वो आज भी हमसे बात करती है
पर वैसे बात नहीं करती
कुदरत आज भी रात करती है
पर वैसी रात नहीं करती
मैं रेज़ा बदला - (II)
वो रेजा रेजा बदल गये
मैने बारिश बोला
वो बूंद बन कर फ़िसल गए
वो कोई नदी, कोई समुंदर के होने निकल गए
और हम बादल बन कर देखते रह गए
वो औरो की प्यास बुझाते रह गए
और हम एक बूंद के लिए तरस गये
सही कहा है किसी ने
कुदरत अब वैसी रात नहीं करती, वैसी बरसात नहीं करती
किस्मत एहसान नहीं करती
वो जो करती है बहुत सोच समझ कर करती है
क्या पता शायद इसलिए वो हमसे वैसे बात नहीं करती
CC: @AayushDx
पर वैसे बात नहीं करती
कुदरत आज भी रात करती है
पर वैसी रात नहीं करती
मैं रेज़ा बदला - (II)
वो रेजा रेजा बदल गये
मैने बारिश बोला
वो बूंद बन कर फ़िसल गए
वो कोई नदी, कोई समुंदर के होने निकल गए
और हम बादल बन कर देखते रह गए
वो औरो की प्यास बुझाते रह गए
और हम एक बूंद के लिए तरस गये
सही कहा है किसी ने
कुदरत अब वैसी रात नहीं करती, वैसी बरसात नहीं करती
किस्मत एहसान नहीं करती
वो जो करती है बहुत सोच समझ कर करती है
क्या पता शायद इसलिए वो हमसे वैसे बात नहीं करती
CC: @AayushDx
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