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कल्याणदायक गणपति मंत्र
।। श्रीं ह्रीं गं गणपतये गं ह्रीं श्रीं नमः ।।
।। श्रीं ह्रीं गं गणपतये गं ह्रीं श्रीं नमः ।।
लक्ष्मी कमला मंत्र
यह मंत्र लक्ष्मी का प्रिय एवं श्रेष्ठ मंत्र कहा गया है तथा इस मंत्र के जप या प्रयोग से विशेष आर्थिक अनुकूलता, सम्पन्नता, ऐश्वर्य और व्यापारिक उन्नति सम्भव है।
इस मंत्र का जप सम्पन्न करने के लिए आयु, जाति या वर्ग का कोई बन्धन नहीं है, कोई भी पुरुष या स्त्री इस मंत्र का जप सकता है तथा इस साधना को पूर्ण कर सकता है।
इसके लिए यह आवश्यक है, कि पीले रंग का आसन बिछा कर पूर्व या उत्तर की तरफ मुंह करके साधक को स्वयं भी पीला वस्त्र धारण कर बैठना चाहिए और।
साधक को अपने सामने अगरबत्ती एवं घी का दीपक भी लगा लेना चाहिए।
सामने 'गज लक्ष्मी' का प्राण प्रतिष्ठितत चित्र स्थापित करें। इस चित्र में लक्ष्मी बैठी हुई होती हैं तथा उनके दोनों तरफ हाथी उन पर जल-वर्षा या घट-वर्षा करते हैं, इस चित्र को कांच के फ्रेम में मढ़वा कर सामने रख देना चाहिए।
इसके बाद नीचे लिखे मंत्र की 'कमलगट्टे की माला' से एक माला या ग्यारह मालाएं फेरनी चाहिए, कुल मिला कर इस अनुष्ठान में सवा लाख मंत्र जप होता है। इसलिए साधक को चाहिए, कि वह कुल मिला कर 1250 मालाएं फेरे, ऐसा करने पर सवा लाख मंत्र जप पूरा हो । जाता है।
इस मंत्र का जप या तो प्रातःकाल सूर्योदय से पहले करना चाहिए। अथवा रात्रि को किया जा सकता है, पर इस बात का ध्यान रखें, कि यह. सवा लाख मंत्र जप चालीस दिन में पूरा हो जाना चाहिए। इस प्रकार का चालीस दिन का अनुष्ठान करने के लिए नित्य जितनी भी सम्भव हो, मालाएं फेरी जा सकती हैं।
चालीस दिन बाद माला को नदी में प्रवाहित कर दे और चित्र को पूजा स्थान में स्थापित कर दे, परन्तु यदि अनुष्ठान के रूप में इस मंत्र को नहीं जपना है, तो साधक को नित्य अपनी पूजा में एक माला या ग्यारह मालाएं फेरनी चाहिए।
अनुष्ठान के रूप में इस प्रयोग को सम्पन्न कर जब साधक मंत्र जप सवा लाख पूरा कर ले, तब इसी मंत्र से दूध के बने पेड़ों की 108 आहुतियां देनी चाहिए और प्रत्येक आहुति देते समय इसी मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।
मंत्र
।।ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः ।।
यह मंत्र अत्यन्त महत्वपूर्ण है, साधकों ने इससे विशेष लाभ उठाया है।
मंत्र जप में भूल कर भी रुद्राक्ष माला का प्रयोग नहीं करना चाहिए, लक्ष्मी से सम्बन्धित मंत्र जप में कमलगट्टे की माला सबसे अधिक उपयुक्त एवं लाभकारी मानी गई है, परन्तु यह माला भी मंत्रसिद्ध प्राणप्रतिष्ठा युक्त हो।
यह मंत्र लक्ष्मी का प्रिय एवं श्रेष्ठ मंत्र कहा गया है तथा इस मंत्र के जप या प्रयोग से विशेष आर्थिक अनुकूलता, सम्पन्नता, ऐश्वर्य और व्यापारिक उन्नति सम्भव है।
इस मंत्र का जप सम्पन्न करने के लिए आयु, जाति या वर्ग का कोई बन्धन नहीं है, कोई भी पुरुष या स्त्री इस मंत्र का जप सकता है तथा इस साधना को पूर्ण कर सकता है।
इसके लिए यह आवश्यक है, कि पीले रंग का आसन बिछा कर पूर्व या उत्तर की तरफ मुंह करके साधक को स्वयं भी पीला वस्त्र धारण कर बैठना चाहिए और।
साधक को अपने सामने अगरबत्ती एवं घी का दीपक भी लगा लेना चाहिए।
सामने 'गज लक्ष्मी' का प्राण प्रतिष्ठितत चित्र स्थापित करें। इस चित्र में लक्ष्मी बैठी हुई होती हैं तथा उनके दोनों तरफ हाथी उन पर जल-वर्षा या घट-वर्षा करते हैं, इस चित्र को कांच के फ्रेम में मढ़वा कर सामने रख देना चाहिए।
इसके बाद नीचे लिखे मंत्र की 'कमलगट्टे की माला' से एक माला या ग्यारह मालाएं फेरनी चाहिए, कुल मिला कर इस अनुष्ठान में सवा लाख मंत्र जप होता है। इसलिए साधक को चाहिए, कि वह कुल मिला कर 1250 मालाएं फेरे, ऐसा करने पर सवा लाख मंत्र जप पूरा हो । जाता है।
इस मंत्र का जप या तो प्रातःकाल सूर्योदय से पहले करना चाहिए। अथवा रात्रि को किया जा सकता है, पर इस बात का ध्यान रखें, कि यह. सवा लाख मंत्र जप चालीस दिन में पूरा हो जाना चाहिए। इस प्रकार का चालीस दिन का अनुष्ठान करने के लिए नित्य जितनी भी सम्भव हो, मालाएं फेरी जा सकती हैं।
चालीस दिन बाद माला को नदी में प्रवाहित कर दे और चित्र को पूजा स्थान में स्थापित कर दे, परन्तु यदि अनुष्ठान के रूप में इस मंत्र को नहीं जपना है, तो साधक को नित्य अपनी पूजा में एक माला या ग्यारह मालाएं फेरनी चाहिए।
अनुष्ठान के रूप में इस प्रयोग को सम्पन्न कर जब साधक मंत्र जप सवा लाख पूरा कर ले, तब इसी मंत्र से दूध के बने पेड़ों की 108 आहुतियां देनी चाहिए और प्रत्येक आहुति देते समय इसी मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।
मंत्र
।।ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः ।।
यह मंत्र अत्यन्त महत्वपूर्ण है, साधकों ने इससे विशेष लाभ उठाया है।
मंत्र जप में भूल कर भी रुद्राक्ष माला का प्रयोग नहीं करना चाहिए, लक्ष्मी से सम्बन्धित मंत्र जप में कमलगट्टे की माला सबसे अधिक उपयुक्त एवं लाभकारी मानी गई है, परन्तु यह माला भी मंत्रसिद्ध प्राणप्रतिष्ठा युक्त हो।