Forwarded from Avinash
A.C.S.R का पूरा नाम एल्युशमशनयम कन्डक्ट्टर थटील रेनफोथडव (Aluminium Conductor Steel Rrinforced ) होता है |
“ सामान्य तापमान पर वर्धुत का र्ह अशधकतम मान , जो ककसी तार में से सुरस्क्षत रूप से प्रर्ाकहत हो सके , उस तार की वर्धुत धारा र्हन क्षमता कहलाती है
ककसी तार की वर्धुत धारा र्हन क्षमता उस तार की धातु के वर्शि प्रशतरोध और उसकी मोटाई तथा थटैण्डसव की संख्या पर शनभवर करती है |अथावत् तार की मोटाई स्जतनी अशधक होती है उसकी करंट र्हन क्षमता उतनी ही अशधक होती है |
“ ककसी तार के शलए वर्धुत धारा का र्ह न्यूनतम मान , स्जस पर र्ह वपघल कर टूट जाता है , फ्यूस्जंग वर्धुत धारा मान कहलाता है |
तार की मोटाई स्जतनी अशधक होगी उसकी फ्यूस्जंग वर्धुत धारा का मान भी उतना ही अशधक होगा |
ककसी केवबल की वर्धुत धारा र्हन क्षमता , उसमे प्रयोग ककये तारों की मोटाई (व्यास ) तथा तारों की संख्या आकद पर शनभवर करती है |
केवबल की वर्धुत धारा र्हन क्षमता उसके कटाक्ष क्षेत्रफल के अशतररक्त शनम्न कारकों पर शनभवर करती है |
1. धातु की ककथम : प्रत्येक धातु का वर्शि प्रशतरोध अलग अलग होता है |
2. अचालक की ककथम
3. केवबल थथापना वर्शध
4. पररपथ में फेजों की संख्या
5. चारों और का तापमान
6. कोरों की संख्या
केवबल का रेकटंग फैक्ट्टर 40०C तापमान पर इकाई होता है |
र्ोल्टेज ग्रेड के आधार पर केवबल का र्गीकरण
शनम्न र्ोल्टेज केवबल 240 र्ोल्ट , मध्यम र्ोल्टेज केवबल 660 volt ,उच्च र्ोल्टेज केवबल 2.2 ककलो र्ोल्ट तथा अशत उच्च र्ोल्टेज केवबल से र्गीकृत होती है |
ककट कैट फ्यूज “सामान्य” अशधक वर्धुत धारा सुरक्षा साधन है जो शनधावररत लोड करंट मान के 1.5 गुणा करंट मान पर लगातार 4 घंटे तक शनस्ित रूप से प्रचाशलत नहीं होता है |
काकटवज फ्यूज एर्ं HRC फ्यूज ‘सीशमत अशधक वर्धुत धारा सुरक्षा साधन है जो शनधावररत करंट मान के 1.5 गुणा करंट मान पर 4 घंटे में शनस्ित रूप से प्रचाशलत हो जाता है अथावत् फ्यूज वपघलकर पररपथ को तोड़ देता है |
तापमाि के आधार पर अिालकों का वगीकरण
सोल्डररंग : दो समान या शभन्न धातुओं को उष्मीय प्रकक्रयाओं द्वारा ककसी तीसरी धातु की सहायता से जोड़ना सोल्डररंग कहलाता है | तीसरी धातु को कफलर धातु कहतें है |
सोल्डर में सीसा र् कटन का शमश्रण होता है जो 40 : 60 का अनुपात होता है |
एल्युशमशनयम चालकों के शलए ALCA – P सोल्डर का प्रयोग ककया जाता है |
एल्युशमशनयम चालकों के शलए EYRE NO .7 फलक्ट्स का प्रयोग ककया जाता है |
र्ैधुशतक कायों के शलए बेरोंजा,रेस्जन फलक्ट्स का प्रयोग ककया जाता है |
सोल्डररंग कायों के शलए सोल्डररंग आयरन का प्रयोग ककया जाता है स्जसका शनधावरण र्ाट क्षमता से ककया जाता है |
वर्धुत कमी सोल्डर ( 60%कटन र् 40% सीसा ) का कायावन्र्न ताप 185 होता है |
एल्युशमशनयम चालकों में प्रयुक्त सोल्डर का कायावन्र्न ताप 170 - 215 होता है |
सोल्डररंग आयरन की वबट तांबे की बनी होती है क्ट्योंकक ताम्बा ऊष्मा का अच्छा चालक होता है |
सोल्डररंग आयरन की वबट को साफ़ करनें के शलए तार ब्रुि, थपंज पैड, रेती र् सेंड पेपर का प्रयोग ककया जाता है
सोल्डररंग कायों में प्रयुक्त फ्लक्ट्स का शनम्न कायव होता है | 1. सोल्डररंग जोड़ को साफ़ करना 2. सोल्डर को वपघलने में सहायता प्रदान करना 3. सोल्डर को फैलनें में सहायक होना 4. जोड़ को ऑक्ट्सीकृत होनें से बचाना
र्ृतीय कटाक्ष क्षेत्रफल र्ाला चालक तार (Wire ) कहलाता है |
आर्रण युक्त तार केवबल कहलाता है |
प्रमुख तार : 1.ACSR तार 2. यूरेका तार 3. नाइक्रोम तार 4. फ्यूज तार
ACSR तार का पूणव नाम ;( एल्युशमशनयम कन्डक्ट्टर थटील रैन्फोसवड) इसका प्रयोग शिरोपरी लाइनों में ककया जाता है
फ्यूज तार कटन र् सीसे का शमश्रण होता है स्जसका गलनांक कम होता है |
शिरोपरी लाइनों र् र्ैधुत कायों में चालक की लम्बाई बढ़ाने के शलए शनम्न प्रकार के जोड़ लगायें जाते है |
वपग टेल जोड़ : यह जोड़ उन स्थथशतयों में उपयुक्त होता है जहाँ पर चालकों पर कोई यांवत्रक प्रशतबल नहीं होता जैसे संशध बॉक्ट्स अथर्ा क्ट्न्युट उपसाधन बाक्ट्स |
वर्र्ाकहत जोड़ : यह जोड़ उन थथानों में प्रयुक्त ककया जाता है जहाँ दृढ़ता के साथ उतम र्ैधुत चालकता र्ांशछत होती है |
वब्रटाशनया जोड़ : शिरोपरी लाइनों में चालकों की लम्बाई बढ़ाने के शलए वब्रटाशनया जोड़ प्रयोग ककया जाता है |
वब्रटाशनया जोड़ में दोनों चालकों के शसरों को 90® पर मोड़तें है तथा बन्धन तार को 180® पर लपेटते है |
वब्रटाशनया जोड़ में दो चालकों के मध्य अशत व्यापन दूरी चालकों के व्यास का लगभग 20 से 25 गुना रखी जाती है |
पस्िम संघ जोड़ का प्रयोग शिरोपरी लाइनों द्वारा सेर्ायी रेखाओं के लन्बर्त र्ैधुत ऊजाव के अन्त शनष्कािन के शलये ककया जाता है |
“ सामान्य तापमान पर वर्धुत का र्ह अशधकतम मान , जो ककसी तार में से सुरस्क्षत रूप से प्रर्ाकहत हो सके , उस तार की वर्धुत धारा र्हन क्षमता कहलाती है
ककसी तार की वर्धुत धारा र्हन क्षमता उस तार की धातु के वर्शि प्रशतरोध और उसकी मोटाई तथा थटैण्डसव की संख्या पर शनभवर करती है |अथावत् तार की मोटाई स्जतनी अशधक होती है उसकी करंट र्हन क्षमता उतनी ही अशधक होती है |
“ ककसी तार के शलए वर्धुत धारा का र्ह न्यूनतम मान , स्जस पर र्ह वपघल कर टूट जाता है , फ्यूस्जंग वर्धुत धारा मान कहलाता है |
तार की मोटाई स्जतनी अशधक होगी उसकी फ्यूस्जंग वर्धुत धारा का मान भी उतना ही अशधक होगा |
ककसी केवबल की वर्धुत धारा र्हन क्षमता , उसमे प्रयोग ककये तारों की मोटाई (व्यास ) तथा तारों की संख्या आकद पर शनभवर करती है |
केवबल की वर्धुत धारा र्हन क्षमता उसके कटाक्ष क्षेत्रफल के अशतररक्त शनम्न कारकों पर शनभवर करती है |
1. धातु की ककथम : प्रत्येक धातु का वर्शि प्रशतरोध अलग अलग होता है |
2. अचालक की ककथम
3. केवबल थथापना वर्शध
4. पररपथ में फेजों की संख्या
5. चारों और का तापमान
6. कोरों की संख्या
केवबल का रेकटंग फैक्ट्टर 40०C तापमान पर इकाई होता है |
र्ोल्टेज ग्रेड के आधार पर केवबल का र्गीकरण
शनम्न र्ोल्टेज केवबल 240 र्ोल्ट , मध्यम र्ोल्टेज केवबल 660 volt ,उच्च र्ोल्टेज केवबल 2.2 ककलो र्ोल्ट तथा अशत उच्च र्ोल्टेज केवबल से र्गीकृत होती है |
ककट कैट फ्यूज “सामान्य” अशधक वर्धुत धारा सुरक्षा साधन है जो शनधावररत लोड करंट मान के 1.5 गुणा करंट मान पर लगातार 4 घंटे तक शनस्ित रूप से प्रचाशलत नहीं होता है |
काकटवज फ्यूज एर्ं HRC फ्यूज ‘सीशमत अशधक वर्धुत धारा सुरक्षा साधन है जो शनधावररत करंट मान के 1.5 गुणा करंट मान पर 4 घंटे में शनस्ित रूप से प्रचाशलत हो जाता है अथावत् फ्यूज वपघलकर पररपथ को तोड़ देता है |
तापमाि के आधार पर अिालकों का वगीकरण
सोल्डररंग : दो समान या शभन्न धातुओं को उष्मीय प्रकक्रयाओं द्वारा ककसी तीसरी धातु की सहायता से जोड़ना सोल्डररंग कहलाता है | तीसरी धातु को कफलर धातु कहतें है |
सोल्डर में सीसा र् कटन का शमश्रण होता है जो 40 : 60 का अनुपात होता है |
एल्युशमशनयम चालकों के शलए ALCA – P सोल्डर का प्रयोग ककया जाता है |
एल्युशमशनयम चालकों के शलए EYRE NO .7 फलक्ट्स का प्रयोग ककया जाता है |
र्ैधुशतक कायों के शलए बेरोंजा,रेस्जन फलक्ट्स का प्रयोग ककया जाता है |
सोल्डररंग कायों के शलए सोल्डररंग आयरन का प्रयोग ककया जाता है स्जसका शनधावरण र्ाट क्षमता से ककया जाता है |
वर्धुत कमी सोल्डर ( 60%कटन र् 40% सीसा ) का कायावन्र्न ताप 185 होता है |
एल्युशमशनयम चालकों में प्रयुक्त सोल्डर का कायावन्र्न ताप 170 - 215 होता है |
सोल्डररंग आयरन की वबट तांबे की बनी होती है क्ट्योंकक ताम्बा ऊष्मा का अच्छा चालक होता है |
सोल्डररंग आयरन की वबट को साफ़ करनें के शलए तार ब्रुि, थपंज पैड, रेती र् सेंड पेपर का प्रयोग ककया जाता है
सोल्डररंग कायों में प्रयुक्त फ्लक्ट्स का शनम्न कायव होता है | 1. सोल्डररंग जोड़ को साफ़ करना 2. सोल्डर को वपघलने में सहायता प्रदान करना 3. सोल्डर को फैलनें में सहायक होना 4. जोड़ को ऑक्ट्सीकृत होनें से बचाना
र्ृतीय कटाक्ष क्षेत्रफल र्ाला चालक तार (Wire ) कहलाता है |
आर्रण युक्त तार केवबल कहलाता है |
प्रमुख तार : 1.ACSR तार 2. यूरेका तार 3. नाइक्रोम तार 4. फ्यूज तार
ACSR तार का पूणव नाम ;( एल्युशमशनयम कन्डक्ट्टर थटील रैन्फोसवड) इसका प्रयोग शिरोपरी लाइनों में ककया जाता है
फ्यूज तार कटन र् सीसे का शमश्रण होता है स्जसका गलनांक कम होता है |
शिरोपरी लाइनों र् र्ैधुत कायों में चालक की लम्बाई बढ़ाने के शलए शनम्न प्रकार के जोड़ लगायें जाते है |
वपग टेल जोड़ : यह जोड़ उन स्थथशतयों में उपयुक्त होता है जहाँ पर चालकों पर कोई यांवत्रक प्रशतबल नहीं होता जैसे संशध बॉक्ट्स अथर्ा क्ट्न्युट उपसाधन बाक्ट्स |
वर्र्ाकहत जोड़ : यह जोड़ उन थथानों में प्रयुक्त ककया जाता है जहाँ दृढ़ता के साथ उतम र्ैधुत चालकता र्ांशछत होती है |
वब्रटाशनया जोड़ : शिरोपरी लाइनों में चालकों की लम्बाई बढ़ाने के शलए वब्रटाशनया जोड़ प्रयोग ककया जाता है |
वब्रटाशनया जोड़ में दोनों चालकों के शसरों को 90® पर मोड़तें है तथा बन्धन तार को 180® पर लपेटते है |
वब्रटाशनया जोड़ में दो चालकों के मध्य अशत व्यापन दूरी चालकों के व्यास का लगभग 20 से 25 गुना रखी जाती है |
पस्िम संघ जोड़ का प्रयोग शिरोपरी लाइनों द्वारा सेर्ायी रेखाओं के लन्बर्त र्ैधुत ऊजाव के अन्त शनष्कािन के शलये ककया जाता है |
Forwarded from Avinash
बार – बार करवपंग के दौरान M. C .B पुनः प्रयोग ककया जा सकता है | जबकक फ्यूज को बार –बार ररपेयर करना पड़ता है |
फ्यूज की तुलना में M.C.B. को धारण करना आसान है |
M.C.B. का मूल्य फ्यूज की तुलना में अशधक होता है यह सबसे बड़ी हाशन है |
M. C. B का उपयोग
‘Z’ Type ___ इस M.C.B. का उपयोग कंरोल सककवट , र्ोल्टेज कन्र्टवर और अधवचालक युवक्तयों में ककया जाता है |
B ,C ,D Type ____ इनका उपयोग सामान्य भार के शलए ककया जाता है जैसे B प्रकार का घरेलू में C प्रकार का ओधौशगक क्षेत्र में तथा D प्रकार का बैटरीज चास्जिंग में X – Ray मिीन आकद में |
‘K’ Type ___ अत्यशधक रुक्ष धारा पर प्रारम्भ होने र्ाले उपकरणों जैसे मोटर रांसफामवर आकद पररपथ में इसका उपयोग ककया जाता है |
o M.C.C.B. (Moulded Case Circuit Breaker Concept)
M.c.c.b. का मुख्य कायव होता है ककसी पररपथ को अशत भाररत धारा से बचाना |जब mccb में से अशधक धारा प्रर्ाकहत होती है तो यह सकक्रय होकर खुला पररपथ हो जाती है | M.C.C.B. शनस्ित धारा पर कायव करती है | ककसी कारण र्ि यकद पररपथ का लोड बढ़ जाये तो M.C.C.B. में थमवल करप थर्चाशलत होकर पररपथ को ऑफ कर देती है | यकद पररपथ लघुपशथत हो जाये तो मेननेकटक करप सकक्रय होकर M.C.C.B. करप कर देती है |
M.C.C.B. की थमवल करप में वर्धुत धारा , समय के वर्लोमानुपाती होती है अथावत् वर्धुत धारा में र्ृवद्द होने पर M.C.C.B. करप होने में कम समय लेती है |
R.C.C.B. (Residual Current Circuit Breaker ) : इसे E.L.C.B. भी कहते हैं |जब न्यूरल र् फेज में करंट बराबर नहीं होती है तो R.C.C.b iइसे रीड करके पररपथ को खोल देता है | MCB र् RCCB के मध्य मुख्य अन्तर यह की RCCB शमली एस्म्पयर धारा पर सकक्रय हो जाती है
Fuse
ककसी पररपथ का र्ह कमजोर थथान जो अशधक धारा प्रर्ाह के कारण थर्ंय वपघलकर टूट जाए फ्यूज कहलाता है
फ्यूज सदैर् फेज लाइन के श्रेणी क्रम में लगाया जाता है |
फ्यूज तार शनमावण में सीसा र् कटन का शमश्रण प्रयोग ककया जाता है | शमश्रण अनुपात 37% सीसा र् 63% कटन होता है |
फ्यूज तार उच्च प्रशतरोध र् शनम्न गलनांक र्ाला होता है |
र्ह अशधकतम सुरस्क्षत धारा जो वबना ऊस्ष्मत ककये शनरन्तर फ्यूज में से प्रर्ाकहत होती है फ्यूज की धारा शनधावरण क्षमता कहलाती है |
र्ह धारा स्जस पर फ्यूज र्ायर वपघल जाता है उसकी फ्यूस्जंग धारा कहलाती है |
पररपथ में दोष होने पर फ्यूज द्वारा पररपथ को वर्क्षेकदत करने में लगा समय कक्रयान्त घटक कहलाता है |
अल्पतम फ्यूस्जंग धारा और धारा शनधावरण का अनुपात फ्यूस्जंग घटक कहलाता है |
पुनः तारण योनय फ्यूज का फ्यूस्जंग गुणक 1.4 से 1.7 तक पररर्शतवत होता है जो 2.0 तक हो सकता है |
H.R.C. फ्यूज का फ्यूस्जंग गुणांक 1.1 होता है |
अशत धारा से बचार् के शलए चयशनत फ्यूज का फ्यूस्जंग गुणांक 1.4 से अशधक नहीं होना चाकहए |
अशधक धारा के शलये यथा सम्भर् एक धारक में समान्तर में छोटे फ्यूज तारों का प्रयोग करना चाकहए | व्यवक्तगत लकड़यों का शनधावरण योग की तुलना में र्ाथतवर्क शनधावरण कम हो जाता है |0.7 से 0.8 का एक समान्तरण गुणक का उपयोग व्यवक्त लकड़यों के शनधावरण योनय से गुणा कर र्ाथतवर्क धारा शनधावरण प्राप्त ककया जाता है |
पुनः तारण योनय प्रकार फ्यूज 200 A तक र् कारतूस प्रकार फ्यूज 1250 A तक शनधावरण में होते हैं |
पदाथव (Matter ) : स्जसका कोई शनस्ित भार होता है और जो थथान घेरता है उसे पदाथव कहते है !
ठोस ( Solid) :स्जसका शनस्ित भार , आयतन र् आकार होता है र्ह ठोस कहलाता है ! सोना, लोहा , कोयला , पत्थर आकद !
गैस (Gas ) : स्जसका शनस्ित भार तो होता है परन्तु शनस्ित आयतन र् आकार नहीं होता है गैस कहलाता है ! जैसे हाइड्रोजन , ऑक्ट्सीजन ,काबवन डाइ – ऑक्ट्साइड आकद !
द्रर् (Liquid ) : स्जसका शनस्ित भार र् आयतन तो होता है परन्तु शनस्ित आकार नहीं होता है र्ह द्रर् कहलाता है ! जैसे – जल , पारा, गंधक का अम्ल आकद !
अणु (Molecule ) : ककसी पदाथव का र्ह छोटे से छोटा कण स्जसमे उस पदाथव के सभी भौशतक एर्ं रासायशनक गुण वर्धमान हों और जो थर्तंत्र अर्थथा में वर्धमान रह सके उसे अणु कहते है !
परमाणु ( Atom) : ककसी पदाथव का र्ह छोटे-से-छोटा कण जो रासायशनक कक्रयाओं में भाग ले सके अथर्ा रासायशनक कक्रयाओं के द्वारा पृथक ककया जा सके और थर्तंत्र अर्थथा में वर्धमान न रह सके उसे परमाणु कहते है !
तत्र् ( Element) : केर्ल एक ही प्रकार के परमाणुओं से बने पदाथव तत्र् कहलाते है ! जैसे लोहा , काबवन आकद !
यौशगक ( Compound) : दो या दो से अशधक प्रकार के परमाणुओं के रासायशनक संयोग से बने पदाथव यौशगक कहलाते है ! जैसे नौसादर , नमक ,जल आकद !
शमश्रण( Mixture): दो या दो से अशधक प्रकार के पदाथों को एक शनस्ित अनुपात में भौशतकरूप में शमला देने पर बना पदाथव शमश्रण कहलाता है
फ्यूज की तुलना में M.C.B. को धारण करना आसान है |
M.C.B. का मूल्य फ्यूज की तुलना में अशधक होता है यह सबसे बड़ी हाशन है |
M. C. B का उपयोग
‘Z’ Type ___ इस M.C.B. का उपयोग कंरोल सककवट , र्ोल्टेज कन्र्टवर और अधवचालक युवक्तयों में ककया जाता है |
B ,C ,D Type ____ इनका उपयोग सामान्य भार के शलए ककया जाता है जैसे B प्रकार का घरेलू में C प्रकार का ओधौशगक क्षेत्र में तथा D प्रकार का बैटरीज चास्जिंग में X – Ray मिीन आकद में |
‘K’ Type ___ अत्यशधक रुक्ष धारा पर प्रारम्भ होने र्ाले उपकरणों जैसे मोटर रांसफामवर आकद पररपथ में इसका उपयोग ककया जाता है |
o M.C.C.B. (Moulded Case Circuit Breaker Concept)
M.c.c.b. का मुख्य कायव होता है ककसी पररपथ को अशत भाररत धारा से बचाना |जब mccb में से अशधक धारा प्रर्ाकहत होती है तो यह सकक्रय होकर खुला पररपथ हो जाती है | M.C.C.B. शनस्ित धारा पर कायव करती है | ककसी कारण र्ि यकद पररपथ का लोड बढ़ जाये तो M.C.C.B. में थमवल करप थर्चाशलत होकर पररपथ को ऑफ कर देती है | यकद पररपथ लघुपशथत हो जाये तो मेननेकटक करप सकक्रय होकर M.C.C.B. करप कर देती है |
M.C.C.B. की थमवल करप में वर्धुत धारा , समय के वर्लोमानुपाती होती है अथावत् वर्धुत धारा में र्ृवद्द होने पर M.C.C.B. करप होने में कम समय लेती है |
R.C.C.B. (Residual Current Circuit Breaker ) : इसे E.L.C.B. भी कहते हैं |जब न्यूरल र् फेज में करंट बराबर नहीं होती है तो R.C.C.b iइसे रीड करके पररपथ को खोल देता है | MCB र् RCCB के मध्य मुख्य अन्तर यह की RCCB शमली एस्म्पयर धारा पर सकक्रय हो जाती है
Fuse
ककसी पररपथ का र्ह कमजोर थथान जो अशधक धारा प्रर्ाह के कारण थर्ंय वपघलकर टूट जाए फ्यूज कहलाता है
फ्यूज सदैर् फेज लाइन के श्रेणी क्रम में लगाया जाता है |
फ्यूज तार शनमावण में सीसा र् कटन का शमश्रण प्रयोग ककया जाता है | शमश्रण अनुपात 37% सीसा र् 63% कटन होता है |
फ्यूज तार उच्च प्रशतरोध र् शनम्न गलनांक र्ाला होता है |
र्ह अशधकतम सुरस्क्षत धारा जो वबना ऊस्ष्मत ककये शनरन्तर फ्यूज में से प्रर्ाकहत होती है फ्यूज की धारा शनधावरण क्षमता कहलाती है |
र्ह धारा स्जस पर फ्यूज र्ायर वपघल जाता है उसकी फ्यूस्जंग धारा कहलाती है |
पररपथ में दोष होने पर फ्यूज द्वारा पररपथ को वर्क्षेकदत करने में लगा समय कक्रयान्त घटक कहलाता है |
अल्पतम फ्यूस्जंग धारा और धारा शनधावरण का अनुपात फ्यूस्जंग घटक कहलाता है |
पुनः तारण योनय फ्यूज का फ्यूस्जंग गुणक 1.4 से 1.7 तक पररर्शतवत होता है जो 2.0 तक हो सकता है |
H.R.C. फ्यूज का फ्यूस्जंग गुणांक 1.1 होता है |
अशत धारा से बचार् के शलए चयशनत फ्यूज का फ्यूस्जंग गुणांक 1.4 से अशधक नहीं होना चाकहए |
अशधक धारा के शलये यथा सम्भर् एक धारक में समान्तर में छोटे फ्यूज तारों का प्रयोग करना चाकहए | व्यवक्तगत लकड़यों का शनधावरण योग की तुलना में र्ाथतवर्क शनधावरण कम हो जाता है |0.7 से 0.8 का एक समान्तरण गुणक का उपयोग व्यवक्त लकड़यों के शनधावरण योनय से गुणा कर र्ाथतवर्क धारा शनधावरण प्राप्त ककया जाता है |
पुनः तारण योनय प्रकार फ्यूज 200 A तक र् कारतूस प्रकार फ्यूज 1250 A तक शनधावरण में होते हैं |
पदाथव (Matter ) : स्जसका कोई शनस्ित भार होता है और जो थथान घेरता है उसे पदाथव कहते है !
ठोस ( Solid) :स्जसका शनस्ित भार , आयतन र् आकार होता है र्ह ठोस कहलाता है ! सोना, लोहा , कोयला , पत्थर आकद !
गैस (Gas ) : स्जसका शनस्ित भार तो होता है परन्तु शनस्ित आयतन र् आकार नहीं होता है गैस कहलाता है ! जैसे हाइड्रोजन , ऑक्ट्सीजन ,काबवन डाइ – ऑक्ट्साइड आकद !
द्रर् (Liquid ) : स्जसका शनस्ित भार र् आयतन तो होता है परन्तु शनस्ित आकार नहीं होता है र्ह द्रर् कहलाता है ! जैसे – जल , पारा, गंधक का अम्ल आकद !
अणु (Molecule ) : ककसी पदाथव का र्ह छोटे से छोटा कण स्जसमे उस पदाथव के सभी भौशतक एर्ं रासायशनक गुण वर्धमान हों और जो थर्तंत्र अर्थथा में वर्धमान रह सके उसे अणु कहते है !
परमाणु ( Atom) : ककसी पदाथव का र्ह छोटे-से-छोटा कण जो रासायशनक कक्रयाओं में भाग ले सके अथर्ा रासायशनक कक्रयाओं के द्वारा पृथक ककया जा सके और थर्तंत्र अर्थथा में वर्धमान न रह सके उसे परमाणु कहते है !
तत्र् ( Element) : केर्ल एक ही प्रकार के परमाणुओं से बने पदाथव तत्र् कहलाते है ! जैसे लोहा , काबवन आकद !
यौशगक ( Compound) : दो या दो से अशधक प्रकार के परमाणुओं के रासायशनक संयोग से बने पदाथव यौशगक कहलाते है ! जैसे नौसादर , नमक ,जल आकद !
शमश्रण( Mixture): दो या दो से अशधक प्रकार के पदाथों को एक शनस्ित अनुपात में भौशतकरूप में शमला देने पर बना पदाथव शमश्रण कहलाता है
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प्रशतरोधक (Resistors ): जब ककसी पदाथव के टुकड़े अथर्ा उससे बने तार के एक अंि को एक शनस्ित प्रशतरोध मान प्रथतुत करने र्ाले पुजे का रूप दे कदया जाता है तो र्ह प्रशतरोधक कहलाता है | प्रशतरोधक चार प्रकार के होते हैं
1.तार-कुंडशलत प्रशतरोधक ( - Wire Wound Resistors ): ये प्रशतरोधक यूरेका अथर्ा मैगशनन शमश्र धातु के महीन तार से बने होते हैं | इनकी वर्धुत धारा र्हन क्षमता काबवन प्रशतरोधकों की अपेक्षा अशधक होती है | ये दो प्रकार के होते है |
A. शनयत मान प्रशतरोधक : ये प्रशतरोधक 0.1 ओम से 50 ककलो ओम ,1 र्ाट से 50 र्ाट क्षमता में शनशमवत होतें है |
B. पररर्ती मान प्रशतरोधक : ये प्रशतरोधक 5 ओम से 5 ककलो ओम , 1 र्ाट से 50 र्ाट क्षमता में शनशमवत होते हैं |
तार-कुंडशलत प्रशतरोधक को गलनीय प्रशतरोधक भी कहते हैं |
2. धातु कफल्म प्रशतरोधक : धातु कफल्म प्रशतरोधक 1 ओम से 10 मैगा ओम तक 1 में शमलते है धातु कफल्म प्रशतरोधक 120० से 175० तक कायव कर सकते है |
3. काबवन कफल्म प्रशतरोधक : ये प्रशतरोधक 1 ओम से 10 मैगा ओम तथा 1 क्षमता में शमलते हैं | काबवन कफल्म प्रशतरोधक 85० से 155० तक कायव कर सकते हैं |
4. काबवन संयोजन प्रशतरोधक : ये प्रशतरोधक काबवन अथर्ा ग्रेफाइट के महीन चूणव को ककसी उपयुक्त अचालक र्् बन्धक पदाथव के साथ शमलाकर तैयार ककए जाते हैं | ये दो प्रकार के होते हैं |
शनयत मान काबवन प्रशतरोधक : ये प्रशतरोधक 1 ओम से 20 मैगा ओम तक प्रशतरोध तथा 1/8 र्ाट से 2 र्ाट क्षमता में शनशमवत होते हैं
पररर्ती मान प्रशतरोधक : ये प्रशतरोधक 100 ओम से 5 मैगा ओम तक प्रशतरोध तथा 0.05 र्ाट से 0.25 र्ाट क्षमता में शनशमवत होते हैं
प्रशतरोधक का शनकदववकरण : प्रशतरोधकों को सामान्यत:चार महत्र्पूणव पैरामीटर से शनकदव ककया जाता है |
o प्रशतरोधक का प्रकार
o प्रशतरोधक का अशभकहत मान ओ,ककलो ओ ,मैगाओ में
o प्रशतित में प्रशतरोधक मान की सहन सीमा (टालरेंस)
o घटकों की भारण क्षमता र्ाट में
प्रशतरोधकों को उनके कायव के आधार पर दो र्गों में बांटा गया है |
स्थथर प्रशतरोधक : र्े प्रशतरोधक स्जनका अशभकहत मान स्थथर रहता है |
पररर्तीय प्रशतरोधक : र्े प्रशतरोधक स्जनमे सपी सम्पकव की सहायता से प्रशतरोध मान को वर्शभन्न थतरों पर सेट ककया जा सकता है | इन्हें वर्भर् मापी कहतें हैं | कतवनी ( Timmer) वर्भर्मापी या प्रशतरोधकों को एक छोटे पेंचकस की सहायता से समायोस्जत ककया जाता है
प्रशतरोध ताप,र्ोल्टता,प्रकाि पर शनभवर करता है : वर्िेष प्रकार के प्रशतरोधक स्जनका प्रशतरोध ताप,र्ोल्टता,तथा प्रकाि के साथ पररर्तवनीय होता है
प्रशतरोधक (ताप र्धवक प्रशतरोध )(सेंशसथटर) : PTC प्रशतरोधक (धनात्मक ताप गुणांक प्रशतरोधक )में जैसे-जैसे ताप बढ़ता है तो प्रशतरोध रेखीय रूप से बढ़ता है |
प्रशतरोधक (तापी प्रशतरोधक) (थेशमवथटर) : NTC प्रशतरोधक (ऋणात्मक ताप गुणांक प्रशतरोधक) की स्थथशत में जैसे ताप बढ़ता है तो प्रशतरोध का मान रेखीय रूप से घटता है |
प्रशतरोधक (चर प्रशतरोधक) (र्ैरररथटर) ( Voltage Depeneded Resistor ): VDR प्रशतरोधक में र्ोल्टता बढ़ने पर प्रशतरोध रेखीय रूप से घटता है | VDR का उपयोग र्ोल्टता स्थथरीकरण, आकव िमन तथा अशत र्ोल्टता रक्षण में उपयोग ककया जाता है |
प्रशतरोधक (प्रकाि आशश्रत प्रशतरोधक)( Light Dependent Resistor ) : LDR प्रशतरोधक में प्रदीशप्त की तीव्रता बढ़ने के साथ प्रशतरोध कम होता है | प्रकाि की तीव्रता मापने के शलए उपयोग ककए जाते हैं |
काबवन प्रशतरोधकों का प्रशतरोध मान अंकन : प्रशतरोध मान अंकन की दो वर्शधयाँ है | 1. बैण्ड टाइप 2. बॉडी टाइप
बैण्ड टाइप : पहली पंवक्त का रंग प्रशतरोध मान के पहले अंक को,दूसरी पंवक्त का रंग प्रशतरोध मान के दूसरे अंक को, तीसरी पंवक्त का रंग गुणक को तथा चौथी पंवक्त का रंग सहन सीमा को व्यक्त करता है |
बॉडी टाइप : प्रशतरोधक की बॉडी का रंग प्रशतरोध मान के पहले अंक को,शसरे का रंग दूसरे अंक को,वबन्दी का रंग गुणक को तथा आयताकार शचन्ह का रंग प्रशतित सहन सीमा को व्यक्त करता है |
रंग संकेत ताशलका : 1.प्रथम पंवक्त का रंग काला , सुनहरी र् चाँदनी नहीं होता है |
2.दूसरी पंवक्त का रंग सुनहरी र् चाँदनी नहीं होता है |
प्रशतरोध के मान के शलए अक्षर तथा अंककीय संख्या कोड : इस प्रणाली में अक्षर तथा संख्या का उपयोग ककया जाता है | अक्षर R , K तथा M को , ओ में व्यक्त प्रशतरोध के मान के गुणक के शलए उपयोग ककया जाता है | प्रशतित में सामंजथयपूणव टालरेंस के शलए प्रशतरोध के टालरेंस को संकेत करने के शलए शनम्नशलस्खत अक्षर उपयोग ककये जातें हैं | 5% = , 10% = , 20% =
o रंगो के क्रमिः नाम याद रखने के शलए शनम्न सूत्र का प्रयोग कर सकते हैं
o बी बी रॉय गो टू बोम्बे र्ाया गोर्ा वर्द गोल्डन शसल्र्र
रंग संकेत ताशलका :
रंग
पहली पंवक्त
दूसरी पंवक्त
तीसरी पंवक्त
चौथी पंवक्त
1.तार-कुंडशलत प्रशतरोधक ( - Wire Wound Resistors ): ये प्रशतरोधक यूरेका अथर्ा मैगशनन शमश्र धातु के महीन तार से बने होते हैं | इनकी वर्धुत धारा र्हन क्षमता काबवन प्रशतरोधकों की अपेक्षा अशधक होती है | ये दो प्रकार के होते है |
A. शनयत मान प्रशतरोधक : ये प्रशतरोधक 0.1 ओम से 50 ककलो ओम ,1 र्ाट से 50 र्ाट क्षमता में शनशमवत होतें है |
B. पररर्ती मान प्रशतरोधक : ये प्रशतरोधक 5 ओम से 5 ककलो ओम , 1 र्ाट से 50 र्ाट क्षमता में शनशमवत होते हैं |
तार-कुंडशलत प्रशतरोधक को गलनीय प्रशतरोधक भी कहते हैं |
2. धातु कफल्म प्रशतरोधक : धातु कफल्म प्रशतरोधक 1 ओम से 10 मैगा ओम तक 1 में शमलते है धातु कफल्म प्रशतरोधक 120० से 175० तक कायव कर सकते है |
3. काबवन कफल्म प्रशतरोधक : ये प्रशतरोधक 1 ओम से 10 मैगा ओम तथा 1 क्षमता में शमलते हैं | काबवन कफल्म प्रशतरोधक 85० से 155० तक कायव कर सकते हैं |
4. काबवन संयोजन प्रशतरोधक : ये प्रशतरोधक काबवन अथर्ा ग्रेफाइट के महीन चूणव को ककसी उपयुक्त अचालक र्् बन्धक पदाथव के साथ शमलाकर तैयार ककए जाते हैं | ये दो प्रकार के होते हैं |
शनयत मान काबवन प्रशतरोधक : ये प्रशतरोधक 1 ओम से 20 मैगा ओम तक प्रशतरोध तथा 1/8 र्ाट से 2 र्ाट क्षमता में शनशमवत होते हैं
पररर्ती मान प्रशतरोधक : ये प्रशतरोधक 100 ओम से 5 मैगा ओम तक प्रशतरोध तथा 0.05 र्ाट से 0.25 र्ाट क्षमता में शनशमवत होते हैं
प्रशतरोधक का शनकदववकरण : प्रशतरोधकों को सामान्यत:चार महत्र्पूणव पैरामीटर से शनकदव ककया जाता है |
o प्रशतरोधक का प्रकार
o प्रशतरोधक का अशभकहत मान ओ,ककलो ओ ,मैगाओ में
o प्रशतित में प्रशतरोधक मान की सहन सीमा (टालरेंस)
o घटकों की भारण क्षमता र्ाट में
प्रशतरोधकों को उनके कायव के आधार पर दो र्गों में बांटा गया है |
स्थथर प्रशतरोधक : र्े प्रशतरोधक स्जनका अशभकहत मान स्थथर रहता है |
पररर्तीय प्रशतरोधक : र्े प्रशतरोधक स्जनमे सपी सम्पकव की सहायता से प्रशतरोध मान को वर्शभन्न थतरों पर सेट ककया जा सकता है | इन्हें वर्भर् मापी कहतें हैं | कतवनी ( Timmer) वर्भर्मापी या प्रशतरोधकों को एक छोटे पेंचकस की सहायता से समायोस्जत ककया जाता है
प्रशतरोध ताप,र्ोल्टता,प्रकाि पर शनभवर करता है : वर्िेष प्रकार के प्रशतरोधक स्जनका प्रशतरोध ताप,र्ोल्टता,तथा प्रकाि के साथ पररर्तवनीय होता है
प्रशतरोधक (ताप र्धवक प्रशतरोध )(सेंशसथटर) : PTC प्रशतरोधक (धनात्मक ताप गुणांक प्रशतरोधक )में जैसे-जैसे ताप बढ़ता है तो प्रशतरोध रेखीय रूप से बढ़ता है |
प्रशतरोधक (तापी प्रशतरोधक) (थेशमवथटर) : NTC प्रशतरोधक (ऋणात्मक ताप गुणांक प्रशतरोधक) की स्थथशत में जैसे ताप बढ़ता है तो प्रशतरोध का मान रेखीय रूप से घटता है |
प्रशतरोधक (चर प्रशतरोधक) (र्ैरररथटर) ( Voltage Depeneded Resistor ): VDR प्रशतरोधक में र्ोल्टता बढ़ने पर प्रशतरोध रेखीय रूप से घटता है | VDR का उपयोग र्ोल्टता स्थथरीकरण, आकव िमन तथा अशत र्ोल्टता रक्षण में उपयोग ककया जाता है |
प्रशतरोधक (प्रकाि आशश्रत प्रशतरोधक)( Light Dependent Resistor ) : LDR प्रशतरोधक में प्रदीशप्त की तीव्रता बढ़ने के साथ प्रशतरोध कम होता है | प्रकाि की तीव्रता मापने के शलए उपयोग ककए जाते हैं |
काबवन प्रशतरोधकों का प्रशतरोध मान अंकन : प्रशतरोध मान अंकन की दो वर्शधयाँ है | 1. बैण्ड टाइप 2. बॉडी टाइप
बैण्ड टाइप : पहली पंवक्त का रंग प्रशतरोध मान के पहले अंक को,दूसरी पंवक्त का रंग प्रशतरोध मान के दूसरे अंक को, तीसरी पंवक्त का रंग गुणक को तथा चौथी पंवक्त का रंग सहन सीमा को व्यक्त करता है |
बॉडी टाइप : प्रशतरोधक की बॉडी का रंग प्रशतरोध मान के पहले अंक को,शसरे का रंग दूसरे अंक को,वबन्दी का रंग गुणक को तथा आयताकार शचन्ह का रंग प्रशतित सहन सीमा को व्यक्त करता है |
रंग संकेत ताशलका : 1.प्रथम पंवक्त का रंग काला , सुनहरी र् चाँदनी नहीं होता है |
2.दूसरी पंवक्त का रंग सुनहरी र् चाँदनी नहीं होता है |
प्रशतरोध के मान के शलए अक्षर तथा अंककीय संख्या कोड : इस प्रणाली में अक्षर तथा संख्या का उपयोग ककया जाता है | अक्षर R , K तथा M को , ओ में व्यक्त प्रशतरोध के मान के गुणक के शलए उपयोग ककया जाता है | प्रशतित में सामंजथयपूणव टालरेंस के शलए प्रशतरोध के टालरेंस को संकेत करने के शलए शनम्नशलस्खत अक्षर उपयोग ककये जातें हैं | 5% = , 10% = , 20% =
o रंगो के क्रमिः नाम याद रखने के शलए शनम्न सूत्र का प्रयोग कर सकते हैं
o बी बी रॉय गो टू बोम्बे र्ाया गोर्ा वर्द गोल्डन शसल्र्र
रंग संकेत ताशलका :
रंग
पहली पंवक्त
दूसरी पंवक्त
तीसरी पंवक्त
चौथी पंवक्त
Forwarded from Avinash
परमाणु संरचना ( Etomic Structure ) ; परमाणु का खोजकताव जॉन डेल्टन था ! परमाणु मुख्यतः प्रोटान , न्यूरॉन तथा इलेक्ट्रोन से बना होता है ! परमाणु की संरचना सौर मण्डल के समान होती है !
1.नाशभक ( Nucleus) : परमाणु का केन्द्रीय सघन भाग नाशभक कहलाता है! इसमें प्रोटोन तथा न्यूरॉन अर्स्थथत होते है इसकी खोज रदरफोडव ने की थी !
प्रोटान (Proton ) : प्रोटोन पर धन आर्ेि होता है ! इसका आर्ेि (+)1.6 X 10-19 कूलाम आर्ेि होता है!इसका द्रव्यमान 1.67 X 10-27Kg होता है ! प्रोटोन के खोज कताव रदरफोडव थे |
इलेक्ट्रोन (Electron ) : यह सबसे हल्का कण होता है इस पर ऋण आर्ेि होता है ! इसका मान (-) 1.6 X10-19 कूलाम होता है ! इसका द्रव्यमान 9.107 X 10-31 Kg होता है| इसके खोज कताव जोजव जेम्स थोमसन थे ! इलेक्ट्रोन में दो प्रकार की घूणवन गशत होती है !
चक्रण गशत ( Spin ) इलेक्ट्रोन का अपनी ही धुरी पर घूणवन करना चक्रण गशत कहलाती है !
कक्षीय गशत ( Orbital ) : अपनी कक्षा में रहते हुए नाशभक के चारों और पररक्रमा करना कक्षीय गशत कहलाती है !
न्यूरॉन (Neutron ) : यह उदासीन होता है इसका द्रव्यमान 1.67 X 10-27 Kg होता है ! खोज करता जेम्स चैस्ड्र्क था |
o परमाणु संरचना शनयम ( Law of atomic struture ) :
प्रत्येक परमाणु ,सामान्य अर्थथा में आर्ेि रकहत होता है,क्ट्योंकक उसमें प्रोटोन्स तथा इलैक्ट्रोन्स की संख्या बराबर होती है | अत: परमाणु में कुल धन आर्ेि, कुल ऋण आर्ेि के तुल्य होता है |
2. परमाणु में वर्धमान कक्षाओं को K ,L ,M ,N ,O ,P ,Q अक्षरों से व्यक्त ककया जाता है | इनमे से प्रथम 4 कक्षाओं में इलैक्ट्रोन्स का वर्तरण 2 n2 शनयम के अनुसार होता है |
प्रथम कक्षा K में इलैक्ट्रोन्स = 2 × 12 = 2
दुसरी कक्षा L में इलैक्ट्रोन्स = 2 × 22 = 8
तीसरी कक्षा M में इलैक्ट्रोन्स = 2 × 32 = 18
चौथी कक्षा N में इलैक्ट्रोन्स = 2 × 42 = 32
हाइड्रोजन के परमाणु के नाशभक में केर्ल एक प्रोटोन होता है और उसके चारों ओर एक इलैक्ट्रोन पररक्रमागत होता है
आक्ट्सीजन के परमाणु के नाशभक में 8 प्रोटोन्स तथा 8 न्यूरॉन्स होते है और नाशभक के चारों ओर दो कक्षाओं में क्रमि:2,6 इलैक्ट्रोन्स पररक्रमागत होते हैं
सोकडयम के परमाणु के नाशभक में 11 प्रोटोन्स तथा 11 न्यूरॉन्स होते हैं और नाशभक के चारों ओर तीन कक्षाओं में क्रमि: 2, 8, 1 में इलैक्ट्रोन्स पररक्रमागत होते हैं|
परमाणु क्रमांक ( Atomic Number ): ककसी तत्र् के एक परमाणु में वर्धमान इलैक्ट्रोन्स अथर्ा प्रोटोन्स की संख्या उसकी परमाणु संख्या कहलाती है |
परमाणु भार ( Atomic Weight ) : ककसी तत्र् के एक परमाणु के नाशभक में वर्धमान प्रोटोन्स तथा न्यूरॉन्स की कुल संख्याओं के योग के बराबर उसका परमाणु भार या ‘द्रव्यमान संख्या’ कहलाती है |
संयोजी इलैक्ट्रोन्स (Valence Electrons) : “ककसी तत्र् के परमाणु की अस्न्तम कक्षा में स्जतने इलैक्ट्रोन्स होते हैं र्े संयोजी इलैक्ट्रोन्स कहलाते है|
मुक्त इलैक्ट्रोन्स ( Free Electrons ) :अशधकांि धातुओं की अस्न्तम कक्षा में उपस्थथत इलैक्ट्रोन्स स्जन्हें दुसरें परमाणुओं द्वारा आरोवपत थोड़े से आकषवण बल द्वारा ही धातु के परमाणु से वर्थथावपत ककया जा सकता है स्जनका नाशभक के प्रशत आकषवण बल का मान बहुत कम रह जाता है | मुक्त इलैक्ट्रोन्स कहलातें हैं |
आयन (Ion ) : आर्ेि युक्त परमाणु या परमाणुओं के समूह को आयन कहतें हैं |
धनायन (Cation ) : स्जस परमाणु में शनधावररत संख्या की अपेक्षा , इलैक्ट्रोन्स की संख्या कम हो जाती है, उसे धनायन कहतें हैं |
ऋणायन (Anion ) : स्जस परमाणु में शनधावररत संख्या की अपेक्षा , इलैक्ट्रोन्स की संख्या अशधक हो जाती है, उसे ऋणायन कहतें हैं
आयनीकरण ( Ionisation) : ‘परमाणुओं अथर्ा परमाणु – समूहों के आयन बनने की प्रकक्रया आयनीकरण कहलाती हैं |
वर्धुत धारा (Electric Current ) : ककसी चालक में इलैक्ट्रोन्स के प्रर्ाह को वर्धुत धारा कहतें है अथावत जब ककसी चालक में मुक्त इलैक्ट्रोन् एक थथान से दुसरे थथान को प्रर्ाकहत होतें हैं तब इस इलैक्ट्रोन प्रर्ाह को वर्धुत धारा कहतें हैं इसकी इकाई एम्पीयर ( A) तथा प्रतीक I (आई)है
वर्धुत धारा की कदिा : वर्धुत धारा की कदिा प्रारस्म्भक अर्धारणा के अनुसार धनात्मक (+Ve .) से ऋणात्मक (-Ve ) की ओर होती है | तथा इलेक्ट्रोशनक अर्धारणा के अनुसार वर्धुत धारा की कदिा ऋणात्मक (- Ve)से धनात्मक (+Ve .) होती है |
वर्धुत धारा के प्रकार : वर्धुत धारा दो प्रकार की होती है |
कद धारा ( Direct Current ) : र्ह वर्धुत धारा है स्जसकी प्रर्ाह कदिा और मान शनयत रहता है |
प्रत्यार्ृशत धारा ( Alternating Current ) : र्ह वर्धुत धारा है स्जसकी प्रर्ाह कदिा और मान एक शनयत दर पर पररर्शतवत होता रहता है |
1.नाशभक ( Nucleus) : परमाणु का केन्द्रीय सघन भाग नाशभक कहलाता है! इसमें प्रोटोन तथा न्यूरॉन अर्स्थथत होते है इसकी खोज रदरफोडव ने की थी !
प्रोटान (Proton ) : प्रोटोन पर धन आर्ेि होता है ! इसका आर्ेि (+)1.6 X 10-19 कूलाम आर्ेि होता है!इसका द्रव्यमान 1.67 X 10-27Kg होता है ! प्रोटोन के खोज कताव रदरफोडव थे |
इलेक्ट्रोन (Electron ) : यह सबसे हल्का कण होता है इस पर ऋण आर्ेि होता है ! इसका मान (-) 1.6 X10-19 कूलाम होता है ! इसका द्रव्यमान 9.107 X 10-31 Kg होता है| इसके खोज कताव जोजव जेम्स थोमसन थे ! इलेक्ट्रोन में दो प्रकार की घूणवन गशत होती है !
चक्रण गशत ( Spin ) इलेक्ट्रोन का अपनी ही धुरी पर घूणवन करना चक्रण गशत कहलाती है !
कक्षीय गशत ( Orbital ) : अपनी कक्षा में रहते हुए नाशभक के चारों और पररक्रमा करना कक्षीय गशत कहलाती है !
न्यूरॉन (Neutron ) : यह उदासीन होता है इसका द्रव्यमान 1.67 X 10-27 Kg होता है ! खोज करता जेम्स चैस्ड्र्क था |
o परमाणु संरचना शनयम ( Law of atomic struture ) :
प्रत्येक परमाणु ,सामान्य अर्थथा में आर्ेि रकहत होता है,क्ट्योंकक उसमें प्रोटोन्स तथा इलैक्ट्रोन्स की संख्या बराबर होती है | अत: परमाणु में कुल धन आर्ेि, कुल ऋण आर्ेि के तुल्य होता है |
2. परमाणु में वर्धमान कक्षाओं को K ,L ,M ,N ,O ,P ,Q अक्षरों से व्यक्त ककया जाता है | इनमे से प्रथम 4 कक्षाओं में इलैक्ट्रोन्स का वर्तरण 2 n2 शनयम के अनुसार होता है |
प्रथम कक्षा K में इलैक्ट्रोन्स = 2 × 12 = 2
दुसरी कक्षा L में इलैक्ट्रोन्स = 2 × 22 = 8
तीसरी कक्षा M में इलैक्ट्रोन्स = 2 × 32 = 18
चौथी कक्षा N में इलैक्ट्रोन्स = 2 × 42 = 32
हाइड्रोजन के परमाणु के नाशभक में केर्ल एक प्रोटोन होता है और उसके चारों ओर एक इलैक्ट्रोन पररक्रमागत होता है
आक्ट्सीजन के परमाणु के नाशभक में 8 प्रोटोन्स तथा 8 न्यूरॉन्स होते है और नाशभक के चारों ओर दो कक्षाओं में क्रमि:2,6 इलैक्ट्रोन्स पररक्रमागत होते हैं
सोकडयम के परमाणु के नाशभक में 11 प्रोटोन्स तथा 11 न्यूरॉन्स होते हैं और नाशभक के चारों ओर तीन कक्षाओं में क्रमि: 2, 8, 1 में इलैक्ट्रोन्स पररक्रमागत होते हैं|
परमाणु क्रमांक ( Atomic Number ): ककसी तत्र् के एक परमाणु में वर्धमान इलैक्ट्रोन्स अथर्ा प्रोटोन्स की संख्या उसकी परमाणु संख्या कहलाती है |
परमाणु भार ( Atomic Weight ) : ककसी तत्र् के एक परमाणु के नाशभक में वर्धमान प्रोटोन्स तथा न्यूरॉन्स की कुल संख्याओं के योग के बराबर उसका परमाणु भार या ‘द्रव्यमान संख्या’ कहलाती है |
संयोजी इलैक्ट्रोन्स (Valence Electrons) : “ककसी तत्र् के परमाणु की अस्न्तम कक्षा में स्जतने इलैक्ट्रोन्स होते हैं र्े संयोजी इलैक्ट्रोन्स कहलाते है|
मुक्त इलैक्ट्रोन्स ( Free Electrons ) :अशधकांि धातुओं की अस्न्तम कक्षा में उपस्थथत इलैक्ट्रोन्स स्जन्हें दुसरें परमाणुओं द्वारा आरोवपत थोड़े से आकषवण बल द्वारा ही धातु के परमाणु से वर्थथावपत ककया जा सकता है स्जनका नाशभक के प्रशत आकषवण बल का मान बहुत कम रह जाता है | मुक्त इलैक्ट्रोन्स कहलातें हैं |
आयन (Ion ) : आर्ेि युक्त परमाणु या परमाणुओं के समूह को आयन कहतें हैं |
धनायन (Cation ) : स्जस परमाणु में शनधावररत संख्या की अपेक्षा , इलैक्ट्रोन्स की संख्या कम हो जाती है, उसे धनायन कहतें हैं |
ऋणायन (Anion ) : स्जस परमाणु में शनधावररत संख्या की अपेक्षा , इलैक्ट्रोन्स की संख्या अशधक हो जाती है, उसे ऋणायन कहतें हैं
आयनीकरण ( Ionisation) : ‘परमाणुओं अथर्ा परमाणु – समूहों के आयन बनने की प्रकक्रया आयनीकरण कहलाती हैं |
वर्धुत धारा (Electric Current ) : ककसी चालक में इलैक्ट्रोन्स के प्रर्ाह को वर्धुत धारा कहतें है अथावत जब ककसी चालक में मुक्त इलैक्ट्रोन् एक थथान से दुसरे थथान को प्रर्ाकहत होतें हैं तब इस इलैक्ट्रोन प्रर्ाह को वर्धुत धारा कहतें हैं इसकी इकाई एम्पीयर ( A) तथा प्रतीक I (आई)है
वर्धुत धारा की कदिा : वर्धुत धारा की कदिा प्रारस्म्भक अर्धारणा के अनुसार धनात्मक (+Ve .) से ऋणात्मक (-Ve ) की ओर होती है | तथा इलेक्ट्रोशनक अर्धारणा के अनुसार वर्धुत धारा की कदिा ऋणात्मक (- Ve)से धनात्मक (+Ve .) होती है |
वर्धुत धारा के प्रकार : वर्धुत धारा दो प्रकार की होती है |
कद धारा ( Direct Current ) : र्ह वर्धुत धारा है स्जसकी प्रर्ाह कदिा और मान शनयत रहता है |
प्रत्यार्ृशत धारा ( Alternating Current ) : र्ह वर्धुत धारा है स्जसकी प्रर्ाह कदिा और मान एक शनयत दर पर पररर्शतवत होता रहता है |
Forwarded from Avinash
काला (B )
0
0
1
------
भूरा ( B)
1
1
10
1%
लाल ( R)
2
2
102
2%
नारंगी (O )
3
3
103
3%
पीला (Y )
4
4
104
4%
हरा (G )
5
5
105
नीला ( B)
6
6
106
बैंगनी ( V)
7
7
-
सलेटी ( G)
8
8
-
सफेद (W )
9
9
-
सुनहरी ( G)
-
-
0.1
5%
चाँदनी (S )
-
-
0.01
10%
रंगहीन (NO COLOUR )
-
-
-
20%
1. भूरा ,काला ,सुनहरी ,सुनहरी = =
2. 1.5Ω 10% 1 को अक्षर कोड में =
3. लाल ,लाल , काला ,लाल =
T.C.C. इलेक्ट्रीशियन थ्योरी T.C.C.
15 TARGET COACHING CENTER
WARD NO.4 HANUMAN KHEJRI MANDIOR ROAD SURATGARH 335804 (RAJ.)
4. 330Ω 20% 0.5 को अक्षर कोड में =
5. लाल , बैंगनी , नारंगी ,चाँदनी =
6. 2.7 Ω 5% 2 को अक्षर कोड में =
7. पीला , बैंगनी , पीला , सुनहरी =
8. 1 Ω 20% 1 को अक्षर कोड में =
9. भूरा , काला , हरा ,सुनहरी =
10. KR 22 1 W को अंकीय कोड में =
11. भूरा , काला , नीला , चाँदनी =
12. K 1R 8 1W को अंकीय कोड में =
13. .पीला , लाल , नारंगी , सुनहरी =
14. J 2 K7 1W को अंकीय कोड में =
15. सलेटी , नीला , चाँदनी , चाँदनी =
16. KM 2 1W को अंकीय कोड में =
17. सफेद , काला ,हरा , सुनहरी =
18. K 1 M5 1W को अंकीय कोड में =
औजार
संयुक्त प्लायर :
संयुक्त प्लायर का आकार उसकी पुरी लम्बाई से मापा जाता है | संयुक्त प्लायर का उपयोग ककसी र्ायर को छीलने , काटने, पकड़ने , खींचने र् मरोड़ने के शलए ककया जाता है | इसका प्रयोग थटील र्ायर काटने र् हैमर की तरह ठोकने के शलए नहीं करना चाकहए |
पेिकस :
पेचकस का साइज वबट की चौड़ाई र् िैंक की लम्बाई से मापा जाता है | पेचकस की िैंक प्राय: काबवन थटील या एलाय थटील की बनी होती है |तारा िीषव थर्टेवपंग पेंच के शलए कफशलप्स पेचकस प्रयोग होता है | पेचकस का प्रयोग छेनी की तरह नहीं करना चाकहए |
फेज टेस्टर :
फेज टेथटर का प्रयोग फेज की उपस्थथशत जांचने के शलए ककया जाता है | इसकी र्ोल्टता शनधावरण 500 र्ोल्ट होती है | फेज टेथटर द्वारा फेज जांचते समय अंगुली केप को छुनी चाकहए |
टेस्ट लेम्प :
A.C. लाइन के फेज , न्यूरल तथा अथव तारों की पहचान करने के शलए टेथट लेम्प का प्रयोग ककया जाता है
पोकर :
इसे सुम्मी या ब्राडल कहते हैं | लकड़ी की कफकटंनस में पेंच कसने से पूर्व पेंच के शलए छोटा खांचा बनाने के शलए प्रयोग होता है |
िोज प्लायर :
पतले तारों को पकड़ने ,ऐंठने , तारों की घुंडी बनाने तथा छोटे आकार के नटों को कसने तथा खोलने के शलए नोज प्लायर का प्रयोग होता है |
इलैणरिनशयि िाकू :
इसका साइज इसकी पूरी लम्बाई से मापा जाता है | इलैस्क्ट्रशियन प्राय 80 mm र्ाले चाकू का प्रयोग करता है | इसमें दो फलक होते हैं एक धारदार र् दूसरा धार रकहत | धारदार फलक इन्सुलेिन शछलने र् धार रकहत फलक इनैमल्ड साफ़ करने के शलए प्रयोग होता है |
रेती (File) :
रेती एक प्रकार का ककटंग टूल है स्जसका प्रयोग जॉब से अनार्श्यक धातु को हटाने के शलए ककया जाता है |
रेती प्राय: उच्च काबवनथटील , काथट थटील से बनाई जाती है |
रेशतयों को लम्बाई , आकार , कट र् ग्रेड के आधार पर वर्शित ककया जाता है |
रेती की लम्बाई कटप से हील तक की लम्बाई से मापी जाती है |
कठोर धातु को रेतने के शलए डबल कट रेती का प्रयोग ककया जाता है एकल कट रेती में एक कदिा में दांतों के कट 600 कोण पर होते हैं|
डबल कट रेती में प्रथम पंवक्त 500 कोण पर तथा दूसरी पंवक्त 700 कोण पर होती है |
उद्धक्रन्त रेती (रेस्प कट फाइल ) केर्ल अद्दव गोलाकार आकृशत में शमलती है इसका प्रयोग लकड़ी , रबर , टायर ट्यूब आकद को रेतने के शलए ककया जाता है |
o अनभयांविक स्टील रूल :
यह स्थप्रंग थटील का बना होता है | इसका प्रयोग प्रत्यक्ष माप लेने के शलए ककया जाता है| इसका अल्पतम माप 0.5mmहोता है |
o हैरसा :
यह ककटंग प्रकार का औजार है |
हैक्ट्सा फ्रेम तीन प्रकार के होते हैं 1. बोल्ड फ्रेम 2. समंजन फ्रेम 3. समंजन फ्रेम नशलका प्रकार |
हैक्ट्सा ध लेड के दोनों शसरों पर बने शछद्र ध लेड को फ्रेम के साथ स्थथर करने केशलए होते हैं |
हैक्ट्सा ध लेड का साइज उसके दोनों वपन होल्स के सेंटर से सेंटर की दूरी से शलया जाता है |
हैक्ट्सा ध लेड प्राय: हाई काबवन थटील ,लो एलाय थटील या हाई थपीड थटील से बनाये जाते हैं |
हैक्ट्साइंग करते समय हैक्ट्सा की औसतन चाल 40 से 50 थरोक प्रशत शमनट होनी चाकहए |
हैक्ट्सा ध लेड को उसकी लम्बाई ,चौड़ाई ,मोटाई और वपच के अनुसार शनकदव ककया जाता है |
प्लास्थटक ,नमव एल्युशमशनयम या ताम्बा की छड़ों को काटने के शलए 14 दांत प्रशत 25 mm हैक्ट्सा ध लेड का प्रयोग ककया जाता है |
दृढ़ थटील को काटने के शलए 24 दांत प्रशत 25 mm हैक्ट्सा ध लेड का प्रयोग ककया जाता है |
पतले दीर्ान सेक्ट्िन तथा पानी के पाइप को काटने के शलए 32 दांत प्रशत 25 mm हैक्ट्सा ध लेड का प्रयोग ककया जाता है |
इंजीनियररंग नशकंजा :
0
0
1
------
भूरा ( B)
1
1
10
1%
लाल ( R)
2
2
102
2%
नारंगी (O )
3
3
103
3%
पीला (Y )
4
4
104
4%
हरा (G )
5
5
105
नीला ( B)
6
6
106
बैंगनी ( V)
7
7
-
सलेटी ( G)
8
8
-
सफेद (W )
9
9
-
सुनहरी ( G)
-
-
0.1
5%
चाँदनी (S )
-
-
0.01
10%
रंगहीन (NO COLOUR )
-
-
-
20%
1. भूरा ,काला ,सुनहरी ,सुनहरी = =
2. 1.5Ω 10% 1 को अक्षर कोड में =
3. लाल ,लाल , काला ,लाल =
T.C.C. इलेक्ट्रीशियन थ्योरी T.C.C.
15 TARGET COACHING CENTER
WARD NO.4 HANUMAN KHEJRI MANDIOR ROAD SURATGARH 335804 (RAJ.)
4. 330Ω 20% 0.5 को अक्षर कोड में =
5. लाल , बैंगनी , नारंगी ,चाँदनी =
6. 2.7 Ω 5% 2 को अक्षर कोड में =
7. पीला , बैंगनी , पीला , सुनहरी =
8. 1 Ω 20% 1 को अक्षर कोड में =
9. भूरा , काला , हरा ,सुनहरी =
10. KR 22 1 W को अंकीय कोड में =
11. भूरा , काला , नीला , चाँदनी =
12. K 1R 8 1W को अंकीय कोड में =
13. .पीला , लाल , नारंगी , सुनहरी =
14. J 2 K7 1W को अंकीय कोड में =
15. सलेटी , नीला , चाँदनी , चाँदनी =
16. KM 2 1W को अंकीय कोड में =
17. सफेद , काला ,हरा , सुनहरी =
18. K 1 M5 1W को अंकीय कोड में =
औजार
संयुक्त प्लायर :
संयुक्त प्लायर का आकार उसकी पुरी लम्बाई से मापा जाता है | संयुक्त प्लायर का उपयोग ककसी र्ायर को छीलने , काटने, पकड़ने , खींचने र् मरोड़ने के शलए ककया जाता है | इसका प्रयोग थटील र्ायर काटने र् हैमर की तरह ठोकने के शलए नहीं करना चाकहए |
पेिकस :
पेचकस का साइज वबट की चौड़ाई र् िैंक की लम्बाई से मापा जाता है | पेचकस की िैंक प्राय: काबवन थटील या एलाय थटील की बनी होती है |तारा िीषव थर्टेवपंग पेंच के शलए कफशलप्स पेचकस प्रयोग होता है | पेचकस का प्रयोग छेनी की तरह नहीं करना चाकहए |
फेज टेस्टर :
फेज टेथटर का प्रयोग फेज की उपस्थथशत जांचने के शलए ककया जाता है | इसकी र्ोल्टता शनधावरण 500 र्ोल्ट होती है | फेज टेथटर द्वारा फेज जांचते समय अंगुली केप को छुनी चाकहए |
टेस्ट लेम्प :
A.C. लाइन के फेज , न्यूरल तथा अथव तारों की पहचान करने के शलए टेथट लेम्प का प्रयोग ककया जाता है
पोकर :
इसे सुम्मी या ब्राडल कहते हैं | लकड़ी की कफकटंनस में पेंच कसने से पूर्व पेंच के शलए छोटा खांचा बनाने के शलए प्रयोग होता है |
िोज प्लायर :
पतले तारों को पकड़ने ,ऐंठने , तारों की घुंडी बनाने तथा छोटे आकार के नटों को कसने तथा खोलने के शलए नोज प्लायर का प्रयोग होता है |
इलैणरिनशयि िाकू :
इसका साइज इसकी पूरी लम्बाई से मापा जाता है | इलैस्क्ट्रशियन प्राय 80 mm र्ाले चाकू का प्रयोग करता है | इसमें दो फलक होते हैं एक धारदार र् दूसरा धार रकहत | धारदार फलक इन्सुलेिन शछलने र् धार रकहत फलक इनैमल्ड साफ़ करने के शलए प्रयोग होता है |
रेती (File) :
रेती एक प्रकार का ककटंग टूल है स्जसका प्रयोग जॉब से अनार्श्यक धातु को हटाने के शलए ककया जाता है |
रेती प्राय: उच्च काबवनथटील , काथट थटील से बनाई जाती है |
रेशतयों को लम्बाई , आकार , कट र् ग्रेड के आधार पर वर्शित ककया जाता है |
रेती की लम्बाई कटप से हील तक की लम्बाई से मापी जाती है |
कठोर धातु को रेतने के शलए डबल कट रेती का प्रयोग ककया जाता है एकल कट रेती में एक कदिा में दांतों के कट 600 कोण पर होते हैं|
डबल कट रेती में प्रथम पंवक्त 500 कोण पर तथा दूसरी पंवक्त 700 कोण पर होती है |
उद्धक्रन्त रेती (रेस्प कट फाइल ) केर्ल अद्दव गोलाकार आकृशत में शमलती है इसका प्रयोग लकड़ी , रबर , टायर ट्यूब आकद को रेतने के शलए ककया जाता है |
o अनभयांविक स्टील रूल :
यह स्थप्रंग थटील का बना होता है | इसका प्रयोग प्रत्यक्ष माप लेने के शलए ककया जाता है| इसका अल्पतम माप 0.5mmहोता है |
o हैरसा :
यह ककटंग प्रकार का औजार है |
हैक्ट्सा फ्रेम तीन प्रकार के होते हैं 1. बोल्ड फ्रेम 2. समंजन फ्रेम 3. समंजन फ्रेम नशलका प्रकार |
हैक्ट्सा ध लेड के दोनों शसरों पर बने शछद्र ध लेड को फ्रेम के साथ स्थथर करने केशलए होते हैं |
हैक्ट्सा ध लेड का साइज उसके दोनों वपन होल्स के सेंटर से सेंटर की दूरी से शलया जाता है |
हैक्ट्सा ध लेड प्राय: हाई काबवन थटील ,लो एलाय थटील या हाई थपीड थटील से बनाये जाते हैं |
हैक्ट्साइंग करते समय हैक्ट्सा की औसतन चाल 40 से 50 थरोक प्रशत शमनट होनी चाकहए |
हैक्ट्सा ध लेड को उसकी लम्बाई ,चौड़ाई ,मोटाई और वपच के अनुसार शनकदव ककया जाता है |
प्लास्थटक ,नमव एल्युशमशनयम या ताम्बा की छड़ों को काटने के शलए 14 दांत प्रशत 25 mm हैक्ट्सा ध लेड का प्रयोग ककया जाता है |
दृढ़ थटील को काटने के शलए 24 दांत प्रशत 25 mm हैक्ट्सा ध लेड का प्रयोग ककया जाता है |
पतले दीर्ान सेक्ट्िन तथा पानी के पाइप को काटने के शलए 32 दांत प्रशत 25 mm हैक्ट्सा ध लेड का प्रयोग ककया जाता है |
इंजीनियररंग नशकंजा :
Forwarded from Avinash
प्रशतरोध (Resistens ) : ककसी पदाथव का र्ह गुण , स्जसके कारण यह वर्धुत पररपथ में धारा प्रर्ाह के मागव में बाधा उत्पन्न करता है, प्रशतरोध कहलाता है | इसका प्रतीक (R ) र् ईकाई ओ (Ω) है | बड़ी इकाइयाँ ककलो ओ ( Ω) एर्ं मैगा ओ ( Ω) तथा छोटी इकाइयाँ शमली ओ ( Ω) र् माइक्रो ओ (μΩ) है
चालकता (Conductance ) : ककसी पदाथव का र्ह गुण जो वर्धुत धारा प्रर्ाह में सुगमता प्रदान करता है उसे चालकता कहतें है इसका प्रतीक G र्ह मात्रक साइमन ( S) होता हैं | चालकता प्रशतरोध के वर्लोमानुपाती होती है G = 1/R
वर्शि चालकता (Conductivity ) : वर्शि प्रशतरोध का वर्लोम वर्शि चालकता कहलाती है | इसका प्रतीक मात्रक साइमन/सेमी होता है 1 ρ
वर्धुत र्ाहक बल (Electro Motive Force ) : ककसी चालक में से मुक्त इलैक्ट्रोन्स को प्रर्ाकहत करने र्ाला बल वर्धुत र्ाहक बल कहलाता है इसका प्रतीक E र् मात्रक र्ोल्ट ( V) होता है |
वर्भर्ान्तर ( Potential Difrensh ) :जब ककसी चालक में से वर्धुत धारा प्रर्ाकहत होती है तो उसके शसरों के वर्भर्ों में कुछ अन्तर उत्पन्न हो जाता है स्जसे वर्भर्ान्तर कहतें है | इसका प्रतीक V और मात्रक र्ोल्ट (V ) होता है |
वर्धुत वर्भर् ( Electric Potential ) : ककसी इकाई धनार्ेि को अनन्त से ककसी वबन्दु तक लाने में ककया गया कायव उस वबन्दु पर वर्धुत वर्भर् कहलाता है | वर्धुत वर्भर् की इकाई र्ोल्ट है |
चालक (Conductor ) : र्ह पदाथव स्जनमें मुक्त इलैक्ट्रोन की बहुलता होती है अथावत स्जनमें से वर्धुत धारा प्रर्ाकहत हो सकती है चालक कहलाता है
चालक के गुण : 1. चालक सथता र् सरलता से उपलध ध होना चाकहये | 2. चालक मजबूत , तन्य र् अघातर्ृध्य होना चाकहये 3. चालक का वर्शि प्रशतरोध शनम्न होना चाकहये | 4. चालक र्ातार्रणीय प्रभार्ों से मुक्त होना चाकहये | 5. चालक सरलता से टांका लगाने योनय होना चाकहये |
प्रमुख चालक : 1.चाँदी सबसे अच्छा चालक है | इसका प्रयोग ररले , कोंरेक्ट्टर आकद के संयोजक वबन्दु बनाने में ककया जाता है
2. टंगथटंन का उपयोग बल्बों के कफलामेंट बनानें में ककया जाता है | टंगथटन थथायी चुम्बक शनमावण में भी प्रयोग ककया जाता है |
3. नाइक्रोम का उपयोग हीकटंग एशलमेंट (उष्मक तत्र्) बनानें में ककया जाता है |
4. तांबा एक अच्छा र्ेधुत चालक है स्जसका उपयोग र्ैधुत र्ायररंग,र्ैधुत र्ैष्टन, कदक्ट्पररर्तवक खंड र् वर्भक्त र्लय बनानें में ककया जाताहै
5. डी. सी. मिीनों के ब्रुि बनानें में काबवन धातु का प्रयोग ककया जाता है |
6. यूरेका धातु का प्रयोग तार लपेट प्रशतरोधक बनानें में ककया जाता है |
7. मेंगनींन धातु का प्रयोग तार लपेट प्रशतरोधक बनानें में ककया जाता है |
8. नाइक्रोम धातु में 80%शनककल र् 20%क्रोशमयम का शमश्रण होता है |
9. यूरेका धातु में 40% शनककल र् 60% तांबा धातु का शमश्रण होता है |
10. तांबे का गलनांक 1083 होता है र् आपेस्क्षक घनत्र् 8.93 होता है |
11. एल्युशमशनयम का गलनांक 648 होता है र् आपेस्क्षक घनत्र् 2.7 होता है|
12. सीसे का गलनांक 327 होता है र् आपेस्क्षक घनत्र् 11.3 होता है |
13. कटन का गलनांक 232 होता है र् आपेस्क्षक घनत्र् 7.3 होता है |
14. जथते का गलनांक 420 होता है |
15. पीतल (Brass ), तांबा र् जथता का शमश्रण होता है | इसका प्रयोग र्ैधुत सहायक सामग्री के टशमवनल बनानें में ककया जाता है
16. जथता धातु का उपयोग कैथोड इलैक्ट्रोड बनाने में ककया जाता है र् लौहे पर जंगरोधीपरत चढ़ाने में ककया जाता है
17 कांसा धातु ताम्बा र् कटन धातु का शमश्रण होता है |
अचालक : र्ह पदाथव स्जनमे मुक्त इलैक्ट्रोन नगण्य होते हैं अथावत वर्धुत धारा प्रर्ाह में बाधा उत्पन्न करतें है अचालक कहलातें है |
अचालक के गुण : 1. अचालक सथता र् सरलता से उपलध ध होना चाकहये 2. अचालक मजबूत होना चाकहये
3. अचालक की डाई-लैस्क्ट्रक थरेन्थ उच्च होनी चाकहये 4. अचालक मौसमी र्ातार्रणी प्रभार्ों से मुक्त होना चाकहये
5. उच्च वर्शि प्रशतरोध होना चाकहये |
डाई-लैस्क्ट्रक थरेन्थ (परा र्ैधुत सामथ्यव) : ककसी अचालक की प्रशत mm र्ोल्टता सहन करने की क्षमता डाई-लैस्क्ट्रक थरेन्थ कहलाती है | डाई-लैस्क्ट्रक थरेन्थ को ककलो र्ोल्ट प्रशत शमलीमीटर (Kv /mm ) में व्यक्त ककया जाता है|
प्रमुख अचालक : 1. िुष्क र्ायु : शिरोपरी लाइनों में दो चालकों के मध्य िुष्क हर्ा का इन्सुलेिन प्रयोग ककया जाता है |
2. P.V.C. ( पोली वर्नायल क्ट्लोराइड )अचालक का प्रयोग केवबलों के इन्सुलेिन में ककया जाता है |
3. V.I.R (व्ल्केनाइज्ड इंकडया रबर ) : अचालक का प्रयोग केवबलों के इन्सुलेिन में ककया जाता है |
4. पोशसवलेन : शिरोपरी लाइनों के इन्सुलेटर बनानें में पोशसवलेन का प्रयोग ककया जाता है |
5. अभ्रक (माइका) : दो कदक् पररर्तवक खंडों के मध्य रोधन के रूप में प्रयोग ककया जाता है |
चालकता (Conductance ) : ककसी पदाथव का र्ह गुण जो वर्धुत धारा प्रर्ाह में सुगमता प्रदान करता है उसे चालकता कहतें है इसका प्रतीक G र्ह मात्रक साइमन ( S) होता हैं | चालकता प्रशतरोध के वर्लोमानुपाती होती है G = 1/R
वर्शि चालकता (Conductivity ) : वर्शि प्रशतरोध का वर्लोम वर्शि चालकता कहलाती है | इसका प्रतीक मात्रक साइमन/सेमी होता है 1 ρ
वर्धुत र्ाहक बल (Electro Motive Force ) : ककसी चालक में से मुक्त इलैक्ट्रोन्स को प्रर्ाकहत करने र्ाला बल वर्धुत र्ाहक बल कहलाता है इसका प्रतीक E र् मात्रक र्ोल्ट ( V) होता है |
वर्भर्ान्तर ( Potential Difrensh ) :जब ककसी चालक में से वर्धुत धारा प्रर्ाकहत होती है तो उसके शसरों के वर्भर्ों में कुछ अन्तर उत्पन्न हो जाता है स्जसे वर्भर्ान्तर कहतें है | इसका प्रतीक V और मात्रक र्ोल्ट (V ) होता है |
वर्धुत वर्भर् ( Electric Potential ) : ककसी इकाई धनार्ेि को अनन्त से ककसी वबन्दु तक लाने में ककया गया कायव उस वबन्दु पर वर्धुत वर्भर् कहलाता है | वर्धुत वर्भर् की इकाई र्ोल्ट है |
चालक (Conductor ) : र्ह पदाथव स्जनमें मुक्त इलैक्ट्रोन की बहुलता होती है अथावत स्जनमें से वर्धुत धारा प्रर्ाकहत हो सकती है चालक कहलाता है
चालक के गुण : 1. चालक सथता र् सरलता से उपलध ध होना चाकहये | 2. चालक मजबूत , तन्य र् अघातर्ृध्य होना चाकहये 3. चालक का वर्शि प्रशतरोध शनम्न होना चाकहये | 4. चालक र्ातार्रणीय प्रभार्ों से मुक्त होना चाकहये | 5. चालक सरलता से टांका लगाने योनय होना चाकहये |
प्रमुख चालक : 1.चाँदी सबसे अच्छा चालक है | इसका प्रयोग ररले , कोंरेक्ट्टर आकद के संयोजक वबन्दु बनाने में ककया जाता है
2. टंगथटंन का उपयोग बल्बों के कफलामेंट बनानें में ककया जाता है | टंगथटन थथायी चुम्बक शनमावण में भी प्रयोग ककया जाता है |
3. नाइक्रोम का उपयोग हीकटंग एशलमेंट (उष्मक तत्र्) बनानें में ककया जाता है |
4. तांबा एक अच्छा र्ेधुत चालक है स्जसका उपयोग र्ैधुत र्ायररंग,र्ैधुत र्ैष्टन, कदक्ट्पररर्तवक खंड र् वर्भक्त र्लय बनानें में ककया जाताहै
5. डी. सी. मिीनों के ब्रुि बनानें में काबवन धातु का प्रयोग ककया जाता है |
6. यूरेका धातु का प्रयोग तार लपेट प्रशतरोधक बनानें में ककया जाता है |
7. मेंगनींन धातु का प्रयोग तार लपेट प्रशतरोधक बनानें में ककया जाता है |
8. नाइक्रोम धातु में 80%शनककल र् 20%क्रोशमयम का शमश्रण होता है |
9. यूरेका धातु में 40% शनककल र् 60% तांबा धातु का शमश्रण होता है |
10. तांबे का गलनांक 1083 होता है र् आपेस्क्षक घनत्र् 8.93 होता है |
11. एल्युशमशनयम का गलनांक 648 होता है र् आपेस्क्षक घनत्र् 2.7 होता है|
12. सीसे का गलनांक 327 होता है र् आपेस्क्षक घनत्र् 11.3 होता है |
13. कटन का गलनांक 232 होता है र् आपेस्क्षक घनत्र् 7.3 होता है |
14. जथते का गलनांक 420 होता है |
15. पीतल (Brass ), तांबा र् जथता का शमश्रण होता है | इसका प्रयोग र्ैधुत सहायक सामग्री के टशमवनल बनानें में ककया जाता है
16. जथता धातु का उपयोग कैथोड इलैक्ट्रोड बनाने में ककया जाता है र् लौहे पर जंगरोधीपरत चढ़ाने में ककया जाता है
17 कांसा धातु ताम्बा र् कटन धातु का शमश्रण होता है |
अचालक : र्ह पदाथव स्जनमे मुक्त इलैक्ट्रोन नगण्य होते हैं अथावत वर्धुत धारा प्रर्ाह में बाधा उत्पन्न करतें है अचालक कहलातें है |
अचालक के गुण : 1. अचालक सथता र् सरलता से उपलध ध होना चाकहये 2. अचालक मजबूत होना चाकहये
3. अचालक की डाई-लैस्क्ट्रक थरेन्थ उच्च होनी चाकहये 4. अचालक मौसमी र्ातार्रणी प्रभार्ों से मुक्त होना चाकहये
5. उच्च वर्शि प्रशतरोध होना चाकहये |
डाई-लैस्क्ट्रक थरेन्थ (परा र्ैधुत सामथ्यव) : ककसी अचालक की प्रशत mm र्ोल्टता सहन करने की क्षमता डाई-लैस्क्ट्रक थरेन्थ कहलाती है | डाई-लैस्क्ट्रक थरेन्थ को ककलो र्ोल्ट प्रशत शमलीमीटर (Kv /mm ) में व्यक्त ककया जाता है|
प्रमुख अचालक : 1. िुष्क र्ायु : शिरोपरी लाइनों में दो चालकों के मध्य िुष्क हर्ा का इन्सुलेिन प्रयोग ककया जाता है |
2. P.V.C. ( पोली वर्नायल क्ट्लोराइड )अचालक का प्रयोग केवबलों के इन्सुलेिन में ककया जाता है |
3. V.I.R (व्ल्केनाइज्ड इंकडया रबर ) : अचालक का प्रयोग केवबलों के इन्सुलेिन में ककया जाता है |
4. पोशसवलेन : शिरोपरी लाइनों के इन्सुलेटर बनानें में पोशसवलेन का प्रयोग ककया जाता है |
5. अभ्रक (माइका) : दो कदक् पररर्तवक खंडों के मध्य रोधन के रूप में प्रयोग ककया जाता है |
Forwarded from Avinash
इंजीशनयररंग शिकंजे का साइज जबड़े की चौड़ाई से ककया जाता है |
बेंि वाइस का प्रयोग जॉब को मजबुती से पकड़ने के शलए ककया जाता है |
इंजीशनयररंग शिकंजे में दो प्रकार के जबड़े होते है एक स्थथर रहता है तथा दूसरा घूमने योनय होता है |
इंजीशनयररंग शिकंजे से ककसी जॉब की कफशनशिंग सतह को बचाने के शलए नशकंजा रलैम्प का प्रयोग ककया जाता है |
छोटी जॉब को पकड़ने के शलए हैण्ड वाइस का प्रयोग ककया जाता है |
घड़ी साज द्वारा वपि वाइस का प्रयोग ककया जाता है |
ककसी बेलनाकार जॉब या पाइप को पकड़ने के शलए पाइप वाइस का प्रयोग ककया जाता है |
o स्क्राइबर ( खरोंिक ):
यह प्राय: हाई काबवन थटील से बना होता है | इसका प्रयोग धास्त्र्क चरों में माककिंग करने र् लाइने खींचने में ककया जाता है
ववभाजक (डडवाइडर ) :
यह एक अप्रत्यक्ष प्रकार का माककिंग टूल है | इसका साइज ररर्ट या वपर्ट वपन के सेंटर से प्र्ाइंट तक की दूरी से शलया जाता है |
पंि :
पंच प्राय: हाई काबवन थटील के बनाये जाते हैं | पंच का साइज इसकी पूरी लम्बाई और व्यास से शलया जाता है |
डॉट पंि का प्र्ाइंट कोण 600 होता है इसका प्रयोग माककिंग करने के पिात लाइनों पर डॉट लगा कर उन्हें थथायी करने के शलए ककया जाता है |
केन्र निद्र्क ( सेंटर पंि ) का प्र्ाइंट कोण 900 होता है | इसका मुख्य प्रयोग धास्त्र्क चर में कड्रल होल करने के शलए उसके सेंटर प्र्ाइंट की पंशचंग करने के शलए ककआ जाता है |
वप्रक पंि का प्र्ाइंट कोण 300 होता है |
ठोस शीतल पंि का उपयोग धास्त्र्क चरों में छोटे शछद्र करने के शलए ककया जाता है |
खोखला शीतल पंि का उपयोग लघु गेज की चरों में छेद बनाने के शलए ककया जाता है
माइक्रोमापी :
अशत सूक्ष्म माप मापने र्ाला औजार है |यह वब्रकटि प्रणाली में 1/1000 इंच या 0.001 इंच और मीकरक प्रणाली में 1/100 mm या 0.01mm की िुद्दता में माप देता है |
धास्त्र्क चर या र्ायर का बाह्म व्यास मापने के शलए बाह्म माइक्रो मीटर का प्रयोग ककया जाता है | आंतररक माप लेने के शलए इनसाइड माइक्रोमीटर का प्रयोग ककया जाता है |गहराई मापने के शलए डैप्थ माइक्रोमीटर का प्रयोग ककया जाता है
माइक्रोमीटर नट और बोल्ट या लीड और वपच के शसद्दांत पर कायव करता है |
1/1000 mm या 0.001 mm को एक माइक्रोन कहतें हैं | यह माप मीकरक र्शनवयर माइक्रोमीटर से मापा जाता है
माइक्रोमीटर का फ्रेम अंग्रेजी के “C’ अक्षर के आकार का होता है | यह इन्र्ार थटील , काथट आयरन और फोज्डव थटील का बना होता है |
र्शनवयर केशलपर का अल्पतम माप 0.02 mm है |
o हैमर (हथौड़ा ):
हथौड़ा एक हथत टूल है जो वर्शभन्न आघातों जैसे पंशचंग,मोड़ना,सीधा करना ,तोड़ना,फोस्जिंग करना और ररर्ेकटंग के शलए प्रयुक्त होता है | हथौड़े का आकार भार (र्जन ) र् वपन की आकृशत से ककया जाता है |
हथौड़े के फेस र् वपन भागों को कठोरीकृत ककया जाता है |
बॉल वपि हैमर का फेस चपटा होता है और वपन बॉल के
बेंि वाइस का प्रयोग जॉब को मजबुती से पकड़ने के शलए ककया जाता है |
इंजीशनयररंग शिकंजे में दो प्रकार के जबड़े होते है एक स्थथर रहता है तथा दूसरा घूमने योनय होता है |
इंजीशनयररंग शिकंजे से ककसी जॉब की कफशनशिंग सतह को बचाने के शलए नशकंजा रलैम्प का प्रयोग ककया जाता है |
छोटी जॉब को पकड़ने के शलए हैण्ड वाइस का प्रयोग ककया जाता है |
घड़ी साज द्वारा वपि वाइस का प्रयोग ककया जाता है |
ककसी बेलनाकार जॉब या पाइप को पकड़ने के शलए पाइप वाइस का प्रयोग ककया जाता है |
o स्क्राइबर ( खरोंिक ):
यह प्राय: हाई काबवन थटील से बना होता है | इसका प्रयोग धास्त्र्क चरों में माककिंग करने र् लाइने खींचने में ककया जाता है
ववभाजक (डडवाइडर ) :
यह एक अप्रत्यक्ष प्रकार का माककिंग टूल है | इसका साइज ररर्ट या वपर्ट वपन के सेंटर से प्र्ाइंट तक की दूरी से शलया जाता है |
पंि :
पंच प्राय: हाई काबवन थटील के बनाये जाते हैं | पंच का साइज इसकी पूरी लम्बाई और व्यास से शलया जाता है |
डॉट पंि का प्र्ाइंट कोण 600 होता है इसका प्रयोग माककिंग करने के पिात लाइनों पर डॉट लगा कर उन्हें थथायी करने के शलए ककया जाता है |
केन्र निद्र्क ( सेंटर पंि ) का प्र्ाइंट कोण 900 होता है | इसका मुख्य प्रयोग धास्त्र्क चर में कड्रल होल करने के शलए उसके सेंटर प्र्ाइंट की पंशचंग करने के शलए ककआ जाता है |
वप्रक पंि का प्र्ाइंट कोण 300 होता है |
ठोस शीतल पंि का उपयोग धास्त्र्क चरों में छोटे शछद्र करने के शलए ककया जाता है |
खोखला शीतल पंि का उपयोग लघु गेज की चरों में छेद बनाने के शलए ककया जाता है
माइक्रोमापी :
अशत सूक्ष्म माप मापने र्ाला औजार है |यह वब्रकटि प्रणाली में 1/1000 इंच या 0.001 इंच और मीकरक प्रणाली में 1/100 mm या 0.01mm की िुद्दता में माप देता है |
धास्त्र्क चर या र्ायर का बाह्म व्यास मापने के शलए बाह्म माइक्रो मीटर का प्रयोग ककया जाता है | आंतररक माप लेने के शलए इनसाइड माइक्रोमीटर का प्रयोग ककया जाता है |गहराई मापने के शलए डैप्थ माइक्रोमीटर का प्रयोग ककया जाता है
माइक्रोमीटर नट और बोल्ट या लीड और वपच के शसद्दांत पर कायव करता है |
1/1000 mm या 0.001 mm को एक माइक्रोन कहतें हैं | यह माप मीकरक र्शनवयर माइक्रोमीटर से मापा जाता है
माइक्रोमीटर का फ्रेम अंग्रेजी के “C’ अक्षर के आकार का होता है | यह इन्र्ार थटील , काथट आयरन और फोज्डव थटील का बना होता है |
र्शनवयर केशलपर का अल्पतम माप 0.02 mm है |
o हैमर (हथौड़ा ):
हथौड़ा एक हथत टूल है जो वर्शभन्न आघातों जैसे पंशचंग,मोड़ना,सीधा करना ,तोड़ना,फोस्जिंग करना और ररर्ेकटंग के शलए प्रयुक्त होता है | हथौड़े का आकार भार (र्जन ) र् वपन की आकृशत से ककया जाता है |
हथौड़े के फेस र् वपन भागों को कठोरीकृत ककया जाता है |
बॉल वपि हैमर का फेस चपटा होता है और वपन बॉल के
Forwarded from Avinash
अल्टरनेटर
अल्टरनेटर
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अल्टरनेटर का कार्य-सिद्धान्त
अल्टरनेटर प्रत्यावर्ती धारा उत्पन्न करने वाला विद्युत जनित्र है। वस्तुतः यह एक तुल्यकालिक मशीन है। वर्तमान समय में अधिकांश शक्ति संयंत्रों में विद्युत उत्पादन का कार्य अलटरनेटर ही करते हैं।
समय के साथ साथ बहुत बड़े बड़े आकार के अलटरनेटर बनने लगते हैं। ५०,००० से १,५०,००० किलोवाट की क्षमतावाले जनित्र अब सामान्य हो गए हैं। ये निरंतर प्रवर्तन करनेवाली मशीनें हैं, इसलिए इनकी संरचना भी अत्यंत मानक आधार (exacting standards) पर होती है। मुख्यत:, यह स्वत: कार्यकारी मशीन होती है और इसके सारे प्रवर्तन दूरस्थ नियंत्रण (remote control) द्वारा नियंत्रित किए जा सकते हैं। क्षेत्र धारा के विचरण से वोल्टता नियंत्रण सुगमता से किया जा सकता है। भार के अनुरूप निवेश (input) स्वयं ही नियंत्रित हो जाता है। इन सब कारणों से वर्तमान विद्युत् जनित्र बहुत ही दक्ष एवं विश्वसनीय होते हैं। वास्तव में इनके विश्वसनीय प्रवर्तन के कारण ही विद्युत् संभरण को विश्वसनीय बनाया जाना संभव हो सका है।
परिचय
जैसे जैसे विद्युत् का प्रयोग बढ़ता गया, जनित्रों का आकार एवं जनित वोल्टता में भी वृद्धि होती गई। परंतु दिष्टधारा जनित्रों में, आर्मेचर घूमनेवाला होने के कारण उसके आकार में बहुत वृद्धि करना संभव नहीं था। इसलिए उच्च वोल्टता जनित करनेवाले प्रत्यावर्ती धारा के जनित्र बनाए गए, जिनमें आर्मेचर स्वैतिक था और क्षेत्र परिभ्रमणशील। वस्तुत:, वोल्टता जनन के लिए यह आवश्यक नहीं कि चालक ही चुंबकीय क्षेत्र में घूमे। घूमते हुए चुंबकीय क्षेत्र में स्थित चालक में भी वोल्टता प्रेरित होगी, क्योंकि इस दशा में भी वह चुंबकीय अभिवाह को काट रहा है। अत: इस सिद्धांत पर, स्थैतिक आर्मेचर और परिभ्रमण क्षेत्र द्वारा वोल्टता जनित हो सकती है। यह वोल्टता प्रत्यावर्ती प्ररूप की होगी और आर्मेचर चालक तथा क्षेत्र की सापेक्ष स्थिति पर निर्भर करेगी।
एक बडे जल पम्प का रोटर
एक बड़े पम्प का स्टेटर
प्रत्यावर्ती धारा जनित्र, सामान्यत:, स्थैतिक आर्मेचर और परिभ्रमणशील क्षेत्र के सिद्धांत पर आधारित होते हैं। इनमें क्षेत्र चुंबक और कुंडलियाँ परिभ्रमणशील बनाई जाती हैं तथा आर्मेचर उनको बाहर से घेरे होता है। आर्मेचर में कटे खाँचों (slots) में चालक स्थित होते हैं। आर्मेचर के स्थैतिक होने के कारण और बाहर की ओर होने से, उसका आकार काफी बढ़ाया जा सकता है, जिसका मतलब है, उसमें चालक संख्या काफी अधिक हो सकती है। क्षेत्र वाइंडिंग सापेक्षतया छोटे होते हैं और उन्हें अधिक वेग पर घुमाया जाना, व्यावहारिक रूप में, कोई कठिनाई नहीं उत्पन्न करता। इन कारणों से प्रत्यावर्ती धारा जनित्रों में उच्च वोल्टता जनित करना संभव है और ये साधारणतया ११,००० वोल्ट पर प्रवर्तित किए जाते हैं।
रोटर को डीसी देने की एक विधि ; लाल बक्से में दिखाया गया परिपथ शाफ्ट पर घूर्ण करता है।
स्लिप रिंगों के माध्यम से रोटर को डीसी द्ने की विधि
अल्टरनेटर का तुल्य परिपथ
इन जनित्रों में बुरुशों के स्थान पर सर्पी वलय (slip rings) होते हैं, जो क्षेत्र कुंडलियों को उत्तेजित करने के लिए धारा पहुँचाते हैं। क्षेत्र के परिभ्रमणशील होने के कारण उन्हें दिष्ट धारा द्वारा उत्तेजन करना आवश्यक है। उत्तेजन धारा या तो बाहरी स्रोत से प्राप्त की जाती है, अथवा उसी शाफ्ट पर आरोपित एक छोटे से दिष्ट धारा जनित्र से, जिसे उत्तेजक (Exciter) कहते हैं। उत्तेजन वोल्टता साधारणतया ११० अथवा २२० वोल्ट ही होती है। सभी बड़े जनित्रों में उत्तेजक द्वारा संभरण (सप्लाई) होता है, जिससे उत्तेजक के लिए अलग से दिष्ट धारा स्रोत की आवश्यकता न रहे।
प्रत्यावर्ती धारा जनित्रों को निर्धारित वेग पर ही प्रवर्तन करना होता है, जो उनमें जनित वोल्टता की आवृत्ति (frequency) एवं क्षेत्र ध्रुवों की संख्या पर निर्भर करता है। इसे निम्नलिखित समीकरण से व्यक्त किया जा सकता है :
n = 120 f / p
यहाँ n=परिक्रमण प्रति मिनट, f=आवृत्ति (चक्र प्रति सेकंड) तथा p=ध्रुव संख्या।
इस प्रकार, ५० चक्रीय आवृत्ति के लिए चार ध्रुवी मशीन १,५०० परिक्रमण प्रति मिनट के वेग से प्रवर्तन करेगी और दो ध्रुवी मशीन ३,००० परिक्रमण प्रति मिनट के वेग से। यदि निर्धारित वेग एक समान रहा, तो आवृत्ति में अंतर आ जाएगा। सामान्यत: विद्युत् संभरण निर्धारित वोल्टता और आवृत्ति के होते हैं। अत: आवृत्ति स्थिर रखने के लिए जनित्र का वेग एकसा न रखना आवश्यक है और यह वेग उसकी ध्रुवसंख्या के अनुसार निश्चित होता है। भारत तथा दूसरे कॉमनवेल्थ देशों में विद्युतसंभरण की आवृत्ति सामान्यत: ५० चक्र प्रति सेकंड निश्चित है। अमरीका तथा दूसरे देशों में ६० चक्रीय आवृत्ति प्रयोग की जाती है। आवृत्ति के अनुसार विभिन्न ध्रुवों के जनित्रों का वेग भी निश्चित होता है, जिसे समक्रमिक वेग कहते हैं।
प्रकार
अल्टरनेटर
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अल्टरनेटर का कार्य-सिद्धान्त
अल्टरनेटर प्रत्यावर्ती धारा उत्पन्न करने वाला विद्युत जनित्र है। वस्तुतः यह एक तुल्यकालिक मशीन है। वर्तमान समय में अधिकांश शक्ति संयंत्रों में विद्युत उत्पादन का कार्य अलटरनेटर ही करते हैं।
समय के साथ साथ बहुत बड़े बड़े आकार के अलटरनेटर बनने लगते हैं। ५०,००० से १,५०,००० किलोवाट की क्षमतावाले जनित्र अब सामान्य हो गए हैं। ये निरंतर प्रवर्तन करनेवाली मशीनें हैं, इसलिए इनकी संरचना भी अत्यंत मानक आधार (exacting standards) पर होती है। मुख्यत:, यह स्वत: कार्यकारी मशीन होती है और इसके सारे प्रवर्तन दूरस्थ नियंत्रण (remote control) द्वारा नियंत्रित किए जा सकते हैं। क्षेत्र धारा के विचरण से वोल्टता नियंत्रण सुगमता से किया जा सकता है। भार के अनुरूप निवेश (input) स्वयं ही नियंत्रित हो जाता है। इन सब कारणों से वर्तमान विद्युत् जनित्र बहुत ही दक्ष एवं विश्वसनीय होते हैं। वास्तव में इनके विश्वसनीय प्रवर्तन के कारण ही विद्युत् संभरण को विश्वसनीय बनाया जाना संभव हो सका है।
परिचय
जैसे जैसे विद्युत् का प्रयोग बढ़ता गया, जनित्रों का आकार एवं जनित वोल्टता में भी वृद्धि होती गई। परंतु दिष्टधारा जनित्रों में, आर्मेचर घूमनेवाला होने के कारण उसके आकार में बहुत वृद्धि करना संभव नहीं था। इसलिए उच्च वोल्टता जनित करनेवाले प्रत्यावर्ती धारा के जनित्र बनाए गए, जिनमें आर्मेचर स्वैतिक था और क्षेत्र परिभ्रमणशील। वस्तुत:, वोल्टता जनन के लिए यह आवश्यक नहीं कि चालक ही चुंबकीय क्षेत्र में घूमे। घूमते हुए चुंबकीय क्षेत्र में स्थित चालक में भी वोल्टता प्रेरित होगी, क्योंकि इस दशा में भी वह चुंबकीय अभिवाह को काट रहा है। अत: इस सिद्धांत पर, स्थैतिक आर्मेचर और परिभ्रमण क्षेत्र द्वारा वोल्टता जनित हो सकती है। यह वोल्टता प्रत्यावर्ती प्ररूप की होगी और आर्मेचर चालक तथा क्षेत्र की सापेक्ष स्थिति पर निर्भर करेगी।
एक बडे जल पम्प का रोटर
एक बड़े पम्प का स्टेटर
प्रत्यावर्ती धारा जनित्र, सामान्यत:, स्थैतिक आर्मेचर और परिभ्रमणशील क्षेत्र के सिद्धांत पर आधारित होते हैं। इनमें क्षेत्र चुंबक और कुंडलियाँ परिभ्रमणशील बनाई जाती हैं तथा आर्मेचर उनको बाहर से घेरे होता है। आर्मेचर में कटे खाँचों (slots) में चालक स्थित होते हैं। आर्मेचर के स्थैतिक होने के कारण और बाहर की ओर होने से, उसका आकार काफी बढ़ाया जा सकता है, जिसका मतलब है, उसमें चालक संख्या काफी अधिक हो सकती है। क्षेत्र वाइंडिंग सापेक्षतया छोटे होते हैं और उन्हें अधिक वेग पर घुमाया जाना, व्यावहारिक रूप में, कोई कठिनाई नहीं उत्पन्न करता। इन कारणों से प्रत्यावर्ती धारा जनित्रों में उच्च वोल्टता जनित करना संभव है और ये साधारणतया ११,००० वोल्ट पर प्रवर्तित किए जाते हैं।
रोटर को डीसी देने की एक विधि ; लाल बक्से में दिखाया गया परिपथ शाफ्ट पर घूर्ण करता है।
स्लिप रिंगों के माध्यम से रोटर को डीसी द्ने की विधि
अल्टरनेटर का तुल्य परिपथ
इन जनित्रों में बुरुशों के स्थान पर सर्पी वलय (slip rings) होते हैं, जो क्षेत्र कुंडलियों को उत्तेजित करने के लिए धारा पहुँचाते हैं। क्षेत्र के परिभ्रमणशील होने के कारण उन्हें दिष्ट धारा द्वारा उत्तेजन करना आवश्यक है। उत्तेजन धारा या तो बाहरी स्रोत से प्राप्त की जाती है, अथवा उसी शाफ्ट पर आरोपित एक छोटे से दिष्ट धारा जनित्र से, जिसे उत्तेजक (Exciter) कहते हैं। उत्तेजन वोल्टता साधारणतया ११० अथवा २२० वोल्ट ही होती है। सभी बड़े जनित्रों में उत्तेजक द्वारा संभरण (सप्लाई) होता है, जिससे उत्तेजक के लिए अलग से दिष्ट धारा स्रोत की आवश्यकता न रहे।
प्रत्यावर्ती धारा जनित्रों को निर्धारित वेग पर ही प्रवर्तन करना होता है, जो उनमें जनित वोल्टता की आवृत्ति (frequency) एवं क्षेत्र ध्रुवों की संख्या पर निर्भर करता है। इसे निम्नलिखित समीकरण से व्यक्त किया जा सकता है :
n = 120 f / p
यहाँ n=परिक्रमण प्रति मिनट, f=आवृत्ति (चक्र प्रति सेकंड) तथा p=ध्रुव संख्या।
इस प्रकार, ५० चक्रीय आवृत्ति के लिए चार ध्रुवी मशीन १,५०० परिक्रमण प्रति मिनट के वेग से प्रवर्तन करेगी और दो ध्रुवी मशीन ३,००० परिक्रमण प्रति मिनट के वेग से। यदि निर्धारित वेग एक समान रहा, तो आवृत्ति में अंतर आ जाएगा। सामान्यत: विद्युत् संभरण निर्धारित वोल्टता और आवृत्ति के होते हैं। अत: आवृत्ति स्थिर रखने के लिए जनित्र का वेग एकसा न रखना आवश्यक है और यह वेग उसकी ध्रुवसंख्या के अनुसार निश्चित होता है। भारत तथा दूसरे कॉमनवेल्थ देशों में विद्युतसंभरण की आवृत्ति सामान्यत: ५० चक्र प्रति सेकंड निश्चित है। अमरीका तथा दूसरे देशों में ६० चक्रीय आवृत्ति प्रयोग की जाती है। आवृत्ति के अनुसार विभिन्न ध्रुवों के जनित्रों का वेग भी निश्चित होता है, जिसे समक्रमिक वेग कहते हैं।
प्रकार
Forwarded from Avinash
आधुनिक टर्बोजनित्र
उपर्युक्त आधार पर, वेग के अनुसार इन जनित्रों के दो मुख्य प्ररूप होते हैं : एक तो टर्बोजनित्र (Turbo Generators), जिन्हें वाष्प टरबाइन से चलाया जाता है और उच्च वेग पर प्रवर्तित करते हैं तथा दूसरे जलविद्युत् जनित्र (Hydroelectric Generators), जो सामान्यत: कम वेग पर प्रवर्तित किए जाते हैं। कुछ का वेग तो १२५ परिक्रमण प्रति मिनट तक होता है। इनमें ५० चक्रीय आवृत्ति के लिए ४८ ध्रुव होते हैं। टर्वोजनित्र में ध्रुव संख्या २ या ४ से अधिक नहीं होती। बड़े जनित्रों में केवल २ ध्रुव ही होते हैं और वे ३,००० परिक्रमण प्रति मिनट पर प्रवर्तन करते हैं। इस अंतर के साथ साथ इनकी रचना में भी बहुत अंतर होता है। अधिक ध्रुवोवाली मशीन का रोटर (rotor) काफी बड़ा होता है। उसकी रचना एक गतिपालक चक्र (fly wheel) के समान होती है, जो मध्य भाग से साइकिल के पहिऐ की भाँति स्पोकों (spokes) पर आरोपित होता है और ध्रुव गोलाई में चारों ओर लगे होते हैं। इसे सैलिएंट ध्रुव (saliant pole) वाला रोटर कहते हैं। इसके विपरीत, टर्बो जनित्र का रोटर बहुत लंबा और बेलनाकार होता है। इसमें ध्रुव निकले हुए नहीं होते, वरन् बेलनाकार रोटर में बने खाँचों में अवस्थित क्षेत्र कुंडलियों द्वारा बनते हैं। आकृति के अनुरूप इस प्रकार के रोटर को बेलनाकार (cylindrical) रोटर अथवा चिकना (smooth) रोटर कहते हैं।
टर्बोजनित्र के उच्च वेग पर प्रवर्तित करने के कारण, इनमें वेयरिंग के स्नेहन (lubrication) और संवातन (ventilation) की समस्याएँ अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं। जलविद्युत् जनित्रों में वेयरिंग पर बहुत अधिक भार होने के कारण (रोटर बहुत बड़ा और भारी होता है) तथा पार्श्व बल के लगने के कारण, स्नेहन की समस्या जटिल होती है, परंतु संवातन स्वयं अपने आप ही पर्याप्त हो जाता है। स्नेहन के लिए तेल पंप द्वारा तेल चलनशील भागों में, जहाँ स्नेहन आवश्यक होता है, दाब (pressure) के साथ भेजा जाता है। तेल साफ करने के लिए तेल फिल्टर भी आवश्यक सहायक (auxiliary) है। स्नेहन दाब घट जाने पर, मशीन के सक्रिय रूप से बंद हो जाने की भी व्यवस्था होती है।
टर्बोजनित्रों में संवातन के लिए बहुधा वलित संवातन (forced ventilation) का प्रयोग किया जाता है। आर्मेचर और रोटर में वाहिनियाँ (ducts) इस प्रकार बनी होती है कि एक ओर से हवा खिंचकर इन वाहिनियों में होती हुई और मशीन को ठंढा करती हुई दूसरी ओर को निकल जाती है। उच्च वेग पर इस क्रिया में सहायता तो मिलती है, परंतु बड़े बड़े जनित्रों में यह प्राकृतिक रूप से संवातन पर्याप्त नहीं होता और हवा को दबाव के द्वारा मशीन में भेजा जाता है। धूल और नमी से मशीन को बचाने के लिए, संवाहन का बंद तंत्र (closed system of ventilation) प्रयुक्त होता है। इसमें उसी वायु को बार बार प्रयुक्त किया जाता है और गरम होने पर, वायुशीतक (air cooler) द्वारा उसे ठंडा कर लिया जाता है और फिर उसे दबाव के साथ मशीन में संवातन के लिए भेजा जाता है। बड़े जनित्रों में संवातन के लिए वायु के स्थान पर हाइड्रोजन गैस का भी प्रयोग किया जाता है। हाइड्रोजन वायु से १४ गुना हल्का होता है। अत:, संवातन के लिए इसे प्रयोग करने से वायव्य हानि (windage loss) कम हो जाती है। ऊष्मा निष्कासन का भी यह वायु से अधिक प्रभावी माध्यम है। परंतु वायु के साथ मिलकर हाइड्रोजन विस्फोटक हो सकता है और इसे बचाने के लिए पर्याप्त सावधानी रखी जाती है।
उपर्युक्त आधार पर, वेग के अनुसार इन जनित्रों के दो मुख्य प्ररूप होते हैं : एक तो टर्बोजनित्र (Turbo Generators), जिन्हें वाष्प टरबाइन से चलाया जाता है और उच्च वेग पर प्रवर्तित करते हैं तथा दूसरे जलविद्युत् जनित्र (Hydroelectric Generators), जो सामान्यत: कम वेग पर प्रवर्तित किए जाते हैं। कुछ का वेग तो १२५ परिक्रमण प्रति मिनट तक होता है। इनमें ५० चक्रीय आवृत्ति के लिए ४८ ध्रुव होते हैं। टर्वोजनित्र में ध्रुव संख्या २ या ४ से अधिक नहीं होती। बड़े जनित्रों में केवल २ ध्रुव ही होते हैं और वे ३,००० परिक्रमण प्रति मिनट पर प्रवर्तन करते हैं। इस अंतर के साथ साथ इनकी रचना में भी बहुत अंतर होता है। अधिक ध्रुवोवाली मशीन का रोटर (rotor) काफी बड़ा होता है। उसकी रचना एक गतिपालक चक्र (fly wheel) के समान होती है, जो मध्य भाग से साइकिल के पहिऐ की भाँति स्पोकों (spokes) पर आरोपित होता है और ध्रुव गोलाई में चारों ओर लगे होते हैं। इसे सैलिएंट ध्रुव (saliant pole) वाला रोटर कहते हैं। इसके विपरीत, टर्बो जनित्र का रोटर बहुत लंबा और बेलनाकार होता है। इसमें ध्रुव निकले हुए नहीं होते, वरन् बेलनाकार रोटर में बने खाँचों में अवस्थित क्षेत्र कुंडलियों द्वारा बनते हैं। आकृति के अनुरूप इस प्रकार के रोटर को बेलनाकार (cylindrical) रोटर अथवा चिकना (smooth) रोटर कहते हैं।
टर्बोजनित्र के उच्च वेग पर प्रवर्तित करने के कारण, इनमें वेयरिंग के स्नेहन (lubrication) और संवातन (ventilation) की समस्याएँ अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं। जलविद्युत् जनित्रों में वेयरिंग पर बहुत अधिक भार होने के कारण (रोटर बहुत बड़ा और भारी होता है) तथा पार्श्व बल के लगने के कारण, स्नेहन की समस्या जटिल होती है, परंतु संवातन स्वयं अपने आप ही पर्याप्त हो जाता है। स्नेहन के लिए तेल पंप द्वारा तेल चलनशील भागों में, जहाँ स्नेहन आवश्यक होता है, दाब (pressure) के साथ भेजा जाता है। तेल साफ करने के लिए तेल फिल्टर भी आवश्यक सहायक (auxiliary) है। स्नेहन दाब घट जाने पर, मशीन के सक्रिय रूप से बंद हो जाने की भी व्यवस्था होती है।
टर्बोजनित्रों में संवातन के लिए बहुधा वलित संवातन (forced ventilation) का प्रयोग किया जाता है। आर्मेचर और रोटर में वाहिनियाँ (ducts) इस प्रकार बनी होती है कि एक ओर से हवा खिंचकर इन वाहिनियों में होती हुई और मशीन को ठंढा करती हुई दूसरी ओर को निकल जाती है। उच्च वेग पर इस क्रिया में सहायता तो मिलती है, परंतु बड़े बड़े जनित्रों में यह प्राकृतिक रूप से संवातन पर्याप्त नहीं होता और हवा को दबाव के द्वारा मशीन में भेजा जाता है। धूल और नमी से मशीन को बचाने के लिए, संवाहन का बंद तंत्र (closed system of ventilation) प्रयुक्त होता है। इसमें उसी वायु को बार बार प्रयुक्त किया जाता है और गरम होने पर, वायुशीतक (air cooler) द्वारा उसे ठंडा कर लिया जाता है और फिर उसे दबाव के साथ मशीन में संवातन के लिए भेजा जाता है। बड़े जनित्रों में संवातन के लिए वायु के स्थान पर हाइड्रोजन गैस का भी प्रयोग किया जाता है। हाइड्रोजन वायु से १४ गुना हल्का होता है। अत:, संवातन के लिए इसे प्रयोग करने से वायव्य हानि (windage loss) कम हो जाती है। ऊष्मा निष्कासन का भी यह वायु से अधिक प्रभावी माध्यम है। परंतु वायु के साथ मिलकर हाइड्रोजन विस्फोटक हो सकता है और इसे बचाने के लिए पर्याप्त सावधानी रखी जाती है।
Sameer Kumar:
भारत की प्रमुख मिसाइलों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी
अग्नि - 1(agni - 1)
इस मिसाइल पर वर्ष 1999 में कार्य शुरू किया गया किन्तु परीक्षण वर्ष 2002 किया गया इसे कम मारक क्षमता वाली मिसाइल से रूप में विकसित किया गया यह 700 किमी तक मार करने में संक्षम है इसे भारतीय सेना में शामिल कर लिया गया है।
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अग्नि - II (agni - ii)
सतह से सतह मार करने वाली अग्नि-II मिसाइल का व्हीलर आयलैण्ड से मई 2010 में सफल परीक्षण किया गया इससे पूर्व 2009 में दो बार इसका परीक्षण असफल रहा इस मिसाइल की मारक क्षमता 2000 किमी है तथा यह एक टन का पेलोड ले जाने में सक्षम है।
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अग्नि- III (agni - iii)
परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम इस मिसाइल का परीक्षण वर्ष 2006 में किया गया था जिसमें आंशिक सफलता ही मिली वर्ष 2007 और 2008 में इसका सफल परीक्षण किया गया वर्ष 2010 में व्हीलर आइलैण्ड से इसका चौथा परीक्षण किया गया 3500 किमी मारक क्षमता वाली इस मिसाइल 17 मी लम्बी है इसका व्यास 2 मी है।
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अग्नि-IV (agni - iv)
सतह से सतह पर मार करने वाली इस मिसाइल का सफल परीक्षण नवम्बर 2011 में किया गया यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है इस मिसाइल का मारक क्षमता 3 हजार किमी है तथा इसकी पेलोड क्षमता 1000 किमी है।
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अग्नि - V (agni - v)
इस अन्तर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का 15 सितम्बर 2013 को ओडिशा के व्हीलर द्वीप से सफल परीक्षण किया गया इससे पहले 19 अप्रैल 2012 को अग्नि V का पहला सफल परीक्षण किया गया था परमाणु हथियार ने जाने में सक्षम इस मिसाइल की मारक क्षमता 5000 किमी है इस प्रकार अब अमेरिका को छोड कर विश्व के सभी महाद्वीप इस मिसाइल की परिधी में अा गये हैं यह मिसाइल तीन चरणों में काम करती है तथा आखिरी चरण में 800 किमी की ऊॅचाई तक पहुॅच कर बुलैट से भी तेज स्पीड से आपने निशाने की तरफ आती है।
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अग्नि - VI (agni - vi)
यह एक अंतर माहाद्वीपीय वैलिस्टिक मिसाइल है जिसका विकास डी आर डी ओ तथा भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (Bharat Dynamics Ltd.) द्वारा किया जा रहा है इसका वजन 55-70 किलाेग्राम है और इसकी मारक क्षमता अधिकतम 10000 किमी है। @speedybook
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धनुष (dhanush)
इस मिसाइल को नौसेना के लिए विकसित किया गया है यह 350 किमी की दूरी पर स्थित अपने लक्ष्य को भेद सकती है जिसका विकास डी आर डी ओ तथा भारत डायनेमिक्स लिमिटेड द्वारा किया है इसकी लंबाई 10 मीटर तथा चौडाई 1 मीटर है यह 500 किलोग्राम तक के हथियार ले जाने में सक्षम है।
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प्रहार (prahaar)
सतह से सतह तक मार करने वाली इस मिसाइल की मारक क्षमता 150 किमी है इसकी लंबाई 7.3 मीटर व वजन 1200 किलोग्राम तथा व्यास 420 मिमी है यह मिसाइल अपने साथ 200 किलोग्राम पेलोड ले जाने में सक्षम है।
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पृथ्वी (prithvee)
यह मिसाइल भारत ने स्वदेशी तकनीक से विकसित की है तथा सेना में शमिल किया गया है भारत के एकीकृत मिसाइल विकास कार्यक्रम के तहत पृथ्वी पूर्ण रूप से स्वदेश में निर्मित पहली मिसाइल है इस मिसाइल से 500 किलोग्राम के बम गिराये जा सकते हैं।
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ब्रह्मोस (brahmos)
यह ध्वनि की गति से भी तेज चलती सुपर सोनिक क्रूज मिसाइल है यह 290 किमी तक मार करने की क्षमता रखती है तथा इसका वजन 3 टन है यह ध्वनि की गति से 2.8 गुना अधिक गति से उडान भर सकती है यह हवा में ही मार्ग बदल सकती है तथा चलते- फिरते लक्ष्य को भी भेद सकती है।
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आकाश (aakaash)
सतह से सतह पर मार करने वाली यह मिसाइल का वजन 700 किलोग्राम है यह मिसाइल 55 पेलोड ले जा सकता है इसकी गति 2.5 मॉक है यह मिसाइल एक साथ कई निशनों को भेद सकती है।
त्रिशूल (trishool)
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यह सतह से सतह आकाश में मार करने वाली त्वरित प्रतिक्रिया वाली मिसाइल है इसका प्रयोग किसी जहाज से नीचे उड रही आक्रमणकारी मिसाइलों के विरूद्ध समुद्ररोधी द्रुतगामी मीटर नाव के रूप में भी किया जा सकता है।
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नाग (naag)
डी आस डी ओ द्वारा विककित तथा "दागो और भूल जाओ" की नीति पर आधारित यह एक टैंकरोधी मिसाइल है इसका वजन 42 किग्रा तथा लंबाई 1.90 मीटर है।
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राष्ट्रीय आंदोलन की महत्वपूर्ण घटनाएँ
https://t.me/speedybook
►1904 ~ भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम पारित
►1905 ~ बंगाल का विभाजन
►1906 ~ मुस्लिम लीग की स्थापना
►1907 ~ सूरत अधिवेशन, कांग्रेस में फूट
भारत की प्रमुख मिसाइलों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी
अग्नि - 1(agni - 1)
इस मिसाइल पर वर्ष 1999 में कार्य शुरू किया गया किन्तु परीक्षण वर्ष 2002 किया गया इसे कम मारक क्षमता वाली मिसाइल से रूप में विकसित किया गया यह 700 किमी तक मार करने में संक्षम है इसे भारतीय सेना में शामिल कर लिया गया है।
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अग्नि - II (agni - ii)
सतह से सतह मार करने वाली अग्नि-II मिसाइल का व्हीलर आयलैण्ड से मई 2010 में सफल परीक्षण किया गया इससे पूर्व 2009 में दो बार इसका परीक्षण असफल रहा इस मिसाइल की मारक क्षमता 2000 किमी है तथा यह एक टन का पेलोड ले जाने में सक्षम है।
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अग्नि- III (agni - iii)
परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम इस मिसाइल का परीक्षण वर्ष 2006 में किया गया था जिसमें आंशिक सफलता ही मिली वर्ष 2007 और 2008 में इसका सफल परीक्षण किया गया वर्ष 2010 में व्हीलर आइलैण्ड से इसका चौथा परीक्षण किया गया 3500 किमी मारक क्षमता वाली इस मिसाइल 17 मी लम्बी है इसका व्यास 2 मी है।
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अग्नि-IV (agni - iv)
सतह से सतह पर मार करने वाली इस मिसाइल का सफल परीक्षण नवम्बर 2011 में किया गया यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है इस मिसाइल का मारक क्षमता 3 हजार किमी है तथा इसकी पेलोड क्षमता 1000 किमी है।
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अग्नि - V (agni - v)
इस अन्तर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का 15 सितम्बर 2013 को ओडिशा के व्हीलर द्वीप से सफल परीक्षण किया गया इससे पहले 19 अप्रैल 2012 को अग्नि V का पहला सफल परीक्षण किया गया था परमाणु हथियार ने जाने में सक्षम इस मिसाइल की मारक क्षमता 5000 किमी है इस प्रकार अब अमेरिका को छोड कर विश्व के सभी महाद्वीप इस मिसाइल की परिधी में अा गये हैं यह मिसाइल तीन चरणों में काम करती है तथा आखिरी चरण में 800 किमी की ऊॅचाई तक पहुॅच कर बुलैट से भी तेज स्पीड से आपने निशाने की तरफ आती है।
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अग्नि - VI (agni - vi)
यह एक अंतर माहाद्वीपीय वैलिस्टिक मिसाइल है जिसका विकास डी आर डी ओ तथा भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (Bharat Dynamics Ltd.) द्वारा किया जा रहा है इसका वजन 55-70 किलाेग्राम है और इसकी मारक क्षमता अधिकतम 10000 किमी है। @speedybook
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धनुष (dhanush)
इस मिसाइल को नौसेना के लिए विकसित किया गया है यह 350 किमी की दूरी पर स्थित अपने लक्ष्य को भेद सकती है जिसका विकास डी आर डी ओ तथा भारत डायनेमिक्स लिमिटेड द्वारा किया है इसकी लंबाई 10 मीटर तथा चौडाई 1 मीटर है यह 500 किलोग्राम तक के हथियार ले जाने में सक्षम है।
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प्रहार (prahaar)
सतह से सतह तक मार करने वाली इस मिसाइल की मारक क्षमता 150 किमी है इसकी लंबाई 7.3 मीटर व वजन 1200 किलोग्राम तथा व्यास 420 मिमी है यह मिसाइल अपने साथ 200 किलोग्राम पेलोड ले जाने में सक्षम है।
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पृथ्वी (prithvee)
यह मिसाइल भारत ने स्वदेशी तकनीक से विकसित की है तथा सेना में शमिल किया गया है भारत के एकीकृत मिसाइल विकास कार्यक्रम के तहत पृथ्वी पूर्ण रूप से स्वदेश में निर्मित पहली मिसाइल है इस मिसाइल से 500 किलोग्राम के बम गिराये जा सकते हैं।
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ब्रह्मोस (brahmos)
यह ध्वनि की गति से भी तेज चलती सुपर सोनिक क्रूज मिसाइल है यह 290 किमी तक मार करने की क्षमता रखती है तथा इसका वजन 3 टन है यह ध्वनि की गति से 2.8 गुना अधिक गति से उडान भर सकती है यह हवा में ही मार्ग बदल सकती है तथा चलते- फिरते लक्ष्य को भी भेद सकती है।
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आकाश (aakaash)
सतह से सतह पर मार करने वाली यह मिसाइल का वजन 700 किलोग्राम है यह मिसाइल 55 पेलोड ले जा सकता है इसकी गति 2.5 मॉक है यह मिसाइल एक साथ कई निशनों को भेद सकती है।
त्रिशूल (trishool)
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यह सतह से सतह आकाश में मार करने वाली त्वरित प्रतिक्रिया वाली मिसाइल है इसका प्रयोग किसी जहाज से नीचे उड रही आक्रमणकारी मिसाइलों के विरूद्ध समुद्ररोधी द्रुतगामी मीटर नाव के रूप में भी किया जा सकता है।
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नाग (naag)
डी आस डी ओ द्वारा विककित तथा "दागो और भूल जाओ" की नीति पर आधारित यह एक टैंकरोधी मिसाइल है इसका वजन 42 किग्रा तथा लंबाई 1.90 मीटर है।
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राष्ट्रीय आंदोलन की महत्वपूर्ण घटनाएँ
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►1904 ~ भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम पारित
►1905 ~ बंगाल का विभाजन
►1906 ~ मुस्लिम लीग की स्थापना
►1907 ~ सूरत अधिवेशन, कांग्रेस में फूट
►1909 ~ मार्ले-मिंटो सुधार
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►1911 ~ ब्रिटिश सम्राट का दिल्ली दरबार
►1916 ~ होमरूल लीग का निर्माण
►1916 ~ मुस्लिम लीग-कांग्रेस समझौता (लखनऊ पैक्ट)
►1917 ~ महात्मा गाँधी द्वारा चंपारण में आंदोलन
►1919 ~ रौलेट अधिनियम
►1919 ~ जलियाँवाला बाग हत्याकांड
►1919 ~ मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार
►1920 ~ खिलाफत आंदोलन
►1920 ~ असहयोग आंदोलन
►1922 ~ चौरी-चौरा कांड
►1927 ~ साइमन कमीशन की नियुक्ति
►1928 ~ साइमन कमीशन का भारत आगमन
►1929 ~ भगतसिंह द्वारा केन्द्रीय असेंबली में बम विस्फोट
►1929 ~ कांग्रेस द्वारा पूर्ण स्वतंत्रता की माँग
►1930 ~ सविनय अवज्ञा आंदोलन
►1930 ~ प्रथम गोलमेज सम्मेलन
►1931 ~ द्वितीय गोलमेज सम्मेलन
►1932 ~ तृतीय गोलमेज सम्मेलन
►1932 ~ सांप्रदायिक निर्वाचक प्रणाली की घोषणा
►1932 ~ पूना पैक्ट
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►1942 ~ भारत छोड़ो आंदोलन
►1942 ~ क्रिप्स मिशन का आगमन
►1943 ~ आजाद हिन्द फौज की स्थापना
►1946 ~ कैबिनेट मिशन का आगमन
►1946 ~ भारतीय संविधान सभा का निर्वाचन
►1946 ~ अंतरिम सरकार की स्थापना
►1947 ~ भारत के विभाजन की माउंटबेटन योजना
►1947 ~ भारतीय स्वतंत्रता प्राप्ति
✅Biology One Liners
(1) जीवों के पारिस्थितिक कारकों का योग पर्यावरण है। यह कथन किसका है।
*-- ए. फिटिंग ।*
(2) पर्यावरणीय निश्चयवाद के प्रतिपादक कौन थे।
*-- कार्ल रिटर ।*
(3) संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 2002 को किसका अंतर्राष्ट्रीय वर्ष घोषित किया है।
*-- सतत् विकास का।*
(4) विश्व पर्यावरण दिवस कौन सी तारीख को मनाया जाता है।
*-- 5 जून ।*
https://t.me/speedybook
(5) पर्यावरण का सन्तुलन बनाये रखने के लिए वनान्तर्गत क्षेत्रफल होना चाहिए।
*-- 33 प्रतिशत।*
(6) किसी क्षेत्र में पेड़ो के उगने के लिए अपेक्षित न्यूनतम तापमान है।
*-- 4 डिग्री सेल्सियस।*
(7) भारत में वन अनुसंस्थान कहॉ स्थित है।
*-- देहरादून ।*
(8) वनरोपण प्रक्रिया है।
*-- ज्यादा पेड़ लगाने की।*
(9) भारत में अधिकतम वनाच्छादन क्षेत्र कौन सा है।
*-- आरक्षित वन ।*
(10) हरा सोना किसे कहा जाता है।
*-- वन को।*
https://t.me/speedybook
(11) भारत में अधिकांश वन संपदा का मालिक कौन है।
*-- राज्य।*
(12) वन महोत्सव किससे संबंधित है।
*-- पेड़ लगाना।*
(13) सोपान कृषि कहॉ की जाती है।
*-- पहाड़ो के ढलान पर।*
(14) पर्यावरण अध्ययन की प्रकृति है।
*-- बहु अनुशासनिक।*
(15) हम चारो ओर जिन दशाओं से घिरे हुए है, उनका योग कहलाता है।
*-- पर्यावरण।*
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(16) वैश्विक पर्यावरण के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण वन है।
*-- उष्ण कटिबंधीय वन।*
(17) पर्यावरण उन बहारी दशाओं और प्रभावों का योग है जो पृथ्वी तल पर जीवों के विकास चक्र को प्रभावित करते है। यह कथन है।
*-- निकोलस ।*
(18) पर्यावरण एक बाह्य शक्ति है जो कि हमें प्रभावित करती है। यह कथन है।
*-- सी. सी. पार्क ।*
(19) विश्व में पर्यावरण जागरूकता की शुरूआत की थी।
*-- विलियम हैवेट ।*
(20) पर्यावरण का जैविक कारक है।
*-- वनस्पति।*
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🅰 Important Lakes in India 🅰
🔹डल झील :- जम्मू-कश्मीर
🔹वुलर झील :- जम्मू-कश्मीर
🔹बैरीनाग झील :- जम्मू-कश्मीर
🔹मानस बल झील :- जम्मू-कश्मीर
🔹नागिन झील :- जम्मू-कश्मीर
🔹शेषनाग झील :- जम्मू-कश्मीर
🔹अनंतनाग झील :- जम्मू-कश्मीर
🔹राजसमंद झील :- राजस्थान
🔹पिछौला झील :- राजस्थान
🔹सांभर झील :- राजस्थान
🔹जयसमंद झील :- राजस्थान
🔹फतेहसागर झील :- राजस्थान
🔹डीडवाना झील :- राजस्थान
🔹लूनकरनसर झील :- राजस्थान
@speedybook
🔹सातताल झील :- उत्तराखंड
🔹नैनीताल झील :- उत्तराखंड
🔹राकसताल झील :- उत्तराखंड
🔹मालाताल झील :- उत्तराखंड
🔹देवताल झील :- उत्तराखंड
🔹नौकुछियाताल झील :- उत्तराखंड
🔹खुरपताल झील :- उत्तराखंड
🔹हुसैनसागर झील :- आंध्रप्रदेश
🔹कोलेरू झील :- आंध्रप्रदेश
🔹बेम्बनाड झील :- केरल
🔹अष्टमुदी झील :- केरल
🔹पेरियार झील :- केरल
🔹लोनार झील :- महाराष्ट्र
🔹पुलीकट झील :- तमिलनाडु एवं आँध्रप्रदेश
🔹लोकटक झील :- मणिपुर
🔹चिल्का झील :- उड़ीसा
════════════════════
🇮🇳 भारतीय राजव्यवस्था POLITY MCQ 🇮🇳
1.संविधान की द्वितीय अनुसूची का संबंध किस से है?
1) नए राज्यो के निर्माण से
2) महत्वपूर्ण पद अधिकारियों के वेतन-भत्तों से
3) संसद से3
4) राष्ट्रपति चुनाव से
B✅
2.कौन-सी अनुसूची में 22 भाषाओं को मान्यता दी गई है?
1) सातवीं
2) छठी
3) आठवीं
4) पहली
C✅
3.दल-बदल के आधार पर निर्वाचित सदस्यों की अयोग्यता संबंधी विवरण किस अनुसूची में है?
1) दूसरी
2) तीसरी
3) नवीं
4) दसवीं
D✅
*4.संविधान की छठी अनुसूची किस राज्य में लागू नहीं होता है?*
1) मणिपुर
2) मिजोरम
3) नागालैंड
4) मेघालय
A और C ✅
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►1911 ~ ब्रिटिश सम्राट का दिल्ली दरबार
►1916 ~ होमरूल लीग का निर्माण
►1916 ~ मुस्लिम लीग-कांग्रेस समझौता (लखनऊ पैक्ट)
►1917 ~ महात्मा गाँधी द्वारा चंपारण में आंदोलन
►1919 ~ रौलेट अधिनियम
►1919 ~ जलियाँवाला बाग हत्याकांड
►1919 ~ मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार
►1920 ~ खिलाफत आंदोलन
►1920 ~ असहयोग आंदोलन
►1922 ~ चौरी-चौरा कांड
►1927 ~ साइमन कमीशन की नियुक्ति
►1928 ~ साइमन कमीशन का भारत आगमन
►1929 ~ भगतसिंह द्वारा केन्द्रीय असेंबली में बम विस्फोट
►1929 ~ कांग्रेस द्वारा पूर्ण स्वतंत्रता की माँग
►1930 ~ सविनय अवज्ञा आंदोलन
►1930 ~ प्रथम गोलमेज सम्मेलन
►1931 ~ द्वितीय गोलमेज सम्मेलन
►1932 ~ तृतीय गोलमेज सम्मेलन
►1932 ~ सांप्रदायिक निर्वाचक प्रणाली की घोषणा
►1932 ~ पूना पैक्ट
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►1942 ~ भारत छोड़ो आंदोलन
►1942 ~ क्रिप्स मिशन का आगमन
►1943 ~ आजाद हिन्द फौज की स्थापना
►1946 ~ कैबिनेट मिशन का आगमन
►1946 ~ भारतीय संविधान सभा का निर्वाचन
►1946 ~ अंतरिम सरकार की स्थापना
►1947 ~ भारत के विभाजन की माउंटबेटन योजना
►1947 ~ भारतीय स्वतंत्रता प्राप्ति
✅Biology One Liners
(1) जीवों के पारिस्थितिक कारकों का योग पर्यावरण है। यह कथन किसका है।
*-- ए. फिटिंग ।*
(2) पर्यावरणीय निश्चयवाद के प्रतिपादक कौन थे।
*-- कार्ल रिटर ।*
(3) संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 2002 को किसका अंतर्राष्ट्रीय वर्ष घोषित किया है।
*-- सतत् विकास का।*
(4) विश्व पर्यावरण दिवस कौन सी तारीख को मनाया जाता है।
*-- 5 जून ।*
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(5) पर्यावरण का सन्तुलन बनाये रखने के लिए वनान्तर्गत क्षेत्रफल होना चाहिए।
*-- 33 प्रतिशत।*
(6) किसी क्षेत्र में पेड़ो के उगने के लिए अपेक्षित न्यूनतम तापमान है।
*-- 4 डिग्री सेल्सियस।*
(7) भारत में वन अनुसंस्थान कहॉ स्थित है।
*-- देहरादून ।*
(8) वनरोपण प्रक्रिया है।
*-- ज्यादा पेड़ लगाने की।*
(9) भारत में अधिकतम वनाच्छादन क्षेत्र कौन सा है।
*-- आरक्षित वन ।*
(10) हरा सोना किसे कहा जाता है।
*-- वन को।*
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(11) भारत में अधिकांश वन संपदा का मालिक कौन है।
*-- राज्य।*
(12) वन महोत्सव किससे संबंधित है।
*-- पेड़ लगाना।*
(13) सोपान कृषि कहॉ की जाती है।
*-- पहाड़ो के ढलान पर।*
(14) पर्यावरण अध्ययन की प्रकृति है।
*-- बहु अनुशासनिक।*
(15) हम चारो ओर जिन दशाओं से घिरे हुए है, उनका योग कहलाता है।
*-- पर्यावरण।*
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(16) वैश्विक पर्यावरण के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण वन है।
*-- उष्ण कटिबंधीय वन।*
(17) पर्यावरण उन बहारी दशाओं और प्रभावों का योग है जो पृथ्वी तल पर जीवों के विकास चक्र को प्रभावित करते है। यह कथन है।
*-- निकोलस ।*
(18) पर्यावरण एक बाह्य शक्ति है जो कि हमें प्रभावित करती है। यह कथन है।
*-- सी. सी. पार्क ।*
(19) विश्व में पर्यावरण जागरूकता की शुरूआत की थी।
*-- विलियम हैवेट ।*
(20) पर्यावरण का जैविक कारक है।
*-- वनस्पति।*
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🅰 Important Lakes in India 🅰
🔹डल झील :- जम्मू-कश्मीर
🔹वुलर झील :- जम्मू-कश्मीर
🔹बैरीनाग झील :- जम्मू-कश्मीर
🔹मानस बल झील :- जम्मू-कश्मीर
🔹नागिन झील :- जम्मू-कश्मीर
🔹शेषनाग झील :- जम्मू-कश्मीर
🔹अनंतनाग झील :- जम्मू-कश्मीर
🔹राजसमंद झील :- राजस्थान
🔹पिछौला झील :- राजस्थान
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🔹जयसमंद झील :- राजस्थान
🔹फतेहसागर झील :- राजस्थान
🔹डीडवाना झील :- राजस्थान
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🔹सातताल झील :- उत्तराखंड
🔹नैनीताल झील :- उत्तराखंड
🔹राकसताल झील :- उत्तराखंड
🔹मालाताल झील :- उत्तराखंड
🔹देवताल झील :- उत्तराखंड
🔹नौकुछियाताल झील :- उत्तराखंड
🔹खुरपताल झील :- उत्तराखंड
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🔹कोलेरू झील :- आंध्रप्रदेश
🔹बेम्बनाड झील :- केरल
🔹अष्टमुदी झील :- केरल
🔹पेरियार झील :- केरल
🔹लोनार झील :- महाराष्ट्र
🔹पुलीकट झील :- तमिलनाडु एवं आँध्रप्रदेश
🔹लोकटक झील :- मणिपुर
🔹चिल्का झील :- उड़ीसा
════════════════════
🇮🇳 भारतीय राजव्यवस्था POLITY MCQ 🇮🇳
1.संविधान की द्वितीय अनुसूची का संबंध किस से है?
1) नए राज्यो के निर्माण से
2) महत्वपूर्ण पद अधिकारियों के वेतन-भत्तों से
3) संसद से3
4) राष्ट्रपति चुनाव से
B✅
2.कौन-सी अनुसूची में 22 भाषाओं को मान्यता दी गई है?
1) सातवीं
2) छठी
3) आठवीं
4) पहली
C✅
3.दल-बदल के आधार पर निर्वाचित सदस्यों की अयोग्यता संबंधी विवरण किस अनुसूची में है?
1) दूसरी
2) तीसरी
3) नवीं
4) दसवीं
D✅
*4.संविधान की छठी अनुसूची किस राज्य में लागू नहीं होता है?*
1) मणिपुर
2) मिजोरम
3) नागालैंड
4) मेघालय
A और C ✅
*5.किस राज्य के आरक्षण विधेयक को 9वीं अनुसूची में सम्मिलिति किया गया है?*
1) राजस्थान
2) पंजाब
3) तमिलनाडु
4) महाराष्ट्र
C✅
6. भारतीय संविधान की कौन-सी अनुसूची राज्य में नामों की सूची तथा राज्य क्षेत्रों का ब्यौरा देती है?
1) तीसरी
2) पहली
3) चौथी
4) सातवीं
B✅
7. भारतीय संविधान में 9वीं अनुसूची परिवर्तित हुई?
1) द्वितीय संशोधन द्वारा
2) तृतीय संशोधन द्वारा
3) चतुर्थ संशोधन द्वारा
4) प्रथम संशोधन द्वारा
D✅
*8. किस अनुच्छेद के अंतर्गत उपराष्ट्रपति पद की व्यवस्था है?*
1) अनुच्छेद-61
2) अनुच्छेद-63
3) अनुच्छेद-65
4) अनुच्छेद-67
B✅
*9.वित्तीय आपात की घोषणा किस अनुच्छेद के अंतर्गत होती है?*
1) अनुच्छेद-352
2) अनुच्छेद-356
3) अनुच्छेद-360
4) अनुच्छेद-370
C✅
*10.राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग का गठन किस अनुच्छेद के अंतर्गत किया जाता है?*
1) अनुच्छेद-340
2) अनुच्छेद-341
3) अनुच्छेद-257
4) अनुच्छेद-340(क)
A✅
*11.किस अनुसूची में केंद्र व राज्यों के बीच शक्तियों के बंटवारे का वर्णन है?*
1) द्वितीय अनुसूची में
2) चौथी अनुसूची में
3) सातवीं अनुसूची में
4) आठवीं अनुसूची में
C✅
*12.समवर्ती सूची किस राज्य में संबंधित नहीं है?*
1) अरुणाचल प्रदेश से
2) त्रिपुरा से
3) बिहार से
4) जम्मू-कश्मीर से
D✅
*13.संविधान लागू होने के समय समवर्ती सूची में कितने विषय थे?*
1) 49 विषय
2) 47 विषय
3) 51 विषय
4) 54 विषय
B✅
*14.मूलतः राज्य सूची में कितने विषय हैं?*
1) 66 विषय
2) 67 विषय
3) 69 विषय
4) 71 विषय
A✅
*15.मूलतः संघ सूची में कितने विषय हैं?*
1) 99 विषय
2) 97 विषय
3) 101 विषय
4) 98 विषय
B✅
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➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖
1. गुप्त साम्राज्य का संस्थापक कौन था ?
- श्रीगुप्त
2. गुप्त साम्राज्य का उदय कब हुआ था ?
- तीसरी शताब्दी
3. गुप्त साम्राज्य की स्थापना कहाँ हुई थी ?
- कौशाम्बी में
4. श्रीगुप्त का शासन काल कब-से-कब तक रहा ?
- 240 ई० – 280 ई०
5. श्रीगुप्त का उत्तराधिकारी कौन बना ?
- घटोत्कच
6. घटोत्कच किसका पुत्र था ?
- श्रीगुप्त
7. घटोत्कच का शासन काल कब-से-कब तक रहा ?
- 280 ई० – 320 ई०
8. घटोत्कच का उत्तराधिकारी कौन बना ?
- चन्द्रगुप्त प्रथम
9. चन्द्रगुप्त प्रथम ने किससे शादी की ?
- कुमार देवी
10. कुमार देवी कहाँ की राजकुमारी थी ?
- लिच्छवी
11. चन्द्रगुप्त प्रथम किसकी उपाधि धारण की थी ?
- महाराजाधिराज
12. गुप्त सवंत् की शुरुआत किसने की थी ?
- चन्द्रगुप्त प्रथम
13. चन्द्रगुप्त प्रथम का उत्तराधिकारी कौन बना ?
- समुद्रगुप्त
14. समुद्रगुप्त किसका पुत्र था ?
- चन्द्रगुप्त प्रथम
15. समुद्रगुप्त राजगद्दी पर कब बैठा ?
- 335 ई०
16. समुद्रगुप्त ने आर्यावर्त के कितने शासकों को पराजित किया था ?
- 9
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17. दक्षिणावर्त के कितने शासको को समुद्रगुप्त ने पराजित किया था ?
- 12
18. भारतीय इतिहासकारों ने समुद्रगुप्त को किस नाम से संबोधित किया है ?
- भारत का नेपोलियन
19. समुद्रगुप्त के दरबारी कवी का नाम क्या था ?
- हरिषेण
20. हरिषेण ने किसकी रचना की थी ?
- इलाहाबाद प्रशस्ति लेख
21. अश्वमेधकर्ता की उपाधि धारण करने वाले राजा का नाम क्या है ?
- समुद्रगुप्त
22. समुद्रगुप्त ने अश्वमेधकर्ता की उपाधि कब धारण की थी ?
- 360 ई०
23. महाराजाधिराज और विक्रमांक की उपाधि धारण करने वाले शासक कौन है ?
- समुद्रगुप्त
24. कविराज के नाम से किस शासक को कहा जाता है ?
- समुद्रगुप्त
25. समुद्रगुप्त किस भगवान का उपासक था ?
- विष्णु
26. समुद्रगुप्त किस धर्म का उपासक था ?
- हिन्दू धर्म
27. समुद्रगुप्त के मृत्यु के पश्चात् मगध के सिहांसन पर कौन बैठा ?
- रामगुप्त
28. रामगुप्त किसका पुत्र था ?
- समुद्रगुप्त
29. गुप्त वंश का सबसे कमजोर शासक कौन हुआ ?
- रामगुप्त
30. रामगुप्त की हत्या किसने की ?
- चन्द्रगुप्त ll
31. चन्द्रगुप्त ll कौन था ?
- रामगुप्त का छोटा भाई
32. रामगुप्त के मृत्यु के बाद मगध के गद्दी पर कौन बैठा ?
- चन्द्रगुप्त ll
33. चन्द्रगुप्त ll ने मगध की गद्दी पर अपना अधिकार कब जमाया ?
- 380 ई०
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34. विक्रमादित्य के नाम से किस शासक को ख्याति मिली ?
- चन्द्रगुप्त ll
35. चन्द्रगुप्त के दरबार का महान कवि का नाम क्या था ?
- महाकवि कालिदास
36. चन्द्रगुप्त ll ने अपना पहला राजधानी कहाँ बनाया ?
- पाटलिपुत्र
37. चन्द्रगुप्त ll ने अपना दूसरी राजधानी कहाँ बनाया ?
- उज्जयिनी
38. चन्द्रगुप्त ll की महारानी का नाम क्या थी ?
- ध्रुवस्वामिनी
1) राजस्थान
2) पंजाब
3) तमिलनाडु
4) महाराष्ट्र
C✅
6. भारतीय संविधान की कौन-सी अनुसूची राज्य में नामों की सूची तथा राज्य क्षेत्रों का ब्यौरा देती है?
1) तीसरी
2) पहली
3) चौथी
4) सातवीं
B✅
7. भारतीय संविधान में 9वीं अनुसूची परिवर्तित हुई?
1) द्वितीय संशोधन द्वारा
2) तृतीय संशोधन द्वारा
3) चतुर्थ संशोधन द्वारा
4) प्रथम संशोधन द्वारा
D✅
*8. किस अनुच्छेद के अंतर्गत उपराष्ट्रपति पद की व्यवस्था है?*
1) अनुच्छेद-61
2) अनुच्छेद-63
3) अनुच्छेद-65
4) अनुच्छेद-67
B✅
*9.वित्तीय आपात की घोषणा किस अनुच्छेद के अंतर्गत होती है?*
1) अनुच्छेद-352
2) अनुच्छेद-356
3) अनुच्छेद-360
4) अनुच्छेद-370
C✅
*10.राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग का गठन किस अनुच्छेद के अंतर्गत किया जाता है?*
1) अनुच्छेद-340
2) अनुच्छेद-341
3) अनुच्छेद-257
4) अनुच्छेद-340(क)
A✅
*11.किस अनुसूची में केंद्र व राज्यों के बीच शक्तियों के बंटवारे का वर्णन है?*
1) द्वितीय अनुसूची में
2) चौथी अनुसूची में
3) सातवीं अनुसूची में
4) आठवीं अनुसूची में
C✅
*12.समवर्ती सूची किस राज्य में संबंधित नहीं है?*
1) अरुणाचल प्रदेश से
2) त्रिपुरा से
3) बिहार से
4) जम्मू-कश्मीर से
D✅
*13.संविधान लागू होने के समय समवर्ती सूची में कितने विषय थे?*
1) 49 विषय
2) 47 विषय
3) 51 विषय
4) 54 विषय
B✅
*14.मूलतः राज्य सूची में कितने विषय हैं?*
1) 66 विषय
2) 67 विषय
3) 69 विषय
4) 71 विषय
A✅
*15.मूलतः संघ सूची में कितने विषय हैं?*
1) 99 विषय
2) 97 विषय
3) 101 विषय
4) 98 विषय
B✅
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1. गुप्त साम्राज्य का संस्थापक कौन था ?
- श्रीगुप्त
2. गुप्त साम्राज्य का उदय कब हुआ था ?
- तीसरी शताब्दी
3. गुप्त साम्राज्य की स्थापना कहाँ हुई थी ?
- कौशाम्बी में
4. श्रीगुप्त का शासन काल कब-से-कब तक रहा ?
- 240 ई० – 280 ई०
5. श्रीगुप्त का उत्तराधिकारी कौन बना ?
- घटोत्कच
6. घटोत्कच किसका पुत्र था ?
- श्रीगुप्त
7. घटोत्कच का शासन काल कब-से-कब तक रहा ?
- 280 ई० – 320 ई०
8. घटोत्कच का उत्तराधिकारी कौन बना ?
- चन्द्रगुप्त प्रथम
9. चन्द्रगुप्त प्रथम ने किससे शादी की ?
- कुमार देवी
10. कुमार देवी कहाँ की राजकुमारी थी ?
- लिच्छवी
11. चन्द्रगुप्त प्रथम किसकी उपाधि धारण की थी ?
- महाराजाधिराज
12. गुप्त सवंत् की शुरुआत किसने की थी ?
- चन्द्रगुप्त प्रथम
13. चन्द्रगुप्त प्रथम का उत्तराधिकारी कौन बना ?
- समुद्रगुप्त
14. समुद्रगुप्त किसका पुत्र था ?
- चन्द्रगुप्त प्रथम
15. समुद्रगुप्त राजगद्दी पर कब बैठा ?
- 335 ई०
16. समुद्रगुप्त ने आर्यावर्त के कितने शासकों को पराजित किया था ?
- 9
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17. दक्षिणावर्त के कितने शासको को समुद्रगुप्त ने पराजित किया था ?
- 12
18. भारतीय इतिहासकारों ने समुद्रगुप्त को किस नाम से संबोधित किया है ?
- भारत का नेपोलियन
19. समुद्रगुप्त के दरबारी कवी का नाम क्या था ?
- हरिषेण
20. हरिषेण ने किसकी रचना की थी ?
- इलाहाबाद प्रशस्ति लेख
21. अश्वमेधकर्ता की उपाधि धारण करने वाले राजा का नाम क्या है ?
- समुद्रगुप्त
22. समुद्रगुप्त ने अश्वमेधकर्ता की उपाधि कब धारण की थी ?
- 360 ई०
23. महाराजाधिराज और विक्रमांक की उपाधि धारण करने वाले शासक कौन है ?
- समुद्रगुप्त
24. कविराज के नाम से किस शासक को कहा जाता है ?
- समुद्रगुप्त
25. समुद्रगुप्त किस भगवान का उपासक था ?
- विष्णु
26. समुद्रगुप्त किस धर्म का उपासक था ?
- हिन्दू धर्म
27. समुद्रगुप्त के मृत्यु के पश्चात् मगध के सिहांसन पर कौन बैठा ?
- रामगुप्त
28. रामगुप्त किसका पुत्र था ?
- समुद्रगुप्त
29. गुप्त वंश का सबसे कमजोर शासक कौन हुआ ?
- रामगुप्त
30. रामगुप्त की हत्या किसने की ?
- चन्द्रगुप्त ll
31. चन्द्रगुप्त ll कौन था ?
- रामगुप्त का छोटा भाई
32. रामगुप्त के मृत्यु के बाद मगध के गद्दी पर कौन बैठा ?
- चन्द्रगुप्त ll
33. चन्द्रगुप्त ll ने मगध की गद्दी पर अपना अधिकार कब जमाया ?
- 380 ई०
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34. विक्रमादित्य के नाम से किस शासक को ख्याति मिली ?
- चन्द्रगुप्त ll
35. चन्द्रगुप्त के दरबार का महान कवि का नाम क्या था ?
- महाकवि कालिदास
36. चन्द्रगुप्त ll ने अपना पहला राजधानी कहाँ बनाया ?
- पाटलिपुत्र
37. चन्द्रगुप्त ll ने अपना दूसरी राजधानी कहाँ बनाया ?
- उज्जयिनी
38. चन्द्रगुप्त ll की महारानी का नाम क्या थी ?
- ध्रुवस्वामिनी
39. चन्द्रगुप्त ll का उत्तराधिकारी कौन बना ?
- कुमारगुप्त प्रथम
40. कुमारगुप्त प्रथम का अन्य दूसरा नाम क्या था ?
- महेन्द्रादित्य
41. नालंदा विश्वविधालय की स्थापना किसने की थी ?
- कुमारगुप्त
42. कुमारगुप्त का शासन किस लिए प्रसिद्ध था ?
- शांति और समृधि
43. कुमारगुप्त का उत्तराधिकारी कौन था ?
- स्कंधगुप्त
44. स्कंधगुप्त का शासन काल कब-से-कब तक रहा ?
- 455 ई० – 467 ई०
45. स्कंधगुप्त ने सौराष्ट्र का गर्वनर किसे बनाया ?
- पर्णदत
46. गुप्त वंश का अंतिम शासक कौन था ?
- भानुगुप्त
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47. गुप्त काल में ग्राम प्रशासन सबसे ........... इकाई थी l
- छोटी
48. गुप्त काल में ग्राम सभा के मुखिया को क्या कहा जाता था ?
- ग्रामिक
49. ग्राम सभा के अन्य सदस्यों को क्या कहा जाता था ?
- महत्तर
50. ग्राम समूहों की छोटी इकाई क्या कहलाती थी ?
- पेठ
▰▱▰▱▰▱▰▱▰▱▰▱▰▱▰▱
❇️ भारतीय आंतरराष्ट्रीय बंदरगाह
🔹बंदरगाह - राज्य
1) कांडला - गुजरात
2) मुंबई - महाराष्ट्र
3) न्हाव्हाशेवा - महाराष्ट्र
4) मार्मागोवा - गोवा
5) कोचीन - केरळ
6) तुतीकोरीन - तमिळनाडू
7) चेन्नई - तामीळनाडू
8) विशाखापट्टणम - आंध्रप्रदेश
9) पॅरादीप - ओडिसा
10)न्यू मंगलोर - कर्नाटक
11) एन्नोर - आंध्रप्रदेश
12) कोलकत्ता - पश्चिम बंगाल
13) हल्दिया - पश्चिम बंगाल
❇️ Indian International Ports { English }
🔹Harbour - State
1) Kandla - Gujarat
2) Mumbai - Maharashtra
3) Nhavasheva - Maharashtra
4) Marmagova - Goa
5) Cochin - Kerala
6) Tuticorin - Tamil Nadu
7) Chennai - Tamil Nadu
8) Visakhapatnam - Andhra Pradesh
9) Paradip - Odisha
10) New Mangalore - Karnataka
11) Ennore - Andhra Pradesh
12) Kolkata - West Bengal
13) Haldia - West Bengal
● खजुराहों के मंदिर कहाँ स्थित हैं— मध्य प्रदेश
● बड़ा इमामबाड़ा कहाँ स्थित है— लखनऊ
● बीजागणित के क्षेत्र में अपने विशेष योगदान के लिए किसे जाना जाता है — भास्कर
● किस वृहत मंदिर की आरंभिक कल्पना तथा निर्माण सूर्यवर्मन द्वितीय के राज्य काल में हुआ— अंकोरवाट का मंदिर
● अमरावती बौद्ध स्तूप कहाँ है— आंध्र प्रदेश में
● सलहर के युद्ध में मुगल सेना को किसने हराया— शिवाजी ने
● सलहर का युद्ध कब हुआ था— 1672 ई.
● भारत का अंतिम मुगल सम्राट बहादुरशाह जफर (द्वितीय) का मकबरा कहाँ स्थित है— रंगून (यंगून), म्यांमार में
● अहमद शाह अब्दाली ने भारत पर कितनी बार आक्रमण किए— 8 बार
● नादिरशाह ने भारत पर आक्रमण कब किया— 1739 ई.
● शिवाजी के समय कितना राजस्व वसूला जाता था— भू-राजस्व का 33%
● ‘आगरा की जामा मस्जिद’ का निर्माण किसने कराया— जहाँआरा ने
● किस सिख गुरु ने फारसी भाषा में जफरनामा लिखा— गुरु गोविंद सिंह
● गुरु नानक का जीवन परिचय किस सिख गुरु ने लिखा— गुरु अर्जुन देव ने
● औरंगजेब के शासन काल में बंगाल का नबाब कौन था— मुर्शीद कुली खाँ
● शिवाजी की मृत्यु कब हुई— 12 अप्रैल, 1680 में
● औरंगजेब ने ‘बीबी का मकबरा’ का निर्माण कब कराया— 1679 में
● सामूगढ़ का युद्ध कब हुआ— 1658 में
● हैदरअली मैसूर के शासक कब बने— 1761
● नादिरशाह कहाँ का शासक था— ईरान का
● माधवराव नारायण पेशवा कब बने— 1761 में
● गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की नींव कब डाली— 1699 ई. में
● किस गुरु ने विद्रोही मुगल राजकुमार की सहायता धन व मन से की थी— गुरु अर्जुन देव
● सैय्यद बंधुओं का पतन किसके समय में हुआ— मुहम्मद शाह
● फर्रुखसियर किसके सहयोग से मुगल बादशाह बना— सैय्यद बंधु
● भारत पर आक्रमण करने वाले किस ईरानी शासक को ‘ईरान का नेपोलियन’ कहा जाता है— नादिर शाह को
● किस राज्य के शासक ‘नवाब वजीर’ कहलाते थे— अवध के शासक
● ‘आदिग्रंथ’ का समायोजन किसने किया— गुरु अर्जुन देव ने
● मोती मुख्य रूप से किस पदार्थ का बना होता है? --- कैल्सियम कार्बोनेट
● मानव शरीर में सबसे अधिक मात्रा में कौन-सा तत्व पाया जाता है? --- ऑक्सीजन
● किस प्रकार के ऊतक शरीर के सुरक्षा कवच का कार्य करते हैं? --- एपिथीलियम ऊतक
● किस वैज्ञानिक ने सर्वप्रथम बर्फ़ के दो टुकड़ों को आपस में घिसकर पिघला दिया? --- डेवी
● सबसे अधिक तीव्रता की ध्वनि कौन उत्पन्न करता है? --- बाघ
● सूर्य ग्रहण के समय सूर्य का कौन-सा भाग दिखाई देता है? --- किरीट
● 'टाइपराइटर' (टंकण मशीन) के आविष्कारक कौन हैं? --- शोल्स
● सिरका को लैटिन भाषा में क्या कहा जाता है। --- ऐसीटम
● कपड़ों से जंग के धब्बे हटाने के लिये प्रयोग किया जाता है --- -ऑक्ज़ैलिक अम्ल
- कुमारगुप्त प्रथम
40. कुमारगुप्त प्रथम का अन्य दूसरा नाम क्या था ?
- महेन्द्रादित्य
41. नालंदा विश्वविधालय की स्थापना किसने की थी ?
- कुमारगुप्त
42. कुमारगुप्त का शासन किस लिए प्रसिद्ध था ?
- शांति और समृधि
43. कुमारगुप्त का उत्तराधिकारी कौन था ?
- स्कंधगुप्त
44. स्कंधगुप्त का शासन काल कब-से-कब तक रहा ?
- 455 ई० – 467 ई०
45. स्कंधगुप्त ने सौराष्ट्र का गर्वनर किसे बनाया ?
- पर्णदत
46. गुप्त वंश का अंतिम शासक कौन था ?
- भानुगुप्त
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47. गुप्त काल में ग्राम प्रशासन सबसे ........... इकाई थी l
- छोटी
48. गुप्त काल में ग्राम सभा के मुखिया को क्या कहा जाता था ?
- ग्रामिक
49. ग्राम सभा के अन्य सदस्यों को क्या कहा जाता था ?
- महत्तर
50. ग्राम समूहों की छोटी इकाई क्या कहलाती थी ?
- पेठ
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❇️ भारतीय आंतरराष्ट्रीय बंदरगाह
🔹बंदरगाह - राज्य
1) कांडला - गुजरात
2) मुंबई - महाराष्ट्र
3) न्हाव्हाशेवा - महाराष्ट्र
4) मार्मागोवा - गोवा
5) कोचीन - केरळ
6) तुतीकोरीन - तमिळनाडू
7) चेन्नई - तामीळनाडू
8) विशाखापट्टणम - आंध्रप्रदेश
9) पॅरादीप - ओडिसा
10)न्यू मंगलोर - कर्नाटक
11) एन्नोर - आंध्रप्रदेश
12) कोलकत्ता - पश्चिम बंगाल
13) हल्दिया - पश्चिम बंगाल
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🔹Harbour - State
1) Kandla - Gujarat
2) Mumbai - Maharashtra
3) Nhavasheva - Maharashtra
4) Marmagova - Goa
5) Cochin - Kerala
6) Tuticorin - Tamil Nadu
7) Chennai - Tamil Nadu
8) Visakhapatnam - Andhra Pradesh
9) Paradip - Odisha
10) New Mangalore - Karnataka
11) Ennore - Andhra Pradesh
12) Kolkata - West Bengal
13) Haldia - West Bengal
● खजुराहों के मंदिर कहाँ स्थित हैं— मध्य प्रदेश
● बड़ा इमामबाड़ा कहाँ स्थित है— लखनऊ
● बीजागणित के क्षेत्र में अपने विशेष योगदान के लिए किसे जाना जाता है — भास्कर
● किस वृहत मंदिर की आरंभिक कल्पना तथा निर्माण सूर्यवर्मन द्वितीय के राज्य काल में हुआ— अंकोरवाट का मंदिर
● अमरावती बौद्ध स्तूप कहाँ है— आंध्र प्रदेश में
● सलहर के युद्ध में मुगल सेना को किसने हराया— शिवाजी ने
● सलहर का युद्ध कब हुआ था— 1672 ई.
● भारत का अंतिम मुगल सम्राट बहादुरशाह जफर (द्वितीय) का मकबरा कहाँ स्थित है— रंगून (यंगून), म्यांमार में
● अहमद शाह अब्दाली ने भारत पर कितनी बार आक्रमण किए— 8 बार
● नादिरशाह ने भारत पर आक्रमण कब किया— 1739 ई.
● शिवाजी के समय कितना राजस्व वसूला जाता था— भू-राजस्व का 33%
● ‘आगरा की जामा मस्जिद’ का निर्माण किसने कराया— जहाँआरा ने
● किस सिख गुरु ने फारसी भाषा में जफरनामा लिखा— गुरु गोविंद सिंह
● गुरु नानक का जीवन परिचय किस सिख गुरु ने लिखा— गुरु अर्जुन देव ने
● औरंगजेब के शासन काल में बंगाल का नबाब कौन था— मुर्शीद कुली खाँ
● शिवाजी की मृत्यु कब हुई— 12 अप्रैल, 1680 में
● औरंगजेब ने ‘बीबी का मकबरा’ का निर्माण कब कराया— 1679 में
● सामूगढ़ का युद्ध कब हुआ— 1658 में
● हैदरअली मैसूर के शासक कब बने— 1761
● नादिरशाह कहाँ का शासक था— ईरान का
● माधवराव नारायण पेशवा कब बने— 1761 में
● गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की नींव कब डाली— 1699 ई. में
● किस गुरु ने विद्रोही मुगल राजकुमार की सहायता धन व मन से की थी— गुरु अर्जुन देव
● सैय्यद बंधुओं का पतन किसके समय में हुआ— मुहम्मद शाह
● फर्रुखसियर किसके सहयोग से मुगल बादशाह बना— सैय्यद बंधु
● भारत पर आक्रमण करने वाले किस ईरानी शासक को ‘ईरान का नेपोलियन’ कहा जाता है— नादिर शाह को
● किस राज्य के शासक ‘नवाब वजीर’ कहलाते थे— अवध के शासक
● ‘आदिग्रंथ’ का समायोजन किसने किया— गुरु अर्जुन देव ने
● मोती मुख्य रूप से किस पदार्थ का बना होता है? --- कैल्सियम कार्बोनेट
● मानव शरीर में सबसे अधिक मात्रा में कौन-सा तत्व पाया जाता है? --- ऑक्सीजन
● किस प्रकार के ऊतक शरीर के सुरक्षा कवच का कार्य करते हैं? --- एपिथीलियम ऊतक
● किस वैज्ञानिक ने सर्वप्रथम बर्फ़ के दो टुकड़ों को आपस में घिसकर पिघला दिया? --- डेवी
● सबसे अधिक तीव्रता की ध्वनि कौन उत्पन्न करता है? --- बाघ
● सूर्य ग्रहण के समय सूर्य का कौन-सा भाग दिखाई देता है? --- किरीट
● 'टाइपराइटर' (टंकण मशीन) के आविष्कारक कौन हैं? --- शोल्स
● सिरका को लैटिन भाषा में क्या कहा जाता है। --- ऐसीटम
● कपड़ों से जंग के धब्बे हटाने के लिये प्रयोग किया जाता है --- -ऑक्ज़ैलिक अम्ल
● गन्ने में 'लाल सड़न रोग' किसके कारण उत्पन्न होता है? --- कवकों द्वारा
● आम का वानस्पतिक नाम क्या है? --- मेंगीफ़ेरा इण्डिका
● कॉफी पाउडर के साथ मिलाया जाने वाला 'चिकोरी चूर्ण' प्राप्त होता है --- - जड़ों से
● ● सुर्योदय का देश कहा जाता है ??- जापान
● बाग्लादेश की राजधानी है ?- ढाका
● रिक्शा सबसे पहले किस देश मेँ चली थी ??- जापान
● वानखेड़ स्टेडिअम कहा स्थित है ?- मुंबई
● कर्नाटक का रत्न कहा जाता है ? मैसुर
● वह कौनसा प्रथम सुल्तान था जिसने इक्ता के बदले सिपाहियों को वेतन देना प्रारंभ किया - अलाउद्दीन खिलजी
● जैन धर्म तथा बौद्ध धर्म दोनों ही विश्वास करते हैं कि- कर्म तथा पुनर्जन्म के सिद्धांत सही हैं
● छत्रपति शिवाजी का राज्याभिषक करने वाला पण्डित गंगाभट्ट कहां का निवासी था ?- बनारस
● लाल कुवंर नाम की वेश्या किस मुगल शासक के राजकाज में अति प्रभावशील थी?- बहादुरशाह प्रथम
● किस सिख गुरु पर खुसरो को जहांगीर के विरुद्ध विद्रोह में सहायता करने का आरोप लगाया गया था ?- गुरु अर्जुनदेव
● पतंजलि द्वारा लिखा गया " महाभाष्य " निम्नलिखित में से किस पुस्तक पर लिखी गई टीका हैं ?- अष्टाध्यायी
● दादा साहब फाल्के पुरस्कार किस मंत्रालय की और से दिया जाता हैं ?- सूचना और प्रसारण मंत्रालय
● समुद्र के जल में लवण की औसत मात्रा क्या
होती है ? -- 3.5%
● ब्लड ग्रुप की खोज किसने की ? -- लैड स्टेंनर
● कैन्सर के उपचार के लिए प्रयुक्त उत्क्रुस्ट गैस कौन सी है ? -- रैड्न गैस
● कोयले की खदानो में विस्फोट करने वाली गैस
प्रायः कौन सी होती है ? -- मिथेन
● मोटर कार के धुए से मानसिक रोग पैदा करने
वाला प्रदुशक का नाम क्या है ? -- सिसा
● किस बीमरी में रक्त में सर्करा का स्थर बढ़
जाता है ? -- डाईवेटीज मेलिट्स
● विकासशील देशों में कितने % भाग पर कृषि की जाती है— 60%
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🌺STATES AND ITS LAKES🌺
🌸Adal Lake: - Jammu and Kashmir
🌸Avular Lake: - Jammu and Kashmir
🌸Barinag Lake: - Jammu and Kashmir
🌸Manas Bal Lake: - Jammu and Kashmir
🌸Anagin Lake: - Jammu and Kashmir
🌸Sheshnag Lake: - Jammu and Kashmir
🌸Anantnag Lake: - Jammu and Kashmir
🌸Rajsamand Lake: - Rajasthan
🌸Pichhula Lake: - Rajasthan
🌸Sambhar lake: - Rajasthan
🌸Ajayasamand Lake: - Rajasthan
🌸Fatehsagar Lake: - Rajasthan
🌸Adwana Lake: - Rajasthan
🌸Alunkaranasar Lake: - Rajasthan
🌸Satatal Lake: - Uttarakhand
🌸Nainital Lake: - Uttarakhand
🌸Arakasatal Lake: - Uttarakhand
🌸Amalatal Lake: - Uttarakhand
🌸Deodatal Lake: - Uttarakhand
🌸Anoukiyatal Lake: - Uttarakhand
🌸khurpatal lake: - Uttarakhand
🌸Hussainasagar Lake: - Andhra Pradesh
🌸Koleru Lake: - Andhra Pradesh
🌸Bembanad Lake: - Kerala
🌸Ashtamudi Lake: - Kerala
🌸Aperiyar Lake: - Kerala
🌸Alonar Lake: - Maharashtra
🌸Pulicat Lake: - Tamil Nadu and A.P
🌸Loktak Lake: - Manipur
🌸Chilka Lake: - Odisha
🤺🤺मानव शरीर के बारे में तथ्य
(Facts about Human Body)🤺🤺
🤸♂️🤸♂️🤸♂️🤸♂️🤸♂️🤸♂️🤸♂️🤸♂️🤸♂️🤸♂️🤸♂️🤸♂️
🧘♀️हमारी आँखे जन्म से लेकर सदा एकसार रहती है जबकि हमारे कान और नाक कभी बढ़ना नही रूकते।
🧘♀️ आप की कुहनी के निचले भाग से हाथ की कलाई तक के भाग जितनी लंबाई ही आपके पेर की ऐ़डी और घुटने की के बीच की लंबाई के बराबर होती है। । ऐसे ही आपके अंगुठे की लंबाई आपकी नाक की लंबाई जितनी होती है और आुरे होठों की लंम्बाई आपकी पहली ऊगली जितनी होती है।
🧘♀️ जीभ एकलौती मासपेशी है जो कि सिर्फ एक सिरे से जुडी होती है।
🧘♀️ मनुष्य के थूक का उबाल दर्जा पानी से तीन गुना होता है।
🧘♀️ शारीरक तौर पर एक ही समय पर पेशाब करना और खून देना असंभव है।
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🧘♀️ मनुष्य का बायां फेफडा, दाएँ फेफडे से छोटा होता है क्योकि उसने दिल को जगा देनी होती है।
🧘♀️ आपके हाथ की हथेली और पैर का हथेली पर कभी भी बाल नही आ सकते।
🧘♀️ जिन लोगो कि शरीर पर तिलों की संख्या ज्यादा होती है वह औसतन कम तिल वाले लोगो से ज्यादा जीते हैं।
🧘♀️ अपने muscles के बारे में सोचना आपको ताकतवर बनाता है।
🧘♀️ दुनिया के सबसे कम उम्र के मां-बाप 8 और 9 साल के थे और 1910 में चीन में रहते थे।
🧘♀️ संसार में जितने भी मनुष्य जी चुके हैं उन में से 10% वर्तमान समय में जिन्दा हैं ।
🧘♀️ आपके सिर में 22 हड्डिया होती है।
🧘♀️ टैलीविजन देखते समय आप सोने से ज्यादा कैलोरी खप्त करते है।
🧘♀️ जिस मानव का वजन 70 किलो होता है उसमें 0.2 मिलीग्राम तक सोना होता है।
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🧘♀️ अगर आप बिना होठ और जीभ हिलाऐ कोई भी अक्षर बोलने की कोशिश करें तो हर एक का उचारण एक जैसा ही होगा।
🧘♀️ दुनिया में हर 40 सैकेंड में एक आत्महत्या होती है।
● आम का वानस्पतिक नाम क्या है? --- मेंगीफ़ेरा इण्डिका
● कॉफी पाउडर के साथ मिलाया जाने वाला 'चिकोरी चूर्ण' प्राप्त होता है --- - जड़ों से
● ● सुर्योदय का देश कहा जाता है ??- जापान
● बाग्लादेश की राजधानी है ?- ढाका
● रिक्शा सबसे पहले किस देश मेँ चली थी ??- जापान
● वानखेड़ स्टेडिअम कहा स्थित है ?- मुंबई
● कर्नाटक का रत्न कहा जाता है ? मैसुर
● वह कौनसा प्रथम सुल्तान था जिसने इक्ता के बदले सिपाहियों को वेतन देना प्रारंभ किया - अलाउद्दीन खिलजी
● जैन धर्म तथा बौद्ध धर्म दोनों ही विश्वास करते हैं कि- कर्म तथा पुनर्जन्म के सिद्धांत सही हैं
● छत्रपति शिवाजी का राज्याभिषक करने वाला पण्डित गंगाभट्ट कहां का निवासी था ?- बनारस
● लाल कुवंर नाम की वेश्या किस मुगल शासक के राजकाज में अति प्रभावशील थी?- बहादुरशाह प्रथम
● किस सिख गुरु पर खुसरो को जहांगीर के विरुद्ध विद्रोह में सहायता करने का आरोप लगाया गया था ?- गुरु अर्जुनदेव
● पतंजलि द्वारा लिखा गया " महाभाष्य " निम्नलिखित में से किस पुस्तक पर लिखी गई टीका हैं ?- अष्टाध्यायी
● दादा साहब फाल्के पुरस्कार किस मंत्रालय की और से दिया जाता हैं ?- सूचना और प्रसारण मंत्रालय
● समुद्र के जल में लवण की औसत मात्रा क्या
होती है ? -- 3.5%
● ब्लड ग्रुप की खोज किसने की ? -- लैड स्टेंनर
● कैन्सर के उपचार के लिए प्रयुक्त उत्क्रुस्ट गैस कौन सी है ? -- रैड्न गैस
● कोयले की खदानो में विस्फोट करने वाली गैस
प्रायः कौन सी होती है ? -- मिथेन
● मोटर कार के धुए से मानसिक रोग पैदा करने
वाला प्रदुशक का नाम क्या है ? -- सिसा
● किस बीमरी में रक्त में सर्करा का स्थर बढ़
जाता है ? -- डाईवेटीज मेलिट्स
● विकासशील देशों में कितने % भाग पर कृषि की जाती है— 60%
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🌸Adal Lake: - Jammu and Kashmir
🌸Avular Lake: - Jammu and Kashmir
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🌸Sheshnag Lake: - Jammu and Kashmir
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🌸Rajsamand Lake: - Rajasthan
🌸Pichhula Lake: - Rajasthan
🌸Sambhar lake: - Rajasthan
🌸Ajayasamand Lake: - Rajasthan
🌸Fatehsagar Lake: - Rajasthan
🌸Adwana Lake: - Rajasthan
🌸Alunkaranasar Lake: - Rajasthan
🌸Satatal Lake: - Uttarakhand
🌸Nainital Lake: - Uttarakhand
🌸Arakasatal Lake: - Uttarakhand
🌸Amalatal Lake: - Uttarakhand
🌸Deodatal Lake: - Uttarakhand
🌸Anoukiyatal Lake: - Uttarakhand
🌸khurpatal lake: - Uttarakhand
🌸Hussainasagar Lake: - Andhra Pradesh
🌸Koleru Lake: - Andhra Pradesh
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🌸Ashtamudi Lake: - Kerala
🌸Aperiyar Lake: - Kerala
🌸Alonar Lake: - Maharashtra
🌸Pulicat Lake: - Tamil Nadu and A.P
🌸Loktak Lake: - Manipur
🌸Chilka Lake: - Odisha
🤺🤺मानव शरीर के बारे में तथ्य
(Facts about Human Body)🤺🤺
🤸♂️🤸♂️🤸♂️🤸♂️🤸♂️🤸♂️🤸♂️🤸♂️🤸♂️🤸♂️🤸♂️🤸♂️
🧘♀️हमारी आँखे जन्म से लेकर सदा एकसार रहती है जबकि हमारे कान और नाक कभी बढ़ना नही रूकते।
🧘♀️ आप की कुहनी के निचले भाग से हाथ की कलाई तक के भाग जितनी लंबाई ही आपके पेर की ऐ़डी और घुटने की के बीच की लंबाई के बराबर होती है। । ऐसे ही आपके अंगुठे की लंबाई आपकी नाक की लंबाई जितनी होती है और आुरे होठों की लंम्बाई आपकी पहली ऊगली जितनी होती है।
🧘♀️ जीभ एकलौती मासपेशी है जो कि सिर्फ एक सिरे से जुडी होती है।
🧘♀️ मनुष्य के थूक का उबाल दर्जा पानी से तीन गुना होता है।
🧘♀️ शारीरक तौर पर एक ही समय पर पेशाब करना और खून देना असंभव है।
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🧘♀️ मनुष्य का बायां फेफडा, दाएँ फेफडे से छोटा होता है क्योकि उसने दिल को जगा देनी होती है।
🧘♀️ आपके हाथ की हथेली और पैर का हथेली पर कभी भी बाल नही आ सकते।
🧘♀️ जिन लोगो कि शरीर पर तिलों की संख्या ज्यादा होती है वह औसतन कम तिल वाले लोगो से ज्यादा जीते हैं।
🧘♀️ अपने muscles के बारे में सोचना आपको ताकतवर बनाता है।
🧘♀️ दुनिया के सबसे कम उम्र के मां-बाप 8 और 9 साल के थे और 1910 में चीन में रहते थे।
🧘♀️ संसार में जितने भी मनुष्य जी चुके हैं उन में से 10% वर्तमान समय में जिन्दा हैं ।
🧘♀️ आपके सिर में 22 हड्डिया होती है।
🧘♀️ टैलीविजन देखते समय आप सोने से ज्यादा कैलोरी खप्त करते है।
🧘♀️ जिस मानव का वजन 70 किलो होता है उसमें 0.2 मिलीग्राम तक सोना होता है।
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🧘♀️ अगर आप बिना होठ और जीभ हिलाऐ कोई भी अक्षर बोलने की कोशिश करें तो हर एक का उचारण एक जैसा ही होगा।
🧘♀️ दुनिया में हर 40 सैकेंड में एक आत्महत्या होती है।
🧘♀️ एक मिनट में 1 करोड़ सिगरेट पी ली जाती है।
🧘♀️ एक मिनट में दुनिया में सात लोग धुम्रपान की वजह से मारे जाते है।
🧘♀️ जो आदमी सिगरेट छोड़ना चाहते है वह रात को लगभग एक घंटा कम सोते है।
🧘♀️ बुद्धीमान लोगों के बालों में जिंक और ताबें की मात्रा ज्यादा होती है।
🧘♀️ आप की middle finger(बड़ी ऊगली) का नाखून बाकी सभी नाखुनों से ज्यादा तेजी से बढ़ता है।
देश की प्रमुख उत्पादन क्रान्तियां 🌿 सम्पूर्ण क्रांतियाँ 🌲
🌿हरित क्रांति –खाद्यान्न उत्पादन
🐄श्वेत क्रांति – दुग्ध उत्पादन
🐬नीली क्रांति – मत्स्य उत्पादन
🐌भूरी क्रांति – उर्वरक उत्पादन
🥚रजत क्रांति – अंडा उत्पादन
🍯पीली क्रांति – तिलहन उत्पादन
🛢कृष्ण क्रांति – बायोडीजल उत्पादन
🍅लाल क्रांति – टमाटर/मांस उत्पादन
🦐गुलाबी क्रांति – झींगा मछली उत्पादन
🍛बादामी क्रांति – मासाला उत्पादन
🍋सुनहरी क्रांति – फल उत्पादन
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प्रश्न 1: भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन किस वर्ष किया गया?
उत्तर- 1952 ई0
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प्रश्न 2: बिना बुझे चूने का रासायनिक नाम क्या है?
उत्तर- कैल्शियम ऑक्साइड
प्रश्न 3: भारत में रेपो दर कौन निर्धारित करता है?
उत्तर- भारतीय रिजर्व बैंक
प्रश्न 4: किसका प्रयोग पौधों में खाद्यान्न का भंडार यानी स्टार्च तैयार करने के लिए मुख्यतः उपयोग किया जाता है?
उत्तर- कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन
प्रश्न 5: दक्षिण ध्रुव यानी साउथ पोल तक पहुंचने वाला प्रथम व्यक्ति कौन था?
उत्तर- एमण्ड्सेन
प्रश्न 6: अभी तक ज्ञात विश्व का सबसे बड़ा तेल भंडार रिजर्व कहां है?
उत्तर- सऊदी अरब
प्रश्न 7: महाभारत का प्रारंभिक नाम क्या है?
उत्तर- जय संहिता
प्रश्न 8: एंग्लो -मोहम्मद ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना के लिए कौन उत्तरदाई था?
उत्तर- सर सैयद अहमद खान
प्रश्न 9: कौन सा शिलालेख प्रयाग प्रशस्ति के नाम से जाना जाता है?
उत्तर- इलाहाबाद स्तंभ शिलालेख
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प्रश्न 10: “नेमसेक” पुस्तक के रचयिता कौन है?
उत्तर झुम्पा लहड़ी
प्रश्न 11: जब किसी बॉडी का वेग दुगुना कर दिया जाता है तो उसके संवेग पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर संवेग दोगुना हो जाता है
प्रश्न 12: कौन सा संविधान संशोधन के पश्चात बोड़ो और डोगरी भाषाएं आठवीं अनुसूची में शामिल की गई?
उत्तर है 92वा संशोधन
प्रश्न 13: पॉलिटिक्स यानी राजनीति शब्द का सबसे पहले किसके द्वारा प्रयोग किया गया था?
उत्तर- अरस्तू
प्रश्न 14: कौन सी रक्त वाहिकाएं साफ रक्त फेफड़ो से हृदय मे ले जाती हैं?
उत्तर- फुफ्फुस शिरा
प्रश्न 15: कंप्यूटर की स्पीड को मापने के लिए कौन सी यूनिट प्रयोग में लाई जाती है?
उत्तर- m i p s
प्रश्न 16: विश्व के किस देश में चाय की सर्वाधिक सबसे अधिक पैदावार होती है?
उत्तर- भारत
प्रश्न 17: काला ज्वार का संचार किस से होता है?
उत्तर- सिकता मक्खी से
प्रश्न 18: कोई हवाई जहाज एक समान रफ्तार से क्षैतिज उड़ान भर रहा है, और उसमें से एक बैग नीचे फेंका जाता है। वायु के प्रतिरोध को नजरअंदाज करते हुए जब बैग भूमि पर गिरेगा तब हवाई जहाज कहां होगा?
उत्तर- बैग से आगे
प्रश्न 19: एक अंतरराष्ट्रीय आंदोलन जिसका उद्देश्य पर्यावरण की समस्या से संबंध होकर विश्व को बचाना है?
उत्तर- ग्रीनपीस
प्रश्न 20: बरनौली का सिद्धांत किसके संरक्षण का प्रकथन है?
उत्तर- रेखिक संवेग
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❇️ जीव विज्ञान की कुछ महत्वपूर्ण शाखाएँ 📕
▪️ एपीकल्चर (Apiculture) - मधुमक्खी पालन का अध्ययन
▪️ सेरीकल्वर (Sericulture) - रेशम कीट पालन का अध्ययन
▪️ पीसीकल्चर (Pisciculture) - मत्स्य पालन का अध्ययन
▪️ माइकोलॉजी (Mycology) - कवकों का अध्ययन
▪️ फाइकोलॉजी (Phycology) - शैवालों का अध्ययन
▪️ पोमोलॉजी (Pomology) - फलों का अध्ययन
▪️ ऑर्निथोलॉजी (Ornithology) - पक्षियों का अध्ययन
▪️ इक्थ्योलॉजी (Ichthyology) - मछलियों का अध्ययन
▪️ एण्टोमोलॉजी (Entomology) - कीटों का अध्ययन
▪️ डेन्ड्रोलॉजी (Dendrology) - वृक्षों एवं झाड़ियों का अध्ययन
▪️ ओफियोलॉजी (Ophiology) - सर्पों (snakes) का अध्ययन
▪️ सॉरोलॉजी (Saurology) - छिपकलियों का अध्ययन
▪️ सिल्विकल्चर (Silviculture) - काष्ठी पेड़ों का संवर्धन (जंगल विज्ञान)
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
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प्रश्न – भारतीय संविधान के अनुसार कौन युद्ध की घोषणा करने अथवा शान्ति की स्थापना करने के लिए वैधानिक रूप से सक्षम है?
उत्तर – राष्ट्रपति✅
प्रश्न – क्या लोकसभा राज्यसभा द्वारा धन विधेयकों के लिए की गई सिफारिशों को मानने को बाध्य है?
उत्तर – नहीं✅
प्रश्न – लोक सभा स्पीकर अपना पद छोड़ देता है?
उत्तर – नई लोकसभा की प्रथम बैठक से ठीक पहले✅
🧘♀️ एक मिनट में दुनिया में सात लोग धुम्रपान की वजह से मारे जाते है।
🧘♀️ जो आदमी सिगरेट छोड़ना चाहते है वह रात को लगभग एक घंटा कम सोते है।
🧘♀️ बुद्धीमान लोगों के बालों में जिंक और ताबें की मात्रा ज्यादा होती है।
🧘♀️ आप की middle finger(बड़ी ऊगली) का नाखून बाकी सभी नाखुनों से ज्यादा तेजी से बढ़ता है।
देश की प्रमुख उत्पादन क्रान्तियां 🌿 सम्पूर्ण क्रांतियाँ 🌲
🌿हरित क्रांति –खाद्यान्न उत्पादन
🐄श्वेत क्रांति – दुग्ध उत्पादन
🐬नीली क्रांति – मत्स्य उत्पादन
🐌भूरी क्रांति – उर्वरक उत्पादन
🥚रजत क्रांति – अंडा उत्पादन
🍯पीली क्रांति – तिलहन उत्पादन
🛢कृष्ण क्रांति – बायोडीजल उत्पादन
🍅लाल क्रांति – टमाटर/मांस उत्पादन
🦐गुलाबी क्रांति – झींगा मछली उत्पादन
🍛बादामी क्रांति – मासाला उत्पादन
🍋सुनहरी क्रांति – फल उत्पादन
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प्रश्न 1: भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन किस वर्ष किया गया?
उत्तर- 1952 ई0
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प्रश्न 2: बिना बुझे चूने का रासायनिक नाम क्या है?
उत्तर- कैल्शियम ऑक्साइड
प्रश्न 3: भारत में रेपो दर कौन निर्धारित करता है?
उत्तर- भारतीय रिजर्व बैंक
प्रश्न 4: किसका प्रयोग पौधों में खाद्यान्न का भंडार यानी स्टार्च तैयार करने के लिए मुख्यतः उपयोग किया जाता है?
उत्तर- कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन
प्रश्न 5: दक्षिण ध्रुव यानी साउथ पोल तक पहुंचने वाला प्रथम व्यक्ति कौन था?
उत्तर- एमण्ड्सेन
प्रश्न 6: अभी तक ज्ञात विश्व का सबसे बड़ा तेल भंडार रिजर्व कहां है?
उत्तर- सऊदी अरब
प्रश्न 7: महाभारत का प्रारंभिक नाम क्या है?
उत्तर- जय संहिता
प्रश्न 8: एंग्लो -मोहम्मद ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना के लिए कौन उत्तरदाई था?
उत्तर- सर सैयद अहमद खान
प्रश्न 9: कौन सा शिलालेख प्रयाग प्रशस्ति के नाम से जाना जाता है?
उत्तर- इलाहाबाद स्तंभ शिलालेख
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प्रश्न 10: “नेमसेक” पुस्तक के रचयिता कौन है?
उत्तर झुम्पा लहड़ी
प्रश्न 11: जब किसी बॉडी का वेग दुगुना कर दिया जाता है तो उसके संवेग पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर संवेग दोगुना हो जाता है
प्रश्न 12: कौन सा संविधान संशोधन के पश्चात बोड़ो और डोगरी भाषाएं आठवीं अनुसूची में शामिल की गई?
उत्तर है 92वा संशोधन
प्रश्न 13: पॉलिटिक्स यानी राजनीति शब्द का सबसे पहले किसके द्वारा प्रयोग किया गया था?
उत्तर- अरस्तू
प्रश्न 14: कौन सी रक्त वाहिकाएं साफ रक्त फेफड़ो से हृदय मे ले जाती हैं?
उत्तर- फुफ्फुस शिरा
प्रश्न 15: कंप्यूटर की स्पीड को मापने के लिए कौन सी यूनिट प्रयोग में लाई जाती है?
उत्तर- m i p s
प्रश्न 16: विश्व के किस देश में चाय की सर्वाधिक सबसे अधिक पैदावार होती है?
उत्तर- भारत
प्रश्न 17: काला ज्वार का संचार किस से होता है?
उत्तर- सिकता मक्खी से
प्रश्न 18: कोई हवाई जहाज एक समान रफ्तार से क्षैतिज उड़ान भर रहा है, और उसमें से एक बैग नीचे फेंका जाता है। वायु के प्रतिरोध को नजरअंदाज करते हुए जब बैग भूमि पर गिरेगा तब हवाई जहाज कहां होगा?
उत्तर- बैग से आगे
प्रश्न 19: एक अंतरराष्ट्रीय आंदोलन जिसका उद्देश्य पर्यावरण की समस्या से संबंध होकर विश्व को बचाना है?
उत्तर- ग्रीनपीस
प्रश्न 20: बरनौली का सिद्धांत किसके संरक्षण का प्रकथन है?
उत्तर- रेखिक संवेग
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❇️ जीव विज्ञान की कुछ महत्वपूर्ण शाखाएँ 📕
▪️ एपीकल्चर (Apiculture) - मधुमक्खी पालन का अध्ययन
▪️ सेरीकल्वर (Sericulture) - रेशम कीट पालन का अध्ययन
▪️ पीसीकल्चर (Pisciculture) - मत्स्य पालन का अध्ययन
▪️ माइकोलॉजी (Mycology) - कवकों का अध्ययन
▪️ फाइकोलॉजी (Phycology) - शैवालों का अध्ययन
▪️ पोमोलॉजी (Pomology) - फलों का अध्ययन
▪️ ऑर्निथोलॉजी (Ornithology) - पक्षियों का अध्ययन
▪️ इक्थ्योलॉजी (Ichthyology) - मछलियों का अध्ययन
▪️ एण्टोमोलॉजी (Entomology) - कीटों का अध्ययन
▪️ डेन्ड्रोलॉजी (Dendrology) - वृक्षों एवं झाड़ियों का अध्ययन
▪️ ओफियोलॉजी (Ophiology) - सर्पों (snakes) का अध्ययन
▪️ सॉरोलॉजी (Saurology) - छिपकलियों का अध्ययन
▪️ सिल्विकल्चर (Silviculture) - काष्ठी पेड़ों का संवर्धन (जंगल विज्ञान)
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प्रश्न – भारतीय संविधान के अनुसार कौन युद्ध की घोषणा करने अथवा शान्ति की स्थापना करने के लिए वैधानिक रूप से सक्षम है?
उत्तर – राष्ट्रपति✅
प्रश्न – क्या लोकसभा राज्यसभा द्वारा धन विधेयकों के लिए की गई सिफारिशों को मानने को बाध्य है?
उत्तर – नहीं✅
प्रश्न – लोक सभा स्पीकर अपना पद छोड़ देता है?
उत्तर – नई लोकसभा की प्रथम बैठक से ठीक पहले✅
प्रश्न – भारत के संविधान के अनुच्छेद 352 के अधीन राष्ट्रपति द्वारा आपात उद्घोषणा कब की जा सकती है?
उत्तर – मंत्रिपरिषद के लिखित परामर्श पर✅
प्रश्न – भारत में सार्वभौम वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franschisc) किसके द्वारा प्रदान किया गया है?
उत्तर – भारत के संविधान द्वारा✅
प्रश्न – जब संविधान के अतिक्रमण के लिए राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाना हो तब आरोप किसके द्वारा लगाया जाएगा?
उत्तर – संसद की किसी भी सदन द्वारा✅
प्रश्न – राज्य लोक सेवा आयोग का सदस्य कदाचार के आरोप तभी हटाया जा सकता है जब जाँच की गई हो?
उत्तर – भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा✅
✍ वाक्यांश के लिए एक शब्द
(गत वर्षों पर आधारित) 【पार्ट 1st】❣💐
༺═───────────────────═༻
● जो दिखायी न पड़े – अदृश्य, अप्रत्यक्ष (UPPCS, IAS)
● जो सदा से चला आ रहा है – अनवरत (IAS)
● जो कभी नहीं मरता – अमर्त्य, अमर (APO, RAS, IAS)
● जो आगे (दूर) की न सोचता हो – अदूरदर्शी (Upper Sub.)
● जो आगे (दूर) की सोंचता हो – अग्रसोची, दूरदर्शी (UPPCS)
● धरती (पृथ्वी) और आकाश के बीच का स्थान – अंतरिक्ष (UPPCS)
● जिसका कोई अर्थ न हो – अर्थहीन (UPPCS)
● जिस पर आक्रमण न किया गया हो – अनाक्रांत (UPPCS)
● जिसे जीता न जा सके – अजेय (UPPCS, Upper Sub., RO)
● बिना वेतन काम करने वाला – अवैतनिक (UPPCS, B.Ed., Low Sub.)
● जिसका जन्म पहले हुआ हो (बड़ा भाई) – अग्रज (RAS)
● दोपहर के बाद का समय – अपराह्न (IAS, Upper Sub., UPPCS)
● जो पराजित न किया जा सके – अपराजेय (UKPCS)
● अधिक बढ़ा-चढ़ा कर कहना – अतिशयोक्ति, अतियुक्ति (B.Ed.)
● जिसका परिहार (त्याग) न हो सके/जिसको छोड़ा न जा सके – अपरिहार्य (UPPCS, B.Ed., Low Sub.)
● जो कानून के प्रतिकूल हो/जो विधि के विरुद्ध हो – अवैध, अविधिक (UPPCS, IAS)
● जो समय पर न हो – असामयिक (UPPCS)
● जो अवश्य होने वाला हो – अवश्यम्भावी (APO, UPPCS)
● जिसका विवाह न हुआ हो – अविवाहित (IAS)
● जो सबके अन्तःकारण की बात जानने वाला हो – अन्तर्यामी (MPPCS)
● जिसका इलाज न हो सके – असाध्य (RO)
● किसी कार्य के लिए दी जाने वाली आर्थिक सहायता – अनुदान (UKPCS)
● व्यर्थ/अनुचित खर्च करने वाला – अपव्ययी (RAS, UPPCS)
● जिसकी पहले से कोई आशा न हो – अप्रत्याशित (UPPCS, APO)
● पुरुष जो अभिनय करता हो – अभिनेता (MPPSC)
● जो भेदा या तोड़ा न जा सके – अभेद्य (Low Sub.)
● जिसका जन्म छोटी जाति (निचले वर्ण) में हुआ हो – अंत्यज (RO)
● जो अभी-अभी उत्पन्न हुआ हो – अद्यःप्रसूत (UPPCS)
● जिसको क्षमा न किया जा सके – अक्षम्य (Low Sub.)
● जो न जाना जा सके – अज्ञेय (Upper Sub., UPPCS)
● जो कुछ न जानता हो – अज्ञ, अज्ञानी (UPPCS, B.Ed.)
● कम बोलने वाला – अल्पभाषी, मितभाषी (Low Sub., APO, UPPCS, RAS,)
● थोड़ा जानने वाला – अल्पज्ञ (RAS, MPPCS)
● जिसका कभी अन्त न हो – अनन्त (UPPCS, B.Ed.)
● जिसका माँ-बाप न हो – अनाथ (IAS, UPPCS)
▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬
🔴Important Trick....✍
विभिन्न राज्यो के प्रमुख लोक् नृत्य याद करने की ट्रिक
• करेले कि कथा = केरल = कथकली
• पंजे में भांग डालो = पंजाब = भांगड़ा
• राजा तुम घुमो = राजस्थान = घूमर
• असम कि बहु = असम = बिहू
• अरुण क मुखोटा = अरुणाचल = मुखोटा
• गुज़र गई गरीबी = गुजरात
• झाड़ू में छाऊ = झारखण्ड = छऊ
• U K में गडा = उत्तराखंड = गढ़वाली
• अंधेरे मे कच्ची पूरी खाई खाई = आंधरा = कचिपTri छतरी मे गाड़ी = छत्तीसगढ़ = गाडी
• हिम्मत कि धमाल = हिमाचल = धमाल
• गोवा कि मंडी = गोवा = मंडी
• बंगले कि काठी = पशिम बंगाल = काठी
• मेघ लाओ = मेघालय = लावणी
• नाग कि चोच = नागालैंड = चोंग
• उड़ी उड़ीं बबा = उड़ीसा = ओड़िसी
• कान( कर्ण) में करो यक्ष ज्ञान = कर्नाटक = यक्ष ज्ञान
• जम्मुरा = जम्मू कश्मीर = राउफ
• तुम मिले भरत = तमिलनाडु = भरतनाट्यम
• उत्तर की रास = उत्तर प्रदेश = रासलीला
❇️भारत की नदियों से सम्बन्धित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर❇️part#1
1● भारत की पवित्र नदी कौन-सी है—गंगा
2● गंगा को बांग्लादेश में किस नाम से जाना जाता है— पद्मा
3● गंगा एवं ब्रह्मपुत्र की संयुक्त जलधारा किस नाम से जानी जाती है— मेघना
4● भारत की कौन-सी नदी सुंदरवन डेल्टा बनाती है— गंगा व ब्रह्मपुत्र
5● सांगपो नदी किस राज्य से होकर भारत में प्रवेश करती है— अरुणाचल प्रदेश
6● तवा किसकी सहायक नदी है— नर्मदा
7● किस नदी को ‘बिहार का शोक’ कहा जाता है— कोसी
8● कौन-सी नदी ‘बगाल का शोक’ कही जाती है— दामोदर नदी
9● कौन-सी नदी भ्रंश दोणी से होकर बहती है— नर्मदा
10● प्रायद्वीपीय भारत की सबसे बड़ी नदी कौन-सी है— गोदावरी
🌎 भूगोल से सम्बन्धित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर 🔰
उत्तर – मंत्रिपरिषद के लिखित परामर्श पर✅
प्रश्न – भारत में सार्वभौम वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franschisc) किसके द्वारा प्रदान किया गया है?
उत्तर – भारत के संविधान द्वारा✅
प्रश्न – जब संविधान के अतिक्रमण के लिए राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाना हो तब आरोप किसके द्वारा लगाया जाएगा?
उत्तर – संसद की किसी भी सदन द्वारा✅
प्रश्न – राज्य लोक सेवा आयोग का सदस्य कदाचार के आरोप तभी हटाया जा सकता है जब जाँच की गई हो?
उत्तर – भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा✅
✍ वाक्यांश के लिए एक शब्द
(गत वर्षों पर आधारित) 【पार्ट 1st】❣💐
༺═───────────────────═༻
● जो दिखायी न पड़े – अदृश्य, अप्रत्यक्ष (UPPCS, IAS)
● जो सदा से चला आ रहा है – अनवरत (IAS)
● जो कभी नहीं मरता – अमर्त्य, अमर (APO, RAS, IAS)
● जो आगे (दूर) की न सोचता हो – अदूरदर्शी (Upper Sub.)
● जो आगे (दूर) की सोंचता हो – अग्रसोची, दूरदर्शी (UPPCS)
● धरती (पृथ्वी) और आकाश के बीच का स्थान – अंतरिक्ष (UPPCS)
● जिसका कोई अर्थ न हो – अर्थहीन (UPPCS)
● जिस पर आक्रमण न किया गया हो – अनाक्रांत (UPPCS)
● जिसे जीता न जा सके – अजेय (UPPCS, Upper Sub., RO)
● बिना वेतन काम करने वाला – अवैतनिक (UPPCS, B.Ed., Low Sub.)
● जिसका जन्म पहले हुआ हो (बड़ा भाई) – अग्रज (RAS)
● दोपहर के बाद का समय – अपराह्न (IAS, Upper Sub., UPPCS)
● जो पराजित न किया जा सके – अपराजेय (UKPCS)
● अधिक बढ़ा-चढ़ा कर कहना – अतिशयोक्ति, अतियुक्ति (B.Ed.)
● जिसका परिहार (त्याग) न हो सके/जिसको छोड़ा न जा सके – अपरिहार्य (UPPCS, B.Ed., Low Sub.)
● जो कानून के प्रतिकूल हो/जो विधि के विरुद्ध हो – अवैध, अविधिक (UPPCS, IAS)
● जो समय पर न हो – असामयिक (UPPCS)
● जो अवश्य होने वाला हो – अवश्यम्भावी (APO, UPPCS)
● जिसका विवाह न हुआ हो – अविवाहित (IAS)
● जो सबके अन्तःकारण की बात जानने वाला हो – अन्तर्यामी (MPPCS)
● जिसका इलाज न हो सके – असाध्य (RO)
● किसी कार्य के लिए दी जाने वाली आर्थिक सहायता – अनुदान (UKPCS)
● व्यर्थ/अनुचित खर्च करने वाला – अपव्ययी (RAS, UPPCS)
● जिसकी पहले से कोई आशा न हो – अप्रत्याशित (UPPCS, APO)
● पुरुष जो अभिनय करता हो – अभिनेता (MPPSC)
● जो भेदा या तोड़ा न जा सके – अभेद्य (Low Sub.)
● जिसका जन्म छोटी जाति (निचले वर्ण) में हुआ हो – अंत्यज (RO)
● जो अभी-अभी उत्पन्न हुआ हो – अद्यःप्रसूत (UPPCS)
● जिसको क्षमा न किया जा सके – अक्षम्य (Low Sub.)
● जो न जाना जा सके – अज्ञेय (Upper Sub., UPPCS)
● जो कुछ न जानता हो – अज्ञ, अज्ञानी (UPPCS, B.Ed.)
● कम बोलने वाला – अल्पभाषी, मितभाषी (Low Sub., APO, UPPCS, RAS,)
● थोड़ा जानने वाला – अल्पज्ञ (RAS, MPPCS)
● जिसका कभी अन्त न हो – अनन्त (UPPCS, B.Ed.)
● जिसका माँ-बाप न हो – अनाथ (IAS, UPPCS)
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🔴Important Trick....✍
विभिन्न राज्यो के प्रमुख लोक् नृत्य याद करने की ट्रिक
• करेले कि कथा = केरल = कथकली
• पंजे में भांग डालो = पंजाब = भांगड़ा
• राजा तुम घुमो = राजस्थान = घूमर
• असम कि बहु = असम = बिहू
• अरुण क मुखोटा = अरुणाचल = मुखोटा
• गुज़र गई गरीबी = गुजरात
• झाड़ू में छाऊ = झारखण्ड = छऊ
• U K में गडा = उत्तराखंड = गढ़वाली
• अंधेरे मे कच्ची पूरी खाई खाई = आंधरा = कचिपTri छतरी मे गाड़ी = छत्तीसगढ़ = गाडी
• हिम्मत कि धमाल = हिमाचल = धमाल
• गोवा कि मंडी = गोवा = मंडी
• बंगले कि काठी = पशिम बंगाल = काठी
• मेघ लाओ = मेघालय = लावणी
• नाग कि चोच = नागालैंड = चोंग
• उड़ी उड़ीं बबा = उड़ीसा = ओड़िसी
• कान( कर्ण) में करो यक्ष ज्ञान = कर्नाटक = यक्ष ज्ञान
• जम्मुरा = जम्मू कश्मीर = राउफ
• तुम मिले भरत = तमिलनाडु = भरतनाट्यम
• उत्तर की रास = उत्तर प्रदेश = रासलीला
❇️भारत की नदियों से सम्बन्धित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर❇️part#1
1● भारत की पवित्र नदी कौन-सी है—गंगा
2● गंगा को बांग्लादेश में किस नाम से जाना जाता है— पद्मा
3● गंगा एवं ब्रह्मपुत्र की संयुक्त जलधारा किस नाम से जानी जाती है— मेघना
4● भारत की कौन-सी नदी सुंदरवन डेल्टा बनाती है— गंगा व ब्रह्मपुत्र
5● सांगपो नदी किस राज्य से होकर भारत में प्रवेश करती है— अरुणाचल प्रदेश
6● तवा किसकी सहायक नदी है— नर्मदा
7● किस नदी को ‘बिहार का शोक’ कहा जाता है— कोसी
8● कौन-सी नदी ‘बगाल का शोक’ कही जाती है— दामोदर नदी
9● कौन-सी नदी भ्रंश दोणी से होकर बहती है— नर्मदा
10● प्रायद्वीपीय भारत की सबसे बड़ी नदी कौन-सी है— गोदावरी
🌎 भूगोल से सम्बन्धित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर 🔰