लखनऊ के सरोजनीनगर विकास खंड में ग्राम पंचायतों के डिजिटल कार्यों हेतु एक पायलट प्रोजेक्ट प्रारम्भ किया जा रहा है, जिसमें NGO/CSR के माध्यम से Digital Support Staff की तैनाती प्रस्तावित है।
उक्त पायलट में जिन डिजिटल कार्यों का उल्लेख किया गया है वे सभी कार्य पंचायत सहायक वर्तमान में नियमित रूप से निर्वहन कर रहे हैं। यह व्यवस्था हम पंचायत सहायकों के हित में प्रतीत नहीं होती क्योंकि भविष्य में इससे पंचायत सहायकों के स्थायीकरण एवं मानदेय वृद्धि की मांगों के विरुद्ध यह तर्क प्रस्तुत किया जा सकता है कि ग्राम पंचायतों के नियमित कार्य संस्थाओं के माध्यम से भी संपादित किए जा सकते हैं।
और यदि इस व्यवस्था को पंचायत सहायकों के लिए सहायक (Supporting Staff) के रूप में प्रस्तावित किया गया है तो यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि
क्या सरकार यह स्वीकार करती है कि पंचायत सहायक ग्राम पंचायतों में स्थायी कर्मियों के समान कार्य एवं उत्तरदायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। क्योंकि सपोर्ट तभी दिया जाता जब स्तंभ पर वजन जिम्मेदारिया जायदा हो
अगर हां तो स्थाईकरण क्यों नहीं किया जा रहा? मानदेय वृद्धि क्यों नहीं की जा रही
उक्त पायलट में जिन डिजिटल कार्यों का उल्लेख किया गया है वे सभी कार्य पंचायत सहायक वर्तमान में नियमित रूप से निर्वहन कर रहे हैं। यह व्यवस्था हम पंचायत सहायकों के हित में प्रतीत नहीं होती क्योंकि भविष्य में इससे पंचायत सहायकों के स्थायीकरण एवं मानदेय वृद्धि की मांगों के विरुद्ध यह तर्क प्रस्तुत किया जा सकता है कि ग्राम पंचायतों के नियमित कार्य संस्थाओं के माध्यम से भी संपादित किए जा सकते हैं।
और यदि इस व्यवस्था को पंचायत सहायकों के लिए सहायक (Supporting Staff) के रूप में प्रस्तावित किया गया है तो यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि
क्या सरकार यह स्वीकार करती है कि पंचायत सहायक ग्राम पंचायतों में स्थायी कर्मियों के समान कार्य एवं उत्तरदायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। क्योंकि सपोर्ट तभी दिया जाता जब स्तंभ पर वजन जिम्मेदारिया जायदा हो
अगर हां तो स्थाईकरण क्यों नहीं किया जा रहा? मानदेय वृद्धि क्यों नहीं की जा रही
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1 जनवरी 2026 से महत्वपूर्ण नियम और बदलाव लागू !!!!!
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1)- 8वां वेतन आयोग-
केंद्र और राज्य सरकारी कर्मचारियों की सैलरी संरचना में संशोधन होगा, जिसमें 25-30% तक की बढ़ोतरी संभव है. ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि फिटमेंट फैक्टर 2.10-2.89 तक हो सकता है, जिससे न्यूनतम वेतन ₹18,000 से बढ़कर ₹41,000 हो जाएगा.
2)- महंगाई भत्ता बढ़ोतरी - सरकारी राज्य कर्मचारियों के महंगाई भत्तों में वृद्धि होगी, जो मुद्रास्फीति के कारण सैलरी में अतिरिक्त बढ़ोतरी प्रदान करेगी.
3)- न्यूनतम मजदूरी की समीक्षा-
देश में पार्ट-टाइम और दैनिक मजदूरों के न्यूनतम वेतन में बढ़ोत्तरी की समीक्षा होगी. न्यूनतम दैनिक वेतन में बढ़ोतरी सम्भव है.
4)- क्रेडिट स्कोर अपडेट-
क्रेडिट ब्यूरो अब क्रेडिट स्कोर को हर सप्ताह अपडेट करेंगे.आपको बता दें पहले यह 15 दिनों में होता था.जानकारों का मानना है इससे लोन चुकती का असर तेजी से दिखेगा.
5)- फिक्स्ड डिपॉजिट दरें - फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों में संशोधन होगा जिन्हें 7.1 से 7.8 तक किया जा सकता है. अलग अलग बैंकों में अलग अलग होगा.
6)- लोन ब्याज दरें - SBI, PNB, HDFC सहित तमाम अन्य बैंकों ने लोन की ब्याज दरों में कटौती की है, जो ग्राहकों को राहत प्रदान करेंगे.
7)- PAN-आधार लिंकिंग अनिवार्य - PAN कार्ड को आधार कार्ड से लिंक न करने पर 1 जनवरी से PAN निष्क्रिय हो जाएगा, जिससे आपकी बैंकिंग, टैक्स रिफंड और सरकारी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं.आधार कार्ड को PAN कार्ड से लिंकिंग के लिए ₹1,000 शुल्क निर्धारित किया गया है.
8) - SIM वेरिफिकेशन नियम - WhatsApp,Telegram जैसे अन्य ऐप्स के लिए SIM वेरिफिकेशन नियम सख्त होंगे, जिसमें फ्रॉड रोकने के लिए 90 दिनों में सक्रिय SIM चेक और वेब वर्जन के लिए हर 6 घंटे में लॉगआउट जरूरी होगा.
9)- UPI और डिजिटल पेमेंट नियम - UPI ट्रांजैक्शन में सख्त चेक लागू होंगे, जिसमें PAN-आधार लिंकिंग और SIM वेरिफिकेशन शामिल है. 2026 में UPI से सामान्य लेनदेन के लिए दिन में ₹1 लाख तक भेज सकते हैं, वहीं शिक्षा, स्वास्थ्य, IPO और बीमा जैसे खास कामों के लिए यह सीमा ₹5 लाख तक है. वेरिफाइड मर्चेंट्स को ₹10 लाख तक की अनुमति होगी.
10)- एलपीजी और कॉमर्शियल गैस कीमतें - घरेलू और कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में संशोधन होगा, जिसमें शुरुआत में ₹30-40 की कमी संभव है.
11)- नया इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म - नया ITR फॉर्म जारी होगा, जिसमें बैंक ट्रांजैक्शन और खर्चों की प्री-फिल्ड डिटेल्स होंगी, जिससे फाइलिंग आसान त्रुटि रहित बनेगी.
12)- पीएम-किसान योजना के लिए यूनिक किसान आईडी -उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में किसानों को यूनिक आईडी जारी की जा रही है, जो योजना की किस्तें पाने के लिए अनिवार्य होगी.
13)- फसल बीमा में बदलाव - पीएम फसल बीमा योजना में जंगली जानवरों से फसल नुकसान पर मुआवजा मिलेगा, अगर 72 घंटे में रिपोर्ट किया जाए तो.
14)- सोशल मीडिया कानून - 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर आयु प्रतिबंध और पैरेंटल कंट्रोल लागू हो सकते हैं, जिसमें DPDP एक्ट के तहत पैरेंटल कंसेंट अनिवार्य किया जा सकता है.
15)- प्रदूषण नियंत्रण के लिए वाहन प्रतिबंध - दिल्ली, नोएडा सहित पूरे NCR में डीजल-पेट्रोल कमर्शियल वाहनों पर प्रतिबंध बढ़ेगा, जिसमें डिलीवरी सेवाएं प्रभावित होकर और महँगी हो सकती हैं.
16)- डिजिटल राशन कार्ड - यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश सहित कुछ राज्यों में राशन कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य होगा, जिससे आधार-लिंक्ड ई-कार्ड जारी होंगे.
17)- नए टैक्स स्लैब - नई कर व्यवस्था के तहत ₹4 लाख तक की आय कर-मुक्त होगी. ₹12 लाख तक की कुल आय पर ₹60,000 की छूट (rebate) के कारण प्रभावी टैक्स शून्य हो सकता है.
18)- ATM उपयोग के नए शुल्क-
अब ग्राहकों को हर महीने 5 मुफ्त लेनदेन वित्तीय और गैर-वित्तीय दोनों की सीमा खत्म होने के बाद प्रत्येक लेनदेन के लिए ₹23 और लागू टैक्स देना होगा. पहले 21 रुपये लगते थे.
19)- एटीएम से पीएफ निकासी - मार्च 2026 से कर्मचारी अपने EPF फंड का 75% हिस्सा सीधे एटीएम और UPI के माध्यम से निकाल सकेंगे. इसका मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों में कागजी कार्यवाही को कम करना और ग्राहकों को उनके जमा पैसे तक तुरंत पहुंच प्रदान करना है.
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1)- 8वां वेतन आयोग-
केंद्र और राज्य सरकारी कर्मचारियों की सैलरी संरचना में संशोधन होगा, जिसमें 25-30% तक की बढ़ोतरी संभव है. ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि फिटमेंट फैक्टर 2.10-2.89 तक हो सकता है, जिससे न्यूनतम वेतन ₹18,000 से बढ़कर ₹41,000 हो जाएगा.
2)- महंगाई भत्ता बढ़ोतरी - सरकारी राज्य कर्मचारियों के महंगाई भत्तों में वृद्धि होगी, जो मुद्रास्फीति के कारण सैलरी में अतिरिक्त बढ़ोतरी प्रदान करेगी.
3)- न्यूनतम मजदूरी की समीक्षा-
देश में पार्ट-टाइम और दैनिक मजदूरों के न्यूनतम वेतन में बढ़ोत्तरी की समीक्षा होगी. न्यूनतम दैनिक वेतन में बढ़ोतरी सम्भव है.
4)- क्रेडिट स्कोर अपडेट-
क्रेडिट ब्यूरो अब क्रेडिट स्कोर को हर सप्ताह अपडेट करेंगे.आपको बता दें पहले यह 15 दिनों में होता था.जानकारों का मानना है इससे लोन चुकती का असर तेजी से दिखेगा.
5)- फिक्स्ड डिपॉजिट दरें - फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों में संशोधन होगा जिन्हें 7.1 से 7.8 तक किया जा सकता है. अलग अलग बैंकों में अलग अलग होगा.
6)- लोन ब्याज दरें - SBI, PNB, HDFC सहित तमाम अन्य बैंकों ने लोन की ब्याज दरों में कटौती की है, जो ग्राहकों को राहत प्रदान करेंगे.
7)- PAN-आधार लिंकिंग अनिवार्य - PAN कार्ड को आधार कार्ड से लिंक न करने पर 1 जनवरी से PAN निष्क्रिय हो जाएगा, जिससे आपकी बैंकिंग, टैक्स रिफंड और सरकारी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं.आधार कार्ड को PAN कार्ड से लिंकिंग के लिए ₹1,000 शुल्क निर्धारित किया गया है.
8) - SIM वेरिफिकेशन नियम - WhatsApp,Telegram जैसे अन्य ऐप्स के लिए SIM वेरिफिकेशन नियम सख्त होंगे, जिसमें फ्रॉड रोकने के लिए 90 दिनों में सक्रिय SIM चेक और वेब वर्जन के लिए हर 6 घंटे में लॉगआउट जरूरी होगा.
9)- UPI और डिजिटल पेमेंट नियम - UPI ट्रांजैक्शन में सख्त चेक लागू होंगे, जिसमें PAN-आधार लिंकिंग और SIM वेरिफिकेशन शामिल है. 2026 में UPI से सामान्य लेनदेन के लिए दिन में ₹1 लाख तक भेज सकते हैं, वहीं शिक्षा, स्वास्थ्य, IPO और बीमा जैसे खास कामों के लिए यह सीमा ₹5 लाख तक है. वेरिफाइड मर्चेंट्स को ₹10 लाख तक की अनुमति होगी.
10)- एलपीजी और कॉमर्शियल गैस कीमतें - घरेलू और कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में संशोधन होगा, जिसमें शुरुआत में ₹30-40 की कमी संभव है.
11)- नया इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म - नया ITR फॉर्म जारी होगा, जिसमें बैंक ट्रांजैक्शन और खर्चों की प्री-फिल्ड डिटेल्स होंगी, जिससे फाइलिंग आसान त्रुटि रहित बनेगी.
12)- पीएम-किसान योजना के लिए यूनिक किसान आईडी -उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में किसानों को यूनिक आईडी जारी की जा रही है, जो योजना की किस्तें पाने के लिए अनिवार्य होगी.
13)- फसल बीमा में बदलाव - पीएम फसल बीमा योजना में जंगली जानवरों से फसल नुकसान पर मुआवजा मिलेगा, अगर 72 घंटे में रिपोर्ट किया जाए तो.
14)- सोशल मीडिया कानून - 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर आयु प्रतिबंध और पैरेंटल कंट्रोल लागू हो सकते हैं, जिसमें DPDP एक्ट के तहत पैरेंटल कंसेंट अनिवार्य किया जा सकता है.
15)- प्रदूषण नियंत्रण के लिए वाहन प्रतिबंध - दिल्ली, नोएडा सहित पूरे NCR में डीजल-पेट्रोल कमर्शियल वाहनों पर प्रतिबंध बढ़ेगा, जिसमें डिलीवरी सेवाएं प्रभावित होकर और महँगी हो सकती हैं.
16)- डिजिटल राशन कार्ड - यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश सहित कुछ राज्यों में राशन कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य होगा, जिससे आधार-लिंक्ड ई-कार्ड जारी होंगे.
17)- नए टैक्स स्लैब - नई कर व्यवस्था के तहत ₹4 लाख तक की आय कर-मुक्त होगी. ₹12 लाख तक की कुल आय पर ₹60,000 की छूट (rebate) के कारण प्रभावी टैक्स शून्य हो सकता है.
18)- ATM उपयोग के नए शुल्क-
अब ग्राहकों को हर महीने 5 मुफ्त लेनदेन वित्तीय और गैर-वित्तीय दोनों की सीमा खत्म होने के बाद प्रत्येक लेनदेन के लिए ₹23 और लागू टैक्स देना होगा. पहले 21 रुपये लगते थे.
19)- एटीएम से पीएफ निकासी - मार्च 2026 से कर्मचारी अपने EPF फंड का 75% हिस्सा सीधे एटीएम और UPI के माध्यम से निकाल सकेंगे. इसका मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों में कागजी कार्यवाही को कम करना और ग्राहकों को उनके जमा पैसे तक तुरंत पहुंच प्रदान करना है.
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माननीय केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्रीमान Shivraj Singh Chouhan जी नें वर्चुअल बैठक के माध्यम से मनरेगाकर्मियों से से संवाद किया एक साथी नें उनसे अनुरोध किया कि "आदरणीय मामा जी आपसे निवेदन है कि हम लोगों को केंद्रीय कर्मचारी घोषित करके नियमितीकरण का सौगात दे देते तो बहुत अच्छा होता "।
इस बात पर माननीय मामा जी ठहाका लगा कर हंसने लगे और बोले कि आप लोगों का अपेक्षा कुछ ज्यादा ही है...
मेरे नजर में माननीय मामा जी को गंभीरता का परिचय देते हुए कोई उचित जबाब देना चाहिए था..
लेकिन क्या कहा जाय मनरेगाकर्मी इनकी नजर में हंसी के ही पात्र हैं...
जिस प्रकार पंचायत सहायकों का मानदेय 40 हजार किए जाने की मांग पर पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर जी ने हंसी के ठहाके लगाए थे उसी तरह रोजगार सेवकों के साथ भी मजाक चल रहा है
Video 👉 https://www.facebook.com/share/v/14W3pts2a8M/
इस बात पर माननीय मामा जी ठहाका लगा कर हंसने लगे और बोले कि आप लोगों का अपेक्षा कुछ ज्यादा ही है...
मेरे नजर में माननीय मामा जी को गंभीरता का परिचय देते हुए कोई उचित जबाब देना चाहिए था..
लेकिन क्या कहा जाय मनरेगाकर्मी इनकी नजर में हंसी के ही पात्र हैं...
जिस प्रकार पंचायत सहायकों का मानदेय 40 हजार किए जाने की मांग पर पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर जी ने हंसी के ठहाके लगाए थे उसी तरह रोजगार सेवकों के साथ भी मजाक चल रहा है
Video 👉 https://www.facebook.com/share/v/14W3pts2a8M/
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5967_पंचायत_सहायक_04_दिवसीय_प्रशिक्षण.pdf
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समस्त पंचायत सहायक / एकाउन्टेन्ट-कम-डाटा इन्ट्री आपरेटरों का 04 दिवसीय प्रशिक्षण कराये जाने के सम्बन्ध में
लखनऊ मंडल
लखनऊ मंडल
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DocScanner 31 Dec 2025 10-34 pm.pdf
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Crop survey
आप सभी साथियों को नववर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं 💐
हमें पूरा विश्वास है हम सब के प्रयासो से इस साल 2026 में इस पंचायत सहायक पद में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिलेगा
2026 आप सभी के लिए बहुत सारी खुशियां लाए
#HappyNewYear2026
हमें पूरा विश्वास है हम सब के प्रयासो से इस साल 2026 में इस पंचायत सहायक पद में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिलेगा
2026 आप सभी के लिए बहुत सारी खुशियां लाए
आज से टेलीग्राम पर भी बर्फ गिरने लगी 😂
#HappyNewYear2026
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Panchayat sahayak 04 days training 2026.pdf
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पंचायत सहायको की 4 दिवसीय ट्रेनिंग
जनपद लखनऊ
जनपद लखनऊ
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अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों को आर्थिक स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा ट्रैक्टर अनुदान योजना संचालित की जा रही है। योजना के तहत पात्र किसानों को 45 हॉर्स पावर अथवा उससे अधिक क्षमता के ट्रैक्टर की खरीद पर 3 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा नीचे दिए पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
https://agriculture.up.gov.in
https://agriculture.up.gov.in
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*एक ही जनगणना पर तीसरी बार लागू होगा पंचायत आरक्षण*
*2021 की जनगणना न होने से उत्पन्न हुई स्थिति*
*2011 की जनगणना ही होगी आरक्षण का मुख्य आधार*
लखनऊ। एसएनबी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में यह पहली बार होगा जब आरक्षण व्यवस्था लागू होने के बाद पंचायतों का आरक्षण तीसरी बार एक ही जनगणना पर लागू होगा। इससे पहले एक जनगणना पर अधिकतम दो बार आरक्षण लागू किया गया था। आरक्षण को लेकर यह स्थिति वर्ष 2021 में जनगणना होने के कारण उत्पन्न हो रही है। ऐसे में वर्ष 2011 की पुरानी जनगणना को ही मुख्य आधार मानकर आरक्षण लागू किया जाएगा। ऐसे में तमाम पंचायतों में उन वर्गों के लोगों को भी आरक्षण का लाभ मिल सकता है जहां पर उनकी जनसंख्या काफी कम है।
पंचायतों में त्रिस्तरीय व्यवस्था लागू होने के साथ ही आरक्षण व्यवस्था भी लागू की गयी थी। इसके तहत पंचायतों के सभी पदों ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत प्रमुख, क्षेत्र पंचायत सदस्य, जिला पंचायत अध्यक्ष व जिला पंचायत सदस्य में सभी वर्गों को आरक्षण दिया जाता रहा है। इसमें पिछड़ी जाति को 27 प्रतिशत, अनुसूचित जाति को 21 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है। इसके साथ ही सभी वर्गों में आरक्षित पदों में 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को दिया जाता है। पंचायतों में आरक्षण की यह व्यवस्था 1995 से लागू हुई जो वर्ष 1991 की जनगणना के आधार पर लागू की गयी थी। 1991 की जनगणना पर ही वर्ष 2000 के पंचायत चुनाव का आरक्षण लागू किया गया।
इसके बाद वर्ष 2001 की जनगणना पर वर्ष 2005 व 2010 के पंचायत चुनाव में आरक्षण लागू किया गया, फिर वर्ष 2011 की जनगणना पर 2015 व 2021 के पंचायत चुनाव कराये गये। अब स्थिति ऐसी उत्पन्न हो गयी है कि वर्ष 2021 में केन्द्र सरकार से जनगणना ही नहीं करायी है। यदि 2021 में जनगणना करायी जाती तो वर्ष 2026 में होने वाले पंचायत चुनाव में इसके आधार पर आरक्षण लागू किया जाता लेकिन जनगणना न होने के कारण अब 2026 के पंचायत चुनाव में भी वर्ष 2011 की जनगणना पर ही आरक्षण लागू करना पड़ेगा। भले ही पंचायतों में किसी वर्ग की जनसंख्या घट-बढ़ गयी हो। वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर जब वर्ष 2015 में आरक्षण लागू किया गया था तब प्रदेश में 59182 ग्राम पंचायतों में प्रधान पद का चुनाव कराया गया था। इसी तरह ग्राम पंचायत सदस्य के 742269 पदों, क्षेत्र पंचायत प्रमुख के 821 पदों, क्षेत्र पंचायत सदस्य के 77576 पदों, जिला पंचायत अध्यक्ष के 75 व जिला पंचायत सदस्य के 3112 पदों के लिए चुनाव कराया गया था। इसके बाद वर्ष 2021 में भी वर्ष 2011 की जनगणना पर ही आरक्षण लागू किया गया। वर्ष 2021 में प्रदेश में 58189 ग्राम पंचायतों में प्रधान पदों पर चुनाव कराया गया था। इसी तरह ग्राम पंचायत सदस्य के 732643, क्षेत्र पंचायत सदस्य के 75845, क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष के 826, जिला पंचायत अध्यक्ष के 75 व जिला पंचायत सदस्य के 3050 पदों के लिए चुनाव कराया गया था। अब 2026 के होने वाले पंचायत चुनाव में पंचायतीराज विभाग को आरक्षण लागू करने के लिए वर्ष 2011 की जनगणना का ही सहारा लेना पड़ेगा। इस वर्ष ग्राम प्रधान के 57694, ग्राम पंचायत सदस्य के 726141, क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष के 826, क्षेत्र पंचायत सदस्य के 75355, जिला पंचायत अध्यक्ष के 75 व जिला पंचायत सदस्य के 3021 पदों के लिए चुनाव होना है।
आरक्षण लागू करने में यह व्यवस्था होती है कि सबसे पहले एसटी, फिर एससी, फिर पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण लागू किया जाता है। इसमें यह भी वर्ष 2015 व 2021 के चुनाव में जो सीट किसी भी वर्ग के लिए आरक्षित की गयी थी उनको छोड़ते हुए शेष बची सीटों में उस वर्ग के लिए आरक्षण लागू किया जाएगा। उदाहरण के लिए यदि एससी का आरक्षण 21 प्रतिशत है तो दो चुनावों में 42 प्रतिशत सीटों पर एससी का आरक्षण लागू किया जा चुका है अब इसके बाद शेष बची 58 प्रतिशत सीटों में 21 प्रतिशत एससी के लिए आरक्षित की जाएंगी। ऐसे में तमाम ऐसी ग्राम पंचायतें व अन्य सीटें इस वर्ग के लिए आरक्षित होंगी जहां पर इनकी जनसंख्या काफी कम है। ऐसा ही आरक्षण अन्य वर्गों के लिए भी होगा।
*2021 की जनगणना न होने से उत्पन्न हुई स्थिति*
*2011 की जनगणना ही होगी आरक्षण का मुख्य आधार*
लखनऊ। एसएनबी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में यह पहली बार होगा जब आरक्षण व्यवस्था लागू होने के बाद पंचायतों का आरक्षण तीसरी बार एक ही जनगणना पर लागू होगा। इससे पहले एक जनगणना पर अधिकतम दो बार आरक्षण लागू किया गया था। आरक्षण को लेकर यह स्थिति वर्ष 2021 में जनगणना होने के कारण उत्पन्न हो रही है। ऐसे में वर्ष 2011 की पुरानी जनगणना को ही मुख्य आधार मानकर आरक्षण लागू किया जाएगा। ऐसे में तमाम पंचायतों में उन वर्गों के लोगों को भी आरक्षण का लाभ मिल सकता है जहां पर उनकी जनसंख्या काफी कम है।
पंचायतों में त्रिस्तरीय व्यवस्था लागू होने के साथ ही आरक्षण व्यवस्था भी लागू की गयी थी। इसके तहत पंचायतों के सभी पदों ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत प्रमुख, क्षेत्र पंचायत सदस्य, जिला पंचायत अध्यक्ष व जिला पंचायत सदस्य में सभी वर्गों को आरक्षण दिया जाता रहा है। इसमें पिछड़ी जाति को 27 प्रतिशत, अनुसूचित जाति को 21 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है। इसके साथ ही सभी वर्गों में आरक्षित पदों में 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को दिया जाता है। पंचायतों में आरक्षण की यह व्यवस्था 1995 से लागू हुई जो वर्ष 1991 की जनगणना के आधार पर लागू की गयी थी। 1991 की जनगणना पर ही वर्ष 2000 के पंचायत चुनाव का आरक्षण लागू किया गया।
इसके बाद वर्ष 2001 की जनगणना पर वर्ष 2005 व 2010 के पंचायत चुनाव में आरक्षण लागू किया गया, फिर वर्ष 2011 की जनगणना पर 2015 व 2021 के पंचायत चुनाव कराये गये। अब स्थिति ऐसी उत्पन्न हो गयी है कि वर्ष 2021 में केन्द्र सरकार से जनगणना ही नहीं करायी है। यदि 2021 में जनगणना करायी जाती तो वर्ष 2026 में होने वाले पंचायत चुनाव में इसके आधार पर आरक्षण लागू किया जाता लेकिन जनगणना न होने के कारण अब 2026 के पंचायत चुनाव में भी वर्ष 2011 की जनगणना पर ही आरक्षण लागू करना पड़ेगा। भले ही पंचायतों में किसी वर्ग की जनसंख्या घट-बढ़ गयी हो। वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर जब वर्ष 2015 में आरक्षण लागू किया गया था तब प्रदेश में 59182 ग्राम पंचायतों में प्रधान पद का चुनाव कराया गया था। इसी तरह ग्राम पंचायत सदस्य के 742269 पदों, क्षेत्र पंचायत प्रमुख के 821 पदों, क्षेत्र पंचायत सदस्य के 77576 पदों, जिला पंचायत अध्यक्ष के 75 व जिला पंचायत सदस्य के 3112 पदों के लिए चुनाव कराया गया था। इसके बाद वर्ष 2021 में भी वर्ष 2011 की जनगणना पर ही आरक्षण लागू किया गया। वर्ष 2021 में प्रदेश में 58189 ग्राम पंचायतों में प्रधान पदों पर चुनाव कराया गया था। इसी तरह ग्राम पंचायत सदस्य के 732643, क्षेत्र पंचायत सदस्य के 75845, क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष के 826, जिला पंचायत अध्यक्ष के 75 व जिला पंचायत सदस्य के 3050 पदों के लिए चुनाव कराया गया था। अब 2026 के होने वाले पंचायत चुनाव में पंचायतीराज विभाग को आरक्षण लागू करने के लिए वर्ष 2011 की जनगणना का ही सहारा लेना पड़ेगा। इस वर्ष ग्राम प्रधान के 57694, ग्राम पंचायत सदस्य के 726141, क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष के 826, क्षेत्र पंचायत सदस्य के 75355, जिला पंचायत अध्यक्ष के 75 व जिला पंचायत सदस्य के 3021 पदों के लिए चुनाव होना है।
आरक्षण लागू करने में यह व्यवस्था होती है कि सबसे पहले एसटी, फिर एससी, फिर पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण लागू किया जाता है। इसमें यह भी वर्ष 2015 व 2021 के चुनाव में जो सीट किसी भी वर्ग के लिए आरक्षित की गयी थी उनको छोड़ते हुए शेष बची सीटों में उस वर्ग के लिए आरक्षण लागू किया जाएगा। उदाहरण के लिए यदि एससी का आरक्षण 21 प्रतिशत है तो दो चुनावों में 42 प्रतिशत सीटों पर एससी का आरक्षण लागू किया जा चुका है अब इसके बाद शेष बची 58 प्रतिशत सीटों में 21 प्रतिशत एससी के लिए आरक्षित की जाएंगी। ऐसे में तमाम ऐसी ग्राम पंचायतें व अन्य सीटें इस वर्ग के लिए आरक्षित होंगी जहां पर इनकी जनसंख्या काफी कम है। ऐसा ही आरक्षण अन्य वर्गों के लिए भी होगा।
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