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“मुझे देख !” ओघड़ बाबा अपनी लाल-लाल आंखों से मोहिता के चेहरे को घूरते हुए बोला- “मेरे नंगे जिस्म को देख!, कड़कड़ाती ठंड से भरी इस काली रात को देख! इस श्मशानघाट को देख ! जलती हुई चिता को देख! शराब की उस बोतल को देख जो प्रेतराज को भोग लगाने के बाद मैंने खाली की है। अथभुनी लाश के उस मांस को देख! जिसे मैं अभी-अभी खा रहा था, फिर सोच कि तंत्र – विद्या सीखने के लिए साधक को कैसे-कैसे हालातों से गुजरना पड़ता है। श्मशान सिद्धि पाने के लिए ओघड़ तंत्र की कैसी-कैसी नंगी तलवारों पर चलना पड़ता है।”
“ऐसा कहकर तुम मुझे मेरे इरादों से नहीं डिगा सकोगे बाबा ।” मोहिता सपाट स्वर में कहती चली गई— “तुम मुझे देखो! मैं एक लड़की हूं। एक जवान कुंआरी लड़की जो आधी रात के वक्त, बिना किसी खौफ के श्मशान में चली आई, जो इस वक्त एक ओ बाबा से बातें कर रही है। मुझे बताओ बाबा! क्या यह लड़की तंत्र-विद्या सीखने के काबिल नहीं? क्या अपनी काबलियत साबित करने के लिए इसे कोई और सबूत देना होगा ? ” “मुझसे बहस मत कर लड़की!” बाबा गुर्राया “यहां से चुपचाप लौट जाने में ही तेरी भलाई है।”
“बाबा!” मोहिता के स्वर में तनिक और सख्ती आ गई “मुझे हर कीमत पर तंत्र-विद्या सीखनी है। मैं इतनी खूबसूरत नहीं जो अपने धनकुबेर बहनोई को अपने रूप-जाल में फांस सकूं, मुझे हर हाल में मिसेज मेहरा बनना है। हर हाल में! चाहे मुझे इसके लिए कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े।”
Name: Sali Number 1
Format: PDF
Language: Hindi
Pages: 310
Size: 42.9 MB
Novel Type: Thriller & Suspense, Murder Mystery
Writer: Tiger
https://www.comixtream.com/free-download-sali-number-1-tiger-hindi-novel-pdf/
#Hindi_Novels #Thriller_and_Suspense_Novels #Tiger_Novels
“मुझे देख !” ओघड़ बाबा अपनी लाल-लाल आंखों से मोहिता के चेहरे को घूरते हुए बोला- “मेरे नंगे जिस्म को देख!, कड़कड़ाती ठंड से भरी इस काली रात को देख! इस श्मशानघाट को देख ! जलती हुई चिता को देख! शराब की उस बोतल को देख जो प्रेतराज को भोग लगाने के बाद मैंने खाली की है। अथभुनी लाश के उस मांस को देख! जिसे मैं अभी-अभी खा रहा था, फिर सोच कि तंत्र – विद्या सीखने के लिए साधक को कैसे-कैसे हालातों से गुजरना पड़ता है। श्मशान सिद्धि पाने के लिए ओघड़ तंत्र की कैसी-कैसी नंगी तलवारों पर चलना पड़ता है।”
“ऐसा कहकर तुम मुझे मेरे इरादों से नहीं डिगा सकोगे बाबा ।” मोहिता सपाट स्वर में कहती चली गई— “तुम मुझे देखो! मैं एक लड़की हूं। एक जवान कुंआरी लड़की जो आधी रात के वक्त, बिना किसी खौफ के श्मशान में चली आई, जो इस वक्त एक ओ बाबा से बातें कर रही है। मुझे बताओ बाबा! क्या यह लड़की तंत्र-विद्या सीखने के काबिल नहीं? क्या अपनी काबलियत साबित करने के लिए इसे कोई और सबूत देना होगा ? ” “मुझसे बहस मत कर लड़की!” बाबा गुर्राया “यहां से चुपचाप लौट जाने में ही तेरी भलाई है।”
“बाबा!” मोहिता के स्वर में तनिक और सख्ती आ गई “मुझे हर कीमत पर तंत्र-विद्या सीखनी है। मैं इतनी खूबसूरत नहीं जो अपने धनकुबेर बहनोई को अपने रूप-जाल में फांस सकूं, मुझे हर हाल में मिसेज मेहरा बनना है। हर हाल में! चाहे मुझे इसके लिए कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े।”
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“मुझे देख !” ओघड़ बाबा अपनी लाल-लाल आंखों से मोहिता के चेहरे को घूरते हुए बोला- “मेरे नंगे जिस्म को देख!, कड़कड़ाती ठंड से भरी इस काली रात को देख! इस श्मशानघाट को देख ! जलती हुई चिता को देख! शराब की उस बोतल को देख जो प्रेतराज को भोग लगाने के बाद मैंने खाली की है। अथभुनी लाश के उस मांस को देख! जिसे मैं अभी-अभी खा रहा था, फिर सोच कि तंत्र – विद्या सीखने के लिए साधक को कैसे-कैसे हालातों से गुजरना पड़ता है। श्मशान सिद्धि पाने के लिए ओघड़ तंत्र की कैसी-कैसी नंगी तलवारों पर चलना पड़ता है।”
“ऐसा कहकर तुम मुझे मेरे इरादों से नहीं डिगा सकोगे बाबा ।” मोहिता सपाट स्वर में कहती चली गई— “तुम मुझे देखो! मैं एक लड़की हूं। एक जवान कुंआरी लड़की जो आधी रात के वक्त, बिना किसी खौफ के श्मशान में चली आई, जो इस वक्त एक ओ बाबा से बातें कर रही है। मुझे बताओ बाबा! क्या यह लड़की तंत्र-विद्या सीखने के काबिल नहीं? क्या अपनी काबलियत साबित करने के लिए इसे कोई और सबूत देना होगा ? ” “मुझसे बहस मत कर लड़की!” बाबा गुर्राया “यहां से चुपचाप लौट जाने में ही तेरी भलाई है।”
“बाबा!” मोहिता के स्वर में तनिक और सख्ती आ गई “मुझे हर कीमत पर तंत्र-विद्या सीखनी है। मैं इतनी खूबसूरत नहीं जो अपने धनकुबेर बहनोई को अपने रूप-जाल में फांस सकूं, मुझे हर हाल में मिसेज मेहरा बनना है। हर हाल में! चाहे मुझे इसके लिए कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े।”
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Novel Type: Thriller & Suspense, Murder Mystery
Writer: Tiger
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“ऐसा कहकर तुम मुझे मेरे इरादों से नहीं डिगा सकोगे बाबा ।” मोहिता सपाट स्वर में कहती चली गई— “तुम मुझे देखो! मैं एक लड़की हूं। एक जवान कुंआरी लड़की जो आधी रात के वक्त, बिना किसी खौफ के श्मशान में चली आई, जो इस वक्त एक ओ बाबा से बातें कर रही है। मुझे बताओ बाबा! क्या यह लड़की तंत्र-विद्या सीखने के काबिल नहीं? क्या अपनी काबलियत साबित करने के लिए इसे कोई और सबूत देना होगा ? ” “मुझसे बहस मत कर लड़की!” बाबा गुर्राया “यहां से चुपचाप लौट जाने में ही तेरी भलाई है।”
“बाबा!” मोहिता के स्वर में तनिक और सख्ती आ गई “मुझे हर कीमत पर तंत्र-विद्या सीखनी है। मैं इतनी खूबसूरत नहीं जो अपने धनकुबेर बहनोई को अपने रूप-जाल में फांस सकूं, मुझे हर हाल में मिसेज मेहरा बनना है। हर हाल में! चाहे मुझे इसके लिए कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े।”
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Pages: 310
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Novel Type: Thriller & Suspense, Murder Mystery
Writer: Tiger
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“अपने घरवाले को समझा।” जगतपाल शामली को घूरते हुए बड़े ही गंभीर स्वर में बोला- “मेरी बीवी से दूर रहे। उससे दिल लगाने की भूल न करे । उसने आज तक किसी से वफा नहीं की। जो भी उसे चाहने लगता है, वह उसकी मौत बन जाती है। सुन रही है न तू मेरी बीवी सबकी मौत है… सबकी मौत!”
“लेकिन तुम्हारी बीवी है कहां —तुम्हारी तो अभी तक शादी ही नहीं हुई।” शामली ने हैरत से आंखें फाड़कर पूछा ।
प्रत्युत्तर में जगतपाल जोर-जोर से अट्टहास लगाने लगा । शामली को लगा जैसे वह उसका मजाक उड़ा रहा है।
Name: Meri Biwi Sabki Maut
Format: PDF
Language: Hindi
Pages: 274
Size: 34.8 MB
Novel Type: Thriller & Suspense, Murder Mystery
Writer: Tiger
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“अपने घरवाले को समझा।” जगतपाल शामली को घूरते हुए बड़े ही गंभीर स्वर में बोला- “मेरी बीवी से दूर रहे। उससे दिल लगाने की भूल न करे । उसने आज तक किसी से वफा नहीं की। जो भी उसे चाहने लगता है, वह उसकी मौत बन जाती है। सुन रही है न तू मेरी बीवी सबकी मौत है… सबकी मौत!”
“लेकिन तुम्हारी बीवी है कहां —तुम्हारी तो अभी तक शादी ही नहीं हुई।” शामली ने हैरत से आंखें फाड़कर पूछा ।
प्रत्युत्तर में जगतपाल जोर-जोर से अट्टहास लगाने लगा । शामली को लगा जैसे वह उसका मजाक उड़ा रहा है।
Name: Meri Biwi Sabki Maut
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Language: Hindi
Pages: 274
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Novel Type: Thriller & Suspense, Murder Mystery
Writer: Tiger
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“बड़ी मुश्किल से दो ही मिनट गुजरे होंगे।” कांस्टेबल ने बताया -” अंदर से एक गोली चलने की आवाज आई। हम लोगों ने जोर-जोर से इमरजेंसी वार्ड का दरवाजा खटखटाया जो कि जल्द ही खुला तथा हमें वही नर्स दिखाई दी जो डॉक्टर साहब के साथ अंदर गई थी।” “फिर ?” शुक्ला ने धड़कते दिल से पूछा । “उसके चेहरे पर मौत नाच रही थी सर !” आंखों की पुतलियां यूं लग रही थीं जैसे अभी निकलकर बाहर आ गिरेंगी। इससे पहले कि हम उससे कुछ पूछते, उसका जिस्म धड़ाम से फर्श पर जा गिरा।”
“फिर तुमने क्या किया ?”“अपने साथी को उस नर्स के पास छोड़कर मैं तेजी से इमरजेंसी वार्ड में घुसा। वहां फर्श पर डॉक्टर भारद्वाज की खून से लथपथ लाश पड़ी थी। लाश के पास ही उसका रिवॉल्वर पड़ा था मगर… ।”“मगर क्या ?” शुक्ला ने एक ही झटके से पूछा। कोई जवाब देने की बजाए कांस्टेबल यूं अपने होंठों पर जुबान फिराने लगा जैसे आगे की बात बताने के लिए स्वयं को तैयार कर रहा है।
Name: Meri Biwi Sabki Maut
Format: PDF
Language: Hindi
Pages: 322
Size: 58 MB
Novel Type: Thriller & Suspense, Murder Mystery
Writer: Tiger
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“बड़ी मुश्किल से दो ही मिनट गुजरे होंगे।” कांस्टेबल ने बताया -” अंदर से एक गोली चलने की आवाज आई। हम लोगों ने जोर-जोर से इमरजेंसी वार्ड का दरवाजा खटखटाया जो कि जल्द ही खुला तथा हमें वही नर्स दिखाई दी जो डॉक्टर साहब के साथ अंदर गई थी।” “फिर ?” शुक्ला ने धड़कते दिल से पूछा । “उसके चेहरे पर मौत नाच रही थी सर !” आंखों की पुतलियां यूं लग रही थीं जैसे अभी निकलकर बाहर आ गिरेंगी। इससे पहले कि हम उससे कुछ पूछते, उसका जिस्म धड़ाम से फर्श पर जा गिरा।”
“फिर तुमने क्या किया ?”“अपने साथी को उस नर्स के पास छोड़कर मैं तेजी से इमरजेंसी वार्ड में घुसा। वहां फर्श पर डॉक्टर भारद्वाज की खून से लथपथ लाश पड़ी थी। लाश के पास ही उसका रिवॉल्वर पड़ा था मगर… ।”“मगर क्या ?” शुक्ला ने एक ही झटके से पूछा। कोई जवाब देने की बजाए कांस्टेबल यूं अपने होंठों पर जुबान फिराने लगा जैसे आगे की बात बताने के लिए स्वयं को तैयार कर रहा है।
Name: Meri Biwi Sabki Maut
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Language: Hindi
Pages: 322
Size: 58 MB
Novel Type: Thriller & Suspense, Murder Mystery
Writer: Tiger
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“मिस मोनिका ।” जनरल मखीजा गम्भीर स्वर में बोला – “मुझे डर है कि वे लोग कहीं तुम्हारा कत्ल न कर दें। तुम चाहो तो अब भी इस मिशन से पीछे हट सकती हो। हम तुम्हारी जगह किसी और…।” “सर, मैं हमेशा खतरों से खेलती आई हूं।” मोनिका दृढ़ स्वर में बोली— अपनी मातृभूमि के लिए मैं अपनी जान भी दे सकती हूं। मैं इस मिशन से पीछे नहीं हट सकती। सर, मेरा मानना है कि मौत अपने वक्त से पहले कभी नहीं आ सकती। सर, मुझे खलीफा अली की कही एक बात बहुत पसंद है। उनका कहना था कि मौत इंसान की खुद निगहबानी करती है। यानि जब तक उसके मरने का वक्त नहीं आता मौत खुद रक्षा करती है।”
क्रिमिनल लॉयर मोनिका पंडित का एक्शन से भरपूर छठा विस्फोटक धमाका।
Name: Matribhumi
Format: PDF
Language: Hindi
Pages: 269
Size: 46 MB
Series: Monika Pandit Series
Novel Type: Crime, Thriller & Suspense
Writer: Tiger
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#Hindi_Novels #Thriller_and_Suspense_Novels #Tiger_Novels
“मिस मोनिका ।” जनरल मखीजा गम्भीर स्वर में बोला – “मुझे डर है कि वे लोग कहीं तुम्हारा कत्ल न कर दें। तुम चाहो तो अब भी इस मिशन से पीछे हट सकती हो। हम तुम्हारी जगह किसी और…।” “सर, मैं हमेशा खतरों से खेलती आई हूं।” मोनिका दृढ़ स्वर में बोली— अपनी मातृभूमि के लिए मैं अपनी जान भी दे सकती हूं। मैं इस मिशन से पीछे नहीं हट सकती। सर, मेरा मानना है कि मौत अपने वक्त से पहले कभी नहीं आ सकती। सर, मुझे खलीफा अली की कही एक बात बहुत पसंद है। उनका कहना था कि मौत इंसान की खुद निगहबानी करती है। यानि जब तक उसके मरने का वक्त नहीं आता मौत खुद रक्षा करती है।”
क्रिमिनल लॉयर मोनिका पंडित का एक्शन से भरपूर छठा विस्फोटक धमाका।
Name: Matribhumi
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Language: Hindi
Pages: 269
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Series: Monika Pandit Series
Novel Type: Crime, Thriller & Suspense
Writer: Tiger
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‘जस्टिस विरमानी! तूने हमेशा कानून को बच्चों वाला झुनझुना समझा। तूने बिना सोचे-समझे इसे कई बार हिलाया और उन बेगुनाह लोगों को सजा सुना दी जो कि सरासर बेकसूर थे। अपने इसी झुनझुने से तूने न केवल कानून का मजाक उड़ाया, बल्कि इसकी आड़ में तूने कई लोगों की हत्याएं भी की हैं। तू एक हत्यारा है। तूने जितने भी कत्ल किए, खुद नहीं
किए, बल्कि कानून के कंधे का सहारा लेकर उसकी पीठ के पीछे छुपकर किए। शायद इसी वजह से दुनिया की कोई अदालत तुझे तेरे काले कारनामों की सजा नहीं दे सकती। लेकिन तेरे काले कारनामों की सजा मैं तुझे दूंगा। जिस तरह तूने कानून का सहारा लेकर खूब हत्याएं करके कानून को हत्यारा बनाया है, ठीक उसी तरह मैं कानून का सहारा लेकर तुझे और तेरे पूरे परिवार को खत्म कर दूंगा और हत्यारा भी नहीं कहलाऊंगा, क्योंकि हत्यारा कहलाएगा. हमारे देश का कानून जो कि अंधा है। अब तू अपनी और अपने घर के सदस्यों की जान बचाने के लिए जो कर सकता है, कर ले। बाद में तू मुझ पर यह इल्जाम मत लगाना कि मैंने तुझे सफाई का मौका नहीं दिया, यानी कि तुझे चेताया नहीं।
Name: Hatyara Kanoon
Format: PDF
Language: Hindi
Pages: 315
Size: 33.6 MB
Series: Monika Pandit Series
Novel Type: Crime, Thriller & Suspense
Writer: Tiger
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‘जस्टिस विरमानी! तूने हमेशा कानून को बच्चों वाला झुनझुना समझा। तूने बिना सोचे-समझे इसे कई बार हिलाया और उन बेगुनाह लोगों को सजा सुना दी जो कि सरासर बेकसूर थे। अपने इसी झुनझुने से तूने न केवल कानून का मजाक उड़ाया, बल्कि इसकी आड़ में तूने कई लोगों की हत्याएं भी की हैं। तू एक हत्यारा है। तूने जितने भी कत्ल किए, खुद नहीं
किए, बल्कि कानून के कंधे का सहारा लेकर उसकी पीठ के पीछे छुपकर किए। शायद इसी वजह से दुनिया की कोई अदालत तुझे तेरे काले कारनामों की सजा नहीं दे सकती। लेकिन तेरे काले कारनामों की सजा मैं तुझे दूंगा। जिस तरह तूने कानून का सहारा लेकर खूब हत्याएं करके कानून को हत्यारा बनाया है, ठीक उसी तरह मैं कानून का सहारा लेकर तुझे और तेरे पूरे परिवार को खत्म कर दूंगा और हत्यारा भी नहीं कहलाऊंगा, क्योंकि हत्यारा कहलाएगा. हमारे देश का कानून जो कि अंधा है। अब तू अपनी और अपने घर के सदस्यों की जान बचाने के लिए जो कर सकता है, कर ले। बाद में तू मुझ पर यह इल्जाम मत लगाना कि मैंने तुझे सफाई का मौका नहीं दिया, यानी कि तुझे चेताया नहीं।
Name: Hatyara Kanoon
Format: PDF
Language: Hindi
Pages: 315
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Series: Monika Pandit Series
Novel Type: Crime, Thriller & Suspense
Writer: Tiger
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“सिर्फ एक घंटा बाकी रह गया है शेषनाग !” वो व्यंग्यपूर्वक हंसती हुई बोली——“अपने वादे के मुताबिक या तो तुम मेरी जुबान खुलवाकर दिखाओ, वरना सारी उम्र दादी मां की गुलामी करने के लिए तैयार हो जाओ ।” “मैं चलता हूं।” कहकर शेषनाग दरवाजे की ओर बढ़ा। “क्यों, मेरी जुबान खुलवाने की सभी कोशिशें कर-करके थक चुके हो ?”
“अभी एक घंटा बाकी है।” शेषनाग उसे घूरकर बोला- “मैं अपने कमरे में जा रहा हूं।” “काफी थक चुके हो, इसलिए आराम करने जा रहे हो ?” “नहीं! अपने कमरे में जाकर मैं एक ऐसा इंतजाम करने जा रहा हूं, जिससे तू मुझे सब कुछ बताने के लिए तैयार हो जाएगी और दौड़ी-दौड़ीं मेरे पास चली आएगी।” प्रत्युत्तर में यूं कहकहे लगाने लगी दादी मां की एजेंट, जैसे शेषनाग का मजाक उड़ा रही हो । कुर्सी वाला डाकू एक ऐसी लड़की की कहानी, जिसके चार पिता थे। पहला हिन्दू, दूसरा मुस्लिम, तीसरा सिक्ख और चौथा ईसाई ।
Name: Kursi Wala Daaku
Format: PDF
Language: Hindi
Pages: 372
Size: 36.4 MB
Series: Sheshnag Shamli Series
Novel Type: Crime, Thriller & Suspense
Writer: Tiger
https://www.comixtream.com/free-download-kursi-wala-daaku-tiger-hindi-novel-pdf/
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“सिर्फ एक घंटा बाकी रह गया है शेषनाग !” वो व्यंग्यपूर्वक हंसती हुई बोली——“अपने वादे के मुताबिक या तो तुम मेरी जुबान खुलवाकर दिखाओ, वरना सारी उम्र दादी मां की गुलामी करने के लिए तैयार हो जाओ ।” “मैं चलता हूं।” कहकर शेषनाग दरवाजे की ओर बढ़ा। “क्यों, मेरी जुबान खुलवाने की सभी कोशिशें कर-करके थक चुके हो ?”
“अभी एक घंटा बाकी है।” शेषनाग उसे घूरकर बोला- “मैं अपने कमरे में जा रहा हूं।” “काफी थक चुके हो, इसलिए आराम करने जा रहे हो ?” “नहीं! अपने कमरे में जाकर मैं एक ऐसा इंतजाम करने जा रहा हूं, जिससे तू मुझे सब कुछ बताने के लिए तैयार हो जाएगी और दौड़ी-दौड़ीं मेरे पास चली आएगी।” प्रत्युत्तर में यूं कहकहे लगाने लगी दादी मां की एजेंट, जैसे शेषनाग का मजाक उड़ा रही हो । कुर्सी वाला डाकू एक ऐसी लड़की की कहानी, जिसके चार पिता थे। पहला हिन्दू, दूसरा मुस्लिम, तीसरा सिक्ख और चौथा ईसाई ।
Name: Kursi Wala Daaku
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Pages: 372
Size: 36.4 MB
Series: Sheshnag Shamli Series
Novel Type: Crime, Thriller & Suspense
Writer: Tiger
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“वापस लौट जाओ साहब।” कोठी के मेन गेट पर खड़े चार डों में से एक खूंखार सा दिखने वाला गुंडा कड़े स्वर में बोला- “आइंदा भूलकर भी यहां मत आना।” “तुम लोग मुझे जानते हो?” शेषनाग ने एक-एक करके उन्हें घूरते हुए पूछा। “हमने क्या करना है जानकर? हमें तो यह ऑर्डर मिला है कि अंदर किसी को न आने दिया जाए, अगर कोई जबरदस्ती घुसने की कोशिश करे तो…” “तो क्या ?” उसने जेब से रिवॉल्वर निकालकर शेषनाग को दिखाया। “इस बंगले में आखिर हो क्या रहा है?” शेषनाग ने पूछा। “कुछ नहीं हो रहा है।” गुंडा बोला- “अगर कुछ हो भी रहा है तो तुम्हें इससे कोई मतलब नहीं होना चाहिए।” “मुझे मतलब है।” “लौट जाओ साहब! क्यों मरना चाहते हो?” “एक पुलिस ऑफिसर को मार सकोगे?” “मैं तुम्हारे टुकड़े-टुकड़े करके चौक पर सजा सकता हूं, अगर यकीन न हो तो अंदर घुसने की कोशिश करके देखो।” “अगर मैं अपनी ड्यूटी पर होता।” शेषनाग उसे घूरकर बोला – ” अगर अंदर घुसना एक सरकारी काम होता, तो तुम्हारे जैसे बीस-पच्चीस भी मुझे नहीं रोक पाते। फिलहाल अंदर जाना मेरी बहुत बड़ी जरूरत नहीं है ।”- “तो फिर लीट जाओ साहब!” “लौटना तो मुझे है ही, लेकिन तुम लोगों को तुम्हारी औकात बताकर ही लौटूंगा।”
Name: Nayee Nasl Ka Gunda
Format: PDF
Language: Hindi
Pages: 272
Size: 18.2 MB
Series: Sheshnag Shamli Series
Novel Type: Crime, Thriller & Suspense
Writer: Tiger
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#Hindi_Novels #Thriller_and_Suspense_Novels #Tiger_Novels
“वापस लौट जाओ साहब।” कोठी के मेन गेट पर खड़े चार डों में से एक खूंखार सा दिखने वाला गुंडा कड़े स्वर में बोला- “आइंदा भूलकर भी यहां मत आना।” “तुम लोग मुझे जानते हो?” शेषनाग ने एक-एक करके उन्हें घूरते हुए पूछा। “हमने क्या करना है जानकर? हमें तो यह ऑर्डर मिला है कि अंदर किसी को न आने दिया जाए, अगर कोई जबरदस्ती घुसने की कोशिश करे तो…” “तो क्या ?” उसने जेब से रिवॉल्वर निकालकर शेषनाग को दिखाया। “इस बंगले में आखिर हो क्या रहा है?” शेषनाग ने पूछा। “कुछ नहीं हो रहा है।” गुंडा बोला- “अगर कुछ हो भी रहा है तो तुम्हें इससे कोई मतलब नहीं होना चाहिए।” “मुझे मतलब है।” “लौट जाओ साहब! क्यों मरना चाहते हो?” “एक पुलिस ऑफिसर को मार सकोगे?” “मैं तुम्हारे टुकड़े-टुकड़े करके चौक पर सजा सकता हूं, अगर यकीन न हो तो अंदर घुसने की कोशिश करके देखो।” “अगर मैं अपनी ड्यूटी पर होता।” शेषनाग उसे घूरकर बोला – ” अगर अंदर घुसना एक सरकारी काम होता, तो तुम्हारे जैसे बीस-पच्चीस भी मुझे नहीं रोक पाते। फिलहाल अंदर जाना मेरी बहुत बड़ी जरूरत नहीं है ।”- “तो फिर लीट जाओ साहब!” “लौटना तो मुझे है ही, लेकिन तुम लोगों को तुम्हारी औकात बताकर ही लौटूंगा।”
Name: Nayee Nasl Ka Gunda
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Pages: 272
Size: 18.2 MB
Series: Sheshnag Shamli Series
Novel Type: Crime, Thriller & Suspense
Writer: Tiger
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Free Download Hara Hua Sikandar Tiger Hindi Novel Pdf
मैंने तुम्हारी आंखों पर काली पट्टी बांधनी है।” “उसकी क्या जरूरत है?”
“जरूरत है। तुम अगर अपनी खैरियत चाहती हो तो चुपचाप पट्टी बंधवा लो। अगर थोड़ी-सी भी होशियारी • दिखाने की कोशिश करोगी तो मैं एक गोली तुम्हारी उस टांग पर मारूंगी जो सही सलामत है और दूसरी गोली उस हाथ पर मारूंगी जो सही सलामत हैं। उसके बाद मुझे तुम्हारी आंखों पर पट्टी बांधने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। बोलो, क्या तुम ऐसा चाहती हो?” “नहीं।” सुनयना का स्वर जोरों से कांपा । “कभी शामली का नाम सुना है ?” “कौन शामली ?” “एक फरार मुजरिम है। कई राज्यों की पुलिस उसे शिकारी कुत्तों की तरह ढूंढ़ रही है। उसने कई कत्ल किए हैं। यहां तक कि एक राज्य के मुख्यमंत्री तक का भी।” “मैं उसे नहीं जानती।”“अब जान लो ! वह मैं ही हूं।”
टाइगर की कलम से निकला शेषनाग-शामली सीरीज का एक और सनसनीखेज उपन्यास, – जो आपको हृदय की गहराई तक झकझोर देगा ।
Name: Hara Hua Sikandar
Format: PDF
Language: Hindi
Pages: 272
Size: 18.6 MB
Series: Sheshnag Shamli Series
Novel Type: Crime, Thriller & Suspense
Writer: Tiger
https://www.comixtream.com/free-download-hara-hua-sikandar-tiger-hindi-novel-pdf/
#Hindi_Novels #Thriller_and_Suspense_Novels #Tiger_Novels
मैंने तुम्हारी आंखों पर काली पट्टी बांधनी है।” “उसकी क्या जरूरत है?”
“जरूरत है। तुम अगर अपनी खैरियत चाहती हो तो चुपचाप पट्टी बंधवा लो। अगर थोड़ी-सी भी होशियारी • दिखाने की कोशिश करोगी तो मैं एक गोली तुम्हारी उस टांग पर मारूंगी जो सही सलामत है और दूसरी गोली उस हाथ पर मारूंगी जो सही सलामत हैं। उसके बाद मुझे तुम्हारी आंखों पर पट्टी बांधने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। बोलो, क्या तुम ऐसा चाहती हो?” “नहीं।” सुनयना का स्वर जोरों से कांपा । “कभी शामली का नाम सुना है ?” “कौन शामली ?” “एक फरार मुजरिम है। कई राज्यों की पुलिस उसे शिकारी कुत्तों की तरह ढूंढ़ रही है। उसने कई कत्ल किए हैं। यहां तक कि एक राज्य के मुख्यमंत्री तक का भी।” “मैं उसे नहीं जानती।”“अब जान लो ! वह मैं ही हूं।”
टाइगर की कलम से निकला शेषनाग-शामली सीरीज का एक और सनसनीखेज उपन्यास, – जो आपको हृदय की गहराई तक झकझोर देगा ।
Name: Hara Hua Sikandar
Format: PDF
Language: Hindi
Pages: 272
Size: 18.6 MB
Series: Sheshnag Shamli Series
Novel Type: Crime, Thriller & Suspense
Writer: Tiger
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शेषनाग की आंखें दहक उठीं। उसने कमिश्नर को कहर नजरों से घूरते हुए कहा- “ये दादागिरी या गुंडागर्दी मुझ पर नहीं चलेगी। अगर मुझसे जरा भी जबर्दस्ती की गई तो अंजाम काफी खतरनाक होगा।””क्या अंजाम खतरनाक होगा?” “तुम्हारी ये हिजड़ों के फौज।” शेषनाग पुलिस फोर्स की और इशारा करके बोला – “सबसे बड़ा घोटाला होने से नहीं रोक पाएगी। पूरी दुनिया में थू-थू हो जाएगी तुम्हारी। बच्चा-बच्चा जान जाएगा कि एक कमिश्नर की दादागिरी के कारण ही हुआ है घोटाला। जिसे रोका जा सकता था। समय रहते जिसकी पोल खोली जा सकती थी।” तब पहली बार कमिश्नर तनिक विचलित दिखाई दिया। “आप लाख कोशिश करें तो भी ऐसा कोई क्लू नहीं मिलने वाला, जो यह साबित करता हो कि दुनिया का सबसे बड़ा घोटाला करने की योजना बनाई जा चुकी है, जबकि मैं।” शेषनाग अपने दाएं हाथ की पहली उंगली से अपनी छाती पर दस्तक देते हुए बोला- “मैं उन लोगों के बारे में भी जान चुका हूं, जिन्होंने यह योजना बनाई है। जो इस योजना पर काम कर रहे हैं।” “कौन हैं वे लोग?” ” नो क्वेश्चन । कोई सवाल नहीं।” शेषनाग उंगली उठाकर बोला – ” अगर आप घोटाले को रोकना चाहते हैं, अगर आप घोटाला होने से पहले ही उसका दाफाश चाहते हैं तो बताइए, वरना मैं जा रहा हूं।”
” म… मैं ऐसा चाहता हूं।” कमिश्नर मरी आवाज में बोला।
Name: Sabse Bada Ghotala
Format: PDF
Language: Hindi
Pages: 386
Size: 33.3 MB
Series: Sheshnag Shamli Series
Novel Type: Crime, Thriller & Suspense
Writer: Tiger
https://www.comixtream.com/free-download-sabse-bada-ghotala-tiger-hindi-novel-pdf/
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शेषनाग की आंखें दहक उठीं। उसने कमिश्नर को कहर नजरों से घूरते हुए कहा- “ये दादागिरी या गुंडागर्दी मुझ पर नहीं चलेगी। अगर मुझसे जरा भी जबर्दस्ती की गई तो अंजाम काफी खतरनाक होगा।””क्या अंजाम खतरनाक होगा?” “तुम्हारी ये हिजड़ों के फौज।” शेषनाग पुलिस फोर्स की और इशारा करके बोला – “सबसे बड़ा घोटाला होने से नहीं रोक पाएगी। पूरी दुनिया में थू-थू हो जाएगी तुम्हारी। बच्चा-बच्चा जान जाएगा कि एक कमिश्नर की दादागिरी के कारण ही हुआ है घोटाला। जिसे रोका जा सकता था। समय रहते जिसकी पोल खोली जा सकती थी।” तब पहली बार कमिश्नर तनिक विचलित दिखाई दिया। “आप लाख कोशिश करें तो भी ऐसा कोई क्लू नहीं मिलने वाला, जो यह साबित करता हो कि दुनिया का सबसे बड़ा घोटाला करने की योजना बनाई जा चुकी है, जबकि मैं।” शेषनाग अपने दाएं हाथ की पहली उंगली से अपनी छाती पर दस्तक देते हुए बोला- “मैं उन लोगों के बारे में भी जान चुका हूं, जिन्होंने यह योजना बनाई है। जो इस योजना पर काम कर रहे हैं।” “कौन हैं वे लोग?” ” नो क्वेश्चन । कोई सवाल नहीं।” शेषनाग उंगली उठाकर बोला – ” अगर आप घोटाले को रोकना चाहते हैं, अगर आप घोटाला होने से पहले ही उसका दाफाश चाहते हैं तो बताइए, वरना मैं जा रहा हूं।”
” म… मैं ऐसा चाहता हूं।” कमिश्नर मरी आवाज में बोला।
Name: Sabse Bada Ghotala
Format: PDF
Language: Hindi
Pages: 386
Size: 33.3 MB
Series: Sheshnag Shamli Series
Novel Type: Crime, Thriller & Suspense
Writer: Tiger
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Free Download Kalyug Multi Starrer Hindi Comics Pdf
Name: Kalyug
Format: PDF
Language: Hindi
Pages: 25
Size: 11.2 MB
Comic Genre: Action
Super Hero: Super Commando Dhruv, Toofan
Publisher: FMC Comics
https://www.comixtream.com/free-download-kalyug-multi-starrer-hindi-comics-pdf/
#Action_Comics #Comics #FMC_Comics
Name: Kalyug
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Language: Hindi
Pages: 25
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Comic Genre: Action
Super Hero: Super Commando Dhruv, Toofan
Publisher: FMC Comics
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