन से को ग्लूकोज़ की प्राप्ति होती है तथा कोशिकीय श्वसन के पश्चात ग्लूकोज से ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
(2)---टूटी फूटी कोशिकाओ की मरम्मत~
विटामिन व् खनिज,लवण तथा प्रोटीन शरीर में टूट-फुट की मरम्मत करता है ।
(3)---रोगों से रक्षा~~~
विटामिन,खनिज तथा प्रोटीन शरीर के प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनती है।
{शेष अब अगले नोट्स में}
@nitinranker
भोजन से पोषक पदार्थो का प्राप्त करना ही पोषण कहलाता है।
✴दूसरे शब्दों में कह सकते हैं,की पोषण वह क्रिया है,जिसके द्वारा कोई जीव कार्य करने हेतु तथा वृद्धि के लिए आवश्यक पदार्थो को ऊर्जा के लिए प्राप्त करता है।
➡कोई भी जीव निम्नलिखित आवश्यकताओ के पूर्ति के लिए पोषण का प्रयोग करता है।
(1)-- ऊर्जा की प्राप्ति~~~
सभी जीवधारी को ऊर्जा की आवश्यकता होती है। भोजन से को ग्लूकोज़ की प्राप्ति होती है तथा कोशिकीय श्वसन के पश्चात ग्लूकोज से ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
(2)---टूटी फूटी कोशिकाओ की मरम्मत~
विटामिन व् खनिज,लवण तथा प्रोटीन शरीर में टूट-फुट की मरम्मत करता है ।
(3)---रोगों से रक्षा~~~
विटामिन,खनिज तथा प्रोटीन शरीर के प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनती है।
{शेष अब अगले नोट्स में}
@nitinranker
Good morning every one
हमने अभी जीवविज्ञान में पोषण के शुरुआती टॉपिक के बारे में जान लिया है।
अब आगे जो है वो बहुत महत्वपूर्ण है।
अब आगे है-- पोषण के प्रकार:
{ जल्द ही नोट्स भेज दिया जायेगा। }
हमने अभी जीवविज्ञान में पोषण के शुरुआती टॉपिक के बारे में जान लिया है।
अब आगे जो है वो बहुत महत्वपूर्ण है।
अब आगे है-- पोषण के प्रकार:
{ जल्द ही नोट्स भेज दिया जायेगा। }
रिश्ते हमेशा "तितली" जैसे होते है
जोर से पकड़ो तो "मर" जाते है
छोड़ दो तो "उड़" जाते हैं
और प्यार से पकड़ो तो उँगलियों पर
अपना "रंग" छोड़ जाते है..
जिंदगी की सुंदरता इस बात मैं नहीं है कि हम कितने खुश रहते है,
बल्कि इस बात मैं है कि कितने लोग हमसे खुश रहते है.....
जोर से पकड़ो तो "मर" जाते है
छोड़ दो तो "उड़" जाते हैं
और प्यार से पकड़ो तो उँगलियों पर
अपना "रंग" छोड़ जाते है..
जिंदगी की सुंदरता इस बात मैं नहीं है कि हम कितने खुश रहते है,
बल्कि इस बात मैं है कि कितने लोग हमसे खुश रहते है.....
पोषण के प्रकार---
पोषण विधि के आधार पर पोषण 2 प्रकार के होते हैं।
1)----स्वपोषी पोषण(Autotrophic nutrition)---
पोषण की वह विधि जिसमे कोई जीव स्वयं को पोषित करता है।स्वपोषी के अंतर्गत समस्त हरे पेड़ पौधे आते हैं।अतः हम कह सकते हैं की पोषण की वह विधि जिसमे हरे पेड़ पौधे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा स्वयं को पोषित करता है,स्वपोषी पोषण कहलाता है।
2)---परपोषी पोषण(Heterotrophic nutrition)----
जीवो में होने वाला ऐसा पोषण जिसमे कोई जीव पोषण क्रिया के लिए दूसरे जीव पर निर्भर रहता है,परपोषी पोषण कहलाता है।
{अब आगे आप लोग प्रकाश संश्लेषण के बारे में पढ़ेंगे}
धन्यवाद्
@nitinranker
पोषण विधि के आधार पर पोषण 2 प्रकार के होते हैं।
1)----स्वपोषी पोषण(Autotrophic nutrition)---
पोषण की वह विधि जिसमे कोई जीव स्वयं को पोषित करता है।स्वपोषी के अंतर्गत समस्त हरे पेड़ पौधे आते हैं।अतः हम कह सकते हैं की पोषण की वह विधि जिसमे हरे पेड़ पौधे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा स्वयं को पोषित करता है,स्वपोषी पोषण कहलाता है।
2)---परपोषी पोषण(Heterotrophic nutrition)----
जीवो में होने वाला ऐसा पोषण जिसमे कोई जीव पोषण क्रिया के लिए दूसरे जीव पर निर्भर रहता है,परपोषी पोषण कहलाता है।
{अब आगे आप लोग प्रकाश संश्लेषण के बारे में पढ़ेंगे}
धन्यवाद्
@nitinranker
🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿
*👇👇 आज का प्रेरक प्रसंग 👇👇*
*!! सोच का फर्क !!*
~~~~~~~~~~~~~
एक गरीब आदमी बड़ी मेहनत से एक - एक रूपया जोड़ कर मकान बनवाता है. उस मकान को बनवाने के लिए वह पिछले 20 वर्षों से एक - एक पैसा बचत करता है ताकि उसका परिवार छोटे से झोपड़े से निकलकर पक्के मकान में सुखी से रह सके.
आखिरकार एक दिन मकान बन कर तैयार हो जाता है. तत्पश्चात पंडित से पूछ कर गृह प्रवेश के लिए शुभ तिथि निश्चित की जाती है. लेकिन गृहप्रवेश के 2 दिन पहले ही भूकंप आता है और उसका मकान पूरी तरह ध्वस्त हो जाता है. यह खबर जब उस आदमी को पता चलती है तो वह दौड़ा दौड़ा बाजार जाता है और मिठाई खरीद कर ले आता है. मिठाई लेकर वह घटनास्थल पर पहुंचता है जहां पर काफी लोग इकट्ठे होकर उसके मकान गिरने पर अफसोस जाहिर कर रहे थे.
ओह बेचारे के साथ बहुत बुरा हुआ, कितनी मुश्किल से एक - एक पैसा जोड़कर मकान बनवाया था. इसी प्रकार लोग आपस में तरह तरह की बातें कर रहे थे.
वह आदमी वहां पहुंचता है और झोले से मिठाई निकाल कर सबको बांटने लगता है. यह देखकर सभी लोग हैरान हो जाते हैं. तभी उसका एक मित्र उससे कहता है, कहीं तुम पागल तो नहीं हो गए हो, घर गिर गया, तुम्हारी जीवन भर की कमाई बर्बाद हो गई और तुम खुश होकर मिठाई बांट रहे हो.
वह आदमी मुस्कुराते हुए कहता है, तुम इस घटना का सिर्फ नकारात्मक पक्ष देख रहे हो इसलिए इसका सकारात्मक पक्ष तुम्हें दिखाई नहीं दे रहा है. ये तो बहुत अच्छा हुआ कि मकान आज ही गिर गया. वरना तुम्हीं सोचो अगर यह मकान 2 दिनों के बाद गिरता तो मैं मेरी पत्नी और बच्चे सभी मारे जा सकत थे. तब कितना बड़ा नुकसान होता.
*शिक्षा:-*
यदि वह व्यक्ति नकारात्मक दृष्टिकोण से सोचता तो शायद वह Depression का शिकार हो जाता. लेकिन केवल एक सोच के फर्क ने उसके दुःख को परिवर्तित कर दिया. ईश्वर जो भी करता है, अच्छा ही करता है।
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
*👇👇 आज का प्रेरक प्रसंग 👇👇*
*!! सोच का फर्क !!*
एक गरीब आदमी बड़ी मेहनत से एक - एक रूपया जोड़ कर मकान बनवाता है. उस मकान को बनवाने के लिए वह पिछले 20 वर्षों से एक - एक पैसा बचत करता है ताकि उसका परिवार छोटे से झोपड़े से निकलकर पक्के मकान में सुखी से रह सके.
आखिरकार एक दिन मकान बन कर तैयार हो जाता है. तत्पश्चात पंडित से पूछ कर गृह प्रवेश के लिए शुभ तिथि निश्चित की जाती है. लेकिन गृहप्रवेश के 2 दिन पहले ही भूकंप आता है और उसका मकान पूरी तरह ध्वस्त हो जाता है. यह खबर जब उस आदमी को पता चलती है तो वह दौड़ा दौड़ा बाजार जाता है और मिठाई खरीद कर ले आता है. मिठाई लेकर वह घटनास्थल पर पहुंचता है जहां पर काफी लोग इकट्ठे होकर उसके मकान गिरने पर अफसोस जाहिर कर रहे थे.
ओह बेचारे के साथ बहुत बुरा हुआ, कितनी मुश्किल से एक - एक पैसा जोड़कर मकान बनवाया था. इसी प्रकार लोग आपस में तरह तरह की बातें कर रहे थे.
वह आदमी वहां पहुंचता है और झोले से मिठाई निकाल कर सबको बांटने लगता है. यह देखकर सभी लोग हैरान हो जाते हैं. तभी उसका एक मित्र उससे कहता है, कहीं तुम पागल तो नहीं हो गए हो, घर गिर गया, तुम्हारी जीवन भर की कमाई बर्बाद हो गई और तुम खुश होकर मिठाई बांट रहे हो.
वह आदमी मुस्कुराते हुए कहता है, तुम इस घटना का सिर्फ नकारात्मक पक्ष देख रहे हो इसलिए इसका सकारात्मक पक्ष तुम्हें दिखाई नहीं दे रहा है. ये तो बहुत अच्छा हुआ कि मकान आज ही गिर गया. वरना तुम्हीं सोचो अगर यह मकान 2 दिनों के बाद गिरता तो मैं मेरी पत्नी और बच्चे सभी मारे जा सकत थे. तब कितना बड़ा नुकसान होता.
*शिक्षा:-*
यदि वह व्यक्ति नकारात्मक दृष्टिकोण से सोचता तो शायद वह Depression का शिकार हो जाता. लेकिन केवल एक सोच के फर्क ने उसके दुःख को परिवर्तित कर दिया. ईश्वर जो भी करता है, अच्छा ही करता है।
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
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