Devendra Choudhary IAS
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Welcome, For you guy's here uploading soon all videos Audio or class regarding UPSC examination. Make your own strategy and be succeed.
जूनून है तो सब है -🚨

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"बड़ी महत्वाकांक्षा महान चरित्र का भावावेश (जुनून) है। जो इससे संपन्न है वे या तो बहुत अच्छे अथवा बहुत बुरे कार्य कर सकते हैं। ये सब कुछ उन सिद्धन्तों पर आधारित है जिनसे वे निर्देशित होते हैं।”

– Napoleon Bonaparte.
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To reach to your Goal, You have to fight every single day.💪💪
अगर सही दिशा और सही समय का ज्ञान ना हो,
तो उगता सूरज भी डूबता नजर आता है
📍📍 चलो मान लेते हैं की राहों में अंधेरा घना है पर फिर भी मंजिलों की ओर चलना कौनसा मना है..!! 📍📍
यदि आप उड़ना चाहते हैं, तो वह सब कुछ छोड़ दें जो आपको नीचे खींचता है।

~ बुद्ध
⏲️Your Time, Your Choice🌍

150 × 4hrs  = 600hrs
150 × 6hrs  = 900hrs
150 × 8hrs  = 1200hrs
150 × 10hrs = 1500hrs
150 × 12hrs = 1800hrs
150 × 14hrs = 2100hrs
150 × 16hrs = 2400hrs
150 × 18hrs = 2700hrs
150 × 20hrs = 3000hrs
150 × 22hrs = 3300hrs
150 × 24hrs = 3600hrs
150 × 00hrs = 0000hrs

📍150 Days for UPSC CSE 2023📍
भरोसा खुद पर रखो तो ताकत बन जाती है 

और दूसरों पर रखो तो कमजोरी बन जाती है......... 📍



हमें अपने बाहर की दुनिया को जीतने या हासिल करने से पहले। हमें अपने अंतर्मन से जीतना होगा। खुद के भीतर की दुनिया से जीतने के लिए, आपको अपने अंदर के आत्मविश्वास को बढ़ाना होगा। क्योंकि जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करेंगे। तो आप पर इस पूरे संसार के 700 करोड़ लोग कैसे भरोसा करेंगें।

📍📍आत्मविश्वास की ऊंचाई📍📍
 हम सभी लोगों के पास एक कुदरती शक्ति है। लेकिन हम उस शक्ति को, तब महसूस करते हैं। जब हम अपने दिमाग से, चीजों को समझने और देखने का तरीका बदलते हैं। यही वह शक्ति है। जिससे हमारे मन में विश्वास आता है। जब हमारे मन में, किसी चीज के प्रति विश्वास बन जाता है। तब हमारे अंदर आत्मविश्वास उत्पन्न होने लगता है।

     एक बार एक आदमी ने, दो खूबसूरत पक्षी खरीदें। उसने अपने माली से कहा कि वह इन दोनों पक्षियों को प्रशिक्षित करें। थोड़े दिनों के बाद, माली ने देखा। कि उन दोनों पंछियों में एक ने उड़ना सीख लिया।  जबकि दूसरा पंछी उड़ नहीं पा रहा था। मतलब उसने कभी छोड़ने की कोशिश नहीं की।

    वह हमेशा डाली पर बैठा रहता था। माली उस पंछी को उड़ना सिखाने की बहुत कोशिश करता था। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। एक दिन जब मालिक ने, उन दोनों पंछियों को आसमान में उड़ते हुए देखा। तो वह बहुत आश्चर्य में पड़ गया। उसने माली से पूछा। तुमने ऐसा कैसे किया।

     तब उस माली ने कहा। मैंने इस पंछी को उड़ाने के लिए, कई प्रयास किए। लेकिन यह कभी उड़ने की कोशिश नहीं करता था। इसलिए मैंने उस डाली को ही काट दिया। जिसमें वह बैठा करता था। ठीक उसी प्रकार ज्यादातर इंसान, हमेशा अपने दुखों के साथ चिपके रहते हैं।

    वह कभी ये सोचते ही नहीं है। कि इन दुखों के बिना जिंदगी कैसे होती है। हर इंसान की जिंदगी में दुख आता है। तो नकारात्मक सोच उस पर हावी हो जाती है। उस समय उसको न अपने आप पर, न दूसरे लोगों पर, न ही ब्रह्मांड की शक्ति पर विश्वास रहता है।

     ऐसी परिस्थिति में, उसके पास दो ही रास्ते  बचते हैं। पहला – वह अपने मन की बात को मानकर, निराशा के समंदर में डूबा रहे। दूसरा – उस दुख को खत्म करने के लिए रास्ता खोजे। अच्छा सोचने से हमारा दिमाग, हर समस्या का समाधान खोज ही लेता है।

हमारा दिमाग वह शक्ति है। जो हर सच्चे झूठे सपने को, किसी न किसी तरीके से सच कर ही देता है। फिर जब आप अपने गोल के बारे में, पूरी तरह से सोच लेते हैं। मतलब उसके बारे में निश्चित हो जाते हैं। तब आपका दिमाग, उस सोचे हुए सपने को सच मान लेता है।

     जिस चीज को हमारा दिमाग पूरी तरह से accept कर लेता है। वह चीज निश्चित रूप से घटित होती है। अगर आप विश्वास करते हैं कि आप सफल होंगे। तो आप निश्चित रूप से सफल होंगे। लेकिन अगर आप विश्वास करते हैं कि आप सफल नहीं होंगे। तो यकीन मानिए। आपको असफलता ही हाथ लगेगी। यानी सारा खेल मन के विश्वास का है।

   अगर किसी जानवर को एक तालाब में डाल दो। तो वह तैरकर निकल जाएगा। जबकि अगर आप किसी ऐसे इंसान को तालाब में डाल दो। जो तैरना नहीं जानता है। तो वह डूब जाएगा। लेकिन ऐसा क्यों। तो ऐसा इसलिए, क्योंकि उस जानवर को यह विश्वास होता है कि वह तैरकर पार हो जाएगा। इसलिए वह पार भी हो जाता है।

     जबकि जिस इंसान को तैरना नहीं आता है। वह अपने मन में विश्वास भी नहीं कर पाता है कि वह सच में तैरकर नदी को पार कर सकता है। इसीलिए वह डूब जाता है। यानी कि यह इंसान ऐसे समय में भी नेगेटिव चीज को सोच रहा है। हर इंसान को कोई न कोई चीज नेगेटिव चीज बांध कर रखती है।

     मतलब कोई न कोई नेगेटिव चीज, इंसानों को अपनी तरफ आकर्षित करती रहती है। जिस दिन आपने उस डाली की तरह, अपने आप से निगेटिव चीज को दूर कर लेंगे। उस दिन से आपकी जिंदगी में बदलाव आना शुरू हो जाएंगे।
माइक्रोबायोम
औसत व्यक्ति में मुंह, त्वचा, पसीने और पेट और आंतों से बैक्टीरिया में बड़ी विविधता होती है। बैक्टीरिया हमारे स्वास्थ्य में एक चिकित्सा लाभ और एक चिकित्सा जोखिम दोनों के रूप में एक विशेष स्थान रखता है क्योंकि उनके माइक्रोएन्वायरमेंट और होस्ट के साथ उनकी बातचीत होती है।

© Human metabolome technologies America inc.
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आसमान में सिर उठाकर
घने बादलों को चीरकर
रोशनी का संकल्प लें
अभी तो सूरज उगा है
दृढ़ निश्चय के साथ चलकर
हर मुश्किल को पार कर
घोर अंधेरे को मिटाने
अभी तो सूरज उगा है।।

- प्रधानमंत्री
📂 Report on Trend and Progress of Banking in India

**** यूपीएससी परीक्षा हेतु अति महत्वपूर्ण डाटा स्रोत

**** भारतीय अर्थव्यवस्था पर आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट

© RBI
1 दिन ऐसा भी आएगा
जब आप के पास
इतना वक्त नहीं होगा कि
आप वह सब चीजें कर पाओ,
जो आप हमेशा से करना चाहते थे।
इसलिए आज ही शुरुआत करो, अभी से।
“यदि आप कुछ भी जोखिम नहीं लेते हैं , तो आप और भी अधिक जोखिम उठाते हैं । ”
“If you don’t risk anything, you risk even more.”
छोटा लक्ष्य एक अपराध है , अपने लक्ष्य को हमेशा बड़ा रखो ।
A small goal is a crime, always keep your goal big.
तजुर्बा बता रहा हूँ ऐ दोस्त दर्द , गम , डर जो भी है
बस तेरे अन्दर है ,
खुद के बनाए पिंजरे से निकल कर तो देख ,
तू भी एक सिकंदर है
शंकराचार्य के चार मठ/पीठ | Four Mathas Of Shankaracharya:
भारतीय सनातन परम्परा के विकास और हिन्दू धर्म के प्रचार के लिए आदि शंकराचार्य ने भारत के चारों कोनों में चार मठों की स्थापना की थी. इन्हें पीठ कहा जाता है. ये मठ गुरु शिष्य परम्परा के निर्वहन का प्रमुख केंद्र है. आदि शन्कराचार्य ने चारों मठों को अपने योग्यतम शिष्यों को मठाधीश बनाया. हर मठाधीश शंकराचार्य कहलाता है और अपने जीवनकाल में ही सबसे योग्य शिष्य को अपना उतराधिकारी बना देता है.


गोवर्धन मठ (Govardhan Math)
भारत के पूर्वी भाग में उडीसा राज्य के जगन्नाथ पुरी में स्थित है! गोवर्धन मठ के अंतर्गत दीक्षा प्राप्त करने वाले सन्यासियों के नाम के बाद अरण्य सम्प्रदाय का विशेषण लगाया जाता है. जिससे उन्हें उस सम्प्रदाय का सन्यासी माना जाता है।

इस मठ का महाकाव्य है प्रज्ञान ब्रह्मा और इस मठ के तहत ऋग्वेद को रखा गया है। इस मठ के पहले मठाधीश आदिगुरु शंकराचार्य के शिष्य पदम्पाद हुए।

शारदा मठ (Sharda Math)

शारदा कालिका मठ गुजरात के द्वारका धाम है. इसके तहत दीक्षा लेने वाले सन्यासियों के नाम के बाद तीर्थ और आश्रम सम्प्रदाय विशेषण लगाया जाता है। जिससे उन्हें उस सम्प्रदाय का सन्यासी माना जाता है।

इस मठ का महाकाव्य है तत्वमसि और इसमे सामवेद को रखा गया है। शारदा मठ के पहले मठाधीश हस्तामलक (पृथ्वीधर) थे। हस्तामलक आदि शंकराचार्य के प्रमुख चार शिष्यों में से एक थे।

श्रृंगेरी मठ (Sringeri Math)

श्रृंगेरी मठ भारत के दक्षिण में रामेश्वरम में स्थित है। श्रृंगेरी मठ के अंतर्गत दीक्षा प्राप्त करने वाले सन्यासियों के नाम के पश्चात सरस्वती, भारती तथा पुरी सम्प्रदाय का विशेषण लगाया जाता है।जिससे उन्हें उक्त सम्प्रदाय का सन्यासी माना जाता है। इस मठ का महाकाव्य अहं ब्रह्मास्मि है तथा मठ के अंतर्गत युजुर्वेद को रखा गया है। श्रृंगेरी मठ के प्रथम मठाधीश आचार्य सुरेश्वर जी थे, जिनका दीक्षा पूर्व नाम मंडन मिश्र था।

🛑🛑📍📍ज्योतिर्मठ (Jyotirmartha)/जोशीमठ (Joshimatha) 🛑🛑
ज्योतिर्मठ उतराखंड 🗺️ के बद्रिकाश्रम में है, ज्योतिर्मठ के तहत दीक्षा लेने वाले सन्यासियों के नाम के बाद गिरी , पर्वत और सागर सम्प्रदाय का विशेषण लगाया जाता है, जिससे उन्हें उस सम्प्रदाय का सन्यासी माना जाता है।
इसका महाकाव्य अयमात्मा ब्रह्मा है। मठ के अंतर्गत अथर्ववेद को रखा गया है। इसके पहले मठाधीश आचार्य तोटक थे। ( Why in News :- 👇👇 Article)
प्रसंग , जोशीमठ, उत्तराखंड का प्राचीन शहर चिंता का विषय बन गया है। हालांकि जोशीमठ शहर में पिछले दो दशकों से दरारें उभर रही हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों में चीजें बढ़ गई हैं।

स्थान उत्तराखंड के चमोली जिले में 6,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब के मार्ग पर स्थित शहर उच्च जोखिम वाले भूकंपीय 'जोन-वी' में आता है।
यह मेन सेंट्रल थ्रस्ट (MCT) लाइन के शीर्ष पर स्थित है ।
पूरे उत्तराखंड राज्य का भूगोल नाजुक है। और, जोशीमठ विशेष रूप से पुराने भूमि निक्षेपों पर स्थित है।
इसलिए जोशीमठ में भूस्खलन का खतरा हमेशा बना रहता है। इसके चलते हर साल जोशीमठ के लोगों के घरों और खेतों में दरारें पड़ जाती हैं।
ज्योतिर्मठ हिंदू मठ, हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण स्थलों में से एक, यहां है।
इसके पास चीन के साथ सीमा के निकटतम सैन्य स्टेशनों में से एक है।


मेन सेंट्रल थ्रस्ट (एमसीटी) लाइन
MCT हिमालय में एक दरार या भूगर्भीय दोष है।
इसका निर्माण इंडो-ऑस्ट्रेलियाई प्लेट और यूरेशियन प्लेट की टक्कर से हुआ है।
लगातार विवर्तनिक गतिविधियों के कारण एमसीटी के नीचे का क्षेत्र विशेष रूप से बहुत नाजुक है।
और, इसलिए, एमसीटी क्षेत्रों में भूकंपीय गतिविधियां बहुत आम हैं।
एमसीटी उत्तर-पश्चिम-दक्षिणपूर्व दिशा में हिमालय में 2200 किमी से अधिक तक फैली हुई है। जोशीमठ एमसीटी के ऊपर स्थित है।

कौन ज़िम्मेदार? जोशीमठ में संकट प्राकृतिक और मानव निर्मित दोनों है।

भू धंसाव - उपसतह सामग्री के हटाने या विस्थापन के कारण पृथ्वी की सतह का धीरे-धीरे जमना या अचानक धंसना - जोशीमठ के लगभग सभी वार्डों में संरचनात्मक दोषों और क्षति को प्रेरित किया है।

टनलिंग और स्लोप कटिंग
तपोवन-विष्णुगढ़ जलविद्युत परियोजना और हेलंग बाईपास के निर्माण को धंसने के मुख्य कारणों में से एक माना जाता है।
1976 की मिश्रा समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि "जोशीमठ एक प्राचीन भूस्खलन पर स्थित है" और भारी निर्माण कार्य को रोक दिया जाना चाहिए।

Way Forward/सुझावात्मक उपाय

📍साइट की स्थिरता की जांच के बाद ही क्षेत्र में आगे का निर्माण किया जाना चाहिए, और ढलानों पर उत्खनन पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
📍खुदाई या विस्फोट से कोई बोल्डर नहीं हटाया जाना चाहिए और भूस्खलन क्षेत्र में कोई पेड़ नहीं काटा जाना चाहिए।
📍 अपने तार्किक व निर्विवाद्य सुझाव शामिल करें.......।