🦋भपंग का जादूगर👉 जहुर खां मेवाती
🦋नगाड़े का जादूगर👉 रामकिशन पुष्कर
🦋सारंगी का जादूगर👉 सुल्तान खां (सारंगी का सुल्तान)
🦋हारमोनियम का जादूगर👉 महमूद धौलपुरी
🦋खड़ताल का जादूगर👉 सादिक खां मांगणियार
🦋अलगोचा का जादूगर👉 रामनाथ चौधरी
🦋सुरनाई का जादूगर👉 पेपे खां मांगणियार
🦋नड़ का जादूगर👉 करणा भील(डाकू)
🦋मृदंग(पखावज) का जादूगर👉 पुरुषोत्तम दास
🦋नगाड़े का जादूगर👉 रामकिशन पुष्कर
🦋सारंगी का जादूगर👉 सुल्तान खां (सारंगी का सुल्तान)
🦋हारमोनियम का जादूगर👉 महमूद धौलपुरी
🦋खड़ताल का जादूगर👉 सादिक खां मांगणियार
🦋अलगोचा का जादूगर👉 रामनाथ चौधरी
🦋सुरनाई का जादूगर👉 पेपे खां मांगणियार
🦋नड़ का जादूगर👉 करणा भील(डाकू)
🦋मृदंग(पखावज) का जादूगर👉 पुरुषोत्तम दास
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*📜 05 नवम्बर 📜*
*🌹 आजाद भारत के पहले वोटर 'श्याम शरण नेगी' // पुण्यतिथि 🌹*
जन्म : 01 जुलाई 1917
मृत्यु : 05 नवंबर 2022
आजाद भारत के पहले मतदाता (वोटर-Voter) श्याम शरण नेगी का 05 नवंबर 2022 को निधन हो गया। उन्होंने 106 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहा। चुनाव आयोग ने 2022 में बैलेट पेपर के जरिए दिव्यांग और बुजुर्ग मतदाताओं के लिए वोटिंग की व्यवस्था करवाई थी, जिसमें नेगी ने भी मतदान किया। वैसे तो उनके जीवन से जुड़े कई किस्से फेमस हैं, लेकिन लोगों के मन में ये सवाल उठता है कि आखिर आजादी के वक्त जब लाखों मतदाता थे, तो मास्टर नेगी किसी आधार पर पहले मतदाता बन गए?
>> हिमाचल में ही गुजरी जिंदगी <<
मास्टर नेगी का जन्म 1 जुलाई 1917 को किन्नौर जिले के चिन्नी गांव में हुआ था। जिसे अब कल्पा के नाम से जाना जाता है। वो वहीं पर पले-बढ़े और आखिरी सांस भी वहीं पर ली। आजाद भारत में जब पहला चुनाव हुआ था, तो आधिकारिक रूप से नेगी ने उसमें पहला वोट डाला था। उसके बाद से उन्होंने कुल 34 चुनावों में मतदान किया।
*🌹 आजाद भारत के पहले वोटर 'श्याम शरण नेगी' // पुण्यतिथि 🌹*
जन्म : 01 जुलाई 1917
मृत्यु : 05 नवंबर 2022
आजाद भारत के पहले मतदाता (वोटर-Voter) श्याम शरण नेगी का 05 नवंबर 2022 को निधन हो गया। उन्होंने 106 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहा। चुनाव आयोग ने 2022 में बैलेट पेपर के जरिए दिव्यांग और बुजुर्ग मतदाताओं के लिए वोटिंग की व्यवस्था करवाई थी, जिसमें नेगी ने भी मतदान किया। वैसे तो उनके जीवन से जुड़े कई किस्से फेमस हैं, लेकिन लोगों के मन में ये सवाल उठता है कि आखिर आजादी के वक्त जब लाखों मतदाता थे, तो मास्टर नेगी किसी आधार पर पहले मतदाता बन गए?
>> हिमाचल में ही गुजरी जिंदगी <<
मास्टर नेगी का जन्म 1 जुलाई 1917 को किन्नौर जिले के चिन्नी गांव में हुआ था। जिसे अब कल्पा के नाम से जाना जाता है। वो वहीं पर पले-बढ़े और आखिरी सांस भी वहीं पर ली। आजाद भारत में जब पहला चुनाव हुआ था, तो आधिकारिक रूप से नेगी ने उसमें पहला वोट डाला था। उसके बाद से उन्होंने कुल 34 चुनावों में मतदान किया।
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राजस्थान तृतीय श्रेणी शिक्षक (3rd Grade Teacher) भर्ती 2025 (L-1 BSTC)की विस्तृत विज्ञप्ति जारी ✅
कुल पदों की संख्या : 5000
REET Mains 2025 की परीक्षा 17 से 21 जनवरी 2026 को आयोजित होगी।
Note : ऑनलाइन आवेदन 07 नवंबर से 06 दिसंबर 2025 तक भरे जाएंगे।
राजस्थान तृतीय श्रेणी शिक्षक (3rd Grade Teacher) भर्ती 2025 (L-2 B.Ed)की विस्तृत विज्ञप्ति जारी ✅
कुल पदों की संख्या : 2123
REET Mains 2025 की परीक्षा 17 से 21 जनवरी 2026 को आयोजित होगी।
Note : ऑनलाइन आवेदन 07 नवंबर से 06 दिसंबर 2025 तक भरे जाएंगे।
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https://t.me/realstudyclasses
कुल पदों की संख्या : 5000
REET Mains 2025 की परीक्षा 17 से 21 जनवरी 2026 को आयोजित होगी।
Note : ऑनलाइन आवेदन 07 नवंबर से 06 दिसंबर 2025 तक भरे जाएंगे।
राजस्थान तृतीय श्रेणी शिक्षक (3rd Grade Teacher) भर्ती 2025 (L-2 B.Ed)की विस्तृत विज्ञप्ति जारी ✅
कुल पदों की संख्या : 2123
REET Mains 2025 की परीक्षा 17 से 21 जनवरी 2026 को आयोजित होगी।
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*📜 10 नवम्बर 📜*
*🎀 शांति एवं विकास हेतु 'विश्व विज्ञान दिवस' (यूनेस्को) 🎀*
प्रत्येक वर्ष 10 नवम्बर को दुनिया के कई देशों में शांति और विकास के लिए "विश्व विज्ञान दिवस" मनाया जाता है। इसके तहत शांति एवं विकास कार्यों में विज्ञान के योगदान के बारे में बताया जाता है। यह दिन समाज में विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका और उभरते वैज्ञानिक मुद्दों पर बहस में व्यापक जनता को जोड़ने की आवश्यकता को उजागर करने के लिए मनाया जाता है।
>> विश्व विज्ञान दिवस का इतिहास <<
विश्व विज्ञान दिवस मनाए जाने की घोषणा साल 2001 में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) द्वारा की गई थी और इसे 2002 में पहली बार मनाया गया था। यूनेस्को द्वारा इस दिवस की स्थापना दुनिया भर में विज्ञान के लाभों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए की गई थी।
>> विश्व विज्ञान दिवस का उद्देश्य <<
शांति और विकास के लिए विश्व विज्ञान दिवस, शांति एवं विकास कार्यों में विज्ञान के योगदान के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। इस दिन सभी विज्ञान संस्थानों, जैसे राष्ट्रीय एवं अन्य विज्ञान प्रयोगशालाएं, विज्ञान अकादमियों, स्कूल और कॉल
*🎀 शांति एवं विकास हेतु 'विश्व विज्ञान दिवस' (यूनेस्को) 🎀*
प्रत्येक वर्ष 10 नवम्बर को दुनिया के कई देशों में शांति और विकास के लिए "विश्व विज्ञान दिवस" मनाया जाता है। इसके तहत शांति एवं विकास कार्यों में विज्ञान के योगदान के बारे में बताया जाता है। यह दिन समाज में विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका और उभरते वैज्ञानिक मुद्दों पर बहस में व्यापक जनता को जोड़ने की आवश्यकता को उजागर करने के लिए मनाया जाता है।
>> विश्व विज्ञान दिवस का इतिहास <<
विश्व विज्ञान दिवस मनाए जाने की घोषणा साल 2001 में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) द्वारा की गई थी और इसे 2002 में पहली बार मनाया गया था। यूनेस्को द्वारा इस दिवस की स्थापना दुनिया भर में विज्ञान के लाभों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए की गई थी।
>> विश्व विज्ञान दिवस का उद्देश्य <<
शांति और विकास के लिए विश्व विज्ञान दिवस, शांति एवं विकास कार्यों में विज्ञान के योगदान के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। इस दिन सभी विज्ञान संस्थानों, जैसे राष्ट्रीय एवं अन्य विज्ञान प्रयोगशालाएं, विज्ञान अकादमियों, स्कूल और कॉल
*📜 13 नवम्बर 📜*
*🌹 शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह // जयंती 🌹*
जन्म : 13 नवंबर 1780
मृत्यु : 27 जून 1839
अठारहवीं सदी के पंजाब में सिखों की शुकरचकिया मिसल (छोटी रियासत) के उत्तराधिकारी के रूप में 13 नवम्बर 1780 को गुजराँवाला में जन्मे रणजीत सिंह ने अपने शौर्य, पराक्रम, सूझबूझ और कूटनीति से सिख राज्य की सीमाएँ अटक, पेशावर, काबुल और जमरूद तक पहुँचा दी थीं।
रणजीत सिंह के पिता का नाम सरदार महासिंह था। जब रणजीत सिंह केवल 12 वर्ष के थे, तब महासिंह के देहान्त से मिसल की देखभाल की जिम्मेदारी उनकी माता और रियासत की रेजीडेण्ट महोतर कौर पर आ पड़ी; पर असली सत्ता एक अन्य महत्वाकांक्षी महिला रानी सुधा कौर के हाथ में थी। उसमें प्रशासनिक क्षमता न होने से सर्वत्र अव्यवस्था व्याप्त थी।
रणजीत सिंह ने होश सँभालते ही 1799 में लाहौर और 1805 में अमृतसर पर कठोर नियंत्रण स्थापित किया। फिर कसूर, जम्मू, मुल्तान, काँगड़ा, शिमला और कश्मीर को क्रमशः अपने राज्य में मिलाया। जम्मू के डोगरा राजा गुलाब सिंह के पराक्रमी सेनानायक जोरावर सिंह के शौर्य से उन्होंने लद्दाख पर भी अधिकार कर लिया। अपने राज्य की सीमाओं का विस्तार कर रणजीत सिंह ने सब
*🌹 शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह // जयंती 🌹*
जन्म : 13 नवंबर 1780
मृत्यु : 27 जून 1839
अठारहवीं सदी के पंजाब में सिखों की शुकरचकिया मिसल (छोटी रियासत) के उत्तराधिकारी के रूप में 13 नवम्बर 1780 को गुजराँवाला में जन्मे रणजीत सिंह ने अपने शौर्य, पराक्रम, सूझबूझ और कूटनीति से सिख राज्य की सीमाएँ अटक, पेशावर, काबुल और जमरूद तक पहुँचा दी थीं।
रणजीत सिंह के पिता का नाम सरदार महासिंह था। जब रणजीत सिंह केवल 12 वर्ष के थे, तब महासिंह के देहान्त से मिसल की देखभाल की जिम्मेदारी उनकी माता और रियासत की रेजीडेण्ट महोतर कौर पर आ पड़ी; पर असली सत्ता एक अन्य महत्वाकांक्षी महिला रानी सुधा कौर के हाथ में थी। उसमें प्रशासनिक क्षमता न होने से सर्वत्र अव्यवस्था व्याप्त थी।
रणजीत सिंह ने होश सँभालते ही 1799 में लाहौर और 1805 में अमृतसर पर कठोर नियंत्रण स्थापित किया। फिर कसूर, जम्मू, मुल्तान, काँगड़ा, शिमला और कश्मीर को क्रमशः अपने राज्य में मिलाया। जम्मू के डोगरा राजा गुलाब सिंह के पराक्रमी सेनानायक जोरावर सिंह के शौर्य से उन्होंने लद्दाख पर भी अधिकार कर लिया। अपने राज्य की सीमाओं का विस्तार कर रणजीत सिंह ने सब
*📜 15 नवम्बर 📜*
*🌹 भगवान बिरसा मुंडा // जयंती 🌹*
जन्म : 15 नवंबर 1875
मृत्यु : 09 जून 1900
मुंडा जनजाति से ताल्लुक रखने वाले बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को हुआ था। 19वीं शताब्दी के अंत में ब्रिटिश शासन के दौरान उन्होंने 19वीं शताबदी में आदिवासी बेल्ट में बंगाल प्रेसीडेंसी (अब झारखंड) में आदिवासी धार्मिक सहस्राब्दी आंदोलन का नेतृत्व किया। उनकी जयंती देश में बिरसा मुंडा जयंती के रूप में मनाई जाती है। इसी दिन झारखंड स्थापना दिवस भी है। झारखंड साल 2000 में बिहार से अलग हुआ था।
>> कौन हैं बिरसा मुंडा <<
बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को में एक गरीब किसान परिवार में हुआ था। जो जनजातीय समूह मुंडा से संबंध रखते थे और झारखण्ड निवासी थे। बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश औपनिवेशिक व्यवस्था की शोषक व्यवस्था के खिलाफ महत्वपूर्ण योगदान दिया था। 1 अक्टूबर 1894 को वह एक प्रखर नेता के रूप में उभरे और उन्होंने सभी मुंडाओं को इकट्ठा कर अंग्रेजो से लगान माफी के लिये आन्दोलन किया। इस आंदोलन ने अंग्रेजों को हिलाकर रख दिया। इसके बाद उन्हें 1895 में गिरफ़्तार कर हजारीबाग केन्द्रीय कारागार में दो साल के कारावास की सजा दी गयी। उन
*🌹 भगवान बिरसा मुंडा // जयंती 🌹*
जन्म : 15 नवंबर 1875
मृत्यु : 09 जून 1900
मुंडा जनजाति से ताल्लुक रखने वाले बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को हुआ था। 19वीं शताब्दी के अंत में ब्रिटिश शासन के दौरान उन्होंने 19वीं शताबदी में आदिवासी बेल्ट में बंगाल प्रेसीडेंसी (अब झारखंड) में आदिवासी धार्मिक सहस्राब्दी आंदोलन का नेतृत्व किया। उनकी जयंती देश में बिरसा मुंडा जयंती के रूप में मनाई जाती है। इसी दिन झारखंड स्थापना दिवस भी है। झारखंड साल 2000 में बिहार से अलग हुआ था।
>> कौन हैं बिरसा मुंडा <<
बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को में एक गरीब किसान परिवार में हुआ था। जो जनजातीय समूह मुंडा से संबंध रखते थे और झारखण्ड निवासी थे। बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश औपनिवेशिक व्यवस्था की शोषक व्यवस्था के खिलाफ महत्वपूर्ण योगदान दिया था। 1 अक्टूबर 1894 को वह एक प्रखर नेता के रूप में उभरे और उन्होंने सभी मुंडाओं को इकट्ठा कर अंग्रेजो से लगान माफी के लिये आन्दोलन किया। इस आंदोलन ने अंग्रेजों को हिलाकर रख दिया। इसके बाद उन्हें 1895 में गिरफ़्तार कर हजारीबाग केन्द्रीय कारागार में दो साल के कारावास की सजा दी गयी। उन
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*📜 15 नवम्बर 📜*
*🌹 भगवान बिरसा मुंडा // जयंती 🌹*
जन्म : 15 नवंबर 1875
मृत्यु : 09 जून 1900
मुंडा जनजाति से ताल्लुक रखने वाले बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को हुआ था। 19वीं शताब्दी के अंत में ब्रिटिश शासन के दौरान उन्होंने 19वीं शताबदी में आदिवासी बेल्ट में बंगाल प्रेसीडेंसी (अब झारखंड) में आदिवासी धार्मिक सहस्राब्दी आंदोलन का नेतृत्व किया। उनकी जयंती देश में बिरसा मुंडा जयंती के रूप में मनाई जाती है। इसी दिन झारखंड स्थापना दिवस भी है। झारखंड साल 2000 में बिहार से अलग हुआ था।
>> कौन हैं बिरसा मुंडा <<
बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को में एक गरीब किसान परिवार में हुआ था। जो जनजातीय समूह मुंडा से संबंध रखते थे और झारखण्ड निवासी थे। बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश औपनिवेशिक व्यवस्था की शोषक व्यवस्था के खिलाफ महत्वपूर्ण योगदान दिया था। 1 अक्टूबर 1894 को वह एक प्रखर नेता के रूप में उभरे और उन्होंने सभी मुंडाओं को इकट्ठा कर अंग्रेजो से लगान माफी के लिये आन्दोलन किया। इस आंदोलन ने अंग्रेजों को हिलाकर रख दिया। इसके बाद उन्हें 1895 में गिरफ़्तार कर हजारीबाग केन्द्रीय कारागार में दो साल के कारावास की सजा दी गयी। उन
*🌹 भगवान बिरसा मुंडा // जयंती 🌹*
जन्म : 15 नवंबर 1875
मृत्यु : 09 जून 1900
मुंडा जनजाति से ताल्लुक रखने वाले बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को हुआ था। 19वीं शताब्दी के अंत में ब्रिटिश शासन के दौरान उन्होंने 19वीं शताबदी में आदिवासी बेल्ट में बंगाल प्रेसीडेंसी (अब झारखंड) में आदिवासी धार्मिक सहस्राब्दी आंदोलन का नेतृत्व किया। उनकी जयंती देश में बिरसा मुंडा जयंती के रूप में मनाई जाती है। इसी दिन झारखंड स्थापना दिवस भी है। झारखंड साल 2000 में बिहार से अलग हुआ था।
>> कौन हैं बिरसा मुंडा <<
बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को में एक गरीब किसान परिवार में हुआ था। जो जनजातीय समूह मुंडा से संबंध रखते थे और झारखण्ड निवासी थे। बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश औपनिवेशिक व्यवस्था की शोषक व्यवस्था के खिलाफ महत्वपूर्ण योगदान दिया था। 1 अक्टूबर 1894 को वह एक प्रखर नेता के रूप में उभरे और उन्होंने सभी मुंडाओं को इकट्ठा कर अंग्रेजो से लगान माफी के लिये आन्दोलन किया। इस आंदोलन ने अंग्रेजों को हिलाकर रख दिया। इसके बाद उन्हें 1895 में गिरफ़्तार कर हजारीबाग केन्द्रीय कारागार में दो साल के कारावास की सजा दी गयी। उन
हर exam में पूछे जाना वाला टॉपिक
📖 राज्यपाल – संबंधित अनुच्छेद 📖
अनु. 153 – राज्यों में राज्यपाल का पद।
अनु. 154 – राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित।
अनु. 155 – राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा।
अनु. 156 – कार्यकाल (पद की अवधि)।
अनु. 157 – राज्यपाल बनने की योग्यता।
अनु. 158 – राज्यपाल के पद की शर्तें।
अनु. 159 – पद की शपथ ।
अनु. 160 – राज्यपाल पद की आकस्मिक रिक्ति।
अनु. 161 – राज्यपाल के क्षमादान की शक्ति।
अनु. 162 – राज्य की कार्यपालिका शक्ति का क्षेत्र।
अनु. 165 – राज्यपाल के द्वारा महाधिवक्ता की नियुक्ति की जाती है।
अनु. 171 – राज्य विधान परिषद के कुल सदस्यो का 1/6 भाग राज्यपाल के द्वारा मनोनित।
अनु. 174 – राज्यपाल द्वारा राज्य विधानमंडल के सत्र को आहूत करना ,सदनो का सत्रावसान तथा विधानसभा का विघटन।
अनु. 175 – राज्यपाल का विधानमंडल को अभिभाषण देने और संदेश भेजने का अधिकार।
अनु. 176 – राज्यपाल का विशेष अभिभाषण (विधानमंडल के पहले सत्र में)।
अनु. 200 – विधेयक पर राज्यपाल की स्वीकृति, रोक या पुनर्विचार हेतु लौटाना।
अनु. 213 – राज्यपाल के अध्यादेश जारी करने की शक्ति।
अनु. 233 – उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सलाह के बाद जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पदस्थापना, प्रमोशन।
अनु. 316 – लोक सेवा आयोग (राज्य) के अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल के द्वारा।
अनु. 356 – राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति शासन की सिफारिश।
अनु. 361 – राष्ट्रपति व राज्यपाल का संरक्षण।
📖 राज्यपाल – संबंधित अनुच्छेद 📖
अनु. 153 – राज्यों में राज्यपाल का पद।
अनु. 154 – राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित।
अनु. 155 – राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा।
अनु. 156 – कार्यकाल (पद की अवधि)।
अनु. 157 – राज्यपाल बनने की योग्यता।
अनु. 158 – राज्यपाल के पद की शर्तें।
अनु. 159 – पद की शपथ ।
अनु. 160 – राज्यपाल पद की आकस्मिक रिक्ति।
अनु. 161 – राज्यपाल के क्षमादान की शक्ति।
अनु. 162 – राज्य की कार्यपालिका शक्ति का क्षेत्र।
अनु. 165 – राज्यपाल के द्वारा महाधिवक्ता की नियुक्ति की जाती है।
अनु. 171 – राज्य विधान परिषद के कुल सदस्यो का 1/6 भाग राज्यपाल के द्वारा मनोनित।
अनु. 174 – राज्यपाल द्वारा राज्य विधानमंडल के सत्र को आहूत करना ,सदनो का सत्रावसान तथा विधानसभा का विघटन।
अनु. 175 – राज्यपाल का विधानमंडल को अभिभाषण देने और संदेश भेजने का अधिकार।
अनु. 176 – राज्यपाल का विशेष अभिभाषण (विधानमंडल के पहले सत्र में)।
अनु. 200 – विधेयक पर राज्यपाल की स्वीकृति, रोक या पुनर्विचार हेतु लौटाना।
अनु. 213 – राज्यपाल के अध्यादेश जारी करने की शक्ति।
अनु. 233 – उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सलाह के बाद जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पदस्थापना, प्रमोशन।
अनु. 316 – लोक सेवा आयोग (राज्य) के अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल के द्वारा।
अनु. 356 – राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति शासन की सिफारिश।
अनु. 361 – राष्ट्रपति व राज्यपाल का संरक्षण।
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*📜 20 नवम्बर 📜*
*🌹 प्रसिद्ध धावक मिलखा सिंह // जयंती 🌹*
जन्म : 20 नवंबर 1929
मृत्यु : 18 जून 2021
मिलखा सिंह भारत के ऐसे प्रसिद्ध धावक थे जिन्हें लोग फ्लाइंग सिक्ख के नाम से जानते हैं। सन् 1956 में मेलबर्न में आयोजित हुए ओलंपिक खेलों में उन्होंने पहली बार 200 मीटर और 400 मीटर की रेस में भाग लिया था। मिलखा सिंह ने 1958 में कटक में आयोजित नेशनल गेम्स में 200 मीटर और 400 मीटर स्पर्धा में रिकॉर्ड बनाए। इसके बाद उसी साल टोक्यो में आयोजित हुए एशियन गेम्स में उन्होंने 200 मीटर और 400 मीटर की दौड़ में भी गोल्ड मेडल अपने नाम किया। साल 1958 में ही इंग्लैंड के कार्डिफ में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में मिलखा सिंह ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए 400 मीटर की रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उस समय आज़ाद भारत में कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाले वे पहले भारतीय थे।
मिलखा सिंह का जन्म 20 नवम्बर, 1929 गोविंदपुरा (जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है) में एक सिक्ख परिवार में हुआ था। उनका बचपन बेहद कठिन दौर से गुजरा।
*🌹 प्रसिद्ध धावक मिलखा सिंह // जयंती 🌹*
जन्म : 20 नवंबर 1929
मृत्यु : 18 जून 2021
मिलखा सिंह भारत के ऐसे प्रसिद्ध धावक थे जिन्हें लोग फ्लाइंग सिक्ख के नाम से जानते हैं। सन् 1956 में मेलबर्न में आयोजित हुए ओलंपिक खेलों में उन्होंने पहली बार 200 मीटर और 400 मीटर की रेस में भाग लिया था। मिलखा सिंह ने 1958 में कटक में आयोजित नेशनल गेम्स में 200 मीटर और 400 मीटर स्पर्धा में रिकॉर्ड बनाए। इसके बाद उसी साल टोक्यो में आयोजित हुए एशियन गेम्स में उन्होंने 200 मीटर और 400 मीटर की दौड़ में भी गोल्ड मेडल अपने नाम किया। साल 1958 में ही इंग्लैंड के कार्डिफ में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में मिलखा सिंह ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए 400 मीटर की रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उस समय आज़ाद भारत में कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाले वे पहले भारतीय थे।
मिलखा सिंह का जन्म 20 नवम्बर, 1929 गोविंदपुरा (जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है) में एक सिक्ख परिवार में हुआ था। उनका बचपन बेहद कठिन दौर से गुजरा।