ESSAY-QP-CSM-25-010925.pdf
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Official papers mains 2025
मजबूत कारण ही कठिन रास्ते को आसान बना देते हैं। A strong “why” can overcome any “how.”
सारा खेल जरूरत का है 😊
अभी तक कई लोग 2/4 क्लास कर चुके होंगे , कोई 100/200 प्रश्न कर चुके होंगे तो कोई रिविजन कर चुके होंगे अपने विषयों का।
कुछ कर रहे होंगे वो पहले वालों से थोड़ा पीछे हैं। कुछ ने शुरू किया होगा , कुछ सोच रहे होंगे , फिर कुछ शाम को करने का तो कुछ कल से कुछ अगले अगले.....xyz से शुरू करने का सोच रहे होंगे।
कुछ को लगता है कि 1 सितंबर से या सोमवार से या या अमुक दिन समय से करेंगे।
दरअसल जो जहां हैं उसमें आनंद खोज रहा है और अपने कंफर्ट ज़ोन में रहकर सपने देख रहा है।
हकीक़त यह है कि इनमें अधिकांश वही आगे बढ़ते हैं जो रास्ते पर चल चुके हैं और बहुत कम वे जो दृढ़ इच्छाशक्ति वाले होंगे।
शुभकामनाएं।
अभी तक कई लोग 2/4 क्लास कर चुके होंगे , कोई 100/200 प्रश्न कर चुके होंगे तो कोई रिविजन कर चुके होंगे अपने विषयों का।
कुछ कर रहे होंगे वो पहले वालों से थोड़ा पीछे हैं। कुछ ने शुरू किया होगा , कुछ सोच रहे होंगे , फिर कुछ शाम को करने का तो कुछ कल से कुछ अगले अगले.....xyz से शुरू करने का सोच रहे होंगे।
कुछ को लगता है कि 1 सितंबर से या सोमवार से या या अमुक दिन समय से करेंगे।
दरअसल जो जहां हैं उसमें आनंद खोज रहा है और अपने कंफर्ट ज़ोन में रहकर सपने देख रहा है।
हकीक़त यह है कि इनमें अधिकांश वही आगे बढ़ते हैं जो रास्ते पर चल चुके हैं और बहुत कम वे जो दृढ़ इच्छाशक्ति वाले होंगे।
शुभकामनाएं।
आज रात, चंद्रमा एक ज्वलंत लाल तमाशे में बदल जाएगा।
एक दुर्लभ पूर्ण चंद्र ग्रहण (चंद्र ग्रहण) पूरे भारत और दुनिया के अधिकांश हिस्सों में दिखाई देगा। इस खगोलीय आश्चर्य को देखना न भूलें। ग्रहण रात 8.59 बजे (भारतीय समयानुसार) शुरू होगा और अधिकतम ग्रहण रात 11.42 बजे होगा।
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और अन्य स्थानों पर यह स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
एक दुर्लभ पूर्ण चंद्र ग्रहण (चंद्र ग्रहण) पूरे भारत और दुनिया के अधिकांश हिस्सों में दिखाई देगा। इस खगोलीय आश्चर्य को देखना न भूलें। ग्रहण रात 8.59 बजे (भारतीय समयानुसार) शुरू होगा और अधिकतम ग्रहण रात 11.42 बजे होगा।
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और अन्य स्थानों पर यह स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
Whatever you Learning, Reading, Listening , Writing, Speaking , Talking , Doing and a lot , "if there's No Perfect Why , Quit immediately" if Why is there! Look into Significance.
Topic for essay:
कक्षाओं में राष्ट्र विकास की नींव रखी जाती है।
Foundation of national development is found in classes.
© @cbpsrivastava
कक्षाओं में राष्ट्र विकास की नींव रखी जाती है।
Foundation of national development is found in classes.
© @cbpsrivastava
Forwarded from UPSC हिंदी माध्यम 🦚
स्त्री हमेशा सीता ही क्यों होती है,
उसे बुद्ध भी तो होना चाहिए....
जवाब - क्यूँकि अगर वो बुद्ध की तरह अपने सोते पति और बच्चे को छोड़कर जाएगी तो ये समाज़ पहले ही घोषित कर देगा कि प्रेमी के साथ भागी होगी,
कभी समाज़ ये जानना नहीं चाहेगा कि वो खुद की तलाश में निकली होगी..!!
ये समाज़ बड़ा भेदभाव भरा है स्त्री के लिए,
बुद्ध जंगल से लौटते हैं तो महात्मा की उपाधि से नवाजे जाते हैं,
और सीता लौटती है तो कलंकित हो जाती है.. और उसे खुद को सही साबित करने के लिए अग्नि परीक्षा देनी पड़ती है....
उसे बुद्ध भी तो होना चाहिए....
जवाब - क्यूँकि अगर वो बुद्ध की तरह अपने सोते पति और बच्चे को छोड़कर जाएगी तो ये समाज़ पहले ही घोषित कर देगा कि प्रेमी के साथ भागी होगी,
कभी समाज़ ये जानना नहीं चाहेगा कि वो खुद की तलाश में निकली होगी..!!
ये समाज़ बड़ा भेदभाव भरा है स्त्री के लिए,
बुद्ध जंगल से लौटते हैं तो महात्मा की उपाधि से नवाजे जाते हैं,
और सीता लौटती है तो कलंकित हो जाती है.. और उसे खुद को सही साबित करने के लिए अग्नि परीक्षा देनी पड़ती है....
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डेंगू से कैसे बचें?
🅰️ ई गवर्नेंस , कल्याणकारी योजनाओं एवं प्रणालियों तक समावेशी डिजिटल पहुंच आम व्यक्ति के जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का एक हिस्सा है - सुप्रीम कोर्ट
कारण :
- तकनीति एवं संरचनात्मक भेदभाव
( दक्षता का अभाव)
- जानकारी/ जागरूकता का अभाव
- भाषा की बाध्यता
- अक्षमता के कारण पहुंच नहीं(≈50/140 cr लोग इंटरनेट पहुंच से वंचित)
- अनदेखी
..........etc
प्रभाव:
(सामाजिक,आर्थिक, न्याय एवं अधिकार से संबंधित मुद्दे)
- पहुंच में मुश्किलों से वंचना वृद्धि
- डिजिटलीकरण सीमित>संभावित लाभों की सीमित प्राप्ति
- डिजिटल खाई का विस्तार
- असमानता का विस्तार: अस्थिरता की संभावना
...........etc
मर्म: यह दायित्व सरकार का है कि वह समाज में हास्य के व्यक्ति ,वंचित ,कमजोर ,दिव्यांग वर्गों को एक समावेशी डिजिटल पारिस्थितिक तंत्र प्रदान करें जिससे कोई भी नागरिक डिजिटली पिछड़ न जाए।
समाधान: खुद से सोच लेना!
@Devendra4india
कारण :
- तकनीति एवं संरचनात्मक भेदभाव
( दक्षता का अभाव)
- जानकारी/ जागरूकता का अभाव
- भाषा की बाध्यता
- अक्षमता के कारण पहुंच नहीं(≈50/140 cr लोग इंटरनेट पहुंच से वंचित)
- अनदेखी
..........etc
प्रभाव:
(सामाजिक,आर्थिक, न्याय एवं अधिकार से संबंधित मुद्दे)
- पहुंच में मुश्किलों से वंचना वृद्धि
- डिजिटलीकरण सीमित>संभावित लाभों की सीमित प्राप्ति
- डिजिटल खाई का विस्तार
- असमानता का विस्तार: अस्थिरता की संभावना
...........etc
मर्म: यह दायित्व सरकार का है कि वह समाज में हास्य के व्यक्ति ,वंचित ,कमजोर ,दिव्यांग वर्गों को एक समावेशी डिजिटल पारिस्थितिक तंत्र प्रदान करें जिससे कोई भी नागरिक डिजिटली पिछड़ न जाए।
समाधान: खुद से सोच लेना!
@Devendra4india