*📜 13 नवम्बर 📜*
*🌹 शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह // जयंती 🌹*
जन्म : 13 नवंबर 1780
मृत्यु : 27 जून 1839
अठारहवीं सदी के पंजाब में सिखों की शुकरचकिया मिसल (छोटी रियासत) के उत्तराधिकारी के रूप में 13 नवम्बर 1780 को गुजराँवाला में जन्मे रणजीत सिंह ने अपने शौर्य, पराक्रम, सूझबूझ और कूटनीति से सिख राज्य की सीमाएँ अटक, पेशावर, काबुल और जमरूद तक पहुँचा दी थीं।
रणजीत सिंह के पिता का नाम सरदार महासिंह था। जब रणजीत सिंह केवल 12 वर्ष के थे, तब महासिंह के देहान्त से मिसल की देखभाल की जिम्मेदारी उनकी माता और रियासत की रेजीडेण्ट महोतर कौर पर आ पड़ी; पर असली सत्ता एक अन्य महत्वाकांक्षी महिला रानी सुधा कौर के हाथ में थी। उसमें प्रशासनिक क्षमता न होने से सर्वत्र अव्यवस्था व्याप्त थी।
रणजीत सिंह ने होश सँभालते ही 1799 में लाहौर और 1805 में अमृतसर पर कठोर नियंत्रण स्थापित किया। फिर कसूर, जम्मू, मुल्तान, काँगड़ा, शिमला और कश्मीर को क्रमशः अपने राज्य में मिलाया। जम्मू के डोगरा राजा गुलाब सिंह के पराक्रमी सेनानायक जोरावर सिंह के शौर्य से उन्होंने लद्दाख पर भी अधिकार कर लिया। अपने राज्य की सीमाओं का विस्तार कर रणजीत सिंह ने सब
*🌹 शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह // जयंती 🌹*
जन्म : 13 नवंबर 1780
मृत्यु : 27 जून 1839
अठारहवीं सदी के पंजाब में सिखों की शुकरचकिया मिसल (छोटी रियासत) के उत्तराधिकारी के रूप में 13 नवम्बर 1780 को गुजराँवाला में जन्मे रणजीत सिंह ने अपने शौर्य, पराक्रम, सूझबूझ और कूटनीति से सिख राज्य की सीमाएँ अटक, पेशावर, काबुल और जमरूद तक पहुँचा दी थीं।
रणजीत सिंह के पिता का नाम सरदार महासिंह था। जब रणजीत सिंह केवल 12 वर्ष के थे, तब महासिंह के देहान्त से मिसल की देखभाल की जिम्मेदारी उनकी माता और रियासत की रेजीडेण्ट महोतर कौर पर आ पड़ी; पर असली सत्ता एक अन्य महत्वाकांक्षी महिला रानी सुधा कौर के हाथ में थी। उसमें प्रशासनिक क्षमता न होने से सर्वत्र अव्यवस्था व्याप्त थी।
रणजीत सिंह ने होश सँभालते ही 1799 में लाहौर और 1805 में अमृतसर पर कठोर नियंत्रण स्थापित किया। फिर कसूर, जम्मू, मुल्तान, काँगड़ा, शिमला और कश्मीर को क्रमशः अपने राज्य में मिलाया। जम्मू के डोगरा राजा गुलाब सिंह के पराक्रमी सेनानायक जोरावर सिंह के शौर्य से उन्होंने लद्दाख पर भी अधिकार कर लिया। अपने राज्य की सीमाओं का विस्तार कर रणजीत सिंह ने सब
*📜 15 नवम्बर 📜*
*🌹 भगवान बिरसा मुंडा // जयंती 🌹*
जन्म : 15 नवंबर 1875
मृत्यु : 09 जून 1900
मुंडा जनजाति से ताल्लुक रखने वाले बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को हुआ था। 19वीं शताब्दी के अंत में ब्रिटिश शासन के दौरान उन्होंने 19वीं शताबदी में आदिवासी बेल्ट में बंगाल प्रेसीडेंसी (अब झारखंड) में आदिवासी धार्मिक सहस्राब्दी आंदोलन का नेतृत्व किया। उनकी जयंती देश में बिरसा मुंडा जयंती के रूप में मनाई जाती है। इसी दिन झारखंड स्थापना दिवस भी है। झारखंड साल 2000 में बिहार से अलग हुआ था।
>> कौन हैं बिरसा मुंडा <<
बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को में एक गरीब किसान परिवार में हुआ था। जो जनजातीय समूह मुंडा से संबंध रखते थे और झारखण्ड निवासी थे। बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश औपनिवेशिक व्यवस्था की शोषक व्यवस्था के खिलाफ महत्वपूर्ण योगदान दिया था। 1 अक्टूबर 1894 को वह एक प्रखर नेता के रूप में उभरे और उन्होंने सभी मुंडाओं को इकट्ठा कर अंग्रेजो से लगान माफी के लिये आन्दोलन किया। इस आंदोलन ने अंग्रेजों को हिलाकर रख दिया। इसके बाद उन्हें 1895 में गिरफ़्तार कर हजारीबाग केन्द्रीय कारागार में दो साल के कारावास की सजा दी गयी। उन
*🌹 भगवान बिरसा मुंडा // जयंती 🌹*
जन्म : 15 नवंबर 1875
मृत्यु : 09 जून 1900
मुंडा जनजाति से ताल्लुक रखने वाले बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को हुआ था। 19वीं शताब्दी के अंत में ब्रिटिश शासन के दौरान उन्होंने 19वीं शताबदी में आदिवासी बेल्ट में बंगाल प्रेसीडेंसी (अब झारखंड) में आदिवासी धार्मिक सहस्राब्दी आंदोलन का नेतृत्व किया। उनकी जयंती देश में बिरसा मुंडा जयंती के रूप में मनाई जाती है। इसी दिन झारखंड स्थापना दिवस भी है। झारखंड साल 2000 में बिहार से अलग हुआ था।
>> कौन हैं बिरसा मुंडा <<
बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को में एक गरीब किसान परिवार में हुआ था। जो जनजातीय समूह मुंडा से संबंध रखते थे और झारखण्ड निवासी थे। बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश औपनिवेशिक व्यवस्था की शोषक व्यवस्था के खिलाफ महत्वपूर्ण योगदान दिया था। 1 अक्टूबर 1894 को वह एक प्रखर नेता के रूप में उभरे और उन्होंने सभी मुंडाओं को इकट्ठा कर अंग्रेजो से लगान माफी के लिये आन्दोलन किया। इस आंदोलन ने अंग्रेजों को हिलाकर रख दिया। इसके बाद उन्हें 1895 में गिरफ़्तार कर हजारीबाग केन्द्रीय कारागार में दो साल के कारावास की सजा दी गयी। उन
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*📜 15 नवम्बर 📜*
*🌹 भगवान बिरसा मुंडा // जयंती 🌹*
जन्म : 15 नवंबर 1875
मृत्यु : 09 जून 1900
मुंडा जनजाति से ताल्लुक रखने वाले बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को हुआ था। 19वीं शताब्दी के अंत में ब्रिटिश शासन के दौरान उन्होंने 19वीं शताबदी में आदिवासी बेल्ट में बंगाल प्रेसीडेंसी (अब झारखंड) में आदिवासी धार्मिक सहस्राब्दी आंदोलन का नेतृत्व किया। उनकी जयंती देश में बिरसा मुंडा जयंती के रूप में मनाई जाती है। इसी दिन झारखंड स्थापना दिवस भी है। झारखंड साल 2000 में बिहार से अलग हुआ था।
>> कौन हैं बिरसा मुंडा <<
बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को में एक गरीब किसान परिवार में हुआ था। जो जनजातीय समूह मुंडा से संबंध रखते थे और झारखण्ड निवासी थे। बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश औपनिवेशिक व्यवस्था की शोषक व्यवस्था के खिलाफ महत्वपूर्ण योगदान दिया था। 1 अक्टूबर 1894 को वह एक प्रखर नेता के रूप में उभरे और उन्होंने सभी मुंडाओं को इकट्ठा कर अंग्रेजो से लगान माफी के लिये आन्दोलन किया। इस आंदोलन ने अंग्रेजों को हिलाकर रख दिया। इसके बाद उन्हें 1895 में गिरफ़्तार कर हजारीबाग केन्द्रीय कारागार में दो साल के कारावास की सजा दी गयी। उन
*🌹 भगवान बिरसा मुंडा // जयंती 🌹*
जन्म : 15 नवंबर 1875
मृत्यु : 09 जून 1900
मुंडा जनजाति से ताल्लुक रखने वाले बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को हुआ था। 19वीं शताब्दी के अंत में ब्रिटिश शासन के दौरान उन्होंने 19वीं शताबदी में आदिवासी बेल्ट में बंगाल प्रेसीडेंसी (अब झारखंड) में आदिवासी धार्मिक सहस्राब्दी आंदोलन का नेतृत्व किया। उनकी जयंती देश में बिरसा मुंडा जयंती के रूप में मनाई जाती है। इसी दिन झारखंड स्थापना दिवस भी है। झारखंड साल 2000 में बिहार से अलग हुआ था।
>> कौन हैं बिरसा मुंडा <<
बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को में एक गरीब किसान परिवार में हुआ था। जो जनजातीय समूह मुंडा से संबंध रखते थे और झारखण्ड निवासी थे। बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश औपनिवेशिक व्यवस्था की शोषक व्यवस्था के खिलाफ महत्वपूर्ण योगदान दिया था। 1 अक्टूबर 1894 को वह एक प्रखर नेता के रूप में उभरे और उन्होंने सभी मुंडाओं को इकट्ठा कर अंग्रेजो से लगान माफी के लिये आन्दोलन किया। इस आंदोलन ने अंग्रेजों को हिलाकर रख दिया। इसके बाद उन्हें 1895 में गिरफ़्तार कर हजारीबाग केन्द्रीय कारागार में दो साल के कारावास की सजा दी गयी। उन
हर exam में पूछे जाना वाला टॉपिक
📖 राज्यपाल – संबंधित अनुच्छेद 📖
अनु. 153 – राज्यों में राज्यपाल का पद।
अनु. 154 – राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित।
अनु. 155 – राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा।
अनु. 156 – कार्यकाल (पद की अवधि)।
अनु. 157 – राज्यपाल बनने की योग्यता।
अनु. 158 – राज्यपाल के पद की शर्तें।
अनु. 159 – पद की शपथ ।
अनु. 160 – राज्यपाल पद की आकस्मिक रिक्ति।
अनु. 161 – राज्यपाल के क्षमादान की शक्ति।
अनु. 162 – राज्य की कार्यपालिका शक्ति का क्षेत्र।
अनु. 165 – राज्यपाल के द्वारा महाधिवक्ता की नियुक्ति की जाती है।
अनु. 171 – राज्य विधान परिषद के कुल सदस्यो का 1/6 भाग राज्यपाल के द्वारा मनोनित।
अनु. 174 – राज्यपाल द्वारा राज्य विधानमंडल के सत्र को आहूत करना ,सदनो का सत्रावसान तथा विधानसभा का विघटन।
अनु. 175 – राज्यपाल का विधानमंडल को अभिभाषण देने और संदेश भेजने का अधिकार।
अनु. 176 – राज्यपाल का विशेष अभिभाषण (विधानमंडल के पहले सत्र में)।
अनु. 200 – विधेयक पर राज्यपाल की स्वीकृति, रोक या पुनर्विचार हेतु लौटाना।
अनु. 213 – राज्यपाल के अध्यादेश जारी करने की शक्ति।
अनु. 233 – उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सलाह के बाद जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पदस्थापना, प्रमोशन।
अनु. 316 – लोक सेवा आयोग (राज्य) के अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल के द्वारा।
अनु. 356 – राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति शासन की सिफारिश।
अनु. 361 – राष्ट्रपति व राज्यपाल का संरक्षण।
📖 राज्यपाल – संबंधित अनुच्छेद 📖
अनु. 153 – राज्यों में राज्यपाल का पद।
अनु. 154 – राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित।
अनु. 155 – राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा।
अनु. 156 – कार्यकाल (पद की अवधि)।
अनु. 157 – राज्यपाल बनने की योग्यता।
अनु. 158 – राज्यपाल के पद की शर्तें।
अनु. 159 – पद की शपथ ।
अनु. 160 – राज्यपाल पद की आकस्मिक रिक्ति।
अनु. 161 – राज्यपाल के क्षमादान की शक्ति।
अनु. 162 – राज्य की कार्यपालिका शक्ति का क्षेत्र।
अनु. 165 – राज्यपाल के द्वारा महाधिवक्ता की नियुक्ति की जाती है।
अनु. 171 – राज्य विधान परिषद के कुल सदस्यो का 1/6 भाग राज्यपाल के द्वारा मनोनित।
अनु. 174 – राज्यपाल द्वारा राज्य विधानमंडल के सत्र को आहूत करना ,सदनो का सत्रावसान तथा विधानसभा का विघटन।
अनु. 175 – राज्यपाल का विधानमंडल को अभिभाषण देने और संदेश भेजने का अधिकार।
अनु. 176 – राज्यपाल का विशेष अभिभाषण (विधानमंडल के पहले सत्र में)।
अनु. 200 – विधेयक पर राज्यपाल की स्वीकृति, रोक या पुनर्विचार हेतु लौटाना।
अनु. 213 – राज्यपाल के अध्यादेश जारी करने की शक्ति।
अनु. 233 – उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सलाह के बाद जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पदस्थापना, प्रमोशन।
अनु. 316 – लोक सेवा आयोग (राज्य) के अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल के द्वारा।
अनु. 356 – राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति शासन की सिफारिश।
अनु. 361 – राष्ट्रपति व राज्यपाल का संरक्षण।
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*📜 20 नवम्बर 📜*
*🌹 प्रसिद्ध धावक मिलखा सिंह // जयंती 🌹*
जन्म : 20 नवंबर 1929
मृत्यु : 18 जून 2021
मिलखा सिंह भारत के ऐसे प्रसिद्ध धावक थे जिन्हें लोग फ्लाइंग सिक्ख के नाम से जानते हैं। सन् 1956 में मेलबर्न में आयोजित हुए ओलंपिक खेलों में उन्होंने पहली बार 200 मीटर और 400 मीटर की रेस में भाग लिया था। मिलखा सिंह ने 1958 में कटक में आयोजित नेशनल गेम्स में 200 मीटर और 400 मीटर स्पर्धा में रिकॉर्ड बनाए। इसके बाद उसी साल टोक्यो में आयोजित हुए एशियन गेम्स में उन्होंने 200 मीटर और 400 मीटर की दौड़ में भी गोल्ड मेडल अपने नाम किया। साल 1958 में ही इंग्लैंड के कार्डिफ में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में मिलखा सिंह ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए 400 मीटर की रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उस समय आज़ाद भारत में कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाले वे पहले भारतीय थे।
मिलखा सिंह का जन्म 20 नवम्बर, 1929 गोविंदपुरा (जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है) में एक सिक्ख परिवार में हुआ था। उनका बचपन बेहद कठिन दौर से गुजरा।
*🌹 प्रसिद्ध धावक मिलखा सिंह // जयंती 🌹*
जन्म : 20 नवंबर 1929
मृत्यु : 18 जून 2021
मिलखा सिंह भारत के ऐसे प्रसिद्ध धावक थे जिन्हें लोग फ्लाइंग सिक्ख के नाम से जानते हैं। सन् 1956 में मेलबर्न में आयोजित हुए ओलंपिक खेलों में उन्होंने पहली बार 200 मीटर और 400 मीटर की रेस में भाग लिया था। मिलखा सिंह ने 1958 में कटक में आयोजित नेशनल गेम्स में 200 मीटर और 400 मीटर स्पर्धा में रिकॉर्ड बनाए। इसके बाद उसी साल टोक्यो में आयोजित हुए एशियन गेम्स में उन्होंने 200 मीटर और 400 मीटर की दौड़ में भी गोल्ड मेडल अपने नाम किया। साल 1958 में ही इंग्लैंड के कार्डिफ में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में मिलखा सिंह ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए 400 मीटर की रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उस समय आज़ाद भारत में कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाले वे पहले भारतीय थे।
मिलखा सिंह का जन्म 20 नवम्बर, 1929 गोविंदपुरा (जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है) में एक सिक्ख परिवार में हुआ था। उनका बचपन बेहद कठिन दौर से गुजरा।
🌈 3rd ग्रेड ( तृतीय श्रेणी) शिक्षक भर्ती 2025:–
👨🏫 7000+ पदों पर भर्ती होगी l
📌 ऑनलाइन आवेदन 6 दिसंबर 2025 तक
भरे जा सकते हैं l
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने थर्ड ग्रेड शिक्षक भर्ती 2025 की विस्तृत अधिसूचना जारी कर दी है।
इस भर्ती में—
🔹 लेवल-1 (कक्षा 1 से 5)
🔹 लेवल-2 (कक्षा 6 से 8)
में कुल 7,123 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।
🗓 ऑनलाइन आवेदन शुरू: 7 नवंबर 2025 से प्रारंभ हो चुके हैं l
🗓 अंतिम तिथि: 6 दिसंबर 2025
📝 परीक्षा की तिथि: 17 से 21 जनवरी 2026
📢 परिणाम(Result) : 10 जुलाई 2026
📍 योग्यता (Qualification)
🔹 लेवल-1:–
उच्च माध्यमिक 50% अंकों के साथ + D.El.Ed (बीएसटीसी) + REET पास
🔹 लेवल-2:–
स्नातक डिग्री + B.Ed + REET पास
👉 REET पास अभ्यर्थी ही आवेदन के पात्र होंगे
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राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने थर्ड ग्रेड शिक्षक भर्ती 2025 की विस्तृत अधिसूचना जारी कर दी है।
इस भर्ती में—
🔹 लेवल-1 (कक्षा 1 से 5)
🔹 लेवल-2 (कक्षा 6 से 8)
में कुल 7,123 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।
🗓 ऑनलाइन आवेदन शुरू: 7 नवंबर 2025 से प्रारंभ हो चुके हैं l
🗓 अंतिम तिथि: 6 दिसंबर 2025
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202511271651651092.pdf
1 MB
CTET form start 27 November
Last date 18 December
Exam date : 8 February 2026
Paper 1 evening shift
Paper 2 morning shift
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*जैसे कि आपको पता ctet के फॉर्म भर जाना शुरू हो गए हैं तो बिना किसी देरी करते हुए आप सीटेट का फॉर्म जरूर करें जो आगे आने वाली सभी वैकेंसी में आपका काम आएगा जैसे अभी केवीएस एनवीएस में आप बहुत सारे स्टूडेंट रह गए हैं तो यह अफसोस बाद में नहीं हो*
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👉नोट्स की विशेषता
👉संपूर्ण पाठ्य सामग्री
👉चैप्टर वाइज नोट्स
शॉर्ट शॉर्ट नोट्स जो इंपॉर्टेंट है एग्जाम में वही पढ़ना जरूरी
👉एग्जाम तक दो बार आराम से रिवीजन
Wtsp msg 9024020902
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📚वनस्पति एवं वन्यजीवों के संरक्षण संबंधी एक्ट एवं परियोजनाएं :-
➡️ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972
➡️ बाघ संरक्षण परियोजना 1973
➡️ मगरमच्छ संरक्षण परियोजना 1975
➡️ वन संरक्षण अधिनियम 1980
➡️ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986
➡️ हाथी संरक्षण परियोजना 1992
➡️ जैव विविधता संरक्षण एक्ट 2002
➡️ डॉल्फिन संरक्षण अधिनियम 2009
➡️ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972
➡️ बाघ संरक्षण परियोजना 1973
➡️ मगरमच्छ संरक्षण परियोजना 1975
➡️ वन संरक्षण अधिनियम 1980
➡️ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986
➡️ हाथी संरक्षण परियोजना 1992
➡️ जैव विविधता संरक्षण एक्ट 2002
➡️ डॉल्फिन संरक्षण अधिनियम 2009
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✨ महत्वपूर्ण आवेदन फॉर्म भरने की अंतिम तिथियां नजदीक⤵️
■ उत्तरप्रदेश जूनियर एडेड शिक्षक भर्ती 2021
👉 Last Date 14 दिसंबर
■ KVS & NVS भर्ती 2025
👉 Last Date 04 दिसंबर
■ RRB NTPC इंटर स्तर भर्ती 2025
👉 Last Date 04 दिसंबर
■ BSSC इंटर स्तर भर्ती 2023
👉 Last Date 15 दिसंबर
■ पश्चिम बंगाल Group C & D भर्ती 2025
👉 Last Date 03 दिसंबर
■ IB MTS भर्ती 2025
👉 Last Date 14 दिसंबर
■ केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026
👉 Last Date 18 दिसंबर
■ उत्तरप्रदेश होमगार्ड भर्ती 2025
👉 Last Date 17 दिसंबर
■ राजस्थान REET Mains 2025
👉 Last Date 06 दिसंबर
https://t.me/realstudyclasses
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■ BSSC इंटर स्तर भर्ती 2023
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■ पश्चिम बंगाल Group C & D भर्ती 2025
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