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# मन_के_मते_न_चलिए
मन तो मन है। कभी डगमगाता है तो कभी चट्टान की तरह खड़ा हो जाता है। कभी आसमाँ के तारे तोड़ने की सोचता है तो कभी ताश के पत्तों की तरह ढह जाता है। मन के जंची तो भयंकर पसीने से भीगा शरीर भी मुस्कुराता हुआ दौड़-धपाड़ कर लेगा और नहीं जंची तो पंचमेवे की मिठाई को भी नकार देगा। भक्ष्याभक्ष्य के मानक मन ही स्थापित करता है।
बादलों की उमड़-धुमड़ किसी का मन हर लेती है तो किसी का मन उसे देख भारी हो जाता है। कोई मन-मुटाव के खेल खेलकर मनगढ़ंत दुःख गढ़ लेता है तो कोई मनमौजी अंदाज़ में रूठी रानी के सौंदर्य का महिमामंडन कर उखड़े मन को भी मोह लेता है।
कुछ लोग ताजिन्दगी मन का मैल मन में ही रखते हैं कुछ लोग मन में अद्भुत विचारों को सजा कर रखते हैं। कुछ लोगों का मन कहीं उलझ जाता है तो सुलझने का नाम नहीं लेता, और कुछ लोगों का मन एक बार सुलझ जाता है तो मजाल है दुनियां की कोई ताकत उसको उलझा दे।
मन कच्चा है तो फौलादी मांसपेशियां भी कुछ नहीं कर पायेगी, और मन मजबूत है तो उखड़ती स्वांसों में भी प्राण भर आता है।
जीवन में सबकुछ मनभाया हो, ऐसा सदैव होता नहीं है। सुख और दुःख जीवन के दो शाश्वत अनुभव है लेकिन संसार में इन दोनों का मनगढन्त रूप ज्यादा प्रचलन में है।
एक मन कहता है मैं अपने सारे अवसर खो चुका हूँ दूसरा मन कहता है जो जीवन इतने अवसर खोकर भी टिक गया वह अवसरों के भरोसे थोड़े ही जीता है।
एक मन कहता है मुझे दुनियां ने धोखे ही धोखे दिए हैं तो दूसरा मन कहता चलो, अब बहुतेरे धोखेबाज मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते। मैं अधिक अनुभवी हूँ।
एक मन कहता है "मैं जिन्दगी में इससे भी ज्यादा पाने का हकदार था" दूसरा मन कहता है "अगर पहली बात सच रही है तो अभी भी तुम उसी प्रकार के हकदार हो"
एक मन अक्सर अपनी खराब आदत के अनुसार हर चीज़ को पाने खोने का एहसास करता हुआ दुःखी और खुश रहने का दिखावा करता है तो दूसरा मन दुःखी दिखता हुआ भी नीले आकाश के नीचे स्थित हर चीज़ को जीने का साधन समझता है ना कि जीवन का उद्देश्य; तो उसके सुखों का अनुभव आप उसके जैसा बनकर ही कर सकते हैं।
सन्त कबीर ने सभी ग्रंथों का सार कितने सरल शब्दों में रख दिया।
मन के मते न चलिए, मन के मते अनेक,
जो मन पर असवार है, सो साधु कोई एक।।
मन को रोजाना नहलाये। मन की अद्भुत सत्ता संसार के संपर्क में आकर मैली ज्यादा होती है। मन के घोड़े पर आप सवार है, और लगाम आपके हाथ में है तो आपका गंतव्य तक पहुंचना तय है।
मन तो मन है। कभी डगमगाता है तो कभी चट्टान की तरह खड़ा हो जाता है। कभी आसमाँ के तारे तोड़ने की सोचता है तो कभी ताश के पत्तों की तरह ढह जाता है। मन के जंची तो भयंकर पसीने से भीगा शरीर भी मुस्कुराता हुआ दौड़-धपाड़ कर लेगा और नहीं जंची तो पंचमेवे की मिठाई को भी नकार देगा। भक्ष्याभक्ष्य के मानक मन ही स्थापित करता है।
बादलों की उमड़-धुमड़ किसी का मन हर लेती है तो किसी का मन उसे देख भारी हो जाता है। कोई मन-मुटाव के खेल खेलकर मनगढ़ंत दुःख गढ़ लेता है तो कोई मनमौजी अंदाज़ में रूठी रानी के सौंदर्य का महिमामंडन कर उखड़े मन को भी मोह लेता है।
कुछ लोग ताजिन्दगी मन का मैल मन में ही रखते हैं कुछ लोग मन में अद्भुत विचारों को सजा कर रखते हैं। कुछ लोगों का मन कहीं उलझ जाता है तो सुलझने का नाम नहीं लेता, और कुछ लोगों का मन एक बार सुलझ जाता है तो मजाल है दुनियां की कोई ताकत उसको उलझा दे।
मन कच्चा है तो फौलादी मांसपेशियां भी कुछ नहीं कर पायेगी, और मन मजबूत है तो उखड़ती स्वांसों में भी प्राण भर आता है।
जीवन में सबकुछ मनभाया हो, ऐसा सदैव होता नहीं है। सुख और दुःख जीवन के दो शाश्वत अनुभव है लेकिन संसार में इन दोनों का मनगढन्त रूप ज्यादा प्रचलन में है।
एक मन कहता है मैं अपने सारे अवसर खो चुका हूँ दूसरा मन कहता है जो जीवन इतने अवसर खोकर भी टिक गया वह अवसरों के भरोसे थोड़े ही जीता है।
एक मन कहता है मुझे दुनियां ने धोखे ही धोखे दिए हैं तो दूसरा मन कहता चलो, अब बहुतेरे धोखेबाज मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते। मैं अधिक अनुभवी हूँ।
एक मन कहता है "मैं जिन्दगी में इससे भी ज्यादा पाने का हकदार था" दूसरा मन कहता है "अगर पहली बात सच रही है तो अभी भी तुम उसी प्रकार के हकदार हो"
एक मन अक्सर अपनी खराब आदत के अनुसार हर चीज़ को पाने खोने का एहसास करता हुआ दुःखी और खुश रहने का दिखावा करता है तो दूसरा मन दुःखी दिखता हुआ भी नीले आकाश के नीचे स्थित हर चीज़ को जीने का साधन समझता है ना कि जीवन का उद्देश्य; तो उसके सुखों का अनुभव आप उसके जैसा बनकर ही कर सकते हैं।
सन्त कबीर ने सभी ग्रंथों का सार कितने सरल शब्दों में रख दिया।
मन के मते न चलिए, मन के मते अनेक,
जो मन पर असवार है, सो साधु कोई एक।।
मन को रोजाना नहलाये। मन की अद्भुत सत्ता संसार के संपर्क में आकर मैली ज्यादा होती है। मन के घोड़े पर आप सवार है, और लगाम आपके हाथ में है तो आपका गंतव्य तक पहुंचना तय है।
*🔘मा०शि० म० म० प्र०*
*बोर्ड परीक्षा 2024*
*पर्यवेक्षकों के लिए परीक्षा संबंधित आवश्यक निर्देश*
1 कलेक्टर प्रतिनिधि को
परीक्षा केन्द्र पर 10AM तक रहेंगे । उनकी उपस्थिति में ही परीक्षा आरंभ होगी।
2 मोबाईल पूर्णता प्रतिबंधित है। सभी के मोबाइल बंद कर कलेक्टर प्रतिनिधि के हस्ताक्षर से शील्ड किए जाना हैं।
3 परीक्षार्थियों को 8:30 के बाद केन्द्र अध्यक्ष की अनुमति से ही प्रवेश दे।
4 परीक्षार्थी की शालीनता से सघन जाँच करे l
5 पेपर अब परीक्षा कक्ष में ही खोले जायेंगे ।
6 परीक्षा के प्रश्नपत्रों का
ABCD सेट क्रम मे वितरण होगा। आगे पीछे दाएं बाएं समान सेट ना हो।
7 पेपर पैकेट परीक्षा कक्ष में 8:50 प्रात से पहले नहीं खोला जाए। प्रश्न पत्र पर रोल नंबर के अतिरिक्त किसी भी प्रकार के निशान या लिखने से परीक्षार्थियों को मना करें।
8 परीक्षा कक्ष में किसी तरह की कोई अनुचित सामग्री ना हो। वातावरण शांत व परीक्षा के अनुकूल हो। कोई परीक्षार्थी प्रश्न पत्र या उत्तर पुस्तिका बदलने या अनुचित साधन प्रयोग करने जैसा कृत्य कक्ष में नहीं कर पाए । इस तरह की घटना के लिये पर्यवेक्षक जिम्मेदार होंगे।
9 पर्यवेक्षक सुनिश्चित करे कि परीक्षार्थी OMRSHEET सही भरे। सीट भरते समय केवल नीले या काले रंग के बॉल पॉइंट पेन का ही प्रयोग किया जावे।
10 OMR SHEET वाली उत्तर पुस्तिका मिलेगी एवं पूरक उ. पु. नहीं दी जायेगी।
11 कटी फटी धागा उखड़ी या कम पेज की कॉपी प्रयोग नहीं करना हैं।
12 OMR SHEET की जानकारी भरने में परीक्षार्थी की सहायता करें । सही रोल नंबर व अन्य जानकारी प्रवेश पत्र के अनुसार जांच करने के बाद ही पर्यवेक्षक अपने हस्ताक्षर करे ।
13 प्रवेश पत्र पर फोटो अस्पष्ट या न होने पर संबंधित प्राचार्य से सत्यापित कराने को कहे।
14 अक्षम परीक्षार्थियों के लिए लेखक के संबंध में परीक्षार्थी के स्कूल से अलग व निचली की कक्षा का विद्यार्थी हो।
15 पर्यवेक्षक को पहचान पत्र लगाना अनिवार्य है। और पर्यवेक्षक 8:00तक परीक्षा केंद्र पर अनिवार्यतः उपस्थित हो जावे ।
16 परीक्षार्थी को 8:50 पर उ. पु. और 8:55 पर प्रश्नपत्र दिया जावे।
17 उपस्थिति पत्रक पर सही कालम में उ. पु. का सही नंबर लिख कर प्रवेश पत्र के अनुसार परीक्षार्थी के हस्ताक्षर व पर्यवेक्षक स्वयं के हस्ताक्षर करें।
18 परीक्षा कक्ष में उ. पु. संग्रह करते समय ध्यान रखें कि सभी उ. पु. जमा करने गिन कर संतुष्ट होने के बाद ही परीक्षार्थी कक्ष से जाए।
19 उ. पु. संग्रह करते समय ध्यान रखें कि माध्यमवार व विषयवार कॉपी अलग जमा करे ।
20 पर्यवेक्षक परीक्षा केंद्र की पूरी कापियां जमा होने के बाद अपनी अगले दिन की ड्यूटी की जानकारी लेकर ही परीक्षा केंद्र से जाए।
*बोर्ड परीक्षा 2024*
*पर्यवेक्षकों के लिए परीक्षा संबंधित आवश्यक निर्देश*
1 कलेक्टर प्रतिनिधि को
परीक्षा केन्द्र पर 10AM तक रहेंगे । उनकी उपस्थिति में ही परीक्षा आरंभ होगी।
2 मोबाईल पूर्णता प्रतिबंधित है। सभी के मोबाइल बंद कर कलेक्टर प्रतिनिधि के हस्ताक्षर से शील्ड किए जाना हैं।
3 परीक्षार्थियों को 8:30 के बाद केन्द्र अध्यक्ष की अनुमति से ही प्रवेश दे।
4 परीक्षार्थी की शालीनता से सघन जाँच करे l
5 पेपर अब परीक्षा कक्ष में ही खोले जायेंगे ।
6 परीक्षा के प्रश्नपत्रों का
ABCD सेट क्रम मे वितरण होगा। आगे पीछे दाएं बाएं समान सेट ना हो।
7 पेपर पैकेट परीक्षा कक्ष में 8:50 प्रात से पहले नहीं खोला जाए। प्रश्न पत्र पर रोल नंबर के अतिरिक्त किसी भी प्रकार के निशान या लिखने से परीक्षार्थियों को मना करें।
8 परीक्षा कक्ष में किसी तरह की कोई अनुचित सामग्री ना हो। वातावरण शांत व परीक्षा के अनुकूल हो। कोई परीक्षार्थी प्रश्न पत्र या उत्तर पुस्तिका बदलने या अनुचित साधन प्रयोग करने जैसा कृत्य कक्ष में नहीं कर पाए । इस तरह की घटना के लिये पर्यवेक्षक जिम्मेदार होंगे।
9 पर्यवेक्षक सुनिश्चित करे कि परीक्षार्थी OMRSHEET सही भरे। सीट भरते समय केवल नीले या काले रंग के बॉल पॉइंट पेन का ही प्रयोग किया जावे।
10 OMR SHEET वाली उत्तर पुस्तिका मिलेगी एवं पूरक उ. पु. नहीं दी जायेगी।
11 कटी फटी धागा उखड़ी या कम पेज की कॉपी प्रयोग नहीं करना हैं।
12 OMR SHEET की जानकारी भरने में परीक्षार्थी की सहायता करें । सही रोल नंबर व अन्य जानकारी प्रवेश पत्र के अनुसार जांच करने के बाद ही पर्यवेक्षक अपने हस्ताक्षर करे ।
13 प्रवेश पत्र पर फोटो अस्पष्ट या न होने पर संबंधित प्राचार्य से सत्यापित कराने को कहे।
14 अक्षम परीक्षार्थियों के लिए लेखक के संबंध में परीक्षार्थी के स्कूल से अलग व निचली की कक्षा का विद्यार्थी हो।
15 पर्यवेक्षक को पहचान पत्र लगाना अनिवार्य है। और पर्यवेक्षक 8:00तक परीक्षा केंद्र पर अनिवार्यतः उपस्थित हो जावे ।
16 परीक्षार्थी को 8:50 पर उ. पु. और 8:55 पर प्रश्नपत्र दिया जावे।
17 उपस्थिति पत्रक पर सही कालम में उ. पु. का सही नंबर लिख कर प्रवेश पत्र के अनुसार परीक्षार्थी के हस्ताक्षर व पर्यवेक्षक स्वयं के हस्ताक्षर करें।
18 परीक्षा कक्ष में उ. पु. संग्रह करते समय ध्यान रखें कि सभी उ. पु. जमा करने गिन कर संतुष्ट होने के बाद ही परीक्षार्थी कक्ष से जाए।
19 उ. पु. संग्रह करते समय ध्यान रखें कि माध्यमवार व विषयवार कॉपी अलग जमा करे ।
20 पर्यवेक्षक परीक्षा केंद्र की पूरी कापियां जमा होने के बाद अपनी अगले दिन की ड्यूटी की जानकारी लेकर ही परीक्षा केंद्र से जाए।
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