UP Board 10th & 12th (NEET/JEE)
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❤️ Active and Passive Voice ❤️

👉Active तथा Passive Voice में अन्तर

👉(1) Active Voice (कर्तृवाच्य)-ऐसे वाक्यों में वास्तविक कर्ता को ही प्रधानता दी जाती है अर्थात् क्रिया द्वारा बताये गये
कार्य करने वाला ही कर्ता के स्थान पर रखा जाता है।

👉(2) Passive Voice (कर्मवाच्य)-ऐसे वाक्यों में Object (कर्म) को प्रधानता दी जाती है अर्थात् Object को Subject के स्थान पर रखा जाता है और ऐसा Subject कोई कार्य नहीं करता, बल्कि उसके लिए या उससे सम्बन्धित कोई कार्य किया जाता है। उदाहरण

🍏 My sister sings a song.

🍎A song is sung by my sister.

🍏The child broke the glass.


🍎The glass was broken by the child

🍏The driver is driving a taxi.

🍎A taxi is being driven by the driver.

🍏The child will pluck the flower.

🍎The flower will be plucked by the child.

🍏The principal has punished Suresh.

🍎Suresh has been punished by the principal.


उपर्युक्त वाक्यों को देखने से पता लगेगा कि Active Voice का Object Passive Voice में Subject
का स्थान ले लेता है तथा Active Voice का Subject Passive Voice में by के साथ , Object का स्थान ले लेता है।

यदि Subject या Object के स्थान पर कोई Pronoun दिया हो तब उसका रूप भी निम्नलिखित प्रकार बदल जाता है। । साथ-ही-साथ Active Voice के Verb का रूप Passive Voice में उसी Tense में निम्नवत् बदल जाता है।

अत: Active Voice से Passive Voice तथा Passive Voice से Active Voice में बदलते समय निम्नलिखित बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना आवश्यक है
👉👉ध्यान रखिए-

1. Active से Passive Voice में बदलते समय Active Voice के Object को Passive Voice में Subject बना देते हैं तथा Active Voice के Subject को Passive Voice में Verb के बाद by के साथ प्रयोग करते हैं।

2. Pronoun का स्थान बदलते समय उनका रूप भी Active तथा Passive Voice में आगे दी गयी तालिका के अनुसार परिवर्तित हो जाएगा


👉I को by me
👉 We को by us
👉you को by you
👉He को by him
👉she को by her
👉they को by them
👉someone को हटा देते है
👉Everyone को हटा देते हैं
👉anyone को हटा देते हैं
👉Noun , by के साथ ही same rehta hai
👉उपर्युक्त तालिका से स्पष्ट होता है कि Subject के स्थान पर प्रयुक्त Pronoun I, We, He आदि Passive बनाते समय by me, by us, by him ओर passive ko Active बनाते समयby me, by us, by him को बदलकर Subject के स्थान पर क्रमश: I, We, He आदि हो जाते हैं। जैसे-

🍏He gave me a book.

🍎I was given a book by him.
वस्तुनिष्ठ_प्रश्न_जीव_विज्ञान.pdf
1.2 MB
वस्तुनिष्ठ प्रश्न जीव विज्ञान
UP Board 10th & 12th (NEET/JEE)
वस्तुनिष्ठ_प्रश्न_जीव_विज्ञान.pdf
इन प्रश्नों k उत्तर अपको दोपहर को मिल जाएंगे तब तक आप इन्हे हल करने का प्रयत्न करे
वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का उत्तर
❤️❤️Passive voice❤️❤️



निम्नलिखित वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िएI.
Present Indefinite Tense:

1. यहाँ पुरानी पुस्तकें खरीदी जाती हैं।
Old books are bought here.

2. इस सड़क पर रोजाना झाडू लगायी जाती है।
This road is swept everyday.


👉II. Past Indefinite Tense :

इस वर्ष दीवाली धूमधाम से मनाई गई। The Diwali was celebrated in a grand way this year.

इस विषय में मेरी सलाह नहीं ली गई।
I was not consulted in this matter.

👉III. Future Indefinite Tense

5. आज शाम को मेरा जन्मदिवस मनाया जाएगा।
My birthday will be celebrated this evening.

6. अपराधी को सजा दी जाएगी।
The criminal will be punished.


👉IV. Present Continuous Tense :

7. मैदान में फुटबॉल खेली जा रही है।
Football is being played in the ground.

8. गेहूँ के खेतों में सिंचाई की जा रही है।
The wheet fields are being irrigated.


नियम : (i) Passive Voice में कर्म (Object) को प्रधानता दी जाती है। अत: Passive Voice के लिए कर्म का होना अति आवश्यक है।

(ii) Passive Voice में Verb की Third Form का प्रयोग होता है। इससे पहले Tense के अनुसार सहायक क्रिया (is, am, are, was, were, be अथवा being) का प्रयोग होता है।

जैसे-Present Indefinite Tense में सहायक क्रिया is, am, are (वाक्य के Subject के अनुसार), Past Indefinite Tense में सहायक क्रिया was, were (वाक्य के Subject के अनुसार) और Future Indefinite Tense में सहायक क्रिया will be, shall be (वाक्य के Subject के अनुसार); तथा
(ii) Present Perfect Continuous, में सहायक क्रिया is being, am being, are being तथा Past Continuous में was being, were being (वाक्य के Subject के अनुसार) प्रयोग होती हैं। Passive Voice में Future Continuous Tense नहीं होता है।



👉V. Past Continuous Tense :

9. इस मकान में कल सफेदी की जा रही थी।
This house was being whitewashed yesterday.

10. चोर को थाने में पीटा जा रहा था।

The theif was being beaten at station.

Note : Future Continuous Tense में Passive Voice नहीं बनता है।


👉 VI. Present Perfect Tense:

11. सौदा कर लिया गया है।

The bargain has been struck.

12. क्या तुम्हारे शत्रु को हथकड़ी लग गई है?

Has your enemy been hand-cuffed?

13. उसकी सेवाएँ क्यों समाप्त की जा चुकी हैं?

Why has he been dismissed ?



👉VII. Past Perfect Tense :

14. क्या आठ बजे तक सब दुकानें बन्द हो चुकी थीं?

Had all the shops been closed by 8 o'clock.

15. अवकाश आरम्भ होने से पहले हमारा कोर्स

Our courses had been completed before the vacations began.

16. क्या उसके आने से पूर्व उत्सव समाप्त हो चुका था?

Had the function been ended before he came?


👉VIII. Future Perfect Tense :

17. वह दर-दर की ठोकरे खा चुका होगा।

He will have been driven from pillar to post.

18. अगले वर्ष तक सुनामी ग्रस्त लोगों को बसाया जा चुका होगा।

The Tsunami victims will have been rehabilitated by next year.


19.क्या हमारे वहाँ पहुँचने से पहले आग बुझाई जा सकी होगी?

Will the fire have been extinguished before we reach there?


नियम : (i) Past Continuous में Subject के अनुसार सहायक क्रिया was being/were being का प्रयोग होता है।(उदाहरण 9)

(ii) Present Perfect Tense में Subject के अनुसार have been/has been सहायक क्रिया का प्रयोग करते हैं।
(उदाहरण 11, 12)

(ii) Past Perfect Tense के वाक्यों में प्रत्येक Subject के साथ सहायक क्रिया had been का प्रयोग होता है।
(उदाहरण 14, 15, 16)

(vi) Future Perfect Tense के Subject के अनुसार सहायक क्रिया will have been/ shall
(उदाहरण 17, 18, 19)


Note : (i) Will has been/ shall has been का प्रयोग कभी नहीं होता है।
❤️वाष्पोत्सर्जन (Transpiration)❤️

👉वाष्पोत्सर्जन की परिभाषा (Definition of Transpiration)

मूलरोमों द्वारा पौधे जमीन से बहुत अधिक मात्रा में जल का अवशोषण करते हैं। जल की कुछ ही मात्रा पौधों के उपयोग में आती है। अनुमान है कि अवशोषित जल का लगभग 98% पौधे के वायवीय भागों (पत्तियों व तना) से वाष्प के रूप में वायुमण्डल में आ जाता है। पौधों के वायवीय भागों से पानी का वाष्प के रूप में उड़ने की क्रिया को वाष्पोत्सर्जन या उत्स्वेदन कहते हैं।




👉वाष्पोत्सर्जन के प्रकार (Types of Transpiration)

पौधों के तीन भागों से वाष्पोत्सर्जन होता है :

1. रन्ध्रों द्वारा (By Stomata) वाष्पोत्सर्जन :
पत्तियों, हरे तनों तथा कुछ रूपान्तरित तनों की सतह पर असंख्य छोटे-छोटे छिद्र होते हैं। एक जोड़ी वृक्काकार रन्ध्र कोशिकाएँ इन छिद्रों के खुलने व बन्द होने का नियन्त्रण करती हैं। इन छिद्रों द्वारा वायु का आवागमन होता है जिससे पादप कोशिकाओं को श्वसन के लिए ऑक्सीजन मिलती है। वायु के सम्पर्क में जल का वाष्पीकरण होता है और रन्ध्रों से बाहर निकलने वाली वायु में जल भी वाष्प के रूप में बाहर निकलता है। वाष्पोत्सर्जन का लगभग 90% भाग रन्ध्रों द्वारा होता है। इसे रन्ध्रीय वाष्पोत्सर्जन कहते हैं।

2. उपत्वचा द्वारा वाष्पोत्सर्जन (By Cuticular Transpiration) :

पौधों का बाहरी भाग व पत्तियाँ उपत्वचा या क्यूटिकल द्वारा ढके होते हैं। इनसे भी वाष्पीकरण द्वारा जल उड़ता है। इसे उपत्वचीय वाष्पोत्सर्जन कहते हैं।

3. वातरन्ध्रों द्वारा वाष्पोत्सर्जन (By Lenticular Transpiration) :

वृक्षों के तने व शाखाओं पर छाल में बीच-बीच में छोटे-छोटे वातरन्ध्र होते हैं। इनसे भी वाष्पोत्सर्जन होता है।


👉वाष्पोत्सर्जन का लाभ

(1) पौधों में पानी का अवरोहण व अवशोषण तथा जल के साथ खनिज लवणों का अवशोषण व अवरोहण वाष्पोत्सर्जनके कारण ही सम्भव है।

(2) पौधों में तापक्रम का नियमन होता है।

(3) हानिकारक पदार्थों का उत्सर्जन सम्भव है।

(4) आवश्यकता से अधिक अवशोषित जल को पादप शरीर से बाहर निकालता है।

👉वाष्पोत्सर्जन को प्रभावित करने वाले कारक

1. वायु की आर्द्रता (Humidity of Air) :
वायुमण्डल में आर्द्रता बढ़ने पर वाष्पोत्सर्जन कम होता है।

2. वायु की गति (Velocity of Wind) : तेज हवा चलने या आंधी आने पर वाष्पोत्सर्जन बढ़ जाता है।

3. प्रकाश की तीव्रता (Intensity of Light) : प्रकाश या दिन में वाष्पोत्सर्जन अधिक होता है और रात में कम क्योकि
दिन में प्रकाश संश्लेषण के लिए स्टोमेटा खुले रहते हैं जिससे वाष्पीकरण अधिक होता है।

4. तापमान (Temperature) : तापमान अधिक होने पर वाष्पोत्सर्जन की गति बढ़ जाती है।

5. पत्तियों पर स्टोमेटा की संख्या व स्थिति वाष्पीकरण की दर को प्रभावित करते हैं।

@upbordnotes
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श्वसन एवं दहन में अंतर
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*👇👇 आज का प्रेरक प्रसंग 👇👇*

*!! नेत्रहीन संत !!*
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एक बार एक राजा अपने सहचरों के साथ शिकार खेलने जंगल में गया था। वहाँ शिकार के चक्कर में एक दूसरे से बिछड़ गये और एक दूसरे को खोजते हुये राजा एक नेत्रहीन संत की कुटिया में पहुँच कर अपने बिछड़े हुये साथियों के बारे में पूछा।

नेत्र हीन संत ने कहा महाराज सबसे पहले आपके सिपाही गये हैं, बाद में आपके मंत्री गये, अब आप स्वयं पधारे हैं। इसी रास्ते से आप आगे जायें तो मुलाकात हो जायगी। संत के बताये हुये रास्ते में राजा ने घोड़ा दौड़ाया और जल्दी ही अपने सहयोगियों से जा मिला और नेत्रहीन संत के कथनानुसार ही एक दूसरे से आगे पीछे पहुंचे थे।

यह बात राजा के दिमाग में घर कर गयी कि नेत्रहीन संत को कैसे पता चला कि कौन किस ओहदे वाला जा रहा है। लौटते समय राजा अपने अनुचरों को साथ लेकर संत की कुटिया में पहुंच कर संत से प्रश्न किया कि आप नेत्रविहीन होते हुये कैसे जान गये कि कौन जा रहा है, कौन आ रहा है ?

राजा की बात सुन कर नेत्रहीन संत ने कहा महाराज आदमी की हैसियत का ज्ञान नेत्रों से नहीं उसकी बातचीत से होती है। सबसे पहले जब आपके सिपाही मेरे पास से गुजरे तब उन्होंने मुझसे पूछा कि ऐ अंधे इधर से किसी के जाते हुये की आहट सुनाई दी क्या ? तो मैं समझ गया कि यह संस्कार विहीन व्यक्ति छोटी पदवी वाले सिपाही ही होंगे।

जब आपके मंत्री जी आये तब उन्होंने पूछा बाबा जी इधर से किसी को जाते हुये..... तो मैं समझ गया कि यह किसी उच्च ओहदे वाला है, क्योंकि बिना संस्कारित व्यक्ति किसी बड़े पद पर आसीन नहीं होता। इसलिये मैंने आपसे कहा कि सिपाहियों के पीछे मंत्री जी गये हैं।

जब आप स्वयं आये तो आपने कहा सूरदास जी महाराज आपको इधर से निकल कर जाने वालों की आहट तो नहीं मिली तो मैं समझ गया कि आप राजा ही हो सकते हैं। क्योंकि आपकी वाणी में आदर सूचक शब्दों का समावेश था और दूसरे का आदर वही कर सकता है जिसे दूसरों से आदर प्राप्त होता है। क्योंकि जिसे कभी कोई चीज नहीं मिलती तो वह उस वस्तु के गुणों को कैसे जान सकता है!

दूसरी बात यह संसार एक वृक्ष स्वरूप है- जैसे वृक्ष में डालियाँ तो बहुत होती हैं पर जिस डाली में ज्यादा फल लगते हैं वही झुकती है। इसी अनुभव के आधार में मैं नेत्रहीन होते हुये भी सिपाहियों, मंत्री और आपके पद का पता बताया अगर गलती हुई हो महाराज तो क्षमा करें।

राजा संत के अनुभव से प्रसन्न हो कर संत की जीवन व्रत्ति का प्रबंन्ध राजकोष से करने का मंत्री जी को आदेशित कर वापस राजमहल आया।
*शिक्षा:-*
आजकल हमारा मध्यमवर्ग परिवार संस्कार विहीन होता जा रहा है। थोड़ा सा पद, पैसा व प्रतिष्ठा पाते ही दूसरे की उपेक्षा करते हैं, जो उचित नहीं है। मधुर भाषा बोलने में किसी प्रकार का आर्थिक नुकसान नहीं होता है। अतः मीठा बोलने में कंजूसी नहीं करनी चाहिये।
*✍हम गरीब इतने हैं कि अपनी सांसे भी हमारी नहीं हैं और,*

*अमीर इतने हैं कि तीनों लोकों का मालिक हमारा है🙏*
❤️आन्तरिक या कोशिकीय श्वसन एवं उसके प्रकार👉👇👇👇👇
(Internal or Cellular Respiration and its Types)

श्वसन में भोज्य पदार्थों के ऑक्सीकरण की क्रिया अनेक पदों में सम्पन्न होती है। इस क्रिया जब को दो पदों में बाँट सकते हैं : (1) ग्लाइकोलाइसिस, (2) क्रेब्स चक्र।

👉(1) ग्लाइकोलाइसिस (glycolysis) में ग्लूकोज जैसे पदार्थ को पाइरुविक अम्ल (pyruvic acid) में बदला जाता है। यह क्रिया कोशिकाद्रव्य में होती है। इसके बाद की क्रियाएँ ऑक्सीजन (O2) की उपस्थिति अथवा अनुपस्थिति पर निर्भर करती हैं।

👉(2) क्रेब्स चक्र (Krebs cycle) में पाइरुविक अम्ल के पूर्ण ऑक्सीकरण से जल तथा कार्बन डाइऑक्साइड बनते हैं। यह क्रिया ऑक्सीजन की उपस्थिति में माइटोकॉण्ड्रिया (mitochondria) में सम्पन्न होती है। इसे ऑक्सी या वायवीय श्वसन (aerobic respiration) कहते हैं।
ऑक्सीजन के अभाव में कोशिकाद्रव्य में ही पाइरुविक अम्ल (pyruvic acid) के अपूर्ण ऑक्सीकरण से एथिल ऐल्कोहॉल (ethyl alcohol) तथा कार्बन डाइऑक्साइड बनती है। इस प्रक्रिया को अनॉक्सी या अवायवीय श्वसन (anaerobic respiration) कहते हैं।


❤️ATP की उत्पत्ति (Generation of ATP)

👉श्वसन क्रिया में ग्लूकोज के एक अणु से कुल 38 ATP अणु निम्नलिखित चक्रों के अन्तर्गत प्राप्त होते हैं

(i) ग्लाइकोलाइसिस के अन्तर्गत 10 ATP अणु प्राप्त होते हैं और 2 ATP अणु खर्च हो जाते हैं; अत: 8 ATP अणु प्राप्त होते हैं।

(ii) एसीटिल को एन्जाइम ‘ए’ के बनते समय 6 ATP अणु प्राप्त होते हैं।

(iii) क्रेब्स चक्र में 24 ATP अणु प्राप्त होते हैं।

❤️श्वसन चक्र एवं श्वसन दर (Respiratory Cycle and Rate of Respiration)

श्वसन चक्र में वायु को ग्रहण करने तथा फेफड़ों से वायु निकालने की दोनों क्रियाएँ होती हैं। एक मिनट में जितनी बार वायु का निश्वसन होता है, उसे श्वसन दर कहते हैं। यह बच्चों में अधिक एवं वयस्कों में कम होता है। विश्रामावस्था में इसकी दर औसतन 12-15 प्रति मिनट होती है।


👉श्वसन दर पर ऊँचाई का प्रभाव (Effect of Height on Respiratory Rate)

वायु का घनत्व (density of air) समुद्र सतह से ऊपर उठने पर कम होता जाता हैं। जिससे इसमें उपस्थित गैसों का वायुदाब भी कम होता जाता है। अतः पहाड़ों पर चढ़ते समय ऊँचाई के साथ-साथ O2 की मात्रा कम होती जाती है। शरीर में O2 की कमी के कारण श्वास फूलने लगता है एवं श्वसन दर बढ़ जाती है। विभिन्न ऊँचाइयों का श्वसन दर पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है।

(1) 3,500-4,000 मीटर की ऊँचाई पर O2 की अधिक कमी के कारण थकावट, शिथिलता, सिर दर्द व मिचली आदि का आभास होता है।

(2) 5,000-6,000 मीटर की ऊँचाई पर शरीर के रुधिर से CO2 के निकलने से pH बढ़ जाता है। जिससे श्वसन दर
बढ़ जाती है।

(3) 6,000 से अधिक की ऊँचाई पर O2 की मात्रा बहुत कम हो जाती है और व्यक्ति को मूर्छा आने लगती है। इस समय कृत्रिम O2 की आवश्यकता होती है।

(4) 11,000 मीटर या उससे ऊपर कृत्रिम O2 से भी काम नहीं चलता। इसी कारण हवाई जहाज वायुरुद्ध बनाये जाते हैं।



@upbordnotes
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*👇👇 आज का प्रेरक प्रसंग 👇👇*

*!! असली शिक्षा !!*
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एक बड़ी सी गाड़ी आकर बाजार में रूकी, कार में ही मोबाईल से बातें करते हुए महिला ने अपनी बच्ची से कहा, जा उस बुढिया से पूछ सब्जी कैंसे दी, बच्ची कार से उतरतें ही- अरें बुढिया ! यें सब्जी कैंसे दी?
40 रूपयें किलो, बेबी जी...

सब्जी लेते ही उस बच्ची ने सौ रूपयें का नोट उस सब्जी वाली को फेंक कर दिया और आकर कार पर बैठ गयी, कार जाने लगी तभी अचानक किसी ने कार के सीसे पर दस्तक दी, एक छोटी सी बच्ची जो हाथ में 60 रूपयें कार में बैठी उस औरत को देते हुए, बोलती हैं आंटी जी यें आपके सब्जी के बचें 60 रूपयें हैं, आपकी बेटी भूल आयी हैं। कार में बैठी औरत ने कहा तुम रख लों, उस बच्ची ने बड़ी ही मिठी और सभ्यता से कहा- नहीं आंटी जी हमारें जितने पैंसे बनते थें हमने ले लियें, हम इसे नहीं रख सकतें, मैं आपकी आभारी हूं, आप हमारी दुकान पर आए और आशा करती हूं कि सब्जी आपको अच्छी लगें, जिससे आप हमारें ही दुकान पर हमेशा आए। उस लड़की ने हाथ जोड़े और अपनी दुकान लौट गयी...

कार में बैठी महिला उस लड़की से बहुत प्रभावित हुई और कार से उतर कर फिर सब्जी की दुकान पर जाने लगी, जैसें ही वहाँ पास गयी, सब्जी वाली अपनी बच्ची को पूछते हुयें, तुमने तमीज से बात की ना, कोई शिकायत का मौका तो नहीं दिया ना..?

बच्ची ने कहा, हाँ माँ मुझे आपकी सिखाई हर बात याद है, कभी किसी बड़े का अपमान मत करो, उनसे सभ्यता से बात करो, उनकी कद्र करो, क्यूंकि बड़े-बुजर्ग बड़े ही होते हैं, मुझे आपकी सारी बात याद है और मैं सदैव इन बातों का स्मरण रखूंगी। बच्ची ने फिर कहा, अच्छा माँ अब मैं स्कूल चलती हूं, शाम में स्कूल से छुट्टी होते ही, दुकान पर आ जाऊंगी...

कार वाली महिला शर्म से पानी पानी थी, क्यूंकि एक सब्जी वाली अपनी बेटी को इंसानियत और बड़ों से बात करने के शिष्टाचार का पाठ सीखा रही थी और वह महिला अपनी बेटी को छोटा-बड़ा, ऊंच-नीच का मन में बीज बो रही थी..!!

*शिक्षा:-*
सबसे अच्छा तो वो कहलाता है जो आसमान पर भी रहता है और जमींन से भी जुड़ा रहता है। बस इंसानियत, भाईचारें, सभ्यता, आचरण, वाणी में मिठास, सब की इज्जत करने की सीख दीजिए अपने बच्चों को, क्यूंकि अब बस यहीं पढ़ाई है जो आने वाले समय में बहुत ही ज्यादा मुश्किल होगी इसे पढ़ने, इसे याद रखने, इसे ग्रहण करने में और जीवन को उपयोगी बनानें में !!

*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
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❤️❤️विद्युत-रासायनिक श्रेणी (Electrochemical Series)👇👇

विभिन्न इलेक्ट्रोडों या उन पर होने वाली अर्द्ध-अभिक्रियाओं के मानक इलेक्ट्रोड विभवों को बढ़ते हुए क्रम में रखने पर जो श्रेणी प्राप्त होती है उसे विद्युत-रासायनिक श्रेणी कहते हैं। इस श्रेणी में सभी धातु अपनी सक्रियता (reactivity) के घटते हुए क्रम में स्थित हैं।

[ नोट-वास्तव में विद्युत-रासायनिक श्रेणी में विभिन्न इलेक्ट्रोडों या उन पर होने वाली अर्द्धअभिक्रियाओं के मानक इलेक्ट्रोड विभवों को किसी भी (बढ़ते हुए या घटते हुए) क्रम में रखा जा सकता है।


👉 सूचना :-चूँकि उ०प्र० बोर्ड की परीक्षाओं में अब तक सभी प्रश्न इस आधार पर पूछे गये हैं कि विद्युत-रासायनिक श्रेणी में मानक इलेक्ट्रोड विभव बढ़ते क्रम में रखे जायें,

❤️विद्युत-रासायनिक श्रेणी के मुख्य उपयोग

1. विद्युत-रासायनिक श्रेणी की सहायता से धातुओं की क्रियाशीलता की तुलना की जा सकती है।

विद्युत-रासायनिक श्रेणी में जो धातु ऊपर की ओर स्थित हैं उनके इलेक्ट्रोड विभव कम होते हैं,
अर्थात् उनके अपचयन विभव कम होते हैं,
अर्थात् उनके ऑक्सीकरण विभव अधिक होते हैं,

अर्थात् उन पर होने वाली अर्द्ध-अभिक्रियाओं में ऑक्सीकरण होने की प्रवृत्ति अधिक होती है,

अर्थात् उन धातुओं की ऑक्सीकृत होने की प्रवृत्ति अधिक होती है, अर्थात् उन धातुओं की इलेक्ट्रॉन त्याग कर धनायन बनाने की प्रवृत्ति अधिक होती है,

अर्थात् वे धातु अधिक क्रियाशील होती हैं।

अत: धातुओं की क्रियाशीलता उनके इलेक्ट्रोड विभवों के बढ़ते हुए क्रम में घटती है तथा विद्युत-रासायनिक श्रेणी में धातुओं को उनकी सक्रियता (reactivity) के घटते हुए क्रम में रखा गया है।

उदाहरणार्थ-अग्रांकित सारणी में Fe, Cu से ऊपर स्थित है। अत: Fe, Cu से अधिक क्रियाशील धातु है। कुछ प्रमुख धातुओं की सक्रियता का घटता हुआ क्रम इस प्रकार है

K> Na > Mg > Al > Zn > Fe > Cu > Ag > Pt > Au

किसी अधिक सक्रिय धातु को किसी कम सक्रिय धातु के धनायनों के विलयन में डाल देने से कम सक्रिय धातु मुक्त हो जाती है।

उदाहरणार्थ- Fe विद्युत-रासायनिक श्रेणी में Cu के ऊपर स्थित है तथा Cu से अधिक क्रियाशील है। अत: Fe को CuSO4 विलयन में डालने से यह Cu को मुक्त कर देता है।

Fe + CuSO4→ FeSO4 +Cu

विद्युत-रासायनिक श्रेणी की सहायता से विभिन्न धातुओं द्वारा अम्लों में से हाइड्रोजन विस्थापित कर पाने की क्षमता की जानकारी प्राप्त होती है।

विद्युत-रासायनिक श्रेणी में जो धातु हाइड्रोजन से ऊपर स्थित हैं, हाइड्रोजन की तुलना मेंउनके इलेक्ट्रोड विभव कम होते हैं, अर्थात्
उनके अपचयन विभव कम होते हैं,
अर्थात् उनके ऑक्सीकरण विभव अधिक होते हैं,
अर्थात् उन पर होने वाली अर्द्ध-अभिक्रियाओं में ऑक्सीकरण होने की प्रवृत्ति अधिक होती है,
अर्थात् उनकी ऑक्सीकृत होने की प्रवृत्ति अधिक होती है,
अर्थात् उन धातुओं की धनायन बनाने की प्रवृत्ति अधिक होती है,
अर्थात् वे धातु अम्लों में से हाइड्रोजन को विस्थापित कर सकती हैं।

👉अत: विद्युत-रासायनिक श्रेणी में जो धातु हाइड्रोजन से ऊपर स्थित हैं, वे अम्लों में से हाइड्रोजन को विस्थापित कर देती हैं।

दूसरे शब्दों में, जिन धातुओं के इलेक्ट्रोड विभव हाइड्रोजन के इलेक्ट्रोड विभव से कम होते हैं, वे धातु अम्लों में से हाइड्रोजन को विस्थापित कर देती हैं। जिन धातुओं के इलेक्ट्रोड विभव हाइड्रोजन के इलेक्ट्रोड विभव से अधिक होते हैं,वे धातु अम्लों में से हाइड्रोजन विस्थापित नहीं करती हैं।

उदाहरणार्थ-ऐलुमिनियम तथा जिंक विद्युत-रासायनिक श्रेणी में हाइड्रोजन से ऊपर स्थित हैं। Al, Zn तथा हाइड्रोजन के मानक इलेक्ट्रोड विभव क्रमश: -1.66,
- 0.76 तथा 0 वोल्ट हैं। अत: Al तथा Zn, HCI में से हाइड्रोजन विस्थापित कर देते हैं। Al की HCl से अभिक्रिया की गति, Zn की HCl से अभिक्रिया की गति से तीव्र होती है।

2Al + 6HCl→ 2AlCl3 + 3H2

Zn + 2HCl ---> ZnCl2 + H2

कॉपर विद्युत-रासायनिक श्रेणी में हाइड्रोजन से नीचे स्थित है। Cu का मानक इलेक्ट्रोड विभव +0.34 वोल्ट है जो हाइड्रोजन के मानक इलेक्ट्रोड विभव से अधिक है। अत: Cu, HCI में से हाइड्रोजन विस्थापित नहीं करता है।

3. विद्युत-रासायनिक श्रेणी की सहायता से विभिन्न ऑक्सीकारकों की ऑक्सीकारक क्षमताओं तथा विभिन्न अपचायकों की अपचायक क्षमताओं की तुलना की जा सकती है।

4. विद्युत-रासायनिक श्रेणी से किसी गैल्वेनिक (या वोल्टीय) सेल के E.M.F की गणना की जा सकती है।

@upbordnotes
👉👉विघुत रासायनिक श्रेणी को सक्रियता श्रेणी भी कहते हैं
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻

*👇👇 आज का प्रेरक प्रसंग 👇👇*

*!! परोपकार की ईंट !!*
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बहुत समय पहले की बात है. एक विख्यात ऋषि गुरुकुल में बालकों को शिक्षा प्रदान किया करते थे. उनके गुरुकुल में बड़े-बड़े राजा महाराजाओं के पुत्रों से लेकर साधारण परिवार के लड़के भी पढ़ा करते थे।

वर्षों से शिक्षा प्राप्त कर रहे शिष्यों की शिक्षा आज पूर्ण हो रही थी और सभी बड़े उत्साह के साथ अपने अपने घरों को लौटने की तैयारी कर रहे थे कि तभी ऋषिवर की तेज आवाज सभी के कानो में पड़ी, “आप सभी मैदान में एकत्रित हो जाएं।”

आदेश सुनते ही शिष्यों ने ऐसा ही किया।

ऋषिवर बोले, “प्रिय शिष्यों, आज इस गुरुकुल में आपका अंतिम दिन है. मैं चाहता हूँ कि यहाँ से प्रस्थान करने से पहले आप सभी एक दौड़ में हिस्सा लें.

यह एक बाधा दौड़ होगी और इसमें आपको कहीं कूदना तो कहीं पानी में दौड़ना होगा और इसके आखिरी हिस्से में आपको एक अँधेरी सुरंग से भी गुजरना पड़ेगा.”

तो क्या आप सब तैयार हैं?”

” हाँ, हम तैयार हैं ”, शिष्य एक स्वर में बोले.

दौड़ शुरू हुई.

सभी तेजी से भागने लगे. वे तमाम बाधाओं को पार करते हुए अंत में सुरंग के पास पहुंचे. वहाँ बहुत अँधेरा था और उसमें जगह-जगह नुकीले पत्थर भी पड़े थे जिनके चुभने पर असहनीय पीड़ा का अनुभव होता था.

सभी असमंजस में पड़ गए, जहाँ अभी तक दौड़ में सभी एक सामान बर्ताव कर रहे थे वहीं अब सभी अलग -अलग व्यवहार करने लगे; खैर, सभी ने ऐसे-तैसे दौड़ ख़त्म की और ऋषिवर के समक्ष एकत्रित हुए।

“पुत्रों ! मैं देख रहा हूँ कि कुछ लोगों ने दौड़ बहुत जल्दी पूरी कर ली और कुछ ने बहुत अधिक समय लिया, भला ऐसा क्यों ?”, ऋषिवर ने प्रश्न किया।

यह सुनकर एक शिष्य बोला, “ गुरु जी, हम सभी लगभग साथ-साथ ही दौड़ रहे थे पर सुरंग में पहुचते ही स्थिति बदल गयी... कोई दुसरे को धक्का देकर आगे निकलने में लगा हुआ था तो कोई संभल-संभल कर आगे बढ़ रहा था और कुछ तो ऐसे भी थे जो पैरों में चुभ रहे पत्थरों को उठा-उठा कर अपनी जेब में रख ले रहे थे ताकि बाद में आने वाले लोगों को पीड़ा ना सहनी पड़े… इसलिए सब ने अलग-अलग समय में दौड़ पूरी की.”

“ठीक है ! जिन लोगों ने पत्थर उठाये हैं वे आगे आएं और मुझे वो पत्थर दिखाएँ”, ऋषिवर ने आदेश दिया.

आदेश सुनते ही कुछ शिष्य सामने आये और पत्थर निकालने लगे. पर ये क्या जिन्हें वे पत्थर समझ रहे थे दरअसल वे बहुमूल्य हीरे थे. सभी आश्चर्य में पड़ गए और ऋषिवर की तरफ देखने लगे.

“मैं जानता हूँ आप लोग इन हीरों को देखकर आश्चर्य में पड़ गए हैं.” ऋषिवर बोले।

“दरअसल इन्हें मैंने ही उस सुरंग में डाला था और यह दूसरों के विषय में सोचने वालों शिष्यों को मेरा इनाम है।”

पुत्रों यह दौड़ जीवन की भागम-भाग को दर्शाती है, जहाँ हर कोई कुछ न कुछ पाने के लिए भाग रहा है. पर अंत में वही सबसे समृद्ध होता है जो इस भागम-भाग में भी दूसरों के बारे में सोचने और उनका भला करने से नहीं चूकता है.

*शिक्षा:-*
अतः यहाँ से जाते-जाते इस बात को गाँठ बाँध लीजिये कि आप अपने जीवन में सफलता की जो इमारत खड़ी करें उसमें परोपकार की ईंटें लगाना कभी ना भूलें, अंततः वही आपकी सबसे अनमोल जमा-पूँजी होगी।”