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5– microATX
यह एक छोटा मदरबोर्ड है जिसे ATX के आधार पर बनाया गया है। हालांकि ATX की तुलना में microATX का आकार काफी छोटा होता है। इसका आविष्कार 1997 में Intel के द्वारा किया गया था. इसमें ATX की सभी विशेषताएं शामिल होती है।
6– NLX मदरबोर्ड
NLX का पूरा नाम न्यू लो प्रोफाइल एक्सटेंडेड है जिसे 1990 के दशक के अंत में बनाया गया था। इस motherboard को सीपीयू से अलग किया जा सकता है।
मदरबोर्ड की विशेषताएं – Features of Motherboard in Hindi
इसकी विशेषताएं नीचे दी गयी हैं:-
1- मदरबोर्ड सीपीयू और मेमोरी को सपोर्ट करता है।
2- ठीक से काम करने के लिए वीडियो कार्ड, हार्ड ड्राइव, साउंड कार्ड को मदरबोर्ड के साथ अनुकूल (compatible) होना चाहिए।
3- यह कंप्यूटर के डिवाइसों को आपस में जोड़ने में मदद करता है।
4- इसका आकार एक जैसा नहीं होता है। यह अलग अलग साइज़ में आता है.
BIOS in Hindi – BIOS क्या है?
• BIOS का पूरा नाम Basic Input/Output System (बेसिक इनपुट/आउटपुट सिस्टम) होता है.
• कंप्यूटर को start (स्टार्ट) करने पर सबसे पहले हमें जो स्क्रीन दिखायी देती है उसे ही हम BIOS कहते हैं.
• BIOS एक सॉफ्टवेयर है जो कंप्यूटर के चालू होने पर अपने आप ही run करने लगता है। दुसरे शब्दो में कहे तो “यह एक प्रोग्राम है जिसका इस्तेमाल हार्डवेयर को मैनेज करने के लिए किया जाता है”।
• BIOS मदरबोर्ड के साथ जुड़ा हुआ एक सॉफ्टवेयर होता है और जब भी कंप्यूटर चालू होता है तो यह अपने आप ही run होने लगता है.
• BIOS एक ऐसा प्रोग्राम है जो कंप्यूटर को बूट (boot) करने के लिए ज़िम्मेदार होता है। यह हार्डवेयर के सभी कनेक्शन का पता लगाता है और उनकी जांच करता है कि सभी कनेक्शन सही तरीके से काम कर रहे है या नहीं।
• BIOS का मुख्य कार्य हार्डवेयर को सेट करना और ऑपरेटिंग सिस्टम को शुरू करना होता है। यह इनपुट और आउटपुट डिवाइसों को नियंत्रित (control) भी करता है।
• BIOS कंप्यूटर की ROM मेमोरी में मौजूद होता है, यह कंप्यूटर के चालू होने पर हार्डवेयर की पहचान कर उन्हें configure (कॉन्फ़िगर) करता है.
• CPU ऑपरेटिंग सिस्टम लोड होने से पहले ही BIOS को एक्सेस कर लेता है जिसकी वजह से BIOS कंप्यूटर के शुरू होने पर ही स्टार्ट हो जाता है।
• BIOS सॉफ्टवेयर का प्रयोग पहली बार आईबीएम (IBM) के द्वारा वर्ष 1981 में किया गया था। वर्ष 1981 में IBM ने इस सॉफ्टवेयर का प्रयोग पर्सनल कंप्यूटर में किया था। कुछ ही समय में यह काफी लोकप्रिय हो गया जिसके बाद इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल सभी प्रकार के कम्प्यूटरो में किया जाने लगा।
• यह सॉफ्टवेयर कंप्यूटर सिस्टम में Data Flow (डेटा प्रवाह) को नियंत्रित भी करता है। BIOS को “BYE-oss” के नाम से भी जाना जाता है। इस सॉफ्टवेयर को अनेक नामो से जाना जाता है जैसे :- ROM BIOS, PC BIOS और सिस्टम BIOS आदि।
BIOS के प्रकार – Types of BIOS in Hindi
इसके दो प्रकार होते है जिनके बारे में नीचे बताया गया है :-
1- UEFI
UEFI का पूरा नाम (यूनिफाइड एक्सटेंसिबल फर्मवेयर इंटरफेस) होता है। इसका इस्तेमाल 2.2 TB जैसी बड़ी हार्ड-ड्राइव के लिए किया जाता है। यह GUID table के बजाय master boot record का उपयोग करके हार्ड-ड्राइव को संभालता है।
2- Legacy BIOS
Legacy BIOS का इस्तेमाल छोटी हार्ड-ड्राइव के लिए किया जाता है। यह बड़ी हार्डड्राइव को नहीं संभाल सकता। UEFI की तुलना में इसकी क्षमता कम होती है।
BIOS setting को open कैसे करें?
BIOS setting ओपन करने के लिए आपको सबसे पहले अपना कंप्यूटर restart करना होगा, Restart करने के बाद कंप्यूटर चालु होते ही आपको की-बोर्ड शार्टकट keys F2, F12, Delete या Esc में से कोई भी एक key को बिना समय लगाये दबाना है ऐसा करते ही आपके कंप्यूटर की BIOS setting ओपन हो जाएगी।
History of BIOS in Hindi – BIOS का इतिहास
1. BIOS का आविष्कार वर्ष 1975 में गैरी किल्डल (Gary Kildall) के द्वारा किया गया था। इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल पहली बार CP/M ऑपरेटिंग सिस्टम में किया गया था।
2. पुराने समय में बायोस का इस्तेमाल बूटिंग के दौरान लोड किए गए CP/M मशीन के विशेष भाग के वर्णन करने के लिए किया जाता था। 1990 के दशक में पर्सनल कंप्यूटर में बायोस का उपयोग किया जाने लगा।
3. शुरुआती दौर में इस सॉफ्टवेयर को ROM चिप्स पर स्थित किया गया था। हालांकि कुछ समय के बाद बायोस को ROM से हटाकर EEPROM या फ़्लैश ड्राइव में स्थित किया जाने लगा।
4. आधुनिक समय में, कुछ कंप्यूटरों में BIOS सॉफ्टवेयर हो सकता है, जिसका आकार 16 मेगाबाइट या उससे अधिक हो सकता है। वर्ष 1981 में पहली बार IBM ने अपने पर्सनल कंप्यूटर में बायोस का इस्तेमाल किया था।
BIOS को बनाने वाली कंपनीयां
1. Foxconn
2. AMI
3. Hewlett Packard (HP)
4. Ricoh
5. Asus
BIOS और CMOS के बीच के अंतर
CMOS बायोस
CMOS का फुल फॉर्म Complementary Metal Oxide Semiconductor होता है इसका फुल फॉर्म Basic Input Output System होता है.
CMOS एक हार्डवेयर है जो मदरबोर्ड में लगी रहती है. बायोस एक सॉफ्टवेयर है जो ROM में स्टोर रहता है
CMOS का कार्य BIOS की Setting को सुरक्षित तरीके से स्टोर करना होता है. बायोस का कार्य POST की प्रक्रिया करना, Boot करना और ड्राइवर को लोड करना होता है.
CMOS को एक बैटरी के द्वारा Power मिलती है जिसे कि CMOS बैटरी कहते हैं. बायोस को CMOS के द्वारा Power (शक्ति) मिलती है.
What is RAM in Hindi (रैम क्या है?)
RAM का पूरा नाम random access memory (रैंडम एक्सेस मैमोरी) है. यह कंप्यूटर में स्थित एक हार्डवेयर डिवाइस होती है जो कि data को temporarily स्टोर करती है. (temporarily मतलब यह कुछ समय के लिए ही data को स्टोर करती है)
RAM को main memory, primary memory या system memory भी कहते है. इसे कभी कभी read-write मैमोरी भी कहते है
RAM के द्वारा कंप्यूटर data को randomly एक्सेस करता है जिससे कि कंप्यूटर बहुत तेजी से कार्य कर सकता है. CD तथा hard drive में डेटा sequence में एक्सेस होता है जिसके कारण वे slow होते है.
RAM एक volatile मैमोरी है तथा इसके data को एक्सेस करने के लिए power की आवश्यकता होती है यदि कंप्यूटर को बंद कर दिया जाएँ तो RAM में जितना भी data होगा वह lost (समाप्त) हो जाएगा. यदि कंप्यूटर को reboot कर दिया जाए तो operating system तथा अन्य फाइल्स RAM में हार्ड डिस्क के द्वारा दूबारा load होती है.
यह motherboard में स्थित रहती है और एक ही समय में read तथा write का कार्य करती है. इसकी read तथा write करने की speed अन्य storage devices की तुलना में बहुत अधिक तेज होती है. तथा RAM मैमोरी को bytes (GB, MB) में मापा जाता है.
advantage of RAM in hindi (रैम के लाभ)
इसके लाभ निम्नलिखित है:-
1:- इससे कंप्यूटर सिस्टम की speed (गति) बढती है जितनी ज्यादा ram होगी सिस्टम कि गति उतनी ही अधिक होगी.
2:- CPU, रैम से data को तेजी से read कर सकता है. (हार्ड डिस्क, CD, DVD, FLOPPY DISK तथा USB की तुलना में)
3:- इसमें power का बहुत कम use होता है जिससे battery life बढती है.
4:- इसमें कोई भी moving parts नहीं होते है अर्थात् इसके कोई भी parts हिलते नहीं है.
5:- इसमें write तथा erase operations कर सकते है.
disadvantage of RAM in hindi (रैम की हानियाँ)
इसके नुकसान निम्नलिखित है:-
1:- computer में RAM कम होती है क्योंकि इसकी प्रत्येक bit की cost बहुत अधिक होती है.
2:- यह volatile होती है अर्थात् इसमें डाटा हमेशा के लिए स्टोर नहीं हो सकता है.
3:- यह बहुत महँगी होती है.
4:- यह CPU cache से slow (धीमी) होती है.
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types of RAM in hindi (रैम के प्रकार)
यह मुख्यतया दो प्रकार का होता है जो कि निम्नलिखित है:-
1. SRAM
2. DRAM
what is SRAM in hindi
SRAM का पूरा नाम static random access memory (स्टैटिक रैंडम एक्सेस मैमोरी) है. इसे कार्य करने के लिए एक निरंतर (constant) power की जरूरत होती है. निरंतर power मिलते रहने के कारण इसे refresh करने की आवश्यकता नहीं होती है.
SRAM प्रत्येक memory cell के लिए बहुत सारें transistors का प्रयोग करता है परन्तु इसमें प्रत्येक cell के लिए capacitor नहीं होता है.
आजकल इसका प्रयोग cache मैमोरी तथा registers में किया जाता है. इसकी खोज 1990 के दशक में की गयी थी और इसका प्रयोग digital camera, routers, printers तथा LCD screens में किया जाता है.