फिर एक झटका उसका इतनी गहराई में उतरा कि लिंग बाहर नहीं निकला और वहीं पड़ा हुआ कुलबुला कर फुफकारने लगा।
मैंने अपने अंदर एक गर्म लावा महसूस किया.
उसने सारा पानी अंदर छोड़ दिया था।
वह कुछ देर तक ऐसे ही निढाल पड़ा रहा।
सारी प्रतिक्रियायें शांत हो चुकी थी जैसे एक तूफ़ान के बाद की शांति।
अब भी वह मुझे झकड़े हुए था और उसके शरीर का एक हिस्सा मेरे शरीर में था।
💦💦💦💦💦💦
ब्लूफिल्म दिखा कर क्लासमेट की चूत चुदाई
💦💦💦💦💦💦
इंडियन टीन वर्जिन सेक्स कहानी में मैंने अपनी एक दोस्त लड़की को प्रोपोज़ किया पर उसने बात सिर्फ दोस्ती तक रखने को कहा. पर एक दिन वह मेरे लंड से चुद भी गयी. कैसे?
मित्रो, मेरा नाम सूरज है.
मेरा लंड सामान्य ही है यह साढ़े छह इंच लम्बा और ढाई इंच मोटा है.
मैं किसी भी लड़की, भाभी, आंटी को देर तक चोद कर पूरा संतुष्ट कर सकता हूँ.
यह इंडियन टीन वर्जिन सेक्स कहानी चार साल पहले उस वक्त की है जब मैं डिप्लोमा कर रहा था और लास्ट ईयर में था.
उस समय मैं 19 साल का था और किराये के कमरे में दोस्तों के साथ रह कर पढ़ रहा था.
अब मैं आपको सीमा के बारे में बता देता हूँ. वह मेरे साथ ही पढ़ती थी.
उस वक्त उसकी उम्र मेरे जितनी ही थी यानि हम दोनों ही 19 साल के थे.
सीमा का बदन मस्त भर हुआ था और एकदम गोरा था.
उसकी बॉडी के कटाव बेहद आकर्षक थे.
उसका फिगर कुछ यूं था. उसके दूध 30 इंच के, कमर 28 की और गांड बाहर को निकली हुई 32 इंच की थी.
मैंने उसे एक बार प्रपोज भी किया था.
पर उसने कहा था- हम दोनों सिर्फ बेस्ट फ्रेंड ही रहेंगे.
उस वक्त हमारे लास्ट ईयर के पेपर चल रहे थे.
मैं और मेरे दो दोस्त एक मकान में रहते थे.
उस घर में दो कमरे और एक किचन भी था.
मकान मालिक के साथ मेरे पापा काफी अच्छी पहचान भी थी तो वे किराया भी कम लेते थे और कभी कोई बाहर का कोई लड़का रूम पर रुकने आ जाए तो कोई दिक्कत भी नहीं थी.
उसका एक कारण यह भी था कि अंकल दूसरे मकान में रहते थे और वह दूसरा मकान कुछ दूर था.
मेरे घर के सामने वाले घर के ऊपर के माले पर सीमा भी अपनी सहेलियों के साथ किराए से रहती थी.
जब हमारे पेपर चल रहे थे तो हर पेपर के बीच चार पांच दिन का गैप था.
मेरे दोस्तों ने ट्यूशन लगाई थी.
उस दिन वे ट्यूशन क्लास में सुबह 7 बजे ही चले गए और 11 बजे वापस आने वाले थे.
मैंने ट्यूशन नहीं लगाई थी तो मैं रूम पर ही था.
इस बीच मुझे भूख लग आई थी और मेस 10.30 बजे चालू होती थी.
जबकि अभी तो 8 ही बजे थे.
बाहर नाश्ता करने के लिए जाता तो वह रेस्तरां भी काफी दूर था.
मैं यह सोच ही रहा था कि क्या किया जाए कि तभी सीमा का कॉल आ गया.
वह पूछने लगी- पढ़ाई हुई, क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- यार पढ़ाई की छोड़ो, मुझे तो अभी बहुत तेज भूख लगी है और मैं चाय बना रहा हूँ. तुम चाय पीना चाहती हो तो नीचे आ जाओ.
उसने हां कहकर और नीचे आने की बोल कर फोन काट दिया.
अब सीमा और शीतल नीचे आने के बाद मेरे रूम में आ गईं.
सीमा बोली- हम लोग मैगी भी साथ लाई हैं, तुम चाय बनाओ, मैं मैगी बनाऊंगी.
हम तीनों ने बातें करते करते मैगी और चाय पी ली.
फिर शीतल वहां से किसी से नोट्स लेने के लिए चली गई.
अब कमरे में मैं और सीमा ही रह गए थे.
हम दोनों बिस्तर पर लेटकर इधर उधर की बातें कर रहे थे.
उसी बीच उसने मेरा मेरा मोबाइल ले लिया.
उसे मेरे मोबाइल के सारे पासवर्ड पता थे तो वह उसमें से कुछ सॉलव्ड पेपर अपने मोबाइल पर भेज रही थी.
उसके बाद वह कॉलेज की वीडियो देखने लगी तो उसमें कुछ ब्लू फिल्म भी थीं.
उसने कहा- अबे चूतिया, ये क्या देखता रहता है?
मैंने उससे कहा- तुम और शीतल भी तो देखती हो … मुझे सब पता है.
तो वह शर्मा गई.
मैंने कहा- इसमें शर्माने की क्या बात है, सब देखते हैं.
यह कहकर मैंने एक फिल्म चालू कर दी और उससे बोला- चल साथ में देखते हैं.
वह मेरे बाजू में ही लेटी थी.
उस फिल्म में दो लड़के एक लड़की के साथ थे.
एक उसके बूब्स दबा रहा था और लंड चुसवा रहा था तो दूसरा उसकी चूत चाट रहा था.
कुछ मिनट की ब्लू फिल्म देखने के बाद वह गर्म होने लगी थी.
मेरा भी लौड़ा सख्त हो चुका था और वह लोवर से साफ दिख रहा था.
मैं धीरे धीरे अपना लौड़ा सहला रहा था.
पास में होने के कारण मेरी कोहनी उसके बूब्स को बार बार टच हो रही थी.
पर वह कुछ नहीं बोली क्योंकि मैं कभी कभी मजाक में उसके बूब्स दबा देता था.
उसका भी मन कर रहा था कि वह चूत सहला ले!
मैंने हिम्मत करके उससे कहा- यार सीमा, मैंने अब तक कभी भी किसी लड़की को किस तक नहीं किया और ना ही उसे नंगी करके बूब्स नहीं दबाए हैं. क्या तू एक बार अपने दूध दबाने देगी … प्लीज यार.
उसने पहले ना कहा, पर थोड़ी देर बाद वह मान गई.
उसने कहा- सिर्फ बूब्स ही, आगे मत बढ़ना!
मैंने कहा- हां ठीक है.
मैंने कमरे का दरवाजा बंद किया और उसको किस करने लगा, उसके होंठ चूसना शुरू कर दिया.
मैंने अपने अंदर एक गर्म लावा महसूस किया.
उसने सारा पानी अंदर छोड़ दिया था।
वह कुछ देर तक ऐसे ही निढाल पड़ा रहा।
सारी प्रतिक्रियायें शांत हो चुकी थी जैसे एक तूफ़ान के बाद की शांति।
अब भी वह मुझे झकड़े हुए था और उसके शरीर का एक हिस्सा मेरे शरीर में था।
💦💦💦💦💦💦
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💦💦💦💦💦💦
इंडियन टीन वर्जिन सेक्स कहानी में मैंने अपनी एक दोस्त लड़की को प्रोपोज़ किया पर उसने बात सिर्फ दोस्ती तक रखने को कहा. पर एक दिन वह मेरे लंड से चुद भी गयी. कैसे?
मित्रो, मेरा नाम सूरज है.
मेरा लंड सामान्य ही है यह साढ़े छह इंच लम्बा और ढाई इंच मोटा है.
मैं किसी भी लड़की, भाभी, आंटी को देर तक चोद कर पूरा संतुष्ट कर सकता हूँ.
यह इंडियन टीन वर्जिन सेक्स कहानी चार साल पहले उस वक्त की है जब मैं डिप्लोमा कर रहा था और लास्ट ईयर में था.
उस समय मैं 19 साल का था और किराये के कमरे में दोस्तों के साथ रह कर पढ़ रहा था.
अब मैं आपको सीमा के बारे में बता देता हूँ. वह मेरे साथ ही पढ़ती थी.
उस वक्त उसकी उम्र मेरे जितनी ही थी यानि हम दोनों ही 19 साल के थे.
सीमा का बदन मस्त भर हुआ था और एकदम गोरा था.
उसकी बॉडी के कटाव बेहद आकर्षक थे.
उसका फिगर कुछ यूं था. उसके दूध 30 इंच के, कमर 28 की और गांड बाहर को निकली हुई 32 इंच की थी.
मैंने उसे एक बार प्रपोज भी किया था.
पर उसने कहा था- हम दोनों सिर्फ बेस्ट फ्रेंड ही रहेंगे.
उस वक्त हमारे लास्ट ईयर के पेपर चल रहे थे.
मैं और मेरे दो दोस्त एक मकान में रहते थे.
उस घर में दो कमरे और एक किचन भी था.
मकान मालिक के साथ मेरे पापा काफी अच्छी पहचान भी थी तो वे किराया भी कम लेते थे और कभी कोई बाहर का कोई लड़का रूम पर रुकने आ जाए तो कोई दिक्कत भी नहीं थी.
उसका एक कारण यह भी था कि अंकल दूसरे मकान में रहते थे और वह दूसरा मकान कुछ दूर था.
मेरे घर के सामने वाले घर के ऊपर के माले पर सीमा भी अपनी सहेलियों के साथ किराए से रहती थी.
जब हमारे पेपर चल रहे थे तो हर पेपर के बीच चार पांच दिन का गैप था.
मेरे दोस्तों ने ट्यूशन लगाई थी.
उस दिन वे ट्यूशन क्लास में सुबह 7 बजे ही चले गए और 11 बजे वापस आने वाले थे.
मैंने ट्यूशन नहीं लगाई थी तो मैं रूम पर ही था.
इस बीच मुझे भूख लग आई थी और मेस 10.30 बजे चालू होती थी.
जबकि अभी तो 8 ही बजे थे.
बाहर नाश्ता करने के लिए जाता तो वह रेस्तरां भी काफी दूर था.
मैं यह सोच ही रहा था कि क्या किया जाए कि तभी सीमा का कॉल आ गया.
वह पूछने लगी- पढ़ाई हुई, क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- यार पढ़ाई की छोड़ो, मुझे तो अभी बहुत तेज भूख लगी है और मैं चाय बना रहा हूँ. तुम चाय पीना चाहती हो तो नीचे आ जाओ.
उसने हां कहकर और नीचे आने की बोल कर फोन काट दिया.
अब सीमा और शीतल नीचे आने के बाद मेरे रूम में आ गईं.
सीमा बोली- हम लोग मैगी भी साथ लाई हैं, तुम चाय बनाओ, मैं मैगी बनाऊंगी.
हम तीनों ने बातें करते करते मैगी और चाय पी ली.
फिर शीतल वहां से किसी से नोट्स लेने के लिए चली गई.
अब कमरे में मैं और सीमा ही रह गए थे.
हम दोनों बिस्तर पर लेटकर इधर उधर की बातें कर रहे थे.
उसी बीच उसने मेरा मेरा मोबाइल ले लिया.
उसे मेरे मोबाइल के सारे पासवर्ड पता थे तो वह उसमें से कुछ सॉलव्ड पेपर अपने मोबाइल पर भेज रही थी.
उसके बाद वह कॉलेज की वीडियो देखने लगी तो उसमें कुछ ब्लू फिल्म भी थीं.
उसने कहा- अबे चूतिया, ये क्या देखता रहता है?
मैंने उससे कहा- तुम और शीतल भी तो देखती हो … मुझे सब पता है.
तो वह शर्मा गई.
मैंने कहा- इसमें शर्माने की क्या बात है, सब देखते हैं.
यह कहकर मैंने एक फिल्म चालू कर दी और उससे बोला- चल साथ में देखते हैं.
वह मेरे बाजू में ही लेटी थी.
उस फिल्म में दो लड़के एक लड़की के साथ थे.
एक उसके बूब्स दबा रहा था और लंड चुसवा रहा था तो दूसरा उसकी चूत चाट रहा था.
कुछ मिनट की ब्लू फिल्म देखने के बाद वह गर्म होने लगी थी.
मेरा भी लौड़ा सख्त हो चुका था और वह लोवर से साफ दिख रहा था.
मैं धीरे धीरे अपना लौड़ा सहला रहा था.
पास में होने के कारण मेरी कोहनी उसके बूब्स को बार बार टच हो रही थी.
पर वह कुछ नहीं बोली क्योंकि मैं कभी कभी मजाक में उसके बूब्स दबा देता था.
उसका भी मन कर रहा था कि वह चूत सहला ले!
मैंने हिम्मत करके उससे कहा- यार सीमा, मैंने अब तक कभी भी किसी लड़की को किस तक नहीं किया और ना ही उसे नंगी करके बूब्स नहीं दबाए हैं. क्या तू एक बार अपने दूध दबाने देगी … प्लीज यार.
उसने पहले ना कहा, पर थोड़ी देर बाद वह मान गई.
उसने कहा- सिर्फ बूब्स ही, आगे मत बढ़ना!
मैंने कहा- हां ठीक है.
मैंने कमरे का दरवाजा बंद किया और उसको किस करने लगा, उसके होंठ चूसना शुरू कर दिया.
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दो मिनट बाद वह भी मेरे होंठ चूसने लगी.
हम दोनों कामुक अवस्था में थे तो दस मिनट तक किस ही करते रहे.
उसी बीच हम दोनों की जीभें भी एक दूसरे से लड़ने लगीं और हम दोनों की उत्तेजना चरम पर पहुँचने लगी.
काफी देर तक किस करने के बाद मैंने उसके होंठों को छोड़ा और गले को किस करते हुए उसकी चूचियों तक आ गया.
उसकी टी-शर्ट के ऊपर से ही उसके बूब्स दबाना और किस करना चालू कर दिया.
वह भी अब पूरा मजा ले रही थी.
मैंने उससे कहा- तुम अपनी टी-शर्ट उतारो.
उसने अपनी टी-शर्ट उतार दी और मैं ब्रा में हाथ डाल कर बूब्स दबाने लगा था.
फिर मैंने उसकी ब्रा भी खोल दी और आज पहली बार मैंने उसके सफेद मम्मों को देखा.
उसके एकदम गोल गोल और टाइट बूब्स मेरे सामने थे.
मैं पागलों की तरह उन पर टूट पड़ा.
एक को चूसने और दूसरे को दबाने का सिलसिला शुरू हो गया.
उसने कहा- धीरे से करो और आराम से दबाओ न … मैं कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ!
मैंने धीरे धीरे से दूध दबाना शुरू किए और मस्ती से उसके निप्पलों को खींच खींच कर चूसने लगा.
वह भी आती कामुक होकर मेरे सर को अपने हाथों से पकड़ कर मुझे अपने दोनों दूध बारी बारी से पिला रही थी.
अब मैंने अपनी शर्ट और लोवर को भी उतार दिया और पुनः उसके बूब्स चूसना चालू किए.
फिर धीरे धीरे लोवर के ऊपर से ही उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा था.
उसकी लोअर दोनों टांगों के बीच से गीली हो गई थी.
उसकी चूत को हाथ से रगड़ने से वह अपनी कमर को आगे पीछे करती हुई कुछ ऐसा करने लगी थी मानो वह मेरे हाथ से अपनी चूत रगड़वा कर मुठ मरवा रही हो.
कुछ ही देर बाद उसने भी मेरी चड्डी के अन्दर हाथ डाल दिया और मेरा लौड़ा पकड़ कर आगे पीछे करने लगी थी.
यह देख कर मैंने भी अपना एक हाथ उसकी पैंटी के अन्दर डाल दिया और चूत सहलाने लगा.
उसकी चूत हद से ज्यादा गीली हो चुकी थी.
मैंने उसे देखा तो वह आँख बंद करके अपनी चूत रगड़वाने का सुख ले रही थी.
मैंने उसके होंठों को फिर से किस करना चालू कर दिया और धीरे धीरे उसकी लोवर और पैंटी भी नीचे सरका दिया.
अब वह अपनी चूत में लंड लेने के लिए मचल रही थी.
उसने कहा भी- सूरज, अब अपना लंड मेरी चूत में डाल ही दो और मत तड़पाओ प्लीज!
यह सुनकर मेरी तो मानो लॉटरी निकल पड़ी थी.
मैंने झट से उसको पूरी नंगी कर दिया और खुद भी नंगा हो गया.
मैंने उससे लंड चूसने को कहा.
पर उसने मना कर दिया लेकिन अपने हाथ से मेरे को लंड हिलाना शुरू कर दिया.
थोड़ी देर बाद मेरे लंड से माल का फव्वारा निकल कर उसके चेहरे पर जा पड़ा और मैं झड़ चुका था.
वह मेरे झड़े हुए लौड़े को अपने हाथ से मसलती रही.
मैंने उसकी आंखों में झाँका तो एक तड़फ सी दिखाई दी जो साफ कह रही थी कि लंड को जल्दी से खड़ा करो और उसकी चूत में घुसेड़ कर उसे चोद दो.
मैंने उसे अपने सिरहाने रखी हुई तौलिया पकड़ा दी और उसने मेरी भावना समझ कर मेरे लौड़े को पौंछना शुरू कर दिया था.
उसी समय मैंने अपने एक हाथ से उसके एक दूध को मसल कर उसका ध्यान अपनी तरफ किया.
उसने मेरी तरफ देखा तो मैंने उसे अपने हाथ से इशारा किया कि मुँह से लंड चूस कर खड़ा करो.
वह मुस्कुरा दी और अपनी चुदास के चलते उसने मेरे लंड को मुँह से एक बार चाटा.
फिर अपनी जीभ को मुँह के अन्दर लेकर स्वाद को जांचा.
शायद उसे स्वाद अच्छा लगा तो उसने अपने हाथ से मेरे मुरझाए हुए लौड़े को पकड़ कर सीधा किया और मुँह से लगा कर उसे चूमने लगी.
इससे लंड में सुगबुगाहट होने लगी और वह अपने हाथ से मेरे लौड़े में आने वाले तनाव को महसूस करने लगी.
इससे उसकी आंखों की चमक बढ़ गई और उसने अगले ही पल अपने मुँह में मेरे लौड़े को भर लिया.
आह … उसके मुँह की गर्मी पाते ही मेरे मुर्दा लंड में जान आने लगी और वह कुछ ही पलों में टनटनाने लगा.
उसको भी लंड चूसने में मजा आने लगा, तो वह भी मेरे लौड़े को बड़े प्यार से चूसने लगी.
पांच मिनट बाद उसने मेरा लंड खड़ा कर दिया और आंख के इशारे से चूत में लंड डालने के लिए कहा.
मैंने पलक झपकते ही उसकी टांगें फैलाईं और उसे चुदाई की पोजीशन में लेकर लंड चूत के मुँह में लगा दिया.
उसकी चूत एकदम चिपकी हुई थी और चिपचिपा भी रही थी.
मैं सुपारे को चूत की फांक में डालने लगा लेकिन वह अन्दर न जाकर बार बार फिसल रहा था.
मैंने बाजू में रखा केश तेल उठा लिया और थोड़ा सा अपने लंड पर मल लिया.
कुछ उसकी चूत में लगाया और चूत में उंगली घुसेड़ कर आगे पीछे करने लगा.
उसकी चूत में जगह बनने लगी और वह आह भरने लगी.
अब मैंने लंड चूत पर सैट करके उसके हाथ से लंड पकड़ाया और जोर का धक्का दे दिया.
मेरे लंड के आगे वाला हिस्सा चूत में घुसता चला गया.
उसने दर्द भरी आह भरने के साथ ही मेरे लौड़े से अपना हाथ हटा लिया.
चूंकि सुपारा चूत में प्रविष्ट हो चुका था तो मैंने तत्काल जोर जोर के दो तीन तगड़े झटके लगा दिए और अपना पूरा लंड उसकी चूत के अन्दर पेल दिया.
हम दोनों कामुक अवस्था में थे तो दस मिनट तक किस ही करते रहे.
उसी बीच हम दोनों की जीभें भी एक दूसरे से लड़ने लगीं और हम दोनों की उत्तेजना चरम पर पहुँचने लगी.
काफी देर तक किस करने के बाद मैंने उसके होंठों को छोड़ा और गले को किस करते हुए उसकी चूचियों तक आ गया.
उसकी टी-शर्ट के ऊपर से ही उसके बूब्स दबाना और किस करना चालू कर दिया.
वह भी अब पूरा मजा ले रही थी.
मैंने उससे कहा- तुम अपनी टी-शर्ट उतारो.
उसने अपनी टी-शर्ट उतार दी और मैं ब्रा में हाथ डाल कर बूब्स दबाने लगा था.
फिर मैंने उसकी ब्रा भी खोल दी और आज पहली बार मैंने उसके सफेद मम्मों को देखा.
उसके एकदम गोल गोल और टाइट बूब्स मेरे सामने थे.
मैं पागलों की तरह उन पर टूट पड़ा.
एक को चूसने और दूसरे को दबाने का सिलसिला शुरू हो गया.
उसने कहा- धीरे से करो और आराम से दबाओ न … मैं कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ!
मैंने धीरे धीरे से दूध दबाना शुरू किए और मस्ती से उसके निप्पलों को खींच खींच कर चूसने लगा.
वह भी आती कामुक होकर मेरे सर को अपने हाथों से पकड़ कर मुझे अपने दोनों दूध बारी बारी से पिला रही थी.
अब मैंने अपनी शर्ट और लोवर को भी उतार दिया और पुनः उसके बूब्स चूसना चालू किए.
फिर धीरे धीरे लोवर के ऊपर से ही उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा था.
उसकी लोअर दोनों टांगों के बीच से गीली हो गई थी.
उसकी चूत को हाथ से रगड़ने से वह अपनी कमर को आगे पीछे करती हुई कुछ ऐसा करने लगी थी मानो वह मेरे हाथ से अपनी चूत रगड़वा कर मुठ मरवा रही हो.
कुछ ही देर बाद उसने भी मेरी चड्डी के अन्दर हाथ डाल दिया और मेरा लौड़ा पकड़ कर आगे पीछे करने लगी थी.
यह देख कर मैंने भी अपना एक हाथ उसकी पैंटी के अन्दर डाल दिया और चूत सहलाने लगा.
उसकी चूत हद से ज्यादा गीली हो चुकी थी.
मैंने उसे देखा तो वह आँख बंद करके अपनी चूत रगड़वाने का सुख ले रही थी.
मैंने उसके होंठों को फिर से किस करना चालू कर दिया और धीरे धीरे उसकी लोवर और पैंटी भी नीचे सरका दिया.
अब वह अपनी चूत में लंड लेने के लिए मचल रही थी.
उसने कहा भी- सूरज, अब अपना लंड मेरी चूत में डाल ही दो और मत तड़पाओ प्लीज!
यह सुनकर मेरी तो मानो लॉटरी निकल पड़ी थी.
मैंने झट से उसको पूरी नंगी कर दिया और खुद भी नंगा हो गया.
मैंने उससे लंड चूसने को कहा.
पर उसने मना कर दिया लेकिन अपने हाथ से मेरे को लंड हिलाना शुरू कर दिया.
थोड़ी देर बाद मेरे लंड से माल का फव्वारा निकल कर उसके चेहरे पर जा पड़ा और मैं झड़ चुका था.
वह मेरे झड़े हुए लौड़े को अपने हाथ से मसलती रही.
मैंने उसकी आंखों में झाँका तो एक तड़फ सी दिखाई दी जो साफ कह रही थी कि लंड को जल्दी से खड़ा करो और उसकी चूत में घुसेड़ कर उसे चोद दो.
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उसी समय मैंने अपने एक हाथ से उसके एक दूध को मसल कर उसका ध्यान अपनी तरफ किया.
उसने मेरी तरफ देखा तो मैंने उसे अपने हाथ से इशारा किया कि मुँह से लंड चूस कर खड़ा करो.
वह मुस्कुरा दी और अपनी चुदास के चलते उसने मेरे लंड को मुँह से एक बार चाटा.
फिर अपनी जीभ को मुँह के अन्दर लेकर स्वाद को जांचा.
शायद उसे स्वाद अच्छा लगा तो उसने अपने हाथ से मेरे मुरझाए हुए लौड़े को पकड़ कर सीधा किया और मुँह से लगा कर उसे चूमने लगी.
इससे लंड में सुगबुगाहट होने लगी और वह अपने हाथ से मेरे लौड़े में आने वाले तनाव को महसूस करने लगी.
इससे उसकी आंखों की चमक बढ़ गई और उसने अगले ही पल अपने मुँह में मेरे लौड़े को भर लिया.
आह … उसके मुँह की गर्मी पाते ही मेरे मुर्दा लंड में जान आने लगी और वह कुछ ही पलों में टनटनाने लगा.
उसको भी लंड चूसने में मजा आने लगा, तो वह भी मेरे लौड़े को बड़े प्यार से चूसने लगी.
पांच मिनट बाद उसने मेरा लंड खड़ा कर दिया और आंख के इशारे से चूत में लंड डालने के लिए कहा.
मैंने पलक झपकते ही उसकी टांगें फैलाईं और उसे चुदाई की पोजीशन में लेकर लंड चूत के मुँह में लगा दिया.
उसकी चूत एकदम चिपकी हुई थी और चिपचिपा भी रही थी.
मैं सुपारे को चूत की फांक में डालने लगा लेकिन वह अन्दर न जाकर बार बार फिसल रहा था.
मैंने बाजू में रखा केश तेल उठा लिया और थोड़ा सा अपने लंड पर मल लिया.
कुछ उसकी चूत में लगाया और चूत में उंगली घुसेड़ कर आगे पीछे करने लगा.
उसकी चूत में जगह बनने लगी और वह आह भरने लगी.
अब मैंने लंड चूत पर सैट करके उसके हाथ से लंड पकड़ाया और जोर का धक्का दे दिया.
मेरे लंड के आगे वाला हिस्सा चूत में घुसता चला गया.
उसने दर्द भरी आह भरने के साथ ही मेरे लौड़े से अपना हाथ हटा लिया.
चूंकि सुपारा चूत में प्रविष्ट हो चुका था तो मैंने तत्काल जोर जोर के दो तीन तगड़े झटके लगा दिए और अपना पूरा लंड उसकी चूत के अन्दर पेल दिया.
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उतने में वह चिल्ला उठी, तो मैंने जल्दी से अपना मुँह उसके मुँह पर रखा और उसे किस करना चालू कर दिया.
मुझे भी थोड़ा दर्द होने लगा था और ऐसा लग रहा था मानो मैंने अपने लंड को आग की तप्त भट्टी में डाल दिया हो.
थोड़ी देर बाद मैंने धक्के लगाने चालू किए … उसे दर्द हो रहा था पर वह अपनी आवाज अन्दर ही रख कर दर्द को सहन कर रही थी.
पर जैसे ही मैंने उसके मुँह से मुँह हटाया, वह कराह उठी और मुझे पीछे करने लगी.
लेकिन मैंने उसे किस करना चालू किया, पर वह मुझे गाली देती हुई चिल्लाने लगी- आह हट जा साले कमीने … मेरी चूत फट गई है और तुझे मस्ती चढ़ रही है!
वह मुझे धक्का देती हुई पीछे करने लगी लेकिन मैंने उसे किस करना चालू रखा.
थोड़ी देर बाद उसे भी मजा आने लगा था.
अब मैं उसके बूब्स दबाते हुए उसे चोद रहा था, वह भी मजा ले रही थी.
दस बारह मिनट बाद मेरे लंड का काम तमाम होने वाला था तो मैंने स्पीड बढ़ा दी और जोर जोर से चोदने लगा.
तभी उसने कहा- अन्दर मत डालना!
मैं एकदम से होश में आया.
उसका पानी निकल गया था तो मैंने लंड चूत से बाहर निकाला और उसके सामने खड़ा हो गया.
उसने मेरे लंड को पकड़ कर मुठ मारना चालू कर दिया.
मैंने सारा माल उसके मम्मों पर डाल दिया … वह पहले तो सकपका गई, बाद में हंसने लगी.
इंडियन टीन वर्जिन सेक्स करके हम दोनों की ही तेज तेज सांसें चल रही थीं और हम दोनों बेहद थक चुके थे.
उसने घड़ी की तरफ देखा तो मैंने कहा- अभी हमारे पास काफी टाइम है.
वह लेट गई.
मैं भी उसके बाजू में लेट गया.
दस मिनट बाद उसने उठ कर अपने मम्मों पर पड़ा सारा माल साफ किया.
फिर हम दोनों वाशरूम में जाकर फ्रेश हुए और दोनों ने कपड़े पहन लिए.
मैंने उसे किस किया और वह अपने रूम में चली गई.
उसे चलने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी.
उसी शाम को बाहर आइसक्रीम खाने का प्लान बना तो मेरे दोस्त और उसकी दोनों सहेलियां बाहर गईं.
उस वक्त मैंने चुपके से उसे दर्द कम करने की गोलियां दे दीं, जो मैंने अपने दोस्तों के ट्यूशन से वापस आने से पहले खरीद ली थीं.
उसके बाद पेपर होने के बाद भी दो दिन एक्स्ट्रा रूम पर रहकर हमने खूब इंजॉय किया.
उस वक्त सारे लड़के लड़कियां घर वापिस जा चुके थे, सिर्फ कुछ ही रह गए थे, जिनका चक्कर चल रहा था.
वह सब मैं बाद में लिखूंगा.
दोस्तो, यह मेरी पहली सेक्स कहानी है, कुछ गलती हो गई हो तो माफ कर देना.
आपको यह इंडियन टीन वर्जिन सेक्स कहानी अच्छी लगी होगी.
💦💦💦💦💦💦
बीवी की अदला बदली कर चुदाई का मजा
💦💦💦💦💦💦
वाइफ चेंज Xxx कहानी में मेरा मन हुआ कि मैं बीवी की अदला-बदली करके नयी चूत का मजा लूं. एक बार ट्रेन में मेरा एक दोस्त बना. उसके साथ मेरा वाइफ स्वैप का प्रोग्राम कैसे बना?
दोस्तो, मेरा नाम राजा है.
मैं एम पी का रहने वाला हूं.
मेरी पत्नी का नाम प्रिया है.
वह दिखने मैं थोड़ी दुबली है लेकिन ज्यादा नहीं!
वह बहुत सुंदर दिखती है.
दोस्तो, मैं आप लोगों का ज्यादा समय न लेते हुए सीधे कहानी पर आता हूं.
मैं बहुत दिनों से सेक्स कहानी पढ़ता आ रहा हूं, जिसमें मुझे बीवी की अदला बदली की कहानी बहुत पसंद आई.
तो मैंने भी सोचा क्यों ना मैं भी बीवी बदल कर किसी के साथ चुदाई करूं.
बस अब मैं इस बात को लेकर संजीदा हो गया और सही जोड़े की तलाश करने लगा.
अब यह कुछ इस तरह की बात है कि किसी से सीधे सीधे पूछा भी नहीं जा सकता था कि क्यों भाई आप अपनी बीवी को मेरे साथ चुदवा सकते हो!
मतलब यदि किसी से यह कहा जाए कि क्यों भाई आप मेरी बीवी को चोद सकते हो … तो शायद ही कोई ऐसा मर्द होगा जो इस ऑफर को ठुकरा देगा, पर किसी से उसकी बीवी चोदने की बात पर तो बखेड़ा खड़ा होने का अंदेशा था.
बस इसी उधेड़बुन में समय निकलता गया और मुझे कोई भी ऐसा बंदा नहीं मिला.
फिर एक दिन मैं और मेरी पत्नी इंदौर जा रहे थे, तभी मुझे एक दोस्त मिल गया.
हालांकि वह था तो अजनबी … पर रास्ते में ही मेरी उससे दोस्ती हो गई थी.
उसका नाम रोहण था और वह इंदौर का ही रहने वाला था.
उसके साथ उसकी पत्नी भी थी.
उसका नाम राखी था.
रोहण मुझसे बोला- क्यों ना हम दोनों एक ही स्लीपर में हो जाएं और ये दोनों लेडीज एक स्लीपर में हो जाएं.
मैंने कह दिया- हां चलो ठीक है.
हम दोनों एक ही स्लीपर में चले गए.
हम दोनों स्लीपर में पहुंचे और थोड़ी देर बातें करने के बाद मेरा दोस्त सो गया.
मैंने सोचा क्यों ना मैं सेक्स कहानी पढ़ूँ.
मैं मोबाईल में अन्तर्वासना फ्री सेक्स कहानी पढ़ने लगा.
अभी मैं सेक्स कहानी पढ़ ही रहा था कि मुझे अहसास हुआ कि मेरा साथी रोहण जाग रहा है.
मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने पूछा- क्या पढ़ रहे हो?
मैं जल्दी से साईट बंद करने वाला था, तो रोहण ने कहा- जरा दिखाओ तो यार, मुझे भी पढ़ना है!
मैं सेक्स कहानी पढ़ रहा था तो मैंने उसके साथ कहानी पढ़ना शुरू कर दी.
अब हम दोनों कहानी का मजा लेने लगे.
मुझे भी थोड़ा दर्द होने लगा था और ऐसा लग रहा था मानो मैंने अपने लंड को आग की तप्त भट्टी में डाल दिया हो.
थोड़ी देर बाद मैंने धक्के लगाने चालू किए … उसे दर्द हो रहा था पर वह अपनी आवाज अन्दर ही रख कर दर्द को सहन कर रही थी.
पर जैसे ही मैंने उसके मुँह से मुँह हटाया, वह कराह उठी और मुझे पीछे करने लगी.
लेकिन मैंने उसे किस करना चालू किया, पर वह मुझे गाली देती हुई चिल्लाने लगी- आह हट जा साले कमीने … मेरी चूत फट गई है और तुझे मस्ती चढ़ रही है!
वह मुझे धक्का देती हुई पीछे करने लगी लेकिन मैंने उसे किस करना चालू रखा.
थोड़ी देर बाद उसे भी मजा आने लगा था.
अब मैं उसके बूब्स दबाते हुए उसे चोद रहा था, वह भी मजा ले रही थी.
दस बारह मिनट बाद मेरे लंड का काम तमाम होने वाला था तो मैंने स्पीड बढ़ा दी और जोर जोर से चोदने लगा.
तभी उसने कहा- अन्दर मत डालना!
मैं एकदम से होश में आया.
उसका पानी निकल गया था तो मैंने लंड चूत से बाहर निकाला और उसके सामने खड़ा हो गया.
उसने मेरे लंड को पकड़ कर मुठ मारना चालू कर दिया.
मैंने सारा माल उसके मम्मों पर डाल दिया … वह पहले तो सकपका गई, बाद में हंसने लगी.
इंडियन टीन वर्जिन सेक्स करके हम दोनों की ही तेज तेज सांसें चल रही थीं और हम दोनों बेहद थक चुके थे.
उसने घड़ी की तरफ देखा तो मैंने कहा- अभी हमारे पास काफी टाइम है.
वह लेट गई.
मैं भी उसके बाजू में लेट गया.
दस मिनट बाद उसने उठ कर अपने मम्मों पर पड़ा सारा माल साफ किया.
फिर हम दोनों वाशरूम में जाकर फ्रेश हुए और दोनों ने कपड़े पहन लिए.
मैंने उसे किस किया और वह अपने रूम में चली गई.
उसे चलने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी.
उसी शाम को बाहर आइसक्रीम खाने का प्लान बना तो मेरे दोस्त और उसकी दोनों सहेलियां बाहर गईं.
उस वक्त मैंने चुपके से उसे दर्द कम करने की गोलियां दे दीं, जो मैंने अपने दोस्तों के ट्यूशन से वापस आने से पहले खरीद ली थीं.
उसके बाद पेपर होने के बाद भी दो दिन एक्स्ट्रा रूम पर रहकर हमने खूब इंजॉय किया.
उस वक्त सारे लड़के लड़कियां घर वापिस जा चुके थे, सिर्फ कुछ ही रह गए थे, जिनका चक्कर चल रहा था.
वह सब मैं बाद में लिखूंगा.
दोस्तो, यह मेरी पहली सेक्स कहानी है, कुछ गलती हो गई हो तो माफ कर देना.
आपको यह इंडियन टीन वर्जिन सेक्स कहानी अच्छी लगी होगी.
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बीवी की अदला बदली कर चुदाई का मजा
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वाइफ चेंज Xxx कहानी में मेरा मन हुआ कि मैं बीवी की अदला-बदली करके नयी चूत का मजा लूं. एक बार ट्रेन में मेरा एक दोस्त बना. उसके साथ मेरा वाइफ स्वैप का प्रोग्राम कैसे बना?
दोस्तो, मेरा नाम राजा है.
मैं एम पी का रहने वाला हूं.
मेरी पत्नी का नाम प्रिया है.
वह दिखने मैं थोड़ी दुबली है लेकिन ज्यादा नहीं!
वह बहुत सुंदर दिखती है.
दोस्तो, मैं आप लोगों का ज्यादा समय न लेते हुए सीधे कहानी पर आता हूं.
मैं बहुत दिनों से सेक्स कहानी पढ़ता आ रहा हूं, जिसमें मुझे बीवी की अदला बदली की कहानी बहुत पसंद आई.
तो मैंने भी सोचा क्यों ना मैं भी बीवी बदल कर किसी के साथ चुदाई करूं.
बस अब मैं इस बात को लेकर संजीदा हो गया और सही जोड़े की तलाश करने लगा.
अब यह कुछ इस तरह की बात है कि किसी से सीधे सीधे पूछा भी नहीं जा सकता था कि क्यों भाई आप अपनी बीवी को मेरे साथ चुदवा सकते हो!
मतलब यदि किसी से यह कहा जाए कि क्यों भाई आप मेरी बीवी को चोद सकते हो … तो शायद ही कोई ऐसा मर्द होगा जो इस ऑफर को ठुकरा देगा, पर किसी से उसकी बीवी चोदने की बात पर तो बखेड़ा खड़ा होने का अंदेशा था.
बस इसी उधेड़बुन में समय निकलता गया और मुझे कोई भी ऐसा बंदा नहीं मिला.
फिर एक दिन मैं और मेरी पत्नी इंदौर जा रहे थे, तभी मुझे एक दोस्त मिल गया.
हालांकि वह था तो अजनबी … पर रास्ते में ही मेरी उससे दोस्ती हो गई थी.
उसका नाम रोहण था और वह इंदौर का ही रहने वाला था.
उसके साथ उसकी पत्नी भी थी.
उसका नाम राखी था.
रोहण मुझसे बोला- क्यों ना हम दोनों एक ही स्लीपर में हो जाएं और ये दोनों लेडीज एक स्लीपर में हो जाएं.
मैंने कह दिया- हां चलो ठीक है.
हम दोनों एक ही स्लीपर में चले गए.
हम दोनों स्लीपर में पहुंचे और थोड़ी देर बातें करने के बाद मेरा दोस्त सो गया.
मैंने सोचा क्यों ना मैं सेक्स कहानी पढ़ूँ.
मैं मोबाईल में अन्तर्वासना फ्री सेक्स कहानी पढ़ने लगा.
अभी मैं सेक्स कहानी पढ़ ही रहा था कि मुझे अहसास हुआ कि मेरा साथी रोहण जाग रहा है.
मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने पूछा- क्या पढ़ रहे हो?
मैं जल्दी से साईट बंद करने वाला था, तो रोहण ने कहा- जरा दिखाओ तो यार, मुझे भी पढ़ना है!
मैं सेक्स कहानी पढ़ रहा था तो मैंने उसके साथ कहानी पढ़ना शुरू कर दी.
अब हम दोनों कहानी का मजा लेने लगे.
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कहानी पढ़ते-पढ़ते वाइफ चेंज Xxx कहानी पढ़ने लगे थे.
तो उसने कहा- क्यों ना भाई ऐसा हमारे साथ हो!
तो मैंने कहा- हां यार मैं तो कब से तैयार हूं, पर कोई मिलता ही नहीं!
उसने धीमी आवाज में कहा- क्यों ना मैं अपनी वाइफ राखी को मना कर देखूं और तुम अपनी वाइफ को!
मैंने कहा- अगर ऐसा हो गया तो मजा आ जाएगा भाई!
हम दोनों उसके बाद इसी मुद्दे पर चर्च करते रहे और एक दूसरे की बीवी के बारे में बातें करते रहे.
कुछ देर बाद हम दोनों सो गए.
अब सुबह हो गई, हम लोग इंदौर पहुंच गए.
उधर पहुंचकर हम दोनों ने एक दूसरे के फोन नंबर ले लिए.
दो दिन बाद मेरे दोस्त का कॉल आया.
उसने कहा- क्यों भाई अपनी बीवी से बात की तुमने?
मैंने कहा- अभी नहीं की.
तो उसने कहा- मैंने अपनी बीवी से बात की थी और वह मान गई है. अब तू भी अपनी बीवी से बात कर ले. अगर वह भी मान जाए तो हम लोग कल ही सेक्स के लिए आ जाएंगे.
मैंने ओके कहा.
बाद में मैंने अपनी बीवी से इस बारे में बात की तो उसने साफ मना कर दिया कि वह ऐसा नहीं करेगी.
फरात को जब मैं उसकी चुदाई कर रहा था तो उसने मुझसे कहा- तुम दिन में क्या बोल रहे थे? मैं तुम्हें ऐसा सेक्स नहीं करने दूंगी!
मैंने उसे चोदते हुए कहा- बेबी बहुत मजा आता है ऐसा करने में … लाइफ में इंजॉय करना चाहिए … खुल कर जियो यार … तुम एक बार करके देखोगी तो तुम्हें बहुत मजा आएगा.
फिर मैंने उसे बीवी अदला-बदली की चुदाई वाली वीडियो भी दिखाई और कहानी भी पढ़ाई.
अब उसके मन में कुछ विचार आया.
वह मुझसे बोली- मैं किसी और के साथ सेक्स करूंगी तो तुम्हें बुरा नहीं लगेगा?
मैंने कहा- मुझे बुरा नहीं लगेगा, मैं भी तो उसकी बीवी के साथ सेक्स करूंगा!
उसने कहा- लेकिन हम एक ही कमरे में करेंगे, अकेले में मुझे किसी और के साथ सेक्स करने में डर लगेगा!
मैंने कहा- हां, हम चारों एक ही कमरे में सेक्स करेंगे!
अब वह मान गई.
बस फिर क्या था … मैंने झट से अपने दोस्त को फोन लगाया और उससे कहा कि कल रात को आ जाना!
रात को करीब 7:30 बजे वे दोनों लोग जब हमारे घर आए तो मैंने दरवाजा खोला और वे अन्दर आ गए.
अन्दर आते ही उसकी बीवी राखी मेरे पास बैठ गई.
हम सबने हंसी मजाक किया और एक दूसरे से सहज हो गए.
फिर हम सबने साथ में खाना खाया और सभी लोग आपस में बातें करने लगे.
रात को करीब 10:30 बजे मैंने कहा- क्या हम लोग बातें ही करते रहेंगे या जिस काम के लिए हम लोग आए हैं, वह काम भी करेंगे?
यह सुनकर मेरी बीवी शर्मा गई और उसकी बीवी भी शर्मा गई.
दोस्त ने कहा- भाई तू ही पहले शुरू कर!
मैंने उसकी बीवी का हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और उसके गाल का किस ले लिया.
उसने भी मेरी बीवी का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचा और किस करने लगा.
अब माहौल बनने लगा.
धीरे धीरे हम चारों उन्मादित होते गए और जल्द ही हम दोनों मर्दों ने दोनों औरतों के कपड़े उतार दिए.
वे दोनों बिल्कुल नंगी हो गईं.
कुछ देर बाद हमने अपने भी कपड़े खोल दिए.
मैंने देखा कि मेरे दोस्त का लंड काफी तगड़ा था.
उसका लंड मेरे लंड से थोड़ा सा ज्यादा मोटा जरूर था लेकिन लंबा नहीं था.
बस फिर क्या था … हम दोनों ने अपनी बीवियों की चूत चाटनी शुरू कर दी.
मैंने उसकी बीवी की चूत को चाटी, तो वह बहुत गीली हो चुकी थी.
उधर रोहण भी मेरी बीवी की चूत को चाट रहा था.
हम दोनों मस्ती में थे.
और क्या बताऊं यार … बहुत मजा आ रहा था.
हम दोनों की बीवियों की चूत चाटे जाने से उनके मुँह से कसमसाहट भरी आह आह की आवाज निकल रही थी.
फिर हम दोनों ने उनको खड़ा किया और मैंने रोहण की बीवी राखी से कहा- चलो लंड चूसो.
वह झट से मेरा लंड चूसने लगी.
उधर रोहण ने मेरी बीवी स्वाति से अपना लंड चुसवाना शुरू कर दिया.
उन दोनों महिलाओं ने हमारे लंड चूसना शुरू कर दिए.
मेरे लौड़े के टट्टे सहलाती हुई राखी मुझे बड़ा मजा दे रही थी.
राखी को देख कर मेरी बीवी स्वाति ने भी रोहण के टट्टों के साथ खेलना शुरू कर दिया था.
थोड़ी देर तक पूरी मस्ती से लंड चुसवाने के बाद में हम दोनों ने उन्हें डॉगी स्टाइल में कर दिया और पीछे से लंड पेल कर उनकी चुदाई चालू कर दी.
मैं राखी के दूध दबाते हुए जबरदस्त पेल रहा था उसकी मादक आवाजें मुझे जबरदस्त जोश दिला रही थीं.
ठीक उसी तरह स्वाति भी रोहण को अपनी चूत का मजा दे रही थी.
रोहण भी मेरी बीवी स्वाति के दूध मसलता हुआ उसे धकपेल चोद रहा था.
इसी तरह से चुदाई करते करते हमें बहुत देर हो गई.
फिर मैंने उसकी बीवी की टांग उठा कर कंधे पर रखीं और अपना लंड चूत में एकदम से धकेल दिया.
उसकी बीवी की चीख निकल गई.
उधर रोहण ने भी ऐसा ही किया.
उसने भी मेरी बीवी की टांग उठा कर लंड पेला तो मेरी बीवी मुझसे कहने लगी- आज तुमने मुझे इस कसाई से चूत मरवाने के लिए छोड़ दिया … आह रोहण धीरे चोद आह!
तो उसने कहा- क्यों ना भाई ऐसा हमारे साथ हो!
तो मैंने कहा- हां यार मैं तो कब से तैयार हूं, पर कोई मिलता ही नहीं!
उसने धीमी आवाज में कहा- क्यों ना मैं अपनी वाइफ राखी को मना कर देखूं और तुम अपनी वाइफ को!
मैंने कहा- अगर ऐसा हो गया तो मजा आ जाएगा भाई!
हम दोनों उसके बाद इसी मुद्दे पर चर्च करते रहे और एक दूसरे की बीवी के बारे में बातें करते रहे.
कुछ देर बाद हम दोनों सो गए.
अब सुबह हो गई, हम लोग इंदौर पहुंच गए.
उधर पहुंचकर हम दोनों ने एक दूसरे के फोन नंबर ले लिए.
दो दिन बाद मेरे दोस्त का कॉल आया.
उसने कहा- क्यों भाई अपनी बीवी से बात की तुमने?
मैंने कहा- अभी नहीं की.
तो उसने कहा- मैंने अपनी बीवी से बात की थी और वह मान गई है. अब तू भी अपनी बीवी से बात कर ले. अगर वह भी मान जाए तो हम लोग कल ही सेक्स के लिए आ जाएंगे.
मैंने ओके कहा.
बाद में मैंने अपनी बीवी से इस बारे में बात की तो उसने साफ मना कर दिया कि वह ऐसा नहीं करेगी.
फरात को जब मैं उसकी चुदाई कर रहा था तो उसने मुझसे कहा- तुम दिन में क्या बोल रहे थे? मैं तुम्हें ऐसा सेक्स नहीं करने दूंगी!
मैंने उसे चोदते हुए कहा- बेबी बहुत मजा आता है ऐसा करने में … लाइफ में इंजॉय करना चाहिए … खुल कर जियो यार … तुम एक बार करके देखोगी तो तुम्हें बहुत मजा आएगा.
फिर मैंने उसे बीवी अदला-बदली की चुदाई वाली वीडियो भी दिखाई और कहानी भी पढ़ाई.
अब उसके मन में कुछ विचार आया.
वह मुझसे बोली- मैं किसी और के साथ सेक्स करूंगी तो तुम्हें बुरा नहीं लगेगा?
मैंने कहा- मुझे बुरा नहीं लगेगा, मैं भी तो उसकी बीवी के साथ सेक्स करूंगा!
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मैंने कहा- हां, हम चारों एक ही कमरे में सेक्स करेंगे!
अब वह मान गई.
बस फिर क्या था … मैंने झट से अपने दोस्त को फोन लगाया और उससे कहा कि कल रात को आ जाना!
रात को करीब 7:30 बजे वे दोनों लोग जब हमारे घर आए तो मैंने दरवाजा खोला और वे अन्दर आ गए.
अन्दर आते ही उसकी बीवी राखी मेरे पास बैठ गई.
हम सबने हंसी मजाक किया और एक दूसरे से सहज हो गए.
फिर हम सबने साथ में खाना खाया और सभी लोग आपस में बातें करने लगे.
रात को करीब 10:30 बजे मैंने कहा- क्या हम लोग बातें ही करते रहेंगे या जिस काम के लिए हम लोग आए हैं, वह काम भी करेंगे?
यह सुनकर मेरी बीवी शर्मा गई और उसकी बीवी भी शर्मा गई.
दोस्त ने कहा- भाई तू ही पहले शुरू कर!
मैंने उसकी बीवी का हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और उसके गाल का किस ले लिया.
उसने भी मेरी बीवी का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचा और किस करने लगा.
अब माहौल बनने लगा.
धीरे धीरे हम चारों उन्मादित होते गए और जल्द ही हम दोनों मर्दों ने दोनों औरतों के कपड़े उतार दिए.
वे दोनों बिल्कुल नंगी हो गईं.
कुछ देर बाद हमने अपने भी कपड़े खोल दिए.
मैंने देखा कि मेरे दोस्त का लंड काफी तगड़ा था.
उसका लंड मेरे लंड से थोड़ा सा ज्यादा मोटा जरूर था लेकिन लंबा नहीं था.
बस फिर क्या था … हम दोनों ने अपनी बीवियों की चूत चाटनी शुरू कर दी.
मैंने उसकी बीवी की चूत को चाटी, तो वह बहुत गीली हो चुकी थी.
उधर रोहण भी मेरी बीवी की चूत को चाट रहा था.
हम दोनों मस्ती में थे.
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फिर हम दोनों ने उनको खड़ा किया और मैंने रोहण की बीवी राखी से कहा- चलो लंड चूसो.
वह झट से मेरा लंड चूसने लगी.
उधर रोहण ने मेरी बीवी स्वाति से अपना लंड चुसवाना शुरू कर दिया.
उन दोनों महिलाओं ने हमारे लंड चूसना शुरू कर दिए.
मेरे लौड़े के टट्टे सहलाती हुई राखी मुझे बड़ा मजा दे रही थी.
राखी को देख कर मेरी बीवी स्वाति ने भी रोहण के टट्टों के साथ खेलना शुरू कर दिया था.
थोड़ी देर तक पूरी मस्ती से लंड चुसवाने के बाद में हम दोनों ने उन्हें डॉगी स्टाइल में कर दिया और पीछे से लंड पेल कर उनकी चुदाई चालू कर दी.
मैं राखी के दूध दबाते हुए जबरदस्त पेल रहा था उसकी मादक आवाजें मुझे जबरदस्त जोश दिला रही थीं.
ठीक उसी तरह स्वाति भी रोहण को अपनी चूत का मजा दे रही थी.
रोहण भी मेरी बीवी स्वाति के दूध मसलता हुआ उसे धकपेल चोद रहा था.
इसी तरह से चुदाई करते करते हमें बहुत देर हो गई.
फिर मैंने उसकी बीवी की टांग उठा कर कंधे पर रखीं और अपना लंड चूत में एकदम से धकेल दिया.
उसकी बीवी की चीख निकल गई.
उधर रोहण ने भी ऐसा ही किया.
उसने भी मेरी बीवी की टांग उठा कर लंड पेला तो मेरी बीवी मुझसे कहने लगी- आज तुमने मुझे इस कसाई से चूत मरवाने के लिए छोड़ दिया … आह रोहण धीरे चोद आह!
मैंने स्वाति से कहा- कुछ नहीं होगा साली …. तुम दोनों रंडियों मजे से छुवा रही हो और फालतू की बकचोदी कर रही हो … चलो राखी, अब तुम मेरे लंड की सवारी करो!
वह मेरे लौड़े पर आ गई और मुझे अपने दूध पिलाती हुई मस्ती से मेरे लंड पर कूदने लगी.
स्वाति भी रोहण के लंड पर डिस्को करने लगी.
वे दोनों मस्ती में चुदने लगीं.
एक लंबी चुदाई के बाद हम दोनों मर्द झड़ गए और थोड़ी देर आराम करने लगे.
रात को बारह बज गए थे, तब फिर से चुदाई होने लगी.
इस तरह से सुबह होते हम चारों ने चार बार चुदाई का मजा लिए और वे लोग सुबह सुबह ही अपने घर चले गए.
फिर एक दिन रोहण का कॉल मुझे आया.
उसने मुझसे कहा- मेरा एक और दोस्त है, वह भी हमारे साथ मिलकर सेक्स करना चाहता है.
मैंने कहा- हां चलो ठीक है, उसको भी बुला लो. तीनों मिलकर मजा करेंगे.
अगले ही दिन रोहण और राखी, अपने दोस्त शफीक और उसकी बीवी जैनब को लेकर हमारे घर आ गए.
मैंने उस आदमी को देखा, वह काफी हट्टा-कट्टा था.
शरीर में उसकी बीवी भी काफी भरी हुई थी और बहुत मस्त माल लग रही थी.
शफीक कहने लगा- मेरी बीवी जैनब को दोनों ही एक साथ चोदो और मैं तुम दोनों की बीवियों को अकेला ही चोद दूंगा.
शफीक मेरी बीवी को चोदने के लिए ज्यादा उतावला हो रहा था.
वह बोल रहा था- पहले मैं तुम्हारी बीवियों को अपनी बहन समझ कर चोद दूंगा.
मैंने कहा- तुम्हें जो करना है, कर लो लेकिन आराम से करना.
अब हम तीनों जोड़े सेक्स के लिए तैयार हो गए.
हम सबने अपने अपने कपड़े उतारे और एक दूसरे का लंड देखने लगे.
उस साले शफीक का लंड बहुत मोटा और बड़ा था.
उसके पाइप जैसे लंड को देखकर मेरी मेरी बीवी डर गई और कहने लगी- इससे मैं नहीं चुद पाऊंगी.
वह कहने लगा- मान जाओ बहन … थोड़ा दर्द होगा. उसके बाद में मजा ही मजा है.
जब उसने स्वाति को बहन कहा तो वह मान गई.
शफीक ने पहले मेरी बीवी स्वाति से कहा- बहन, तू मेरा लंड चूस ले!
मेरी बीवी उसका लंड चूसने लगी और उसे मोटे लंड से बहुत मजा आने लगा.
शफीक मेरी बीवी के गले तक लंड उतार रहा था तो स्वाति सही से सांस नहीं ले पा रही थी.
फिर शफीक मेरी बीवी की चूत में उंगली डालकर चाटने लगा तो उसकी चूत काफी चिकनी हो गई थी.
अब वह अपनी खुरदुरी जीभ को मेरी बीवी की चूत की दीवारों से रगड़ रगड़ कर उसे मजा देने लगा था.
मेरी बीवी बहुत कामुक हो गई थी और वह सिसियाती हुई आएं बाएं बकने लगी थी- आह साले शफीक मेरे भाई, साले भोसड़ी के क्या मस्त चूस रहा है आह साले और चूस ले अपनी बहन की चूत को आह बहुत मजा आ रहा है.
स्वाति के मुँह से इस तरह की गालियां सुनकर मैं बहुत उत्तेजित हो गया था.
शफीक भी कहने लगा- आह साली स्वाति … तेरे जैसी अनेक लड़कियों को अपनी बहन बना कर चोद चुका हूँ. तू फिक्र मत कर … आज से तेरी चूत मेरे लौड़े की गुलाम हो जाएगी.
फिर शफीक ने मेरी बीवी की दोनों टांगें हवा में ऊपर उठाकर अपने लंड को उसकी रस रिसाती चूत पर रखा और सुपारे से चूत की फाँकों को रगड़ने लगा.
स्वाति की मदमस्त आहें और कराहें कमरे के माहौल को निरंतर गर्म कर रही थीं.
थोड़ी देर बाद शफीक ने अपना मोटा लंड मेरी बीवी की चूत में घुसेड़ना चालू कर दिया.
मेरी बीवी की चूत शफीक के मोटे लौड़े से चिरने लगी और वह चिल्लाने लगी- आह मादरचोद रुक जा … मेरी चूत फट जाएगी!
लेकिन शफीक अब मानने वाला नहीं था.
उसने अपना आधा लंड मेरी बीवी की चूत में ठांस दिया.
मेरी बीवी की तो जैसे सांसें ही रुक गई थीं, उसका कंठ रुँध गया था.
बस फिर क्या था … शफीक ने एक झटके से पूरा लंड अन्दर डाल दिया और वह थोड़ी देर के लिए रुक गया.
मेरी बीवी की हालत खराब होने लगी थी.
मैंने शफ़ीक से कुछ कहने के लिए उसके कंधे पर हाथ रखा.
तो वह बोला- चिंता मत करो … मैंने बहुतेरी चूतें इसी तरह से फाड़ी हैं.
कुछ देर बाद मेरी बीवी की कराहें पुनः निकलने लगी और वह मेरी तरफ कातर भाव से देखने लगी.
उधर शफीक ने अपने लौड़े को हिलाना शुरू कर दिया और वह अपने लंड को थोड़ा थोड़ा अन्दर बाहर करने लगा.
मेरी बीवी की चूत से खून निकलने लगा था.
शफीक लगातार चुदाई करता गया.
कुछ मिनट की चुदाई के बाद मेरी बीवी स्वाति को उसके लंड से चुदने में मजा आने लगा तो शफीक ने उसके दूध दबाए और अपने लंड उसकी चूत से निकाल कर स्वाति को अलग कर दिया.
फिर उसने रोहण की बीवी राखी को अपने नीचे लिया और उसकी चुदाई करना शुरू कर दी.
शफीक ने मेरी बीवी स्वाति की तरह रोहण की बीवी राखी की चूत भी फाड़ डाली.
साले ने उसकी बीवी की चूत को भी भोसड़ा बना दिया था.
मगर हम दोनों की बीवियाँ उसके मोंटे लंड की फैन बन गई थीं.
बस फिर क्या था उसने दोनों की बीवियों को पलंग के किनारे चूत फैला कर लेटा दिया और बारी बारी से वह दोनों की चूत में लंड पेलने लगा.
इधर हम दोनों ने उसकी बीवी जैनब की चुदाई एक साथ उसके दोनों छेदों में लंड पेल कर की.
उस देसी रंडी की डबल चुदाई हुई.
वह मेरे लौड़े पर आ गई और मुझे अपने दूध पिलाती हुई मस्ती से मेरे लंड पर कूदने लगी.
स्वाति भी रोहण के लंड पर डिस्को करने लगी.
वे दोनों मस्ती में चुदने लगीं.
एक लंबी चुदाई के बाद हम दोनों मर्द झड़ गए और थोड़ी देर आराम करने लगे.
रात को बारह बज गए थे, तब फिर से चुदाई होने लगी.
इस तरह से सुबह होते हम चारों ने चार बार चुदाई का मजा लिए और वे लोग सुबह सुबह ही अपने घर चले गए.
फिर एक दिन रोहण का कॉल मुझे आया.
उसने मुझसे कहा- मेरा एक और दोस्त है, वह भी हमारे साथ मिलकर सेक्स करना चाहता है.
मैंने कहा- हां चलो ठीक है, उसको भी बुला लो. तीनों मिलकर मजा करेंगे.
अगले ही दिन रोहण और राखी, अपने दोस्त शफीक और उसकी बीवी जैनब को लेकर हमारे घर आ गए.
मैंने उस आदमी को देखा, वह काफी हट्टा-कट्टा था.
शरीर में उसकी बीवी भी काफी भरी हुई थी और बहुत मस्त माल लग रही थी.
शफीक कहने लगा- मेरी बीवी जैनब को दोनों ही एक साथ चोदो और मैं तुम दोनों की बीवियों को अकेला ही चोद दूंगा.
शफीक मेरी बीवी को चोदने के लिए ज्यादा उतावला हो रहा था.
वह बोल रहा था- पहले मैं तुम्हारी बीवियों को अपनी बहन समझ कर चोद दूंगा.
मैंने कहा- तुम्हें जो करना है, कर लो लेकिन आराम से करना.
अब हम तीनों जोड़े सेक्स के लिए तैयार हो गए.
हम सबने अपने अपने कपड़े उतारे और एक दूसरे का लंड देखने लगे.
उस साले शफीक का लंड बहुत मोटा और बड़ा था.
उसके पाइप जैसे लंड को देखकर मेरी मेरी बीवी डर गई और कहने लगी- इससे मैं नहीं चुद पाऊंगी.
वह कहने लगा- मान जाओ बहन … थोड़ा दर्द होगा. उसके बाद में मजा ही मजा है.
जब उसने स्वाति को बहन कहा तो वह मान गई.
शफीक ने पहले मेरी बीवी स्वाति से कहा- बहन, तू मेरा लंड चूस ले!
मेरी बीवी उसका लंड चूसने लगी और उसे मोटे लंड से बहुत मजा आने लगा.
शफीक मेरी बीवी के गले तक लंड उतार रहा था तो स्वाति सही से सांस नहीं ले पा रही थी.
फिर शफीक मेरी बीवी की चूत में उंगली डालकर चाटने लगा तो उसकी चूत काफी चिकनी हो गई थी.
अब वह अपनी खुरदुरी जीभ को मेरी बीवी की चूत की दीवारों से रगड़ रगड़ कर उसे मजा देने लगा था.
मेरी बीवी बहुत कामुक हो गई थी और वह सिसियाती हुई आएं बाएं बकने लगी थी- आह साले शफीक मेरे भाई, साले भोसड़ी के क्या मस्त चूस रहा है आह साले और चूस ले अपनी बहन की चूत को आह बहुत मजा आ रहा है.
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शफीक भी कहने लगा- आह साली स्वाति … तेरे जैसी अनेक लड़कियों को अपनी बहन बना कर चोद चुका हूँ. तू फिक्र मत कर … आज से तेरी चूत मेरे लौड़े की गुलाम हो जाएगी.
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थोड़ी देर बाद शफीक ने अपना मोटा लंड मेरी बीवी की चूत में घुसेड़ना चालू कर दिया.
मेरी बीवी की चूत शफीक के मोटे लौड़े से चिरने लगी और वह चिल्लाने लगी- आह मादरचोद रुक जा … मेरी चूत फट जाएगी!
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मेरी बीवी की हालत खराब होने लगी थी.
मैंने शफ़ीक से कुछ कहने के लिए उसके कंधे पर हाथ रखा.
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कुछ देर बाद मेरी बीवी की कराहें पुनः निकलने लगी और वह मेरी तरफ कातर भाव से देखने लगी.
उधर शफीक ने अपने लौड़े को हिलाना शुरू कर दिया और वह अपने लंड को थोड़ा थोड़ा अन्दर बाहर करने लगा.
मेरी बीवी की चूत से खून निकलने लगा था.
शफीक लगातार चुदाई करता गया.
कुछ मिनट की चुदाई के बाद मेरी बीवी स्वाति को उसके लंड से चुदने में मजा आने लगा तो शफीक ने उसके दूध दबाए और अपने लंड उसकी चूत से निकाल कर स्वाति को अलग कर दिया.
फिर उसने रोहण की बीवी राखी को अपने नीचे लिया और उसकी चुदाई करना शुरू कर दी.
शफीक ने मेरी बीवी स्वाति की तरह रोहण की बीवी राखी की चूत भी फाड़ डाली.
साले ने उसकी बीवी की चूत को भी भोसड़ा बना दिया था.
मगर हम दोनों की बीवियाँ उसके मोंटे लंड की फैन बन गई थीं.
बस फिर क्या था उसने दोनों की बीवियों को पलंग के किनारे चूत फैला कर लेटा दिया और बारी बारी से वह दोनों की चूत में लंड पेलने लगा.
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उस देसी रंडी की डबल चुदाई हुई.
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वह भी पक्की रांड की तरह हम दोनों के लंड से चुदने के मजे ले रही थी.
उसकी चुदाई में भी हमें बहुत मजा आया.
साली की बहुत बड़ी बड़ी चूचियां थीं तो हम दोनों शफीक की बीवी जैनब की एक एक चूची से खेल रहे थे.
करीब चार घंटा तक चुदाई का खेल चला जिसमें शफीक ने हम दोनों की बीवियों को अपनी बहन बना कर जबरदस्त पेला और उनकी चूत को भोसड़े में तबदील कर दिया.
दोस्तो, अभी यह ग्रुप सेक्स वाली चुदाई की कहानी में बहुत रस लिखना बाकी है.
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पति के बेस्ट फ्रेंड ने मौके का फायदा उठा के चोदा
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सेक्स प्ले विद ब्यूटीफुल भाभी का मजा मेरे पति के ख़ास दोस्त ने मेरे साथ किया. एक रात मुझे उनके घर में रुकना था पर सोने की जगह की तंगी के कारण मैं अपने
पति के दोस्त के साथ सो गयी.
दोस्तो, मेरा नाम सुशीला है. मेरी उम्र 28 साल है।
मेरी शादी मेरे घर वालों ने 20 की उम्र में ही करा दी थी।
मेरे पति का नाम रवि है.
रवि एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं और महीनों महीनों के लिए घर से बाहर रहते हैं।
आज मैं आपके समक्ष एक ऐसी कहानी लाई हूँ जिसे पढ़कर आप लोग अपने हाथों को अपने कंट्रोल में नहीं रख पाएंगे।
यह कहानी मेरे और मेरे पति के बचपन के दोस्त के साथ हुई घटना पर आधारित है।
मैं आपको अपने बारे में बता दूँ कि मेरा रंग एकदम गोरा है और मेरा 36-32-40 का फिगर बहुत ही कातिलाना है.
ऐसा मेरा नहीं मेरे चाहने वालों का कहना है.
रूप रंग की बात खत्म करके सीधे सेक्स प्ले विद ब्यूटीफुल भाभी कहानी पर आती हूँ.
उस दिन मैं अपनी साड़ी लपेट चुकी थी और बालों को आखिरी स्वरूप दे रही थी कि तभी सासु माँ की आवाज़ आयी- तैयार हुई या नहीं? सब लोग आ चुके होंगे. ज्यादा देर नहीं करते अब!
मैं तुरंत कंघा नीचे रखते हुए बोली- हो गया बस!
और कमरे से बाहर निकल गयी।
सासु जी तैयार थी पड़ोसी के यहाँ एक रात्रि जागरण में जाने के लिए।
मैंने तुरंत कमरे को ताला लगाया और सासुजी के साथ पैदल घर से निकल पड़ी।
सासु जी कुछ बोलती हुई चल रही थी पर मैं किन्ही और ख्यालों में थी.
पति को दूसरे शहर गए 4 महीने हो चुके थे और मुझे उनकी बहुत याद आ रही थी, विरह के कुछ महीने काट रही थी।
दस मिनट के बाद ही हम पड़ोस के मकान के सामने खड़े थे.
अंदर काफी चहल पहल थी, रात्रि जागरण का माहौल बन चुका था।
एक बड़े हाल में सारे पुरुष लोगों के लिए व्यवस्था थी।
वहाँ की मेरी भाभी, सहेलियां दूसरे थोड़े छोटे कमरे में थी अपने पीहर और घनिष्ट सहेलियों के साथ!
इसलिए थोड़े अभिवादन के बाद मैंने उनको डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा।
अंदर एक बड़े कमरे में सारी औरतें बैठी बातों में मशगूल थी.
हमारे आते ही उन्होंने स्वागत किया और हम लोग बैठ गए।
कुछ औरतें बातों में मग्न थी, कुछ ने सोने की तैयारी कर ली थी।
पता चला कि पूजा आरती का कार्यक्रम सुबह 5 बजे होने वाला है।
मैं अपने पुराने दिनों और विचारों में खो गयी और अब मध्य रात्रि होने वाली थी.
अब तक सारी औरतें और पुरुष सो चुके थे।
शायद सुबह 5 बजे उठने की तैयारी में!
मगर मेरी आँखों में नींद नहीं थी, भीड़ भरा माहौल देख कर मेरी नींद वैसे भी जा चुकी थी।
मैं कमरे से बाहर लघु शंका के बहाने किसी तरह औरतों के पाँव बचाते हुए बाहर निकली।
तभी सामने मोहित दिखाई दिया, जिसका यह घर था।
एक हंसमुख और मुखर स्वभाव का युवक मेरे पति का हम उम्र!
जब भी किसी फंक्शन में जाता … अपनी बातों से वह समां बाँध लेता।
मुझे ऐसे व्यक्तित्व हमेशा आकर्षित करते हैं।
पिछली बार जब कुछ महीने अपने पति से दूर थी तब जब भी वह मिलता, मेरी कुशलक्षेम जरुर पूछता और मदद के लिए पूछता।
मगर कभी उसे मदद का मौका नहीं दिया।
मुझे देखते ही उसने हँसते हुए सवाल दाग दिया कि मेरे पति कब आने वाले हैं।
मुझे भी पक्का पता नहीं था पर बोल दिया- कुछ और महीने लगेंगे।
फिर उसने पूछा कि मैं अब तक सोई क्यों नहीं जबकि सारे लोग सो चुके थे।
उसने मुझे सुबह 5 बजे के प्रोग्राम के बारे में बताया।
मैंने उसे समझाया- इस भीड़ में मैं नहीं सो सकती।
उसको मुझ पर दया आयी और कुछ सोचने लगा।
उसकी इस उधेड़बुन को देखते हुए मैंने एक सवाल दाग दिया- आप अब तक क्यों नहीं सोये?
उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान तैर गयी और हाथ में पकड़ी कम्बल को थोड़ा उठाते हुए बोला कि उसने अपने सोने का एक विशेष प्रबंध किया है … घर की छत पर!
मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ और पूछा- छत पर तो बहुत मच्छर होंगे. और सुबह होने तक ठण्ड भी बढ़ जाएगी।
वह मेरे सवालों के जवाब के साथ तुरंत तैयार था।
उसने बताया कि उसने एक मच्छरदानी का इंतज़ाम पहले से कर लिया है और ठण्ड के लिए कम्बल लेने ही आया था।
यह कम्बल भी उसने किसी और सोते हुए व्यक्ति के सिरहाने से निकाल कर लिया है।
मैं उसकी इस शरारत पर खिलखिला पड़ी।
मेरे चेहरे पर हंसी देख कर उसको अच्छा लगा और मुझे मदद के रास्ते सोचने लगा।
उसकी चुदाई में भी हमें बहुत मजा आया.
साली की बहुत बड़ी बड़ी चूचियां थीं तो हम दोनों शफीक की बीवी जैनब की एक एक चूची से खेल रहे थे.
करीब चार घंटा तक चुदाई का खेल चला जिसमें शफीक ने हम दोनों की बीवियों को अपनी बहन बना कर जबरदस्त पेला और उनकी चूत को भोसड़े में तबदील कर दिया.
दोस्तो, अभी यह ग्रुप सेक्स वाली चुदाई की कहानी में बहुत रस लिखना बाकी है.
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पति के दोस्त के साथ सो गयी.
दोस्तो, मेरा नाम सुशीला है. मेरी उम्र 28 साल है।
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मेरे पति का नाम रवि है.
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आज मैं आपके समक्ष एक ऐसी कहानी लाई हूँ जिसे पढ़कर आप लोग अपने हाथों को अपने कंट्रोल में नहीं रख पाएंगे।
यह कहानी मेरे और मेरे पति के बचपन के दोस्त के साथ हुई घटना पर आधारित है।
मैं आपको अपने बारे में बता दूँ कि मेरा रंग एकदम गोरा है और मेरा 36-32-40 का फिगर बहुत ही कातिलाना है.
ऐसा मेरा नहीं मेरे चाहने वालों का कहना है.
रूप रंग की बात खत्म करके सीधे सेक्स प्ले विद ब्यूटीफुल भाभी कहानी पर आती हूँ.
उस दिन मैं अपनी साड़ी लपेट चुकी थी और बालों को आखिरी स्वरूप दे रही थी कि तभी सासु माँ की आवाज़ आयी- तैयार हुई या नहीं? सब लोग आ चुके होंगे. ज्यादा देर नहीं करते अब!
मैं तुरंत कंघा नीचे रखते हुए बोली- हो गया बस!
और कमरे से बाहर निकल गयी।
सासु जी तैयार थी पड़ोसी के यहाँ एक रात्रि जागरण में जाने के लिए।
मैंने तुरंत कमरे को ताला लगाया और सासुजी के साथ पैदल घर से निकल पड़ी।
सासु जी कुछ बोलती हुई चल रही थी पर मैं किन्ही और ख्यालों में थी.
पति को दूसरे शहर गए 4 महीने हो चुके थे और मुझे उनकी बहुत याद आ रही थी, विरह के कुछ महीने काट रही थी।
दस मिनट के बाद ही हम पड़ोस के मकान के सामने खड़े थे.
अंदर काफी चहल पहल थी, रात्रि जागरण का माहौल बन चुका था।
एक बड़े हाल में सारे पुरुष लोगों के लिए व्यवस्था थी।
वहाँ की मेरी भाभी, सहेलियां दूसरे थोड़े छोटे कमरे में थी अपने पीहर और घनिष्ट सहेलियों के साथ!
इसलिए थोड़े अभिवादन के बाद मैंने उनको डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा।
अंदर एक बड़े कमरे में सारी औरतें बैठी बातों में मशगूल थी.
हमारे आते ही उन्होंने स्वागत किया और हम लोग बैठ गए।
कुछ औरतें बातों में मग्न थी, कुछ ने सोने की तैयारी कर ली थी।
पता चला कि पूजा आरती का कार्यक्रम सुबह 5 बजे होने वाला है।
मैं अपने पुराने दिनों और विचारों में खो गयी और अब मध्य रात्रि होने वाली थी.
अब तक सारी औरतें और पुरुष सो चुके थे।
शायद सुबह 5 बजे उठने की तैयारी में!
मगर मेरी आँखों में नींद नहीं थी, भीड़ भरा माहौल देख कर मेरी नींद वैसे भी जा चुकी थी।
मैं कमरे से बाहर लघु शंका के बहाने किसी तरह औरतों के पाँव बचाते हुए बाहर निकली।
तभी सामने मोहित दिखाई दिया, जिसका यह घर था।
एक हंसमुख और मुखर स्वभाव का युवक मेरे पति का हम उम्र!
जब भी किसी फंक्शन में जाता … अपनी बातों से वह समां बाँध लेता।
मुझे ऐसे व्यक्तित्व हमेशा आकर्षित करते हैं।
पिछली बार जब कुछ महीने अपने पति से दूर थी तब जब भी वह मिलता, मेरी कुशलक्षेम जरुर पूछता और मदद के लिए पूछता।
मगर कभी उसे मदद का मौका नहीं दिया।
मुझे देखते ही उसने हँसते हुए सवाल दाग दिया कि मेरे पति कब आने वाले हैं।
मुझे भी पक्का पता नहीं था पर बोल दिया- कुछ और महीने लगेंगे।
फिर उसने पूछा कि मैं अब तक सोई क्यों नहीं जबकि सारे लोग सो चुके थे।
उसने मुझे सुबह 5 बजे के प्रोग्राम के बारे में बताया।
मैंने उसे समझाया- इस भीड़ में मैं नहीं सो सकती।
उसको मुझ पर दया आयी और कुछ सोचने लगा।
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उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान तैर गयी और हाथ में पकड़ी कम्बल को थोड़ा उठाते हुए बोला कि उसने अपने सोने का एक विशेष प्रबंध किया है … घर की छत पर!
मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ और पूछा- छत पर तो बहुत मच्छर होंगे. और सुबह होने तक ठण्ड भी बढ़ जाएगी।
वह मेरे सवालों के जवाब के साथ तुरंत तैयार था।
उसने बताया कि उसने एक मच्छरदानी का इंतज़ाम पहले से कर लिया है और ठण्ड के लिए कम्बल लेने ही आया था।
यह कम्बल भी उसने किसी और सोते हुए व्यक्ति के सिरहाने से निकाल कर लिया है।
मैं उसकी इस शरारत पर खिलखिला पड़ी।
मेरे चेहरे पर हंसी देख कर उसको अच्छा लगा और मुझे मदद के रास्ते सोचने लगा।
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मैंने मजाक करते हुए कहा- आपके लिए अच्छा है कि विशेष इंतज़ाम है, पर हमारा क्या?
यह बात उसकी दिल को लगी।
उसने मुझे सुझाव दिया कि मैं छत पर मच्छरदानी में सो जाऊं।
मुझे लगा कि वह मजाक कर रहा है.
पर वह इस बात पर गंभीर था।
उसने अब और ज्यादा आग्रह किया तो मैंने उसको टालने के लिए बोल दिया- फिर आप कहाँ सोएंगे?
उसने बोला कि वह नीचे ही सो जायेगा पुरुषों के कमरे में!
मैंने उसका प्रस्ताव यह कहते हुए ठुकरा दिया- यह नहीं हो सकता, सारी महिलाये यहाँ हैं, मैं वहां अकेली जाऊंगी. और किसी को पता लगा तो अच्छा नहीं होगा।
उसने बताया कि छत पर कोई नहीं हैं और मैं छत पर लगे दरवाज़े को अंदर से बंद करके सो सकती हूँ. किसी को पता नहीं चलेगा और सुबह सबके जागने तक वापिस नीचे आ सकती हूँ।
मुझे कुछ और नहीं सूझा तो बहाना मार दिया- मैं वहाँ अकेले नहीं सो सकती, डर लगता है।
कुछ सोचने के बाद वह बोला कि वह मेरे साथ सो जायेगा।
उसके यह कहते ही एक चुप्पी सी छा गयी।
उसे अहसास हुआ कि उसने क्या बोल दिया.
और तुरंत अपनी बात सुधारते हुए बोला कि वह पास में ही दूसरा बिस्तर लगा कर सो जाएगा।
मैंने तुरंत मना कर दिया कि मेरी वजह से मैं उसको मच्छरों का भोजन नहीं बना सकती।
वह अपने आप को लाचार महसूस करने लगा।
हमेशा मदद के लिए ऑफर करने वाला आज मदद मांगने पर नहीं कर पा रहा था।
उसने अपना आखिरी प्रस्ताव रखा- मच्छरदानी पलंग के साइज की हैं जिसमें दो लोग आसानी से सो सकते हैं. और अगर मुझे आपत्ति ना हो तो हम दोनों वहां सो सकते हैं।
मेरे हां कहने का तो कोई सवाल ही पैदा नहीं होता था.
पर अब उसने एक ब्रह्मास्त्र छोड़ा कि अगर मैं उस पर थोड़ा सा भी भरोसा करती हूँ तो हां कर दूँ।
अब मैं बुरी तरह फंस चुकी थी।
न हां कह सकती और न ही ना कह सकती।
एक तरफ कुआं दूसरी तरफ खाई।
ऐसा नहीं था कि मैं उस पर भरोसा नहीं करती।
परन्तु यह समाज … अगर किसी को पता चल गया तो कुछ ना होते हुए भी मुझे बहुत कुछ होने वाला था।
अपने पति को मैं क्या जवाब दूंगी।
मैं हां या ना कुछ कह पाती … उसके पहले ही उसने मुझे निर्देश दिया कि मैं अपनी सासुजी को बोल दूँ कि मैं दूसरे कमरे में भाभी (उसकी पत्नी) के साथ सो रही हूँ. और फिर मैं छत पर आ जाऊं … वह मेरा इंतज़ार करेगा।
यह कहते हुए वह सीढ़ियाँ चढ़ते हुए चला गया।
मेरे पाँव अब जम गए.
फिर मैं औरतों वाले कमरे की तरफ गयी.
सासुजी दूसरे कोने में सो रही थी और उन तक पहुंचने के लिए काफी लोगों को लांघ कर जाना था.
मैंने सासुजी की नींद ख़राब करना ठीक नहीं समझा।
मैं मुड़ कर सीढ़ियों की तरफ भारी कदमों से बढ़ने लगी।
किसी तरह बेमन से मैं छत पर पहुंची.
वहाँ वो मेरा इंतज़ार कर रहा था।
उसने छत के दरवाज़े पर कुण्डी लगाते हुए मुझे आश्वासन दिया- चिंता ना करो, किसी को पता नहीं चलेगा।
उसने अच्छे से गद्दा लगा रखा था और मच्छरदानी के अंदर दो तकिये लगे हुए थे।
कहीं से उसने मेरे लिए दूसरे तकिये का इंतज़ाम कर लिया था … शायद फिर किसी के सिर के नीचे से खींच कर!
अब हम दोनों एक ही बिस्तर पर आस पास लेटे आसमान को निहार रहे थे।
चांदनी रात थी, आसमान साफ़ था तारों से भरा हुआ!
बहुत खुशनुमा रात का मौसम था।
हल्की सी हवा चल रही थी पर ठण्ड शुरू नहीं हुई थी इसलिए कम्बल एक कोने में पड़ा था।
थोड़ी देर हम ऐसे ही बातें करते रहे.
फिर थोड़ी ख़ामोशी … और पता ही नहीं चला कब मेरी आँख लग गयी।
अचानक मैंने अपने सीने पर कुछ हलचल महसूस की और मेरी नींद टूट गयी.
पर आँखें अभी भी बंद ही थी।
मैंने महसूस किया कि कुछ उंगलियां मेरे ब्लाउज के हुक को खोल रही थी।
मैं डर से काँप उठी … क्या यह उसी की हरकत है?
अब मैं क्या कर सकती थी … अगर चिल्लाई तो लोग पूछेंगे कि मैं यहाँ अकेले क्यों आयी और मुझ पर ही शक करेंगे।
मैंने आँखें बंद किये हुए ही कुछ इंतज़ार करना ठीक समझा।
तब तक सारे हुक खुल चुके थे और मेरे खुले ब्लाउज के अंदर कुछ हवा प्रवेश कर गयी।
मैं फिर से कांप उठी और एक अनिष्ट की आशंका से गिर गयी।
अब मैं इंतज़ार करने लगी कि आगे क्या गलत होने वाला है।
अब उसका हाथ मेरे पेट पर था.
पूरे 4 महीने बाद किसी पुरुष ने मुझे छुआ था, पूरे शरीर में एक तरंग सी दौड़ गयी।
कुछ मजा भी आ रहा था पर डर ज्यादा था।
उसने अब मेरे पेटीकोट से साड़ी की पटली निकालने की कोशिश की जिसमें वह कामयाब नहीं हुआ.
शायद मेरे जाग जाने के डर से उसने ज्यादा ताकत नहीं लगाई।
मैंने चैन की सांस ली।
अब उसने मेरा ब्लाउज सामने से और खुला कर दिया.
शायद वह मेरे स्तन देखना चाहता था.
पर कसी हुई ब्रा की वजह से कुछ हो नहीं पाया।
ब्रा का हुक पीठ पर था और मैं पीठ के बल ही सोई थी.
इस बात की मुझे ख़ुशी थी।
वह चाहते हुए भी ब्रा नहीं खोल सकता था।
कुछ मिनट ऐसे ही निकल गए और वह मेरी कमर और ऊपरी सीने पर ऐसे ही हाथ मलता रहा.
यह बात उसकी दिल को लगी।
उसने मुझे सुझाव दिया कि मैं छत पर मच्छरदानी में सो जाऊं।
मुझे लगा कि वह मजाक कर रहा है.
पर वह इस बात पर गंभीर था।
उसने अब और ज्यादा आग्रह किया तो मैंने उसको टालने के लिए बोल दिया- फिर आप कहाँ सोएंगे?
उसने बोला कि वह नीचे ही सो जायेगा पुरुषों के कमरे में!
मैंने उसका प्रस्ताव यह कहते हुए ठुकरा दिया- यह नहीं हो सकता, सारी महिलाये यहाँ हैं, मैं वहां अकेली जाऊंगी. और किसी को पता लगा तो अच्छा नहीं होगा।
उसने बताया कि छत पर कोई नहीं हैं और मैं छत पर लगे दरवाज़े को अंदर से बंद करके सो सकती हूँ. किसी को पता नहीं चलेगा और सुबह सबके जागने तक वापिस नीचे आ सकती हूँ।
मुझे कुछ और नहीं सूझा तो बहाना मार दिया- मैं वहाँ अकेले नहीं सो सकती, डर लगता है।
कुछ सोचने के बाद वह बोला कि वह मेरे साथ सो जायेगा।
उसके यह कहते ही एक चुप्पी सी छा गयी।
उसे अहसास हुआ कि उसने क्या बोल दिया.
और तुरंत अपनी बात सुधारते हुए बोला कि वह पास में ही दूसरा बिस्तर लगा कर सो जाएगा।
मैंने तुरंत मना कर दिया कि मेरी वजह से मैं उसको मच्छरों का भोजन नहीं बना सकती।
वह अपने आप को लाचार महसूस करने लगा।
हमेशा मदद के लिए ऑफर करने वाला आज मदद मांगने पर नहीं कर पा रहा था।
उसने अपना आखिरी प्रस्ताव रखा- मच्छरदानी पलंग के साइज की हैं जिसमें दो लोग आसानी से सो सकते हैं. और अगर मुझे आपत्ति ना हो तो हम दोनों वहां सो सकते हैं।
मेरे हां कहने का तो कोई सवाल ही पैदा नहीं होता था.
पर अब उसने एक ब्रह्मास्त्र छोड़ा कि अगर मैं उस पर थोड़ा सा भी भरोसा करती हूँ तो हां कर दूँ।
अब मैं बुरी तरह फंस चुकी थी।
न हां कह सकती और न ही ना कह सकती।
एक तरफ कुआं दूसरी तरफ खाई।
ऐसा नहीं था कि मैं उस पर भरोसा नहीं करती।
परन्तु यह समाज … अगर किसी को पता चल गया तो कुछ ना होते हुए भी मुझे बहुत कुछ होने वाला था।
अपने पति को मैं क्या जवाब दूंगी।
मैं हां या ना कुछ कह पाती … उसके पहले ही उसने मुझे निर्देश दिया कि मैं अपनी सासुजी को बोल दूँ कि मैं दूसरे कमरे में भाभी (उसकी पत्नी) के साथ सो रही हूँ. और फिर मैं छत पर आ जाऊं … वह मेरा इंतज़ार करेगा।
यह कहते हुए वह सीढ़ियाँ चढ़ते हुए चला गया।
मेरे पाँव अब जम गए.
फिर मैं औरतों वाले कमरे की तरफ गयी.
सासुजी दूसरे कोने में सो रही थी और उन तक पहुंचने के लिए काफी लोगों को लांघ कर जाना था.
मैंने सासुजी की नींद ख़राब करना ठीक नहीं समझा।
मैं मुड़ कर सीढ़ियों की तरफ भारी कदमों से बढ़ने लगी।
किसी तरह बेमन से मैं छत पर पहुंची.
वहाँ वो मेरा इंतज़ार कर रहा था।
उसने छत के दरवाज़े पर कुण्डी लगाते हुए मुझे आश्वासन दिया- चिंता ना करो, किसी को पता नहीं चलेगा।
उसने अच्छे से गद्दा लगा रखा था और मच्छरदानी के अंदर दो तकिये लगे हुए थे।
कहीं से उसने मेरे लिए दूसरे तकिये का इंतज़ाम कर लिया था … शायद फिर किसी के सिर के नीचे से खींच कर!
अब हम दोनों एक ही बिस्तर पर आस पास लेटे आसमान को निहार रहे थे।
चांदनी रात थी, आसमान साफ़ था तारों से भरा हुआ!
बहुत खुशनुमा रात का मौसम था।
हल्की सी हवा चल रही थी पर ठण्ड शुरू नहीं हुई थी इसलिए कम्बल एक कोने में पड़ा था।
थोड़ी देर हम ऐसे ही बातें करते रहे.
फिर थोड़ी ख़ामोशी … और पता ही नहीं चला कब मेरी आँख लग गयी।
अचानक मैंने अपने सीने पर कुछ हलचल महसूस की और मेरी नींद टूट गयी.
पर आँखें अभी भी बंद ही थी।
मैंने महसूस किया कि कुछ उंगलियां मेरे ब्लाउज के हुक को खोल रही थी।
मैं डर से काँप उठी … क्या यह उसी की हरकत है?
अब मैं क्या कर सकती थी … अगर चिल्लाई तो लोग पूछेंगे कि मैं यहाँ अकेले क्यों आयी और मुझ पर ही शक करेंगे।
मैंने आँखें बंद किये हुए ही कुछ इंतज़ार करना ठीक समझा।
तब तक सारे हुक खुल चुके थे और मेरे खुले ब्लाउज के अंदर कुछ हवा प्रवेश कर गयी।
मैं फिर से कांप उठी और एक अनिष्ट की आशंका से गिर गयी।
अब मैं इंतज़ार करने लगी कि आगे क्या गलत होने वाला है।
अब उसका हाथ मेरे पेट पर था.
पूरे 4 महीने बाद किसी पुरुष ने मुझे छुआ था, पूरे शरीर में एक तरंग सी दौड़ गयी।
कुछ मजा भी आ रहा था पर डर ज्यादा था।
उसने अब मेरे पेटीकोट से साड़ी की पटली निकालने की कोशिश की जिसमें वह कामयाब नहीं हुआ.
शायद मेरे जाग जाने के डर से उसने ज्यादा ताकत नहीं लगाई।
मैंने चैन की सांस ली।
अब उसने मेरा ब्लाउज सामने से और खुला कर दिया.
शायद वह मेरे स्तन देखना चाहता था.
पर कसी हुई ब्रा की वजह से कुछ हो नहीं पाया।
ब्रा का हुक पीठ पर था और मैं पीठ के बल ही सोई थी.
इस बात की मुझे ख़ुशी थी।
वह चाहते हुए भी ब्रा नहीं खोल सकता था।
कुछ मिनट ऐसे ही निकल गए और वह मेरी कमर और ऊपरी सीने पर ऐसे ही हाथ मलता रहा.
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फिर जब उसे अहसास हुआ कि कुछ होने वाला नहीं तो उसने मेरे ब्लाउज के हुक वापिस लगा दिए।
मैंने चैन की लम्बी सांस ली और थोड़ी देर बाद कब फिर आँख लग गयी पता ही नहीं चला।
मेरी नींद में दूसरी बार व्यवधान आया.
इस बार मैं करवट लेकर उसकी और पीठ करके सोई हुई थी इसलिए आँखें खोली.
अभी भी गहरी चांदनी रात थी और नींद खुलने का कारण वही था।
पर थोड़ी देर हो चुकी थी, ब्लाउज के सारे हुक खुल चुके थे।
फिर से मेरे अंदर डर की लहर कौंध गयी कि इस बार कैसे बचूंगी क्योंकि मैं करवट लेकर सोई थी और ब्रा का हुक उसकी तरफ था।
कुछ सोच पाती, उसके पहले ही खट की आवाज़ से ब्रा का हुक खुल चुका था और अचानक सीने पर कस के बाँधा हुआ प्रोटेक्शन ढीला हो चुका था।
मैंने एक साये को अपने चेहरे की तरफ आते महसूस किया और तुरंत अपनी आँखें बंद कर ली।
उसके हाथों ने अब मेरी ब्रा, मेरे शरीर के एक महत्पूर्ण अंग से उठा दिया और हवा की लहरें अब मेरे स्तनों को छू रही थी।
उस साये में मैंने महसूस किया कि अब वह मेरे शरीर के उस भाग को घूर रहा हैं जिसे देखने की असफल कोशिश उसने कुछ देर पहले ही की थी.
पर अब वो कामयाब हो चुका था।
मैं अपने आप को कोसने लगी कि क्यों मैंने करवट ली।
और उससे भी पहले क्यों मैं उसको ना नहीं बोल पाई छत पर आने के लिए।
पर अब क्या हो सकता था … या अब भी बहुत कुछ रोका जा सकता था।
अगले कुछ क्षणों के बाद उसने एक हाथ से मेरे स्तन को दबोच लिया था.
मैं अंदर से पूरी तरह सिहर गयी थी।
पर मैं कुछ बोलने या करने की हिम्मत नहीं जुटा पायी और यह प्रार्थना करने लगी कि इससे बुरा कुछ न हो.
या शायद अंदर ही अंदर कहीं से यह चाहती थी कि 4 महीने के एकांतवास को टूटने दिया जाये।
शायद मैं कुछ निर्णय नहीं ले पा रही थी और खुद को भाग्य के हाथों छोड़ दिया था।
कुछ देर ऐसे खेलने के बाद उसके हाथ फिर मेरी साड़ी की पटली की तरफ बढ़े और कुछ सेकंड की जद्दोजहद के बाद पटली पेटीकोट के बाहर थी और अगले कुछ मिनटों में मेरी पूरी साड़ी पेटीकोट से अलग हो चुकी थी।
अब मैं एक अबला की नारी तरह पड़ी थी जिसके शरीर पर सिर्फ पेटीकोट था, ऊपर के वस्त्र सामने से खुले थे।
फिर से एक खट की आवाज़ हुई और मेरे पेटीकोट का नाड़ा खुल चूका था और उसने मेरा पेटीकोट कमर से नीचे खिसकाना शुरू कर दिया।
मैंने आंखें खोली तो पेटीकोट पूरा निकल कर मेरी आँखों के सामने पड़ा चिढ़ा रहा था।
और कुछ सोचने के पहले ही मेरे नीचे के अंगवस्त्र भी निकल कर पेटीकोट का साथ पड़े थे।
अब मुझे अहसास हो चुका था कि बचने का कोई रास्ता नहीं हैं और आत्मसमर्पण कर देना चाहिए या तुरंत उठ कर फटकार लगा देनी चाहिये कि उसकी यह हिम्मत कैसे हुई।
फिर किसी डर की आशंका से या काफी समय से शरीर की जरूरत पूरी नहीं होने की वजह से मैं चुपचाप लेटी रही।
मेरे नग्न शरीर को देख कर अब शायद उसका अपने आप पर नियंत्रण नहीं रहा था और पीछे से उसका शरीर मुझसे चिपका हुआ था और रह रह कर ऊपर नीचे रगड़ रहा था।
उसका एक हाथ मेरे कमर, कूल्हों और स्तनों पर फिर रहा था।
फिर उसने अपना शरीर मुझसे अलग कर लिया.
मुझे लगा कि उसका इरादा बदल गया लगता है और मैं सुरक्षित हूं.
पर मैं गलत थी।
फिर कुछ कपडे निकलने की आवाज़ आयी।
अब मैंने अपने पीछे के निचले हिस्से में एक गर्म बदन का स्पर्श महसूस किया.
मुझे समझते देर नहीं लगी कि उसने क्या किया है।
अब वह पूरा नग्न मुझसे पीछे से फिर चिपक गया।
इस बार शायद कुछ ज्यादा ही जोर से, शायद नग्नावस्था में उसकी इन्द्रियां और सक्रिय हो गयी थी।
उसका लचीला अंग मेरे पुट्ठों को छू गया।
अब शायद कहीं न कहीं मैं अपने आप को तैयार कर चुकी थी एक अनपेक्षित मिलन के लिए।
उसका शरीर बराबर मुझे पीछे से रगड़ रहा था।
मैं महसूस कर पा रही थी कि उसका लचीला अंग धीरे धीरे कठोर होता जा रहा था।
अब वह जोर जोर से मेरे स्तनों को दबाते हुए कुचलने लगा.
पर अब मुझे बुरा नहीं लग रहा था।
कुछ देर बार उसने हाथ स्तनों से हटा लिया।
उसका कठोर अंग अब मेरे दोनों टांगों के बीच खोजी कुत्ते तरह कुछ ढूंढ रहा था।
शायद अंदर प्रवेश का मार्ग … पर मिल नहीं रहा था।
एक दो बार वह मेरे योनि द्वार के आस पास भी पंहुचा था।
थोड़े प्रयासों के बाद ही उसे मेरे शरीर पर गीली जमीन मिल गयी और वह रुक गया।
उसका लिंग अब मेरे योनि द्वार पर था।
मेरी साँसें जैसे रुक गयी।
एक भटकते हुए प्यासे राहगीर के होठों पर जैसे किसी ने पानी का गिलास रख दिया था।
उसके लिंग ने थोड़ी ऊपर नीचे हरकत की और थोड़ा सा योनि में अंदर गड़ गया।
मैंने आँखें जोर से बंद कर ली … अगले क्षणों में जो होने वाला था, उसकी तैयारी में!
पति के अलावा पहली बार कोई पुरुष मेरी योनि में प्रवेश करने वाला था।
इतनी देर की रगड़ से मेरे अंदर पहले ही थोड़ा गीला हो चुका था।
मैंने चैन की लम्बी सांस ली और थोड़ी देर बाद कब फिर आँख लग गयी पता ही नहीं चला।
मेरी नींद में दूसरी बार व्यवधान आया.
इस बार मैं करवट लेकर उसकी और पीठ करके सोई हुई थी इसलिए आँखें खोली.
अभी भी गहरी चांदनी रात थी और नींद खुलने का कारण वही था।
पर थोड़ी देर हो चुकी थी, ब्लाउज के सारे हुक खुल चुके थे।
फिर से मेरे अंदर डर की लहर कौंध गयी कि इस बार कैसे बचूंगी क्योंकि मैं करवट लेकर सोई थी और ब्रा का हुक उसकी तरफ था।
कुछ सोच पाती, उसके पहले ही खट की आवाज़ से ब्रा का हुक खुल चुका था और अचानक सीने पर कस के बाँधा हुआ प्रोटेक्शन ढीला हो चुका था।
मैंने एक साये को अपने चेहरे की तरफ आते महसूस किया और तुरंत अपनी आँखें बंद कर ली।
उसके हाथों ने अब मेरी ब्रा, मेरे शरीर के एक महत्पूर्ण अंग से उठा दिया और हवा की लहरें अब मेरे स्तनों को छू रही थी।
उस साये में मैंने महसूस किया कि अब वह मेरे शरीर के उस भाग को घूर रहा हैं जिसे देखने की असफल कोशिश उसने कुछ देर पहले ही की थी.
पर अब वो कामयाब हो चुका था।
मैं अपने आप को कोसने लगी कि क्यों मैंने करवट ली।
और उससे भी पहले क्यों मैं उसको ना नहीं बोल पाई छत पर आने के लिए।
पर अब क्या हो सकता था … या अब भी बहुत कुछ रोका जा सकता था।
अगले कुछ क्षणों के बाद उसने एक हाथ से मेरे स्तन को दबोच लिया था.
मैं अंदर से पूरी तरह सिहर गयी थी।
पर मैं कुछ बोलने या करने की हिम्मत नहीं जुटा पायी और यह प्रार्थना करने लगी कि इससे बुरा कुछ न हो.
या शायद अंदर ही अंदर कहीं से यह चाहती थी कि 4 महीने के एकांतवास को टूटने दिया जाये।
शायद मैं कुछ निर्णय नहीं ले पा रही थी और खुद को भाग्य के हाथों छोड़ दिया था।
कुछ देर ऐसे खेलने के बाद उसके हाथ फिर मेरी साड़ी की पटली की तरफ बढ़े और कुछ सेकंड की जद्दोजहद के बाद पटली पेटीकोट के बाहर थी और अगले कुछ मिनटों में मेरी पूरी साड़ी पेटीकोट से अलग हो चुकी थी।
अब मैं एक अबला की नारी तरह पड़ी थी जिसके शरीर पर सिर्फ पेटीकोट था, ऊपर के वस्त्र सामने से खुले थे।
फिर से एक खट की आवाज़ हुई और मेरे पेटीकोट का नाड़ा खुल चूका था और उसने मेरा पेटीकोट कमर से नीचे खिसकाना शुरू कर दिया।
मैंने आंखें खोली तो पेटीकोट पूरा निकल कर मेरी आँखों के सामने पड़ा चिढ़ा रहा था।
और कुछ सोचने के पहले ही मेरे नीचे के अंगवस्त्र भी निकल कर पेटीकोट का साथ पड़े थे।
अब मुझे अहसास हो चुका था कि बचने का कोई रास्ता नहीं हैं और आत्मसमर्पण कर देना चाहिए या तुरंत उठ कर फटकार लगा देनी चाहिये कि उसकी यह हिम्मत कैसे हुई।
फिर किसी डर की आशंका से या काफी समय से शरीर की जरूरत पूरी नहीं होने की वजह से मैं चुपचाप लेटी रही।
मेरे नग्न शरीर को देख कर अब शायद उसका अपने आप पर नियंत्रण नहीं रहा था और पीछे से उसका शरीर मुझसे चिपका हुआ था और रह रह कर ऊपर नीचे रगड़ रहा था।
उसका एक हाथ मेरे कमर, कूल्हों और स्तनों पर फिर रहा था।
फिर उसने अपना शरीर मुझसे अलग कर लिया.
मुझे लगा कि उसका इरादा बदल गया लगता है और मैं सुरक्षित हूं.
पर मैं गलत थी।
फिर कुछ कपडे निकलने की आवाज़ आयी।
अब मैंने अपने पीछे के निचले हिस्से में एक गर्म बदन का स्पर्श महसूस किया.
मुझे समझते देर नहीं लगी कि उसने क्या किया है।
अब वह पूरा नग्न मुझसे पीछे से फिर चिपक गया।
इस बार शायद कुछ ज्यादा ही जोर से, शायद नग्नावस्था में उसकी इन्द्रियां और सक्रिय हो गयी थी।
उसका लचीला अंग मेरे पुट्ठों को छू गया।
अब शायद कहीं न कहीं मैं अपने आप को तैयार कर चुकी थी एक अनपेक्षित मिलन के लिए।
उसका शरीर बराबर मुझे पीछे से रगड़ रहा था।
मैं महसूस कर पा रही थी कि उसका लचीला अंग धीरे धीरे कठोर होता जा रहा था।
अब वह जोर जोर से मेरे स्तनों को दबाते हुए कुचलने लगा.
पर अब मुझे बुरा नहीं लग रहा था।
कुछ देर बार उसने हाथ स्तनों से हटा लिया।
उसका कठोर अंग अब मेरे दोनों टांगों के बीच खोजी कुत्ते तरह कुछ ढूंढ रहा था।
शायद अंदर प्रवेश का मार्ग … पर मिल नहीं रहा था।
एक दो बार वह मेरे योनि द्वार के आस पास भी पंहुचा था।
थोड़े प्रयासों के बाद ही उसे मेरे शरीर पर गीली जमीन मिल गयी और वह रुक गया।
उसका लिंग अब मेरे योनि द्वार पर था।
मेरी साँसें जैसे रुक गयी।
एक भटकते हुए प्यासे राहगीर के होठों पर जैसे किसी ने पानी का गिलास रख दिया था।
उसके लिंग ने थोड़ी ऊपर नीचे हरकत की और थोड़ा सा योनि में अंदर गड़ गया।
मैंने आँखें जोर से बंद कर ली … अगले क्षणों में जो होने वाला था, उसकी तैयारी में!
पति के अलावा पहली बार कोई पुरुष मेरी योनि में प्रवेश करने वाला था।
इतनी देर की रगड़ से मेरे अंदर पहले ही थोड़ा गीला हो चुका था।
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मक्खन की तरह धीरे धीरे उसका लिंग फिसलते हुए अंदर आता गया और उसके मुँह से सिसकी निकलती गयी।
मेरा हाथ चेहरे के पास ही था, मैंने अपने होठों पर हाथ रख कर अपना मुँह बंद कर दिया।
उसने अपने हाथ से एक बार फिर मेरा स्तन दबोच लिया।
मैं अपने काफी अंदर तक उसके कठोर लिंग को महसूस कर पा रही थी।
जितनी धीमी गति से वो अंदर गया, उसी धीमी गति से उसने फिर उसको आधे से भी ज्यादा बाहर निकाला।
अंदर और बाहर निकलते समय उसका लिंग मेरी योनि की दीवारों को रगड़ते हुए जा रहा था और मेरा पूरा शरीर अंदर ही अंदर कम्पन कर रहा था।
दो सेकंड के विराम के बाद एक बार फिर उसी धीमी गति से वो दीवार रगड़ता हुआ अंदर गया।
जितना अंदर वो गया, उससे मुझे अहसास हो गया उसकी लम्बाई कितनी ज्यादा रही होगी.
और जिस तरह वो मेरी दीवारों से रगड़ खा रहा था, इतनी मोटाई मैंने तो पहले महसूस नहीं की थी।
काफी समय तक वह ऐसे ही मालगाड़ी की रफ़्तार से धीरे धीरे अंदर जाता, थोड़ा रुकता और बाहर आता … फिर थोड़ा रूककर अंदर जाता।
हर बार अंदर जाते ही उसकी एक लम्बी आह निकलती।
पता ही नहीं चला कब उसकी मालगाड़ी फ़ास्ट ट्रेन में बदली और कब राजधानी एक्सप्रेस बन गयी।
उसका लिंग अंदर योनि में एकत्रित पानी को तेजी से चीरता हुआ आ जा रहा था जिससे छपाक छपाक की आवाज़ आने लगी थी।
उसके झटकों की गति बढ़ने के साथ छपाक की आवाजें काफी तेज हो गयी थी।
अब वह तेजी से बार बार झटके मारते हुए अंदर बाहर हो रहा था और मेरी उत्तेजना भी बढ़ती जा रही थी।
उसके मुँह से अब आहें निकलने लगी और समय के साथ तेज होती गयी।
मुझे डर लगा कही कोई सुन न ले।
रात के सन्नाटे में ऐसी आवाज़ें ज्यादा ही गूंजती हैं।
पर मैं मन ही मन चुपके से उसका आनन्द भी लेती जा रही थी।
कुछ ही देर में न चाहते हुए भी मैं भी उस आनंद में भीग गयी।
मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी आवाज़ अभी तक दबा के रखी हुई थी जो अब आपे से बाहर होता जा रहा था।
मेरे होंठों के बीच से एक आवाज़ छूट ही गयी।
इसके पहले कि मैं अपने हाथों से ओर जोर से मुँह को दबाती, उसने सुन लिया और डरने की बजाय मेरी आह को मेरी मौन स्वीकृति मान कर उसने कुछ जोर के झटके मुझे मारे जिससे मेरी हल्की चीख निकलने लगी।
अब कोई फायदा नहीं था आवाज़ दबाने का … जिस चीज़ के लिए मैं कुछ महीने से तड़प रही थी, वह मिली तो भी इस तरह से … और वह भी किस व्यक्ति से, यह सपने में भी नहीं सोचा था।
उसने अब मेरे ब्लाउज और ब्रा को पूरी तरह मेरे शरीर से अलग कर दिया था।
अब मेरे शरीर पर एक भी वस्त्र नहीं था और ना ही उसके!
पर अब हमें कपड़ों की परवाह नहीं थी, हम दोनों नंगे इन यौनानन्द के क्षणों को पूरी तरह सफल बनाने में जुट गए।
हम दोनों की आहें एक ही सुर में छपाकों की आवाज़ से ताल मिला रही थी।
इतनी देर करने के बाद भी उसकी शक्ति क्षीण नहीं हुई थी और उसी गति से उसके झटके निर्बाध जारी थे।
मैं अपनी योनि के बाहर कुछ तरल पदार्थ रिसता हुआ महसूस कर पा रही थी जो उसके लिंग के बाहर आते वक़्त साथ बाहर आ रहा था।
अब मैं अपने चरम की तरफ बढ़ती जा रही थी और दुआ कर रही थी कि मुझसे पहले कहीं वह छूट ना जाये।
पर शायद इन मर्दों को दूसरी औरतों के साथ करते वक़्त ज्यादा ही ताकत मिल जाती है।
मेरा नशा अब सर तक चढ़ने लगा था और जैसे चक्कर आने लगे.
मैं स्वयं को निश्तेज महसूस करने लगी थी.
ये चरम के नजदीक पहुंचने के संकेत थे।
गैर मर्द के साथ मस्ती करते हुए मैंने अपनी टांगें अब खोल दी, जिससे बाहर छलके पानी से हवा टकराई और एक ठंडक का अहसास हुआ।
टांगें खुलने से उसको और भी बड़ा रास्ता मिला और उसने अपना लिंग और गहराई में डाल दिया।
शायद एक इंच और गहरा अंदर उतर गया था वो!
अगले कुछ मिनट बहुत कीमती थे.
उसने जिस गहराई से एक के बाद एक तेज झटके मारे, मैं पूरा छूट गयी.
मेरी छोटी छोटी आहें चरम पर आते ही एक लम्बी चीख में तबदील हो गयी.
और उसके बाद मेरी कुछ हल्की चीखें निकली और मैंने अपना चरम प्राप्त कर लिया।
मेरे चरम से उसका उत्साहवर्धन हुआ और वह भूखे भेड़िये की तरह आवाजें निकालते हुए झटकों पर झटके मारता रहा।
मेरे स्तनों को वह अब बुरी तरह से मौसम्बी की तरह निचोड़ रहा था।
फिर एक झटका उसका इतनी गहराई में उतरा कि लिंग बाहर नहीं निकला और वहीं पड़ा हुआ कुलबुला कर फुफकारने लगा।
मैंने अपने अंदर एक गर्म लावा महसूस किया.
उसने सारा पानी अंदर छोड़ दिया था।
वह कुछ देर तक ऐसे ही निढाल पड़ा रहा।
सारी प्रतिक्रियायें शांत हो चुकी थी जैसे एक तूफ़ान के बाद की शांति।
अब भी वह मुझे झकड़े हुए था
💦💦💦💦💦💦
ट्रेन में मिली बुर्के वाली भाभी की होटल में चुदाई
💦💦💦💦💦💦
हॉट भाभी पोर्न कहानी में मुंबई की लोकल ट्रेन में मेरी दोस्ती पर्दे वाली एक भाभी से हुई. हमने होटल में मिलकर चुदाई का मजा लेने का प्रोग्राम बनाया.
आप सभी को मेरा नमस्कार.
मैं जतिन हूँ मुंबई से!
मेरा हाथ चेहरे के पास ही था, मैंने अपने होठों पर हाथ रख कर अपना मुँह बंद कर दिया।
उसने अपने हाथ से एक बार फिर मेरा स्तन दबोच लिया।
मैं अपने काफी अंदर तक उसके कठोर लिंग को महसूस कर पा रही थी।
जितनी धीमी गति से वो अंदर गया, उसी धीमी गति से उसने फिर उसको आधे से भी ज्यादा बाहर निकाला।
अंदर और बाहर निकलते समय उसका लिंग मेरी योनि की दीवारों को रगड़ते हुए जा रहा था और मेरा पूरा शरीर अंदर ही अंदर कम्पन कर रहा था।
दो सेकंड के विराम के बाद एक बार फिर उसी धीमी गति से वो दीवार रगड़ता हुआ अंदर गया।
जितना अंदर वो गया, उससे मुझे अहसास हो गया उसकी लम्बाई कितनी ज्यादा रही होगी.
और जिस तरह वो मेरी दीवारों से रगड़ खा रहा था, इतनी मोटाई मैंने तो पहले महसूस नहीं की थी।
काफी समय तक वह ऐसे ही मालगाड़ी की रफ़्तार से धीरे धीरे अंदर जाता, थोड़ा रुकता और बाहर आता … फिर थोड़ा रूककर अंदर जाता।
हर बार अंदर जाते ही उसकी एक लम्बी आह निकलती।
पता ही नहीं चला कब उसकी मालगाड़ी फ़ास्ट ट्रेन में बदली और कब राजधानी एक्सप्रेस बन गयी।
उसका लिंग अंदर योनि में एकत्रित पानी को तेजी से चीरता हुआ आ जा रहा था जिससे छपाक छपाक की आवाज़ आने लगी थी।
उसके झटकों की गति बढ़ने के साथ छपाक की आवाजें काफी तेज हो गयी थी।
अब वह तेजी से बार बार झटके मारते हुए अंदर बाहर हो रहा था और मेरी उत्तेजना भी बढ़ती जा रही थी।
उसके मुँह से अब आहें निकलने लगी और समय के साथ तेज होती गयी।
मुझे डर लगा कही कोई सुन न ले।
रात के सन्नाटे में ऐसी आवाज़ें ज्यादा ही गूंजती हैं।
पर मैं मन ही मन चुपके से उसका आनन्द भी लेती जा रही थी।
कुछ ही देर में न चाहते हुए भी मैं भी उस आनंद में भीग गयी।
मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी आवाज़ अभी तक दबा के रखी हुई थी जो अब आपे से बाहर होता जा रहा था।
मेरे होंठों के बीच से एक आवाज़ छूट ही गयी।
इसके पहले कि मैं अपने हाथों से ओर जोर से मुँह को दबाती, उसने सुन लिया और डरने की बजाय मेरी आह को मेरी मौन स्वीकृति मान कर उसने कुछ जोर के झटके मुझे मारे जिससे मेरी हल्की चीख निकलने लगी।
अब कोई फायदा नहीं था आवाज़ दबाने का … जिस चीज़ के लिए मैं कुछ महीने से तड़प रही थी, वह मिली तो भी इस तरह से … और वह भी किस व्यक्ति से, यह सपने में भी नहीं सोचा था।
उसने अब मेरे ब्लाउज और ब्रा को पूरी तरह मेरे शरीर से अलग कर दिया था।
अब मेरे शरीर पर एक भी वस्त्र नहीं था और ना ही उसके!
पर अब हमें कपड़ों की परवाह नहीं थी, हम दोनों नंगे इन यौनानन्द के क्षणों को पूरी तरह सफल बनाने में जुट गए।
हम दोनों की आहें एक ही सुर में छपाकों की आवाज़ से ताल मिला रही थी।
इतनी देर करने के बाद भी उसकी शक्ति क्षीण नहीं हुई थी और उसी गति से उसके झटके निर्बाध जारी थे।
मैं अपनी योनि के बाहर कुछ तरल पदार्थ रिसता हुआ महसूस कर पा रही थी जो उसके लिंग के बाहर आते वक़्त साथ बाहर आ रहा था।
अब मैं अपने चरम की तरफ बढ़ती जा रही थी और दुआ कर रही थी कि मुझसे पहले कहीं वह छूट ना जाये।
पर शायद इन मर्दों को दूसरी औरतों के साथ करते वक़्त ज्यादा ही ताकत मिल जाती है।
मेरा नशा अब सर तक चढ़ने लगा था और जैसे चक्कर आने लगे.
मैं स्वयं को निश्तेज महसूस करने लगी थी.
ये चरम के नजदीक पहुंचने के संकेत थे।
गैर मर्द के साथ मस्ती करते हुए मैंने अपनी टांगें अब खोल दी, जिससे बाहर छलके पानी से हवा टकराई और एक ठंडक का अहसास हुआ।
टांगें खुलने से उसको और भी बड़ा रास्ता मिला और उसने अपना लिंग और गहराई में डाल दिया।
शायद एक इंच और गहरा अंदर उतर गया था वो!
अगले कुछ मिनट बहुत कीमती थे.
उसने जिस गहराई से एक के बाद एक तेज झटके मारे, मैं पूरा छूट गयी.
मेरी छोटी छोटी आहें चरम पर आते ही एक लम्बी चीख में तबदील हो गयी.
और उसके बाद मेरी कुछ हल्की चीखें निकली और मैंने अपना चरम प्राप्त कर लिया।
मेरे चरम से उसका उत्साहवर्धन हुआ और वह भूखे भेड़िये की तरह आवाजें निकालते हुए झटकों पर झटके मारता रहा।
मेरे स्तनों को वह अब बुरी तरह से मौसम्बी की तरह निचोड़ रहा था।
फिर एक झटका उसका इतनी गहराई में उतरा कि लिंग बाहर नहीं निकला और वहीं पड़ा हुआ कुलबुला कर फुफकारने लगा।
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उसने सारा पानी अंदर छोड़ दिया था।
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अब भी वह मुझे झकड़े हुए था
💦💦💦💦💦💦
ट्रेन में मिली बुर्के वाली भाभी की होटल में चुदाई
💦💦💦💦💦💦
हॉट भाभी पोर्न कहानी में मुंबई की लोकल ट्रेन में मेरी दोस्ती पर्दे वाली एक भाभी से हुई. हमने होटल में मिलकर चुदाई का मजा लेने का प्रोग्राम बनाया.
आप सभी को मेरा नमस्कार.
मैं जतिन हूँ मुंबई से!
मेरे साथ कुछ दिन पहले की हुई सच्ची घटना है यह!
मैं उम्मीद करता हूं कि आपको बहुत पसंद आएगी.
मैं एक 5 फीट 8 इंच का नौजवान हूँ. मेरी उम्र 25 साल है.
दिखने में भी मैं काफी अच्छा हूँ.
मेरा लंड 7 इंच से ज्यादा बड़ा है और ये करीब 3 इंच मोटा है.
अब लड़के, लड़कियां, मर्द, औरतें और ख़ास कर भाभियां अभी से अपनी अंडरवियर में हाथ डाल लें.
यह करीब 3 महीने पहले की बात है.
मैं और मेरा एक दोस्त हम दोनों मुंबई के बस स्टैन्ड से लौट रहे थे.
करीब रात के एक बजे का समय था.
दादर से हम दोनों ने कल्याण के लिए लोकल ट्रेन से सफर करना शुरू किया.
कुछ देर बाद कुर्ला स्टेशन आया और एक खूबसूरत सी भाभी ने ट्रेन में अपना कदम रखा.
वह बुर्का पहन कर चढ़ी ही थी कि उसकी नजरें मेरी नजरों से टकरा गईं क्योंकि उसने अपना नकाब हटाया हुआ था.
उसी पल मैंने एक क्यूट सी स्माइल पास करते हुए उन्हें सीट ऑफर की.
रात में ट्रेन में इतनी भीड़ नहीं थी.
वे मेरे करीब ही बैठ गईं.
वे एकदम चुप थीं.
पर उनसे ज्यादा देर चुप नहीं रहा गया.
उन्होंने मुझसे बात करनी शुरू करते हुए हैलो कहा.
मैंने भी उन्हें हैलो कहा.
उन्होंने पूछा- किधर जा रहे हो?
मैंने लंबी सांस भरते हुए कहा- जहां नसीब ले जाए!
वे हंस दीं और बोली- हुंअ … इंटरेस्टिंग पर्सन … क्या नाम है तुम्हारा!
मैंने बताते हुए कहा- आप को क्या लगता है कि मुझे देख कर आपको क्या नाम अच्छा लगेगा?
वे बोलीं- मतलब?
मैंने कहा- बंदे को आप जो भी नाम देना चाहें … मैं उसी को रख लूँगा.
भाभी फिर से हंस दीं.
फिर उन्होंने मुझसे मेरी पढ़ाई के बारे में पूछ लिया और इस तरह से हमारे बीच बातचीत होना शुरू हो गई.
बातों ही बातों में उन्होंने मुझे जॉब के लिए पूछ लिया.
मैंने कहां- हाँ करता तो हूँ, पर अभी मैं और अच्छी जॉब देख रहा हूँ.
उस पर उन्होंने मुझसे कहा- तुम अपना रेज़्यूमे मुझे मेल कर दो, मैं कुछ देखती हूँ.
यह कहते हुए भाभी ने अपनी मेल आईडी मुझे बता दी.
मैंने उसी वक्त उन्हें मेल सेंड करके अपना रेज़्यूमे भेज दिया.
फिर हमारा स्टेशन आया तो हम सब उतर गए.
फिर करीब एक घंटा बाद मैं अपने फ्रेंड को बस में बैठा कर अपने घर जा रहा था.
तभी एक अंजान नंबर से मुझे व्हाट्सैप पर मैसेज आया ‘हाय सन्नो हियर, अभी थोड़ी देर पहले मैंने तुम्हारा रेज़्यूमे देखा!’
यह पढ़ते ही मैं खुश हो गया कि भाभी ने अपना नाम बताते हुए मैसेज किया है.
मैं उनसे मैसेज पर ही बात करने लगा.
अब हम दोनों के बीच मस्ती की बातें होने लगीं.
मैंने उनका नंबर सेव कर लिया और हमारी बातें परवान चढ़ने लगीं.
कुछ दिन में ही हम दोनों एक दूसरे के प्रति आकर्षित होने लगे.
फोन पर भी हमारी बात होने लगी थी.
कभी कभी मिल भी लेते और मूवी आदि भी देखने चले जाते.
इस तरह से हमारे बीच थोड़ा थोड़ा रोमांस भी होने लगा था.
अब जल्दी ही हमारे बीच कुछ इस तरह की आग लग गई थी कि सिर्फ मिलने से नहीं बुझ रही थी.
इस बात को हम दोनों ही महसूस करने लगे थे.
एक रात छत पर भाभी और मैं फोन पर बात कर रहे थे.
हम दोनों ने मिलने का प्लान किया.
हमारे बीच यह तय हुआ कि हम दोनों किसी होटल में जाएंगे.
उसी रात हम दोनों आपस में बातें करने लगे कि कमरे में जाकर क्या करना है.
अब इस बात पर न तो भाभी ही कुछ कह रही थीं और न ही मैं कुछ कह रहा था कि कमरे में जाकर करना क्या है.
जबकि हम दोनों ही समझ रहे थे कि उधर हम दोनों को चुदाई करने का खुल कर मौका मिलेगा.
भाभी मेरी तरफ देख कर हंसने लगीं और मेरे मजे लेने लगीं- तो बताओ न उधर जाकर क्या करना है?
मैंने कहा- उधर आपको मैं जीवन में आनन्द प्राप्त करने का एक गूढ़ रहस्य बताऊंगा.
भाभी बोलीं- तो वह रहस्य तो तुम इधर फोन पर भी बता सकते हो?
मैंने कहा- नहीं, वह अकेले और एकांत वाली जगह में ही बताया जाता है!
भाभी ने फिर से चुटकी ली- तो इधर भी तो हम दोनों अकेले में ही हैं और इधर एकांत भी है!
मैंने दिमाग लगाया कि भाभी मेरी ले रही हैं. अब कुछ ऐसा करना पड़ेगा … जिससे भाभी खुल जाएं.
तो मैंने कहा- ओके … तो क्या आप उस रहस्य को जाने के लिए अभी तैयार हैं?
भाभी मुस्कुराईं और बोलीं- हाँ मगर पहले बताओ तो!
मैंने कहा- आपको उस रहस्य को जाने के लिए एक अनुष्ठान करना है और उस अनुष्ठान में आपको अपने सारे कपड़े उतारने पड़ेंगे … तो बताइए भाभी जी क्या आप अभी तैयार हैं?
भाभी हंस पड़ीं और बोलीं- तुम सच में बहुत चालू पुर्जा हो. चलो मैं समझ गई कि तुमको मेरे साथ क्या करना है!
अब मैंने डोर पकड़ ली और कहा- अच्छा तो बताइए कि आपको क्या समझ में आ गया है?
भाभी छूटते ही बोलीं- तुमको मुझे चोदना है … सीधे सीधे बोलो न यार!
मैंने उनके मुँह से चोदना शब्द सुना तो मैंने कहा- या यूं कहें कि आपको मेरे साथ चुदवाना है!
वे हो हो करके हंसने लगीं और हम दोनों के बीच सेक्स की बातें होने लगीं.
कुछ ही देर में हमारे बीच इतनी ज्यादा बेचैनी हो गई थी कि क्या ही बताऊं.
मैं उम्मीद करता हूं कि आपको बहुत पसंद आएगी.
मैं एक 5 फीट 8 इंच का नौजवान हूँ. मेरी उम्र 25 साल है.
दिखने में भी मैं काफी अच्छा हूँ.
मेरा लंड 7 इंच से ज्यादा बड़ा है और ये करीब 3 इंच मोटा है.
अब लड़के, लड़कियां, मर्द, औरतें और ख़ास कर भाभियां अभी से अपनी अंडरवियर में हाथ डाल लें.
यह करीब 3 महीने पहले की बात है.
मैं और मेरा एक दोस्त हम दोनों मुंबई के बस स्टैन्ड से लौट रहे थे.
करीब रात के एक बजे का समय था.
दादर से हम दोनों ने कल्याण के लिए लोकल ट्रेन से सफर करना शुरू किया.
कुछ देर बाद कुर्ला स्टेशन आया और एक खूबसूरत सी भाभी ने ट्रेन में अपना कदम रखा.
वह बुर्का पहन कर चढ़ी ही थी कि उसकी नजरें मेरी नजरों से टकरा गईं क्योंकि उसने अपना नकाब हटाया हुआ था.
उसी पल मैंने एक क्यूट सी स्माइल पास करते हुए उन्हें सीट ऑफर की.
रात में ट्रेन में इतनी भीड़ नहीं थी.
वे मेरे करीब ही बैठ गईं.
वे एकदम चुप थीं.
पर उनसे ज्यादा देर चुप नहीं रहा गया.
उन्होंने मुझसे बात करनी शुरू करते हुए हैलो कहा.
मैंने भी उन्हें हैलो कहा.
उन्होंने पूछा- किधर जा रहे हो?
मैंने लंबी सांस भरते हुए कहा- जहां नसीब ले जाए!
वे हंस दीं और बोली- हुंअ … इंटरेस्टिंग पर्सन … क्या नाम है तुम्हारा!
मैंने बताते हुए कहा- आप को क्या लगता है कि मुझे देख कर आपको क्या नाम अच्छा लगेगा?
वे बोलीं- मतलब?
मैंने कहा- बंदे को आप जो भी नाम देना चाहें … मैं उसी को रख लूँगा.
भाभी फिर से हंस दीं.
फिर उन्होंने मुझसे मेरी पढ़ाई के बारे में पूछ लिया और इस तरह से हमारे बीच बातचीत होना शुरू हो गई.
बातों ही बातों में उन्होंने मुझे जॉब के लिए पूछ लिया.
मैंने कहां- हाँ करता तो हूँ, पर अभी मैं और अच्छी जॉब देख रहा हूँ.
उस पर उन्होंने मुझसे कहा- तुम अपना रेज़्यूमे मुझे मेल कर दो, मैं कुछ देखती हूँ.
यह कहते हुए भाभी ने अपनी मेल आईडी मुझे बता दी.
मैंने उसी वक्त उन्हें मेल सेंड करके अपना रेज़्यूमे भेज दिया.
फिर हमारा स्टेशन आया तो हम सब उतर गए.
फिर करीब एक घंटा बाद मैं अपने फ्रेंड को बस में बैठा कर अपने घर जा रहा था.
तभी एक अंजान नंबर से मुझे व्हाट्सैप पर मैसेज आया ‘हाय सन्नो हियर, अभी थोड़ी देर पहले मैंने तुम्हारा रेज़्यूमे देखा!’
यह पढ़ते ही मैं खुश हो गया कि भाभी ने अपना नाम बताते हुए मैसेज किया है.
मैं उनसे मैसेज पर ही बात करने लगा.
अब हम दोनों के बीच मस्ती की बातें होने लगीं.
मैंने उनका नंबर सेव कर लिया और हमारी बातें परवान चढ़ने लगीं.
कुछ दिन में ही हम दोनों एक दूसरे के प्रति आकर्षित होने लगे.
फोन पर भी हमारी बात होने लगी थी.
कभी कभी मिल भी लेते और मूवी आदि भी देखने चले जाते.
इस तरह से हमारे बीच थोड़ा थोड़ा रोमांस भी होने लगा था.
अब जल्दी ही हमारे बीच कुछ इस तरह की आग लग गई थी कि सिर्फ मिलने से नहीं बुझ रही थी.
इस बात को हम दोनों ही महसूस करने लगे थे.
एक रात छत पर भाभी और मैं फोन पर बात कर रहे थे.
हम दोनों ने मिलने का प्लान किया.
हमारे बीच यह तय हुआ कि हम दोनों किसी होटल में जाएंगे.
उसी रात हम दोनों आपस में बातें करने लगे कि कमरे में जाकर क्या करना है.
अब इस बात पर न तो भाभी ही कुछ कह रही थीं और न ही मैं कुछ कह रहा था कि कमरे में जाकर करना क्या है.
जबकि हम दोनों ही समझ रहे थे कि उधर हम दोनों को चुदाई करने का खुल कर मौका मिलेगा.
भाभी मेरी तरफ देख कर हंसने लगीं और मेरे मजे लेने लगीं- तो बताओ न उधर जाकर क्या करना है?
मैंने कहा- उधर आपको मैं जीवन में आनन्द प्राप्त करने का एक गूढ़ रहस्य बताऊंगा.
भाभी बोलीं- तो वह रहस्य तो तुम इधर फोन पर भी बता सकते हो?
मैंने कहा- नहीं, वह अकेले और एकांत वाली जगह में ही बताया जाता है!
भाभी ने फिर से चुटकी ली- तो इधर भी तो हम दोनों अकेले में ही हैं और इधर एकांत भी है!
मैंने दिमाग लगाया कि भाभी मेरी ले रही हैं. अब कुछ ऐसा करना पड़ेगा … जिससे भाभी खुल जाएं.
तो मैंने कहा- ओके … तो क्या आप उस रहस्य को जाने के लिए अभी तैयार हैं?
भाभी मुस्कुराईं और बोलीं- हाँ मगर पहले बताओ तो!
मैंने कहा- आपको उस रहस्य को जाने के लिए एक अनुष्ठान करना है और उस अनुष्ठान में आपको अपने सारे कपड़े उतारने पड़ेंगे … तो बताइए भाभी जी क्या आप अभी तैयार हैं?
भाभी हंस पड़ीं और बोलीं- तुम सच में बहुत चालू पुर्जा हो. चलो मैं समझ गई कि तुमको मेरे साथ क्या करना है!
अब मैंने डोर पकड़ ली और कहा- अच्छा तो बताइए कि आपको क्या समझ में आ गया है?
भाभी छूटते ही बोलीं- तुमको मुझे चोदना है … सीधे सीधे बोलो न यार!
मैंने उनके मुँह से चोदना शब्द सुना तो मैंने कहा- या यूं कहें कि आपको मेरे साथ चुदवाना है!
वे हो हो करके हंसने लगीं और हम दोनों के बीच सेक्स की बातें होने लगीं.
कुछ ही देर में हमारे बीच इतनी ज्यादा बेचैनी हो गई थी कि क्या ही बताऊं.
उनमें से एक बात यह भी भाभी ने कही थी कि उन्हें हार्डकोर सेक्स बहुत पसंद है.
जब मैंने उनसे उसकी डिटेल में जानना चाहा तो उन्होंने वही सब बताया कि कोई शहद लगा कर चाटे या बेल्ट से मारे या मोम टपकाते हुए दूध चूसे. यह सब जानकर मैं मन ही मन प्लान बनाने लगा था कि भाभी को कैसे चोदना है.
फिर हम दोनों अलग हुए और सोने लगे.
मगर मुझे तो समझो नींद ही नहीं आ रही थी.
जैसे तैसे वह रात कटी और सवेरा हुआ.
मैंने अपने बैग में एक मोमबत्ती और लाइटर के साथ कुछ कंडोम के पैकेट रखे. फिर याद आया तो साथ में हनी और श्रीखंड भी ले लिया.
अब मैं स्टेशन पर पहुंच गया और भाभी के आने का इंतज़ार करने लगा.
कुछ ही देर में भाभी मस्त लाल रंग के चूड़ीदार सलवार कमीज में आती दिखाई दीं.
उन्होंने अपने बाल खुले रखे हुए थे.
होंठों पर लाल लिपस्टिक, हाथ में लेडी बैग टांग कर पेन्सिल हील्स पहने हुई आईं और मुस्कुराने लगीं.
मेरी तो उनके ऊपर से नजर ही नहीं हट रही थी.
कसम से भाभी आज कयामत लग रही थीं और आस पास खड़े सब लोग उन्हें ही घूरे जा रहे थे.
उनकी उठी हुई गोल गोल चूचियां और गांड ठुमकाने वाली उनकी कॅट वॉक पर तो मेरा दिल ही घायल हो गया था.
एक मन तो किया कि इन्हें अभी ही गोद में उठा कर शुरू हो जाऊं.
पर स्टेशन था, काफ़ी लोग थे. वैसा किया नहीं जा सकता था.
तभी हम हम दोनों होटल में पहुंचे और कमरे में जाते ही हम एक दूसरे पर भूखे जानवरों की तरह टूट पड़े.
मैं भाभी के खुले बालों में हाथ डाल कर लिप्स टू लिप्स किस करते हुए मजा लेने लगा.
भाभी के चूचों को मैं उनकी कमीज के ऊपर से ही सहला रहा था.
तभी अचानक से भाभी मुझसे अलग होकर बोलीं- एक मिनट रुको यार, मुझे कपड़ों में मजा नहीं आ रहा.
उन्होंने यह कहा तो मैंने उन्हें अपनी बांहों में खींचा और उनकी कमीज के पीछे लगे हुए हुक्स खोल दिए.
साथ ही भाभी की गर्दन पर किस करते हुए मैंने उनकी ड्रेस को खोलना चालू कर दिया था.
भाभी मेरे साथ रमण सुख का आनन्द लिए जा रही थीं.
मैंने उनके एक कान में अपनी नाक से गर्म सांस छोड़ते हुए उन्हें घुमाया और अपने सामने की ओर कर दिया.
आह भाभी के बड़े बड़े एकदम टाइट गुब्बारे उनकी पिंक कलर की ब्रा में कसे हुए दिखने लगे थे.
भाभी एकदम माल लग रही थीं.
तभी मैंने अपने हाथ उनके पीछे ले जाकर उनकी ब्रा का हुक भी खोल कर उसे निकाल दिया और उनके खड़े हो चुके कड़क गुलाबी चूचुक को किस करने लगा.
वे मानो एकदम से बिफर उठीं और अगले ही पल वे मेरी शर्ट के बटन्स खोलने लगीं.
हम दोनों किस भी किए जा रहे थे.
तब हम दोनों इतने जोश में थे कि कब मेरी छाती उनकी नंगी चूचियों से रगड़ने लगी, कुछ पता ही नहीं चला.
मैं भाभी की कमर पर किस करते हुए उनकी सलवार के नाड़े की तरफ बढ़ा और जल्दी से उनके नाड़े को ढीला करके उसे भी उतार दिया.
अब भाभी मेरे सामने एक नेट वाली पतली सी पैंटी में थीं और मैं भी अंडरवियर में रह गया था.
हम दोनों एक दूसरे हर अंग को पागलों की तरह चाट और चूस रहे थे.
हमारी कामुक सिसकारियां कमरे में एक मधुर संगीत बिखेर रही थीं.
‘आह … उउह …’
भाभी भी पूरी गर्म हो चुकी थीं और बार बार कह रही थीं- अब बस देर न करो … मुझे चोद दो जल्दी से आह!
मैंने झट से भाभी की पैंटी को खींच कर निकाला और उन्हें नंगी कर दिया.
आह क्या चिकनी गोरी चूत थी उनकी, ऐसी लग रही थी जैसे आज सुबह ही झांटों की सफाई की हो.
मैंने उनकी पैंटी को किस किया और उसको लंबी सांस लेकर सूंघ कर साइड में फेंक दिया.
फिर झट से अपने बैग से मधु निकाल कर उन्हें चटाया और उनकी चूत पर शहद की बोतल उड़ेल कर खूब सारा शहद चूत पर टपका दिया.
भाभी अपनी चूत पर ठंडे शहद का स्पर्श पाकर अचकचा उठीं और जब तक वे संभल पातीं कि मैंने उनकी चूत पर अपनी जीभ फेर दी.
भाभी एकदम से सिहर गईं और उनके कंठ से एक मीठी सी ‘आह मर गई’ निकल पड़ा.
मैं लगा रहा और उनकी चूत को चाटने लगा.
कभी चूत को चुम्मी करता, तो कभी चाट लेता.
उसी दौरान मैंने अपने हाथ में पकड़ी हुई शहद की शीशी को उनके एक दूध के निप्पल पर टपका दिया.
वे अब शहद का मजा समझ गई थीं तो अपनी उंगली से अपने निप्पल पर शहद मलने लगीं और मेरे हाथ से शहद की शीशी लेकर अपने दूसरे दूध के निप्पल पर लगाने लगीं.
फिर उन्होंने मेरे बाल पकड़ कर मुझे दूध चूसने का इशारा किया.
तो मैं भाभी के मम्मों पर आ गया.
अब कभी मैं उनके एक दूध के निप्पल पर लगा शहद चूसता, तो कभी दूसरे को चूसने लगता.
यूं ही खेल चलता रहा. चूत और चूचियों को मैंने छक कर चूसा.
मेरे ऐसे करने से भाभी अब तक दो बार झड़ चुकी थीं और वे पागलों की तरह मेरे लंड से चुदने के लिए मचल रही थीं- आह … अब चोद भी दो … प्लीज चोद दो!
मैं उन्हें तड़फाए जा रहा था क्योंकि प्यास जितनी गहरी हो, बुझाने में उतना मजा ज्यादा आता है.
जब मैंने उनसे उसकी डिटेल में जानना चाहा तो उन्होंने वही सब बताया कि कोई शहद लगा कर चाटे या बेल्ट से मारे या मोम टपकाते हुए दूध चूसे. यह सब जानकर मैं मन ही मन प्लान बनाने लगा था कि भाभी को कैसे चोदना है.
फिर हम दोनों अलग हुए और सोने लगे.
मगर मुझे तो समझो नींद ही नहीं आ रही थी.
जैसे तैसे वह रात कटी और सवेरा हुआ.
मैंने अपने बैग में एक मोमबत्ती और लाइटर के साथ कुछ कंडोम के पैकेट रखे. फिर याद आया तो साथ में हनी और श्रीखंड भी ले लिया.
अब मैं स्टेशन पर पहुंच गया और भाभी के आने का इंतज़ार करने लगा.
कुछ ही देर में भाभी मस्त लाल रंग के चूड़ीदार सलवार कमीज में आती दिखाई दीं.
उन्होंने अपने बाल खुले रखे हुए थे.
होंठों पर लाल लिपस्टिक, हाथ में लेडी बैग टांग कर पेन्सिल हील्स पहने हुई आईं और मुस्कुराने लगीं.
मेरी तो उनके ऊपर से नजर ही नहीं हट रही थी.
कसम से भाभी आज कयामत लग रही थीं और आस पास खड़े सब लोग उन्हें ही घूरे जा रहे थे.
उनकी उठी हुई गोल गोल चूचियां और गांड ठुमकाने वाली उनकी कॅट वॉक पर तो मेरा दिल ही घायल हो गया था.
एक मन तो किया कि इन्हें अभी ही गोद में उठा कर शुरू हो जाऊं.
पर स्टेशन था, काफ़ी लोग थे. वैसा किया नहीं जा सकता था.
तभी हम हम दोनों होटल में पहुंचे और कमरे में जाते ही हम एक दूसरे पर भूखे जानवरों की तरह टूट पड़े.
मैं भाभी के खुले बालों में हाथ डाल कर लिप्स टू लिप्स किस करते हुए मजा लेने लगा.
भाभी के चूचों को मैं उनकी कमीज के ऊपर से ही सहला रहा था.
तभी अचानक से भाभी मुझसे अलग होकर बोलीं- एक मिनट रुको यार, मुझे कपड़ों में मजा नहीं आ रहा.
उन्होंने यह कहा तो मैंने उन्हें अपनी बांहों में खींचा और उनकी कमीज के पीछे लगे हुए हुक्स खोल दिए.
साथ ही भाभी की गर्दन पर किस करते हुए मैंने उनकी ड्रेस को खोलना चालू कर दिया था.
भाभी मेरे साथ रमण सुख का आनन्द लिए जा रही थीं.
मैंने उनके एक कान में अपनी नाक से गर्म सांस छोड़ते हुए उन्हें घुमाया और अपने सामने की ओर कर दिया.
आह भाभी के बड़े बड़े एकदम टाइट गुब्बारे उनकी पिंक कलर की ब्रा में कसे हुए दिखने लगे थे.
भाभी एकदम माल लग रही थीं.
तभी मैंने अपने हाथ उनके पीछे ले जाकर उनकी ब्रा का हुक भी खोल कर उसे निकाल दिया और उनके खड़े हो चुके कड़क गुलाबी चूचुक को किस करने लगा.
वे मानो एकदम से बिफर उठीं और अगले ही पल वे मेरी शर्ट के बटन्स खोलने लगीं.
हम दोनों किस भी किए जा रहे थे.
तब हम दोनों इतने जोश में थे कि कब मेरी छाती उनकी नंगी चूचियों से रगड़ने लगी, कुछ पता ही नहीं चला.
मैं भाभी की कमर पर किस करते हुए उनकी सलवार के नाड़े की तरफ बढ़ा और जल्दी से उनके नाड़े को ढीला करके उसे भी उतार दिया.
अब भाभी मेरे सामने एक नेट वाली पतली सी पैंटी में थीं और मैं भी अंडरवियर में रह गया था.
हम दोनों एक दूसरे हर अंग को पागलों की तरह चाट और चूस रहे थे.
हमारी कामुक सिसकारियां कमरे में एक मधुर संगीत बिखेर रही थीं.
‘आह … उउह …’
भाभी भी पूरी गर्म हो चुकी थीं और बार बार कह रही थीं- अब बस देर न करो … मुझे चोद दो जल्दी से आह!
मैंने झट से भाभी की पैंटी को खींच कर निकाला और उन्हें नंगी कर दिया.
आह क्या चिकनी गोरी चूत थी उनकी, ऐसी लग रही थी जैसे आज सुबह ही झांटों की सफाई की हो.
मैंने उनकी पैंटी को किस किया और उसको लंबी सांस लेकर सूंघ कर साइड में फेंक दिया.
फिर झट से अपने बैग से मधु निकाल कर उन्हें चटाया और उनकी चूत पर शहद की बोतल उड़ेल कर खूब सारा शहद चूत पर टपका दिया.
भाभी अपनी चूत पर ठंडे शहद का स्पर्श पाकर अचकचा उठीं और जब तक वे संभल पातीं कि मैंने उनकी चूत पर अपनी जीभ फेर दी.
भाभी एकदम से सिहर गईं और उनके कंठ से एक मीठी सी ‘आह मर गई’ निकल पड़ा.
मैं लगा रहा और उनकी चूत को चाटने लगा.
कभी चूत को चुम्मी करता, तो कभी चाट लेता.
उसी दौरान मैंने अपने हाथ में पकड़ी हुई शहद की शीशी को उनके एक दूध के निप्पल पर टपका दिया.
वे अब शहद का मजा समझ गई थीं तो अपनी उंगली से अपने निप्पल पर शहद मलने लगीं और मेरे हाथ से शहद की शीशी लेकर अपने दूसरे दूध के निप्पल पर लगाने लगीं.
फिर उन्होंने मेरे बाल पकड़ कर मुझे दूध चूसने का इशारा किया.
तो मैं भाभी के मम्मों पर आ गया.
अब कभी मैं उनके एक दूध के निप्पल पर लगा शहद चूसता, तो कभी दूसरे को चूसने लगता.
यूं ही खेल चलता रहा. चूत और चूचियों को मैंने छक कर चूसा.
मेरे ऐसे करने से भाभी अब तक दो बार झड़ चुकी थीं और वे पागलों की तरह मेरे लंड से चुदने के लिए मचल रही थीं- आह … अब चोद भी दो … प्लीज चोद दो!
मैं उन्हें तड़फाए जा रहा था क्योंकि प्यास जितनी गहरी हो, बुझाने में उतना मजा ज्यादा आता है.
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फिर मैंने उनके दुप्पटे से उनके हाथ पैर बांध कर उन्हें बेड पर सीधा लिटा दिया.
इसके बाद मैंने अपने रूमाल से उनकी आंखों को बंद कर दिया.
अब मैं मोमबत्ती जला कर तैयार हो गया.
मैं अपने एक हाथ में जली हुई मोमबत्ती और एक हाथ में बेल्ट लेकर आगे आया.
फिर जैसे ही मैंने उनके दूध पर मोम टपकाई … भाभी चीख उठीं.
उनकी इस चीख ने मुझे बड़ा सुकून दिया था.
दोस्तो, यह एक ऐसा सेक्स है, जिसे करें से जो सुख मिलता है वह चुदाई के सुख को दोगुना कर देता है.
अब मैं कभी उन्हें मोमबत्ती के मोम टपका कर मजा लेता तो कभी उनकी उसी जगह को चूम कर चूस लेता और किस कर देता, तो कभी उसी जगह पर बेल्ट से मारता.
भाभी का अंग अंग एकदम लाल टमाटर की तरह हो गया था और वे चुदने के लिए एकदम बेताब हो गई थीं.
अब मैंने जरा सा श्रीखंड अपने लंड पर लगाया और उनके मुँह में देकर लंड चुसवाया व चटवाया.
भाभी भी खूब मज़े से लंड को ऐसे चाटे जा रही थीं जैसे बरसों बाद कोई लंड मिला हो.
उन्होंने मेरे लौड़े को चूस चूस कर एकदम लाल कर दिया था.
मेरा लंबा और मोटा लंड अब चूत के लिए बेताब हो उठा था.
मैंने अब भाभी के हाथ पैर खोल कर उन्हें खड़ा कर दिया और दीवार से टिका दिया.
फिर भाभी की चूत की दरार में अपने लंड को धीरे से रगड़ने लगा.
भाभी भी अपनी चूत आगे को बढ़ा कर मेरे लंड को अपनी चूत में अन्दर लेने की कोशिश कर रही थीं.
पर लंड आसानी से कहां घुसने वाला था.
तभी मैंने अपने बैग से एक कंडोम निकाल कर लंड पर चढ़ा दिया.
फिर भाभी को किस करते हुए मैंने उनकी चूत पर लंड का सुपारा सैट कर दिया और ताक़त लगा कर पहला झटका देते हुए उनके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया.
पहले तो कुछ पल के लिए उनकी आवाज अटक गई.
फिर जैसे ही लंड का टोपा चूत को चीरता हुआ अन्दर घुसा, उनके पसीने छूट गए.
वे चिल्लाने की … और मेरी पकड़ से छूटने की कोशिश करने लगीं, छटपटाने लगीं.
पर मैंने उन्हें नहीं छूटने दिया, बल्कि अपनी पकड़ और मजबूत करते हुए थोड़ा ठहर गया.
फिर कुछ पल बाद जब भाभी को आराम हुआ तो वे अभी थोड़ी सामान्य हुई ही थीं कि मैंने एक और जोर का झटका मार दिया.
तभी उनकी दर्द भरी कामुक आवाज निकल गई- उईई मांआ मर गईइइ … भोसड़ी के मां चोद दी तूने मेरी चूत की … निकाल अपने लवड़े को … आह … साले ने चूत ही फाड़ दी!
उधर वे चिल्ला रही थीं और इधर में भी कहां कुछ मानने वाला था.
इसी बीच मैं एक जोर का झटका देते हुए अपना पूरा लंड भाभी की चूत में डाल दिया.
वे एकदम से ‘आआवव … मांआह … र गई …’ की आवाज करती हुई चीखीं.
तभी मैंने लंड थोड़ा सा बाहर को निकाल लिया.
फिर देखा तो मेरे लंड पर खून लगा था.
इसका मतलब भाभी की चूत फट गई थी, तभी उनको थोड़ा दर्द हुआ था.
मैं बड़े प्यार से उन्हें किस करते हुए चोदने लगा.
कुछ ही देर में भाभी को भी मज़ा आने लगा और वे भी अपनी चूत आगे पीछे करने लगीं.
मैं उन्हें और तेज़ गति से चोदने लगा.
भाभी ‘उई … एयेए … उई अम्म्म!’ किये जा रही थीं.
इसी तरह करीब लगभग 15 मिनट की चुदाई में भाभी दो बार और झड़ चुकी थीं.
अब मेरा भी होने ही वाला था, तभी मैंने भाभी से कहा- सन्नो मैं आ रहा हूँ!
वे अपनी चूत से लंड निकाल कर नीचे बैठ गईं और लंड से कंडोम को निकाल कर सामने बैठ गईं.
मैंने अपने लंड की पिचकारी भाभी के चेहरे पर दे मारी.
कुछ बूँदें उकी गोरी गुलाबी चूचियों पर भी जा गिरीं.
मैं एकदम से निढाल हो गया था, तो मैंने भाभी को पकड़ा और उन्होंने मुझे पकड़ लिया.
हम दोनों एक दूसरे को पकड़ कर वहीं बेड पर गिर कर सो गए.
कुछ देर बाद उठे तो फिर से सहवास शुरू हो गया.
उस दिन मैंने 3 बार अलग अलग पोज़िशन में भाभी की चुदाई का मजा लिया.
अभी भी जब भी मौका मिलता है, तो हम दोनों चुदाई कर लेते हैं.
आगे की सेक्स कहानी को मैं फिर लिखूंगा कि कैसे मैंने सन्नो जान की गांड मारी और उन्हें चोद कर खुश किया.
आपको मेरी सेक्स कहानी कैसी लगी,
💦💦💦💦💦💦
मैंने अपनी बीवी को नीग्रो से चुदवाया
💦💦💦💦💦💦
ब्लैक डिक नीग्रो सेक्स कहानी में मेरी गर्म बीवी मेरी चुदाई से खुश नहीं थी. एक दिन मेरे ऑफिस में एक अफ़्रीकी आया तो मैंने अपनी बीवी को उससे चुदवाने की योजना बनाई.
मैं करीब 48 वर्ष का हो गया हूँ और मेरी धर्मपत्नी करीब 35 वर्ष की होगी.
हम दोनों की उम्र में लगभग 13 वर्ष का फासला है.
शायद इसी वजह से मैं अपनी बीवी की चुदाई के मामले में कमजोर पड़ गया था.
जब भी मैं उससे चुदाई की मांग करता था तो वह बुरा सा मुँह बनाकर मना कर देती.
वह कह देती- जब कुछ होता ही नहीं है, तो क्यों आग लगा कर छोड़ देते हो, चुपचाप सो जाओ!
इसी तरह से दिन कटते रहे.
एक बार की बात है हमारी कम्पनी में कोई ग्राहक साउथ अफ्रीका से आने वाला था.
उस दिन करीब 12 बजे हमारी फैक्ट्री में उसका विजिट था.
जब वह आया तो हम लोगों ने उसका बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया.
इसके बाद मैंने अपने रूमाल से उनकी आंखों को बंद कर दिया.
अब मैं मोमबत्ती जला कर तैयार हो गया.
मैं अपने एक हाथ में जली हुई मोमबत्ती और एक हाथ में बेल्ट लेकर आगे आया.
फिर जैसे ही मैंने उनके दूध पर मोम टपकाई … भाभी चीख उठीं.
उनकी इस चीख ने मुझे बड़ा सुकून दिया था.
दोस्तो, यह एक ऐसा सेक्स है, जिसे करें से जो सुख मिलता है वह चुदाई के सुख को दोगुना कर देता है.
अब मैं कभी उन्हें मोमबत्ती के मोम टपका कर मजा लेता तो कभी उनकी उसी जगह को चूम कर चूस लेता और किस कर देता, तो कभी उसी जगह पर बेल्ट से मारता.
भाभी का अंग अंग एकदम लाल टमाटर की तरह हो गया था और वे चुदने के लिए एकदम बेताब हो गई थीं.
अब मैंने जरा सा श्रीखंड अपने लंड पर लगाया और उनके मुँह में देकर लंड चुसवाया व चटवाया.
भाभी भी खूब मज़े से लंड को ऐसे चाटे जा रही थीं जैसे बरसों बाद कोई लंड मिला हो.
उन्होंने मेरे लौड़े को चूस चूस कर एकदम लाल कर दिया था.
मेरा लंबा और मोटा लंड अब चूत के लिए बेताब हो उठा था.
मैंने अब भाभी के हाथ पैर खोल कर उन्हें खड़ा कर दिया और दीवार से टिका दिया.
फिर भाभी की चूत की दरार में अपने लंड को धीरे से रगड़ने लगा.
भाभी भी अपनी चूत आगे को बढ़ा कर मेरे लंड को अपनी चूत में अन्दर लेने की कोशिश कर रही थीं.
पर लंड आसानी से कहां घुसने वाला था.
तभी मैंने अपने बैग से एक कंडोम निकाल कर लंड पर चढ़ा दिया.
फिर भाभी को किस करते हुए मैंने उनकी चूत पर लंड का सुपारा सैट कर दिया और ताक़त लगा कर पहला झटका देते हुए उनके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया.
पहले तो कुछ पल के लिए उनकी आवाज अटक गई.
फिर जैसे ही लंड का टोपा चूत को चीरता हुआ अन्दर घुसा, उनके पसीने छूट गए.
वे चिल्लाने की … और मेरी पकड़ से छूटने की कोशिश करने लगीं, छटपटाने लगीं.
पर मैंने उन्हें नहीं छूटने दिया, बल्कि अपनी पकड़ और मजबूत करते हुए थोड़ा ठहर गया.
फिर कुछ पल बाद जब भाभी को आराम हुआ तो वे अभी थोड़ी सामान्य हुई ही थीं कि मैंने एक और जोर का झटका मार दिया.
तभी उनकी दर्द भरी कामुक आवाज निकल गई- उईई मांआ मर गईइइ … भोसड़ी के मां चोद दी तूने मेरी चूत की … निकाल अपने लवड़े को … आह … साले ने चूत ही फाड़ दी!
उधर वे चिल्ला रही थीं और इधर में भी कहां कुछ मानने वाला था.
इसी बीच मैं एक जोर का झटका देते हुए अपना पूरा लंड भाभी की चूत में डाल दिया.
वे एकदम से ‘आआवव … मांआह … र गई …’ की आवाज करती हुई चीखीं.
तभी मैंने लंड थोड़ा सा बाहर को निकाल लिया.
फिर देखा तो मेरे लंड पर खून लगा था.
इसका मतलब भाभी की चूत फट गई थी, तभी उनको थोड़ा दर्द हुआ था.
मैं बड़े प्यार से उन्हें किस करते हुए चोदने लगा.
कुछ ही देर में भाभी को भी मज़ा आने लगा और वे भी अपनी चूत आगे पीछे करने लगीं.
मैं उन्हें और तेज़ गति से चोदने लगा.
भाभी ‘उई … एयेए … उई अम्म्म!’ किये जा रही थीं.
इसी तरह करीब लगभग 15 मिनट की चुदाई में भाभी दो बार और झड़ चुकी थीं.
अब मेरा भी होने ही वाला था, तभी मैंने भाभी से कहा- सन्नो मैं आ रहा हूँ!
वे अपनी चूत से लंड निकाल कर नीचे बैठ गईं और लंड से कंडोम को निकाल कर सामने बैठ गईं.
मैंने अपने लंड की पिचकारी भाभी के चेहरे पर दे मारी.
कुछ बूँदें उकी गोरी गुलाबी चूचियों पर भी जा गिरीं.
मैं एकदम से निढाल हो गया था, तो मैंने भाभी को पकड़ा और उन्होंने मुझे पकड़ लिया.
हम दोनों एक दूसरे को पकड़ कर वहीं बेड पर गिर कर सो गए.
कुछ देर बाद उठे तो फिर से सहवास शुरू हो गया.
उस दिन मैंने 3 बार अलग अलग पोज़िशन में भाभी की चुदाई का मजा लिया.
अभी भी जब भी मौका मिलता है, तो हम दोनों चुदाई कर लेते हैं.
आगे की सेक्स कहानी को मैं फिर लिखूंगा कि कैसे मैंने सन्नो जान की गांड मारी और उन्हें चोद कर खुश किया.
आपको मेरी सेक्स कहानी कैसी लगी,
💦💦💦💦💦💦
मैंने अपनी बीवी को नीग्रो से चुदवाया
💦💦💦💦💦💦
ब्लैक डिक नीग्रो सेक्स कहानी में मेरी गर्म बीवी मेरी चुदाई से खुश नहीं थी. एक दिन मेरे ऑफिस में एक अफ़्रीकी आया तो मैंने अपनी बीवी को उससे चुदवाने की योजना बनाई.
मैं करीब 48 वर्ष का हो गया हूँ और मेरी धर्मपत्नी करीब 35 वर्ष की होगी.
हम दोनों की उम्र में लगभग 13 वर्ष का फासला है.
शायद इसी वजह से मैं अपनी बीवी की चुदाई के मामले में कमजोर पड़ गया था.
जब भी मैं उससे चुदाई की मांग करता था तो वह बुरा सा मुँह बनाकर मना कर देती.
वह कह देती- जब कुछ होता ही नहीं है, तो क्यों आग लगा कर छोड़ देते हो, चुपचाप सो जाओ!
इसी तरह से दिन कटते रहे.
एक बार की बात है हमारी कम्पनी में कोई ग्राहक साउथ अफ्रीका से आने वाला था.
उस दिन करीब 12 बजे हमारी फैक्ट्री में उसका विजिट था.
जब वह आया तो हम लोगों ने उसका बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया.
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वह आदमी था तो करीब 22 साल का, पर देखने में लम्बा चौड़ा, काला-कलूटा और करीब 6 फुट का अच्छा खासा नौजवान था!
यह ब्लैक डिक नीग्रो सेक्स कहानी इसी के साथ मेरी बीवी की है.
मालिक ने उसको मेरे साथ लगा दिया और उससे कहा कि यह आदमी आप की मदद करेगा!
उसके साथ काम करते करते रात के 10 बज गए.
अब हम लोग घर जाने की तैयारी करने लगे.
मेरी बाइक पुरानी होने के कारण जल्दी स्टार्ट नहीं हो रही थी.
यह देख कर वह कालू मेरे पास आया और उसने मुझसे पूछा कि क्या प्रॉब्लम हो गई है?
मैंने कहा- कुछ नहीं सब ठीक है.
फिर उसने मुझसे अपने होटल का पता पूछा, तो मैंने बता दिया.
मगर उसकी समझ में नहीं आया.
तो मैंने कहा- अरे सर, इतनी रात में कहां जाओगे. आज की रात आप हमारे यहां ही रुक जाओ!
उसने कुछ सोचा, फिर ओके कहा.
मैं अब उसको उसकी कार में बैठा कर अपने घर की तरफ निकल गया.
रास्ते में ही मैंने बीवी को मैसेज कर दिया- आज मेरे बॉस का ख़ास आदमी मेरे साथ घर आ रहा है, तुम उसकी खातिरदारी करने में कोई कसर नहीं छोड़ना.
इस मामले में मेरी बीवी मेरा बड़ा कहना मानती थी.
उसका ओके का मैसेज आ गया.
फिर रास्ते में शराब की दुकान देख कर मैंने कालू से उसकी मनपसंद शराब के बारे में पूछा.
उसने मुझे बताया.
तो मैंने उसकी पसंद की ब्रांड की एक बोतल ले ली और उसे लेकर घर की तरफ निकल पड़ा.
फिर घर पहुंचा तो बीवी ने दरवाजा खोला.
उस वक्त मेरी बीवी ने एक जालीदार गाउन पहना हुआ था.
कालू ने मेरी बीवी को सेक्सी नजरों से देखा और हम दोनों अन्दर आ गए.
हम दोनों ने दारू पीना शुरू की.
मेरी बीवी को भी दारू से परहेज नहीं था.
वह हम दोनों के लिए चखना में गर्म गर्म पकौड़े तल लाई.
कालू ने एक पैग बना कर मेरी बीवी को भी ऑफर किया तो उसने ले लिया.
मैंने कनखियों से देखा तो कालू मेरी बीवी की चूचियों को ताड़ रहा था और मेरी बीवी को भी उस कालू पर दिल आ गया लग रहा था.
मैंने भी सोचा कि साली मुझे तो चूत देती नहीं है, आज इसकी चुदाई कालू के लौड़े से हुई तो कम से कम ब्लू फिल्म का लाइव टेलिकास्ट तो देखने को मिलेगा.
यही सोच कर मैंने दारू पीने में दिमाग लगाया और उन दोनों की हरकतों को ताड़ने लगा.
इसी सबके बीच हम तीनों का खाने पीने का दौर चलता रहा.
अब तक मैंने भली भांति नोटिस कर लिया था कि कालू पहलवान मेरी बीवी के दूध और उसकी उठी हुई गांड को बड़ी कामुक नजरों से निहार रहा था.
मेरी बीवी भी झुक झुक कर अपने चूचे दिखा कर उसको लाइन दे रही थी.
यह सब देखकर मैंने ज्यादा नशा होने का ड्रामा किया और बीवी से कहा- यार, मुझे नशा ज्यादा हो गया है, तुम मुझे सहारा देकर बिस्तर पर लिटा दो.
मेरी बीवी ने नशीली नजरों से कहा- अरे यार, क्या तुम भी जरा सी दारू में टुन्न हो गए. चलो अब उठो.
उसने मुझे उठाने का प्रयास किया तो मैंने जानबूझ कर उसकी नाइटी को कुछ इस तरह से पकड़ा कि उसकी चूचियां आधी से ज्यादा कालू को दिख गईं.
मैंने गौर किया कि इस बात से मेरी बीवी को जरा सी भी आपत्ति नहीं हुई और उसने कालू को आवाज दे कर कहा- प्लीज हेल्प मी बडी!
कालू फट से उठ कर आया और बहन के लौड़े ने मुझे पकड़ने की जगह मेरी बीवी के चूतड़ पकड़ कर दबा दिए.
मेरी बीवी उंहुं कह कर मुस्कुरा दी.
फिर उन दोनों ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया.
मैं नशे का ड्रामा करता रहा और अपनी आंखों को थोड़ी सी खोल कर देखने लगा कि अब यह दोनों क्या करते हैं.
मैंने देखा कि कालू ने अपनी जेब से सिगरेट निकाली और सुलगा कर मेरी बीवी की तरफ धुआं छोड़ा.
इससे मेरी बीवी हंस दी.
वे दोनों एक दूसरे को निहार रहे थे मगर दोनों की हिम्मत नहीं हो रही थी.
कालू ने मेरी बीवी से पूछा- मैं किधर सोऊंगा!
तब मेरी बीवी ने कहा- यहीं सो जाओ इनके बगल में!
उसने आंख मटका कर पूछा कि तुम कहां सोओगी?
उसने कहा- मैं भी यहीं बगल में लेट जाउंगी.
यह कह कर वह लेट गयी.
इतने में कालू ने भी अपनी पैंट खोल कर अपनी चड्डी में फूलते लंड को हाथ सहलाया, जिसे मेरी बीवी और मैं दोनों ही देखने लगे.
उसने मेरी बीवी को अपना लंड का उभार दिखाया और पैंट को उतार कर एक तरफ रख दिया.
फिर उसने अपनी शर्ट उतारी तो उसकी छौड़ी छाती देख कर मेरी बीवी की आह निकल गई.
बीवी बोली- यू लुक्स माचो मैन!
मैंने मन में सोचा कि माचो नहीं है रंडी … यह मादरचोद है. आज तेरी चूत का कबाड़ा कर देगा.
अब कालू पहलवान जानबूझ कर मेरी बीवी के बाजू में लेट गया.
वह सिर्फ कच्छा में ही लेट गया था.
उन दोनों में बातें होने लगीं. मेरी बीवी को उसके साथ बात करने में बड़ा मजा आ रहा था.
मुझे भी उन दोनों की चुदाई देखे बिना नींद कहां आने वाली थी.
फिर वे दोनों आंख मूँद कर सोने का ड्रामा करने लगे.
मेरी बीवी ने अपने घुटने मोड़े और अपने गाउन को अपने घुटनों से ऊपर चढ़ा लिया.
यह ब्लैक डिक नीग्रो सेक्स कहानी इसी के साथ मेरी बीवी की है.
मालिक ने उसको मेरे साथ लगा दिया और उससे कहा कि यह आदमी आप की मदद करेगा!
उसके साथ काम करते करते रात के 10 बज गए.
अब हम लोग घर जाने की तैयारी करने लगे.
मेरी बाइक पुरानी होने के कारण जल्दी स्टार्ट नहीं हो रही थी.
यह देख कर वह कालू मेरे पास आया और उसने मुझसे पूछा कि क्या प्रॉब्लम हो गई है?
मैंने कहा- कुछ नहीं सब ठीक है.
फिर उसने मुझसे अपने होटल का पता पूछा, तो मैंने बता दिया.
मगर उसकी समझ में नहीं आया.
तो मैंने कहा- अरे सर, इतनी रात में कहां जाओगे. आज की रात आप हमारे यहां ही रुक जाओ!
उसने कुछ सोचा, फिर ओके कहा.
मैं अब उसको उसकी कार में बैठा कर अपने घर की तरफ निकल गया.
रास्ते में ही मैंने बीवी को मैसेज कर दिया- आज मेरे बॉस का ख़ास आदमी मेरे साथ घर आ रहा है, तुम उसकी खातिरदारी करने में कोई कसर नहीं छोड़ना.
इस मामले में मेरी बीवी मेरा बड़ा कहना मानती थी.
उसका ओके का मैसेज आ गया.
फिर रास्ते में शराब की दुकान देख कर मैंने कालू से उसकी मनपसंद शराब के बारे में पूछा.
उसने मुझे बताया.
तो मैंने उसकी पसंद की ब्रांड की एक बोतल ले ली और उसे लेकर घर की तरफ निकल पड़ा.
फिर घर पहुंचा तो बीवी ने दरवाजा खोला.
उस वक्त मेरी बीवी ने एक जालीदार गाउन पहना हुआ था.
कालू ने मेरी बीवी को सेक्सी नजरों से देखा और हम दोनों अन्दर आ गए.
हम दोनों ने दारू पीना शुरू की.
मेरी बीवी को भी दारू से परहेज नहीं था.
वह हम दोनों के लिए चखना में गर्म गर्म पकौड़े तल लाई.
कालू ने एक पैग बना कर मेरी बीवी को भी ऑफर किया तो उसने ले लिया.
मैंने कनखियों से देखा तो कालू मेरी बीवी की चूचियों को ताड़ रहा था और मेरी बीवी को भी उस कालू पर दिल आ गया लग रहा था.
मैंने भी सोचा कि साली मुझे तो चूत देती नहीं है, आज इसकी चुदाई कालू के लौड़े से हुई तो कम से कम ब्लू फिल्म का लाइव टेलिकास्ट तो देखने को मिलेगा.
यही सोच कर मैंने दारू पीने में दिमाग लगाया और उन दोनों की हरकतों को ताड़ने लगा.
इसी सबके बीच हम तीनों का खाने पीने का दौर चलता रहा.
अब तक मैंने भली भांति नोटिस कर लिया था कि कालू पहलवान मेरी बीवी के दूध और उसकी उठी हुई गांड को बड़ी कामुक नजरों से निहार रहा था.
मेरी बीवी भी झुक झुक कर अपने चूचे दिखा कर उसको लाइन दे रही थी.
यह सब देखकर मैंने ज्यादा नशा होने का ड्रामा किया और बीवी से कहा- यार, मुझे नशा ज्यादा हो गया है, तुम मुझे सहारा देकर बिस्तर पर लिटा दो.
मेरी बीवी ने नशीली नजरों से कहा- अरे यार, क्या तुम भी जरा सी दारू में टुन्न हो गए. चलो अब उठो.
उसने मुझे उठाने का प्रयास किया तो मैंने जानबूझ कर उसकी नाइटी को कुछ इस तरह से पकड़ा कि उसकी चूचियां आधी से ज्यादा कालू को दिख गईं.
मैंने गौर किया कि इस बात से मेरी बीवी को जरा सी भी आपत्ति नहीं हुई और उसने कालू को आवाज दे कर कहा- प्लीज हेल्प मी बडी!
कालू फट से उठ कर आया और बहन के लौड़े ने मुझे पकड़ने की जगह मेरी बीवी के चूतड़ पकड़ कर दबा दिए.
मेरी बीवी उंहुं कह कर मुस्कुरा दी.
फिर उन दोनों ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया.
मैं नशे का ड्रामा करता रहा और अपनी आंखों को थोड़ी सी खोल कर देखने लगा कि अब यह दोनों क्या करते हैं.
मैंने देखा कि कालू ने अपनी जेब से सिगरेट निकाली और सुलगा कर मेरी बीवी की तरफ धुआं छोड़ा.
इससे मेरी बीवी हंस दी.
वे दोनों एक दूसरे को निहार रहे थे मगर दोनों की हिम्मत नहीं हो रही थी.
कालू ने मेरी बीवी से पूछा- मैं किधर सोऊंगा!
तब मेरी बीवी ने कहा- यहीं सो जाओ इनके बगल में!
उसने आंख मटका कर पूछा कि तुम कहां सोओगी?
उसने कहा- मैं भी यहीं बगल में लेट जाउंगी.
यह कह कर वह लेट गयी.
इतने में कालू ने भी अपनी पैंट खोल कर अपनी चड्डी में फूलते लंड को हाथ सहलाया, जिसे मेरी बीवी और मैं दोनों ही देखने लगे.
उसने मेरी बीवी को अपना लंड का उभार दिखाया और पैंट को उतार कर एक तरफ रख दिया.
फिर उसने अपनी शर्ट उतारी तो उसकी छौड़ी छाती देख कर मेरी बीवी की आह निकल गई.
बीवी बोली- यू लुक्स माचो मैन!
मैंने मन में सोचा कि माचो नहीं है रंडी … यह मादरचोद है. आज तेरी चूत का कबाड़ा कर देगा.
अब कालू पहलवान जानबूझ कर मेरी बीवी के बाजू में लेट गया.
वह सिर्फ कच्छा में ही लेट गया था.
उन दोनों में बातें होने लगीं. मेरी बीवी को उसके साथ बात करने में बड़ा मजा आ रहा था.
मुझे भी उन दोनों की चुदाई देखे बिना नींद कहां आने वाली थी.
फिर वे दोनों आंख मूँद कर सोने का ड्रामा करने लगे.
मेरी बीवी ने अपने घुटने मोड़े और अपने गाउन को अपने घुटनों से ऊपर चढ़ा लिया.
कुछ देर बाद कालू ने आंखें खोल कर देखा कि मेरी बीवी घुटने मोड़ कर सोई हुई थी और उसका गाउन सरक कर उसकी जांघों तक आ गया था.
यह देख कर कालू समझ गया कि झंडी हरी है, तो उसने अपना हाथ धीरे से मेरी बीवी की जांघों पर रख दिया.
कुछ पल बाद वह मेरी बीवी की जांघों को सहलाने लगा.
उसके स्पर्श मात्र से मेरी बीवी ने अपनी दोनों जांघों को फैला दिया.
यह देख कर कालू ने अपने हाथ को सीधा उसकी फुदी पर रख दिया और वह मेरी बीवी की चूत को सहलाने लगा.
मेरी बीवी की बुर पहले से ही मजबूत लंड की चाह में पनिया गई थी.
कालू के सहलाने के कारण मेरी बीवी की चूत चिपचिपी हो गई और रस छोड़ने लगी.
मेरी बीवी भी गजब की रांड थी.
साली वह चुपचाप कालू के हाथ की हरकत का मजा लेने लगी.
अब वह धीरे से उठा और अपने एक हाथ की उंगली से मेरी बीवी की बुर के दाने को कुरेदने लगा.
फिर उसने चूत के छेद में अपनी उंगली डाल दी और अन्दर बाहर करने लगा.
मैं हैरान था कि मेरी बीवी ने अपनी पैंटी कब उतार दी.
फिर मैंने ध्यान से देखा तो उसने एक डोरी वाली पैंटी पहनी हुई थी … जिसे शायद उसने लेटते समय ही ढीली करके अपनी चूत नंगी कर दी थी.
अब खेल शुरू हुआ.
कालू की उंगली ने मेरी बीवी की चूत को चोदा,तो उसने गर्म होकर कालू का हाथ पकड़ लिया और मुस्कुरा कर उसे देखने लगी.
वे दोनों मस्त ही गए थे और चुदाई के लिए उत्तेजित हो उठे थे.
मेरी बीवी ने कालू से चूत चाटने का इशारा किया.
तो वह नीग्रो झट से बैठ गया और पोजीशन बना कर अपना मुँह मेरी बीवी की चूत पर रख कर कुत्ते की तरह चाटने लगा.
उस बहन के लौड़े की जीभ ही इतनी बड़ी थी कि मेरे लंड से ज्यादा गहराई तक जाकर वह मेरी बीवी को अपनी जुबान से चोदने लगा था.
उसकी खुरदुरी जीभ से चूत में रगड़ लगी, तो मेरी बीवी ‘आह आह उई मम्मी’ करने लगी.
वह खुद अपने हाथ से कालू का लंड उसके कच्छे से निकाल कर सहलाने लगी थी.
मैंने कालू का लंड देखा तो मेरी गांड फट गई.
साला ग्यारह इंच का गधे के लंड जैसा लंड था.
मैं समझ गया कि आज मेरी बीवी की चूत के परखचे उड़ने वाले हैं.
कालू पूरी दमखम से मेरी बीवी की चूत चाटने में लगा हुआ था.
मेरी बीवी ने उससे लंड को बाहर निकालने को कहा तो उसने जल्दी से अपना कच्छा उतार दिया.
माय गॉड क्या लंड था … खासा लम्बा और मोटा लंड देख कर मेरी बीवी की चूत ने तो पानी ही छोड़ दिया होगा.
अब कालू भाई ने उससे लंड चूसने का इशारा किया तो वह कालू का लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.
तभी कालू ने हाथ बढ़ा कर शराब की बोतल उठाई और वह उसे अपने लंड पर टपकाने लगा.
इस तरह से कालू ने करीब 60 mL नीट दारू मेरी बीवी को पिला दी थी, साथ ही वह सिगरेट फूँक रहा था तो मेरी बीवी उसकी सिगरेट से कश लगा कर अपना स्वाद ठीक करती जा रही थी.
करीब दस मिनट तक शराब से भीगा हुआ लंड चूसने के बाद मेरी बीवी नशे में टल्ली हो गई थी.
तभी उस कालू ने भी एक बड़ा सा घूंट पिया और मेरी बीवी के मुँह से मुँह लगा कर उसे और ज्यादा शराब पिला दी.
यह देख कर मैं समझ गया कि बंदा बहुत बड़ा मादरचोद है. यह शराब के नशे में टल्ली करके मेरी बीवी की चूत फाड़ेगा, उससे मेरी बीवी को दर्द का अहसास नहीं होगा.
अब मेरी बीवी कालू को अपनी चूत दिखा कर चोदने को बोली.
कालू ने मेरी बीवी की दोनों टांगों को फैला कर 69 की पोज लेकर उसकी चूत की दरार में अपना लंड रख कर जोरदार धक्का मार दिया.
उसका मूसल लंड मेरी बीवी की बुर को चीरते फाड़ते हुए अन्दर चला गया.
मैंने देखा कि करीब आधा से अधिक लंड बुर में घुस गया था.
मेरी बीवी की चीख न निकल पाए, इसके लिए कालू ने अपने मुँह को उसके मुँह पर जमा दिया था.
कुछ देर बाद मेरी बीवी ने अपनी गांड उठा कर दूसरा धक्का मारने का इशारा दिया.
कालू ने दूसरी बार और करारा धक्का मारा और उसका लंड चूत की जड़ तक जाकर धंस गया.
मेरी बीवी का मुँह बंद था, तो वह अपने दांतों को भींच कर दर्द को बर्दाश्त करने लगी.
करीब एक मिनट बाद मेरी बीवी अपनी गांड उठा कर चोदने को बोलने लगी.
अब कालू मेरी बीवी पर सांड की तरह चढ़ कर ताबड़तोड़ धक्के मारने लगा था.
आप खुद सोचो कि जब ग्यारह इंच का मोटा लंड मेरी बीवी की चूत के अन्दर बाहर जाने लगेगा तो मेरी बीवी का क्या हाल होगा.
साली मरी हुई कुतिया सी बिलबिला रही थी.
बहन की लौड़ी का सारा नशा फट गया था- आह आह फट गई मेरी … आह मर गई साले फ्री की चूत समझ कर चोद रहा है … आह हट जा कमीने!
कालू को उसकी हिन्दी समझ में ही नहीं आ रही थी. वह समझा कि मेरी बीवी को चुदने में मजा आ रहा है. सो वह और जोर से पिल पड़ा.
वैसे ही उस पर दारू का नशा चढ़ा हुआ था और कामांध सांड की तरह वह मेरी बीवी को रांड की तरह चोदने में लगा हुआ था.
यह देख कर कालू समझ गया कि झंडी हरी है, तो उसने अपना हाथ धीरे से मेरी बीवी की जांघों पर रख दिया.
कुछ पल बाद वह मेरी बीवी की जांघों को सहलाने लगा.
उसके स्पर्श मात्र से मेरी बीवी ने अपनी दोनों जांघों को फैला दिया.
यह देख कर कालू ने अपने हाथ को सीधा उसकी फुदी पर रख दिया और वह मेरी बीवी की चूत को सहलाने लगा.
मेरी बीवी की बुर पहले से ही मजबूत लंड की चाह में पनिया गई थी.
कालू के सहलाने के कारण मेरी बीवी की चूत चिपचिपी हो गई और रस छोड़ने लगी.
मेरी बीवी भी गजब की रांड थी.
साली वह चुपचाप कालू के हाथ की हरकत का मजा लेने लगी.
अब वह धीरे से उठा और अपने एक हाथ की उंगली से मेरी बीवी की बुर के दाने को कुरेदने लगा.
फिर उसने चूत के छेद में अपनी उंगली डाल दी और अन्दर बाहर करने लगा.
मैं हैरान था कि मेरी बीवी ने अपनी पैंटी कब उतार दी.
फिर मैंने ध्यान से देखा तो उसने एक डोरी वाली पैंटी पहनी हुई थी … जिसे शायद उसने लेटते समय ही ढीली करके अपनी चूत नंगी कर दी थी.
अब खेल शुरू हुआ.
कालू की उंगली ने मेरी बीवी की चूत को चोदा,तो उसने गर्म होकर कालू का हाथ पकड़ लिया और मुस्कुरा कर उसे देखने लगी.
वे दोनों मस्त ही गए थे और चुदाई के लिए उत्तेजित हो उठे थे.
मेरी बीवी ने कालू से चूत चाटने का इशारा किया.
तो वह नीग्रो झट से बैठ गया और पोजीशन बना कर अपना मुँह मेरी बीवी की चूत पर रख कर कुत्ते की तरह चाटने लगा.
उस बहन के लौड़े की जीभ ही इतनी बड़ी थी कि मेरे लंड से ज्यादा गहराई तक जाकर वह मेरी बीवी को अपनी जुबान से चोदने लगा था.
उसकी खुरदुरी जीभ से चूत में रगड़ लगी, तो मेरी बीवी ‘आह आह उई मम्मी’ करने लगी.
वह खुद अपने हाथ से कालू का लंड उसके कच्छे से निकाल कर सहलाने लगी थी.
मैंने कालू का लंड देखा तो मेरी गांड फट गई.
साला ग्यारह इंच का गधे के लंड जैसा लंड था.
मैं समझ गया कि आज मेरी बीवी की चूत के परखचे उड़ने वाले हैं.
कालू पूरी दमखम से मेरी बीवी की चूत चाटने में लगा हुआ था.
मेरी बीवी ने उससे लंड को बाहर निकालने को कहा तो उसने जल्दी से अपना कच्छा उतार दिया.
माय गॉड क्या लंड था … खासा लम्बा और मोटा लंड देख कर मेरी बीवी की चूत ने तो पानी ही छोड़ दिया होगा.
अब कालू भाई ने उससे लंड चूसने का इशारा किया तो वह कालू का लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.
तभी कालू ने हाथ बढ़ा कर शराब की बोतल उठाई और वह उसे अपने लंड पर टपकाने लगा.
इस तरह से कालू ने करीब 60 mL नीट दारू मेरी बीवी को पिला दी थी, साथ ही वह सिगरेट फूँक रहा था तो मेरी बीवी उसकी सिगरेट से कश लगा कर अपना स्वाद ठीक करती जा रही थी.
करीब दस मिनट तक शराब से भीगा हुआ लंड चूसने के बाद मेरी बीवी नशे में टल्ली हो गई थी.
तभी उस कालू ने भी एक बड़ा सा घूंट पिया और मेरी बीवी के मुँह से मुँह लगा कर उसे और ज्यादा शराब पिला दी.
यह देख कर मैं समझ गया कि बंदा बहुत बड़ा मादरचोद है. यह शराब के नशे में टल्ली करके मेरी बीवी की चूत फाड़ेगा, उससे मेरी बीवी को दर्द का अहसास नहीं होगा.
अब मेरी बीवी कालू को अपनी चूत दिखा कर चोदने को बोली.
कालू ने मेरी बीवी की दोनों टांगों को फैला कर 69 की पोज लेकर उसकी चूत की दरार में अपना लंड रख कर जोरदार धक्का मार दिया.
उसका मूसल लंड मेरी बीवी की बुर को चीरते फाड़ते हुए अन्दर चला गया.
मैंने देखा कि करीब आधा से अधिक लंड बुर में घुस गया था.
मेरी बीवी की चीख न निकल पाए, इसके लिए कालू ने अपने मुँह को उसके मुँह पर जमा दिया था.
कुछ देर बाद मेरी बीवी ने अपनी गांड उठा कर दूसरा धक्का मारने का इशारा दिया.
कालू ने दूसरी बार और करारा धक्का मारा और उसका लंड चूत की जड़ तक जाकर धंस गया.
मेरी बीवी का मुँह बंद था, तो वह अपने दांतों को भींच कर दर्द को बर्दाश्त करने लगी.
करीब एक मिनट बाद मेरी बीवी अपनी गांड उठा कर चोदने को बोलने लगी.
अब कालू मेरी बीवी पर सांड की तरह चढ़ कर ताबड़तोड़ धक्के मारने लगा था.
आप खुद सोचो कि जब ग्यारह इंच का मोटा लंड मेरी बीवी की चूत के अन्दर बाहर जाने लगेगा तो मेरी बीवी का क्या हाल होगा.
साली मरी हुई कुतिया सी बिलबिला रही थी.
बहन की लौड़ी का सारा नशा फट गया था- आह आह फट गई मेरी … आह मर गई साले फ्री की चूत समझ कर चोद रहा है … आह हट जा कमीने!
कालू को उसकी हिन्दी समझ में ही नहीं आ रही थी. वह समझा कि मेरी बीवी को चुदने में मजा आ रहा है. सो वह और जोर से पिल पड़ा.
वैसे ही उस पर दारू का नशा चढ़ा हुआ था और कामांध सांड की तरह वह मेरी बीवी को रांड की तरह चोदने में लगा हुआ था.
कुछ ही देर बाद मेरी बीवी की चूत में जलजला आ गया और अब चिकनाई की वजह से लंड सटासट अन्दर बाहर होने लगा.
और कुछ ही देर में मेरी बीवी को भी मजा आने लगा- आह …और जोर से चोद कलमुँहे … आह मस्त लंड है तेरा … आज चूत चुद कर तृप्त हो गई!
उधर कालू दबा कर मेरी बीवी की चूत को भोसड़ा बनाने की नीयत से चोद रहा था.
उसके नीचे दबी मेरी बीवी खूब मजा ले लेकर अपनी गांड उछाल उछाल कर मोटा लंड गपागप ले रही थी.
करीब चालीस मिनट तक लगातार चोदने के बाद मेरी बीवी निढाल हो गई और वह कालू से लंड को बाहर निकालने को बोलने लगी.
जब कालू ने अपना लंड बाहर निकाला, तब मैंने देखा उसका लंड चूत के रस से एकदम सफेद हुआ पड़ा था.
अब वह मेरी बीवी से घोड़ी बनने को कहने लगा.
जैसे ही मेरी बीवी घोड़ी बनी, कालू भाई ने उसकी गांड के छेद पर अपना लंड रख दिया और धक्का दे मारा.
बीवी की मां चुद गई.
कालू ने अपने हाथ से उसका मुँह दबाया हुआ था तो आवाज नहीं निकल पाई.
कालू ने लगातार दूसरा, तीसरा और ताबड़तोड़ गांड फाड़ सीन क्रियेट कर दिया.
जैसे ही मेरी बीवी के मुँह से कालू का हाथ हटा, वह चीखने लगी- आह मादरचोद साले कालू … बहन के लौड़े जरा आराम से चोद हरामी! तेरी माँ की चूत कुतिया किए जने … मैं मर गयी हरामी साले!
कालू की सेहत पर झांट असर नहीं पड़ रहा था.
करीब आधा घंटा तक गांड चोदने के बाद कालू मेरी बीवी की गांड में ही झड़ गया और अपना लंड बाहर खींच कर कुत्ते की तरह हांफने लगा.
उधर मेरी बीवी की हालत तो खराब हो ही गई थी.
करीब आधा घंटा बाद वे दोनों पुनः उठ गए और एक बार फिर से चुदाई का खेल चालू हो गया.
उन दोनों ने सुबह तक चुदाई का खेल खेला और दोनों थक कर नंगे ही बिस्तर पर सो गए.
जब सुबह मैं उठा तो मैंने अपनी बीवी की बुर देखी.
बुर के नाम पर फटा हुआ भोसड़ा मुझे हँसने पर मजबूर कर रही थी.
मैं पुनः सो गया.
करीब नौ बजे वे दोनों उठे और मुझे सोता समझ कर मेरी बीवी उठी और कालू को बाथरूम में जाने को बोली.
वे दोनों उठ कर बाथरूम में जाकर नंगे नहाने लगे.
नहा धोकर मेरी बीवी ने दूसरा गाउन पहन लिया और सज संवर कर तैयार हो गई.
वह उसके लिए चाय बनाने लगी और दोनों चाय पीकर फिर से भिड़ गए.
ब्लैक डिक नीग्रो सेक्स का खेल फिर शुरू हो गया.
मैंने देखा कि इस बार कालू मेरी बीवी को गोद में बैठा कर उसको चूम चाट रहा था और एक हाथ से उसकी चूची और दूसरे हाथ से उसकी बुर को मसल रहा था.
मेरी बीवी ने उससे अंग्रेजी में पूछा- आज रहोगे ना?
उसने कहा- नहीं, आज की मेरी फ्लाइट है.
मेरी बीवी ने कहा- जाने से पहले मेरी चूत एक बार और फाड़ कर जाना.
वह राजी हो गया और उसने अपने मोटे ब्लैक डिक को मेरी बीवी के हाथ में दे दिया.
बीवी लौड़े को सहलाने लगी और चुदाई का खेल शुरू हो गया.
कालू मेरी बीवी की बुर को बुरी तरह से चूसने चाटने लगा.
वे दोनों 69 में आ गए थे और मेरी बीवी लंड चूस रही थी.
करीब एक घंटा के बाद वे दोनों चुदाई से फारिग होकर अलग हुए.
मेरी बीवी पूर्ण संतुष्ट लग रही थी.
कालू के जाने के बाद मैं उठा और मैंने अपनी बीवी को हंस कर बताया- मैं ही तुम्हारे लिए कालू को लाया था ताकि तुम मजा ले सको.
यह सुनकर मेरी बीवी मुझसे लिपट गई और मुझे प्यार करने लगी.
तो दोस्तो कैसी लगी मेरी ब्लैक डिक नीग्रो सेक्स कहानी, प्लीज जरूर बताए
💦💦💦💦💦
मैंने अपनी फ्रेंड को उसकी बर्थडे पर चोदा
💦💦💦💦💦
GF हिंदी Xxx कहानी में एक बहुत सेक्सी माल लड़की मेरी दोस्त थी. उसने मुझे अपने जन्म दिन पर बुलाया. देर होने पर मैं उसके रुक गया. तो रात को मेरे साथ क्या हुआ?
दोस्तो, मेरा नाम अक्षय है और मैं राँची झारखंड का रहने वाला हूँ.
मेरा लंड 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है, ये आज तक जिसकी भी चूत में गया है … उसको खुश करके ही आया है.
यह GF हिंदी Xxx कहानी एकदम सच्ची है, मैं इस घटना को हर दिन याद करके खुश होता हूँ कि कैसे मैंने अपनी एक फ्रेंड को उसी के घर में चोदा था.
मैं राँची के दोरंडा कॉलेज में पढ़ता हूँ और वहीं की एक लड़की मेरी फ्रेंड है.
उसका नाम जूही है.
उसे देख कर ऐसा लगता है मानो उसके बदन को बस चाट कर खा जाऊं.
अभी भी बस उसको चोदने का बड़ा मन कर रहा है.
यह GF हिंदी Xxx कहानी तब की है, जब मैं अपने घर से कॉलेज जा रहा था.
मैं बेडमिंटन खेलता हूँ और इसी खेल से जूही मेरी फ्रेंड बनी थी.
उसको बेडमिंटन खेलना पसंद था, पर उसको खेलने नहीं आता था.
उसने मुझे खेलते हुए देखा था तो बहुत प्रभावित थी.
कुछ दिनों के बाद उसने मुझसे पूछा- अक्षय, मुझे भी बेडमिंटन खेलना सिख़ा दोगे. मेरा भी खेलने का बड़ा मन करता है, पर यार मुझे आता नहीं है.
मैंने उससे कहा- कि ठीक है, कल से तुम मेरे घर आ जाना मैं तुम्हें वहीं खेलना सिखा दूँगा.
वह मान गई और रोजाना खेलने आने लगी थी.
बस ऐसे ही वह मेरी दोस्त बन गई.
और कुछ ही देर में मेरी बीवी को भी मजा आने लगा- आह …और जोर से चोद कलमुँहे … आह मस्त लंड है तेरा … आज चूत चुद कर तृप्त हो गई!
उधर कालू दबा कर मेरी बीवी की चूत को भोसड़ा बनाने की नीयत से चोद रहा था.
उसके नीचे दबी मेरी बीवी खूब मजा ले लेकर अपनी गांड उछाल उछाल कर मोटा लंड गपागप ले रही थी.
करीब चालीस मिनट तक लगातार चोदने के बाद मेरी बीवी निढाल हो गई और वह कालू से लंड को बाहर निकालने को बोलने लगी.
जब कालू ने अपना लंड बाहर निकाला, तब मैंने देखा उसका लंड चूत के रस से एकदम सफेद हुआ पड़ा था.
अब वह मेरी बीवी से घोड़ी बनने को कहने लगा.
जैसे ही मेरी बीवी घोड़ी बनी, कालू भाई ने उसकी गांड के छेद पर अपना लंड रख दिया और धक्का दे मारा.
बीवी की मां चुद गई.
कालू ने अपने हाथ से उसका मुँह दबाया हुआ था तो आवाज नहीं निकल पाई.
कालू ने लगातार दूसरा, तीसरा और ताबड़तोड़ गांड फाड़ सीन क्रियेट कर दिया.
जैसे ही मेरी बीवी के मुँह से कालू का हाथ हटा, वह चीखने लगी- आह मादरचोद साले कालू … बहन के लौड़े जरा आराम से चोद हरामी! तेरी माँ की चूत कुतिया किए जने … मैं मर गयी हरामी साले!
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उधर मेरी बीवी की हालत तो खराब हो ही गई थी.
करीब आधा घंटा बाद वे दोनों पुनः उठ गए और एक बार फिर से चुदाई का खेल चालू हो गया.
उन दोनों ने सुबह तक चुदाई का खेल खेला और दोनों थक कर नंगे ही बिस्तर पर सो गए.
जब सुबह मैं उठा तो मैंने अपनी बीवी की बुर देखी.
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मैं पुनः सो गया.
करीब नौ बजे वे दोनों उठे और मुझे सोता समझ कर मेरी बीवी उठी और कालू को बाथरूम में जाने को बोली.
वे दोनों उठ कर बाथरूम में जाकर नंगे नहाने लगे.
नहा धोकर मेरी बीवी ने दूसरा गाउन पहन लिया और सज संवर कर तैयार हो गई.
वह उसके लिए चाय बनाने लगी और दोनों चाय पीकर फिर से भिड़ गए.
ब्लैक डिक नीग्रो सेक्स का खेल फिर शुरू हो गया.
मैंने देखा कि इस बार कालू मेरी बीवी को गोद में बैठा कर उसको चूम चाट रहा था और एक हाथ से उसकी चूची और दूसरे हाथ से उसकी बुर को मसल रहा था.
मेरी बीवी ने उससे अंग्रेजी में पूछा- आज रहोगे ना?
उसने कहा- नहीं, आज की मेरी फ्लाइट है.
मेरी बीवी ने कहा- जाने से पहले मेरी चूत एक बार और फाड़ कर जाना.
वह राजी हो गया और उसने अपने मोटे ब्लैक डिक को मेरी बीवी के हाथ में दे दिया.
बीवी लौड़े को सहलाने लगी और चुदाई का खेल शुरू हो गया.
कालू मेरी बीवी की बुर को बुरी तरह से चूसने चाटने लगा.
वे दोनों 69 में आ गए थे और मेरी बीवी लंड चूस रही थी.
करीब एक घंटा के बाद वे दोनों चुदाई से फारिग होकर अलग हुए.
मेरी बीवी पूर्ण संतुष्ट लग रही थी.
कालू के जाने के बाद मैं उठा और मैंने अपनी बीवी को हंस कर बताया- मैं ही तुम्हारे लिए कालू को लाया था ताकि तुम मजा ले सको.
यह सुनकर मेरी बीवी मुझसे लिपट गई और मुझे प्यार करने लगी.
तो दोस्तो कैसी लगी मेरी ब्लैक डिक नीग्रो सेक्स कहानी, प्लीज जरूर बताए
💦💦💦💦💦
मैंने अपनी फ्रेंड को उसकी बर्थडे पर चोदा
💦💦💦💦💦
GF हिंदी Xxx कहानी में एक बहुत सेक्सी माल लड़की मेरी दोस्त थी. उसने मुझे अपने जन्म दिन पर बुलाया. देर होने पर मैं उसके रुक गया. तो रात को मेरे साथ क्या हुआ?
दोस्तो, मेरा नाम अक्षय है और मैं राँची झारखंड का रहने वाला हूँ.
मेरा लंड 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है, ये आज तक जिसकी भी चूत में गया है … उसको खुश करके ही आया है.
यह GF हिंदी Xxx कहानी एकदम सच्ची है, मैं इस घटना को हर दिन याद करके खुश होता हूँ कि कैसे मैंने अपनी एक फ्रेंड को उसी के घर में चोदा था.
मैं राँची के दोरंडा कॉलेज में पढ़ता हूँ और वहीं की एक लड़की मेरी फ्रेंड है.
उसका नाम जूही है.
उसे देख कर ऐसा लगता है मानो उसके बदन को बस चाट कर खा जाऊं.
अभी भी बस उसको चोदने का बड़ा मन कर रहा है.
यह GF हिंदी Xxx कहानी तब की है, जब मैं अपने घर से कॉलेज जा रहा था.
मैं बेडमिंटन खेलता हूँ और इसी खेल से जूही मेरी फ्रेंड बनी थी.
उसको बेडमिंटन खेलना पसंद था, पर उसको खेलने नहीं आता था.
उसने मुझे खेलते हुए देखा था तो बहुत प्रभावित थी.
कुछ दिनों के बाद उसने मुझसे पूछा- अक्षय, मुझे भी बेडमिंटन खेलना सिख़ा दोगे. मेरा भी खेलने का बड़ा मन करता है, पर यार मुझे आता नहीं है.
मैंने उससे कहा- कि ठीक है, कल से तुम मेरे घर आ जाना मैं तुम्हें वहीं खेलना सिखा दूँगा.
वह मान गई और रोजाना खेलने आने लगी थी.
बस ऐसे ही वह मेरी दोस्त बन गई.
जब वह मेरे साथ बेडमिंटन खेलती तो क्या माल लगती थी यार … उसके बूब्स जब ऊपर नीचे होते तो लगता उसी टाइम उसे पकड़ कर उसके दूध चूसने लगूँ.
दिसंबर महीने की बात है.
तब शाम के टाइम हम लोग बेडमिंटन खेलते थे.
उस दिन मैं खेलते खेलते थक कर बैठ गया और बोला- जूही, थोड़ी देर रुक जा, मैं थक गया हूँ.
वह मेरे पास आई और मुझे जोर से उठाने लगी.
मैंने अपना पूरा भार उस पर पर डाल दिया और उसी से चिपक गया.
मैं बोला- नहीं अब नहीं, थोड़ा रुक जा यार!
वह बोली- कल मेरा बर्थडे है, तो मुझे अभी से गिफ्ट दे दे, चल खेल मेरे साथ!
तो मैं उसे मना नहीं कर पाया और खेलने लगा.
कुछ देर बाद वह थक गई.
फिर उसने मुझे अपने घर आने के लिए बोला.
वह बोली- कल तुम मेरे घर मेरे बर्थडे की पार्टी में आओगे न!
मैंने हां कह दिया.
जब मैं उसके घर गया तब शाम हो गई थी.
वह शॉर्ट्स में थी.
ऐसा लग रहा था मानो उसका फिगर सिर्फ चोदने के लिए ही बना है.
वह मुझसे आ कर गले लग गई.
उसके बूब्स अपनी छाती पर गड़ते हुए महसूस करके मेरा लंड उसी टाइम कड़क हो गया.
मुझे ऐसा लगा कि मेरा लंड अभी बाहर आ कर बोलेगा कि मुझे मुँह ले लो जूही रानी.
मेरे और उसके अलावा उसके घर में उसके पापा मम्मी और उसकी बहन थी.
सब लोग केक कट करने के बाद खाना खाने लगे.
मैं भी खाना खाकर अपने घर जाने लगा तो वह बोली- आज यहीं रुक जा … सुबह चले जाना.
उसके पेरेंट्स भी ज़िद करने लगे, उसके पापा बोलने लगे- तुम ही तो बस जूही के फ्रेंड हो! रुक जाओ बेटा!
मैंने भी मना नहीं किया और रुक गया.
जूही के पेरेंट्स और उसकी बहन एक रूम में सो गए.
जूही अपने रूम में!
मेरे लिए उन्होंने एक अलग बेड लगा दिया था.
मैंने सोचा कि काश आज जूही मेरे साथ सो जाती.
मैं अपने बेड पर लेट गया.
कुछ देर बाद जूही आई और बोली- चलो!
मैंने पूछा- कहां?
वह बोली- चलो न!
मैंने कहा- ओके.
मैं उठ कर उसके रूम में चला गया.
वह बोली- मुझे पता है कि तुम बोर हो रहे होगे वहां, इसलिए तुम मेरे साथ सो हम दोनों बातें करेंगे और यहीं सो जाएंगे.
इस पर मैंने आशंका जताते हुए कहा- पर तेरे पेरेंट्स?
तो वह बोली- वे कुछ नहीं बोलेंगे, तुम यहीं सो जाओ.
उसका बेड एक इंसान के लिए ही था, पर मैं भी वहीं सो गया.
मैं जूही की तरफ मुँह करके सोया तो उसके बूब्स मेरे हाथ में टच हो रहे थे और उसकी जांघें मेरे पैर के ऊपर थीं.
तो मैं थोड़ा डर रहा था.
तभी जूही बोली- क्या इससे पहले लड़की के साथ नहीं सोया है?
मैंने कहा- नहीं.
तब जूही बोली- थैंक्स, मुझे बेडमिंटन सिखाने के लिए … और मेरे फ्रेंड बनने के लिए.
वह मुझसे बात करने लगी कि तभी मेरा हाथ गलती से उसकी कमर पर चला गया.
मैं एक बार को फिर से डर गया.
तो वह बोली- रख लो कोई बात नहीं!
मैंने कहा- पक्का!
‘हां जो चाहो … वह कर सकते हो. मैं कुछ नहीं बोलूँगी!’
अब मैं समझ गया कि इसे आज मुझसे चुदवाना ही है.
मैंने कहा- जूही, तुम सच में बहुत हॉट हो और मैं पहले दिन से ही तुमको बड़ी हसरत से देखता आ रहा हूँ.
मेरी इस बात वह शर्मा गई.
मैंने सही मौका देखा और उसको किस करने लगा.
वह भी मेरा साथ देने लगी थी.
मुझे तो ऐसा लग रहा था कि मुझसे ज्यादा वह लंड की भूखी हो.
मैं उसे किस करते करते उसके बूब्स को दबाने लगा.
तो वह ‘आह उऊह आह …’ की कामुक आवाज़ करने लगी.
मैंने कहा- जूही, तेरे बूब्स पर मैं पहले से नज़र रखे हुए था, सच में कितने मस्त और रसीले बूब्स हैं. अब तक तो मैं कुछ कर ही नहीं पाया, पर आज मौका मिला है तो जो मैं चाहूँ कर लूँ न … रोकेगी तो नहीं न!
वह बोली- मेरे बर्थडे में तू गिफ्ट ले रहा है.
मैंने हंस कर उसकी चुम्मी ली तो वह भी हंसने लगी.
मैं अब समझ गया कि देर करने का कोई मतलब नहीं है.
मैंने अगले कुछ ही पलों में उसको पूरी नंगी कर दिया और खुद को भी नंगा कर दिया.
अब मैं उसको चोदने के नजरिए से किस कर रहा था और उसके बूब्स दबा रहा था.
वह भी चुदासी हो गई और उसने मेरा लंड पकड़ लिया.
जूही लंड हिलाने लगी तो मैं समझ गया कि ये साली मुझसे ज्यादा गर्म हुई पड़ी है, इसको जल्दी ही चोदना पड़ेगा.
मैंने उससे कहा कि 69 जानती है!
वह बोली- नहीं, ये क्या होता है?
मैंने उसे समझाया और करने को बोला.
वह झट से तैयार हो गई और अपने लेटने की पोजीशन को बदल कर मेरे लंड के पास मुँह ले गई.
मैं उसकी बुर में अपनी पूरी जीभ घुसा कर उसको मजा देने लगा और वह मेरे पूरे लंड को अपने मुँह में लेने लगी.
इतना सब करते करते अचानक से वह बोली- जान, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है, ऐसा ही करते रहो. आह … कबसे मैं इस पल का वेट कर रही थी. आह उहह … और जोर से अन्दर तक जीभ को डालो … सच में यार तुम मस्त हो.
यह सब कहते हुए वह मेरे लंड को और जोर जोर से हिलाने लगी.
कुछ ही देर बाद वह अकड़ती हुई झड़ गई और उसका पूरा पानी मेरे मुँह पर आ गिरा.
वह शांत हो गई थी, पर अभी भी मैं पूरा गर्म था.
दिसंबर महीने की बात है.
तब शाम के टाइम हम लोग बेडमिंटन खेलते थे.
उस दिन मैं खेलते खेलते थक कर बैठ गया और बोला- जूही, थोड़ी देर रुक जा, मैं थक गया हूँ.
वह मेरे पास आई और मुझे जोर से उठाने लगी.
मैंने अपना पूरा भार उस पर पर डाल दिया और उसी से चिपक गया.
मैं बोला- नहीं अब नहीं, थोड़ा रुक जा यार!
वह बोली- कल मेरा बर्थडे है, तो मुझे अभी से गिफ्ट दे दे, चल खेल मेरे साथ!
तो मैं उसे मना नहीं कर पाया और खेलने लगा.
कुछ देर बाद वह थक गई.
फिर उसने मुझे अपने घर आने के लिए बोला.
वह बोली- कल तुम मेरे घर मेरे बर्थडे की पार्टी में आओगे न!
मैंने हां कह दिया.
जब मैं उसके घर गया तब शाम हो गई थी.
वह शॉर्ट्स में थी.
ऐसा लग रहा था मानो उसका फिगर सिर्फ चोदने के लिए ही बना है.
वह मुझसे आ कर गले लग गई.
उसके बूब्स अपनी छाती पर गड़ते हुए महसूस करके मेरा लंड उसी टाइम कड़क हो गया.
मुझे ऐसा लगा कि मेरा लंड अभी बाहर आ कर बोलेगा कि मुझे मुँह ले लो जूही रानी.
मेरे और उसके अलावा उसके घर में उसके पापा मम्मी और उसकी बहन थी.
सब लोग केक कट करने के बाद खाना खाने लगे.
मैं भी खाना खाकर अपने घर जाने लगा तो वह बोली- आज यहीं रुक जा … सुबह चले जाना.
उसके पेरेंट्स भी ज़िद करने लगे, उसके पापा बोलने लगे- तुम ही तो बस जूही के फ्रेंड हो! रुक जाओ बेटा!
मैंने भी मना नहीं किया और रुक गया.
जूही के पेरेंट्स और उसकी बहन एक रूम में सो गए.
जूही अपने रूम में!
मेरे लिए उन्होंने एक अलग बेड लगा दिया था.
मैंने सोचा कि काश आज जूही मेरे साथ सो जाती.
मैं अपने बेड पर लेट गया.
कुछ देर बाद जूही आई और बोली- चलो!
मैंने पूछा- कहां?
वह बोली- चलो न!
मैंने कहा- ओके.
मैं उठ कर उसके रूम में चला गया.
वह बोली- मुझे पता है कि तुम बोर हो रहे होगे वहां, इसलिए तुम मेरे साथ सो हम दोनों बातें करेंगे और यहीं सो जाएंगे.
इस पर मैंने आशंका जताते हुए कहा- पर तेरे पेरेंट्स?
तो वह बोली- वे कुछ नहीं बोलेंगे, तुम यहीं सो जाओ.
उसका बेड एक इंसान के लिए ही था, पर मैं भी वहीं सो गया.
मैं जूही की तरफ मुँह करके सोया तो उसके बूब्स मेरे हाथ में टच हो रहे थे और उसकी जांघें मेरे पैर के ऊपर थीं.
तो मैं थोड़ा डर रहा था.
तभी जूही बोली- क्या इससे पहले लड़की के साथ नहीं सोया है?
मैंने कहा- नहीं.
तब जूही बोली- थैंक्स, मुझे बेडमिंटन सिखाने के लिए … और मेरे फ्रेंड बनने के लिए.
वह मुझसे बात करने लगी कि तभी मेरा हाथ गलती से उसकी कमर पर चला गया.
मैं एक बार को फिर से डर गया.
तो वह बोली- रख लो कोई बात नहीं!
मैंने कहा- पक्का!
‘हां जो चाहो … वह कर सकते हो. मैं कुछ नहीं बोलूँगी!’
अब मैं समझ गया कि इसे आज मुझसे चुदवाना ही है.
मैंने कहा- जूही, तुम सच में बहुत हॉट हो और मैं पहले दिन से ही तुमको बड़ी हसरत से देखता आ रहा हूँ.
मेरी इस बात वह शर्मा गई.
मैंने सही मौका देखा और उसको किस करने लगा.
वह भी मेरा साथ देने लगी थी.
मुझे तो ऐसा लग रहा था कि मुझसे ज्यादा वह लंड की भूखी हो.
मैं उसे किस करते करते उसके बूब्स को दबाने लगा.
तो वह ‘आह उऊह आह …’ की कामुक आवाज़ करने लगी.
मैंने कहा- जूही, तेरे बूब्स पर मैं पहले से नज़र रखे हुए था, सच में कितने मस्त और रसीले बूब्स हैं. अब तक तो मैं कुछ कर ही नहीं पाया, पर आज मौका मिला है तो जो मैं चाहूँ कर लूँ न … रोकेगी तो नहीं न!
वह बोली- मेरे बर्थडे में तू गिफ्ट ले रहा है.
मैंने हंस कर उसकी चुम्मी ली तो वह भी हंसने लगी.
मैं अब समझ गया कि देर करने का कोई मतलब नहीं है.
मैंने अगले कुछ ही पलों में उसको पूरी नंगी कर दिया और खुद को भी नंगा कर दिया.
अब मैं उसको चोदने के नजरिए से किस कर रहा था और उसके बूब्स दबा रहा था.
वह भी चुदासी हो गई और उसने मेरा लंड पकड़ लिया.
जूही लंड हिलाने लगी तो मैं समझ गया कि ये साली मुझसे ज्यादा गर्म हुई पड़ी है, इसको जल्दी ही चोदना पड़ेगा.
मैंने उससे कहा कि 69 जानती है!
वह बोली- नहीं, ये क्या होता है?
मैंने उसे समझाया और करने को बोला.
वह झट से तैयार हो गई और अपने लेटने की पोजीशन को बदल कर मेरे लंड के पास मुँह ले गई.
मैं उसकी बुर में अपनी पूरी जीभ घुसा कर उसको मजा देने लगा और वह मेरे पूरे लंड को अपने मुँह में लेने लगी.
इतना सब करते करते अचानक से वह बोली- जान, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है, ऐसा ही करते रहो. आह … कबसे मैं इस पल का वेट कर रही थी. आह उहह … और जोर से अन्दर तक जीभ को डालो … सच में यार तुम मस्त हो.
यह सब कहते हुए वह मेरे लंड को और जोर जोर से हिलाने लगी.
कुछ ही देर बाद वह अकड़ती हुई झड़ गई और उसका पूरा पानी मेरे मुँह पर आ गिरा.
वह शांत हो गई थी, पर अभी भी मैं पूरा गर्म था.
❤1
मैंने कहा- अब तुम ऊपर आओ. मैं तुम्हें और सुख दूँगा!
वह बोली- कैसे?
मैंने उसकी बुर के ऊपर अपना लंड दो बार पटक कर मारा और कहा- मुझे किस करो, मुझे अब तुम्हारा छेद फाड़ना है. तुम मुझे किस करती रहना, रुकना मत.
वह बोली- ठीक है.
वह शुरू हो गई.
मैं उसकी बुर के अन्दर अपना लंड डालने लगा और धीरे धीरे उसको चुदाई का सुख देने लगा.
वह शुरू में तो कुछ नहीं बोली.
फिर मैंने अचानक से उसकी बुर के अन्दर अपना पूरा लंड घुसेड़ दिया.
वह एकदम से कराह उठी और बोली- आह नहीं नहीं … अक्षय मत करो … बहुत दर्द हो रहा है प्लीज रुक जाओ … दर्द हो रहा है.
मैंने कहा- जान बस दो मिनट लगेंगे. उसके बाद तुमको जन्नत का सुख मिलेगा.
किसी तरह से मैंने उसको मनाया और कुछ देर उसकी चूत के अन्दर अपना लंड डाल कर रुक गया.
मैं उसको सहलाने लगा और चूमने लगा.
जब वह शांत हुई तो मैं जोर जोर से धक्का देने लगा.
मुझे ऐसा लग रहा था मानो किसी ने उसके बूब्स की जगह दो बॉल रख दी हों.
उसको चोदने में मुझे बहुत ज्यादा खुशी मिलने लगी थी.
मैं बहुत देर तक उसको चोदता रहा.
वह भी मजा लेती हुई अपनी कमर को चला रही थी.
फिर मैं उसकी चूत के अन्दर ही झड़ गया और उसके ऊपर लेट गया.
कुछ मिनट बाद उसने मेरा लंड पुनः हिलाना शुरू कर दिया.
वह बोली- तुम मुझे अपनी बांहों में उठा कर चोदो न, वैसा मैंने बहुत बार पॉर्न वीडियो में देखा है.
मैंने कहा- अरे वाह तुम पॉर्न भी देखती हो और तुम्हें 69 नहीं पता था?
तो वह हंसने लगी.
मैं समझ गया कि यह पूरी तरह से चूत चुदाई की कला को जानती है, बस नाटक कर रही थी.
मैंने उसको अपनी बांहों में उठा लिया और उससे कहा- जब भी मेरा लंड बाहर निकले, तुम कमर को पुश करके अन्दर करना.
वह बोली- ओके.
फिर उसने मेरा लंड अपनी बुर में घुसड़वाना शुरू कर दिया और मैं उसको एकदम पॉर्न वीडियो के जैसा चोदने लगा.
मैंने उसे इतना ज्यादा चोदा कि उसकी बुर लाल भोसड़ा हो गई थी.
कुछ देर बाद हम दोनों पुनः झड़ गए और मैं उसके साथ नंगा ही सो गया.
सुबह 5 बजे वह मेरे बगल में नंगी लेटी हुई थी.
मेरा मन उसको फिर से चोदने का हुआ.
तो मैंने उसको एक लिप किस किया और उसकी बुर में लंड घुसाने लगा.
उसकी नींद खुल गई और वह बोली- यार, तुम नींद में क्यों डाल रहे हो, अभी सब जाग गए होंगे … अब तुम अपने बेडरूम में जाओ.
मैंने कहा- तुमको चोदने के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ.
मैं उसको किस करने लगा.
वह भी मेरा साथ देने लगी और मेरे ऊपर आ गई.
जूही अपने छेद में मेरे लंड को फिट करके ऐसे उछलने लगी थी मानो उसकी बुर मेरे लंड के लिए ही बनी हो.
कुछ देर बाद मेरा माल निकल गया और वह बोली- अब बस, चलो कपड़े पहनो और अपने बेडरूम में जाओ.
कपड़े पहन कर मैं अपने बेडरूम की तरफ जाने लगा.
मैं अपने कमरे के बेड की तरफ जा ही रहा था कि जूही की बहन मेरे बेड में बैठी थी.
मुझे देख कर बोली- आप रात भर दीदी के साथ सोए थे न!
तो मैं डर गया और बोला- नहीं नहीं, अभी गया था जस्ट!
वह बोली- मैंने सब देखा कि आप दीदी की कैसे ले रहे थे. अब आपको मेरी भी वैसे ही लेनी होगी … तभी आप बचोगे … नहीं तो मैं पापा को सब बता दूँगी.
मैं बोला- ठीक है, मैं तुम्हें बाद में मिलूँगा. अभी मुझे सोने दो.
वह हंस दी और बोली- मैं जानती हूँ कि आपको मेरे साथ सेक्स करने का मन है पर आप की फट रही है … है न! डरिए मत दीदी और मैं एक दूसरे से बिंदास खुली हुई हैं.
मैं समझ गया कि यह तो साला रंडीखाना है.
बस मैं जूही की बहन के साथ लेट गया और उसके कुछ ही देर बाद मैं जन्नत में सैर कर रहा था.
वह जन्नत की सैर किस तरह से हुई, उसकी जवानी का मजा लेने की, पूरी चुदाई की कहानी अगले भाग में लिखूँगा.
💦💦💦💦💦
ट्रेन में मिली बुर्के वाली भाभी की होटल में चुदाई
💦💦💦💦💦
हॉट भाभी पोर्न कहानी में मुंबई की लोकल ट्रेन में मेरी दोस्ती पर्दे वाली एक भाभी से हुई. हमने होटल में मिलकर चुदाई का मजा लेने का प्रोग्राम बनाया.
आप सभी को मेरा नमस्कार.
मैं जतिन हूँ मुंबई से!
मेरे साथ कुछ दिन पहले की हुई सच्ची घटना है यह!
मैं उम्मीद करता हूं कि आपको बहुत पसंद आएगी.
मैं एक 5 फीट 8 इंच का नौजवान हूँ. मेरी उम्र 25 साल है.
दिखने में भी मैं काफी अच्छा हूँ.
मेरा लंड 7 इंच से ज्यादा बड़ा है और ये करीब 3 इंच मोटा है.
अब लड़के, लड़कियां, मर्द, औरतें और ख़ास कर भाभियां अभी से अपनी अंडरवियर में हाथ डाल लें.
यह करीब 3 महीने पहले की बात है.
मैं और मेरा एक दोस्त हम दोनों मुंबई के बस स्टैन्ड से लौट रहे थे.
करीब रात के एक बजे का समय था.
दादर से हम दोनों ने कल्याण के लिए लोकल ट्रेन से सफर करना शुरू किया.
कुछ देर बाद कुर्ला स्टेशन आया और एक खूबसूरत सी भाभी ने ट्रेन में अपना कदम रखा.
वह बुर्का पहन कर चढ़ी ही थी कि उसकी नजरें मेरी नजरों से टकरा गईं क्योंकि उसने अपना नकाब हटाया हुआ था.
वह बोली- कैसे?
मैंने उसकी बुर के ऊपर अपना लंड दो बार पटक कर मारा और कहा- मुझे किस करो, मुझे अब तुम्हारा छेद फाड़ना है. तुम मुझे किस करती रहना, रुकना मत.
वह बोली- ठीक है.
वह शुरू हो गई.
मैं उसकी बुर के अन्दर अपना लंड डालने लगा और धीरे धीरे उसको चुदाई का सुख देने लगा.
वह शुरू में तो कुछ नहीं बोली.
फिर मैंने अचानक से उसकी बुर के अन्दर अपना पूरा लंड घुसेड़ दिया.
वह एकदम से कराह उठी और बोली- आह नहीं नहीं … अक्षय मत करो … बहुत दर्द हो रहा है प्लीज रुक जाओ … दर्द हो रहा है.
मैंने कहा- जान बस दो मिनट लगेंगे. उसके बाद तुमको जन्नत का सुख मिलेगा.
किसी तरह से मैंने उसको मनाया और कुछ देर उसकी चूत के अन्दर अपना लंड डाल कर रुक गया.
मैं उसको सहलाने लगा और चूमने लगा.
जब वह शांत हुई तो मैं जोर जोर से धक्का देने लगा.
मुझे ऐसा लग रहा था मानो किसी ने उसके बूब्स की जगह दो बॉल रख दी हों.
उसको चोदने में मुझे बहुत ज्यादा खुशी मिलने लगी थी.
मैं बहुत देर तक उसको चोदता रहा.
वह भी मजा लेती हुई अपनी कमर को चला रही थी.
फिर मैं उसकी चूत के अन्दर ही झड़ गया और उसके ऊपर लेट गया.
कुछ मिनट बाद उसने मेरा लंड पुनः हिलाना शुरू कर दिया.
वह बोली- तुम मुझे अपनी बांहों में उठा कर चोदो न, वैसा मैंने बहुत बार पॉर्न वीडियो में देखा है.
मैंने कहा- अरे वाह तुम पॉर्न भी देखती हो और तुम्हें 69 नहीं पता था?
तो वह हंसने लगी.
मैं समझ गया कि यह पूरी तरह से चूत चुदाई की कला को जानती है, बस नाटक कर रही थी.
मैंने उसको अपनी बांहों में उठा लिया और उससे कहा- जब भी मेरा लंड बाहर निकले, तुम कमर को पुश करके अन्दर करना.
वह बोली- ओके.
फिर उसने मेरा लंड अपनी बुर में घुसड़वाना शुरू कर दिया और मैं उसको एकदम पॉर्न वीडियो के जैसा चोदने लगा.
मैंने उसे इतना ज्यादा चोदा कि उसकी बुर लाल भोसड़ा हो गई थी.
कुछ देर बाद हम दोनों पुनः झड़ गए और मैं उसके साथ नंगा ही सो गया.
सुबह 5 बजे वह मेरे बगल में नंगी लेटी हुई थी.
मेरा मन उसको फिर से चोदने का हुआ.
तो मैंने उसको एक लिप किस किया और उसकी बुर में लंड घुसाने लगा.
उसकी नींद खुल गई और वह बोली- यार, तुम नींद में क्यों डाल रहे हो, अभी सब जाग गए होंगे … अब तुम अपने बेडरूम में जाओ.
मैंने कहा- तुमको चोदने के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ.
मैं उसको किस करने लगा.
वह भी मेरा साथ देने लगी और मेरे ऊपर आ गई.
जूही अपने छेद में मेरे लंड को फिट करके ऐसे उछलने लगी थी मानो उसकी बुर मेरे लंड के लिए ही बनी हो.
कुछ देर बाद मेरा माल निकल गया और वह बोली- अब बस, चलो कपड़े पहनो और अपने बेडरूम में जाओ.
कपड़े पहन कर मैं अपने बेडरूम की तरफ जाने लगा.
मैं अपने कमरे के बेड की तरफ जा ही रहा था कि जूही की बहन मेरे बेड में बैठी थी.
मुझे देख कर बोली- आप रात भर दीदी के साथ सोए थे न!
तो मैं डर गया और बोला- नहीं नहीं, अभी गया था जस्ट!
वह बोली- मैंने सब देखा कि आप दीदी की कैसे ले रहे थे. अब आपको मेरी भी वैसे ही लेनी होगी … तभी आप बचोगे … नहीं तो मैं पापा को सब बता दूँगी.
मैं बोला- ठीक है, मैं तुम्हें बाद में मिलूँगा. अभी मुझे सोने दो.
वह हंस दी और बोली- मैं जानती हूँ कि आपको मेरे साथ सेक्स करने का मन है पर आप की फट रही है … है न! डरिए मत दीदी और मैं एक दूसरे से बिंदास खुली हुई हैं.
मैं समझ गया कि यह तो साला रंडीखाना है.
बस मैं जूही की बहन के साथ लेट गया और उसके कुछ ही देर बाद मैं जन्नत में सैर कर रहा था.
वह जन्नत की सैर किस तरह से हुई, उसकी जवानी का मजा लेने की, पूरी चुदाई की कहानी अगले भाग में लिखूँगा.
💦💦💦💦💦
ट्रेन में मिली बुर्के वाली भाभी की होटल में चुदाई
💦💦💦💦💦
हॉट भाभी पोर्न कहानी में मुंबई की लोकल ट्रेन में मेरी दोस्ती पर्दे वाली एक भाभी से हुई. हमने होटल में मिलकर चुदाई का मजा लेने का प्रोग्राम बनाया.
आप सभी को मेरा नमस्कार.
मैं जतिन हूँ मुंबई से!
मेरे साथ कुछ दिन पहले की हुई सच्ची घटना है यह!
मैं उम्मीद करता हूं कि आपको बहुत पसंद आएगी.
मैं एक 5 फीट 8 इंच का नौजवान हूँ. मेरी उम्र 25 साल है.
दिखने में भी मैं काफी अच्छा हूँ.
मेरा लंड 7 इंच से ज्यादा बड़ा है और ये करीब 3 इंच मोटा है.
अब लड़के, लड़कियां, मर्द, औरतें और ख़ास कर भाभियां अभी से अपनी अंडरवियर में हाथ डाल लें.
यह करीब 3 महीने पहले की बात है.
मैं और मेरा एक दोस्त हम दोनों मुंबई के बस स्टैन्ड से लौट रहे थे.
करीब रात के एक बजे का समय था.
दादर से हम दोनों ने कल्याण के लिए लोकल ट्रेन से सफर करना शुरू किया.
कुछ देर बाद कुर्ला स्टेशन आया और एक खूबसूरत सी भाभी ने ट्रेन में अपना कदम रखा.
वह बुर्का पहन कर चढ़ी ही थी कि उसकी नजरें मेरी नजरों से टकरा गईं क्योंकि उसने अपना नकाब हटाया हुआ था.
❤1
उसी पल मैंने एक क्यूट सी स्माइल पास करते हुए उन्हें सीट ऑफर की.
रात में ट्रेन में इतनी भीड़ नहीं थी.
वे मेरे करीब ही बैठ गईं.
वे एकदम चुप थीं.
पर उनसे ज्यादा देर चुप नहीं रहा गया.
उन्होंने मुझसे बात करनी शुरू करते हुए हैलो कहा.
मैंने भी उन्हें हैलो कहा.
उन्होंने पूछा- किधर जा रहे हो?
मैंने लंबी सांस भरते हुए कहा- जहां नसीब ले जाए!
वे हंस दीं और बोली- हुंअ … इंटरेस्टिंग पर्सन … क्या नाम है तुम्हारा!
मैंने बताते हुए कहा- आप को क्या लगता है कि मुझे देख कर आपको क्या नाम अच्छा लगेगा?
वे बोलीं- मतलब?
मैंने कहा- बंदे को आप जो भी नाम देना चाहें … मैं उसी को रख लूँगा.
भाभी फिर से हंस दीं.
फिर उन्होंने मुझसे मेरी पढ़ाई के बारे में पूछ लिया और इस तरह से हमारे बीच बातचीत होना शुरू हो गई.
बातों ही बातों में उन्होंने मुझे जॉब के लिए पूछ लिया.
मैंने कहां- हाँ करता तो हूँ, पर अभी मैं और अच्छी जॉब देख रहा हूँ.
उस पर उन्होंने मुझसे कहा- तुम अपना रेज़्यूमे मुझे मेल कर दो, मैं कुछ देखती हूँ.
यह कहते हुए भाभी ने अपनी मेल आईडी मुझे बता दी.
मैंने उसी वक्त उन्हें मेल सेंड करके अपना रेज़्यूमे भेज दिया.
फिर हमारा स्टेशन आया तो हम सब उतर गए.
फिर करीब एक घंटा बाद मैं अपने फ्रेंड को बस में बैठा कर अपने घर जा रहा था.
तभी एक अंजान नंबर से मुझे व्हाट्सैप पर मैसेज आया ‘हाय सन्नो हियर, अभी थोड़ी देर पहले मैंने तुम्हारा रेज़्यूमे देखा!’
यह पढ़ते ही मैं खुश हो गया कि भाभी ने अपना नाम बताते हुए मैसेज किया है.
मैं उनसे मैसेज पर ही बात करने लगा.
अब हम दोनों के बीच मस्ती की बातें होने लगीं.
मैंने उनका नंबर सेव कर लिया और हमारी बातें परवान चढ़ने लगीं.
कुछ दिन में ही हम दोनों एक दूसरे के प्रति आकर्षित होने लगे.
फोन पर भी हमारी बात होने लगी थी.
कभी कभी मिल भी लेते और मूवी आदि भी देखने चले जाते.
इस तरह से हमारे बीच थोड़ा थोड़ा रोमांस भी होने लगा था.
अब जल्दी ही हमारे बीच कुछ इस तरह की आग लग गई थी कि सिर्फ मिलने से नहीं बुझ रही थी.
इस बात को हम दोनों ही महसूस करने लगे थे.
एक रात छत पर भाभी और मैं फोन पर बात कर रहे थे.
हम दोनों ने मिलने का प्लान किया.
हमारे बीच यह तय हुआ कि हम दोनों किसी होटल में जाएंगे.
उसी रात हम दोनों आपस में बातें करने लगे कि कमरे में जाकर क्या करना है.
अब इस बात पर न तो भाभी ही कुछ कह रही थीं और न ही मैं कुछ कह रहा था कि कमरे में जाकर करना क्या है.
जबकि हम दोनों ही समझ रहे थे कि उधर हम दोनों को चुदाई करने का खुल कर मौका मिलेगा.
भाभी मेरी तरफ देख कर हंसने लगीं और मेरे मजे लेने लगीं- तो बताओ न उधर जाकर क्या करना है?
मैंने कहा- उधर आपको मैं जीवन में आनन्द प्राप्त करने का एक गूढ़ रहस्य बताऊंगा.
भाभी बोलीं- तो वह रहस्य तो तुम इधर फोन पर भी बता सकते हो?
मैंने कहा- नहीं, वह अकेले और एकांत वाली जगह में ही बताया जाता है!
भाभी ने फिर से चुटकी ली- तो इधर भी तो हम दोनों अकेले में ही हैं और इधर एकांत भी है!
मैंने दिमाग लगाया कि भाभी मेरी ले रही हैं. अब कुछ ऐसा करना पड़ेगा … जिससे भाभी खुल जाएं.
तो मैंने कहा- ओके … तो क्या आप उस रहस्य को जाने के लिए अभी तैयार हैं?
भाभी मुस्कुराईं और बोलीं- हाँ मगर पहले बताओ तो!
मैंने कहा- आपको उस रहस्य को जाने के लिए एक अनुष्ठान करना है और उस अनुष्ठान में आपको अपने सारे कपड़े उतारने पड़ेंगे … तो बताइए भाभी जी क्या आप अभी तैयार हैं?
भाभी हंस पड़ीं और बोलीं- तुम सच में बहुत चालू पुर्जा हो. चलो मैं समझ गई कि तुमको मेरे साथ क्या करना है!
अब मैंने डोर पकड़ ली और कहा- अच्छा तो बताइए कि आपको क्या समझ में आ गया है?
भाभी छूटते ही बोलीं- तुमको मुझे चोदना है … सीधे सीधे बोलो न यार!
मैंने उनके मुँह से चोदना शब्द सुना तो मैंने कहा- या यूं कहें कि आपको मेरे साथ चुदवाना है!
वे हो हो करके हंसने लगीं और हम दोनों के बीच सेक्स की बातें होने लगीं.
कुछ ही देर में हमारे बीच इतनी ज्यादा बेचैनी हो गई थी कि क्या ही बताऊं.
उनमें से एक बात यह भी भाभी ने कही थी कि उन्हें हार्डकोर सेक्स बहुत पसंद है.
जब मैंने उनसे उसकी डिटेल में जानना चाहा तो उन्होंने वही सब बताया कि कोई शहद लगा कर चाटे या बेल्ट से मारे या मोम टपकाते हुए दूध चूसे. यह सब जानकर मैं मन ही मन प्लान बनाने लगा था कि भाभी को कैसे चोदना है.
फिर हम दोनों अलग हुए और सोने लगे.
मगर मुझे तो समझो नींद ही नहीं आ रही थी.
जैसे तैसे वह रात कटी और सवेरा हुआ.
मैंने अपने बैग में एक मोमबत्ती और लाइटर के साथ कुछ कंडोम के पैकेट रखे. फिर याद आया तो साथ में हनी और श्रीखंड भी ले लिया.
अब मैं स्टेशन पर पहुंच गया और भाभी के आने का इंतज़ार करने लगा.
रात में ट्रेन में इतनी भीड़ नहीं थी.
वे मेरे करीब ही बैठ गईं.
वे एकदम चुप थीं.
पर उनसे ज्यादा देर चुप नहीं रहा गया.
उन्होंने मुझसे बात करनी शुरू करते हुए हैलो कहा.
मैंने भी उन्हें हैलो कहा.
उन्होंने पूछा- किधर जा रहे हो?
मैंने लंबी सांस भरते हुए कहा- जहां नसीब ले जाए!
वे हंस दीं और बोली- हुंअ … इंटरेस्टिंग पर्सन … क्या नाम है तुम्हारा!
मैंने बताते हुए कहा- आप को क्या लगता है कि मुझे देख कर आपको क्या नाम अच्छा लगेगा?
वे बोलीं- मतलब?
मैंने कहा- बंदे को आप जो भी नाम देना चाहें … मैं उसी को रख लूँगा.
भाभी फिर से हंस दीं.
फिर उन्होंने मुझसे मेरी पढ़ाई के बारे में पूछ लिया और इस तरह से हमारे बीच बातचीत होना शुरू हो गई.
बातों ही बातों में उन्होंने मुझे जॉब के लिए पूछ लिया.
मैंने कहां- हाँ करता तो हूँ, पर अभी मैं और अच्छी जॉब देख रहा हूँ.
उस पर उन्होंने मुझसे कहा- तुम अपना रेज़्यूमे मुझे मेल कर दो, मैं कुछ देखती हूँ.
यह कहते हुए भाभी ने अपनी मेल आईडी मुझे बता दी.
मैंने उसी वक्त उन्हें मेल सेंड करके अपना रेज़्यूमे भेज दिया.
फिर हमारा स्टेशन आया तो हम सब उतर गए.
फिर करीब एक घंटा बाद मैं अपने फ्रेंड को बस में बैठा कर अपने घर जा रहा था.
तभी एक अंजान नंबर से मुझे व्हाट्सैप पर मैसेज आया ‘हाय सन्नो हियर, अभी थोड़ी देर पहले मैंने तुम्हारा रेज़्यूमे देखा!’
यह पढ़ते ही मैं खुश हो गया कि भाभी ने अपना नाम बताते हुए मैसेज किया है.
मैं उनसे मैसेज पर ही बात करने लगा.
अब हम दोनों के बीच मस्ती की बातें होने लगीं.
मैंने उनका नंबर सेव कर लिया और हमारी बातें परवान चढ़ने लगीं.
कुछ दिन में ही हम दोनों एक दूसरे के प्रति आकर्षित होने लगे.
फोन पर भी हमारी बात होने लगी थी.
कभी कभी मिल भी लेते और मूवी आदि भी देखने चले जाते.
इस तरह से हमारे बीच थोड़ा थोड़ा रोमांस भी होने लगा था.
अब जल्दी ही हमारे बीच कुछ इस तरह की आग लग गई थी कि सिर्फ मिलने से नहीं बुझ रही थी.
इस बात को हम दोनों ही महसूस करने लगे थे.
एक रात छत पर भाभी और मैं फोन पर बात कर रहे थे.
हम दोनों ने मिलने का प्लान किया.
हमारे बीच यह तय हुआ कि हम दोनों किसी होटल में जाएंगे.
उसी रात हम दोनों आपस में बातें करने लगे कि कमरे में जाकर क्या करना है.
अब इस बात पर न तो भाभी ही कुछ कह रही थीं और न ही मैं कुछ कह रहा था कि कमरे में जाकर करना क्या है.
जबकि हम दोनों ही समझ रहे थे कि उधर हम दोनों को चुदाई करने का खुल कर मौका मिलेगा.
भाभी मेरी तरफ देख कर हंसने लगीं और मेरे मजे लेने लगीं- तो बताओ न उधर जाकर क्या करना है?
मैंने कहा- उधर आपको मैं जीवन में आनन्द प्राप्त करने का एक गूढ़ रहस्य बताऊंगा.
भाभी बोलीं- तो वह रहस्य तो तुम इधर फोन पर भी बता सकते हो?
मैंने कहा- नहीं, वह अकेले और एकांत वाली जगह में ही बताया जाता है!
भाभी ने फिर से चुटकी ली- तो इधर भी तो हम दोनों अकेले में ही हैं और इधर एकांत भी है!
मैंने दिमाग लगाया कि भाभी मेरी ले रही हैं. अब कुछ ऐसा करना पड़ेगा … जिससे भाभी खुल जाएं.
तो मैंने कहा- ओके … तो क्या आप उस रहस्य को जाने के लिए अभी तैयार हैं?
भाभी मुस्कुराईं और बोलीं- हाँ मगर पहले बताओ तो!
मैंने कहा- आपको उस रहस्य को जाने के लिए एक अनुष्ठान करना है और उस अनुष्ठान में आपको अपने सारे कपड़े उतारने पड़ेंगे … तो बताइए भाभी जी क्या आप अभी तैयार हैं?
भाभी हंस पड़ीं और बोलीं- तुम सच में बहुत चालू पुर्जा हो. चलो मैं समझ गई कि तुमको मेरे साथ क्या करना है!
अब मैंने डोर पकड़ ली और कहा- अच्छा तो बताइए कि आपको क्या समझ में आ गया है?
भाभी छूटते ही बोलीं- तुमको मुझे चोदना है … सीधे सीधे बोलो न यार!
मैंने उनके मुँह से चोदना शब्द सुना तो मैंने कहा- या यूं कहें कि आपको मेरे साथ चुदवाना है!
वे हो हो करके हंसने लगीं और हम दोनों के बीच सेक्स की बातें होने लगीं.
कुछ ही देर में हमारे बीच इतनी ज्यादा बेचैनी हो गई थी कि क्या ही बताऊं.
उनमें से एक बात यह भी भाभी ने कही थी कि उन्हें हार्डकोर सेक्स बहुत पसंद है.
जब मैंने उनसे उसकी डिटेल में जानना चाहा तो उन्होंने वही सब बताया कि कोई शहद लगा कर चाटे या बेल्ट से मारे या मोम टपकाते हुए दूध चूसे. यह सब जानकर मैं मन ही मन प्लान बनाने लगा था कि भाभी को कैसे चोदना है.
फिर हम दोनों अलग हुए और सोने लगे.
मगर मुझे तो समझो नींद ही नहीं आ रही थी.
जैसे तैसे वह रात कटी और सवेरा हुआ.
मैंने अपने बैग में एक मोमबत्ती और लाइटर के साथ कुछ कंडोम के पैकेट रखे. फिर याद आया तो साथ में हनी और श्रीखंड भी ले लिया.
अब मैं स्टेशन पर पहुंच गया और भाभी के आने का इंतज़ार करने लगा.
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कुछ ही देर में भाभी मस्त लाल रंग के चूड़ीदार सलवार कमीज में आती दिखाई दीं.
उन्होंने अपने बाल खुले रखे हुए थे.
होंठों पर लाल लिपस्टिक, हाथ में लेडी बैग टांग कर पेन्सिल हील्स पहने हुई आईं और मुस्कुराने लगीं.
मेरी तो उनके ऊपर से नजर ही नहीं हट रही थी.
कसम से भाभी आज कयामत लग रही थीं और आस पास खड़े सब लोग उन्हें ही घूरे जा रहे थे.
उनकी उठी हुई गोल गोल चूचियां और गांड ठुमकाने वाली उनकी कॅट वॉक पर तो मेरा दिल ही घायल हो गया था.
एक मन तो किया कि इन्हें अभी ही गोद में उठा कर शुरू हो जाऊं.
पर स्टेशन था, काफ़ी लोग थे. वैसा किया नहीं जा सकता था.
तभी हम हम दोनों होटल में पहुंचे और कमरे में जाते ही हम एक दूसरे पर भूखे जानवरों की तरह टूट पड़े.
मैं भाभी के खुले बालों में हाथ डाल कर लिप्स टू लिप्स किस करते हुए मजा लेने लगा.
भाभी के चूचों को मैं उनकी कमीज के ऊपर से ही सहला रहा था.
तभी अचानक से भाभी मुझसे अलग होकर बोलीं- एक मिनट रुको यार, मुझे कपड़ों में मजा नहीं आ रहा.
उन्होंने यह कहा तो मैंने उन्हें अपनी बांहों में खींचा और उनकी कमीज के पीछे लगे हुए हुक्स खोल दिए.
साथ ही भाभी की गर्दन पर किस करते हुए मैंने उनकी ड्रेस को खोलना चालू कर दिया था.
भाभी मेरे साथ रमण सुख का आनन्द लिए जा रही थीं.
मैंने उनके एक कान में अपनी नाक से गर्म सांस छोड़ते हुए उन्हें घुमाया और अपने सामने की ओर कर दिया.
आह भाभी के बड़े बड़े एकदम टाइट गुब्बारे उनकी पिंक कलर की ब्रा में कसे हुए दिखने लगे थे.
भाभी एकदम माल लग रही थीं.
तभी मैंने अपने हाथ उनके पीछे ले जाकर उनकी ब्रा का हुक भी खोल कर उसे निकाल दिया और उनके खड़े हो चुके कड़क गुलाबी चूचुक को किस करने लगा.
वे मानो एकदम से बिफर उठीं और अगले ही पल वे मेरी शर्ट के बटन्स खोलने लगीं.
हम दोनों किस भी किए जा रहे थे.
तब हम दोनों इतने जोश में थे कि कब मेरी छाती उनकी नंगी चूचियों से रगड़ने लगी, कुछ पता ही नहीं चला.
मैं भाभी की कमर पर किस करते हुए उनकी सलवार के नाड़े की तरफ बढ़ा और जल्दी से उनके नाड़े को ढीला करके उसे भी उतार दिया.
अब भाभी मेरे सामने एक नेट वाली पतली सी पैंटी में थीं और मैं भी अंडरवियर में रह गया था.
हम दोनों एक दूसरे हर अंग को पागलों की तरह चाट और चूस रहे थे.
हमारी कामुक सिसकारियां कमरे में एक मधुर संगीत बिखेर रही थीं.
‘आह … उउह …’
भाभी भी पूरी गर्म हो चुकी थीं और बार बार कह रही थीं- अब बस देर न करो … मुझे चोद दो जल्दी से आह!
मैंने झट से भाभी की पैंटी को खींच कर निकाला और उन्हें नंगी कर दिया.
आह क्या चिकनी गोरी चूत थी उनकी, ऐसी लग रही थी जैसे आज सुबह ही झांटों की सफाई की हो.
मैंने उनकी पैंटी को किस किया और उसको लंबी सांस लेकर सूंघ कर साइड में फेंक दिया.
फिर झट से अपने बैग से मधु निकाल कर उन्हें चटाया और उनकी चूत पर शहद की बोतल उड़ेल कर खूब सारा शहद चूत पर टपका दिया.
भाभी अपनी चूत पर ठंडे शहद का स्पर्श पाकर अचकचा उठीं और जब तक वे संभल पातीं कि मैंने उनकी चूत पर अपनी जीभ फेर दी.
भाभी एकदम से सिहर गईं और उनके कंठ से एक मीठी सी ‘आह मर गई’ निकल पड़ा.
मैं लगा रहा और उनकी चूत को चाटने लगा.
कभी चूत को चुम्मी करता, तो कभी चाट लेता.
उसी दौरान मैंने अपने हाथ में पकड़ी हुई शहद की शीशी को उनके एक दूध के निप्पल पर टपका दिया.
वे अब शहद का मजा समझ गई थीं तो अपनी उंगली से अपने निप्पल पर शहद मलने लगीं और मेरे हाथ से शहद की शीशी लेकर अपने दूसरे दूध के निप्पल पर लगाने लगीं.
फिर उन्होंने मेरे बाल पकड़ कर मुझे दूध चूसने का इशारा किया.
तो मैं भाभी के मम्मों पर आ गया.
अब कभी मैं उनके एक दूध के निप्पल पर लगा शहद चूसता, तो कभी दूसरे को चूसने लगता.
यूं ही खेल चलता रहा. चूत और चूचियों को मैंने छक कर चूसा.
मेरे ऐसे करने से भाभी अब तक दो बार झड़ चुकी थीं और वे पागलों की तरह मेरे लंड से चुदने के लिए मचल रही थीं- आह … अब चोद भी दो … प्लीज चोद दो!
मैं उन्हें तड़फाए जा रहा था क्योंकि प्यास जितनी गहरी हो, बुझाने में उतना मजा ज्यादा आता है.
फिर मैंने उनके दुप्पटे से उनके हाथ पैर बांध कर उन्हें बेड पर सीधा लिटा दिया.
इसके बाद मैंने अपने रूमाल से उनकी आंखों को बंद कर दिया.
अब मैं मोमबत्ती जला कर तैयार हो गया.
मैं अपने एक हाथ में जली हुई मोमबत्ती और एक हाथ में बेल्ट लेकर आगे आया.
फिर जैसे ही मैंने उनके दूध पर मोम टपकाई … भाभी चीख उठीं.
उनकी इस चीख ने मुझे बड़ा सुकून दिया था.
दोस्तो, यह एक ऐसा सेक्स है, जिसे करें से जो सुख मिलता है वह चुदाई के सुख को दोगुना कर देता है.
अब मैं कभी उन्हें मोमबत्ती के मोम टपका कर मजा लेता तो कभी उनकी उसी जगह को चूम कर चूस लेता और किस कर देता, तो कभी उसी जगह पर बेल्ट से मारता.
भाभी का अंग अंग एकदम लाल टमाटर की तरह हो गया था और वे चुदने के लिए एकदम बेताब हो गई थीं.
उन्होंने अपने बाल खुले रखे हुए थे.
होंठों पर लाल लिपस्टिक, हाथ में लेडी बैग टांग कर पेन्सिल हील्स पहने हुई आईं और मुस्कुराने लगीं.
मेरी तो उनके ऊपर से नजर ही नहीं हट रही थी.
कसम से भाभी आज कयामत लग रही थीं और आस पास खड़े सब लोग उन्हें ही घूरे जा रहे थे.
उनकी उठी हुई गोल गोल चूचियां और गांड ठुमकाने वाली उनकी कॅट वॉक पर तो मेरा दिल ही घायल हो गया था.
एक मन तो किया कि इन्हें अभी ही गोद में उठा कर शुरू हो जाऊं.
पर स्टेशन था, काफ़ी लोग थे. वैसा किया नहीं जा सकता था.
तभी हम हम दोनों होटल में पहुंचे और कमरे में जाते ही हम एक दूसरे पर भूखे जानवरों की तरह टूट पड़े.
मैं भाभी के खुले बालों में हाथ डाल कर लिप्स टू लिप्स किस करते हुए मजा लेने लगा.
भाभी के चूचों को मैं उनकी कमीज के ऊपर से ही सहला रहा था.
तभी अचानक से भाभी मुझसे अलग होकर बोलीं- एक मिनट रुको यार, मुझे कपड़ों में मजा नहीं आ रहा.
उन्होंने यह कहा तो मैंने उन्हें अपनी बांहों में खींचा और उनकी कमीज के पीछे लगे हुए हुक्स खोल दिए.
साथ ही भाभी की गर्दन पर किस करते हुए मैंने उनकी ड्रेस को खोलना चालू कर दिया था.
भाभी मेरे साथ रमण सुख का आनन्द लिए जा रही थीं.
मैंने उनके एक कान में अपनी नाक से गर्म सांस छोड़ते हुए उन्हें घुमाया और अपने सामने की ओर कर दिया.
आह भाभी के बड़े बड़े एकदम टाइट गुब्बारे उनकी पिंक कलर की ब्रा में कसे हुए दिखने लगे थे.
भाभी एकदम माल लग रही थीं.
तभी मैंने अपने हाथ उनके पीछे ले जाकर उनकी ब्रा का हुक भी खोल कर उसे निकाल दिया और उनके खड़े हो चुके कड़क गुलाबी चूचुक को किस करने लगा.
वे मानो एकदम से बिफर उठीं और अगले ही पल वे मेरी शर्ट के बटन्स खोलने लगीं.
हम दोनों किस भी किए जा रहे थे.
तब हम दोनों इतने जोश में थे कि कब मेरी छाती उनकी नंगी चूचियों से रगड़ने लगी, कुछ पता ही नहीं चला.
मैं भाभी की कमर पर किस करते हुए उनकी सलवार के नाड़े की तरफ बढ़ा और जल्दी से उनके नाड़े को ढीला करके उसे भी उतार दिया.
अब भाभी मेरे सामने एक नेट वाली पतली सी पैंटी में थीं और मैं भी अंडरवियर में रह गया था.
हम दोनों एक दूसरे हर अंग को पागलों की तरह चाट और चूस रहे थे.
हमारी कामुक सिसकारियां कमरे में एक मधुर संगीत बिखेर रही थीं.
‘आह … उउह …’
भाभी भी पूरी गर्म हो चुकी थीं और बार बार कह रही थीं- अब बस देर न करो … मुझे चोद दो जल्दी से आह!
मैंने झट से भाभी की पैंटी को खींच कर निकाला और उन्हें नंगी कर दिया.
आह क्या चिकनी गोरी चूत थी उनकी, ऐसी लग रही थी जैसे आज सुबह ही झांटों की सफाई की हो.
मैंने उनकी पैंटी को किस किया और उसको लंबी सांस लेकर सूंघ कर साइड में फेंक दिया.
फिर झट से अपने बैग से मधु निकाल कर उन्हें चटाया और उनकी चूत पर शहद की बोतल उड़ेल कर खूब सारा शहद चूत पर टपका दिया.
भाभी अपनी चूत पर ठंडे शहद का स्पर्श पाकर अचकचा उठीं और जब तक वे संभल पातीं कि मैंने उनकी चूत पर अपनी जीभ फेर दी.
भाभी एकदम से सिहर गईं और उनके कंठ से एक मीठी सी ‘आह मर गई’ निकल पड़ा.
मैं लगा रहा और उनकी चूत को चाटने लगा.
कभी चूत को चुम्मी करता, तो कभी चाट लेता.
उसी दौरान मैंने अपने हाथ में पकड़ी हुई शहद की शीशी को उनके एक दूध के निप्पल पर टपका दिया.
वे अब शहद का मजा समझ गई थीं तो अपनी उंगली से अपने निप्पल पर शहद मलने लगीं और मेरे हाथ से शहद की शीशी लेकर अपने दूसरे दूध के निप्पल पर लगाने लगीं.
फिर उन्होंने मेरे बाल पकड़ कर मुझे दूध चूसने का इशारा किया.
तो मैं भाभी के मम्मों पर आ गया.
अब कभी मैं उनके एक दूध के निप्पल पर लगा शहद चूसता, तो कभी दूसरे को चूसने लगता.
यूं ही खेल चलता रहा. चूत और चूचियों को मैंने छक कर चूसा.
मेरे ऐसे करने से भाभी अब तक दो बार झड़ चुकी थीं और वे पागलों की तरह मेरे लंड से चुदने के लिए मचल रही थीं- आह … अब चोद भी दो … प्लीज चोद दो!
मैं उन्हें तड़फाए जा रहा था क्योंकि प्यास जितनी गहरी हो, बुझाने में उतना मजा ज्यादा आता है.
फिर मैंने उनके दुप्पटे से उनके हाथ पैर बांध कर उन्हें बेड पर सीधा लिटा दिया.
इसके बाद मैंने अपने रूमाल से उनकी आंखों को बंद कर दिया.
अब मैं मोमबत्ती जला कर तैयार हो गया.
मैं अपने एक हाथ में जली हुई मोमबत्ती और एक हाथ में बेल्ट लेकर आगे आया.
फिर जैसे ही मैंने उनके दूध पर मोम टपकाई … भाभी चीख उठीं.
उनकी इस चीख ने मुझे बड़ा सुकून दिया था.
दोस्तो, यह एक ऐसा सेक्स है, जिसे करें से जो सुख मिलता है वह चुदाई के सुख को दोगुना कर देता है.
अब मैं कभी उन्हें मोमबत्ती के मोम टपका कर मजा लेता तो कभी उनकी उसी जगह को चूम कर चूस लेता और किस कर देता, तो कभी उसी जगह पर बेल्ट से मारता.
भाभी का अंग अंग एकदम लाल टमाटर की तरह हो गया था और वे चुदने के लिए एकदम बेताब हो गई थीं.
अब मैंने जरा सा श्रीखंड अपने लंड पर लगाया और उनके मुँह में देकर लंड चुसवाया व चटवाया.
भाभी भी खूब मज़े से लंड को ऐसे चाटे जा रही थीं जैसे बरसों बाद कोई लंड मिला हो.
उन्होंने मेरे लौड़े को चूस चूस कर एकदम लाल कर दिया था.
मेरा लंबा और मोटा लंड अब चूत के लिए बेताब हो उठा था.
मैंने अब भाभी के हाथ पैर खोल कर उन्हें खड़ा कर दिया और दीवार से टिका दिया.
फिर भाभी की चूत की दरार में अपने लंड को धीरे से रगड़ने लगा.
भाभी भी अपनी चूत आगे को बढ़ा कर मेरे लंड को अपनी चूत में अन्दर लेने की कोशिश कर रही थीं.
पर लंड आसानी से कहां घुसने वाला था.
तभी मैंने अपने बैग से एक कंडोम निकाल कर लंड पर चढ़ा दिया.
फिर भाभी को किस करते हुए मैंने उनकी चूत पर लंड का सुपारा सैट कर दिया और ताक़त लगा कर पहला झटका देते हुए उनके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया.
पहले तो कुछ पल के लिए उनकी आवाज अटक गई.
फिर जैसे ही लंड का टोपा चूत को चीरता हुआ अन्दर घुसा, उनके पसीने छूट गए.
वे चिल्लाने की … और मेरी पकड़ से छूटने की कोशिश करने लगीं, छटपटाने लगीं.
पर मैंने उन्हें नहीं छूटने दिया, बल्कि अपनी पकड़ और मजबूत करते हुए थोड़ा ठहर गया.
फिर कुछ पल बाद जब भाभी को आराम हुआ तो वे अभी थोड़ी सामान्य हुई ही थीं कि मैंने एक और जोर का झटका मार दिया.
तभी उनकी दर्द भरी कामुक आवाज निकल गई- उईई मांआ मर गईइइ … भोसड़ी के मां चोद दी तूने मेरी चूत की … निकाल अपने लवड़े को … आह … साले ने चूत ही फाड़ दी!
उधर वे चिल्ला रही थीं और इधर में भी कहां कुछ मानने वाला था.
इसी बीच मैं एक जोर का झटका देते हुए अपना पूरा लंड भाभी की चूत में डाल दिया.
वे एकदम से ‘आआवव … मांआह … र गई …’ की आवाज करती हुई चीखीं.
तभी मैंने लंड थोड़ा सा बाहर को निकाल लिया.
फिर देखा तो मेरे लंड पर खून लगा था.
इसका मतलब भाभी की चूत फट गई थी, तभी उनको थोड़ा दर्द हुआ था.
मैं बड़े प्यार से उन्हें किस करते हुए चोदने लगा.
कुछ ही देर में भाभी को भी मज़ा आने लगा और वे भी अपनी चूत आगे पीछे करने लगीं.
मैं उन्हें और तेज़ गति से चोदने लगा.
भाभी ‘उई … एयेए … उई अम्म्म!’ किये जा रही थीं.
इसी तरह करीब लगभग 15 मिनट की चुदाई में भाभी दो बार और झड़ चुकी थीं.
अब मेरा भी होने ही वाला था, तभी मैंने भाभी से कहा- सन्नो मैं आ रहा हूँ!
वे अपनी चूत से लंड निकाल कर नीचे बैठ गईं और लंड से कंडोम को निकाल कर सामने बैठ गईं.
मैंने अपने लंड की पिचकारी भाभी के चेहरे पर दे मारी.
कुछ बूँदें उकी गोरी गुलाबी चूचियों पर भी जा गिरीं.
मैं एकदम से निढाल हो गया था, तो मैंने भाभी को पकड़ा और उन्होंने मुझे पकड़ लिया.
हम दोनों एक दूसरे को पकड़ कर वहीं बेड पर गिर कर सो गए.
कुछ देर बाद उठे तो फिर से सहवास शुरू हो गया.
उस दिन मैंने 3 बार अलग अलग पोज़िशन में भाभी की चुदाई का मजा लिया.
अभी भी जब भी मौका मिलता है, तो हम दोनों चुदाई कर लेते हैं.
आगे की सेक्स कहानी को मैं फिर लिखूंगा कि कैसे मैंने सन्नो जान की गांड
💦💦💦💦💦💦💦
शादीशुदा बहन और मॉम की चुदाई
💦💦💦💦💦💦💦
भाई सेक्स प्रेगनेंसी कहानी में मेरी बहन को शादी के बाद बच्चा नहीं हुआ तो मेरी मम्मी ने उसे मेरे साथ सेक्स करके गर्भ धारण करने की सलाह दी. दीदी ने मुझे कैसे सेक्स के लिए मनाया?
मेरा नाम शशिकांत है और मैं गुजरात का रहने वाला हूँ.
मेरी उम्र 26 साल है और मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ.
यह भाई सेक्स प्रेगनेंसी कहानी मेरी एक सच्ची घटना पर आधारित सेक्स कहानी है.
मेरे परिवार में मेरे अलावा मॉम और मेरी बड़ी बहन हैं.
मेरी बड़ी बहन की शादी एक साल पहले हो गयी थी. मेरी मॉम विधवा हैं.
बहन की शादी के बाद मैं और मॉम दोनों ही घर में रहते हैं.
मेरी बहन की शादी एक मिडल क्लास घर में हुई थी क्योंकि पापा के गुजर जाने के बाद हमारी आर्थिक परिस्थिति कोई खास अच्छी नहीं थी.
मैं अपनी दीदी के बारे में बताऊं, तो मेरी दीदी बहुत ही बड़ी हॉट और सेक्सी थी.
उसकी ब्रा का साइज़ 34 था.
शादी के एक साल बाद मेरी दीदी घर आई.
रात को मैं जब ऑफिस से घर आया तो बहन को आया देख कर मैं बहुत खुश हुआ.
हम तीनों ने मिलकर खाना खाया और रात को बैठ कर बातें की.
तब मैंने देखा कि मेरी दीदी और मॉम परेशान लग रही थीं.
मैंने बहुत पूछा लेकिन उन दोनों ने मुझे कुछ बताया ही नहीं.
फिर रात के करीब बारह बजे हम सब सोने लगे.
लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी तो मैं अपने कमरे से बाहर निकल आया.
मैंने देखा कि मॉम के कमरे की लाइट जल रही थी.
मैं मॉम के कमरे के दरवाजे के पास गया तो मुझे दीदी के रोने आवाज़ आ रही थी.
तो मैं और नज़दीक गया और मॉम और दीदी की बातें सुनने लगा.
तब मुझे पता चला कि दीदी को कोई बच्चा नहीं हुआ इसलिए दीदी को उसकी ससुराल वालों ने घर से निकाल दिया था.
लेकिन दीदी बोल रही थी कि प्राब्लम उनके पति में है.
भाभी भी खूब मज़े से लंड को ऐसे चाटे जा रही थीं जैसे बरसों बाद कोई लंड मिला हो.
उन्होंने मेरे लौड़े को चूस चूस कर एकदम लाल कर दिया था.
मेरा लंबा और मोटा लंड अब चूत के लिए बेताब हो उठा था.
मैंने अब भाभी के हाथ पैर खोल कर उन्हें खड़ा कर दिया और दीवार से टिका दिया.
फिर भाभी की चूत की दरार में अपने लंड को धीरे से रगड़ने लगा.
भाभी भी अपनी चूत आगे को बढ़ा कर मेरे लंड को अपनी चूत में अन्दर लेने की कोशिश कर रही थीं.
पर लंड आसानी से कहां घुसने वाला था.
तभी मैंने अपने बैग से एक कंडोम निकाल कर लंड पर चढ़ा दिया.
फिर भाभी को किस करते हुए मैंने उनकी चूत पर लंड का सुपारा सैट कर दिया और ताक़त लगा कर पहला झटका देते हुए उनके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया.
पहले तो कुछ पल के लिए उनकी आवाज अटक गई.
फिर जैसे ही लंड का टोपा चूत को चीरता हुआ अन्दर घुसा, उनके पसीने छूट गए.
वे चिल्लाने की … और मेरी पकड़ से छूटने की कोशिश करने लगीं, छटपटाने लगीं.
पर मैंने उन्हें नहीं छूटने दिया, बल्कि अपनी पकड़ और मजबूत करते हुए थोड़ा ठहर गया.
फिर कुछ पल बाद जब भाभी को आराम हुआ तो वे अभी थोड़ी सामान्य हुई ही थीं कि मैंने एक और जोर का झटका मार दिया.
तभी उनकी दर्द भरी कामुक आवाज निकल गई- उईई मांआ मर गईइइ … भोसड़ी के मां चोद दी तूने मेरी चूत की … निकाल अपने लवड़े को … आह … साले ने चूत ही फाड़ दी!
उधर वे चिल्ला रही थीं और इधर में भी कहां कुछ मानने वाला था.
इसी बीच मैं एक जोर का झटका देते हुए अपना पूरा लंड भाभी की चूत में डाल दिया.
वे एकदम से ‘आआवव … मांआह … र गई …’ की आवाज करती हुई चीखीं.
तभी मैंने लंड थोड़ा सा बाहर को निकाल लिया.
फिर देखा तो मेरे लंड पर खून लगा था.
इसका मतलब भाभी की चूत फट गई थी, तभी उनको थोड़ा दर्द हुआ था.
मैं बड़े प्यार से उन्हें किस करते हुए चोदने लगा.
कुछ ही देर में भाभी को भी मज़ा आने लगा और वे भी अपनी चूत आगे पीछे करने लगीं.
मैं उन्हें और तेज़ गति से चोदने लगा.
भाभी ‘उई … एयेए … उई अम्म्म!’ किये जा रही थीं.
इसी तरह करीब लगभग 15 मिनट की चुदाई में भाभी दो बार और झड़ चुकी थीं.
अब मेरा भी होने ही वाला था, तभी मैंने भाभी से कहा- सन्नो मैं आ रहा हूँ!
वे अपनी चूत से लंड निकाल कर नीचे बैठ गईं और लंड से कंडोम को निकाल कर सामने बैठ गईं.
मैंने अपने लंड की पिचकारी भाभी के चेहरे पर दे मारी.
कुछ बूँदें उकी गोरी गुलाबी चूचियों पर भी जा गिरीं.
मैं एकदम से निढाल हो गया था, तो मैंने भाभी को पकड़ा और उन्होंने मुझे पकड़ लिया.
हम दोनों एक दूसरे को पकड़ कर वहीं बेड पर गिर कर सो गए.
कुछ देर बाद उठे तो फिर से सहवास शुरू हो गया.
उस दिन मैंने 3 बार अलग अलग पोज़िशन में भाभी की चुदाई का मजा लिया.
अभी भी जब भी मौका मिलता है, तो हम दोनों चुदाई कर लेते हैं.
आगे की सेक्स कहानी को मैं फिर लिखूंगा कि कैसे मैंने सन्नो जान की गांड
💦💦💦💦💦💦💦
शादीशुदा बहन और मॉम की चुदाई
💦💦💦💦💦💦💦
भाई सेक्स प्रेगनेंसी कहानी में मेरी बहन को शादी के बाद बच्चा नहीं हुआ तो मेरी मम्मी ने उसे मेरे साथ सेक्स करके गर्भ धारण करने की सलाह दी. दीदी ने मुझे कैसे सेक्स के लिए मनाया?
मेरा नाम शशिकांत है और मैं गुजरात का रहने वाला हूँ.
मेरी उम्र 26 साल है और मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ.
यह भाई सेक्स प्रेगनेंसी कहानी मेरी एक सच्ची घटना पर आधारित सेक्स कहानी है.
मेरे परिवार में मेरे अलावा मॉम और मेरी बड़ी बहन हैं.
मेरी बड़ी बहन की शादी एक साल पहले हो गयी थी. मेरी मॉम विधवा हैं.
बहन की शादी के बाद मैं और मॉम दोनों ही घर में रहते हैं.
मेरी बहन की शादी एक मिडल क्लास घर में हुई थी क्योंकि पापा के गुजर जाने के बाद हमारी आर्थिक परिस्थिति कोई खास अच्छी नहीं थी.
मैं अपनी दीदी के बारे में बताऊं, तो मेरी दीदी बहुत ही बड़ी हॉट और सेक्सी थी.
उसकी ब्रा का साइज़ 34 था.
शादी के एक साल बाद मेरी दीदी घर आई.
रात को मैं जब ऑफिस से घर आया तो बहन को आया देख कर मैं बहुत खुश हुआ.
हम तीनों ने मिलकर खाना खाया और रात को बैठ कर बातें की.
तब मैंने देखा कि मेरी दीदी और मॉम परेशान लग रही थीं.
मैंने बहुत पूछा लेकिन उन दोनों ने मुझे कुछ बताया ही नहीं.
फिर रात के करीब बारह बजे हम सब सोने लगे.
लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी तो मैं अपने कमरे से बाहर निकल आया.
मैंने देखा कि मॉम के कमरे की लाइट जल रही थी.
मैं मॉम के कमरे के दरवाजे के पास गया तो मुझे दीदी के रोने आवाज़ आ रही थी.
तो मैं और नज़दीक गया और मॉम और दीदी की बातें सुनने लगा.
तब मुझे पता चला कि दीदी को कोई बच्चा नहीं हुआ इसलिए दीदी को उसकी ससुराल वालों ने घर से निकाल दिया था.
लेकिन दीदी बोल रही थी कि प्राब्लम उनके पति में है.
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मैं मॉम की बातें सुन रहा था.
मॉम ने दीदी से कहा- एक रास्ता है, तुम अपने भाई से चुदवा लो तो तुम्हारी प्राब्लम दूर हो जाएगी!
यह सुनकर मेरा लंड तुरन्त टाइट हो गया लेकिन मेरी दीदी को ये पसंद नहीं आ रहा था.
मेरी मॉम के काफी समझाने पर दीदी ने हां बोल दिया, लेकिन दीदी बोली- भैया का तो छोटा होगा ना!
तो मॉम बोली- नहीं, तेरे भैया का तो तेरे पापा से भी बड़ा और मोटा है!
ये सुन कर तो मैं पानी पानी हो गया.
दीदी बोली- तुमको कैसे पता कि भैया का बड़ा है?
तो मॉम बोली- मैंने बाथरूम के छेद से उसको दो तीन बार लंड को हिलाते हुए देखा है.
यह सुनकर मेरे होश उड़ गए.
अब दीदी तैयार हो गयी थी कि वह मुझसे चुदवाएगी.
लेकिन यह सब कैसे होगा?
तो मॉम ने प्लान बनाया- मैं दो दिन के लिए बाहर जाने का प्लान बनाती हूँ, तुम चुदने का प्लान बना लेना!
दीदी बोली- ठीक है.
दूसरे दिन मॉम मेरे पास आईं और रात को जिस तरह बात हुई थी, वैसे ही उन्होंने कहा.
अब मॉम बाहर चली गईं.
उनके जाने के बाद घर में दीदी और मैं ही रह गए थे.
दीदी ने आज सेक्सी टाइट जींस और टी-शर्ट पहनी थी जिसमें से दीदी की ब्रा साफ दिखाई दे रही थी.
उनके बूब्स भी बहुत बड़े थे, तो उनकी टी-शर्ट में ऐसे दिख रहे थे, मानो अभी निकल कर बाहर आ जाएंगे.
मैं यह जानता था कि मेरी दीदी मेरे लौड़े से आज चुदेगी.
इसलिए मैं अपने आपको कंट्रोल नहीं कर पा रहा था.
बस मैं यह देखने को मरा जा रहा था कि मेरी दीदी किस तरह से मुझे उत्तेजित करके मनाती है.
हम दोनों खाना खाने बैठे तो दीदी ने मुझसे बातें करना शुरू किया- भैया, तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं?
मैं पहले थोड़ा शर्माया.
फिर दीदी ने दुबारा से पूछा.
तो मैंने कहा- नहीं दीदी!
तो दीदी बोली- क्यों नहीं है … अभी तो तुम जवान हो फिर भी?
मेरे मन में लड्डू फूट रहे थे.
मैंने भी दीदी से पूछा- क्या आपका शादी से पहले कोई ब्वॉयफ्रेंड था?
तो वह बोली- हां जब मैं पढ़ाई करती थी, तब तो था.
फिर मैंने दीदी से पूछा- जीजा जी कैसे हैं? आपको खुश तो रखते हैं न?
मेरे इस सवाल पर वह रोने लगी और मेरे पास आकर मुझसे चिपक गई.
मैं समझ गया कि उसका एक्शन शुरू हो गया है.
मैंने उसे सहलाते हुए पूछा- क्या हुआ दीदी?
तो वह मुझसे और ज़ोर से चिपक गई.
अब दीदी के बूब्स मुझे स्पर्श हो रहे थे.
मेरा लंड और ज्यादा टाइट होता जा रहा था.
दीदी ने मुझसे चिपके हुए ही सब बात बताई, जो उसने रात को मॉम को बताई थी.
अब मैं समझ गया था कि दीदी भी चुदने के लिए तैयार है!
मैंने आगे पूछा- तो बच्चा क्यों नहीं हो रहा है?
दीदी खुल कर बोली- तेरे जीजा जी का लंड बहुत ही छोटा है!
उसके मुँह से लंड शब्द सुनकर मेरा लंड और ज्यादा टाइट हो गया.
मैंने कहा- तो क्या वह तुझे सही से नहीं करता है?
वह बोली- हां भैया, उसका लंड मेरी चूत में घुसते ही झड़ जाता है.
मैंने कहा- तो तू अब क्या करेगी?
वह मेरे सीने से लिपट गई और बोली- मुझसे तू किसी भी तरह से संतुष्ट कर दे.
मैंने उसके मुँह से यह सुना तो उसको अपनी गोदी में लेकर बेडरूम में आ गया और उधर मैंने अपनी दीदी को बेड पर लेटा दिया.
फिर मैंने अपने सारे कपड़े निकाल दिए.
दीदी बोली- भैया ये क्या कर रहे हो?
मैं अपनी चड्डी उतारते हुए बोला- तुम्हें मां बनाने का काम कर रहा हूँ.
भाई सेक्स प्रेगनेंसी
मेरी दीदी मेरे लंड को हैरानी से देख रही थी.
वह बोली- इतना बड़ा!
मैंने अपना लंड सहलाते हुए कहा- हां आज यही लंड तुम्हारा उद्धार करेगा.
भाई सेक्स प्रेगनेंसी की बात सोच कर वह खुश हो गई.
अब मैंने दीदी से भी नंगी होने को कहा.
दीदी ने पहले अपनी जींस निकाली और बाद में टी-शर्ट उतार दी.
मेरी दीदी अब सिर्फ़ ब्रा पैंटी में थी.
दीदी को ब्रा पैंटी में देखकर मेरा लंड और भी लंबा और मोटा हो गया.
मैंने दीदी की ब्रा को निकाल दिया.
दीदी के बूब्स पूरे नंगे थे और एकदम तने हुए थे.
मैं दीदी के बूब्स को दबाने लगा और उसकी चूचियों को मसलने लगा.
दीदी को बहुत मज़ा आने लगा था.
वह मेरे मुँह में निप्पल देने लगी थी.
उस वक्त हम दोनों यह भूल गए थे कि हम भाई बहन हैं.
उस वक्त हम दोनों सिर्फ नर-मादा थे जो संतान को पैदा करने की कोशिश में लगे हुए थे.
अब तक उसके दूध चूसने से वह पूरी गर्म हो गयी थी और मेरे लंड को अपने मुँह में लेना चाहती थी.
वह मेरे लौड़े को अपने हाथ में लेकर सहलाती हुई बोल रही थी- आज मेरी एक साल की वासना को शांत कर दो भैया!
दीदी ने मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी.
कुछ मिनट बाद मैंने दीदी को बेड पर चित लेटा दिया और अपना लंड उसकी चूत पर सैट कर दिया.
मैंने धीरे से लंड को पेल कर अपनी बहन की चुदाई शुरू की.
जैसे ही मैंने लंड जरा अन्दर डाला, तो वह चिल्लाने लगी- आह भाई, धीरे डालो!
मेरी दीदी की चूत सच में बहुत टाइट थी.
किसी तरह से मैंने लंड चूत में पेला तो उसकी चूत से खून निकलने लगा.
मॉम ने दीदी से कहा- एक रास्ता है, तुम अपने भाई से चुदवा लो तो तुम्हारी प्राब्लम दूर हो जाएगी!
यह सुनकर मेरा लंड तुरन्त टाइट हो गया लेकिन मेरी दीदी को ये पसंद नहीं आ रहा था.
मेरी मॉम के काफी समझाने पर दीदी ने हां बोल दिया, लेकिन दीदी बोली- भैया का तो छोटा होगा ना!
तो मॉम बोली- नहीं, तेरे भैया का तो तेरे पापा से भी बड़ा और मोटा है!
ये सुन कर तो मैं पानी पानी हो गया.
दीदी बोली- तुमको कैसे पता कि भैया का बड़ा है?
तो मॉम बोली- मैंने बाथरूम के छेद से उसको दो तीन बार लंड को हिलाते हुए देखा है.
यह सुनकर मेरे होश उड़ गए.
अब दीदी तैयार हो गयी थी कि वह मुझसे चुदवाएगी.
लेकिन यह सब कैसे होगा?
तो मॉम ने प्लान बनाया- मैं दो दिन के लिए बाहर जाने का प्लान बनाती हूँ, तुम चुदने का प्लान बना लेना!
दीदी बोली- ठीक है.
दूसरे दिन मॉम मेरे पास आईं और रात को जिस तरह बात हुई थी, वैसे ही उन्होंने कहा.
अब मॉम बाहर चली गईं.
उनके जाने के बाद घर में दीदी और मैं ही रह गए थे.
दीदी ने आज सेक्सी टाइट जींस और टी-शर्ट पहनी थी जिसमें से दीदी की ब्रा साफ दिखाई दे रही थी.
उनके बूब्स भी बहुत बड़े थे, तो उनकी टी-शर्ट में ऐसे दिख रहे थे, मानो अभी निकल कर बाहर आ जाएंगे.
मैं यह जानता था कि मेरी दीदी मेरे लौड़े से आज चुदेगी.
इसलिए मैं अपने आपको कंट्रोल नहीं कर पा रहा था.
बस मैं यह देखने को मरा जा रहा था कि मेरी दीदी किस तरह से मुझे उत्तेजित करके मनाती है.
हम दोनों खाना खाने बैठे तो दीदी ने मुझसे बातें करना शुरू किया- भैया, तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं?
मैं पहले थोड़ा शर्माया.
फिर दीदी ने दुबारा से पूछा.
तो मैंने कहा- नहीं दीदी!
तो दीदी बोली- क्यों नहीं है … अभी तो तुम जवान हो फिर भी?
मेरे मन में लड्डू फूट रहे थे.
मैंने भी दीदी से पूछा- क्या आपका शादी से पहले कोई ब्वॉयफ्रेंड था?
तो वह बोली- हां जब मैं पढ़ाई करती थी, तब तो था.
फिर मैंने दीदी से पूछा- जीजा जी कैसे हैं? आपको खुश तो रखते हैं न?
मेरे इस सवाल पर वह रोने लगी और मेरे पास आकर मुझसे चिपक गई.
मैं समझ गया कि उसका एक्शन शुरू हो गया है.
मैंने उसे सहलाते हुए पूछा- क्या हुआ दीदी?
तो वह मुझसे और ज़ोर से चिपक गई.
अब दीदी के बूब्स मुझे स्पर्श हो रहे थे.
मेरा लंड और ज्यादा टाइट होता जा रहा था.
दीदी ने मुझसे चिपके हुए ही सब बात बताई, जो उसने रात को मॉम को बताई थी.
अब मैं समझ गया था कि दीदी भी चुदने के लिए तैयार है!
मैंने आगे पूछा- तो बच्चा क्यों नहीं हो रहा है?
दीदी खुल कर बोली- तेरे जीजा जी का लंड बहुत ही छोटा है!
उसके मुँह से लंड शब्द सुनकर मेरा लंड और ज्यादा टाइट हो गया.
मैंने कहा- तो क्या वह तुझे सही से नहीं करता है?
वह बोली- हां भैया, उसका लंड मेरी चूत में घुसते ही झड़ जाता है.
मैंने कहा- तो तू अब क्या करेगी?
वह मेरे सीने से लिपट गई और बोली- मुझसे तू किसी भी तरह से संतुष्ट कर दे.
मैंने उसके मुँह से यह सुना तो उसको अपनी गोदी में लेकर बेडरूम में आ गया और उधर मैंने अपनी दीदी को बेड पर लेटा दिया.
फिर मैंने अपने सारे कपड़े निकाल दिए.
दीदी बोली- भैया ये क्या कर रहे हो?
मैं अपनी चड्डी उतारते हुए बोला- तुम्हें मां बनाने का काम कर रहा हूँ.
भाई सेक्स प्रेगनेंसी
मेरी दीदी मेरे लंड को हैरानी से देख रही थी.
वह बोली- इतना बड़ा!
मैंने अपना लंड सहलाते हुए कहा- हां आज यही लंड तुम्हारा उद्धार करेगा.
भाई सेक्स प्रेगनेंसी की बात सोच कर वह खुश हो गई.
अब मैंने दीदी से भी नंगी होने को कहा.
दीदी ने पहले अपनी जींस निकाली और बाद में टी-शर्ट उतार दी.
मेरी दीदी अब सिर्फ़ ब्रा पैंटी में थी.
दीदी को ब्रा पैंटी में देखकर मेरा लंड और भी लंबा और मोटा हो गया.
मैंने दीदी की ब्रा को निकाल दिया.
दीदी के बूब्स पूरे नंगे थे और एकदम तने हुए थे.
मैं दीदी के बूब्स को दबाने लगा और उसकी चूचियों को मसलने लगा.
दीदी को बहुत मज़ा आने लगा था.
वह मेरे मुँह में निप्पल देने लगी थी.
उस वक्त हम दोनों यह भूल गए थे कि हम भाई बहन हैं.
उस वक्त हम दोनों सिर्फ नर-मादा थे जो संतान को पैदा करने की कोशिश में लगे हुए थे.
अब तक उसके दूध चूसने से वह पूरी गर्म हो गयी थी और मेरे लंड को अपने मुँह में लेना चाहती थी.
वह मेरे लौड़े को अपने हाथ में लेकर सहलाती हुई बोल रही थी- आज मेरी एक साल की वासना को शांत कर दो भैया!
दीदी ने मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी.
कुछ मिनट बाद मैंने दीदी को बेड पर चित लेटा दिया और अपना लंड उसकी चूत पर सैट कर दिया.
मैंने धीरे से लंड को पेल कर अपनी बहन की चुदाई शुरू की.
जैसे ही मैंने लंड जरा अन्दर डाला, तो वह चिल्लाने लगी- आह भाई, धीरे डालो!
मेरी दीदी की चूत सच में बहुत टाइट थी.
किसी तरह से मैंने लंड चूत में पेला तो उसकी चूत से खून निकलने लगा.
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