The public protest against Special Intensive Revision (SIR) exercise which resulted in 65 lakh voter names being removed, and the fear across the country with regard to the Citizenship was a successful one, in Ranchi today. A Petition addressed to the President of India via Governor of Jharkhand was endorsed by many organisations including -
** Jharkhand Janadhikar Mahasabha ; Sajha Kadam ; United Milli Forum (UMF) Jharkhand ; Adivasi Sangharsh Morcha ; Adivasi Adhikar Manch ; Loktantrik Rashtra Nirman Abhiyan ; AILAJ ; Samajwadi Jan Parishad ; Fr Stan Swamy Nyaya Morcha ; All India Students Association (AISA) ; Jharkhand NREGA Watch ; PUCL ; AIPWA ; Bagaicha ; Janmukti Sangharsh Vahini (JASVA) ; Jharkhand Nirman Mazdoor Union ; CPI ; CPM and CPIML Liberation.
Individual Signatories included - Elina Horo ; Siraj Dutta ; Tom Kavala ; Praveer Peter ; Afzal Anis ; Manoj Bhakt ; Anant Prasad Gupta ; Bharat Bhushan Choudhary ; Antony PM ; Md Sohail Ansari ; Triloki ; Taramani Sahu ; Leena Padam ; Geeta Mandal ; Kumar Varun ; Priyasheela Besra ; Sushma Gadi ; Ziaul Haque ; Manthan ; Shahroz Qamar ; Nandita Bhattacharya ; Bhim Sahu ; Sunita Devi ; Chhotu Munda ; Peter Martin ; Sunita Kachchhap
मोदी सरकार ने चुनाव आयोग का इस्तेमाल कर बिहार के लोगों पर अपनी नागरिकता प्रमाणित करने का अनुचित दबाव बनाया। एक बहुत ही छोटी समय सीमा के भीतर निर्देशित प्रपत्रों को प्रस्तुत करने को कहा था। SIR के पहले चरण में ही लगभग 65 लाख मतदाताओं का नाम हटा दिया गया है। जिस प्रकार यह प्रक्रिया चलायी गई है, इससे स्पष्ट है कि इसमें ज्यादातर भूमिहीन, प्रवासी मजदूर और गरीब तबके के लोग हैं। इतने लोगों की नागरिकता को संदिग्ध घोषित करना और इनके मताधिकार को छीनने का अधिकार चुनाव आयोग या किसी भी संस्था पास नहीं है। अतः इस पर अविलंब रोक लगाया जाए।
देश के कई हिस्सों में नागरिकता और संबंधित प्रपत्रों की जांच को लेकर प्रशासनिक कार्रवाइयां चर्चा में हैं। गुरुग्राम और असम इसका विशेष उदाहरण है। इन जगहों में बांग्लाभाषियों और खासकर अल्पसंख्यकों की नागरिकता पर जानबूझकर मनमाने तरीके से संदेह किया जा रहा है । बिना पर्याप्त सबूतों के उन्हें देश से बाहर भी किया जा रहा है। इससे प्रवासी मजदूरों और अल्पसंख्यकों में भय का माहौल बन रहा है। इस पर मोदी सरकार की चुप्पी परोक्ष संरक्षण या प्रोत्साहन का वातावरण बना रही है। प्रवासी मजदूरों, अल्पसंख्यकों और खास भाषाभाषियों की पहचान के कागज जांच के आड़ में हो रहे हमलों पर फौरन रोक लगाने की जरूरत है। किसी भी भारतीय की नागरिकता पर संदेह के पहले सरकार को पुख्ता सबूत पेश करना चाहिए।
महोदया, गत विधानसभा चुनाव में भाजपा के केंद्रीय मंत्रियों ने झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठ का जोर-शोर से प्रचार किया था। उनकी सरकार आज तक इस संबंध में कोई आंकड़ा या तथ्य पेश नहीं कर पायी है। नागरिकता को लेकर मोदी सरकार महज अपने अनुकूल राजनीतिक ध्रुवीकरण में लगी है। और मतदाता सूची को अपने स्वार्थ के अनुरूप तैयार करने में लगी है।
** समर्थक संगठन - झारखण्ड जनाधिकार महासभा ; साझा कदम; यूनाइटेड मिल्ली फोरम (यूएमएफ) झारखंड; आदिवासी संघर्ष मोर्चा ; आदिवासी अधिकार मंच ; लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण अभियान ; अइलज ; समाजवादी जन परिषद ; फादर स्टेन स्वामी न्याय मोर्चा ; ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए); झारखंड नरेगा वॉच; पीयूसीएल ; ऐपवा ; बगइचा ; जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी (जसवा); झारखण्ड निर्माण मजदूर यूनियन ; सीपीआई; सीपीएम और सीपीआईएमएल लिबरेशन.
** Jharkhand Janadhikar Mahasabha ; Sajha Kadam ; United Milli Forum (UMF) Jharkhand ; Adivasi Sangharsh Morcha ; Adivasi Adhikar Manch ; Loktantrik Rashtra Nirman Abhiyan ; AILAJ ; Samajwadi Jan Parishad ; Fr Stan Swamy Nyaya Morcha ; All India Students Association (AISA) ; Jharkhand NREGA Watch ; PUCL ; AIPWA ; Bagaicha ; Janmukti Sangharsh Vahini (JASVA) ; Jharkhand Nirman Mazdoor Union ; CPI ; CPM and CPIML Liberation.
Individual Signatories included - Elina Horo ; Siraj Dutta ; Tom Kavala ; Praveer Peter ; Afzal Anis ; Manoj Bhakt ; Anant Prasad Gupta ; Bharat Bhushan Choudhary ; Antony PM ; Md Sohail Ansari ; Triloki ; Taramani Sahu ; Leena Padam ; Geeta Mandal ; Kumar Varun ; Priyasheela Besra ; Sushma Gadi ; Ziaul Haque ; Manthan ; Shahroz Qamar ; Nandita Bhattacharya ; Bhim Sahu ; Sunita Devi ; Chhotu Munda ; Peter Martin ; Sunita Kachchhap
मोदी सरकार ने चुनाव आयोग का इस्तेमाल कर बिहार के लोगों पर अपनी नागरिकता प्रमाणित करने का अनुचित दबाव बनाया। एक बहुत ही छोटी समय सीमा के भीतर निर्देशित प्रपत्रों को प्रस्तुत करने को कहा था। SIR के पहले चरण में ही लगभग 65 लाख मतदाताओं का नाम हटा दिया गया है। जिस प्रकार यह प्रक्रिया चलायी गई है, इससे स्पष्ट है कि इसमें ज्यादातर भूमिहीन, प्रवासी मजदूर और गरीब तबके के लोग हैं। इतने लोगों की नागरिकता को संदिग्ध घोषित करना और इनके मताधिकार को छीनने का अधिकार चुनाव आयोग या किसी भी संस्था पास नहीं है। अतः इस पर अविलंब रोक लगाया जाए।
देश के कई हिस्सों में नागरिकता और संबंधित प्रपत्रों की जांच को लेकर प्रशासनिक कार्रवाइयां चर्चा में हैं। गुरुग्राम और असम इसका विशेष उदाहरण है। इन जगहों में बांग्लाभाषियों और खासकर अल्पसंख्यकों की नागरिकता पर जानबूझकर मनमाने तरीके से संदेह किया जा रहा है । बिना पर्याप्त सबूतों के उन्हें देश से बाहर भी किया जा रहा है। इससे प्रवासी मजदूरों और अल्पसंख्यकों में भय का माहौल बन रहा है। इस पर मोदी सरकार की चुप्पी परोक्ष संरक्षण या प्रोत्साहन का वातावरण बना रही है। प्रवासी मजदूरों, अल्पसंख्यकों और खास भाषाभाषियों की पहचान के कागज जांच के आड़ में हो रहे हमलों पर फौरन रोक लगाने की जरूरत है। किसी भी भारतीय की नागरिकता पर संदेह के पहले सरकार को पुख्ता सबूत पेश करना चाहिए।
महोदया, गत विधानसभा चुनाव में भाजपा के केंद्रीय मंत्रियों ने झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठ का जोर-शोर से प्रचार किया था। उनकी सरकार आज तक इस संबंध में कोई आंकड़ा या तथ्य पेश नहीं कर पायी है। नागरिकता को लेकर मोदी सरकार महज अपने अनुकूल राजनीतिक ध्रुवीकरण में लगी है। और मतदाता सूची को अपने स्वार्थ के अनुरूप तैयार करने में लगी है।
** समर्थक संगठन - झारखण्ड जनाधिकार महासभा ; साझा कदम; यूनाइटेड मिल्ली फोरम (यूएमएफ) झारखंड; आदिवासी संघर्ष मोर्चा ; आदिवासी अधिकार मंच ; लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण अभियान ; अइलज ; समाजवादी जन परिषद ; फादर स्टेन स्वामी न्याय मोर्चा ; ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए); झारखंड नरेगा वॉच; पीयूसीएल ; ऐपवा ; बगइचा ; जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी (जसवा); झारखण्ड निर्माण मजदूर यूनियन ; सीपीआई; सीपीएम और सीपीआईएमएल लिबरेशन.
❤1