आज १४ डिसेंबर, राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिन म्हणून साजरा केला जातो...
भारतात राष्ट्रीय ऊर्जा संवर्धन दिवस माणसाच्या दैनंदिन जीवनातील ऊर्जेचे महत्त्व जाणून तसेच कमी ऊर्जा वापर, अधिक ऊर्जा बचत किंवा संरक्षण करण्यास जागरुक करण्यासाठी साजरा केला जातो.
उर्जेचे अनावश्यक वापर टाळून ऊर्जा संवर्धन करण्याची गरज आहे. भविष्यातील वापरासाठी ती जतन करणे तसेच उपलब्ध उर्जा कार्यक्षमतेने वापरणे अतिशय आवश्यक आहे. ऊर्जा संवर्धन योजनेत अधिक परिणाम मिळवण्यासाठी प्रत्येक संसाधनाच्या वापरात ऊर्जा संवर्धनाची नाळ रुजलेली असावी.
अनावश्यकपणे चालणारे पंखे, लाइट, हीटर, रोजच्या वापरातील कार टेप किंवा इतर इलेक्ट्रीक वस्तूंना जोडतांना ही काळजी घेवून ऊर्जा वाचवू शकतो. ऊर्जेचा अतिरिक्त वापर वाचवण्याकरता ही अधिक सोपी व कार्यक्षम पद्धत आहे. ज्यामुळे आपण राष्ट्रीय ऊर्जा संवर्धन मोहिमेत मोठी भूमिका बजावू शकतो.
t.me/thempscupdate
भारतात राष्ट्रीय ऊर्जा संवर्धन दिवस माणसाच्या दैनंदिन जीवनातील ऊर्जेचे महत्त्व जाणून तसेच कमी ऊर्जा वापर, अधिक ऊर्जा बचत किंवा संरक्षण करण्यास जागरुक करण्यासाठी साजरा केला जातो.
उर्जेचे अनावश्यक वापर टाळून ऊर्जा संवर्धन करण्याची गरज आहे. भविष्यातील वापरासाठी ती जतन करणे तसेच उपलब्ध उर्जा कार्यक्षमतेने वापरणे अतिशय आवश्यक आहे. ऊर्जा संवर्धन योजनेत अधिक परिणाम मिळवण्यासाठी प्रत्येक संसाधनाच्या वापरात ऊर्जा संवर्धनाची नाळ रुजलेली असावी.
अनावश्यकपणे चालणारे पंखे, लाइट, हीटर, रोजच्या वापरातील कार टेप किंवा इतर इलेक्ट्रीक वस्तूंना जोडतांना ही काळजी घेवून ऊर्जा वाचवू शकतो. ऊर्जेचा अतिरिक्त वापर वाचवण्याकरता ही अधिक सोपी व कार्यक्षम पद्धत आहे. ज्यामुळे आपण राष्ट्रीय ऊर्जा संवर्धन मोहिमेत मोठी भूमिका बजावू शकतो.
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#Hindu Mahasabha : अखिल भारतीय हिन्दू महासभा
अखिल भारत हिन्दू महासभा भारत का एक राजनीतिक दल है। यह एक भारतीय हिन्दू राष्ट्रवादी संगठन है। इसकी स्थापना सन १९१५ में हुई थी। विनायक दामोदर सावरकर इसके अध्यक्ष रहे। केशव बलराम हेडगेवार इसके उपसभापति रहे।
बालकृष्ण शिवराम मुंजे हिन्दू महासभा के सदस्य थे। वे सन १९२७-२८ में अखिल भारत हिन्दू महासभा के अध्यक्ष रहे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को बनवाने में इनका बहुत योगदान था। संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार के वे राजनितिक गुरु थे। भारत के स्वतन्त्रता के उपरान्त जब महात्मा गांधी की हत्या हुई तब इसके बहुत से कार्यकर्ता इसे छोड़कर भारतीय जनसंघ में भर्ती हो गये।
स्थापना
सन् 1915 में मदनमोहन मालवीय के नेतृत्व में प्रयाग में हिंदू महासभा की स्थापना की गई। सन् 1916 में अंबिका चरण मजूमदार की अध्यक्षता में लखनऊ में कांग्रेस अधिवेशन हुआ। लखनऊ कांग्रेस ने मुस्लिम लीग से समझौता किया जिसके कारण सभी प्रांतों में मुसलमानों को विशेष अधिकार और संरक्षण प्राप्त हुए। हिंदू महासभा ने सन् 1917 में हरिद्वार में महाराजा नंदी कासिम बाजार की अध्यक्षता में अपना अधिवेशन करके कांग्रेस-मुस्लिम लीग समझौते तथा चेम्सफोर्ड योजना का तीव्र विरोध किया।
अंग्रेजों ने स्वाधीनता आंदोलन का दमन करने के लिए रौलट ऐक्ट बनाकर क्रांतिकारियों को कुचलने के लिए पुलिस और फौजी अदालतों को व्यापक अधिकार दिए। कांग्रेस की तरह हिंदू महासभा ने भी इसके विरुद्ध आंदोलन चलाया। उसी समय गांधी ने तुर्की के खलीफा को अंग्रेजों द्वारा हटाए जाने के विरुद्ध तुर्की के खिलाफत आंदोलन के समर्थन में भारत में भी खिलाफत आंदोलन चलाया।
सन् 1925 में कलकत्ता नगरी में लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में हिंदू महासभा का अधिवेशन हुआ जिसमें प्रसिद्ध कांग्रेसी नेता मुकुंदराव आनंदराव जयकर भी सम्मिलित हुए। सन् 1926 में देश में प्रथम निर्वाचन होने जा रहा था। अंग्रेजों ने असंबलियों में मुसलमानों के लिए स्थान सुरक्षित कर दिए। हिंदूमहासभा ने पृथक् निर्वाचन के सिद्धांत और मुसलमानों के लिए सीटें सुरक्षित करने की विरोध किया।
जब अंग्रेजों का साइमन कमीशन, रिफार्म ऐक्ट में सुधार के लिए भारत आया, तो हिंदू महासभा ने भी कांग्रेस के कहने पर इसका बहिष्कार किया। लाहौर में हिंदू महासभा के अध्यक्ष लाला लाजपत राय स्वयंसेवकों के साथ कमीशन के बहिष्कार के लिए एकत्र हुए। पुलिस ने लाठी प्रहार किया, जिसमें लाला को चोट आई और उनकी मृत्यु हो गई। ब्रिटिश सरकार ने लंदन में गोलमेज सम्मेलन आयोजित करके हिंदू, मुसलमान, सिक्ख आदि सभी के प्रतिनिधियों को बुलाया। हिंदू महासभा की ओर से डॉ॰ धर्मवीर, मुंजे, बैरिस्टर जयकर आदि सम्मिलित हुए। हिंदू महासभा ने सिंध प्रांत को बंबई से अलग करने का भी विरोध किया।
सावरकर का आगमन
१९३०-४० के दशक का अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के नेता शंकर किस्तैया, गोपाल गोडसे, मदनलाल पाहवा, दिगम्बर बाडगे , नारायण आप्टे, विनायक दामोदर सावरकर, नाथूराम गोडसे, विष्णु करकरे
सन् 1937 में जब हिन्दू महासभा काफी शिथिल पड़ गई थी और गांधी लोकप्रिय हो रहे थे, तब वीर सावरकर रत्नागिरि की नजरबंदी से मुक्त होकर आए। वीर सावरकर ने सन् 1937 में अपने प्रथम अध्यक्षीय भाषण में कहा कि हिंदू ही इस देश के राष्ट्रीय हैं और आज भी अंग्रेजों को भगाकर अपने देश की स्वतंत्रता उसी प्रकार प्राप्त कर सकते हैं, जिस प्रकार भूतकाल में उनके पूर्वजों ने शकों, ग्रीकों, हूणों, मुगलों, तुर्कों और पठानों को परास्त करके की थी। उन्होंने घोषणा की कि हिमालय से कन्याकुमारी और अटक से क़टक तक रहनेवाले वह सभी धर्म, संप्रदाय, प्रांत एवं क्षेत्र के लोग जो भारत भूमि को पुण्यभूमि तथा पितृभूमि मानते हैं, खानपान, मतमतांतर, रीतिरिवाज और भाषाओं की भिन्नता के बाद भी एक ही राष्ट्र के अंग हैं क्योंकि उनकी संस्कृति, परंपरा, इतिहास और मित्र और शत्रु भी एक हैं - उनमें कोई विदेशीयता की भावना नहीं है।
हैदराबाद का सत्याग्रह
पाकिस्तान की स्थापना
हिंदू महासभा ने पाकिस्तान बनने का समर्थन किया। हिंदू महासभा के नेता रामचन्द्र वीर और वीर सावरकर ने विभाजन का समर्थन किया। वर्तमान समय में देश की परिस्थितियों को देखते हुए हिंदू महासभा इसपर बल देती है कि देश की जनता को, प्रत्येक देशवासी को अनुभव करना चाहिए कि जब तक संसार के सभी छोटे मोटे राष्ट्र अपने स्वार्थ और हितों को लेकर दूसरों पर आक्रमण करने की घात में लगे हैं, उस समय तक भारत की उन्नति और विकास के लिए प्रखर हिंदू राष्ट्रवादी भावना का प्रसार तथा राष्ट्र को आधुनिकतम अस्त्रशस्त्रों से सुसज्जित होना नितांत आवश्यक है।
१९५१/५२ के प्रथम लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग ने अखिल भारतीय हिन्दू महासभा को 'राष्ट्रीय दल' के रूप में मान्यता दी थी। इसे 'घोडा और घुड़सवार' चुनाव-चिह्न प्रदान किया गया था।
t.me/historymm
अखिल भारत हिन्दू महासभा भारत का एक राजनीतिक दल है। यह एक भारतीय हिन्दू राष्ट्रवादी संगठन है। इसकी स्थापना सन १९१५ में हुई थी। विनायक दामोदर सावरकर इसके अध्यक्ष रहे। केशव बलराम हेडगेवार इसके उपसभापति रहे।
बालकृष्ण शिवराम मुंजे हिन्दू महासभा के सदस्य थे। वे सन १९२७-२८ में अखिल भारत हिन्दू महासभा के अध्यक्ष रहे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को बनवाने में इनका बहुत योगदान था। संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार के वे राजनितिक गुरु थे। भारत के स्वतन्त्रता के उपरान्त जब महात्मा गांधी की हत्या हुई तब इसके बहुत से कार्यकर्ता इसे छोड़कर भारतीय जनसंघ में भर्ती हो गये।
स्थापना
सन् 1915 में मदनमोहन मालवीय के नेतृत्व में प्रयाग में हिंदू महासभा की स्थापना की गई। सन् 1916 में अंबिका चरण मजूमदार की अध्यक्षता में लखनऊ में कांग्रेस अधिवेशन हुआ। लखनऊ कांग्रेस ने मुस्लिम लीग से समझौता किया जिसके कारण सभी प्रांतों में मुसलमानों को विशेष अधिकार और संरक्षण प्राप्त हुए। हिंदू महासभा ने सन् 1917 में हरिद्वार में महाराजा नंदी कासिम बाजार की अध्यक्षता में अपना अधिवेशन करके कांग्रेस-मुस्लिम लीग समझौते तथा चेम्सफोर्ड योजना का तीव्र विरोध किया।
अंग्रेजों ने स्वाधीनता आंदोलन का दमन करने के लिए रौलट ऐक्ट बनाकर क्रांतिकारियों को कुचलने के लिए पुलिस और फौजी अदालतों को व्यापक अधिकार दिए। कांग्रेस की तरह हिंदू महासभा ने भी इसके विरुद्ध आंदोलन चलाया। उसी समय गांधी ने तुर्की के खलीफा को अंग्रेजों द्वारा हटाए जाने के विरुद्ध तुर्की के खिलाफत आंदोलन के समर्थन में भारत में भी खिलाफत आंदोलन चलाया।
सन् 1925 में कलकत्ता नगरी में लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में हिंदू महासभा का अधिवेशन हुआ जिसमें प्रसिद्ध कांग्रेसी नेता मुकुंदराव आनंदराव जयकर भी सम्मिलित हुए। सन् 1926 में देश में प्रथम निर्वाचन होने जा रहा था। अंग्रेजों ने असंबलियों में मुसलमानों के लिए स्थान सुरक्षित कर दिए। हिंदूमहासभा ने पृथक् निर्वाचन के सिद्धांत और मुसलमानों के लिए सीटें सुरक्षित करने की विरोध किया।
जब अंग्रेजों का साइमन कमीशन, रिफार्म ऐक्ट में सुधार के लिए भारत आया, तो हिंदू महासभा ने भी कांग्रेस के कहने पर इसका बहिष्कार किया। लाहौर में हिंदू महासभा के अध्यक्ष लाला लाजपत राय स्वयंसेवकों के साथ कमीशन के बहिष्कार के लिए एकत्र हुए। पुलिस ने लाठी प्रहार किया, जिसमें लाला को चोट आई और उनकी मृत्यु हो गई। ब्रिटिश सरकार ने लंदन में गोलमेज सम्मेलन आयोजित करके हिंदू, मुसलमान, सिक्ख आदि सभी के प्रतिनिधियों को बुलाया। हिंदू महासभा की ओर से डॉ॰ धर्मवीर, मुंजे, बैरिस्टर जयकर आदि सम्मिलित हुए। हिंदू महासभा ने सिंध प्रांत को बंबई से अलग करने का भी विरोध किया।
सावरकर का आगमन
१९३०-४० के दशक का अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के नेता शंकर किस्तैया, गोपाल गोडसे, मदनलाल पाहवा, दिगम्बर बाडगे , नारायण आप्टे, विनायक दामोदर सावरकर, नाथूराम गोडसे, विष्णु करकरे
सन् 1937 में जब हिन्दू महासभा काफी शिथिल पड़ गई थी और गांधी लोकप्रिय हो रहे थे, तब वीर सावरकर रत्नागिरि की नजरबंदी से मुक्त होकर आए। वीर सावरकर ने सन् 1937 में अपने प्रथम अध्यक्षीय भाषण में कहा कि हिंदू ही इस देश के राष्ट्रीय हैं और आज भी अंग्रेजों को भगाकर अपने देश की स्वतंत्रता उसी प्रकार प्राप्त कर सकते हैं, जिस प्रकार भूतकाल में उनके पूर्वजों ने शकों, ग्रीकों, हूणों, मुगलों, तुर्कों और पठानों को परास्त करके की थी। उन्होंने घोषणा की कि हिमालय से कन्याकुमारी और अटक से क़टक तक रहनेवाले वह सभी धर्म, संप्रदाय, प्रांत एवं क्षेत्र के लोग जो भारत भूमि को पुण्यभूमि तथा पितृभूमि मानते हैं, खानपान, मतमतांतर, रीतिरिवाज और भाषाओं की भिन्नता के बाद भी एक ही राष्ट्र के अंग हैं क्योंकि उनकी संस्कृति, परंपरा, इतिहास और मित्र और शत्रु भी एक हैं - उनमें कोई विदेशीयता की भावना नहीं है।
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पाकिस्तान की स्थापना
हिंदू महासभा ने पाकिस्तान बनने का समर्थन किया। हिंदू महासभा के नेता रामचन्द्र वीर और वीर सावरकर ने विभाजन का समर्थन किया। वर्तमान समय में देश की परिस्थितियों को देखते हुए हिंदू महासभा इसपर बल देती है कि देश की जनता को, प्रत्येक देशवासी को अनुभव करना चाहिए कि जब तक संसार के सभी छोटे मोटे राष्ट्र अपने स्वार्थ और हितों को लेकर दूसरों पर आक्रमण करने की घात में लगे हैं, उस समय तक भारत की उन्नति और विकास के लिए प्रखर हिंदू राष्ट्रवादी भावना का प्रसार तथा राष्ट्र को आधुनिकतम अस्त्रशस्त्रों से सुसज्जित होना नितांत आवश्यक है।
१९५१/५२ के प्रथम लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग ने अखिल भारतीय हिन्दू महासभा को 'राष्ट्रीय दल' के रूप में मान्यता दी थी। इसे 'घोडा और घुड़सवार' चुनाव-चिह्न प्रदान किया गया था।
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#SSE राज्यसेवा मुख्य परीक्षा-2019 कटऑफ अंदाज...👆👆
अंतिम उत्तरतालिकातील बदल आणि उपलब्ध पदे पाहता राज्यसेवा मुख्य परीक्षा-2017 प्रमाणे यावर्षी पण तसाच निकाल लागेल अशी शक्यता आहे..
वरील #SSE राज्यसेवा मुख्य-2019 साठी हा आमचा अंदाज असून यापेक्षा कमी कटऑफ लागल्यास आम्हाला आनंदच होईल..!
🚨त्यामुळे Final Answerkey नुसार या जवळपास स्कोर असणाऱ्या उमेदवारांनी पूर्व परीक्षा-2020 बरोबरच मुलाखतीची पण तयारी करावी..
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जमैकाची टोनी अॅन सिंह 'मिस वर्ल्ड २०१९'
http://mtonline.in/Y-0pja?dga via @mataonline: http://app.mtmobile.in
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Maharashtra Times
जमैकाची टोनी अॅन सिंह 'मिस वर्ल्ड २०१९'
international news: मिस जमैका टोनी अॅन सिंह हिने 'मिस वर्ल्ड २०१९' चा किताब पटकावला आहे. युकेतील लंडनमध्ये ही ६९ वी मिस वर्ल्ड स्पर्धा पार पडली. एकूण ११४ स्पर्धकांमध्ये टोनीने बाजी मारली.
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# विजय दिवस : 16 डिसेंबर, 1971
1971 साली भारताने पाकिस्तानवर युद्धात विजय मिळवला होता. भारत-पाकिस्तानमध्ये लढल्या गेलेल्या दुस-या युद्धात भारतीय सैन्याच्या पराक्रमासमोर पाकिस्तानने अक्षरश: गुडघे टेकत शरणागती पत्करली होती. पाकिस्तानी लष्कराच्या पूर्व कमांडने शरणागतीच्या कागदपत्रांवर स्वाक्षरी केल्यानंतर हे युद्ध समाप्त झाले. भारताने पाकिस्तानवर मिळवलेल्या या विजयाला आज 47 वर्ष पुर्ण होत आहेत.
या युद्धातून एका नव्या देशाची बांगलादेशची निर्मिती झाली. त्यावेळी भारतीय लष्कराच्या पूर्व कमांडचे लेफ्टनंट जनरल "जे एस अरोरा" प्रमुख होते. शेख मुजीबूर रहमान यांच्या अध्यक्षतेखालील आवामी पक्षाने पूर्व पाकिस्तानात मिळवलेल्या विजयामुळे युद्धाची पार्श्वभूमी तयार झाली. त्यावेळी पश्चिम पाकिस्तानात झुल्फीकार अली भुट्टो यांचा पाकिस्तान पीपल्स पार्टी मोठा पक्ष होता.
पाकिस्तानी लष्कराचे पूर्व पाकिस्तानमध्ये मोठ्या प्रमाणावर अत्याचार सुरु होते. बांगलादेशातून जवळपास 1 कोटी लोक आश्रयासाठी भारतात आले होते. जर असेच सुरु राहिले असते तर भारतात असंतोष वाढला असता, त्यामुळे तत्कालीन पंतप्रधान इंदिरा गांधी यांना युद्धाचा निर्णय घ्यावा लागला. 3 डिसेंबर रोजी पाकिस्तानी हवाई दलाच्या विमानांनी भारतीय हवाई दलाच्या 11 तळांवर हल्ले केले आणि युद्धाला तोंड फुटलं. भारतीय सैन्याने फक्त 13 दिवसात पाकिस्तानला लोळवून इतिहास रचला. पाकिस्तानचे लष्करप्रमुख लेफ्टनंट जनरल आमिर अब्दुल्ला खान "नियाजी" यांनी ढाक्याच्या रेसकोर्स मैदानावर आपल्या 93 हजार सैनिकांसोबत, भारतीय सैन्याचे कमांडर जनरल जगजीत सिंह अरोरा यांच्यासमोर शरणागती पत्कारली होती.
दोन्ही देशांमधील इतिहासातील हे सर्वात छोटे युद्ध ठरले. 90 ते 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकांना भारतीय लष्कराने कैद केले होते. या युद्धात भारताच्या तब्बल चार हजार सैनिकांनी आपल्या प्राणांची आहुती दिली. तर दहा हजार सैनिक जखमी झाले होते. याचीच आठवण म्हणून आज देशभर विजय दिवस साजरा केला जातो. विजय दिवसाला दिल्लीतल्या इंडिया गेटवर अमर जवान ज्योतीला सलामी देत युद्धातील शहीदांना श्रद्धांजली वाहिली जाते.
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1971 साली भारताने पाकिस्तानवर युद्धात विजय मिळवला होता. भारत-पाकिस्तानमध्ये लढल्या गेलेल्या दुस-या युद्धात भारतीय सैन्याच्या पराक्रमासमोर पाकिस्तानने अक्षरश: गुडघे टेकत शरणागती पत्करली होती. पाकिस्तानी लष्कराच्या पूर्व कमांडने शरणागतीच्या कागदपत्रांवर स्वाक्षरी केल्यानंतर हे युद्ध समाप्त झाले. भारताने पाकिस्तानवर मिळवलेल्या या विजयाला आज 47 वर्ष पुर्ण होत आहेत.
या युद्धातून एका नव्या देशाची बांगलादेशची निर्मिती झाली. त्यावेळी भारतीय लष्कराच्या पूर्व कमांडचे लेफ्टनंट जनरल "जे एस अरोरा" प्रमुख होते. शेख मुजीबूर रहमान यांच्या अध्यक्षतेखालील आवामी पक्षाने पूर्व पाकिस्तानात मिळवलेल्या विजयामुळे युद्धाची पार्श्वभूमी तयार झाली. त्यावेळी पश्चिम पाकिस्तानात झुल्फीकार अली भुट्टो यांचा पाकिस्तान पीपल्स पार्टी मोठा पक्ष होता.
पाकिस्तानी लष्कराचे पूर्व पाकिस्तानमध्ये मोठ्या प्रमाणावर अत्याचार सुरु होते. बांगलादेशातून जवळपास 1 कोटी लोक आश्रयासाठी भारतात आले होते. जर असेच सुरु राहिले असते तर भारतात असंतोष वाढला असता, त्यामुळे तत्कालीन पंतप्रधान इंदिरा गांधी यांना युद्धाचा निर्णय घ्यावा लागला. 3 डिसेंबर रोजी पाकिस्तानी हवाई दलाच्या विमानांनी भारतीय हवाई दलाच्या 11 तळांवर हल्ले केले आणि युद्धाला तोंड फुटलं. भारतीय सैन्याने फक्त 13 दिवसात पाकिस्तानला लोळवून इतिहास रचला. पाकिस्तानचे लष्करप्रमुख लेफ्टनंट जनरल आमिर अब्दुल्ला खान "नियाजी" यांनी ढाक्याच्या रेसकोर्स मैदानावर आपल्या 93 हजार सैनिकांसोबत, भारतीय सैन्याचे कमांडर जनरल जगजीत सिंह अरोरा यांच्यासमोर शरणागती पत्कारली होती.
दोन्ही देशांमधील इतिहासातील हे सर्वात छोटे युद्ध ठरले. 90 ते 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकांना भारतीय लष्कराने कैद केले होते. या युद्धात भारताच्या तब्बल चार हजार सैनिकांनी आपल्या प्राणांची आहुती दिली. तर दहा हजार सैनिक जखमी झाले होते. याचीच आठवण म्हणून आज देशभर विजय दिवस साजरा केला जातो. विजय दिवसाला दिल्लीतल्या इंडिया गेटवर अमर जवान ज्योतीला सलामी देत युद्धातील शहीदांना श्रद्धांजली वाहिली जाते.
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🚨 विधानपरिषदेच्या विरोधी पक्षनेतेपदी प्रविण दरेकर यांची निवड
https://www.loksatta.com/maharashtra-news/pravin-darekar-is-leader-of-opposition-in-maharashtra-legislative-council-dmp-82-2037527/
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लोकसत्ता
विधानपरिषदेच्या विरोधी पक्षनेतेपदी प्रविण दरेकर यांची निवड
भाजपाचे आमदार सुरजितसिंह ठाकूर, भाई गिरकर यांची नावे आघाडीवर होती.
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# कृषक प्रजा पार्टी व युनियनिस्ट पार्टी..👇
# भारत सरकारचा कायदा,1935 नुसार झालेल्या 1937 च्या निवडणुकीत ..👇
1. ☑️बंगाल प्रांतात- "ए. के. फझलूल हक" ह्यांच्या "कृषक प्रजा पार्टी" ने प्रांतीय सरकार बनवले.
2.☑️ सिंध प्रांतात- "सिकंदर हयात खान" ह्यांच्या नेतृत्वाखाली "युनियनिस्ट पार्टी" ने मुस्लिम लीगला हरवून प्रांतीय सरकार बनवले.
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2.☑️ सिंध प्रांतात- "सिकंदर हयात खान" ह्यांच्या नेतृत्वाखाली "युनियनिस्ट पार्टी" ने मुस्लिम लीगला हरवून प्रांतीय सरकार बनवले.
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Read: अभिमानास्पद! मराठमोळे मनोज नरवणे होणार लष्करप्रमुख
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अभिमानास्पद! मराठमोळे मनोज नरवणे होणार लष्करप्रमुख
३१ डिसेंबर रोजी लष्करप्रमुख बिपीन रावत सेवानिवृत्त होत आहेत
आजच्याच दिवशी (१७ डिसेंबर १९०३) राईट बंधूंनी विमानाचा शोध लावला होता जाणून घेऊया त्याविषयी अधिक माहिती⠀
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हवेत उडण्याची इच्छासुद्धा माणसाला पूर्वीपासून होती. खांद्याला सुपांसारखे पंख बांधून ते हाताने फडफडवण्याचे अनेक प्रयोग माणसाने केले. पण स्वतःचे वजन उचलून काही काळपर्यंत हवेत तरंगत ठेवण्याइतका जोर लावत राहणे त्याला शक्य झाले नाही मात्र बलून्स, ग्लायडर्स अशा अनेक प्रकारच्या उडू शकणाऱ्या यंत्रांनी हवेत तरंगण्याची युक्ती आधी जमलेली होती. पण राईट ब्रदर्स हे विमानोड्डाण करणारे किंवा त्यावर प्रयोग करणारे पहिले मुळीच नव्हते. त्यापूर्वीही अनेक जणांनी हे प्रयोग केले होते. मग राईट जोडगोळीने काय नवीन केलं? तर त्यांनी हवेपेक्षा जड विमानाला नियंत्रित करत उडवण्याचं तंत्र शोधून काढलं.. या हवेपेक्षा जड विमानाचं तंत्र काय आहे?⠀
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हवेपेक्षा जड असूनही हवेमध्ये तरंगण्यासाठी ती वस्तू गतिमान असावी लागते. अशा उडत्या वस्तूवर एकाच वेळी चार दिशांनी चार प्रकारचे जोर कार्य करीत असतात. गुरुत्वाकर्षणामुळे पृथ्वी तिला खाली खेचते तर गतिमान हवा वर उचलते. या वर उचलण्याला 'लिफ्ट'(उचल) म्हणतात. पुढे जाण्यासाठी जो जोर लावावा लागतो त्याला 'थ्रस्ट'(धक्का) असे नांव दिले आहे. या पुढे जाण्याला हवेकडून होणाऱ्या प्रतिकारामुळे ती वस्तू मागे ओढली जाते, याला 'ड्रॅग'(ओढ) म्हणतात. मुख्यतः पुढे जाण्याच्या क्रियेमुळे लिफ्ट व ड्रॅग या दोन्ही प्रतिक्रिया निर्माण होतात. कमीत कमी थ्रस्टची आवश्यकता लागणे, जास्तीत जास्त लिफ्ट मिळवणे व दिशा, वेग आणि उंची यावर चांगला ताबा ठेवणे हे विमान तयार करून उडवण्याच्या कलेतील कौशल्य आहे.⠀
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विमान बनवून उडवण्याचा नाद लागण्यापूर्वी विल्बर आणि ऑर्विल या राइट बंधूद्वयांनी सायकली दुरुस्त करण्यापासून सुरू करून त्याच्या सुधारित आवृत्या तयार करून विकण्यापर्यंत मजल मारली होती. याच काळात विमाने उडवण्याचे जे प्रयोग जगभर सुरू होते त्याच्या बातम्यांकडे त्यांचे लक्ष वेधले गेले. यातील बहुतेक सारी उड्डाणे अयशस्वी होऊन अल्पावधीत खाली कोसळत असत..
t.me/thempscupdate
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हवेत उडण्याची इच्छासुद्धा माणसाला पूर्वीपासून होती. खांद्याला सुपांसारखे पंख बांधून ते हाताने फडफडवण्याचे अनेक प्रयोग माणसाने केले. पण स्वतःचे वजन उचलून काही काळपर्यंत हवेत तरंगत ठेवण्याइतका जोर लावत राहणे त्याला शक्य झाले नाही मात्र बलून्स, ग्लायडर्स अशा अनेक प्रकारच्या उडू शकणाऱ्या यंत्रांनी हवेत तरंगण्याची युक्ती आधी जमलेली होती. पण राईट ब्रदर्स हे विमानोड्डाण करणारे किंवा त्यावर प्रयोग करणारे पहिले मुळीच नव्हते. त्यापूर्वीही अनेक जणांनी हे प्रयोग केले होते. मग राईट जोडगोळीने काय नवीन केलं? तर त्यांनी हवेपेक्षा जड विमानाला नियंत्रित करत उडवण्याचं तंत्र शोधून काढलं.. या हवेपेक्षा जड विमानाचं तंत्र काय आहे?⠀
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हवेपेक्षा जड असूनही हवेमध्ये तरंगण्यासाठी ती वस्तू गतिमान असावी लागते. अशा उडत्या वस्तूवर एकाच वेळी चार दिशांनी चार प्रकारचे जोर कार्य करीत असतात. गुरुत्वाकर्षणामुळे पृथ्वी तिला खाली खेचते तर गतिमान हवा वर उचलते. या वर उचलण्याला 'लिफ्ट'(उचल) म्हणतात. पुढे जाण्यासाठी जो जोर लावावा लागतो त्याला 'थ्रस्ट'(धक्का) असे नांव दिले आहे. या पुढे जाण्याला हवेकडून होणाऱ्या प्रतिकारामुळे ती वस्तू मागे ओढली जाते, याला 'ड्रॅग'(ओढ) म्हणतात. मुख्यतः पुढे जाण्याच्या क्रियेमुळे लिफ्ट व ड्रॅग या दोन्ही प्रतिक्रिया निर्माण होतात. कमीत कमी थ्रस्टची आवश्यकता लागणे, जास्तीत जास्त लिफ्ट मिळवणे व दिशा, वेग आणि उंची यावर चांगला ताबा ठेवणे हे विमान तयार करून उडवण्याच्या कलेतील कौशल्य आहे.⠀
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Read: मराठमोळ्या स्मृतीला ICC कडून मिळाला बहुमान
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ऑस्टेलियाच्या एलिस पेरी हिलाही विशेष पुरस्कार
Read: काही मिनिटात शत्रूचा वेध घेणाऱ्या सुपरसॉनिक 'ब्रह्मोस'ची यशस्वी चाचणी
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