ओजस्वी भारत
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मनुस्मृति को आलोचना करने वाले 99.99% लोगों ने कभी पुस्तक रूप में भी देखा तक नहीं है....

17 January 2023
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🚩बिहार के एक मंत्री ने मनुस्मृति के विषय में बयान दिया है। यह सब राजनीतिक स्टंटबाजी है। जिसका उद्देश्य वोट बैंक को सहेजना है। मनुस्मृति को आलोचना करने वाले 99.99% लोगों ने कभी पुस्तक रूप में देखा तक नहीं है। पढ़ना , समझना और चिंतन करना बहुत दूर की बात है। कुछ लोग बरगला रहे है। कुछ बहक रहे है। इस लेख के माध्यम से मनुस्मृति से सम्बंधित सभी भ्रांतियों का निराकरण करने का प्रयास किया है।

🚩ब्राह्मण शब्द को लेकर अनेक भ्रांतियां हैं। इनका समाधान करना अत्यंत आवश्यक है। क्योंकि हिन्दू समाज की सबसे बड़ी कमजोरी जातिवाद है। ब्राह्मण शब्द को सत्य अर्थ को न समझ पाने के कारण जातिवाद को बढ़ावा मिला है।

🚩शंका (1) ब्राह्मण की परिभाषा बताये ?

🚩समाधान:-पढने-पढ़ाने से, चिंतन-मनन करने से, ब्रह्मचर्य, अनुशासन, सत्य-भाषण आदि व्रतों का पालन करने से, परोपकार आदि सत्कर्म करने से, वेद, विज्ञान आदि पढने से, कर्तव्य का पालन करने से, दान करने से और आदर्शों के प्रति समर्पित रहने से मनुष्य का यह शरीर ब्राह्मण किया जाता है।-मनुस्मृति 2/28

🚩 शंका (2) ब्राह्मण जाति है अथवा वर्ण है ?

🚩 समाधान- ब्राह्मण वर्ण है जाति नहीं। वर्ण का अर्थ है चयन या चुनना और सामान्यत: शब्द वरण भी यही अर्थ रखता है। व्यक्ति अपनी रूचि, योग्यता और कर्म के अनुसार इसका स्वयं वरण करता है, इस कारण इसका नाम वर्ण है। वैदिक वर्ण व्यवस्था में चार वर्ण है। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र।

🚩ब्राह्मण का कर्म है विधिवत वेद पढ़ना और पढ़ाना, यज्ञ करना और कराना, दान प्राप्त करना और सुपात्रों को दान देना।

🚩क्षत्रिय का कर्म है विधिवत पढ़ना, यज्ञ करना, प्रजाओं का पालन-पोषण और रक्षा करना, सुपात्रों को दान देना, धन ऐश्वर्य में लिप्त न होकर जितेन्द्रिय रहना।

🚩वैश्य का कर्म है पशुओं का लालन-पोषण, सुपात्रों को दान देना, यज्ञ करना, विधिवत अध्ययन करना, व्यापार करना, धन कमाना, खेती करना।

🚩शुद्र का कर्म है सभी चारों वर्णों के व्यक्तियों के यहाँ पर सेवा या श्रम करना।

🚩शुद्र शब्द को मनु अथवा वेद ने कहीं भी अपमानजनक, नीचा अथवा निकृष्ठ नहीं माना है। मनु के अनुसार चारों वर्ण ब्राह्मण, क्षत्रिय,वैश्य एवं शूद्र आर्य है।- मनु 10/4

🚩शंका (3) मनुष्यों में कितनी जातियां है ?

🚩समाधान- मनुष्यों में केवल एक ही जाति है। वह है "मनुष्य"। अन्य की जाति नहीं है।

🚩शंका (4) चार वर्णों का विभाजन का आधार क्या है?

🚩समाधान- वर्ण बनाने का मुख्य प्रयोजन कर्म विभाजन है। वर्ण विभाजन का आधार व्यक्ति की योग्यता है। आज भी शिक्षा प्राप्ति के उपरांत व्यक्ति डॉक्टर, इंजीनियर, वकील आदि बनता है। जन्म से कोई भी डॉक्टर, इंजीनियर, वकील नहीं होता। इसे ही वर्ण व्यवस्था कहते है।

🚩शंका (5) कोई भी ब्राह्मण जन्म से होता है अथवा गुण, कर्म और स्वाभाव से होता है ?

🚩समाधान- व्यक्ति की योग्यता का निर्धारण शिक्षा प्राप्ति के पश्चात ही होता है। जन्म के आधार पर नहीं होता है। किसी भी व्यक्ति के गुण, कर्म और स्वाभाव के आधार पर उसके वर्ण का चयन होता हैं। कोई व्यक्ति अनपढ़ हो और अपने आपको ब्राह्मण कहे तो वह गलत है।

🚩मनु का उपदेश पढ़िए:-

🚩जैसे लकड़ी से बना हाथी और चमड़े का बनाया हुआ हिरण सिर्फ़ नाम के लिए ही हाथी और हिरण कहे जाते है वैसे ही बिना पढ़ा ब्राह्मण मात्र नाम का ही ब्राह्मण होता है-मनुस्मृति 2/157

🚩शंका (6) क्या ब्राह्मण पिता की संतान केवल इसलिए ब्राह्मण कहलाती है कि उसके पिता ब्राह्मण है?

🚩समाधान- यह भ्रान्ति है कि ब्राह्मण पिता की संतान इसलिए ब्राह्मण कहलाएगी क्योंकि उसका पिता ब्राह्मण है। जैसे एक डॉक्टर की संतान तभी डॉक्टर कहलाएगी जब वह MBBS उत्तीर्ण कर लेगी। जैसे एक इंजीनियर की संतान तभी इंजीनियर कहलाएगी जब वह BTech उत्तीर्ण कर लेगी। बिना पढ़े नहीं कहलाएगी। वैसे ही ब्राह्मण एक अर्जित जाने वाली पुरानी उपाधि हैं।

🚩मनु का उपदेश पढ़िए-

🚩माता-पिता से उत्पन्न संतति का माता के गर्भ से प्राप्त जन्म साधारण जन्म है। वास्तविक जन्म तो शिक्षा पूर्ण कर लेने के उपरांत ही होता है। -मनुस्मृति 2/147

🚩शंका (7) प्राचीन काल में ब्राह्मण बनने के लिए क्या करना पड़ता था ?

🚩समाधान- प्राचीन काल में ब्राह्मण बनने के लिए शिक्षित और गुणवान दोनों होना पड़ता था।

🚩मनु का उपदेश देखे-

🚩वेदों में पारंगत आचार्य द्वारा शिष्य को गायत्री मंत्र की दीक्षा देने के उपरांत ही उसका वास्तविक मनुष्य जन्म होता है-मनुस्मृति 2/148
🚩ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य, ये तीन वर्ण विद्याध्ययन से दूसरा जन्म प्राप्त करते हैं। विद्याध्ययन न कर पाने वाला शूद्र, चौथा वर्ण है-मनुस्मृति 10/4

🚩आजकल कुछ लोग केवल इसलिए अपने आपको ब्राह्मण कहकर जाति का अभिमान दिखाते है क्यूंकि उनके पूर्वज ब्राह्मण थे। यह सरासर गलत है। योग्यता अर्जित किये बिना कोई ब्राह्मण नहीं बन सकता। हमारे प्राचीन ब्राह्मण अपने तप से अपनी विद्या से अपने ज्ञान से सम्पूर्ण संसार का मार्गदर्शन करते थे। इसीलिए हमारे आर्यवर्त देश विश्वगुरु था।


🚩शंका ( 8 ) ब्राह्मण को श्रेष्ठ क्यों माने ?

🚩समाधान- ब्राह्मण एक गुणवाचक वर्ण है। समाज का सबसे ज्ञानी, बुद्धिमान, शिक्षित, समाज का मार्गदर्शन करने वाला, त्यागी, तपस्वी व्यक्ति ही ब्राह्मण कहलाने का अधिकारी बनता है,इसीलिए ब्राह्मण वर्ण श्रेष्ठ है,वैदिक विचारधारा में ब्राह्मण को अगर सबसे अधिक सम्मान दिया गया है तो ब्राह्मण को सबसे अधिक गलती करने पर दंड भी दिया गया है।

🚩मनु का उपदेश देखे-

🚩एक ही अपराध के लिए शूद्र को सबसे दंड कम दंड, वैश्य को दोगुना, क्षत्रिय को तीन गुना और ब्राह्मण को सोलह या 128 गुणा दंड मिलता था- मनु 8/337 एवं 8/338

🚩इन श्लोकों के आधार पर कोई भी मनु महाराज को पक्षपाती नहीं कह सकता।

🚩शंका (9) क्या शूद्र ब्राह्मण और ब्राह्मण शूद्र बन सकता है ?

🚩समाधान -ब्राह्मण, शूद्र आदि वर्ण क्योंकि गुण, कर्म और स्वाभाव के आधार पर विभाजित है। इसलिए इनमें परिवर्तन संभव है। कोई भी व्यक्ति जन्म से ब्राह्मण नहीं होता। अपितु शिक्षा प्राप्ति के पश्चात उसके वर्ण का निर्धारण होता है।

🚩मनु का उपदेश देखे-

🚩ब्राह्मण शूद्र बन सकता और शूद्र ब्राह्मण हो सकता है। इसी प्रकार क्षत्रिय और वैश्य भी अपने वर्ण बदल सकते है -मनुस्मृति 10/64

🚩शरीर और मन से शुद्ध- पवित्र रहने वाला, उत्कृष्ट लोगों के सानिध्य में रहने वाला, मधुर-भाषी, अहंकार से रहित, अपने से उत्कृष्ट वर्ण वालों की सेवा करने वाला शूद्र भी उत्तम ब्राह्मण जन्म और द्विज वर्ण को प्राप्त कर लेता है -मनुस्मृति 9/335

🚩जो मनुष्य नित्य प्रात: और सांय ईश्वर आराधना नहीं करता उसको शूद्र समझना चाहिए-मनुस्मृति 2/103

🚩जब तक व्यक्ति वेदों की शिक्षाओं में दीक्षित नहीं होता वह शूद्र के ही समान है-मनुस्मृति 2/172

🚩ब्राह्मण- वर्णस्थ व्यक्ति श्रेष्ठ–अतिश्रेष्ठ व्यक्तियों का संग करते हुए और नीच- नीचतर व्यक्तिओं का संग छोड़कर अधिक श्रेष्ठ बनता जाता है। इसके विपरीत आचरण से पतित होकर वह शूद्र बन जाता है -मनुस्मृति 4/245

🚩जो ब्राह्मण,क्षत्रिय या वैश्य वेदों का अध्ययन और पालन छोड़कर अन्य विषयों में ही परिश्रम करता है, वह शूद्र बन जाता है -मनुस्मृति 2/168

🚩शंका (10) क्या आज जो अपने आपको ब्राह्मण कहते है वही हमारी प्राचीन विद्या और ज्ञान की रक्षा करने वाले प्रहरी थे?

🚩समाधान- आजकल जो व्यक्ति ब्राह्मण कुल में उत्पन्न होकर अगर प्राचीन ब्राह्मणों के समान वैदिक धर्म की रक्षा के लिए पुरुषार्थ कर रहा है तब तो वह निश्चित रूप से ब्राह्मण के समान सम्मान का पात्र है। अगर कोई व्यक्ति ब्राह्मण कुल में उत्पन्न होकर ब्राह्मण धर्म के विपरीत कर्म कर रहा है। तब वह किसी भी प्रकार से ब्राह्मण कहलाने के लायक नहीं है। एक उदहारण लीजिये। एक व्यक्ति यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर है, शाकाहारी है, चरित्रवान है और धर्म के लिए पुरुषार्थ करता है। उसका वर्ण ब्राह्मण कहलायेगा चाहे वह शूद्र पिता की संतान हो। उसके विपरीत एक व्यक्ति अनपढ़ है, मांसाहारी है, चरित्रहीन है और किसी भी प्रकार से समाज हित का कोई कार्य नहीं करता, चाहे उसके पिता कितने भी प्रतिष्ठित ब्राह्मण हो, किसी भी प्रकार से ब्राह्मण कहलाने लायक नहीं है। केवल चोटी पहनना और जनेऊ धारण करने भर से कोई ब्राह्मण नहीं बन जाता। इन दोनों वैदिक व्रतों से जुड़े हुए कर्म अर्थात धर्म का पालन करना अनिवार्य हैं। प्राचीन काल में धर्म रूपी आचरण एवं पुरुषार्थ के कारण ब्राह्मणों का मान था।

🚩इस लेख के माध्यम से हमने वैदिक विचारधारा में ब्राह्मण शब्द को लेकर सभी भ्रांतियों के निराकरण का प्रयास किया हैं। ब्राह्मण शब्द की वेदों में बहुत महत्ता है। मगर इसकी महत्ता का मुख्य कारण जन्मना ब्राह्मण होना नहीं अपितु कर्मणा ब्राह्मण होना है। मध्यकाल में हमारी वैदिक वर्ण व्यवस्था बदल कर जाति व्यवस्था में परिवर्तित हो गई। विडंबना यह है कि इस बिगाड़ को हम आज भी दोह रहे है। जातिवाद से हिन्दू समाज की एकता समाप्त हो गई। भाई भाई में द्वेष हो गया। इसी कारण से हम कमजोर हुए तो विदेशी विधर्मियो के गुलाम बने। हिन्दुओं के 1200 वर्षों के दमन का अगर कोई मुख्य कारण है तो वह जातिवाद है। वही हमारा सबसे बड़ा शत्रु है। आइये इस जातिवाद रूपी शत्रु को को जड़ से नष्ट करने का संकल्प ले

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कांग्रेस के 65 वर्षों के शासनकाल में,यह पढ़ाया जा रहा है बच्चों को.....

18 January 2023
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🚩भारत के बच्चों को सही इतिहास नही बल्कि ऐसा गलत इतिहास पढ़ाया जाता है,जिसे पढ़कर आप भी पढ़कर चौंक जाएंगे। ऐसे इतिहास को बंद कराना चाहिए।

🚩01. वैदिक काल में विशिष्ट अतिथियों के लिए गोमांस परोसा जाना सम्मान सूचक माना जाता था। (कक्षा 6-प्राचीन भारत,पृष्ठ 35, लेखिका-रोमिला थापर)

🚩02. महमूद गजनवी ने मूर्तियों को तोड़ा, इससे वह धार्मिक नेता बन गया !(कक्षा 7-मध्यकालीन भारत, पृष्ठ 28)

🚩03. 1857 का स्वतंत्रता संग्राम एक सैनिक विद्रोह था।(कक्षा 8-सामाजिक विज्ञान भाग-1)

🚩04. महावीर 12 वर्षों तक जहां-तहां भटकते रहे। 12 वर्ष की लम्बी यात्रा के दौरान उन्होंने एक बार भी अपने वस्त्र नहीं बदले। 42 वर्ष की आयु में उन्होंने वस्त्र का एकदम त्याग कर दिया।(कक्षा 11, प्राचीन भारत, पृष्ठ 101, लेखक-रामशरण शर्मा)

🚩05. तीर्थंकर जो अधिकतर मध्य गंगा के मैदान में उत्पन्न हुए और जिन्होंने बिहार में निर्वाण प्राप्त किया, की मिथक कथा जैन सम्प्रदाय की प्राचीनता सिद्ध करने के लिए गढ़ ली गई। (कक्षा 11-प्राचीन भारत,पृष्ठ 101, लेखक-रामशरण शर्मा)

🚩06. जाटों ने गरीब हो या धनी, जागीरदार हो या किसान, हिन्दू हो या मुसलमान सबको लूटा। (कक्षा 12-आधुनिक भारत,पृष्ठ 18-19, विपिन चन्द्र)

🚩07. रणजीत सिंह अपने सिंहासन से उतरकर मुसलमान फकीरों के पैरों की धूल अपनी लम्बी सफेद दाढ़ी से झाड़ता था। (कक्षा 12 -पृष्ठ 20, विपिन चन्द्र)

🚩08. आर्य समाज ने हिन्दुओं, मुसलमानों, पारसियों, सिखों और ईसाइयों के बीच पनप रही राष्ट्रीय एकता को भंग करने का प्रयास किया। (कक्षा 12-आधुनिक भारत,पृष्ठ 183, लेखक-विपिन चन्द्र)

🚩09. तिलक, अरविन्द घोष, विपिनचन्द्र पाल और लाला लाजपतराय जैसे नेता उग्रवादी तथा आतंकवादी थे ! (कक्षा 12-आधुनिक भारत-विपिन चन्द्र, पृष्ठ 208)

🚩10. 400 वर्ष ईसा पूर्व अयोध्या का कोई अस्तित्व नहीं था। महाभारत और रामायण कल्पित महाकाव्य हैं। (कक्षा 11, पृष्ठ 107, मध्यकालीन इतिहास, आर.एस. शर्मा)

🚩11. वीर पृथ्वीराज चौहान मैदान छोड़कर भाग गया और गद्दार जयचन्द गोरी के खिलाफ युद्धभूमि में लड़ते हुए मारा गया (कक्षा 11, मध्यकालीन भारत,प्रो. सतीश चन्द्र)

🚩12. औरंगजेब जिन्दा पीर थे।(मध्यकालीन भारत, पृष्ठ 316,लेखक-प्रो. सतीश चन्द्र)

🚩13. राम और कृष्ण का कोई अस्तित्व ही नहीं था। वे केवल काल्पनिक कहानियां हैं।(मध्यकालीन भारत, पृष्ठ 245,रोमिला थापर)

🚩ऐसी और भी बहुत सी आपत्तिजनक बाते आपको एन.सी.आर.टी. की पुस्तकों में पढ़ने को मिल जायेंगी, इन किताबों में जो छापा जा रहा हैं उनमें रोमिला थापर जैसी लेखको ने मुसलमानों द्वारा धर्म के नाम पर हिन्दुओं के ऊपर किये गये भयानक अत्याचारों को गायब कर दिया है !

🚩नकली धर्मनिरपेक्षतावादी नेताओं की शह पर झूठा इतिहास लिखकर एक समुदाय की हिंसक मानसिकता पर जानबूझकर पर्दा ड़ाला जा रहा है !

🚩इन भयानक अत्याचारों को सदियों से चली आ रही गंगा जमुनी संस्कृति, अनेकता में एकता और धार्मिक सहिष्णुता बताकर नौजवान पीढ़ी को धोखा दिया जा रहा है, उन्हें अंधकार में रखा जा रहा है !

🚩भविष्य में इसका परिणाम बहुत खतरनाक होगा, क्योकि नयी पीढ़ी ऐसे मुसलमानों की मानसिकता न जानने के कारण उनसे असावधान रहेगी और खतरे में पड़ जायेगी. सोचने का विषय है कि आखिर किसके दबाव में सत्य को छिपाया अथवा तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है ?


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वो काली रात जब लाखों हिंदुओं को कश्मीर छोड़ने को किया मजबूर.......

19 January 2023
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🚩इतिहास का वो काला दिन 19 जनवरी 1990 जब लाखों हिन्दू बंधुओं को जिहादियों ने धमकी देकर उन्हें वहां से विस्थापित होने के लिए विवश किया था ।

🚩19 जनवरी जब-जब यह तारीख आती है, कश्मीरी पंडितों के जख्म हरे हो जाते हैं । यही वह तारीख है जिस दिन जम्मू कश्मीर में बसे कश्मीरी पंडितों को अपने ही देश में शरणार्थी बनकर रहने को मजबूर कर दिया गया । इस तारीख ने उनके लिए जिंदगी के मायने ही बदल दिए थे ।

🚩आपको बता दें कि कश्मीर में केवल पंडितों को ही नही सभी जाति के हिंदुओं भगाया गया था, इतिहास में केवल पंडितों का नाम इसलिए बताया है कि जिसके कारण दूसरे जाति के हिंदू शांत रहे क्योंकि नकली इतिहासकार अच्छे से जानते हैं कि हिंदू जाति-पाति में बंटे है, एक नहीं है इसलिए केवल ब्राह्मणों का ही उल्लेख किया गया है।

🚩कश्मीेरी पंडितों को बताया काफिर-

🚩देश की आजादी के बाद धरती के स्वर्ग कश्मीर में नरक का मौहाल बन चुका था । 19 जनवरी 1990 की काली रात को करीब 3 लाख कश्मीरी पंडितों व हिंदुओं को अपना घर,दुकान,जमीन आदि छोड़कर पलायन को मजबूर होना पड़ा था । अलगावादियों ने हिन्दुओ के घर पर एक नोटिस चस्पा की गई । जिसपर लिखा था कि ‘या तो मुस्लिम बन जाओ या फिर कश्मीर छोड़कर भाग जाओ…या फिर मरने के लिए तैयार हो जाओ ।’

🚩20 जनवरी 1999 को कश्मीर की मस्जिदों से कश्मीरी पंडितों को काफिर करार दिया गया । मस्जिदों से लाउडस्पीकरों के जरिए ऐलान किया गया, 'कश्मीरी पंडित या तो मुसलमान धर्म अपना लें, या चले जाएं या फिर मरने के लिए तैयार रहें ।' यह ऐलान इसलिए किया गया ताकि कश्मीरी पंडितों (हिंदुओं) के घरों को पहचाना जा सके और उन्हें या तो इस्लाम कुबूल करने के लिए मजबूर किया जाए या फिर उन्हें मार दिया जाए ।

🚩कश्मीरी पंडितों के सर काटे गए, कटे सर वाले शवों को चौक-चौराहों पर लटकाया गया था ।

🚩बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों ने अपने घर छोड़ दिए । आंकड़ों के मुताबिक 1990 के बाद करीब 7 लाख से अधिक कश्मीरी पंडित (हिंदू) अपने घरों को छोड़कर कश्मीर से विस्थापित होने को मजबूर हुए ।

🚩खुलेआम हुए थे बलात्कार!!

🚩एक कश्मीरी पंडित नर्स के साथ जिहादियों ने सामूहिक बलात्कार किया और उसके बाद मार-मार कर उसकी हत्या कर दी । घाटी में कई कश्मीरी पंडितों की लड़कियों के साथ जिहादियों ने सामूहिक बलात्कार किया और लड़कियों के अपहरण किए गए ।

🚩मस्जिदों में भारत एवं हिंदू विरोधी भाषण दिए जाने लगे। सभी कश्मीरियों को कहा गया कि इस्लामिक ड्रेस कोड अपनाएं ।

🚩डर की वजह से वापस लौटने से कतराते!!

🚩आज भी कश्मीेरी पंडितों के अंदर का डर उन्हें वापस लौटने से रोक देता है । कश्मीरी पंडितों ने घाटी छोड़ने से पहले अपने घरों को कौड़‍ियों के दाम पर बेचा था । 33 वर्षों में कीमतें 4 गुना तक बढ़ गई हैं । आज अगर वह वापस आना भी चाहें तो नहीं आ सकते क्योंकि न तो उनका घर है और न ही घाटी में उनकी जमीन बची है । इस मौके पर अभिनेता अनुपम खेर ने एक कविता शेयर की है । आप भी देखिए अनुपम ने कैसे कश्मीररी पंडितों का दर्द बयां किया है ।

🚩कर्नाटक के श्री प्रमोद मुतालिक, श्रीराम सेना (राष्ट्रिय अध्यक्ष) ने बताया कि यह कश्मीरी हिंदुओं के विस्थापन का प्रश्न नहीं, यह पूरे भारत की समस्या है । हिंदुओं को 1990 में कश्मीर में से क्यों निकाला गया ? क्या वो कोई दंगा कर रहे थे ? या उनके घर में हथियार थे ?

🚩उन्हें केवल इसलिए वहां से निकाल दिया गया क्योंकि वे ’हिन्दू´ हैं । आज यही समस्या भारत के विविध राज्यों में उभरनी शुरू हो गई है । इसलिए आज एक भारत अभियान की/राष्ट्र निर्माण की आवश्यकता है ।

🚩डॉ. चारुदत्त पिंगळे, राष्ट्रीय मार्गदर्शक, हिन्दू जनजागृति समिती ने बताया कि जिस प्रकार महाभारत के काल में भगवान श्रीकृष्ण ने 5 गांव मांगे थे किंतु कौरवों ने वो भी देने से इन्कार कर दिया था , तदुपरांत महाभारत हुआ । उसी प्रकार आज कश्मीरी हिंदुओं के लिए पूरे भारत के हिन्दुत्वनिष्ठ और राष्ट्रप्रेमी संगठन अपना कश्मीर मांग रहे हैं।

🚩कश्मीर भारत माता का मुकुट है । कश्मीर भूभाग नहीं, कश्यप ऋषि की तपोभूमि है । वहां से हिंदुओं का पलायन हुआ है, परंतु उन्हाेंने हार नहीं मानी है । कश्मीर में पुनः कश्मीर और भारत हिन्दू राष्ट्र बनने तक हम कार्य करते रहेंगे यह हमारा धर्मदायित्व है ।

🚩अधिवक्ता श्रीमती चेतना शर्मा, हिन्दू स्वाभिमान, उत्तर प्रदेश ने बताया कि राजनैतिक दलों ने हर जगह जाति का नाम देकर हर मामले को राजनैतिक करने का प्रयास किया है । परंतु आज समय आ गया है कि जो स्थिति जैसी है, वैसा ही सत्य रूप दुनिया के सामने लाया जाए । जब भी, जहां भी जनसांख्यिकी बदली है, वहां कश्मीर बना है । अब उत्तर प्रदेश की भी स्थिति वैसी ही होना शुरु हो गई है
। कैराना में जो हुआ, वही आज उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में भी होने लगा है । अब मात्र 10 वर्ष में या तो भारत हिन्दू राष्ट्र होगा या हिन्दू विहीन राष्ट्र !

🚩आपको बता दें कि 14 सितंबर 1989 को बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष टिक्कू लाल टपलू की हत्या से कश्मीर में शुरू हुए आतंक का दौर समय के साथ और वीभत्स होता चला गया ।

🚩टिक्कू की हत्या के महीने भर बाद ही जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के नेता मकबूल बट को मौत की सजा सुनाने वाले सेवानिवृत्त सत्र न्यायाधीश नीलकंठ गंजू की हत्या कर दी गई । फिर 13 फरवरी को श्रीनगर के टेलीविजन केंद्र के निदेशक लासा कौल की निर्मम हत्या के साथ ही आतंक अपने चरम पर पहुंच गया था । उस दौर के अधिकतर हिंदू नेताओं की हत्या कर दी गई । उसके बाद 300 से अधिक हिंदू-महिलाओं और पुरुषों की आतंकियों ने हत्या की ।

🚩सुप्रीम कोर्ट में 27 साल पहले हुए पंडितों पर नरसंहार की जांच करने से इंकार कर दिया था । जिसमें 700 लोगों की मौत हुई थी । कोर्ट ने कहा कि इतने साल से आप कहां थे, अब 27 साल बाद इन मामलों में सबूत कैसे मिलेंगे ? कुल मिला कर अब वो सभी हिन्दू कम से कम भारत के तंत्र से न्याय से सदा वंचित ही रहेंगे जबकि अदालत ने ही लगभग 30 साल पुराने मेरठ के हाशिमपुरा दंगो में मारे गए मुस्लिमों के केस में कई PAC के जवानों को सज़ा दी ।

🚩उन कश्मीर पंडितों की हालात की कल्पना कीजिये जब उनके घरों में सामान बिखरा पड़ा था । गैस स्टोव पर देग़चियां और रसोई में बर्तन इधर-उधर फेंके हुए थे । घरों के दरवाज़े खुले थे । हर घर में ऐसा ही समान था । ऐसा लगता था कि कोई बहुत बड़ा भूकंप के कारण घर वाले अचानक अपने घरों से भाग खड़े हुए हों..कश्मीरी पंडित हिंसा, आतंकी हमले और हत्याओं के माहौल में जी रहे थे । सुरक्षाकर्मी थे लेकिन उन्हें किस ने मना किया था चुप रह कर सब देखते रहने के लिये ये आज तक रहस्य है...शुरू में उन्हें दर-दर की ठोकरें खानी पड़ीं । “जम्मू में पहले हम सस्ते होटल में रहे, छोटी-छोटी जगहों पर रहे । बाद में एक धर्मशाला में रहे.. इतना ही नहीं, उनके पेट भीख माग कर भी पले... ।

🚩सरकार प्रयास करें कि वहाँ पुनः हिन्दू बसें और अन्य राज्यों में हिंदू कम हो रहे हैं। उसके लिए जनता ध्यान दें की जैसे पिछले 75 साल से मुसलमान 8-8 बच्चों को पैदा कर रहे है तो हिंदुओं को कम से कम 4 बच्चें तो पैदा करना चाहिए।

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बहुत सारे भक्त गुप्त नवरात्रि के बारे में नही जानते होंगे,22 से शुरू हो रही है लाभ जरूर उठाए....

21 January 2023
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🚩देवी भागवत के अनुसार वर्ष में चार बार नवरात्रि आते हैं और जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है।

🚩इस बार माघ की गुप्त नवरात्रि 22 जनवरी 2023, रविवार से शुरू होगी और इसका समापन 30 जनवरी 2023 को होगा। इन नो दिनों में सभी भक्त व्रत करें, ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए,संयम,नियम,जप,ध्यान, पाठ करते हुए बिताए।

🚩घटस्थापना मुहूर्त - सुबह 07 बजकर 15 मिनट से लेकर 10 बजकर 58 मिनट तक,
घटस्थापना अभिजित मुहूर्त -दोपहर 12 बजकर 28 मिनट से लेकर 01 बजकर 12 तक

🚩जो भक्त व्रत-उपवास करते है उन्हें व्रत-उपवास के दिनों में साबुदाने,आलू,गाजर,गोभी, शलजम, पालक, नही खाना चाहिए।

🚩व्रत-उपवास करने वालों को दूध, फल,आम,अंगूर,केला,बादाम,पिस्ता,मखाना, चारोली,मखाने की खीर,गुड़-मूंगफली की चिक्की,मूंगफली का सेवन करना चाहिए, जो इनका सेवन नही कर पाते,वे सिंघाड़े या राजगरे के आटे की नमकीन रोटी,पूरी,पकोड़े, कड़ी बनाकर कड़ी-पूरी भी खा सकते है। व्रत में नमकीन व्यजनों में सेंधा नमक का उपयोग करें।

🚩नवरात्रि की तिथि

🚩प्रतिपदा (मां शैलपुत्री): 22 जनवरी 2023
द्वितीया (मां ब्रह्मचारिणी): 23 जनवरी 2023
तृतीया (मां चंद्रघंटा): 24 जनवरी 2023
चतुर्थी (मां कुष्मांडा): 25 जनवरी 2023
पंचमी (मां स्कंदमाता): 26 जनवरी 2023
षष्ठी (मां कात्यायनी): 27 जनवरी 2023
सप्तमी (मां कालरात्रि): 28 जनवरी 2023
अष्टमी (मां महागौरी): 29 जनवरी 2023
नवमी (मां सिद्धिदात्री): 30 जनवरी 2023

🚩गुप्त नवरात्रि पूजन विधि

🚩गुप्त नवरात्रि में नौ दिन के लिए कलश स्थापना की जा सकती है,अगर कलश की स्थापना की है तो दोनों सुबह-शाम मंत्र जाप, चालीसा या सप्तशती का पाठ करें,दोनों ही समय आरती करना भी अच्छा होगा,मां को दोनों समय भोग भी लगाएं,सबसे सरल और उत्तम भोग है लौंग और बताशा, मां के लिए लाल फूल सर्वोत्तम होता है, ध्यान रखें इस दौरान मां को आक, मदार, दूब और तुलसी बिल्कुल न चढ़ाएं,पूरे नौ दिन अपना खान-पान और आहार सात्विक रखें।

🚩नवरात्रि में देवी शक्ति मां दुर्गा के भक्त उनके नौ रूपों की बड़े विधि-विधान के साथ पूजा करते हैं, नवरात्र के समय घरों में कलश स्थापित कर दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू किया जाता है, इसके दौरान मंदिरों में जागरण किए जाते हैं, नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा करने से लोगों को हर मुश्किल परेशानियों से छुटकारा मिल जाता है,इन नौ दिनों को बहुत पवित्र माना जाता है और भक्त नवरात्रि के दौरान उपवास रखते हैं।

🚩गुप्त नवरात्र उसी प्रकार मान्य हैं, जिस प्रकार 'शारदीय' और 'चैत्र नवरात्र'। आषाढ़ और माघ माह के नवरात्रों को "गुप्त नवरात्र" कह कर पुकारा जाता है। बहुत कम लोगों को ही इसके ज्ञान या छिपे हुए होने के कारण इसे 'गुप्त नवरात्र' कहा जाता है। गुप्त नवरात्र मनाने और इनकी साधना का विधान 'देवी भागवत' व अन्य धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। श्रृंगी ऋषि ने गुप्त नवरात्रों के महत्त्व को बतलाते हुए कहा है कि- "जिस प्रकार वासंतिक नवरात्र में भगवान विष्णु की पूजा और शारदीय नवरात्र में देवी शक्ति की नौ देवियों की पूजा की प्रधानता रहती है, उसी प्रकार गुप्त नवरात्र दस महाविद्याओं की सिद्धि की होती हैं। यदि कोई इन महाविद्याओं के रूप में शक्ति की उपासना करें, तो जीवन धन-धान्य, राज्य सत्ता और ऐश्वर्य से भर जाता है।

🚩गुप्त नवरात्रों का बड़ा ही महत्त्व बताया गया है। मानव के समस्त रोग-दोष व कष्टों के निवारण के लिए गुप्त नवरात्र से बढ़कर कोई साधना काल नहीं हैं। श्री, वर्चस्व, आयु, आरोग्य और धन प्राप्ति के साथ ही शत्रु संहार के लिए गुप्त नवरात्र में अनेक प्रकार के अनुष्ठान व व्रत-उपवास के विधान शास्त्रों में मिलते हैं। इन अनुष्ठानों के प्रभाव से मानव को सहज ही सुख व अक्षय ऎश्वर्य की प्राप्ति होती है। "दुर्गावरिवस्या" नामक ग्रंथ में स्पष्ट लिखा है कि साल में दो बार आने वाले गुप्त नवरात्रों में भी माघ में पड़ने वाले गुप्त नवरात्र मानव को न केवल आध्यात्मिक बल ही प्रदान करते हैं, बल्कि इन दिनों में संयम-नियम व श्रद्धा के साथ माता दुर्गा की उपासना करने वाले व्यक्ति को अनेक सुख व साम्राज्य भी प्राप्त होते हैं।

🚩 "शिवसंहिता" के अनुसार ये नवरात्र भगवान शंकर और आदिशक्ति माँ पार्वती की उपासना के लिए भी श्रेष्ठ हैं। गुप्त नवरात्रों को सफलतापूर्वक सम्पन्न करने से कई बाधाएँ समाप्त हो जाती हैं।

जैसे:-
🚩विवाह बाधा
वे कुमारी कन्याएँ जिनके विवाह में बाधा आ रही हो, उनके लिए गुप्त नवरात्र बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। कुमारी कन्याओं को अच्छे वर की प्राप्ति के लिए इन नौ दिनों में माता कात्यायनी की पूजा-उपासना करनी चाहिए। "दुर्गास्तवनम्" जैसे प्रामाणिक प्राचीन ग्रंथों में लिखा है कि इस मंत्र का 108 बार जप करने से कुमारी कन्या का विवाह शीघ्र ही योग्य वर से संपन्न हो जाता है-
कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि।
नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरू ते नम:।।

🚩इसी प्रकार जिन पुरुषों के विवाह में विलम्ब हो रहा हो, उन्हें भी लाल रंग के पुष्पों की माला देवी को चढ़ाकर निम्न मंत्र का 108 बार जप पूरे नौ दिन तक करने चाहिए-
देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।

🚩देवी की महिमा

🚩शास्त्र कहते हैं कि आदिशक्ति का अवतरण सृष्टि के आरंभ में हुआ था। कभी सागर की पुत्री सिंधुजा-लक्ष्मी तो कभी पर्वतराज हिमालय की कन्या अपर्णा-पार्वती। तेज, द्युति, दीप्ति, ज्योति, कांति, प्रभा और चेतना और जीवन शक्ति संसार में जहाँ कहीं भी दिखाई देती है, वहाँ देवी का ही दर्शन होता है। ऋषियों की विश्व-दृष्टि तो सर्वत्र विश्वरूपा देवी को ही देखती है, इसलिए माता दुर्गा ही महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के रूप में प्रकट होती है।

🚩 'देवीभागवत' में लिखा है कि- "देवी ही ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश का रूप धर संसार का पालन और संहार करती हैं। जगन्माता दुर्गा सुकृती मनुष्यों के घर संपत्ति, पापियों के घर में अलक्ष्मी, विद्वानों-वैष्णवों के हृदय में बुद्धि व विद्या, सज्जनों में श्रद्धा व भक्ति तथा कुलीन महिलाओं में लज्जा एवं मर्यादा के रूप में निवास करती है। 'मार्कण्डेयपुराण' कहता है कि- "हे देवि! तुम सारे वेद-शास्त्रों का सार हो। भगवान विष्णु के हृदय में निवास करने वाली माँ लक्ष्मी-शशिशेखर भगवान शंकर की महिमा बढ़ाने वाली माँ तुम ही हो।"

🚩सरस्वती पूजा महोत्सव
माघी नवरात्र में पंचमी तिथि सर्वप्रमुख मानी जाती है। इसे 'श्रीपंचमी', 'वसंत पंचमी' और 'सरस्वती महोत्सव' के नाम से कहा जाता है। प्राचीन काल से आज तक इस दिन माता सरस्वती का पूजन-अर्चन किया जाता है। यह त्रिशक्ति में एक माता शारदा के आराधना के लिए विशिष्ट दिवस के रूप में शास्त्रों में वर्णित है। कई प्रामाणिक विद्वानों का यह भी मानना है कि जो छात्र पढ़ने में कमज़ोर हों या जिनकी पढ़ने में रुचि नहीं हो, ऐसे विद्यार्थियों को अनिवार्य रूप से माँ सरस्वती का पूजन करना चाहिए। देववाणी संस्कृत भाषा में निबद्ध शास्त्रीय ग्रंथों का दान संकल्प पूर्वक विद्वान् ब्राह्मणों को देना चाहिए।

🚩महानवमी को पूर्णाहुति*
*गुप्त नवरात्र में संपूर्ण फल की प्राप्ति के लिए सप्तमी,अष्टमी और नवमी तिथि को आवश्यक रूप से देवी के पूजन का विधान शास्त्रों में वर्णित है। माता के संमुख "ज्योत दर्शन" एवं कन्या भोजन करवाना चाहिए।

🚩स्त्री रूप में देवी पूजा

🚩'कूर्मपुराण' में पृथ्वी पर देवी के बिंब के रूप में स्त्री का पूरा जीवन नवदुर्गा की मूर्ति के रूप से बताया गया है। जन्म ग्रहण करती हुई कन्या "शैलपुत्री", कौमार्य अवस्था तक "ब्रह्मचारिणी" व विवाह से पूर्व तक चंद्रमा के समान निर्मल होने से "चंद्रघंटा" कहलाती है। नए जीव को जन्म देने के लिए गर्भ धारण करने से "कूष्मांडा" व संतान को जन्म देने के बाद वही स्त्री "स्कन्दमाता" होती है। संयम व साधना को धारण करने वाली स्त्री "कात्यायनी" व पतिव्रता होने के कारण पति की अकाल मृत्यु को भी जीत लेने से "कालरात्रि" कहलाती है। संसार का उपकार करने से "महागौरी" व धरती को छोड़कर स्वर्ग प्रयाण करने से पहले संसार को सिद्धि का आशीर्वाद देने वाली "सिद्धिदात्री" मानी जाती हैं।

🚩वैसे तो 22 जनवरी 2023 से 30 जनवरी 2023 तक नो दिनों तक सम्पूर्ण नवरात्र व्रत का पालन संयम-नियम ,जप-ध्यान,पाठ करते हुए करना चाहिए, पर किसी कारण से कोई नो दिनों तक व्रत नहीं कर कर पाता हैं, उसे 28 जनवरी 2023 से 30 जनवरी 2023 तक ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए, संयम, नियम,जप,ध्यान,पाठ करते हुए सप्तमी, अष्टमी और नवमी को दुधाहर, फलाहार करते हुए उपवास करना चाहिए और नवमी तिथि के अंतिम काल मे उपवास खोलना चाहिए।

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याद है? बागेश्वर धाम से भी भयंकर षड्यंत्र 10 साल पहले हुआ था

27 January 2023
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🚩हाल ही में बागेश्वर धाम वाले पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री चमत्कार को लेकर नेशनल मीडिया और सोशल मीडिया पर बहुत सुर्खियों में है। उनके ऊपर अंध विश्वास फैलना का आरोप लगाया जा रहा है लेकिन धीरेंद्र शास्त्री का कहना है कि वे सनातन धर्म का प्रचार कर रहे है और उन्होंने 300 लोगो की घरवापसी करवाई इसलिए उनके खिलाफ षड्यंत्र किया जा रहा है।

🚩आपको बता दे की आज से 10 साल पहले बापू आशाराम जिन्होंने आदिवासी और देहाती गांवों और शहरों में घूमकर अपने प्रवचनों के माध्यम से करोड़ों लोगों में हिन्दू धर्म की लो जगाई, जिस समय कांग्रेस की सत्ता पूरी बहुमत थी, वेटिकन से सीधा संबध था,उस समय अकेले बापू भीड़ गए और लाखों हिंदुओं की घर वापसी करवा दी और आदिवासी क्षेत्रों में जाकर उनको जीवन उपयोगी सामग्री,मकान,राशन,कपड़े,बर्तन आदि देकर धर्मांतरण वालो की दुकानें बंद करा दी थी, करोड़ों लोगों को व्यसन और व्यभिचार से छुड़ाकर सदाचारी बना दिया था जिसके कारण विदेशी कंपनिया और वेटिकन सिटी में हड़कंप मच गया तो विधर्मियों ने तत्कालीन सरकार से मिलकर भयंकर साजिश रची और बापू को मीडिया में बदनाम करके झूठा आरोप लगवाकर जेल में भेज दिया था और 10 सालों में अभीतक उनको 1 दिन के लिए भी रिहा नही किया,जबकि उनकी उम्र अभी 86 वर्ष की और उनके पास षडयंत्र से फसाने और निर्दोष होने के प्रमाण होने के बाद भी उनको रिहा नही किया जा रहा है,ये इस सदी का सबसे बड़ा षडयंत्र है।

🚩हिंदू संत आशारामजी बापू ने ऐसा क्या क्या किया था जिसके कारण उन्हें झूठे केस में जेल भेजा गया है ? जानिए:-

🚩1). लाखों धर्मांतरित ईसाईयों को पुनः हिंदू बनाया व करोड़ों हिन्दुओं को अपने धर्म के प्रति जागरूक किया व आदिवासी इलाकों में जाकर जीवनोपयोगी सामग्री, मकान, पैसे, दवाइयां आदि दी जिससे धर्मान्तरण करने वालों का धंधा चौपट हो गया।

🚩2). कत्लखाने में जाती हज़ारों गौ-माताओं को बचाकर, उनके लिए विशाल गौशालाओं का निर्माण करवाया।

🚩3). शिकागो विश्व धर्मपरिषद में स्वामी विवेकानंदजी के 100 साल बाद जाकर हिन्दू संस्कृति का परचम लहराया।

🚩4). विदेशी कंपनियों द्वारा देश को लूटने से बचाकर आयुर्वेद/होम्योपैथिक के प्रचार-प्रसार द्वारा एलोपैथिक दवाईयों के कुप्रभाव से असंख्य लोगों का स्वास्थ्य और पैसा बचाया।

🚩5). लाखों-करोड़ों विद्यार्थियों को सारस्वत्य मंत्र देकर और योग व उच्च संस्कार का प्रशिक्षण देकर ओजस्वी- तेजस्वी बनाया।

🚩6). लंदन, पाकिस्तान, चाईना, अमेरिका और बहुत सारे देशों में जाकर सनातन हिंदू धर्म का ध्वज फहराया, पाकिस्तान में तो कराची में गाजी दरगाह मे दोपहर की अजान के समय भी वे हरि कथा करते रहे।

🚩7). वैलेंटाइन डे का विरोध करके "मातृ-पितृ पूजन दिवस" का प्रारम्भ करवाया।
https://youtu.be/LO7MWmLPz7w

🚩8). क्रिसमस डे के दिन प्लास्टिक के क्रिसमस ट्री को सजाने के बजाय, तुलसी पूजन दिवस मनाना शुरू करवाया।
https://www.youtube.com/playlist?list=PLbBmiOH-57U42_T8gMe-Q1pE7sO78E1Sq

🚩9). करोड़ों लोगों को अधर्म से सनातन धर्म की ओर मोड़ दिया।

🚩10). नशा मुक्ति अभियान के द्वारा करोड़ों लोगों को व्यसन-मुक्त कराया।

🚩11). वैदिक शिक्षा पर आधारित अनेकों गुरुकुल खुलवाए।

🚩12). मुश्किल हालातों में कांची कामकोटि पीठ के "शंकराचार्य श्री जयेंद्र सरस्वतीजी", बाबा रामदेव, मोरारी बापूजी, साध्वी प्रज्ञा एवं अन्य संतों का साथ दिया।

🚩13). ‘युवाधन सुरक्षा' अभियान चलाया गया तथा ‘युवा सेवा संघ' एवं ‘महिला उत्थान मंडल' की स्थापना की गयी है। इन संगठनों द्वारा भारत भर में ‘संस्कार सभाएँ' चलायी जा रही हैं, जिनका लाभ लेकर युवक-युवतियाँ अपना सर्वांगीण विकास कर रहे हैं।

🚩14) देशभर में विद्यार्थियों के उत्थान के लिए योग-प्राणायाम शिविरों का आयोजन किया जा रहा हैं।

🚩15) देशभर में 19 हजार के लगभग बाल-संस्कार केंद्र चलाये जा रहे है,जिसमें बच्चों को योग-प्राणायाम के साथ परीक्षाओं में उच्चतम अंक प्राप्त करने की युक्तियों को बताया जा रहा हैं।

🚩देश की जनता की मांग है कि राष्ट्र , संस्कृति की अथाह सेवा करने वाल बापू आशारामजी को शीघ्रता से ससम्मान से रिहा करना चाहिए।

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आशारामजी बापू को जेल क्यों हुई ?
सवाल आपका-जवाब हमारा…..

31 January 2023
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🚩पिछले 10 साल से 87 वर्षीय हिंदू संत आशारामजी बापू जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। 10 सालों में उनको 1 दिन की भी जमानत नहीं दी गई, जबकि बड़े बड़े अपराधियों व आतंकवादियों को भी जमानत मिल चुकी है, फिर आशारामजी बापू को क्यों बेल नहीं मिली-आज आपको हम सच्चाई बताते हैं।

🚩आइये सबसे पहले नजर डालते हैं- उन सेवाकार्यों पर जिनकी शुरूआत आशारामजी बापू द्वारा हुई:

🚩1.) स्वदेशी अभियान आंदोलन-
इसके अंतर्गत आशारामजी बापू आयुर्वेद विज्ञान को लोगों की जीवनशैली में वापस लाए और उन्होंने गरीबों को उच्च गुणवत्तावाली और सस्ती दवाइयां उपलब्ध करवाई।

🚩2.) 50 से भी ज्यादा सनातन धर्म शैली के गुरुकुलों की शुरूआत की जिससे छोटी उम्र में ही बच्चे वैदिक संस्कृति से जुड़ने लगे। इनके गुरुकुल इतने लोकप्रिय हो गए हैं कि सभी स्थानीय कॉन्वेंट स्कूलों में प्रवेश में गिरावट आने लगी।

🚩3.) 1.0,000 से ज्यादा गायों को कत्लखाने जाने से बचाकर स्व-निर्भर गौशालाओं की शुरूआत की, जो बिना किसी बाहरी दान के चलाये जाते हैं; जहाँ गौ सेवा अंतरराष्ट्रीय मानकों पर की जा रही है। इनके गौमूत्र से बने अर्क, गौवटी और गोधूप इतने लोकप्रिय हो गए हैं कि अन्य बाहरी स्रोतों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं पड़ी और इससे 100 से ज्यादा स्थानीय आदिवासी परिवारों को रोजगार मिलने लगा।

🚩4.) जो लोग उनके सत्संग को सुनते और उनके संपर्क में आने लगे, वे गर्व से कहने लगे कि हिंदू होने पर वे अपने आपको बहुत भाग्यशाली मानते हैं।

🚩5.) आशारामजी बापू ने कई संस्थाओं का मार्गदर्शक बनकर उन्हें भी प्रेरित किया और खुद भी जनजातीय क्षेत्रों में बहुत-से सेवा और रोजगार के अवसरों का नेतृत्व किया और सनातन धर्म के मार्ग को खोनेवाले लाखों धर्मान्तरित हिंदुओं की घरवापसी करवाई ।

🚩6.) आशारामजी बापू के प्रत्येक आश्रम (कुल 450 आश्रम) को एक आत्मनिर्भर ईकाई के रूप में बनाया गया ताकि उन्हें किसीके सामने धनराशि के लिए प्रार्थना न करनी पड़े और वे आसानी से व्यसनमुक्ति अभियान, मातृपितृ पूजन दिवस, संस्कार सिंचन अभियान, वैदिक मंत्र विज्ञान प्रचार, संस्कृति रक्षक सम्मेलन, संकीर्तन यात्राएं और सत्संग जैसे सेवाकार्यों द्वारा समाज में जागृति लायें।

🚩7.) किसी भी देश की रीढ़ की हड्डी युवा होते हैं।* *आशारामजी बापू ने युवाधन सुरक्षा अभियान (दिव्य प्रेरणा प्रकाश) द्वारा युवाओं को संयमित जीवन का महत्व समझाया। आज आशारामजी बापू के कारण आधुनिक अश्लीलता भरे वातावरण में भी करोड़ों युवा ब्रह्मचर्य का महत्व समझ रहे हैं और अपनी प्राचीन विरासत पर गर्व करने लगे हैं।

🚩8.) आशारामजी बापू ने देश विदेश में 17,000 से भी अधिक बाल संस्कार केंद्र शुरू करवाये जहां बच्चों को अपने माता-पिता का आदर करने, स्मृति क्षमता में वृद्धि करने और जीवन को ऊर्जावान बनाये जाने की शिक्षा दी जाने लगी; उद्यम, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति, पराक्रम जैसे सद्गुणों से बच्चे विद्यार्थी जीवन से ही उन्नत, विचारवान और संस्कृति प्रेमी बनने लगे।

🚩9.) हमारी खोई हुई गरिमा और संस्कृति की महिमा को जनमानस के हृदय में पुनः स्थापित करने के लिए समाज में वैश्विक आंदोलन के रूप में प्रस्तुत किया गया, जैसे- 14 फरवरी वेलेंटाइन डे को “मातृपितृ पूजन दिवस” और 25 दिसंबर क्रिसमस डे को “तुलसी पूजन दिवस”।

🚩आपको बता दें कि आशारामजी बापू द्वारा 50 सालों से समाज उत्थान के कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने सत्संग के द्वारा देश व समाज को तोड़नेवाली ताकतों से देशवासियों को बचाया। लाखों लोगों को धर्मान्तरण से बचाया व लाखों धर्मान्तरित हिंदुओं को अपने धर्म में वापसी कराई। गरीब आदिवासी क्षेत्रों में जहाँ खाने की सुविधा तक नहीं थी वहाँ “भोजन करो, भजन करो, दक्षिणा पाओ” अभियान चलाया जाता है; गरीबों में राशन कार्ड के द्वारा अनाज का वितरण, कपड़े, बर्तन व जीवनोपयोगी सामग्री एवं मकान आदि का वितरण किया जाता है।

🚩प्राकृतिक आपदाओं में जहाँ प्रशासन भी नहीं पहुँच सका वहाँ आशारामजी बापू के शिष्यों द्वारा कई सेवाकार्य (निःशुल्क भोजन भंडार, कम्बल, कपड़े का वितरण व स्वास्थ्य शिविर के आयोजन) होते हैं। इसके अलावा आशारामजी बापू ने महिला सुरक्षा (WOMEN SAFETY & EMPOWERMENT) के कई अभियान चलाए, नारी जाति के सम्मान व उनमें पूज्यभाव के लिए सबको प्रोत्साहित किया, बड़ी कंपनियों में काम कर रही महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई, महिला संगठन बनाया।

🚩World’s Religions’ Parliament, शिकागो अमेरिका में 1993 में स्वामी विवेकानन्दजी के बाद यदि कोई दूसरे संत ने प्रतिनिधित्व किया है तो वे आशारामजी बापू हैं, जिन्होंने हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व कर सनातन संस्कृति का परचम लहराया।
🚩इन सेवाकार्यों से देश-विदेश के करोड़ों लोग किसी भी तरह के धर्म- जाति-मत–पंथ-सम्प्रदाय-राज्य व लिंग के हो भेदभाव के बिना लाभान्वित हो रहे हैं ।

🚩इन सभी गतिविधियों को आम व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा शुरू नहीं किया जा सकता है। यह केवल महान संत द्वारा किया जा सकता है जो आत्मनिर्भर और दिव्य हैं। ऐसे संतों से लाभान्वित होना, न होना- ये समाज पर निर्भर करता है। विकल्प आपका है क्योंकि आत्मरामी संतों को आपसे किसी चीज की आवश्यकता नहीं है और न ही उनको कोई घाटा है पर उनकी उपेक्षा करने से समाज को आनेवाले समय में बहुत बड़े नुकसान का सामना करना पड़ेगा।

🚩तो अब सवाल यह है कि पिछले पचास सालों से देश और संस्कृति की सेवा करनेवाले आशारामजी बापू को जेल क्यों भेजा गया ?

🚩सब जानते हैं कि भारत को 1947 में आजादी मिली पर पर्दे के पीछे का सत्य कोई नहीं जानता। केजीबी जासूस के मुताबिक़ अंतर्राष्ट्रीय मिशनरियों के पास भारत की संस्कृति को ध्वस्त करने का लक्ष्य है। असल में वे दुनिया पर शासन करना चाहते हैं पर किसी भी देश को नष्ट करने के लिए सबसे पहले उस देश की संस्कृति को नष्ट करना होता है और इसलिए वे उस देश की संस्कृति को नष्ट करने के लिए देश के प्रति वफादार नेताओं और संतों पर हमला करते हैं।

🚩जैसे सुभाष चन्द्र बोस, लाल बहादुर शास्त्री, राजीव दीक्षित और संत लक्ष्मणानंदजी आदि-आदि की कैसे मृत्यु हुई, आजतक पता नहीं चला।

🚩अब यह स्पष्ट होना चाहिए कि आशारामजी बापू अभी भी जेल में क्यों हैं ?
कुछ लोग कहते हैं- कांग्रेस (विशेष रूप से सोनिया गांधी का षड्यंत्र) आशारामजी बापू पर बनाये गये मामले के पीछे छिपी हुई है लेकिन अब जब मोदी सत्ता में हैं, तब भी आशारामजी बापू जेल में हैं।

🚩वास्तविक सत्य यह है: यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साजिश है। बड़े शक्तिशाली लोग जो बहुराष्ट्रीय कंपनियों और मिशनरियों से जुड़े हुए हैं, उन्होंने पूरी भारतीय मीडिया को खरीद रखा है। यहां भारतीय मीडिया पूरी तरह से दूषित है और खरीदने में मुश्किल नहीं है, वे भ्रष्ट अधिकारी और राजनेता को खरीदते हैं। वे हमेशा किसी भी चेहरे के पीछे काम करते हैं, जैसे उन्होंने सोनिया गांधी के चेहरे के पीछे किया था। भारतीय लोगों को मीडिया द्वारा आसानी से बेवकूफ़ बना दिया जाता है और बाकि भ्रष्ट राजनेता और अधिकारी केस को लंबा बनाते हैं।

🚩जब हम आशारामजी बापू पर की गई FIR पढ़ते हैं तो सबकुछ स्पष्ट होता है।
5 दिन पहले जोधपुर मामले की दिल्ली में FIR ! और लडकी शाहजहांपुर (यूपी ) से है। बाकि FIR में कोई बलात्कार का जिक्र नहीं है, लेकिन मीडिया ब्रेकिंग न्यूज 24X7 में “रेप” शब्द बोलता है। क्यों ???

🚩अगर देश को बचाना चाहते हैं तो भारतीयों को एकजुट होना चाहिए। निर्दोष संत की रिहाई के लिए आगे आना चाहिए।

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न्याय पालिका बिक कर संत आशाराम बापू को प्रताड़ित कर रही है, पछताना पड़ेगा - सुरेश चव्हाणके

04 February 2023
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🚩राष्ट्रवादी चैनल सुदर्शन न्यूज के मुख्य संपादक श्री सुरेश चव्हाणके ने कहा कि आजादी के पहले की स्थिति और मुगलों के समय का तो मुझे पता नहीं लेकिन आजादी के बाद हिंदुस्तान में सबसे ज्यादा षड्यंत्रपूर्वक जिनको प्रताड़ित किया गया उन संत का नाम है आसाराम बापू जी। सबसे ज्यादा प्रताड़ित..इतनी प्रताड़ना की पराकाष्ठा मैंने कहीं नहीं देखी । हम सब जानते हैं कि बापूजी के साथ कैसे कानून का दुरुपयोग किया गया है ।

🚩सुरेश जी ने आगे कहा कि भाइयों को बताना चाहता हूँ कि कानून का मिसयूज कैसे किया जाता है मैक्सिमम मतलब उस Max का अंत नहीं इतना सब कुछ। बापू आशारामजी पर आरोप लगाने वाली उस लड़की की उम्र के कारण पॉक्सो एक्ट लगाया गया जबकि वह अल्पायु नहीं है उसके डॉक्यूमेंट भी है ।

🚩जो घटना घटी वहां पर मैं खुद गया था और खुद जाकर वह डिस्टेंस कितना है वो सब चेक किया । वाकई में क्या हुआ होगा इतनी देर में,में और मेरे साथ और कई पत्रकार और पुलिस अधिकारियों को भी लेकर गया था। ऐसे कई चीजों का विश्लेषण किया और कितनी चीज है जो हमारे (बापू आशारामजी के ) पक्ष में है उसके बावजूद भी किसी चीज को कानून के कटघरे में डाल दो और सालों किसी को जेल में सड़ाओ । मैंने तो ऐसा दूसरा कोई केस देखा नहीं जो बापूजी के बारे में देखा है ।
https://youtu.be/A65mB8owhVc

🚩बापूजी अत्याचार सहकर भी राष्ट्र सेवाकार्य कर रहे हैं....

🚩सुरेश जी ने आगे बताया कि बापू आशारामजी तो अंदर है लेकिन यह लोग (बापू आसारामजी के अनुयायी ) जो आज बापू आसारामजी का नाम लेकर इतना बड़ा सेवा कार्य चला रहे हैं विभिन्न आपदाओं के बावजूद कितनों को क्या-क्या झेलना नहीं पड़ा होगा पहले कुछ समय तक तो यह बिकाऊ मीडिया वालों की गंदी गेम के कारण बापू आसारामजी का नाम लेकर चलने वाले व्यक्ति की तरफ लोग गलत निगाह से देखते थे, कितनी हीन भावना से कैसे कैसे गंदे कॉमेंट्स रहे होंगे, ऐसे में काम करना कितना मुश्किल रहा होगा ।

🚩मित्रों! जो बापू आसारामजी के भक्तों ने झेला (सहन) किया है है मुझे लगता है कि इस देश में किसी राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता नेता या यहां तक कि बंगाल, केरला में जो राजनीतिक कार्यकर्ता पर अत्याचार होते हैं उससे भी 1000 गुना ज्यादा अत्याचार बापू आसारामजी के भक्तों पर हुए। कितनी महिलाओं को लाठी डंडे झेलने पड़े कितने लोगों ने मतलब आप में से कई लोगों ने तो अपने घर को स्वाहा किया ।

🚩अनुयायी समाज तक सच्चाई पहुँचा रहे हैं

🚩सुरेश जी ने कहा कि बापू आसारामजी के भक्तों का कहना है कि हम लड़ेंगे क्योंकि पीछे हटेंगे तो पता नहीं यह लड़ाई कमजोर हो जाएगी, मैं ऐसे कई लोगों (बापू आसारामजी के भक्तों ) को जानता हूँ जिनकी दुकान तक बंद हो गई, जिनकी नौकरी छूट गई वह फिर भी थैला लेकर प्रूफ लेकर लोगों के पास जा रहे हैं RSS के लोगों को मिलते है, BJP से मिलते हैं, सत्ता से जुड़े लोगों को मिलते हैं, पत्रकारों को मिलते हैं, हमारे पास भी आते हैं कितने लोग मतलब वो कोई एक्टिविस्ट नहीं है लेकिन मैं बताऊं जब आप (षडयंत्रकारी) अत्याचार की अति कर देते हो तो उसके बाद सत्य का जो चक्र है ना वह उल्टा परिणाम देने लगता है, और वह चक्र क्या परिणाम दे रहा है यह तमाम वह लोग हैं जो लोग ईश्वर और खुद इसमें कनेक्ट है ।

🚩एक षडयंत्र ने करोड़ो राष्ट्रवादी पैदा किये

🚩आगे बताते हुए सुरेश जी ने कहा कि बापू आसारामजी पर हुए अत्याचार ने इस देश में कई करोड़ हिंदूवादी एक्टिविस्ट पैदा कर दिए । जो (बापू आसारामजी के अनुयायी ) भक्ति भाव और भजन के आगे जाते नहीं थे देश में बाकि क्या चीजें हो रही हैं वह स्वाभाविक से आदमी अलग चीजों में होता है धार्मिक क्षेत्र का, लेकिन आज ज्यादातर लोग (बापू आसारामजी के अनुयायी) सोशल मीडिया में सबसे ज्यादा एक्टिव है, ट्वीटर का ट्रेंड चलाते हैं तो टॉप ट्रेंड में रहते है, मैसेजेस भेजते हैं, भाषण सीख गए हैं। ऐसी ऐसी महिलाएं मुझे नहीं लगता कि वह घूंघट वाली महिलाएं हैं । मैंने दिल्ली में देखी थी वह चौराहे पर खड़े होकर भाषण दे सकती है यह सारा जोश उनके अंदर जो भरा वह इस एक घटना (बापू आसारामजी पर षड्यंत्र) ने भरा! कभी कभी मुझे ऐसा लगता है कि शायद हिंदुत्व का आंदोलन कमजोर पड़ रहा है और उस आंदोलन में एक साथ कई करोड़ कार्यकर्ता की जरूरत थी क्योंकि एक साथ कई कार्यकर्ता तो बड़ी मुश्किल से मिलते है । आपको तो पता है कि कार्यकर्ता खड़ा करना कितना मुश्किल होता है लेकिन हजारों साल के हिंदुत्ववादी मूमेंट में किसी एक घटना ने अगर करोड़ों कार्यकर्ताओं को खड़ा किया होगा तो बापू आसारामजी की घटना ने किया है यह इतिहास याद रखेगा की एक घटना का परिवर्तन कैसे होता है। हमें इस घटना का आज भी दुःख है ।

🚩न्यायपालिका को पछताना पड़ेगा
🚩सुरेश जी ने आगे कहा कि मैं दावा करता हूं कि आने वाले दिनों में हिंदुस्तान को और न्यायपालिका को पछतावा करना पड़ेगा कि दोनों ने जो बापू आसारामजी पर अत्याचार किये वो कितने गलत थे ।

🚩न्यापालिका बिकती है

🚩बापू आसारामजी जी हमारे लिए पवित्र थे, हैं और रहेंगे और हम यह केवल मैं आप लोगों के सामने नहीं कहता हूँ बल्कि मैं आप लोगों के सामने कम बोलता हूँ चैनल पर इससे ज्यादा बोलता हूँ। इस देश में न्यायपालिकाएं बिकती हैं प्रभावित होती है यह मैं पहले भी कह चुका हूँ आगे भी कहता हूँ कैमरे पे कहता हूँ क्योंकि मुझे ये कहने में डर नहीं हैं,खुद न्यायपालिका के अंदर के ही सिस्टम के अंदर के जज से लेकर मजिस्ट्रेट वकील इस बात को दोहरा चुके हैं इसलिए इन व्यवस्थाओं से बहुत ज्यादा भरोसा करने की जरूरत नहीं है।

🚩दिव्य शक्ति की इच्छा से नव हिंदुस्तान का निर्मित

🚩सुरेश जी ने बताया कि हम तो दिव्य व्यवस्था के वाहक हैं और इसलिए हमने उस दिव्य व्यवस्था पर अपनी श्रद्धा रखनी चाहिए भाव रखना चाहिए । वही व्यवस्था इन तमाम चीजों को क्योंकि भगवान किस बंदे से क्या करना चाहता है कोई बता नहीं सकता कभी-कभी वह बातें समझने में 100-100 साल लग जाते हैं और इसीलिए हम यह माने कि दिव्य शक्ति की इच्छा के आधार पर नव हिंदुस्तान को निर्मित करने की आवश्यकता है ।

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