Forwarded from Utkarsh Classes
जीवन में दिन है ही कितने
आज धूप तीक्ष्ण बहुत है,
काम बहुत सा कल करेंगे।
कहकर ऐसा बहुतेरे लोग,
खुद से बड़ा ही छल करेंगे।
आज दिन जरा शुभ नहीं है,
बरकत कोई होनी नहीं है।
ऐसे कुछ मुहलत वालों में,
हरकत कोई होनी नहीं है।
नींद बहुत आ रही है,
फिर खाट पड़े वो सो गए।
सोचा कभी दूसरे रोज,
एक साल बड़े वो हो गए।
अभी बहुत दिन पड़े है,
और काम की बात रह गई।
होगा ऐसे में सवेरा मगर,
दिन में काली रात रह गई।
आलस्य बहुत आ रहा है,
सुस्ताना अब मेरी दवाई है।
जिंदगी होगी बहुत अंधेरे में,
जब ख्वाब ही हवा हवाई है।
उठो! काम पर लग जाओ,
जीवन में दिन है ही कितने।
फुर्सत में अगर ये बीते तो,
फुर्सत के दिन है ही कितने।
✒️डॉ अर्जुन सिंह साँखला
आज धूप तीक्ष्ण बहुत है,
काम बहुत सा कल करेंगे।
कहकर ऐसा बहुतेरे लोग,
खुद से बड़ा ही छल करेंगे।
आज दिन जरा शुभ नहीं है,
बरकत कोई होनी नहीं है।
ऐसे कुछ मुहलत वालों में,
हरकत कोई होनी नहीं है।
नींद बहुत आ रही है,
फिर खाट पड़े वो सो गए।
सोचा कभी दूसरे रोज,
एक साल बड़े वो हो गए।
अभी बहुत दिन पड़े है,
और काम की बात रह गई।
होगा ऐसे में सवेरा मगर,
दिन में काली रात रह गई।
आलस्य बहुत आ रहा है,
सुस्ताना अब मेरी दवाई है।
जिंदगी होगी बहुत अंधेरे में,
जब ख्वाब ही हवा हवाई है।
उठो! काम पर लग जाओ,
जीवन में दिन है ही कितने।
फुर्सत में अगर ये बीते तो,
फुर्सत के दिन है ही कितने।
✒️डॉ अर्जुन सिंह साँखला