मक्खन की तरह धीरे धीरे उसका लिंग फिसलते हुए अंदर आता गया और उसके मुँह से सिसकी निकलती गयी।
मेरा हाथ चेहरे के पास ही था, मैंने अपने होठों पर हाथ रख कर अपना मुँह बंद कर दिया।
उसने अपने हाथ से एक बार फिर मेरा स्तन दबोच लिया।
मैं अपने काफी अंदर तक उसके कठोर लिंग को महसूस कर पा रही थी।
जितनी धीमी गति से वो अंदर गया, उसी धीमी गति से उसने फिर उसको आधे से भी ज्यादा बाहर निकाला।
अंदर और बाहर निकलते समय उसका लिंग मेरी योनि की दीवारों को रगड़ते हुए जा रहा था और मेरा पूरा शरीर अंदर ही अंदर कम्पन कर रहा था।
दो सेकंड के विराम के बाद एक बार फिर उसी धीमी गति से वो दीवार रगड़ता हुआ अंदर गया।
जितना अंदर वो गया, उससे मुझे अहसास हो गया उसकी लम्बाई कितनी ज्यादा रही होगी.
और जिस तरह वो मेरी दीवारों से रगड़ खा रहा था, इतनी मोटाई मैंने तो पहले महसूस नहीं की थी।
काफी समय तक वह ऐसे ही मालगाड़ी की रफ़्तार से धीरे धीरे अंदर जाता, थोड़ा रुकता और बाहर आता … फिर थोड़ा रूककर अंदर जाता।
हर बार अंदर जाते ही उसकी एक लम्बी आह निकलती।
पता ही नहीं चला कब उसकी मालगाड़ी फ़ास्ट ट्रेन में बदली और कब राजधानी एक्सप्रेस बन गयी।
उसका लिंग अंदर योनि में एकत्रित पानी को तेजी से चीरता हुआ आ जा रहा था जिससे छपाक छपाक की आवाज़ आने लगी थी।
उसके झटकों की गति बढ़ने के साथ छपाक की आवाजें काफी तेज हो गयी थी।
अब वह तेजी से बार बार झटके मारते हुए अंदर बाहर हो रहा था और मेरी उत्तेजना भी बढ़ती जा रही थी।
उसके मुँह से अब आहें निकलने लगी और समय के साथ तेज होती गयी।
मुझे डर लगा कही कोई सुन न ले।
रात के सन्नाटे में ऐसी आवाज़ें ज्यादा ही गूंजती हैं।
पर मैं मन ही मन चुपके से उसका आनन्द भी लेती जा रही थी।
कुछ ही देर में न चाहते हुए भी मैं भी उस आनंद में भीग गयी।
मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी आवाज़ अभी तक दबा के रखी हुई थी जो अब आपे से बाहर होता जा रहा था।
मेरे होंठों के बीच से एक आवाज़ छूट ही गयी।
इसके पहले कि मैं अपने हाथों से ओर जोर से मुँह को दबाती, उसने सुन लिया और डरने की बजाय मेरी आह को मेरी मौन स्वीकृति मान कर उसने कुछ जोर के झटके मुझे मारे जिससे मेरी हल्की चीख निकलने लगी।
अब कोई फायदा नहीं था आवाज़ दबाने का … जिस चीज़ के लिए मैं कुछ महीने से तड़प रही थी, वह मिली तो भी इस तरह से … और वह भी किस व्यक्ति से, यह सपने में भी नहीं सोचा था।
उसने अब मेरे ब्लाउज और ब्रा को पूरी तरह मेरे शरीर से अलग कर दिया था।
अब मेरे शरीर पर एक भी वस्त्र नहीं था और ना ही उसके!
पर अब हमें कपड़ों की परवाह नहीं थी, हम दोनों नंगे इन यौनानन्द के क्षणों को पूरी तरह सफल बनाने में जुट गए।
हम दोनों की आहें एक ही सुर में छपाकों की आवाज़ से ताल मिला रही थी।
इतनी देर करने के बाद भी उसकी शक्ति क्षीण नहीं हुई थी और उसी गति से उसके झटके निर्बाध जारी थे।
मैं अपनी योनि के बाहर कुछ तरल पदार्थ रिसता हुआ महसूस कर पा रही थी जो उसके लिंग के बाहर आते वक़्त साथ बाहर आ रहा था।
अब मैं अपने चरम की तरफ बढ़ती जा रही थी और दुआ कर रही थी कि मुझसे पहले कहीं वह छूट ना जाये।
पर शायद इन मर्दों को दूसरी औरतों के साथ करते वक़्त ज्यादा ही ताकत मिल जाती है।
मेरा नशा अब सर तक चढ़ने लगा था और जैसे चक्कर आने लगे.
मैं स्वयं को निश्तेज महसूस करने लगी थी.
ये चरम के नजदीक पहुंचने के संकेत थे।
गैर मर्द के साथ मस्ती करते हुए मैंने अपनी टांगें अब खोल दी, जिससे बाहर छलके पानी से हवा टकराई और एक ठंडक का अहसास हुआ।
टांगें खुलने से उसको और भी बड़ा रास्ता मिला और उसने अपना लिंग और गहराई में डाल दिया।
शायद एक इंच और गहरा अंदर उतर गया था वो!
अगले कुछ मिनट बहुत कीमती थे.
उसने जिस गहराई से एक के बाद एक तेज झटके मारे, मैं पूरा छूट गयी.
मेरी छोटी छोटी आहें चरम पर आते ही एक लम्बी चीख में तबदील हो गयी.
और उसके बाद मेरी कुछ हल्की चीखें निकली और मैंने अपना चरम प्राप्त कर लिया।
मेरे चरम से उसका उत्साहवर्धन हुआ और वह भूखे भेड़िये की तरह आवाजें निकालते हुए झटकों पर झटके मारता रहा।
मेरे स्तनों को वह अब बुरी तरह से मौसम्बी की तरह निचोड़ रहा था।
फिर एक झटका उसका इतनी गहराई में उतरा कि लिंग बाहर नहीं निकला और वहीं पड़ा हुआ कुलबुला कर फुफकारने लगा।
मैंने अपने अंदर एक गर्म लावा महसूस किया.
उसने सारा पानी अंदर छोड़ दिया था।
वह कुछ देर तक ऐसे ही निढाल पड़ा रहा।
सारी प्रतिक्रियायें शांत हो चुकी थी जैसे एक तूफ़ान के बाद की शांति।
अब भी वह मुझे झकड़े हुए था
💦💦💦💦💦💦
ट्रेन में मिली बुर्के वाली भाभी की होटल में चुदाई
💦💦💦💦💦💦
हॉट भाभी पोर्न कहानी में मुंबई की लोकल ट्रेन में मेरी दोस्ती पर्दे वाली एक भाभी से हुई. हमने होटल में मिलकर चुदाई का मजा लेने का प्रोग्राम बनाया.
आप सभी को मेरा नमस्कार.
मैं जतिन हूँ मुंबई से!
मेरा हाथ चेहरे के पास ही था, मैंने अपने होठों पर हाथ रख कर अपना मुँह बंद कर दिया।
उसने अपने हाथ से एक बार फिर मेरा स्तन दबोच लिया।
मैं अपने काफी अंदर तक उसके कठोर लिंग को महसूस कर पा रही थी।
जितनी धीमी गति से वो अंदर गया, उसी धीमी गति से उसने फिर उसको आधे से भी ज्यादा बाहर निकाला।
अंदर और बाहर निकलते समय उसका लिंग मेरी योनि की दीवारों को रगड़ते हुए जा रहा था और मेरा पूरा शरीर अंदर ही अंदर कम्पन कर रहा था।
दो सेकंड के विराम के बाद एक बार फिर उसी धीमी गति से वो दीवार रगड़ता हुआ अंदर गया।
जितना अंदर वो गया, उससे मुझे अहसास हो गया उसकी लम्बाई कितनी ज्यादा रही होगी.
और जिस तरह वो मेरी दीवारों से रगड़ खा रहा था, इतनी मोटाई मैंने तो पहले महसूस नहीं की थी।
काफी समय तक वह ऐसे ही मालगाड़ी की रफ़्तार से धीरे धीरे अंदर जाता, थोड़ा रुकता और बाहर आता … फिर थोड़ा रूककर अंदर जाता।
हर बार अंदर जाते ही उसकी एक लम्बी आह निकलती।
पता ही नहीं चला कब उसकी मालगाड़ी फ़ास्ट ट्रेन में बदली और कब राजधानी एक्सप्रेस बन गयी।
उसका लिंग अंदर योनि में एकत्रित पानी को तेजी से चीरता हुआ आ जा रहा था जिससे छपाक छपाक की आवाज़ आने लगी थी।
उसके झटकों की गति बढ़ने के साथ छपाक की आवाजें काफी तेज हो गयी थी।
अब वह तेजी से बार बार झटके मारते हुए अंदर बाहर हो रहा था और मेरी उत्तेजना भी बढ़ती जा रही थी।
उसके मुँह से अब आहें निकलने लगी और समय के साथ तेज होती गयी।
मुझे डर लगा कही कोई सुन न ले।
रात के सन्नाटे में ऐसी आवाज़ें ज्यादा ही गूंजती हैं।
पर मैं मन ही मन चुपके से उसका आनन्द भी लेती जा रही थी।
कुछ ही देर में न चाहते हुए भी मैं भी उस आनंद में भीग गयी।
मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी आवाज़ अभी तक दबा के रखी हुई थी जो अब आपे से बाहर होता जा रहा था।
मेरे होंठों के बीच से एक आवाज़ छूट ही गयी।
इसके पहले कि मैं अपने हाथों से ओर जोर से मुँह को दबाती, उसने सुन लिया और डरने की बजाय मेरी आह को मेरी मौन स्वीकृति मान कर उसने कुछ जोर के झटके मुझे मारे जिससे मेरी हल्की चीख निकलने लगी।
अब कोई फायदा नहीं था आवाज़ दबाने का … जिस चीज़ के लिए मैं कुछ महीने से तड़प रही थी, वह मिली तो भी इस तरह से … और वह भी किस व्यक्ति से, यह सपने में भी नहीं सोचा था।
उसने अब मेरे ब्लाउज और ब्रा को पूरी तरह मेरे शरीर से अलग कर दिया था।
अब मेरे शरीर पर एक भी वस्त्र नहीं था और ना ही उसके!
पर अब हमें कपड़ों की परवाह नहीं थी, हम दोनों नंगे इन यौनानन्द के क्षणों को पूरी तरह सफल बनाने में जुट गए।
हम दोनों की आहें एक ही सुर में छपाकों की आवाज़ से ताल मिला रही थी।
इतनी देर करने के बाद भी उसकी शक्ति क्षीण नहीं हुई थी और उसी गति से उसके झटके निर्बाध जारी थे।
मैं अपनी योनि के बाहर कुछ तरल पदार्थ रिसता हुआ महसूस कर पा रही थी जो उसके लिंग के बाहर आते वक़्त साथ बाहर आ रहा था।
अब मैं अपने चरम की तरफ बढ़ती जा रही थी और दुआ कर रही थी कि मुझसे पहले कहीं वह छूट ना जाये।
पर शायद इन मर्दों को दूसरी औरतों के साथ करते वक़्त ज्यादा ही ताकत मिल जाती है।
मेरा नशा अब सर तक चढ़ने लगा था और जैसे चक्कर आने लगे.
मैं स्वयं को निश्तेज महसूस करने लगी थी.
ये चरम के नजदीक पहुंचने के संकेत थे।
गैर मर्द के साथ मस्ती करते हुए मैंने अपनी टांगें अब खोल दी, जिससे बाहर छलके पानी से हवा टकराई और एक ठंडक का अहसास हुआ।
टांगें खुलने से उसको और भी बड़ा रास्ता मिला और उसने अपना लिंग और गहराई में डाल दिया।
शायद एक इंच और गहरा अंदर उतर गया था वो!
अगले कुछ मिनट बहुत कीमती थे.
उसने जिस गहराई से एक के बाद एक तेज झटके मारे, मैं पूरा छूट गयी.
मेरी छोटी छोटी आहें चरम पर आते ही एक लम्बी चीख में तबदील हो गयी.
और उसके बाद मेरी कुछ हल्की चीखें निकली और मैंने अपना चरम प्राप्त कर लिया।
मेरे चरम से उसका उत्साहवर्धन हुआ और वह भूखे भेड़िये की तरह आवाजें निकालते हुए झटकों पर झटके मारता रहा।
मेरे स्तनों को वह अब बुरी तरह से मौसम्बी की तरह निचोड़ रहा था।
फिर एक झटका उसका इतनी गहराई में उतरा कि लिंग बाहर नहीं निकला और वहीं पड़ा हुआ कुलबुला कर फुफकारने लगा।
मैंने अपने अंदर एक गर्म लावा महसूस किया.
उसने सारा पानी अंदर छोड़ दिया था।
वह कुछ देर तक ऐसे ही निढाल पड़ा रहा।
सारी प्रतिक्रियायें शांत हो चुकी थी जैसे एक तूफ़ान के बाद की शांति।
अब भी वह मुझे झकड़े हुए था
💦💦💦💦💦💦
ट्रेन में मिली बुर्के वाली भाभी की होटल में चुदाई
💦💦💦💦💦💦
हॉट भाभी पोर्न कहानी में मुंबई की लोकल ट्रेन में मेरी दोस्ती पर्दे वाली एक भाभी से हुई. हमने होटल में मिलकर चुदाई का मजा लेने का प्रोग्राम बनाया.
आप सभी को मेरा नमस्कार.
मैं जतिन हूँ मुंबई से!
मेरे साथ कुछ दिन पहले की हुई सच्ची घटना है यह!
मैं उम्मीद करता हूं कि आपको बहुत पसंद आएगी.
मैं एक 5 फीट 8 इंच का नौजवान हूँ. मेरी उम्र 25 साल है.
दिखने में भी मैं काफी अच्छा हूँ.
मेरा लंड 7 इंच से ज्यादा बड़ा है और ये करीब 3 इंच मोटा है.
अब लड़के, लड़कियां, मर्द, औरतें और ख़ास कर भाभियां अभी से अपनी अंडरवियर में हाथ डाल लें.
यह करीब 3 महीने पहले की बात है.
मैं और मेरा एक दोस्त हम दोनों मुंबई के बस स्टैन्ड से लौट रहे थे.
करीब रात के एक बजे का समय था.
दादर से हम दोनों ने कल्याण के लिए लोकल ट्रेन से सफर करना शुरू किया.
कुछ देर बाद कुर्ला स्टेशन आया और एक खूबसूरत सी भाभी ने ट्रेन में अपना कदम रखा.
वह बुर्का पहन कर चढ़ी ही थी कि उसकी नजरें मेरी नजरों से टकरा गईं क्योंकि उसने अपना नकाब हटाया हुआ था.
उसी पल मैंने एक क्यूट सी स्माइल पास करते हुए उन्हें सीट ऑफर की.
रात में ट्रेन में इतनी भीड़ नहीं थी.
वे मेरे करीब ही बैठ गईं.
वे एकदम चुप थीं.
पर उनसे ज्यादा देर चुप नहीं रहा गया.
उन्होंने मुझसे बात करनी शुरू करते हुए हैलो कहा.
मैंने भी उन्हें हैलो कहा.
उन्होंने पूछा- किधर जा रहे हो?
मैंने लंबी सांस भरते हुए कहा- जहां नसीब ले जाए!
वे हंस दीं और बोली- हुंअ … इंटरेस्टिंग पर्सन … क्या नाम है तुम्हारा!
मैंने बताते हुए कहा- आप को क्या लगता है कि मुझे देख कर आपको क्या नाम अच्छा लगेगा?
वे बोलीं- मतलब?
मैंने कहा- बंदे को आप जो भी नाम देना चाहें … मैं उसी को रख लूँगा.
भाभी फिर से हंस दीं.
फिर उन्होंने मुझसे मेरी पढ़ाई के बारे में पूछ लिया और इस तरह से हमारे बीच बातचीत होना शुरू हो गई.
बातों ही बातों में उन्होंने मुझे जॉब के लिए पूछ लिया.
मैंने कहां- हाँ करता तो हूँ, पर अभी मैं और अच्छी जॉब देख रहा हूँ.
उस पर उन्होंने मुझसे कहा- तुम अपना रेज़्यूमे मुझे मेल कर दो, मैं कुछ देखती हूँ.
यह कहते हुए भाभी ने अपनी मेल आईडी मुझे बता दी.
मैंने उसी वक्त उन्हें मेल सेंड करके अपना रेज़्यूमे भेज दिया.
फिर हमारा स्टेशन आया तो हम सब उतर गए.
फिर करीब एक घंटा बाद मैं अपने फ्रेंड को बस में बैठा कर अपने घर जा रहा था.
तभी एक अंजान नंबर से मुझे व्हाट्सैप पर मैसेज आया ‘हाय सन्नो हियर, अभी थोड़ी देर पहले मैंने तुम्हारा रेज़्यूमे देखा!’
यह पढ़ते ही मैं खुश हो गया कि भाभी ने अपना नाम बताते हुए मैसेज किया है.
मैं उनसे मैसेज पर ही बात करने लगा.
अब हम दोनों के बीच मस्ती की बातें होने लगीं.
मैंने उनका नंबर सेव कर लिया और हमारी बातें परवान चढ़ने लगीं.
कुछ दिन में ही हम दोनों एक दूसरे के प्रति आकर्षित होने लगे.
फोन पर भी हमारी बात होने लगी थी.
कभी कभी मिल भी लेते और मूवी आदि भी देखने चले जाते.
इस तरह से हमारे बीच थोड़ा थोड़ा रोमांस भी होने लगा था.
अब जल्दी ही हमारे बीच कुछ इस तरह की आग लग गई थी कि सिर्फ मिलने से नहीं बुझ रही थी.
इस बात को हम दोनों ही महसूस करने लगे थे.
एक रात छत पर भाभी और मैं फोन पर बात कर रहे थे.
हम दोनों ने मिलने का प्लान किया.
हमारे बीच यह तय हुआ कि हम दोनों किसी होटल में जाएंगे.
उसी रात हम दोनों आपस में बातें करने लगे कि कमरे में जाकर क्या करना है.
अब इस बात पर न तो भाभी ही कुछ कह रही थीं और न ही मैं कुछ कह रहा था कि कमरे में जाकर करना क्या है.
जबकि हम दोनों ही समझ रहे थे कि उधर हम दोनों को चुदाई करने का खुल कर मौका मिलेगा.
भाभी मेरी तरफ देख कर हंसने लगीं और मेरे मजे लेने लगीं- तो बताओ न उधर जाकर क्या करना है?
मैंने कहा- उधर आपको मैं जीवन में आनन्द प्राप्त करने का एक गूढ़ रहस्य बताऊंगा.
भाभी बोलीं- तो वह रहस्य तो तुम इधर फोन पर भी बता सकते हो?
मैंने कहा- नहीं, वह अकेले और एकांत वाली जगह में ही बताया जाता है!
भाभी ने फिर से चुटकी ली- तो इधर भी तो हम दोनों अकेले में ही हैं और इधर एकांत भी है!
मैंने दिमाग लगाया कि भाभी मेरी ले रही हैं. अब कुछ ऐसा करना पड़ेगा … जिससे भाभी खुल जाएं.
तो मैंने कहा- ओके … तो क्या आप उस रहस्य को जाने के लिए अभी तैयार हैं?
भाभी मुस्कुराईं और बोलीं- हाँ मगर पहले बताओ तो!
मैंने कहा- आपको उस रहस्य को जाने के लिए एक अनुष्ठान करना है और उस अनुष्ठान में आपको अपने सारे कपड़े उतारने पड़ेंगे … तो बताइए भाभी जी क्या आप अभी तैयार हैं?
भाभी हंस पड़ीं और बोलीं- तुम सच में बहुत चालू पुर्जा हो. चलो मैं समझ गई कि तुमको मेरे साथ क्या करना है!
अब मैंने डोर पकड़ ली और कहा- अच्छा तो बताइए कि आपको क्या समझ में आ गया है?
भाभी छूटते ही बोलीं- तुमको मुझे चोदना है … सीधे सीधे बोलो न यार!
मैंने उनके मुँह से चोदना शब्द सुना तो मैंने कहा- या यूं कहें कि आपको मेरे साथ चुदवाना है!
वे हो हो करके हंसने लगीं और हम दोनों के बीच सेक्स की बातें होने लगीं.
कुछ ही देर में हमारे बीच इतनी ज्यादा बेचैनी हो गई थी कि क्या ही बताऊं.
मैं उम्मीद करता हूं कि आपको बहुत पसंद आएगी.
मैं एक 5 फीट 8 इंच का नौजवान हूँ. मेरी उम्र 25 साल है.
दिखने में भी मैं काफी अच्छा हूँ.
मेरा लंड 7 इंच से ज्यादा बड़ा है और ये करीब 3 इंच मोटा है.
अब लड़के, लड़कियां, मर्द, औरतें और ख़ास कर भाभियां अभी से अपनी अंडरवियर में हाथ डाल लें.
यह करीब 3 महीने पहले की बात है.
मैं और मेरा एक दोस्त हम दोनों मुंबई के बस स्टैन्ड से लौट रहे थे.
करीब रात के एक बजे का समय था.
दादर से हम दोनों ने कल्याण के लिए लोकल ट्रेन से सफर करना शुरू किया.
कुछ देर बाद कुर्ला स्टेशन आया और एक खूबसूरत सी भाभी ने ट्रेन में अपना कदम रखा.
वह बुर्का पहन कर चढ़ी ही थी कि उसकी नजरें मेरी नजरों से टकरा गईं क्योंकि उसने अपना नकाब हटाया हुआ था.
उसी पल मैंने एक क्यूट सी स्माइल पास करते हुए उन्हें सीट ऑफर की.
रात में ट्रेन में इतनी भीड़ नहीं थी.
वे मेरे करीब ही बैठ गईं.
वे एकदम चुप थीं.
पर उनसे ज्यादा देर चुप नहीं रहा गया.
उन्होंने मुझसे बात करनी शुरू करते हुए हैलो कहा.
मैंने भी उन्हें हैलो कहा.
उन्होंने पूछा- किधर जा रहे हो?
मैंने लंबी सांस भरते हुए कहा- जहां नसीब ले जाए!
वे हंस दीं और बोली- हुंअ … इंटरेस्टिंग पर्सन … क्या नाम है तुम्हारा!
मैंने बताते हुए कहा- आप को क्या लगता है कि मुझे देख कर आपको क्या नाम अच्छा लगेगा?
वे बोलीं- मतलब?
मैंने कहा- बंदे को आप जो भी नाम देना चाहें … मैं उसी को रख लूँगा.
भाभी फिर से हंस दीं.
फिर उन्होंने मुझसे मेरी पढ़ाई के बारे में पूछ लिया और इस तरह से हमारे बीच बातचीत होना शुरू हो गई.
बातों ही बातों में उन्होंने मुझे जॉब के लिए पूछ लिया.
मैंने कहां- हाँ करता तो हूँ, पर अभी मैं और अच्छी जॉब देख रहा हूँ.
उस पर उन्होंने मुझसे कहा- तुम अपना रेज़्यूमे मुझे मेल कर दो, मैं कुछ देखती हूँ.
यह कहते हुए भाभी ने अपनी मेल आईडी मुझे बता दी.
मैंने उसी वक्त उन्हें मेल सेंड करके अपना रेज़्यूमे भेज दिया.
फिर हमारा स्टेशन आया तो हम सब उतर गए.
फिर करीब एक घंटा बाद मैं अपने फ्रेंड को बस में बैठा कर अपने घर जा रहा था.
तभी एक अंजान नंबर से मुझे व्हाट्सैप पर मैसेज आया ‘हाय सन्नो हियर, अभी थोड़ी देर पहले मैंने तुम्हारा रेज़्यूमे देखा!’
यह पढ़ते ही मैं खुश हो गया कि भाभी ने अपना नाम बताते हुए मैसेज किया है.
मैं उनसे मैसेज पर ही बात करने लगा.
अब हम दोनों के बीच मस्ती की बातें होने लगीं.
मैंने उनका नंबर सेव कर लिया और हमारी बातें परवान चढ़ने लगीं.
कुछ दिन में ही हम दोनों एक दूसरे के प्रति आकर्षित होने लगे.
फोन पर भी हमारी बात होने लगी थी.
कभी कभी मिल भी लेते और मूवी आदि भी देखने चले जाते.
इस तरह से हमारे बीच थोड़ा थोड़ा रोमांस भी होने लगा था.
अब जल्दी ही हमारे बीच कुछ इस तरह की आग लग गई थी कि सिर्फ मिलने से नहीं बुझ रही थी.
इस बात को हम दोनों ही महसूस करने लगे थे.
एक रात छत पर भाभी और मैं फोन पर बात कर रहे थे.
हम दोनों ने मिलने का प्लान किया.
हमारे बीच यह तय हुआ कि हम दोनों किसी होटल में जाएंगे.
उसी रात हम दोनों आपस में बातें करने लगे कि कमरे में जाकर क्या करना है.
अब इस बात पर न तो भाभी ही कुछ कह रही थीं और न ही मैं कुछ कह रहा था कि कमरे में जाकर करना क्या है.
जबकि हम दोनों ही समझ रहे थे कि उधर हम दोनों को चुदाई करने का खुल कर मौका मिलेगा.
भाभी मेरी तरफ देख कर हंसने लगीं और मेरे मजे लेने लगीं- तो बताओ न उधर जाकर क्या करना है?
मैंने कहा- उधर आपको मैं जीवन में आनन्द प्राप्त करने का एक गूढ़ रहस्य बताऊंगा.
भाभी बोलीं- तो वह रहस्य तो तुम इधर फोन पर भी बता सकते हो?
मैंने कहा- नहीं, वह अकेले और एकांत वाली जगह में ही बताया जाता है!
भाभी ने फिर से चुटकी ली- तो इधर भी तो हम दोनों अकेले में ही हैं और इधर एकांत भी है!
मैंने दिमाग लगाया कि भाभी मेरी ले रही हैं. अब कुछ ऐसा करना पड़ेगा … जिससे भाभी खुल जाएं.
तो मैंने कहा- ओके … तो क्या आप उस रहस्य को जाने के लिए अभी तैयार हैं?
भाभी मुस्कुराईं और बोलीं- हाँ मगर पहले बताओ तो!
मैंने कहा- आपको उस रहस्य को जाने के लिए एक अनुष्ठान करना है और उस अनुष्ठान में आपको अपने सारे कपड़े उतारने पड़ेंगे … तो बताइए भाभी जी क्या आप अभी तैयार हैं?
भाभी हंस पड़ीं और बोलीं- तुम सच में बहुत चालू पुर्जा हो. चलो मैं समझ गई कि तुमको मेरे साथ क्या करना है!
अब मैंने डोर पकड़ ली और कहा- अच्छा तो बताइए कि आपको क्या समझ में आ गया है?
भाभी छूटते ही बोलीं- तुमको मुझे चोदना है … सीधे सीधे बोलो न यार!
मैंने उनके मुँह से चोदना शब्द सुना तो मैंने कहा- या यूं कहें कि आपको मेरे साथ चुदवाना है!
वे हो हो करके हंसने लगीं और हम दोनों के बीच सेक्स की बातें होने लगीं.
कुछ ही देर में हमारे बीच इतनी ज्यादा बेचैनी हो गई थी कि क्या ही बताऊं.
उनमें से एक बात यह भी भाभी ने कही थी कि उन्हें हार्डकोर सेक्स बहुत पसंद है.
जब मैंने उनसे उसकी डिटेल में जानना चाहा तो उन्होंने वही सब बताया कि कोई शहद लगा कर चाटे या बेल्ट से मारे या मोम टपकाते हुए दूध चूसे. यह सब जानकर मैं मन ही मन प्लान बनाने लगा था कि भाभी को कैसे चोदना है.
फिर हम दोनों अलग हुए और सोने लगे.
मगर मुझे तो समझो नींद ही नहीं आ रही थी.
जैसे तैसे वह रात कटी और सवेरा हुआ.
मैंने अपने बैग में एक मोमबत्ती और लाइटर के साथ कुछ कंडोम के पैकेट रखे. फिर याद आया तो साथ में हनी और श्रीखंड भी ले लिया.
अब मैं स्टेशन पर पहुंच गया और भाभी के आने का इंतज़ार करने लगा.
कुछ ही देर में भाभी मस्त लाल रंग के चूड़ीदार सलवार कमीज में आती दिखाई दीं.
उन्होंने अपने बाल खुले रखे हुए थे.
होंठों पर लाल लिपस्टिक, हाथ में लेडी बैग टांग कर पेन्सिल हील्स पहने हुई आईं और मुस्कुराने लगीं.
मेरी तो उनके ऊपर से नजर ही नहीं हट रही थी.
कसम से भाभी आज कयामत लग रही थीं और आस पास खड़े सब लोग उन्हें ही घूरे जा रहे थे.
उनकी उठी हुई गोल गोल चूचियां और गांड ठुमकाने वाली उनकी कॅट वॉक पर तो मेरा दिल ही घायल हो गया था.
एक मन तो किया कि इन्हें अभी ही गोद में उठा कर शुरू हो जाऊं.
पर स्टेशन था, काफ़ी लोग थे. वैसा किया नहीं जा सकता था.
तभी हम हम दोनों होटल में पहुंचे और कमरे में जाते ही हम एक दूसरे पर भूखे जानवरों की तरह टूट पड़े.
मैं भाभी के खुले बालों में हाथ डाल कर लिप्स टू लिप्स किस करते हुए मजा लेने लगा.
भाभी के चूचों को मैं उनकी कमीज के ऊपर से ही सहला रहा था.
तभी अचानक से भाभी मुझसे अलग होकर बोलीं- एक मिनट रुको यार, मुझे कपड़ों में मजा नहीं आ रहा.
उन्होंने यह कहा तो मैंने उन्हें अपनी बांहों में खींचा और उनकी कमीज के पीछे लगे हुए हुक्स खोल दिए.
साथ ही भाभी की गर्दन पर किस करते हुए मैंने उनकी ड्रेस को खोलना चालू कर दिया था.
भाभी मेरे साथ रमण सुख का आनन्द लिए जा रही थीं.
मैंने उनके एक कान में अपनी नाक से गर्म सांस छोड़ते हुए उन्हें घुमाया और अपने सामने की ओर कर दिया.
आह भाभी के बड़े बड़े एकदम टाइट गुब्बारे उनकी पिंक कलर की ब्रा में कसे हुए दिखने लगे थे.
भाभी एकदम माल लग रही थीं.
तभी मैंने अपने हाथ उनके पीछे ले जाकर उनकी ब्रा का हुक भी खोल कर उसे निकाल दिया और उनके खड़े हो चुके कड़क गुलाबी चूचुक को किस करने लगा.
वे मानो एकदम से बिफर उठीं और अगले ही पल वे मेरी शर्ट के बटन्स खोलने लगीं.
हम दोनों किस भी किए जा रहे थे.
तब हम दोनों इतने जोश में थे कि कब मेरी छाती उनकी नंगी चूचियों से रगड़ने लगी, कुछ पता ही नहीं चला.
मैं भाभी की कमर पर किस करते हुए उनकी सलवार के नाड़े की तरफ बढ़ा और जल्दी से उनके नाड़े को ढीला करके उसे भी उतार दिया.
अब भाभी मेरे सामने एक नेट वाली पतली सी पैंटी में थीं और मैं भी अंडरवियर में रह गया था.
हम दोनों एक दूसरे हर अंग को पागलों की तरह चाट और चूस रहे थे.
हमारी कामुक सिसकारियां कमरे में एक मधुर संगीत बिखेर रही थीं.
‘आह … उउह …’
भाभी भी पूरी गर्म हो चुकी थीं और बार बार कह रही थीं- अब बस देर न करो … मुझे चोद दो जल्दी से आह!
मैंने झट से भाभी की पैंटी को खींच कर निकाला और उन्हें नंगी कर दिया.
आह क्या चिकनी गोरी चूत थी उनकी, ऐसी लग रही थी जैसे आज सुबह ही झांटों की सफाई की हो.
मैंने उनकी पैंटी को किस किया और उसको लंबी सांस लेकर सूंघ कर साइड में फेंक दिया.
फिर झट से अपने बैग से मधु निकाल कर उन्हें चटाया और उनकी चूत पर शहद की बोतल उड़ेल कर खूब सारा शहद चूत पर टपका दिया.
भाभी अपनी चूत पर ठंडे शहद का स्पर्श पाकर अचकचा उठीं और जब तक वे संभल पातीं कि मैंने उनकी चूत पर अपनी जीभ फेर दी.
भाभी एकदम से सिहर गईं और उनके कंठ से एक मीठी सी ‘आह मर गई’ निकल पड़ा.
मैं लगा रहा और उनकी चूत को चाटने लगा.
कभी चूत को चुम्मी करता, तो कभी चाट लेता.
उसी दौरान मैंने अपने हाथ में पकड़ी हुई शहद की शीशी को उनके एक दूध के निप्पल पर टपका दिया.
वे अब शहद का मजा समझ गई थीं तो अपनी उंगली से अपने निप्पल पर शहद मलने लगीं और मेरे हाथ से शहद की शीशी लेकर अपने दूसरे दूध के निप्पल पर लगाने लगीं.
फिर उन्होंने मेरे बाल पकड़ कर मुझे दूध चूसने का इशारा किया.
तो मैं भाभी के मम्मों पर आ गया.
अब कभी मैं उनके एक दूध के निप्पल पर लगा शहद चूसता, तो कभी दूसरे को चूसने लगता.
यूं ही खेल चलता रहा. चूत और चूचियों को मैंने छक कर चूसा.
मेरे ऐसे करने से भाभी अब तक दो बार झड़ चुकी थीं और वे पागलों की तरह मेरे लंड से चुदने के लिए मचल रही थीं- आह … अब चोद भी दो … प्लीज चोद दो!
मैं उन्हें तड़फाए जा रहा था क्योंकि प्यास जितनी गहरी हो, बुझाने में उतना मजा ज्यादा आता है.
जब मैंने उनसे उसकी डिटेल में जानना चाहा तो उन्होंने वही सब बताया कि कोई शहद लगा कर चाटे या बेल्ट से मारे या मोम टपकाते हुए दूध चूसे. यह सब जानकर मैं मन ही मन प्लान बनाने लगा था कि भाभी को कैसे चोदना है.
फिर हम दोनों अलग हुए और सोने लगे.
मगर मुझे तो समझो नींद ही नहीं आ रही थी.
जैसे तैसे वह रात कटी और सवेरा हुआ.
मैंने अपने बैग में एक मोमबत्ती और लाइटर के साथ कुछ कंडोम के पैकेट रखे. फिर याद आया तो साथ में हनी और श्रीखंड भी ले लिया.
अब मैं स्टेशन पर पहुंच गया और भाभी के आने का इंतज़ार करने लगा.
कुछ ही देर में भाभी मस्त लाल रंग के चूड़ीदार सलवार कमीज में आती दिखाई दीं.
उन्होंने अपने बाल खुले रखे हुए थे.
होंठों पर लाल लिपस्टिक, हाथ में लेडी बैग टांग कर पेन्सिल हील्स पहने हुई आईं और मुस्कुराने लगीं.
मेरी तो उनके ऊपर से नजर ही नहीं हट रही थी.
कसम से भाभी आज कयामत लग रही थीं और आस पास खड़े सब लोग उन्हें ही घूरे जा रहे थे.
उनकी उठी हुई गोल गोल चूचियां और गांड ठुमकाने वाली उनकी कॅट वॉक पर तो मेरा दिल ही घायल हो गया था.
एक मन तो किया कि इन्हें अभी ही गोद में उठा कर शुरू हो जाऊं.
पर स्टेशन था, काफ़ी लोग थे. वैसा किया नहीं जा सकता था.
तभी हम हम दोनों होटल में पहुंचे और कमरे में जाते ही हम एक दूसरे पर भूखे जानवरों की तरह टूट पड़े.
मैं भाभी के खुले बालों में हाथ डाल कर लिप्स टू लिप्स किस करते हुए मजा लेने लगा.
भाभी के चूचों को मैं उनकी कमीज के ऊपर से ही सहला रहा था.
तभी अचानक से भाभी मुझसे अलग होकर बोलीं- एक मिनट रुको यार, मुझे कपड़ों में मजा नहीं आ रहा.
उन्होंने यह कहा तो मैंने उन्हें अपनी बांहों में खींचा और उनकी कमीज के पीछे लगे हुए हुक्स खोल दिए.
साथ ही भाभी की गर्दन पर किस करते हुए मैंने उनकी ड्रेस को खोलना चालू कर दिया था.
भाभी मेरे साथ रमण सुख का आनन्द लिए जा रही थीं.
मैंने उनके एक कान में अपनी नाक से गर्म सांस छोड़ते हुए उन्हें घुमाया और अपने सामने की ओर कर दिया.
आह भाभी के बड़े बड़े एकदम टाइट गुब्बारे उनकी पिंक कलर की ब्रा में कसे हुए दिखने लगे थे.
भाभी एकदम माल लग रही थीं.
तभी मैंने अपने हाथ उनके पीछे ले जाकर उनकी ब्रा का हुक भी खोल कर उसे निकाल दिया और उनके खड़े हो चुके कड़क गुलाबी चूचुक को किस करने लगा.
वे मानो एकदम से बिफर उठीं और अगले ही पल वे मेरी शर्ट के बटन्स खोलने लगीं.
हम दोनों किस भी किए जा रहे थे.
तब हम दोनों इतने जोश में थे कि कब मेरी छाती उनकी नंगी चूचियों से रगड़ने लगी, कुछ पता ही नहीं चला.
मैं भाभी की कमर पर किस करते हुए उनकी सलवार के नाड़े की तरफ बढ़ा और जल्दी से उनके नाड़े को ढीला करके उसे भी उतार दिया.
अब भाभी मेरे सामने एक नेट वाली पतली सी पैंटी में थीं और मैं भी अंडरवियर में रह गया था.
हम दोनों एक दूसरे हर अंग को पागलों की तरह चाट और चूस रहे थे.
हमारी कामुक सिसकारियां कमरे में एक मधुर संगीत बिखेर रही थीं.
‘आह … उउह …’
भाभी भी पूरी गर्म हो चुकी थीं और बार बार कह रही थीं- अब बस देर न करो … मुझे चोद दो जल्दी से आह!
मैंने झट से भाभी की पैंटी को खींच कर निकाला और उन्हें नंगी कर दिया.
आह क्या चिकनी गोरी चूत थी उनकी, ऐसी लग रही थी जैसे आज सुबह ही झांटों की सफाई की हो.
मैंने उनकी पैंटी को किस किया और उसको लंबी सांस लेकर सूंघ कर साइड में फेंक दिया.
फिर झट से अपने बैग से मधु निकाल कर उन्हें चटाया और उनकी चूत पर शहद की बोतल उड़ेल कर खूब सारा शहद चूत पर टपका दिया.
भाभी अपनी चूत पर ठंडे शहद का स्पर्श पाकर अचकचा उठीं और जब तक वे संभल पातीं कि मैंने उनकी चूत पर अपनी जीभ फेर दी.
भाभी एकदम से सिहर गईं और उनके कंठ से एक मीठी सी ‘आह मर गई’ निकल पड़ा.
मैं लगा रहा और उनकी चूत को चाटने लगा.
कभी चूत को चुम्मी करता, तो कभी चाट लेता.
उसी दौरान मैंने अपने हाथ में पकड़ी हुई शहद की शीशी को उनके एक दूध के निप्पल पर टपका दिया.
वे अब शहद का मजा समझ गई थीं तो अपनी उंगली से अपने निप्पल पर शहद मलने लगीं और मेरे हाथ से शहद की शीशी लेकर अपने दूसरे दूध के निप्पल पर लगाने लगीं.
फिर उन्होंने मेरे बाल पकड़ कर मुझे दूध चूसने का इशारा किया.
तो मैं भाभी के मम्मों पर आ गया.
अब कभी मैं उनके एक दूध के निप्पल पर लगा शहद चूसता, तो कभी दूसरे को चूसने लगता.
यूं ही खेल चलता रहा. चूत और चूचियों को मैंने छक कर चूसा.
मेरे ऐसे करने से भाभी अब तक दो बार झड़ चुकी थीं और वे पागलों की तरह मेरे लंड से चुदने के लिए मचल रही थीं- आह … अब चोद भी दो … प्लीज चोद दो!
मैं उन्हें तड़फाए जा रहा था क्योंकि प्यास जितनी गहरी हो, बुझाने में उतना मजा ज्यादा आता है.
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फिर मैंने उनके दुप्पटे से उनके हाथ पैर बांध कर उन्हें बेड पर सीधा लिटा दिया.
इसके बाद मैंने अपने रूमाल से उनकी आंखों को बंद कर दिया.
अब मैं मोमबत्ती जला कर तैयार हो गया.
मैं अपने एक हाथ में जली हुई मोमबत्ती और एक हाथ में बेल्ट लेकर आगे आया.
फिर जैसे ही मैंने उनके दूध पर मोम टपकाई … भाभी चीख उठीं.
उनकी इस चीख ने मुझे बड़ा सुकून दिया था.
दोस्तो, यह एक ऐसा सेक्स है, जिसे करें से जो सुख मिलता है वह चुदाई के सुख को दोगुना कर देता है.
अब मैं कभी उन्हें मोमबत्ती के मोम टपका कर मजा लेता तो कभी उनकी उसी जगह को चूम कर चूस लेता और किस कर देता, तो कभी उसी जगह पर बेल्ट से मारता.
भाभी का अंग अंग एकदम लाल टमाटर की तरह हो गया था और वे चुदने के लिए एकदम बेताब हो गई थीं.
अब मैंने जरा सा श्रीखंड अपने लंड पर लगाया और उनके मुँह में देकर लंड चुसवाया व चटवाया.
भाभी भी खूब मज़े से लंड को ऐसे चाटे जा रही थीं जैसे बरसों बाद कोई लंड मिला हो.
उन्होंने मेरे लौड़े को चूस चूस कर एकदम लाल कर दिया था.
मेरा लंबा और मोटा लंड अब चूत के लिए बेताब हो उठा था.
मैंने अब भाभी के हाथ पैर खोल कर उन्हें खड़ा कर दिया और दीवार से टिका दिया.
फिर भाभी की चूत की दरार में अपने लंड को धीरे से रगड़ने लगा.
भाभी भी अपनी चूत आगे को बढ़ा कर मेरे लंड को अपनी चूत में अन्दर लेने की कोशिश कर रही थीं.
पर लंड आसानी से कहां घुसने वाला था.
तभी मैंने अपने बैग से एक कंडोम निकाल कर लंड पर चढ़ा दिया.
फिर भाभी को किस करते हुए मैंने उनकी चूत पर लंड का सुपारा सैट कर दिया और ताक़त लगा कर पहला झटका देते हुए उनके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया.
पहले तो कुछ पल के लिए उनकी आवाज अटक गई.
फिर जैसे ही लंड का टोपा चूत को चीरता हुआ अन्दर घुसा, उनके पसीने छूट गए.
वे चिल्लाने की … और मेरी पकड़ से छूटने की कोशिश करने लगीं, छटपटाने लगीं.
पर मैंने उन्हें नहीं छूटने दिया, बल्कि अपनी पकड़ और मजबूत करते हुए थोड़ा ठहर गया.
फिर कुछ पल बाद जब भाभी को आराम हुआ तो वे अभी थोड़ी सामान्य हुई ही थीं कि मैंने एक और जोर का झटका मार दिया.
तभी उनकी दर्द भरी कामुक आवाज निकल गई- उईई मांआ मर गईइइ … भोसड़ी के मां चोद दी तूने मेरी चूत की … निकाल अपने लवड़े को … आह … साले ने चूत ही फाड़ दी!
उधर वे चिल्ला रही थीं और इधर में भी कहां कुछ मानने वाला था.
इसी बीच मैं एक जोर का झटका देते हुए अपना पूरा लंड भाभी की चूत में डाल दिया.
वे एकदम से ‘आआवव … मांआह … र गई …’ की आवाज करती हुई चीखीं.
तभी मैंने लंड थोड़ा सा बाहर को निकाल लिया.
फिर देखा तो मेरे लंड पर खून लगा था.
इसका मतलब भाभी की चूत फट गई थी, तभी उनको थोड़ा दर्द हुआ था.
मैं बड़े प्यार से उन्हें किस करते हुए चोदने लगा.
कुछ ही देर में भाभी को भी मज़ा आने लगा और वे भी अपनी चूत आगे पीछे करने लगीं.
मैं उन्हें और तेज़ गति से चोदने लगा.
भाभी ‘उई … एयेए … उई अम्म्म!’ किये जा रही थीं.
इसी तरह करीब लगभग 15 मिनट की चुदाई में भाभी दो बार और झड़ चुकी थीं.
अब मेरा भी होने ही वाला था, तभी मैंने भाभी से कहा- सन्नो मैं आ रहा हूँ!
वे अपनी चूत से लंड निकाल कर नीचे बैठ गईं और लंड से कंडोम को निकाल कर सामने बैठ गईं.
मैंने अपने लंड की पिचकारी भाभी के चेहरे पर दे मारी.
कुछ बूँदें उकी गोरी गुलाबी चूचियों पर भी जा गिरीं.
मैं एकदम से निढाल हो गया था, तो मैंने भाभी को पकड़ा और उन्होंने मुझे पकड़ लिया.
हम दोनों एक दूसरे को पकड़ कर वहीं बेड पर गिर कर सो गए.
कुछ देर बाद उठे तो फिर से सहवास शुरू हो गया.
उस दिन मैंने 3 बार अलग अलग पोज़िशन में भाभी की चुदाई का मजा लिया.
अभी भी जब भी मौका मिलता है, तो हम दोनों चुदाई कर लेते हैं.
आगे की सेक्स कहानी को मैं फिर लिखूंगा कि कैसे मैंने सन्नो जान की गांड मारी और उन्हें चोद कर खुश किया.
आपको मेरी सेक्स कहानी कैसी लगी,
💦💦💦💦💦💦
मैंने अपनी बीवी को नीग्रो से चुदवाया
💦💦💦💦💦💦
ब्लैक डिक नीग्रो सेक्स कहानी में मेरी गर्म बीवी मेरी चुदाई से खुश नहीं थी. एक दिन मेरे ऑफिस में एक अफ़्रीकी आया तो मैंने अपनी बीवी को उससे चुदवाने की योजना बनाई.
मैं करीब 48 वर्ष का हो गया हूँ और मेरी धर्मपत्नी करीब 35 वर्ष की होगी.
हम दोनों की उम्र में लगभग 13 वर्ष का फासला है.
शायद इसी वजह से मैं अपनी बीवी की चुदाई के मामले में कमजोर पड़ गया था.
जब भी मैं उससे चुदाई की मांग करता था तो वह बुरा सा मुँह बनाकर मना कर देती.
वह कह देती- जब कुछ होता ही नहीं है, तो क्यों आग लगा कर छोड़ देते हो, चुपचाप सो जाओ!
इसी तरह से दिन कटते रहे.
एक बार की बात है हमारी कम्पनी में कोई ग्राहक साउथ अफ्रीका से आने वाला था.
उस दिन करीब 12 बजे हमारी फैक्ट्री में उसका विजिट था.
जब वह आया तो हम लोगों ने उसका बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया.
इसके बाद मैंने अपने रूमाल से उनकी आंखों को बंद कर दिया.
अब मैं मोमबत्ती जला कर तैयार हो गया.
मैं अपने एक हाथ में जली हुई मोमबत्ती और एक हाथ में बेल्ट लेकर आगे आया.
फिर जैसे ही मैंने उनके दूध पर मोम टपकाई … भाभी चीख उठीं.
उनकी इस चीख ने मुझे बड़ा सुकून दिया था.
दोस्तो, यह एक ऐसा सेक्स है, जिसे करें से जो सुख मिलता है वह चुदाई के सुख को दोगुना कर देता है.
अब मैं कभी उन्हें मोमबत्ती के मोम टपका कर मजा लेता तो कभी उनकी उसी जगह को चूम कर चूस लेता और किस कर देता, तो कभी उसी जगह पर बेल्ट से मारता.
भाभी का अंग अंग एकदम लाल टमाटर की तरह हो गया था और वे चुदने के लिए एकदम बेताब हो गई थीं.
अब मैंने जरा सा श्रीखंड अपने लंड पर लगाया और उनके मुँह में देकर लंड चुसवाया व चटवाया.
भाभी भी खूब मज़े से लंड को ऐसे चाटे जा रही थीं जैसे बरसों बाद कोई लंड मिला हो.
उन्होंने मेरे लौड़े को चूस चूस कर एकदम लाल कर दिया था.
मेरा लंबा और मोटा लंड अब चूत के लिए बेताब हो उठा था.
मैंने अब भाभी के हाथ पैर खोल कर उन्हें खड़ा कर दिया और दीवार से टिका दिया.
फिर भाभी की चूत की दरार में अपने लंड को धीरे से रगड़ने लगा.
भाभी भी अपनी चूत आगे को बढ़ा कर मेरे लंड को अपनी चूत में अन्दर लेने की कोशिश कर रही थीं.
पर लंड आसानी से कहां घुसने वाला था.
तभी मैंने अपने बैग से एक कंडोम निकाल कर लंड पर चढ़ा दिया.
फिर भाभी को किस करते हुए मैंने उनकी चूत पर लंड का सुपारा सैट कर दिया और ताक़त लगा कर पहला झटका देते हुए उनके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया.
पहले तो कुछ पल के लिए उनकी आवाज अटक गई.
फिर जैसे ही लंड का टोपा चूत को चीरता हुआ अन्दर घुसा, उनके पसीने छूट गए.
वे चिल्लाने की … और मेरी पकड़ से छूटने की कोशिश करने लगीं, छटपटाने लगीं.
पर मैंने उन्हें नहीं छूटने दिया, बल्कि अपनी पकड़ और मजबूत करते हुए थोड़ा ठहर गया.
फिर कुछ पल बाद जब भाभी को आराम हुआ तो वे अभी थोड़ी सामान्य हुई ही थीं कि मैंने एक और जोर का झटका मार दिया.
तभी उनकी दर्द भरी कामुक आवाज निकल गई- उईई मांआ मर गईइइ … भोसड़ी के मां चोद दी तूने मेरी चूत की … निकाल अपने लवड़े को … आह … साले ने चूत ही फाड़ दी!
उधर वे चिल्ला रही थीं और इधर में भी कहां कुछ मानने वाला था.
इसी बीच मैं एक जोर का झटका देते हुए अपना पूरा लंड भाभी की चूत में डाल दिया.
वे एकदम से ‘आआवव … मांआह … र गई …’ की आवाज करती हुई चीखीं.
तभी मैंने लंड थोड़ा सा बाहर को निकाल लिया.
फिर देखा तो मेरे लंड पर खून लगा था.
इसका मतलब भाभी की चूत फट गई थी, तभी उनको थोड़ा दर्द हुआ था.
मैं बड़े प्यार से उन्हें किस करते हुए चोदने लगा.
कुछ ही देर में भाभी को भी मज़ा आने लगा और वे भी अपनी चूत आगे पीछे करने लगीं.
मैं उन्हें और तेज़ गति से चोदने लगा.
भाभी ‘उई … एयेए … उई अम्म्म!’ किये जा रही थीं.
इसी तरह करीब लगभग 15 मिनट की चुदाई में भाभी दो बार और झड़ चुकी थीं.
अब मेरा भी होने ही वाला था, तभी मैंने भाभी से कहा- सन्नो मैं आ रहा हूँ!
वे अपनी चूत से लंड निकाल कर नीचे बैठ गईं और लंड से कंडोम को निकाल कर सामने बैठ गईं.
मैंने अपने लंड की पिचकारी भाभी के चेहरे पर दे मारी.
कुछ बूँदें उकी गोरी गुलाबी चूचियों पर भी जा गिरीं.
मैं एकदम से निढाल हो गया था, तो मैंने भाभी को पकड़ा और उन्होंने मुझे पकड़ लिया.
हम दोनों एक दूसरे को पकड़ कर वहीं बेड पर गिर कर सो गए.
कुछ देर बाद उठे तो फिर से सहवास शुरू हो गया.
उस दिन मैंने 3 बार अलग अलग पोज़िशन में भाभी की चुदाई का मजा लिया.
अभी भी जब भी मौका मिलता है, तो हम दोनों चुदाई कर लेते हैं.
आगे की सेक्स कहानी को मैं फिर लिखूंगा कि कैसे मैंने सन्नो जान की गांड मारी और उन्हें चोद कर खुश किया.
आपको मेरी सेक्स कहानी कैसी लगी,
💦💦💦💦💦💦
मैंने अपनी बीवी को नीग्रो से चुदवाया
💦💦💦💦💦💦
ब्लैक डिक नीग्रो सेक्स कहानी में मेरी गर्म बीवी मेरी चुदाई से खुश नहीं थी. एक दिन मेरे ऑफिस में एक अफ़्रीकी आया तो मैंने अपनी बीवी को उससे चुदवाने की योजना बनाई.
मैं करीब 48 वर्ष का हो गया हूँ और मेरी धर्मपत्नी करीब 35 वर्ष की होगी.
हम दोनों की उम्र में लगभग 13 वर्ष का फासला है.
शायद इसी वजह से मैं अपनी बीवी की चुदाई के मामले में कमजोर पड़ गया था.
जब भी मैं उससे चुदाई की मांग करता था तो वह बुरा सा मुँह बनाकर मना कर देती.
वह कह देती- जब कुछ होता ही नहीं है, तो क्यों आग लगा कर छोड़ देते हो, चुपचाप सो जाओ!
इसी तरह से दिन कटते रहे.
एक बार की बात है हमारी कम्पनी में कोई ग्राहक साउथ अफ्रीका से आने वाला था.
उस दिन करीब 12 बजे हमारी फैक्ट्री में उसका विजिट था.
जब वह आया तो हम लोगों ने उसका बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया.
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वह आदमी था तो करीब 22 साल का, पर देखने में लम्बा चौड़ा, काला-कलूटा और करीब 6 फुट का अच्छा खासा नौजवान था!
यह ब्लैक डिक नीग्रो सेक्स कहानी इसी के साथ मेरी बीवी की है.
मालिक ने उसको मेरे साथ लगा दिया और उससे कहा कि यह आदमी आप की मदद करेगा!
उसके साथ काम करते करते रात के 10 बज गए.
अब हम लोग घर जाने की तैयारी करने लगे.
मेरी बाइक पुरानी होने के कारण जल्दी स्टार्ट नहीं हो रही थी.
यह देख कर वह कालू मेरे पास आया और उसने मुझसे पूछा कि क्या प्रॉब्लम हो गई है?
मैंने कहा- कुछ नहीं सब ठीक है.
फिर उसने मुझसे अपने होटल का पता पूछा, तो मैंने बता दिया.
मगर उसकी समझ में नहीं आया.
तो मैंने कहा- अरे सर, इतनी रात में कहां जाओगे. आज की रात आप हमारे यहां ही रुक जाओ!
उसने कुछ सोचा, फिर ओके कहा.
मैं अब उसको उसकी कार में बैठा कर अपने घर की तरफ निकल गया.
रास्ते में ही मैंने बीवी को मैसेज कर दिया- आज मेरे बॉस का ख़ास आदमी मेरे साथ घर आ रहा है, तुम उसकी खातिरदारी करने में कोई कसर नहीं छोड़ना.
इस मामले में मेरी बीवी मेरा बड़ा कहना मानती थी.
उसका ओके का मैसेज आ गया.
फिर रास्ते में शराब की दुकान देख कर मैंने कालू से उसकी मनपसंद शराब के बारे में पूछा.
उसने मुझे बताया.
तो मैंने उसकी पसंद की ब्रांड की एक बोतल ले ली और उसे लेकर घर की तरफ निकल पड़ा.
फिर घर पहुंचा तो बीवी ने दरवाजा खोला.
उस वक्त मेरी बीवी ने एक जालीदार गाउन पहना हुआ था.
कालू ने मेरी बीवी को सेक्सी नजरों से देखा और हम दोनों अन्दर आ गए.
हम दोनों ने दारू पीना शुरू की.
मेरी बीवी को भी दारू से परहेज नहीं था.
वह हम दोनों के लिए चखना में गर्म गर्म पकौड़े तल लाई.
कालू ने एक पैग बना कर मेरी बीवी को भी ऑफर किया तो उसने ले लिया.
मैंने कनखियों से देखा तो कालू मेरी बीवी की चूचियों को ताड़ रहा था और मेरी बीवी को भी उस कालू पर दिल आ गया लग रहा था.
मैंने भी सोचा कि साली मुझे तो चूत देती नहीं है, आज इसकी चुदाई कालू के लौड़े से हुई तो कम से कम ब्लू फिल्म का लाइव टेलिकास्ट तो देखने को मिलेगा.
यही सोच कर मैंने दारू पीने में दिमाग लगाया और उन दोनों की हरकतों को ताड़ने लगा.
इसी सबके बीच हम तीनों का खाने पीने का दौर चलता रहा.
अब तक मैंने भली भांति नोटिस कर लिया था कि कालू पहलवान मेरी बीवी के दूध और उसकी उठी हुई गांड को बड़ी कामुक नजरों से निहार रहा था.
मेरी बीवी भी झुक झुक कर अपने चूचे दिखा कर उसको लाइन दे रही थी.
यह सब देखकर मैंने ज्यादा नशा होने का ड्रामा किया और बीवी से कहा- यार, मुझे नशा ज्यादा हो गया है, तुम मुझे सहारा देकर बिस्तर पर लिटा दो.
मेरी बीवी ने नशीली नजरों से कहा- अरे यार, क्या तुम भी जरा सी दारू में टुन्न हो गए. चलो अब उठो.
उसने मुझे उठाने का प्रयास किया तो मैंने जानबूझ कर उसकी नाइटी को कुछ इस तरह से पकड़ा कि उसकी चूचियां आधी से ज्यादा कालू को दिख गईं.
मैंने गौर किया कि इस बात से मेरी बीवी को जरा सी भी आपत्ति नहीं हुई और उसने कालू को आवाज दे कर कहा- प्लीज हेल्प मी बडी!
कालू फट से उठ कर आया और बहन के लौड़े ने मुझे पकड़ने की जगह मेरी बीवी के चूतड़ पकड़ कर दबा दिए.
मेरी बीवी उंहुं कह कर मुस्कुरा दी.
फिर उन दोनों ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया.
मैं नशे का ड्रामा करता रहा और अपनी आंखों को थोड़ी सी खोल कर देखने लगा कि अब यह दोनों क्या करते हैं.
मैंने देखा कि कालू ने अपनी जेब से सिगरेट निकाली और सुलगा कर मेरी बीवी की तरफ धुआं छोड़ा.
इससे मेरी बीवी हंस दी.
वे दोनों एक दूसरे को निहार रहे थे मगर दोनों की हिम्मत नहीं हो रही थी.
कालू ने मेरी बीवी से पूछा- मैं किधर सोऊंगा!
तब मेरी बीवी ने कहा- यहीं सो जाओ इनके बगल में!
उसने आंख मटका कर पूछा कि तुम कहां सोओगी?
उसने कहा- मैं भी यहीं बगल में लेट जाउंगी.
यह कह कर वह लेट गयी.
इतने में कालू ने भी अपनी पैंट खोल कर अपनी चड्डी में फूलते लंड को हाथ सहलाया, जिसे मेरी बीवी और मैं दोनों ही देखने लगे.
उसने मेरी बीवी को अपना लंड का उभार दिखाया और पैंट को उतार कर एक तरफ रख दिया.
फिर उसने अपनी शर्ट उतारी तो उसकी छौड़ी छाती देख कर मेरी बीवी की आह निकल गई.
बीवी बोली- यू लुक्स माचो मैन!
मैंने मन में सोचा कि माचो नहीं है रंडी … यह मादरचोद है. आज तेरी चूत का कबाड़ा कर देगा.
अब कालू पहलवान जानबूझ कर मेरी बीवी के बाजू में लेट गया.
वह सिर्फ कच्छा में ही लेट गया था.
उन दोनों में बातें होने लगीं. मेरी बीवी को उसके साथ बात करने में बड़ा मजा आ रहा था.
मुझे भी उन दोनों की चुदाई देखे बिना नींद कहां आने वाली थी.
फिर वे दोनों आंख मूँद कर सोने का ड्रामा करने लगे.
मेरी बीवी ने अपने घुटने मोड़े और अपने गाउन को अपने घुटनों से ऊपर चढ़ा लिया.
यह ब्लैक डिक नीग्रो सेक्स कहानी इसी के साथ मेरी बीवी की है.
मालिक ने उसको मेरे साथ लगा दिया और उससे कहा कि यह आदमी आप की मदद करेगा!
उसके साथ काम करते करते रात के 10 बज गए.
अब हम लोग घर जाने की तैयारी करने लगे.
मेरी बाइक पुरानी होने के कारण जल्दी स्टार्ट नहीं हो रही थी.
यह देख कर वह कालू मेरे पास आया और उसने मुझसे पूछा कि क्या प्रॉब्लम हो गई है?
मैंने कहा- कुछ नहीं सब ठीक है.
फिर उसने मुझसे अपने होटल का पता पूछा, तो मैंने बता दिया.
मगर उसकी समझ में नहीं आया.
तो मैंने कहा- अरे सर, इतनी रात में कहां जाओगे. आज की रात आप हमारे यहां ही रुक जाओ!
उसने कुछ सोचा, फिर ओके कहा.
मैं अब उसको उसकी कार में बैठा कर अपने घर की तरफ निकल गया.
रास्ते में ही मैंने बीवी को मैसेज कर दिया- आज मेरे बॉस का ख़ास आदमी मेरे साथ घर आ रहा है, तुम उसकी खातिरदारी करने में कोई कसर नहीं छोड़ना.
इस मामले में मेरी बीवी मेरा बड़ा कहना मानती थी.
उसका ओके का मैसेज आ गया.
फिर रास्ते में शराब की दुकान देख कर मैंने कालू से उसकी मनपसंद शराब के बारे में पूछा.
उसने मुझे बताया.
तो मैंने उसकी पसंद की ब्रांड की एक बोतल ले ली और उसे लेकर घर की तरफ निकल पड़ा.
फिर घर पहुंचा तो बीवी ने दरवाजा खोला.
उस वक्त मेरी बीवी ने एक जालीदार गाउन पहना हुआ था.
कालू ने मेरी बीवी को सेक्सी नजरों से देखा और हम दोनों अन्दर आ गए.
हम दोनों ने दारू पीना शुरू की.
मेरी बीवी को भी दारू से परहेज नहीं था.
वह हम दोनों के लिए चखना में गर्म गर्म पकौड़े तल लाई.
कालू ने एक पैग बना कर मेरी बीवी को भी ऑफर किया तो उसने ले लिया.
मैंने कनखियों से देखा तो कालू मेरी बीवी की चूचियों को ताड़ रहा था और मेरी बीवी को भी उस कालू पर दिल आ गया लग रहा था.
मैंने भी सोचा कि साली मुझे तो चूत देती नहीं है, आज इसकी चुदाई कालू के लौड़े से हुई तो कम से कम ब्लू फिल्म का लाइव टेलिकास्ट तो देखने को मिलेगा.
यही सोच कर मैंने दारू पीने में दिमाग लगाया और उन दोनों की हरकतों को ताड़ने लगा.
इसी सबके बीच हम तीनों का खाने पीने का दौर चलता रहा.
अब तक मैंने भली भांति नोटिस कर लिया था कि कालू पहलवान मेरी बीवी के दूध और उसकी उठी हुई गांड को बड़ी कामुक नजरों से निहार रहा था.
मेरी बीवी भी झुक झुक कर अपने चूचे दिखा कर उसको लाइन दे रही थी.
यह सब देखकर मैंने ज्यादा नशा होने का ड्रामा किया और बीवी से कहा- यार, मुझे नशा ज्यादा हो गया है, तुम मुझे सहारा देकर बिस्तर पर लिटा दो.
मेरी बीवी ने नशीली नजरों से कहा- अरे यार, क्या तुम भी जरा सी दारू में टुन्न हो गए. चलो अब उठो.
उसने मुझे उठाने का प्रयास किया तो मैंने जानबूझ कर उसकी नाइटी को कुछ इस तरह से पकड़ा कि उसकी चूचियां आधी से ज्यादा कालू को दिख गईं.
मैंने गौर किया कि इस बात से मेरी बीवी को जरा सी भी आपत्ति नहीं हुई और उसने कालू को आवाज दे कर कहा- प्लीज हेल्प मी बडी!
कालू फट से उठ कर आया और बहन के लौड़े ने मुझे पकड़ने की जगह मेरी बीवी के चूतड़ पकड़ कर दबा दिए.
मेरी बीवी उंहुं कह कर मुस्कुरा दी.
फिर उन दोनों ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया.
मैं नशे का ड्रामा करता रहा और अपनी आंखों को थोड़ी सी खोल कर देखने लगा कि अब यह दोनों क्या करते हैं.
मैंने देखा कि कालू ने अपनी जेब से सिगरेट निकाली और सुलगा कर मेरी बीवी की तरफ धुआं छोड़ा.
इससे मेरी बीवी हंस दी.
वे दोनों एक दूसरे को निहार रहे थे मगर दोनों की हिम्मत नहीं हो रही थी.
कालू ने मेरी बीवी से पूछा- मैं किधर सोऊंगा!
तब मेरी बीवी ने कहा- यहीं सो जाओ इनके बगल में!
उसने आंख मटका कर पूछा कि तुम कहां सोओगी?
उसने कहा- मैं भी यहीं बगल में लेट जाउंगी.
यह कह कर वह लेट गयी.
इतने में कालू ने भी अपनी पैंट खोल कर अपनी चड्डी में फूलते लंड को हाथ सहलाया, जिसे मेरी बीवी और मैं दोनों ही देखने लगे.
उसने मेरी बीवी को अपना लंड का उभार दिखाया और पैंट को उतार कर एक तरफ रख दिया.
फिर उसने अपनी शर्ट उतारी तो उसकी छौड़ी छाती देख कर मेरी बीवी की आह निकल गई.
बीवी बोली- यू लुक्स माचो मैन!
मैंने मन में सोचा कि माचो नहीं है रंडी … यह मादरचोद है. आज तेरी चूत का कबाड़ा कर देगा.
अब कालू पहलवान जानबूझ कर मेरी बीवी के बाजू में लेट गया.
वह सिर्फ कच्छा में ही लेट गया था.
उन दोनों में बातें होने लगीं. मेरी बीवी को उसके साथ बात करने में बड़ा मजा आ रहा था.
मुझे भी उन दोनों की चुदाई देखे बिना नींद कहां आने वाली थी.
फिर वे दोनों आंख मूँद कर सोने का ड्रामा करने लगे.
मेरी बीवी ने अपने घुटने मोड़े और अपने गाउन को अपने घुटनों से ऊपर चढ़ा लिया.
कुछ देर बाद कालू ने आंखें खोल कर देखा कि मेरी बीवी घुटने मोड़ कर सोई हुई थी और उसका गाउन सरक कर उसकी जांघों तक आ गया था.
यह देख कर कालू समझ गया कि झंडी हरी है, तो उसने अपना हाथ धीरे से मेरी बीवी की जांघों पर रख दिया.
कुछ पल बाद वह मेरी बीवी की जांघों को सहलाने लगा.
उसके स्पर्श मात्र से मेरी बीवी ने अपनी दोनों जांघों को फैला दिया.
यह देख कर कालू ने अपने हाथ को सीधा उसकी फुदी पर रख दिया और वह मेरी बीवी की चूत को सहलाने लगा.
मेरी बीवी की बुर पहले से ही मजबूत लंड की चाह में पनिया गई थी.
कालू के सहलाने के कारण मेरी बीवी की चूत चिपचिपी हो गई और रस छोड़ने लगी.
मेरी बीवी भी गजब की रांड थी.
साली वह चुपचाप कालू के हाथ की हरकत का मजा लेने लगी.
अब वह धीरे से उठा और अपने एक हाथ की उंगली से मेरी बीवी की बुर के दाने को कुरेदने लगा.
फिर उसने चूत के छेद में अपनी उंगली डाल दी और अन्दर बाहर करने लगा.
मैं हैरान था कि मेरी बीवी ने अपनी पैंटी कब उतार दी.
फिर मैंने ध्यान से देखा तो उसने एक डोरी वाली पैंटी पहनी हुई थी … जिसे शायद उसने लेटते समय ही ढीली करके अपनी चूत नंगी कर दी थी.
अब खेल शुरू हुआ.
कालू की उंगली ने मेरी बीवी की चूत को चोदा,तो उसने गर्म होकर कालू का हाथ पकड़ लिया और मुस्कुरा कर उसे देखने लगी.
वे दोनों मस्त ही गए थे और चुदाई के लिए उत्तेजित हो उठे थे.
मेरी बीवी ने कालू से चूत चाटने का इशारा किया.
तो वह नीग्रो झट से बैठ गया और पोजीशन बना कर अपना मुँह मेरी बीवी की चूत पर रख कर कुत्ते की तरह चाटने लगा.
उस बहन के लौड़े की जीभ ही इतनी बड़ी थी कि मेरे लंड से ज्यादा गहराई तक जाकर वह मेरी बीवी को अपनी जुबान से चोदने लगा था.
उसकी खुरदुरी जीभ से चूत में रगड़ लगी, तो मेरी बीवी ‘आह आह उई मम्मी’ करने लगी.
वह खुद अपने हाथ से कालू का लंड उसके कच्छे से निकाल कर सहलाने लगी थी.
मैंने कालू का लंड देखा तो मेरी गांड फट गई.
साला ग्यारह इंच का गधे के लंड जैसा लंड था.
मैं समझ गया कि आज मेरी बीवी की चूत के परखचे उड़ने वाले हैं.
कालू पूरी दमखम से मेरी बीवी की चूत चाटने में लगा हुआ था.
मेरी बीवी ने उससे लंड को बाहर निकालने को कहा तो उसने जल्दी से अपना कच्छा उतार दिया.
माय गॉड क्या लंड था … खासा लम्बा और मोटा लंड देख कर मेरी बीवी की चूत ने तो पानी ही छोड़ दिया होगा.
अब कालू भाई ने उससे लंड चूसने का इशारा किया तो वह कालू का लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.
तभी कालू ने हाथ बढ़ा कर शराब की बोतल उठाई और वह उसे अपने लंड पर टपकाने लगा.
इस तरह से कालू ने करीब 60 mL नीट दारू मेरी बीवी को पिला दी थी, साथ ही वह सिगरेट फूँक रहा था तो मेरी बीवी उसकी सिगरेट से कश लगा कर अपना स्वाद ठीक करती जा रही थी.
करीब दस मिनट तक शराब से भीगा हुआ लंड चूसने के बाद मेरी बीवी नशे में टल्ली हो गई थी.
तभी उस कालू ने भी एक बड़ा सा घूंट पिया और मेरी बीवी के मुँह से मुँह लगा कर उसे और ज्यादा शराब पिला दी.
यह देख कर मैं समझ गया कि बंदा बहुत बड़ा मादरचोद है. यह शराब के नशे में टल्ली करके मेरी बीवी की चूत फाड़ेगा, उससे मेरी बीवी को दर्द का अहसास नहीं होगा.
अब मेरी बीवी कालू को अपनी चूत दिखा कर चोदने को बोली.
कालू ने मेरी बीवी की दोनों टांगों को फैला कर 69 की पोज लेकर उसकी चूत की दरार में अपना लंड रख कर जोरदार धक्का मार दिया.
उसका मूसल लंड मेरी बीवी की बुर को चीरते फाड़ते हुए अन्दर चला गया.
मैंने देखा कि करीब आधा से अधिक लंड बुर में घुस गया था.
मेरी बीवी की चीख न निकल पाए, इसके लिए कालू ने अपने मुँह को उसके मुँह पर जमा दिया था.
कुछ देर बाद मेरी बीवी ने अपनी गांड उठा कर दूसरा धक्का मारने का इशारा दिया.
कालू ने दूसरी बार और करारा धक्का मारा और उसका लंड चूत की जड़ तक जाकर धंस गया.
मेरी बीवी का मुँह बंद था, तो वह अपने दांतों को भींच कर दर्द को बर्दाश्त करने लगी.
करीब एक मिनट बाद मेरी बीवी अपनी गांड उठा कर चोदने को बोलने लगी.
अब कालू मेरी बीवी पर सांड की तरह चढ़ कर ताबड़तोड़ धक्के मारने लगा था.
आप खुद सोचो कि जब ग्यारह इंच का मोटा लंड मेरी बीवी की चूत के अन्दर बाहर जाने लगेगा तो मेरी बीवी का क्या हाल होगा.
साली मरी हुई कुतिया सी बिलबिला रही थी.
बहन की लौड़ी का सारा नशा फट गया था- आह आह फट गई मेरी … आह मर गई साले फ्री की चूत समझ कर चोद रहा है … आह हट जा कमीने!
कालू को उसकी हिन्दी समझ में ही नहीं आ रही थी. वह समझा कि मेरी बीवी को चुदने में मजा आ रहा है. सो वह और जोर से पिल पड़ा.
वैसे ही उस पर दारू का नशा चढ़ा हुआ था और कामांध सांड की तरह वह मेरी बीवी को रांड की तरह चोदने में लगा हुआ था.
यह देख कर कालू समझ गया कि झंडी हरी है, तो उसने अपना हाथ धीरे से मेरी बीवी की जांघों पर रख दिया.
कुछ पल बाद वह मेरी बीवी की जांघों को सहलाने लगा.
उसके स्पर्श मात्र से मेरी बीवी ने अपनी दोनों जांघों को फैला दिया.
यह देख कर कालू ने अपने हाथ को सीधा उसकी फुदी पर रख दिया और वह मेरी बीवी की चूत को सहलाने लगा.
मेरी बीवी की बुर पहले से ही मजबूत लंड की चाह में पनिया गई थी.
कालू के सहलाने के कारण मेरी बीवी की चूत चिपचिपी हो गई और रस छोड़ने लगी.
मेरी बीवी भी गजब की रांड थी.
साली वह चुपचाप कालू के हाथ की हरकत का मजा लेने लगी.
अब वह धीरे से उठा और अपने एक हाथ की उंगली से मेरी बीवी की बुर के दाने को कुरेदने लगा.
फिर उसने चूत के छेद में अपनी उंगली डाल दी और अन्दर बाहर करने लगा.
मैं हैरान था कि मेरी बीवी ने अपनी पैंटी कब उतार दी.
फिर मैंने ध्यान से देखा तो उसने एक डोरी वाली पैंटी पहनी हुई थी … जिसे शायद उसने लेटते समय ही ढीली करके अपनी चूत नंगी कर दी थी.
अब खेल शुरू हुआ.
कालू की उंगली ने मेरी बीवी की चूत को चोदा,तो उसने गर्म होकर कालू का हाथ पकड़ लिया और मुस्कुरा कर उसे देखने लगी.
वे दोनों मस्त ही गए थे और चुदाई के लिए उत्तेजित हो उठे थे.
मेरी बीवी ने कालू से चूत चाटने का इशारा किया.
तो वह नीग्रो झट से बैठ गया और पोजीशन बना कर अपना मुँह मेरी बीवी की चूत पर रख कर कुत्ते की तरह चाटने लगा.
उस बहन के लौड़े की जीभ ही इतनी बड़ी थी कि मेरे लंड से ज्यादा गहराई तक जाकर वह मेरी बीवी को अपनी जुबान से चोदने लगा था.
उसकी खुरदुरी जीभ से चूत में रगड़ लगी, तो मेरी बीवी ‘आह आह उई मम्मी’ करने लगी.
वह खुद अपने हाथ से कालू का लंड उसके कच्छे से निकाल कर सहलाने लगी थी.
मैंने कालू का लंड देखा तो मेरी गांड फट गई.
साला ग्यारह इंच का गधे के लंड जैसा लंड था.
मैं समझ गया कि आज मेरी बीवी की चूत के परखचे उड़ने वाले हैं.
कालू पूरी दमखम से मेरी बीवी की चूत चाटने में लगा हुआ था.
मेरी बीवी ने उससे लंड को बाहर निकालने को कहा तो उसने जल्दी से अपना कच्छा उतार दिया.
माय गॉड क्या लंड था … खासा लम्बा और मोटा लंड देख कर मेरी बीवी की चूत ने तो पानी ही छोड़ दिया होगा.
अब कालू भाई ने उससे लंड चूसने का इशारा किया तो वह कालू का लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.
तभी कालू ने हाथ बढ़ा कर शराब की बोतल उठाई और वह उसे अपने लंड पर टपकाने लगा.
इस तरह से कालू ने करीब 60 mL नीट दारू मेरी बीवी को पिला दी थी, साथ ही वह सिगरेट फूँक रहा था तो मेरी बीवी उसकी सिगरेट से कश लगा कर अपना स्वाद ठीक करती जा रही थी.
करीब दस मिनट तक शराब से भीगा हुआ लंड चूसने के बाद मेरी बीवी नशे में टल्ली हो गई थी.
तभी उस कालू ने भी एक बड़ा सा घूंट पिया और मेरी बीवी के मुँह से मुँह लगा कर उसे और ज्यादा शराब पिला दी.
यह देख कर मैं समझ गया कि बंदा बहुत बड़ा मादरचोद है. यह शराब के नशे में टल्ली करके मेरी बीवी की चूत फाड़ेगा, उससे मेरी बीवी को दर्द का अहसास नहीं होगा.
अब मेरी बीवी कालू को अपनी चूत दिखा कर चोदने को बोली.
कालू ने मेरी बीवी की दोनों टांगों को फैला कर 69 की पोज लेकर उसकी चूत की दरार में अपना लंड रख कर जोरदार धक्का मार दिया.
उसका मूसल लंड मेरी बीवी की बुर को चीरते फाड़ते हुए अन्दर चला गया.
मैंने देखा कि करीब आधा से अधिक लंड बुर में घुस गया था.
मेरी बीवी की चीख न निकल पाए, इसके लिए कालू ने अपने मुँह को उसके मुँह पर जमा दिया था.
कुछ देर बाद मेरी बीवी ने अपनी गांड उठा कर दूसरा धक्का मारने का इशारा दिया.
कालू ने दूसरी बार और करारा धक्का मारा और उसका लंड चूत की जड़ तक जाकर धंस गया.
मेरी बीवी का मुँह बंद था, तो वह अपने दांतों को भींच कर दर्द को बर्दाश्त करने लगी.
करीब एक मिनट बाद मेरी बीवी अपनी गांड उठा कर चोदने को बोलने लगी.
अब कालू मेरी बीवी पर सांड की तरह चढ़ कर ताबड़तोड़ धक्के मारने लगा था.
आप खुद सोचो कि जब ग्यारह इंच का मोटा लंड मेरी बीवी की चूत के अन्दर बाहर जाने लगेगा तो मेरी बीवी का क्या हाल होगा.
साली मरी हुई कुतिया सी बिलबिला रही थी.
बहन की लौड़ी का सारा नशा फट गया था- आह आह फट गई मेरी … आह मर गई साले फ्री की चूत समझ कर चोद रहा है … आह हट जा कमीने!
कालू को उसकी हिन्दी समझ में ही नहीं आ रही थी. वह समझा कि मेरी बीवी को चुदने में मजा आ रहा है. सो वह और जोर से पिल पड़ा.
वैसे ही उस पर दारू का नशा चढ़ा हुआ था और कामांध सांड की तरह वह मेरी बीवी को रांड की तरह चोदने में लगा हुआ था.
कुछ ही देर बाद मेरी बीवी की चूत में जलजला आ गया और अब चिकनाई की वजह से लंड सटासट अन्दर बाहर होने लगा.
और कुछ ही देर में मेरी बीवी को भी मजा आने लगा- आह …और जोर से चोद कलमुँहे … आह मस्त लंड है तेरा … आज चूत चुद कर तृप्त हो गई!
उधर कालू दबा कर मेरी बीवी की चूत को भोसड़ा बनाने की नीयत से चोद रहा था.
उसके नीचे दबी मेरी बीवी खूब मजा ले लेकर अपनी गांड उछाल उछाल कर मोटा लंड गपागप ले रही थी.
करीब चालीस मिनट तक लगातार चोदने के बाद मेरी बीवी निढाल हो गई और वह कालू से लंड को बाहर निकालने को बोलने लगी.
जब कालू ने अपना लंड बाहर निकाला, तब मैंने देखा उसका लंड चूत के रस से एकदम सफेद हुआ पड़ा था.
अब वह मेरी बीवी से घोड़ी बनने को कहने लगा.
जैसे ही मेरी बीवी घोड़ी बनी, कालू भाई ने उसकी गांड के छेद पर अपना लंड रख दिया और धक्का दे मारा.
बीवी की मां चुद गई.
कालू ने अपने हाथ से उसका मुँह दबाया हुआ था तो आवाज नहीं निकल पाई.
कालू ने लगातार दूसरा, तीसरा और ताबड़तोड़ गांड फाड़ सीन क्रियेट कर दिया.
जैसे ही मेरी बीवी के मुँह से कालू का हाथ हटा, वह चीखने लगी- आह मादरचोद साले कालू … बहन के लौड़े जरा आराम से चोद हरामी! तेरी माँ की चूत कुतिया किए जने … मैं मर गयी हरामी साले!
कालू की सेहत पर झांट असर नहीं पड़ रहा था.
करीब आधा घंटा तक गांड चोदने के बाद कालू मेरी बीवी की गांड में ही झड़ गया और अपना लंड बाहर खींच कर कुत्ते की तरह हांफने लगा.
उधर मेरी बीवी की हालत तो खराब हो ही गई थी.
करीब आधा घंटा बाद वे दोनों पुनः उठ गए और एक बार फिर से चुदाई का खेल चालू हो गया.
उन दोनों ने सुबह तक चुदाई का खेल खेला और दोनों थक कर नंगे ही बिस्तर पर सो गए.
जब सुबह मैं उठा तो मैंने अपनी बीवी की बुर देखी.
बुर के नाम पर फटा हुआ भोसड़ा मुझे हँसने पर मजबूर कर रही थी.
मैं पुनः सो गया.
करीब नौ बजे वे दोनों उठे और मुझे सोता समझ कर मेरी बीवी उठी और कालू को बाथरूम में जाने को बोली.
वे दोनों उठ कर बाथरूम में जाकर नंगे नहाने लगे.
नहा धोकर मेरी बीवी ने दूसरा गाउन पहन लिया और सज संवर कर तैयार हो गई.
वह उसके लिए चाय बनाने लगी और दोनों चाय पीकर फिर से भिड़ गए.
ब्लैक डिक नीग्रो सेक्स का खेल फिर शुरू हो गया.
मैंने देखा कि इस बार कालू मेरी बीवी को गोद में बैठा कर उसको चूम चाट रहा था और एक हाथ से उसकी चूची और दूसरे हाथ से उसकी बुर को मसल रहा था.
मेरी बीवी ने उससे अंग्रेजी में पूछा- आज रहोगे ना?
उसने कहा- नहीं, आज की मेरी फ्लाइट है.
मेरी बीवी ने कहा- जाने से पहले मेरी चूत एक बार और फाड़ कर जाना.
वह राजी हो गया और उसने अपने मोटे ब्लैक डिक को मेरी बीवी के हाथ में दे दिया.
बीवी लौड़े को सहलाने लगी और चुदाई का खेल शुरू हो गया.
कालू मेरी बीवी की बुर को बुरी तरह से चूसने चाटने लगा.
वे दोनों 69 में आ गए थे और मेरी बीवी लंड चूस रही थी.
करीब एक घंटा के बाद वे दोनों चुदाई से फारिग होकर अलग हुए.
मेरी बीवी पूर्ण संतुष्ट लग रही थी.
कालू के जाने के बाद मैं उठा और मैंने अपनी बीवी को हंस कर बताया- मैं ही तुम्हारे लिए कालू को लाया था ताकि तुम मजा ले सको.
यह सुनकर मेरी बीवी मुझसे लिपट गई और मुझे प्यार करने लगी.
तो दोस्तो कैसी लगी मेरी ब्लैक डिक नीग्रो सेक्स कहानी, प्लीज जरूर बताए
💦💦💦💦💦
मैंने अपनी फ्रेंड को उसकी बर्थडे पर चोदा
💦💦💦💦💦
GF हिंदी Xxx कहानी में एक बहुत सेक्सी माल लड़की मेरी दोस्त थी. उसने मुझे अपने जन्म दिन पर बुलाया. देर होने पर मैं उसके रुक गया. तो रात को मेरे साथ क्या हुआ?
दोस्तो, मेरा नाम अक्षय है और मैं राँची झारखंड का रहने वाला हूँ.
मेरा लंड 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है, ये आज तक जिसकी भी चूत में गया है … उसको खुश करके ही आया है.
यह GF हिंदी Xxx कहानी एकदम सच्ची है, मैं इस घटना को हर दिन याद करके खुश होता हूँ कि कैसे मैंने अपनी एक फ्रेंड को उसी के घर में चोदा था.
मैं राँची के दोरंडा कॉलेज में पढ़ता हूँ और वहीं की एक लड़की मेरी फ्रेंड है.
उसका नाम जूही है.
उसे देख कर ऐसा लगता है मानो उसके बदन को बस चाट कर खा जाऊं.
अभी भी बस उसको चोदने का बड़ा मन कर रहा है.
यह GF हिंदी Xxx कहानी तब की है, जब मैं अपने घर से कॉलेज जा रहा था.
मैं बेडमिंटन खेलता हूँ और इसी खेल से जूही मेरी फ्रेंड बनी थी.
उसको बेडमिंटन खेलना पसंद था, पर उसको खेलने नहीं आता था.
उसने मुझे खेलते हुए देखा था तो बहुत प्रभावित थी.
कुछ दिनों के बाद उसने मुझसे पूछा- अक्षय, मुझे भी बेडमिंटन खेलना सिख़ा दोगे. मेरा भी खेलने का बड़ा मन करता है, पर यार मुझे आता नहीं है.
मैंने उससे कहा- कि ठीक है, कल से तुम मेरे घर आ जाना मैं तुम्हें वहीं खेलना सिखा दूँगा.
वह मान गई और रोजाना खेलने आने लगी थी.
बस ऐसे ही वह मेरी दोस्त बन गई.
और कुछ ही देर में मेरी बीवी को भी मजा आने लगा- आह …और जोर से चोद कलमुँहे … आह मस्त लंड है तेरा … आज चूत चुद कर तृप्त हो गई!
उधर कालू दबा कर मेरी बीवी की चूत को भोसड़ा बनाने की नीयत से चोद रहा था.
उसके नीचे दबी मेरी बीवी खूब मजा ले लेकर अपनी गांड उछाल उछाल कर मोटा लंड गपागप ले रही थी.
करीब चालीस मिनट तक लगातार चोदने के बाद मेरी बीवी निढाल हो गई और वह कालू से लंड को बाहर निकालने को बोलने लगी.
जब कालू ने अपना लंड बाहर निकाला, तब मैंने देखा उसका लंड चूत के रस से एकदम सफेद हुआ पड़ा था.
अब वह मेरी बीवी से घोड़ी बनने को कहने लगा.
जैसे ही मेरी बीवी घोड़ी बनी, कालू भाई ने उसकी गांड के छेद पर अपना लंड रख दिया और धक्का दे मारा.
बीवी की मां चुद गई.
कालू ने अपने हाथ से उसका मुँह दबाया हुआ था तो आवाज नहीं निकल पाई.
कालू ने लगातार दूसरा, तीसरा और ताबड़तोड़ गांड फाड़ सीन क्रियेट कर दिया.
जैसे ही मेरी बीवी के मुँह से कालू का हाथ हटा, वह चीखने लगी- आह मादरचोद साले कालू … बहन के लौड़े जरा आराम से चोद हरामी! तेरी माँ की चूत कुतिया किए जने … मैं मर गयी हरामी साले!
कालू की सेहत पर झांट असर नहीं पड़ रहा था.
करीब आधा घंटा तक गांड चोदने के बाद कालू मेरी बीवी की गांड में ही झड़ गया और अपना लंड बाहर खींच कर कुत्ते की तरह हांफने लगा.
उधर मेरी बीवी की हालत तो खराब हो ही गई थी.
करीब आधा घंटा बाद वे दोनों पुनः उठ गए और एक बार फिर से चुदाई का खेल चालू हो गया.
उन दोनों ने सुबह तक चुदाई का खेल खेला और दोनों थक कर नंगे ही बिस्तर पर सो गए.
जब सुबह मैं उठा तो मैंने अपनी बीवी की बुर देखी.
बुर के नाम पर फटा हुआ भोसड़ा मुझे हँसने पर मजबूर कर रही थी.
मैं पुनः सो गया.
करीब नौ बजे वे दोनों उठे और मुझे सोता समझ कर मेरी बीवी उठी और कालू को बाथरूम में जाने को बोली.
वे दोनों उठ कर बाथरूम में जाकर नंगे नहाने लगे.
नहा धोकर मेरी बीवी ने दूसरा गाउन पहन लिया और सज संवर कर तैयार हो गई.
वह उसके लिए चाय बनाने लगी और दोनों चाय पीकर फिर से भिड़ गए.
ब्लैक डिक नीग्रो सेक्स का खेल फिर शुरू हो गया.
मैंने देखा कि इस बार कालू मेरी बीवी को गोद में बैठा कर उसको चूम चाट रहा था और एक हाथ से उसकी चूची और दूसरे हाथ से उसकी बुर को मसल रहा था.
मेरी बीवी ने उससे अंग्रेजी में पूछा- आज रहोगे ना?
उसने कहा- नहीं, आज की मेरी फ्लाइट है.
मेरी बीवी ने कहा- जाने से पहले मेरी चूत एक बार और फाड़ कर जाना.
वह राजी हो गया और उसने अपने मोटे ब्लैक डिक को मेरी बीवी के हाथ में दे दिया.
बीवी लौड़े को सहलाने लगी और चुदाई का खेल शुरू हो गया.
कालू मेरी बीवी की बुर को बुरी तरह से चूसने चाटने लगा.
वे दोनों 69 में आ गए थे और मेरी बीवी लंड चूस रही थी.
करीब एक घंटा के बाद वे दोनों चुदाई से फारिग होकर अलग हुए.
मेरी बीवी पूर्ण संतुष्ट लग रही थी.
कालू के जाने के बाद मैं उठा और मैंने अपनी बीवी को हंस कर बताया- मैं ही तुम्हारे लिए कालू को लाया था ताकि तुम मजा ले सको.
यह सुनकर मेरी बीवी मुझसे लिपट गई और मुझे प्यार करने लगी.
तो दोस्तो कैसी लगी मेरी ब्लैक डिक नीग्रो सेक्स कहानी, प्लीज जरूर बताए
💦💦💦💦💦
मैंने अपनी फ्रेंड को उसकी बर्थडे पर चोदा
💦💦💦💦💦
GF हिंदी Xxx कहानी में एक बहुत सेक्सी माल लड़की मेरी दोस्त थी. उसने मुझे अपने जन्म दिन पर बुलाया. देर होने पर मैं उसके रुक गया. तो रात को मेरे साथ क्या हुआ?
दोस्तो, मेरा नाम अक्षय है और मैं राँची झारखंड का रहने वाला हूँ.
मेरा लंड 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है, ये आज तक जिसकी भी चूत में गया है … उसको खुश करके ही आया है.
यह GF हिंदी Xxx कहानी एकदम सच्ची है, मैं इस घटना को हर दिन याद करके खुश होता हूँ कि कैसे मैंने अपनी एक फ्रेंड को उसी के घर में चोदा था.
मैं राँची के दोरंडा कॉलेज में पढ़ता हूँ और वहीं की एक लड़की मेरी फ्रेंड है.
उसका नाम जूही है.
उसे देख कर ऐसा लगता है मानो उसके बदन को बस चाट कर खा जाऊं.
अभी भी बस उसको चोदने का बड़ा मन कर रहा है.
यह GF हिंदी Xxx कहानी तब की है, जब मैं अपने घर से कॉलेज जा रहा था.
मैं बेडमिंटन खेलता हूँ और इसी खेल से जूही मेरी फ्रेंड बनी थी.
उसको बेडमिंटन खेलना पसंद था, पर उसको खेलने नहीं आता था.
उसने मुझे खेलते हुए देखा था तो बहुत प्रभावित थी.
कुछ दिनों के बाद उसने मुझसे पूछा- अक्षय, मुझे भी बेडमिंटन खेलना सिख़ा दोगे. मेरा भी खेलने का बड़ा मन करता है, पर यार मुझे आता नहीं है.
मैंने उससे कहा- कि ठीक है, कल से तुम मेरे घर आ जाना मैं तुम्हें वहीं खेलना सिखा दूँगा.
वह मान गई और रोजाना खेलने आने लगी थी.
बस ऐसे ही वह मेरी दोस्त बन गई.
जब वह मेरे साथ बेडमिंटन खेलती तो क्या माल लगती थी यार … उसके बूब्स जब ऊपर नीचे होते तो लगता उसी टाइम उसे पकड़ कर उसके दूध चूसने लगूँ.
दिसंबर महीने की बात है.
तब शाम के टाइम हम लोग बेडमिंटन खेलते थे.
उस दिन मैं खेलते खेलते थक कर बैठ गया और बोला- जूही, थोड़ी देर रुक जा, मैं थक गया हूँ.
वह मेरे पास आई और मुझे जोर से उठाने लगी.
मैंने अपना पूरा भार उस पर पर डाल दिया और उसी से चिपक गया.
मैं बोला- नहीं अब नहीं, थोड़ा रुक जा यार!
वह बोली- कल मेरा बर्थडे है, तो मुझे अभी से गिफ्ट दे दे, चल खेल मेरे साथ!
तो मैं उसे मना नहीं कर पाया और खेलने लगा.
कुछ देर बाद वह थक गई.
फिर उसने मुझे अपने घर आने के लिए बोला.
वह बोली- कल तुम मेरे घर मेरे बर्थडे की पार्टी में आओगे न!
मैंने हां कह दिया.
जब मैं उसके घर गया तब शाम हो गई थी.
वह शॉर्ट्स में थी.
ऐसा लग रहा था मानो उसका फिगर सिर्फ चोदने के लिए ही बना है.
वह मुझसे आ कर गले लग गई.
उसके बूब्स अपनी छाती पर गड़ते हुए महसूस करके मेरा लंड उसी टाइम कड़क हो गया.
मुझे ऐसा लगा कि मेरा लंड अभी बाहर आ कर बोलेगा कि मुझे मुँह ले लो जूही रानी.
मेरे और उसके अलावा उसके घर में उसके पापा मम्मी और उसकी बहन थी.
सब लोग केक कट करने के बाद खाना खाने लगे.
मैं भी खाना खाकर अपने घर जाने लगा तो वह बोली- आज यहीं रुक जा … सुबह चले जाना.
उसके पेरेंट्स भी ज़िद करने लगे, उसके पापा बोलने लगे- तुम ही तो बस जूही के फ्रेंड हो! रुक जाओ बेटा!
मैंने भी मना नहीं किया और रुक गया.
जूही के पेरेंट्स और उसकी बहन एक रूम में सो गए.
जूही अपने रूम में!
मेरे लिए उन्होंने एक अलग बेड लगा दिया था.
मैंने सोचा कि काश आज जूही मेरे साथ सो जाती.
मैं अपने बेड पर लेट गया.
कुछ देर बाद जूही आई और बोली- चलो!
मैंने पूछा- कहां?
वह बोली- चलो न!
मैंने कहा- ओके.
मैं उठ कर उसके रूम में चला गया.
वह बोली- मुझे पता है कि तुम बोर हो रहे होगे वहां, इसलिए तुम मेरे साथ सो हम दोनों बातें करेंगे और यहीं सो जाएंगे.
इस पर मैंने आशंका जताते हुए कहा- पर तेरे पेरेंट्स?
तो वह बोली- वे कुछ नहीं बोलेंगे, तुम यहीं सो जाओ.
उसका बेड एक इंसान के लिए ही था, पर मैं भी वहीं सो गया.
मैं जूही की तरफ मुँह करके सोया तो उसके बूब्स मेरे हाथ में टच हो रहे थे और उसकी जांघें मेरे पैर के ऊपर थीं.
तो मैं थोड़ा डर रहा था.
तभी जूही बोली- क्या इससे पहले लड़की के साथ नहीं सोया है?
मैंने कहा- नहीं.
तब जूही बोली- थैंक्स, मुझे बेडमिंटन सिखाने के लिए … और मेरे फ्रेंड बनने के लिए.
वह मुझसे बात करने लगी कि तभी मेरा हाथ गलती से उसकी कमर पर चला गया.
मैं एक बार को फिर से डर गया.
तो वह बोली- रख लो कोई बात नहीं!
मैंने कहा- पक्का!
‘हां जो चाहो … वह कर सकते हो. मैं कुछ नहीं बोलूँगी!’
अब मैं समझ गया कि इसे आज मुझसे चुदवाना ही है.
मैंने कहा- जूही, तुम सच में बहुत हॉट हो और मैं पहले दिन से ही तुमको बड़ी हसरत से देखता आ रहा हूँ.
मेरी इस बात वह शर्मा गई.
मैंने सही मौका देखा और उसको किस करने लगा.
वह भी मेरा साथ देने लगी थी.
मुझे तो ऐसा लग रहा था कि मुझसे ज्यादा वह लंड की भूखी हो.
मैं उसे किस करते करते उसके बूब्स को दबाने लगा.
तो वह ‘आह उऊह आह …’ की कामुक आवाज़ करने लगी.
मैंने कहा- जूही, तेरे बूब्स पर मैं पहले से नज़र रखे हुए था, सच में कितने मस्त और रसीले बूब्स हैं. अब तक तो मैं कुछ कर ही नहीं पाया, पर आज मौका मिला है तो जो मैं चाहूँ कर लूँ न … रोकेगी तो नहीं न!
वह बोली- मेरे बर्थडे में तू गिफ्ट ले रहा है.
मैंने हंस कर उसकी चुम्मी ली तो वह भी हंसने लगी.
मैं अब समझ गया कि देर करने का कोई मतलब नहीं है.
मैंने अगले कुछ ही पलों में उसको पूरी नंगी कर दिया और खुद को भी नंगा कर दिया.
अब मैं उसको चोदने के नजरिए से किस कर रहा था और उसके बूब्स दबा रहा था.
वह भी चुदासी हो गई और उसने मेरा लंड पकड़ लिया.
जूही लंड हिलाने लगी तो मैं समझ गया कि ये साली मुझसे ज्यादा गर्म हुई पड़ी है, इसको जल्दी ही चोदना पड़ेगा.
मैंने उससे कहा कि 69 जानती है!
वह बोली- नहीं, ये क्या होता है?
मैंने उसे समझाया और करने को बोला.
वह झट से तैयार हो गई और अपने लेटने की पोजीशन को बदल कर मेरे लंड के पास मुँह ले गई.
मैं उसकी बुर में अपनी पूरी जीभ घुसा कर उसको मजा देने लगा और वह मेरे पूरे लंड को अपने मुँह में लेने लगी.
इतना सब करते करते अचानक से वह बोली- जान, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है, ऐसा ही करते रहो. आह … कबसे मैं इस पल का वेट कर रही थी. आह उहह … और जोर से अन्दर तक जीभ को डालो … सच में यार तुम मस्त हो.
यह सब कहते हुए वह मेरे लंड को और जोर जोर से हिलाने लगी.
कुछ ही देर बाद वह अकड़ती हुई झड़ गई और उसका पूरा पानी मेरे मुँह पर आ गिरा.
वह शांत हो गई थी, पर अभी भी मैं पूरा गर्म था.
दिसंबर महीने की बात है.
तब शाम के टाइम हम लोग बेडमिंटन खेलते थे.
उस दिन मैं खेलते खेलते थक कर बैठ गया और बोला- जूही, थोड़ी देर रुक जा, मैं थक गया हूँ.
वह मेरे पास आई और मुझे जोर से उठाने लगी.
मैंने अपना पूरा भार उस पर पर डाल दिया और उसी से चिपक गया.
मैं बोला- नहीं अब नहीं, थोड़ा रुक जा यार!
वह बोली- कल मेरा बर्थडे है, तो मुझे अभी से गिफ्ट दे दे, चल खेल मेरे साथ!
तो मैं उसे मना नहीं कर पाया और खेलने लगा.
कुछ देर बाद वह थक गई.
फिर उसने मुझे अपने घर आने के लिए बोला.
वह बोली- कल तुम मेरे घर मेरे बर्थडे की पार्टी में आओगे न!
मैंने हां कह दिया.
जब मैं उसके घर गया तब शाम हो गई थी.
वह शॉर्ट्स में थी.
ऐसा लग रहा था मानो उसका फिगर सिर्फ चोदने के लिए ही बना है.
वह मुझसे आ कर गले लग गई.
उसके बूब्स अपनी छाती पर गड़ते हुए महसूस करके मेरा लंड उसी टाइम कड़क हो गया.
मुझे ऐसा लगा कि मेरा लंड अभी बाहर आ कर बोलेगा कि मुझे मुँह ले लो जूही रानी.
मेरे और उसके अलावा उसके घर में उसके पापा मम्मी और उसकी बहन थी.
सब लोग केक कट करने के बाद खाना खाने लगे.
मैं भी खाना खाकर अपने घर जाने लगा तो वह बोली- आज यहीं रुक जा … सुबह चले जाना.
उसके पेरेंट्स भी ज़िद करने लगे, उसके पापा बोलने लगे- तुम ही तो बस जूही के फ्रेंड हो! रुक जाओ बेटा!
मैंने भी मना नहीं किया और रुक गया.
जूही के पेरेंट्स और उसकी बहन एक रूम में सो गए.
जूही अपने रूम में!
मेरे लिए उन्होंने एक अलग बेड लगा दिया था.
मैंने सोचा कि काश आज जूही मेरे साथ सो जाती.
मैं अपने बेड पर लेट गया.
कुछ देर बाद जूही आई और बोली- चलो!
मैंने पूछा- कहां?
वह बोली- चलो न!
मैंने कहा- ओके.
मैं उठ कर उसके रूम में चला गया.
वह बोली- मुझे पता है कि तुम बोर हो रहे होगे वहां, इसलिए तुम मेरे साथ सो हम दोनों बातें करेंगे और यहीं सो जाएंगे.
इस पर मैंने आशंका जताते हुए कहा- पर तेरे पेरेंट्स?
तो वह बोली- वे कुछ नहीं बोलेंगे, तुम यहीं सो जाओ.
उसका बेड एक इंसान के लिए ही था, पर मैं भी वहीं सो गया.
मैं जूही की तरफ मुँह करके सोया तो उसके बूब्स मेरे हाथ में टच हो रहे थे और उसकी जांघें मेरे पैर के ऊपर थीं.
तो मैं थोड़ा डर रहा था.
तभी जूही बोली- क्या इससे पहले लड़की के साथ नहीं सोया है?
मैंने कहा- नहीं.
तब जूही बोली- थैंक्स, मुझे बेडमिंटन सिखाने के लिए … और मेरे फ्रेंड बनने के लिए.
वह मुझसे बात करने लगी कि तभी मेरा हाथ गलती से उसकी कमर पर चला गया.
मैं एक बार को फिर से डर गया.
तो वह बोली- रख लो कोई बात नहीं!
मैंने कहा- पक्का!
‘हां जो चाहो … वह कर सकते हो. मैं कुछ नहीं बोलूँगी!’
अब मैं समझ गया कि इसे आज मुझसे चुदवाना ही है.
मैंने कहा- जूही, तुम सच में बहुत हॉट हो और मैं पहले दिन से ही तुमको बड़ी हसरत से देखता आ रहा हूँ.
मेरी इस बात वह शर्मा गई.
मैंने सही मौका देखा और उसको किस करने लगा.
वह भी मेरा साथ देने लगी थी.
मुझे तो ऐसा लग रहा था कि मुझसे ज्यादा वह लंड की भूखी हो.
मैं उसे किस करते करते उसके बूब्स को दबाने लगा.
तो वह ‘आह उऊह आह …’ की कामुक आवाज़ करने लगी.
मैंने कहा- जूही, तेरे बूब्स पर मैं पहले से नज़र रखे हुए था, सच में कितने मस्त और रसीले बूब्स हैं. अब तक तो मैं कुछ कर ही नहीं पाया, पर आज मौका मिला है तो जो मैं चाहूँ कर लूँ न … रोकेगी तो नहीं न!
वह बोली- मेरे बर्थडे में तू गिफ्ट ले रहा है.
मैंने हंस कर उसकी चुम्मी ली तो वह भी हंसने लगी.
मैं अब समझ गया कि देर करने का कोई मतलब नहीं है.
मैंने अगले कुछ ही पलों में उसको पूरी नंगी कर दिया और खुद को भी नंगा कर दिया.
अब मैं उसको चोदने के नजरिए से किस कर रहा था और उसके बूब्स दबा रहा था.
वह भी चुदासी हो गई और उसने मेरा लंड पकड़ लिया.
जूही लंड हिलाने लगी तो मैं समझ गया कि ये साली मुझसे ज्यादा गर्म हुई पड़ी है, इसको जल्दी ही चोदना पड़ेगा.
मैंने उससे कहा कि 69 जानती है!
वह बोली- नहीं, ये क्या होता है?
मैंने उसे समझाया और करने को बोला.
वह झट से तैयार हो गई और अपने लेटने की पोजीशन को बदल कर मेरे लंड के पास मुँह ले गई.
मैं उसकी बुर में अपनी पूरी जीभ घुसा कर उसको मजा देने लगा और वह मेरे पूरे लंड को अपने मुँह में लेने लगी.
इतना सब करते करते अचानक से वह बोली- जान, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है, ऐसा ही करते रहो. आह … कबसे मैं इस पल का वेट कर रही थी. आह उहह … और जोर से अन्दर तक जीभ को डालो … सच में यार तुम मस्त हो.
यह सब कहते हुए वह मेरे लंड को और जोर जोर से हिलाने लगी.
कुछ ही देर बाद वह अकड़ती हुई झड़ गई और उसका पूरा पानी मेरे मुँह पर आ गिरा.
वह शांत हो गई थी, पर अभी भी मैं पूरा गर्म था.
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मैंने कहा- अब तुम ऊपर आओ. मैं तुम्हें और सुख दूँगा!
वह बोली- कैसे?
मैंने उसकी बुर के ऊपर अपना लंड दो बार पटक कर मारा और कहा- मुझे किस करो, मुझे अब तुम्हारा छेद फाड़ना है. तुम मुझे किस करती रहना, रुकना मत.
वह बोली- ठीक है.
वह शुरू हो गई.
मैं उसकी बुर के अन्दर अपना लंड डालने लगा और धीरे धीरे उसको चुदाई का सुख देने लगा.
वह शुरू में तो कुछ नहीं बोली.
फिर मैंने अचानक से उसकी बुर के अन्दर अपना पूरा लंड घुसेड़ दिया.
वह एकदम से कराह उठी और बोली- आह नहीं नहीं … अक्षय मत करो … बहुत दर्द हो रहा है प्लीज रुक जाओ … दर्द हो रहा है.
मैंने कहा- जान बस दो मिनट लगेंगे. उसके बाद तुमको जन्नत का सुख मिलेगा.
किसी तरह से मैंने उसको मनाया और कुछ देर उसकी चूत के अन्दर अपना लंड डाल कर रुक गया.
मैं उसको सहलाने लगा और चूमने लगा.
जब वह शांत हुई तो मैं जोर जोर से धक्का देने लगा.
मुझे ऐसा लग रहा था मानो किसी ने उसके बूब्स की जगह दो बॉल रख दी हों.
उसको चोदने में मुझे बहुत ज्यादा खुशी मिलने लगी थी.
मैं बहुत देर तक उसको चोदता रहा.
वह भी मजा लेती हुई अपनी कमर को चला रही थी.
फिर मैं उसकी चूत के अन्दर ही झड़ गया और उसके ऊपर लेट गया.
कुछ मिनट बाद उसने मेरा लंड पुनः हिलाना शुरू कर दिया.
वह बोली- तुम मुझे अपनी बांहों में उठा कर चोदो न, वैसा मैंने बहुत बार पॉर्न वीडियो में देखा है.
मैंने कहा- अरे वाह तुम पॉर्न भी देखती हो और तुम्हें 69 नहीं पता था?
तो वह हंसने लगी.
मैं समझ गया कि यह पूरी तरह से चूत चुदाई की कला को जानती है, बस नाटक कर रही थी.
मैंने उसको अपनी बांहों में उठा लिया और उससे कहा- जब भी मेरा लंड बाहर निकले, तुम कमर को पुश करके अन्दर करना.
वह बोली- ओके.
फिर उसने मेरा लंड अपनी बुर में घुसड़वाना शुरू कर दिया और मैं उसको एकदम पॉर्न वीडियो के जैसा चोदने लगा.
मैंने उसे इतना ज्यादा चोदा कि उसकी बुर लाल भोसड़ा हो गई थी.
कुछ देर बाद हम दोनों पुनः झड़ गए और मैं उसके साथ नंगा ही सो गया.
सुबह 5 बजे वह मेरे बगल में नंगी लेटी हुई थी.
मेरा मन उसको फिर से चोदने का हुआ.
तो मैंने उसको एक लिप किस किया और उसकी बुर में लंड घुसाने लगा.
उसकी नींद खुल गई और वह बोली- यार, तुम नींद में क्यों डाल रहे हो, अभी सब जाग गए होंगे … अब तुम अपने बेडरूम में जाओ.
मैंने कहा- तुमको चोदने के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ.
मैं उसको किस करने लगा.
वह भी मेरा साथ देने लगी और मेरे ऊपर आ गई.
जूही अपने छेद में मेरे लंड को फिट करके ऐसे उछलने लगी थी मानो उसकी बुर मेरे लंड के लिए ही बनी हो.
कुछ देर बाद मेरा माल निकल गया और वह बोली- अब बस, चलो कपड़े पहनो और अपने बेडरूम में जाओ.
कपड़े पहन कर मैं अपने बेडरूम की तरफ जाने लगा.
मैं अपने कमरे के बेड की तरफ जा ही रहा था कि जूही की बहन मेरे बेड में बैठी थी.
मुझे देख कर बोली- आप रात भर दीदी के साथ सोए थे न!
तो मैं डर गया और बोला- नहीं नहीं, अभी गया था जस्ट!
वह बोली- मैंने सब देखा कि आप दीदी की कैसे ले रहे थे. अब आपको मेरी भी वैसे ही लेनी होगी … तभी आप बचोगे … नहीं तो मैं पापा को सब बता दूँगी.
मैं बोला- ठीक है, मैं तुम्हें बाद में मिलूँगा. अभी मुझे सोने दो.
वह हंस दी और बोली- मैं जानती हूँ कि आपको मेरे साथ सेक्स करने का मन है पर आप की फट रही है … है न! डरिए मत दीदी और मैं एक दूसरे से बिंदास खुली हुई हैं.
मैं समझ गया कि यह तो साला रंडीखाना है.
बस मैं जूही की बहन के साथ लेट गया और उसके कुछ ही देर बाद मैं जन्नत में सैर कर रहा था.
वह जन्नत की सैर किस तरह से हुई, उसकी जवानी का मजा लेने की, पूरी चुदाई की कहानी अगले भाग में लिखूँगा.
💦💦💦💦💦
ट्रेन में मिली बुर्के वाली भाभी की होटल में चुदाई
💦💦💦💦💦
हॉट भाभी पोर्न कहानी में मुंबई की लोकल ट्रेन में मेरी दोस्ती पर्दे वाली एक भाभी से हुई. हमने होटल में मिलकर चुदाई का मजा लेने का प्रोग्राम बनाया.
आप सभी को मेरा नमस्कार.
मैं जतिन हूँ मुंबई से!
मेरे साथ कुछ दिन पहले की हुई सच्ची घटना है यह!
मैं उम्मीद करता हूं कि आपको बहुत पसंद आएगी.
मैं एक 5 फीट 8 इंच का नौजवान हूँ. मेरी उम्र 25 साल है.
दिखने में भी मैं काफी अच्छा हूँ.
मेरा लंड 7 इंच से ज्यादा बड़ा है और ये करीब 3 इंच मोटा है.
अब लड़के, लड़कियां, मर्द, औरतें और ख़ास कर भाभियां अभी से अपनी अंडरवियर में हाथ डाल लें.
यह करीब 3 महीने पहले की बात है.
मैं और मेरा एक दोस्त हम दोनों मुंबई के बस स्टैन्ड से लौट रहे थे.
करीब रात के एक बजे का समय था.
दादर से हम दोनों ने कल्याण के लिए लोकल ट्रेन से सफर करना शुरू किया.
कुछ देर बाद कुर्ला स्टेशन आया और एक खूबसूरत सी भाभी ने ट्रेन में अपना कदम रखा.
वह बुर्का पहन कर चढ़ी ही थी कि उसकी नजरें मेरी नजरों से टकरा गईं क्योंकि उसने अपना नकाब हटाया हुआ था.
वह बोली- कैसे?
मैंने उसकी बुर के ऊपर अपना लंड दो बार पटक कर मारा और कहा- मुझे किस करो, मुझे अब तुम्हारा छेद फाड़ना है. तुम मुझे किस करती रहना, रुकना मत.
वह बोली- ठीक है.
वह शुरू हो गई.
मैं उसकी बुर के अन्दर अपना लंड डालने लगा और धीरे धीरे उसको चुदाई का सुख देने लगा.
वह शुरू में तो कुछ नहीं बोली.
फिर मैंने अचानक से उसकी बुर के अन्दर अपना पूरा लंड घुसेड़ दिया.
वह एकदम से कराह उठी और बोली- आह नहीं नहीं … अक्षय मत करो … बहुत दर्द हो रहा है प्लीज रुक जाओ … दर्द हो रहा है.
मैंने कहा- जान बस दो मिनट लगेंगे. उसके बाद तुमको जन्नत का सुख मिलेगा.
किसी तरह से मैंने उसको मनाया और कुछ देर उसकी चूत के अन्दर अपना लंड डाल कर रुक गया.
मैं उसको सहलाने लगा और चूमने लगा.
जब वह शांत हुई तो मैं जोर जोर से धक्का देने लगा.
मुझे ऐसा लग रहा था मानो किसी ने उसके बूब्स की जगह दो बॉल रख दी हों.
उसको चोदने में मुझे बहुत ज्यादा खुशी मिलने लगी थी.
मैं बहुत देर तक उसको चोदता रहा.
वह भी मजा लेती हुई अपनी कमर को चला रही थी.
फिर मैं उसकी चूत के अन्दर ही झड़ गया और उसके ऊपर लेट गया.
कुछ मिनट बाद उसने मेरा लंड पुनः हिलाना शुरू कर दिया.
वह बोली- तुम मुझे अपनी बांहों में उठा कर चोदो न, वैसा मैंने बहुत बार पॉर्न वीडियो में देखा है.
मैंने कहा- अरे वाह तुम पॉर्न भी देखती हो और तुम्हें 69 नहीं पता था?
तो वह हंसने लगी.
मैं समझ गया कि यह पूरी तरह से चूत चुदाई की कला को जानती है, बस नाटक कर रही थी.
मैंने उसको अपनी बांहों में उठा लिया और उससे कहा- जब भी मेरा लंड बाहर निकले, तुम कमर को पुश करके अन्दर करना.
वह बोली- ओके.
फिर उसने मेरा लंड अपनी बुर में घुसड़वाना शुरू कर दिया और मैं उसको एकदम पॉर्न वीडियो के जैसा चोदने लगा.
मैंने उसे इतना ज्यादा चोदा कि उसकी बुर लाल भोसड़ा हो गई थी.
कुछ देर बाद हम दोनों पुनः झड़ गए और मैं उसके साथ नंगा ही सो गया.
सुबह 5 बजे वह मेरे बगल में नंगी लेटी हुई थी.
मेरा मन उसको फिर से चोदने का हुआ.
तो मैंने उसको एक लिप किस किया और उसकी बुर में लंड घुसाने लगा.
उसकी नींद खुल गई और वह बोली- यार, तुम नींद में क्यों डाल रहे हो, अभी सब जाग गए होंगे … अब तुम अपने बेडरूम में जाओ.
मैंने कहा- तुमको चोदने के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ.
मैं उसको किस करने लगा.
वह भी मेरा साथ देने लगी और मेरे ऊपर आ गई.
जूही अपने छेद में मेरे लंड को फिट करके ऐसे उछलने लगी थी मानो उसकी बुर मेरे लंड के लिए ही बनी हो.
कुछ देर बाद मेरा माल निकल गया और वह बोली- अब बस, चलो कपड़े पहनो और अपने बेडरूम में जाओ.
कपड़े पहन कर मैं अपने बेडरूम की तरफ जाने लगा.
मैं अपने कमरे के बेड की तरफ जा ही रहा था कि जूही की बहन मेरे बेड में बैठी थी.
मुझे देख कर बोली- आप रात भर दीदी के साथ सोए थे न!
तो मैं डर गया और बोला- नहीं नहीं, अभी गया था जस्ट!
वह बोली- मैंने सब देखा कि आप दीदी की कैसे ले रहे थे. अब आपको मेरी भी वैसे ही लेनी होगी … तभी आप बचोगे … नहीं तो मैं पापा को सब बता दूँगी.
मैं बोला- ठीक है, मैं तुम्हें बाद में मिलूँगा. अभी मुझे सोने दो.
वह हंस दी और बोली- मैं जानती हूँ कि आपको मेरे साथ सेक्स करने का मन है पर आप की फट रही है … है न! डरिए मत दीदी और मैं एक दूसरे से बिंदास खुली हुई हैं.
मैं समझ गया कि यह तो साला रंडीखाना है.
बस मैं जूही की बहन के साथ लेट गया और उसके कुछ ही देर बाद मैं जन्नत में सैर कर रहा था.
वह जन्नत की सैर किस तरह से हुई, उसकी जवानी का मजा लेने की, पूरी चुदाई की कहानी अगले भाग में लिखूँगा.
💦💦💦💦💦
ट्रेन में मिली बुर्के वाली भाभी की होटल में चुदाई
💦💦💦💦💦
हॉट भाभी पोर्न कहानी में मुंबई की लोकल ट्रेन में मेरी दोस्ती पर्दे वाली एक भाभी से हुई. हमने होटल में मिलकर चुदाई का मजा लेने का प्रोग्राम बनाया.
आप सभी को मेरा नमस्कार.
मैं जतिन हूँ मुंबई से!
मेरे साथ कुछ दिन पहले की हुई सच्ची घटना है यह!
मैं उम्मीद करता हूं कि आपको बहुत पसंद आएगी.
मैं एक 5 फीट 8 इंच का नौजवान हूँ. मेरी उम्र 25 साल है.
दिखने में भी मैं काफी अच्छा हूँ.
मेरा लंड 7 इंच से ज्यादा बड़ा है और ये करीब 3 इंच मोटा है.
अब लड़के, लड़कियां, मर्द, औरतें और ख़ास कर भाभियां अभी से अपनी अंडरवियर में हाथ डाल लें.
यह करीब 3 महीने पहले की बात है.
मैं और मेरा एक दोस्त हम दोनों मुंबई के बस स्टैन्ड से लौट रहे थे.
करीब रात के एक बजे का समय था.
दादर से हम दोनों ने कल्याण के लिए लोकल ट्रेन से सफर करना शुरू किया.
कुछ देर बाद कुर्ला स्टेशन आया और एक खूबसूरत सी भाभी ने ट्रेन में अपना कदम रखा.
वह बुर्का पहन कर चढ़ी ही थी कि उसकी नजरें मेरी नजरों से टकरा गईं क्योंकि उसने अपना नकाब हटाया हुआ था.
❤1
उसी पल मैंने एक क्यूट सी स्माइल पास करते हुए उन्हें सीट ऑफर की.
रात में ट्रेन में इतनी भीड़ नहीं थी.
वे मेरे करीब ही बैठ गईं.
वे एकदम चुप थीं.
पर उनसे ज्यादा देर चुप नहीं रहा गया.
उन्होंने मुझसे बात करनी शुरू करते हुए हैलो कहा.
मैंने भी उन्हें हैलो कहा.
उन्होंने पूछा- किधर जा रहे हो?
मैंने लंबी सांस भरते हुए कहा- जहां नसीब ले जाए!
वे हंस दीं और बोली- हुंअ … इंटरेस्टिंग पर्सन … क्या नाम है तुम्हारा!
मैंने बताते हुए कहा- आप को क्या लगता है कि मुझे देख कर आपको क्या नाम अच्छा लगेगा?
वे बोलीं- मतलब?
मैंने कहा- बंदे को आप जो भी नाम देना चाहें … मैं उसी को रख लूँगा.
भाभी फिर से हंस दीं.
फिर उन्होंने मुझसे मेरी पढ़ाई के बारे में पूछ लिया और इस तरह से हमारे बीच बातचीत होना शुरू हो गई.
बातों ही बातों में उन्होंने मुझे जॉब के लिए पूछ लिया.
मैंने कहां- हाँ करता तो हूँ, पर अभी मैं और अच्छी जॉब देख रहा हूँ.
उस पर उन्होंने मुझसे कहा- तुम अपना रेज़्यूमे मुझे मेल कर दो, मैं कुछ देखती हूँ.
यह कहते हुए भाभी ने अपनी मेल आईडी मुझे बता दी.
मैंने उसी वक्त उन्हें मेल सेंड करके अपना रेज़्यूमे भेज दिया.
फिर हमारा स्टेशन आया तो हम सब उतर गए.
फिर करीब एक घंटा बाद मैं अपने फ्रेंड को बस में बैठा कर अपने घर जा रहा था.
तभी एक अंजान नंबर से मुझे व्हाट्सैप पर मैसेज आया ‘हाय सन्नो हियर, अभी थोड़ी देर पहले मैंने तुम्हारा रेज़्यूमे देखा!’
यह पढ़ते ही मैं खुश हो गया कि भाभी ने अपना नाम बताते हुए मैसेज किया है.
मैं उनसे मैसेज पर ही बात करने लगा.
अब हम दोनों के बीच मस्ती की बातें होने लगीं.
मैंने उनका नंबर सेव कर लिया और हमारी बातें परवान चढ़ने लगीं.
कुछ दिन में ही हम दोनों एक दूसरे के प्रति आकर्षित होने लगे.
फोन पर भी हमारी बात होने लगी थी.
कभी कभी मिल भी लेते और मूवी आदि भी देखने चले जाते.
इस तरह से हमारे बीच थोड़ा थोड़ा रोमांस भी होने लगा था.
अब जल्दी ही हमारे बीच कुछ इस तरह की आग लग गई थी कि सिर्फ मिलने से नहीं बुझ रही थी.
इस बात को हम दोनों ही महसूस करने लगे थे.
एक रात छत पर भाभी और मैं फोन पर बात कर रहे थे.
हम दोनों ने मिलने का प्लान किया.
हमारे बीच यह तय हुआ कि हम दोनों किसी होटल में जाएंगे.
उसी रात हम दोनों आपस में बातें करने लगे कि कमरे में जाकर क्या करना है.
अब इस बात पर न तो भाभी ही कुछ कह रही थीं और न ही मैं कुछ कह रहा था कि कमरे में जाकर करना क्या है.
जबकि हम दोनों ही समझ रहे थे कि उधर हम दोनों को चुदाई करने का खुल कर मौका मिलेगा.
भाभी मेरी तरफ देख कर हंसने लगीं और मेरे मजे लेने लगीं- तो बताओ न उधर जाकर क्या करना है?
मैंने कहा- उधर आपको मैं जीवन में आनन्द प्राप्त करने का एक गूढ़ रहस्य बताऊंगा.
भाभी बोलीं- तो वह रहस्य तो तुम इधर फोन पर भी बता सकते हो?
मैंने कहा- नहीं, वह अकेले और एकांत वाली जगह में ही बताया जाता है!
भाभी ने फिर से चुटकी ली- तो इधर भी तो हम दोनों अकेले में ही हैं और इधर एकांत भी है!
मैंने दिमाग लगाया कि भाभी मेरी ले रही हैं. अब कुछ ऐसा करना पड़ेगा … जिससे भाभी खुल जाएं.
तो मैंने कहा- ओके … तो क्या आप उस रहस्य को जाने के लिए अभी तैयार हैं?
भाभी मुस्कुराईं और बोलीं- हाँ मगर पहले बताओ तो!
मैंने कहा- आपको उस रहस्य को जाने के लिए एक अनुष्ठान करना है और उस अनुष्ठान में आपको अपने सारे कपड़े उतारने पड़ेंगे … तो बताइए भाभी जी क्या आप अभी तैयार हैं?
भाभी हंस पड़ीं और बोलीं- तुम सच में बहुत चालू पुर्जा हो. चलो मैं समझ गई कि तुमको मेरे साथ क्या करना है!
अब मैंने डोर पकड़ ली और कहा- अच्छा तो बताइए कि आपको क्या समझ में आ गया है?
भाभी छूटते ही बोलीं- तुमको मुझे चोदना है … सीधे सीधे बोलो न यार!
मैंने उनके मुँह से चोदना शब्द सुना तो मैंने कहा- या यूं कहें कि आपको मेरे साथ चुदवाना है!
वे हो हो करके हंसने लगीं और हम दोनों के बीच सेक्स की बातें होने लगीं.
कुछ ही देर में हमारे बीच इतनी ज्यादा बेचैनी हो गई थी कि क्या ही बताऊं.
उनमें से एक बात यह भी भाभी ने कही थी कि उन्हें हार्डकोर सेक्स बहुत पसंद है.
जब मैंने उनसे उसकी डिटेल में जानना चाहा तो उन्होंने वही सब बताया कि कोई शहद लगा कर चाटे या बेल्ट से मारे या मोम टपकाते हुए दूध चूसे. यह सब जानकर मैं मन ही मन प्लान बनाने लगा था कि भाभी को कैसे चोदना है.
फिर हम दोनों अलग हुए और सोने लगे.
मगर मुझे तो समझो नींद ही नहीं आ रही थी.
जैसे तैसे वह रात कटी और सवेरा हुआ.
मैंने अपने बैग में एक मोमबत्ती और लाइटर के साथ कुछ कंडोम के पैकेट रखे. फिर याद आया तो साथ में हनी और श्रीखंड भी ले लिया.
अब मैं स्टेशन पर पहुंच गया और भाभी के आने का इंतज़ार करने लगा.
रात में ट्रेन में इतनी भीड़ नहीं थी.
वे मेरे करीब ही बैठ गईं.
वे एकदम चुप थीं.
पर उनसे ज्यादा देर चुप नहीं रहा गया.
उन्होंने मुझसे बात करनी शुरू करते हुए हैलो कहा.
मैंने भी उन्हें हैलो कहा.
उन्होंने पूछा- किधर जा रहे हो?
मैंने लंबी सांस भरते हुए कहा- जहां नसीब ले जाए!
वे हंस दीं और बोली- हुंअ … इंटरेस्टिंग पर्सन … क्या नाम है तुम्हारा!
मैंने बताते हुए कहा- आप को क्या लगता है कि मुझे देख कर आपको क्या नाम अच्छा लगेगा?
वे बोलीं- मतलब?
मैंने कहा- बंदे को आप जो भी नाम देना चाहें … मैं उसी को रख लूँगा.
भाभी फिर से हंस दीं.
फिर उन्होंने मुझसे मेरी पढ़ाई के बारे में पूछ लिया और इस तरह से हमारे बीच बातचीत होना शुरू हो गई.
बातों ही बातों में उन्होंने मुझे जॉब के लिए पूछ लिया.
मैंने कहां- हाँ करता तो हूँ, पर अभी मैं और अच्छी जॉब देख रहा हूँ.
उस पर उन्होंने मुझसे कहा- तुम अपना रेज़्यूमे मुझे मेल कर दो, मैं कुछ देखती हूँ.
यह कहते हुए भाभी ने अपनी मेल आईडी मुझे बता दी.
मैंने उसी वक्त उन्हें मेल सेंड करके अपना रेज़्यूमे भेज दिया.
फिर हमारा स्टेशन आया तो हम सब उतर गए.
फिर करीब एक घंटा बाद मैं अपने फ्रेंड को बस में बैठा कर अपने घर जा रहा था.
तभी एक अंजान नंबर से मुझे व्हाट्सैप पर मैसेज आया ‘हाय सन्नो हियर, अभी थोड़ी देर पहले मैंने तुम्हारा रेज़्यूमे देखा!’
यह पढ़ते ही मैं खुश हो गया कि भाभी ने अपना नाम बताते हुए मैसेज किया है.
मैं उनसे मैसेज पर ही बात करने लगा.
अब हम दोनों के बीच मस्ती की बातें होने लगीं.
मैंने उनका नंबर सेव कर लिया और हमारी बातें परवान चढ़ने लगीं.
कुछ दिन में ही हम दोनों एक दूसरे के प्रति आकर्षित होने लगे.
फोन पर भी हमारी बात होने लगी थी.
कभी कभी मिल भी लेते और मूवी आदि भी देखने चले जाते.
इस तरह से हमारे बीच थोड़ा थोड़ा रोमांस भी होने लगा था.
अब जल्दी ही हमारे बीच कुछ इस तरह की आग लग गई थी कि सिर्फ मिलने से नहीं बुझ रही थी.
इस बात को हम दोनों ही महसूस करने लगे थे.
एक रात छत पर भाभी और मैं फोन पर बात कर रहे थे.
हम दोनों ने मिलने का प्लान किया.
हमारे बीच यह तय हुआ कि हम दोनों किसी होटल में जाएंगे.
उसी रात हम दोनों आपस में बातें करने लगे कि कमरे में जाकर क्या करना है.
अब इस बात पर न तो भाभी ही कुछ कह रही थीं और न ही मैं कुछ कह रहा था कि कमरे में जाकर करना क्या है.
जबकि हम दोनों ही समझ रहे थे कि उधर हम दोनों को चुदाई करने का खुल कर मौका मिलेगा.
भाभी मेरी तरफ देख कर हंसने लगीं और मेरे मजे लेने लगीं- तो बताओ न उधर जाकर क्या करना है?
मैंने कहा- उधर आपको मैं जीवन में आनन्द प्राप्त करने का एक गूढ़ रहस्य बताऊंगा.
भाभी बोलीं- तो वह रहस्य तो तुम इधर फोन पर भी बता सकते हो?
मैंने कहा- नहीं, वह अकेले और एकांत वाली जगह में ही बताया जाता है!
भाभी ने फिर से चुटकी ली- तो इधर भी तो हम दोनों अकेले में ही हैं और इधर एकांत भी है!
मैंने दिमाग लगाया कि भाभी मेरी ले रही हैं. अब कुछ ऐसा करना पड़ेगा … जिससे भाभी खुल जाएं.
तो मैंने कहा- ओके … तो क्या आप उस रहस्य को जाने के लिए अभी तैयार हैं?
भाभी मुस्कुराईं और बोलीं- हाँ मगर पहले बताओ तो!
मैंने कहा- आपको उस रहस्य को जाने के लिए एक अनुष्ठान करना है और उस अनुष्ठान में आपको अपने सारे कपड़े उतारने पड़ेंगे … तो बताइए भाभी जी क्या आप अभी तैयार हैं?
भाभी हंस पड़ीं और बोलीं- तुम सच में बहुत चालू पुर्जा हो. चलो मैं समझ गई कि तुमको मेरे साथ क्या करना है!
अब मैंने डोर पकड़ ली और कहा- अच्छा तो बताइए कि आपको क्या समझ में आ गया है?
भाभी छूटते ही बोलीं- तुमको मुझे चोदना है … सीधे सीधे बोलो न यार!
मैंने उनके मुँह से चोदना शब्द सुना तो मैंने कहा- या यूं कहें कि आपको मेरे साथ चुदवाना है!
वे हो हो करके हंसने लगीं और हम दोनों के बीच सेक्स की बातें होने लगीं.
कुछ ही देर में हमारे बीच इतनी ज्यादा बेचैनी हो गई थी कि क्या ही बताऊं.
उनमें से एक बात यह भी भाभी ने कही थी कि उन्हें हार्डकोर सेक्स बहुत पसंद है.
जब मैंने उनसे उसकी डिटेल में जानना चाहा तो उन्होंने वही सब बताया कि कोई शहद लगा कर चाटे या बेल्ट से मारे या मोम टपकाते हुए दूध चूसे. यह सब जानकर मैं मन ही मन प्लान बनाने लगा था कि भाभी को कैसे चोदना है.
फिर हम दोनों अलग हुए और सोने लगे.
मगर मुझे तो समझो नींद ही नहीं आ रही थी.
जैसे तैसे वह रात कटी और सवेरा हुआ.
मैंने अपने बैग में एक मोमबत्ती और लाइटर के साथ कुछ कंडोम के पैकेट रखे. फिर याद आया तो साथ में हनी और श्रीखंड भी ले लिया.
अब मैं स्टेशन पर पहुंच गया और भाभी के आने का इंतज़ार करने लगा.
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कुछ ही देर में भाभी मस्त लाल रंग के चूड़ीदार सलवार कमीज में आती दिखाई दीं.
उन्होंने अपने बाल खुले रखे हुए थे.
होंठों पर लाल लिपस्टिक, हाथ में लेडी बैग टांग कर पेन्सिल हील्स पहने हुई आईं और मुस्कुराने लगीं.
मेरी तो उनके ऊपर से नजर ही नहीं हट रही थी.
कसम से भाभी आज कयामत लग रही थीं और आस पास खड़े सब लोग उन्हें ही घूरे जा रहे थे.
उनकी उठी हुई गोल गोल चूचियां और गांड ठुमकाने वाली उनकी कॅट वॉक पर तो मेरा दिल ही घायल हो गया था.
एक मन तो किया कि इन्हें अभी ही गोद में उठा कर शुरू हो जाऊं.
पर स्टेशन था, काफ़ी लोग थे. वैसा किया नहीं जा सकता था.
तभी हम हम दोनों होटल में पहुंचे और कमरे में जाते ही हम एक दूसरे पर भूखे जानवरों की तरह टूट पड़े.
मैं भाभी के खुले बालों में हाथ डाल कर लिप्स टू लिप्स किस करते हुए मजा लेने लगा.
भाभी के चूचों को मैं उनकी कमीज के ऊपर से ही सहला रहा था.
तभी अचानक से भाभी मुझसे अलग होकर बोलीं- एक मिनट रुको यार, मुझे कपड़ों में मजा नहीं आ रहा.
उन्होंने यह कहा तो मैंने उन्हें अपनी बांहों में खींचा और उनकी कमीज के पीछे लगे हुए हुक्स खोल दिए.
साथ ही भाभी की गर्दन पर किस करते हुए मैंने उनकी ड्रेस को खोलना चालू कर दिया था.
भाभी मेरे साथ रमण सुख का आनन्द लिए जा रही थीं.
मैंने उनके एक कान में अपनी नाक से गर्म सांस छोड़ते हुए उन्हें घुमाया और अपने सामने की ओर कर दिया.
आह भाभी के बड़े बड़े एकदम टाइट गुब्बारे उनकी पिंक कलर की ब्रा में कसे हुए दिखने लगे थे.
भाभी एकदम माल लग रही थीं.
तभी मैंने अपने हाथ उनके पीछे ले जाकर उनकी ब्रा का हुक भी खोल कर उसे निकाल दिया और उनके खड़े हो चुके कड़क गुलाबी चूचुक को किस करने लगा.
वे मानो एकदम से बिफर उठीं और अगले ही पल वे मेरी शर्ट के बटन्स खोलने लगीं.
हम दोनों किस भी किए जा रहे थे.
तब हम दोनों इतने जोश में थे कि कब मेरी छाती उनकी नंगी चूचियों से रगड़ने लगी, कुछ पता ही नहीं चला.
मैं भाभी की कमर पर किस करते हुए उनकी सलवार के नाड़े की तरफ बढ़ा और जल्दी से उनके नाड़े को ढीला करके उसे भी उतार दिया.
अब भाभी मेरे सामने एक नेट वाली पतली सी पैंटी में थीं और मैं भी अंडरवियर में रह गया था.
हम दोनों एक दूसरे हर अंग को पागलों की तरह चाट और चूस रहे थे.
हमारी कामुक सिसकारियां कमरे में एक मधुर संगीत बिखेर रही थीं.
‘आह … उउह …’
भाभी भी पूरी गर्म हो चुकी थीं और बार बार कह रही थीं- अब बस देर न करो … मुझे चोद दो जल्दी से आह!
मैंने झट से भाभी की पैंटी को खींच कर निकाला और उन्हें नंगी कर दिया.
आह क्या चिकनी गोरी चूत थी उनकी, ऐसी लग रही थी जैसे आज सुबह ही झांटों की सफाई की हो.
मैंने उनकी पैंटी को किस किया और उसको लंबी सांस लेकर सूंघ कर साइड में फेंक दिया.
फिर झट से अपने बैग से मधु निकाल कर उन्हें चटाया और उनकी चूत पर शहद की बोतल उड़ेल कर खूब सारा शहद चूत पर टपका दिया.
भाभी अपनी चूत पर ठंडे शहद का स्पर्श पाकर अचकचा उठीं और जब तक वे संभल पातीं कि मैंने उनकी चूत पर अपनी जीभ फेर दी.
भाभी एकदम से सिहर गईं और उनके कंठ से एक मीठी सी ‘आह मर गई’ निकल पड़ा.
मैं लगा रहा और उनकी चूत को चाटने लगा.
कभी चूत को चुम्मी करता, तो कभी चाट लेता.
उसी दौरान मैंने अपने हाथ में पकड़ी हुई शहद की शीशी को उनके एक दूध के निप्पल पर टपका दिया.
वे अब शहद का मजा समझ गई थीं तो अपनी उंगली से अपने निप्पल पर शहद मलने लगीं और मेरे हाथ से शहद की शीशी लेकर अपने दूसरे दूध के निप्पल पर लगाने लगीं.
फिर उन्होंने मेरे बाल पकड़ कर मुझे दूध चूसने का इशारा किया.
तो मैं भाभी के मम्मों पर आ गया.
अब कभी मैं उनके एक दूध के निप्पल पर लगा शहद चूसता, तो कभी दूसरे को चूसने लगता.
यूं ही खेल चलता रहा. चूत और चूचियों को मैंने छक कर चूसा.
मेरे ऐसे करने से भाभी अब तक दो बार झड़ चुकी थीं और वे पागलों की तरह मेरे लंड से चुदने के लिए मचल रही थीं- आह … अब चोद भी दो … प्लीज चोद दो!
मैं उन्हें तड़फाए जा रहा था क्योंकि प्यास जितनी गहरी हो, बुझाने में उतना मजा ज्यादा आता है.
फिर मैंने उनके दुप्पटे से उनके हाथ पैर बांध कर उन्हें बेड पर सीधा लिटा दिया.
इसके बाद मैंने अपने रूमाल से उनकी आंखों को बंद कर दिया.
अब मैं मोमबत्ती जला कर तैयार हो गया.
मैं अपने एक हाथ में जली हुई मोमबत्ती और एक हाथ में बेल्ट लेकर आगे आया.
फिर जैसे ही मैंने उनके दूध पर मोम टपकाई … भाभी चीख उठीं.
उनकी इस चीख ने मुझे बड़ा सुकून दिया था.
दोस्तो, यह एक ऐसा सेक्स है, जिसे करें से जो सुख मिलता है वह चुदाई के सुख को दोगुना कर देता है.
अब मैं कभी उन्हें मोमबत्ती के मोम टपका कर मजा लेता तो कभी उनकी उसी जगह को चूम कर चूस लेता और किस कर देता, तो कभी उसी जगह पर बेल्ट से मारता.
भाभी का अंग अंग एकदम लाल टमाटर की तरह हो गया था और वे चुदने के लिए एकदम बेताब हो गई थीं.
उन्होंने अपने बाल खुले रखे हुए थे.
होंठों पर लाल लिपस्टिक, हाथ में लेडी बैग टांग कर पेन्सिल हील्स पहने हुई आईं और मुस्कुराने लगीं.
मेरी तो उनके ऊपर से नजर ही नहीं हट रही थी.
कसम से भाभी आज कयामत लग रही थीं और आस पास खड़े सब लोग उन्हें ही घूरे जा रहे थे.
उनकी उठी हुई गोल गोल चूचियां और गांड ठुमकाने वाली उनकी कॅट वॉक पर तो मेरा दिल ही घायल हो गया था.
एक मन तो किया कि इन्हें अभी ही गोद में उठा कर शुरू हो जाऊं.
पर स्टेशन था, काफ़ी लोग थे. वैसा किया नहीं जा सकता था.
तभी हम हम दोनों होटल में पहुंचे और कमरे में जाते ही हम एक दूसरे पर भूखे जानवरों की तरह टूट पड़े.
मैं भाभी के खुले बालों में हाथ डाल कर लिप्स टू लिप्स किस करते हुए मजा लेने लगा.
भाभी के चूचों को मैं उनकी कमीज के ऊपर से ही सहला रहा था.
तभी अचानक से भाभी मुझसे अलग होकर बोलीं- एक मिनट रुको यार, मुझे कपड़ों में मजा नहीं आ रहा.
उन्होंने यह कहा तो मैंने उन्हें अपनी बांहों में खींचा और उनकी कमीज के पीछे लगे हुए हुक्स खोल दिए.
साथ ही भाभी की गर्दन पर किस करते हुए मैंने उनकी ड्रेस को खोलना चालू कर दिया था.
भाभी मेरे साथ रमण सुख का आनन्द लिए जा रही थीं.
मैंने उनके एक कान में अपनी नाक से गर्म सांस छोड़ते हुए उन्हें घुमाया और अपने सामने की ओर कर दिया.
आह भाभी के बड़े बड़े एकदम टाइट गुब्बारे उनकी पिंक कलर की ब्रा में कसे हुए दिखने लगे थे.
भाभी एकदम माल लग रही थीं.
तभी मैंने अपने हाथ उनके पीछे ले जाकर उनकी ब्रा का हुक भी खोल कर उसे निकाल दिया और उनके खड़े हो चुके कड़क गुलाबी चूचुक को किस करने लगा.
वे मानो एकदम से बिफर उठीं और अगले ही पल वे मेरी शर्ट के बटन्स खोलने लगीं.
हम दोनों किस भी किए जा रहे थे.
तब हम दोनों इतने जोश में थे कि कब मेरी छाती उनकी नंगी चूचियों से रगड़ने लगी, कुछ पता ही नहीं चला.
मैं भाभी की कमर पर किस करते हुए उनकी सलवार के नाड़े की तरफ बढ़ा और जल्दी से उनके नाड़े को ढीला करके उसे भी उतार दिया.
अब भाभी मेरे सामने एक नेट वाली पतली सी पैंटी में थीं और मैं भी अंडरवियर में रह गया था.
हम दोनों एक दूसरे हर अंग को पागलों की तरह चाट और चूस रहे थे.
हमारी कामुक सिसकारियां कमरे में एक मधुर संगीत बिखेर रही थीं.
‘आह … उउह …’
भाभी भी पूरी गर्म हो चुकी थीं और बार बार कह रही थीं- अब बस देर न करो … मुझे चोद दो जल्दी से आह!
मैंने झट से भाभी की पैंटी को खींच कर निकाला और उन्हें नंगी कर दिया.
आह क्या चिकनी गोरी चूत थी उनकी, ऐसी लग रही थी जैसे आज सुबह ही झांटों की सफाई की हो.
मैंने उनकी पैंटी को किस किया और उसको लंबी सांस लेकर सूंघ कर साइड में फेंक दिया.
फिर झट से अपने बैग से मधु निकाल कर उन्हें चटाया और उनकी चूत पर शहद की बोतल उड़ेल कर खूब सारा शहद चूत पर टपका दिया.
भाभी अपनी चूत पर ठंडे शहद का स्पर्श पाकर अचकचा उठीं और जब तक वे संभल पातीं कि मैंने उनकी चूत पर अपनी जीभ फेर दी.
भाभी एकदम से सिहर गईं और उनके कंठ से एक मीठी सी ‘आह मर गई’ निकल पड़ा.
मैं लगा रहा और उनकी चूत को चाटने लगा.
कभी चूत को चुम्मी करता, तो कभी चाट लेता.
उसी दौरान मैंने अपने हाथ में पकड़ी हुई शहद की शीशी को उनके एक दूध के निप्पल पर टपका दिया.
वे अब शहद का मजा समझ गई थीं तो अपनी उंगली से अपने निप्पल पर शहद मलने लगीं और मेरे हाथ से शहद की शीशी लेकर अपने दूसरे दूध के निप्पल पर लगाने लगीं.
फिर उन्होंने मेरे बाल पकड़ कर मुझे दूध चूसने का इशारा किया.
तो मैं भाभी के मम्मों पर आ गया.
अब कभी मैं उनके एक दूध के निप्पल पर लगा शहद चूसता, तो कभी दूसरे को चूसने लगता.
यूं ही खेल चलता रहा. चूत और चूचियों को मैंने छक कर चूसा.
मेरे ऐसे करने से भाभी अब तक दो बार झड़ चुकी थीं और वे पागलों की तरह मेरे लंड से चुदने के लिए मचल रही थीं- आह … अब चोद भी दो … प्लीज चोद दो!
मैं उन्हें तड़फाए जा रहा था क्योंकि प्यास जितनी गहरी हो, बुझाने में उतना मजा ज्यादा आता है.
फिर मैंने उनके दुप्पटे से उनके हाथ पैर बांध कर उन्हें बेड पर सीधा लिटा दिया.
इसके बाद मैंने अपने रूमाल से उनकी आंखों को बंद कर दिया.
अब मैं मोमबत्ती जला कर तैयार हो गया.
मैं अपने एक हाथ में जली हुई मोमबत्ती और एक हाथ में बेल्ट लेकर आगे आया.
फिर जैसे ही मैंने उनके दूध पर मोम टपकाई … भाभी चीख उठीं.
उनकी इस चीख ने मुझे बड़ा सुकून दिया था.
दोस्तो, यह एक ऐसा सेक्स है, जिसे करें से जो सुख मिलता है वह चुदाई के सुख को दोगुना कर देता है.
अब मैं कभी उन्हें मोमबत्ती के मोम टपका कर मजा लेता तो कभी उनकी उसी जगह को चूम कर चूस लेता और किस कर देता, तो कभी उसी जगह पर बेल्ट से मारता.
भाभी का अंग अंग एकदम लाल टमाटर की तरह हो गया था और वे चुदने के लिए एकदम बेताब हो गई थीं.
अब मैंने जरा सा श्रीखंड अपने लंड पर लगाया और उनके मुँह में देकर लंड चुसवाया व चटवाया.
भाभी भी खूब मज़े से लंड को ऐसे चाटे जा रही थीं जैसे बरसों बाद कोई लंड मिला हो.
उन्होंने मेरे लौड़े को चूस चूस कर एकदम लाल कर दिया था.
मेरा लंबा और मोटा लंड अब चूत के लिए बेताब हो उठा था.
मैंने अब भाभी के हाथ पैर खोल कर उन्हें खड़ा कर दिया और दीवार से टिका दिया.
फिर भाभी की चूत की दरार में अपने लंड को धीरे से रगड़ने लगा.
भाभी भी अपनी चूत आगे को बढ़ा कर मेरे लंड को अपनी चूत में अन्दर लेने की कोशिश कर रही थीं.
पर लंड आसानी से कहां घुसने वाला था.
तभी मैंने अपने बैग से एक कंडोम निकाल कर लंड पर चढ़ा दिया.
फिर भाभी को किस करते हुए मैंने उनकी चूत पर लंड का सुपारा सैट कर दिया और ताक़त लगा कर पहला झटका देते हुए उनके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया.
पहले तो कुछ पल के लिए उनकी आवाज अटक गई.
फिर जैसे ही लंड का टोपा चूत को चीरता हुआ अन्दर घुसा, उनके पसीने छूट गए.
वे चिल्लाने की … और मेरी पकड़ से छूटने की कोशिश करने लगीं, छटपटाने लगीं.
पर मैंने उन्हें नहीं छूटने दिया, बल्कि अपनी पकड़ और मजबूत करते हुए थोड़ा ठहर गया.
फिर कुछ पल बाद जब भाभी को आराम हुआ तो वे अभी थोड़ी सामान्य हुई ही थीं कि मैंने एक और जोर का झटका मार दिया.
तभी उनकी दर्द भरी कामुक आवाज निकल गई- उईई मांआ मर गईइइ … भोसड़ी के मां चोद दी तूने मेरी चूत की … निकाल अपने लवड़े को … आह … साले ने चूत ही फाड़ दी!
उधर वे चिल्ला रही थीं और इधर में भी कहां कुछ मानने वाला था.
इसी बीच मैं एक जोर का झटका देते हुए अपना पूरा लंड भाभी की चूत में डाल दिया.
वे एकदम से ‘आआवव … मांआह … र गई …’ की आवाज करती हुई चीखीं.
तभी मैंने लंड थोड़ा सा बाहर को निकाल लिया.
फिर देखा तो मेरे लंड पर खून लगा था.
इसका मतलब भाभी की चूत फट गई थी, तभी उनको थोड़ा दर्द हुआ था.
मैं बड़े प्यार से उन्हें किस करते हुए चोदने लगा.
कुछ ही देर में भाभी को भी मज़ा आने लगा और वे भी अपनी चूत आगे पीछे करने लगीं.
मैं उन्हें और तेज़ गति से चोदने लगा.
भाभी ‘उई … एयेए … उई अम्म्म!’ किये जा रही थीं.
इसी तरह करीब लगभग 15 मिनट की चुदाई में भाभी दो बार और झड़ चुकी थीं.
अब मेरा भी होने ही वाला था, तभी मैंने भाभी से कहा- सन्नो मैं आ रहा हूँ!
वे अपनी चूत से लंड निकाल कर नीचे बैठ गईं और लंड से कंडोम को निकाल कर सामने बैठ गईं.
मैंने अपने लंड की पिचकारी भाभी के चेहरे पर दे मारी.
कुछ बूँदें उकी गोरी गुलाबी चूचियों पर भी जा गिरीं.
मैं एकदम से निढाल हो गया था, तो मैंने भाभी को पकड़ा और उन्होंने मुझे पकड़ लिया.
हम दोनों एक दूसरे को पकड़ कर वहीं बेड पर गिर कर सो गए.
कुछ देर बाद उठे तो फिर से सहवास शुरू हो गया.
उस दिन मैंने 3 बार अलग अलग पोज़िशन में भाभी की चुदाई का मजा लिया.
अभी भी जब भी मौका मिलता है, तो हम दोनों चुदाई कर लेते हैं.
आगे की सेक्स कहानी को मैं फिर लिखूंगा कि कैसे मैंने सन्नो जान की गांड
💦💦💦💦💦💦💦
शादीशुदा बहन और मॉम की चुदाई
💦💦💦💦💦💦💦
भाई सेक्स प्रेगनेंसी कहानी में मेरी बहन को शादी के बाद बच्चा नहीं हुआ तो मेरी मम्मी ने उसे मेरे साथ सेक्स करके गर्भ धारण करने की सलाह दी. दीदी ने मुझे कैसे सेक्स के लिए मनाया?
मेरा नाम शशिकांत है और मैं गुजरात का रहने वाला हूँ.
मेरी उम्र 26 साल है और मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ.
यह भाई सेक्स प्रेगनेंसी कहानी मेरी एक सच्ची घटना पर आधारित सेक्स कहानी है.
मेरे परिवार में मेरे अलावा मॉम और मेरी बड़ी बहन हैं.
मेरी बड़ी बहन की शादी एक साल पहले हो गयी थी. मेरी मॉम विधवा हैं.
बहन की शादी के बाद मैं और मॉम दोनों ही घर में रहते हैं.
मेरी बहन की शादी एक मिडल क्लास घर में हुई थी क्योंकि पापा के गुजर जाने के बाद हमारी आर्थिक परिस्थिति कोई खास अच्छी नहीं थी.
मैं अपनी दीदी के बारे में बताऊं, तो मेरी दीदी बहुत ही बड़ी हॉट और सेक्सी थी.
उसकी ब्रा का साइज़ 34 था.
शादी के एक साल बाद मेरी दीदी घर आई.
रात को मैं जब ऑफिस से घर आया तो बहन को आया देख कर मैं बहुत खुश हुआ.
हम तीनों ने मिलकर खाना खाया और रात को बैठ कर बातें की.
तब मैंने देखा कि मेरी दीदी और मॉम परेशान लग रही थीं.
मैंने बहुत पूछा लेकिन उन दोनों ने मुझे कुछ बताया ही नहीं.
फिर रात के करीब बारह बजे हम सब सोने लगे.
लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी तो मैं अपने कमरे से बाहर निकल आया.
मैंने देखा कि मॉम के कमरे की लाइट जल रही थी.
मैं मॉम के कमरे के दरवाजे के पास गया तो मुझे दीदी के रोने आवाज़ आ रही थी.
तो मैं और नज़दीक गया और मॉम और दीदी की बातें सुनने लगा.
तब मुझे पता चला कि दीदी को कोई बच्चा नहीं हुआ इसलिए दीदी को उसकी ससुराल वालों ने घर से निकाल दिया था.
लेकिन दीदी बोल रही थी कि प्राब्लम उनके पति में है.
भाभी भी खूब मज़े से लंड को ऐसे चाटे जा रही थीं जैसे बरसों बाद कोई लंड मिला हो.
उन्होंने मेरे लौड़े को चूस चूस कर एकदम लाल कर दिया था.
मेरा लंबा और मोटा लंड अब चूत के लिए बेताब हो उठा था.
मैंने अब भाभी के हाथ पैर खोल कर उन्हें खड़ा कर दिया और दीवार से टिका दिया.
फिर भाभी की चूत की दरार में अपने लंड को धीरे से रगड़ने लगा.
भाभी भी अपनी चूत आगे को बढ़ा कर मेरे लंड को अपनी चूत में अन्दर लेने की कोशिश कर रही थीं.
पर लंड आसानी से कहां घुसने वाला था.
तभी मैंने अपने बैग से एक कंडोम निकाल कर लंड पर चढ़ा दिया.
फिर भाभी को किस करते हुए मैंने उनकी चूत पर लंड का सुपारा सैट कर दिया और ताक़त लगा कर पहला झटका देते हुए उनके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया.
पहले तो कुछ पल के लिए उनकी आवाज अटक गई.
फिर जैसे ही लंड का टोपा चूत को चीरता हुआ अन्दर घुसा, उनके पसीने छूट गए.
वे चिल्लाने की … और मेरी पकड़ से छूटने की कोशिश करने लगीं, छटपटाने लगीं.
पर मैंने उन्हें नहीं छूटने दिया, बल्कि अपनी पकड़ और मजबूत करते हुए थोड़ा ठहर गया.
फिर कुछ पल बाद जब भाभी को आराम हुआ तो वे अभी थोड़ी सामान्य हुई ही थीं कि मैंने एक और जोर का झटका मार दिया.
तभी उनकी दर्द भरी कामुक आवाज निकल गई- उईई मांआ मर गईइइ … भोसड़ी के मां चोद दी तूने मेरी चूत की … निकाल अपने लवड़े को … आह … साले ने चूत ही फाड़ दी!
उधर वे चिल्ला रही थीं और इधर में भी कहां कुछ मानने वाला था.
इसी बीच मैं एक जोर का झटका देते हुए अपना पूरा लंड भाभी की चूत में डाल दिया.
वे एकदम से ‘आआवव … मांआह … र गई …’ की आवाज करती हुई चीखीं.
तभी मैंने लंड थोड़ा सा बाहर को निकाल लिया.
फिर देखा तो मेरे लंड पर खून लगा था.
इसका मतलब भाभी की चूत फट गई थी, तभी उनको थोड़ा दर्द हुआ था.
मैं बड़े प्यार से उन्हें किस करते हुए चोदने लगा.
कुछ ही देर में भाभी को भी मज़ा आने लगा और वे भी अपनी चूत आगे पीछे करने लगीं.
मैं उन्हें और तेज़ गति से चोदने लगा.
भाभी ‘उई … एयेए … उई अम्म्म!’ किये जा रही थीं.
इसी तरह करीब लगभग 15 मिनट की चुदाई में भाभी दो बार और झड़ चुकी थीं.
अब मेरा भी होने ही वाला था, तभी मैंने भाभी से कहा- सन्नो मैं आ रहा हूँ!
वे अपनी चूत से लंड निकाल कर नीचे बैठ गईं और लंड से कंडोम को निकाल कर सामने बैठ गईं.
मैंने अपने लंड की पिचकारी भाभी के चेहरे पर दे मारी.
कुछ बूँदें उकी गोरी गुलाबी चूचियों पर भी जा गिरीं.
मैं एकदम से निढाल हो गया था, तो मैंने भाभी को पकड़ा और उन्होंने मुझे पकड़ लिया.
हम दोनों एक दूसरे को पकड़ कर वहीं बेड पर गिर कर सो गए.
कुछ देर बाद उठे तो फिर से सहवास शुरू हो गया.
उस दिन मैंने 3 बार अलग अलग पोज़िशन में भाभी की चुदाई का मजा लिया.
अभी भी जब भी मौका मिलता है, तो हम दोनों चुदाई कर लेते हैं.
आगे की सेक्स कहानी को मैं फिर लिखूंगा कि कैसे मैंने सन्नो जान की गांड
💦💦💦💦💦💦💦
शादीशुदा बहन और मॉम की चुदाई
💦💦💦💦💦💦💦
भाई सेक्स प्रेगनेंसी कहानी में मेरी बहन को शादी के बाद बच्चा नहीं हुआ तो मेरी मम्मी ने उसे मेरे साथ सेक्स करके गर्भ धारण करने की सलाह दी. दीदी ने मुझे कैसे सेक्स के लिए मनाया?
मेरा नाम शशिकांत है और मैं गुजरात का रहने वाला हूँ.
मेरी उम्र 26 साल है और मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ.
यह भाई सेक्स प्रेगनेंसी कहानी मेरी एक सच्ची घटना पर आधारित सेक्स कहानी है.
मेरे परिवार में मेरे अलावा मॉम और मेरी बड़ी बहन हैं.
मेरी बड़ी बहन की शादी एक साल पहले हो गयी थी. मेरी मॉम विधवा हैं.
बहन की शादी के बाद मैं और मॉम दोनों ही घर में रहते हैं.
मेरी बहन की शादी एक मिडल क्लास घर में हुई थी क्योंकि पापा के गुजर जाने के बाद हमारी आर्थिक परिस्थिति कोई खास अच्छी नहीं थी.
मैं अपनी दीदी के बारे में बताऊं, तो मेरी दीदी बहुत ही बड़ी हॉट और सेक्सी थी.
उसकी ब्रा का साइज़ 34 था.
शादी के एक साल बाद मेरी दीदी घर आई.
रात को मैं जब ऑफिस से घर आया तो बहन को आया देख कर मैं बहुत खुश हुआ.
हम तीनों ने मिलकर खाना खाया और रात को बैठ कर बातें की.
तब मैंने देखा कि मेरी दीदी और मॉम परेशान लग रही थीं.
मैंने बहुत पूछा लेकिन उन दोनों ने मुझे कुछ बताया ही नहीं.
फिर रात के करीब बारह बजे हम सब सोने लगे.
लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी तो मैं अपने कमरे से बाहर निकल आया.
मैंने देखा कि मॉम के कमरे की लाइट जल रही थी.
मैं मॉम के कमरे के दरवाजे के पास गया तो मुझे दीदी के रोने आवाज़ आ रही थी.
तो मैं और नज़दीक गया और मॉम और दीदी की बातें सुनने लगा.
तब मुझे पता चला कि दीदी को कोई बच्चा नहीं हुआ इसलिए दीदी को उसकी ससुराल वालों ने घर से निकाल दिया था.
लेकिन दीदी बोल रही थी कि प्राब्लम उनके पति में है.
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मैं मॉम की बातें सुन रहा था.
मॉम ने दीदी से कहा- एक रास्ता है, तुम अपने भाई से चुदवा लो तो तुम्हारी प्राब्लम दूर हो जाएगी!
यह सुनकर मेरा लंड तुरन्त टाइट हो गया लेकिन मेरी दीदी को ये पसंद नहीं आ रहा था.
मेरी मॉम के काफी समझाने पर दीदी ने हां बोल दिया, लेकिन दीदी बोली- भैया का तो छोटा होगा ना!
तो मॉम बोली- नहीं, तेरे भैया का तो तेरे पापा से भी बड़ा और मोटा है!
ये सुन कर तो मैं पानी पानी हो गया.
दीदी बोली- तुमको कैसे पता कि भैया का बड़ा है?
तो मॉम बोली- मैंने बाथरूम के छेद से उसको दो तीन बार लंड को हिलाते हुए देखा है.
यह सुनकर मेरे होश उड़ गए.
अब दीदी तैयार हो गयी थी कि वह मुझसे चुदवाएगी.
लेकिन यह सब कैसे होगा?
तो मॉम ने प्लान बनाया- मैं दो दिन के लिए बाहर जाने का प्लान बनाती हूँ, तुम चुदने का प्लान बना लेना!
दीदी बोली- ठीक है.
दूसरे दिन मॉम मेरे पास आईं और रात को जिस तरह बात हुई थी, वैसे ही उन्होंने कहा.
अब मॉम बाहर चली गईं.
उनके जाने के बाद घर में दीदी और मैं ही रह गए थे.
दीदी ने आज सेक्सी टाइट जींस और टी-शर्ट पहनी थी जिसमें से दीदी की ब्रा साफ दिखाई दे रही थी.
उनके बूब्स भी बहुत बड़े थे, तो उनकी टी-शर्ट में ऐसे दिख रहे थे, मानो अभी निकल कर बाहर आ जाएंगे.
मैं यह जानता था कि मेरी दीदी मेरे लौड़े से आज चुदेगी.
इसलिए मैं अपने आपको कंट्रोल नहीं कर पा रहा था.
बस मैं यह देखने को मरा जा रहा था कि मेरी दीदी किस तरह से मुझे उत्तेजित करके मनाती है.
हम दोनों खाना खाने बैठे तो दीदी ने मुझसे बातें करना शुरू किया- भैया, तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं?
मैं पहले थोड़ा शर्माया.
फिर दीदी ने दुबारा से पूछा.
तो मैंने कहा- नहीं दीदी!
तो दीदी बोली- क्यों नहीं है … अभी तो तुम जवान हो फिर भी?
मेरे मन में लड्डू फूट रहे थे.
मैंने भी दीदी से पूछा- क्या आपका शादी से पहले कोई ब्वॉयफ्रेंड था?
तो वह बोली- हां जब मैं पढ़ाई करती थी, तब तो था.
फिर मैंने दीदी से पूछा- जीजा जी कैसे हैं? आपको खुश तो रखते हैं न?
मेरे इस सवाल पर वह रोने लगी और मेरे पास आकर मुझसे चिपक गई.
मैं समझ गया कि उसका एक्शन शुरू हो गया है.
मैंने उसे सहलाते हुए पूछा- क्या हुआ दीदी?
तो वह मुझसे और ज़ोर से चिपक गई.
अब दीदी के बूब्स मुझे स्पर्श हो रहे थे.
मेरा लंड और ज्यादा टाइट होता जा रहा था.
दीदी ने मुझसे चिपके हुए ही सब बात बताई, जो उसने रात को मॉम को बताई थी.
अब मैं समझ गया था कि दीदी भी चुदने के लिए तैयार है!
मैंने आगे पूछा- तो बच्चा क्यों नहीं हो रहा है?
दीदी खुल कर बोली- तेरे जीजा जी का लंड बहुत ही छोटा है!
उसके मुँह से लंड शब्द सुनकर मेरा लंड और ज्यादा टाइट हो गया.
मैंने कहा- तो क्या वह तुझे सही से नहीं करता है?
वह बोली- हां भैया, उसका लंड मेरी चूत में घुसते ही झड़ जाता है.
मैंने कहा- तो तू अब क्या करेगी?
वह मेरे सीने से लिपट गई और बोली- मुझसे तू किसी भी तरह से संतुष्ट कर दे.
मैंने उसके मुँह से यह सुना तो उसको अपनी गोदी में लेकर बेडरूम में आ गया और उधर मैंने अपनी दीदी को बेड पर लेटा दिया.
फिर मैंने अपने सारे कपड़े निकाल दिए.
दीदी बोली- भैया ये क्या कर रहे हो?
मैं अपनी चड्डी उतारते हुए बोला- तुम्हें मां बनाने का काम कर रहा हूँ.
भाई सेक्स प्रेगनेंसी
मेरी दीदी मेरे लंड को हैरानी से देख रही थी.
वह बोली- इतना बड़ा!
मैंने अपना लंड सहलाते हुए कहा- हां आज यही लंड तुम्हारा उद्धार करेगा.
भाई सेक्स प्रेगनेंसी की बात सोच कर वह खुश हो गई.
अब मैंने दीदी से भी नंगी होने को कहा.
दीदी ने पहले अपनी जींस निकाली और बाद में टी-शर्ट उतार दी.
मेरी दीदी अब सिर्फ़ ब्रा पैंटी में थी.
दीदी को ब्रा पैंटी में देखकर मेरा लंड और भी लंबा और मोटा हो गया.
मैंने दीदी की ब्रा को निकाल दिया.
दीदी के बूब्स पूरे नंगे थे और एकदम तने हुए थे.
मैं दीदी के बूब्स को दबाने लगा और उसकी चूचियों को मसलने लगा.
दीदी को बहुत मज़ा आने लगा था.
वह मेरे मुँह में निप्पल देने लगी थी.
उस वक्त हम दोनों यह भूल गए थे कि हम भाई बहन हैं.
उस वक्त हम दोनों सिर्फ नर-मादा थे जो संतान को पैदा करने की कोशिश में लगे हुए थे.
अब तक उसके दूध चूसने से वह पूरी गर्म हो गयी थी और मेरे लंड को अपने मुँह में लेना चाहती थी.
वह मेरे लौड़े को अपने हाथ में लेकर सहलाती हुई बोल रही थी- आज मेरी एक साल की वासना को शांत कर दो भैया!
दीदी ने मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी.
कुछ मिनट बाद मैंने दीदी को बेड पर चित लेटा दिया और अपना लंड उसकी चूत पर सैट कर दिया.
मैंने धीरे से लंड को पेल कर अपनी बहन की चुदाई शुरू की.
जैसे ही मैंने लंड जरा अन्दर डाला, तो वह चिल्लाने लगी- आह भाई, धीरे डालो!
मेरी दीदी की चूत सच में बहुत टाइट थी.
किसी तरह से मैंने लंड चूत में पेला तो उसकी चूत से खून निकलने लगा.
मॉम ने दीदी से कहा- एक रास्ता है, तुम अपने भाई से चुदवा लो तो तुम्हारी प्राब्लम दूर हो जाएगी!
यह सुनकर मेरा लंड तुरन्त टाइट हो गया लेकिन मेरी दीदी को ये पसंद नहीं आ रहा था.
मेरी मॉम के काफी समझाने पर दीदी ने हां बोल दिया, लेकिन दीदी बोली- भैया का तो छोटा होगा ना!
तो मॉम बोली- नहीं, तेरे भैया का तो तेरे पापा से भी बड़ा और मोटा है!
ये सुन कर तो मैं पानी पानी हो गया.
दीदी बोली- तुमको कैसे पता कि भैया का बड़ा है?
तो मॉम बोली- मैंने बाथरूम के छेद से उसको दो तीन बार लंड को हिलाते हुए देखा है.
यह सुनकर मेरे होश उड़ गए.
अब दीदी तैयार हो गयी थी कि वह मुझसे चुदवाएगी.
लेकिन यह सब कैसे होगा?
तो मॉम ने प्लान बनाया- मैं दो दिन के लिए बाहर जाने का प्लान बनाती हूँ, तुम चुदने का प्लान बना लेना!
दीदी बोली- ठीक है.
दूसरे दिन मॉम मेरे पास आईं और रात को जिस तरह बात हुई थी, वैसे ही उन्होंने कहा.
अब मॉम बाहर चली गईं.
उनके जाने के बाद घर में दीदी और मैं ही रह गए थे.
दीदी ने आज सेक्सी टाइट जींस और टी-शर्ट पहनी थी जिसमें से दीदी की ब्रा साफ दिखाई दे रही थी.
उनके बूब्स भी बहुत बड़े थे, तो उनकी टी-शर्ट में ऐसे दिख रहे थे, मानो अभी निकल कर बाहर आ जाएंगे.
मैं यह जानता था कि मेरी दीदी मेरे लौड़े से आज चुदेगी.
इसलिए मैं अपने आपको कंट्रोल नहीं कर पा रहा था.
बस मैं यह देखने को मरा जा रहा था कि मेरी दीदी किस तरह से मुझे उत्तेजित करके मनाती है.
हम दोनों खाना खाने बैठे तो दीदी ने मुझसे बातें करना शुरू किया- भैया, तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं?
मैं पहले थोड़ा शर्माया.
फिर दीदी ने दुबारा से पूछा.
तो मैंने कहा- नहीं दीदी!
तो दीदी बोली- क्यों नहीं है … अभी तो तुम जवान हो फिर भी?
मेरे मन में लड्डू फूट रहे थे.
मैंने भी दीदी से पूछा- क्या आपका शादी से पहले कोई ब्वॉयफ्रेंड था?
तो वह बोली- हां जब मैं पढ़ाई करती थी, तब तो था.
फिर मैंने दीदी से पूछा- जीजा जी कैसे हैं? आपको खुश तो रखते हैं न?
मेरे इस सवाल पर वह रोने लगी और मेरे पास आकर मुझसे चिपक गई.
मैं समझ गया कि उसका एक्शन शुरू हो गया है.
मैंने उसे सहलाते हुए पूछा- क्या हुआ दीदी?
तो वह मुझसे और ज़ोर से चिपक गई.
अब दीदी के बूब्स मुझे स्पर्श हो रहे थे.
मेरा लंड और ज्यादा टाइट होता जा रहा था.
दीदी ने मुझसे चिपके हुए ही सब बात बताई, जो उसने रात को मॉम को बताई थी.
अब मैं समझ गया था कि दीदी भी चुदने के लिए तैयार है!
मैंने आगे पूछा- तो बच्चा क्यों नहीं हो रहा है?
दीदी खुल कर बोली- तेरे जीजा जी का लंड बहुत ही छोटा है!
उसके मुँह से लंड शब्द सुनकर मेरा लंड और ज्यादा टाइट हो गया.
मैंने कहा- तो क्या वह तुझे सही से नहीं करता है?
वह बोली- हां भैया, उसका लंड मेरी चूत में घुसते ही झड़ जाता है.
मैंने कहा- तो तू अब क्या करेगी?
वह मेरे सीने से लिपट गई और बोली- मुझसे तू किसी भी तरह से संतुष्ट कर दे.
मैंने उसके मुँह से यह सुना तो उसको अपनी गोदी में लेकर बेडरूम में आ गया और उधर मैंने अपनी दीदी को बेड पर लेटा दिया.
फिर मैंने अपने सारे कपड़े निकाल दिए.
दीदी बोली- भैया ये क्या कर रहे हो?
मैं अपनी चड्डी उतारते हुए बोला- तुम्हें मां बनाने का काम कर रहा हूँ.
भाई सेक्स प्रेगनेंसी
मेरी दीदी मेरे लंड को हैरानी से देख रही थी.
वह बोली- इतना बड़ा!
मैंने अपना लंड सहलाते हुए कहा- हां आज यही लंड तुम्हारा उद्धार करेगा.
भाई सेक्स प्रेगनेंसी की बात सोच कर वह खुश हो गई.
अब मैंने दीदी से भी नंगी होने को कहा.
दीदी ने पहले अपनी जींस निकाली और बाद में टी-शर्ट उतार दी.
मेरी दीदी अब सिर्फ़ ब्रा पैंटी में थी.
दीदी को ब्रा पैंटी में देखकर मेरा लंड और भी लंबा और मोटा हो गया.
मैंने दीदी की ब्रा को निकाल दिया.
दीदी के बूब्स पूरे नंगे थे और एकदम तने हुए थे.
मैं दीदी के बूब्स को दबाने लगा और उसकी चूचियों को मसलने लगा.
दीदी को बहुत मज़ा आने लगा था.
वह मेरे मुँह में निप्पल देने लगी थी.
उस वक्त हम दोनों यह भूल गए थे कि हम भाई बहन हैं.
उस वक्त हम दोनों सिर्फ नर-मादा थे जो संतान को पैदा करने की कोशिश में लगे हुए थे.
अब तक उसके दूध चूसने से वह पूरी गर्म हो गयी थी और मेरे लंड को अपने मुँह में लेना चाहती थी.
वह मेरे लौड़े को अपने हाथ में लेकर सहलाती हुई बोल रही थी- आज मेरी एक साल की वासना को शांत कर दो भैया!
दीदी ने मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी.
कुछ मिनट बाद मैंने दीदी को बेड पर चित लेटा दिया और अपना लंड उसकी चूत पर सैट कर दिया.
मैंने धीरे से लंड को पेल कर अपनी बहन की चुदाई शुरू की.
जैसे ही मैंने लंड जरा अन्दर डाला, तो वह चिल्लाने लगी- आह भाई, धीरे डालो!
मेरी दीदी की चूत सच में बहुत टाइट थी.
किसी तरह से मैंने लंड चूत में पेला तो उसकी चूत से खून निकलने लगा.
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मैंने हाथ से टटोल कर देखा तो खून मेरी उंगलियों में लग गया.
दीदी बहुत छटपटा रही थी.
उसकी आंखें बंद थीं और उसे कुछ भी नहीं सूझ रहा था.
वह मुझसे लंड निकालने की भी नहीं कह पा रही थी और चोदने की भी नहीं कह पा रही थी.
फिर मैंने अपनी बहन के दूध चूसना शुरू किए तो धीरे धीरे उसकी चूत ने रस छोड़ना शुरू किया और लंड को चूत में जगह मिलने लगी.
शुरुआती दर्द के बाद अब हम दोनों भाई बहन की मस्त चुदाई होने लगी थी.
मेरी बहन बस चुपचाप अपनी दोनों मुट्ठियों में चादर को भींचे हुई थी और मैं उसकी चूत में लगातार लंबे लंबे शॉट मार रहा था.
मुझे अपनी बहन की कसी हुई चूत चोदने में बहुत मजा आ रहा था.
लगभग 20 मिनट चुदाई के बाद मैं अपनी बहन की चूत में ही झड़ गया और उसके ऊपर छा गया.
मैंने दीदी से पूछा- कैसा लगा?
मेरी दीदी ने बताया- मैं दो बार झड़ चुकी हूँ.
कुछ देर बाद हम दोनों फिर से उत्तेजित हो गए और मैंने फिर से अपनी बहन की चुदाई शुरू कर दी.
उस दिन मैंने दीदी को दिन में तीन बार और रात को चार बार चोदा.
हम दोनों ने लगातार दो दिन चुदाई की और दो दिन बाद मॉम वापस आ गईं.
शाम को हम सबने खाना खाया और अपने अपने कमरे में सोने चले गए.
पहले मॉम अपने कमरे में गईं तो उसी समय मौका देख कर मैंने दीदी से पूछा- क्या आज चुदाई करने नहीं मिलेगी?
तो दीदी हंस कर ना में सर हिला कर चली गयी.
मुझे चुदाई किए बिना नींद नहीं आ रही थी.
तो मैं मॉम के कमरे के दरवाजे पर वापस गया.
मॉम और दीदी बातें कर रही थीं.
मॉम ने दीदी से पूछा- काम हुआ या नहीं?
दीदी ने कहा- हां मॉम काम हो गया. भैया तो लंबी रेस का घोड़ा है.
मॉम बोली- मैंने तो तेरा काम कर दिया … अब तू मेरा भी कर दे!
दीदी बोली- मॉम मैं समझी नहीं?
तो मॉम बोलीं- मैं भी तेरे पापा के जाने के बाद कभी नहीं चुदी हूँ, तो मुझे भी अपने भैया से चुदवा दे!
दीदी मुस्कुरा कर बोली- ठीक है.
इतना बोल कर वह दरवाजे के पास आई.
मैं झट से अपने कमरे में चला गया और सोने का नाटक करने लगा.
दीदी ने मुझे जगाने की कोशिश की, मैं जागने का नाटक करने लगा.
फिर मैंने पूछा- दीदी क्यों आई हो? मॉम को पता चला तो वह हमें डाटेंगी!
तो वह बोली- मॉम नहीं डाटेंगी.
फिर मॉम से बहन की जो बातें हो रही थीं, उसने वे सब बातें मुझे बताईं.
मैंने भी हां कर दी और उसी समय मैं दीदी के साथ मॉम के पास आ गया.
मॉम समझ गईं कि मैं उनको चोदने के लिए राजी हो गया हूँ तो वे मुझे वासना भरी नजरों से देखने लगीं.
मैंने मॉम के सामने ही दीदी को अपनी बांहों में भर लिया और मॉम को दिखाते हुए अपनी बहन के दूध दबाने लगा.
यह सीन देख कर मॉम भी गर्मा गईं और उनका साथ भी मुझे मिलने लगा.
मैंने उन दोनों को एक साथ प्यार करना शुरू कर दिया.
कुछ ही देर में मॉम मेरे सामने नंगी हो गई थीं और वे मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी थीं.
मैंने मॉम की धकापेल चुदाई की.
उसके बाद हम तीनों घर में बिंदास रहने लगे थे.
एक महीने तक मैंने अपनी बहन को चोदा और दीदी प्रेग्नेंट होकर अपनी ससुराल चली गयी.
अब मैं अपनी मॉम को हर रोज डॉगी स्टाइल में चोदता हूँ.
तो दोस्तो, आपको मेरी सच्ची भाई सेक्स प्रेगनेंसी कहानी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
दीदी बहुत छटपटा रही थी.
उसकी आंखें बंद थीं और उसे कुछ भी नहीं सूझ रहा था.
वह मुझसे लंड निकालने की भी नहीं कह पा रही थी और चोदने की भी नहीं कह पा रही थी.
फिर मैंने अपनी बहन के दूध चूसना शुरू किए तो धीरे धीरे उसकी चूत ने रस छोड़ना शुरू किया और लंड को चूत में जगह मिलने लगी.
शुरुआती दर्द के बाद अब हम दोनों भाई बहन की मस्त चुदाई होने लगी थी.
मेरी बहन बस चुपचाप अपनी दोनों मुट्ठियों में चादर को भींचे हुई थी और मैं उसकी चूत में लगातार लंबे लंबे शॉट मार रहा था.
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लगभग 20 मिनट चुदाई के बाद मैं अपनी बहन की चूत में ही झड़ गया और उसके ऊपर छा गया.
मैंने दीदी से पूछा- कैसा लगा?
मेरी दीदी ने बताया- मैं दो बार झड़ चुकी हूँ.
कुछ देर बाद हम दोनों फिर से उत्तेजित हो गए और मैंने फिर से अपनी बहन की चुदाई शुरू कर दी.
उस दिन मैंने दीदी को दिन में तीन बार और रात को चार बार चोदा.
हम दोनों ने लगातार दो दिन चुदाई की और दो दिन बाद मॉम वापस आ गईं.
शाम को हम सबने खाना खाया और अपने अपने कमरे में सोने चले गए.
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मॉम ने दीदी से पूछा- काम हुआ या नहीं?
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मॉम बोली- मैंने तो तेरा काम कर दिया … अब तू मेरा भी कर दे!
दीदी बोली- मॉम मैं समझी नहीं?
तो मॉम बोलीं- मैं भी तेरे पापा के जाने के बाद कभी नहीं चुदी हूँ, तो मुझे भी अपने भैया से चुदवा दे!
दीदी मुस्कुरा कर बोली- ठीक है.
इतना बोल कर वह दरवाजे के पास आई.
मैं झट से अपने कमरे में चला गया और सोने का नाटक करने लगा.
दीदी ने मुझे जगाने की कोशिश की, मैं जागने का नाटक करने लगा.
फिर मैंने पूछा- दीदी क्यों आई हो? मॉम को पता चला तो वह हमें डाटेंगी!
तो वह बोली- मॉम नहीं डाटेंगी.
फिर मॉम से बहन की जो बातें हो रही थीं, उसने वे सब बातें मुझे बताईं.
मैंने भी हां कर दी और उसी समय मैं दीदी के साथ मॉम के पास आ गया.
मॉम समझ गईं कि मैं उनको चोदने के लिए राजी हो गया हूँ तो वे मुझे वासना भरी नजरों से देखने लगीं.
मैंने मॉम के सामने ही दीदी को अपनी बांहों में भर लिया और मॉम को दिखाते हुए अपनी बहन के दूध दबाने लगा.
यह सीन देख कर मॉम भी गर्मा गईं और उनका साथ भी मुझे मिलने लगा.
मैंने उन दोनों को एक साथ प्यार करना शुरू कर दिया.
कुछ ही देर में मॉम मेरे सामने नंगी हो गई थीं और वे मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी थीं.
मैंने मॉम की धकापेल चुदाई की.
उसके बाद हम तीनों घर में बिंदास रहने लगे थे.
एक महीने तक मैंने अपनी बहन को चोदा और दीदी प्रेग्नेंट होकर अपनी ससुराल चली गयी.
अब मैं अपनी मॉम को हर रोज डॉगी स्टाइल में चोदता हूँ.
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Antarvasana story:
अनजान शहर में पहली बार चूत मिली
(Indian Sexy Ladki ki Chudai)
इंडियन सेक्सी लड़की की चुदाई कहानी में मैं कमरा किराये पर लेकर रहता था. साथ वाले कमरों में लड़कियां रहती थी. उनमें से एक लड़की से मेरी दोस्ती हो गयी. उसने मुझे हॉट वीडियो भेजी.
यह मेरी पहली सच्ची सेक्स की घटना है कि कैसे मैं गांव से एक दूर शहर में पढ़ाई करने के लिए बाहर निकला और मेरा पहला सेक्स मेरे रूम के बगल वाली लड़की के साथ हुआ।
मेरा नाम विजय डी. शुक्ला है और मेरी उम्र 19 साल की है.
मैं बहुत सीधा-साधा लड़का हूं.
अंतर्वासना को पढ़ने के बाद मेरी इच्छा हुई कि मैं अपनी इंडियन सेक्सी लड़की की चुदाई कहानी आप लोगों के साथ साझा करूं.
मैंने वाराणसी में एक प्रतिष्ठित संस्थान में प्रथम वर्ष बी. काम में प्रवेश लिया और एक किराए के कमरे में रहने लगा.
जब मैं पहली बार किसी किराए के रूम में शिफ्ट हुआ तो मुझे बहुत अजीब लगा.
लेकिन वहां मैंने बहुत कुछ सीखा.
जैसे खाना बनाने के समय को मैनेज करना आदि चीजें!
अब मैं आपको बताता हूं कि मेरे कमरे के बगल में दो लड़कियां रहती थी, एक का नाम कोमल सिंह और दूसरे का नाम नेहा तिवारी था.
दोनों लड़कियों का कमरा अलग अलग था तो हम एक दूसरे के पड़ोसी थे.
कोमल सिंह बहुत सेक्सी थी. उसके दोनों मम्मों को देखकर मेरा लन्ड खड़ा हो गया. उसकी चूचियां गोदाम जैसे भरी हुई थी.
उसकी गांड इतनी फूली हुई थी कि मेरा लन्ड उसको मारने के लिए उतावला हो रहा था.
पहली बार किसी लड़की को देखकर मेरे साथ ऐसा हुआ था.
हम दोनों की छत एक ही थी.
मैं छत पर था और वह भी.
उसने मुझसे पूछा- क्या करते हो?
मैंने बताया- यहां मैं पढ़ने आया हूं.
सब कुछ बताने के बाद मैं भी उससे पूछा- आप यहां क्या करती हैं?
तो उसने बताया- मैं यहां M.A. कर रही हूं.
इस तरह से बातें हुई तो धीरे-धीरे इसी तरह का प्रतिदिन बातें होने लगी थी.
अगर वह व्यस्त रहती थी तो उनका कुछ भी समान मार्केट से लाना होता था तो मैं ला देता था.
वह मुझे उसका पैसा दे देती.
सामान लेने के बाद मुझे जो पैसा बचता, मैं उसे देने लगता तो उसे मुझे रख लेने के लिए बोलती.
इससे मुझे पता चल गया था कि यह किसी बड़े घर की लड़की है।
उसके कमरे में सब व्यवस्थाएं थी.
मैं आपको बता दूं कि उस समय गर्मी का मौसम था उनके रूम में कूलर और फ्रिज तमाम व्यवस्थाएं थी.
इसी तरह से हम दोनों ने एक दूसरे का फोन नंबर लिया,
क्योंकि मैं मार्केट जाता किसी काम से तो उनका भी मार्केट का काम कर देता था जिससे वह बहुत खुश रहती थी.
धीरे-धीरे व्हाट्सएप पर बातें होने लगी थी.
इक दिन अचानक मेरे साथ कुछ ऐसा हुआ जिससे मैं बहुत डर गया था.
लेकिन साथ में खुशी भी हो रही थी.
मैं छत पर था तो कोमल एक झटके में आई और मेरा गाल चूम लिया.
मानो मुझे सदमा सा लग गया था.
आज तक मेरे साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था.
मैंने पूछा- क्या हुआ?
बोली- मेरा रिजल्ट आ गया और मैं कॉलेज की टॉपर बन गई.
मैंने बधाइयां दी और बोला- मुझे पार्टी चाहिए!
मैं भी मौके का फायदा उठाना चाहता था.
वह बोली- ठीक है.
उसने मुझे पार्टी दी.
मैं भी धीरे-धीरे उनके बदन को छूने लगा था लेकिन वह कुछ नहीं बोलती थी.
उस रात को उसने मुझे एक वीडियो भेजा जिसमें गंदा गाना था.
कामुक चीजें देखकर मैं भी भौचक्का रह गया.
पर मैं समझ गया कि इसकी भी चूत प्यासी है.
तभी उसने व्हाट्सएप पर हंसने वाले इमोजी भेजा.
मैं भी मजाक में बोला- आ जाऊं क्या तुम्हारे रूम पर? तब हंस के दिखाना!
वह बोली- आ जाओ.
मुझे कोमल को चोदने की आग लग चुकी थी.
मैं उसके कमरे में गया देखा तो उसने स्पोर्ट्स टॉप पहनी थी जिससे उसके उरोज बाहर झांक रहे थे.
नीचे उसने शॉर्ट पहनी हुई थी जिससे मोटी जांघें खंभों की तरह झलक रही थी.
ऐसा लग रहा था कि मैं सपना देख रहा हूं.
लेकिन यह सच में मेरे सामने था.
मैं उसके पास जाकर उसको देखने लगा.
और वह मेरी आंखों में देखने लगी.
मुझे तो यह पता चल चुका था कि कोमल की चूत प्यासी है.
मानो जैसे मुझे नशा हो गया हो … मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया.
वह भी मेरे होंठों को चूसने लगी.
कभी मैं उसको चूसता, कभी वह मुझे चूसती.
इस तरह से मैंने कोमल को बेड पर लेटा दिया और मेरा हाथ उसके बदन को सहलाने लगा.
ऊपर से ही मैंने उसके चूचों को हल्का-हल्का दबाना शुरू कर दिया.
और वह सिसकारियां भरने लगी- शस्स शशश् आह हहह!
मेरा लन्ड कड़क हो गया था.
कोमल मेरे लोअर के ऊपर से मेरे लंड को पकड़ने लगी.
मुझे ऐसा मानो स्वर्ग नसीब हो रहा था.
मैंने उसके स्पोर्ट्स टॉप को निकालकर फेंका.
उसकी चूचियां अब नंगी हो चुकी थी.
मैंने कोमल के गले को चूमते हुए उसके निप्पल पीना शुरू कर दिया.
कोमल की जोर जोर से सिसकारियां निकलने लगी.
उसे सुनकर मुझे और भी आनंद आने लगा.
और अब मेरा एक हाथ उसके पैंटी के अंदर से ही उसकी चूत को रगड़ रहा था.
अनजान शहर में पहली बार चूत मिली
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इंडियन सेक्सी लड़की की चुदाई कहानी में मैं कमरा किराये पर लेकर रहता था. साथ वाले कमरों में लड़कियां रहती थी. उनमें से एक लड़की से मेरी दोस्ती हो गयी. उसने मुझे हॉट वीडियो भेजी.
यह मेरी पहली सच्ची सेक्स की घटना है कि कैसे मैं गांव से एक दूर शहर में पढ़ाई करने के लिए बाहर निकला और मेरा पहला सेक्स मेरे रूम के बगल वाली लड़की के साथ हुआ।
मेरा नाम विजय डी. शुक्ला है और मेरी उम्र 19 साल की है.
मैं बहुत सीधा-साधा लड़का हूं.
अंतर्वासना को पढ़ने के बाद मेरी इच्छा हुई कि मैं अपनी इंडियन सेक्सी लड़की की चुदाई कहानी आप लोगों के साथ साझा करूं.
मैंने वाराणसी में एक प्रतिष्ठित संस्थान में प्रथम वर्ष बी. काम में प्रवेश लिया और एक किराए के कमरे में रहने लगा.
जब मैं पहली बार किसी किराए के रूम में शिफ्ट हुआ तो मुझे बहुत अजीब लगा.
लेकिन वहां मैंने बहुत कुछ सीखा.
जैसे खाना बनाने के समय को मैनेज करना आदि चीजें!
अब मैं आपको बताता हूं कि मेरे कमरे के बगल में दो लड़कियां रहती थी, एक का नाम कोमल सिंह और दूसरे का नाम नेहा तिवारी था.
दोनों लड़कियों का कमरा अलग अलग था तो हम एक दूसरे के पड़ोसी थे.
कोमल सिंह बहुत सेक्सी थी. उसके दोनों मम्मों को देखकर मेरा लन्ड खड़ा हो गया. उसकी चूचियां गोदाम जैसे भरी हुई थी.
उसकी गांड इतनी फूली हुई थी कि मेरा लन्ड उसको मारने के लिए उतावला हो रहा था.
पहली बार किसी लड़की को देखकर मेरे साथ ऐसा हुआ था.
हम दोनों की छत एक ही थी.
मैं छत पर था और वह भी.
उसने मुझसे पूछा- क्या करते हो?
मैंने बताया- यहां मैं पढ़ने आया हूं.
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इस तरह से बातें हुई तो धीरे-धीरे इसी तरह का प्रतिदिन बातें होने लगी थी.
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वह मुझे उसका पैसा दे देती.
सामान लेने के बाद मुझे जो पैसा बचता, मैं उसे देने लगता तो उसे मुझे रख लेने के लिए बोलती.
इससे मुझे पता चल गया था कि यह किसी बड़े घर की लड़की है।
उसके कमरे में सब व्यवस्थाएं थी.
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इसी तरह से हम दोनों ने एक दूसरे का फोन नंबर लिया,
क्योंकि मैं मार्केट जाता किसी काम से तो उनका भी मार्केट का काम कर देता था जिससे वह बहुत खुश रहती थी.
धीरे-धीरे व्हाट्सएप पर बातें होने लगी थी.
इक दिन अचानक मेरे साथ कुछ ऐसा हुआ जिससे मैं बहुत डर गया था.
लेकिन साथ में खुशी भी हो रही थी.
मैं छत पर था तो कोमल एक झटके में आई और मेरा गाल चूम लिया.
मानो मुझे सदमा सा लग गया था.
आज तक मेरे साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था.
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मैंने बधाइयां दी और बोला- मुझे पार्टी चाहिए!
मैं भी मौके का फायदा उठाना चाहता था.
वह बोली- ठीक है.
उसने मुझे पार्टी दी.
मैं भी धीरे-धीरे उनके बदन को छूने लगा था लेकिन वह कुछ नहीं बोलती थी.
उस रात को उसने मुझे एक वीडियो भेजा जिसमें गंदा गाना था.
कामुक चीजें देखकर मैं भी भौचक्का रह गया.
पर मैं समझ गया कि इसकी भी चूत प्यासी है.
तभी उसने व्हाट्सएप पर हंसने वाले इमोजी भेजा.
मैं भी मजाक में बोला- आ जाऊं क्या तुम्हारे रूम पर? तब हंस के दिखाना!
वह बोली- आ जाओ.
मुझे कोमल को चोदने की आग लग चुकी थी.
मैं उसके कमरे में गया देखा तो उसने स्पोर्ट्स टॉप पहनी थी जिससे उसके उरोज बाहर झांक रहे थे.
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मैं उसके पास जाकर उसको देखने लगा.
और वह मेरी आंखों में देखने लगी.
मुझे तो यह पता चल चुका था कि कोमल की चूत प्यासी है.
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इस तरह से मैंने कोमल को बेड पर लेटा दिया और मेरा हाथ उसके बदन को सहलाने लगा.
ऊपर से ही मैंने उसके चूचों को हल्का-हल्का दबाना शुरू कर दिया.
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और अब मेरा एक हाथ उसके पैंटी के अंदर से ही उसकी चूत को रगड़ रहा था.
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अब कोमल को बर्दाश्त नहीं हो रहा था, वह बोली- पीते ही रहोगे कुछ और भी करोगे?
मैंने उसकी पेंटी उतार कर अपने भी कपड़े उतार दिए.
हम दोनों नंगे हो चुके थे.
पहली बार मैंने किसी लड़की को अपने सामने नंगी होते हुए देखा.
मेरा लन्ड सेक्स का मजा लेने के लिए तैयार हो चुका था.
कोमल ने मेरे लंड को देखा और पकड़ कर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.
मुझे बहुत मजा आ रहा था, मैं भी झरने वाला ही था.
और तभी मैंने उसके मुंह में ही अपना माल गिरा दिया.
वह उसको पी गयी.
मैंने उसको बेड पर लेटाया और उसकी चूत चाटने लगा.
कोमल और भी सिसकारियां भरने लगी.
मुझे उसकी चूत से कुछ चिपचिपा सा लगा.
मैं समझ गया अब यह भी झड़ने वाली है.
तब तक उसने सारा पानी मेरे मुंह पर छोड़ दिया.
इसके बाद कोमल बोली- जान मत तड़पाओ!
मेरा लने पुनः खड़ा हो चुका था.
मैं खड़ा हुआ, उसकी दोनों टांगों को अपने कंधों पर रखा और अपना लन्ड उसकी चूत पर रखकर थोड़ा धक्का मारा.
तो मेरा लंड उसकी चूत में आधा ही घुसा.
पर वह दर्द के मारे चिल्ला उठी.
मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रखे और फिर धक्का मारा.
इस बार मेरा लंड पूरा उसकी चूत में घुस गया.
वह पुनः चीख उठी दर्द से!
मैं 5 मिनट रुका ताकि उसका दर्द कम हो जाए.
फिर कोमल खुद ही अपनी गांड उठाने लगी.
फिर मैं भी उसकी चूत में अपना लन्ड आगे पीछे करने लगा.
कोमल सेक्सी-2 आवाज निकालने लगी- आहह आह … ह फक मी जान … फक मी!
मैंने भी चुदाई की रफ्तार बढ़ा ली.
15 मिनट चोदने के बाद मैं कोमल को घोड़ी बनाकर चोदने लगा.
कोमल तीन बार झड़ चुकी थी लेकिन मेरा अभी तक नहीं हुआ था.
इस बार मैं बेड पर लेटा और उसको अपने ऊपर लंड पर बैठा लिया.
10 मिनट बाद मैं भी झड़ गया.
एक रात में मैंने कोमल को तीन बार चोदा.
3:00 बज चुके थे, मैंने उसको किस किया और मैं अपने रूम पर चला आया.
दूसरे दिन वह बोली- यार विजय, तुमने तो मेरी कमर तोड़ के रख दी.
यह सुनकर मैं हंसने लगा.
दो-तीन महीने तक ऐसे ही इंडियन सेक्सी लड़की की चुदाई चलती रही.
एक बात तो थी कोमल अपनी चूत को साफ करके रखती थी.
कुछ दिन बाद वह पढ़ने के लिए विदेश चली गई.
तब से आज तक मुझे कोई लड़की सेक्स के लिए नहीं मिली.
मैं उस रात को आज तक नहीं भूल सकता.
दोस्तो, यह मेरी सच्ची इंडियन सेक्सी लड़की की चुदाई कहानी आपको पसंद आई होगी.
तो अपनी प्रतिक्रिया मेरी इमेल आईडी पर जरूर भेजें
पड़ोस के लड़के ने चोद कर पूरा मजा दिया
(Desi Bhabi Xx Chudai)
सना साहिल 2024-12-25 Comments 3725 23544
देसी भाबी Xx चुदाई का मजा दिया पड़ोस के शादीशुदा लड़के ने. वह मुझे पटाने की कोशिश कर रहा था और मैं उसे रोकती नहीं थी. एक दिन उसने मुझे बिना किसी तैयारी के मुझे पेल दिया.
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मेरा नाम सना है. मैं 32 साल की शादीशुदा लड़की हूं।
मैं जौनपुर में रहती हूं.
मेरे पति अक्सर अपने व्यवसाय को लेकर बाहर की यात्रा पर रहते हैं।
मेरा मुहल्ला बहुत अच्छा है, सब एक-दूसरे से मिलकर रहते हैं।
मेरे बगल में एक यादव परिवार ने मकान बनवाया जिसमें पति-पत्नी और दो बच्चे हैं।
पति का नाम महेश है और उसके लड़के का नाम अंकुर है।
उसकी उम्र 27-28 साल की होगी.
उनकी पत्नी मेरे यहां आती है और मैं उनके यहां जाती हूं।
जब मैं उनके यहां जाती तो महेश अक्सर मेरे करीब आकर हंसी मजाक कर देता था.
मैं भी मज़ाक जान उसे इग्नोर कर देती थी।
वह शायद देसी भाबी Xx चुदाई का मजा लेना चाह रहा था.
अब धीरे धीरे उसकी हिम्मत बढ़ने लगी और वह मौका देख अनजान बन कभी मेरे बूब्स को दबा देता, कभी गाल पर चिकोटी काट लेता था।
एक दिन की बात है, मैं सुबह के समय अपने लान की सफाई कर रही थी.
कि वह मेरे घर की बाउंड्री के पास आया और मुझसे मजाक में कहा- भाभी, भैया तो अक्सर बाहर रहते हैं.
तो मैंने कहा- रहते हैं. तो आप से क्या मतलब?
वह फिर हंसकर कहा- वे आप को खुश कर पाते हैं या नहीं।
तब मैंने कहा- वे नहीं खुश करते तो आप खुश करते हो क्या?
तब वह पुनः हंस कर बोला- आप कहें तो खुश कर दूँ?
मैं उसकी बात अनसुनी कर घर में चली आई।
पर मैं उसकी बात का मतलब समझ गयी थी, मेरे मन में भी उसके लिए वैसे ही भाव पनपने लगे थे.
इस घटना के एक हफ्ते बाद मेरे मुहल्ले में एक लड़की की शादी थी.
हम सभी मुहल्ले के लोग आमन्त्रित थे।
शादी मुहल्ले के बगल मैरिज लान में थी.
वहां पर केवल द्वारपूजा और जयमाला का कार्यक्रम था, शादी घर से ही थी।
महेश भी सपरिवार शादी में गया था।
वह वहां भी बार बार मेरे आगे पीछे मंडरा रहा था।
जयमाला के बाद खाना वह मेरे बगल में ही खाना खा रहा था।
उसके बाद जब हम सब चलने लगे.
तब मेरे बच्चे और महेश की पत्नी और बच्चे आगे आगे चल रहे थे.
मैं जरा धीरे धीरे चल रही थी.
महेश भी मेरे साथ चलने लगा, उसने मुझसे कहा- भाभी जी, आप रात में शादी देखने जायेंगी?
तब मैंने कहा- हां जी!
मैंने उसकी पेंटी उतार कर अपने भी कपड़े उतार दिए.
हम दोनों नंगे हो चुके थे.
पहली बार मैंने किसी लड़की को अपने सामने नंगी होते हुए देखा.
मेरा लन्ड सेक्स का मजा लेने के लिए तैयार हो चुका था.
कोमल ने मेरे लंड को देखा और पकड़ कर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.
मुझे बहुत मजा आ रहा था, मैं भी झरने वाला ही था.
और तभी मैंने उसके मुंह में ही अपना माल गिरा दिया.
वह उसको पी गयी.
मैंने उसको बेड पर लेटाया और उसकी चूत चाटने लगा.
कोमल और भी सिसकारियां भरने लगी.
मुझे उसकी चूत से कुछ चिपचिपा सा लगा.
मैं समझ गया अब यह भी झड़ने वाली है.
तब तक उसने सारा पानी मेरे मुंह पर छोड़ दिया.
इसके बाद कोमल बोली- जान मत तड़पाओ!
मेरा लने पुनः खड़ा हो चुका था.
मैं खड़ा हुआ, उसकी दोनों टांगों को अपने कंधों पर रखा और अपना लन्ड उसकी चूत पर रखकर थोड़ा धक्का मारा.
तो मेरा लंड उसकी चूत में आधा ही घुसा.
पर वह दर्द के मारे चिल्ला उठी.
मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रखे और फिर धक्का मारा.
इस बार मेरा लंड पूरा उसकी चूत में घुस गया.
वह पुनः चीख उठी दर्द से!
मैं 5 मिनट रुका ताकि उसका दर्द कम हो जाए.
फिर कोमल खुद ही अपनी गांड उठाने लगी.
फिर मैं भी उसकी चूत में अपना लन्ड आगे पीछे करने लगा.
कोमल सेक्सी-2 आवाज निकालने लगी- आहह आह … ह फक मी जान … फक मी!
मैंने भी चुदाई की रफ्तार बढ़ा ली.
15 मिनट चोदने के बाद मैं कोमल को घोड़ी बनाकर चोदने लगा.
कोमल तीन बार झड़ चुकी थी लेकिन मेरा अभी तक नहीं हुआ था.
इस बार मैं बेड पर लेटा और उसको अपने ऊपर लंड पर बैठा लिया.
10 मिनट बाद मैं भी झड़ गया.
एक रात में मैंने कोमल को तीन बार चोदा.
3:00 बज चुके थे, मैंने उसको किस किया और मैं अपने रूम पर चला आया.
दूसरे दिन वह बोली- यार विजय, तुमने तो मेरी कमर तोड़ के रख दी.
यह सुनकर मैं हंसने लगा.
दो-तीन महीने तक ऐसे ही इंडियन सेक्सी लड़की की चुदाई चलती रही.
एक बात तो थी कोमल अपनी चूत को साफ करके रखती थी.
कुछ दिन बाद वह पढ़ने के लिए विदेश चली गई.
तब से आज तक मुझे कोई लड़की सेक्स के लिए नहीं मिली.
मैं उस रात को आज तक नहीं भूल सकता.
दोस्तो, यह मेरी सच्ची इंडियन सेक्सी लड़की की चुदाई कहानी आपको पसंद आई होगी.
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पड़ोस के लड़के ने चोद कर पूरा मजा दिया
(Desi Bhabi Xx Chudai)
सना साहिल 2024-12-25 Comments 3725 23544
देसी भाबी Xx चुदाई का मजा दिया पड़ोस के शादीशुदा लड़के ने. वह मुझे पटाने की कोशिश कर रहा था और मैं उसे रोकती नहीं थी. एक दिन उसने मुझे बिना किसी तैयारी के मुझे पेल दिया.
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मेरा नाम सना है. मैं 32 साल की शादीशुदा लड़की हूं।
मैं जौनपुर में रहती हूं.
मेरे पति अक्सर अपने व्यवसाय को लेकर बाहर की यात्रा पर रहते हैं।
मेरा मुहल्ला बहुत अच्छा है, सब एक-दूसरे से मिलकर रहते हैं।
मेरे बगल में एक यादव परिवार ने मकान बनवाया जिसमें पति-पत्नी और दो बच्चे हैं।
पति का नाम महेश है और उसके लड़के का नाम अंकुर है।
उसकी उम्र 27-28 साल की होगी.
उनकी पत्नी मेरे यहां आती है और मैं उनके यहां जाती हूं।
जब मैं उनके यहां जाती तो महेश अक्सर मेरे करीब आकर हंसी मजाक कर देता था.
मैं भी मज़ाक जान उसे इग्नोर कर देती थी।
वह शायद देसी भाबी Xx चुदाई का मजा लेना चाह रहा था.
अब धीरे धीरे उसकी हिम्मत बढ़ने लगी और वह मौका देख अनजान बन कभी मेरे बूब्स को दबा देता, कभी गाल पर चिकोटी काट लेता था।
एक दिन की बात है, मैं सुबह के समय अपने लान की सफाई कर रही थी.
कि वह मेरे घर की बाउंड्री के पास आया और मुझसे मजाक में कहा- भाभी, भैया तो अक्सर बाहर रहते हैं.
तो मैंने कहा- रहते हैं. तो आप से क्या मतलब?
वह फिर हंसकर कहा- वे आप को खुश कर पाते हैं या नहीं।
तब मैंने कहा- वे नहीं खुश करते तो आप खुश करते हो क्या?
तब वह पुनः हंस कर बोला- आप कहें तो खुश कर दूँ?
मैं उसकी बात अनसुनी कर घर में चली आई।
पर मैं उसकी बात का मतलब समझ गयी थी, मेरे मन में भी उसके लिए वैसे ही भाव पनपने लगे थे.
इस घटना के एक हफ्ते बाद मेरे मुहल्ले में एक लड़की की शादी थी.
हम सभी मुहल्ले के लोग आमन्त्रित थे।
शादी मुहल्ले के बगल मैरिज लान में थी.
वहां पर केवल द्वारपूजा और जयमाला का कार्यक्रम था, शादी घर से ही थी।
महेश भी सपरिवार शादी में गया था।
वह वहां भी बार बार मेरे आगे पीछे मंडरा रहा था।
जयमाला के बाद खाना वह मेरे बगल में ही खाना खा रहा था।
उसके बाद जब हम सब चलने लगे.
तब मेरे बच्चे और महेश की पत्नी और बच्चे आगे आगे चल रहे थे.
मैं जरा धीरे धीरे चल रही थी.
महेश भी मेरे साथ चलने लगा, उसने मुझसे कहा- भाभी जी, आप रात में शादी देखने जायेंगी?
तब मैंने कहा- हां जी!
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उसने कहा- अंकुर की मम्मी भी कह रही थी जाने को!
तब मैंने कहा- ठीक तो है.
उसने कहा- जब अंकुर की मम्मी वहां पहुंचे, तब आप पांच मिनट के लिए बाहर आइएगा.
तब मैंने कहा- ठीक है।
मुझे लगा कि वह कुछ ऐसी वैसी बात ही करेगा जिसके लिए मैं तैयार भी थी.
यह बात करते करते हम घर आ गये।
घर पहुंच कर मैंने बच्चों को सुलाकर कपड़े बदले और शादी देखने पहुंची.
मेरे पहुंचने के बीस मिनट बाद महेश की पत्नी भी पहुंची और वह मेरे बगल में बैठकर शादी देखने लगी।
दो तीन मिनट बाद मैं बाहर निकली तो देखा महेश मेरे गेट के पास लुंगी और बनियान में खड़ा था।
मैंने अपने मेन गेट का दरवाजा जैसे खोलना चाहा, वैसे उसने मेरे हाथ को पकड़ लिया और मुझे अपने घर की ओर लेकर चलने लगा.
सड़क पर लाइट और जनरेटर वाले थे इसलिए मैं जोर से नहीं बोली.
मैंने धीरे से कहा- अंकुर के पापा, यह क्या है?
तब उसने कहा- कुछ नहीं भाभी, बस पांच मिनट आप से बात करनी है।
मैं चुपचाप उसके साथ चली आई.
अपने घर के बरामदे में पहुंच कर उसने पहले बरामदे के चैनल को खींचा फिर पर्दे को खींच मेरे हाथ में अपनी लुंगी हटा खड़े लंड को पकड़ा दिया.
मैं अचम्भित रह गई।
मैंने तुरंत हाथ खींच लिया।
तब उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरे मुंह में अपना मुंह डाल किस करने लगा।
अब मैं कुछ नहीं कह पा रही थी।
मुझे अपनी सहेली (चूत) के पास कुछ मोटा लोहे की रॉड जैसा चुभने लगा।
उसने मुझे उसी तरह पास पड़े तख्ते पर लिटा दिया और मेरी साड़ी पेटीकोट सहित उठा दिया और अपना आठ इंच लंबा लंड एक झटके में मेरी चूत में डाल दिया.
मेरी आंखों से आंसू निकल आए और मैं उससे कहती रही- अंकुर के पापा, यह क्या कर रहे हैं?
तब वह कहता- भाभी आप को बहुत मज़ा देंगे।
मुझे मजा आ भी रहा था.
अब वह तेज तेज चोदने लगा और जिसकी ठोकर मेरी बच्चेदानी तक लग रही थी.
करीब बीस मिनट जोरदार चोदने के बाद उसने अपना गर्म गर्म बीज मेरे बच्चेदानी पर उड़ेल दिया।
इस तरह मुझे मेरे पड़ोसी ने बिना किसी फोरप्ले के फटाफट चोद दिया था।
उसके बाद मैं तुरंत उठी और साड़ी ठीक कर शादी देखने पहुंची.
मेरी चूत के द्वार के ऊपर बहुत जलन हो रही थी।
आधे घंटे तक शादी देखने के बाद मैं अपने घर आ गयी.
दूसरे दिन मुझे पूरे दिन हरारत यानि बुखार की फीलिंग रही और चूत में जलन! दोपहर तक मैं सोती रही.
लगभग 11:30 बजे जब मैं सोकर उठ गई तो बुखार के साथ मेरा बदन भी दर्द कर रहा था।
फ्रेश होने के बाद जब मैं नहाने गई तो काफी देर तक गर्म पानी की फुहारें अपनी चूत पर मारी जिससे कुछ आराम मिला.
जब दोपहर को हम खाना खाने बैठे तो मेरे पति ने पूछा- संजना, तुम्हारी तबीयत तो ठीक है?
मैंने हां कर दिया और कहा- कल रात शादी में जाने के कारण कुछ हरारत जैसी है.
तब उन्होंने डिस्प्रिन लाकर मुझे दी और कहा- खा लो, आराम मिलेगा।
मैंने दवा खा ली, फिर जाकर लेट गई.
जैसे ही मैंने आंखें बंद की, वैसे ही महेश का मोटा और लम्बा लंड मेरे आंखों के सामने आने लगा और मेरी चूत में अजीब सा दर्द और गुदगुदी होने लगी।
यह सोचते सोचते मैं सो गयी।
शाम को जब मैं उठी तब मेरा शरीर कुछ हल्का सा लगा.
पति ने पूछा- कैसी तबीयत है अब?
मैंने कहा- ठीक हूं!
उसके बाद पति ने कहा- खाना मत बनाइएगा, हम बाहर खाकर आयेंगे.
मैंने भी हां कर दी।
उस दिन हम रात का खाना बाहर होटल में खाकर आये और आकर सो गए.
क्योंकि मेरे पति को बाहर जाना था सुबह ही!
अगले दिन भोर में ही मैं उठ गई और फ्रेश होकर नाश्ता तैयार किया.
तब तक मेरे पति भी तैयार हो गए थे.
उन्होंने नाश्ता पैक करने को कहा क्योंकि उनकी रेलगाड़ी का समय हो गया था।
पति के जाने के बाद बाहर लॉन में जब मैं झाड़ू लगा रही थी, तब महेश आया और बाउंड्री के पार से मुझसे धीरे से कहा- भाभी, उस दिन आपको अधूरे में छोड़ दिया था, आज आ जाइएगा, पूरा मजा देंगे!
और उसने कहा- बच्चों को और अंकुर मम्मी को हम डेरी पर छोड़ आएंगे.
घर से कुछ दूर ही उसकी एक डेयरी थी जहां कभी-कभी उसकी बीवी बच्चों के साथ रात को रुक जाती थी.
मैंने कहा- ठीक है।
उसके बाद जब मैं नहाने गई तो सबसे पहले मैंने अपनी झांटों को क्लीन शेव किया, फिर काखों के बालों को!
सुबह जब से महेश ने घर आने को कहा था, तबसे मैं बहुत उतावली हो रही थी कि जल्दी से रात हो और मैं महेश की बाहों में पूरी रात रहूं।
खैर धीरे धीरे रात हुई मैंने अपने बच्चों को जल्दी से खिला कर सुला दिया और अपने भी सोने का नाटक किया.
जाड़े के दिन थे, उस दिन कोहरा भी कुछ ज्यादा पड़ रहा था.
कुछ देर बाद मैंने देखा कि मेरे बच्चे सो गए थे.
रात के करीब 10:00 बजे थे.
मैं गुलाबी रंग की साड़ी और लाके रंग का ब्लाउज पहन कर, हल्की सी लिपस्टिक लगाकर, शाल ओढ़ कर महेश के पास पहुंची.
वह अपने गेट पर मेरा इंतजार कर रहा था.
उसने लोवर और जैकेट डाल रखी थी.
तब मैंने कहा- ठीक तो है.
उसने कहा- जब अंकुर की मम्मी वहां पहुंचे, तब आप पांच मिनट के लिए बाहर आइएगा.
तब मैंने कहा- ठीक है।
मुझे लगा कि वह कुछ ऐसी वैसी बात ही करेगा जिसके लिए मैं तैयार भी थी.
यह बात करते करते हम घर आ गये।
घर पहुंच कर मैंने बच्चों को सुलाकर कपड़े बदले और शादी देखने पहुंची.
मेरे पहुंचने के बीस मिनट बाद महेश की पत्नी भी पहुंची और वह मेरे बगल में बैठकर शादी देखने लगी।
दो तीन मिनट बाद मैं बाहर निकली तो देखा महेश मेरे गेट के पास लुंगी और बनियान में खड़ा था।
मैंने अपने मेन गेट का दरवाजा जैसे खोलना चाहा, वैसे उसने मेरे हाथ को पकड़ लिया और मुझे अपने घर की ओर लेकर चलने लगा.
सड़क पर लाइट और जनरेटर वाले थे इसलिए मैं जोर से नहीं बोली.
मैंने धीरे से कहा- अंकुर के पापा, यह क्या है?
तब उसने कहा- कुछ नहीं भाभी, बस पांच मिनट आप से बात करनी है।
मैं चुपचाप उसके साथ चली आई.
अपने घर के बरामदे में पहुंच कर उसने पहले बरामदे के चैनल को खींचा फिर पर्दे को खींच मेरे हाथ में अपनी लुंगी हटा खड़े लंड को पकड़ा दिया.
मैं अचम्भित रह गई।
मैंने तुरंत हाथ खींच लिया।
तब उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरे मुंह में अपना मुंह डाल किस करने लगा।
अब मैं कुछ नहीं कह पा रही थी।
मुझे अपनी सहेली (चूत) के पास कुछ मोटा लोहे की रॉड जैसा चुभने लगा।
उसने मुझे उसी तरह पास पड़े तख्ते पर लिटा दिया और मेरी साड़ी पेटीकोट सहित उठा दिया और अपना आठ इंच लंबा लंड एक झटके में मेरी चूत में डाल दिया.
मेरी आंखों से आंसू निकल आए और मैं उससे कहती रही- अंकुर के पापा, यह क्या कर रहे हैं?
तब वह कहता- भाभी आप को बहुत मज़ा देंगे।
मुझे मजा आ भी रहा था.
अब वह तेज तेज चोदने लगा और जिसकी ठोकर मेरी बच्चेदानी तक लग रही थी.
करीब बीस मिनट जोरदार चोदने के बाद उसने अपना गर्म गर्म बीज मेरे बच्चेदानी पर उड़ेल दिया।
इस तरह मुझे मेरे पड़ोसी ने बिना किसी फोरप्ले के फटाफट चोद दिया था।
उसके बाद मैं तुरंत उठी और साड़ी ठीक कर शादी देखने पहुंची.
मेरी चूत के द्वार के ऊपर बहुत जलन हो रही थी।
आधे घंटे तक शादी देखने के बाद मैं अपने घर आ गयी.
दूसरे दिन मुझे पूरे दिन हरारत यानि बुखार की फीलिंग रही और चूत में जलन! दोपहर तक मैं सोती रही.
लगभग 11:30 बजे जब मैं सोकर उठ गई तो बुखार के साथ मेरा बदन भी दर्द कर रहा था।
फ्रेश होने के बाद जब मैं नहाने गई तो काफी देर तक गर्म पानी की फुहारें अपनी चूत पर मारी जिससे कुछ आराम मिला.
जब दोपहर को हम खाना खाने बैठे तो मेरे पति ने पूछा- संजना, तुम्हारी तबीयत तो ठीक है?
मैंने हां कर दिया और कहा- कल रात शादी में जाने के कारण कुछ हरारत जैसी है.
तब उन्होंने डिस्प्रिन लाकर मुझे दी और कहा- खा लो, आराम मिलेगा।
मैंने दवा खा ली, फिर जाकर लेट गई.
जैसे ही मैंने आंखें बंद की, वैसे ही महेश का मोटा और लम्बा लंड मेरे आंखों के सामने आने लगा और मेरी चूत में अजीब सा दर्द और गुदगुदी होने लगी।
यह सोचते सोचते मैं सो गयी।
शाम को जब मैं उठी तब मेरा शरीर कुछ हल्का सा लगा.
पति ने पूछा- कैसी तबीयत है अब?
मैंने कहा- ठीक हूं!
उसके बाद पति ने कहा- खाना मत बनाइएगा, हम बाहर खाकर आयेंगे.
मैंने भी हां कर दी।
उस दिन हम रात का खाना बाहर होटल में खाकर आये और आकर सो गए.
क्योंकि मेरे पति को बाहर जाना था सुबह ही!
अगले दिन भोर में ही मैं उठ गई और फ्रेश होकर नाश्ता तैयार किया.
तब तक मेरे पति भी तैयार हो गए थे.
उन्होंने नाश्ता पैक करने को कहा क्योंकि उनकी रेलगाड़ी का समय हो गया था।
पति के जाने के बाद बाहर लॉन में जब मैं झाड़ू लगा रही थी, तब महेश आया और बाउंड्री के पार से मुझसे धीरे से कहा- भाभी, उस दिन आपको अधूरे में छोड़ दिया था, आज आ जाइएगा, पूरा मजा देंगे!
और उसने कहा- बच्चों को और अंकुर मम्मी को हम डेरी पर छोड़ आएंगे.
घर से कुछ दूर ही उसकी एक डेयरी थी जहां कभी-कभी उसकी बीवी बच्चों के साथ रात को रुक जाती थी.
मैंने कहा- ठीक है।
उसके बाद जब मैं नहाने गई तो सबसे पहले मैंने अपनी झांटों को क्लीन शेव किया, फिर काखों के बालों को!
सुबह जब से महेश ने घर आने को कहा था, तबसे मैं बहुत उतावली हो रही थी कि जल्दी से रात हो और मैं महेश की बाहों में पूरी रात रहूं।
खैर धीरे धीरे रात हुई मैंने अपने बच्चों को जल्दी से खिला कर सुला दिया और अपने भी सोने का नाटक किया.
जाड़े के दिन थे, उस दिन कोहरा भी कुछ ज्यादा पड़ रहा था.
कुछ देर बाद मैंने देखा कि मेरे बच्चे सो गए थे.
रात के करीब 10:00 बजे थे.
मैं गुलाबी रंग की साड़ी और लाके रंग का ब्लाउज पहन कर, हल्की सी लिपस्टिक लगाकर, शाल ओढ़ कर महेश के पास पहुंची.
वह अपने गेट पर मेरा इंतजार कर रहा था.
उसने लोवर और जैकेट डाल रखी थी.
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जैसे ही मैं पहुंची, उसने मुझे खींच लिया और तुरंत गेट बंद कर मुझे अन्दर कमरे में ले जाकर उसके दरवाजे भी बंद कर दिया.
मेरी आँखों में देख वह मेरे ओंठों में ओंठ डाल कर जीभ से जीभ लड़ाते हुए मेरी चूचियों को दबाने लगा और दूसरे हाथ से मेरी चूत को साड़ी के ऊपर से सहलाने लगा।
मैं भी उसके लन्ड को लोवर के ऊपर से सहलाने लगी.
वह उस दिन की तरह लोहे की रॉड जैसा चुभने लगा था।
मेरे ओंठ चूसते हुए महेश ने पहले मेरी शाल को हटाया, फिर उसने मेरी साड़ी मेरे बदन से अलग कर दिया.
मैंने भी उसके जैकट को उतार दिया.
फिर जैसे मैंने उसके लोवर को सरकाया तो देखा उसने अन्डरवियर नहीं पहनी हुई है और उसका लंड पहले से ज्यादा मोटा और लम्बा हो गया है।
अब वह पूरा नंगा हो गया था और मैं ब्लाउज और पेटीकोट में थी।
वह अब और उतावला हो गया था.
मैं भी उसके लंड को हाथ में लेकर धीरे धीरे आगे पीछे सहला रही थी।
अब उसने मेरी ब्लाउज और ब्रा को उतार दिया.
फिर उसने तेजी से पेटिकोट का नाड़ा खोला.
मेरी चिकनी बुर को देख उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और एक बार पुनः मेरे माथे पर किस किया.
फिर ओंठ पर, फिर गर्दन पर, फिर नाभि पर!
फिर जैसे ही उसके ओंठ मेरी चूत पर टिके, वैसे ही मेरे शरीर में चींटियां सी दौड़ गई।
मैं भी उसके बालों को सहलाने लगी.
कुछ देर मेरी चूत चूसने के बाद उसने मुझे अपने बेड पर बैठा दिया.
वह मेरे सामने आकर बैठ गया और कहा- भाभी, अपने पैरों को फैलाओ बैठे-बैठे!
जब मैंने अपने पैरों को फैलाया तो मेरी भीगी चूत और सेक्सी लग रही थी.
उसने भी अपने दोनों पैरों को फैलाया और अपने लन्ड को हाथ में लेकर मेरी चूत पर रगड़ने लगा.
तब मेरी बुर में जैसे आग लग गई हो.
मैं उसके कमर में अपने दोनों पैर को फंसाकर आगे बढ़ी.
तो उसने भी अपने पैरों को मेरे कमर में फंसाकर अपनी ओर मुझे खींचा.
उसका लंड जैसे ही मेरी चूत में पूरा घुसा, वह अपने ओंठ से मेरे ओंठ चूसने लगा.
महेश का पूरा लन्ड मेरी बच्चेदानी तक ठोकर मार रहा था।
मैं भी उसके गोदी में बैठ कर उछल उछल कर चुद रही थी।
करीब पंद्रह मिनट इस तरह चुदने के बाद मैंने उसे धक्का देते हुए लिटा दिया और उससे कहा- अब मैं आपको ऊपर से चोदूंगी.
इतना कह मैं उसके लम्बे लंड पर बैठ अच्छी तरह से रगड़ रगड़ कर चुदने लगी.
जब मैं अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंचने वाली थी, तब मैंने उसे कसकर पकड़ कर कहा- अंकुर के पापा, मैं झरने वाली हूं!
और यह कह मैंने उसके लंड पर बैठकर ऊपर से दबाते हुए बच्चेदानी तक घुसेड़ लिया.
मैं उसके ऊपर निढाल सी पड़ गई.
कुछ देर लेटने के बाद उसने मुझे सहलाते हुए कहा- भाभी जरा बकैइया हो जाओ.
मैं उसके बेड पर ही बकैइया बन गयी.
पीछे से आकर उसने एक झटके में ही अपने लंड को मेरे बच्चेदानी तक पहुंचा दिया.
फिर वह तेज़ रफ़्तार में डॉगी स्टाइल में चोदने लगा और मुझसे पूछने लगा- भाभी, कैसा लग रहा है?
तो मैं भी कहारती हुई बोली- अंकुर के पापा, बहुत मज़ा दे रहे हैं आप!
इस तरह दस मिनट तक उसने तेज धक्के लगा मुझे चोदा.
मैं दूसरी बार भी झर गयी.
मैंने कहा- अब बस करो अंकुर के पापा!
तो उसने कहा- भाभी, अभी मैं झरा नहीं!
फिर उसने मुझे सीधा लिटा दिया और मेरी चूचियों को अपने मुंह में डाल धीरे धीरे मुझे चोदने लगा.
मेरी कमर के नीचे तकिया लगा होने के कारण उसका लंड बार-बार ठोकर मारकर मेरे बच्चेदानी का मुंह खोल देता था।
अब तो जैसे राजधानी एक्सप्रेस चलती है, वह वैसे तेज़ तेज़ चोदने लगा.
देसी भाबी Xx चुदाई में मेरे मुंह से निकल रहा था- अंकुर के पापा … अब बस करो … बस करो!
और वह बुरी तरह से चोद रहा था और कह रहा था- भाभी, इतना मजा अंकुर मम्मी नहीं देती है!
पन्द्रह मिनट तेज़ चोदने के बाद उसने कहा- भाभी, मैं झरने वाला हूं, कहां गिराऊँ?
तब मैंने कहा- अन्दर ही झाड़ दो अंकुर के पापा!
और तेज़ झटके मार मार कर उसने मेरी बच्चेदानी के मुंह पर अपनी सारी मलाई उड़ेल दी.
मैं बहुत खुश थी कि एक बार की चुदवाई में पहली बार मैं तीन बार झड़ी.
और चोदने वाला एक बार!
उसके बाद वह नंगे ही मुझे लेकर रजाई में लेट गया और मुझको अपनी बाहों में चिपका कर पूछा- कैसा लगा?
तब मैंने कहा- सच बोलूं, अंकुर के पापा … शादी भले ही तुम्हारे भैया से हुई हो लेकिन सुहागरात का असली मजा आपने दिया. अब आप मुझे कभी प्यासी नहीं छोड़ोगे न?
तब उसने कहा- नहीं भाभी!
इस तरह बात करते करते उसका मोटा लोहे जैसा सख्त लंड फिर खड़ा हो गया और वह पुनः मेरे ऊपर आकर बुरी तरह आधे घंटे चोदने के बाद मेरी चूत में ही झड़ गया.
और मैं भी उसके साथ झड़ी.
फिर वह अपना लंड निकाल कर मेरे मुंह में लगाने लगा और कहा- भाभी, यह मलाई साफ करो!
पहले तो मुझे घिन आयी लेकिन जब उसने जबरन मुंह में छुआ दिया.
तो मैं पहले थोड़ा सा मुंह खोल कर साफ किया फिर उसका नमकीन स्वाद अच्छा लगा.
तब मैंने सारे लंड को चाट चाट कर साफ़ कर दिया.
मेरी आँखों में देख वह मेरे ओंठों में ओंठ डाल कर जीभ से जीभ लड़ाते हुए मेरी चूचियों को दबाने लगा और दूसरे हाथ से मेरी चूत को साड़ी के ऊपर से सहलाने लगा।
मैं भी उसके लन्ड को लोवर के ऊपर से सहलाने लगी.
वह उस दिन की तरह लोहे की रॉड जैसा चुभने लगा था।
मेरे ओंठ चूसते हुए महेश ने पहले मेरी शाल को हटाया, फिर उसने मेरी साड़ी मेरे बदन से अलग कर दिया.
मैंने भी उसके जैकट को उतार दिया.
फिर जैसे मैंने उसके लोवर को सरकाया तो देखा उसने अन्डरवियर नहीं पहनी हुई है और उसका लंड पहले से ज्यादा मोटा और लम्बा हो गया है।
अब वह पूरा नंगा हो गया था और मैं ब्लाउज और पेटीकोट में थी।
वह अब और उतावला हो गया था.
मैं भी उसके लंड को हाथ में लेकर धीरे धीरे आगे पीछे सहला रही थी।
अब उसने मेरी ब्लाउज और ब्रा को उतार दिया.
फिर उसने तेजी से पेटिकोट का नाड़ा खोला.
मेरी चिकनी बुर को देख उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और एक बार पुनः मेरे माथे पर किस किया.
फिर ओंठ पर, फिर गर्दन पर, फिर नाभि पर!
फिर जैसे ही उसके ओंठ मेरी चूत पर टिके, वैसे ही मेरे शरीर में चींटियां सी दौड़ गई।
मैं भी उसके बालों को सहलाने लगी.
कुछ देर मेरी चूत चूसने के बाद उसने मुझे अपने बेड पर बैठा दिया.
वह मेरे सामने आकर बैठ गया और कहा- भाभी, अपने पैरों को फैलाओ बैठे-बैठे!
जब मैंने अपने पैरों को फैलाया तो मेरी भीगी चूत और सेक्सी लग रही थी.
उसने भी अपने दोनों पैरों को फैलाया और अपने लन्ड को हाथ में लेकर मेरी चूत पर रगड़ने लगा.
तब मेरी बुर में जैसे आग लग गई हो.
मैं उसके कमर में अपने दोनों पैर को फंसाकर आगे बढ़ी.
तो उसने भी अपने पैरों को मेरे कमर में फंसाकर अपनी ओर मुझे खींचा.
उसका लंड जैसे ही मेरी चूत में पूरा घुसा, वह अपने ओंठ से मेरे ओंठ चूसने लगा.
महेश का पूरा लन्ड मेरी बच्चेदानी तक ठोकर मार रहा था।
मैं भी उसके गोदी में बैठ कर उछल उछल कर चुद रही थी।
करीब पंद्रह मिनट इस तरह चुदने के बाद मैंने उसे धक्का देते हुए लिटा दिया और उससे कहा- अब मैं आपको ऊपर से चोदूंगी.
इतना कह मैं उसके लम्बे लंड पर बैठ अच्छी तरह से रगड़ रगड़ कर चुदने लगी.
जब मैं अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंचने वाली थी, तब मैंने उसे कसकर पकड़ कर कहा- अंकुर के पापा, मैं झरने वाली हूं!
और यह कह मैंने उसके लंड पर बैठकर ऊपर से दबाते हुए बच्चेदानी तक घुसेड़ लिया.
मैं उसके ऊपर निढाल सी पड़ गई.
कुछ देर लेटने के बाद उसने मुझे सहलाते हुए कहा- भाभी जरा बकैइया हो जाओ.
मैं उसके बेड पर ही बकैइया बन गयी.
पीछे से आकर उसने एक झटके में ही अपने लंड को मेरे बच्चेदानी तक पहुंचा दिया.
फिर वह तेज़ रफ़्तार में डॉगी स्टाइल में चोदने लगा और मुझसे पूछने लगा- भाभी, कैसा लग रहा है?
तो मैं भी कहारती हुई बोली- अंकुर के पापा, बहुत मज़ा दे रहे हैं आप!
इस तरह दस मिनट तक उसने तेज धक्के लगा मुझे चोदा.
मैं दूसरी बार भी झर गयी.
मैंने कहा- अब बस करो अंकुर के पापा!
तो उसने कहा- भाभी, अभी मैं झरा नहीं!
फिर उसने मुझे सीधा लिटा दिया और मेरी चूचियों को अपने मुंह में डाल धीरे धीरे मुझे चोदने लगा.
मेरी कमर के नीचे तकिया लगा होने के कारण उसका लंड बार-बार ठोकर मारकर मेरे बच्चेदानी का मुंह खोल देता था।
अब तो जैसे राजधानी एक्सप्रेस चलती है, वह वैसे तेज़ तेज़ चोदने लगा.
देसी भाबी Xx चुदाई में मेरे मुंह से निकल रहा था- अंकुर के पापा … अब बस करो … बस करो!
और वह बुरी तरह से चोद रहा था और कह रहा था- भाभी, इतना मजा अंकुर मम्मी नहीं देती है!
पन्द्रह मिनट तेज़ चोदने के बाद उसने कहा- भाभी, मैं झरने वाला हूं, कहां गिराऊँ?
तब मैंने कहा- अन्दर ही झाड़ दो अंकुर के पापा!
और तेज़ झटके मार मार कर उसने मेरी बच्चेदानी के मुंह पर अपनी सारी मलाई उड़ेल दी.
मैं बहुत खुश थी कि एक बार की चुदवाई में पहली बार मैं तीन बार झड़ी.
और चोदने वाला एक बार!
उसके बाद वह नंगे ही मुझे लेकर रजाई में लेट गया और मुझको अपनी बाहों में चिपका कर पूछा- कैसा लगा?
तब मैंने कहा- सच बोलूं, अंकुर के पापा … शादी भले ही तुम्हारे भैया से हुई हो लेकिन सुहागरात का असली मजा आपने दिया. अब आप मुझे कभी प्यासी नहीं छोड़ोगे न?
तब उसने कहा- नहीं भाभी!
इस तरह बात करते करते उसका मोटा लोहे जैसा सख्त लंड फिर खड़ा हो गया और वह पुनः मेरे ऊपर आकर बुरी तरह आधे घंटे चोदने के बाद मेरी चूत में ही झड़ गया.
और मैं भी उसके साथ झड़ी.
फिर वह अपना लंड निकाल कर मेरे मुंह में लगाने लगा और कहा- भाभी, यह मलाई साफ करो!
पहले तो मुझे घिन आयी लेकिन जब उसने जबरन मुंह में छुआ दिया.
तो मैं पहले थोड़ा सा मुंह खोल कर साफ किया फिर उसका नमकीन स्वाद अच्छा लगा.
तब मैंने सारे लंड को चाट चाट कर साफ़ कर दिया.
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उसके बाद मैं कपड़े पहनकर जल्दी से अपने घर आ गयी.
वास्तव में उस रात की चुदाई मैं जिन्दगी भर नहीं भूलूंगी।
देसी भाबी Xx चुदाई कहानी पर अपनी राय कमेंट्स और मेल में बताएं.
दूर के रिश्ते में अविवाहित मौसी की चुदाई
(antarwasna Xxx Stori)
समर यादव 2024-11-18 Comments 5044 30591
अन्तरवासना Xxx स्टोरी मेरी पहली चुदाई की है जिसमें मैंने अपने रिश्ते में मौसी की चूत मारी. वे शादीशुदा नहीं थी फिर भी उनकी चूत फटी हुई थी. वे अपने बॉयफ्रेंड से चुदती थी.
दोस्तो, मेरा नाम समर है, मैं मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले का रहने वाला हूँ।
मेरी हाइट 6 फीट है।
मैं आजकल एक सरकारी संस्था में नौकरी करता हूँ। यह मेरी पहली सच्ची कहानी है.
इसमें कोई ग़लती हो जाए लिखने में … तो मैं क्षमा प्रार्थी हूँ।
यह अन्तरवासना Xxx स्टोरी तब की है जब मैं 12वीं की पढ़ाई कर रहा था।
मेरी उम्र उस वक़्त 18 वर्ष थी।
मेरे सामने वाले मकान में मेरी मौसी रहती थी।
वे मेरी दूर की मौसी थी, तब उनकी शादी नहीं हुई थी और वे अकेली रहती थी. उनके पापा व परिवार गांव में रहते थे।
मैं उनके सामने वाले मकान में किराए से रहता था।
उनकी उम्र उस वक़्त 23 वर्ष थी।
तब उनकी शादी नही हुई थी।
वे एक भरे जिस्म की मालकिन थी।
उनका एक बॉयफ्रेंड भी था।
मुझे वे बहुत पसंद थी.
क्योंकि उस वक़्त में सिंगल भी था तो मैं लड़की की तलाश में रहता था।
तो मैंने एक दिन सोचा कि जब वे बाहर बॉयफ्रेंड बना सकती हैं तो मुझसे भी सेट हो सकती हैं।
लेकिन मुझे सही मौका नहीं मिल पा रहा था।
फिर उनकी भाभी अपने बच्चे को पढ़ाने शहर आ गयी जो पहले गांव में रहती थी.
तो मौसी अपने बॉयफ्रेंड से बात करने के लिए रात को मेरे रूम में सोने के लिए आने लगी।
तो दोस्तो, यहीं से शुरू होती है मेरी अन्तरवासना Xxx स्टोरी!
मेरे कमरे में एक ही बेड था जिस पर मैं सोता था.
जब वे मेरे कमरे में आती तो उनको अपने बॉयफ्रेंड से बात करने के चक्कर में मजबूरी में मेरे साथ मेरे बेड पर सोना पड़ रहा था।
क्यूंकि लड़कियों में अन्तर्वासना ज़्यादा होती है तो उनका अपने बॉयफ्रेंड से बात किए बिना मन नहीं लगता था।
सॉरी दोस्तो, मैंने अपनी मौसी के फिगर के बारे में तो बताया ही नहीं!
वे एक भरे बदन की मालकिन है उनका फिगर 32-34-36 का है जो किसी को भी पागल कर दे।
जब रात को बात करती-2 वे सो जाती तो मैं रात को जगकर उनके बूब्स दबाता रहता और वे कुछ नहीं कहती.
शायद वे नींद में रहती थी।
ऐसे ही दिन गुज़रते जा रहे थे.
पर मेरी बूब्स दबाने से आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं हो रही थी।
लेकिन एक दिन मैंने हिम्मत करके बूब्स पूरी ज़ोर से दबाए.
मुझे लगा शायद वे जाग गयी हैं.
पर वे ऐसा कुछ भी प्रतिक्रिया नहीं कर रही थी।
मैंने बूब्स दबाने के बाद उनकी सलवार में हाथ डाला।
सलवार का नाड़ा बँधा हुआ था.
फिर भी मैंने ज़ोर लगाकर हाथ बढ़ी मुश्किल से अंदर डाला.
मौसी की चूत के आसपास यानि वस्ति-प्रदेश पर कम बाल थे, शायद उन्होने दो-चार दिन पहले अपनी झांट के बाल साफ किए थे.
जैसे ही मेरा हाथ उनकी पेंटी के अंदर गया … ये क्या … उनकी पेंटी तो उनके चूत के पानी से गीली हो चुकी थी और उनकी चूत ढेर सारा पानी छोड़ चुकी थी।
फिर मैंने अपने कपड़े उतारे और उनकी सलवार को थोड़ा नीचे सरकाया क्यूंकि उनकी सलवार में गाँठ बँधी थी तो सलवार ज़्यादा नीचे जा नहीं रही थी.
एक बार फिर सॉरी दोस्तो … मैंने अपने लंड के बारे में तो बताया ही नहीं!
मेरे लंड की साइज़ 6 इंच है जो सामान्य लंबाई है.
क्यूंकि यह एक सच्ची घटना है तो झूठ लिखने का कोइ मतलब तो है नहीं।
अब मैंने अपना लंड उनके हाथ में दिया और अपने हाथ से पकड़ कर ही हिलवाने लगा क्योंकि मौसी तो सोने की एक्टिंग ही कर रही थी।
फ़िर मैंने सोचा ऐसे तो काम चलेगा नहीं … क्योंकि रात के 1:30 बज रहे थे.
मैं अपना लंड उनकी सलवार खिसका के उनकी चूत में पेलने लगा।
मेरा लंड उनकी चूत में एक ही बार में समाने लगा.
लेकिन वे फिर भी सोने की एक्टिंग कर रही थी.
मैं तो समझ गया कि वे जाग गयी हैं.
तब मैंने उनकी एक्टिंग खत्म करने के लिए उनके साथ जानवरों जैसा सुलूक किया, उनका कुर्ता फाड़ दिया और उनके बूब्स बुरी तरह से दबाने लगा और ब्रा उतार कर निप्पलों पर काटने लगा.
फिर मैंने कहा- यार मौसी … अब तो जाग जाओ और मज़ा लो अपनी चुदाई का!
फिर वे जाग तो गयी लेकिन आँखें खोलने में शर्म महसूस कर रही थी.
तब मैंने उनकी जोरदार चुदाई करनी शुरू की.
मौसी की चूत पर लगे झटके पर झटके कि उनकी रूह काँप गयी.
वे बोली- ऐसी चुदाई तो मेरे बॉयफ्रेंड ने भी आज तक नहीं की।
फिर मैंने पूरी रात में चार राउंड लगाए चुदाई की और मौसी की हालत मेरी चुदाई से ढीली हो गयी।
तब वे बुरी तरह थक गयी और चूँकि मैं भी थक गया था क्योंकि चार राउंड, दोस्तो, बहुत होते हैं।
मैंने आज तक किसी कहानी में इतनी चुदाई एक बार में ज़्यादा नहीं देखी।
वास्तव में उस रात की चुदाई मैं जिन्दगी भर नहीं भूलूंगी।
देसी भाबी Xx चुदाई कहानी पर अपनी राय कमेंट्स और मेल में बताएं.
दूर के रिश्ते में अविवाहित मौसी की चुदाई
(antarwasna Xxx Stori)
समर यादव 2024-11-18 Comments 5044 30591
अन्तरवासना Xxx स्टोरी मेरी पहली चुदाई की है जिसमें मैंने अपने रिश्ते में मौसी की चूत मारी. वे शादीशुदा नहीं थी फिर भी उनकी चूत फटी हुई थी. वे अपने बॉयफ्रेंड से चुदती थी.
दोस्तो, मेरा नाम समर है, मैं मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले का रहने वाला हूँ।
मेरी हाइट 6 फीट है।
मैं आजकल एक सरकारी संस्था में नौकरी करता हूँ। यह मेरी पहली सच्ची कहानी है.
इसमें कोई ग़लती हो जाए लिखने में … तो मैं क्षमा प्रार्थी हूँ।
यह अन्तरवासना Xxx स्टोरी तब की है जब मैं 12वीं की पढ़ाई कर रहा था।
मेरी उम्र उस वक़्त 18 वर्ष थी।
मेरे सामने वाले मकान में मेरी मौसी रहती थी।
वे मेरी दूर की मौसी थी, तब उनकी शादी नहीं हुई थी और वे अकेली रहती थी. उनके पापा व परिवार गांव में रहते थे।
मैं उनके सामने वाले मकान में किराए से रहता था।
उनकी उम्र उस वक़्त 23 वर्ष थी।
तब उनकी शादी नही हुई थी।
वे एक भरे जिस्म की मालकिन थी।
उनका एक बॉयफ्रेंड भी था।
मुझे वे बहुत पसंद थी.
क्योंकि उस वक़्त में सिंगल भी था तो मैं लड़की की तलाश में रहता था।
तो मैंने एक दिन सोचा कि जब वे बाहर बॉयफ्रेंड बना सकती हैं तो मुझसे भी सेट हो सकती हैं।
लेकिन मुझे सही मौका नहीं मिल पा रहा था।
फिर उनकी भाभी अपने बच्चे को पढ़ाने शहर आ गयी जो पहले गांव में रहती थी.
तो मौसी अपने बॉयफ्रेंड से बात करने के लिए रात को मेरे रूम में सोने के लिए आने लगी।
तो दोस्तो, यहीं से शुरू होती है मेरी अन्तरवासना Xxx स्टोरी!
मेरे कमरे में एक ही बेड था जिस पर मैं सोता था.
जब वे मेरे कमरे में आती तो उनको अपने बॉयफ्रेंड से बात करने के चक्कर में मजबूरी में मेरे साथ मेरे बेड पर सोना पड़ रहा था।
क्यूंकि लड़कियों में अन्तर्वासना ज़्यादा होती है तो उनका अपने बॉयफ्रेंड से बात किए बिना मन नहीं लगता था।
सॉरी दोस्तो, मैंने अपनी मौसी के फिगर के बारे में तो बताया ही नहीं!
वे एक भरे बदन की मालकिन है उनका फिगर 32-34-36 का है जो किसी को भी पागल कर दे।
जब रात को बात करती-2 वे सो जाती तो मैं रात को जगकर उनके बूब्स दबाता रहता और वे कुछ नहीं कहती.
शायद वे नींद में रहती थी।
ऐसे ही दिन गुज़रते जा रहे थे.
पर मेरी बूब्स दबाने से आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं हो रही थी।
लेकिन एक दिन मैंने हिम्मत करके बूब्स पूरी ज़ोर से दबाए.
मुझे लगा शायद वे जाग गयी हैं.
पर वे ऐसा कुछ भी प्रतिक्रिया नहीं कर रही थी।
मैंने बूब्स दबाने के बाद उनकी सलवार में हाथ डाला।
सलवार का नाड़ा बँधा हुआ था.
फिर भी मैंने ज़ोर लगाकर हाथ बढ़ी मुश्किल से अंदर डाला.
मौसी की चूत के आसपास यानि वस्ति-प्रदेश पर कम बाल थे, शायद उन्होने दो-चार दिन पहले अपनी झांट के बाल साफ किए थे.
जैसे ही मेरा हाथ उनकी पेंटी के अंदर गया … ये क्या … उनकी पेंटी तो उनके चूत के पानी से गीली हो चुकी थी और उनकी चूत ढेर सारा पानी छोड़ चुकी थी।
फिर मैंने अपने कपड़े उतारे और उनकी सलवार को थोड़ा नीचे सरकाया क्यूंकि उनकी सलवार में गाँठ बँधी थी तो सलवार ज़्यादा नीचे जा नहीं रही थी.
एक बार फिर सॉरी दोस्तो … मैंने अपने लंड के बारे में तो बताया ही नहीं!
मेरे लंड की साइज़ 6 इंच है जो सामान्य लंबाई है.
क्यूंकि यह एक सच्ची घटना है तो झूठ लिखने का कोइ मतलब तो है नहीं।
अब मैंने अपना लंड उनके हाथ में दिया और अपने हाथ से पकड़ कर ही हिलवाने लगा क्योंकि मौसी तो सोने की एक्टिंग ही कर रही थी।
फ़िर मैंने सोचा ऐसे तो काम चलेगा नहीं … क्योंकि रात के 1:30 बज रहे थे.
मैं अपना लंड उनकी सलवार खिसका के उनकी चूत में पेलने लगा।
मेरा लंड उनकी चूत में एक ही बार में समाने लगा.
लेकिन वे फिर भी सोने की एक्टिंग कर रही थी.
मैं तो समझ गया कि वे जाग गयी हैं.
तब मैंने उनकी एक्टिंग खत्म करने के लिए उनके साथ जानवरों जैसा सुलूक किया, उनका कुर्ता फाड़ दिया और उनके बूब्स बुरी तरह से दबाने लगा और ब्रा उतार कर निप्पलों पर काटने लगा.
फिर मैंने कहा- यार मौसी … अब तो जाग जाओ और मज़ा लो अपनी चुदाई का!
फिर वे जाग तो गयी लेकिन आँखें खोलने में शर्म महसूस कर रही थी.
तब मैंने उनकी जोरदार चुदाई करनी शुरू की.
मौसी की चूत पर लगे झटके पर झटके कि उनकी रूह काँप गयी.
वे बोली- ऐसी चुदाई तो मेरे बॉयफ्रेंड ने भी आज तक नहीं की।
फिर मैंने पूरी रात में चार राउंड लगाए चुदाई की और मौसी की हालत मेरी चुदाई से ढीली हो गयी।
तब वे बुरी तरह थक गयी और चूँकि मैं भी थक गया था क्योंकि चार राउंड, दोस्तो, बहुत होते हैं।
मैंने आज तक किसी कहानी में इतनी चुदाई एक बार में ज़्यादा नहीं देखी।
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फिर जब चुदाई करते-2 हम थक गये तो समय देखा.
सुबह के 4 बज रहे थे.
फिर हम सो गये और सुबह 8 बजे आँख खुली तो देखा तो उनकी भाभी गांव जा रही हैं क्योंकि उनकी सास की तबीयत खराब थी.
तो हम दोनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
फिर उनकी भाभी के जाते ही मैंने मौसी को छेड़ना शुरू कर दिया.
और इस बार उनकी शर्म गायब थी।
इस बार मैंने उन्हें पहले अपना लंड मुंह में लेने को कहा तो उन्होंने बिना देरी किए झट से पूरा लंड अपने मुंह में लिया और लॉलिपोप की तरह चूसने लगी.
जब उन्हें मेरा लंड चूसते हुए 10 मिनट हो गये तो मैंने कहा- मेरा निकलने वाला है मौसी … कहाँ निकालूं?
तो उन्होंने कहा- मेरे मुंह में ही निकाल दो.
और फिर 10 सेकेंड बाद मेरा माल उनके मुख में ही निकल गया जिसे उन्होंने बड़े चाव से पूरा अंदर निगल लिया.
फिर वे अपन हाथ से बड़े प्यार से मेरे लंड को सहलाने लगी.
और मौसी ने 5-7 मिनट बाद मेरा लंड फिर से खड़ा कर दिया.
अब मैंने देरी किए बिना उनके सारे कपड़े उतारे और अपना खड़ा लंड नंगी मौसी की चूत में डाल दिया.
और मौसी भानजे के बीच घपाघप शुरू हो गया.
इस बार मैं करीब 20 मिनट तक मौसी की चूत की चुदाई करता रहा.
और जब मेरा माल निकलने लगा तो मैंने मौसी से पूछा- मौसी, माल कहाँ निकालूं?
तो मौसी ने कहा- मेरी चूत में ही निकालो!
तब मैंने अपना सारा माल उनकी चूत में ही निकाल दिया.
और जब मैंने अपने लंड की तरफ देखा तो वह बुरी तरह से लाल हो गया था।
अब तो मेरी और मौसी की रोज ही चुदाई होने लगी क्योंकि अब हम एक साथ ही सोते थे।
तब से मौसी के चेहरे पर एक अलग ही चमक आ गयी थी क्योंकि उनकी चुदाई जो रोज होने लगी थी.
हफ्ते में 4-5 दिन चुदाई तो रोज की ही बात में आती है।
तो दोस्तो, यह थी मेरी पहली अन्तरवासना Xxx स्टोरी अपनी मौसी के साथ सेक्स की।
अब उनकी शादी हो चुकी है और वे अपनी ज़िंदगी में खुश हैं और मैं अपनी ज़िंदगी में!
तो बतायें कि आपको मेरी अन्तरवासना Xxx स्टोरी कैसी लगी?
मुझे ईमेल करें
किसी लड़की/भाभी/विधवा/आन्टी को सेक्सी चैट/ तस्वीरें/ वीडियो कालिंग पर बात करनी है तो मैसेज करें
सब कुछ गुप्त रखा जाता है
सिर्फ लड़कियां ही मैसेज करें
@Surya4455
कोई भी लड़का मैसेज नहीं करें🚫
❌
फ़ालतू टाइम पास के लिए मैसेज नहीं करें
जिस लड़की को सेक्सी बातें करनी हैं वो ही मैसेज करें
सुबह के 4 बज रहे थे.
फिर हम सो गये और सुबह 8 बजे आँख खुली तो देखा तो उनकी भाभी गांव जा रही हैं क्योंकि उनकी सास की तबीयत खराब थी.
तो हम दोनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
फिर उनकी भाभी के जाते ही मैंने मौसी को छेड़ना शुरू कर दिया.
और इस बार उनकी शर्म गायब थी।
इस बार मैंने उन्हें पहले अपना लंड मुंह में लेने को कहा तो उन्होंने बिना देरी किए झट से पूरा लंड अपने मुंह में लिया और लॉलिपोप की तरह चूसने लगी.
जब उन्हें मेरा लंड चूसते हुए 10 मिनट हो गये तो मैंने कहा- मेरा निकलने वाला है मौसी … कहाँ निकालूं?
तो उन्होंने कहा- मेरे मुंह में ही निकाल दो.
और फिर 10 सेकेंड बाद मेरा माल उनके मुख में ही निकल गया जिसे उन्होंने बड़े चाव से पूरा अंदर निगल लिया.
फिर वे अपन हाथ से बड़े प्यार से मेरे लंड को सहलाने लगी.
और मौसी ने 5-7 मिनट बाद मेरा लंड फिर से खड़ा कर दिया.
अब मैंने देरी किए बिना उनके सारे कपड़े उतारे और अपना खड़ा लंड नंगी मौसी की चूत में डाल दिया.
और मौसी भानजे के बीच घपाघप शुरू हो गया.
इस बार मैं करीब 20 मिनट तक मौसी की चूत की चुदाई करता रहा.
और जब मेरा माल निकलने लगा तो मैंने मौसी से पूछा- मौसी, माल कहाँ निकालूं?
तो मौसी ने कहा- मेरी चूत में ही निकालो!
तब मैंने अपना सारा माल उनकी चूत में ही निकाल दिया.
और जब मैंने अपने लंड की तरफ देखा तो वह बुरी तरह से लाल हो गया था।
अब तो मेरी और मौसी की रोज ही चुदाई होने लगी क्योंकि अब हम एक साथ ही सोते थे।
तब से मौसी के चेहरे पर एक अलग ही चमक आ गयी थी क्योंकि उनकी चुदाई जो रोज होने लगी थी.
हफ्ते में 4-5 दिन चुदाई तो रोज की ही बात में आती है।
तो दोस्तो, यह थी मेरी पहली अन्तरवासना Xxx स्टोरी अपनी मौसी के साथ सेक्स की।
अब उनकी शादी हो चुकी है और वे अपनी ज़िंदगी में खुश हैं और मैं अपनी ज़िंदगी में!
तो बतायें कि आपको मेरी अन्तरवासना Xxx स्टोरी कैसी लगी?
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