प्रश्न 40:
गर्भावस्था के दौरान, एक हार्मोन जो स्तन को बढ़ाने में मदद करता है और प्रसव होने तक दूध के स्राव को रोकता है _______ है।
(A) प्रोजेस्टेरोन
(B) गोनैडोट्रोपिन
(C) एस्ट्रोजन
(D) थायरोक्सिन
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (A) प्रोजेस्टेरोन
व्याख्या:
गर्भावस्था के दौरान, प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) और एस्ट्रोजन दोनों हार्मोन स्तन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, प्रोजेस्टेरोन विशेष रूप से दुग्ध ग्रंथियों के विकास को बढ़ावा देता है और प्रसव होने तक दूध के वास्तविक स्राव (दुग्ध निष्कासन) को रोकता है। प्रसव के बाद, प्रोजेस्टेरोन का स्तर गिर जाता है, जिससे प्रोलैक्टिन (Prolactin) हार्मोन को दूध उत्पादन और स्राव को बढ़ावा देने का अवसर मिलता है।
गर्भावस्था के दौरान, एक हार्मोन जो स्तन को बढ़ाने में मदद करता है और प्रसव होने तक दूध के स्राव को रोकता है _______ है।
(A) प्रोजेस्टेरोन
(B) गोनैडोट्रोपिन
(C) एस्ट्रोजन
(D) थायरोक्सिन
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (A) प्रोजेस्टेरोन
व्याख्या:
गर्भावस्था के दौरान, प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) और एस्ट्रोजन दोनों हार्मोन स्तन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, प्रोजेस्टेरोन विशेष रूप से दुग्ध ग्रंथियों के विकास को बढ़ावा देता है और प्रसव होने तक दूध के वास्तविक स्राव (दुग्ध निष्कासन) को रोकता है। प्रसव के बाद, प्रोजेस्टेरोन का स्तर गिर जाता है, जिससे प्रोलैक्टिन (Prolactin) हार्मोन को दूध उत्पादन और स्राव को बढ़ावा देने का अवसर मिलता है।
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प्रश्न 41:
भ्रूण निम्नलिखित दो झिल्लियों से घिरा होता है:
(A) आंतरिक : एम्नियन; बाहरी : कोरियोन
(B) आंतरिक : अम्बिलिकल झिल्ली; बाहरी : भ्रूण झिल्ली
(C) आंतरिक : वास डेफेरेंस; बाहरी : प्रोस्टेट
(D) आंतरिक : यूटिराइन सैक; बाहरी : एम्नियोटिक सैक
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (A) आंतरिक : एम्नियन; बाहरी : कोरियोन
व्याख्या:
मानव भ्रूण (और बाद में भ्रूण) गर्भाशय में दो प्रमुख झिल्लियों से घिरा होता है, जो उसे सुरक्षा और पोषण प्रदान करती हैं:
आंतरिक झिल्ली: एम्नियन (Amnion)
यह आंतरिक झिल्ली है जो भ्रूण को सीधे घेरती है।
यह एमनियोटिक द्रव (amniotic fluid) से भरी एक थैली (एमनियोटिक सैक) बनाती है।
यह द्रव भ्रूण को सदमे से बचाता है, तापमान को नियंत्रित करता है, और भ्रूण को स्वतंत्र रूप से हिलने-डुलने देता है, जिससे उसके मांसपेशियों और हड्डियों का विकास होता है।
बाहरी झिल्ली: कोरियोन (Chorion)
यह बाहरी झिल्ली है जो एम्नियन को घेरती है।
कोरियोन गर्भाशय की दीवार से जुड़कर प्लेसेंटा (placenta) का निर्माण करता है, जो भ्रूण को पोषण और ऑक्सीजन प्रदान करता है और अपशिष्ट उत्पादों को हटाता है।
भ्रूण निम्नलिखित दो झिल्लियों से घिरा होता है:
(A) आंतरिक : एम्नियन; बाहरी : कोरियोन
(B) आंतरिक : अम्बिलिकल झिल्ली; बाहरी : भ्रूण झिल्ली
(C) आंतरिक : वास डेफेरेंस; बाहरी : प्रोस्टेट
(D) आंतरिक : यूटिराइन सैक; बाहरी : एम्नियोटिक सैक
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (A) आंतरिक : एम्नियन; बाहरी : कोरियोन
व्याख्या:
मानव भ्रूण (और बाद में भ्रूण) गर्भाशय में दो प्रमुख झिल्लियों से घिरा होता है, जो उसे सुरक्षा और पोषण प्रदान करती हैं:
आंतरिक झिल्ली: एम्नियन (Amnion)
यह आंतरिक झिल्ली है जो भ्रूण को सीधे घेरती है।
यह एमनियोटिक द्रव (amniotic fluid) से भरी एक थैली (एमनियोटिक सैक) बनाती है।
यह द्रव भ्रूण को सदमे से बचाता है, तापमान को नियंत्रित करता है, और भ्रूण को स्वतंत्र रूप से हिलने-डुलने देता है, जिससे उसके मांसपेशियों और हड्डियों का विकास होता है।
बाहरी झिल्ली: कोरियोन (Chorion)
यह बाहरी झिल्ली है जो एम्नियन को घेरती है।
कोरियोन गर्भाशय की दीवार से जुड़कर प्लेसेंटा (placenta) का निर्माण करता है, जो भ्रूण को पोषण और ऑक्सीजन प्रदान करता है और अपशिष्ट उत्पादों को हटाता है।
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आपके द्वारा भेजी गई फोटो में प्रश्न संख्या 42 और 43 हैं। चलिए, इन्हें एक-एक करके हल करते हैं।
प्रश्न 42:
"सेलूलोज और लिग्निन" आहार फाइबर के उदाहरण हैं। उपरोक्त वाक्य को पढ़ें और सही विकल्प चुनें:
(i) सेलूलोज अघुलनशील है और लिग्निन घुलनशील आहार फाइबर है।
(ii) सेलूलोज और लिग्निन दोनों अघुलनशील आहार फाइबर हैं।
(iii) लिग्निन अघुलनशील है और सेलूलोज घुलनशील आहार फाइबर है।
(iv) सेलूलोज और लिग्निन दोनों घुलनशील आहार फाइबर हैं।
निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें:
(A) केवल वाक्य (i) सही है।
(B) केवल वाक्य (ii) सही है।
(C) केवल वाक्य (iii) सही है।
(D) केवल वाक्य (iv) सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (B) केवल वाक्य (ii) सही है।
व्याख्या:
आहार फाइबर (Dietary fiber) दो मुख्य प्रकार के होते हैं: घुलनशील (soluble) और अघुलनशील (insoluble)।
अघुलनशील फाइबर (Insoluble fiber): यह पानी में घुलता नहीं है और पाचन तंत्र से होकर अपेक्षाकृत अपरिवर्तित गुजरता है। यह मल त्याग को नियमित करने में मदद करता है।
सेलूलोज (Cellulose) और लिग्निन (Lignin) दोनों ही अघुलनशील आहार फाइबर के उदाहरण हैं। ये पौधों की कोशिका भित्ति के प्रमुख घटक हैं।
घुलनशील फाइबर पानी में घुल जाता है और एक जेल जैसा पदार्थ बनाता है, जो कोलेस्ट्रॉल और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है (जैसे पेक्टिन, गम्स)।
प्रश्न 42:
"सेलूलोज और लिग्निन" आहार फाइबर के उदाहरण हैं। उपरोक्त वाक्य को पढ़ें और सही विकल्प चुनें:
(i) सेलूलोज अघुलनशील है और लिग्निन घुलनशील आहार फाइबर है।
(ii) सेलूलोज और लिग्निन दोनों अघुलनशील आहार फाइबर हैं।
(iii) लिग्निन अघुलनशील है और सेलूलोज घुलनशील आहार फाइबर है।
(iv) सेलूलोज और लिग्निन दोनों घुलनशील आहार फाइबर हैं।
निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें:
(A) केवल वाक्य (i) सही है।
(B) केवल वाक्य (ii) सही है।
(C) केवल वाक्य (iii) सही है।
(D) केवल वाक्य (iv) सही है।
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (B) केवल वाक्य (ii) सही है।
व्याख्या:
आहार फाइबर (Dietary fiber) दो मुख्य प्रकार के होते हैं: घुलनशील (soluble) और अघुलनशील (insoluble)।
अघुलनशील फाइबर (Insoluble fiber): यह पानी में घुलता नहीं है और पाचन तंत्र से होकर अपेक्षाकृत अपरिवर्तित गुजरता है। यह मल त्याग को नियमित करने में मदद करता है।
सेलूलोज (Cellulose) और लिग्निन (Lignin) दोनों ही अघुलनशील आहार फाइबर के उदाहरण हैं। ये पौधों की कोशिका भित्ति के प्रमुख घटक हैं।
घुलनशील फाइबर पानी में घुल जाता है और एक जेल जैसा पदार्थ बनाता है, जो कोलेस्ट्रॉल और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है (जैसे पेक्टिन, गम्स)।
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प्रश्न 43:
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आई सी एम आर) खाद्य पदार्थों को निम्नलिखित पाँच खाद्य समूहों में वर्गीकृत करती है:
(A) अनाज; दालें और फलियाँ; दूध और मांस उत्पाद; फल और सब्जियां; वसा और शर्करा
(B) अनाज; दालें; मेवे और तिलहन; चीनी; तेल और वसा; फल और सब्जियां
(C) अनाज और दालें; फल और सब्जियां; शर्करा और वसा; मेवे और तिलहन; मांस, अंडे और मुर्गी
(D) अनाज और मोटा अनाज; दालें और फलियाँ; वसा और शर्करा; हरी पत्तेदार सब्जियां; फल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (A) अनाज; दालें और फलियाँ; दूध और मांस उत्पाद; फल और सब्जियां; वसा और शर्करा
व्याख्या:
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR), विशेष रूप से नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (NIN), भारत में पोषण संबंधी दिशानिर्देश प्रदान करता है। उनके दिशानिर्देशों के अनुसार, संतुलित आहार के लिए खाद्य पदार्थों को आमतौर पर पाँच प्रमुख खाद्य समूहों में वर्गीकृत किया जाता है:
अनाज और मोटा अनाज (Cereals and Millets): ऊर्जा का मुख्य स्रोत (जैसे चावल, गेहूं, बाजरा, ज्वार)।
दालें और फलियाँ (Pulses and Legumes): प्रोटीन का प्रमुख स्रोत (जैसे अरहर, मूंग, चना, राजमा)।
दूध और मांस उत्पाद (Milk and Meat Products): कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन बी12 के स्रोत (जैसे दूध, दही, पनीर, अंडा, मछली, मांस)।
फल और सब्जियां (Fruits and Vegetables): विटामिन, खनिज और फाइबर के स्रोत (सभी प्रकार के फल, पत्तेदार सब्जियां, अन्य सब्जियां)।
वसा और शर्करा (Fats and Sugars): ऊर्जा के केंद्रित स्रोत (जैसे तेल, घी, मक्खन, चीनी, गुड़)।
यह वर्गीकरण शरीर के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्वों को संतुलित मात्रा में सुनिश्चित करने में मदद करता है।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आई सी एम आर) खाद्य पदार्थों को निम्नलिखित पाँच खाद्य समूहों में वर्गीकृत करती है:
(A) अनाज; दालें और फलियाँ; दूध और मांस उत्पाद; फल और सब्जियां; वसा और शर्करा
(B) अनाज; दालें; मेवे और तिलहन; चीनी; तेल और वसा; फल और सब्जियां
(C) अनाज और दालें; फल और सब्जियां; शर्करा और वसा; मेवे और तिलहन; मांस, अंडे और मुर्गी
(D) अनाज और मोटा अनाज; दालें और फलियाँ; वसा और शर्करा; हरी पत्तेदार सब्जियां; फल
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (A) अनाज; दालें और फलियाँ; दूध और मांस उत्पाद; फल और सब्जियां; वसा और शर्करा
व्याख्या:
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR), विशेष रूप से नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (NIN), भारत में पोषण संबंधी दिशानिर्देश प्रदान करता है। उनके दिशानिर्देशों के अनुसार, संतुलित आहार के लिए खाद्य पदार्थों को आमतौर पर पाँच प्रमुख खाद्य समूहों में वर्गीकृत किया जाता है:
अनाज और मोटा अनाज (Cereals and Millets): ऊर्जा का मुख्य स्रोत (जैसे चावल, गेहूं, बाजरा, ज्वार)।
दालें और फलियाँ (Pulses and Legumes): प्रोटीन का प्रमुख स्रोत (जैसे अरहर, मूंग, चना, राजमा)।
दूध और मांस उत्पाद (Milk and Meat Products): कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन बी12 के स्रोत (जैसे दूध, दही, पनीर, अंडा, मछली, मांस)।
फल और सब्जियां (Fruits and Vegetables): विटामिन, खनिज और फाइबर के स्रोत (सभी प्रकार के फल, पत्तेदार सब्जियां, अन्य सब्जियां)।
वसा और शर्करा (Fats and Sugars): ऊर्जा के केंद्रित स्रोत (जैसे तेल, घी, मक्खन, चीनी, गुड़)।
यह वर्गीकरण शरीर के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्वों को संतुलित मात्रा में सुनिश्चित करने में मदद करता है।
प्रश्न 44:
हृदय की परतों को उनकी स्थिति से मिलाइए:
कॉलम-I (हृदय की परतें) कॉलम-II (स्थिति)
1. पेरीकार्डियम a. मध्य पेशीय परत
2. मायोकार्डियम b. अंदरूनी परत
3. एंडोकार्डियम c. पूरे हृदय की परत
4. एंडोथीलियम d. बाहरी आवरण
निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें:
(A) 1-a, 2-c, 3-d, 4-b
(B) 1-d, 2-a, 3-b, 4-c
(C) 1-c, 2-d, 3-b, 4-a
(D) 1-b, 2-a, 3-d, 4-c
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (B) 1-d, 2-a, 3-b, 4-c
व्याख्या:
आइए हृदय की परतों और उनकी सही स्थितियों का मिलान करें:
1. पेरीकार्डियम (Pericardium): यह हृदय का बाहरी आवरण (d) है। यह हृदय को घेरे हुए एक दोहरी दीवार वाली थैली होती है, जो उसे सुरक्षा और स्नेहन प्रदान करती है।
2. मायोकार्डियम (Myocardium): यह हृदय की मध्य पेशीय परत (a) है। यह हृदय की दीवार का सबसे मोटा और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हृदय के संकुचन (पंपिंग क्रिया) के लिए जिम्मेदार होता है।
3. एंडोकार्डियम (Endocardium): यह हृदय की अंदरूनी परत (b) है। यह हृदय के कक्षों और वाल्वों को रेखाबद्ध करती है और रक्त के सीधे संपर्क में होती है।
4. एंडोथीलियम (Endothelium): यह एक पतली परत होती है जो रक्त वाहिकाओं और हृदय के आंतरिक भाग को अस्तर करती है। यह मूल रूप से रक्त वाहिकाओं और हृदय के कक्षों की सबसे आंतरिक परत होती है, और यह पूरे हृदय के अंदरूनी सतह को कवर करती है। इसलिए, यह पूरे हृदय की परत (c) के रूप में मानी जा सकती है, विशेष रूप से आंतरिक रूप से। हालाँकि, दिए गए विकल्पों में, "पूरे हृदय की परत" एंडोथीलियम के संदर्भ में सबसे उपयुक्त लगती है, क्योंकि यह रक्त के संपर्क में आने वाली सबसे आंतरिक परत है जो पूरे हृदय की आंतरिक सतह को अस्तर करती है।
इस प्रकार, सही मिलान है:
1 - d (पेरीकार्डियम - बाहरी आवरण)
2 - a (मायोकार्डियम - मध्य पेशीय परत)
3 - b (एंडोकार्डियम - अंदरूनी परत)
4 - c (एंडोथीलियम - पूरे हृदय की परत)
हृदय की परतों को उनकी स्थिति से मिलाइए:
कॉलम-I (हृदय की परतें) कॉलम-II (स्थिति)
1. पेरीकार्डियम a. मध्य पेशीय परत
2. मायोकार्डियम b. अंदरूनी परत
3. एंडोकार्डियम c. पूरे हृदय की परत
4. एंडोथीलियम d. बाहरी आवरण
निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें:
(A) 1-a, 2-c, 3-d, 4-b
(B) 1-d, 2-a, 3-b, 4-c
(C) 1-c, 2-d, 3-b, 4-a
(D) 1-b, 2-a, 3-d, 4-c
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (B) 1-d, 2-a, 3-b, 4-c
व्याख्या:
आइए हृदय की परतों और उनकी सही स्थितियों का मिलान करें:
1. पेरीकार्डियम (Pericardium): यह हृदय का बाहरी आवरण (d) है। यह हृदय को घेरे हुए एक दोहरी दीवार वाली थैली होती है, जो उसे सुरक्षा और स्नेहन प्रदान करती है।
2. मायोकार्डियम (Myocardium): यह हृदय की मध्य पेशीय परत (a) है। यह हृदय की दीवार का सबसे मोटा और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हृदय के संकुचन (पंपिंग क्रिया) के लिए जिम्मेदार होता है।
3. एंडोकार्डियम (Endocardium): यह हृदय की अंदरूनी परत (b) है। यह हृदय के कक्षों और वाल्वों को रेखाबद्ध करती है और रक्त के सीधे संपर्क में होती है।
4. एंडोथीलियम (Endothelium): यह एक पतली परत होती है जो रक्त वाहिकाओं और हृदय के आंतरिक भाग को अस्तर करती है। यह मूल रूप से रक्त वाहिकाओं और हृदय के कक्षों की सबसे आंतरिक परत होती है, और यह पूरे हृदय के अंदरूनी सतह को कवर करती है। इसलिए, यह पूरे हृदय की परत (c) के रूप में मानी जा सकती है, विशेष रूप से आंतरिक रूप से। हालाँकि, दिए गए विकल्पों में, "पूरे हृदय की परत" एंडोथीलियम के संदर्भ में सबसे उपयुक्त लगती है, क्योंकि यह रक्त के संपर्क में आने वाली सबसे आंतरिक परत है जो पूरे हृदय की आंतरिक सतह को अस्तर करती है।
इस प्रकार, सही मिलान है:
1 - d (पेरीकार्डियम - बाहरी आवरण)
2 - a (मायोकार्डियम - मध्य पेशीय परत)
3 - b (एंडोकार्डियम - अंदरूनी परत)
4 - c (एंडोथीलियम - पूरे हृदय की परत)
प्रश्न 45:
शुष्काक्षिपाक (जेरोपथेलमिया) के वर्गीकरण का उचित समीकरण करें :
कॉलम-I (वर्गीकरण) कॉलम-II (संक्षिप्तीकरण)
1. रतौंधी a. X1A
2. कंजंक्टिवल जेरोसिस b. X1B
3. बिडोट स्पॉट c. X2
4. कॉर्नियल जेरोसिस d. XN
निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें:
(A) 1-d, 2-a, 3-b, 4-c
(B) 1-b, 2-c, 3-d, 4-a
(C) 1-c, 2-b, 3-d, 4-a
(D) 1-d, 2-c, 3-b, 4-a
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (A) 1-d, 2-a, 3-b, 4-c
व्याख्या:
जेरोपथेलमिया (Xerophthalmia) विटामिन A की कमी से होने वाली आंखों की बीमारियों का एक स्पेक्ट्रम है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसके वर्गीकरण के लिए कुछ कोड दिए हैं:
1. रतौंधी (Night blindness): इसका कोड XN (d) है। यह विटामिन A की कमी का सबसे पहला और हल्का लक्षण है।
2. कंजंक्टिवल जेरोसिस (Conjunctival xerosis): इसका कोड X1A (a) है। इसमें आंखों के सफेद हिस्से (कंजंक्टिवा) में सूखापन आ जाता है।
3. बिडोट स्पॉट (Bitot's spot): इसका कोड X1B (b) है। ये कंजंक्टिवा पर झागदार, त्रिकोणीय धब्बे होते हैं, जो विटामिन A की कमी के उन्नत चरण का संकेत देते हैं।
4. कॉर्नियल जेरोसिस (Corneal xerosis): इसका कोड X2 (c) है। इसमें आंख का कॉर्निया सूख जाता है, जो अंधापन का कारण बन सकता है।
इस प्रकार, सही मिलान है:
1 - d (रतौंधी - XN)
2 - a (कंजंक्टिवल जेरोसिस - X1A)
3 - b (बिडोट स्पॉट - X1B)
4 - c (कॉर्नियल जेरोसिस - X2)
शुष्काक्षिपाक (जेरोपथेलमिया) के वर्गीकरण का उचित समीकरण करें :
कॉलम-I (वर्गीकरण) कॉलम-II (संक्षिप्तीकरण)
1. रतौंधी a. X1A
2. कंजंक्टिवल जेरोसिस b. X1B
3. बिडोट स्पॉट c. X2
4. कॉर्नियल जेरोसिस d. XN
निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें:
(A) 1-d, 2-a, 3-b, 4-c
(B) 1-b, 2-c, 3-d, 4-a
(C) 1-c, 2-b, 3-d, 4-a
(D) 1-d, 2-c, 3-b, 4-a
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (A) 1-d, 2-a, 3-b, 4-c
व्याख्या:
जेरोपथेलमिया (Xerophthalmia) विटामिन A की कमी से होने वाली आंखों की बीमारियों का एक स्पेक्ट्रम है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसके वर्गीकरण के लिए कुछ कोड दिए हैं:
1. रतौंधी (Night blindness): इसका कोड XN (d) है। यह विटामिन A की कमी का सबसे पहला और हल्का लक्षण है।
2. कंजंक्टिवल जेरोसिस (Conjunctival xerosis): इसका कोड X1A (a) है। इसमें आंखों के सफेद हिस्से (कंजंक्टिवा) में सूखापन आ जाता है।
3. बिडोट स्पॉट (Bitot's spot): इसका कोड X1B (b) है। ये कंजंक्टिवा पर झागदार, त्रिकोणीय धब्बे होते हैं, जो विटामिन A की कमी के उन्नत चरण का संकेत देते हैं।
4. कॉर्नियल जेरोसिस (Corneal xerosis): इसका कोड X2 (c) है। इसमें आंख का कॉर्निया सूख जाता है, जो अंधापन का कारण बन सकता है।
इस प्रकार, सही मिलान है:
1 - d (रतौंधी - XN)
2 - a (कंजंक्टिवल जेरोसिस - X1A)
3 - b (बिडोट स्पॉट - X1B)
4 - c (कॉर्नियल जेरोसिस - X2)
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प्रश्न 46:
_____ राज्य का देश के ग्वार के उत्पादन में पहला स्थान है तथा देश में इसका हिस्सा _____ (इकोनोमिक सर्वे - 2023-24 के अनुसार) है।
(A) राजस्थान, 40%
(B) राजस्थान, 88%
(C) कर्नाटक, 25%
(D) आंध्र प्रदेश, 33%
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (B) राजस्थान, 88%
व्याख्या:
राजस्थान ग्वार (cluster bean) का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है, और देश के कुल ग्वार उत्पादन में इसका हिस्सा काफी बड़ा है। आर्थिक सर्वेक्षणों के अनुसार, राजस्थान का हिस्सा लगभग 80-85% या उससे अधिक रहता है। दिए गए विकल्पों में, 88% सबसे उपयुक्त है और यह दर्शाता है कि राजस्थान का ग्वार उत्पादन में अत्यधिक प्रभुत्व है।
_____ राज्य का देश के ग्वार के उत्पादन में पहला स्थान है तथा देश में इसका हिस्सा _____ (इकोनोमिक सर्वे - 2023-24 के अनुसार) है।
(A) राजस्थान, 40%
(B) राजस्थान, 88%
(C) कर्नाटक, 25%
(D) आंध्र प्रदेश, 33%
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (B) राजस्थान, 88%
व्याख्या:
राजस्थान ग्वार (cluster bean) का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है, और देश के कुल ग्वार उत्पादन में इसका हिस्सा काफी बड़ा है। आर्थिक सर्वेक्षणों के अनुसार, राजस्थान का हिस्सा लगभग 80-85% या उससे अधिक रहता है। दिए गए विकल्पों में, 88% सबसे उपयुक्त है और यह दर्शाता है कि राजस्थान का ग्वार उत्पादन में अत्यधिक प्रभुत्व है।
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प्रश्न 47:
भारतीय संविधान की तीसरी अनुसूची में शपथ या प्रतिज्ञान के प्ररूप हैं:
a. संसद के लिए निर्वाचन के लिए अभ्यर्थी का
b. उप राष्ट्रपति का
c. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों का
d. भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक का
e. राज्य के विधानमंडल के सदस्यों का
निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें:
(A) केवल a, b, d और e
(B) केवल a, b, c और d
(C) केवल a, c, d और e
(D) केवल b, c, d और e
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (C) केवल a, c, d और e
व्याख्या:
भारतीय संविधान की तीसरी अनुसूची में विभिन्न पदाधिकारियों द्वारा ली जाने वाली शपथ या प्रतिज्ञान (Oaths or Affirmations) के प्रारूप दिए गए हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
a. संसद के लिए निर्वाचन के लिए अभ्यर्थी का (Candidates for election to Parliament) - शामिल है।
b. उप राष्ट्रपति का (Vice-President) - शामिल नहीं है। उपराष्ट्रपति की शपथ का प्रारूप अनुच्छेद 69 में है, न कि तीसरी अनुसूची में।
c. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों का (Judges of the Supreme Court) - शामिल है।
d. भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक का (Comptroller and Auditor-General of India) - शामिल है।
e. राज्य के विधानमंडल के सदस्यों का (Members of the State Legislature) - शामिल है।
भारतीय संविधान की तीसरी अनुसूची में शपथ या प्रतिज्ञान के प्ररूप हैं:
a. संसद के लिए निर्वाचन के लिए अभ्यर्थी का
b. उप राष्ट्रपति का
c. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों का
d. भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक का
e. राज्य के विधानमंडल के सदस्यों का
निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें:
(A) केवल a, b, d और e
(B) केवल a, b, c और d
(C) केवल a, c, d और e
(D) केवल b, c, d और e
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (C) केवल a, c, d और e
व्याख्या:
भारतीय संविधान की तीसरी अनुसूची में विभिन्न पदाधिकारियों द्वारा ली जाने वाली शपथ या प्रतिज्ञान (Oaths or Affirmations) के प्रारूप दिए गए हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
a. संसद के लिए निर्वाचन के लिए अभ्यर्थी का (Candidates for election to Parliament) - शामिल है।
b. उप राष्ट्रपति का (Vice-President) - शामिल नहीं है। उपराष्ट्रपति की शपथ का प्रारूप अनुच्छेद 69 में है, न कि तीसरी अनुसूची में।
c. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों का (Judges of the Supreme Court) - शामिल है।
d. भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक का (Comptroller and Auditor-General of India) - शामिल है।
e. राज्य के विधानमंडल के सदस्यों का (Members of the State Legislature) - शामिल है।
प्रश्न 48:
राजस्थान की प्रथम कार्यवाहक (अतिरिक्त प्रभार) महिला राज्यपाल थी:
(A) प्रतिभा पाटिल
(B) प्रभा राव
(C) मार्गरेट अल्वा
(D) निर्मला पाण्डे
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (B) प्रभा राव
व्याख्या:
प्रभा राव राजस्थान की प्रथम महिला राज्यपाल थीं जिन्होंने अतिरिक्त प्रभार के रूप में कार्य किया। उन्हें 2 दिसंबर 2009 को राजस्थान का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था, जब तक कि उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति नहीं हो गई।
अन्य विकल्प:
प्रतिभा पाटिल: राजस्थान की पहली महिला राज्यपाल थीं, लेकिन वह पूर्णकालिक राज्यपाल थीं, न कि कार्यवाहक या अतिरिक्त प्रभार वाली। बाद में वे भारत की राष्ट्रपति बनीं।
मार्गरेट अल्वा: वे भी राजस्थान की राज्यपाल रह चुकी हैं, लेकिन प्रभा राव के बाद।
निर्मला पाण्डे: यह नाम दिए गए संदर्भ में प्रसिद्ध नहीं है।
राजस्थान की प्रथम कार्यवाहक (अतिरिक्त प्रभार) महिला राज्यपाल थी:
(A) प्रतिभा पाटिल
(B) प्रभा राव
(C) मार्गरेट अल्वा
(D) निर्मला पाण्डे
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (B) प्रभा राव
व्याख्या:
प्रभा राव राजस्थान की प्रथम महिला राज्यपाल थीं जिन्होंने अतिरिक्त प्रभार के रूप में कार्य किया। उन्हें 2 दिसंबर 2009 को राजस्थान का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था, जब तक कि उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति नहीं हो गई।
अन्य विकल्प:
प्रतिभा पाटिल: राजस्थान की पहली महिला राज्यपाल थीं, लेकिन वह पूर्णकालिक राज्यपाल थीं, न कि कार्यवाहक या अतिरिक्त प्रभार वाली। बाद में वे भारत की राष्ट्रपति बनीं।
मार्गरेट अल्वा: वे भी राजस्थान की राज्यपाल रह चुकी हैं, लेकिन प्रभा राव के बाद।
निर्मला पाण्डे: यह नाम दिए गए संदर्भ में प्रसिद्ध नहीं है।
प्रश्न 49:
भारत में "प्रोजेक्ट टाइगर" कौन-से वर्ष में शुरू हुआ?
(A) 2001
(B) 1973
(C) 1983
(D) 1955
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (B) 1973
व्याख्या:
भारत में "प्रोजेक्ट टाइगर" की शुरुआत 1 अप्रैल 1973 को हुई थी। यह भारत सरकार द्वारा बाघों की घटती आबादी को बचाने और उनके आवासों को संरक्षित करने के उद्देश्य से शुरू की गई एक प्रमुख वन्यजीव संरक्षण पहल है।
भारत में "प्रोजेक्ट टाइगर" कौन-से वर्ष में शुरू हुआ?
(A) 2001
(B) 1973
(C) 1983
(D) 1955
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (B) 1973
व्याख्या:
भारत में "प्रोजेक्ट टाइगर" की शुरुआत 1 अप्रैल 1973 को हुई थी। यह भारत सरकार द्वारा बाघों की घटती आबादी को बचाने और उनके आवासों को संरक्षित करने के उद्देश्य से शुरू की गई एक प्रमुख वन्यजीव संरक्षण पहल है।
प्रश्न 50:
निम्न में से कौन सा कारण जैव विविधता हानि के "दि ईविल क्वार्टेट" का कारण नहीं है? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
(A) आवास का नुकसान और खंडन
(B) प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन
(C) भूमंडलीय उच्चीकरण (ग्लोबल वार्मिंग)
(D) विदेशी प्रजातियों का आक्रमण
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (C) भूमंडलीय उच्चीकरण (ग्लोबल वार्मिंग)
व्याख्या:
"दि ईविल क्वार्टेट" (The Evil Quartet) उन चार मुख्य कारणों को संदर्भित करता है जो जैव विविधता के नुकसान के लिए सबसे बड़े खतरे माने जाते हैं। ये चार कारण हैं:
आवास का नुकसान और खंडन (Habitat loss and fragmentation): जैव विविधता हानि का सबसे महत्वपूर्ण कारण। (विकल्प A)
प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन (Over-exploitation of natural resources): जैसे अत्यधिक मछली पकड़ना, शिकार करना, लकड़ी काटना। (विकल्प B)
विदेशी प्रजातियों का आक्रमण (Alien species invasions): बाहरी प्रजातियों का स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव। (विकल्प D)
सह-विलुप्ति (Co-extinctions): जब एक प्रजाति के विलुप्त होने से उस पर निर्भर रहने वाली अन्य प्रजातियाँ भी विलुप्त हो जाती हैं।
भूमंडलीय उच्चीकरण (ग्लोबल वार्मिंग) यद्यपि जैव विविधता हानि का एक बहुत बड़ा और बढ़ता हुआ कारण है, इसे पारंपरिक रूप से "दि ईविल क्वार्टेट" में शामिल नहीं किया जाता है। "दि ईविल क्वार्टेट" एक पुरानी अवधारणा है, जबकि ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव बाद में अधिक स्पष्ट रूप से सामने आया। इसलिए, दिए गए विकल्पों में से, ग्लोबल वार्मिंग "दि ईविल क्वार्टेट" का हिस्सा नहीं है।
निम्न में से कौन सा कारण जैव विविधता हानि के "दि ईविल क्वार्टेट" का कारण नहीं है? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
(A) आवास का नुकसान और खंडन
(B) प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन
(C) भूमंडलीय उच्चीकरण (ग्लोबल वार्मिंग)
(D) विदेशी प्रजातियों का आक्रमण
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (C) भूमंडलीय उच्चीकरण (ग्लोबल वार्मिंग)
व्याख्या:
"दि ईविल क्वार्टेट" (The Evil Quartet) उन चार मुख्य कारणों को संदर्भित करता है जो जैव विविधता के नुकसान के लिए सबसे बड़े खतरे माने जाते हैं। ये चार कारण हैं:
आवास का नुकसान और खंडन (Habitat loss and fragmentation): जैव विविधता हानि का सबसे महत्वपूर्ण कारण। (विकल्प A)
प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन (Over-exploitation of natural resources): जैसे अत्यधिक मछली पकड़ना, शिकार करना, लकड़ी काटना। (विकल्प B)
विदेशी प्रजातियों का आक्रमण (Alien species invasions): बाहरी प्रजातियों का स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव। (विकल्प D)
सह-विलुप्ति (Co-extinctions): जब एक प्रजाति के विलुप्त होने से उस पर निर्भर रहने वाली अन्य प्रजातियाँ भी विलुप्त हो जाती हैं।
भूमंडलीय उच्चीकरण (ग्लोबल वार्मिंग) यद्यपि जैव विविधता हानि का एक बहुत बड़ा और बढ़ता हुआ कारण है, इसे पारंपरिक रूप से "दि ईविल क्वार्टेट" में शामिल नहीं किया जाता है। "दि ईविल क्वार्टेट" एक पुरानी अवधारणा है, जबकि ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव बाद में अधिक स्पष्ट रूप से सामने आया। इसलिए, दिए गए विकल्पों में से, ग्लोबल वार्मिंग "दि ईविल क्वार्टेट" का हिस्सा नहीं है।
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प्रश्न 51:
9 से 19 जनवरी, 2025 के बीच 23वां दिव्य कला मेला कहाँ आयोजित किया जाएगा?
(A) पुणे, महाराष्ट्र
(B) चंडीगढ़, पंजाब
(C) जयपुर, राजस्थान
(D) वडोदरा, गुजरात
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (D) वडोदरा, गुजरात
व्याख्या:
9 से 19 जनवरी, 2025 के बीच 23वां दिव्य कला मेला वडोदरा, गुजरात में आयोजित किया जाएगा। यह मेला दिव्यांग कारीगरों और उद्यमियों द्वारा बनाए गए उत्पादों और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने और प्रदर्शित करने के लिए आयोजित किया जाता है।
9 से 19 जनवरी, 2025 के बीच 23वां दिव्य कला मेला कहाँ आयोजित किया जाएगा?
(A) पुणे, महाराष्ट्र
(B) चंडीगढ़, पंजाब
(C) जयपुर, राजस्थान
(D) वडोदरा, गुजरात
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (D) वडोदरा, गुजरात
व्याख्या:
9 से 19 जनवरी, 2025 के बीच 23वां दिव्य कला मेला वडोदरा, गुजरात में आयोजित किया जाएगा। यह मेला दिव्यांग कारीगरों और उद्यमियों द्वारा बनाए गए उत्पादों और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने और प्रदर्शित करने के लिए आयोजित किया जाता है।
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प्रश्न 52:
_______ एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट और कोलोजन, एल-कार्निटिन और नॉरएपिनेफ्रीन के संश्लेषण में भाग लेता है।
(A) विटामिन A
(B) विटामिन C
(C) विटामिन D
(D) विटामिन E
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (B) विटामिन C
व्याख्या:
विटामिन C (एस्कॉर्बिक एसिड) एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है। यह शरीर में कई महत्वपूर्ण कार्यों में शामिल होता है, जिनमें शामिल हैं:
कोलेजन (Collagen) संश्लेषण: यह त्वचा, हड्डियों, कार्टिलेज और रक्त वाहिकाओं के लिए आवश्यक कोलेजन के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
एल-कार्निटिन (L-Carnitine) संश्लेषण: यह वसा के चयापचय में महत्वपूर्ण एल-कार्निटिन के उत्पादन के लिए आवश्यक है।
नॉरएपिनेफ्रीन (Norepinephrine) संश्लेषण: यह एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो मस्तिष्क कार्य और मूड को प्रभावित करता है।
एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करना: यह कोशिकाओं को मुक्त कणों (free radicals) से होने वाले नुकसान से बचाता है।
_______ एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट और कोलोजन, एल-कार्निटिन और नॉरएपिनेफ्रीन के संश्लेषण में भाग लेता है।
(A) विटामिन A
(B) विटामिन C
(C) विटामिन D
(D) विटामिन E
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (B) विटामिन C
व्याख्या:
विटामिन C (एस्कॉर्बिक एसिड) एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है। यह शरीर में कई महत्वपूर्ण कार्यों में शामिल होता है, जिनमें शामिल हैं:
कोलेजन (Collagen) संश्लेषण: यह त्वचा, हड्डियों, कार्टिलेज और रक्त वाहिकाओं के लिए आवश्यक कोलेजन के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
एल-कार्निटिन (L-Carnitine) संश्लेषण: यह वसा के चयापचय में महत्वपूर्ण एल-कार्निटिन के उत्पादन के लिए आवश्यक है।
नॉरएपिनेफ्रीन (Norepinephrine) संश्लेषण: यह एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो मस्तिष्क कार्य और मूड को प्रभावित करता है।
एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करना: यह कोशिकाओं को मुक्त कणों (free radicals) से होने वाले नुकसान से बचाता है।
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प्रश्न 53:
निम्न में से किस विटामिन की कमी से नेत्र संबंधी घाव उत्पन्न हो जाते हैं?
(A) विटामिन A
(B) विटामिन K
(C) विटामिन D
(D) विटामिन C
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (A) विटामिन A
व्याख्या:
विटामिन A की कमी से आंखों से संबंधित कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से जेरोपथेलमिया (Xerophthalmia) कहा जाता है। इसमें रतौंधी (night blindness) से लेकर कॉर्नियल जेरोसिस (corneal xerosis) और अंततः कॉर्नियल अल्सर (corneal ulcers) और अंधापन तक शामिल है। आंखों की सतह पर घाव या क्षति विटामिन A की गंभीर कमी का एक विशिष्ट लक्षण है।
निम्न में से किस विटामिन की कमी से नेत्र संबंधी घाव उत्पन्न हो जाते हैं?
(A) विटामिन A
(B) विटामिन K
(C) विटामिन D
(D) विटामिन C
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (A) विटामिन A
व्याख्या:
विटामिन A की कमी से आंखों से संबंधित कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से जेरोपथेलमिया (Xerophthalmia) कहा जाता है। इसमें रतौंधी (night blindness) से लेकर कॉर्नियल जेरोसिस (corneal xerosis) और अंततः कॉर्नियल अल्सर (corneal ulcers) और अंधापन तक शामिल है। आंखों की सतह पर घाव या क्षति विटामिन A की गंभीर कमी का एक विशिष्ट लक्षण है।
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प्रश्न 54:
खाद्य असुरक्षा से जुड़े कारक हैं -
(A) भोजन की उपलब्धता, भोजन की पहुँच, भोजन का उपयोग
(B) भोजन की उपलब्धता, भोजन का उत्पादन, भोजन का सेवन
(C) भोजन का सेवन, भोजन (खाद्य) शिक्षा, खाद्य भेद्यता (जोखिम)
(D) भोजन का उत्पादन, खाद्य उपलब्धता, भोजन की पहचान
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (A) भोजन की उपलब्धता, भोजन की पहुँच, भोजन का उपयोग
व्याख्या:
खाद्य सुरक्षा (Food Security) एक ऐसी स्थिति को संदर्भित करती है जहाँ सभी लोगों के पास हर समय सक्रिय और स्वस्थ जीवन के लिए पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन तक भौतिक, सामाजिक और आर्थिक पहुँच होती है। खाद्य सुरक्षा के चार मुख्य आयाम (pillar) हैं:
उपलब्धता (Availability): क्या पर्याप्त भोजन है? यह भोजन के उत्पादन, वितरण और स्टॉक से संबंधित है।
पहुँच (Access): क्या लोगों के पास भोजन खरीदने या प्राप्त करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं? यह आय, कीमतों और परिवहन जैसे कारकों से प्रभावित होता है।
उपयोग (Utilization): क्या लोग भोजन का सही तरीके से उपयोग कर रहे हैं ताकि उन्हें पोषण मिल सके? इसमें पोषण संबंधी ज्ञान, स्वच्छता, पानी और स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच शामिल है।
स्थिरता (Stability): क्या लोग हर समय, सूखे या आर्थिक संकट जैसे झटकों के बावजूद भोजन तक पहुँच बनाए रख सकते हैं?
खाद्य असुरक्षा से जुड़े कारक हैं -
(A) भोजन की उपलब्धता, भोजन की पहुँच, भोजन का उपयोग
(B) भोजन की उपलब्धता, भोजन का उत्पादन, भोजन का सेवन
(C) भोजन का सेवन, भोजन (खाद्य) शिक्षा, खाद्य भेद्यता (जोखिम)
(D) भोजन का उत्पादन, खाद्य उपलब्धता, भोजन की पहचान
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (A) भोजन की उपलब्धता, भोजन की पहुँच, भोजन का उपयोग
व्याख्या:
खाद्य सुरक्षा (Food Security) एक ऐसी स्थिति को संदर्भित करती है जहाँ सभी लोगों के पास हर समय सक्रिय और स्वस्थ जीवन के लिए पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन तक भौतिक, सामाजिक और आर्थिक पहुँच होती है। खाद्य सुरक्षा के चार मुख्य आयाम (pillar) हैं:
उपलब्धता (Availability): क्या पर्याप्त भोजन है? यह भोजन के उत्पादन, वितरण और स्टॉक से संबंधित है।
पहुँच (Access): क्या लोगों के पास भोजन खरीदने या प्राप्त करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं? यह आय, कीमतों और परिवहन जैसे कारकों से प्रभावित होता है।
उपयोग (Utilization): क्या लोग भोजन का सही तरीके से उपयोग कर रहे हैं ताकि उन्हें पोषण मिल सके? इसमें पोषण संबंधी ज्ञान, स्वच्छता, पानी और स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच शामिल है।
स्थिरता (Stability): क्या लोग हर समय, सूखे या आर्थिक संकट जैसे झटकों के बावजूद भोजन तक पहुँच बनाए रख सकते हैं?
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प्रश्न 55:एंजाइम जो कैसीनोजेन को कैसीन में परिवर्तित करके दूध को फाड़ देता है:
(A) पेप्सिन
(B) गैस्ट्रिन
(C) रेनिन
(D) लाइपेज
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (C) रेनिन
व्याख्या:रेनिन (Renin), जिसे काइमोसिन (Chymosin) भी कहा जाता है, एक प्रोटीयोलाइटिक एंजाइम है जो नवजात शिशुओं के पेट में पाया जाता है। इसका मुख्य कार्य दूध में मौजूद प्रोटीन कैसीनोजेन (caseinogen) को कैसीन (casein) में परिवर्तित करना है। यह दूध को दही जैसा बनाने में मदद करता है, जिससे दूध का पाचन आसान हो जाता है। वयस्कों में, दूध के पाचन में पेप्सिन जैसे अन्य एंजाइम प्रमुख भूमिका निभाते हैं,
(A) पेप्सिन
(B) गैस्ट्रिन
(C) रेनिन
(D) लाइपेज
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (C) रेनिन
व्याख्या:रेनिन (Renin), जिसे काइमोसिन (Chymosin) भी कहा जाता है, एक प्रोटीयोलाइटिक एंजाइम है जो नवजात शिशुओं के पेट में पाया जाता है। इसका मुख्य कार्य दूध में मौजूद प्रोटीन कैसीनोजेन (caseinogen) को कैसीन (casein) में परिवर्तित करना है। यह दूध को दही जैसा बनाने में मदद करता है, जिससे दूध का पाचन आसान हो जाता है। वयस्कों में, दूध के पाचन में पेप्सिन जैसे अन्य एंजाइम प्रमुख भूमिका निभाते हैं,
प्रश्न 56:
बुजुर्गों की स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने वाली आहार विज्ञान की शाखा है -
(A) जराचिकित्सा
(B) वृद्धावस्था के रोगों का अध्ययन
(C) उम्र बढ़ना
(D) बुजुर्ग शिक्षा
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (A) जराचिकित्सा
व्याख्या:
जराचिकित्सा (Geriatrics) चिकित्सा विज्ञान की वह शाखा है जो बुजुर्ग व्यक्तियों की स्वास्थ्य देखभाल, बीमारियों की रोकथाम, निदान और उपचार से संबंधित है। यह विशेष रूप से वृद्ध लोगों की शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और कार्यात्मक आवश्यकताओं पर केंद्रित है।
(B) वृद्धावस्था के रोगों का अध्ययन (Gerontology) एक व्यापक क्षेत्र है जिसमें उम्र बढ़ने के सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और जैविक पहलुओं का अध्ययन शामिल है, जबकि जराचिकित्सा चिकित्सा संबंधी है।
(C) उम्र बढ़ना (Aging) एक प्राकृतिक प्रक्रिया है।
(D) बुजुर्ग शिक्षा (Geriatric education) बुजुर्गों को शिक्षित करने से संबंधित है।
बुजुर्गों की स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने वाली आहार विज्ञान की शाखा है -
(A) जराचिकित्सा
(B) वृद्धावस्था के रोगों का अध्ययन
(C) उम्र बढ़ना
(D) बुजुर्ग शिक्षा
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (A) जराचिकित्सा
व्याख्या:
जराचिकित्सा (Geriatrics) चिकित्सा विज्ञान की वह शाखा है जो बुजुर्ग व्यक्तियों की स्वास्थ्य देखभाल, बीमारियों की रोकथाम, निदान और उपचार से संबंधित है। यह विशेष रूप से वृद्ध लोगों की शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और कार्यात्मक आवश्यकताओं पर केंद्रित है।
(B) वृद्धावस्था के रोगों का अध्ययन (Gerontology) एक व्यापक क्षेत्र है जिसमें उम्र बढ़ने के सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और जैविक पहलुओं का अध्ययन शामिल है, जबकि जराचिकित्सा चिकित्सा संबंधी है।
(C) उम्र बढ़ना (Aging) एक प्राकृतिक प्रक्रिया है।
(D) बुजुर्ग शिक्षा (Geriatric education) बुजुर्गों को शिक्षित करने से संबंधित है।
प्रश्न 57:
किसी क्षेत्र या देश को खाद्य उपलब्धता बृहत् स्तर पर किस विधि से निर्धारित होती है?
(A) वजन माप विधि
(B) खाद्य संतुलन पत्र विधि
(C) 24 घण्टे आहार पुनःस्मरण विधि
(D) खाद्य आवृत्ति प्रश्नावली
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (B) खाद्य संतुलन पत्र विधि
व्याख्या:
किसी क्षेत्र या देश में बड़े पैमाने पर खाद्य उपलब्धता का आकलन करने के लिए खाद्य संतुलन पत्र विधि (Food Balance Sheet Method) का उपयोग किया जाता है।
एक खाद्य संतुलन पत्र किसी देश में एक निश्चित अवधि (आमतौर पर एक वर्ष) के लिए खाद्य आपूर्ति और उपयोग का व्यापक रिकॉर्ड प्रदान करता है।
यह भोजन के उत्पादन, आयात, निर्यात, स्टॉक में परिवर्तन, और विभिन्न उपयोगों (जैसे पशु चारा, बीज, अपशिष्ट, और मानव उपभोग) का विस्तृत हिसाब रखता है।
इस विधि से प्रति व्यक्ति खाद्य उपलब्धता और ऊर्जा तथा पोषक तत्वों की आपूर्ति का अनुमान लगाया जा सकता है।
अन्य विकल्प व्यक्ति-विशिष्ट आहार सेवन के मूल्यांकन के तरीके हैं:
(A) वजन माप विधि (Weighment method) व्यक्तियों द्वारा खाए गए भोजन को तौलना है।
(C) 24 घण्टे आहार पुनःस्मरण विधि (24-hour dietary recall) पिछले 24 घंटों में व्यक्ति द्वारा खाए गए सभी भोजन और पेय पदार्थों को याद करना है।
(D) खाद्य आवृत्ति प्रश्नावली (Food frequency questionnaire) एक निश्चित अवधि में व्यक्ति द्वारा खाए गए खाद्य पदार्थों की आवृत्ति का आकलन करती है।
किसी क्षेत्र या देश को खाद्य उपलब्धता बृहत् स्तर पर किस विधि से निर्धारित होती है?
(A) वजन माप विधि
(B) खाद्य संतुलन पत्र विधि
(C) 24 घण्टे आहार पुनःस्मरण विधि
(D) खाद्य आवृत्ति प्रश्नावली
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (B) खाद्य संतुलन पत्र विधि
व्याख्या:
किसी क्षेत्र या देश में बड़े पैमाने पर खाद्य उपलब्धता का आकलन करने के लिए खाद्य संतुलन पत्र विधि (Food Balance Sheet Method) का उपयोग किया जाता है।
एक खाद्य संतुलन पत्र किसी देश में एक निश्चित अवधि (आमतौर पर एक वर्ष) के लिए खाद्य आपूर्ति और उपयोग का व्यापक रिकॉर्ड प्रदान करता है।
यह भोजन के उत्पादन, आयात, निर्यात, स्टॉक में परिवर्तन, और विभिन्न उपयोगों (जैसे पशु चारा, बीज, अपशिष्ट, और मानव उपभोग) का विस्तृत हिसाब रखता है।
इस विधि से प्रति व्यक्ति खाद्य उपलब्धता और ऊर्जा तथा पोषक तत्वों की आपूर्ति का अनुमान लगाया जा सकता है।
अन्य विकल्प व्यक्ति-विशिष्ट आहार सेवन के मूल्यांकन के तरीके हैं:
(A) वजन माप विधि (Weighment method) व्यक्तियों द्वारा खाए गए भोजन को तौलना है।
(C) 24 घण्टे आहार पुनःस्मरण विधि (24-hour dietary recall) पिछले 24 घंटों में व्यक्ति द्वारा खाए गए सभी भोजन और पेय पदार्थों को याद करना है।
(D) खाद्य आवृत्ति प्रश्नावली (Food frequency questionnaire) एक निश्चित अवधि में व्यक्ति द्वारा खाए गए खाद्य पदार्थों की आवृत्ति का आकलन करती है।
प्रश्न 58:
खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार की आर्थिक नीति के प्रमुख साधन हैं?
(A) एकीकृत बाल विकास सेवा
(B) अन्नपूर्णा योजना
(C) सार्वजनिक वितरण प्रणाली
(D) अंत्योदय अन्न योजना
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (C) सार्वजनिक वितरण प्रणाली
व्याख्या:
खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार की आर्थिक नीति का सबसे प्रमुख और व्यापक साधन सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System - PDS) है।
PDS का उद्देश्य रियायती दरों पर (या मुफ्त) खाद्यान्न (जैसे गेहूं, चावल) और अन्य आवश्यक वस्तुएं (जैसे चीनी, मिट्टी का तेल) वितरित करके आबादी के कमजोर वर्गों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करना है।
यह एक विशाल नेटवर्क के माध्यम से संचालित होता है जिसमें उचित मूल्य की दुकानें शामिल हैं।
अन्य विकल्प भी खाद्य सुरक्षा से संबंधित कार्यक्रम हैं, लेकिन PDS सबसे व्यापक और नीतिगत साधन है:
(A) एकीकृत बाल विकास सेवा (Integrated Child Development Services - ICDS) बच्चों और गर्भवती/स्तनपान कराने वाली महिलाओं के पोषण और स्वास्थ्य पर केंद्रित है।
(B) अन्नपूर्णा योजना वृद्ध निराश्रित व्यक्तियों को मुफ्त भोजन प्रदान करती है।
(D) अंत्योदय अन्न योजना (Antyodaya Anna Yojana - AAY) PDS के तहत गरीब से गरीब परिवारों को अत्यधिक रियायती दरों पर खाद्यान्न प्रदान करती है, जो PDS का ही एक उप-घटक है।
खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार की आर्थिक नीति के प्रमुख साधन हैं?
(A) एकीकृत बाल विकास सेवा
(B) अन्नपूर्णा योजना
(C) सार्वजनिक वितरण प्रणाली
(D) अंत्योदय अन्न योजना
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (C) सार्वजनिक वितरण प्रणाली
व्याख्या:
खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार की आर्थिक नीति का सबसे प्रमुख और व्यापक साधन सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System - PDS) है।
PDS का उद्देश्य रियायती दरों पर (या मुफ्त) खाद्यान्न (जैसे गेहूं, चावल) और अन्य आवश्यक वस्तुएं (जैसे चीनी, मिट्टी का तेल) वितरित करके आबादी के कमजोर वर्गों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करना है।
यह एक विशाल नेटवर्क के माध्यम से संचालित होता है जिसमें उचित मूल्य की दुकानें शामिल हैं।
अन्य विकल्प भी खाद्य सुरक्षा से संबंधित कार्यक्रम हैं, लेकिन PDS सबसे व्यापक और नीतिगत साधन है:
(A) एकीकृत बाल विकास सेवा (Integrated Child Development Services - ICDS) बच्चों और गर्भवती/स्तनपान कराने वाली महिलाओं के पोषण और स्वास्थ्य पर केंद्रित है।
(B) अन्नपूर्णा योजना वृद्ध निराश्रित व्यक्तियों को मुफ्त भोजन प्रदान करती है।
(D) अंत्योदय अन्न योजना (Antyodaya Anna Yojana - AAY) PDS के तहत गरीब से गरीब परिवारों को अत्यधिक रियायती दरों पर खाद्यान्न प्रदान करती है, जो PDS का ही एक उप-घटक है।
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प्रश्न 59:
नेत्र कंजक्टिवा की सूजन को कहा जाता है:
(A) कंजक्टिवाइटिस
(B) पेल कंजक्टिवा
(C) कंजक्टिवल इन्फेक्शन
(D) कंजक्टिवल जेरोसिस
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (A) कंजक्टिवाइटिस
व्याख्या:
कंजक्टिवाइटिस (Conjunctivitis), जिसे आमतौर पर "पिंक आई" (Pink Eye) भी कहा जाता है, नेत्र कंजक्टिवा (Conjunctiva) की सूजन होती है। कंजक्टिवा आँख की सफेद परत (स्क्लेरा) और पलकों की अंदरूनी सतह को ढँकने वाली एक पतली, पारदर्शी झिल्ली होती है। सूजन से आँख लाल हो जाती है, खुजली होती है, पानी आता है, और कभी-कभी चिपचिपा स्राव भी होता है। यह अक्सर बैक्टीरिया, वायरस या एलर्जी के कारण होता है।
(B) पेल कंजक्टिवा (Pale Conjunctiva) एनीमिया (रक्ताल्पता) जैसी स्थिति का संकेत है, जहाँ कंजक्टिवा का रंग पीला पड़ जाता है, सूजन नहीं।
(C) कंजक्टिवल इन्फेक्शन (Conjunctival Infection) सूजन का कारण बन सकता है, लेकिन "कंजक्टिवाइटिस" सूजन के लिए अधिक सटीक और व्यापक चिकित्सा शब्द है।
(D) कंजक्टिवल जेरोसिस (Conjunctival Xerosis) विटामिन A की कमी के कारण कंजक्टिवा में सूखापन आना है, सूजन नहीं।
नेत्र कंजक्टिवा की सूजन को कहा जाता है:
(A) कंजक्टिवाइटिस
(B) पेल कंजक्टिवा
(C) कंजक्टिवल इन्फेक्शन
(D) कंजक्टिवल जेरोसिस
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (A) कंजक्टिवाइटिस
व्याख्या:
कंजक्टिवाइटिस (Conjunctivitis), जिसे आमतौर पर "पिंक आई" (Pink Eye) भी कहा जाता है, नेत्र कंजक्टिवा (Conjunctiva) की सूजन होती है। कंजक्टिवा आँख की सफेद परत (स्क्लेरा) और पलकों की अंदरूनी सतह को ढँकने वाली एक पतली, पारदर्शी झिल्ली होती है। सूजन से आँख लाल हो जाती है, खुजली होती है, पानी आता है, और कभी-कभी चिपचिपा स्राव भी होता है। यह अक्सर बैक्टीरिया, वायरस या एलर्जी के कारण होता है।
(B) पेल कंजक्टिवा (Pale Conjunctiva) एनीमिया (रक्ताल्पता) जैसी स्थिति का संकेत है, जहाँ कंजक्टिवा का रंग पीला पड़ जाता है, सूजन नहीं।
(C) कंजक्टिवल इन्फेक्शन (Conjunctival Infection) सूजन का कारण बन सकता है, लेकिन "कंजक्टिवाइटिस" सूजन के लिए अधिक सटीक और व्यापक चिकित्सा शब्द है।
(D) कंजक्टिवल जेरोसिस (Conjunctival Xerosis) विटामिन A की कमी के कारण कंजक्टिवा में सूखापन आना है, सूजन नहीं।
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प्रश्न 60:
जल की स्थायी कठोरता को हटाया जा सकता है:
(A) उबालकर
(B) सोडा मिलाकर
(C) क्लोरीनीकरण से
(D) छानकर
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (B) सोडा मिलाकर
व्याख्या:
जल की कठोरता दो प्रकार की होती है: अस्थायी और स्थायी।
अस्थायी कठोरता (Temporary Hardness): यह कैल्शियम और मैग्नीशियम के बाइकार्बोनेट की उपस्थिति के कारण होती है। इसे पानी को उबालकर या चूना (lime) मिलाकर हटाया जा सकता है, क्योंकि उबालने पर बाइकार्बोनेट अघुलनशील कार्बोनेट में बदल जाते हैं और अवक्षेपित हो जाते हैं।
स्थायी कठोरता (Permanent Hardness): यह कैल्शियम और मैग्नीशियम के सल्फेट्स और क्लोराइड्स की उपस्थिति के कारण होती है। इसे उबालकर नहीं हटाया जा सकता। इसे हटाने के लिए रासायनिक विधियों का उपयोग किया जाता है:
सोडा मिलाकर (Adding washing soda - सोडियम कार्बोनेट, Na
2
CO
3
): जब पानी में वाशिंग सोडा मिलाया जाता है, तो यह कैल्शियम और मैग्नीशियम आयनों के साथ प्रतिक्रिया करके अघुलनशील कैल्शियम कार्बोनेट और मैग्नीशियम कार्बोनेट बनाता है, जो अवक्षेपित होकर पानी से अलग हो जाते हैं। यह स्थायी कठोरता को हटाने का एक सामान्य तरीका है।
आयनों के आदान-प्रदान (Ion-exchange) विधि (जैसे परमुटिट या ज़ियोलाइट विधि): यह विधि भी स्थायी कठोरता को हटाती है।
(C) क्लोरीनीकरण (Chlorination) पानी को कीटाणुमुक्त करने के लिए होता है, कठोरता हटाने के लिए नहीं।
(D) छानना (Filtering) पानी में मौजूद निलंबित अशुद्धियों को हटाता है, घुले हुए कठोरता पैदा करने वाले लवणों को नहीं।
जल की स्थायी कठोरता को हटाया जा सकता है:
(A) उबालकर
(B) सोडा मिलाकर
(C) क्लोरीनीकरण से
(D) छानकर
(E) अनुत्तरित प्रश्न
सही उत्तर: (B) सोडा मिलाकर
व्याख्या:
जल की कठोरता दो प्रकार की होती है: अस्थायी और स्थायी।
अस्थायी कठोरता (Temporary Hardness): यह कैल्शियम और मैग्नीशियम के बाइकार्बोनेट की उपस्थिति के कारण होती है। इसे पानी को उबालकर या चूना (lime) मिलाकर हटाया जा सकता है, क्योंकि उबालने पर बाइकार्बोनेट अघुलनशील कार्बोनेट में बदल जाते हैं और अवक्षेपित हो जाते हैं।
स्थायी कठोरता (Permanent Hardness): यह कैल्शियम और मैग्नीशियम के सल्फेट्स और क्लोराइड्स की उपस्थिति के कारण होती है। इसे उबालकर नहीं हटाया जा सकता। इसे हटाने के लिए रासायनिक विधियों का उपयोग किया जाता है:
सोडा मिलाकर (Adding washing soda - सोडियम कार्बोनेट, Na
2
CO
3
): जब पानी में वाशिंग सोडा मिलाया जाता है, तो यह कैल्शियम और मैग्नीशियम आयनों के साथ प्रतिक्रिया करके अघुलनशील कैल्शियम कार्बोनेट और मैग्नीशियम कार्बोनेट बनाता है, जो अवक्षेपित होकर पानी से अलग हो जाते हैं। यह स्थायी कठोरता को हटाने का एक सामान्य तरीका है।
आयनों के आदान-प्रदान (Ion-exchange) विधि (जैसे परमुटिट या ज़ियोलाइट विधि): यह विधि भी स्थायी कठोरता को हटाती है।
(C) क्लोरीनीकरण (Chlorination) पानी को कीटाणुमुक्त करने के लिए होता है, कठोरता हटाने के लिए नहीं।
(D) छानना (Filtering) पानी में मौजूद निलंबित अशुद्धियों को हटाता है, घुले हुए कठोरता पैदा करने वाले लवणों को नहीं।
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