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उत्तर प्रदेश परीक्षा | शिक्षक भर्ती UPSSSC PET लेखपाल VDO | UPSC
राज्यसभा में TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन पूरे मानसून सत्र के लिए निलंबित सभापति के साथ बहस करने के कारण उन पर एक्शन लिया गया. पहले संजय सिंह अब ब्रायन साहब 🔇
विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट आने तक राघव चड्ढा राज्यसभा से निलंबित.
राघव चड्ढा 🔇
राघव चड्ढा 🔇
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उत्तर प्रदेश परीक्षा | शिक्षक भर्ती UPSSSC PET लेखपाल VDO | UPSC
✅ B.Ed. vs B.T.C. Court Case ⏩ सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट का फैसला बरकरार रखते हुए B.Ed. की सारी याचिकाएं खारिज कर दी गई। ⏩ B.Ed. प्राथमिक से बाहर, अब केवल B.T.C. प्राथमिक बनने के योग्य ⏩ पिछली भर्तियों पर नहीं पड़ेगा कोई असर ⏩ कोर्ट ने NCTE के…
30718_2021_2_1501_46056_Order_11-Aug-2023.pdf
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उत्तर प्रदेश परीक्षा | शिक्षक भर्ती UPSSSC PET लेखपाल VDO | UPSC
30718_2021_2_1501_46056_Judgement_11-Aug-2023.pdf
📌 Judgement के कुछ मुख्य बिंदु
✅ B.Ed. को शामिल करने या बाहर करने का निर्णय प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों के लिए योग्यता एक शैक्षणिक निर्णय है, जिसे शैक्षणिक निकाय यानी NCTE द्वारा उचित अध्ययन के बाद लिया जाना चाहिए और बेहतर होगा कि इसे इस विशेषज्ञ निकाय पर छोड़ दिया जाए।
👉🏻 लेकिन जैसा कि हमने बीएड को शामिल करने का निर्णय देखा है। योग्यता के रूप में योग्यता एनसीटीई का एक स्वतंत्र निर्णय नहीं है, बल्कि यह केंद्र सरकार का निर्णय था और एनसीटीई को इसे लागू करने के लिए केवल एनसीटीई अधिनियम की धारा 29 के तहत एक निर्देश के रूप में निर्देशित किया गया था, जिसका एनसीटीई ने पालन किया।
👉🏻 इसलिए हमारी सुविचारित राय में केंद्र सरकार के दिनांक 30.05.2018 के निर्देश और एनसीटीई की दिनांक 28.06.2018 की अधिसूचना आरटीई अधिनियम में निर्धारित सिद्धांतों का उल्लंघन है। इतना ही नहीं, यह अधिसूचना कानून के उद्देश्य और जनादेश के खिलाफ है, जो बच्चों को सार्थक और 'गुणवत्तापूर्ण' प्राथमिक शिक्षा प्रदान करना है।
⏩ दिनांक 28.06.2018 की अधिसूचना उचित विचार-विमर्श के बाद लिया गया एनसीटीई का एक स्वतंत्र निर्णय नहीं है, बल्कि यह केवल केंद्र सरकार के निर्देश का पालन करता है, एक ऐसा निर्देश जो दिन की वस्तुनिष्ठ वास्तविकताओं को ध्यान में रखने में विफल रहता है।
✅ B.Ed. को शामिल करने या बाहर करने का निर्णय प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों के लिए योग्यता एक शैक्षणिक निर्णय है, जिसे शैक्षणिक निकाय यानी NCTE द्वारा उचित अध्ययन के बाद लिया जाना चाहिए और बेहतर होगा कि इसे इस विशेषज्ञ निकाय पर छोड़ दिया जाए।
👉🏻 लेकिन जैसा कि हमने बीएड को शामिल करने का निर्णय देखा है। योग्यता के रूप में योग्यता एनसीटीई का एक स्वतंत्र निर्णय नहीं है, बल्कि यह केंद्र सरकार का निर्णय था और एनसीटीई को इसे लागू करने के लिए केवल एनसीटीई अधिनियम की धारा 29 के तहत एक निर्देश के रूप में निर्देशित किया गया था, जिसका एनसीटीई ने पालन किया।
👉🏻 इसलिए हमारी सुविचारित राय में केंद्र सरकार के दिनांक 30.05.2018 के निर्देश और एनसीटीई की दिनांक 28.06.2018 की अधिसूचना आरटीई अधिनियम में निर्धारित सिद्धांतों का उल्लंघन है। इतना ही नहीं, यह अधिसूचना कानून के उद्देश्य और जनादेश के खिलाफ है, जो बच्चों को सार्थक और 'गुणवत्तापूर्ण' प्राथमिक शिक्षा प्रदान करना है।
⏩ दिनांक 28.06.2018 की अधिसूचना उचित विचार-विमर्श के बाद लिया गया एनसीटीई का एक स्वतंत्र निर्णय नहीं है, बल्कि यह केवल केंद्र सरकार के निर्देश का पालन करता है, एक ऐसा निर्देश जो दिन की वस्तुनिष्ठ वास्तविकताओं को ध्यान में रखने में विफल रहता है।
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उत्तर प्रदेश परीक्षा | शिक्षक भर्ती UPSSSC PET लेखपाल VDO | UPSC
30718_2021_2_1501_46056_Judgement_11-Aug-2023.pdf
📌 Judgement के कुछ मुख्य बिंदु
⏩ शासन स्तर पर बीएड को शामिल करने का निर्णय लिया गया। चूँकि प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों के लिए योग्यता एक नीतिगत निर्णय है, हमें कहना होगा कि यह निर्णय सही नहीं है क्योंकि यह अधिनियम के उद्देश्य के विपरीत है। वास्तव में, यह अनुच्छेद 21ए के तहत संविधान में निहित मौलिक अधिकार की भावना और अक्षरशः के विरुद्ध है। यह अधिनियम के विशिष्ट आदेश के विरुद्ध है, जो बच्चों को मुफ्त, अनिवार्य और सार्थक प्राथमिक शिक्षा का आह्वान करता है।
🛑 प्राथमिक विद्यालय के लिए शिक्षकों की योग्यता के रूप में B.Ed. को शामिल करके केंद्र सरकार ने संविधान के प्रावधानों और कानूनों के खिलाफ काम किया है।
👉🏻 केंद्र सरकार द्वारा बीएड को शामिल करने का एकमात्र तर्क दिया गया है। एक योग्यता के रूप में यह एक 'उच्च योग्यता' है। यह हम पहले ही देख चुके हैं कि यह सही नहीं है। इन परिस्थितियों में, हमें यह कहने में कोई झिझक नहीं है कि अधिसूचना सही तरीके से रद्द की गई है और राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ के फैसले को बरकरार रखा जाना चाहिए।
⏩ शासन स्तर पर बीएड को शामिल करने का निर्णय लिया गया। चूँकि प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों के लिए योग्यता एक नीतिगत निर्णय है, हमें कहना होगा कि यह निर्णय सही नहीं है क्योंकि यह अधिनियम के उद्देश्य के विपरीत है। वास्तव में, यह अनुच्छेद 21ए के तहत संविधान में निहित मौलिक अधिकार की भावना और अक्षरशः के विरुद्ध है। यह अधिनियम के विशिष्ट आदेश के विरुद्ध है, जो बच्चों को मुफ्त, अनिवार्य और सार्थक प्राथमिक शिक्षा का आह्वान करता है।
🛑 प्राथमिक विद्यालय के लिए शिक्षकों की योग्यता के रूप में B.Ed. को शामिल करके केंद्र सरकार ने संविधान के प्रावधानों और कानूनों के खिलाफ काम किया है।
👉🏻 केंद्र सरकार द्वारा बीएड को शामिल करने का एकमात्र तर्क दिया गया है। एक योग्यता के रूप में यह एक 'उच्च योग्यता' है। यह हम पहले ही देख चुके हैं कि यह सही नहीं है। इन परिस्थितियों में, हमें यह कहने में कोई झिझक नहीं है कि अधिसूचना सही तरीके से रद्द की गई है और राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ के फैसले को बरकरार रखा जाना चाहिए।
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उत्तर प्रदेश परीक्षा | शिक्षक भर्ती UPSSSC PET लेखपाल VDO | UPSC
30718_2021_2_1501_46056_Judgement_11-Aug-2023.pdf
🛑 परिणामस्वरूप, अपीलें खारिज की जाती हैं और राजस्थान उच्च न्यायालय के दिनांक 25.11.2021 के फैसले को बरकरार रखा जाता है। दिनांक 28.06.2018 की अधिसूचना को रद्द कर दिया गया है। उपरोक्त आदेश के आलोक में रिट याचिकाएं और सभी लंबित आवेदनों का निपटारा किया जाता है।
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उत्तर प्रदेश परीक्षा | शिक्षक भर्ती UPSSSC PET लेखपाल VDO | UPSC
30718_2021_2_1501_46056_Judgement_11-Aug-2023.pdf
✅ B.Ed. vs B.T.C. Court Case
पूरे डिसीजन में तीन मुख्य बातें की गई है व इनको RTE 2009 की कसौटी पर परखा गया है-
1️⃣ क्या B.Ed. हायर क्वालिफिकेशन है ?
2️⃣ गजट नोटिस लाने का कारण क्या था ?
3️⃣ 2018 का गजट नोटिफिकेशन किस तरह से लाया था ?
1. सुप्रीम कोर्ट के अनुसार B.Ed. प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए उचित अर्हता नहीं है जिसकी वजह से प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता नीचे जा सकती है और RTE 2009 के एक मुख्य पहलू का उल्लंघन होगा जो है- शिक्षा की गुणवत्ता
2. क्या B.Ed. हायर क्वालिफिकेशन है ?
👉🏻 इस पर भी सुप्रीम कोर्ट का कहना यह है कि अगर B.Ed. हायर क्वालिफिकेशन होता तो 6 महीने का ब्रिज कोर्स क्यों करवाया जाता है ? इसका मतलब NCTE भी जानता है कि B.Ed उचित योग्यता नही है और पेडागॉजी के विभिन्न पहलुओं से अछूता है।
3. एक जगह यह भी कहा गया है कि इस नोटिस का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता की आड़ में B.Ed. डिग्री बेरोजगारों को नौकरी देना प्रतीत होता है जो RTE ACT का उल्लंघन करता है क्योंकि गुणवत्ता सबसे जरुरी है।
4. सबसे मुख्य पहलू है कि यह गजट लाया कैसे गया था?
👉🏻 इस पर यह कहा गया है कि केंद्रीय विद्यालय संगठन के कमिश्नर के द्वारा मंत्रालय में यह बात रखी गई कि हमारे पास D.El.Ed. प्रशिक्षु नहीं होते जिसकी वजह से प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों की कमी रहती है इसीलिए कृपया हमें B.Ed. डिग्री धारकों को प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए एलिजिबल करने का मौका दीजिए जिस पर मंत्रालय ने एक तरह से NCTE को आदेश देकर B.Ed. को संपूर्ण देश में एलिजिबल करने के लिए नोटिफिकेशन निकालने हेतु बाध्य किया।
6. RTE 2009 के अनुसार NCTE योग्यता तय तो कर सकता है लेकिन पूरा सर्वे कर के, ना कि सरकार के कहने पर। तो यह policy decision नही अपितु academic decision था जो NCTE को खुद लेना चाहिए था।
7. ये निर्णय बिना किसी expertise के लिया गया है, इस वजह से इस गजट को इस नोटिफिकेशन को खारिज किया जाता है।
~ सेवा समाप्त ~
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पूरे डिसीजन में तीन मुख्य बातें की गई है व इनको RTE 2009 की कसौटी पर परखा गया है-
1️⃣ क्या B.Ed. हायर क्वालिफिकेशन है ?
2️⃣ गजट नोटिस लाने का कारण क्या था ?
3️⃣ 2018 का गजट नोटिफिकेशन किस तरह से लाया था ?
1. सुप्रीम कोर्ट के अनुसार B.Ed. प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए उचित अर्हता नहीं है जिसकी वजह से प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता नीचे जा सकती है और RTE 2009 के एक मुख्य पहलू का उल्लंघन होगा जो है- शिक्षा की गुणवत्ता
2. क्या B.Ed. हायर क्वालिफिकेशन है ?
👉🏻 इस पर भी सुप्रीम कोर्ट का कहना यह है कि अगर B.Ed. हायर क्वालिफिकेशन होता तो 6 महीने का ब्रिज कोर्स क्यों करवाया जाता है ? इसका मतलब NCTE भी जानता है कि B.Ed उचित योग्यता नही है और पेडागॉजी के विभिन्न पहलुओं से अछूता है।
3. एक जगह यह भी कहा गया है कि इस नोटिस का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता की आड़ में B.Ed. डिग्री बेरोजगारों को नौकरी देना प्रतीत होता है जो RTE ACT का उल्लंघन करता है क्योंकि गुणवत्ता सबसे जरुरी है।
4. सबसे मुख्य पहलू है कि यह गजट लाया कैसे गया था?
👉🏻 इस पर यह कहा गया है कि केंद्रीय विद्यालय संगठन के कमिश्नर के द्वारा मंत्रालय में यह बात रखी गई कि हमारे पास D.El.Ed. प्रशिक्षु नहीं होते जिसकी वजह से प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों की कमी रहती है इसीलिए कृपया हमें B.Ed. डिग्री धारकों को प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए एलिजिबल करने का मौका दीजिए जिस पर मंत्रालय ने एक तरह से NCTE को आदेश देकर B.Ed. को संपूर्ण देश में एलिजिबल करने के लिए नोटिफिकेशन निकालने हेतु बाध्य किया।
6. RTE 2009 के अनुसार NCTE योग्यता तय तो कर सकता है लेकिन पूरा सर्वे कर के, ना कि सरकार के कहने पर। तो यह policy decision नही अपितु academic decision था जो NCTE को खुद लेना चाहिए था।
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✅ भारतीय हॉकी टीम ने चेन्नई में खेली जा रही एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में जगह बना ली है।
⏩ टूर्नामेंट की इकलौती अजेय टीम भारत ने सेमीफाइनल में जापान को 5-0 से हराया।
⏩ मलेशिया से होगा खिताबी मुकाबला
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✅ B.Ed. vs B.T.C. Court Case पूरे डिसीजन में तीन मुख्य बातें की गई है व इनको RTE 2009 की कसौटी पर परखा गया है- 1️⃣ क्या B.Ed. हायर क्वालिफिकेशन है ? 2️⃣ गजट नोटिस लाने का कारण क्या था ? 3️⃣ 2018 का गजट नोटिफिकेशन किस तरह से लाया था ? 1. सुप्रीम कोर्ट के…
कुछ दोस्त इसको भेज रहे हैं और कह रहे हैं कि देखो सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उच्च शिक्षा नौकरी के लिए दोष या अवगुण नहीं है। अब यहाँ कुछ और कह रहे हैं।
इसपर हमारा मानना है कि हा सही बात है
उच्च शिक्षा नौकरी के लिए दोष या अवगुण बिलकुल नहीं है लेकिन ये डिप्लोमा और बीटेक के बीच की तुलना मे कहा है जिसमें उच्च शिक्षा या हायर क्वालिफिकेशन के संबंध मे कोई द्वंद है ही नहीं कि कौन हायर क्वालिफिकेशन है
जबकि B.Ed. vs B.T.C. मे कोर्ट ने अपने निर्णय का पैमाना हायर क्वालिफिकेशन को भी रखा है कि क्या B.Ed. हायर क्वालिफिकेशन है या नहीं ?
इस पर सुप्रीम कोर्ट का कहना यह है कि अगर B.Ed. हायर क्वालिफिकेशन होता तो 6 महीने का ब्रिज कोर्स क्यों करवाया जाता है ? इसका मतलब NCTE भी जानता है कि B.Ed उचित योग्यता नही है।
और वैसे भी आप जनते है कि B.Ed. और B.T.C. दोनों मे एडमिशन की न्यूनतम योग्यता स्नातक ही है जबकि उस केस मे ऐसा नहीं है।
इसपर हमारा मानना है कि हा सही बात है
उच्च शिक्षा नौकरी के लिए दोष या अवगुण बिलकुल नहीं है लेकिन ये डिप्लोमा और बीटेक के बीच की तुलना मे कहा है जिसमें उच्च शिक्षा या हायर क्वालिफिकेशन के संबंध मे कोई द्वंद है ही नहीं कि कौन हायर क्वालिफिकेशन है
जबकि B.Ed. vs B.T.C. मे कोर्ट ने अपने निर्णय का पैमाना हायर क्वालिफिकेशन को भी रखा है कि क्या B.Ed. हायर क्वालिफिकेशन है या नहीं ?
इस पर सुप्रीम कोर्ट का कहना यह है कि अगर B.Ed. हायर क्वालिफिकेशन होता तो 6 महीने का ब्रिज कोर्स क्यों करवाया जाता है ? इसका मतलब NCTE भी जानता है कि B.Ed उचित योग्यता नही है।
और वैसे भी आप जनते है कि B.Ed. और B.T.C. दोनों मे एडमिशन की न्यूनतम योग्यता स्नातक ही है जबकि उस केस मे ऐसा नहीं है।
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उत्तर प्रदेश परीक्षा | शिक्षक भर्ती UPSSSC PET लेखपाल VDO | UPSC
✅ B.Ed. vs B.T.C. Court Case पूरे डिसीजन में तीन मुख्य बातें की गई है व इनको RTE 2009 की कसौटी पर परखा गया है- 1️⃣ क्या B.Ed. हायर क्वालिफिकेशन है ? 2️⃣ गजट नोटिस लाने का कारण क्या था ? 3️⃣ 2018 का गजट नोटिफिकेशन किस तरह से लाया था ? 1. सुप्रीम कोर्ट के…
✅ B.Ed. vs B.T.C. अब आगे क्या ?
देखिये
अभी की अंतिम सच्चाई यही है कि B.Ed. को प्राइमरी में से बाहर कर दिया गया है 🤷♂
अब सरकार ऐसा कर देगी वैसा कर देगी ऑर्डिनेंस ला देगी या नया नियम बना देगी इस सब की पॉलिटिक्स के चक्कर में अपनी उर्जा ना व्यर्थ करें!
अगर आपने B.Ed. किया है तो फिलहाल आप अपने सब्जेक्ट पर कमांड बनाइए, TGT/PGT की काफी सारी पोस्ट आ रही हैं जिसमें PRT से कंपटीशन काफी कम होता है 👍
इसके इतर LT Grade और BEO आदि के भी तो पद जल्द ही आने हैं। B.T.C. वालों के अनुपात तो बराबर ही चल रहे हैं।
अगर आपने केवल और केवल PRT में जाने के लिए ही B.Ed की थी तो आप NCTE और सरकार के अगले कदम का इंतज़ार करिए कि वह क्या कदम उठाते हैं या क्या नियम बनाते हैं 🤷♂
🪝 लेकिन इस भ्रम में बिल्कुल भी ना रहे हैं कि आप सरकार पर दबाव बना सकते हैं 😢
अगर आपको लगता है कि आप दबाव बना सकते हैं तो इको गार्डन जाने के लिए तैयार रहिए 🔋
देखिये
अभी की अंतिम सच्चाई यही है कि B.Ed. को प्राइमरी में से बाहर कर दिया गया है 🤷♂
अब सरकार ऐसा कर देगी वैसा कर देगी ऑर्डिनेंस ला देगी या नया नियम बना देगी इस सब की पॉलिटिक्स के चक्कर में अपनी उर्जा ना व्यर्थ करें!
अगर आपने B.Ed. किया है तो फिलहाल आप अपने सब्जेक्ट पर कमांड बनाइए, TGT/PGT की काफी सारी पोस्ट आ रही हैं जिसमें PRT से कंपटीशन काफी कम होता है 👍
इसके इतर LT Grade और BEO आदि के भी तो पद जल्द ही आने हैं। B.T.C. वालों के अनुपात तो बराबर ही चल रहे हैं।
अगर आपने केवल और केवल PRT में जाने के लिए ही B.Ed की थी तो आप NCTE और सरकार के अगले कदम का इंतज़ार करिए कि वह क्या कदम उठाते हैं या क्या नियम बनाते हैं 🤷♂
🪝 लेकिन इस भ्रम में बिल्कुल भी ना रहे हैं कि आप सरकार पर दबाव बना सकते हैं 😢
अगर आपको लगता है कि आप दबाव बना सकते हैं तो इको गार्डन जाने के लिए तैयार रहिए 🔋
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✅ चेन्नई की अदालत ने ऐक्ट्रेस व पूर्व सांसद जया प्रदा को 6-माह की जेल की सज़ा सुनाई है और उन पर ₹5,000 का जुर्माना लगाया है।
⏩ बकौल रिपोर्ट्स, उनके स्वामित्व वाले एक थिएटर को उनके 2 बिज़नेस पार्टनर्स चलाते थे जिसे नुकसान के चलते बंद किया गया था।
⏩ ईएसआई का भुगतान न मिलने पर थिएटर कर्मचारियों ने केस किया था।
⏩ बकौल रिपोर्ट्स, उनके स्वामित्व वाले एक थिएटर को उनके 2 बिज़नेस पार्टनर्स चलाते थे जिसे नुकसान के चलते बंद किया गया था।
⏩ ईएसआई का भुगतान न मिलने पर थिएटर कर्मचारियों ने केस किया था।
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✅ संसद में तीन नए विधेयक हुए पेश, आईपीसी, सीआरपीसी और साक्ष्य अधिनियम में व्यापक बदलाव
⚖️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 (IPC) को अब भारतीय न्याय संहिता द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा।
• Old: 511 sections
• New: 356 sections
⚖️ दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता लेगी
• Old: 484 sections
• New: 533 sections
⚖️ साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) को भारतीय साक्ष्य विधेयक, 2023 से बदल दिया गया।
• Old: 167 sections
• New: 170 sections
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⚖️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 (IPC) को अब भारतीय न्याय संहिता द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा।
• Old: 511 sections
• New: 356 sections
⚖️ दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता लेगी
• Old: 484 sections
• New: 533 sections
⚖️ साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) को भारतीय साक्ष्य विधेयक, 2023 से बदल दिया गया।
• Old: 167 sections
• New: 170 sections
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उत्तर प्रदेश परीक्षा | शिक्षक भर्ती UPSSSC PET लेखपाल VDO | UPSC
✅ संसद में तीन नए विधेयक हुए पेश, आईपीसी, सीआरपीसी और साक्ष्य अधिनियम में व्यापक बदलाव ⚖️ भारतीय दण्ड संहिता 1860 (IPC) को अब भारतीय न्याय संहिता द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा। • Old: 511 sections • New: 356 sections ⚖️ दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की जगह…
📝 कुछ मुख्य बातें एवं बदलाव
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