Assembly Language क्या है ?
Assembly language एक low-level प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है. इसको मशीन लैंग्वेज में बदलने के लिए एक सॉफ्टवेर की आवश्यकता होती है जिसे assembler कहते है.
असेंबली लैंग्वेज का प्रयोग माइक्रोप्रोसेसर पर आधारित डिवाइस में, और real time systems में किया जाता है.
इस language में 0 और 1 digit के स्थान पर alphanumeric का use किया जाता है। जैसे कि- A-Z, 0-9 .
Assembly भाषा में लिखे गए program किसी दुसरे computer पर execute नहीं हो सकते है। इस भाषा को लिखने और समझने के लिए computer hardware की knowledge होनी चाहिए।
Assembly language एक low-level प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है. इसको मशीन लैंग्वेज में बदलने के लिए एक सॉफ्टवेर की आवश्यकता होती है जिसे assembler कहते है.
असेंबली लैंग्वेज का प्रयोग माइक्रोप्रोसेसर पर आधारित डिवाइस में, और real time systems में किया जाता है.
इस language में 0 और 1 digit के स्थान पर alphanumeric का use किया जाता है। जैसे कि- A-Z, 0-9 .
Assembly भाषा में लिखे गए program किसी दुसरे computer पर execute नहीं हो सकते है। इस भाषा को लिखने और समझने के लिए computer hardware की knowledge होनी चाहिए।
असेंबली भाषा के फायदे
1. assembly भाषा को समझना machine language की तुलना में काफी ज्यादा आसान है।
2. इस भाषा में गलती होने के chances काफी कम होते है।
3. इसमें program को modify करना आसान है।
असेंबली भाषा के नुकसान
1. assembly भाषा के प्रोग्राम machine पर depend होते है।
2. इस भाषा का use करने के लिए hardware की knowledge ज़रूरी है।
3. इस भाषा में काफी ज्यादा time waste होता है।
1. assembly भाषा को समझना machine language की तुलना में काफी ज्यादा आसान है।
2. इस भाषा में गलती होने के chances काफी कम होते है।
3. इसमें program को modify करना आसान है।
असेंबली भाषा के नुकसान
1. assembly भाषा के प्रोग्राम machine पर depend होते है।
2. इस भाषा का use करने के लिए hardware की knowledge ज़रूरी है।
3. इस भाषा में काफी ज्यादा time waste होता है।
Advantages of Low Level Language in Hindi – लो लेवल लैंग्वेज के लाभ
1. इस language की speed काफी अच्छी होती है।
2. इस language में ज्यादा memory space की ज़रूरत नहीं पड़ती।
3. इस language को use करना काफी ज्यादा आसान है।
4. Low level language के लिखे हुए code को run करने के लिए किसी भी compiler तथा interpreter की ज़रूरत नहीं पड़ती।
5. इस programming language की मदद से हम बड़ी ही आसानी से hardware को access कर सकते है।
6. इस programming language की मदद से हम अपने कंप्यूटर की storage और Memory registers को आसानी से manipulate कर सकते हैं।
1. इस language की speed काफी अच्छी होती है।
2. इस language में ज्यादा memory space की ज़रूरत नहीं पड़ती।
3. इस language को use करना काफी ज्यादा आसान है।
4. Low level language के लिखे हुए code को run करने के लिए किसी भी compiler तथा interpreter की ज़रूरत नहीं पड़ती।
5. इस programming language की मदद से हम बड़ी ही आसानी से hardware को access कर सकते है।
6. इस programming language की मदद से हम अपने कंप्यूटर की storage और Memory registers को आसानी से manipulate कर सकते हैं।
Disadvantages of Low Level Language in Hindi – लो लेवल लैंग्वेज के नुकसान
1. इंसानो के द्वारा इस language को नहीं समझा जा सकता।
2. इस लैंग्वेज में प्रोग्राम को लिखना बहुत कठिन होता है।
3. इस भाषा में गलतियों को ढूढ़ना मुश्किल होता है।
4. इस language में गलती होने की संभावना ज्यादा रहती है।
5. इस language के code लिखने के लिए programmer को काफी अच्छी knowledge होनी जरुरी है।
1. इंसानो के द्वारा इस language को नहीं समझा जा सकता।
2. इस लैंग्वेज में प्रोग्राम को लिखना बहुत कठिन होता है।
3. इस भाषा में गलतियों को ढूढ़ना मुश्किल होता है।
4. इस language में गलती होने की संभावना ज्यादा रहती है।
5. इस language के code लिखने के लिए programmer को काफी अच्छी knowledge होनी जरुरी है।
High level और low level language के मध्य अंतर
High level
ये भाषा user friendly होती है।
इसको setup करना काफी ज्यादा आसान होता है।
इसका use इस समय काफी ज्यादा किया जाता है।
इसको आसानी से execute किया जा सकता है।
High level language कम memory space इस्तेमाल करता है।
इसको आसानी से debug किया जा सकता है।
इसको maintain करके रखना काफी ज्यादा आसान है।
ये भाषा user friendly होती है।
इसको setup करना काफी ज्यादा आसान होता है।
इसका use इस समय काफी ज्यादा किया जाता है।
इसको आसानी से execute किया जा सकता है।
High level language कम memory space इस्तेमाल करता है।
इसको आसानी से debug किया जा सकता है।
इसको maintain करके रखना काफी ज्यादा आसान है।
Low level
ये भाषा computer friendly है।
इसको setup करने में काफी ज्यादा समस्याओ का सामना करना पड़ता है।
इस समय इस language को बहुत कम जगह use किया जाता है।
Low level language को आसानी से execute नहीं किया जा सकता।
यह computer की काफी ज्यादा memory space का use करता है।
ये भाषा computer friendly है।
इसको setup करने में काफी ज्यादा समस्याओ का सामना करना पड़ता है।
इस समय इस language को बहुत कम जगह use किया जाता है।
Low level language को आसानी से execute नहीं किया जा सकता।
यह computer की काफी ज्यादा memory space का use करता है।
debug करने में मुश्किलों को सामना करना पड़ता है।
maintain करके रखना काफी ज्यादा मुश्किल हो।
maintain करके रखना काफी ज्यादा मुश्किल हो।
Disadvantages of Low Level Language in Hindi – लो लेवल लैंग्वेज के नुकसान
1. इंसानो के द्वारा इस language को नहीं समझा जा सकता।
2. इस लैंग्वेज में प्रोग्राम को लिखना बहुत कठिन होता है।
3. इस भाषा में गलतियों को ढूढ़ना मुश्किल होता है।
4. इस language में गलती होने की संभावना ज्यादा रहती है।
5. इस language के code लिखने के लिए programmer को काफी अच्छी knowledge होनी जरुरी है।
1. इंसानो के द्वारा इस language को नहीं समझा जा सकता।
2. इस लैंग्वेज में प्रोग्राम को लिखना बहुत कठिन होता है।
3. इस भाषा में गलतियों को ढूढ़ना मुश्किल होता है।
4. इस language में गलती होने की संभावना ज्यादा रहती है।
5. इस language के code लिखने के लिए programmer को काफी अच्छी knowledge होनी जरुरी है।
High level और low level language के मध्य अंतर
C++ कैसी भाषा है?
यह ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड भाषा है?
कंप्यूटर में कितनी भाषा होती है?
कंप्यूटर केवल एक ही भाषा समझता है वो है बाइनरी(Binary)। जो 0 और 1 से मिलकर बनी होती है।
C++ कैसी भाषा है?
यह ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड भाषा है?
कंप्यूटर में कितनी भाषा होती है?
कंप्यूटर केवल एक ही भाषा समझता है वो है बाइनरी(Binary)। जो 0 और 1 से मिलकर बनी होती है।
कंप्यूटर मेमोरी क्या है? – Computer Memory in Hindi
हेल्लो दोस्तों! आज हम इस पोस्ट में What is Computer Memory in Hindi & Types (कंप्यूटर मेमोरी क्या है और इसके प्रकार) के बारें में पढेंगे. इसे बहुत ही आसान भाषा में लिखा गया है. इसे आप पूरा पढ़िए, यह आपको आसानी से समझ में आ जायेगा. तो चलिए शुरू करते हैं:-
हेल्लो दोस्तों! आज हम इस पोस्ट में What is Computer Memory in Hindi & Types (कंप्यूटर मेमोरी क्या है और इसके प्रकार) के बारें में पढेंगे. इसे बहुत ही आसान भाषा में लिखा गया है. इसे आप पूरा पढ़िए, यह आपको आसानी से समझ में आ जायेगा. तो चलिए शुरू करते हैं:-
Computer Memory in Hindi – कंप्यूटर मेमोरी क्या है?
• कंप्यूटर मेमोरी एक डिवाइस होती है जिसका इस्तेमाल डेटा और सूचना को स्टोर करने के लिए किया जाता है.
• दूसरे शब्दों में कहें तो, “Computer Memory कंप्यूटर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसमें data को स्टोर करके रखा जाता है, बिना मेमोरी के कंप्यूटर काम नहीं करता.”
• जिस प्रकार मनुष्य डेटा और सूचना को स्टोर करने के अपने दिमाग का इस्तेमाल करता है उसी प्रकार कंप्यूटर data (डेटा) और information (सूचना) को स्टोर करने के लिए memory का इस्तेमाल करता है.
• सरल शब्दो में कहे तो “कंप्यूटर मेमोरी एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जिसका इस्तेमाल प्रोग्राम और सूचनाओं को स्टोर करने के लिए किया जाता है। मेमोरी की मदद से कंप्यूटर अपने कार्यों को पूरा करता है. “
• कंप्यूटर की मेमोरी को छोटे छोटे हिस्सों में विभाजित (divide) किया जाता है जिन्हे हम cell कहते है। इन Cell में डेटा बाइनरी (0,1) के रूप में स्टोर होता है.
• कंप्यूटर मेमोरी इनपुट और आउटपुट दोनों प्रकार के डेटा को स्टोर करने में सक्षम होती है।
• कंप्यूटर मेमोरी बहुत प्रकार की होती है- प्राइमरी मेमोरी (Primary memory), सेकेंडरी मेमोरी (Secondary memory) , कैश मेमोरी (Cache Memory) और रजिस्टर मेमोरी (Register memory). इन सभी मेमोरी के बारे में हम नीचे विस्तार से पढ़ेंगे।
• कंप्यूटर मेमोरी एक डिवाइस होती है जिसका इस्तेमाल डेटा और सूचना को स्टोर करने के लिए किया जाता है.
• दूसरे शब्दों में कहें तो, “Computer Memory कंप्यूटर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसमें data को स्टोर करके रखा जाता है, बिना मेमोरी के कंप्यूटर काम नहीं करता.”
• जिस प्रकार मनुष्य डेटा और सूचना को स्टोर करने के अपने दिमाग का इस्तेमाल करता है उसी प्रकार कंप्यूटर data (डेटा) और information (सूचना) को स्टोर करने के लिए memory का इस्तेमाल करता है.
• सरल शब्दो में कहे तो “कंप्यूटर मेमोरी एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जिसका इस्तेमाल प्रोग्राम और सूचनाओं को स्टोर करने के लिए किया जाता है। मेमोरी की मदद से कंप्यूटर अपने कार्यों को पूरा करता है. “
• कंप्यूटर की मेमोरी को छोटे छोटे हिस्सों में विभाजित (divide) किया जाता है जिन्हे हम cell कहते है। इन Cell में डेटा बाइनरी (0,1) के रूप में स्टोर होता है.
• कंप्यूटर मेमोरी इनपुट और आउटपुट दोनों प्रकार के डेटा को स्टोर करने में सक्षम होती है।
• कंप्यूटर मेमोरी बहुत प्रकार की होती है- प्राइमरी मेमोरी (Primary memory), सेकेंडरी मेमोरी (Secondary memory) , कैश मेमोरी (Cache Memory) और रजिस्टर मेमोरी (Register memory). इन सभी मेमोरी के बारे में हम नीचे विस्तार से पढ़ेंगे।
Types of Computer Memory in Hindi – कंप्यूटर मेमोरी के प्रकार
कंप्यूटर मेमोरी के निम्नलिखित प्रकार होते हैं:-
1. प्राइमरी मेमोरी (Primary memory)
2. सेकेंडरी मेमोरी (Secondary memory)
3. कैश मेमोरी (Cache Memory)
4. रजिस्टर (Register)
कंप्यूटर मेमोरी के निम्नलिखित प्रकार होते हैं:-
1. प्राइमरी मेमोरी (Primary memory)
2. सेकेंडरी मेमोरी (Secondary memory)
3. कैश मेमोरी (Cache Memory)
4. रजिस्टर (Register)
1- प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory)
प्राइमरी मेमोरी कंप्यूटर की मुख्य मेमोरी (main memory) होती है जो कंप्यूटर में मौजूद डेटा और सूचना (information) को स्टोर करती है।
दूसरे शब्दों में कहें तो, “प्राइमरी मैमोरी एक प्रकार की कंप्यूटर मेमोरी है जिसे CPU के द्वारा सीधे एक्सेस (access) किया जा सकता है।“
प्राइमरी मेमोरी को प्राइमरी स्टोरेज के नाम से भी जाना जाता है जो कंप्यूटर के मदरबोर्ड पर स्थित होती है। प्राइमरी मेमोरी को Semiconductor (अर्धचालक) पदार्थ से बनाया जाता है।
प्राइमरी मेमोरी कंप्यूटर की मुख्य मेमोरी (main memory) होती है जो कंप्यूटर में मौजूद डेटा और सूचना (information) को स्टोर करती है।
दूसरे शब्दों में कहें तो, “प्राइमरी मैमोरी एक प्रकार की कंप्यूटर मेमोरी है जिसे CPU के द्वारा सीधे एक्सेस (access) किया जा सकता है।“
प्राइमरी मेमोरी को प्राइमरी स्टोरेज के नाम से भी जाना जाता है जो कंप्यूटर के मदरबोर्ड पर स्थित होती है। प्राइमरी मेमोरी को Semiconductor (अर्धचालक) पदार्थ से बनाया जाता है।
इस मेमोरी की स्टोरेज क्षमता सिमित (limited) होती है जिसके कारण यह बहुत कम मात्रा में डेटा को स्टोर कर पाती है। एक कंप्यूटर में प्राइमरी मेमोरी का साइज लगभग 4 GB होता है।
प्राइमरी मेमोरी Volatile और Non Volatile दोनों प्रकार की होती है। Volatile memory वह मेमोरी होती है जो कंप्यूटर के ON रहने तक ही डेटा को स्टोर करती है, कंप्यूटर के off होने पर इसमें रखा डेटा अपने आप डिलीट हो जाता है। Non-Volatile वह मेमोरी होती है जो हमेशा के लिए डेटा को स्टोर करके रखती है।
सेकेंडरी मेमोरी की तुलना में प्राइमरी मेमोरी महंगी होती है लेकिन यह तेज गति (speed) के साथ डेटा को एक्सेस करती है। इस मेमोरी के दो प्रकार होते है पहला RAM (रैंडम एक्सेस मेमोरी) और दूसरा ROM (रीड ओनली मेमोरी)
प्राइमरी मेमोरी Volatile और Non Volatile दोनों प्रकार की होती है। Volatile memory वह मेमोरी होती है जो कंप्यूटर के ON रहने तक ही डेटा को स्टोर करती है, कंप्यूटर के off होने पर इसमें रखा डेटा अपने आप डिलीट हो जाता है। Non-Volatile वह मेमोरी होती है जो हमेशा के लिए डेटा को स्टोर करके रखती है।
सेकेंडरी मेमोरी की तुलना में प्राइमरी मेमोरी महंगी होती है लेकिन यह तेज गति (speed) के साथ डेटा को एक्सेस करती है। इस मेमोरी के दो प्रकार होते है पहला RAM (रैंडम एक्सेस मेमोरी) और दूसरा ROM (रीड ओनली मेमोरी)
प्राइमरी मेमोरी के प्रकार
(i). RAM (रैम)
RAM का पूरा नाम Random Access Memory (रैंडम एक्सेस मेमोरी) होता है। RAM में डेटा कंप्यूटर के ON रहने तक ही स्टोर रहता है, कंप्यूटर के OFF होने पर इसमें मौजूद डेटा अपने आप डिलीट हो जाता है। इसलिए इसे Volatile memory भी कहा जाता है।
RAM को सिस्टम मेमोरी, और रीड राइट मेमोरी के नाम से भी जाना जाता है। इसमें डेटा को एक्सेस करने के लिए बिजली की आवश्यकता पड़ती है। यदि कंप्यूटर बंद हो जाता है या बिजली चली जाती है तो इसमें मौजूद सारा डेटा डिलीट हो जाता है।
(i). RAM (रैम)
RAM का पूरा नाम Random Access Memory (रैंडम एक्सेस मेमोरी) होता है। RAM में डेटा कंप्यूटर के ON रहने तक ही स्टोर रहता है, कंप्यूटर के OFF होने पर इसमें मौजूद डेटा अपने आप डिलीट हो जाता है। इसलिए इसे Volatile memory भी कहा जाता है।
RAM को सिस्टम मेमोरी, और रीड राइट मेमोरी के नाम से भी जाना जाता है। इसमें डेटा को एक्सेस करने के लिए बिजली की आवश्यकता पड़ती है। यदि कंप्यूटर बंद हो जाता है या बिजली चली जाती है तो इसमें मौजूद सारा डेटा डिलीट हो जाता है।
कंप्यूटर RAM में मौजूद डेटा को तेज गति के साथ एक्सेस करता है जिसके कारण कंप्यूटर तेजी से कार्यो को पूरा कर पाता है।
RAM के दो प्रकार होते है पहला SRAM (स्टेटिक रैंडम एक्सेस मेमोरी) और दूसरा DRAM (डायनामिक रैंडम एक्सेस मैमोरी) .
RAM के दो प्रकार होते है पहला SRAM (स्टेटिक रैंडम एक्सेस मेमोरी) और दूसरा DRAM (डायनामिक रैंडम एक्सेस मैमोरी) .
(ii). ROM (रोम)
ROM का पूरा नाम Read Only Memory (रीड ओनली मेमोरी) होता है। यह एक non volatile मैमोरी है जिसका मतलब यह है कि यह हमेशा के लिए डेटा को स्टोर करके रखती है।
यदि बिजली चली जाती है और कंप्यूटर बंद हो जाता है तो भी ROM में मौजूद डेटा डिलीट नही होता। इस मेमोरी में डेटा को permanently (हमेशा के लिए) स्टोर किया जा सकता है लेकिन RAM में हम ऐसा नहीं कर सकते।
ROM के तीन प्रकार होते है पहला PROM (प्रोग्रामेबल रीड ऑनली मैमोरी) दूसरा EPROM (एरेजेबल प्रोग्रामेबल रीड ऑनली मैमोरी) और तीसरा EEPROM (इलेक्ट्रिकली इरेजेबल प्रोग्रामेबल रीड ऑनली मैमोरी)
ROM का पूरा नाम Read Only Memory (रीड ओनली मेमोरी) होता है। यह एक non volatile मैमोरी है जिसका मतलब यह है कि यह हमेशा के लिए डेटा को स्टोर करके रखती है।
यदि बिजली चली जाती है और कंप्यूटर बंद हो जाता है तो भी ROM में मौजूद डेटा डिलीट नही होता। इस मेमोरी में डेटा को permanently (हमेशा के लिए) स्टोर किया जा सकता है लेकिन RAM में हम ऐसा नहीं कर सकते।
ROM के तीन प्रकार होते है पहला PROM (प्रोग्रामेबल रीड ऑनली मैमोरी) दूसरा EPROM (एरेजेबल प्रोग्रामेबल रीड ऑनली मैमोरी) और तीसरा EEPROM (इलेक्ट्रिकली इरेजेबल प्रोग्रामेबल रीड ऑनली मैमोरी)