इधर मैं एक बात तो बताना भूल ही गया कि वे दोनों वर्जिन नहीं थीं क्योंकि उन दोनों की चूत थोड़ी ढीली सी थी.
उस वक्त तक स्कूल में किसी को नहीं पता था कि ऊपर की क्लास में भी कोई है क्योंकि लंच में हम तीनों मतलब मैं, अंशु और सौम्या अपने-अपने बैग लेकर टॉयलेट में चले गए थे.

अब आप लोग ये सोच रहे होंगे कि मैं तो एक लड़का हूँ तो फिर मैं गर्ल्स टॉयलेट में कैसे गया?
दरअसल बात ये है कि लड़कों के टॉयलेट के नाम पर बस एक नाली और पीछे की तरफ एक दीवार है, जो कि चारों तरफ से खुली हुई हैं. उन्हें लेट्रिन के लिए गर्ल्स टॉयलेट में ही जाना पड़ता है.
इसी बात का मैंने फायदा उठाया कि मुझसे कोई पूछता कि तुम गर्ल्स वाले टॉयलेट में क्या कर रहे थे तो मैं कह सकता था कि मुझे लेट्रिन आई हुई थी … इसलिए मैं इधर आया हुआ था.

लड़कियां अपनी समस्या खुद बतातीं कि वे क्यों टॉयलेट आई हुई थीं.

छुट्टी तक हम तीनों टॉयलेट के अन्दर ही रहे और वहीं पर थ्री-सम मजा करते रहे.
टॉयलेट में अन्दर कुल छह केबिन बने थे.
हम तीनों आखिरी वाले में थे.

अब हम तीनों ने अपने अपने कपड़े उतार कर अपने अपने बैग में डाल लिए थे और तीनों एक दूसरे के सामने बिल्कुल नंगे हो गए थे.

उन दोनों को नंगी देखकर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया था.

मेरा तना हुआ लंड देख कर अंशु मुझसे कहने लगी- अरे प्रिन्स ये क्या? तुम्हारा लंड तो फिर से खड़ा हो गया?
मैं- तो फिर तुम इसे फिर से शांत कर दो!
अंशु- अच्छा जी ऐसी बात है … तो अभी लो!

अंशु नीचे बैठकर मेरा लंड चूसने लगी और सौम्या खड़ी होकर मुझे लिप किस करने लगी.
साथ ही मैं उसके बूब्स भी दबाने लगा.

सौम्या के दूध अंशु के चूचों से थोड़े ज्यादा कड़क थे और उसके निप्पल हल्के भूरे रंग के थे.
जबकि अंशु के दूध बड़े थे और उसके मम्मों की तो मैं क्या ही बात करूँ यार … साली चूचों से लंडखोर लग रही थी.

उसके चूचे एकदम रूई की तरह मुलायम और निप्पल गुलाबी रंग के थे.
मैं बारी बारी से उन दोनों की चूचियों को चूस रहा था, दबा रहा था.

थोड़ी देर के बाद मैंने अंशु की चूत में अपना लंड घुसेड़ दिया और जम कर उसकी चुदाई की.
Xxx स्कूल स्टूडेंट्स सेक्स करीब आधा घंटा तक करने के बाद मुझे नहीं पता कि मैं कब उसकी चूत में ही झड़ गया.

मैं बहुत ज़्यादा डर गया था कि कहीं वह प्रेग्नेंट ना हो जाए लेकिन कुतिया के पास सब इंतजाम था.
बहन की लौड़ी के पास गर्भनिरोधक गोलियां भी थीं.
यह देख कर मैं चौंक गया.

मैंने उससे पूछा कि इन गोलियों का तुम्हारे पास क्या काम?
तो उसने मुझे बताया कि उसका एक ब्वॉयफ्रेंड है, उसी ने उसकी चूत की सील तोड़ी थी.
उसी ने बताया कि सौम्या की चूत भी उसके ब्वॉयफ्रेंड ने ही फाड़ी थी.

हालांकि सौम्या अब तक सिर्फ तीन बार ही चुदी थी.
जबकि अंशु की चुत ने अपने चोदू का लंड बीसियों बार लिया था.

उसकी हरकतों से साफ समझ आ रहा था कि शायद उसने एक से ज्यादा लंड लीले थे.
मुझे लगा कि उसकी तो गांड भी चालू थी.

इसके बाद मैं बिना डरे स्कूल की छुट्टी होने तक उन दोनों की चूत और गांड मारता रहा.
हम लोग छुट्टी होने के एक घंटे के बाद वहां से निकले ताकि कोई हमें देख ना ले.

सरकारी स्कूल से बाहर निकलने के लिए कई रास्ते थे, जिससे अंशु वाकिफ थी.
शायद उसने स्कूल की बिल्डिंग में ही अपनी बुर को चूत में कन्वर्ट करवाया था.

अब जब भी हमें मौका मिलता, हम रोज चूत चुदाई वाला खेल खेल लेते और एक दूसरे को पूरा मज़ा देते.
हमारा लंच ब्रेक का पूरा आधा घंटा टॉयलेट में चुदाई करते हुए ही निकलता था.

एक दिन सक्सेना मैडम ने मुझे गर्ल्स टॉयलेट में जाते हुए देख लिया.

पूछने पर मैंने बहाना बनाया कि मेरा पेट खराब है और बाय्स टॉयलेट के नाम पर यह खुला मैदान है. इसीलिए मुझे अन्दर जाने दो!

सच पूछो तो मुझे डर लग रहा था कि कहीं मेरा मेडिकल टेस्ट ना करवा दिया जाए.
लेकिन यह सब सरकारी स्कूलों में होना संभव नहीं था तो मेरे साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.

मैं अंशु और सौम्या के साथ सेक्स वाली मस्ती करता रहा.
उस स्कूल में मैं दो साल तक पढ़ा और ये तीनों साल सेक्स भरी मस्ती करते-करते गुजरे.

फिर एक दिन स्कूल छोड़ने का समय आ गया.
उस दिन हमारी फेयरवेल पार्टी थी.
वह दिन उस स्कूल में हमारा आखिरी दिन था.

उस दिन सुबह 8 बजे हमारा प्रोग्राम शुरू हुआ और दोपहर 12 बजे तक चला.

समारोह के दौरान अंशु ने मुझे बताया कि उसके पेरेंट्स कुछ दिनों के लिए बाहर गए हुए हैं और उसने मुझे अपने घर आने के लिए भी कहा.

मैं स्कूल के बाद अंशु के साथ उसके घर आ गया.
वहां जाकर मैंने देखा कि वहां पर सौम्या भी आई हुई थी.

उनके साथ अंशु और सौम्या की 6 सहेलियां और थीं.
वहां कुल मिलकर आठ लड़कियां थीं.

मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था.

तब सौम्या ने मुझे बताया कि ये सब भी तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहती हैं.
उस दिन मेरा जन्मदिन भी था.
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अंशु ने मुझे बताया कि ये मेरा जन्मदिन का तोहफा बन कर आई हैं.
उस दिन मैंने उन आठों लड़कियों को एक एक करके चोदा.

मैंने अपने घर पर फोन करके कह दिया था कि मुझे घर आने में देरी हो जाएगी.
अंशु के पास गर्भ निरोधक और कामोत्तेजक दवाओं का भंडार रहता था. कुतिया ने मुझे एक साथ दो दो गोलियां खिला कर सबके साथ चुदाई के लिए कड़क लंड वाला बनाए रखा.

उन सबको चोदने के बाद हम बाथरूम में एक साथ नहाने के लिए चले गए.

अंशु के घर में बाथटब था.
पता नहीं उन लड़कियों को क्या सूझा, उन्होंने मुझे चारों तरफ से घेर लिया और मेरे सामने अपनी-अपनी चूत में उंगलियां करने लगीं.
मैंने उनसे कहा- अब बस, अब मैं और नहीं कर पाऊंगा!

तभी अंशु एक और गोली लेकर आई और उसने मुझे उसे खाने के लिए बोला.
उसे खाते ही पता नहीं मुझे क्या हुआ, मैं एकदम से गामा पहलवान सा उत्तेजित हो गया.

मैंने फिर से उन लड़कियों की चूत में उंगली करना शुरू कर दिया और उनकी चुत की मुठ मारता हुआ उनकी चूत चाटने लगा.

एक घंटा के बाद वे सब एक-एक करके मेरे ऊपर झड़ गईं.
उन्होंने मुझे पूरी तरह से अपने माल से ऐसे लथपथ कर दिया मानो जैसे मैं दूध से भरे हुए बाथटब में सर से लेकर पांव तक पूरा डूब गया हूँ.

थोड़ी देर के बाद मैं भी झड़ गया और उन लड़कियों ने मुझे चाट चाट कर साफ कर दिया.
अब हम सबने नहाकर अपने-अपने कपड़े पहने और एक-एक फ्रेंच किस करने के बाद अपने घर चले गए.

हम सबके जाने के बाद अंशु ने अपने ब्वॉयफ्रेंड को अपने घर बुलाया और वे दोनों दो दिन तक नंगे रह कर चुदाई करते रहे, जब तक कि अंशु के पेरेंट्स के आने का फोन नहीं आ गया.

आगे आप सब को पता हैं कि उन दोनों ने 2 दिनों तक लगातार किस तरह से सेक्स किया किया होगा.

दोस्तो, आपको मेरी यह Xxx स्कूल स्टूडेंट्स सेक्स कहानी कैसी लगी, मुझे जरूर बताएं.
आप मुझे मेरी मेल आईडी पर मेल कर सकते हैं.
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ANTARVASANA KAHANIYAN:
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पति ने मुझे बुलाकर अपनी पत्नी की चूत चुदवाई



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Xxx ककोल्ड हसबैंड स्टोरी में एक अनजान आदमी ने मुझसे संपर्क किया और खुद से अपनी बीवी की चुदाई की बात की. मैंने सोचा कि कोई मजाक होगा. लेकिन बात आगे बढ़ी तो …

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम राहुल है, मैं उत्तर प्रदेश के लखनऊ में रहता हूं.
मैं पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट टाइम जॉब भी करता हूं.

मेरी उम्र 21 साल है. दिखने में मैं लंबा और पतला हूं लेकिन अच्छा दिखता हूं।

यह Xxx ककोल्ड हसबैंड स्टोरी पिछले साल दिसंबर की है जब मैं ऑफिस की छुट्टी होने की वजह से घर पर था और धूप खा रहा था.

तभी मेरे फोन पर एक अंजान नंबर से मैसेज आया.
उस मैसेज में लिखा था- मुझे आपका नंबर सोशियल मीडिया से मिला है!

मैंने भी हैलो कहा और पूछा- जी बताइए, क्या काम है?
उन्होंने अपना नाम शिखा बताया और कहा- मुझे आपसे एक काम है!

तो मैंने पूछा- क्या काम है?
उन्होंने कहा- मैंने आपकी फोटो देखी है और आप काफ़ी अच्छे लगते हो!
मैंने शुक्रिया कहा और उनके अगले मैसेज का इंतजार करने लगा.

अब उन्होंने आप से तुम पर आते हुए लिखा- मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करना है और बदले में मैं तुम्हें पैसे भी दूँगी!
ये सब सुनकर पहले तो मैं हक्का बक्का रह गया, फिर मैंने सोचा कि कोई मज़ाक कर रहा है.

मैंने कहा- आज सुबह से कोई मिला नहीं क्या? मुझे क्यों परेशान कर रहे हो भाई?
तो उन्होंने कहा- नहीं, मैं सीरियसली बात कर रही हूँ. मेरे पति एकदम ओपन माइंडेड हैं और सब कुछ जानते हैं.

अब मुझे कुछ शक हुआ और मैंने लिखा- भाई अगर आप लड़के हो तो बताओ तो पहले … और सच क्या है … ये भी बताओ? यदि तुम अपनी बीवी को मेरे लौड़े से चुदवाना चाहते हो तो भी साफ बताओ या तुम खुद अपनी गांड मरवाना चाहते हो तो भी साफ साफ बताओ!

मेरी इस बात पर उधर से मैसेज नहीं आया.
मैं समझ गया कि शायद कुछ सोचा जा रहा है.

फिर मैसेज आया- क्या तुम मुझे अपना लंड दिखा सकते हो?
मैंने कहा- दिखा तो सकता हूँ पर पहले कुछ गर्म दिखाओ तो लंड कड़क हो सकेगा, फिर दिखा भी दूंगा!

उसने एक नंगी लड़की के दूध व चूत दिखती हुई वीडियो दिखाई, चेहरा अभी भी नहीं दिखाया गया था.

उसने कहा- यह मेरी बीवी की वीडियो है.
मैंने कहा- बीवी की वीडियो है तो सच में बहुत ही सेक्सी लेडी तुम्हारी बीवी है.

उसने कहा- अब अपना लंड दिखाओ!
मैंने एक पल को सोचा और अपना लंड दिखा दिया.

उस तरफ से बात करने वाला मेरा लंड देख कर संतुष्ट हो गया था.
अगले ही पल उन्होंने कहा- हां मेरा नाम राज है … और सच यह है कि मुझे कुछ नया ट्राइ करने का मन है. इसी लिए किसी ऐसे लड़के की तलाश कर रहा हूँ जो मेरी वाइफ के साथ सेक्स कर सके, वह भी मेरी आंखों के सामने!

उन्होंने बताया कि वे लखनऊ में ही राजाजीपुरम में रहते हैं, जो मेरे घर से ज्यादा दूर नहीं है.
उन्होंने कहा कि वे ऐसे ही किसी को नहीं बुला सकते हैं. घर की इज़्ज़त की बात है!

मैंने पूछा- इतने लोगों में आपने मुझे ही क्यों चूज किया?
तो उन्होंने कहा- तुम देखने में अच्छे लगे इसलिए मैसेज किया.

मैंने उनसे कॉल करने के लिए कहा और हमारी बात हो गई.
उसके बाद उन्होंने कहा- दिन में आ जाओ घर में, सिर्फ़ वह और उनकी वाइफ हैं और उनका छोटा सा बेटा!

मैंने उनसे उनकी वाइफ की फोटो मांगी.
उन्होंने भेज दी.

सच में बड़ी गजब की कांटा माल थी यार … उसकी औसत लंबाई थी.
वह गोरी सी 32-30-34 की एकदम जहर थी.

मेरा उनसे टाइम फिक्स हुआ और मैं दिए हुए अड्रेस पर पहुंच गया.

उनके Xxx ककोल्ड हसबैंड ने आकर गेट खोला तो मैंने नमस्ते किया.
उन्होंने भी हाथ मिलाया और मुझे रूम में ले गए.

अपनी वाइफ को नाश्ता लाने के लिए भेजा.
फिर मुझसे कहा- मेरी बीवी की चुदाई देखने के लिए मैंने एक हिडन कैमरा लगाया है.
मैं दीवार पर इधर उधर देखने लगा.

वे बोले- तुम परेशान न हो, उससे तुम्हें जब तक खतरा नहीं है क्योंकि बीवी मेरी चुद रही है और तुम उसे चोदने वाले हो!
मैं हंस दिया.

मैंने कहा- इस सबका सबब क्या है?
वे बोले- तृप्ति!

मैंने कहा- ठीक है. बस एक आखिरी बात और?
वे मेरी तरफ देखने लगे.

मैंने कहा- लंड देखने का क्या मतलब था?
वे हंस कर बोले- मेरा तुमसे आधा है.

मैंने कहा- बड़े छोटे से बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है, टाइमिंग से फर्क पड़ता है!
वे बोले- तुम कितना टाइम लगाते हो!

मैंने कहा- मूड पर डिपेंड करता है. यदि मैडम ने सहयोग किया तो मजा देर तक चल सकता है!

वे हंस दिए और बोले- वह तुम्हें पूरा सहयोग करेगी और यदि वह तुमसे खुश हुई तो दुबारा चुदने के लिए भी बुला सकती है.

यह सुनकर मैं चुप हो गया.

अगले कुछ पल हम दोनों शांत रहे.
और उसी दरमियान वे हॉल में अन्दर आईं तो मैं तो उन्हें बस देखता ही रह गया.

थोड़ी देर बात हुई.
उसके बाद वे मुझे अपने बेडरूम में ले गए.

फिर वाइफ को लेकर आए और उन्हें मेरे बगल में बैठा दिया.
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भाभी जी बहुत शर्मा रही थीं.
और सच पूछो तो मुझे भी थोड़ा अजीब लग रहा था क्योंकि पहली बार ऐसा हो रहा था.

फिर वे सज्जन अपने बेटे को लेकर बाहर चले गए.
मैंने मैडम का हाथ पकड़ा और धीरे धीरे बात करना आरंभ की- क्या आप मेरे साथ सहज हैं?
वे- हां, कुछ कुछ सहज हूँ. कुछ देर तक बातें करने से और ज्यादा सहज महसूस करूंगी.

मैंने कहा- क्या आप अपने पति के अलावा किसी दूसरे मर्द से पहली बार सेक्स कर रही हैं?
उन्होंने कहा- हां … पति की जानकारी में पहली बार करने जा रही हूँ!

मैंने कहा- इसका मतलब आप किसी अन्य से भी चुदवा चुकी हैं?
जब मैंने चुदवा चुकी हैं शब्द कहा तो वे मुस्कुरा दीं और बोलीं- शादी के पहले की बात को अभी दुहराने से क्या फायदा!



मैं समझ गया कि यह बात पति कि सुनाई पड़ रही है और वॉइस सेंसर वाले कैमरे से देखा व सुना जा रहा है.

मैंने उनसे कहा- तो अब शुरू करें?
तो उन्होंने अपनी पलकें हिला दीं.

मैंने भी धीरे धीरे उनकी गर्दन पर हाथ फेरा और कहा- अगर कोई प्राब्लम हो तो हम कम्बल के अंदर कर सकते हैं!
उन्होंने कुछ नहीं कहा.

मैंने भी उनकी रजा समझी और कम्बल में आ गया.
चूंकि ठंड का मौसम था तो हम दोनों कम्बल के अन्दर घुस गए.

मैंने उन्हें अपनी ओर खींचा और उनके होंठों पर अपने होंठ लगा दिए.
शुरुआत में मैडम हिचकीं, पर बाद में हम दोनों ने किस करना शुरू कर दिया.

धीरे धीरे वे भी मेरा साथ देने लगीं.

किस करने से गर्मी बढ़ी तो मैंने कम्बल हटा दिया और उनके होंठों का रस पीते हुए ही उनके कपड़े उतार दिए.
उन्होंने भी मेरी टी-शर्ट उतार दी.

मैं उनके बूब्स दबाने लगा और वे आहें भरने लगी थीं.

मैं अब उनके मम्मों पर आ गया और निप्पल को मुँह में भर कर चूसने लगा.
एक को चूसते हुए मैं दूसरे को दबा रहा था.

उन्हें अपने मम्मे चुसवाने में बड़ा मजा आ रहा था तो वे मेरे मुँह में अपने हाथ से अपने निप्पल को दे रही थीं और आह आह करती हुई मेरे हाथ से अपने दूसरे दूध की मां चुदवा रही थीं.

मैंने उनके दूध को मुँह से निकाला और कहा- कैसा लग रहा है?
वे बोलीं- जबरदस्त लग रहा है … आज काफी समय बाद मेरे दूध किसी ने इस तरह से चूसे हैं!

मैंने कहा- तो लेट कर चुसवाने का मन है!
वे राजी हो गईं.

मैंने कहा- जब लंड की सवारी करोगी, तब दूध पिलाना!
उन्होंने ओके कहा.

इसके बाद मैंने उनकी सलवार और पैंटी भी उतार फेंकी.

अब वे मेरे सामने एकदम बिना कपड़ों के थीं.

मैं टूट पड़ा और उन्होंने भी मेरी पैंट व अंडरवियर को हटा दिया.
जैसे ही उन्होंने मेरा लंड देखा, उनकी आंखें फट गईं.

वे हैरानी से लंड को देखती हुई बोलीं- इतना बड़ा!
मैंने भी कहा- हां क्यों … पहले नहीं देखा क्या?

वे मेरी आंखों में आंखें डालकर हंसने लगीं.
अगले ही पल उन्होंने अपना हाथ आगे बढ़ा कर लंड को पकड़ा और उसे आगे पीछे करने लगीं.

मैंने कहा- चूसने का मन है?
वे बोलीं- हां.

मैंने उनके मुँह में लंड दे दिया और उन्होंने लंड को चूस कर गीला कर दिया.

कुछ पल के बाद मैंने भी उनकी चूत पर हाथ फेरा तो वे अपनी गांड उठाने लगीं.

उनका बच्चा ऑपरेशन से हुआ था तो चूत अभी भी टाइट ही थी, ज्यादा ढीली नहीं हुई थी.

फिर मैंने उनके मुँह से लंड निकाला और कहा- अब चुदाई करता हूँ!

उन्होंने गद्दे के नीचे से एक कंडोम निकाल कर मुझे पकड़ा दिया.
मैंने अपने लौड़े को हाथ सहलाया और एक कंडोम चढ़ा लिया.

फिर उनकी गांड के नीचे तकिया लगाया और अपने लंड को उनकी चूत पर सैट कर दिया.

वे अपनी चूत फैलाने के लिए टांगों को कुछ चौड़ा करने लगीं.
उसी पल मैंने हल्का सा धक्का दे दिया तो मेरा आधा लंड चूत के अन्दर घुसता चला गया.
और उनकी हल्की सी चीख निकल गई ‘ऊई मां मर गई …’

फिर मैंने किस करते करते एक और झटका मारा.
जिससे पूरा लंड अन्दर चला गया.
और वे मेरे शरीर को पकड़ कर हल्के से चिल्ला दीं- रुक जा साले … चूत फाड़ेगा क्या?
यह सुनकर मैं थोड़ी देर रुक गया.

फिर जब वे सामान्य हो गईं, उसके बाद मैंने धीरे धीरे आगे पीछे करना आरम्भ किया.
अब उन्हें भी मजा आने लगा था.

फिर ऐसे ही करते करते मैंने 20 मिनट तक ताबड़तोड़ चुदाई की.
उन्हें भी बहुत मजा आया.

मेरा लंड उनकी चूत झड़ने के बाद भी अड़ा हुआ था और वे एकदम ढीली पड़ी हुई थीं.
मेरे जोरदार शॉट लगटे रहने के कारण वे कहने लगीं- आप तो जानवर हो पूरे … आपका कब निकलेगा?
मैंने कहा- बस जब हो जाएगा तो देख लेना!

कुछ देर बाद अब मेरा भी होने वाला था तो मैंने अपने झटके काफी तेज कर दिए थे.
वे चुदाई की अनुभवी थीं तो समझ गई थीं कि मेरा काम तमाम होने वाला है इसलिए वे मुझे झेलती रहीं.

चुदाई करते करते जैसे ही मेरे लंड का काम हो गया, मैं उनके ऊपर गिर गया.
वे मुझे अपनी बांहों में भरकर पड़ी रहीं और मैं अपनी तेज तेज सांसों को नियंत्रित करता हुआ उनके मम्मों पर अपनी छाती को फुलाता पिचकाता रहा.
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शायद उन्हें यह अच्छा लग रहा था. इसलिए हम दोनों काफ़ी देर तक साथ में ही लेटे रहे थे.
उसके बाद हम उठे, बाथरूम गए और अपने आपको साफ किया.

फिर कपड़े पहन कर रूम से बाहर आ गए.
मैंने उनके Xxx ककोल्ड हसबैंड के साथ मिल कर काफ़ी देर तक बात की.

उन्होंने मुझे पैसे दिए और बोले कि जब जरूरत होगी, तो वापस बुलाऊंगा!
मैंने भी कहा- ठीक है सर!

मैं अपने घर आ गया.
थोड़ी देर बाद उनका मैसेज आया- यार, क्या बात है, मेरी वाइफ तुमसे बहुत खुश हुई है. वह तो मुझसे मिलते ही कहने लगी कि अगली बार से यही आएगा, थैंक्स यार.

उसके बाद हमारी काफ़ी बात होती रहती थी और मैंने यह सब बात अभी भी प्राइवेट रखी है.
ANTARVASANA KAHANIYAN:
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अनजान लड़की की चुत चुदाई का मजा


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सेक्स की कहानी में पढ़ें कि कैसे ऑटो में एक सेक्सी भाभी मेरे साथ जाती थी.एक दिन बारिश में मैं कार ले गया तो भाभी को लिफ्ट दे दी. उसके बाद क्या हुआ?

दोस्तो, कैसे है आप सभी लोग!

मेरा नाम सागर है और मैं 28 साल का हूँ. मेरा लंड 8 इंच लंबा और काफी मोटा है.
आज मैं आप लोगों के सामने अपनी एक सच्ची सेक्स की कहानी पेश कर रहा हूँ.
मुझे पूरा यकीन है कि मेरी ये सेक्स कहानी पढ़ने के बाद लड़कियों और भाभियों की चूत में खुजली शुरू हो जाएगी और लड़के दो बार मुठ जरूर मारेंगे.

वैसे मैं आप लोगों को बता दूँ कि मुझे भाभियों को चोदना बहुत अच्छा लगता है.
खासकर उन भाभियों के साथ चुदाई का मजा ज्यादा आता है, जिनके एक या दो बच्चे हों.
उनके साथ चुदाई में किसी भी तरह की कोई प्रॉब्लम नहीं होती है.
उनको जैसे चाहो, वैसे चोद लो. होटल में, रूम में … उनकी लेने में, कहीं कोई दिक्कत नहीं होती है.

सेक्स की कहानी आज से 2 साल पहले की उन भाभी की है जो दो बच्चों की मां थीं लेकिन भाभी को देखकर कोई भी ये नहीं बोल सकता था कि इनके दो बच्चे होंगे.

मैं रोज की तरह अपने आफिस ऑटो से जा रहा था.
तभी मेरे पास एक भाभी आकर बैठ गईं.
वो थोड़ा जल्दी में दिख रही थीं और उनके चेहरे पर एक अजीब सी उदासी भी दिख रही थी.

मैंने भाभी को ताड़ना शुरू किया तो वो मुझे एक मस्त माल लग रही थीं.

मैं बस उनको देखता रहा. फिर जहां भाभी को जाना था, वो वहां उतर कर चली गईं.

उनके जाने के बाद मैं अब भी उनकी ही यादों में खोया था.

उस दिन मेरा मन काम में जरा भी नहीं लगा और न आफिस में किसी और से बात करने में मन लगा.
मेरे दिल और दिमाग बस वो ऑटो वाली भाभी छाई हुई थीं.

अगले दिन नसीब से फिर से वही भाभी अपनी उसी हालत में मेरे ऑटो में आकर बैठ गई थीं.

आज जब भाभी ऑटो में बैठ रही थीं, तब अचानक से मेरा एक हाथ भाभी के नरम बूब से टकरा गया.
मुझे एकदम से झटका सा लगा.

आज वो मेरे बिल्कुल पास बैठ गई थीं. भाभी की टांगें मेरी टांगों से चिपकी हुई थीं.

भाभी ने आज कुर्ती और स्लैक्स पहनी थी.
जब उनकी टांगें मुझसे चिपकीं, तो मेरे तो तनबदन में मानो आग सी लग गई.

भाभी एकदम अप्सरा सी लग रही थीं, लेकिन न जाने वो क्यों गुमसुम सी रहती थीं.

अब भाभी लगभग रोज ही मेरे साथ ऑटो में जाने लगी थीं.

एक दिन सुबह से ही बारिश हो रही थी तो मैं उस दिन अपनी कार लेकर गया था.

जब उधर से वापस आ रहा था तब वो ऑटो के इन्तजार में खड़ी थीं और बारिश में भीग रही थीं.

मेरी नजर भाभी पर पड़ी तो मैं कार रोक कर उनको देखने लगा.
भाभी बड़ी मस्त माल लग रही थीं.

उस दिन भाभी ने ब्लू कलर की कुर्ती पहनी थी और सफेद रंग की स्लैक्स पहनी थी.

बारिश में भीगने की वजह से उनकी कुर्ती और स्लैक्स उनके बदन से चिपक गए थे और उनकी लाल ब्रा और काली पैंटी का रंग एकदम साफ दिख रहा था.
भाभी के मोटे मोटे बूब्स साफ़ नजर आ रहे थे और बारिश में भीग कर उनकी कुर्ती उसकी गांड से बिल्कुल चिपक गयी थी, जिससे उनकी मस्त गांड का आकार एकदम साफ दिख रहा था.

उनके गीले बाल जब उनके गालों पर आ रहे थे, तब वो और ज्यादा खूबसूरत दिख रही थीं.

मैंने कार उनके पास रोकी और उनसे कहा- अरे आप तो पूरी भीग रही हैं. कार में आ जाओ भाभी जी, मैं आपको आपके घर तक ड्रॉप कर देता हूं.

पहले तो वो बोलीं- मैं आपको पहचानती नहीं हूँ.
उनकी आवाज़ इतनी मीठी थी कि क्या बताऊं.

मैंने कहा- भाभी आप रोज जिस ऑटो से जाती हो, मैं भी उसी से जाता हूं और अब आप ज्यादा सवाल मत करो. अगर आप ज्यादा भीग गईं, तो बीमार हो जाएंगी.

भाभी के मना करने पर भी मैंने उनको अपनी कार में बैठा लिया.
वो ठंड से कांप रही थीं.

मैंने कार का हीटर चालू कर दिया जिससे उनको थोड़ा आराम मिलता दिखने लगा.

मैंने भाभी से उनका नाम पूछा, तो उन्होंने अपना नाम रूही बताया.

मैंने कहा- मैं रोज आपको देखता हूं, आप किसी आफिस में काम करती हैं न!
वो बोलीं- हां, मैं पास ही एक आफिस में काम करती हूं.

फिर मैंने उनसे उनके परिवार के बारे पूछा.
तो उन्होंने बताया कि मेरे दो बच्चे हैं और मेरे हस्बैंड बाहर जॉब करते हैं.

जब मैं अपनी कार के गेयर बदल रहा था तो मेरा हाथ बार बार उनकी जांघों को छू रहा था.

उनका वो स्पर्श मेरे अन्दर काम वासना को उत्तेजित कर रहा था.
बस मैं ये ही सोच रहा था कि कैसे मैं इस भाभी की मदमस्त जवानी का रसपान कर पाऊं.

भाभी मुझे अपने घर का रास्ता बताती जा रही थीं और मैं उनके बताए रास्ते पर कार दौड़ाए चला जा रहा था.

तभी भाभी ने एक घर के सामने कार रुकवाई और मुझसे कहा- आप अन्दर आ जाओ, चाय पीकर जाना.
मैंने कहा- ओके.

उन्होंने घर का गेट खोला तो अन्दर उनके दोनों बच्चे थे, जो 4 साल और 2 साल के थे.

भाभी के बच्चे एक आया के पास रहते थे. भाभी के आने पर वो आया बच्चों को लेकर अन्दर के कमरे में चली गई.
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मैं वहीं सोफे पर बैठ गया और वो बाथरूम में चेंज करने चली गईं.

मेरे दिमाग में बस अब रूही भाभी की चुदाई का भूत सवार हो गया था.

मैं उठा और चुपचाप उनके बाथरूम की तरफ चला गया. वहां एक होल से उनको देखने लगा.

अन्दर का नज़ारा देख कर मैं चौंक गया. रूही भाभी सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं, उनके मोटे मोटे बूब्स उनकी ब्रा को फाड़ कर बाहर आना चाह रहे थे.

उन्होंने भी अपने मम्मों को अपनी ब्रा से आज़ाद कर दिया और बूब्स बाहर फुदकने लगे.

भाभी के दूध एकदम गोल टाइट थे और निप्पल एकदम सुर्ख लाल थे.

वो अपने मम्मों को बड़े प्यार से एक तौलिए से पौंछने लगीं.

तभी मेरी नजर उनकी टांगों के बीच में पड़ी, उनकी जांघें एकदम चिकनी थीं. तभी भाभी ने अपनी पैंटी भी उतार दी.

आह क्या मस्त चुत थी उनकी … एकदम चिकनी.
भाभी की चुत पर एक भी बाल नहीं था.

वो उधर अपनी चुत को साफ करने लगीं, इधर मेरा लंड मेरी पैंट को फाड़कर बाहर आने लगा था.

भाभी ने अब एक गाउन पहना और मैं वापस अपनी जगह आकर बैठ गया.



वो जब बाहर आईं, तो ब्रा न पहनने के कारण उनके बूब्स इधर उधर हो रहे थे.
गाउन का गला बड़ा होने की वजह से उनके बूब्स की घाटी साफ दिख रही थी.

मुझसे अब और कंट्रोल नहीं हो रहा था. मेरा मन कर रहा था कि मैं अभी रूही भाभी को चोद दूँ.

रूही भाभी मुझसे बोलीं- आप बैठो … मैं चाय बनाकर लाती हूँ.
वो रसोई में चली गईं.

मैं अपने लंड को सहलाने लगा. अब बस मैं ये सोच रहा था कि कैसे रूही भाभी की चुत चोद लूं.

फिर मुझे पता नहीं क्या हुआ और मैं उनके पीछे पीछे रसोई में चला गया.
मैंने उनको पीछे से पकड़ लिया.

भाभी मेरी इस हरकत से एकदम चौंक गईं और मुझसे बोलीं- ये क्या बदतमीजी है.

उन्होंने मुझे एक धक्का दे दिया.
मैं वहां से जाने को हुआ.

फिर पता नहीं अचानक से मुझे क्या हुआ और मैं फिर रूही भाभी के गाउन को पीछे से उठा कर उनकी कमर और गांड पर पागलों की तरह किस करने लगा.

मेरे इस तरह से किस करने की वजह से भाभी भी शायद गर्म हो गयी थीं.
भाभी मेरी तरफ घूम कर मुझे देखने लगीं और वो भी मुझे किस करने लगीं.

मैंने उनको वहीं रसोई की स्लैब पर बैठा दिया और उनकी टांगें खोल दीं.

अपने होंठों को मैंने उनके नर्म होंठों पर रख दिया और उनके मम्मों को सहलाने लगा.

वो बोलीं- मैं उसी समय से तुमसे चुदना चाह रही थी, जब तुम मेरी जांघों को टच कर रहे थे.
मैंने कहा- फिर आपने मुझे धक्का क्यों दिया?

भाभी मुस्कुराने लगीं और बोलीं- तुम्हारा दम चैक कर रही थी कि तुम्हारे अन्दर कितनी हिम्मत है कि तुम मुझे चोद सको.

मैं भाभी को वासना से देखने लगा.

भाभी और ज्यादा हॉट हो गई थीं.

फिर वो मुझको होंठों पर किस करते करते मुझे अपने बेडरूम में ले गईं.

वहां उन्होंने मुझको बेड पर बैठा दिया.

मैंने उनका गाउन ऊपर किया और उनके पेट और नाभि पर किस करने लगा.
वो मेरे बालों को खींचती रहीं.

फिर मैंने भाभी को बेड पर लेटा दिया और उनकी टांगें खोलकर उनके पेट और बूब्स दबाकर किस करने लगा.

मैंने उनका जल्दी से गाउन उतार दिया. अब वो मेरे सामने एकदम नंगी थीं.

मैं पागलों की तरह भाभी के मम्मों को अपने होंठों से चूसने लगा और उनके बदन को मसलने लगा.
कभी मैं भाभी की जांघों पर किस करने लगता … तो कभी उनके पेट पर चूमने लगता.

मैंने भाभी की चुत पर अपनी जीभ रख दी और उनकी चुत के दाने को सहलाने लगा.
इससे भाभी वासना में तड़पने लगीं.

फिर मैंने भाभी को उल्टा लेटाया और उनके बाल आगे करके कमर से पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया.
भाभी की गांड मेरे सामने आ गई थी तो मैं उनकी गांड के छेद को पागलों की तरह चाटने लगा.

कुछ देर बाद भाभी ने मेरी टी-शर्ट और पैंट उतार दी. मेरा फौलादी लंड उनके सामने हिल रहा था.
मेरा कड़क लंड देख कर वो चौंक गईं लेकिन कुछ बोली नहीं.

फिर मैंने भाभी को सीधा लेटाया और उनकी चुत पर अपना लंड रख दिया.

भाभी ने चुत उठाई तो मैंने एक तेज धक्का दे मारा जिससे मेरा आधा लंड चुत के अन्दर घुस गया.

एकदम से भाभी की चीख निकली और साथ में आंखों से आंसू भी निकल गए.

मैं भाभी के आंसुओं को पी गया.

आप लोगों को मैं क्या बताऊं … जब मेरा लंड उनकी चुत में घुसा तब मुझे कैसा फील हुआ.
वो आनन्द मैं आपको शब्दों में नहीं बता सकता हूँ.

थोड़ी देर बाद मैंने एक धक्का और मार दिया. इस बार मेरा समूचा लंड भाभी की चुत में समा गया.
मैं जोर जोर से रूही भाभी की चूत को चोदने लगा.

मैं इस समय भाभी को इतनी तेज रफ्तार से चोद रहा था कि पूरा बेड हिल रहा था.

मैंने रूही से पूछा- कैसा लग रहा है?
वो कुछ नहीं बोलीं और मुझसे कस कर चिपक गईं.

भाभी ने अपनी दोनों टांगें मेरे कमर में फंसा दीं.
मैं और जोर से रूही भाभी की चुदाई करने लगा.

कुछ मिनट बाद मैंने रूही भाभी की चूत को अपने लंड के गर्म माल से भर दिया और उनके ऊपर ही लेट गया.
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थोड़ी देर बाद हम दोनों उठे और एक साथ बाथरूम में आ गए.
वहां मैंने फिर से एक बार रूही भाभी की चुदाई की.

फिर मैंने कपड़े पहने और जाने को हुआ तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझसे बोलीं- मुझे तुमसे कुछ बात करनी है.

मैंने पूछा तो उन्होंने मुझे बताया- मेरे हस्बैंड महीने में 3 बार आते हैं और उनका लंड तुम्हारे जितना बड़ा नहीं है. आज तुमने मेरी चुत की प्यास मिटा दी है.

मैंने रूही भाभी से कहा- अब आप जब भी चाहो, मुझसे अपनी प्यास मिटवा सकती हो.
रूही भाभी बोलीं- आज तुम यहीं रुक जाओ और पूरी रात मुझे चोद कर मेरी प्यास मिटा दो.

मैंने कहा- जैसा आपका हुक्म भाभी, पर आपके बच्चे?
भाभी मुस्कुरा कर बोलीं- वो तुम चिंता मत करो. मेरी आया सब जानती है. वो बच्चों को कमरे में ही रखेगी.

मैंने कहा- आया को सब मालूम है, इसका क्या मतलब है भाभी?
भाभी ने हल्की सी स्माइल देते हुए कहा- वो ही मेरी सहारा है.

मैं समझ गया कि भाभी उसके साथ लेस्बियन सेक्स करती होंगी.

उस रात रूही भाभी को मैंने फुल नाईट चोदा.
सुबह तक भाभी की हालत उठने लायक नहीं थी.

अब भाभी मुझसे हर तीसरे दिन चुदती हैं.

अगली कहानी में मैं आपको बताऊंगा कि कैसे मैंने रूही भाभी को उनके घर पर उनके पति की मौजूदगी में चोदा और उनकी आया को भी पेल दिया.

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पति के बेस्ट फ्रेंड ने मौके का फायदा उठा के चोदा


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सेक्स प्ले विद ब्यूटीफुल भाभी का मजा मेरे पति के ख़ास दोस्त ने मेरे साथ किया. एक रात मुझे उनके घर में रुकना था पर सोने की जगह की तंगी के कारण मैं अपने पति के दोस्त के साथ सो गयी.


दोस्तो, मेरा नाम सुशीला है. मेरी उम्र 28 साल है।
मेरी शादी मेरे घर वालों ने 20 की उम्र में ही करा दी थी।
मेरे पति का नाम रवि है.

रवि एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं और महीनों महीनों के लिए घर से बाहर रहते हैं।

आज मैं आपके समक्ष एक ऐसी कहानी लाई हूँ जिसे पढ़कर आप लोग अपने हाथों को अपने कंट्रोल में नहीं रख पाएंगे।

यह कहानी मेरे और मेरे पति के बचपन के दोस्त के साथ हुई घटना पर आधारित है।

मैं आपको अपने बारे में बता दूँ कि मेरा रंग एकदम गोरा है और मेरा 36-32-40 का फिगर बहुत ही कातिलाना है.
ऐसा मेरा नहीं मेरे चाहने वालों का कहना है.

रूप रंग की बात खत्म करके सीधे सेक्स प्ले विद ब्यूटीफुल भाभी कहानी पर आती हूँ.

उस दिन मैं अपनी साड़ी लपेट चुकी थी और बालों को आखिरी स्वरूप दे रही थी कि तभी सासु माँ की आवाज़ आयी- तैयार हुई या नहीं? सब लोग आ चुके होंगे. ज्यादा देर नहीं करते अब!

मैं तुरंत कंघा नीचे रखते हुए बोली- हो गया बस!
और कमरे से बाहर निकल गयी।

सासु जी तैयार थी पड़ोसी के यहाँ एक रात्रि जागरण में जाने के लिए।
मैंने तुरंत कमरे को ताला लगाया और सासुजी के साथ पैदल घर से निकल पड़ी।

सासु जी कुछ बोलती हुई चल रही थी पर मैं किन्ही और ख्यालों में थी.
पति को दूसरे शहर गए 4 महीने हो चुके थे और मुझे उनकी बहुत याद आ रही थी, विरह के कुछ महीने काट रही थी।

दस मिनट के बाद ही हम पड़ोस के मकान के सामने खड़े थे.
अंदर काफी चहल पहल थी, रात्रि जागरण का माहौल बन चुका था।

एक बड़े हाल में सारे पुरुष लोगों के लिए व्यवस्था थी।

वहाँ की मेरी भाभी, सहेलियां दूसरे थोड़े छोटे कमरे में थी अपने पीहर और घनिष्ट सहेलियों के साथ!
इसलिए थोड़े अभिवादन के बाद मैंने उनको डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा।

अंदर एक बड़े कमरे में सारी औरतें बैठी बातों में मशगूल थी.
हमारे आते ही उन्होंने स्वागत किया और हम लोग बैठ गए।

कुछ औरतें बातों में मग्न थी, कुछ ने सोने की तैयारी कर ली थी।
पता चला कि पूजा आरती का कार्यक्रम सुबह 5 बजे होने वाला है।

मैं अपने पुराने दिनों और विचारों में खो गयी और अब मध्य रात्रि होने वाली थी.

अब तक सारी औरतें और पुरुष सो चुके थे।
शायद सुबह 5 बजे उठने की तैयारी में!

मगर मेरी आँखों में नींद नहीं थी, भीड़ भरा माहौल देख कर मेरी नींद वैसे भी जा चुकी थी।

मैं कमरे से बाहर लघु शंका के बहाने किसी तरह औरतों के पाँव बचाते हुए बाहर निकली।

तभी सामने मोहित दिखाई दिया, जिसका यह घर था।
एक हंसमुख और मुखर स्वभाव का युवक मेरे पति का हम उम्र!
जब भी किसी फंक्शन में जाता … अपनी बातों से वह समां बाँध लेता।
मुझे ऐसे व्यक्तित्व हमेशा आकर्षित करते हैं।

पिछली बार जब कुछ महीने अपने पति से दूर थी तब जब भी वह मिलता, मेरी कुशलक्षेम जरुर पूछता और मदद के लिए पूछता।
मगर कभी उसे मदद का मौका नहीं दिया।

मुझे देखते ही उसने हँसते हुए सवाल दाग दिया कि मेरे पति कब आने वाले हैं।
मुझे भी पक्का पता नहीं था पर बोल दिया- कुछ और महीने लगेंगे।

फिर उसने पूछा कि मैं अब तक सोई क्यों नहीं जबकि सारे लोग सो चुके थे।
उसने मुझे सुबह 5 बजे के प्रोग्राम के बारे में बताया।

मैंने उसे समझाया- इस भीड़ में मैं नहीं सो सकती।
उसको मुझ पर दया आयी और कुछ सोचने लगा।
उसकी इस उधेड़बुन को देखते हुए मैंने एक सवाल दाग दिया- आप अब तक क्यों नहीं सोये?

उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान तैर गयी और हाथ में पकड़ी कम्बल को थोड़ा उठाते हुए बोला कि उसने अपने सोने का एक विशेष प्रबंध किया है … घर की छत पर!
मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ और पूछा- छत पर तो बहुत मच्छर होंगे. और सुबह होने तक ठण्ड भी बढ़ जाएगी।

वह मेरे सवालों के जवाब के साथ तुरंत तैयार था।
उसने बताया कि उसने एक मच्छरदानी का इंतज़ाम पहले से कर लिया है और ठण्ड के लिए कम्बल लेने ही आया था।
यह कम्बल भी उसने किसी और सोते हुए व्यक्ति के सिरहाने से निकाल कर लिया है।

मैं उसकी इस शरारत पर खिलखिला पड़ी।
मेरे चेहरे पर हंसी देख कर उसको अच्छा लगा और मुझे मदद के रास्ते सोचने लगा।

मैंने मजाक करते हुए कहा- आपके लिए अच्छा है कि विशेष इंतज़ाम है, पर हमारा क्या?
यह बात उसकी दिल को लगी।

उसने मुझे सुझाव दिया कि मैं छत पर मच्छरदानी में सो जाऊं।

मुझे लगा कि वह मजाक कर रहा है.
पर वह इस बात पर गंभीर था।

उसने अब और ज्यादा आग्रह किया तो मैंने उसको टालने के लिए बोल दिया- फिर आप कहाँ सोएंगे?
उसने बोला कि वह नीचे ही सो जायेगा पुरुषों के कमरे में!

मैंने उसका प्रस्ताव यह कहते हुए ठुकरा दिया- यह नहीं हो सकता, सारी महिलाये यहाँ हैं, मैं वहां अकेली जाऊंगी. और किसी को पता लगा तो अच्छा नहीं होगा।

उसने बताया कि छत पर कोई नहीं हैं और मैं छत पर लगे दरवाज़े को अंदर से बंद करके सो सकती हूँ. किसी को पता नहीं चलेगा और सुबह सबके जागने तक वापिस नीचे आ सकती हूँ।

मुझे कुछ और नहीं सूझा तो बहाना मार दिया- मैं वहाँ अकेले नहीं सो सकती, डर लगता है।

कुछ सोचने के बाद वह बोला कि वह मेरे साथ सो जायेगा।
उसके यह कहते ही एक चुप्पी सी छा गयी।
उसे अहसास हुआ कि उसने क्या बोल दिया.
और तुरंत अपनी बात सुधारते हुए बोला कि वह पास में ही दूसरा बिस्तर लगा कर सो जाएगा।

मैंने तुरंत मना कर दिया कि मेरी वजह से मैं उसको मच्छरों का भोजन नहीं बना सकती।
वह अपने आप को लाचार महसूस करने लगा।

हमेशा मदद के लिए ऑफर करने वाला आज मदद मांगने पर नहीं कर पा रहा था।

उसने अपना आखिरी प्रस्ताव रखा- मच्छरदानी पलंग के साइज की हैं जिसमें दो लोग आसानी से सो सकते हैं. और अगर मुझे आपत्ति ना हो तो हम दोनों वहां सो सकते हैं।

मेरे हां कहने का तो कोई सवाल ही पैदा नहीं होता था.
पर अब उसने एक ब्रह्मास्त्र छोड़ा कि अगर मैं उस पर थोड़ा सा भी भरोसा करती हूँ तो हां कर दूँ।

अब मैं बुरी तरह फंस चुकी थी।
न हां कह सकती और न ही ना कह सकती।
एक तरफ कुआं दूसरी तरफ खाई।

ऐसा नहीं था कि मैं उस पर भरोसा नहीं करती।
परन्तु यह समाज … अगर किसी को पता चल गया तो कुछ ना होते हुए भी मुझे बहुत कुछ होने वाला था।
अपने पति को मैं क्या जवाब दूंगी।

मैं हां या ना कुछ कह पाती … उसके पहले ही उसने मुझे निर्देश दिया कि मैं अपनी सासुजी को बोल दूँ कि मैं दूसरे कमरे में भाभी (उसकी पत्नी) के साथ सो रही हूँ. और फिर मैं छत पर आ जाऊं … वह मेरा इंतज़ार करेगा।
यह कहते हुए वह सीढ़ियाँ चढ़ते हुए चला गया।

मेरे पाँव अब जम गए.
फिर मैं औरतों वाले कमरे की तरफ गयी.
सासुजी दूसरे कोने में सो रही थी और उन तक पहुंचने के लिए काफी लोगों को लांघ कर जाना था.
मैंने सासुजी की नींद ख़राब करना ठीक नहीं समझा।

मैं मुड़ कर सीढ़ियों की तरफ भारी कदमों से बढ़ने लगी।

किसी तरह बेमन से मैं छत पर पहुंची.
वहाँ वो मेरा इंतज़ार कर रहा था।

उसने छत के दरवाज़े पर कुण्डी लगाते हुए मुझे आश्वासन दिया- चिंता ना करो, किसी को पता नहीं चलेगा।

उसने अच्छे से गद्दा लगा रखा था और मच्छरदानी के अंदर दो तकिये लगे हुए थे।

कहीं से उसने मेरे लिए दूसरे तकिये का इंतज़ाम कर लिया था … शायद फिर किसी के सिर के नीचे से खींच कर!

अब हम दोनों एक ही बिस्तर पर आस पास लेटे आसमान को निहार रहे थे।
चांदनी रात थी, आसमान साफ़ था तारों से भरा हुआ!

बहुत खुशनुमा रात का मौसम था।
हल्की सी हवा चल रही थी पर ठण्ड शुरू नहीं हुई थी इसलिए कम्बल एक कोने में पड़ा था।

थोड़ी देर हम ऐसे ही बातें करते रहे.
फिर थोड़ी ख़ामोशी … और पता ही नहीं चला कब मेरी आँख लग गयी।

अचानक मैंने अपने सीने पर कुछ हलचल महसूस की और मेरी नींद टूट गयी.
पर आँखें अभी भी बंद ही थी।

मैंने महसूस किया कि कुछ उंगलियां मेरे ब्लाउज के हुक को खोल रही थी।
मैं डर से काँप उठी … क्या यह उसी की हरकत है?

अब मैं क्या कर सकती थी … अगर चिल्लाई तो लोग पूछेंगे कि मैं यहाँ अकेले क्यों आयी और मुझ पर ही शक करेंगे।
मैंने आँखें बंद किये हुए ही कुछ इंतज़ार करना ठीक समझा।

तब तक सारे हुक खुल चुके थे और मेरे खुले ब्लाउज के अंदर कुछ हवा प्रवेश कर गयी।
मैं फिर से कांप उठी और एक अनिष्ट की आशंका से गिर गयी।

अब मैं इंतज़ार करने लगी कि आगे क्या गलत होने वाला है।
अब उसका हाथ मेरे पेट पर था.
पूरे 4 महीने बाद किसी पुरुष ने मुझे छुआ था, पूरे शरीर में एक तरंग सी दौड़ गयी।
कुछ मजा भी आ रहा था पर डर ज्यादा था।

उसने अब मेरे पेटीकोट से साड़ी की पटली निकालने की कोशिश की जिसमें वह कामयाब नहीं हुआ.
शायद मेरे जाग जाने के डर से उसने ज्यादा ताकत नहीं लगाई।

मैंने चैन की सांस ली।

अब उसने मेरा ब्लाउज सामने से और खुला कर दिया.
शायद वह मेरे स्तन देखना चाहता था.
पर कसी हुई ब्रा की वजह से कुछ हो नहीं पाया।

ब्रा का हुक पीठ पर था और मैं पीठ के बल ही सोई थी.
इस बात की मुझे ख़ुशी थी।
वह चाहते हुए भी ब्रा नहीं खोल सकता था।

कुछ मिनट ऐसे ही निकल गए और वह मेरी कमर और ऊपरी सीने पर ऐसे ही हाथ मलता रहा.

फिर जब उसे अहसास हुआ कि कुछ होने वाला नहीं तो उसने मेरे ब्लाउज के हुक वापिस लगा दिए।
मैंने चैन की लम्बी सांस ली और थोड़ी देर बाद कब फिर आँख लग गयी पता ही नहीं चला।

मेरी नींद में दूसरी बार व्यवधान आया.
इस बार मैं करवट लेकर उसकी और पीठ करके सोई हुई थी इसलिए आँखें खोली.

अभी भी गहरी चांदनी रात थी और नींद खुलने का कारण वही था।

पर थोड़ी देर हो चुकी थी, ब्लाउज के सारे हुक खुल चुके थे।
फिर से मेरे अंदर डर की लहर कौंध गयी कि इस बार कैसे बचूंगी क्योंकि मैं करवट लेकर सोई थी और ब्रा का हुक उसकी तरफ था।

कुछ सोच पाती, उसके पहले ही खट की आवाज़ से ब्रा का हुक खुल चुका था और अचानक सीने पर कस के बाँधा हुआ प्रोटेक्शन ढीला हो चुका था।

मैंने एक साये को अपने चेहरे की तरफ आते महसूस किया और तुरंत अपनी आँखें बंद कर ली।

उसके हाथों ने अब मेरी ब्रा, मेरे शरीर के एक महत्पूर्ण अंग से उठा दिया और हवा की लहरें अब मेरे स्तनों को छू रही थी।

उस साये में मैंने महसूस किया कि अब वह मेरे शरीर के उस भाग को घूर रहा हैं जिसे देखने की असफल कोशिश उसने कुछ देर पहले ही की थी.
पर अब वो कामयाब हो चुका था।

मैं अपने आप को कोसने लगी कि क्यों मैंने करवट ली।
और उससे भी पहले क्यों मैं उसको ना नहीं बोल पाई छत पर आने के लिए।

पर अब क्या हो सकता था … या अब भी बहुत कुछ रोका जा सकता था।

अगले कुछ क्षणों के बाद उसने एक हाथ से मेरे स्तन को दबोच लिया था.
मैं अंदर से पूरी तरह सिहर गयी थी।

पर मैं कुछ बोलने या करने की हिम्मत नहीं जुटा पायी और यह प्रार्थना करने लगी कि इससे बुरा कुछ न हो.
या शायद अंदर ही अंदर कहीं से यह चाहती थी कि 4 महीने के एकांतवास को टूटने दिया जाये।
शायद मैं कुछ निर्णय नहीं ले पा रही थी और खुद को भाग्य के हाथों छोड़ दिया था।

कुछ देर ऐसे खेलने के बाद उसके हाथ फिर मेरी साड़ी की पटली की तरफ बढ़े और कुछ सेकंड की जद्दोजहद के बाद पटली पेटीकोट के बाहर थी और अगले कुछ मिनटों में मेरी पूरी साड़ी पेटीकोट से अलग हो चुकी थी।

अब मैं एक अबला की नारी तरह पड़ी थी जिसके शरीर पर सिर्फ पेटीकोट था, ऊपर के वस्त्र सामने से खुले थे।
फिर से एक खट की आवाज़ हुई और मेरे पेटीकोट का नाड़ा खुल चूका था और उसने मेरा पेटीकोट कमर से नीचे खिसकाना शुरू कर दिया।

मैंने आंखें खोली तो पेटीकोट पूरा निकल कर मेरी आँखों के सामने पड़ा चिढ़ा रहा था।
और कुछ सोचने के पहले ही मेरे नीचे के अंगवस्त्र भी निकल कर पेटीकोट का साथ पड़े थे।

अब मुझे अहसास हो चुका था कि बचने का कोई रास्ता नहीं हैं और आत्मसमर्पण कर देना चाहिए या तुरंत उठ कर फटकार लगा देनी चाहिये कि उसकी यह हिम्मत कैसे हुई।

फिर किसी डर की आशंका से या काफी समय से शरीर की जरूरत पूरी नहीं होने की वजह से मैं चुपचाप लेटी रही।

मेरे नग्न शरीर को देख कर अब शायद उसका अपने आप पर नियंत्रण नहीं रहा था और पीछे से उसका शरीर मुझसे चिपका हुआ था और रह रह कर ऊपर नीचे रगड़ रहा था।
उसका एक हाथ मेरे कमर, कूल्हों और स्तनों पर फिर रहा था।

फिर उसने अपना शरीर मुझसे अलग कर लिया.
मुझे लगा कि उसका इरादा बदल गया लगता है और मैं सुरक्षित हूं.

पर मैं गलत थी।
फिर कुछ कपडे निकलने की आवाज़ आयी।

अब मैंने अपने पीछे के निचले हिस्से में एक गर्म बदन का स्पर्श महसूस किया.
मुझे समझते देर नहीं लगी कि उसने क्या किया है।
अब वह पूरा नग्न मुझसे पीछे से फिर चिपक गया।

इस बार शायद कुछ ज्यादा ही जोर से, शायद नग्नावस्था में उसकी इन्द्रियां और सक्रिय हो गयी थी।

उसका लचीला अंग मेरे पुट्ठों को छू गया।
अब शायद कहीं न कहीं मैं अपने आप को तैयार कर चुकी थी एक अनपेक्षित मिलन के लिए।

उसका शरीर बराबर मुझे पीछे से रगड़ रहा था।
मैं महसूस कर पा रही थी कि उसका लचीला अंग धीरे धीरे कठोर होता जा रहा था।

अब वह जोर जोर से मेरे स्तनों को दबाते हुए कुचलने लगा.
पर अब मुझे बुरा नहीं लग रहा था।

कुछ देर बार उसने हाथ स्तनों से हटा लिया।

उसका कठोर अंग अब मेरे दोनों टांगों के बीच खोजी कुत्ते तरह कुछ ढूंढ रहा था।
शायद अंदर प्रवेश का मार्ग … पर मिल नहीं रहा था।
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एक दो बार वह मेरे योनि द्वार के आस पास भी पंहुचा था।

थोड़े प्रयासों के बाद ही उसे मेरे शरीर पर गीली जमीन मिल गयी और वह रुक गया।
उसका लिंग अब मेरे योनि द्वार पर था।

मेरी साँसें जैसे रुक गयी।

एक भटकते हुए प्यासे राहगीर के होठों पर जैसे किसी ने पानी का गिलास रख दिया था।

उसके लिंग ने थोड़ी ऊपर नीचे हरकत की और थोड़ा सा योनि में अंदर गड़ गया।

मैंने आँखें जोर से बंद कर ली … अगले क्षणों में जो होने वाला था, उसकी तैयारी में!

पति के अलावा पहली बार कोई पुरुष मेरी योनि में प्रवेश करने वाला था।

इतनी देर की रगड़ से मेरे अंदर पहले ही थोड़ा गीला हो चुका था।

मक्खन की तरह धीरे धीरे उसका लिंग फिसलते हुए अंदर आता गया और उसके मुँह से सिसकी निकलती गयी।
मेरा हाथ चेहरे के पास ही था, मैंने अपने होठों पर हाथ रख कर अपना मुँह बंद कर दिया।

उसने अपने हाथ से एक बार फिर मेरा स्तन दबोच लिया।

मैं अपने काफी अंदर तक उसके कठोर लिंग को महसूस कर पा रही थी।
जितनी धीमी गति से वो अंदर गया, उसी धीमी गति से उसने फिर उसको आधे से भी ज्यादा बाहर निकाला।

अंदर और बाहर निकलते समय उसका लिंग मेरी योनि की दीवारों को रगड़ते हुए जा रहा था और मेरा पूरा शरीर अंदर ही अंदर कम्पन कर रहा था।

दो सेकंड के विराम के बाद एक बार फिर उसी धीमी गति से वो दीवार रगड़ता हुआ अंदर गया।
जितना अंदर वो गया, उससे मुझे अहसास हो गया उसकी लम्बाई कितनी ज्यादा रही होगी.
और जिस तरह वो मेरी दीवारों से रगड़ खा रहा था, इतनी मोटाई मैंने तो पहले महसूस नहीं की थी।

काफी समय तक वह ऐसे ही मालगाड़ी की रफ़्तार से धीरे धीरे अंदर जाता, थोड़ा रुकता और बाहर आता … फिर थोड़ा रूककर अंदर जाता।

हर बार अंदर जाते ही उसकी एक लम्बी आह निकलती।

पता ही नहीं चला कब उसकी मालगाड़ी फ़ास्ट ट्रेन में बदली और कब राजधानी एक्सप्रेस बन गयी।
उसका लिंग अंदर योनि में एकत्रित पानी को तेजी से चीरता हुआ आ जा रहा था जिससे छपाक छपाक की आवाज़ आने लगी थी।

उसके झटकों की गति बढ़ने के साथ छपाक की आवाजें काफी तेज हो गयी थी।

अब वह तेजी से बार बार झटके मारते हुए अंदर बाहर हो रहा था और मेरी उत्तेजना भी बढ़ती जा रही थी।

उसके मुँह से अब आहें निकलने लगी और समय के साथ तेज होती गयी।
मुझे डर लगा कही कोई सुन न ले।
रात के सन्नाटे में ऐसी आवाज़ें ज्यादा ही गूंजती हैं।

पर मैं मन ही मन चुपके से उसका आनन्द भी लेती जा रही थी।
कुछ ही देर में न चाहते हुए भी मैं भी उस आनंद में भीग गयी।

मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी आवाज़ अभी तक दबा के रखी हुई थी जो अब आपे से बाहर होता जा रहा था।
मेरे होंठों के बीच से एक आवाज़ छूट ही गयी।

इसके पहले कि मैं अपने हाथों से ओर जोर से मुँह को दबाती, उसने सुन लिया और डरने की बजाय मेरी आह को मेरी मौन स्वीकृति मान कर उसने कुछ जोर के झटके मुझे मारे जिससे मेरी हल्की चीख निकलने लगी।

अब कोई फायदा नहीं था आवाज़ दबाने का … जिस चीज़ के लिए मैं कुछ महीने से तड़प रही थी, वह मिली तो भी इस तरह से … और वह भी किस व्यक्ति से, यह सपने में भी नहीं सोचा था।

उसने अब मेरे ब्लाउज और ब्रा को पूरी तरह मेरे शरीर से अलग कर दिया था।
अब मेरे शरीर पर एक भी वस्त्र नहीं था और ना ही उसके!

पर अब हमें कपड़ों की परवाह नहीं थी, हम दोनों नंगे इन यौनानन्द के क्षणों को पूरी तरह सफल बनाने में जुट गए।

हम दोनों की आहें एक ही सुर में छपाकों की आवाज़ से ताल मिला रही थी।

इतनी देर करने के बाद भी उसकी शक्ति क्षीण नहीं हुई थी और उसी गति से उसके झटके निर्बाध जारी थे।

मैं अपनी योनि के बाहर कुछ तरल पदार्थ रिसता हुआ महसूस कर पा रही थी जो उसके लिंग के बाहर आते वक़्त साथ बाहर आ रहा था।

अब मैं अपने चरम की तरफ बढ़ती जा रही थी और दुआ कर रही थी कि मुझसे पहले कहीं वह छूट ना जाये।

पर शायद इन मर्दों को दूसरी औरतों के साथ करते वक़्त ज्यादा ही ताकत मिल जाती है।

मेरा नशा अब सर तक चढ़ने लगा था और जैसे चक्कर आने लगे.
मैं स्वयं को निश्तेज महसूस करने लगी थी.
ये चरम के नजदीक पहुंचने के संकेत थे।

गैर मर्द के साथ मस्ती करते हुए मैंने अपनी टांगें अब खोल दी, जिससे बाहर छलके पानी से हवा टकराई और एक ठंडक का अहसास हुआ।

टांगें खुलने से उसको और भी बड़ा रास्ता मिला और उसने अपना लिंग और गहराई में डाल दिया।
शायद एक इंच और गहरा अंदर उतर गया था वो!

अगले कुछ मिनट बहुत कीमती थे.
उसने जिस गहराई से एक के बाद एक तेज झटके मारे, मैं पूरा छूट गयी.
मेरी छोटी छोटी आहें चरम पर आते ही एक लम्बी चीख में तबदील हो गयी.

और उसके बाद मेरी कुछ हल्की चीखें निकली और मैंने अपना चरम प्राप्त कर लिया।

मेरे चरम से उसका उत्साहवर्धन हुआ और वह भूखे भेड़िये की तरह आवाजें निकालते हुए झटकों पर झटके मारता रहा।
मेरे स्तनों को वह अब बुरी तरह से मौसम्बी की तरह निचोड़ रहा था।
फिर एक झटका उसका इतनी गहराई में उतरा कि लिंग बाहर नहीं निकला और वहीं पड़ा हुआ कुलबुला कर फुफकारने लगा।

मैंने अपने अंदर एक गर्म लावा महसूस किया.
उसने सारा पानी अंदर छोड़ दिया था।

वह कुछ देर तक ऐसे ही निढाल पड़ा रहा।

सारी प्रतिक्रियायें शांत हो चुकी थी जैसे एक तूफ़ान के बाद की शांति।

अब भी वह मुझे झकड़े हुए था और उसके शरीर का एक हिस्सा मेरे शरीर में था।

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ब्लूफिल्म दिखा कर क्लासमेट की चूत चुदाई



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इंडियन टीन वर्जिन सेक्स कहानी में मैंने अपनी एक दोस्त लड़की को प्रोपोज़ किया पर उसने बात सिर्फ दोस्ती तक रखने को कहा. पर एक दिन वह मेरे लंड से चुद भी गयी. कैसे?

मित्रो, मेरा नाम सूरज है.

मेरा लंड सामान्य ही है यह साढ़े छह इंच लम्बा और ढाई इंच मोटा है.
मैं किसी भी लड़की, भाभी, आंटी को देर तक चोद कर पूरा संतुष्ट कर सकता हूँ.

यह इंडियन टीन वर्जिन सेक्स कहानी चार साल पहले उस वक्त की है जब मैं डिप्लोमा कर रहा था और लास्ट ईयर में था.
उस समय मैं 19 साल का था और किराये के कमरे में दोस्तों के साथ रह कर पढ़ रहा था.

अब मैं आपको सीमा के बारे में बता देता हूँ. वह मेरे साथ ही पढ़ती थी.
उस वक्त उसकी उम्र मेरे जितनी ही थी यानि हम दोनों ही 19 साल के थे.

सीमा का बदन मस्त भर हुआ था और एकदम गोरा था.
उसकी बॉडी के कटाव बेहद आकर्षक थे.
उसका फिगर कुछ यूं था. उसके दूध 30 इंच के, कमर 28 की और गांड बाहर को निकली हुई 32 इंच की थी.

मैंने उसे एक बार प्रपोज भी किया था.
पर उसने कहा था- हम दोनों सिर्फ बेस्ट फ्रेंड ही रहेंगे.

उस वक्त हमारे लास्ट ईयर के पेपर चल रहे थे.
मैं और मेरे दो दोस्त एक मकान में रहते थे.
उस घर में दो कमरे और एक किचन भी था.

मकान मालिक के साथ मेरे पापा काफी अच्छी पहचान भी थी तो वे किराया भी कम लेते थे और कभी कोई बाहर का कोई लड़का रूम पर रुकने आ जाए तो कोई दिक्कत भी नहीं थी.

उसका एक कारण यह भी था कि अंकल दूसरे मकान में रहते थे और वह दूसरा मकान कुछ दूर था.

मेरे घर के सामने वाले घर के ऊपर के माले पर सीमा भी अपनी सहेलियों के साथ किराए से रहती थी.

जब हमारे पेपर चल रहे थे तो हर पेपर के बीच चार पांच दिन का गैप था.

मेरे दोस्तों ने ट्यूशन लगाई थी.
उस दिन वे ट्यूशन क्लास में सुबह 7 बजे ही चले गए और 11 बजे वापस आने वाले थे.

मैंने ट्यूशन नहीं लगाई थी तो मैं रूम पर ही था.

इस बीच मुझे भूख लग आई थी और मेस 10.30 बजे चालू होती थी.
जबकि अभी तो 8 ही बजे थे.

बाहर नाश्ता करने के लिए जाता तो वह रेस्तरां भी काफी दूर था.

मैं यह सोच ही रहा था कि क्या किया जाए कि तभी सीमा का कॉल आ गया.
वह पूछने लगी- पढ़ाई हुई, क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- यार पढ़ाई की छोड़ो, मुझे तो अभी बहुत तेज भूख लगी है और मैं चाय बना रहा हूँ. तुम चाय पीना चाहती हो तो नीचे आ जाओ.

उसने हां कहकर और नीचे आने की बोल कर फोन काट दिया.

अब सीमा और शीतल नीचे आने के बाद मेरे रूम में आ गईं.

सीमा बोली- हम लोग मैगी भी साथ लाई हैं, तुम चाय बनाओ, मैं मैगी बनाऊंगी.
हम तीनों ने बातें करते करते मैगी और चाय पी ली.

फिर शीतल वहां से किसी से नोट्स लेने के लिए चली गई.
अब कमरे में मैं और सीमा ही रह गए थे.

हम दोनों बिस्तर पर लेटकर इधर उधर की बातें कर रहे थे.
उसी बीच उसने मेरा मेरा मोबाइल ले लिया.

उसे मेरे मोबाइल के सारे पासवर्ड पता थे तो वह उसमें से कुछ सॉलव्ड पेपर अपने मोबाइल पर भेज रही थी.

उसके बाद वह कॉलेज की वीडियो देखने लगी तो उसमें कुछ ब्लू फिल्म भी थीं.

उसने कहा- अबे चूतिया, ये क्या देखता रहता है?
मैंने उससे कहा- तुम और शीतल भी तो देखती हो … मुझे सब पता है.
तो वह शर्मा गई.

मैंने कहा- इसमें शर्माने की क्या बात है, सब देखते हैं.
यह कहकर मैंने एक फिल्म चालू कर दी और उससे बोला- चल साथ में देखते हैं.

वह मेरे बाजू में ही लेटी थी.
उस फिल्म में दो लड़के एक लड़की के साथ थे.
एक उसके बूब्स दबा रहा था और लंड चुसवा रहा था तो दूसरा उसकी चूत चाट रहा था.

कुछ मिनट की ब्लू फिल्म देखने के बाद वह गर्म होने लगी थी.
मेरा भी लौड़ा सख्त हो चुका था और वह लोवर से साफ दिख रहा था.

मैं धीरे धीरे अपना लौड़ा सहला रहा था.

पास में होने के कारण मेरी कोहनी उसके बूब्स को बार बार टच हो रही थी.
पर वह कुछ नहीं बोली क्योंकि मैं कभी कभी मजाक में उसके बूब्स दबा देता था.

उसका भी मन कर रहा था कि वह चूत सहला ले!

मैंने हिम्मत करके उससे कहा- यार सीमा, मैंने अब तक कभी भी किसी लड़की को किस तक नहीं किया और ना ही उसे नंगी करके बूब्स नहीं दबाए हैं. क्या तू एक बार अपने दूध दबाने देगी … प्लीज यार.
उसने पहले ना कहा, पर थोड़ी देर बाद वह मान गई.

उसने कहा- सिर्फ बूब्स ही, आगे मत बढ़ना!
मैंने कहा- हां ठीक है.

मैंने कमरे का दरवाजा बंद किया और उसको किस करने लगा, उसके होंठ चूसना शुरू कर दिया.
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दो मिनट बाद वह भी मेरे होंठ चूसने लगी.
हम दोनों कामुक अवस्था में थे तो दस मिनट तक किस ही करते रहे.

उसी बीच हम दोनों की जीभें भी एक दूसरे से लड़ने लगीं और हम दोनों की उत्तेजना चरम पर पहुँचने लगी.

काफी देर तक किस करने के बाद मैंने उसके होंठों को छोड़ा और गले को किस करते हुए उसकी चूचियों तक आ गया.

उसकी टी-शर्ट के ऊपर से ही उसके बूब्स दबाना और किस करना चालू कर दिया.
वह भी अब पूरा मजा ले रही थी.

मैंने उससे कहा- तुम अपनी टी-शर्ट उतारो.
उसने अपनी टी-शर्ट उतार दी और मैं ब्रा में हाथ डाल कर बूब्स दबाने लगा था.

फिर मैंने उसकी ब्रा भी खोल दी और आज पहली बार मैंने उसके सफेद मम्मों को देखा.
उसके एकदम गोल गोल और टाइट बूब्स मेरे सामने थे.

मैं पागलों की तरह उन पर टूट पड़ा.
एक को चूसने और दूसरे को दबाने का सिलसिला शुरू हो गया.

उसने कहा- धीरे से करो और आराम से दबाओ न … मैं कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ!
मैंने धीरे धीरे से दूध दबाना शुरू किए और मस्ती से उसके निप्पलों को खींच खींच कर चूसने लगा.

वह भी आती कामुक होकर मेरे सर को अपने हाथों से पकड़ कर मुझे अपने दोनों दूध बारी बारी से पिला रही थी.
अब मैंने अपनी शर्ट और लोवर को भी उतार दिया और पुनः उसके बूब्स चूसना चालू किए.

फिर धीरे धीरे लोवर के ऊपर से ही उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा था.
उसकी लोअर दोनों टांगों के बीच से गीली हो गई थी.



उसकी चूत को हाथ से रगड़ने से वह अपनी कमर को आगे पीछे करती हुई कुछ ऐसा करने लगी थी मानो वह मेरे हाथ से अपनी चूत रगड़वा कर मुठ मरवा रही हो.

कुछ ही देर बाद उसने भी मेरी चड्डी के अन्दर हाथ डाल दिया और मेरा लौड़ा पकड़ कर आगे पीछे करने लगी थी.
यह देख कर मैंने भी अपना एक हाथ उसकी पैंटी के अन्दर डाल दिया और चूत सहलाने लगा.

उसकी चूत हद से ज्यादा गीली हो चुकी थी.
मैंने उसे देखा तो वह आँख बंद करके अपनी चूत रगड़वाने का सुख ले रही थी.

मैंने उसके होंठों को फिर से किस करना चालू कर दिया और धीरे धीरे उसकी लोवर और पैंटी भी नीचे सरका दिया.

अब वह अपनी चूत में लंड लेने के लिए मचल रही थी.
उसने कहा भी- सूरज, अब अपना लंड मेरी चूत में डाल ही दो और मत तड़पाओ प्लीज!

यह सुनकर मेरी तो मानो लॉटरी निकल पड़ी थी.
मैंने झट से उसको पूरी नंगी कर दिया और खुद भी नंगा हो गया.

मैंने उससे लंड चूसने को कहा.
पर उसने मना कर दिया लेकिन अपने हाथ से मेरे को लंड हिलाना शुरू कर दिया.

थोड़ी देर बाद मेरे लंड से माल का फव्वारा निकल कर उसके चेहरे पर जा पड़ा और मैं झड़ चुका था.

वह मेरे झड़े हुए लौड़े को अपने हाथ से मसलती रही.
मैंने उसकी आंखों में झाँका तो एक तड़फ सी दिखाई दी जो साफ कह रही थी कि लंड को जल्दी से खड़ा करो और उसकी चूत में घुसेड़ कर उसे चोद दो.

मैंने उसे अपने सिरहाने रखी हुई तौलिया पकड़ा दी और उसने मेरी भावना समझ कर मेरे लौड़े को पौंछना शुरू कर दिया था.
उसी समय मैंने अपने एक हाथ से उसके एक दूध को मसल कर उसका ध्यान अपनी तरफ किया.

उसने मेरी तरफ देखा तो मैंने उसे अपने हाथ से इशारा किया कि मुँह से लंड चूस कर खड़ा करो.
वह मुस्कुरा दी और अपनी चुदास के चलते उसने मेरे लंड को मुँह से एक बार चाटा.

फिर अपनी जीभ को मुँह के अन्दर लेकर स्वाद को जांचा.
शायद उसे स्वाद अच्छा लगा तो उसने अपने हाथ से मेरे मुरझाए हुए लौड़े को पकड़ कर सीधा किया और मुँह से लगा कर उसे चूमने लगी.

इससे लंड में सुगबुगाहट होने लगी और वह अपने हाथ से मेरे लौड़े में आने वाले तनाव को महसूस करने लगी.

इससे उसकी आंखों की चमक बढ़ गई और उसने अगले ही पल अपने मुँह में मेरे लौड़े को भर लिया.
आह … उसके मुँह की गर्मी पाते ही मेरे मुर्दा लंड में जान आने लगी और वह कुछ ही पलों में टनटनाने लगा.

उसको भी लंड चूसने में मजा आने लगा, तो वह भी मेरे लौड़े को बड़े प्यार से चूसने लगी.
पांच मिनट बाद उसने मेरा लंड खड़ा कर दिया और आंख के इशारे से चूत में लंड डालने के लिए कहा.

मैंने पलक झपकते ही उसकी टांगें फैलाईं और उसे चुदाई की पोजीशन में लेकर लंड चूत के मुँह में लगा दिया.
उसकी चूत एकदम चिपकी हुई थी और चिपचिपा भी रही थी.

मैं सुपारे को चूत की फांक में डालने लगा लेकिन वह अन्दर न जाकर बार बार फिसल रहा था.
मैंने बाजू में रखा केश तेल उठा लिया और थोड़ा सा अपने लंड पर मल लिया.

कुछ उसकी चूत में लगाया और चूत में उंगली घुसेड़ कर आगे पीछे करने लगा.
उसकी चूत में जगह बनने लगी और वह आह भरने लगी.

अब मैंने लंड चूत पर सैट करके उसके हाथ से लंड पकड़ाया और जोर का धक्का दे दिया.
मेरे लंड के आगे वाला हिस्सा चूत में घुसता चला गया.

उसने दर्द भरी आह भरने के साथ ही मेरे लौड़े से अपना हाथ हटा लिया.

चूंकि सुपारा चूत में प्रविष्ट हो चुका था तो मैंने तत्काल जोर जोर के दो तीन तगड़े झटके लगा दिए और अपना पूरा लंड उसकी चूत के अन्दर पेल दिया.
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उतने में वह चिल्ला उठी, तो मैंने जल्दी से अपना मुँह उसके मुँह पर रखा और उसे किस करना चालू कर दिया.
मुझे भी थोड़ा दर्द होने लगा था और ऐसा लग रहा था मानो मैंने अपने लंड को आग की तप्त भट्टी में डाल दिया हो.

थोड़ी देर बाद मैंने धक्के लगाने चालू किए … उसे दर्द हो रहा था पर वह अपनी आवाज अन्दर ही रख कर दर्द को सहन कर रही थी.

पर जैसे ही मैंने उसके मुँह से मुँह हटाया, वह कराह उठी और मुझे पीछे करने लगी.

लेकिन मैंने उसे किस करना चालू किया, पर वह मुझे गाली देती हुई चिल्लाने लगी- आह हट जा साले कमीने … मेरी चूत फट गई है और तुझे मस्ती चढ़ रही है!
वह मुझे धक्का देती हुई पीछे करने लगी लेकिन मैंने उसे किस करना चालू रखा.

थोड़ी देर बाद उसे भी मजा आने लगा था.
अब मैं उसके बूब्स दबाते हुए उसे चोद रहा था, वह भी मजा ले रही थी.

दस बारह मिनट बाद मेरे लंड का काम तमाम होने वाला था तो मैंने स्पीड बढ़ा दी और जोर जोर से चोदने लगा.
तभी उसने कहा- अन्दर मत डालना!

मैं एकदम से होश में आया.

उसका पानी निकल गया था तो मैंने लंड चूत से बाहर निकाला और उसके सामने खड़ा हो गया.
उसने मेरे लंड को पकड़ कर मुठ मारना चालू कर दिया.

मैंने सारा माल उसके मम्मों पर डाल दिया … वह पहले तो सकपका गई, बाद में हंसने लगी.

इंडियन टीन वर्जिन सेक्स करके हम दोनों की ही तेज तेज सांसें चल रही थीं और हम दोनों बेहद थक चुके थे.

उसने घड़ी की तरफ देखा तो मैंने कहा- अभी हमारे पास काफी टाइम है.

वह लेट गई.
मैं भी उसके बाजू में लेट गया.

दस मिनट बाद उसने उठ कर अपने मम्मों पर पड़ा सारा माल साफ किया.
फिर हम दोनों वाशरूम में जाकर फ्रेश हुए और दोनों ने कपड़े पहन लिए.

मैंने उसे किस किया और वह अपने रूम में चली गई.
उसे चलने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी.

उसी शाम को बाहर आइसक्रीम खाने का प्लान बना तो मेरे दोस्त और उसकी दोनों सहेलियां बाहर गईं.

उस वक्त मैंने चुपके से उसे दर्द कम करने की गोलियां दे दीं, जो मैंने अपने दोस्तों के ट्यूशन से वापस आने से पहले खरीद ली थीं.

उसके बाद पेपर होने के बाद भी दो दिन एक्स्ट्रा रूम पर रहकर हमने खूब इंजॉय किया.

उस वक्त सारे लड़के लड़कियां घर वापिस जा चुके थे, सिर्फ कुछ ही रह गए थे, जिनका चक्कर चल रहा था.

वह सब मैं बाद में लिखूंगा.

दोस्तो, यह मेरी पहली सेक्स कहानी है, कुछ गलती हो गई हो तो माफ कर देना.
आपको यह इंडियन टीन वर्जिन सेक्स कहानी अच्छी लगी होगी.

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बीवी की अदला बदली कर चुदाई का मजा



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वाइफ चेंज Xxx कहानी में मेरा मन हुआ कि मैं बीवी की अदला-बदली करके नयी चूत का मजा लूं. एक बार ट्रेन में मेरा एक दोस्त बना. उसके साथ मेरा वाइफ स्वैप का प्रोग्राम कैसे बना?

दोस्तो, मेरा नाम राजा है.
मैं एम पी का रहने वाला हूं.

मेरी पत्नी का नाम प्रिया है.
वह दिखने मैं थोड़ी दुबली है लेकिन ज्यादा नहीं!
वह बहुत सुंदर दिखती है.

दोस्तो, मैं आप लोगों का ज्यादा समय न लेते हुए सीधे कहानी पर आता हूं.
मैं बहुत दिनों से सेक्स कहानी पढ़ता आ रहा हूं, जिसमें मुझे बीवी की अदला बदली की कहानी बहुत पसंद आई.

तो मैंने भी सोचा क्यों ना मैं भी बीवी बदल कर किसी के साथ चुदाई करूं.

बस अब मैं इस बात को लेकर संजीदा हो गया और सही जोड़े की तलाश करने लगा.

अब यह कुछ इस तरह की बात है कि किसी से सीधे सीधे पूछा भी नहीं जा सकता था कि क्यों भाई आप अपनी बीवी को मेरे साथ चुदवा सकते हो!

मतलब यदि किसी से यह कहा जाए कि क्यों भाई आप मेरी बीवी को चोद सकते हो … तो शायद ही कोई ऐसा मर्द होगा जो इस ऑफर को ठुकरा देगा, पर किसी से उसकी बीवी चोदने की बात पर तो बखेड़ा खड़ा होने का अंदेशा था.

बस इसी उधेड़बुन में समय निकलता गया और मुझे कोई भी ऐसा बंदा नहीं मिला.

फिर एक दिन मैं और मेरी पत्नी इंदौर जा रहे थे, तभी मुझे एक दोस्त मिल गया.
हालांकि वह था तो अजनबी … पर रास्ते में ही मेरी उससे दोस्ती हो गई थी.

उसका नाम रोहण था और वह इंदौर का ही रहने वाला था.
उसके साथ उसकी पत्नी भी थी.
उसका नाम राखी था.

रोहण मुझसे बोला- क्यों ना हम दोनों एक ही स्लीपर में हो जाएं और ये दोनों लेडीज एक स्लीपर में हो जाएं.
मैंने कह दिया- हां चलो ठीक है.

हम दोनों एक ही स्लीपर में चले गए.

हम दोनों स्लीपर में पहुंचे और थोड़ी देर बातें करने के बाद मेरा दोस्त सो गया.

मैंने सोचा क्यों ना मैं सेक्स कहानी पढ़ूँ.
मैं मोबाईल में अन्तर्वासना फ्री सेक्स कहानी पढ़ने लगा.

अभी मैं सेक्स कहानी पढ़ ही रहा था कि मुझे अहसास हुआ कि मेरा साथी रोहण जाग रहा है.

मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने पूछा- क्या पढ़ रहे हो?
मैं जल्दी से साईट बंद करने वाला था, तो रोहण ने कहा- जरा दिखाओ तो यार, मुझे भी पढ़ना है!

मैं सेक्स कहानी पढ़ रहा था तो मैंने उसके साथ कहानी पढ़ना शुरू कर दी.
अब हम दोनों कहानी का मजा लेने लगे.
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कहानी पढ़ते-पढ़ते वाइफ चेंज Xxx कहानी पढ़ने लगे थे.
तो उसने कहा- क्यों ना भाई ऐसा हमारे साथ हो!

तो मैंने कहा- हां यार मैं तो कब से तैयार हूं, पर कोई मिलता ही नहीं!
उसने धीमी आवाज में कहा- क्यों ना मैं अपनी वाइफ राखी को मना कर देखूं और तुम अपनी वाइफ को!

मैंने कहा- अगर ऐसा हो गया तो मजा आ जाएगा भाई!
हम दोनों उसके बाद इसी मुद्दे पर चर्च करते रहे और एक दूसरे की बीवी के बारे में बातें करते रहे.
कुछ देर बाद हम दोनों सो गए.

अब सुबह हो गई, हम लोग इंदौर पहुंच गए.
उधर पहुंचकर हम दोनों ने एक दूसरे के फोन नंबर ले लिए.

दो दिन बाद मेरे दोस्त का कॉल आया.
उसने कहा- क्यों भाई अपनी बीवी से बात की तुमने?
मैंने कहा- अभी नहीं की.

तो उसने कहा- मैंने अपनी बीवी से बात की थी और वह मान गई है. अब तू भी अपनी बीवी से बात कर ले. अगर वह भी मान जाए तो हम लोग कल ही सेक्स के लिए आ जाएंगे.
मैंने ओके कहा.

बाद में मैंने अपनी बीवी से इस बारे में बात की तो उसने साफ मना कर दिया कि वह ऐसा नहीं करेगी.

फरात को जब मैं उसकी चुदाई कर रहा था तो उसने मुझसे कहा- तुम दिन में क्या बोल रहे थे? मैं तुम्हें ऐसा सेक्स नहीं करने दूंगी!

मैंने उसे चोदते हुए कहा- बेबी बहुत मजा आता है ऐसा करने में … लाइफ में इंजॉय करना चाहिए … खुल कर जियो यार … तुम एक बार करके देखोगी तो तुम्हें बहुत मजा आएगा.
फिर मैंने उसे बीवी अदला-बदली की चुदाई वाली वीडियो भी दिखाई और कहानी भी पढ़ाई.

अब उसके मन में कुछ विचार आया.
वह मुझसे बोली- मैं किसी और के साथ सेक्स करूंगी तो तुम्हें बुरा नहीं लगेगा?
मैंने कहा- मुझे बुरा नहीं लगेगा, मैं भी तो उसकी बीवी के साथ सेक्स करूंगा!

उसने कहा- लेकिन हम एक ही कमरे में करेंगे, अकेले में मुझे किसी और के साथ सेक्स करने में डर लगेगा!
मैंने कहा- हां, हम चारों एक ही कमरे में सेक्स करेंगे!

अब वह मान गई.

बस फिर क्या था … मैंने झट से अपने दोस्त को फोन लगाया और उससे कहा कि कल रात को आ जाना!
रात को करीब 7:30 बजे वे दोनों लोग जब हमारे घर आए तो मैंने दरवाजा खोला और वे अन्दर आ गए.

अन्दर आते ही उसकी बीवी राखी मेरे पास बैठ गई.
हम सबने हंसी मजाक किया और एक दूसरे से सहज हो गए.

फिर हम सबने साथ में खाना खाया और सभी लोग आपस में बातें करने लगे.

रात को करीब 10:30 बजे मैंने कहा- क्या हम लोग बातें ही करते रहेंगे या जिस काम के लिए हम लोग आए हैं, वह काम भी करेंगे?

यह सुनकर मेरी बीवी शर्मा गई और उसकी बीवी भी शर्मा गई.
दोस्त ने कहा- भाई तू ही पहले शुरू कर!

मैंने उसकी बीवी का हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और उसके गाल का किस ले लिया.
उसने भी मेरी बीवी का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचा और किस करने लगा.

अब माहौल बनने लगा.

धीरे धीरे हम चारों उन्मादित होते गए और जल्द ही हम दोनों मर्दों ने दोनों औरतों के कपड़े उतार दिए.
वे दोनों बिल्कुल नंगी हो गईं.

कुछ देर बाद हमने अपने भी कपड़े खोल दिए.

मैंने देखा कि मेरे दोस्त का लंड काफी तगड़ा था.
उसका लंड मेरे लंड से थोड़ा सा ज्यादा मोटा जरूर था लेकिन लंबा नहीं था.

बस फिर क्या था … हम दोनों ने अपनी बीवियों की चूत चाटनी शुरू कर दी.
मैंने उसकी बीवी की चूत को चाटी, तो वह बहुत गीली हो चुकी थी.

उधर रोहण भी मेरी बीवी की चूत को चाट रहा था.

हम दोनों मस्ती में थे.
और क्या बताऊं यार … बहुत मजा आ रहा था.

हम दोनों की बीवियों की चूत चाटे जाने से उनके मुँह से कसमसाहट भरी आह आह की आवाज निकल रही थी.

फिर हम दोनों ने उनको खड़ा किया और मैंने रोहण की बीवी राखी से कहा- चलो लंड चूसो.
वह झट से मेरा लंड चूसने लगी.

उधर रोहण ने मेरी बीवी स्वाति से अपना लंड चुसवाना शुरू कर दिया.
उन दोनों महिलाओं ने हमारे लंड चूसना शुरू कर दिए.

मेरे लौड़े के टट्टे सहलाती हुई राखी मुझे बड़ा मजा दे रही थी.

राखी को देख कर मेरी बीवी स्वाति ने भी रोहण के टट्टों के साथ खेलना शुरू कर दिया था.



थोड़ी देर तक पूरी मस्ती से लंड चुसवाने के बाद में हम दोनों ने उन्हें डॉगी स्टाइल में कर दिया और पीछे से लंड पेल कर उनकी चुदाई चालू कर दी.

मैं राखी के दूध दबाते हुए जबरदस्त पेल रहा था उसकी मादक आवाजें मुझे जबरदस्त जोश दिला रही थीं.

ठीक उसी तरह स्वाति भी रोहण को अपनी चूत का मजा दे रही थी.
रोहण भी मेरी बीवी स्वाति के दूध मसलता हुआ उसे धकपेल चोद रहा था.

इसी तरह से चुदाई करते करते हमें बहुत देर हो गई.

फिर मैंने उसकी बीवी की टांग उठा कर कंधे पर रखीं और अपना लंड चूत में एकदम से धकेल दिया.
उसकी बीवी की चीख निकल गई.

उधर रोहण ने भी ऐसा ही किया.
उसने भी मेरी बीवी की टांग उठा कर लंड पेला तो मेरी बीवी मुझसे कहने लगी- आज तुमने मुझे इस कसाई से चूत मरवाने के लिए छोड़ दिया … आह रोहण धीरे चोद आह!
मैंने स्वाति से कहा- कुछ नहीं होगा साली …. तुम दोनों रंडियों मजे से छुवा रही हो और फालतू की बकचोदी कर रही हो … चलो राखी, अब तुम मेरे लंड की सवारी करो!
वह मेरे लौड़े पर आ गई और मुझे अपने दूध पिलाती हुई मस्ती से मेरे लंड पर कूदने लगी.

स्वाति भी रोहण के लंड पर डिस्को करने लगी.
वे दोनों मस्ती में चुदने लगीं.

एक लंबी चुदाई के बाद हम दोनों मर्द झड़ गए और थोड़ी देर आराम करने लगे.
रात को बारह बज गए थे, तब फिर से चुदाई होने लगी.

इस तरह से सुबह होते हम चारों ने चार बार चुदाई का मजा लिए और वे लोग सुबह सुबह ही अपने घर चले गए.

फिर एक दिन रोहण का कॉल मुझे आया.
उसने मुझसे कहा- मेरा एक और दोस्त है, वह भी हमारे साथ मिलकर सेक्स करना चाहता है.
मैंने कहा- हां चलो ठीक है, उसको भी बुला लो. तीनों मिलकर मजा करेंगे.

अगले ही दिन रोहण और राखी, अपने दोस्त शफीक और उसकी बीवी जैनब को लेकर हमारे घर आ गए.
मैंने उस आदमी को देखा, वह काफी हट्टा-कट्टा था.

शरीर में उसकी बीवी भी काफी भरी हुई थी और बहुत मस्त माल लग रही थी.
शफीक कहने लगा- मेरी बीवी जैनब को दोनों ही एक साथ चोदो और मैं तुम दोनों की बीवियों को अकेला ही चोद दूंगा.

शफीक मेरी बीवी को चोदने के लिए ज्यादा उतावला हो रहा था.

वह बोल रहा था- पहले मैं तुम्हारी बीवियों को अपनी बहन समझ कर चोद दूंगा.
मैंने कहा- तुम्हें जो करना है, कर लो लेकिन आराम से करना.

अब हम तीनों जोड़े सेक्स के लिए तैयार हो गए.
हम सबने अपने अपने कपड़े उतारे और एक दूसरे का लंड देखने लगे.

उस साले शफीक का लंड बहुत मोटा और बड़ा था.

उसके पाइप जैसे लंड को देखकर मेरी मेरी बीवी डर गई और कहने लगी- इससे मैं नहीं चुद पाऊंगी.
वह कहने लगा- मान जाओ बहन … थोड़ा दर्द होगा. उसके बाद में मजा ही मजा है.

जब उसने स्वाति को बहन कहा तो वह मान गई.
शफीक ने पहले मेरी बीवी स्वाति से कहा- बहन, तू मेरा लंड चूस ले!

मेरी बीवी उसका लंड चूसने लगी और उसे मोटे लंड से बहुत मजा आने लगा.
शफीक मेरी बीवी के गले तक लंड उतार रहा था तो स्वाति सही से सांस नहीं ले पा रही थी.

फिर शफीक मेरी बीवी की चूत में उंगली डालकर चाटने लगा तो उसकी चूत काफी चिकनी हो गई थी.
अब वह अपनी खुरदुरी जीभ को मेरी बीवी की चूत की दीवारों से रगड़ रगड़ कर उसे मजा देने लगा था.

मेरी बीवी बहुत कामुक हो गई थी और वह सिसियाती हुई आएं बाएं बकने लगी थी- आह साले शफीक मेरे भाई, साले भोसड़ी के क्या मस्त चूस रहा है आह साले और चूस ले अपनी बहन की चूत को आह बहुत मजा आ रहा है.

स्वाति के मुँह से इस तरह की गालियां सुनकर मैं बहुत उत्तेजित हो गया था.

शफीक भी कहने लगा- आह साली स्वाति … तेरे जैसी अनेक लड़कियों को अपनी बहन बना कर चोद चुका हूँ. तू फिक्र मत कर … आज से तेरी चूत मेरे लौड़े की गुलाम हो जाएगी.

फिर शफीक ने मेरी बीवी की दोनों टांगें हवा में ऊपर उठाकर अपने लंड को उसकी रस रिसाती चूत पर रखा और सुपारे से चूत की फाँकों को रगड़ने लगा.

स्वाति की मदमस्त आहें और कराहें कमरे के माहौल को निरंतर गर्म कर रही थीं.

थोड़ी देर बाद शफीक ने अपना मोटा लंड मेरी बीवी की चूत में घुसेड़ना चालू कर दिया.
मेरी बीवी की चूत शफीक के मोटे लौड़े से चिरने लगी और वह चिल्लाने लगी- आह मादरचोद रुक जा … मेरी चूत फट जाएगी!

लेकिन शफीक अब मानने वाला नहीं था.
उसने अपना आधा लंड मेरी बीवी की चूत में ठांस दिया.

मेरी बीवी की तो जैसे सांसें ही रुक गई थीं, उसका कंठ रुँध गया था.

बस फिर क्या था … शफीक ने एक झटके से पूरा लंड अन्दर डाल दिया और वह थोड़ी देर के लिए रुक गया.

मेरी बीवी की हालत खराब होने लगी थी.
मैंने शफ़ीक से कुछ कहने के लिए उसके कंधे पर हाथ रखा.

तो वह बोला- चिंता मत करो … मैंने बहुतेरी चूतें इसी तरह से फाड़ी हैं.

कुछ देर बाद मेरी बीवी की कराहें पुनः निकलने लगी और वह मेरी तरफ कातर भाव से देखने लगी.

उधर शफीक ने अपने लौड़े को हिलाना शुरू कर दिया और वह अपने लंड को थोड़ा थोड़ा अन्दर बाहर करने लगा.

मेरी बीवी की चूत से खून निकलने लगा था.

शफीक लगातार चुदाई करता गया.

कुछ मिनट की चुदाई के बाद मेरी बीवी स्वाति को उसके लंड से चुदने में मजा आने लगा तो शफीक ने उसके दूध दबाए और अपने लंड उसकी चूत से निकाल कर स्वाति को अलग कर दिया.

फिर उसने रोहण की बीवी राखी को अपने नीचे लिया और उसकी चुदाई करना शुरू कर दी.

शफीक ने मेरी बीवी स्वाति की तरह रोहण की बीवी राखी की चूत भी फाड़ डाली.
साले ने उसकी बीवी की चूत को भी भोसड़ा बना दिया था.

मगर हम दोनों की बीवियाँ उसके मोंटे लंड की फैन बन गई थीं.

बस फिर क्या था उसने दोनों की बीवियों को पलंग के किनारे चूत फैला कर लेटा दिया और बारी बारी से वह दोनों की चूत में लंड पेलने लगा.
इधर हम दोनों ने उसकी बीवी जैनब की चुदाई एक साथ उसके दोनों छेदों में लंड पेल कर की.
उस देसी रंडी की डबल चुदाई हुई.
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वह भी पक्की रांड की तरह हम दोनों के लंड से चुदने के मजे ले रही थी.
उसकी चुदाई में भी हमें बहुत मजा आया.

साली की बहुत बड़ी बड़ी चूचियां थीं तो हम दोनों शफीक की बीवी जैनब की एक एक चूची से खेल रहे थे.

करीब चार घंटा तक चुदाई का खेल चला जिसमें शफीक ने हम दोनों की बीवियों को अपनी बहन बना कर जबरदस्त पेला और उनकी चूत को भोसड़े में तबदील कर दिया.

दोस्तो, अभी यह ग्रुप सेक्स वाली चुदाई की कहानी में बहुत रस लिखना बाकी है.

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पति के बेस्ट फ्रेंड ने मौके का फायदा उठा के चोदा



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सेक्स प्ले विद ब्यूटीफुल भाभी का मजा मेरे पति के ख़ास दोस्त ने मेरे साथ किया. एक रात मुझे उनके घर में रुकना था पर सोने की जगह की तंगी के कारण मैं अपने
पति के दोस्त के साथ सो गयी.


दोस्तो, मेरा नाम सुशीला है. मेरी उम्र 28 साल है।
मेरी शादी मेरे घर वालों ने 20 की उम्र में ही करा दी थी।
मेरे पति का नाम रवि है.

रवि एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं और महीनों महीनों के लिए घर से बाहर रहते हैं।

आज मैं आपके समक्ष एक ऐसी कहानी लाई हूँ जिसे पढ़कर आप लोग अपने हाथों को अपने कंट्रोल में नहीं रख पाएंगे।

यह कहानी मेरे और मेरे पति के बचपन के दोस्त के साथ हुई घटना पर आधारित है।

मैं आपको अपने बारे में बता दूँ कि मेरा रंग एकदम गोरा है और मेरा 36-32-40 का फिगर बहुत ही कातिलाना है.
ऐसा मेरा नहीं मेरे चाहने वालों का कहना है.

रूप रंग की बात खत्म करके सीधे सेक्स प्ले विद ब्यूटीफुल भाभी कहानी पर आती हूँ.

उस दिन मैं अपनी साड़ी लपेट चुकी थी और बालों को आखिरी स्वरूप दे रही थी कि तभी सासु माँ की आवाज़ आयी- तैयार हुई या नहीं? सब लोग आ चुके होंगे. ज्यादा देर नहीं करते अब!

मैं तुरंत कंघा नीचे रखते हुए बोली- हो गया बस!
और कमरे से बाहर निकल गयी।

सासु जी तैयार थी पड़ोसी के यहाँ एक रात्रि जागरण में जाने के लिए।
मैंने तुरंत कमरे को ताला लगाया और सासुजी के साथ पैदल घर से निकल पड़ी।

सासु जी कुछ बोलती हुई चल रही थी पर मैं किन्ही और ख्यालों में थी.
पति को दूसरे शहर गए 4 महीने हो चुके थे और मुझे उनकी बहुत याद आ रही थी, विरह के कुछ महीने काट रही थी।

दस मिनट के बाद ही हम पड़ोस के मकान के सामने खड़े थे.
अंदर काफी चहल पहल थी, रात्रि जागरण का माहौल बन चुका था।

एक बड़े हाल में सारे पुरुष लोगों के लिए व्यवस्था थी।

वहाँ की मेरी भाभी, सहेलियां दूसरे थोड़े छोटे कमरे में थी अपने पीहर और घनिष्ट सहेलियों के साथ!
इसलिए थोड़े अभिवादन के बाद मैंने उनको डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा।

अंदर एक बड़े कमरे में सारी औरतें बैठी बातों में मशगूल थी.
हमारे आते ही उन्होंने स्वागत किया और हम लोग बैठ गए।

कुछ औरतें बातों में मग्न थी, कुछ ने सोने की तैयारी कर ली थी।
पता चला कि पूजा आरती का कार्यक्रम सुबह 5 बजे होने वाला है।

मैं अपने पुराने दिनों और विचारों में खो गयी और अब मध्य रात्रि होने वाली थी.

अब तक सारी औरतें और पुरुष सो चुके थे।
शायद सुबह 5 बजे उठने की तैयारी में!

मगर मेरी आँखों में नींद नहीं थी, भीड़ भरा माहौल देख कर मेरी नींद वैसे भी जा चुकी थी।

मैं कमरे से बाहर लघु शंका के बहाने किसी तरह औरतों के पाँव बचाते हुए बाहर निकली।

तभी सामने मोहित दिखाई दिया, जिसका यह घर था।
एक हंसमुख और मुखर स्वभाव का युवक मेरे पति का हम उम्र!
जब भी किसी फंक्शन में जाता … अपनी बातों से वह समां बाँध लेता।
मुझे ऐसे व्यक्तित्व हमेशा आकर्षित करते हैं।

पिछली बार जब कुछ महीने अपने पति से दूर थी तब जब भी वह मिलता, मेरी कुशलक्षेम जरुर पूछता और मदद के लिए पूछता।
मगर कभी उसे मदद का मौका नहीं दिया।

मुझे देखते ही उसने हँसते हुए सवाल दाग दिया कि मेरे पति कब आने वाले हैं।
मुझे भी पक्का पता नहीं था पर बोल दिया- कुछ और महीने लगेंगे।

फिर उसने पूछा कि मैं अब तक सोई क्यों नहीं जबकि सारे लोग सो चुके थे।
उसने मुझे सुबह 5 बजे के प्रोग्राम के बारे में बताया।

मैंने उसे समझाया- इस भीड़ में मैं नहीं सो सकती।
उसको मुझ पर दया आयी और कुछ सोचने लगा।

उसकी इस उधेड़बुन को देखते हुए मैंने एक सवाल दाग दिया- आप अब तक क्यों नहीं सोये?

उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान तैर गयी और हाथ में पकड़ी कम्बल को थोड़ा उठाते हुए बोला कि उसने अपने सोने का एक विशेष प्रबंध किया है … घर की छत पर!
मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ और पूछा- छत पर तो बहुत मच्छर होंगे. और सुबह होने तक ठण्ड भी बढ़ जाएगी।

वह मेरे सवालों के जवाब के साथ तुरंत तैयार था।
उसने बताया कि उसने एक मच्छरदानी का इंतज़ाम पहले से कर लिया है और ठण्ड के लिए कम्बल लेने ही आया था।
यह कम्बल भी उसने किसी और सोते हुए व्यक्ति के सिरहाने से निकाल कर लिया है।

मैं उसकी इस शरारत पर खिलखिला पड़ी।
मेरे चेहरे पर हंसी देख कर उसको अच्छा लगा और मुझे मदद के रास्ते सोचने लगा।
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मैंने मजाक करते हुए कहा- आपके लिए अच्छा है कि विशेष इंतज़ाम है, पर हमारा क्या?
यह बात उसकी दिल को लगी।

उसने मुझे सुझाव दिया कि मैं छत पर मच्छरदानी में सो जाऊं।

मुझे लगा कि वह मजाक कर रहा है.
पर वह इस बात पर गंभीर था।

उसने अब और ज्यादा आग्रह किया तो मैंने उसको टालने के लिए बोल दिया- फिर आप कहाँ सोएंगे?
उसने बोला कि वह नीचे ही सो जायेगा पुरुषों के कमरे में!

मैंने उसका प्रस्ताव यह कहते हुए ठुकरा दिया- यह नहीं हो सकता, सारी महिलाये यहाँ हैं, मैं वहां अकेली जाऊंगी. और किसी को पता लगा तो अच्छा नहीं होगा।

उसने बताया कि छत पर कोई नहीं हैं और मैं छत पर लगे दरवाज़े को अंदर से बंद करके सो सकती हूँ. किसी को पता नहीं चलेगा और सुबह सबके जागने तक वापिस नीचे आ सकती हूँ।

मुझे कुछ और नहीं सूझा तो बहाना मार दिया- मैं वहाँ अकेले नहीं सो सकती, डर लगता है।

कुछ सोचने के बाद वह बोला कि वह मेरे साथ सो जायेगा।
उसके यह कहते ही एक चुप्पी सी छा गयी।
उसे अहसास हुआ कि उसने क्या बोल दिया.
और तुरंत अपनी बात सुधारते हुए बोला कि वह पास में ही दूसरा बिस्तर लगा कर सो जाएगा।

मैंने तुरंत मना कर दिया कि मेरी वजह से मैं उसको मच्छरों का भोजन नहीं बना सकती।
वह अपने आप को लाचार महसूस करने लगा।

हमेशा मदद के लिए ऑफर करने वाला आज मदद मांगने पर नहीं कर पा रहा था।

उसने अपना आखिरी प्रस्ताव रखा- मच्छरदानी पलंग के साइज की हैं जिसमें दो लोग आसानी से सो सकते हैं. और अगर मुझे आपत्ति ना हो तो हम दोनों वहां सो सकते हैं।

मेरे हां कहने का तो कोई सवाल ही पैदा नहीं होता था.
पर अब उसने एक ब्रह्मास्त्र छोड़ा कि अगर मैं उस पर थोड़ा सा भी भरोसा करती हूँ तो हां कर दूँ।

अब मैं बुरी तरह फंस चुकी थी।
न हां कह सकती और न ही ना कह सकती।
एक तरफ कुआं दूसरी तरफ खाई।

ऐसा नहीं था कि मैं उस पर भरोसा नहीं करती।
परन्तु यह समाज … अगर किसी को पता चल गया तो कुछ ना होते हुए भी मुझे बहुत कुछ होने वाला था।
अपने पति को मैं क्या जवाब दूंगी।

मैं हां या ना कुछ कह पाती … उसके पहले ही उसने मुझे निर्देश दिया कि मैं अपनी सासुजी को बोल दूँ कि मैं दूसरे कमरे में भाभी (उसकी पत्नी) के साथ सो रही हूँ. और फिर मैं छत पर आ जाऊं … वह मेरा इंतज़ार करेगा।
यह कहते हुए वह सीढ़ियाँ चढ़ते हुए चला गया।

मेरे पाँव अब जम गए.
फिर मैं औरतों वाले कमरे की तरफ गयी.
सासुजी दूसरे कोने में सो रही थी और उन तक पहुंचने के लिए काफी लोगों को लांघ कर जाना था.
मैंने सासुजी की नींद ख़राब करना ठीक नहीं समझा।

मैं मुड़ कर सीढ़ियों की तरफ भारी कदमों से बढ़ने लगी।

किसी तरह बेमन से मैं छत पर पहुंची.
वहाँ वो मेरा इंतज़ार कर रहा था।

उसने छत के दरवाज़े पर कुण्डी लगाते हुए मुझे आश्वासन दिया- चिंता ना करो, किसी को पता नहीं चलेगा।

उसने अच्छे से गद्दा लगा रखा था और मच्छरदानी के अंदर दो तकिये लगे हुए थे।

कहीं से उसने मेरे लिए दूसरे तकिये का इंतज़ाम कर लिया था … शायद फिर किसी के सिर के नीचे से खींच कर!

अब हम दोनों एक ही बिस्तर पर आस पास लेटे आसमान को निहार रहे थे।
चांदनी रात थी, आसमान साफ़ था तारों से भरा हुआ!

बहुत खुशनुमा रात का मौसम था।
हल्की सी हवा चल रही थी पर ठण्ड शुरू नहीं हुई थी इसलिए कम्बल एक कोने में पड़ा था।

थोड़ी देर हम ऐसे ही बातें करते रहे.
फिर थोड़ी ख़ामोशी … और पता ही नहीं चला कब मेरी आँख लग गयी।

अचानक मैंने अपने सीने पर कुछ हलचल महसूस की और मेरी नींद टूट गयी.
पर आँखें अभी भी बंद ही थी।

मैंने महसूस किया कि कुछ उंगलियां मेरे ब्लाउज के हुक को खोल रही थी।
मैं डर से काँप उठी … क्या यह उसी की हरकत है?

अब मैं क्या कर सकती थी … अगर चिल्लाई तो लोग पूछेंगे कि मैं यहाँ अकेले क्यों आयी और मुझ पर ही शक करेंगे।
मैंने आँखें बंद किये हुए ही कुछ इंतज़ार करना ठीक समझा।

तब तक सारे हुक खुल चुके थे और मेरे खुले ब्लाउज के अंदर कुछ हवा प्रवेश कर गयी।
मैं फिर से कांप उठी और एक अनिष्ट की आशंका से गिर गयी।

अब मैं इंतज़ार करने लगी कि आगे क्या गलत होने वाला है।

अब उसका हाथ मेरे पेट पर था.
पूरे 4 महीने बाद किसी पुरुष ने मुझे छुआ था, पूरे शरीर में एक तरंग सी दौड़ गयी।
कुछ मजा भी आ रहा था पर डर ज्यादा था।

उसने अब मेरे पेटीकोट से साड़ी की पटली निकालने की कोशिश की जिसमें वह कामयाब नहीं हुआ.
शायद मेरे जाग जाने के डर से उसने ज्यादा ताकत नहीं लगाई।

मैंने चैन की सांस ली।

अब उसने मेरा ब्लाउज सामने से और खुला कर दिया.
शायद वह मेरे स्तन देखना चाहता था.
पर कसी हुई ब्रा की वजह से कुछ हो नहीं पाया।

ब्रा का हुक पीठ पर था और मैं पीठ के बल ही सोई थी.
इस बात की मुझे ख़ुशी थी।
वह चाहते हुए भी ब्रा नहीं खोल सकता था।

कुछ मिनट ऐसे ही निकल गए और वह मेरी कमर और ऊपरी सीने पर ऐसे ही हाथ मलता रहा.
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फिर जब उसे अहसास हुआ कि कुछ होने वाला नहीं तो उसने मेरे ब्लाउज के हुक वापिस लगा दिए।
मैंने चैन की लम्बी सांस ली और थोड़ी देर बाद कब फिर आँख लग गयी पता ही नहीं चला।

मेरी नींद में दूसरी बार व्यवधान आया.
इस बार मैं करवट लेकर उसकी और पीठ करके सोई हुई थी इसलिए आँखें खोली.

अभी भी गहरी चांदनी रात थी और नींद खुलने का कारण वही था।

पर थोड़ी देर हो चुकी थी, ब्लाउज के सारे हुक खुल चुके थे।
फिर से मेरे अंदर डर की लहर कौंध गयी कि इस बार कैसे बचूंगी क्योंकि मैं करवट लेकर सोई थी और ब्रा का हुक उसकी तरफ था।

कुछ सोच पाती, उसके पहले ही खट की आवाज़ से ब्रा का हुक खुल चुका था और अचानक सीने पर कस के बाँधा हुआ प्रोटेक्शन ढीला हो चुका था।

मैंने एक साये को अपने चेहरे की तरफ आते महसूस किया और तुरंत अपनी आँखें बंद कर ली।

उसके हाथों ने अब मेरी ब्रा, मेरे शरीर के एक महत्पूर्ण अंग से उठा दिया और हवा की लहरें अब मेरे स्तनों को छू रही थी।

उस साये में मैंने महसूस किया कि अब वह मेरे शरीर के उस भाग को घूर रहा हैं जिसे देखने की असफल कोशिश उसने कुछ देर पहले ही की थी.
पर अब वो कामयाब हो चुका था।

मैं अपने आप को कोसने लगी कि क्यों मैंने करवट ली।
और उससे भी पहले क्यों मैं उसको ना नहीं बोल पाई छत पर आने के लिए।

पर अब क्या हो सकता था … या अब भी बहुत कुछ रोका जा सकता था।

अगले कुछ क्षणों के बाद उसने एक हाथ से मेरे स्तन को दबोच लिया था.
मैं अंदर से पूरी तरह सिहर गयी थी।

पर मैं कुछ बोलने या करने की हिम्मत नहीं जुटा पायी और यह प्रार्थना करने लगी कि इससे बुरा कुछ न हो.
या शायद अंदर ही अंदर कहीं से यह चाहती थी कि 4 महीने के एकांतवास को टूटने दिया जाये।
शायद मैं कुछ निर्णय नहीं ले पा रही थी और खुद को भाग्य के हाथों छोड़ दिया था।

कुछ देर ऐसे खेलने के बाद उसके हाथ फिर मेरी साड़ी की पटली की तरफ बढ़े और कुछ सेकंड की जद्दोजहद के बाद पटली पेटीकोट के बाहर थी और अगले कुछ मिनटों में मेरी पूरी साड़ी पेटीकोट से अलग हो चुकी थी।

अब मैं एक अबला की नारी तरह पड़ी थी जिसके शरीर पर सिर्फ पेटीकोट था, ऊपर के वस्त्र सामने से खुले थे।
फिर से एक खट की आवाज़ हुई और मेरे पेटीकोट का नाड़ा खुल चूका था और उसने मेरा पेटीकोट कमर से नीचे खिसकाना शुरू कर दिया।

मैंने आंखें खोली तो पेटीकोट पूरा निकल कर मेरी आँखों के सामने पड़ा चिढ़ा रहा था।
और कुछ सोचने के पहले ही मेरे नीचे के अंगवस्त्र भी निकल कर पेटीकोट का साथ पड़े थे।

अब मुझे अहसास हो चुका था कि बचने का कोई रास्ता नहीं हैं और आत्मसमर्पण कर देना चाहिए या तुरंत उठ कर फटकार लगा देनी चाहिये कि उसकी यह हिम्मत कैसे हुई।

फिर किसी डर की आशंका से या काफी समय से शरीर की जरूरत पूरी नहीं होने की वजह से मैं चुपचाप लेटी रही।

मेरे नग्न शरीर को देख कर अब शायद उसका अपने आप पर नियंत्रण नहीं रहा था और पीछे से उसका शरीर मुझसे चिपका हुआ था और रह रह कर ऊपर नीचे रगड़ रहा था।
उसका एक हाथ मेरे कमर, कूल्हों और स्तनों पर फिर रहा था।

फिर उसने अपना शरीर मुझसे अलग कर लिया.
मुझे लगा कि उसका इरादा बदल गया लगता है और मैं सुरक्षित हूं.

पर मैं गलत थी।
फिर कुछ कपडे निकलने की आवाज़ आयी।

अब मैंने अपने पीछे के निचले हिस्से में एक गर्म बदन का स्पर्श महसूस किया.
मुझे समझते देर नहीं लगी कि उसने क्या किया है।
अब वह पूरा नग्न मुझसे पीछे से फिर चिपक गया।

इस बार शायद कुछ ज्यादा ही जोर से, शायद नग्नावस्था में उसकी इन्द्रियां और सक्रिय हो गयी थी।

उसका लचीला अंग मेरे पुट्ठों को छू गया।
अब शायद कहीं न कहीं मैं अपने आप को तैयार कर चुकी थी एक अनपेक्षित मिलन के लिए।

उसका शरीर बराबर मुझे पीछे से रगड़ रहा था।
मैं महसूस कर पा रही थी कि उसका लचीला अंग धीरे धीरे कठोर होता जा रहा था।

अब वह जोर जोर से मेरे स्तनों को दबाते हुए कुचलने लगा.
पर अब मुझे बुरा नहीं लग रहा था।

कुछ देर बार उसने हाथ स्तनों से हटा लिया।

उसका कठोर अंग अब मेरे दोनों टांगों के बीच खोजी कुत्ते तरह कुछ ढूंढ रहा था।
शायद अंदर प्रवेश का मार्ग … पर मिल नहीं रहा था।

एक दो बार वह मेरे योनि द्वार के आस पास भी पंहुचा था।

थोड़े प्रयासों के बाद ही उसे मेरे शरीर पर गीली जमीन मिल गयी और वह रुक गया।
उसका लिंग अब मेरे योनि द्वार पर था।

मेरी साँसें जैसे रुक गयी।

एक भटकते हुए प्यासे राहगीर के होठों पर जैसे किसी ने पानी का गिलास रख दिया था।

उसके लिंग ने थोड़ी ऊपर नीचे हरकत की और थोड़ा सा योनि में अंदर गड़ गया।

मैंने आँखें जोर से बंद कर ली … अगले क्षणों में जो होने वाला था, उसकी तैयारी में!

पति के अलावा पहली बार कोई पुरुष मेरी योनि में प्रवेश करने वाला था।

इतनी देर की रगड़ से मेरे अंदर पहले ही थोड़ा गीला हो चुका था।
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मक्खन की तरह धीरे धीरे उसका लिंग फिसलते हुए अंदर आता गया और उसके मुँह से सिसकी निकलती गयी।
मेरा हाथ चेहरे के पास ही था, मैंने अपने होठों पर हाथ रख कर अपना मुँह बंद कर दिया।

उसने अपने हाथ से एक बार फिर मेरा स्तन दबोच लिया।

मैं अपने काफी अंदर तक उसके कठोर लिंग को महसूस कर पा रही थी।
जितनी धीमी गति से वो अंदर गया, उसी धीमी गति से उसने फिर उसको आधे से भी ज्यादा बाहर निकाला।

अंदर और बाहर निकलते समय उसका लिंग मेरी योनि की दीवारों को रगड़ते हुए जा रहा था और मेरा पूरा शरीर अंदर ही अंदर कम्पन कर रहा था।

दो सेकंड के विराम के बाद एक बार फिर उसी धीमी गति से वो दीवार रगड़ता हुआ अंदर गया।
जितना अंदर वो गया, उससे मुझे अहसास हो गया उसकी लम्बाई कितनी ज्यादा रही होगी.
और जिस तरह वो मेरी दीवारों से रगड़ खा रहा था, इतनी मोटाई मैंने तो पहले महसूस नहीं की थी।

काफी समय तक वह ऐसे ही मालगाड़ी की रफ़्तार से धीरे धीरे अंदर जाता, थोड़ा रुकता और बाहर आता … फिर थोड़ा रूककर अंदर जाता।

हर बार अंदर जाते ही उसकी एक लम्बी आह निकलती।

पता ही नहीं चला कब उसकी मालगाड़ी फ़ास्ट ट्रेन में बदली और कब राजधानी एक्सप्रेस बन गयी।
उसका लिंग अंदर योनि में एकत्रित पानी को तेजी से चीरता हुआ आ जा रहा था जिससे छपाक छपाक की आवाज़ आने लगी थी।

उसके झटकों की गति बढ़ने के साथ छपाक की आवाजें काफी तेज हो गयी थी।

अब वह तेजी से बार बार झटके मारते हुए अंदर बाहर हो रहा था और मेरी उत्तेजना भी बढ़ती जा रही थी।

उसके मुँह से अब आहें निकलने लगी और समय के साथ तेज होती गयी।
मुझे डर लगा कही कोई सुन न ले।
रात के सन्नाटे में ऐसी आवाज़ें ज्यादा ही गूंजती हैं।

पर मैं मन ही मन चुपके से उसका आनन्द भी लेती जा रही थी।
कुछ ही देर में न चाहते हुए भी मैं भी उस आनंद में भीग गयी।

मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी आवाज़ अभी तक दबा के रखी हुई थी जो अब आपे से बाहर होता जा रहा था।
मेरे होंठों के बीच से एक आवाज़ छूट ही गयी।

इसके पहले कि मैं अपने हाथों से ओर जोर से मुँह को दबाती, उसने सुन लिया और डरने की बजाय मेरी आह को मेरी मौन स्वीकृति मान कर उसने कुछ जोर के झटके मुझे मारे जिससे मेरी हल्की चीख निकलने लगी।

अब कोई फायदा नहीं था आवाज़ दबाने का … जिस चीज़ के लिए मैं कुछ महीने से तड़प रही थी, वह मिली तो भी इस तरह से … और वह भी किस व्यक्ति से, यह सपने में भी नहीं सोचा था।

उसने अब मेरे ब्लाउज और ब्रा को पूरी तरह मेरे शरीर से अलग कर दिया था।
अब मेरे शरीर पर एक भी वस्त्र नहीं था और ना ही उसके!

पर अब हमें कपड़ों की परवाह नहीं थी, हम दोनों नंगे इन यौनानन्द के क्षणों को पूरी तरह सफल बनाने में जुट गए।

हम दोनों की आहें एक ही सुर में छपाकों की आवाज़ से ताल मिला रही थी।

इतनी देर करने के बाद भी उसकी शक्ति क्षीण नहीं हुई थी और उसी गति से उसके झटके निर्बाध जारी थे।

मैं अपनी योनि के बाहर कुछ तरल पदार्थ रिसता हुआ महसूस कर पा रही थी जो उसके लिंग के बाहर आते वक़्त साथ बाहर आ रहा था।

अब मैं अपने चरम की तरफ बढ़ती जा रही थी और दुआ कर रही थी कि मुझसे पहले कहीं वह छूट ना जाये।

पर शायद इन मर्दों को दूसरी औरतों के साथ करते वक़्त ज्यादा ही ताकत मिल जाती है।

मेरा नशा अब सर तक चढ़ने लगा था और जैसे चक्कर आने लगे.
मैं स्वयं को निश्तेज महसूस करने लगी थी.
ये चरम के नजदीक पहुंचने के संकेत थे।

गैर मर्द के साथ मस्ती करते हुए मैंने अपनी टांगें अब खोल दी, जिससे बाहर छलके पानी से हवा टकराई और एक ठंडक का अहसास हुआ।

टांगें खुलने से उसको और भी बड़ा रास्ता मिला और उसने अपना लिंग और गहराई में डाल दिया।
शायद एक इंच और गहरा अंदर उतर गया था वो!

अगले कुछ मिनट बहुत कीमती थे.
उसने जिस गहराई से एक के बाद एक तेज झटके मारे, मैं पूरा छूट गयी.
मेरी छोटी छोटी आहें चरम पर आते ही एक लम्बी चीख में तबदील हो गयी.

और उसके बाद मेरी कुछ हल्की चीखें निकली और मैंने अपना चरम प्राप्त कर लिया।

मेरे चरम से उसका उत्साहवर्धन हुआ और वह भूखे भेड़िये की तरह आवाजें निकालते हुए झटकों पर झटके मारता रहा।
मेरे स्तनों को वह अब बुरी तरह से मौसम्बी की तरह निचोड़ रहा था।

फिर एक झटका उसका इतनी गहराई में उतरा कि लिंग बाहर नहीं निकला और वहीं पड़ा हुआ कुलबुला कर फुफकारने लगा।

मैंने अपने अंदर एक गर्म लावा महसूस किया.
उसने सारा पानी अंदर छोड़ दिया था।

वह कुछ देर तक ऐसे ही निढाल पड़ा रहा।

सारी प्रतिक्रियायें शांत हो चुकी थी जैसे एक तूफ़ान के बाद की शांति।

अब भी वह मुझे झकड़े हुए था

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ट्रेन में मिली बुर्के वाली भाभी की होटल में चुदाई


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हॉट भाभी पोर्न कहानी में मुंबई की लोकल ट्रेन में मेरी दोस्ती पर्दे वाली एक भाभी से हुई. हमने होटल में मिलकर चुदाई का मजा लेने का प्रोग्राम बनाया.

आप सभी को मेरा नमस्कार.
मैं जतिन हूँ मुंबई से!
मेरे साथ कुछ दिन पहले की हुई सच्ची घटना है यह!
मैं उम्मीद करता हूं कि आपको बहुत पसंद आएगी.

मैं एक 5 फीट 8 इंच का नौजवान हूँ. मेरी उम्र 25 साल है.
दिखने में भी मैं काफी अच्छा हूँ.
मेरा लंड 7 इंच से ज्यादा बड़ा है और ये करीब 3 इंच मोटा है.

अब लड़के, लड़कियां, मर्द, औरतें और ख़ास कर भाभियां अभी से अपनी अंडरवियर में हाथ डाल लें.

यह करीब 3 महीने पहले की बात है.
मैं और मेरा एक दोस्त हम दोनों मुंबई के बस स्टैन्ड से लौट रहे थे.

करीब रात के एक बजे का समय था.

दादर से हम दोनों ने कल्याण के लिए लोकल ट्रेन से सफर करना शुरू किया.
कुछ देर बाद कुर्ला स्टेशन आया और एक खूबसूरत सी भाभी ने ट्रेन में अपना कदम रखा.

वह बुर्का पहन कर चढ़ी ही थी कि उसकी नजरें मेरी नजरों से टकरा गईं क्योंकि उसने अपना नकाब हटाया हुआ था.

उसी पल मैंने एक क्यूट सी स्माइल पास करते हुए उन्हें सीट ऑफर की.
रात में ट्रेन में इतनी भीड़ नहीं थी.

वे मेरे करीब ही बैठ गईं.
वे एकदम चुप थीं.

पर उनसे ज्यादा देर चुप नहीं रहा गया.
उन्होंने मुझसे बात करनी शुरू करते हुए हैलो कहा.

मैंने भी उन्हें हैलो कहा.
उन्होंने पूछा- किधर जा रहे हो?

मैंने लंबी सांस भरते हुए कहा- जहां नसीब ले जाए!
वे हंस दीं और बोली- हुंअ … इंटरेस्टिंग पर्सन … क्या नाम है तुम्हारा!

मैंने बताते हुए कहा- आप को क्या लगता है कि मुझे देख कर आपको क्या नाम अच्छा लगेगा?
वे बोलीं- मतलब?

मैंने कहा- बंदे को आप जो भी नाम देना चाहें … मैं उसी को रख लूँगा.
भाभी फिर से हंस दीं.

फिर उन्होंने मुझसे मेरी पढ़ाई के बारे में पूछ लिया और इस तरह से हमारे बीच बातचीत होना शुरू हो गई.

बातों ही बातों में उन्होंने मुझे जॉब के लिए पूछ लिया.
मैंने कहां- हाँ करता तो हूँ, पर अभी मैं और अच्छी जॉब देख रहा हूँ.

उस पर उन्होंने मुझसे कहा- तुम अपना रेज़्यूमे मुझे मेल कर दो, मैं कुछ देखती हूँ.
यह कहते हुए भाभी ने अपनी मेल आईडी मुझे बता दी.

मैंने उसी वक्त उन्हें मेल सेंड करके अपना रेज़्यूमे भेज दिया.
फिर हमारा स्टेशन आया तो हम सब उतर गए.

फिर करीब एक घंटा बाद मैं अपने फ्रेंड को बस में बैठा कर अपने घर जा रहा था.
तभी एक अंजान नंबर से मुझे व्हाट्सैप पर मैसेज आया ‘हाय सन्नो हियर, अभी थोड़ी देर पहले मैंने तुम्हारा रेज़्यूमे देखा!’

यह पढ़ते ही मैं खुश हो गया कि भाभी ने अपना नाम बताते हुए मैसेज किया है.
मैं उनसे मैसेज पर ही बात करने लगा.

अब हम दोनों के बीच मस्ती की बातें होने लगीं.
मैंने उनका नंबर सेव कर लिया और हमारी बातें परवान चढ़ने लगीं.

कुछ दिन में ही हम दोनों एक दूसरे के प्रति आकर्षित होने लगे.
फोन पर भी हमारी बात होने लगी थी.

कभी कभी मिल भी लेते और मूवी आदि भी देखने चले जाते.
इस तरह से हमारे बीच थोड़ा थोड़ा रोमांस भी होने लगा था.

अब जल्दी ही हमारे बीच कुछ इस तरह की आग लग गई थी कि सिर्फ मिलने से नहीं बुझ रही थी.
इस बात को हम दोनों ही महसूस करने लगे थे.

एक रात छत पर भाभी और मैं फोन पर बात कर रहे थे.
हम दोनों ने मिलने का प्लान किया.
हमारे बीच यह तय हुआ कि हम दोनों किसी होटल में जाएंगे.

उसी रात हम दोनों आपस में बातें करने लगे कि कमरे में जाकर क्या करना है.

अब इस बात पर न तो भाभी ही कुछ कह रही थीं और न ही मैं कुछ कह रहा था कि कमरे में जाकर करना क्या है.
जबकि हम दोनों ही समझ रहे थे कि उधर हम दोनों को चुदाई करने का खुल कर मौका मिलेगा.

भाभी मेरी तरफ देख कर हंसने लगीं और मेरे मजे लेने लगीं- तो बताओ न उधर जाकर क्या करना है?
मैंने कहा- उधर आपको मैं जीवन में आनन्द प्राप्त करने का एक गूढ़ रहस्य बताऊंगा.

भाभी बोलीं- तो वह रहस्य तो तुम इधर फोन पर भी बता सकते हो?
मैंने कहा- नहीं, वह अकेले और एकांत वाली जगह में ही बताया जाता है!

भाभी ने फिर से चुटकी ली- तो इधर भी तो हम दोनों अकेले में ही हैं और इधर एकांत भी है!

मैंने दिमाग लगाया कि भाभी मेरी ले रही हैं. अब कुछ ऐसा करना पड़ेगा … जिससे भाभी खुल जाएं.
तो मैंने कहा- ओके … तो क्या आप उस रहस्य को जाने के लिए अभी तैयार हैं?
भाभी मुस्कुराईं और बोलीं- हाँ मगर पहले बताओ तो!

मैंने कहा- आपको उस रहस्य को जाने के लिए एक अनुष्ठान करना है और उस अनुष्ठान में आपको अपने सारे कपड़े उतारने पड़ेंगे … तो बताइए भाभी जी क्या आप अभी तैयार हैं?
भाभी हंस पड़ीं और बोलीं- तुम सच में बहुत चालू पुर्जा हो. चलो मैं समझ गई कि तुमको मेरे साथ क्या करना है!

अब मैंने डोर पकड़ ली और कहा- अच्छा तो बताइए कि आपको क्या समझ में आ गया है?
भाभी छूटते ही बोलीं- तुमको मुझे चोदना है … सीधे सीधे बोलो न यार!

मैंने उनके मुँह से चोदना शब्द सुना तो मैंने कहा- या यूं कहें कि आपको मेरे साथ चुदवाना है!

वे हो हो करके हंसने लगीं और हम दोनों के बीच सेक्स की बातें होने लगीं.
कुछ ही देर में हमारे बीच इतनी ज्यादा बेचैनी हो गई थी कि क्या ही बताऊं.