This is my Story from Lazy to Busy
पहले मैं बहुत ज़्यादा सोचता था।
चीजे टालता जाता।
एक जगह बैठे कई देर तक mobile चलाता और life में goals भी serious तरीक़े से नहीं बना रखे थे, कोई सपना या लक्ष्य था भी तो उसके बारे में बस दोस्तो के बीच बैठ कर बातें ही किया करता था।
YouTube पर कॉमेडी Videos देखना, mobile में games खेलना, दोस्तो के साथ बाहर जाना इन सब में पूरा दिन कब निकल जाता कुछ पता नहीं चलता।
मैं बहुत ज्यादा stress में रहता और सोचता कि मुझे भी life में पैसा कमाना है और आगे जाना हैं लेकिन मेरे लिए मेरे दिमाग़ को, मेरे मन को control करके केवल काम पर ध्यान देना बहुत मुश्किल होता था।
मैं रात को बहुत plannings करता था, ये कर लूं वो कर लूं, इतने time में ये बना लेता हूँ वगेर-वगेर, लेकिन दूसरे दिन नींद से उठने के बाद में कोई जिज्ञासा/excitement नहीं रहती थी।
मुझे हर बार लगता मेरे पास काफी time हैं ज़िन्दगी में कुछ करने के लिए, इसे बाद में भी कर सकते है।
बस में चीज़ो को टालता जाता और मेरी सबसे बुरी आदत थी मैं कोई भी काम या task, किसी idea पर काम, कोई भी action लेना होता तो में ये सोचता था कि यार करेंगे तो अच्छे से ही करेंगे, perfect तरीके से करेंगे और वो perfect time कभी नहीं आता।
Perfection के चक्कर में कभी शुरू ही नहीं कर पाता था। वो बस टलता जाता और दुसरो को करते देखता रहता, जहाँ मुझे ये लगता मैं भी बहुत कुछ कर सकता हूँ बस शुरुआत ही नहीं कर पा रहा हूँ।
फिर जब मुझे बहुत ज्यादा एहसास होने लगा तब मैंने धीरे-धीरे अच्छे से analyse किया।
मैंने क्या analyse किया?
👉 https://bit.ly/3g5t04u
पहले मैं बहुत ज़्यादा सोचता था।
चीजे टालता जाता।
एक जगह बैठे कई देर तक mobile चलाता और life में goals भी serious तरीक़े से नहीं बना रखे थे, कोई सपना या लक्ष्य था भी तो उसके बारे में बस दोस्तो के बीच बैठ कर बातें ही किया करता था।
YouTube पर कॉमेडी Videos देखना, mobile में games खेलना, दोस्तो के साथ बाहर जाना इन सब में पूरा दिन कब निकल जाता कुछ पता नहीं चलता।
मैं बहुत ज्यादा stress में रहता और सोचता कि मुझे भी life में पैसा कमाना है और आगे जाना हैं लेकिन मेरे लिए मेरे दिमाग़ को, मेरे मन को control करके केवल काम पर ध्यान देना बहुत मुश्किल होता था।
मैं रात को बहुत plannings करता था, ये कर लूं वो कर लूं, इतने time में ये बना लेता हूँ वगेर-वगेर, लेकिन दूसरे दिन नींद से उठने के बाद में कोई जिज्ञासा/excitement नहीं रहती थी।
मुझे हर बार लगता मेरे पास काफी time हैं ज़िन्दगी में कुछ करने के लिए, इसे बाद में भी कर सकते है।
बस में चीज़ो को टालता जाता और मेरी सबसे बुरी आदत थी मैं कोई भी काम या task, किसी idea पर काम, कोई भी action लेना होता तो में ये सोचता था कि यार करेंगे तो अच्छे से ही करेंगे, perfect तरीके से करेंगे और वो perfect time कभी नहीं आता।
Perfection के चक्कर में कभी शुरू ही नहीं कर पाता था। वो बस टलता जाता और दुसरो को करते देखता रहता, जहाँ मुझे ये लगता मैं भी बहुत कुछ कर सकता हूँ बस शुरुआत ही नहीं कर पा रहा हूँ।
फिर जब मुझे बहुत ज्यादा एहसास होने लगा तब मैंने धीरे-धीरे अच्छे से analyse किया।
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