Forwarded from UPPSC SARTHI
You’ve worked hard — now it’s your time to shine!
All the best for your UPPSC Prelims !✍️
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💫Your best teacher is your last mistake💫
Learn from every mistake step by step 🪜
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बधाई हो -
देश को गौरवान्वित करने के लिए भारतीय महिला टीम का हार्दिक धन्यवाद !
भारतीय महिलाओं ने ODI World Cup Final में शानदार प्रदर्शन करते हुए 52 रनों से ऐतिहासिक जीत हासिल कर ली हैं I
जय हिंद 🇮🇳 जय भारत
देश को गौरवान्वित करने के लिए भारतीय महिला टीम का हार्दिक धन्यवाद !
भारतीय महिलाओं ने ODI World Cup Final में शानदार प्रदर्शन करते हुए 52 रनों से ऐतिहासिक जीत हासिल कर ली हैं I
जय हिंद 🇮🇳 जय भारत
WR-CSME-2025-Engl-NameList-111125.pdf
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सोनाखान विद्रोह
1857 के भारतीय विद्रोह से संबंधित
नेतृत्व सोनाखान के ज़मींदार वीर नारायण सिंह ने
यह विद्रोह ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा सिंह को एक व्यापारी के अनाज भंडार को लूटने और भीषण अकाल के दौरान भूखे ग्रामीणों में बाँटने के आरोप में कैद किए जाने का परिणाम था, और यह छत्तीसगढ़ के व्यापक स्वतंत्रता संग्राम का एक प्रमुख हिस्सा बन गया।
प्रारंभिक घटना: 1856 में अकाल के दौरान वीर नारायण सिंह ने एक व्यापारी के अनाज भंडार पर छापा मारा और गरीबों में भोजन वितरित किया।
गिरफ्तारी: इस कृत्य के लिए उन्हें अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया और रायपुर में कैद कर दिया।
पलायन और विद्रोह: कैद के दौरान ही 1857 का विद्रोह शुरू हो गया। सिंह भारतीय सैनिकों की मदद से भाग निकले और सोनाखान लौट आए।
सशस्त्र प्रतिरोध: वापस लौटने पर उन्होंने लगभग 500 लोगों की एक सेना बनाई और अपने लोगों की रक्षा के लिए अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र प्रतिरोध शुरू किया।
दमन: कैप्टन स्मिथ के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना को विद्रोह को कुचलने के लिए भेजा गया। अंततः 10 दिसंबर, 1857 को सिंह को पकड़ लिया गया और उन्हें फाँसी दे दी गई। वे स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के पहले शहीद हुए।
1857 के भारतीय विद्रोह से संबंधित
नेतृत्व सोनाखान के ज़मींदार वीर नारायण सिंह ने
यह विद्रोह ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा सिंह को एक व्यापारी के अनाज भंडार को लूटने और भीषण अकाल के दौरान भूखे ग्रामीणों में बाँटने के आरोप में कैद किए जाने का परिणाम था, और यह छत्तीसगढ़ के व्यापक स्वतंत्रता संग्राम का एक प्रमुख हिस्सा बन गया।
प्रारंभिक घटना: 1856 में अकाल के दौरान वीर नारायण सिंह ने एक व्यापारी के अनाज भंडार पर छापा मारा और गरीबों में भोजन वितरित किया।
गिरफ्तारी: इस कृत्य के लिए उन्हें अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया और रायपुर में कैद कर दिया।
पलायन और विद्रोह: कैद के दौरान ही 1857 का विद्रोह शुरू हो गया। सिंह भारतीय सैनिकों की मदद से भाग निकले और सोनाखान लौट आए।
सशस्त्र प्रतिरोध: वापस लौटने पर उन्होंने लगभग 500 लोगों की एक सेना बनाई और अपने लोगों की रक्षा के लिए अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र प्रतिरोध शुरू किया।
दमन: कैप्टन स्मिथ के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना को विद्रोह को कुचलने के लिए भेजा गया। अंततः 10 दिसंबर, 1857 को सिंह को पकड़ लिया गया और उन्हें फाँसी दे दी गई। वे स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के पहले शहीद हुए।
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नमस्कार दोस्तों 🙏🏻
Digital Awareness / डिजिटल जागरूकता के संदर्भ में भारत सरकार के आधिकारिक App TRAI DND का उपयोग करें और इसका प्रसार हर नागरिक तक करवाएं।
# हम हैं योद्धा इस सदी के
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