सुन लेते हैं हम हाल सबका...🥀
अपनी बातें किसी को बता नहीं पाते, हँसते रहते हैं हरदम...😊
दर्द अपना किसी को दिखा नहीं पाते, साथ निभाते हैं हम सबका...😌
पर मदद किसी से ले नहीं पाते, अपनों की इस भीड़ में भी...🙂
किसी को अपना हम कह नहीं पाते।🫠
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अपनी बातें किसी को बता नहीं पाते, हँसते रहते हैं हरदम...😊
दर्द अपना किसी को दिखा नहीं पाते, साथ निभाते हैं हम सबका...😌
पर मदद किसी से ले नहीं पाते, अपनों की इस भीड़ में भी...🙂
किसी को अपना हम कह नहीं पाते।🫠
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झुमका, नाथिया , हार सवा लाख के रहा !
जवन दिए रही पायल तोहर नाप के रहा !!....2
दिल ते ऐसे तोड़ के गईलू ये हमार करेजा !
जैसे हमार दिल हमार तोहर बाप के रहा !!
जवन दिए रही पायल तोहर नाप के रहा !!....2
दिल ते ऐसे तोड़ के गईलू ये हमार करेजा !
जैसे हमार दिल हमार तोहर बाप के रहा !!
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𝙐𝙉𝙆𝙉𝙊𝙒𝙉 𝙎𝘼𝙔𝘼𝙍 pinned «झुमका, नाथिया , हार सवा लाख के रहा ! जवन दिए रही पायल तोहर नाप के रहा !!....2 दिल ते ऐसे तोड़ के गईलू ये हमार करेजा ! जैसे हमार दिल हमार तोहर बाप के रहा !!»
सुनो तुम मेरे हो ये अफवाह मैं फैला दूं क्या🥱
मुझसे जलने वालों को थोड़ा और जला दूं क्या...!!😉
मुझसे जलने वालों को थोड़ा और जला दूं क्या...!!😉
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दर्द से दूर जो रहते हैं बिखर जाते हैं 💔
.. दर्द को झेलने वाले ही निखर पाते हैं ~💗
.. दर्द को झेलने वाले ही निखर पाते हैं ~💗
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मांग भरी थी कभी नाम हमारे ,
आज वो किसी और का बिस्तर सावरे, ऐसे कैसे?
कहते थे जो न होंगे जुदा,
आज छोड़ गया मुझे दूजे किनारे , ऐसे कैसे?
डूबता बचाते मैं तैरते रहा हु ,
वो गए आगे अपनी पतवार संभाले, ऐसे कैसे?
बात तो कुछ लम्हे साथ चलने की हई थी और वो छोडकर चले गए हाल भी नहीं जाना, ऐसे कैसे...?
ये अल्फ़ाज़ नहीं दर्द है मेरे
वो कहती लिखते अच्छा हो, ऐसे कैस...? 💔❤️🩹
आज वो किसी और का बिस्तर सावरे, ऐसे कैसे?
कहते थे जो न होंगे जुदा,
आज छोड़ गया मुझे दूजे किनारे , ऐसे कैसे?
डूबता बचाते मैं तैरते रहा हु ,
वो गए आगे अपनी पतवार संभाले, ऐसे कैसे?
बात तो कुछ लम्हे साथ चलने की हई थी और वो छोडकर चले गए हाल भी नहीं जाना, ऐसे कैसे...?
ये अल्फ़ाज़ नहीं दर्द है मेरे
वो कहती लिखते अच्छा हो, ऐसे कैस...? 💔❤️🩹
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𝙐𝙉𝙆𝙉𝙊𝙒𝙉 𝙎𝘼𝙔𝘼𝙍 pinned «मांग भरी थी कभी नाम हमारे , आज वो किसी और का बिस्तर सावरे, ऐसे कैसे? कहते थे जो न होंगे जुदा, आज छोड़ गया मुझे दूजे किनारे , ऐसे कैसे? डूबता बचाते मैं तैरते रहा हु , वो गए आगे अपनी पतवार संभाले, ऐसे कैसे? बात तो कुछ लम्हे साथ चलने की…»
❣️🎻हे मां सरस्वती आपके चरणों में हमारी
वाणी , बुद्धि और कला समर्पित है
कृपा करके हमें ऐसा ज्ञान दें जो हमारे
जीवन को सही दिशा में ले जाए ।।
💞इस बसंत पंचमी में आपका आशीर्वाद हमें
रचनात्मकता, समृद्धि और नई ऊर्जा से भर
दे और हमारा हर प्रयास सफल हो जाए।🙏
💖💚आप सभी को बसंत पंचमी की
हार्दिक शुभकामनाएं..! 🙏🏻♥️
🙏 जय मां ♥️᪵᪳❥ सरस्वती 🙏
🌺🦚🌺🥰🥰🥰🥰🙏
───⊱•••••◈••◈••◈•••••⊰───
🌻🌨🌌🎆🌎🌥💞
वाणी , बुद्धि और कला समर्पित है
कृपा करके हमें ऐसा ज्ञान दें जो हमारे
जीवन को सही दिशा में ले जाए ।।
💞इस बसंत पंचमी में आपका आशीर्वाद हमें
रचनात्मकता, समृद्धि और नई ऊर्जा से भर
दे और हमारा हर प्रयास सफल हो जाए।🙏
💖💚आप सभी को बसंत पंचमी की
हार्दिक शुभकामनाएं..! 🙏🏻♥️
🙏 जय मां ♥️᪵᪳❥ सरस्वती 🙏
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धुँध छाई हुई है झीलों पर 🌫️
उड़ रहे हैं परिंदे टीलों पर 🕊️
सब का रुख़ है नशेमनों की तरफ़
बस्तियों की तरफ़ बनों की तरफ़ 🌲
अपने गल्लों को लेकर चरवाहे
सरहदी बस्तियों में जा पहुँचे 🐑
दिल-ए-नाकाम मैं कहाँ जाऊँ 😔
अजनबी शाम मैं कहाँ जाऊँ 🌇
स्रोत :
पुस्तक : Muntakhab Shahkar Nazmon Ka Album 📖 (पृष्ठ 422)
रचनाकार : Munavvar Jameel ✍️
प्रकाशन : Haji Haneef Printer Lahore 🏢 (2000)
संस्करण : 2000 📅
उड़ रहे हैं परिंदे टीलों पर 🕊️
सब का रुख़ है नशेमनों की तरफ़
बस्तियों की तरफ़ बनों की तरफ़ 🌲
अपने गल्लों को लेकर चरवाहे
सरहदी बस्तियों में जा पहुँचे 🐑
दिल-ए-नाकाम मैं कहाँ जाऊँ 😔
अजनबी शाम मैं कहाँ जाऊँ 🌇
स्रोत :
पुस्तक : Muntakhab Shahkar Nazmon Ka Album 📖 (पृष्ठ 422)
रचनाकार : Munavvar Jameel ✍️
प्रकाशन : Haji Haneef Printer Lahore 🏢 (2000)
संस्करण : 2000 📅
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चाँदनी-रात में अंधेरा था 🌑🌙
इस तरह बेबसी ने घेरा था
मेरे घर में बसी थी तारीकी 🏠
घर से बाहर मगर सवेरा था 🌅
वो किसी और का हुआ है आज 😔
वो जो कल तक तो सिर्फ़ मेरा था
उड़ गए आस के सभी पंछी 🕊️
जिन का दिल में मिरे बसेरा था ❤️🩹
बस वहीं 'जोश' का मज़ार है आज 🪦
कल जहाँ बेवफ़ा का डेरा था
इस तरह बेबसी ने घेरा था
मेरे घर में बसी थी तारीकी 🏠
घर से बाहर मगर सवेरा था 🌅
वो किसी और का हुआ है आज 😔
वो जो कल तक तो सिर्फ़ मेरा था
उड़ गए आस के सभी पंछी 🕊️
जिन का दिल में मिरे बसेरा था ❤️🩹
बस वहीं 'जोश' का मज़ार है आज 🪦
कल जहाँ बेवफ़ा का डेरा था
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ज़ख़्म खाते हैं और मुस्कुराते हैं हम 😊
हौसला अपना खुद आज़माते हैं हम 💪
आ लगा है किनारे सीना मगर 🌊
शोर तो आदतन ही मचाते हैं हम 🔊
हम जो डूबें तो कोई न फिर बच सके
ऐसा सागर में तूफ़ाँ उठाते हैं हम 🌪️
चूर कर भी चुके दिल के शीशे को वो 💔
अपनी हिम्मत है फिर चोट खाते हैं हम 🛡️
बे-रुख़ी से जो दिल तोड़ देते हैं 'जोश'
उन के ही प्यार के गीत गाते हैं हम 🎶
हौसला अपना खुद आज़माते हैं हम 💪
आ लगा है किनारे सीना मगर 🌊
शोर तो आदतन ही मचाते हैं हम 🔊
हम जो डूबें तो कोई न फिर बच सके
ऐसा सागर में तूफ़ाँ उठाते हैं हम 🌪️
चूर कर भी चुके दिल के शीशे को वो 💔
अपनी हिम्मत है फिर चोट खाते हैं हम 🛡️
बे-रुख़ी से जो दिल तोड़ देते हैं 'जोश'
उन के ही प्यार के गीत गाते हैं हम 🎶
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