🇮🇳🇮🇳भारत के राष्ट्रीय चिन्ह🇮🇳🇮🇳
@upbordnotes
📌 भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव कौनसा है ?
उतर - गंगा डॉलफिन
📌 भारत का राष्ट्रीय फल कौनसा है ?
उतर - आम
📌 भारत का राष्ट्रीय फूल कौनसा है ?
उतर - कमल
📌 भारत का राष्ट्रीय पेड़ कौनसा है ?
उतर - बरगद
📌 भारत का राष्ट्रीय खेल कौनसा है ?
उतर - हॉकी
📌 भारत के राष्ट्रीय झंडे की लम्बाई और चौड़ाई में अनुपात कितना होता है ?
उतर - 3:2
📌 भारत का राष्ट्रगान किसने लिखा ?
उतर - रवीन्द्रनाथ टैगोर
📌भारत का राष्ट्रीय पशु कौनसा है ?
उतर - बाघ
📌 भारत का राष्ट्रीय पक्षी कौनसा है ?
उतर - मोर
📌 भारत का राष्ट्रगीत कौनसा है ?
उतर - वंदेमातरम्
📌 भारत का राष्ट्रगीत किसने लिखा है ?
उतर - बंकिमचन्द्र चटर्जी
📌 महात्मा गाँधी को राष्ट्रपिता सबसे पहले किसने कहा ?
उतर - नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने
📌 हमारा राष्ट्रीय पंचांग कौनसा है ?
उतर - शक संवत्
📌 राष्ट्रगान गाने की अवधि कितनी है ?
उतर - 52 सेकंड
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📌 भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव कौनसा है ?
उतर - गंगा डॉलफिन
📌 भारत का राष्ट्रीय फल कौनसा है ?
उतर - आम
📌 भारत का राष्ट्रीय फूल कौनसा है ?
उतर - कमल
📌 भारत का राष्ट्रीय पेड़ कौनसा है ?
उतर - बरगद
📌 भारत का राष्ट्रीय खेल कौनसा है ?
उतर - हॉकी
📌 भारत के राष्ट्रीय झंडे की लम्बाई और चौड़ाई में अनुपात कितना होता है ?
उतर - 3:2
📌 भारत का राष्ट्रगान किसने लिखा ?
उतर - रवीन्द्रनाथ टैगोर
📌भारत का राष्ट्रीय पशु कौनसा है ?
उतर - बाघ
📌 भारत का राष्ट्रीय पक्षी कौनसा है ?
उतर - मोर
📌 भारत का राष्ट्रगीत कौनसा है ?
उतर - वंदेमातरम्
📌 भारत का राष्ट्रगीत किसने लिखा है ?
उतर - बंकिमचन्द्र चटर्जी
📌 महात्मा गाँधी को राष्ट्रपिता सबसे पहले किसने कहा ?
उतर - नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने
📌 हमारा राष्ट्रीय पंचांग कौनसा है ?
उतर - शक संवत्
📌 राष्ट्रगान गाने की अवधि कितनी है ?
उतर - 52 सेकंड
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Turn the following into Indirect Narration :
1. The mother said to her son, "Who has beaten you ?"
2. The teacher said, “Why are you so irregular in the class ?"
3. Rama said to him, "What do you want from me ?"
4. The principal said, "Who will teach English to class IX ?"
5. The headmaster said to the peon, "When did you join this school ?''
6. The doctor said to the patient, "What is wrong with you?"
7. The officer said to me, "How old are you?"
8. The mistress said to the servant, "What have you done with the money I gave you
9. Lata said to me, "Why do you not lend me your bicycle ?"
10. My friend said, "When will you come to me?"
11. The king said to Sindbad, "Why are you so much surprised ?"
12. A man said to me, "Which is the way to Durga Temple ?"
13. The coolie said to the passenger, "Which class do you want to travel ?"
14. The principal said to the peon, "What are the teachers doing there ?"
15. I said to the tailor, "How much will you charge me for one shirt ?"
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1. The mother said to her son, "Who has beaten you ?"
2. The teacher said, “Why are you so irregular in the class ?"
3. Rama said to him, "What do you want from me ?"
4. The principal said, "Who will teach English to class IX ?"
5. The headmaster said to the peon, "When did you join this school ?''
6. The doctor said to the patient, "What is wrong with you?"
7. The officer said to me, "How old are you?"
8. The mistress said to the servant, "What have you done with the money I gave you
9. Lata said to me, "Why do you not lend me your bicycle ?"
10. My friend said, "When will you come to me?"
11. The king said to Sindbad, "Why are you so much surprised ?"
12. A man said to me, "Which is the way to Durga Temple ?"
13. The coolie said to the passenger, "Which class do you want to travel ?"
14. The principal said to the peon, "What are the teachers doing there ?"
15. I said to the tailor, "How much will you charge me for one shirt ?"
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❤️❤️यकृत (liver)❤️❤️
यह एक बड़ी ग्रन्थि है जो पित्त रस (bile juice) उत्पन्न करती है। यह उदर गुहा में दाहिनी ओर स्थित होती है। इसका भार लगभग 1.5 किलोग्राम होता है। इसके ऊपर एक थैली-सी लटकी रहती है। इसे पित्ताशय (gall bladder) कहते हैं। इसमें पित्त रस एकत्रित रहता है। यहाँ से एक नली पित्त रस को ग्रहणी में पहुंचाती है। इस नली को पित्त नली (bile duct) कहते हैं।
👉यकृत के कार्य :---
(i )हिपेरिन (Heparin) :
यकृत कोशिकाएँ हिपेरिन नामक पदार्थ का स्राव करती हैं जो रुधिर वाहिनियों
रुधिर को जमने से रोकता है।
(ii) पित्तरस (Bile Juice) का स्त्राव :
आमाशयिक रस के अम्ल को प्रभावहीन करने के लिए पित्त रस बनाता है और भोजन को क्षारीय बनाता है।
(ii) पचे हुए अवशोषित प्रोटीन को पेप्टोन तथा एमिनो एसिड के रूप में संचित रखता है।
(iv) इमल्सीफिकेशन : वसा का पायसीकरण( इमल्सीफिकेशन) पित्त रस के द्वारा होता है।
(v) पित्त लवण तथा पित्त वर्णक का उत्सर्जन करता है।
(vi) रुधिर के निर्माण में भी सहायता करता है क्योंकि यकृत के अन्दर लाल रुधिर कणों का संचय,निर्माण व टूट-फूट आदि कार्य होते हैं।
(vii) रुधिर का थक्का बनना (Clotting of Blood) :
रुधिर में फाइब्रिनोजन का निर्माण होता है जो रुधिर को जमाने में सहायता देता है।
(viii) ग्लाइकोजन का संचय : यकृत शरीर का भण्डार गृह है। जब पाचन के बाद रुधिर में आवश्यकता से अधिक
ग्लूकोज पहुँचता है तो वह यकृत कोशिकाओं में ग्लाइकोजन (glycogen) में बदल जाता है और ग्लाइकोजन के
रूप में संग्रहित किया जाता है।
(ix) ग्लूकोजीनोलाइसिस (Glucogenolysis) :
रुधिर में ग्लूकोज की मात्रा कम होने पर यकृत में संचित ग्लाइकोजन ग्लूकोज में बदल दिया जाता है
(x) ग्लाइकोनिओजेनेसिस (Glyconeogenesis) : शरीर में एमीनो और वसा अम्लों की अतिरिक्त मात्रा को ग्लाइकोजन में बदलकर संचित कर लिया जाता है।
(xi) वसा संश्लेषण (Fat Synthesis) : यकृत कोशिकाओं में ग्लूकोज की अतिरिक्त मात्रा को वसा में बदल दिया जाता है। वसा को वसीय ऊतकों में संचित कर लिया जाता है।
(xii) छोटी आंत, ग्रहणी तथा आमाशय में प्रोटीन के पाचन से बने एमीनो अम्लों को रुधिर यकृत में ले जाता है। यहाँ उन्हें यूरिया में बदलकर मूत्र द्वारा शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। यदि शरीर में से यूरिया न निकले तो शरीर में गठिया आदि रोग हो जाते हैं।
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यह एक बड़ी ग्रन्थि है जो पित्त रस (bile juice) उत्पन्न करती है। यह उदर गुहा में दाहिनी ओर स्थित होती है। इसका भार लगभग 1.5 किलोग्राम होता है। इसके ऊपर एक थैली-सी लटकी रहती है। इसे पित्ताशय (gall bladder) कहते हैं। इसमें पित्त रस एकत्रित रहता है। यहाँ से एक नली पित्त रस को ग्रहणी में पहुंचाती है। इस नली को पित्त नली (bile duct) कहते हैं।
👉यकृत के कार्य :---
(i )हिपेरिन (Heparin) :
यकृत कोशिकाएँ हिपेरिन नामक पदार्थ का स्राव करती हैं जो रुधिर वाहिनियों
रुधिर को जमने से रोकता है।
(ii) पित्तरस (Bile Juice) का स्त्राव :
आमाशयिक रस के अम्ल को प्रभावहीन करने के लिए पित्त रस बनाता है और भोजन को क्षारीय बनाता है।
(ii) पचे हुए अवशोषित प्रोटीन को पेप्टोन तथा एमिनो एसिड के रूप में संचित रखता है।
(iv) इमल्सीफिकेशन : वसा का पायसीकरण( इमल्सीफिकेशन) पित्त रस के द्वारा होता है।
(v) पित्त लवण तथा पित्त वर्णक का उत्सर्जन करता है।
(vi) रुधिर के निर्माण में भी सहायता करता है क्योंकि यकृत के अन्दर लाल रुधिर कणों का संचय,निर्माण व टूट-फूट आदि कार्य होते हैं।
(vii) रुधिर का थक्का बनना (Clotting of Blood) :
रुधिर में फाइब्रिनोजन का निर्माण होता है जो रुधिर को जमाने में सहायता देता है।
(viii) ग्लाइकोजन का संचय : यकृत शरीर का भण्डार गृह है। जब पाचन के बाद रुधिर में आवश्यकता से अधिक
ग्लूकोज पहुँचता है तो वह यकृत कोशिकाओं में ग्लाइकोजन (glycogen) में बदल जाता है और ग्लाइकोजन के
रूप में संग्रहित किया जाता है।
(ix) ग्लूकोजीनोलाइसिस (Glucogenolysis) :
रुधिर में ग्लूकोज की मात्रा कम होने पर यकृत में संचित ग्लाइकोजन ग्लूकोज में बदल दिया जाता है
(x) ग्लाइकोनिओजेनेसिस (Glyconeogenesis) : शरीर में एमीनो और वसा अम्लों की अतिरिक्त मात्रा को ग्लाइकोजन में बदलकर संचित कर लिया जाता है।
(xi) वसा संश्लेषण (Fat Synthesis) : यकृत कोशिकाओं में ग्लूकोज की अतिरिक्त मात्रा को वसा में बदल दिया जाता है। वसा को वसीय ऊतकों में संचित कर लिया जाता है।
(xii) छोटी आंत, ग्रहणी तथा आमाशय में प्रोटीन के पाचन से बने एमीनो अम्लों को रुधिर यकृत में ले जाता है। यहाँ उन्हें यूरिया में बदलकर मूत्र द्वारा शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। यदि शरीर में से यूरिया न निकले तो शरीर में गठिया आदि रोग हो जाते हैं।
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English me kya start kare ?
Anonymous Poll
38%
Tense
36%
Active passive
12%
Part of Sentences
14%
Part of speech
❤️❤️अन्याशय (Pancreas)❤️❤️
📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍📍
आमाशय के ठीक पीछे अग्न्याशय नाम की
एक बड़ी ग्रन्थि होती है। इसकी लम्बाई सेमी18 तथा चौड़ाई 4 सेमी होती है। यह गुलाबी रंग की पत्ती-सदृश संरचना होती है। इसका दाहिना सिरा चौड़ा तथा बायाँ सिरा प्लीहा से चिपका होता है।
अग्न्याशय एक मिश्रित ग्रन्थि है। इसका बहिःस्त्रावी भाग (exocrine part) छोटे-छोटे पिण्डकों का बना होता है। पिण्डकों की कोशिकाएँ अग्न्याशयिक रस (pancreatic juice) का स्राव करती हैं। इसका अन्तःस्रावी भाग (endocrine part) लैंगरहैन्स की द्वीपिकाओं (Islets of Langerhans) का बना होता है।
अग्न्याशय के कार्य👉👉👉
👉1. अग्न्याशय रस का स्त्राव (Secretion of Pancreatic Juice) :
अग्न्याशयिक रस में तीन एन्जाइम पाये जाते हैं :
(1) एमाइलोप्सिन या एमाइलेज (Amylopsin or Amylase) :
कार्बोहाइड्रेट्स का जो भाग मुखगुहा में लार के प्रभाव से बच जाता
ग्रहणी है वह इस एन्जाइम के प्रभाव से शक्कर में बदल जाता है।
👉(ii) लाइपेज या स्टीएप्सिन (Lipase or Steapsim) :
यह वसा को वसा अम्लों में परिवर्तित कर देता है जो रुधिर तथा लसीका द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं।
👉 (iii) ट्रिप्सिन तथा काइमोट्रिप्सिन (Trypsin and Chymotrypsin) : ये एन्जाइम प्रोटीन का पाचन करते हैं।
❤️हॉर्मोन्स का स्राव, (Secretion of Hormones) :
अग्न्याशय की लैंगरहैन्स की दीपिकाओं की बीटा-कोशिकाएँ इन्सुलिन तथा ग्लूकेगॉन नामक हॉर्मोन्स का स्राव करती हैं। ये हॉर्मोन ग्लूकोज के उपापचय का नियन्त्रण करते हैं। रुधिर में सामान्य स्तर से अधिक ग्लूकोज होने पर उसे ग्लाइकोजन में बदलने की क्रिया इन्सुलिन के प्रभाव से होती है।
यदि अग्न्याशय ग्रन्थि में इन्सुलिन कम बनने लगता है तो रुधिर में ग्लूकोज की मात्रा बहुत बढ़ जाती है और मूत्र के साथ ग्लूकोज आने लगता है। इसे मधुमेह रोग (diabetes) कहते हैं।
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आमाशय के ठीक पीछे अग्न्याशय नाम की
एक बड़ी ग्रन्थि होती है। इसकी लम्बाई सेमी18 तथा चौड़ाई 4 सेमी होती है। यह गुलाबी रंग की पत्ती-सदृश संरचना होती है। इसका दाहिना सिरा चौड़ा तथा बायाँ सिरा प्लीहा से चिपका होता है।
अग्न्याशय एक मिश्रित ग्रन्थि है। इसका बहिःस्त्रावी भाग (exocrine part) छोटे-छोटे पिण्डकों का बना होता है। पिण्डकों की कोशिकाएँ अग्न्याशयिक रस (pancreatic juice) का स्राव करती हैं। इसका अन्तःस्रावी भाग (endocrine part) लैंगरहैन्स की द्वीपिकाओं (Islets of Langerhans) का बना होता है।
अग्न्याशय के कार्य👉👉👉
👉1. अग्न्याशय रस का स्त्राव (Secretion of Pancreatic Juice) :
अग्न्याशयिक रस में तीन एन्जाइम पाये जाते हैं :
(1) एमाइलोप्सिन या एमाइलेज (Amylopsin or Amylase) :
कार्बोहाइड्रेट्स का जो भाग मुखगुहा में लार के प्रभाव से बच जाता
ग्रहणी है वह इस एन्जाइम के प्रभाव से शक्कर में बदल जाता है।
👉(ii) लाइपेज या स्टीएप्सिन (Lipase or Steapsim) :
यह वसा को वसा अम्लों में परिवर्तित कर देता है जो रुधिर तथा लसीका द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं।
👉 (iii) ट्रिप्सिन तथा काइमोट्रिप्सिन (Trypsin and Chymotrypsin) : ये एन्जाइम प्रोटीन का पाचन करते हैं।
❤️हॉर्मोन्स का स्राव, (Secretion of Hormones) :
अग्न्याशय की लैंगरहैन्स की दीपिकाओं की बीटा-कोशिकाएँ इन्सुलिन तथा ग्लूकेगॉन नामक हॉर्मोन्स का स्राव करती हैं। ये हॉर्मोन ग्लूकोज के उपापचय का नियन्त्रण करते हैं। रुधिर में सामान्य स्तर से अधिक ग्लूकोज होने पर उसे ग्लाइकोजन में बदलने की क्रिया इन्सुलिन के प्रभाव से होती है।
यदि अग्न्याशय ग्रन्थि में इन्सुलिन कम बनने लगता है तो रुधिर में ग्लूकोज की मात्रा बहुत बढ़ जाती है और मूत्र के साथ ग्लूकोज आने लगता है। इसे मधुमेह रोग (diabetes) कहते हैं।
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❤️ Active and Passive Voice ❤️
👉Active तथा Passive Voice में अन्तर
👉(1) Active Voice (कर्तृवाच्य)-ऐसे वाक्यों में वास्तविक कर्ता को ही प्रधानता दी जाती है अर्थात् क्रिया द्वारा बताये गये
कार्य करने वाला ही कर्ता के स्थान पर रखा जाता है।
👉(2) Passive Voice (कर्मवाच्य)-ऐसे वाक्यों में Object (कर्म) को प्रधानता दी जाती है अर्थात् Object को Subject के स्थान पर रखा जाता है और ऐसा Subject कोई कार्य नहीं करता, बल्कि उसके लिए या उससे सम्बन्धित कोई कार्य किया जाता है। उदाहरण
🍏 My sister sings a song.
🍎A song is sung by my sister.
🍏The child broke the glass.
🍎The glass was broken by the child
🍏The driver is driving a taxi.
🍎A taxi is being driven by the driver.
🍏The child will pluck the flower.
🍎The flower will be plucked by the child.
🍏The principal has punished Suresh.
🍎Suresh has been punished by the principal.
उपर्युक्त वाक्यों को देखने से पता लगेगा कि Active Voice का Object Passive Voice में Subject
का स्थान ले लेता है तथा Active Voice का Subject Passive Voice में by के साथ , Object का स्थान ले लेता है।
यदि Subject या Object के स्थान पर कोई Pronoun दिया हो तब उसका रूप भी निम्नलिखित प्रकार बदल जाता है। । साथ-ही-साथ Active Voice के Verb का रूप Passive Voice में उसी Tense में निम्नवत् बदल जाता है।
अत: Active Voice से Passive Voice तथा Passive Voice से Active Voice में बदलते समय निम्नलिखित बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना आवश्यक है
👉Active तथा Passive Voice में अन्तर
👉(1) Active Voice (कर्तृवाच्य)-ऐसे वाक्यों में वास्तविक कर्ता को ही प्रधानता दी जाती है अर्थात् क्रिया द्वारा बताये गये
कार्य करने वाला ही कर्ता के स्थान पर रखा जाता है।
👉(2) Passive Voice (कर्मवाच्य)-ऐसे वाक्यों में Object (कर्म) को प्रधानता दी जाती है अर्थात् Object को Subject के स्थान पर रखा जाता है और ऐसा Subject कोई कार्य नहीं करता, बल्कि उसके लिए या उससे सम्बन्धित कोई कार्य किया जाता है। उदाहरण
🍏 My sister sings a song.
🍎A song is sung by my sister.
🍏The child broke the glass.
🍎The glass was broken by the child
🍏The driver is driving a taxi.
🍎A taxi is being driven by the driver.
🍏The child will pluck the flower.
🍎The flower will be plucked by the child.
🍏The principal has punished Suresh.
🍎Suresh has been punished by the principal.
उपर्युक्त वाक्यों को देखने से पता लगेगा कि Active Voice का Object Passive Voice में Subject
का स्थान ले लेता है तथा Active Voice का Subject Passive Voice में by के साथ , Object का स्थान ले लेता है।
यदि Subject या Object के स्थान पर कोई Pronoun दिया हो तब उसका रूप भी निम्नलिखित प्रकार बदल जाता है। । साथ-ही-साथ Active Voice के Verb का रूप Passive Voice में उसी Tense में निम्नवत् बदल जाता है।
अत: Active Voice से Passive Voice तथा Passive Voice से Active Voice में बदलते समय निम्नलिखित बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना आवश्यक है
👉👉ध्यान रखिए-
1. Active से Passive Voice में बदलते समय Active Voice के Object को Passive Voice में Subject बना देते हैं तथा Active Voice के Subject को Passive Voice में Verb के बाद by के साथ प्रयोग करते हैं।
2. Pronoun का स्थान बदलते समय उनका रूप भी Active तथा Passive Voice में आगे दी गयी तालिका के अनुसार परिवर्तित हो जाएगा
👉I को by me
👉 We को by us
👉you को by you
👉He को by him
👉she को by her
👉they को by them
👉someone को हटा देते है
👉Everyone को हटा देते हैं
👉anyone को हटा देते हैं
👉Noun , by के साथ ही same rehta hai
1. Active से Passive Voice में बदलते समय Active Voice के Object को Passive Voice में Subject बना देते हैं तथा Active Voice के Subject को Passive Voice में Verb के बाद by के साथ प्रयोग करते हैं।
2. Pronoun का स्थान बदलते समय उनका रूप भी Active तथा Passive Voice में आगे दी गयी तालिका के अनुसार परिवर्तित हो जाएगा
👉I को by me
👉 We को by us
👉you को by you
👉He को by him
👉she को by her
👉they को by them
👉someone को हटा देते है
👉Everyone को हटा देते हैं
👉anyone को हटा देते हैं
👉Noun , by के साथ ही same rehta hai
👉उपर्युक्त तालिका से स्पष्ट होता है कि Subject के स्थान पर प्रयुक्त Pronoun I, We, He आदि Passive बनाते समय by me, by us, by him ओर passive ko Active बनाते समयby me, by us, by him को बदलकर Subject के स्थान पर क्रमश: I, We, He आदि हो जाते हैं। जैसे-
🍏He gave me a book.
🍎I was given a book by him.
🍏He gave me a book.
🍎I was given a book by him.
वस्तुनिष्ठ_प्रश्न_जीव_विज्ञान.pdf
1.2 MB
वस्तुनिष्ठ प्रश्न जीव विज्ञान
UP Board 10th & 12th (NEET/JEE)
वस्तुनिष्ठ_प्रश्न_जीव_विज्ञान.pdf
इन प्रश्नों k उत्तर अपको दोपहर को मिल जाएंगे तब तक आप इन्हे हल करने का प्रयत्न करे
❤️❤️Passive voice❤️❤️
निम्नलिखित वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िएI.
Present Indefinite Tense:
1. यहाँ पुरानी पुस्तकें खरीदी जाती हैं।
Old books are bought here.
2. इस सड़क पर रोजाना झाडू लगायी जाती है।
This road is swept everyday.
👉II. Past Indefinite Tense :
इस वर्ष दीवाली धूमधाम से मनाई गई। The Diwali was celebrated in a grand way this year.
इस विषय में मेरी सलाह नहीं ली गई।
I was not consulted in this matter.
👉III. Future Indefinite Tense
5. आज शाम को मेरा जन्मदिवस मनाया जाएगा।
My birthday will be celebrated this evening.
6. अपराधी को सजा दी जाएगी।
The criminal will be punished.
👉IV. Present Continuous Tense :
7. मैदान में फुटबॉल खेली जा रही है।
Football is being played in the ground.
8. गेहूँ के खेतों में सिंचाई की जा रही है।
The wheet fields are being irrigated.
नियम : (i) Passive Voice में कर्म (Object) को प्रधानता दी जाती है। अत: Passive Voice के लिए कर्म का होना अति आवश्यक है।
(ii) Passive Voice में Verb की Third Form का प्रयोग होता है। इससे पहले Tense के अनुसार सहायक क्रिया (is, am, are, was, were, be अथवा being) का प्रयोग होता है।
जैसे-Present Indefinite Tense में सहायक क्रिया is, am, are (वाक्य के Subject के अनुसार), Past Indefinite Tense में सहायक क्रिया was, were (वाक्य के Subject के अनुसार) और Future Indefinite Tense में सहायक क्रिया will be, shall be (वाक्य के Subject के अनुसार); तथा
(ii) Present Perfect Continuous, में सहायक क्रिया is being, am being, are being तथा Past Continuous में was being, were being (वाक्य के Subject के अनुसार) प्रयोग होती हैं। Passive Voice में Future Continuous Tense नहीं होता है।
👉V. Past Continuous Tense :
9. इस मकान में कल सफेदी की जा रही थी।
This house was being whitewashed yesterday.
10. चोर को थाने में पीटा जा रहा था।
The theif was being beaten at station.
Note : Future Continuous Tense में Passive Voice नहीं बनता है।
👉 VI. Present Perfect Tense:
11. सौदा कर लिया गया है।
The bargain has been struck.
12. क्या तुम्हारे शत्रु को हथकड़ी लग गई है?
Has your enemy been hand-cuffed?
13. उसकी सेवाएँ क्यों समाप्त की जा चुकी हैं?
Why has he been dismissed ?
👉VII. Past Perfect Tense :
14. क्या आठ बजे तक सब दुकानें बन्द हो चुकी थीं?
Had all the shops been closed by 8 o'clock.
15. अवकाश आरम्भ होने से पहले हमारा कोर्स
Our courses had been completed before the vacations began.
16. क्या उसके आने से पूर्व उत्सव समाप्त हो चुका था?
Had the function been ended before he came?
👉VIII. Future Perfect Tense :
17. वह दर-दर की ठोकरे खा चुका होगा।
He will have been driven from pillar to post.
18. अगले वर्ष तक सुनामी ग्रस्त लोगों को बसाया जा चुका होगा।
The Tsunami victims will have been rehabilitated by next year.
19.क्या हमारे वहाँ पहुँचने से पहले आग बुझाई जा सकी होगी?
Will the fire have been extinguished before we reach there?
नियम : (i) Past Continuous में Subject के अनुसार सहायक क्रिया was being/were being का प्रयोग होता है।(उदाहरण 9)
(ii) Present Perfect Tense में Subject के अनुसार have been/has been सहायक क्रिया का प्रयोग करते हैं।
(उदाहरण 11, 12)
(ii) Past Perfect Tense के वाक्यों में प्रत्येक Subject के साथ सहायक क्रिया had been का प्रयोग होता है।
(उदाहरण 14, 15, 16)
(vi) Future Perfect Tense के Subject के अनुसार सहायक क्रिया will have been/ shall
(उदाहरण 17, 18, 19)
Note : (i) Will has been/ shall has been का प्रयोग कभी नहीं होता है।
निम्नलिखित वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िएI.
Present Indefinite Tense:
1. यहाँ पुरानी पुस्तकें खरीदी जाती हैं।
Old books are bought here.
2. इस सड़क पर रोजाना झाडू लगायी जाती है।
This road is swept everyday.
👉II. Past Indefinite Tense :
इस वर्ष दीवाली धूमधाम से मनाई गई। The Diwali was celebrated in a grand way this year.
इस विषय में मेरी सलाह नहीं ली गई।
I was not consulted in this matter.
👉III. Future Indefinite Tense
5. आज शाम को मेरा जन्मदिवस मनाया जाएगा।
My birthday will be celebrated this evening.
6. अपराधी को सजा दी जाएगी।
The criminal will be punished.
👉IV. Present Continuous Tense :
7. मैदान में फुटबॉल खेली जा रही है।
Football is being played in the ground.
8. गेहूँ के खेतों में सिंचाई की जा रही है।
The wheet fields are being irrigated.
नियम : (i) Passive Voice में कर्म (Object) को प्रधानता दी जाती है। अत: Passive Voice के लिए कर्म का होना अति आवश्यक है।
(ii) Passive Voice में Verb की Third Form का प्रयोग होता है। इससे पहले Tense के अनुसार सहायक क्रिया (is, am, are, was, were, be अथवा being) का प्रयोग होता है।
जैसे-Present Indefinite Tense में सहायक क्रिया is, am, are (वाक्य के Subject के अनुसार), Past Indefinite Tense में सहायक क्रिया was, were (वाक्य के Subject के अनुसार) और Future Indefinite Tense में सहायक क्रिया will be, shall be (वाक्य के Subject के अनुसार); तथा
(ii) Present Perfect Continuous, में सहायक क्रिया is being, am being, are being तथा Past Continuous में was being, were being (वाक्य के Subject के अनुसार) प्रयोग होती हैं। Passive Voice में Future Continuous Tense नहीं होता है।
👉V. Past Continuous Tense :
9. इस मकान में कल सफेदी की जा रही थी।
This house was being whitewashed yesterday.
10. चोर को थाने में पीटा जा रहा था।
The theif was being beaten at station.
Note : Future Continuous Tense में Passive Voice नहीं बनता है।
👉 VI. Present Perfect Tense:
11. सौदा कर लिया गया है।
The bargain has been struck.
12. क्या तुम्हारे शत्रु को हथकड़ी लग गई है?
Has your enemy been hand-cuffed?
13. उसकी सेवाएँ क्यों समाप्त की जा चुकी हैं?
Why has he been dismissed ?
👉VII. Past Perfect Tense :
14. क्या आठ बजे तक सब दुकानें बन्द हो चुकी थीं?
Had all the shops been closed by 8 o'clock.
15. अवकाश आरम्भ होने से पहले हमारा कोर्स
Our courses had been completed before the vacations began.
16. क्या उसके आने से पूर्व उत्सव समाप्त हो चुका था?
Had the function been ended before he came?
👉VIII. Future Perfect Tense :
17. वह दर-दर की ठोकरे खा चुका होगा।
He will have been driven from pillar to post.
18. अगले वर्ष तक सुनामी ग्रस्त लोगों को बसाया जा चुका होगा।
The Tsunami victims will have been rehabilitated by next year.
19.क्या हमारे वहाँ पहुँचने से पहले आग बुझाई जा सकी होगी?
Will the fire have been extinguished before we reach there?
नियम : (i) Past Continuous में Subject के अनुसार सहायक क्रिया was being/were being का प्रयोग होता है।(उदाहरण 9)
(ii) Present Perfect Tense में Subject के अनुसार have been/has been सहायक क्रिया का प्रयोग करते हैं।
(उदाहरण 11, 12)
(ii) Past Perfect Tense के वाक्यों में प्रत्येक Subject के साथ सहायक क्रिया had been का प्रयोग होता है।
(उदाहरण 14, 15, 16)
(vi) Future Perfect Tense के Subject के अनुसार सहायक क्रिया will have been/ shall
(उदाहरण 17, 18, 19)
Note : (i) Will has been/ shall has been का प्रयोग कभी नहीं होता है।
❤️वाष्पोत्सर्जन (Transpiration)❤️
👉वाष्पोत्सर्जन की परिभाषा (Definition of Transpiration)
मूलरोमों द्वारा पौधे जमीन से बहुत अधिक मात्रा में जल का अवशोषण करते हैं। जल की कुछ ही मात्रा पौधों के उपयोग में आती है। अनुमान है कि अवशोषित जल का लगभग 98% पौधे के वायवीय भागों (पत्तियों व तना) से वाष्प के रूप में वायुमण्डल में आ जाता है। पौधों के वायवीय भागों से पानी का वाष्प के रूप में उड़ने की क्रिया को वाष्पोत्सर्जन या उत्स्वेदन कहते हैं।
👉वाष्पोत्सर्जन के प्रकार (Types of Transpiration)
पौधों के तीन भागों से वाष्पोत्सर्जन होता है :
1. रन्ध्रों द्वारा (By Stomata) वाष्पोत्सर्जन :
पत्तियों, हरे तनों तथा कुछ रूपान्तरित तनों की सतह पर असंख्य छोटे-छोटे छिद्र होते हैं। एक जोड़ी वृक्काकार रन्ध्र कोशिकाएँ इन छिद्रों के खुलने व बन्द होने का नियन्त्रण करती हैं। इन छिद्रों द्वारा वायु का आवागमन होता है जिससे पादप कोशिकाओं को श्वसन के लिए ऑक्सीजन मिलती है। वायु के सम्पर्क में जल का वाष्पीकरण होता है और रन्ध्रों से बाहर निकलने वाली वायु में जल भी वाष्प के रूप में बाहर निकलता है। वाष्पोत्सर्जन का लगभग 90% भाग रन्ध्रों द्वारा होता है। इसे रन्ध्रीय वाष्पोत्सर्जन कहते हैं।
2. उपत्वचा द्वारा वाष्पोत्सर्जन (By Cuticular Transpiration) :
पौधों का बाहरी भाग व पत्तियाँ उपत्वचा या क्यूटिकल द्वारा ढके होते हैं। इनसे भी वाष्पीकरण द्वारा जल उड़ता है। इसे उपत्वचीय वाष्पोत्सर्जन कहते हैं।
3. वातरन्ध्रों द्वारा वाष्पोत्सर्जन (By Lenticular Transpiration) :
वृक्षों के तने व शाखाओं पर छाल में बीच-बीच में छोटे-छोटे वातरन्ध्र होते हैं। इनसे भी वाष्पोत्सर्जन होता है।
👉वाष्पोत्सर्जन का लाभ
(1) पौधों में पानी का अवरोहण व अवशोषण तथा जल के साथ खनिज लवणों का अवशोषण व अवरोहण वाष्पोत्सर्जनके कारण ही सम्भव है।
(2) पौधों में तापक्रम का नियमन होता है।
(3) हानिकारक पदार्थों का उत्सर्जन सम्भव है।
(4) आवश्यकता से अधिक अवशोषित जल को पादप शरीर से बाहर निकालता है।
👉वाष्पोत्सर्जन को प्रभावित करने वाले कारक
1. वायु की आर्द्रता (Humidity of Air) :
वायुमण्डल में आर्द्रता बढ़ने पर वाष्पोत्सर्जन कम होता है।
2. वायु की गति (Velocity of Wind) : तेज हवा चलने या आंधी आने पर वाष्पोत्सर्जन बढ़ जाता है।
3. प्रकाश की तीव्रता (Intensity of Light) : प्रकाश या दिन में वाष्पोत्सर्जन अधिक होता है और रात में कम क्योकि
दिन में प्रकाश संश्लेषण के लिए स्टोमेटा खुले रहते हैं जिससे वाष्पीकरण अधिक होता है।
4. तापमान (Temperature) : तापमान अधिक होने पर वाष्पोत्सर्जन की गति बढ़ जाती है।
5. पत्तियों पर स्टोमेटा की संख्या व स्थिति वाष्पीकरण की दर को प्रभावित करते हैं।
@upbordnotes
👉वाष्पोत्सर्जन की परिभाषा (Definition of Transpiration)
मूलरोमों द्वारा पौधे जमीन से बहुत अधिक मात्रा में जल का अवशोषण करते हैं। जल की कुछ ही मात्रा पौधों के उपयोग में आती है। अनुमान है कि अवशोषित जल का लगभग 98% पौधे के वायवीय भागों (पत्तियों व तना) से वाष्प के रूप में वायुमण्डल में आ जाता है। पौधों के वायवीय भागों से पानी का वाष्प के रूप में उड़ने की क्रिया को वाष्पोत्सर्जन या उत्स्वेदन कहते हैं।
👉वाष्पोत्सर्जन के प्रकार (Types of Transpiration)
पौधों के तीन भागों से वाष्पोत्सर्जन होता है :
1. रन्ध्रों द्वारा (By Stomata) वाष्पोत्सर्जन :
पत्तियों, हरे तनों तथा कुछ रूपान्तरित तनों की सतह पर असंख्य छोटे-छोटे छिद्र होते हैं। एक जोड़ी वृक्काकार रन्ध्र कोशिकाएँ इन छिद्रों के खुलने व बन्द होने का नियन्त्रण करती हैं। इन छिद्रों द्वारा वायु का आवागमन होता है जिससे पादप कोशिकाओं को श्वसन के लिए ऑक्सीजन मिलती है। वायु के सम्पर्क में जल का वाष्पीकरण होता है और रन्ध्रों से बाहर निकलने वाली वायु में जल भी वाष्प के रूप में बाहर निकलता है। वाष्पोत्सर्जन का लगभग 90% भाग रन्ध्रों द्वारा होता है। इसे रन्ध्रीय वाष्पोत्सर्जन कहते हैं।
2. उपत्वचा द्वारा वाष्पोत्सर्जन (By Cuticular Transpiration) :
पौधों का बाहरी भाग व पत्तियाँ उपत्वचा या क्यूटिकल द्वारा ढके होते हैं। इनसे भी वाष्पीकरण द्वारा जल उड़ता है। इसे उपत्वचीय वाष्पोत्सर्जन कहते हैं।
3. वातरन्ध्रों द्वारा वाष्पोत्सर्जन (By Lenticular Transpiration) :
वृक्षों के तने व शाखाओं पर छाल में बीच-बीच में छोटे-छोटे वातरन्ध्र होते हैं। इनसे भी वाष्पोत्सर्जन होता है।
👉वाष्पोत्सर्जन का लाभ
(1) पौधों में पानी का अवरोहण व अवशोषण तथा जल के साथ खनिज लवणों का अवशोषण व अवरोहण वाष्पोत्सर्जनके कारण ही सम्भव है।
(2) पौधों में तापक्रम का नियमन होता है।
(3) हानिकारक पदार्थों का उत्सर्जन सम्भव है।
(4) आवश्यकता से अधिक अवशोषित जल को पादप शरीर से बाहर निकालता है।
👉वाष्पोत्सर्जन को प्रभावित करने वाले कारक
1. वायु की आर्द्रता (Humidity of Air) :
वायुमण्डल में आर्द्रता बढ़ने पर वाष्पोत्सर्जन कम होता है।
2. वायु की गति (Velocity of Wind) : तेज हवा चलने या आंधी आने पर वाष्पोत्सर्जन बढ़ जाता है।
3. प्रकाश की तीव्रता (Intensity of Light) : प्रकाश या दिन में वाष्पोत्सर्जन अधिक होता है और रात में कम क्योकि
दिन में प्रकाश संश्लेषण के लिए स्टोमेटा खुले रहते हैं जिससे वाष्पीकरण अधिक होता है।
4. तापमान (Temperature) : तापमान अधिक होने पर वाष्पोत्सर्जन की गति बढ़ जाती है।
5. पत्तियों पर स्टोमेटा की संख्या व स्थिति वाष्पीकरण की दर को प्रभावित करते हैं।
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New doc 23-Oct-2020 3.23 pm.pdf
433 KB
श्वसन एवं दहन में अंतर
New doc 23-Oct-2020 3.27 pm.pdf
373.4 KB
BREATHING
New doc 25-Oct-2020 8.11 am.pdf
462.6 KB
Mechanism of Breathing
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*👇👇 आज का प्रेरक प्रसंग 👇👇*
*!! नेत्रहीन संत !!*
~~~~~~~~~~~~~~~~
एक बार एक राजा अपने सहचरों के साथ शिकार खेलने जंगल में गया था। वहाँ शिकार के चक्कर में एक दूसरे से बिछड़ गये और एक दूसरे को खोजते हुये राजा एक नेत्रहीन संत की कुटिया में पहुँच कर अपने बिछड़े हुये साथियों के बारे में पूछा।
नेत्र हीन संत ने कहा महाराज सबसे पहले आपके सिपाही गये हैं, बाद में आपके मंत्री गये, अब आप स्वयं पधारे हैं। इसी रास्ते से आप आगे जायें तो मुलाकात हो जायगी। संत के बताये हुये रास्ते में राजा ने घोड़ा दौड़ाया और जल्दी ही अपने सहयोगियों से जा मिला और नेत्रहीन संत के कथनानुसार ही एक दूसरे से आगे पीछे पहुंचे थे।
यह बात राजा के दिमाग में घर कर गयी कि नेत्रहीन संत को कैसे पता चला कि कौन किस ओहदे वाला जा रहा है। लौटते समय राजा अपने अनुचरों को साथ लेकर संत की कुटिया में पहुंच कर संत से प्रश्न किया कि आप नेत्रविहीन होते हुये कैसे जान गये कि कौन जा रहा है, कौन आ रहा है ?
राजा की बात सुन कर नेत्रहीन संत ने कहा महाराज आदमी की हैसियत का ज्ञान नेत्रों से नहीं उसकी बातचीत से होती है। सबसे पहले जब आपके सिपाही मेरे पास से गुजरे तब उन्होंने मुझसे पूछा कि ऐ अंधे इधर से किसी के जाते हुये की आहट सुनाई दी क्या ? तो मैं समझ गया कि यह संस्कार विहीन व्यक्ति छोटी पदवी वाले सिपाही ही होंगे।
जब आपके मंत्री जी आये तब उन्होंने पूछा बाबा जी इधर से किसी को जाते हुये..... तो मैं समझ गया कि यह किसी उच्च ओहदे वाला है, क्योंकि बिना संस्कारित व्यक्ति किसी बड़े पद पर आसीन नहीं होता। इसलिये मैंने आपसे कहा कि सिपाहियों के पीछे मंत्री जी गये हैं।
जब आप स्वयं आये तो आपने कहा सूरदास जी महाराज आपको इधर से निकल कर जाने वालों की आहट तो नहीं मिली तो मैं समझ गया कि आप राजा ही हो सकते हैं। क्योंकि आपकी वाणी में आदर सूचक शब्दों का समावेश था और दूसरे का आदर वही कर सकता है जिसे दूसरों से आदर प्राप्त होता है। क्योंकि जिसे कभी कोई चीज नहीं मिलती तो वह उस वस्तु के गुणों को कैसे जान सकता है!
दूसरी बात यह संसार एक वृक्ष स्वरूप है- जैसे वृक्ष में डालियाँ तो बहुत होती हैं पर जिस डाली में ज्यादा फल लगते हैं वही झुकती है। इसी अनुभव के आधार में मैं नेत्रहीन होते हुये भी सिपाहियों, मंत्री और आपके पद का पता बताया अगर गलती हुई हो महाराज तो क्षमा करें।
राजा संत के अनुभव से प्रसन्न हो कर संत की जीवन व्रत्ति का प्रबंन्ध राजकोष से करने का मंत्री जी को आदेशित कर वापस राजमहल आया।
*शिक्षा:-*
आजकल हमारा मध्यमवर्ग परिवार संस्कार विहीन होता जा रहा है। थोड़ा सा पद, पैसा व प्रतिष्ठा पाते ही दूसरे की उपेक्षा करते हैं, जो उचित नहीं है। मधुर भाषा बोलने में किसी प्रकार का आर्थिक नुकसान नहीं होता है। अतः मीठा बोलने में कंजूसी नहीं करनी चाहिये।
*👇👇 आज का प्रेरक प्रसंग 👇👇*
*!! नेत्रहीन संत !!*
एक बार एक राजा अपने सहचरों के साथ शिकार खेलने जंगल में गया था। वहाँ शिकार के चक्कर में एक दूसरे से बिछड़ गये और एक दूसरे को खोजते हुये राजा एक नेत्रहीन संत की कुटिया में पहुँच कर अपने बिछड़े हुये साथियों के बारे में पूछा।
नेत्र हीन संत ने कहा महाराज सबसे पहले आपके सिपाही गये हैं, बाद में आपके मंत्री गये, अब आप स्वयं पधारे हैं। इसी रास्ते से आप आगे जायें तो मुलाकात हो जायगी। संत के बताये हुये रास्ते में राजा ने घोड़ा दौड़ाया और जल्दी ही अपने सहयोगियों से जा मिला और नेत्रहीन संत के कथनानुसार ही एक दूसरे से आगे पीछे पहुंचे थे।
यह बात राजा के दिमाग में घर कर गयी कि नेत्रहीन संत को कैसे पता चला कि कौन किस ओहदे वाला जा रहा है। लौटते समय राजा अपने अनुचरों को साथ लेकर संत की कुटिया में पहुंच कर संत से प्रश्न किया कि आप नेत्रविहीन होते हुये कैसे जान गये कि कौन जा रहा है, कौन आ रहा है ?
राजा की बात सुन कर नेत्रहीन संत ने कहा महाराज आदमी की हैसियत का ज्ञान नेत्रों से नहीं उसकी बातचीत से होती है। सबसे पहले जब आपके सिपाही मेरे पास से गुजरे तब उन्होंने मुझसे पूछा कि ऐ अंधे इधर से किसी के जाते हुये की आहट सुनाई दी क्या ? तो मैं समझ गया कि यह संस्कार विहीन व्यक्ति छोटी पदवी वाले सिपाही ही होंगे।
जब आपके मंत्री जी आये तब उन्होंने पूछा बाबा जी इधर से किसी को जाते हुये..... तो मैं समझ गया कि यह किसी उच्च ओहदे वाला है, क्योंकि बिना संस्कारित व्यक्ति किसी बड़े पद पर आसीन नहीं होता। इसलिये मैंने आपसे कहा कि सिपाहियों के पीछे मंत्री जी गये हैं।
जब आप स्वयं आये तो आपने कहा सूरदास जी महाराज आपको इधर से निकल कर जाने वालों की आहट तो नहीं मिली तो मैं समझ गया कि आप राजा ही हो सकते हैं। क्योंकि आपकी वाणी में आदर सूचक शब्दों का समावेश था और दूसरे का आदर वही कर सकता है जिसे दूसरों से आदर प्राप्त होता है। क्योंकि जिसे कभी कोई चीज नहीं मिलती तो वह उस वस्तु के गुणों को कैसे जान सकता है!
दूसरी बात यह संसार एक वृक्ष स्वरूप है- जैसे वृक्ष में डालियाँ तो बहुत होती हैं पर जिस डाली में ज्यादा फल लगते हैं वही झुकती है। इसी अनुभव के आधार में मैं नेत्रहीन होते हुये भी सिपाहियों, मंत्री और आपके पद का पता बताया अगर गलती हुई हो महाराज तो क्षमा करें।
राजा संत के अनुभव से प्रसन्न हो कर संत की जीवन व्रत्ति का प्रबंन्ध राजकोष से करने का मंत्री जी को आदेशित कर वापस राजमहल आया।
*शिक्षा:-*
आजकल हमारा मध्यमवर्ग परिवार संस्कार विहीन होता जा रहा है। थोड़ा सा पद, पैसा व प्रतिष्ठा पाते ही दूसरे की उपेक्षा करते हैं, जो उचित नहीं है। मधुर भाषा बोलने में किसी प्रकार का आर्थिक नुकसान नहीं होता है। अतः मीठा बोलने में कंजूसी नहीं करनी चाहिये।