समानार्थी शब्द
➖➖➖➖➖
कुतूहल = उत्सुकता
कुटुंब = परिवार
कुशल = हुशार, तरबेज
कुत्रा = श्वान
कुटी = झोपडी
कुचंबणा = घुसमट
कृपण = कंजूष
कृश = हडकुळा
कोवळीक = कोमलता
कोठार = भांडार
कोळिष्टक = जळमट
खण = कप्पा
खडक = मोठा दगड, पाषाण
खटाटोप = प्रयत्न
खग = पक्षी
खड्ग = तलवार
खरेपणा = न्यायनीती
ख्याती = कीर्ती, प्रसिद्धी, लौकिक
खात्री = विश्वास
खाली जाणे = अधोगती
खिडकी = गवाक्ष
खेडे = गाव, ग्राम
खोड्या = चेष्टा, मस्करी
गरज = आवश्यकता
गवत = तृण
गर्व = अहंकार
गाय = धेनू, गोमाता
गाणे = गीत, गान
गंमत = मौज, मजा
गंध = वास, दरवळ
ग्रंथ = पुस्तक
गाव = ग्राम, खेडे
गुन्हा = अपराध
गुलामी = दास्य
गोड = मधुर
गोणी = पोते
गोष्ट = कहाणी, कथा
गौरव = सन्मान
ग्राहक = गिऱ्हाईक
घर = सदन, गृह, निकेतन, आलय
घरटे = खोपा
घागर = घडा, मडके
घोडा = अश्व, हय, वारू
चव = रुची, गोडी
चरण = पाय, पाऊल
चरितार्थ = उदरनिर्वाह
चक्र = चाक
चऱ्हाट = दोरखंड
चाक = चक्र
चंद्र = शशी, रजनीनाथ, इंदू
चिंता = काळजी
चिडीचूप = शांत
चिमुरडी = लहान
चूक = दोष
चेहरा = मुख
चौकशी = विचारपूस
छंद = नाद, आवड
छान = सुरेख, सुंदर
छिद्र = भोक
जग = दुनिया, विश्व
जत्रा = मेळा
जन = लोक, जनता
जमीन = भूमी, धरती, भुई
जंगल = रान
जीव = प्राण
जीवन = आयुष्य, हयात
जुलूम = अत्याचार, छळ, बळजोरी, अन्याय
झाड = वृक्ष, तरू
झोपडी = कुटीर, खोप
झोप = निद्रा
झोका = झुला
झेंडा = ध्वज, निशाण
ठग = चोर
ठिकाण = स्थान
डोके = मस्तक, शीर्ष, शीर
डोळा = नेत्र, नयन, लोचन
डोंगर = पर्वत, गिरी
ढग = मेघ, जलद, पयोधर, अभ्र
ॠण = कर्ज
तक्रार = गाऱ्हाणे
तळे = तलाव, सरोवर, तडाग
त्वचा = कातडी
तारण = रक्षण
ताल = ठेका
तुरंग = कैदखाना, बंदिवास
तुलना = साम्य
थट्टा = मस्करी, चेष्टा
थवा = समूह
थोबाड = गालपट
दगड = पाषाण, खडक
दरवाजा = दार, कवाड
दाम = पैसा
दृश्य = देखावा
दृढता = मजबुती
दिवस = दिन, वार, वासर
दिवा = दीप, दीपक
दूध = दुग्ध, पय
द्वेष = मत्सर, हेवा
देव = ईश्वर, विधाता
देश = राष्ट्र
दार = दरवाजा
दारिद्र्य = गरिबी
दौलत = संपत्ती, धन
धरती = भूमी, धरणी
ध्वनी = आवाज, रव
नदी = सरिता
नजर = दृष्टी
नक्कल = प्रतिकृती
नमस्कार = वंदन, नमन
नातेवाईक = नातलग
नाच = नृत्य
निश्चय = निर्धार
निर्धार = निश्चय
निर्मळ = स्वच्छ
नियम = पद्धत
निष्ठा = श्रद्धा
नृत्य = नाच
नोकर = सेवक
परिश्रम = कष्ट, मेहनत
पती = नवरा, वर
पत्र = टपाल
पहाट = उषा
परीक्षा = कसोटी
पर्वा = चिंता, काळजी
पर्वत = डोंगर, गिरी, अचल
पक्षी = पाखरू, खग, विहंग
प्रकाश = उजेड
प्रवास = सफर, फेरफटका, पर्यटन
प्रवासी = वाटसरू
प्रजा = लोक
प्रत - नक्कल
प्रदेश = प्रांत
प्रवास = यात्रा
प्राण = जीव
पान = पत्र, पत्ता
प्रासाद = वाडा
पाखरू = पक्षी
पाऊल = पाय, चरण
पाऊलवाट = पायवाट
प्रार्थना = स्तवन
प्रामाणिकपणा = इमानदारी
प्रारंभ = सुरुवात, आरंभ
प्रेम = प्रीती, माया, जिव्हाळा
प्रोत्साहन = उत्तेजन
पाऊस = वर्षा, पर्जन्य
पाणी = जल, नीर, तोय, उदक
पिशवी = थैली
पुस्तक = ग्रंथ
पुतळा = प्रतिमा, बाहुले
पुरातन = प्राचीन
पृथ्वी = धरणी, जमीन, वसुंधरा, वसुधा
फलक = फळा
फांदी शाखा
फूल = पुष्प, सुमन, कुसुम
बदल = फेरफार, कलाटणी
बर्फ = हिम
बहीण = भगिनी
बक्षीस = पारितोषिक, पुरस्कार
बाग = बगीचा, उद्यान, वाटिका
बासरी = पावा
बेत = योजना
बाळ = बालक
बाप = पिता, वडील, जनक
बादशाहा = सम्राट
बुद्धी = मती
ब्रीद = बाणा
भरवसा = विश्वास
भरारी = झेप, उड्डाण
भव्य = टोलेजंग
भाट = स्तुतिपाठक
भारती = भाषा, वैखरी
भांडण = तंटा
भाळ = कपाळ
भाऊ = बंधू, सहोदर
भेसळ = मिलावट
भेदभाव = फरक
भोजन = जेवण
मदत = साहाय्य
ममता = माया, जिव्हाळा, वात्सल्य
मन = चित्त, अंतःकरण
मजूर = कामगार
महिना = मास
महिला = स्त्री, बाई, ललना
मजूर = कामगार
मस्तक = डोके, शीर, माथा
मानवता = माणुसकी
मान = गळा
मंगल = पवित्र
मंदिर = देऊळ, देवालय
मार्ग = रस्ता, वाट
म्होरक्या = पुढारी, नेता
मित्र = दोस्त, सोबती, सखा, सवंगडी
मिष्टान्न = गोडधोड
मुलगा = पुत्र, सुत, तनय
मुलगी = कन्या, तनया
मुद्रा = चेहरा, मुख, तोंड, वदन
मुख = तोंड, चेहरा
मुलुख = प्रदेश, प्रांत, परगणा
मेहनत = कष्ट, श्रम, परिश्रम
मैत्री = दोस्ती
मौज = मजा, गंमत
यश = सफलता
युक्ती = विचार, शक्कल
युद्ध = लढाई, संग्राम, लढा, समर
योद्धा = लढवय्या
रक्त = रुधिर
रणांगण = रणभूमी, समरांगण
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कुतूहल = उत्सुकता
कुटुंब = परिवार
कुशल = हुशार, तरबेज
कुत्रा = श्वान
कुटी = झोपडी
कुचंबणा = घुसमट
कृपण = कंजूष
कृश = हडकुळा
कोवळीक = कोमलता
कोठार = भांडार
कोळिष्टक = जळमट
खण = कप्पा
खडक = मोठा दगड, पाषाण
खटाटोप = प्रयत्न
खग = पक्षी
खड्ग = तलवार
खरेपणा = न्यायनीती
ख्याती = कीर्ती, प्रसिद्धी, लौकिक
खात्री = विश्वास
खाली जाणे = अधोगती
खिडकी = गवाक्ष
खेडे = गाव, ग्राम
खोड्या = चेष्टा, मस्करी
गरज = आवश्यकता
गवत = तृण
गर्व = अहंकार
गाय = धेनू, गोमाता
गाणे = गीत, गान
गंमत = मौज, मजा
गंध = वास, दरवळ
ग्रंथ = पुस्तक
गाव = ग्राम, खेडे
गुन्हा = अपराध
गुलामी = दास्य
गोड = मधुर
गोणी = पोते
गोष्ट = कहाणी, कथा
गौरव = सन्मान
ग्राहक = गिऱ्हाईक
घर = सदन, गृह, निकेतन, आलय
घरटे = खोपा
घागर = घडा, मडके
घोडा = अश्व, हय, वारू
चव = रुची, गोडी
चरण = पाय, पाऊल
चरितार्थ = उदरनिर्वाह
चक्र = चाक
चऱ्हाट = दोरखंड
चाक = चक्र
चंद्र = शशी, रजनीनाथ, इंदू
चिंता = काळजी
चिडीचूप = शांत
चिमुरडी = लहान
चूक = दोष
चेहरा = मुख
चौकशी = विचारपूस
छंद = नाद, आवड
छान = सुरेख, सुंदर
छिद्र = भोक
जग = दुनिया, विश्व
जत्रा = मेळा
जन = लोक, जनता
जमीन = भूमी, धरती, भुई
जंगल = रान
जीव = प्राण
जीवन = आयुष्य, हयात
जुलूम = अत्याचार, छळ, बळजोरी, अन्याय
झाड = वृक्ष, तरू
झोपडी = कुटीर, खोप
झोप = निद्रा
झोका = झुला
झेंडा = ध्वज, निशाण
ठग = चोर
ठिकाण = स्थान
डोके = मस्तक, शीर्ष, शीर
डोळा = नेत्र, नयन, लोचन
डोंगर = पर्वत, गिरी
ढग = मेघ, जलद, पयोधर, अभ्र
ॠण = कर्ज
तक्रार = गाऱ्हाणे
तळे = तलाव, सरोवर, तडाग
त्वचा = कातडी
तारण = रक्षण
ताल = ठेका
तुरंग = कैदखाना, बंदिवास
तुलना = साम्य
थट्टा = मस्करी, चेष्टा
थवा = समूह
थोबाड = गालपट
दगड = पाषाण, खडक
दरवाजा = दार, कवाड
दाम = पैसा
दृश्य = देखावा
दृढता = मजबुती
दिवस = दिन, वार, वासर
दिवा = दीप, दीपक
दूध = दुग्ध, पय
द्वेष = मत्सर, हेवा
देव = ईश्वर, विधाता
देश = राष्ट्र
दार = दरवाजा
दारिद्र्य = गरिबी
दौलत = संपत्ती, धन
धरती = भूमी, धरणी
ध्वनी = आवाज, रव
नदी = सरिता
नजर = दृष्टी
नक्कल = प्रतिकृती
नमस्कार = वंदन, नमन
नातेवाईक = नातलग
नाच = नृत्य
निश्चय = निर्धार
निर्धार = निश्चय
निर्मळ = स्वच्छ
नियम = पद्धत
निष्ठा = श्रद्धा
नृत्य = नाच
नोकर = सेवक
परिश्रम = कष्ट, मेहनत
पती = नवरा, वर
पत्र = टपाल
पहाट = उषा
परीक्षा = कसोटी
पर्वा = चिंता, काळजी
पर्वत = डोंगर, गिरी, अचल
पक्षी = पाखरू, खग, विहंग
प्रकाश = उजेड
प्रवास = सफर, फेरफटका, पर्यटन
प्रवासी = वाटसरू
प्रजा = लोक
प्रत - नक्कल
प्रदेश = प्रांत
प्रवास = यात्रा
प्राण = जीव
पान = पत्र, पत्ता
प्रासाद = वाडा
पाखरू = पक्षी
पाऊल = पाय, चरण
पाऊलवाट = पायवाट
प्रार्थना = स्तवन
प्रामाणिकपणा = इमानदारी
प्रारंभ = सुरुवात, आरंभ
प्रेम = प्रीती, माया, जिव्हाळा
प्रोत्साहन = उत्तेजन
पाऊस = वर्षा, पर्जन्य
पाणी = जल, नीर, तोय, उदक
पिशवी = थैली
पुस्तक = ग्रंथ
पुतळा = प्रतिमा, बाहुले
पुरातन = प्राचीन
पृथ्वी = धरणी, जमीन, वसुंधरा, वसुधा
फलक = फळा
फांदी शाखा
फूल = पुष्प, सुमन, कुसुम
बदल = फेरफार, कलाटणी
बर्फ = हिम
बहीण = भगिनी
बक्षीस = पारितोषिक, पुरस्कार
बाग = बगीचा, उद्यान, वाटिका
बासरी = पावा
बेत = योजना
बाळ = बालक
बाप = पिता, वडील, जनक
बादशाहा = सम्राट
बुद्धी = मती
ब्रीद = बाणा
भरवसा = विश्वास
भरारी = झेप, उड्डाण
भव्य = टोलेजंग
भाट = स्तुतिपाठक
भारती = भाषा, वैखरी
भांडण = तंटा
भाळ = कपाळ
भाऊ = बंधू, सहोदर
भेसळ = मिलावट
भेदभाव = फरक
भोजन = जेवण
मदत = साहाय्य
ममता = माया, जिव्हाळा, वात्सल्य
मन = चित्त, अंतःकरण
मजूर = कामगार
महिना = मास
महिला = स्त्री, बाई, ललना
मजूर = कामगार
मस्तक = डोके, शीर, माथा
मानवता = माणुसकी
मान = गळा
मंगल = पवित्र
मंदिर = देऊळ, देवालय
मार्ग = रस्ता, वाट
म्होरक्या = पुढारी, नेता
मित्र = दोस्त, सोबती, सखा, सवंगडी
मिष्टान्न = गोडधोड
मुलगा = पुत्र, सुत, तनय
मुलगी = कन्या, तनया
मुद्रा = चेहरा, मुख, तोंड, वदन
मुख = तोंड, चेहरा
मुलुख = प्रदेश, प्रांत, परगणा
मेहनत = कष्ट, श्रम, परिश्रम
मैत्री = दोस्ती
मौज = मजा, गंमत
यश = सफलता
युक्ती = विचार, शक्कल
युद्ध = लढाई, संग्राम, लढा, समर
योद्धा = लढवय्या
रक्त = रुधिर
रणांगण = रणभूमी, समरांगण
❤206👍8👌4👏3🤔1🙏1
र्हास = हानी
राग = क्रोध, संताप, चीड
राजा = नरेश, नृप
राष्ट्र = देश
रांग = ओळ
रात्र = निशा, रजनी, यामिनी
रान = वन, जंगल, अरण्य, कानन
रूप = सौंदर्य
रुबाब = ऐट, तोरा
रेखीव = सुंदर, सुबक
लग्न = विवाह, परिणय
लाट = लहर
लाज = शरम,
लोभ = हाव
वस्त्र = कपडा
वारा = वात, पवन, अनि
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राग = क्रोध, संताप, चीड
राजा = नरेश, नृप
राष्ट्र = देश
रांग = ओळ
रात्र = निशा, रजनी, यामिनी
रान = वन, जंगल, अरण्य, कानन
रूप = सौंदर्य
रुबाब = ऐट, तोरा
रेखीव = सुंदर, सुबक
लग्न = विवाह, परिणय
लाट = लहर
लाज = शरम,
लोभ = हाव
वस्त्र = कपडा
वारा = वात, पवन, अनि
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Forwarded from मराठी व्याकरण
💢 शब्दसिद्धी व त्याचे प्रकार💢
शब्द कसा तयार झाला आहे, म्हणजे सिद्ध कसा झाला आहे यालाच
'शब्दसिद्धी' असे म्हणतात.
⭕शब्दांचे खालील प्रकार पडतात.
🌀 तत्सम शब्द
जे संस्कृत शब्द मराठी भाषेत जसेच्या तसे काहीही बादल न होता आले आहेत त्यांना 'तत्सम शब्द ' असे म्हणतात.
💠उदा.
राजा, भूगोल, चंचू, पुष्प, परंतु, भगवान, कर, पशु, अंध, जल, दीप, पृथ्वी, तथापि, कवि, वायु, भीती, पुत्र, अधापि, मति, पुरुष, शिशु, गुरु, मधु, गंध, पिता, कन्या, वृक्ष, धर्म, सत्कार, समर्थन, उत्सव, विद्वान, संत, निस्तेज, कर, जगन्नाथ, दर्शन, उमेश, स्वामि, मंदिर, तिथी, सूर्य, स्वल्प, घृणा, पिंड, कलश, प्रात:क, दंड, पत्र, ग्रंथ, उत्तम, आकाश पाप, मंत्र, शिखर, सूत्र, कार्य, होम, गणेश, सभ्य, कन्या, देवर्षि, वृद्ध, संसार, प्रीत्यर्थ, कविता, उपकार, परंतु, गायन, अश्रू, प्रसाद, अब्ज, राजा, संमती, घंटा, पुण्य, बुद्धी, अभिषेक, संगती, श्रद्धा, प्रकाश, सत्कार, देवालय, तारा, समर्थन, नयन, उत्सव, दुष्परिणाम, नैवेध.
🌀 तदभव शब्द
जे शब्द संस्कृत मधून मराठीमध्ये येतांना त्यांच्या मूळ रूपात काही बदल होतो त्या शब्दांना 'तदभव शब्द' असे म्हणतात.
💠उदा.
घर, पाय, भाऊ, सासू, सासरा, गाव, दूध, घास, कोवळा, ओळ, काम, घाम, घडा, फुल, आसू, धुर, जुना, चाक, आग, धूळ, दिवा, पान, वीज, चामडे, तहान, अंजली, चोच, तण, माकड, अडाणी, उधोग, शेत, पाणी, पेटी, विनंती, ओंजळ, आंधळा, काय, धुर, पंख, ताक, कान, गाय.
🌀देशी/देशीज शब्द
महाराष्ट्रातील मूळ रहिवाशांच्या बोलीभाषेमधील वापरल्या जाणार्या शब्दांना 'देशी शब्द' असे म्हणतात.
💠उदा.
झाड, दगड, धोंडा, घोडा, डोळा, डोके, हाड, पोट, गुडघा, बोका, रेडा, बाजारी, वांगे, लुगडे, झोप, खुळा, चिमणी, ढेकूण, कंबर, पीठ, डोळा, मुलगा, लाजरा, वेढा, गार, लाकूड, ओटी, वेडा, अबोला, लूट, अंघोळ, उडी, शेतकरी, आजार, रोग, ओढा, चोर, वारकरी, मळकट, धड, ओटा, डोंगर.
🌀 परभाषीय शब्द :
संस्कृत व्यतिरिक्त इतर भाषांमधून मराठीत आलेल्या शब्दांना ' परभाषीय शब्द' असे म्हणतात.
🌀1) तुर्की शब्द
💠कालगी, बंदूक, कजाग
🌀2) इंग्रजी शब्द
💠टी.व्ही., डॉक्टर, कोर्ट, पेन, पार्सल, सायकल, स्टेशन, हॉस्पिटल, बस, फाईल, रेल्वे, पास, ब्रेक, कप, मास्तर, फी, बॉल, स्टॉप, ऑफिस, एजंट, टेलिफोन, सिनेमा, सर्कस, पॅंट, बॅट, पोस्ट, तिकीट, ड्रायव्हर, मोटर, कंडक्टर, नंबर, टीचर, सर, मॅडम, पेपर, नर्स, पेशंट, इंजेक्शन, बटन ड्रेस, ग्लास, इत्यादी.
🌀 3) पोर्तुगीज शब्द
बटाटा, तंभाखू, पगार, बिजागरी, कोबी, हापूस, फणस, घमेले, पायरी, लोणचे, मेज, चावी, तुरुंग, तिजोरी, काडतुस.
🌀4) फारशी शब्द
💠रवाना, समान, हकीकत, अत्तर, अब्रू, पेशवा, पोशाख, सौदागार, कामगार, गुन्हेगार, फडवणीस, बाम, लेजीम, शाई, गरीब, खानेसुमारी, हजार, शाहीर, मोहोर, सरकार, महिना हप्ता.
🌀 5) अरबी शब्द
अर्ज, इनाम, हुकूम, मेहनत, जाहीर, मंजूर, शाहीर, साहेब, मालक, मौताज, नक्कल, जबाब, उर्फ, पैज, मजबूत, शहर, नजर, खर्च, मनोरा, वाद, मदत, बदल.
🌀6) कानडी शब्द
हंडा, भांडे, अक्का, गाजर, भाकरी, अण्णा, पिशवी, खोली, बांगडी, लवंग, अडकित्ता, चाकरी, पापड, खलबत्ता, किल्ली, तूप, चिंधी, गुढी, विळी, आई, रजई, तंदूर, चिंच, खोबरे, कणीक, चिमटा, नथ, तांब्या, उडीद, पाट, गाल, काका, टाळू, गादी, खिडकी, गच्ची, बांबू, ताई, गुंडी, कांबळे.
🌀7) गुजराती शब्द
सदरा, दलाल, ढोकळा, घी, डबा, दादर, रिकामटेकडा, इजा, शेट.
🌀8) हिन्दी शब्द
बच्चा, बात, भाई, दिल, दाम, करोड, बेटा, मिलाप, तपास, और, नानी, मंजूर, इमली.
🌀 9) तेलगू शब्द
ताळा, अनरसा, किडूकमिडूक, शिकेकाई, बंडी, डबी.
🌀10) तामिळ शब्द
चिल्ली, पिल्ली, सार, मठ्ठा.
....,.......
शब्द कसा तयार झाला आहे, म्हणजे सिद्ध कसा झाला आहे यालाच
'शब्दसिद्धी' असे म्हणतात.
⭕शब्दांचे खालील प्रकार पडतात.
🌀 तत्सम शब्द
जे संस्कृत शब्द मराठी भाषेत जसेच्या तसे काहीही बादल न होता आले आहेत त्यांना 'तत्सम शब्द ' असे म्हणतात.
💠उदा.
राजा, भूगोल, चंचू, पुष्प, परंतु, भगवान, कर, पशु, अंध, जल, दीप, पृथ्वी, तथापि, कवि, वायु, भीती, पुत्र, अधापि, मति, पुरुष, शिशु, गुरु, मधु, गंध, पिता, कन्या, वृक्ष, धर्म, सत्कार, समर्थन, उत्सव, विद्वान, संत, निस्तेज, कर, जगन्नाथ, दर्शन, उमेश, स्वामि, मंदिर, तिथी, सूर्य, स्वल्प, घृणा, पिंड, कलश, प्रात:क, दंड, पत्र, ग्रंथ, उत्तम, आकाश पाप, मंत्र, शिखर, सूत्र, कार्य, होम, गणेश, सभ्य, कन्या, देवर्षि, वृद्ध, संसार, प्रीत्यर्थ, कविता, उपकार, परंतु, गायन, अश्रू, प्रसाद, अब्ज, राजा, संमती, घंटा, पुण्य, बुद्धी, अभिषेक, संगती, श्रद्धा, प्रकाश, सत्कार, देवालय, तारा, समर्थन, नयन, उत्सव, दुष्परिणाम, नैवेध.
🌀 तदभव शब्द
जे शब्द संस्कृत मधून मराठीमध्ये येतांना त्यांच्या मूळ रूपात काही बदल होतो त्या शब्दांना 'तदभव शब्द' असे म्हणतात.
💠उदा.
घर, पाय, भाऊ, सासू, सासरा, गाव, दूध, घास, कोवळा, ओळ, काम, घाम, घडा, फुल, आसू, धुर, जुना, चाक, आग, धूळ, दिवा, पान, वीज, चामडे, तहान, अंजली, चोच, तण, माकड, अडाणी, उधोग, शेत, पाणी, पेटी, विनंती, ओंजळ, आंधळा, काय, धुर, पंख, ताक, कान, गाय.
🌀देशी/देशीज शब्द
महाराष्ट्रातील मूळ रहिवाशांच्या बोलीभाषेमधील वापरल्या जाणार्या शब्दांना 'देशी शब्द' असे म्हणतात.
💠उदा.
झाड, दगड, धोंडा, घोडा, डोळा, डोके, हाड, पोट, गुडघा, बोका, रेडा, बाजारी, वांगे, लुगडे, झोप, खुळा, चिमणी, ढेकूण, कंबर, पीठ, डोळा, मुलगा, लाजरा, वेढा, गार, लाकूड, ओटी, वेडा, अबोला, लूट, अंघोळ, उडी, शेतकरी, आजार, रोग, ओढा, चोर, वारकरी, मळकट, धड, ओटा, डोंगर.
🌀 परभाषीय शब्द :
संस्कृत व्यतिरिक्त इतर भाषांमधून मराठीत आलेल्या शब्दांना ' परभाषीय शब्द' असे म्हणतात.
🌀1) तुर्की शब्द
💠कालगी, बंदूक, कजाग
🌀2) इंग्रजी शब्द
💠टी.व्ही., डॉक्टर, कोर्ट, पेन, पार्सल, सायकल, स्टेशन, हॉस्पिटल, बस, फाईल, रेल्वे, पास, ब्रेक, कप, मास्तर, फी, बॉल, स्टॉप, ऑफिस, एजंट, टेलिफोन, सिनेमा, सर्कस, पॅंट, बॅट, पोस्ट, तिकीट, ड्रायव्हर, मोटर, कंडक्टर, नंबर, टीचर, सर, मॅडम, पेपर, नर्स, पेशंट, इंजेक्शन, बटन ड्रेस, ग्लास, इत्यादी.
🌀 3) पोर्तुगीज शब्द
बटाटा, तंभाखू, पगार, बिजागरी, कोबी, हापूस, फणस, घमेले, पायरी, लोणचे, मेज, चावी, तुरुंग, तिजोरी, काडतुस.
🌀4) फारशी शब्द
💠रवाना, समान, हकीकत, अत्तर, अब्रू, पेशवा, पोशाख, सौदागार, कामगार, गुन्हेगार, फडवणीस, बाम, लेजीम, शाई, गरीब, खानेसुमारी, हजार, शाहीर, मोहोर, सरकार, महिना हप्ता.
🌀 5) अरबी शब्द
अर्ज, इनाम, हुकूम, मेहनत, जाहीर, मंजूर, शाहीर, साहेब, मालक, मौताज, नक्कल, जबाब, उर्फ, पैज, मजबूत, शहर, नजर, खर्च, मनोरा, वाद, मदत, बदल.
🌀6) कानडी शब्द
हंडा, भांडे, अक्का, गाजर, भाकरी, अण्णा, पिशवी, खोली, बांगडी, लवंग, अडकित्ता, चाकरी, पापड, खलबत्ता, किल्ली, तूप, चिंधी, गुढी, विळी, आई, रजई, तंदूर, चिंच, खोबरे, कणीक, चिमटा, नथ, तांब्या, उडीद, पाट, गाल, काका, टाळू, गादी, खिडकी, गच्ची, बांबू, ताई, गुंडी, कांबळे.
🌀7) गुजराती शब्द
सदरा, दलाल, ढोकळा, घी, डबा, दादर, रिकामटेकडा, इजा, शेट.
🌀8) हिन्दी शब्द
बच्चा, बात, भाई, दिल, दाम, करोड, बेटा, मिलाप, तपास, और, नानी, मंजूर, इमली.
🌀 9) तेलगू शब्द
ताळा, अनरसा, किडूकमिडूक, शिकेकाई, बंडी, डबी.
🌀10) तामिळ शब्द
चिल्ली, पिल्ली, सार, मठ्ठा.
....,.......
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Forwarded from मराठी व्याकरण
🔹समास
✴✴✴बहुव्रीही समास✴✴✴
✳ज्या समासातील कोणतेच पद प्रमुख नसून त्या पदाच्या अर्थापेक्षा वेगळ्या अशा वस्तूंचा किंवा व्यक्तींचा त्यामधून बोध होतो त्या समासाला बहुव्रीही समास असे म्हणतात.
✴उदा.
❇नीलकंठ - ज्याचा कंठ निळा आहे असा (शंकर)
❇वक्रतुंड - ज्याचे तोंड वक्र आहे असा (गणपती)
❇दशमुख - ज्याला दहा तोंड आहे असा (रावण) बहुव्रीही समासाचे खालील 4 उपपक्रार पडतात.
🔵i) विभक्ती बहुव्रीही समास -
✳ज्या समासाचा विग्रह करतांना शेवटी एक संबंधी सर्वनाम येते.
✳अशा सर्वनामाची जी विभक्ती असेल त्या विभक्तीचे नाव समासाला दिले जाते त्याला विभक्ती बहुव्रीही समास असे म्हणतात.
✴उदा.
❇प्राप्तधन - प्राप्त आहे धन ज्याला तो – व्दितीया विभक्ती
❇जितेंद्रिय - जित आहे इंद्रिये ज्याची तो – षष्ठी विभक्ती
❇जितशत्रू - जित आहे शत्रू ज्याने तो – तृतीया विभक्ती
❇गतप्राण - गत आहे प्राण ज्यापासून तो – पंचमी विभक्ती
🔵ii) नत्र बहुव्रीही समास -
✳ज्या समासाचे पहिले पद नकारदर्शक असते त्याला नत्र बहुव्रीही समास असे म्हणतात.
या समासातील पहिल्या पदात अ, न, अन, नि अशा नकारदर्शक शब्दांचा वापर केला जातो.
✴उदा.
❇अनंत - नाही अंत ज्याला तो
❇निर्धन - नाही धन ज्याकडे तो
❇नीरस - नाही रस ज्यात तो
🔵iii) सहबहुव्रीही समास -
✳ज्या बहुव्रीही समासाचे पहिले पद सह किंवा स अशी अव्यये असून हा सामासिक शब्द एखाधा विशेषणाचे कार्य करतो त्यास सहबहुव्रीही समास म्हणतात.
✴उदा.
❇सहपरिवार - परिवारासहित असा जो
❇सबल - बलासहित आहे असा जो
❇सवर्ण - वर्णासहित असा तो
🔵iv) प्रादिबहुव्रीही समास -
✳ज्या बहुव्रीही समासाचे पहिले पद प्र, परा, अप, दूर, सु, वि अशा उपसर्गानी युक्त असेल तर त्याला प्रादिबहुव्रीही समास असे म्हणतात.
✴उदा.
❇सुमंगल - पवित्र आहे असे ते
❇सुनयना - सु-नयन असलेली स्त्री
❇दुर्गुण - वाईट गुण असलेली व्यक्ती
✴✴✴बहुव्रीही समास✴✴✴
✳ज्या समासातील कोणतेच पद प्रमुख नसून त्या पदाच्या अर्थापेक्षा वेगळ्या अशा वस्तूंचा किंवा व्यक्तींचा त्यामधून बोध होतो त्या समासाला बहुव्रीही समास असे म्हणतात.
✴उदा.
❇नीलकंठ - ज्याचा कंठ निळा आहे असा (शंकर)
❇वक्रतुंड - ज्याचे तोंड वक्र आहे असा (गणपती)
❇दशमुख - ज्याला दहा तोंड आहे असा (रावण) बहुव्रीही समासाचे खालील 4 उपपक्रार पडतात.
🔵i) विभक्ती बहुव्रीही समास -
✳ज्या समासाचा विग्रह करतांना शेवटी एक संबंधी सर्वनाम येते.
✳अशा सर्वनामाची जी विभक्ती असेल त्या विभक्तीचे नाव समासाला दिले जाते त्याला विभक्ती बहुव्रीही समास असे म्हणतात.
✴उदा.
❇प्राप्तधन - प्राप्त आहे धन ज्याला तो – व्दितीया विभक्ती
❇जितेंद्रिय - जित आहे इंद्रिये ज्याची तो – षष्ठी विभक्ती
❇जितशत्रू - जित आहे शत्रू ज्याने तो – तृतीया विभक्ती
❇गतप्राण - गत आहे प्राण ज्यापासून तो – पंचमी विभक्ती
🔵ii) नत्र बहुव्रीही समास -
✳ज्या समासाचे पहिले पद नकारदर्शक असते त्याला नत्र बहुव्रीही समास असे म्हणतात.
या समासातील पहिल्या पदात अ, न, अन, नि अशा नकारदर्शक शब्दांचा वापर केला जातो.
✴उदा.
❇अनंत - नाही अंत ज्याला तो
❇निर्धन - नाही धन ज्याकडे तो
❇नीरस - नाही रस ज्यात तो
🔵iii) सहबहुव्रीही समास -
✳ज्या बहुव्रीही समासाचे पहिले पद सह किंवा स अशी अव्यये असून हा सामासिक शब्द एखाधा विशेषणाचे कार्य करतो त्यास सहबहुव्रीही समास म्हणतात.
✴उदा.
❇सहपरिवार - परिवारासहित असा जो
❇सबल - बलासहित आहे असा जो
❇सवर्ण - वर्णासहित असा तो
🔵iv) प्रादिबहुव्रीही समास -
✳ज्या बहुव्रीही समासाचे पहिले पद प्र, परा, अप, दूर, सु, वि अशा उपसर्गानी युक्त असेल तर त्याला प्रादिबहुव्रीही समास असे म्हणतात.
✴उदा.
❇सुमंगल - पवित्र आहे असे ते
❇सुनयना - सु-नयन असलेली स्त्री
❇दुर्गुण - वाईट गुण असलेली व्यक्ती
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गरज सरो अन् वैद्य मरो.
Meaning:
ज्याने आपली गरज भागविली त्याला विसरुन जाणे.
गरज सरो अन् वैद्य मरो.
Meaning:
ज्याने आपली गरज भागविली त्याला विसरुन जाणे.
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गरजवंताला अक्कल नसते.
Meaning:
गरजेमुळे अडलेल्या, दुसऱ्याचे निमूटपणे ऐकून घ्यावे लागते.
गरजवंताला अक्कल नसते.
Meaning:
गरजेमुळे अडलेल्या, दुसऱ्याचे निमूटपणे ऐकून घ्यावे लागते.
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From Marathi Mhani app:
गरीबाच्या दाराला सावकाराची कडी.
Meaning:
गरिबावर सावकाराचा अंमल.
गरीबाच्या दाराला सावकाराची कडी.
Meaning:
गरिबावर सावकाराचा अंमल.
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गरीबानं खपावं, धनिकानं चाखावं.
Meaning:
गरिबाने कष्ट करावेत आणि श्रीमंताने माल खावा.
गरीबानं खपावं, धनिकानं चाखावं.
Meaning:
गरिबाने कष्ट करावेत आणि श्रीमंताने माल खावा.
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गर्जेल तो पडेल काय?
Meaning:
केवळ बडबड करणाऱ्या माणसाकडून काहीही कृती होत नाही.
गर्जेल तो पडेल काय?
Meaning:
केवळ बडबड करणाऱ्या माणसाकडून काहीही कृती होत नाही.
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From Marathi Mhani app:
गळा नाही सरी, सुखी निद्रा करी.
Meaning:
ज्या स्त्रीच्या अंगावर दागिने नसतात, तिला सुखाने झोप लागते.
गळा नाही सरी, सुखी निद्रा करी.
Meaning:
ज्या स्त्रीच्या अंगावर दागिने नसतात, तिला सुखाने झोप लागते.
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From Marathi Mhani app:
गाजराची पुंगी वाजली तर वाजली नाहीतर मोडून खाल्ली.
Meaning:
एखादे काम सिद्धीस गेले तर ठीक, नाही तरी नुकसान नाही.
गाजराची पुंगी वाजली तर वाजली नाहीतर मोडून खाल्ली.
Meaning:
एखादे काम सिद्धीस गेले तर ठीक, नाही तरी नुकसान नाही.
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From Marathi Mhani app:
गाढवाने शेत खाल्ल्याचे पाप ना पुण्य.
Meaning:
निरुपयोगी माणसावर केलेले उपकार अनाठायी जातात.
गाढवाने शेत खाल्ल्याचे पाप ना पुण्य.
Meaning:
निरुपयोगी माणसावर केलेले उपकार अनाठायी जातात.
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From Marathi Mhani app:
गाव करी ते राव न करी.
Meaning:
श्रीमंत माणूस पैशाच्या जोरावर जे करु शकणार नाही ते सामान्य माणसे एकीच्या जोरावर करु शकतात.
गाव करी ते राव न करी.
Meaning:
श्रीमंत माणूस पैशाच्या जोरावर जे करु शकणार नाही ते सामान्य माणसे एकीच्या जोरावर करु शकतात.
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घोडे खाई भाडे.
Meaning:
ज्या धंद्यात विशेष फायदा नाही तो धंदा.
घोडे खाई भाडे.
Meaning:
ज्या धंद्यात विशेष फायदा नाही तो धंदा.
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घोड्यावर हौदा, हत्तीवर खोगीर.
Meaning:
एखाद्या वस्तूचा चुकीच्या पद्धतीने उपयोग.
घोड्यावर हौदा, हत्तीवर खोगीर.
Meaning:
एखाद्या वस्तूचा चुकीच्या पद्धतीने उपयोग.
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Forwarded from मराठी व्याकरण
🔹अलंकार
〰〰〰〰〰〰〰
🔶व्याख्या:- कोणतेहि गद्य वा काव्य श्रवणीय वा रसपूर्ण करण्यासाठी वापरला जाणारा (काव्यात्मक) साचा म्हणजे अलंकार .
〰〰〰〰〰〰〰
🔶अलंकारांचे प्रकार:-
✔ १) उपमा:- उपमा हा मराठी भाषेच्या अर्थालंकाराचा एक उपप्रकार आहे.
〰〰 〰〰〰〰〰
1. "दोन वस्तूंतील साम्य एका विशिष्ट रीतीने वर्णन केलेले असते तेथे उपमा अलंकार होतो."
2. या अलंकारात दोन भिन्न गोष्टीत साम्य पाहिले जाते. 'एक वस्तु दुसर्या वस्तूसारखी आहे' असे वर्णन असते. दोन वस्तूतील साम्य चमत्कृतिपूर्ण रीतीने जेथे वर्णन केलेले असते तेथे उपमा हा अलंकार होतो.
🔺उदा:
सावळाच रंग तुझा पावसाळी नभापरी आभाळा गत माया तुझी आम्हांवरी राहू दे
〰〰〰〰〰〰〰
✔२) उत्प्रेक्षा:- उत्प्रेक्षा हा मराठी भाषेच्या अर्थालंकाराचा एक उपप्रकार आहे.
〰〰〰〰〰〰〰
1. उपमेय हे जणू उपमान आहे असे वर्णन असते तेथे उत्प्रेक्षा अलंकार होतो. (जणू,गमे,वाटे,भासे,की)
🔺उदा:
ती गुलाबी उषा म्हणजे परमेश्वराचे प्रेमच जणू.
सोने-चांदी-रत्नमाणकांचे दुकानच हे जणू.
अत्रीच्या आश्रमी नेले मज वाटे
माहेरची वाटे खरेखुर
〰〰〰〰〰〰〰
✔३) अपन्हुती:- (अपन्हुती म्हणजे लपविणे/ झाकणे) अपन्हुती हा मराठी भाषेच्या अर्थालंकाराचा एक उपप्रकार आहे.
〰〰〰〰〰〰〰
1. "उपमेयाचा निषेध करून ते उपमानच आहे असे जेव्हा सांगितले जाते तेव्हा 'अपन्हुती' हा अलंकार होतो."
🔺उदा.-
न हे नयन, पाकळ्या उमलल्या सरोजातिल |
न हे वदन, चंद्रमा शरदिचा गमे केवळ ||
🔺स्पष्टीकरण- प्रस्तुत उदाहरणात 'कमळातल्या पाकळ्या' आणि 'शरदिचा चंद्रमा' या उपमानांनी अनुक्रमे 'नयन' आणि 'वदन' या उपमेयांना नाकारल्यामुळे इथे 'अपन्हुती' अलंकार झालेला आहे.
🔺अन्य उदाहरणे-
1. हे हृदय नसे परी स्थंडिल धगधगलेले |
2. ओठ कशाचे देठची फुलल्या पारिजातकाचे |
3. आई म्हणोनि कोणी आईस हाक मारी , ती हाक येई कानी मज होय शोक भारी , नोहेच हाक माते मारी , कुणी कुठारी
〰〰〰〰〰〰〰
✔४) अन्योक्ती:- अन्योक्ती हा मराठी भाषेच्या अर्थालंकाराचा एक उपप्रकार आहे.
〰〰〰〰〰〰〰
1. दुसर्यास उद्देशून केलेली उक्ती.
2. ज्याच्याबद्दल बोलायचे त्याच्याबद्दल काहीच न बोलता दुसर्याबद्दल बोलून आपले मनोगत व्यक्त करण्याची जी पद्धत तिलाच अन्योक्ती असे म्हणतात.
🔺उदा:-
येथे समस्त बहिरे बसतात लोक का भाषणे मधुर तू
करिशी अनेक हे मूर्ख यांस किमपीहि नसे
विवेक कोकिल वर्ण बघुनि म्हणतील काक
➖➖➖➖➖➖➖
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🔶व्याख्या:- कोणतेहि गद्य वा काव्य श्रवणीय वा रसपूर्ण करण्यासाठी वापरला जाणारा (काव्यात्मक) साचा म्हणजे अलंकार .
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🔶अलंकारांचे प्रकार:-
✔ १) उपमा:- उपमा हा मराठी भाषेच्या अर्थालंकाराचा एक उपप्रकार आहे.
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1. "दोन वस्तूंतील साम्य एका विशिष्ट रीतीने वर्णन केलेले असते तेथे उपमा अलंकार होतो."
2. या अलंकारात दोन भिन्न गोष्टीत साम्य पाहिले जाते. 'एक वस्तु दुसर्या वस्तूसारखी आहे' असे वर्णन असते. दोन वस्तूतील साम्य चमत्कृतिपूर्ण रीतीने जेथे वर्णन केलेले असते तेथे उपमा हा अलंकार होतो.
🔺उदा:
सावळाच रंग तुझा पावसाळी नभापरी आभाळा गत माया तुझी आम्हांवरी राहू दे
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✔२) उत्प्रेक्षा:- उत्प्रेक्षा हा मराठी भाषेच्या अर्थालंकाराचा एक उपप्रकार आहे.
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1. उपमेय हे जणू उपमान आहे असे वर्णन असते तेथे उत्प्रेक्षा अलंकार होतो. (जणू,गमे,वाटे,भासे,की)
🔺उदा:
ती गुलाबी उषा म्हणजे परमेश्वराचे प्रेमच जणू.
सोने-चांदी-रत्नमाणकांचे दुकानच हे जणू.
अत्रीच्या आश्रमी नेले मज वाटे
माहेरची वाटे खरेखुर
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✔३) अपन्हुती:- (अपन्हुती म्हणजे लपविणे/ झाकणे) अपन्हुती हा मराठी भाषेच्या अर्थालंकाराचा एक उपप्रकार आहे.
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1. "उपमेयाचा निषेध करून ते उपमानच आहे असे जेव्हा सांगितले जाते तेव्हा 'अपन्हुती' हा अलंकार होतो."
🔺उदा.-
न हे नयन, पाकळ्या उमलल्या सरोजातिल |
न हे वदन, चंद्रमा शरदिचा गमे केवळ ||
🔺स्पष्टीकरण- प्रस्तुत उदाहरणात 'कमळातल्या पाकळ्या' आणि 'शरदिचा चंद्रमा' या उपमानांनी अनुक्रमे 'नयन' आणि 'वदन' या उपमेयांना नाकारल्यामुळे इथे 'अपन्हुती' अलंकार झालेला आहे.
🔺अन्य उदाहरणे-
1. हे हृदय नसे परी स्थंडिल धगधगलेले |
2. ओठ कशाचे देठची फुलल्या पारिजातकाचे |
3. आई म्हणोनि कोणी आईस हाक मारी , ती हाक येई कानी मज होय शोक भारी , नोहेच हाक माते मारी , कुणी कुठारी
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✔४) अन्योक्ती:- अन्योक्ती हा मराठी भाषेच्या अर्थालंकाराचा एक उपप्रकार आहे.
〰〰〰〰〰〰〰
1. दुसर्यास उद्देशून केलेली उक्ती.
2. ज्याच्याबद्दल बोलायचे त्याच्याबद्दल काहीच न बोलता दुसर्याबद्दल बोलून आपले मनोगत व्यक्त करण्याची जी पद्धत तिलाच अन्योक्ती असे म्हणतात.
🔺उदा:-
येथे समस्त बहिरे बसतात लोक का भाषणे मधुर तू
करिशी अनेक हे मूर्ख यांस किमपीहि नसे
विवेक कोकिल वर्ण बघुनि म्हणतील काक
➖➖➖➖➖➖➖
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Forwarded from मराठी व्याकरण
🔹वाक्य पृथक्करण
🔸पृथक म्हणजे वेगळे किंवा सुटे करणे असा होतो आणि वाक्यापृथक्करण म्हणजे वाक्यातील भाग वेगळा करून दाखविणे.
🔷वाक्य:⤵
उद्देश विभाग(उद्देशांग)↔विधेय विभाग
(विधेयांग)
1)उद्देश (कर्ता) ↔1) कर्म व कर्म विस्तार
2)उद्देश विस्तार ↔2) विधानपूरक
↔3) विधेय विस्तार
↔4) विधेय (क्रियापद)
💠उद्देश विभाग/उद्देशांग:💠
💠1)उद्देश (कर्ता)
🔸वाक्य ज्याच्या विषयी माहिती सांगते तो वाक्याचा कर्ता असतो.
🔸क्रियापदातील धातुला णारा, णारे, णारी, हे प्रत्यय जोडून कोण / काय ने प्रश्न विचारल्यास उत्तर कर्ता येते.
🔶उदा.🔸
🔹रामुचा शर्ट फाटला.
➡(फाटणारे काय/कोण?)
🔹रामरावांचा कुत्रा मेला.
➡(मरणारे कोण/काय?)
🔹मोगल साम्राज्याचा अंत झाला.
➡(होणारे-कोण/काय?)
🔹रामुच्या घराचा दरवाजा उघडला.
➡(उघडणारे कोण/काय?)
👉वरील वाक्यात शर्ट, कुत्रा, अंत, दरवाजा हे उद्देश (कर्ता) आहेत.
💠2) उद्देश विस्तार
🔸कर्त्याविषयी माहिती सांगणारे शब्द जर कर्त्यापूर्वी असतील. तर अशा शब्दांना उद्देश विस्तारात लिहावे.
🔶उदा.🔸
🔸शेजारचा रामु धपकन पडला.नियमित अभ्यास करणारे विधार्थी पास होतात.
🔶विधेय विभाग/विधेयांग.
🔸वाक्यात ज्यांच्यावर क्रिया घडते ते कर्म असते म्हणजेच क्रिया सोसणारे कर्म असते.
🔶उदा.🔸
🔹रामने झडाचा पेरु तोडला.
➡(या वाक्यात तोडण्याची क्रिया पेरु वर झाली म्हणून ते कर्म.)
🔹गवळ्याने म्हशीची धार काढली.
➡(या वाक्यात काढण्याची क्रिया धारेवर झाली म्हणून ते कर्म)
💠1) कर्म विस्तार
🔷कर्मापूर्वी कर्माविषयी माहिती सांगणारा शब्द म्हणजे कर्म विस्तार होय.
🔶उदा.🔸
🔸रामने झाडाचा पेरु तोडला.गवळ्याने काळ्या म्हशीची धार काढली.
💠2) विधान पूरक
🔷कर्त्याविषयी माहिती सांगणारा शब्द जर कर्त्यांनंतर आला तर ते विधानपूरक असते.
🔶उदा.🔸
🔸राम राजा झाला.संदीप शिक्षक आहे.शरदाच्या चांदण्यात गुलमोहर मोहक दिसतो. वरील वाक्यावरुन राजा, शिक्षक, मोहक ही शब्द कर्त्याविषयी अधिक महितीसांगत आहेत म्हणून त्यांना विधानपूरक असे म्हणतात.
💠3) विधेय विस्तार
🔷क्रियापदास विधेय असे म्हणतात.
🔸वाक्यात क्रियापदाविषयी माहिती सांगणार्या शब्दांचा यात समावेश होतो. क्रियापदाला केव्हा/ कोठे/ कसे ने प्रश्न विचारल्यास विधेय विस्तार उत्तर येते. ही सर्व क्रियाविशेषणे असतात.
🔶उदा.🔸
🔸कुटुंबातील सर्व व्यक्ती रविवारी वनभोजनास गेले.शरदाच्या चांदण्यात गुलमोहर मोहक दिसतो.माझा जिवलग मित्र मनीष माझे पत्र पाहताच त्वरित आला.
💠4) विधेय/क्रियापद
🔷वाक्यातील क्रियापदाला विधेय असे म्हणतात.
🔶उदा.🔸
🔸रमेश खेळतो.
🔸रमेश अभ्यास करतो.
🔸रमेश चित्र काढतो.
आमचे चॅनेल जॉईन करण्यासाठी @marathi येथे क्लिक करा व चॅनेल ओपन झाले की join ऑप्शन वर क्लिक करा.
🔸पृथक म्हणजे वेगळे किंवा सुटे करणे असा होतो आणि वाक्यापृथक्करण म्हणजे वाक्यातील भाग वेगळा करून दाखविणे.
🔷वाक्य:⤵
उद्देश विभाग(उद्देशांग)↔विधेय विभाग
(विधेयांग)
1)उद्देश (कर्ता) ↔1) कर्म व कर्म विस्तार
2)उद्देश विस्तार ↔2) विधानपूरक
↔3) विधेय विस्तार
↔4) विधेय (क्रियापद)
💠उद्देश विभाग/उद्देशांग:💠
💠1)उद्देश (कर्ता)
🔸वाक्य ज्याच्या विषयी माहिती सांगते तो वाक्याचा कर्ता असतो.
🔸क्रियापदातील धातुला णारा, णारे, णारी, हे प्रत्यय जोडून कोण / काय ने प्रश्न विचारल्यास उत्तर कर्ता येते.
🔶उदा.🔸
🔹रामुचा शर्ट फाटला.
➡(फाटणारे काय/कोण?)
🔹रामरावांचा कुत्रा मेला.
➡(मरणारे कोण/काय?)
🔹मोगल साम्राज्याचा अंत झाला.
➡(होणारे-कोण/काय?)
🔹रामुच्या घराचा दरवाजा उघडला.
➡(उघडणारे कोण/काय?)
👉वरील वाक्यात शर्ट, कुत्रा, अंत, दरवाजा हे उद्देश (कर्ता) आहेत.
💠2) उद्देश विस्तार
🔸कर्त्याविषयी माहिती सांगणारे शब्द जर कर्त्यापूर्वी असतील. तर अशा शब्दांना उद्देश विस्तारात लिहावे.
🔶उदा.🔸
🔸शेजारचा रामु धपकन पडला.नियमित अभ्यास करणारे विधार्थी पास होतात.
🔶विधेय विभाग/विधेयांग.
🔸वाक्यात ज्यांच्यावर क्रिया घडते ते कर्म असते म्हणजेच क्रिया सोसणारे कर्म असते.
🔶उदा.🔸
🔹रामने झडाचा पेरु तोडला.
➡(या वाक्यात तोडण्याची क्रिया पेरु वर झाली म्हणून ते कर्म.)
🔹गवळ्याने म्हशीची धार काढली.
➡(या वाक्यात काढण्याची क्रिया धारेवर झाली म्हणून ते कर्म)
💠1) कर्म विस्तार
🔷कर्मापूर्वी कर्माविषयी माहिती सांगणारा शब्द म्हणजे कर्म विस्तार होय.
🔶उदा.🔸
🔸रामने झाडाचा पेरु तोडला.गवळ्याने काळ्या म्हशीची धार काढली.
💠2) विधान पूरक
🔷कर्त्याविषयी माहिती सांगणारा शब्द जर कर्त्यांनंतर आला तर ते विधानपूरक असते.
🔶उदा.🔸
🔸राम राजा झाला.संदीप शिक्षक आहे.शरदाच्या चांदण्यात गुलमोहर मोहक दिसतो. वरील वाक्यावरुन राजा, शिक्षक, मोहक ही शब्द कर्त्याविषयी अधिक महितीसांगत आहेत म्हणून त्यांना विधानपूरक असे म्हणतात.
💠3) विधेय विस्तार
🔷क्रियापदास विधेय असे म्हणतात.
🔸वाक्यात क्रियापदाविषयी माहिती सांगणार्या शब्दांचा यात समावेश होतो. क्रियापदाला केव्हा/ कोठे/ कसे ने प्रश्न विचारल्यास विधेय विस्तार उत्तर येते. ही सर्व क्रियाविशेषणे असतात.
🔶उदा.🔸
🔸कुटुंबातील सर्व व्यक्ती रविवारी वनभोजनास गेले.शरदाच्या चांदण्यात गुलमोहर मोहक दिसतो.माझा जिवलग मित्र मनीष माझे पत्र पाहताच त्वरित आला.
💠4) विधेय/क्रियापद
🔷वाक्यातील क्रियापदाला विधेय असे म्हणतात.
🔶उदा.🔸
🔸रमेश खेळतो.
🔸रमेश अभ्यास करतो.
🔸रमेश चित्र काढतो.
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🔹विशेषण
खालील शब्दसमुह पहा....
चांगली मुले
काळा कुत्रा
पाच टोप्या
निळे आकाश
वरील शब्दसमुहात चांगली , काळा
पाच निळे हे शब्द त्या त्या नामाबद्दल विशेष माहिती सांगतात .
🏀 *नामाबद्दल विशेष माहिती सांगणाऱ्या शब्दाला विशेषण म्हणतात*.
🎾विशेषण नामाबद्दल विशेष माहिती सांगून नामाची व्याप्ती मर्यादित करते.
🏀साधारणपणे विशेषण नामाच्या पुर्वी येते.
🏀ज्या नामाबद्दल विशेषण माहिती सांगते त्या नामाला विशेष्य असे म्हणतात.
उदा.....
वर चांगली मुले यामध्ये चांगली हे विशेष पण मुले हे विशेष्य होय.
काळा कुत्रा यामध्ये काळा हे विशेषण पण कुत्रा हे विशेष्य होय.
निळे आकाश यामध्ये निळे हे विशेषणा पण आकाश हे विशेष्य होय.
🏀 *प्राथमिक स्तरावर विशेषणाचे प्रकार*-----
🎾 *गुणविशेषण*
🎾 *संख्याविशेषण*
🎾 *सार्वनामिक विशेषण*
खालील शब्दसमुह पहा....
शुर सरदार
ताजी भाजी
🏀 *नामाचा गुण किंवा विशेष दाखवला जातो त्यास गुणविशेषण म्हणतात.
शुर हा सरदाराचा गुण दाखवला.
ताजी हे भाजीबद्दल विशेष बाब दाखवते .
🏀 *संख्याविशेषण*----
आठ दिवस
थोडी साखर
ज्या विशेषणामुळे नामांची संख्या दाखवली जाते त्यास संख्याविशेषण म्हणतात.
बारा महिने, तिसरा भाग आर्धा हिस्सा.
🏀 *सार्वनामिक विशेषण*--
हा कुत्रा
ती बाग
तुझा सदरा
कोणता चित्रपट.
वरील शब्दसमुहात ,हा , ती , तुझा
ही सर्व नामे आहेत.
सर्वनामापासून बनलेल्या विशेषणाना सार्वनामिक विशेषण म्हणतात
खालील शब्दसमुह पहा....
चांगली मुले
काळा कुत्रा
पाच टोप्या
निळे आकाश
वरील शब्दसमुहात चांगली , काळा
पाच निळे हे शब्द त्या त्या नामाबद्दल विशेष माहिती सांगतात .
🏀 *नामाबद्दल विशेष माहिती सांगणाऱ्या शब्दाला विशेषण म्हणतात*.
🎾विशेषण नामाबद्दल विशेष माहिती सांगून नामाची व्याप्ती मर्यादित करते.
🏀साधारणपणे विशेषण नामाच्या पुर्वी येते.
🏀ज्या नामाबद्दल विशेषण माहिती सांगते त्या नामाला विशेष्य असे म्हणतात.
उदा.....
वर चांगली मुले यामध्ये चांगली हे विशेष पण मुले हे विशेष्य होय.
काळा कुत्रा यामध्ये काळा हे विशेषण पण कुत्रा हे विशेष्य होय.
निळे आकाश यामध्ये निळे हे विशेषणा पण आकाश हे विशेष्य होय.
🏀 *प्राथमिक स्तरावर विशेषणाचे प्रकार*-----
🎾 *गुणविशेषण*
🎾 *संख्याविशेषण*
🎾 *सार्वनामिक विशेषण*
खालील शब्दसमुह पहा....
शुर सरदार
ताजी भाजी
🏀 *नामाचा गुण किंवा विशेष दाखवला जातो त्यास गुणविशेषण म्हणतात.
शुर हा सरदाराचा गुण दाखवला.
ताजी हे भाजीबद्दल विशेष बाब दाखवते .
🏀 *संख्याविशेषण*----
आठ दिवस
थोडी साखर
ज्या विशेषणामुळे नामांची संख्या दाखवली जाते त्यास संख्याविशेषण म्हणतात.
बारा महिने, तिसरा भाग आर्धा हिस्सा.
🏀 *सार्वनामिक विशेषण*--
हा कुत्रा
ती बाग
तुझा सदरा
कोणता चित्रपट.
वरील शब्दसमुहात ,हा , ती , तुझा
ही सर्व नामे आहेत.
सर्वनामापासून बनलेल्या विशेषणाना सार्वनामिक विशेषण म्हणतात
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✅मराठी व्याकरण : वाक्यप्रचार व अर्थ✅
✅नामानिराळा राहणे - अलिप्त राहणे
✅ द्त्त म्हणून उभा राहणे - अचानक येणे
✅हातातोंडाची गाठ पडणे - कसेबसे खाण्यास मिळणे
✅ गयावया करणे - केविलवाणी विनंती करणे
✅अंगाचा तिळपापड होणे - अतिशय संतापणे
✅पगडा बसवणे - छाप, प्रभाव पाडणे
मूग गिळणे - अपमान सहन करुन गप्प राहणे
✅वाटाण्याच्या अक्षता लावणे - नाकारणे
✅कस्पटासमान लेखणे - क्षुल्लक, कमी दर्जाचे समजणे
https://t.me/MARATHI
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✅ द्त्त म्हणून उभा राहणे - अचानक येणे
✅हातातोंडाची गाठ पडणे - कसेबसे खाण्यास मिळणे
✅ गयावया करणे - केविलवाणी विनंती करणे
✅अंगाचा तिळपापड होणे - अतिशय संतापणे
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मराठी व्याकरण
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Forwarded from मराठी व्याकरण
🌼पृथक्करण🌻
🌷विभक्तीचा शब्दशः अर्थ 'विभाजित होण्याची क्रिया किंवा भावना' किंवा 'विभाग' किंवा 'वाटा' आहे.
🌷व्याकरणात , प्रत्यय किंवा शब्दाच्या पुढे चिन्ह ( संज्ञा , सर्वनाम आणि विशेषण ) याला विक्षेपण म्हणतात, जे शब्द क्रियापदांशी कसे संबंधित आहे हे दर्शविते.
🌷संस्कृत व्याकरणानुसार , संज्ञा किंवा संज्ञा नंतर प्रत्यय 'आवक' असे म्हणतात जे नावे किंवा संज्ञा शब्दांना एक वाक्यांश बनविते (वाक्यांच्या वापरासाठी) आणि क्रियापद परिणामाद्वारे क्रियापदातील संबंध दर्शवितात. प्रथमा, द्वितीया, तृतीया इत्यादी विभाग आहेत
🌷 ज्यात एकल , द्वंद्वात्मक , अनेकवचन - तीन मुले आहेत
🌷. पॅनिनियन व्याकरणामध्ये , त्यांना 'सुपर' इत्यादि 24 मोजले गेले आहेत. संस्कृत व्याकरणात ज्याला 'विभक्ती' म्हणतात त्या शब्दाचा सुधारित भाग आहे. जसे, रामाणे, रमाये इ.
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🌷विभक्तीचा शब्दशः अर्थ 'विभाजित होण्याची क्रिया किंवा भावना' किंवा 'विभाग' किंवा 'वाटा' आहे.
🌷व्याकरणात , प्रत्यय किंवा शब्दाच्या पुढे चिन्ह ( संज्ञा , सर्वनाम आणि विशेषण ) याला विक्षेपण म्हणतात, जे शब्द क्रियापदांशी कसे संबंधित आहे हे दर्शविते.
🌷संस्कृत व्याकरणानुसार , संज्ञा किंवा संज्ञा नंतर प्रत्यय 'आवक' असे म्हणतात जे नावे किंवा संज्ञा शब्दांना एक वाक्यांश बनविते (वाक्यांच्या वापरासाठी) आणि क्रियापद परिणामाद्वारे क्रियापदातील संबंध दर्शवितात. प्रथमा, द्वितीया, तृतीया इत्यादी विभाग आहेत
🌷 ज्यात एकल , द्वंद्वात्मक , अनेकवचन - तीन मुले आहेत
🌷. पॅनिनियन व्याकरणामध्ये , त्यांना 'सुपर' इत्यादि 24 मोजले गेले आहेत. संस्कृत व्याकरणात ज्याला 'विभक्ती' म्हणतात त्या शब्दाचा सुधारित भाग आहे. जसे, रामाणे, रमाये इ.
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