Forwarded from मराठी व्याकरण
समानार्थी शब्द :
चव = रुची, गोडी
चरण = पाय, पाऊल
चरितार्थ = उदरनिर्वाह
चक्र = चाक
चऱ्हाट = दोरखंड
चाक = चक्र
चंद्र = शशी, रजनीनाथ, इंदू
चिंता = काळजी
चिडीचूप = शांत
चिमुरडी = लहान
चूक = दोष
चेहरा = मुख
चौकशी = विचारपूस
छंद = नाद, आवड
छान = सुरेख, सुंदर
छिद्र = भोक
जग = दुनिया, विश्व
जत्रा = मेळा
जन = लोक, जनता
जमीन = भूमी, धरती, भुई
जंगल = रान
जीव = प्राण
जीवन = आयुष्य, हयात
जुलूम = अत्याचार, छळ, बळजोरी, अन्याय
झाड = वृक्ष, तरू
झोपडी = कुटीर, खोप
झोप = निद्रा
झोका = झुला
झेंडा = ध्वज, निशाण
ठग = चोर
ठिकाण = स्थान
डोके = मस्तक, शीर्ष, शीर
डोळा = नेत्र, नयन, लोचन
डोंगर = पर्वत, गिरी
ढग = मेघ, जलद, पयोधर, अभ्र
ॠण = कर्ज
तक्रार = गाऱ्हाणे
तळे = तलाव, सरोवर, तडाग
त्वचा = कातडी
तारण = रक्षण
ताल = ठेका
तुरंग = कैदखाना, बंदिवास
तुलना = साम्य
थट्टा = मस्करी, चेष्टा
थवा = समूह
थोबाड = गालपट
दगड = पाषाण, खडक
दरवाजा = दार, कवाड
दाम = पैसा
दृश्य = देखावा
दृढता = मजबुती
दिवस = दिन, वार, वासर
दिवा = दीप, दीपक
दूध = दुग्ध, पय
द्वेष = मत्सर, हेवा
देव = ईश्वर, विधाता
देश = राष्ट्र
देखावा = दृश्य
दार = दरवाजा
दारिद्र्य = गरिबी
दौलत = संपत्ती, धन
धरती = भूमी, धरणी
ध्वनी = आवाज, रव
नदी = सरिता
नजर = दृष्टी
नक्कल = प्रतिकृती
नमस्कार = वंदन, नमन
नातेवाईक = नातलग
नाच = नृत्य
निश्चय = निर्धार
निर्धार = निश्चय
निर्मळ = स्वच्छ
नियम = पद्धत
निष्ठा = श्रद्धा
नृत्य = नाच
नोकर = सेवक
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चव = रुची, गोडी
चरण = पाय, पाऊल
चरितार्थ = उदरनिर्वाह
चक्र = चाक
चऱ्हाट = दोरखंड
चाक = चक्र
चंद्र = शशी, रजनीनाथ, इंदू
चिंता = काळजी
चिडीचूप = शांत
चिमुरडी = लहान
चूक = दोष
चेहरा = मुख
चौकशी = विचारपूस
छंद = नाद, आवड
छान = सुरेख, सुंदर
छिद्र = भोक
जग = दुनिया, विश्व
जत्रा = मेळा
जन = लोक, जनता
जमीन = भूमी, धरती, भुई
जंगल = रान
जीव = प्राण
जीवन = आयुष्य, हयात
जुलूम = अत्याचार, छळ, बळजोरी, अन्याय
झाड = वृक्ष, तरू
झोपडी = कुटीर, खोप
झोप = निद्रा
झोका = झुला
झेंडा = ध्वज, निशाण
ठग = चोर
ठिकाण = स्थान
डोके = मस्तक, शीर्ष, शीर
डोळा = नेत्र, नयन, लोचन
डोंगर = पर्वत, गिरी
ढग = मेघ, जलद, पयोधर, अभ्र
ॠण = कर्ज
तक्रार = गाऱ्हाणे
तळे = तलाव, सरोवर, तडाग
त्वचा = कातडी
तारण = रक्षण
ताल = ठेका
तुरंग = कैदखाना, बंदिवास
तुलना = साम्य
थट्टा = मस्करी, चेष्टा
थवा = समूह
थोबाड = गालपट
दगड = पाषाण, खडक
दरवाजा = दार, कवाड
दाम = पैसा
दृश्य = देखावा
दृढता = मजबुती
दिवस = दिन, वार, वासर
दिवा = दीप, दीपक
दूध = दुग्ध, पय
द्वेष = मत्सर, हेवा
देव = ईश्वर, विधाता
देश = राष्ट्र
देखावा = दृश्य
दार = दरवाजा
दारिद्र्य = गरिबी
दौलत = संपत्ती, धन
धरती = भूमी, धरणी
ध्वनी = आवाज, रव
नदी = सरिता
नजर = दृष्टी
नक्कल = प्रतिकृती
नमस्कार = वंदन, नमन
नातेवाईक = नातलग
नाच = नृत्य
निश्चय = निर्धार
निर्धार = निश्चय
निर्मळ = स्वच्छ
नियम = पद्धत
निष्ठा = श्रद्धा
नृत्य = नाच
नोकर = सेवक
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समानार्थी शब्द :
परिश्रम = कष्ट, मेहनत
पती = नवरा, वर
पत्र = टपाल
पहाट = उषा
परीक्षा = कसोटी
पर्वा = चिंता, काळजी
पर्वत = डोंगर, गिरी, अचल
पक्षी = पाखरू, खग, विहंग
प्रकाश = उजेड
प्रवास = सफर, फेरफटका, पर्यटन
प्रवासी = वाटसरू
प्रजा = लोक
प्रत - नक्कल
प्रदेश = प्रांत
प्रवास = यात्रा
प्राण = जीव
पान = पत्र, पत्ता
प्रासाद = वाडा
पाखरू = पक्षी
पाऊल = पाय, चरण
पाऊलवाट = पायवाट
प्रार्थना = स्तवन
प्रामाणिकपणा = इमानदारी
प्रारंभ = सुरुवात, आरंभ
प्रेम = प्रीती, माया, जिव्हाळा
प्रोत्साहन = उत्तेजन
पाऊस = वर्षा, पर्जन्य
पाणी = जल, नीर, तोय, उदक
पिशवी = थैली
पुस्तक = ग्रंथ
पुतळा = प्रतिमा, बाहुले
पुरातन = प्राचीन
पृथ्वी = धरणी, जमीन, वसुंधरा, वसुधा
फलक = फळा
फांदी शाखा
फूल = पुष्प, सुमन, कुसुम
बदल = फेरफार, कलाटणी
बर्फ = हिम
बहीण = भगिनी
बक्षीस = पारितोषिक, पुरस्कार
बाग = बगीचा, उद्यान, वाटिका
बासरी = पावा
बेत = योजना
बाळ = बालक
बाप = पिता, वडील, जनक
बादशाहा = सम्राट
बुद्धी = मती
ब्रीद = बाणा
भरवसा = विश्वास
भरारी = झेप, उड्डाण
भव्य = टोलेजंग
भाट = स्तुतिपाठक
भारती = भाषा, वैखरी
भांडण = तंटा
भाळ = कपाळ
भाऊ = बंधू, सहोदर
भेसळ = मिलावट
भेदभाव = फरक
भोजन = जेवण
मदत = साहाय्य
ममता = माया, जिव्हाळा, वात्सल्य
मन = चित्त, अंतःकरण
मजूर = कामगार
महिना = मास
महिला = स्त्री, बाई, ललना
मजूर = कामगार
मस्तक = डोके, शीर, माथा
मानवता = माणुसकी
मान = गळा
मंगल = पवित्र
मंदिर = देऊळ, देवालय
मार्ग = रस्ता, वाट
म्होरक्या = पुढारी, नेता
मित्र = दोस्त, सोबती, सखा, सवंगडी
मिष्टान्न = गोडधोड
मुलगा = पुत्र, सुत, तनय
मुलगी = कन्या, तनया
मुद्रा = चेहरा, मुख, तोंड, वदन
मुख = तोंड, चेहरा
मुलुख = प्रदेश, प्रांत, परगणा
मेहनत = कष्ट, श्रम, परिश्रम
मैत्री = दोस्ती
मौज = मजा, गंमत
यश = सफलता
युक्ती = विचार, शक्कल
युद्ध = लढाई, संग्राम, लढा, समर
योद्धा = लढवय्या
रक्त = रुधिर
रणांगण = रणभूमी, समरांगण
र्हास = हानी
राग = क्रोध, संताप, चीड
राजा = नरेश, नृप
राष्ट्र = देश
रांग = ओळ
रात्र = निशा, रजनी, यामिनी
रान = वन, जंगल, अरण्य, कानन
रूप = सौंदर्य
रुबाब = ऐट, तोरा
रेखीव = सुंदर, सुबक
लग्न = विवाह, परिणय
लाट = लहर
लाज = शरम,
लोभ = हाव
वस्त्र = कपडा
वारा = वात, पवन, अनिल, मारुत, समीर, वायू
वाट = मार्ग, रस्ता
वाद्य = वाजप
वातावरण = रागरंग
वेग = गती
वेळ = समय, प्रहर
वेळू = बांबू
वेश = सोशाख
वेदना = यातना
विश्रांती = विसावा, आराम
वितरण = वाटप, वाटणी
विद्या = ज्ञान
विनंती = विनवणी
विरोध = प्रतिकार, विसंगती
विसावा = विश्रांती, आराम
विश्व = जग, दुनिया
वीज = विद्युर, सौदामिनी
वृत्ती = स्वभाव
वृद्ध = म्हातारा
वैराण = ओसाड, भकास, उजाड
वैरी = शत्रू, दुष्मन
वैषम्य = विषाद
व्यवसाय = धंदा
व्याख्यान = भाषण
शरीर = देह, तनू, काया, कुडी, अंग
शक्ती = सामर्थ्य, जोर, बळ
शर्यत = स्पर्धा, होड, चुरस
शहर = नगर
शंकर = चंद्रचूड
श्वापद = जनावर
शास्त्रज्ञ = वैज्ञानिक
शाळा = विद्यालय
शाळुंका = शिविलिंग
शेत =
शिवार, वावर, क्षेत्र
शिवार = शेत, वावर
शीण = थकवा
शील = चारित्र्य
शीतल = थंड, गार
शिक्षा = दंड, शासन
श्रम = कष्ट, मेहनत
सकाळ = प्रभात, उष:काल
सचोटी = खरेपणा
सफाई = स्वच्छता
सवलत = सूट
सजा = शिक्षा
सन्मान = आदर
संकट = आपत्ती
संधी = मोका
संत = सज्जन, साधू
संपत्ती = धन, दौलत, संपदा
सायंकाळ = संध्याकाळ
सावली = छाया
साथी = सोबती, मित्र, दोस्त, सखा
स्तुती = प्रशंसा
स्पर्धा = चुरस, शर्यत, होड, पैज
स्थान = ठिकाण, वास, ठाव
स्त्री = बाई, महिला, ललना
संध्याकाळ = सायंकाळ, सांज
स्फूर्ती = प्रेरणा
स्वच्छता = झाडलोट
सुवास = सुगंध, परिमल, दरवळ
सुंदर = सुरेख, रमणीय, मनोहर, छान
सागर = समुद्र, सिंधू, रत्नाकर, जलधी
सावली = छाया
सामर्थ्य = शक्ती, बळ
साहित्य = लिखाण
सेवा = शुश्रूषा
सिनेमा = चित्रपट, बोलपट
सिंह = केसरी, मृगराज, वनराज
सुविधा = सोय
सुगंध = सुवास, परिमळ, दरवळ
सूत = धागा, दोरा
सूर = स्वर
सूर्य = रवी, भास्कर, दिनकर, सविता
सोने = सुवर्ण, कांचन, हेम
सोहळा = समारंभ
हद्द = सीमा, शीव
हल्ला = चढाई
हळू चालणे = मंदगती
हकिकत = गोष्ट, कहाणी, कथा
हात = हस्त, कर, बाहू
हाक = साद
हित = कल्याण
हिंमत = धैर्य
हुकूमत = अधिकार
हुरूप = उत्साह
हुबेहूब = तंतोतंत
हेका = हट्ट, आग्रह
क्षमा = माफी
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परिश्रम = कष्ट, मेहनत
पती = नवरा, वर
पत्र = टपाल
पहाट = उषा
परीक्षा = कसोटी
पर्वा = चिंता, काळजी
पर्वत = डोंगर, गिरी, अचल
पक्षी = पाखरू, खग, विहंग
प्रकाश = उजेड
प्रवास = सफर, फेरफटका, पर्यटन
प्रवासी = वाटसरू
प्रजा = लोक
प्रत - नक्कल
प्रदेश = प्रांत
प्रवास = यात्रा
प्राण = जीव
पान = पत्र, पत्ता
प्रासाद = वाडा
पाखरू = पक्षी
पाऊल = पाय, चरण
पाऊलवाट = पायवाट
प्रार्थना = स्तवन
प्रामाणिकपणा = इमानदारी
प्रारंभ = सुरुवात, आरंभ
प्रेम = प्रीती, माया, जिव्हाळा
प्रोत्साहन = उत्तेजन
पाऊस = वर्षा, पर्जन्य
पाणी = जल, नीर, तोय, उदक
पिशवी = थैली
पुस्तक = ग्रंथ
पुतळा = प्रतिमा, बाहुले
पुरातन = प्राचीन
पृथ्वी = धरणी, जमीन, वसुंधरा, वसुधा
फलक = फळा
फांदी शाखा
फूल = पुष्प, सुमन, कुसुम
बदल = फेरफार, कलाटणी
बर्फ = हिम
बहीण = भगिनी
बक्षीस = पारितोषिक, पुरस्कार
बाग = बगीचा, उद्यान, वाटिका
बासरी = पावा
बेत = योजना
बाळ = बालक
बाप = पिता, वडील, जनक
बादशाहा = सम्राट
बुद्धी = मती
ब्रीद = बाणा
भरवसा = विश्वास
भरारी = झेप, उड्डाण
भव्य = टोलेजंग
भाट = स्तुतिपाठक
भारती = भाषा, वैखरी
भांडण = तंटा
भाळ = कपाळ
भाऊ = बंधू, सहोदर
भेसळ = मिलावट
भेदभाव = फरक
भोजन = जेवण
मदत = साहाय्य
ममता = माया, जिव्हाळा, वात्सल्य
मन = चित्त, अंतःकरण
मजूर = कामगार
महिना = मास
महिला = स्त्री, बाई, ललना
मजूर = कामगार
मस्तक = डोके, शीर, माथा
मानवता = माणुसकी
मान = गळा
मंगल = पवित्र
मंदिर = देऊळ, देवालय
मार्ग = रस्ता, वाट
म्होरक्या = पुढारी, नेता
मित्र = दोस्त, सोबती, सखा, सवंगडी
मिष्टान्न = गोडधोड
मुलगा = पुत्र, सुत, तनय
मुलगी = कन्या, तनया
मुद्रा = चेहरा, मुख, तोंड, वदन
मुख = तोंड, चेहरा
मुलुख = प्रदेश, प्रांत, परगणा
मेहनत = कष्ट, श्रम, परिश्रम
मैत्री = दोस्ती
मौज = मजा, गंमत
यश = सफलता
युक्ती = विचार, शक्कल
युद्ध = लढाई, संग्राम, लढा, समर
योद्धा = लढवय्या
रक्त = रुधिर
रणांगण = रणभूमी, समरांगण
र्हास = हानी
राग = क्रोध, संताप, चीड
राजा = नरेश, नृप
राष्ट्र = देश
रांग = ओळ
रात्र = निशा, रजनी, यामिनी
रान = वन, जंगल, अरण्य, कानन
रूप = सौंदर्य
रुबाब = ऐट, तोरा
रेखीव = सुंदर, सुबक
लग्न = विवाह, परिणय
लाट = लहर
लाज = शरम,
लोभ = हाव
वस्त्र = कपडा
वारा = वात, पवन, अनिल, मारुत, समीर, वायू
वाट = मार्ग, रस्ता
वाद्य = वाजप
वातावरण = रागरंग
वेग = गती
वेळ = समय, प्रहर
वेळू = बांबू
वेश = सोशाख
वेदना = यातना
विश्रांती = विसावा, आराम
वितरण = वाटप, वाटणी
विद्या = ज्ञान
विनंती = विनवणी
विरोध = प्रतिकार, विसंगती
विसावा = विश्रांती, आराम
विश्व = जग, दुनिया
वीज = विद्युर, सौदामिनी
वृत्ती = स्वभाव
वृद्ध = म्हातारा
वैराण = ओसाड, भकास, उजाड
वैरी = शत्रू, दुष्मन
वैषम्य = विषाद
व्यवसाय = धंदा
व्याख्यान = भाषण
शरीर = देह, तनू, काया, कुडी, अंग
शक्ती = सामर्थ्य, जोर, बळ
शर्यत = स्पर्धा, होड, चुरस
शहर = नगर
शंकर = चंद्रचूड
श्वापद = जनावर
शास्त्रज्ञ = वैज्ञानिक
शाळा = विद्यालय
शाळुंका = शिविलिंग
शेत =
शिवार, वावर, क्षेत्र
शिवार = शेत, वावर
शीण = थकवा
शील = चारित्र्य
शीतल = थंड, गार
शिक्षा = दंड, शासन
श्रम = कष्ट, मेहनत
सकाळ = प्रभात, उष:काल
सचोटी = खरेपणा
सफाई = स्वच्छता
सवलत = सूट
सजा = शिक्षा
सन्मान = आदर
संकट = आपत्ती
संधी = मोका
संत = सज्जन, साधू
संपत्ती = धन, दौलत, संपदा
सायंकाळ = संध्याकाळ
सावली = छाया
साथी = सोबती, मित्र, दोस्त, सखा
स्तुती = प्रशंसा
स्पर्धा = चुरस, शर्यत, होड, पैज
स्थान = ठिकाण, वास, ठाव
स्त्री = बाई, महिला, ललना
संध्याकाळ = सायंकाळ, सांज
स्फूर्ती = प्रेरणा
स्वच्छता = झाडलोट
सुवास = सुगंध, परिमल, दरवळ
सुंदर = सुरेख, रमणीय, मनोहर, छान
सागर = समुद्र, सिंधू, रत्नाकर, जलधी
सावली = छाया
सामर्थ्य = शक्ती, बळ
साहित्य = लिखाण
सेवा = शुश्रूषा
सिनेमा = चित्रपट, बोलपट
सिंह = केसरी, मृगराज, वनराज
सुविधा = सोय
सुगंध = सुवास, परिमळ, दरवळ
सूत = धागा, दोरा
सूर = स्वर
सूर्य = रवी, भास्कर, दिनकर, सविता
सोने = सुवर्ण, कांचन, हेम
सोहळा = समारंभ
हद्द = सीमा, शीव
हल्ला = चढाई
हळू चालणे = मंदगती
हकिकत = गोष्ट, कहाणी, कथा
हात = हस्त, कर, बाहू
हाक = साद
हित = कल्याण
हिंमत = धैर्य
हुकूमत = अधिकार
हुरूप = उत्साह
हुबेहूब = तंतोतंत
हेका = हट्ट, आग्रह
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Forwarded from मराठी व्याकरण
🔹मराठी व्याकरण🔹
शब्दाच्या जाती
1)नाम -
जे शब्द प्रत्यक्ष किंवा काल्पनिक वस्तूची, वस्तूच्या गुणांची नावे असतात अशा शब्दांना नाम असे म्हणतात.
उदाहरण - घर, आकाश, गोड
2)सर्वनाम-
जे शब्द नामाच्या ऐवजी वापरले जातात त्या शब्दांना सर्वनाम असे म्हणतात.
उदाहरण - मी, तू, आम्ही
3) विशेषण-
जे शब्द नामाबद्दल जास्त माहिती सांगतात त्या शब्दांना विशेषण असे म्हणतात.
उदाहरण - गोड, उंच
4)क्रियापद-
जे शब्द वाक्यातील क्रिया दाखवतात व त्या वाक्याचा अर्थ पूर्ण करतात त्या शब्दांना क्रियापद असे म्हणतात.
उदाहरण - बसणे, पळणे
5)क्रियाविशेषण-
जे शब्द क्रियापदाबद्दल जास्त माहिती सांगतात त्या शब्दांना क्रियाविशेषण असे म्हणतात.
उदाहरण - इथे, उद्या
6) शब्दयोगी अव्यय-
जे शब्द नामांना किंवा सर्वनामांना जडून येतात व वाक्यातील शब्दांचा संबंध दाखवतात त्या शब्दांना शब्दयोगी अव्यय असे म्हणतात.
उदाहरण - झाडाखाली, त्यासाठी
7) उभयान्वयी अव्यय-
जे शब्द दोन शब्द किंवा वाक्य यांना जोडतात त्या शब्दांना उभयान्वयी अव्यय असे म्हणतात.
उदाहरण - व, आणि, किंवा
8) केवलप्रयोगी अव्यय-
जे शब्द आपल्या मनातील वृत्तीकिंवा भवन व्यक्त करतात त्या शब्दांना केवलप्रयोगी अव्यय असे म्हणतात.
उदाहरण - अरेरे, अबब
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शब्दाच्या जाती
1)नाम -
जे शब्द प्रत्यक्ष किंवा काल्पनिक वस्तूची, वस्तूच्या गुणांची नावे असतात अशा शब्दांना नाम असे म्हणतात.
उदाहरण - घर, आकाश, गोड
2)सर्वनाम-
जे शब्द नामाच्या ऐवजी वापरले जातात त्या शब्दांना सर्वनाम असे म्हणतात.
उदाहरण - मी, तू, आम्ही
3) विशेषण-
जे शब्द नामाबद्दल जास्त माहिती सांगतात त्या शब्दांना विशेषण असे म्हणतात.
उदाहरण - गोड, उंच
4)क्रियापद-
जे शब्द वाक्यातील क्रिया दाखवतात व त्या वाक्याचा अर्थ पूर्ण करतात त्या शब्दांना क्रियापद असे म्हणतात.
उदाहरण - बसणे, पळणे
5)क्रियाविशेषण-
जे शब्द क्रियापदाबद्दल जास्त माहिती सांगतात त्या शब्दांना क्रियाविशेषण असे म्हणतात.
उदाहरण - इथे, उद्या
6) शब्दयोगी अव्यय-
जे शब्द नामांना किंवा सर्वनामांना जडून येतात व वाक्यातील शब्दांचा संबंध दाखवतात त्या शब्दांना शब्दयोगी अव्यय असे म्हणतात.
उदाहरण - झाडाखाली, त्यासाठी
7) उभयान्वयी अव्यय-
जे शब्द दोन शब्द किंवा वाक्य यांना जोडतात त्या शब्दांना उभयान्वयी अव्यय असे म्हणतात.
उदाहरण - व, आणि, किंवा
8) केवलप्रयोगी अव्यय-
जे शब्द आपल्या मनातील वृत्तीकिंवा भवन व्यक्त करतात त्या शब्दांना केवलप्रयोगी अव्यय असे म्हणतात.
उदाहरण - अरेरे, अबब
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Forwarded from मराठी व्याकरण
प्रश्नसंच 1 : मराठी
१) नामाऐवजी वापरल्या जाणार्या शब्दाला काय म्हणतात ?
अ) विशेष नाम
ब) सर्वनाम
क) विशेषण
ड) क्रियापद
उत्तर : ब
====================
२) शब्दाच्या किती जाती आहेत?
अ) आठ
ब) पाच
क) तीन
ड) बारा
उत्तर :अ
====================
३) विसंगत पर्याय निवडा
अ) क - ख
ब) च - छ
क) ब - भ
ड) त - थ
उत्तर : क
====================
४) हरणाच्या कानात वारा शिरला ? (कर्ता ओळखा)
अ) हरीण
ब) शिरला
क) कान
ड) वारा
उत्तर : अ
====================
५) समाजात वावरणारे असले साप ठेचून काढले पाहिजे ? (शब्द शक्ती ओळखा )
अ) लक्षणा
ब) व्यंजना
क) अभिधा
ड) वरील पैकी सर्व
उत्तर : ड
====================
६) नीलकंठ, रक्तचंदन, मुखकमल समासाचा प्रकार ओळखा ?
अ) द्विगु समास.
ब) द्वंद्वाव समास
क) कर्मधारय समास
ड) अलुक तत्पुरुष समास.
उत्तर : क
====================
७) स्वताशी केलेले भाषण म्हणजेच ?
अ) संवाद
ब) स्वगत
क) वाद
ड) नांदी
उत्तर : ब
====================
८) राजु जोराने धावतो. (प्रयोग ओळखा )
अ) भावे प्रयोग
ब) कर्मणी प्रयोग
क) सकर्मक कर्तरी
ड) अकर्मक कर्तरी
उत्तर :क
====================
९) कर्म, दुग्ध, हस्त, कोमल हे कोणत्या प्रकारचे शब्द आहे?
अ) देशी
ब) तत्सम
क) तत्भव
ड) परभाषीय
उत्तर : ब
====================
१०) आई सारखी मायाळू आईच . (अलंकार ओळखा )
अ) उपमा
ब) व्यतिरेक
क) अनन्वय
ड) रुपक
उत्तर : ड
====================
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१) नामाऐवजी वापरल्या जाणार्या शब्दाला काय म्हणतात ?
अ) विशेष नाम
ब) सर्वनाम
क) विशेषण
ड) क्रियापद
उत्तर : ब
====================
२) शब्दाच्या किती जाती आहेत?
अ) आठ
ब) पाच
क) तीन
ड) बारा
उत्तर :अ
====================
३) विसंगत पर्याय निवडा
अ) क - ख
ब) च - छ
क) ब - भ
ड) त - थ
उत्तर : क
====================
४) हरणाच्या कानात वारा शिरला ? (कर्ता ओळखा)
अ) हरीण
ब) शिरला
क) कान
ड) वारा
उत्तर : अ
====================
५) समाजात वावरणारे असले साप ठेचून काढले पाहिजे ? (शब्द शक्ती ओळखा )
अ) लक्षणा
ब) व्यंजना
क) अभिधा
ड) वरील पैकी सर्व
उत्तर : ड
====================
६) नीलकंठ, रक्तचंदन, मुखकमल समासाचा प्रकार ओळखा ?
अ) द्विगु समास.
ब) द्वंद्वाव समास
क) कर्मधारय समास
ड) अलुक तत्पुरुष समास.
उत्तर : क
====================
७) स्वताशी केलेले भाषण म्हणजेच ?
अ) संवाद
ब) स्वगत
क) वाद
ड) नांदी
उत्तर : ब
====================
८) राजु जोराने धावतो. (प्रयोग ओळखा )
अ) भावे प्रयोग
ब) कर्मणी प्रयोग
क) सकर्मक कर्तरी
ड) अकर्मक कर्तरी
उत्तर :क
====================
९) कर्म, दुग्ध, हस्त, कोमल हे कोणत्या प्रकारचे शब्द आहे?
अ) देशी
ब) तत्सम
क) तत्भव
ड) परभाषीय
उत्तर : ब
====================
१०) आई सारखी मायाळू आईच . (अलंकार ओळखा )
अ) उपमा
ब) व्यतिरेक
क) अनन्वय
ड) रुपक
उत्तर : ड
====================
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Forwarded from मराठी व्याकरण
🔹 टोपण नावे - कवी / साहित्यिक 🔹
1) यशवंत - यशवंत दिनकर पेंढारकर
2) मोरोपंत - मोरोपंत रामचंद्र पराडकर
3) रामदास - नारायण सुर्याजीपंत ठोसर
4) दत्त - दत्तात्रय कोंडो घाटे
5) आरती प्रभू - चिंतामण त्र्यंबक खानोलकर
6) बी - नारायण मुरलीधर गुप्ते
7) लोकहितवादी - गोपाळ हरी देशमुख
8) दिवाकर - शंकर काशिनाथ गर्गे
9) माधव ज्युलियन - माधव त्र्यंबक पटवर्धन
10) अज्ञातवासी - दिनकर गंगाधर केळकर
______________________________________
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1) यशवंत - यशवंत दिनकर पेंढारकर
2) मोरोपंत - मोरोपंत रामचंद्र पराडकर
3) रामदास - नारायण सुर्याजीपंत ठोसर
4) दत्त - दत्तात्रय कोंडो घाटे
5) आरती प्रभू - चिंतामण त्र्यंबक खानोलकर
6) बी - नारायण मुरलीधर गुप्ते
7) लोकहितवादी - गोपाळ हरी देशमुख
8) दिवाकर - शंकर काशिनाथ गर्गे
9) माधव ज्युलियन - माधव त्र्यंबक पटवर्धन
10) अज्ञातवासी - दिनकर गंगाधर केळकर
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Forwarded from मराठी व्याकरण
@Marathi
🔹अध्याक्षर अ पासून समानार्थी शब्द:
अनाथ = पोरका
अनर्थ = संकट
अपघात = दुर्घटना
अपेक्षाभंग = हिरमोड
अभिवादन = नमस्कार, वंदन, प्रणाम
अभिनंदन = गौरव
अभिमान = गर्व
अभिनेता = नट
अरण्य = वन, जंगल, कानन
अवघड = कठीण
अवचित = एकदम
अवर्षण = दुष्काळ
अविरत = सतत, अखंड
अडचण = समस्या
अभ्यास = सराव
अन्न = आहार, खाद्य
अग्नी = आग
अचल = शांत, स्थिर
अचंबा = आश्चर्य, नवल
अतिथी = पाहुणा
अत्याचार = अन्याय
अपराध = गुन्हा, दोष
अपमान = मानभंग
अपाय = इजा
अश्रू = आसू
अंबर = वस्त्र
अमृत = पीयूष
अहंकार = गर्व
अंक = आकडा
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🔹अध्याक्षर अ पासून समानार्थी शब्द:
अनाथ = पोरका
अनर्थ = संकट
अपघात = दुर्घटना
अपेक्षाभंग = हिरमोड
अभिवादन = नमस्कार, वंदन, प्रणाम
अभिनंदन = गौरव
अभिमान = गर्व
अभिनेता = नट
अरण्य = वन, जंगल, कानन
अवघड = कठीण
अवचित = एकदम
अवर्षण = दुष्काळ
अविरत = सतत, अखंड
अडचण = समस्या
अभ्यास = सराव
अन्न = आहार, खाद्य
अग्नी = आग
अचल = शांत, स्थिर
अचंबा = आश्चर्य, नवल
अतिथी = पाहुणा
अत्याचार = अन्याय
अपराध = गुन्हा, दोष
अपमान = मानभंग
अपाय = इजा
अश्रू = आसू
अंबर = वस्त्र
अमृत = पीयूष
अहंकार = गर्व
अंक = आकडा
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Forwarded from मराठी व्याकरण
*मराठी व्याकरण*
*शब्दसिद्धी व त्याचे प्रकार*
*शब्द कसा तयार झाला आहे, म्हणजे सिद्ध कसा झाला आहे यालाच 'शब्दसिद्धी' असे म्हणतात.*
*शब्दांचे खालील प्रकार पडतात.*
*तत्सम शब्द :*
जे संस्कृत शब्द मराठी भाषेत जसेच्या तसे काहीही बादल न होता आले आहेत त्यांना *'तत्सम शब्द'* असे म्हणतात.
*उदा.*
राजा, भूगोल, चंचू, पुष्प, परंतु, भगवान, कर, पशु, अंध, जल, दीप, पृथ्वी, तथापि, कवि, वायु, भीती, पुत्र, अधापि, मति, पुरुष, शिशु, गुरु, मधु, गंध, पिता, कन्या, वृक्ष, धर्म, सत्कार, समर्थन, उत्सव, विद्वान, संत, निस्तेज, कर, जगन्नाथ, दर्शन, उमेश, स्वामि, मंदिर, तिथी, सूर्य, स्वल्प, घृणा, पिंड, कलश, प्रात:क, दंड, पत्र, ग्रंथ, उत्तम, आकाश पाप, मंत्र, शिखर, सूत्र, कार्य, होम, गणेश, सभ्य, कन्या, देवर्षि, वृद्ध, संसार, प्रीत्यर्थ, कविता, उपकार, परंतु, गायन, अश्रू, प्रसाद, अब्ज, राजा, संमती, घंटा, पुण्य, बुद्धी, अभिषेक, संगती, श्रद्धा, प्रकाश, सत्कार, देवालय, तारा, समर्थन, नयन, उत्सव, दुष्परिणाम, नैवेध.
*तदभव शब्द :*
*जे शब्द संस्कृत मधून मराठीमध्ये येतांना त्यांच्या मूळ रूपात काही बदल होतो त्या शब्दांना 'तदभव शब्द' असे म्हणतात.*
*उदा.*
घर, पाय, भाऊ, सासू, सासरा, गाव, दूध, घास, कोवळा, ओळ, काम, घाम, घडा, फुल, आसू, धुर, जुना, चाक, आग, धूळ, दिवा, पान, वीज, चामडे, तहान, अंजली, चोच, तण, माकड, अडाणी, उधोग, शेत, पाणी, पेटी, विनंती, ओंजळ, आंधळा, काय, धुर, पंख, ताक, कान, गाय.
*देशी/देशीज शब्द :*
*महाराष्ट्रातील मूळ रहिवाशांच्या बोलीभाषेमधील वापरल्या जाणार्या शब्दांना 'देशी शब्द' असे म्हणतात.*
*उदा.*
झाड, दगड, धोंडा, घोडा, डोळा, डोके, हाड, पोट, गुडघा, बोका, रेडा, बाजारी, वांगे, लुगडे, झोप, खुळा, चिमणी, ढेकूण, कंबर, पीठ, डोळा, मुलगा, लाजरा, वेढा, गार, लाकूड, ओटी, वेडा, अबोला, लूट, अंघोळ, उडी, शेतकरी, आजार, रोग, ओढा, चोर, वारकरी, मळकट, धड, ओटा, डोंगर.
*परभाषीय शब्द :*
*संस्कृत व्यतिरिक्त इतर भाषांमधून मराठीत आलेल्या शब्दांना 'परभाषीय शब्द' असे म्हणतात.*
*1) तुर्की शब्द*
कालगी, बंदूक, कजाग
*2) इंग्रजी शब्द*
टी.व्ही., डॉक्टर, कोर्ट, पेन, पार्सल, सायकल, स्टेशन, हॉस्पिटल, बस, फाईल, रेल्वे, पास, ब्रेक, कप, मास्तर, फी, बॉल, स्टॉप, ऑफिस, एजंट, टेलिफोन, सिनेमा, सर्कस, पॅंट, बॅट, पोस्ट, तिकीट, ड्रायव्हर, मोटर, कंडक्टर, नंबर, टीचर, सर, मॅडम, पेपर, नर्स, पेशंट, इंजेक्शन, बटन ड्रेस, ग्लास, इत्यादी.
*3) पोर्तुगीज शब्द*
बटाटा, तंभाखू, पगार, बिजागरी, कोबी, हापूस, फणस, घमेले, पायरी, लोणचे, मेज, चावी, तुरुंग, तिजोरी, काडतुस.
*4) फारशी शब्द*
रवाना, समान, हकीकत, अत्तर, अब्रू, पेशवा, पोशाख, सौदागार, कामगार, गुन्हेगार, फडवणीस, बाम, लेजीम, शाई, गरीब, खानेसुमारी, हजार, शाहीर, मोहोर, सरकार, महिना हप्ता.
*5) अरबी शब्द*
अर्ज, इनाम, हुकूम, मेहनत, जाहीर, मंजूर, शाहीर, साहेब, मालक, मौताज, नक्कल, जबाब, उर्फ, पैज, मजबूत, शहर, नजर, खर्च, मनोरा, वाद, मदत, बदल.
*6) कानडी शब्द*
हंडा, भांडे, अक्का, गाजर, भाकरी, अण्णा, पिशवी, खोली, बांगडी, लवंग, अडकित्ता, चाकरी, पापड, खलबत्ता, किल्ली, तूप, चिंधी, गुढी, विळी, आई, रजई, तंदूर, चिंच, खोबरे, कणीक, चिमटा, नथ, तांब्या, उडीद, पाट, गाल, काका, टाळू, गादी, खिडकी, गच्ची, बांबू, ताई, गुंडी, कांबळे.
*7) गुजराती शब्द*
सदरा, दलाल, ढोकळा, घी, डबा, दादर, रिकामटेकडा, इजा, शेट.
*8) हिन्दी शब्द*
बच्चा, बात, भाई, दिल, दाम, करोड, बेटा, मिलाप, तपास, और, नानी, मंजूर, इमली.
*9) तेलगू शब्द*
ताळा, अनरसा, किडूकमिडूक, शिकेकाई, बंडी, डबी.
*10) तामिळ शब्द*
चिल्ली, पिल्ली, सार, मठ्ठा.
*सिद्ध व सधीत शब्द :*
*1) सिद्ध शब्द—*
*भाषेत जे शब्द मुळात धातू असतात त्यांना 'सिद्ध शब्द' असे म्हणतात.*
उदा. ये, जा, खा, पी, बस, उठ, कर, गा इत्यादी.
*सिद्ध शब्दांचे 3 प्रकार पडतात.*
*अ) तत्सम*
*ब) तदभव*
*क) देशी (यांचा अभ्यास आपण यापूर्वी केला आहे)*
*2) साधीत शब्द—*
*सिद्ध शब्दाला म्हणजेच धातूच्या पूर्वी उपसर्ग किंवा नंतर प्रत्यय लागून 'साधित शब्द' तयार होतो.*
*साधित शब्दांचे पुढील 4 प्रकार पडतात*
*अ)उपसर्गघटित*
*ब) प्रत्ययघटित*
*क) अभ्यस्त*
*ड) सामासिक*
*अ) उपसर्गघटित शब्द—*
*शब्दाच्या पूर्वी जी अक्षरे जोडली जातात त्यांना उपसर्ग असे म्हणतात. तसेच अशी अक्षरे जोडून जे शब्द तयार होतात त्या शब्दांना 'उपसर्ग घटित शब्द' असे म्हणतात.*
उदा. अनुभव, अपयश, अधिकार, अवगुण अधिपती, उपहार, आकार, साकार, प्रतिकार, प्रकार इ.
वरील शब्दांमध्ये अनु. अप, अधि, अव, अधि, उप, आ, सा, प्रति,प्रइ. उपसर्ग लागलेली आपल्याला दिसतात. असे उपसर्ग लागून तयार होणार्या शब्दांना उपसर्ग घटित शब्द असे
म्हणतात
*ब) प्रत्ययघटित शब्द—*
*धातूच्या कि
*शब्दसिद्धी व त्याचे प्रकार*
*शब्द कसा तयार झाला आहे, म्हणजे सिद्ध कसा झाला आहे यालाच 'शब्दसिद्धी' असे म्हणतात.*
*शब्दांचे खालील प्रकार पडतात.*
*तत्सम शब्द :*
जे संस्कृत शब्द मराठी भाषेत जसेच्या तसे काहीही बादल न होता आले आहेत त्यांना *'तत्सम शब्द'* असे म्हणतात.
*उदा.*
राजा, भूगोल, चंचू, पुष्प, परंतु, भगवान, कर, पशु, अंध, जल, दीप, पृथ्वी, तथापि, कवि, वायु, भीती, पुत्र, अधापि, मति, पुरुष, शिशु, गुरु, मधु, गंध, पिता, कन्या, वृक्ष, धर्म, सत्कार, समर्थन, उत्सव, विद्वान, संत, निस्तेज, कर, जगन्नाथ, दर्शन, उमेश, स्वामि, मंदिर, तिथी, सूर्य, स्वल्प, घृणा, पिंड, कलश, प्रात:क, दंड, पत्र, ग्रंथ, उत्तम, आकाश पाप, मंत्र, शिखर, सूत्र, कार्य, होम, गणेश, सभ्य, कन्या, देवर्षि, वृद्ध, संसार, प्रीत्यर्थ, कविता, उपकार, परंतु, गायन, अश्रू, प्रसाद, अब्ज, राजा, संमती, घंटा, पुण्य, बुद्धी, अभिषेक, संगती, श्रद्धा, प्रकाश, सत्कार, देवालय, तारा, समर्थन, नयन, उत्सव, दुष्परिणाम, नैवेध.
*तदभव शब्द :*
*जे शब्द संस्कृत मधून मराठीमध्ये येतांना त्यांच्या मूळ रूपात काही बदल होतो त्या शब्दांना 'तदभव शब्द' असे म्हणतात.*
*उदा.*
घर, पाय, भाऊ, सासू, सासरा, गाव, दूध, घास, कोवळा, ओळ, काम, घाम, घडा, फुल, आसू, धुर, जुना, चाक, आग, धूळ, दिवा, पान, वीज, चामडे, तहान, अंजली, चोच, तण, माकड, अडाणी, उधोग, शेत, पाणी, पेटी, विनंती, ओंजळ, आंधळा, काय, धुर, पंख, ताक, कान, गाय.
*देशी/देशीज शब्द :*
*महाराष्ट्रातील मूळ रहिवाशांच्या बोलीभाषेमधील वापरल्या जाणार्या शब्दांना 'देशी शब्द' असे म्हणतात.*
*उदा.*
झाड, दगड, धोंडा, घोडा, डोळा, डोके, हाड, पोट, गुडघा, बोका, रेडा, बाजारी, वांगे, लुगडे, झोप, खुळा, चिमणी, ढेकूण, कंबर, पीठ, डोळा, मुलगा, लाजरा, वेढा, गार, लाकूड, ओटी, वेडा, अबोला, लूट, अंघोळ, उडी, शेतकरी, आजार, रोग, ओढा, चोर, वारकरी, मळकट, धड, ओटा, डोंगर.
*परभाषीय शब्द :*
*संस्कृत व्यतिरिक्त इतर भाषांमधून मराठीत आलेल्या शब्दांना 'परभाषीय शब्द' असे म्हणतात.*
*1) तुर्की शब्द*
कालगी, बंदूक, कजाग
*2) इंग्रजी शब्द*
टी.व्ही., डॉक्टर, कोर्ट, पेन, पार्सल, सायकल, स्टेशन, हॉस्पिटल, बस, फाईल, रेल्वे, पास, ब्रेक, कप, मास्तर, फी, बॉल, स्टॉप, ऑफिस, एजंट, टेलिफोन, सिनेमा, सर्कस, पॅंट, बॅट, पोस्ट, तिकीट, ड्रायव्हर, मोटर, कंडक्टर, नंबर, टीचर, सर, मॅडम, पेपर, नर्स, पेशंट, इंजेक्शन, बटन ड्रेस, ग्लास, इत्यादी.
*3) पोर्तुगीज शब्द*
बटाटा, तंभाखू, पगार, बिजागरी, कोबी, हापूस, फणस, घमेले, पायरी, लोणचे, मेज, चावी, तुरुंग, तिजोरी, काडतुस.
*4) फारशी शब्द*
रवाना, समान, हकीकत, अत्तर, अब्रू, पेशवा, पोशाख, सौदागार, कामगार, गुन्हेगार, फडवणीस, बाम, लेजीम, शाई, गरीब, खानेसुमारी, हजार, शाहीर, मोहोर, सरकार, महिना हप्ता.
*5) अरबी शब्द*
अर्ज, इनाम, हुकूम, मेहनत, जाहीर, मंजूर, शाहीर, साहेब, मालक, मौताज, नक्कल, जबाब, उर्फ, पैज, मजबूत, शहर, नजर, खर्च, मनोरा, वाद, मदत, बदल.
*6) कानडी शब्द*
हंडा, भांडे, अक्का, गाजर, भाकरी, अण्णा, पिशवी, खोली, बांगडी, लवंग, अडकित्ता, चाकरी, पापड, खलबत्ता, किल्ली, तूप, चिंधी, गुढी, विळी, आई, रजई, तंदूर, चिंच, खोबरे, कणीक, चिमटा, नथ, तांब्या, उडीद, पाट, गाल, काका, टाळू, गादी, खिडकी, गच्ची, बांबू, ताई, गुंडी, कांबळे.
*7) गुजराती शब्द*
सदरा, दलाल, ढोकळा, घी, डबा, दादर, रिकामटेकडा, इजा, शेट.
*8) हिन्दी शब्द*
बच्चा, बात, भाई, दिल, दाम, करोड, बेटा, मिलाप, तपास, और, नानी, मंजूर, इमली.
*9) तेलगू शब्द*
ताळा, अनरसा, किडूकमिडूक, शिकेकाई, बंडी, डबी.
*10) तामिळ शब्द*
चिल्ली, पिल्ली, सार, मठ्ठा.
*सिद्ध व सधीत शब्द :*
*1) सिद्ध शब्द—*
*भाषेत जे शब्द मुळात धातू असतात त्यांना 'सिद्ध शब्द' असे म्हणतात.*
उदा. ये, जा, खा, पी, बस, उठ, कर, गा इत्यादी.
*सिद्ध शब्दांचे 3 प्रकार पडतात.*
*अ) तत्सम*
*ब) तदभव*
*क) देशी (यांचा अभ्यास आपण यापूर्वी केला आहे)*
*2) साधीत शब्द—*
*सिद्ध शब्दाला म्हणजेच धातूच्या पूर्वी उपसर्ग किंवा नंतर प्रत्यय लागून 'साधित शब्द' तयार होतो.*
*साधित शब्दांचे पुढील 4 प्रकार पडतात*
*अ)उपसर्गघटित*
*ब) प्रत्ययघटित*
*क) अभ्यस्त*
*ड) सामासिक*
*अ) उपसर्गघटित शब्द—*
*शब्दाच्या पूर्वी जी अक्षरे जोडली जातात त्यांना उपसर्ग असे म्हणतात. तसेच अशी अक्षरे जोडून जे शब्द तयार होतात त्या शब्दांना 'उपसर्ग घटित शब्द' असे म्हणतात.*
उदा. अनुभव, अपयश, अधिकार, अवगुण अधिपती, उपहार, आकार, साकार, प्रतिकार, प्रकार इ.
वरील शब्दांमध्ये अनु. अप, अधि, अव, अधि, उप, आ, सा, प्रति,प्रइ. उपसर्ग लागलेली आपल्याला दिसतात. असे उपसर्ग लागून तयार होणार्या शब्दांना उपसर्ग घटित शब्द असे
म्हणतात
*ब) प्रत्ययघटित शब्द—*
*धातूच्या कि
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Forwarded from मराठी व्याकरण
ंवा शब्दांच्या पुढे एक किंवा अधिक अक्षरे लावून प्रत्यय तयार होतात व तयार होणार्या शब्दांना 'प्रत्ययघटित शब्द' असे म्हणतात.*
उदा. जनन, जनक, जननी, जनता इ.
वरील शब्दांना न,क, नी ता ही प्रत्यय लागलेली आपल्याला दिसतात असे प्रत्यय लावून तयार होणार्या शब्दांना 'प्रत्ययघटित शब्द' असे म्हणतात.
*क) अभ्यस्त शब्द—*
*एखाधा शब्दांत एका शब्दाची अथवा काही अक्षरांनी पुनरावृत्ती झालेली असते. अशा शब्दांना 'अभ्यस्त शब्द' असे म्हणतात. अभ्यसतचा अर्थ दुप्पट करणे असा होतो.*
उदा. आतल्या आत, शेजरीपाजारी, किरकिर इ.
*अभ्यस्त शब्दांचे खलील 3 प्रकार पडतात.*
*i) पूर्णाभ्यस्त*
*ii) अंशाभ्यस्त*
*iii) अनुकरणवाचक*
*i) पूर्णाभ्यस्त शब्द—*
*एक पूर्ण शब्द जेव्हा पुन्हा येऊन जोडशब्द तयार होतो त्याला पूर्णाभ्यस्त शब्द असे म्हणतात.*
उदा. बारीक बारीक, कळाकाळा, आतल्या आत, हळहळ, वटवट, कळकळ, मळमळ, बडबड, समोरासमोर, हळूहळू, पुढेपुढे, पैसाच पैसा, मजाच मजा, हिरवेहिरवे इ.
*ii) अंशाभ्यस्त शब्द—*
*जेव्हा पूर्ण शब्द हा जोडशब्दात जशाच्या तसा पुन्हा येतो एखादे अक्षर बदलून येतो तेव्हा त्या जोडशब्दांना अंशाभ्यस्त शब्द असे म्हणतात.*
उदा. अदलाबदल, उलटसुलटा, शेजारीपाजारी, बारीकसारीक, लाडीगोडी, सोक्षमोक्ष, जिकडेतिकडे, गोडधोड, गडबड, जाळपोळ, दगडबिगड, किडूकमिडूक, घरबीर इ.
*iii) अनुकरणवाचक शब्द—*
*ज्या शब्दांमध्ये एखाधा ध्वनिवाचक शब्दांची पुनरावृत्ती झालेली असते, अशा शब्दांना अनुकरणवाचक/नादानुकारी शब्द असे म्हणतात.*
उदा. किरकिर, खडखडाट, रिमझिम, गुणगुण, घणघण, कडकडाट, टिकटिक, गडगड इ.
*ड) सामासिक शब्द—*
*जेव्हा दोन किंवा अधिक शब्द एकमेकांमधील परस्पर संबंधामुळे एकत्र येऊन तयार होणार्या शब्दाला 'सामासिक शब्द' असे म्हणतात.*
उदा. पोळपाट, देवघर, दारोदार इ.
उदा. जनन, जनक, जननी, जनता इ.
वरील शब्दांना न,क, नी ता ही प्रत्यय लागलेली आपल्याला दिसतात असे प्रत्यय लावून तयार होणार्या शब्दांना 'प्रत्ययघटित शब्द' असे म्हणतात.
*क) अभ्यस्त शब्द—*
*एखाधा शब्दांत एका शब्दाची अथवा काही अक्षरांनी पुनरावृत्ती झालेली असते. अशा शब्दांना 'अभ्यस्त शब्द' असे म्हणतात. अभ्यसतचा अर्थ दुप्पट करणे असा होतो.*
उदा. आतल्या आत, शेजरीपाजारी, किरकिर इ.
*अभ्यस्त शब्दांचे खलील 3 प्रकार पडतात.*
*i) पूर्णाभ्यस्त*
*ii) अंशाभ्यस्त*
*iii) अनुकरणवाचक*
*i) पूर्णाभ्यस्त शब्द—*
*एक पूर्ण शब्द जेव्हा पुन्हा येऊन जोडशब्द तयार होतो त्याला पूर्णाभ्यस्त शब्द असे म्हणतात.*
उदा. बारीक बारीक, कळाकाळा, आतल्या आत, हळहळ, वटवट, कळकळ, मळमळ, बडबड, समोरासमोर, हळूहळू, पुढेपुढे, पैसाच पैसा, मजाच मजा, हिरवेहिरवे इ.
*ii) अंशाभ्यस्त शब्द—*
*जेव्हा पूर्ण शब्द हा जोडशब्दात जशाच्या तसा पुन्हा येतो एखादे अक्षर बदलून येतो तेव्हा त्या जोडशब्दांना अंशाभ्यस्त शब्द असे म्हणतात.*
उदा. अदलाबदल, उलटसुलटा, शेजारीपाजारी, बारीकसारीक, लाडीगोडी, सोक्षमोक्ष, जिकडेतिकडे, गोडधोड, गडबड, जाळपोळ, दगडबिगड, किडूकमिडूक, घरबीर इ.
*iii) अनुकरणवाचक शब्द—*
*ज्या शब्दांमध्ये एखाधा ध्वनिवाचक शब्दांची पुनरावृत्ती झालेली असते, अशा शब्दांना अनुकरणवाचक/नादानुकारी शब्द असे म्हणतात.*
उदा. किरकिर, खडखडाट, रिमझिम, गुणगुण, घणघण, कडकडाट, टिकटिक, गडगड इ.
*ड) सामासिक शब्द—*
*जेव्हा दोन किंवा अधिक शब्द एकमेकांमधील परस्पर संबंधामुळे एकत्र येऊन तयार होणार्या शब्दाला 'सामासिक शब्द' असे म्हणतात.*
उदा. पोळपाट, देवघर, दारोदार इ.
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From Marathi Mhani app:
कधी खावे तुपाशी, कधी राहावे उपाशी.
Meaning:
सांसारिक स्थिती नेहमीच सारखी नसते.
कधी खावे तुपाशी, कधी राहावे उपाशी.
Meaning:
सांसारिक स्थिती नेहमीच सारखी नसते.
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Forwarded from मराठी व्याकरण
From Marathi Mhani app:
कधी गाडीवर नाव, कधी नावेवर गाडी.
Meaning:
सर्वांचे दिवस येतात, तीच ती स्थिती कधीच राहत नाही.
कधी गाडीवर नाव, कधी नावेवर गाडी.
Meaning:
सर्वांचे दिवस येतात, तीच ती स्थिती कधीच राहत नाही.
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Forwarded from मराठी व्याकरण
From Marathi Mhani app:
करंगळी सुजली म्हणजे डोंगरा एवढी होईल का?
Meaning:
जी गोष्ट लहान असते, ती कितीही प्रयत्न केला तरी अमर्याद मोठी होऊ शकत नाही.
करंगळी सुजली म्हणजे डोंगरा एवढी होईल का?
Meaning:
जी गोष्ट लहान असते, ती कितीही प्रयत्न केला तरी अमर्याद मोठी होऊ शकत नाही.
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प्रश्नसंच :
1. खालीलपैकी कोणती स्वरसंधी नाही? कशाप्रकारे होईल?
मन्वंतर सूर्यास्त उमेशमतैक्य
उत्तर : सूर्यास्त
2. 'शब्दच्छल' या संधीची फोड कशाप्रकारे होईल?
शब्द+छलशब्द+चलशब्द+सलशब्द+च्छल
उत्तर : शब्द+छल
3. पुढील वाक्यातील अधोरेखित शब्दांची जात सांगा. आमच्या गावात बरेच पाटील आहेत.
भाववाचक नामसामान्य नामविशेषणविशेषनाम
उत्तर : सामान्य नाम
4. भाववाचक नाम ओळखा .
फुशारकी शहराणी मुलेथोडी फळेबोलका पत्थर
उत्तर : फुशारकी
5. तृतीय विभक्तीचे प्रमुख कार्य .......... आहे .
करण आपादान संप्रदान अधिकरण
उत्तर : करण
6. 'बेडूक' या शब्दाचे स्त्रीलिंग रूप -
बेडूकबेडकीबेडकीन बेडके
उत्तर : बेडकी
7. पुढीलपैकी कोणता शब्द नपूसंकलिंग नाही ?
पुस्तकचित्रमंगळसूत्रशाळा
उत्तर : शाळा
8. मला परीक्षेची भीती वाटते. अधोरेखित शब्दाची विभक्ती सांगा?
चतुर्थीपंचमीषष्ठीसप्तमी
उत्तर : षष्ठी
9. खलील वाक्यातील ठळक अक्षरातील शब्दांची विभक्तीचा प्रकार शोधा. मुलांनो, ही वाक्य दहा मिनिटात लिहा.
द्वितीयसप्तमी पंचमी संबोधन
उत्तर : सप्तमी
10. पुढील वाक्यातील अधोरेखित शब्दाची जात ओळखा.
'जो मुलगा अभ्यास करील तो पास होईल'.
दर्शक सर्वनामसंबंची सर्वनाम अनिश्चित सर्वनामप्रश्नार्थक सर्वनाम
उत्तर : संबंची सर्वनाम
1. खालीलपैकी कोणती स्वरसंधी नाही? कशाप्रकारे होईल?
मन्वंतर सूर्यास्त उमेशमतैक्य
उत्तर : सूर्यास्त
2. 'शब्दच्छल' या संधीची फोड कशाप्रकारे होईल?
शब्द+छलशब्द+चलशब्द+सलशब्द+च्छल
उत्तर : शब्द+छल
3. पुढील वाक्यातील अधोरेखित शब्दांची जात सांगा. आमच्या गावात बरेच पाटील आहेत.
भाववाचक नामसामान्य नामविशेषणविशेषनाम
उत्तर : सामान्य नाम
4. भाववाचक नाम ओळखा .
फुशारकी शहराणी मुलेथोडी फळेबोलका पत्थर
उत्तर : फुशारकी
5. तृतीय विभक्तीचे प्रमुख कार्य .......... आहे .
करण आपादान संप्रदान अधिकरण
उत्तर : करण
6. 'बेडूक' या शब्दाचे स्त्रीलिंग रूप -
बेडूकबेडकीबेडकीन बेडके
उत्तर : बेडकी
7. पुढीलपैकी कोणता शब्द नपूसंकलिंग नाही ?
पुस्तकचित्रमंगळसूत्रशाळा
उत्तर : शाळा
8. मला परीक्षेची भीती वाटते. अधोरेखित शब्दाची विभक्ती सांगा?
चतुर्थीपंचमीषष्ठीसप्तमी
उत्तर : षष्ठी
9. खलील वाक्यातील ठळक अक्षरातील शब्दांची विभक्तीचा प्रकार शोधा. मुलांनो, ही वाक्य दहा मिनिटात लिहा.
द्वितीयसप्तमी पंचमी संबोधन
उत्तर : सप्तमी
10. पुढील वाक्यातील अधोरेखित शब्दाची जात ओळखा.
'जो मुलगा अभ्यास करील तो पास होईल'.
दर्शक सर्वनामसंबंची सर्वनाम अनिश्चित सर्वनामप्रश्नार्थक सर्वनाम
उत्तर : संबंची सर्वनाम
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नाम व त्याचे प्रकार :
प्रत्येक्षात असणार्याव किंवा कल्पनेने जाणलेल्या वस्तूंना किंवा त्यांच्या गुणधर्मांना दिलेल्या नावाला नाम असे म्हणतात.
उदा. टेबल, कागद, पेन, साखर, अप्सरा, गाडी, खरेपणा, औदार्थ, देव, स्वर्ग, पुस्तक इ.
नामाचे प्रकार :
नामाचे एकूण 3 मुख्य प्रकार पडतात.
सामान्य नाम
एकाच जातीच्या पदार्थातील समान गुण धर्मामुळे त्या वस्तूचे जे सर्वसामान्य नाव दिले जाते त्याला सामान्य नाम असे म्हणतात.
उदा. मुलगा, मुलगी, घर, शाळा, पुस्तक, नदी, शहर, साखर, पाणी, दूध, सोने, कापड, सैन्य, वर्ग इ.
(सामान्य नाम हे जातीवाच असते, काही विशिष्ट नामांचेच अनेकवचन होते. मराठीमध्ये पदार्थवाचक, समुहवाचक नाम हे सामान्य नामच समजले जाते.)
विशेष नाम
ज्या नामाने जातीचा बोध होत नसून त्या जातीतील एका विशिष्ट व्यक्तीचा, वस्तूचा किंवा प्राण्याचा बोध होतो त्यास विशेष नाम असे म्हणतात.
उदा. राम, आशा, हिमालय, गंगा, भारत, धुळे, मुंबई, दिल्ली, सचिन, अमेरिका, गोदावरी इ.
(विशेषनाम हे व्यक्तिवाचक असते, विशेषनामाचे अनेकवचन होत नाही आल्यास सामान्य नाम समजावे.)
उदा. या गावात बरेच नारद आहेत.सामान्य नामविशेषनाम नदीगंगा, सिंधू, तापी, नर्मदा, गोदावरीपर्वतहिमालय, सहयाद्री, सातपुडामुलगास्वाधीन, हिमांशू, लक्ष्मण, कपिल, भैरवमुलगीमधुस्मिता, स्वागता, तारा, आशा, नलिनीशहरनगर, पुणे, दिल्ली, मुंबई, कोल्हापूर
भाववाचक नाम
ज्या नामाने प्राणी किंवा वस्तु यांच्यामध्ये असलेल्या गुण, धर्म, किंवा भाव यांचा बोध होतो. त्याला भाववाचक नाम असे म्हणतात.
उदा. धैर्य, किर्ती, चांगुलपणा, वात्सल्य, गुलामगिरी, आनंद इ.
(पदार्थाच्या गुणाबरोबरच स्थिति किंवा क्रिया दाखविणार्यां नामांना भाववाचक नाम असे म्हणतात.
उदा. धाव, हास्य, चोरी, उड्डाण, नृत्य ही क्रियेला दिलेली नावे आहेत. वार्धक्य, बाल्य, तारुण्य, मरण हे शब्द पदार्थाची स्थिती दाखवितात.)
भाववाचक नामे साधण्याचे प्रकार :
सामान्यनामे व विशेषनामे यांना आई, ई, की, गिरी, ता, त्व, पण, पणा, य, या यासारखे प्रत्यय लावून नामे तयार होतात ती खालीलप्रमाणेशब्दप्रत्ययभाववाचक नामइतर उदाहरणे
नवल
श्रीमंत
पाटील
गुलाम
शांत
मनुष्य
शहाणा
सुंदर
गोड
आई
ई
की
गिरी
ता
त्व
पण, पणा
य
वा
नवलाई
श्रीमंती
पाटीलकी
गुलामगिरी
शांतता
मनुष्यत्व
शहाणपण, पणा
सौदर्य
गोडवा
खोदाई, चपडाई, दांडगाई, धुलाई
गरीबी, गोडी, लबाडी, वकिली
आपुलकी, भिक्षुकी
फसवेगिरी, लुच्चेगिरी
क्रूरता, नम्रता, समता
प्रौढत्व, मित्रत्व, शत्रुत्व
देवपण, प्रामाणिकपणा, मोठेपण
गांभीर्य, धैर्य, माधुर्य, शौर्य
ओलावा, गारवा
नामाचे कार्य करणारे इतर शब्द :
नाम, सर्वनाम, विशेषण, ही जी नावे शब्दांच्या जातीला दिली जातात, ती त्यांच्या त्या त्या वाक्यातील कार्यावरून दिली जातात तीच गोष्ट येथेही लक्षात ठेवावयास हवी, सामान्यनाम, विशेषनाम, भाववाचकनाम ही नावे देखील नामांच्या विशिष्ट कार्यावरून दिली गेली आहेत. अशाच पद्धतीने नामांच्या कार्यावरून त्यांचे काही नियम आहेत ते खालीलप्रमाणे
नियम: 1. केव्हा-केव्हा सामान्यनाम हे विशेषनामांचे कार्य करतात.
उदा.
आत्ताच मी नगरहून आलो.शेजारची तारा यंदा बी.ए. झाली.वरील वाक्यामध्ये वापरली गेलेली नगर कोणतेही शहर, तारा(नक्षत्र) ही मुळीच सामान्यनामे आहेत परंतु येथे ती विशेषनामे म्हणून वापरली गेलेली आहेत.
नियम: 2. केव्हा-केव्हा विशेषनाम सामान्य नामाचे कार्य करतात.
उदा.
तुमचा मुलगा कुंभकर्णच दिसतो.आमचे वडील म्हणजे जमदग्नि आहेत.आम्हाला आजच्या विधार्थ्यात सुदाम नकोत भीम हवेत.वरील वाक्यांत कुंभकर्ण, जमदग्नि, सुदाम, भीम गे मुळची विशेषनामे आहेत. पण येथे कुंभकर्ण अतिशय झोपाळू, जमदग्नि =अतिशय रागीट मनुष्य, सुदाम=अशक्त मुलगे व भीम=सशक्त मुलगे या अर्थाने वापरली आहेत. म्हणजे मुळची विशेषनामे वरील वाक्यांत सामान्य नामांचे कार्य करतात.
नियम: 3. केव्हा-केव्हा भाववाचक नामे विशेषनामांचे कार्य करते.
उदा.
शांती ही माझ्या बहिणीची मुलगी.विश्वास परीक्षेत उत्तीर्ण झाला.माधुरी उधा मुंबईला जाईल.वरील वाक्यात अधोरेखित केलेली शब्दे ही मुळची भाववाचक नामे आहेत. पण याठिकाणी त्यांचा वापर विशेषणामासारखा केला आहे.
नियम: 4. विशेषनामाचे अनेकवचन होत नाही झाल्यास त्यांना सामान्यनाम म्हणतात.
उदा.
आमच्या वर्गात तीन पाटील आहेत.या गावात बरेच नारद आहेत.माझ्या आईने सोळा सोमवारांचे व्रत केले.विशेषनामाचे अनेकवचन होत नाही पण वरील वाक्यात विशेषनामे अनेकवचनी वापरलेली दिसतील या वाक्यातील विशेषनामे म्हणून वापरली आहेत.
नियम: 5. विशेषण केव्हा-केव्हा नामाचे कार्य करतात.
उदा.
शहाण्याला शब्दांचा मार.श्रीमंतांना गर्व असतो.जातीच्या सुंदरांना काहीही शोभते.जगात गरीबांना मान मिळत नाही.वरील वाक्यात विशेषण ही नामासारखी वापरली आहेत.
नियम:
प्रत्येक्षात असणार्याव किंवा कल्पनेने जाणलेल्या वस्तूंना किंवा त्यांच्या गुणधर्मांना दिलेल्या नावाला नाम असे म्हणतात.
उदा. टेबल, कागद, पेन, साखर, अप्सरा, गाडी, खरेपणा, औदार्थ, देव, स्वर्ग, पुस्तक इ.
नामाचे प्रकार :
नामाचे एकूण 3 मुख्य प्रकार पडतात.
सामान्य नाम
एकाच जातीच्या पदार्थातील समान गुण धर्मामुळे त्या वस्तूचे जे सर्वसामान्य नाव दिले जाते त्याला सामान्य नाम असे म्हणतात.
उदा. मुलगा, मुलगी, घर, शाळा, पुस्तक, नदी, शहर, साखर, पाणी, दूध, सोने, कापड, सैन्य, वर्ग इ.
(सामान्य नाम हे जातीवाच असते, काही विशिष्ट नामांचेच अनेकवचन होते. मराठीमध्ये पदार्थवाचक, समुहवाचक नाम हे सामान्य नामच समजले जाते.)
विशेष नाम
ज्या नामाने जातीचा बोध होत नसून त्या जातीतील एका विशिष्ट व्यक्तीचा, वस्तूचा किंवा प्राण्याचा बोध होतो त्यास विशेष नाम असे म्हणतात.
उदा. राम, आशा, हिमालय, गंगा, भारत, धुळे, मुंबई, दिल्ली, सचिन, अमेरिका, गोदावरी इ.
(विशेषनाम हे व्यक्तिवाचक असते, विशेषनामाचे अनेकवचन होत नाही आल्यास सामान्य नाम समजावे.)
उदा. या गावात बरेच नारद आहेत.सामान्य नामविशेषनाम नदीगंगा, सिंधू, तापी, नर्मदा, गोदावरीपर्वतहिमालय, सहयाद्री, सातपुडामुलगास्वाधीन, हिमांशू, लक्ष्मण, कपिल, भैरवमुलगीमधुस्मिता, स्वागता, तारा, आशा, नलिनीशहरनगर, पुणे, दिल्ली, मुंबई, कोल्हापूर
भाववाचक नाम
ज्या नामाने प्राणी किंवा वस्तु यांच्यामध्ये असलेल्या गुण, धर्म, किंवा भाव यांचा बोध होतो. त्याला भाववाचक नाम असे म्हणतात.
उदा. धैर्य, किर्ती, चांगुलपणा, वात्सल्य, गुलामगिरी, आनंद इ.
(पदार्थाच्या गुणाबरोबरच स्थिति किंवा क्रिया दाखविणार्यां नामांना भाववाचक नाम असे म्हणतात.
उदा. धाव, हास्य, चोरी, उड्डाण, नृत्य ही क्रियेला दिलेली नावे आहेत. वार्धक्य, बाल्य, तारुण्य, मरण हे शब्द पदार्थाची स्थिती दाखवितात.)
भाववाचक नामे साधण्याचे प्रकार :
सामान्यनामे व विशेषनामे यांना आई, ई, की, गिरी, ता, त्व, पण, पणा, य, या यासारखे प्रत्यय लावून नामे तयार होतात ती खालीलप्रमाणेशब्दप्रत्ययभाववाचक नामइतर उदाहरणे
नवल
श्रीमंत
पाटील
गुलाम
शांत
मनुष्य
शहाणा
सुंदर
गोड
आई
ई
की
गिरी
ता
त्व
पण, पणा
य
वा
नवलाई
श्रीमंती
पाटीलकी
गुलामगिरी
शांतता
मनुष्यत्व
शहाणपण, पणा
सौदर्य
गोडवा
खोदाई, चपडाई, दांडगाई, धुलाई
गरीबी, गोडी, लबाडी, वकिली
आपुलकी, भिक्षुकी
फसवेगिरी, लुच्चेगिरी
क्रूरता, नम्रता, समता
प्रौढत्व, मित्रत्व, शत्रुत्व
देवपण, प्रामाणिकपणा, मोठेपण
गांभीर्य, धैर्य, माधुर्य, शौर्य
ओलावा, गारवा
नामाचे कार्य करणारे इतर शब्द :
नाम, सर्वनाम, विशेषण, ही जी नावे शब्दांच्या जातीला दिली जातात, ती त्यांच्या त्या त्या वाक्यातील कार्यावरून दिली जातात तीच गोष्ट येथेही लक्षात ठेवावयास हवी, सामान्यनाम, विशेषनाम, भाववाचकनाम ही नावे देखील नामांच्या विशिष्ट कार्यावरून दिली गेली आहेत. अशाच पद्धतीने नामांच्या कार्यावरून त्यांचे काही नियम आहेत ते खालीलप्रमाणे
नियम: 1. केव्हा-केव्हा सामान्यनाम हे विशेषनामांचे कार्य करतात.
उदा.
आत्ताच मी नगरहून आलो.शेजारची तारा यंदा बी.ए. झाली.वरील वाक्यामध्ये वापरली गेलेली नगर कोणतेही शहर, तारा(नक्षत्र) ही मुळीच सामान्यनामे आहेत परंतु येथे ती विशेषनामे म्हणून वापरली गेलेली आहेत.
नियम: 2. केव्हा-केव्हा विशेषनाम सामान्य नामाचे कार्य करतात.
उदा.
तुमचा मुलगा कुंभकर्णच दिसतो.आमचे वडील म्हणजे जमदग्नि आहेत.आम्हाला आजच्या विधार्थ्यात सुदाम नकोत भीम हवेत.वरील वाक्यांत कुंभकर्ण, जमदग्नि, सुदाम, भीम गे मुळची विशेषनामे आहेत. पण येथे कुंभकर्ण अतिशय झोपाळू, जमदग्नि =अतिशय रागीट मनुष्य, सुदाम=अशक्त मुलगे व भीम=सशक्त मुलगे या अर्थाने वापरली आहेत. म्हणजे मुळची विशेषनामे वरील वाक्यांत सामान्य नामांचे कार्य करतात.
नियम: 3. केव्हा-केव्हा भाववाचक नामे विशेषनामांचे कार्य करते.
उदा.
शांती ही माझ्या बहिणीची मुलगी.विश्वास परीक्षेत उत्तीर्ण झाला.माधुरी उधा मुंबईला जाईल.वरील वाक्यात अधोरेखित केलेली शब्दे ही मुळची भाववाचक नामे आहेत. पण याठिकाणी त्यांचा वापर विशेषणामासारखा केला आहे.
नियम: 4. विशेषनामाचे अनेकवचन होत नाही झाल्यास त्यांना सामान्यनाम म्हणतात.
उदा.
आमच्या वर्गात तीन पाटील आहेत.या गावात बरेच नारद आहेत.माझ्या आईने सोळा सोमवारांचे व्रत केले.विशेषनामाचे अनेकवचन होत नाही पण वरील वाक्यात विशेषनामे अनेकवचनी वापरलेली दिसतील या वाक्यातील विशेषनामे म्हणून वापरली आहेत.
नियम: 5. विशेषण केव्हा-केव्हा नामाचे कार्य करतात.
उदा.
शहाण्याला शब्दांचा मार.श्रीमंतांना गर्व असतो.जातीच्या सुंदरांना काहीही शोभते.जगात गरीबांना मान मिळत नाही.वरील वाक्यात विशेषण ही नामासारखी वापरली आहेत.
नियम:
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Forwarded from मराठी व्याकरण
6. केव्हा-केव्हा अव्यय नामाचे कार्य करतात.
उदा.
आमच्या क्रिकेटपटूंची वाहवा झाली.त्याच्या बोलण्यात परंतुचा वापर फार होतो.नापास झाल्यामुळे त्याची छी-थू झाली.वरील वाक्यामध्ये केवलप्रयोगी अव्यये ही नामाची कार्य करतात.
नियम: 7. धातू-साधिते केव्हा-केव्हा नामाचे कार्ये करते.
उदा.
ज्याला कर नाही त्याला डर कसली.गुरुजींचे वागणे मोठे प्रेमळ असते.ते ध्यान पाहून मला हसू आले.देणार्या ने देत जावे.वरील उदाहरणांवरून असे दिसून येते की, सामान्यपणे, विशेषनामे व भववाचकनामे ही एकमेकांचे कार्य करतांना आढळतात. तसेच विशेषणे, अव्यय, धातुसाधिते यांचा वापरसुद्धा नामांसारखा करण्यात येतो.
उदा.
आमच्या क्रिकेटपटूंची वाहवा झाली.त्याच्या बोलण्यात परंतुचा वापर फार होतो.नापास झाल्यामुळे त्याची छी-थू झाली.वरील वाक्यामध्ये केवलप्रयोगी अव्यये ही नामाची कार्य करतात.
नियम: 7. धातू-साधिते केव्हा-केव्हा नामाचे कार्ये करते.
उदा.
ज्याला कर नाही त्याला डर कसली.गुरुजींचे वागणे मोठे प्रेमळ असते.ते ध्यान पाहून मला हसू आले.देणार्या ने देत जावे.वरील उदाहरणांवरून असे दिसून येते की, सामान्यपणे, विशेषनामे व भववाचकनामे ही एकमेकांचे कार्य करतांना आढळतात. तसेच विशेषणे, अव्यय, धातुसाधिते यांचा वापरसुद्धा नामांसारखा करण्यात येतो.
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Forwarded from मराठी व्याकरण
From Marathi Mhani app:
काडी चोर तो माडी चोर.
Meaning:
क्षुल्लक अपराध केलेल्या माणसाचा एखाद्या घडलेल्या मोठ्या अपराधाशी संबंध जोडणे.
काडी चोर तो माडी चोर.
Meaning:
क्षुल्लक अपराध केलेल्या माणसाचा एखाद्या घडलेल्या मोठ्या अपराधाशी संबंध जोडणे.
❤23
Forwarded from मराठी व्याकरण
From Marathi Mhani app:
काडीची सत्ता आणि लाखाची मत्ता बरोबर होत नाहीत.
Meaning:
थोड्याशा अधिकाराने जे काम होते, ते पुष्कळशा पैशाने देखील होत नाही.
काडीची सत्ता आणि लाखाची मत्ता बरोबर होत नाहीत.
Meaning:
थोड्याशा अधिकाराने जे काम होते, ते पुष्कळशा पैशाने देखील होत नाही.
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Forwarded from मराठी व्याकरण
From Marathi Mhani app:
कानाला ठणका नि नाकाला औषध.
Meaning:
रोग एकीकडे आणि औषध भलतीकडे.
कानाला ठणका नि नाकाला औषध.
Meaning:
रोग एकीकडे आणि औषध भलतीकडे.
❤12
Forwarded from मराठी व्याकरण
म्हणी:
1. पी हळद हो गोरी – उतावळेपणा दाखविणे
2. मेल्याशिवाय स्वर्ग दिसत नाही – प्रत्यक्ष अनुभव घेतल्याशिवाय कळत नाही
3. बाप दाखव नाहीतर श्राद्ध कर – दोनपैकी एक पर्याय निवडणे
4. चार दिवस सासूचे चार दिवस सुनेचे – प्रत्येकाची वेळ कधीतरी येतेच
5. आंधळा मागतो एक डोळा देव देतो दोन डोळे – अपेक्षेपेक्षा जास्त प्राप्ती होणे
6. उंटावरचा शहाणा – मूर्ख सल्ला देणारा
7. अडला हरी गाढवाचे पाय धरी – अडचणीच्या वेळी मूर्खाचीही मनधरणी करावी लागते
8. नाचता येईना अंगण वाकडे – स्वत:स चांगले काम येत नसणारा दुसऱ्याचे दोष काढतो
9. तोंड दाबून बुक्क्यांचा मार – विनाकारण जुलूम सहन करावा लागणे
10. नावडतीचे मीठ अळणी – नावडत्याने काही चांगले केले तरी आवडत नाही
11. अंथरूण पाहून पाय पसरावे – ऎपत पाहून खर्च करवा
12. छत्तीसाचा आकडा – विरुद्ध मत असणे
13. तेरड्याचा रंग तीन दिवस – एखादे कार्य थोडे दिवस जोरात चालून एकदम बंद पडणे
14. दुष्काळात तेरावा महिना – संकटात अधिक भर
15. नव्याचे नऊ दिवस – नवेपणा असतानाचे कौतुक नंतर टिकत नही
16. एका हाताने टाळी वाजत नाही – दोष दोन्हीकडे असतो
17. पालथ्या घड्यावर पाणी – सर्व प्रयत्न निरुपयोगी ठरणे
18. वासरात लंगडी गाय शहाणी – अडाणी लोकात अल्प ज्ञान असणारा शहाणा ठरतो
19. रात्र थोडी सोंगे फार – काम भरपूर, वेळ कमी
22. अति शहाणा त्याचा बैल रिकामा – अति शहाणपणाने नुकसान होते
21. शेरास सव्वाशेर – प्रतिपक्षापेक्षा श्रेष्ठ
22. नाकाचा बाल – अत्यंत प्रिय व्यक्ती
23. नाकापेक्षा मोती जड होणे – डोईजड होणे
24. आई जेवू घालीना बाप भीक मागू देईना – दोन्ही बाजूंनी अडचण
25. कामापुरता मामा – काम साधण्यापुरते गोड बोलणे
26. आधी पोटोबा मग विठोबा – अगोदर पोट भरावे मग देवास आळवावे
27. काखेत कळसा गावाला वळसा – वस्तू स्वत:पाशी असून शोधत राहणे
28. झाकली मूठ सव्वा लाखाची – दुर्गुण असले तरी प्रकट करू नये.
1. पी हळद हो गोरी – उतावळेपणा दाखविणे
2. मेल्याशिवाय स्वर्ग दिसत नाही – प्रत्यक्ष अनुभव घेतल्याशिवाय कळत नाही
3. बाप दाखव नाहीतर श्राद्ध कर – दोनपैकी एक पर्याय निवडणे
4. चार दिवस सासूचे चार दिवस सुनेचे – प्रत्येकाची वेळ कधीतरी येतेच
5. आंधळा मागतो एक डोळा देव देतो दोन डोळे – अपेक्षेपेक्षा जास्त प्राप्ती होणे
6. उंटावरचा शहाणा – मूर्ख सल्ला देणारा
7. अडला हरी गाढवाचे पाय धरी – अडचणीच्या वेळी मूर्खाचीही मनधरणी करावी लागते
8. नाचता येईना अंगण वाकडे – स्वत:स चांगले काम येत नसणारा दुसऱ्याचे दोष काढतो
9. तोंड दाबून बुक्क्यांचा मार – विनाकारण जुलूम सहन करावा लागणे
10. नावडतीचे मीठ अळणी – नावडत्याने काही चांगले केले तरी आवडत नाही
11. अंथरूण पाहून पाय पसरावे – ऎपत पाहून खर्च करवा
12. छत्तीसाचा आकडा – विरुद्ध मत असणे
13. तेरड्याचा रंग तीन दिवस – एखादे कार्य थोडे दिवस जोरात चालून एकदम बंद पडणे
14. दुष्काळात तेरावा महिना – संकटात अधिक भर
15. नव्याचे नऊ दिवस – नवेपणा असतानाचे कौतुक नंतर टिकत नही
16. एका हाताने टाळी वाजत नाही – दोष दोन्हीकडे असतो
17. पालथ्या घड्यावर पाणी – सर्व प्रयत्न निरुपयोगी ठरणे
18. वासरात लंगडी गाय शहाणी – अडाणी लोकात अल्प ज्ञान असणारा शहाणा ठरतो
19. रात्र थोडी सोंगे फार – काम भरपूर, वेळ कमी
22. अति शहाणा त्याचा बैल रिकामा – अति शहाणपणाने नुकसान होते
21. शेरास सव्वाशेर – प्रतिपक्षापेक्षा श्रेष्ठ
22. नाकाचा बाल – अत्यंत प्रिय व्यक्ती
23. नाकापेक्षा मोती जड होणे – डोईजड होणे
24. आई जेवू घालीना बाप भीक मागू देईना – दोन्ही बाजूंनी अडचण
25. कामापुरता मामा – काम साधण्यापुरते गोड बोलणे
26. आधी पोटोबा मग विठोबा – अगोदर पोट भरावे मग देवास आळवावे
27. काखेत कळसा गावाला वळसा – वस्तू स्वत:पाशी असून शोधत राहणे
28. झाकली मूठ सव्वा लाखाची – दुर्गुण असले तरी प्रकट करू नये.
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🔴समास व त्याचे प्रकार
🔸काटकसर करणे हा मनुष्याच्या अंगी असलेला एकूण गुण आहे.
🔹आपण दैनंदिन जीवनात बरीच काटकसर करतो. त्यामुळे आपण बोलतांना सुद्धा हा गुण वापरतो.
🔸बर्याचदा आपण एखादे वाक्य पूर्ण न बोलता शब्दांची काटकसर करून एकच शब्द किंवा जोडशब्द तयार करतो.
🔶जो त्या वाक्यातील अर्थबोध करून देतो. यालाच समास असे म्हणतात.
🔷अशी काटकसर करून जो शब्द तयार होतो त्यालाच सामासिक शब्द असे म्हणतात.
🅾उदा.
🔹वडापाव - वडाघालून तयार केलेला पाव.
🔹पोळपाट - पोळी करण्यासाठी लागणारे पाट
🔹कांदेपोहे - कांदे घालून तयार केलेले पोहे.
🔹पंचवटी - पाच वडांचा समूह
🔴समासाचे मुख्य चार प्रकार पडतात.
▶अव्ययीभाव समास
▶तत्पुरुष समास
▶व्दंव्द समास
▶बहुव्रीही समास
✍📚MPSC💺UPSC-Katta📚✍
🔶अव्ययीभाव समास :
🔹ज्या समासात पहिला शब्द मुख्य असतो व त्या तयार झालेल्या सामासिक शब्दांचा उपयोग क्रियाविशेषणासारख केला जातो त्यास अव्ययीभवन समास असे म्हणतात.
🔸अव्ययीभाव समासात आपल्याला खलील भाषेतील उदाहरणे पाहावयास मिळतात.
🔴मराठी भाषेतील शब्द -
🅾उदा.
▶गोवोगाव - प्रत्येक गावात
▶गल्लोगल्ली - प्रत्येक गल्लीत
▶दारोदारी - प्रत्येक दारी
▶घरोघरी - प्रत्येक घरी
🔴संस्कृत भाषेतील शब्द -
🅾उदा.
🔹प्रती (प्रत्येक) - प्रतिमास, प्रतिक्षण, प्रतिदिन
🔹आ (पर्यत) - आमरण
🔹आ (पासून) - आजन्म, आजीवन
🔹यथा (प्रमाण) - यथाविधी, यथामती, यथाशक्ती.
🔴अरबी व फारसी भाषेतील शब्द -
🅾उदा.
🔹दर (प्रत्येक) - दारसाल, दरडोई, दरमजल.
🔹गैर (प्रत्येक) - गैरसमज, गैरहजर, गैरशिस्त
🔹हर (प्रत्येक) - हररोज, हरहमेशा
🔹बे (विरुद्ध) - बेकायदा, बेमालूम, बेलाशक, बेलाईक
➡➡➡➡क्रमशः ........
🔸काटकसर करणे हा मनुष्याच्या अंगी असलेला एकूण गुण आहे.
🔹आपण दैनंदिन जीवनात बरीच काटकसर करतो. त्यामुळे आपण बोलतांना सुद्धा हा गुण वापरतो.
🔸बर्याचदा आपण एखादे वाक्य पूर्ण न बोलता शब्दांची काटकसर करून एकच शब्द किंवा जोडशब्द तयार करतो.
🔶जो त्या वाक्यातील अर्थबोध करून देतो. यालाच समास असे म्हणतात.
🔷अशी काटकसर करून जो शब्द तयार होतो त्यालाच सामासिक शब्द असे म्हणतात.
🅾उदा.
🔹वडापाव - वडाघालून तयार केलेला पाव.
🔹पोळपाट - पोळी करण्यासाठी लागणारे पाट
🔹कांदेपोहे - कांदे घालून तयार केलेले पोहे.
🔹पंचवटी - पाच वडांचा समूह
🔴समासाचे मुख्य चार प्रकार पडतात.
▶अव्ययीभाव समास
▶तत्पुरुष समास
▶व्दंव्द समास
▶बहुव्रीही समास
✍📚MPSC💺UPSC-Katta📚✍
🔶अव्ययीभाव समास :
🔹ज्या समासात पहिला शब्द मुख्य असतो व त्या तयार झालेल्या सामासिक शब्दांचा उपयोग क्रियाविशेषणासारख केला जातो त्यास अव्ययीभवन समास असे म्हणतात.
🔸अव्ययीभाव समासात आपल्याला खलील भाषेतील उदाहरणे पाहावयास मिळतात.
🔴मराठी भाषेतील शब्द -
🅾उदा.
▶गोवोगाव - प्रत्येक गावात
▶गल्लोगल्ली - प्रत्येक गल्लीत
▶दारोदारी - प्रत्येक दारी
▶घरोघरी - प्रत्येक घरी
🔴संस्कृत भाषेतील शब्द -
🅾उदा.
🔹प्रती (प्रत्येक) - प्रतिमास, प्रतिक्षण, प्रतिदिन
🔹आ (पर्यत) - आमरण
🔹आ (पासून) - आजन्म, आजीवन
🔹यथा (प्रमाण) - यथाविधी, यथामती, यथाशक्ती.
🔴अरबी व फारसी भाषेतील शब्द -
🅾उदा.
🔹दर (प्रत्येक) - दारसाल, दरडोई, दरमजल.
🔹गैर (प्रत्येक) - गैरसमज, गैरहजर, गैरशिस्त
🔹हर (प्रत्येक) - हररोज, हरहमेशा
🔹बे (विरुद्ध) - बेकायदा, बेमालूम, बेलाशक, बेलाईक
➡➡➡➡क्रमशः ........
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Forwarded from मराठी व्याकरण
🔹समास व त्याचे प्रकार
🅾तत्पुरुष समास :
🔸ज्या समासात दुसरे पद महत्वाचे असून समासाचा विग्रह करतांना गाळलेल्या शब्द, विभक्तीप्रत्यय लिहावा लागतो, त्यास तत्पुरुषसमास असे म्हणतात.
🔸थोडक्यात ज्या समासात दूसरा शब्द प्रधान / महत्वाचा असतो त्यास तत्पुरुष समास असे म्हणतात.
🌑उदा.
↘महामानव - महान असलेला मानव
↘राजपुत्र - राजाचा पुत्र
↘तोंडपाठ - तोंडाने पाठ
↘गायरान - गाईसाठी रान
↘वनभोजन - वनातील भोजन
🔸वरील उदाहरणांमध्ये पहिल्या पदापेक्षा दुसरे पद प्रधान आहे आणि या शब्दांना ला, चा, ने हे विभक्ती प्रत्यय वापरावे लागतात म्हणून त्यास तत्पुरुष समास असे म्हणतात.
🔸तत्पुरुष समासाचे 7 उपप्रकर पडतात.
🅾i) विभक्ती तत्पुरुष -
🔸ज्या तत्पुरुष समासात कोणत्या तरी विभक्तीचा अर्थ व्यक्त करणार्याग शब्दयोगी अव्ययाचा लोप करून दोन्ही पद जोडली जातात त्यास विभक्ती तत्पुरुष विभक्ती तत्पुरुष समास असे म्हणतात.
🔸वरील उदाहरणांत वेगवेगळ्या सामासिक शब्दांचा विग्रह केला असता त्याला वेगवेगळ्या विभक्त्या लागलेल्या दिसतात.
🅾विभक्ती तत्पुरुष समासाची काही उदाहरणे :
🌑उदा
↘गुनहीन - गुणाने हीन - तृतीया तत्पुरुष
↘विधाभ्यास - विधेचा भास - षष्ठी तत्पुरुष
↘कर्मकुशल - कर्मात कुशल - सप्तमी तत्पुरुष
🅾ii) अलुक तत्पुरुष -
🔸ज्या विभक्ती तत्पुरुष अमासात पहिला पदाच्या विभक्ती प्रत्ययाचा लोप होत नाही त्यास अलुक तत्पुरुष समास म्हणतात.
🔸अलुक म्हणजे लोप न पावणारा म्हणजे ज्या विभक्ती तत्पुरुष सामासिक शब्दांच्या पहिल्या पदाचा लोप होत नाही त्यास अलुक तत्पुरुष समास असे म्हणतात.
🌑उदा.
↘तोंडी लावणे
↘पाठी घालणे
↘अग्रेसर
🅾iii) उपपद तत्पुरुष/कृदंत तत्पुरुष -
ज्या तत्पुरुष समासात दुसरे पद महत्वाचे असून व ते दुसरे पद हे धातुसाधीत/ कृदंत म्हणून त्या शब्दांत येते तसेच त्याचा वाक्यात स्वतंत्रपणे उपयोग करता येत नाही अशा समासास उपपद तत्पुरुष/कृदंत तत्पुरुष असे म्हणतात.
🅾उदा.
↘ग्रंथकार - ग्रंथ करणारा
↘शेतकरी - शेती करणारा
↘लाचखाऊ - लाच खाणारा
↘सुखद - सुख देणारा
↘जलद - जल देणारा वरील
🔸उदाहरणांमध्ये पहिल्या पदात ग्रंथ, शेत, लाच, सुख, जल हे सर्व धातू आहेत.
🔸नंतर दुसर्या पदात त्यांचे रूपांतर धातुसाधीतांमध्ये झाले आहे म्हणून ते उपपद तत्पुरुष/कृदंत तत्पुरुष समासाची उदाहरणे आहेत.
🔸इतर उदाहरणे : लाकूडतोडया, आगलाव्या, गृहस्थ, कामकरी, कुंभकर्ण, मार्गस्थ, वाटसरु.
🅾iv. नत्र तत्पुरुष समास -
🔸ज्या तत्पुरुष सामासातील प्रथम पद हे नकारार्थी असते त्यास नत्र तत्पुरुष असे म्हणतात.
🔸म्हणजेच ज्या समासातील पहिले पद हे अभाव किंवा निषेध दर्शवतात त्यांना नत्र तत्पुरुष समास असे म्हणतात.
↘उदा. (अ, अन्, न, ना, बे, नि, गैर इ.)
🌑उदा.
↘अयोग्य - योग्य नसलेला
↘अज्ञान - ज्ञान नसलेला
↘अहिंसा - हिंसा नसलेला
↘निरोगी - रोग नसलेला
➡➡➡क्रमशः .........
🅾तत्पुरुष समास :
🔸ज्या समासात दुसरे पद महत्वाचे असून समासाचा विग्रह करतांना गाळलेल्या शब्द, विभक्तीप्रत्यय लिहावा लागतो, त्यास तत्पुरुषसमास असे म्हणतात.
🔸थोडक्यात ज्या समासात दूसरा शब्द प्रधान / महत्वाचा असतो त्यास तत्पुरुष समास असे म्हणतात.
🌑उदा.
↘महामानव - महान असलेला मानव
↘राजपुत्र - राजाचा पुत्र
↘तोंडपाठ - तोंडाने पाठ
↘गायरान - गाईसाठी रान
↘वनभोजन - वनातील भोजन
🔸वरील उदाहरणांमध्ये पहिल्या पदापेक्षा दुसरे पद प्रधान आहे आणि या शब्दांना ला, चा, ने हे विभक्ती प्रत्यय वापरावे लागतात म्हणून त्यास तत्पुरुष समास असे म्हणतात.
🔸तत्पुरुष समासाचे 7 उपप्रकर पडतात.
🅾i) विभक्ती तत्पुरुष -
🔸ज्या तत्पुरुष समासात कोणत्या तरी विभक्तीचा अर्थ व्यक्त करणार्याग शब्दयोगी अव्ययाचा लोप करून दोन्ही पद जोडली जातात त्यास विभक्ती तत्पुरुष विभक्ती तत्पुरुष समास असे म्हणतात.
🔸वरील उदाहरणांत वेगवेगळ्या सामासिक शब्दांचा विग्रह केला असता त्याला वेगवेगळ्या विभक्त्या लागलेल्या दिसतात.
🅾विभक्ती तत्पुरुष समासाची काही उदाहरणे :
🌑उदा
↘गुनहीन - गुणाने हीन - तृतीया तत्पुरुष
↘विधाभ्यास - विधेचा भास - षष्ठी तत्पुरुष
↘कर्मकुशल - कर्मात कुशल - सप्तमी तत्पुरुष
🅾ii) अलुक तत्पुरुष -
🔸ज्या विभक्ती तत्पुरुष अमासात पहिला पदाच्या विभक्ती प्रत्ययाचा लोप होत नाही त्यास अलुक तत्पुरुष समास म्हणतात.
🔸अलुक म्हणजे लोप न पावणारा म्हणजे ज्या विभक्ती तत्पुरुष सामासिक शब्दांच्या पहिल्या पदाचा लोप होत नाही त्यास अलुक तत्पुरुष समास असे म्हणतात.
🌑उदा.
↘तोंडी लावणे
↘पाठी घालणे
↘अग्रेसर
🅾iii) उपपद तत्पुरुष/कृदंत तत्पुरुष -
ज्या तत्पुरुष समासात दुसरे पद महत्वाचे असून व ते दुसरे पद हे धातुसाधीत/ कृदंत म्हणून त्या शब्दांत येते तसेच त्याचा वाक्यात स्वतंत्रपणे उपयोग करता येत नाही अशा समासास उपपद तत्पुरुष/कृदंत तत्पुरुष असे म्हणतात.
🅾उदा.
↘ग्रंथकार - ग्रंथ करणारा
↘शेतकरी - शेती करणारा
↘लाचखाऊ - लाच खाणारा
↘सुखद - सुख देणारा
↘जलद - जल देणारा वरील
🔸उदाहरणांमध्ये पहिल्या पदात ग्रंथ, शेत, लाच, सुख, जल हे सर्व धातू आहेत.
🔸नंतर दुसर्या पदात त्यांचे रूपांतर धातुसाधीतांमध्ये झाले आहे म्हणून ते उपपद तत्पुरुष/कृदंत तत्पुरुष समासाची उदाहरणे आहेत.
🔸इतर उदाहरणे : लाकूडतोडया, आगलाव्या, गृहस्थ, कामकरी, कुंभकर्ण, मार्गस्थ, वाटसरु.
🅾iv. नत्र तत्पुरुष समास -
🔸ज्या तत्पुरुष सामासातील प्रथम पद हे नकारार्थी असते त्यास नत्र तत्पुरुष असे म्हणतात.
🔸म्हणजेच ज्या समासातील पहिले पद हे अभाव किंवा निषेध दर्शवतात त्यांना नत्र तत्पुरुष समास असे म्हणतात.
↘उदा. (अ, अन्, न, ना, बे, नि, गैर इ.)
🌑उदा.
↘अयोग्य - योग्य नसलेला
↘अज्ञान - ज्ञान नसलेला
↘अहिंसा - हिंसा नसलेला
↘निरोगी - रोग नसलेला
➡➡➡क्रमशः .........
❤72👌7🙏1