हम लोग भी परेशान हो गए तो ड्राइवर बोला- घबराइए नहीं, पीछे एक किलोमीटर पर गाँव में एक मैकेनिक की दूकान थी. मैं आधे घंटे में उसको लेकर आता हूँ तब तक आप लोग टेक्सी के अंदर आराम करिये.
ड्राइवर पैदल चला गया तो मैं और शेखर जंगल में घूमने लगे.
चांदनी रात थी और चारों तरफ चन्द्रमा की दूधिया रोशनी फैली थी.
मैं और शेखर एक दूसरे को साफ़ साफ़ देख पा रहे थे.
तभी शेखर ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपनी तरफ खींचा और मेरे होठों पर अपने होंठ रख दिए.
मैं भी शेखर के चौड़े सीने से लिपट गई और उसके होंठ चूसने लगी.
अब मैं कुछ ज्यादा ही गरम होने लगी थी तो मैंने शेखर की शर्ट उतार दी और उसके बदन को चूमने लगी.
शेखर ने भी मेरी कुर्ती उतार दी और मेरे बदन से खेलने लगा.
अब शेखर ने अपनी पैन्ट उतार दी और मेरी सलवार का नाड़ा भी खोल दिया.
अपने हाथ मेरी पीठ पर ले जाकर शेखर ने मेरी ब्रा का हुक खोल दिया और मेरे स्तनों को कैद से आजाद कर दिया.
मेरी महकती जवानी देखकर शेखर पागल हो उठा और मेरे दूध पीने लगा.
मैं भी साथ देते हुए उसके बदन से खेलती रही.
अब शेखर घुटनों पर आया और उसने मेरी चड्डी उतार दी.
मेरी चड्डी उतार कर वो मेरी पनियाई हुई चूत को चाटने लगा.
मुझे बहुत मजा आ रहा था और मैं जोर जोर से सिसकारियां ले रही थी.
इस घने जंगल में हमारी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था तो मुझे आवाजें निकालने में कोई डर भी नहीं था.
मेरी चूत की जीभ से सफाई कर के शेखर उठा तो मैं घुटने पर आ गई और शेखर की चड्डी उतारने लगी.
जैसे ही मैंने चड्डी उतारी तो शेखर का बड़ा सा लंड मेरे मुंह से टकरा गया.
शेखर ने मेरा सर पकड़ा और अपना लंड मेरे मुंह में घुसाने लगा.
मैं रोकने का प्रयास कर रही थी फिर भी जैसे तैसे शेखर ने अपना सुपारा मेरे मुंह में पेल दिया.
मुझे कुछ गन्दा सा लग रहा था फिर भी वासना में मैं शेखर के लंड को चूसने लगी.
कुछ देर चूसने पर मुझे मजा आने लगा और मैं जोर जोर से लंड अपने मुंह में अंदर बाहर करने लगी.
लंड चूसते समय मेरी चूत में अजीब सी सिहरन हो रही थी तो मैं शेखर से बोली- मेरी चूत में अजीब सी चूल उठ रही है, प्लीज इसको शांत करो.
यह सुनकर शेखर ने टेक्सी में से एक मोटा कम्बल निकाल कर घास पर बिछाया और मुझे लेटा दिया.
अब शेखर मेरे ऊपर आ गया और उसने अपना लंड मेरी चूत की दरार पर रख दिया.
शेखर ने हौले से धक्का लगाया तो उसका लंड थोड़ा सा मेरे अंदर घुस गया.
मेरी चीख निकल गई- हाय अम्मी, बाहर निकालो, दुःख रहा है.
लेकिन शेखर ने मेरी बात नहीं सुनी और एक जोर का झटका देकर अपना सारा लंड मेरी चूत में पेल दिया.
दर्द के मारे मेरा बुरा हाल हो गया था और मेरे आंसू निकल आये थे.
शेखर ने अपना लंड आगे पीछे करना शुरू किया और मेरी चीखें निकाल डालीं.
वो धक्के मार रहा था और मैं चिल्ला रही थी- रुक जाओ प्लीज, मेरी बुर फट रही है. प्लीज थोड़ा धीरे चोद लो.
लेकिन इस हवस के मारे आदमी पर कोई असर नहीं हो रहा था; वो बिना रुके मुझे पेले जा रहा था.
कुछ देर में मेरी चूत की नसें ढीली हुईं तो मेरा दर्द कुछ कम हुआ.
अब मैं भी मजे लेने लगी और अपनी गांड उछालने लगी.
शेखर के होंठ मेरे होंठों पर थे, जीभ मेरे मुंह के अंदर थी और हाथ मेरे दोनों स्तनों पर थे.
मेरे हाथ शेखर की पीठ पर थे.
अब शेखर की स्पीड तेज होने लगी और उत्तेजना के मारे मेरे हाथ भी शेखर के चारों तरफ कसने लगे.
जंगल की इस शांति में बस मेरी आहें गूँज रही थी और साथ में शेखर के धक्कों के साथ साथ फट्ट फट्ट की आवाजें गूँज रही थीं.
शेखर गुर्राते हुए पूरी ताकत से धक्के मार रहा था मानो आज मुझे जमीन में ही धंसा देगा.
मैं भी हर तरीके से उसका साथ दे रही थी.
देगा मेरा लंड.
सच में मुझे ऐसा लग रहा था मानो छोटू का लंड मेरा गाला फाड़ते हुए मेरे पेट तक चला जाएगा.
अब ड्राइवर ने मेरी चूत से लंड निकाला और मेरे स्तनों के बीच में फंसा दिया और मेरे दूध चोदने लगा.
ड्राइवर मेरे दूध चोदते हुए बोला- क्या मस्त मम्मे हैं रंडी के. लगता है दो बच्चों की मां है साली!
अब्दुल बोला- जिस तरीके से हम इसको चोद रहे हैं, लगता है आज ही ये चालीस पचास बच्चों की मां बन जाएगी.
यह बोलकर अब्दुल ने मेरी चूत में अपना लंड पेल दिया और घपाघप धक्के मारने लगा.
अब मेरा मुंह, दूध और चूत एक साथ चुद रहे थे और मैं चुदाई के सागर में लंड की नाव पर बैठ कर गोते मार रही थी.
हवस की आग में जलते हुए मैंने छोटू के लंड को बुरी तरह चूसना शुरू कर दिया, ड्राइवर के लंड पर अपने स्तन जोर से दबा दिए और अब्दुल को अपनी टांगों में जकड लिया ताकि उसका लंड मेरे और अंदर तक समा सके.
ड्राइवर पैदल चला गया तो मैं और शेखर जंगल में घूमने लगे.
चांदनी रात थी और चारों तरफ चन्द्रमा की दूधिया रोशनी फैली थी.
मैं और शेखर एक दूसरे को साफ़ साफ़ देख पा रहे थे.
तभी शेखर ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपनी तरफ खींचा और मेरे होठों पर अपने होंठ रख दिए.
मैं भी शेखर के चौड़े सीने से लिपट गई और उसके होंठ चूसने लगी.
अब मैं कुछ ज्यादा ही गरम होने लगी थी तो मैंने शेखर की शर्ट उतार दी और उसके बदन को चूमने लगी.
शेखर ने भी मेरी कुर्ती उतार दी और मेरे बदन से खेलने लगा.
अब शेखर ने अपनी पैन्ट उतार दी और मेरी सलवार का नाड़ा भी खोल दिया.
अपने हाथ मेरी पीठ पर ले जाकर शेखर ने मेरी ब्रा का हुक खोल दिया और मेरे स्तनों को कैद से आजाद कर दिया.
मेरी महकती जवानी देखकर शेखर पागल हो उठा और मेरे दूध पीने लगा.
मैं भी साथ देते हुए उसके बदन से खेलती रही.
अब शेखर घुटनों पर आया और उसने मेरी चड्डी उतार दी.
मेरी चड्डी उतार कर वो मेरी पनियाई हुई चूत को चाटने लगा.
मुझे बहुत मजा आ रहा था और मैं जोर जोर से सिसकारियां ले रही थी.
इस घने जंगल में हमारी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था तो मुझे आवाजें निकालने में कोई डर भी नहीं था.
मेरी चूत की जीभ से सफाई कर के शेखर उठा तो मैं घुटने पर आ गई और शेखर की चड्डी उतारने लगी.
जैसे ही मैंने चड्डी उतारी तो शेखर का बड़ा सा लंड मेरे मुंह से टकरा गया.
शेखर ने मेरा सर पकड़ा और अपना लंड मेरे मुंह में घुसाने लगा.
मैं रोकने का प्रयास कर रही थी फिर भी जैसे तैसे शेखर ने अपना सुपारा मेरे मुंह में पेल दिया.
मुझे कुछ गन्दा सा लग रहा था फिर भी वासना में मैं शेखर के लंड को चूसने लगी.
कुछ देर चूसने पर मुझे मजा आने लगा और मैं जोर जोर से लंड अपने मुंह में अंदर बाहर करने लगी.
लंड चूसते समय मेरी चूत में अजीब सी सिहरन हो रही थी तो मैं शेखर से बोली- मेरी चूत में अजीब सी चूल उठ रही है, प्लीज इसको शांत करो.
यह सुनकर शेखर ने टेक्सी में से एक मोटा कम्बल निकाल कर घास पर बिछाया और मुझे लेटा दिया.
अब शेखर मेरे ऊपर आ गया और उसने अपना लंड मेरी चूत की दरार पर रख दिया.
शेखर ने हौले से धक्का लगाया तो उसका लंड थोड़ा सा मेरे अंदर घुस गया.
मेरी चीख निकल गई- हाय अम्मी, बाहर निकालो, दुःख रहा है.
लेकिन शेखर ने मेरी बात नहीं सुनी और एक जोर का झटका देकर अपना सारा लंड मेरी चूत में पेल दिया.
दर्द के मारे मेरा बुरा हाल हो गया था और मेरे आंसू निकल आये थे.
शेखर ने अपना लंड आगे पीछे करना शुरू किया और मेरी चीखें निकाल डालीं.
वो धक्के मार रहा था और मैं चिल्ला रही थी- रुक जाओ प्लीज, मेरी बुर फट रही है. प्लीज थोड़ा धीरे चोद लो.
लेकिन इस हवस के मारे आदमी पर कोई असर नहीं हो रहा था; वो बिना रुके मुझे पेले जा रहा था.
कुछ देर में मेरी चूत की नसें ढीली हुईं तो मेरा दर्द कुछ कम हुआ.
अब मैं भी मजे लेने लगी और अपनी गांड उछालने लगी.
शेखर के होंठ मेरे होंठों पर थे, जीभ मेरे मुंह के अंदर थी और हाथ मेरे दोनों स्तनों पर थे.
मेरे हाथ शेखर की पीठ पर थे.
अब शेखर की स्पीड तेज होने लगी और उत्तेजना के मारे मेरे हाथ भी शेखर के चारों तरफ कसने लगे.
जंगल की इस शांति में बस मेरी आहें गूँज रही थी और साथ में शेखर के धक्कों के साथ साथ फट्ट फट्ट की आवाजें गूँज रही थीं.
शेखर गुर्राते हुए पूरी ताकत से धक्के मार रहा था मानो आज मुझे जमीन में ही धंसा देगा.
मैं भी हर तरीके से उसका साथ दे रही थी.
देगा मेरा लंड.
सच में मुझे ऐसा लग रहा था मानो छोटू का लंड मेरा गाला फाड़ते हुए मेरे पेट तक चला जाएगा.
अब ड्राइवर ने मेरी चूत से लंड निकाला और मेरे स्तनों के बीच में फंसा दिया और मेरे दूध चोदने लगा.
ड्राइवर मेरे दूध चोदते हुए बोला- क्या मस्त मम्मे हैं रंडी के. लगता है दो बच्चों की मां है साली!
अब्दुल बोला- जिस तरीके से हम इसको चोद रहे हैं, लगता है आज ही ये चालीस पचास बच्चों की मां बन जाएगी.
यह बोलकर अब्दुल ने मेरी चूत में अपना लंड पेल दिया और घपाघप धक्के मारने लगा.
अब मेरा मुंह, दूध और चूत एक साथ चुद रहे थे और मैं चुदाई के सागर में लंड की नाव पर बैठ कर गोते मार रही थी.
हवस की आग में जलते हुए मैंने छोटू के लंड को बुरी तरह चूसना शुरू कर दिया, ड्राइवर के लंड पर अपने स्तन जोर से दबा दिए और अब्दुल को अपनी टांगों में जकड लिया ताकि उसका लंड मेरे और अंदर तक समा सके.
इस समय मेरी चुदाई का घमासान खेल चल रहा था और मेरे शरीर का अंग अंग चोदा जा रहा था लेकिन फिर भी कोई हार मानने को तैयार नहीं था.
अब छोटू का शरीर अकड़ने लगा और मैं समझ गई कि उसका पानी निकलने वाला है.
मैं उसका लंड मुंह से निकालने लगी तो छोटू ने मेरे हाथ पकड़ लिए और जोर जोर से मेरा मुंह चोदने लगा.
अचानक ही उसका पानी छूट गया और उसने अपने गरमागरम वीर्य की ना जाने कितनी पिचकारियां मेरे गले के अंदर उतार दीं.
मुझे उसका सारा वीर्य पीना पड़ा.
छोटू के हटते ही ड्राइवर और अब्दुल उठ गए और उन्होंने पोजीशन बदल ली.
ड्राइवर नीचे लेट गया और उसने मुझे अपने लंड पर बैठने को कहा.
मैं ड्राइवर के लंड पर बैठी तो गपाक से मेरी चूत ने ड्राइवर का सारा लंड निगल लिया.
अब मैं ड्राइवर के ऊपर उछलने लगी.
ड्राइवर का लंड मेरी बच्चेदानी से टकरा रहा था और मुझे गजब का मजा आ रहा था.
मैं हवस भरी आवाज में चिल्लाई- मेरी चूत को अपने वीर्य से भर दे सूअर. उतार दे अपना माल मेरे भोसड़े में.
तभी ड्राइवर का सफर भी पूरा होने को आया और उसका शरीर अकड़ने लगा.
उसका लंड फूल गया और मेरी चूत में एकदम गर्म लगने लगा.
मैं उसके गरमागरम लंड का मजा अपनी चूत में ले ही रही थी कि तभी ड्राइवर के लंड ने वीर्य की पिचकारियां मेरी चूत में छोड़ दीं.
मुझे इतना मजा आया कि मैं एक बार फिर चिल्ला उठी- आह, मजा आ गया. तेरे गर्म गर्म वीर्य ने मेरी चूत का बजा बजा कर रख दिया. और डाल साले, मुझे और वीर्य चाहिए अपनी चूत में.
फचाक फचाक करके ना जाने कितनी पिचकारियां उसके लंड से निकलीं और मेरी चूत को उसने वीर्य का तालाब बना दिया.
मैं ड्राइवर के लंड से उठी तो मेरी चूत से बहते हुए उसके वीर्य ने मेरी दोनों जांघों को गीला कर दिया.
मैंने देखा कि मेरी चूत का मुंह तो खुला का खुला रह गया था.
इस हरामजादे ने मेरी चूत का भोसड़ा बना कर रख दिया था.
अब्दुल हँसते हुए बोला- जब चुदाई शुरू की थी तो चूत थी लेकिन अब साली भोसड़ा बन चुकी है.
मैं बोली- सालों रंडी की औलादों, ऐसे भी कोई चोदता है क्या? अब मेरे बॉयफ्रैंड को क्या मुंह दिखाऊँगी?
अभी मैं उठ ही रही थी कि अब्दुल ने मुझे गर्दन पकड़ कर दबा दिया और घोड़ी बना दिया.
वो अपना लंड मेरी गांड पर फेरने लगा तो मैं घबरा उठी. मैंने उससे कहा- प्लीज चूत जितनी मारनी हो मार लो लेकिन गांड को बक्श दो.
लेकिन वो नहीं माना- शबनम जान, चूत तो भोसड़ा बन चुकी है. अब तो तेरी गांड मारकर ही मजा लेना पड़ेगा.
उसने अपनी एक उंगली थूक से गीली की और मेरी गांड में घुसा दी.
फिर उसने मेरी गांड में ढेर सारा थूका और अपनी दो उँगलियाँ अंदर घुसा दीं.
मुझे तेज दर्द हुआ पर अब्दुल ने अपनी उँगलियाँ मेरी गांड से निकाल कर उधर अपना लंड फंसा दिया.
अब धीरे धीरे उसने दबाव बनाया और घच्च से अपने लंड मेरी गांड में पेल दिया.
दर्द के मारे मेरी रुलाई छूट गई लेकिन उस हरामजादे पर कोई असर नहीं पड़ा. मेरे आंसुओं को नजरअंदाज करके वो मेरी गांड में अपना लंड हिलाता रहा.
कुछ देर उसने अपना लंड आगे पीछे किया तो मेरी गांड का छेद ढीला होने लगा और मेरा दर्द कुछ कम होने लगा.
अब उसने मेरी गांड चोदना शुरू किया और जोर जोर से धक्के मारने लगा.
अब मैं भी उसका साथ देने लगी थी.
वो धक्के मारता तो मैं भी अपनी गांड आगे पीछे करके जंगल सेक्स के मजे ले रही थी.
कुछ देर मुझे कुतिया की तरह चोदने के बाद उसने अपने धक्के तेज कर दिए.
मैं समझ गई कि इसका पानी छूटने वाला है.
मैकेनिक ने अपने धक्के तेज किये और जोरदार ताकत के साथ मेरी गांड में अपने गर्म गर्म वीर्य की पिचकारी छोड़ दी.
जैसे ही उसने अपना लंड बाहर निकाला तो मेरी गांड से वीर्य के साथ साथ खून का फव्वारा छूट गया.
इस रंडी के बच्चे ने सच में मेरी गांड फाड़ कर रख दी थी.
अब्दुल हँसते हुए बोला- अरे बाप रे, इसकी गांड में तो कुआं खुद गया है.
मैं रोते हुए उसको कोसने लगी- साले रंडी के बच्चे, तेरी अम्मी को सूअर चोदे, तेरी बहन को सारा बम्बई चोदे.
ड्राइवर हँसते हुए बोला- अरे शबनम जान, इसकी अम्मी और बहन तो कमाठीपुरा की टॉप की रंडियां हैं. चालीस पचास लोग रोज चोदते हैं उन दोनों को.
मेरी जबरदस्त चुदाई के बाद मैं बुरी तरह पस्त हो चुकी थी और मुझमें उठकर कपड़े पहनने की हिम्मत भी नहीं बची थी.
उन लोगों ने ही मुझे उठाया, साफ़ किया और कपड़े पहना कर टेक्सी की पिछली सीट पर बैठा दिया.
मेरी गांड दुःख रही थी लेकिन इस घमासान चुदाई में बहुत जबरदस्त मजा भी आया था और मेरे हर छेद में वीर्य के दरिये बह चुके थे जिसके बारे में सोच सोच कर मुझे बहुत मजा आ रहा था.
मैं मुस्कुराते हुए ड्राइवर से बोली- सोच रही हूँ लौटते समय भी ट्रैन की जगह टेक्सी ही कर लूँ. सफर का मजा तो टेक्सी में ही है.
अब छोटू का शरीर अकड़ने लगा और मैं समझ गई कि उसका पानी निकलने वाला है.
मैं उसका लंड मुंह से निकालने लगी तो छोटू ने मेरे हाथ पकड़ लिए और जोर जोर से मेरा मुंह चोदने लगा.
अचानक ही उसका पानी छूट गया और उसने अपने गरमागरम वीर्य की ना जाने कितनी पिचकारियां मेरे गले के अंदर उतार दीं.
मुझे उसका सारा वीर्य पीना पड़ा.
छोटू के हटते ही ड्राइवर और अब्दुल उठ गए और उन्होंने पोजीशन बदल ली.
ड्राइवर नीचे लेट गया और उसने मुझे अपने लंड पर बैठने को कहा.
मैं ड्राइवर के लंड पर बैठी तो गपाक से मेरी चूत ने ड्राइवर का सारा लंड निगल लिया.
अब मैं ड्राइवर के ऊपर उछलने लगी.
ड्राइवर का लंड मेरी बच्चेदानी से टकरा रहा था और मुझे गजब का मजा आ रहा था.
मैं हवस भरी आवाज में चिल्लाई- मेरी चूत को अपने वीर्य से भर दे सूअर. उतार दे अपना माल मेरे भोसड़े में.
तभी ड्राइवर का सफर भी पूरा होने को आया और उसका शरीर अकड़ने लगा.
उसका लंड फूल गया और मेरी चूत में एकदम गर्म लगने लगा.
मैं उसके गरमागरम लंड का मजा अपनी चूत में ले ही रही थी कि तभी ड्राइवर के लंड ने वीर्य की पिचकारियां मेरी चूत में छोड़ दीं.
मुझे इतना मजा आया कि मैं एक बार फिर चिल्ला उठी- आह, मजा आ गया. तेरे गर्म गर्म वीर्य ने मेरी चूत का बजा बजा कर रख दिया. और डाल साले, मुझे और वीर्य चाहिए अपनी चूत में.
फचाक फचाक करके ना जाने कितनी पिचकारियां उसके लंड से निकलीं और मेरी चूत को उसने वीर्य का तालाब बना दिया.
मैं ड्राइवर के लंड से उठी तो मेरी चूत से बहते हुए उसके वीर्य ने मेरी दोनों जांघों को गीला कर दिया.
मैंने देखा कि मेरी चूत का मुंह तो खुला का खुला रह गया था.
इस हरामजादे ने मेरी चूत का भोसड़ा बना कर रख दिया था.
अब्दुल हँसते हुए बोला- जब चुदाई शुरू की थी तो चूत थी लेकिन अब साली भोसड़ा बन चुकी है.
मैं बोली- सालों रंडी की औलादों, ऐसे भी कोई चोदता है क्या? अब मेरे बॉयफ्रैंड को क्या मुंह दिखाऊँगी?
अभी मैं उठ ही रही थी कि अब्दुल ने मुझे गर्दन पकड़ कर दबा दिया और घोड़ी बना दिया.
वो अपना लंड मेरी गांड पर फेरने लगा तो मैं घबरा उठी. मैंने उससे कहा- प्लीज चूत जितनी मारनी हो मार लो लेकिन गांड को बक्श दो.
लेकिन वो नहीं माना- शबनम जान, चूत तो भोसड़ा बन चुकी है. अब तो तेरी गांड मारकर ही मजा लेना पड़ेगा.
उसने अपनी एक उंगली थूक से गीली की और मेरी गांड में घुसा दी.
फिर उसने मेरी गांड में ढेर सारा थूका और अपनी दो उँगलियाँ अंदर घुसा दीं.
मुझे तेज दर्द हुआ पर अब्दुल ने अपनी उँगलियाँ मेरी गांड से निकाल कर उधर अपना लंड फंसा दिया.
अब धीरे धीरे उसने दबाव बनाया और घच्च से अपने लंड मेरी गांड में पेल दिया.
दर्द के मारे मेरी रुलाई छूट गई लेकिन उस हरामजादे पर कोई असर नहीं पड़ा. मेरे आंसुओं को नजरअंदाज करके वो मेरी गांड में अपना लंड हिलाता रहा.
कुछ देर उसने अपना लंड आगे पीछे किया तो मेरी गांड का छेद ढीला होने लगा और मेरा दर्द कुछ कम होने लगा.
अब उसने मेरी गांड चोदना शुरू किया और जोर जोर से धक्के मारने लगा.
अब मैं भी उसका साथ देने लगी थी.
वो धक्के मारता तो मैं भी अपनी गांड आगे पीछे करके जंगल सेक्स के मजे ले रही थी.
कुछ देर मुझे कुतिया की तरह चोदने के बाद उसने अपने धक्के तेज कर दिए.
मैं समझ गई कि इसका पानी छूटने वाला है.
मैकेनिक ने अपने धक्के तेज किये और जोरदार ताकत के साथ मेरी गांड में अपने गर्म गर्म वीर्य की पिचकारी छोड़ दी.
जैसे ही उसने अपना लंड बाहर निकाला तो मेरी गांड से वीर्य के साथ साथ खून का फव्वारा छूट गया.
इस रंडी के बच्चे ने सच में मेरी गांड फाड़ कर रख दी थी.
अब्दुल हँसते हुए बोला- अरे बाप रे, इसकी गांड में तो कुआं खुद गया है.
मैं रोते हुए उसको कोसने लगी- साले रंडी के बच्चे, तेरी अम्मी को सूअर चोदे, तेरी बहन को सारा बम्बई चोदे.
ड्राइवर हँसते हुए बोला- अरे शबनम जान, इसकी अम्मी और बहन तो कमाठीपुरा की टॉप की रंडियां हैं. चालीस पचास लोग रोज चोदते हैं उन दोनों को.
मेरी जबरदस्त चुदाई के बाद मैं बुरी तरह पस्त हो चुकी थी और मुझमें उठकर कपड़े पहनने की हिम्मत भी नहीं बची थी.
उन लोगों ने ही मुझे उठाया, साफ़ किया और कपड़े पहना कर टेक्सी की पिछली सीट पर बैठा दिया.
मेरी गांड दुःख रही थी लेकिन इस घमासान चुदाई में बहुत जबरदस्त मजा भी आया था और मेरे हर छेद में वीर्य के दरिये बह चुके थे जिसके बारे में सोच सोच कर मुझे बहुत मजा आ रहा था.
मैं मुस्कुराते हुए ड्राइवर से बोली- सोच रही हूँ लौटते समय भी ट्रैन की जगह टेक्सी ही कर लूँ. सफर का मजा तो टेक्सी में ही है.
अब उजाला होने लगा था और सूरज निकल आया था.
मुझे अहसास हुआ कि आज तो मैं सारी रात ही चुदती रही हूँ.
अब्दुल और छोटू लौटने लगे तो मैंने ड्राइवर से कहा- टेक्सी का क्या होगा?
ड्राइवर ने चाबी लगा कर घुमाई और टेक्सी स्टार्ट हो गई.
वह हँसते हुए बोला- शबनम जान, ये तो सब तुमको चोदने का बहाना था. चलो गोवा चलते हैं.
मैंने कहा- शेखर को तो आने दो.
ड्राइवर बोला- उसको भाड़ में जाने दो.
फिर हम लोग शेखर का इन्तजार किये बगैर ही गोवा की तरफ चल दिए.
तो ये थी मेरी मुंबई से गोवा तक की चुदाई भरी यात्रा जिसमें मैंने जंगल सेक्स का मजा लिया.
मुझे अहसास हुआ कि आज तो मैं सारी रात ही चुदती रही हूँ.
अब्दुल और छोटू लौटने लगे तो मैंने ड्राइवर से कहा- टेक्सी का क्या होगा?
ड्राइवर ने चाबी लगा कर घुमाई और टेक्सी स्टार्ट हो गई.
वह हँसते हुए बोला- शबनम जान, ये तो सब तुमको चोदने का बहाना था. चलो गोवा चलते हैं.
मैंने कहा- शेखर को तो आने दो.
ड्राइवर बोला- उसको भाड़ में जाने दो.
फिर हम लोग शेखर का इन्तजार किये बगैर ही गोवा की तरफ चल दिए.
तो ये थी मेरी मुंबई से गोवा तक की चुदाई भरी यात्रा जिसमें मैंने जंगल सेक्स का मजा लिया.
antarvasna:
फेसबुक पर मिली लड़की को होटल में XX....
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम अमोल है और मैं अहमदनगर शहर का निवासी हूं।
मेरी उम्र 28 साल है. मेरा रंग गोरा है और मेरी हाइट 5 फीट 6 इंच है. मेरे लंड का साइज 7 इंच है और इसकी मोटाई भी अच्छी है.
दोस्तो, यह कहानी है जब मे फेसबुक पर सेक्स कहानियाँ लिखता हु तब मुझे फेसबुक पर एक लड़की मिली जिसे मेरी कहानियाँ पसंद आयी थी जिसको मैंने उसके शहर में जाकर सेक्स का मजा दिया.
वैसे तो मेरी गर्लफ्रेंड से रह चुकी हैं और मैंने बहुत बार चुदाई की है पर यह लड़की मुझे लॉकडाउन के समय फेसबुक पर मिली जिसको मैंने होटल में चोदा !
दोस्तो, मैंने लॉकडाउन में भारी अंतर के चलते फेसबुक पर कहानियाँ लिखना शुरु किया।वहां मैंने अपनी सुंदर सुंदर फोटो लगा दी ताकि मेरी प्रोफाइल अच्छी लगे और अपने बारे में लिख दिया।
उसके बाद मेरी बहुत लड़कियों से बात हुई.
परंतु एक लड़की से बात हुई जोकि पुणे में रहती थी।
लड़की का नाम श्रेया था.
शुरू शुरू में हमारी नॉर्मल बातें हुई जैसे कि आप क्या करते हैं कहां रहते हैं।यह सब एक महीने तक चलता रहा.
उसके बाद हमारी थोड़ी बहुत नॉनवेज बातें होने लग गई और 1 महीने तक हम चुदाई की बातें भी करने लगे।
वह बहुत टाइम से सिंगल थी और लगभग 1 साल से चुदी नहीं थी.
पर मैंने तो मार्च में ही चुदाई की थी और मन तो मेरा भी बहुत कर रहा था किसी की चूत चोदने के लिए!
मेरा लंड हमेशा तैयार रहता था.
श्रेया का रंग गोरा था. उसकी हाइट 5 फुट 7 इंच के करीब थी, शरीर भरा हुआ था. उसके बूब्ज़ 36 इंच के थे और उसकी गांड उससे भी बड़ी 40 इंच की थी।
काम के चलते हम मिल नहीं सकते थे तो वह वीडियो कॉल कर मुझे अपनी चूची और अपनी गांड दिखाया करती थी और मैं उसे देखकर अपना लंड हिलाता था।
श्रेया शुरू से ही हॉट थी वह वीडियो कॉल पर भी अपनी चूत में उंगली करके मुझे दिखाती थी और अपनी चूत में उंगली करते हुए मुझे वीडियो भेजती थी।
हम दोनों एक दूसरे से चुदाई की बातें करके गर्म हो जाते थे और इंतजार कर रहे थे कि कब मिलकर एक दूसरे की आग बुझायें।
और बहुत सब्र करने के बाद वह दिन आया हम दोनों को मिलने का मौका मिला।
उसने उसके ही शहर में पुणे में एक होटल में रूम बुक किया.वह अपनी सहेली के घर रुकने का बहाना लगाकर मुझसे मिलने आई।उसे पता था कि आज हम पूरी रात चुदाई करने वाले हैं.
हमने होटल में एंट्री की और रूम में चले गए। अब हमारे पास पूरी रात थी।वहां जाकर हम ने चेंज किया और अपने नाइट सूट पहन लिए।वह अपने घर से ही पीने के लिए फ्लेवर्ड हुक्का लेकर आई थी। उसने सुलगाया और उसमें फ्लेवर डालकर करके कश लगाने लगी।फिर उसने एक बीयर मंगवाई और पूरी बीयर खत्म कर गई।
उसके बाद हमने खाना खाया और थोड़ी बहुत बातें की.
उसके बाद उसने एक बीयर और खत्म कर दी जिससे उसे नशा हो गया।और फिर उसने मुझे अपनी बांहों में ले लिया, मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर चूसने लगी।10 से 15 मिनट तक हम दोनों एक दूसरे के होंठ चूसते रहे और मैं उसकी गांड से खेलता रहा.हम दोनों गर्म होने लगे थे।
उससे बीयर चढ़ गई थी, उसने मेरी गर्दन पर अपने होंठ रख कर चूसना शुरू कर दिया और मैंने भी उसके गर्दन पर अपनी जीभ फेरने शुरू कर दी।गर्दन चूमते चूमते मेरे हाथ उसकी गर्दन पर चल रहे थे और मैं उसकी गांड दबा रहा था।इतने में मैंने उसे उल्टा घुमा कर उसकी गर्दन के पीछे किस करनी शुरू कर दी और दोनों हाथों से उसकी चूचियां दबाने शुरू कर दी.वो आहें भरने लगी और मेरा लंड टाइट होने लगा।उसने अपना हाथ पीछे करके मेरा लंड पकड़ लिया और मेरे लंड से खेलने लगी।उसके बाद वह वापस घूम गई और उसने मेरे होंठ चूसने शुरू कर दिये।
10 मिनट तक हमारी किस चली और उसके बाद मैंने उसकी चूचियां जोर जोर से दबाने शुरू कर दी.फिर मैंने उसकी टी-शर्ट को ऊपर कर दिया और ब्रा में से उसकी चूचियां दबाने लगा।उसके हाथ मेरी गर्दन पर थे और मैंने उसकी ब्रा उतार कर उसकी बाई तरफ वाली वाली चुची को अपने मुंह में भर लिया और उसके निप्पल चूसने लगा और साथ में अपने हाथ से दाईं तरफ वाली चूची को दबाने लगा।उसके मुंह से सिसकारियां निकल रही थी- आह अआह!
अभी तक हमें यह सब खड़े होकर कर रहे थे पर तब मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया. उसकी दोनों चूचियों को अपने मुंह में लेकर खेलने लगा. कभी मैं उसकी बायीं तरफ वाली वाली चूची को चूस रहा था और कभी दायीं तरफ वाली।फिर मैंने उसके पेट पर किस करना शुरू कर दिया और उसकी नाभि में जीभ डालने लगा.वो पागलों की तरह मेरे बालों में हाथ से रही थी।उसके पेट को चूमते हुए मैं उसकी नाभि में जीभ डालकर चाटने लगा और फिर दोबारा से मैंने उसकी चूचियां मुंह में डाल दी।
फिर मैंने नीचे जाकर उसका पजामा उतारा और उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को चूमने लगा।
उसकी चूत की खुशबू मुझे पागल कर रही थी।मैंने उसकी पैंटी उतारी और उसकी चूत को ऊपर से चाटने लगा।
फेसबुक पर मिली लड़की को होटल में XX....
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम अमोल है और मैं अहमदनगर शहर का निवासी हूं।
मेरी उम्र 28 साल है. मेरा रंग गोरा है और मेरी हाइट 5 फीट 6 इंच है. मेरे लंड का साइज 7 इंच है और इसकी मोटाई भी अच्छी है.
दोस्तो, यह कहानी है जब मे फेसबुक पर सेक्स कहानियाँ लिखता हु तब मुझे फेसबुक पर एक लड़की मिली जिसे मेरी कहानियाँ पसंद आयी थी जिसको मैंने उसके शहर में जाकर सेक्स का मजा दिया.
वैसे तो मेरी गर्लफ्रेंड से रह चुकी हैं और मैंने बहुत बार चुदाई की है पर यह लड़की मुझे लॉकडाउन के समय फेसबुक पर मिली जिसको मैंने होटल में चोदा !
दोस्तो, मैंने लॉकडाउन में भारी अंतर के चलते फेसबुक पर कहानियाँ लिखना शुरु किया।वहां मैंने अपनी सुंदर सुंदर फोटो लगा दी ताकि मेरी प्रोफाइल अच्छी लगे और अपने बारे में लिख दिया।
उसके बाद मेरी बहुत लड़कियों से बात हुई.
परंतु एक लड़की से बात हुई जोकि पुणे में रहती थी।
लड़की का नाम श्रेया था.
शुरू शुरू में हमारी नॉर्मल बातें हुई जैसे कि आप क्या करते हैं कहां रहते हैं।यह सब एक महीने तक चलता रहा.
उसके बाद हमारी थोड़ी बहुत नॉनवेज बातें होने लग गई और 1 महीने तक हम चुदाई की बातें भी करने लगे।
वह बहुत टाइम से सिंगल थी और लगभग 1 साल से चुदी नहीं थी.
पर मैंने तो मार्च में ही चुदाई की थी और मन तो मेरा भी बहुत कर रहा था किसी की चूत चोदने के लिए!
मेरा लंड हमेशा तैयार रहता था.
श्रेया का रंग गोरा था. उसकी हाइट 5 फुट 7 इंच के करीब थी, शरीर भरा हुआ था. उसके बूब्ज़ 36 इंच के थे और उसकी गांड उससे भी बड़ी 40 इंच की थी।
काम के चलते हम मिल नहीं सकते थे तो वह वीडियो कॉल कर मुझे अपनी चूची और अपनी गांड दिखाया करती थी और मैं उसे देखकर अपना लंड हिलाता था।
श्रेया शुरू से ही हॉट थी वह वीडियो कॉल पर भी अपनी चूत में उंगली करके मुझे दिखाती थी और अपनी चूत में उंगली करते हुए मुझे वीडियो भेजती थी।
हम दोनों एक दूसरे से चुदाई की बातें करके गर्म हो जाते थे और इंतजार कर रहे थे कि कब मिलकर एक दूसरे की आग बुझायें।
और बहुत सब्र करने के बाद वह दिन आया हम दोनों को मिलने का मौका मिला।
उसने उसके ही शहर में पुणे में एक होटल में रूम बुक किया.वह अपनी सहेली के घर रुकने का बहाना लगाकर मुझसे मिलने आई।उसे पता था कि आज हम पूरी रात चुदाई करने वाले हैं.
हमने होटल में एंट्री की और रूम में चले गए। अब हमारे पास पूरी रात थी।वहां जाकर हम ने चेंज किया और अपने नाइट सूट पहन लिए।वह अपने घर से ही पीने के लिए फ्लेवर्ड हुक्का लेकर आई थी। उसने सुलगाया और उसमें फ्लेवर डालकर करके कश लगाने लगी।फिर उसने एक बीयर मंगवाई और पूरी बीयर खत्म कर गई।
उसके बाद हमने खाना खाया और थोड़ी बहुत बातें की.
उसके बाद उसने एक बीयर और खत्म कर दी जिससे उसे नशा हो गया।और फिर उसने मुझे अपनी बांहों में ले लिया, मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर चूसने लगी।10 से 15 मिनट तक हम दोनों एक दूसरे के होंठ चूसते रहे और मैं उसकी गांड से खेलता रहा.हम दोनों गर्म होने लगे थे।
उससे बीयर चढ़ गई थी, उसने मेरी गर्दन पर अपने होंठ रख कर चूसना शुरू कर दिया और मैंने भी उसके गर्दन पर अपनी जीभ फेरने शुरू कर दी।गर्दन चूमते चूमते मेरे हाथ उसकी गर्दन पर चल रहे थे और मैं उसकी गांड दबा रहा था।इतने में मैंने उसे उल्टा घुमा कर उसकी गर्दन के पीछे किस करनी शुरू कर दी और दोनों हाथों से उसकी चूचियां दबाने शुरू कर दी.वो आहें भरने लगी और मेरा लंड टाइट होने लगा।उसने अपना हाथ पीछे करके मेरा लंड पकड़ लिया और मेरे लंड से खेलने लगी।उसके बाद वह वापस घूम गई और उसने मेरे होंठ चूसने शुरू कर दिये।
10 मिनट तक हमारी किस चली और उसके बाद मैंने उसकी चूचियां जोर जोर से दबाने शुरू कर दी.फिर मैंने उसकी टी-शर्ट को ऊपर कर दिया और ब्रा में से उसकी चूचियां दबाने लगा।उसके हाथ मेरी गर्दन पर थे और मैंने उसकी ब्रा उतार कर उसकी बाई तरफ वाली वाली चुची को अपने मुंह में भर लिया और उसके निप्पल चूसने लगा और साथ में अपने हाथ से दाईं तरफ वाली चूची को दबाने लगा।उसके मुंह से सिसकारियां निकल रही थी- आह अआह!
अभी तक हमें यह सब खड़े होकर कर रहे थे पर तब मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया. उसकी दोनों चूचियों को अपने मुंह में लेकर खेलने लगा. कभी मैं उसकी बायीं तरफ वाली वाली चूची को चूस रहा था और कभी दायीं तरफ वाली।फिर मैंने उसके पेट पर किस करना शुरू कर दिया और उसकी नाभि में जीभ डालने लगा.वो पागलों की तरह मेरे बालों में हाथ से रही थी।उसके पेट को चूमते हुए मैं उसकी नाभि में जीभ डालकर चाटने लगा और फिर दोबारा से मैंने उसकी चूचियां मुंह में डाल दी।
फिर मैंने नीचे जाकर उसका पजामा उतारा और उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को चूमने लगा।
उसकी चूत की खुशबू मुझे पागल कर रही थी।मैंने उसकी पैंटी उतारी और उसकी चूत को ऊपर से चाटने लगा।
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वो पागल हो गई और सिसकारियां भरने लगी- आह आह आह!उसने अपना मेरा मुंह अपनी चूत पर दबा दिया और अपनी कमर हिला कर अपनी चूत चटवाने लगी।उसके बाद हम 69 पोजीशन में आ गए और मैंने घूम कर अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया।
उसकी चूत चाटने में मुझे बहुत मजा आ रहा था और उसने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया।
वह बिल्कुल आइसक्रीम की तरह लंड चूस रही थी और पूरा लंड मुंह में अंदर बाहर कर रही थी।फिर उसने मेरे टट्टों पर जीभ फेरनी शुरू कर दी.मुझे बहुत मजा आने लगा और मैं उसके मुंह में झटके मारने लगा।
5 मिनट तक यही सब चलता रहा और वह झड़ गई.
मैं उसका सारा माल पी गया और उसके मुंह में अपने लंड के झटके मारता रहा।वो मस्ती में मेरा लंड चूस रही थी.
मेरा एक बार भी नहीं निकला था.5 मिनट और लंड चुसवाने के बाद मैं उसके ऊपर आ गया अब मैं अपना लंड उसकी चूत पर घिसने लगा.वह पागलों की तरह सिसकारियां ले रही थी।
तभी उसने मुझे बोला- जानू अब लंड अंदर डाल दो! मेरा बहुत मन कर रहा है.और उसने अपने आप से मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुंह पर रख दिया क्योंकि वह 1 साल से चुदी नहीं थी।मैंने धीरे से लंड अंदर डाला और उसके मुंह से आह निकल गई.उसने मुझे बोला- बेबी धीरे धीरे डालना।
मैंने उसकी दोनों टाँगों को खोलकर धीरे-धीरे लंड डालना शुरू किया आधा लंड डालकर मैंने झटके मारने शुरू किए।उसकी चूत गीली होने के कारण आधा लंड अंदर चला गया.लगभग 2 मिनट बाद थोड़ा सा दर्द होने के बाद वह पूरा लंड ले गई।एकदम से पूरा लंड अंदर जाते ही उसके मुंह से चीख निकली.
मैंने धीरे-धीरे अपनी कमर चलानी शुरू कर दी.
उसे मजा आने लगा और वह आह आह करने लगी.
मैंने अपनी कमर तेज तेज चलानी शुरू कर दी और हमारी ताबड़तोड़ चुदाई की शुरुआत हो चुकी थी।उसकी आवाज सुनकर मुझे जोश चढने लगा और मैंने जोर जोर से अपना लंड उसकी चूत में पेलना शुरू कर दिया।
अब उसके मुंह में से हल्की-हल्की चीख निकलने लगी।
मैंने उसकी दोनों टांगें उठा कर अपने कंधों पर रख ली और और पैरों के भार बैठकर कर उसकी चूत में अपना लंड पेलने लगा.साथ में मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियां दबानी शुरू कर दी।उसे और मजा आने लगा.
10 मिनट तक ऐसे चुदाई करने के बाद मैंने उसको घोड़ी बना दिया और पीछे से लंड डाला और साथ में उसकी चूचियां पकड़ ली उसको पीछे से चोदना शुरू कर दिया।
मैं बहुत तेज धक्के लगा रहा था जिस वजह से उसकी चीखें निकल रही थी.5 मिनट बाद वो झड़ गयी।पर मेरा माल अभी नहीं निकला था तो मैंने उसे चोदना जारी रखा.2 मिनट बाद वो बोली- मुझे दर्द हो रहा है।
इसलिए मैं नीचे आ गया और मैंने उसको अपने ऊपर बैठा लिया उसने ऊपर आकर अपनी चूत में लंड डाल लिया और ऊपर नीचे होने लगी।मैंने दोनों हाथों से उसकी चूचियां पकड़ ली और दबाने लगा।वह अपनी चूत मेरे लंड पर मार रही थी और मैंने नीचे से झटके मारने लगा।
5 मिनट मेरे लंड पर कूदने के बाद उसने आगे पीछे होकर लंड को लेना शुरू कर दिया।इस पोज में हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था.
थोड़ी देर ऐसे ही चुदाई करने के बाद मैंने उसे बेड से नीचे उतारा और उसको बेड पर झुका दिया और पीछे से लंड डालकर उसकी चुदाई शुरू कर दी।पांच मिनट बाद जब मेरा माल गिरने को आया तो मैंने उसको घुमा कर अपना लौड़ा उसके मुंह में दे दिया और अपनी कमर हिलाने लगा।एक-दो मिनट बाद मेरा सारा माल उसके मुंह में झड़ गया।वह मेरा लंड अपने मुंह से बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी पर मैंने पूरा लंड उसके मुंह में दे रखा था।इस वजह से मेरा सारा माल उसके गले से नीचे उतर गया।मैं संतुष्ट होकर बेड पर लेट गया।
वह बाथरूम में गई और जाकर अपनी चूत और मुंह को धोकर आई और आकर मुझे गले लगा कर कर लेट गई।
उसके बाद सारी रात हमने 4 बार और चुदाई की जिसमें से हमने एक बार सुबह जब वह वापस जाने लगी तो नहाते हुए चुदाई की।
उसे मेरे साथ चुदाई कर कर बहुत मजा आया.
उसकी चूत चाटने में मुझे बहुत मजा आ रहा था और उसने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया।
वह बिल्कुल आइसक्रीम की तरह लंड चूस रही थी और पूरा लंड मुंह में अंदर बाहर कर रही थी।फिर उसने मेरे टट्टों पर जीभ फेरनी शुरू कर दी.मुझे बहुत मजा आने लगा और मैं उसके मुंह में झटके मारने लगा।
5 मिनट तक यही सब चलता रहा और वह झड़ गई.
मैं उसका सारा माल पी गया और उसके मुंह में अपने लंड के झटके मारता रहा।वो मस्ती में मेरा लंड चूस रही थी.
मेरा एक बार भी नहीं निकला था.5 मिनट और लंड चुसवाने के बाद मैं उसके ऊपर आ गया अब मैं अपना लंड उसकी चूत पर घिसने लगा.वह पागलों की तरह सिसकारियां ले रही थी।
तभी उसने मुझे बोला- जानू अब लंड अंदर डाल दो! मेरा बहुत मन कर रहा है.और उसने अपने आप से मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुंह पर रख दिया क्योंकि वह 1 साल से चुदी नहीं थी।मैंने धीरे से लंड अंदर डाला और उसके मुंह से आह निकल गई.उसने मुझे बोला- बेबी धीरे धीरे डालना।
मैंने उसकी दोनों टाँगों को खोलकर धीरे-धीरे लंड डालना शुरू किया आधा लंड डालकर मैंने झटके मारने शुरू किए।उसकी चूत गीली होने के कारण आधा लंड अंदर चला गया.लगभग 2 मिनट बाद थोड़ा सा दर्द होने के बाद वह पूरा लंड ले गई।एकदम से पूरा लंड अंदर जाते ही उसके मुंह से चीख निकली.
मैंने धीरे-धीरे अपनी कमर चलानी शुरू कर दी.
उसे मजा आने लगा और वह आह आह करने लगी.
मैंने अपनी कमर तेज तेज चलानी शुरू कर दी और हमारी ताबड़तोड़ चुदाई की शुरुआत हो चुकी थी।उसकी आवाज सुनकर मुझे जोश चढने लगा और मैंने जोर जोर से अपना लंड उसकी चूत में पेलना शुरू कर दिया।
अब उसके मुंह में से हल्की-हल्की चीख निकलने लगी।
मैंने उसकी दोनों टांगें उठा कर अपने कंधों पर रख ली और और पैरों के भार बैठकर कर उसकी चूत में अपना लंड पेलने लगा.साथ में मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियां दबानी शुरू कर दी।उसे और मजा आने लगा.
10 मिनट तक ऐसे चुदाई करने के बाद मैंने उसको घोड़ी बना दिया और पीछे से लंड डाला और साथ में उसकी चूचियां पकड़ ली उसको पीछे से चोदना शुरू कर दिया।
मैं बहुत तेज धक्के लगा रहा था जिस वजह से उसकी चीखें निकल रही थी.5 मिनट बाद वो झड़ गयी।पर मेरा माल अभी नहीं निकला था तो मैंने उसे चोदना जारी रखा.2 मिनट बाद वो बोली- मुझे दर्द हो रहा है।
इसलिए मैं नीचे आ गया और मैंने उसको अपने ऊपर बैठा लिया उसने ऊपर आकर अपनी चूत में लंड डाल लिया और ऊपर नीचे होने लगी।मैंने दोनों हाथों से उसकी चूचियां पकड़ ली और दबाने लगा।वह अपनी चूत मेरे लंड पर मार रही थी और मैंने नीचे से झटके मारने लगा।
5 मिनट मेरे लंड पर कूदने के बाद उसने आगे पीछे होकर लंड को लेना शुरू कर दिया।इस पोज में हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था.
थोड़ी देर ऐसे ही चुदाई करने के बाद मैंने उसे बेड से नीचे उतारा और उसको बेड पर झुका दिया और पीछे से लंड डालकर उसकी चुदाई शुरू कर दी।पांच मिनट बाद जब मेरा माल गिरने को आया तो मैंने उसको घुमा कर अपना लौड़ा उसके मुंह में दे दिया और अपनी कमर हिलाने लगा।एक-दो मिनट बाद मेरा सारा माल उसके मुंह में झड़ गया।वह मेरा लंड अपने मुंह से बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी पर मैंने पूरा लंड उसके मुंह में दे रखा था।इस वजह से मेरा सारा माल उसके गले से नीचे उतर गया।मैं संतुष्ट होकर बेड पर लेट गया।
वह बाथरूम में गई और जाकर अपनी चूत और मुंह को धोकर आई और आकर मुझे गले लगा कर कर लेट गई।
उसके बाद सारी रात हमने 4 बार और चुदाई की जिसमें से हमने एक बार सुबह जब वह वापस जाने लगी तो नहाते हुए चुदाई की।
उसे मेरे साथ चुदाई कर कर बहुत मजा आया.
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Antarvasana story:
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम मधु है और वर्तमान में मेरी उम्र 46 साल की है.
मैं अपनी जो कहानी बताने जा रही हूं, वो आज से लगभग 27 साल पुरानी है.
उस वक्त मैं 19 साल की थी.
अभी तो मैं लखनऊ में रह रही हूं मगर शादी के पहले मैं एक छोटे से गांव में रहा करती थी.
जिंदगी में कोई भी व्यक्ति अपनी पहली चुदाई को कभी नहीं भूल सकता … चाहे वो मर्द हो या औरत.
वैसा ही मेरा भी हाल है. चाहकर भी मैं अपनी पहली चुदाई कभी नहीं भूल पाती.
वो मेरी चूतकी सील का टूटना और बेइंतहा दर्द, आज भी मुझे अच्छे से याद है.
जब मैं 22 साल की थी, तब मेरी शादी हुई थी. मगर उससे पहले मैंने चुदाई का इतना मजा लिया था कि शायद ही शादी के बाद वैसा मजा मिला हो.
शादी के बाद मैं लखनऊ में अपनी ससुराल में आ गई.
आज आप मेरी जिंदगी के उस हिस्से में चलिए, जब मैं गांव में अपने माता पिता के साथ रहा करती थी.
मेरे घर पर मेरे माता-पिता, मेरा बड़ा भाई, मेरी भाभी और मैं रहा करते थे.
मेरे पिता और भाई दोनों खेती का काम किया करते थे.
गांव में हम लोग काफी संपन्न लोगों में से थे.
मेरे भाई ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे मगर मेरी पढ़ाई के प्रति रुचि देख घर के लोग मुझे आगे पढ़ाना चाहते थे.
गांव में मेरी कुछ ही सहेलियां थीं, जिनकी पढ़ाई जारी थी.
हमारे गांव में केवल 10 वीं तक की शिक्षा के लिए स्कूल था. आगे की पढ़ाई के लिए हमें दूसरे गांव जाना पड़ता था, जो 5 किलोमीटर दूर था.
जब मैं 10 वीं में थी, तभी से मेरा बदन काफी भर गया था और गदराया हुआ दिखने लगा था.
उस समय के दीवाने मेरे पीछे लाइन लगा कर खड़े रहते थे.
गांव में जब मैं निकलती, तो चाहे मेरी उम्र के लड़के हों या शादीशुदा अधेड़ उम्र के आदमी हों, सभी की निगाह मेरे तने हुए बड़े बड़े चूचों पर … और मेरी उभरी हुई गांड पर टिक जाती थी.
मैं भी उस समय तक सब जानने समझने लगी थी कि वो लोग ऐसा क्या देखते थे.
औरत मर्द के बीच क्या संबंध बनाए जाते हैं, इन सबकी जानकारी मुझे हो गई थी.
घर में मेरे कमरे के बगल में ही मेरे भइया भाभी का कमरा था और अक्सर रात में मेरी भाभी की जोश से भरी हुई आहें मुझे सुनाई दिया करती थीं.
मेरे और भाभी के बीच हंसी मजाक चलता रहता था और उनके द्वारा ही मुझे काफी कुछ सीखने और जानने को मिला था.
उसके अलावा भी मेरी कुछ सहेलियां थीं, जिन्होंने चुदाई का खेल खेला हुआ था.
उनके द्वारा भी मुझे सब पता चलता रहता था.
रात में अक्सर मेरे दोनों हाथ मेरी चूत को सहलाया करते क्योंकि कहीं न कहीं अब मुझे भी किसी साथी की जरूरत महसूस होने लगी थी.
मैं दिखने में काफी सुंदर गोरी और भरे बदन की लड़की थी.
गांव के कई लड़के मेरे दीवाने थे मगर मुझे कोई पसंद नहीं आता था और गांव में जो मुझे अच्छा लगता था, उसकी शादी हो चुकी थी.
उसकी शादी हो जाने के बाद भी वो मुझे तिरछी नजरों से देखा करता था.
उस वक्त मैं अन्दर तक कामुक हो जाती थी और मेरी चूतमें चींटियां रेंगने लगती थीं.
उम्र में वो मुझसे करीब 15 साल बड़ा जरूर था मगर मन ही मन में वो मुझे काफी पसंद था.
उसका नाम किशोर था.
एक बार की बात है. वो होली का दिन था और हम सब सहेलियां होली खेलने के बाद नदी में नहाने के लिए गई हुई थीं.
हम लोगों ने थोड़ी बहुत भांग भी पी हुई थी. सब मस्ती कर रही थीं.
नदी में नहाने के बाद मेरी बाकी सहेलियां तो अपने घर चली गईं मगर मैं और मेरी एक अन्य सहेली ने कुछ और देर तक नदी में रुकने का मन बनाया.
नहाने के बाद हम दोनों वैसे ही गीले और भीगे हुए कपड़ों में नदी के किनारे रेत पर लेट गईं.
हमारे गीले कपड़े बदन से कुछ ऐसे चिपके हुए थे कि अन्दर का हर एक अंग साफ साफ झलक रहा था.
वैसे ही लेटे लेटे हम दोनों की आंख लग गई.
कुछ समय बाद अचानक से मेरी आंख खुली तो मैंने देखा कि मेरे सामने किशोर खड़ा हुआ था और मेरे बदन को निहार रहा था.
मैंने जल्दी से अपनी सहेली को उठाया और हम दोनों वहां से वापस घर की तरफ चल दिए.
आधे रास्ते पर मुझे याद आया कि मैं अपने सूखे कपड़े वहीं भूल आई थी.
मैंने अपनी सहेली को साथ चलने के लिए कहा, मगर वो नहीं गई.
मैं अकेली वापस नदी पर गई और देखा कि किशोर नहा रहा था.
मुझे दूर से ही देखकर वो नदी से निकल कर बाहर आ गया.
उस वक्त उसने केवल एक चड्डी पहनी हुई थी.
मेरी तिरछी नजर चड्डी में उसके तने हुए लंड पर जा रही थी.
मैंने चुपचाप अपने कपड़े उठाए और आने लगी.
तभी किशोर की आवाज आई- अरे कोई हमारे साथ भी तो नहा ले.
मैंने अपनी गर्दन पीछे की तरफ घुमाई और मुस्कुराते हुए उसे देखा और वहां से भाग आई.
किसी को पता नहीं चलेगा. ये बात केवल हम दोनों तक ही रहेगी. फिर तुमसे ज्यादा डर तो मुझे है. मेरी पहले से ही बीवी बच्चे हैं.
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम मधु है और वर्तमान में मेरी उम्र 46 साल की है.
मैं अपनी जो कहानी बताने जा रही हूं, वो आज से लगभग 27 साल पुरानी है.
उस वक्त मैं 19 साल की थी.
अभी तो मैं लखनऊ में रह रही हूं मगर शादी के पहले मैं एक छोटे से गांव में रहा करती थी.
जिंदगी में कोई भी व्यक्ति अपनी पहली चुदाई को कभी नहीं भूल सकता … चाहे वो मर्द हो या औरत.
वैसा ही मेरा भी हाल है. चाहकर भी मैं अपनी पहली चुदाई कभी नहीं भूल पाती.
वो मेरी चूतकी सील का टूटना और बेइंतहा दर्द, आज भी मुझे अच्छे से याद है.
जब मैं 22 साल की थी, तब मेरी शादी हुई थी. मगर उससे पहले मैंने चुदाई का इतना मजा लिया था कि शायद ही शादी के बाद वैसा मजा मिला हो.
शादी के बाद मैं लखनऊ में अपनी ससुराल में आ गई.
आज आप मेरी जिंदगी के उस हिस्से में चलिए, जब मैं गांव में अपने माता पिता के साथ रहा करती थी.
मेरे घर पर मेरे माता-पिता, मेरा बड़ा भाई, मेरी भाभी और मैं रहा करते थे.
मेरे पिता और भाई दोनों खेती का काम किया करते थे.
गांव में हम लोग काफी संपन्न लोगों में से थे.
मेरे भाई ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे मगर मेरी पढ़ाई के प्रति रुचि देख घर के लोग मुझे आगे पढ़ाना चाहते थे.
गांव में मेरी कुछ ही सहेलियां थीं, जिनकी पढ़ाई जारी थी.
हमारे गांव में केवल 10 वीं तक की शिक्षा के लिए स्कूल था. आगे की पढ़ाई के लिए हमें दूसरे गांव जाना पड़ता था, जो 5 किलोमीटर दूर था.
जब मैं 10 वीं में थी, तभी से मेरा बदन काफी भर गया था और गदराया हुआ दिखने लगा था.
उस समय के दीवाने मेरे पीछे लाइन लगा कर खड़े रहते थे.
गांव में जब मैं निकलती, तो चाहे मेरी उम्र के लड़के हों या शादीशुदा अधेड़ उम्र के आदमी हों, सभी की निगाह मेरे तने हुए बड़े बड़े चूचों पर … और मेरी उभरी हुई गांड पर टिक जाती थी.
मैं भी उस समय तक सब जानने समझने लगी थी कि वो लोग ऐसा क्या देखते थे.
औरत मर्द के बीच क्या संबंध बनाए जाते हैं, इन सबकी जानकारी मुझे हो गई थी.
घर में मेरे कमरे के बगल में ही मेरे भइया भाभी का कमरा था और अक्सर रात में मेरी भाभी की जोश से भरी हुई आहें मुझे सुनाई दिया करती थीं.
मेरे और भाभी के बीच हंसी मजाक चलता रहता था और उनके द्वारा ही मुझे काफी कुछ सीखने और जानने को मिला था.
उसके अलावा भी मेरी कुछ सहेलियां थीं, जिन्होंने चुदाई का खेल खेला हुआ था.
उनके द्वारा भी मुझे सब पता चलता रहता था.
रात में अक्सर मेरे दोनों हाथ मेरी चूत को सहलाया करते क्योंकि कहीं न कहीं अब मुझे भी किसी साथी की जरूरत महसूस होने लगी थी.
मैं दिखने में काफी सुंदर गोरी और भरे बदन की लड़की थी.
गांव के कई लड़के मेरे दीवाने थे मगर मुझे कोई पसंद नहीं आता था और गांव में जो मुझे अच्छा लगता था, उसकी शादी हो चुकी थी.
उसकी शादी हो जाने के बाद भी वो मुझे तिरछी नजरों से देखा करता था.
उस वक्त मैं अन्दर तक कामुक हो जाती थी और मेरी चूतमें चींटियां रेंगने लगती थीं.
उम्र में वो मुझसे करीब 15 साल बड़ा जरूर था मगर मन ही मन में वो मुझे काफी पसंद था.
उसका नाम किशोर था.
एक बार की बात है. वो होली का दिन था और हम सब सहेलियां होली खेलने के बाद नदी में नहाने के लिए गई हुई थीं.
हम लोगों ने थोड़ी बहुत भांग भी पी हुई थी. सब मस्ती कर रही थीं.
नदी में नहाने के बाद मेरी बाकी सहेलियां तो अपने घर चली गईं मगर मैं और मेरी एक अन्य सहेली ने कुछ और देर तक नदी में रुकने का मन बनाया.
नहाने के बाद हम दोनों वैसे ही गीले और भीगे हुए कपड़ों में नदी के किनारे रेत पर लेट गईं.
हमारे गीले कपड़े बदन से कुछ ऐसे चिपके हुए थे कि अन्दर का हर एक अंग साफ साफ झलक रहा था.
वैसे ही लेटे लेटे हम दोनों की आंख लग गई.
कुछ समय बाद अचानक से मेरी आंख खुली तो मैंने देखा कि मेरे सामने किशोर खड़ा हुआ था और मेरे बदन को निहार रहा था.
मैंने जल्दी से अपनी सहेली को उठाया और हम दोनों वहां से वापस घर की तरफ चल दिए.
आधे रास्ते पर मुझे याद आया कि मैं अपने सूखे कपड़े वहीं भूल आई थी.
मैंने अपनी सहेली को साथ चलने के लिए कहा, मगर वो नहीं गई.
मैं अकेली वापस नदी पर गई और देखा कि किशोर नहा रहा था.
मुझे दूर से ही देखकर वो नदी से निकल कर बाहर आ गया.
उस वक्त उसने केवल एक चड्डी पहनी हुई थी.
मेरी तिरछी नजर चड्डी में उसके तने हुए लंड पर जा रही थी.
मैंने चुपचाप अपने कपड़े उठाए और आने लगी.
तभी किशोर की आवाज आई- अरे कोई हमारे साथ भी तो नहा ले.
मैंने अपनी गर्दन पीछे की तरफ घुमाई और मुस्कुराते हुए उसे देखा और वहां से भाग आई.
किसी को पता नहीं चलेगा. ये बात केवल हम दोनों तक ही रहेगी. फिर तुमसे ज्यादा डर तो मुझे है. मेरी पहले से ही बीवी बच्चे हैं.
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मैंने उसकी तरफ मुस्कुरा कर देखा और अपना हाथ छुड़ाती हुई बोली- कल नदी के पास मिलना, तब मैं अपना जवाब बताऊंगी.
बस इतना कह कर मैं वहां से दौड़ती हुई भाग आई.
सारी रात मैं करवटें बदलती रही और उसकी बातों को सोचती रही कि क्या मैं सही कर रही हूँ या गलत.
मगर मेरी कुंवारी जवानी ने शायद मुझे बहका दिया और मैंने उसे हां करने का फैसला कर लिया.
अगले दिन स्कूल की छुट्टी थी और मैं घर पर ही थी.
घर के काम से फुर्सत होकर दोपहर करीब 3 बजे मैं अकेली ही नदी की तरफ चल दी.
किशोर पहले से ही वहां मौजूद था.
उस वक्त नदी के आसपास कोई भी नजर नहीं आ रहा था.
मुझे देखते ही किशोर मेरे पास आ गया और बोला- बताओ क्या सोचा तुमने?
मैं- सोचना क्या है, तुम भी मुझे पसंद हो … मगर ये बात कभी किसी को पता नहीं चलनी चाहिए.
वो- कभी नहीं चलेगी. मैं कभी किसी को नहीं बताऊंगा.
इतने में ही हमें किसी की आहट सुनाई दी.
किशोर ने झट से मेरा हाथ पकड़ा और मुझे नदी के किनारे टीले के बीच ले गया.
टीले के बीच एक दरार थी.
वहीं झाड़ियों में हम दोनों छुप गए. हमें वहां कोई नहीं देख सकता था.
उस वक्त किशोर मुझे अपने सीने से लगाए हुए था क्योंकि वो जगह काफी संकरी थी.
मैं भी किशोर से चिपकी हुई थी.
मेरे उभरे हुए दोनों दूध उसके सीने पर दबे जा रहे थे, मेरी सांस काफी तेज रफ्तार से चल रही थी.
हम दोनों बिल्कुल शांत होकर एक दूसरे की आंखों में देखे जा रहे थे.
मुझे काफी डर भी लग रहा था कि कहीं कोई देख न ले.
किशोर का चेहरा मेरे चेहरे के पास आता गया और ऐसे ही करते हुए उसने मेरे गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
वो मेरी जिंदगी का पहला चुम्बन था.
मेरे हाथ भी किशोर के बालों पर चलने लगे.
हम दोनों के बदन एक दूसरे से चिपक गए.
मेरे पेट के पास कुछ कठोर सा चीज चुभ रहा था. मैंने ध्यान दिया तो वो किशोर का तना हुआ लंड था.
मैंने कभी भी किसी मर्द का लंड नहीं देखा था.
उस वक्त भी उसका लंड उसके पैंट के अन्दर था, बस उसके पेट से छूने से लंड का अहसास हो रहा था.
देखते ही देखते किशोर का एक हाथ मेरी कमर से होता हुआ मेरे पिछवाड़े तक चला गया और वो मेरे चूतड़ों को सहलाने लगा.
मैंने तुरंत ही उसका हाथ पकड़ कर अलग कर दिया और उससे अलग हो गई.
मैं उस वक्त वो सब नहीं करना चाहती थी और उसने भी इस बात को समझते हुए कुछ नहीं किया.
उसके बाद कुछ समय बाद जब वहां कोई नहीं था तो हम लोग अपने अपने घर की तरफ चल दिए.
रात भर मेरे आंखों से नींद गायब थी और मैं अपने पहले चुम्बन के अहसास को याद करते हुए जागती रही.
दोस्तो, अब विलेज देसी सेक्स की कहानी के अगले भाग में आप मेरी पहली चुदाई पढ़ेंगे.
इसके अलावा भी मैंने किन किन लोगों के साथ बिस्तर पर चुदाई के मजे किए, ये सब कहानी के आने वाले भाग में आप पढ़ेंगे.
दोस्तो, मैं मधु एक बार फिर से आप सभी का अपनी सेक्स कहानी के अगले भाग में स्वागत करती हूँ.
कहानी के पहले भाग
में अभी तक आपने पढ़ा था कि जवानी में कदम रखते ही कैसे मैं अपने आप पर काबू नहीं रख पाई.
अपने बदन की गर्मी को शांत करने के लिए मैं किशोर के नजदीक आ गई थी.
किशोर मुझसे उम्र में 15 साल बड़ा होने के साथ साथ शादीशुदा मर्द था, मेरे तो अंकल जैसा था. और मैं अभी नई उम्र की गदराई हुई जवान लड़की थी.
उस दिन नदी के पास किशोर ने मेरे होंठों को चूमा था और मेरी गांड सहलाने लगा था. उसने में ही मैं उससे अपना हाथ छुड़ा कर अलग हो गई थी.
किशोर ने भी मेरी भावनाओं को समझा था और हम दोनों कुछ देर रुकने के बाद उधर से चले आए थे.
अब देसी बुर की पहली चुदाई में आगे चलते हैं और जानते हैं कि किस तरह से किशोर ने आपकी मधु की जवानी की प्यास बुझाई और किस तरह आपकी मधु चुदाई की इतनी दीवानी हो गई कि वो कई लोगों के साथ बिस्तर गर्म करने लगी.
दोस्तो, मैं जबसे किशोर से मिलकर आई और जबसे उसने मुझे चूमा था, तब से उस वक्त को याद करते हुए मेरी चड्डी से पानी निकल जाया करता.
मेरी चड्डी दिन में कई बार अपने आप ही गीली हो जाती थी.
उस चुम्बन वाली घटना को काफी दिन हो गए थे मगर मुझे किशोर से मिलने का कोई मौका नहीं मिल रहा था.
स्कूल जाते समय भी मेरी सहेलियां साथ में होती थीं. स्कूल के रास्ते में ही उसका खेत पड़ता था, जहां पर हम दोनों एक दूसरे को देख लिया करते थे.
दिन ऐसे ही गुजर रहे थे और करीब एक महीने बाद मेरी दोनों सहेलियों ने कुछ दिन के लिए स्कूल से छुट्टी ले ली.
बस यही मौका मुझे मिल गया और मैंने एक खत के माध्यम से किशोर को बताया कि मैं स्कूल अकेली जाऊंगी, इसलिए रास्ते में मुझसे मिल लेना.
वो भी शायद ऐसे ही मौके के इंतजार में था.
बस इतना कह कर मैं वहां से दौड़ती हुई भाग आई.
सारी रात मैं करवटें बदलती रही और उसकी बातों को सोचती रही कि क्या मैं सही कर रही हूँ या गलत.
मगर मेरी कुंवारी जवानी ने शायद मुझे बहका दिया और मैंने उसे हां करने का फैसला कर लिया.
अगले दिन स्कूल की छुट्टी थी और मैं घर पर ही थी.
घर के काम से फुर्सत होकर दोपहर करीब 3 बजे मैं अकेली ही नदी की तरफ चल दी.
किशोर पहले से ही वहां मौजूद था.
उस वक्त नदी के आसपास कोई भी नजर नहीं आ रहा था.
मुझे देखते ही किशोर मेरे पास आ गया और बोला- बताओ क्या सोचा तुमने?
मैं- सोचना क्या है, तुम भी मुझे पसंद हो … मगर ये बात कभी किसी को पता नहीं चलनी चाहिए.
वो- कभी नहीं चलेगी. मैं कभी किसी को नहीं बताऊंगा.
इतने में ही हमें किसी की आहट सुनाई दी.
किशोर ने झट से मेरा हाथ पकड़ा और मुझे नदी के किनारे टीले के बीच ले गया.
टीले के बीच एक दरार थी.
वहीं झाड़ियों में हम दोनों छुप गए. हमें वहां कोई नहीं देख सकता था.
उस वक्त किशोर मुझे अपने सीने से लगाए हुए था क्योंकि वो जगह काफी संकरी थी.
मैं भी किशोर से चिपकी हुई थी.
मेरे उभरे हुए दोनों दूध उसके सीने पर दबे जा रहे थे, मेरी सांस काफी तेज रफ्तार से चल रही थी.
हम दोनों बिल्कुल शांत होकर एक दूसरे की आंखों में देखे जा रहे थे.
मुझे काफी डर भी लग रहा था कि कहीं कोई देख न ले.
किशोर का चेहरा मेरे चेहरे के पास आता गया और ऐसे ही करते हुए उसने मेरे गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
वो मेरी जिंदगी का पहला चुम्बन था.
मेरे हाथ भी किशोर के बालों पर चलने लगे.
हम दोनों के बदन एक दूसरे से चिपक गए.
मेरे पेट के पास कुछ कठोर सा चीज चुभ रहा था. मैंने ध्यान दिया तो वो किशोर का तना हुआ लंड था.
मैंने कभी भी किसी मर्द का लंड नहीं देखा था.
उस वक्त भी उसका लंड उसके पैंट के अन्दर था, बस उसके पेट से छूने से लंड का अहसास हो रहा था.
देखते ही देखते किशोर का एक हाथ मेरी कमर से होता हुआ मेरे पिछवाड़े तक चला गया और वो मेरे चूतड़ों को सहलाने लगा.
मैंने तुरंत ही उसका हाथ पकड़ कर अलग कर दिया और उससे अलग हो गई.
मैं उस वक्त वो सब नहीं करना चाहती थी और उसने भी इस बात को समझते हुए कुछ नहीं किया.
उसके बाद कुछ समय बाद जब वहां कोई नहीं था तो हम लोग अपने अपने घर की तरफ चल दिए.
रात भर मेरे आंखों से नींद गायब थी और मैं अपने पहले चुम्बन के अहसास को याद करते हुए जागती रही.
दोस्तो, अब विलेज देसी सेक्स की कहानी के अगले भाग में आप मेरी पहली चुदाई पढ़ेंगे.
इसके अलावा भी मैंने किन किन लोगों के साथ बिस्तर पर चुदाई के मजे किए, ये सब कहानी के आने वाले भाग में आप पढ़ेंगे.
दोस्तो, मैं मधु एक बार फिर से आप सभी का अपनी सेक्स कहानी के अगले भाग में स्वागत करती हूँ.
कहानी के पहले भाग
में अभी तक आपने पढ़ा था कि जवानी में कदम रखते ही कैसे मैं अपने आप पर काबू नहीं रख पाई.
अपने बदन की गर्मी को शांत करने के लिए मैं किशोर के नजदीक आ गई थी.
किशोर मुझसे उम्र में 15 साल बड़ा होने के साथ साथ शादीशुदा मर्द था, मेरे तो अंकल जैसा था. और मैं अभी नई उम्र की गदराई हुई जवान लड़की थी.
उस दिन नदी के पास किशोर ने मेरे होंठों को चूमा था और मेरी गांड सहलाने लगा था. उसने में ही मैं उससे अपना हाथ छुड़ा कर अलग हो गई थी.
किशोर ने भी मेरी भावनाओं को समझा था और हम दोनों कुछ देर रुकने के बाद उधर से चले आए थे.
अब देसी बुर की पहली चुदाई में आगे चलते हैं और जानते हैं कि किस तरह से किशोर ने आपकी मधु की जवानी की प्यास बुझाई और किस तरह आपकी मधु चुदाई की इतनी दीवानी हो गई कि वो कई लोगों के साथ बिस्तर गर्म करने लगी.
दोस्तो, मैं जबसे किशोर से मिलकर आई और जबसे उसने मुझे चूमा था, तब से उस वक्त को याद करते हुए मेरी चड्डी से पानी निकल जाया करता.
मेरी चड्डी दिन में कई बार अपने आप ही गीली हो जाती थी.
उस चुम्बन वाली घटना को काफी दिन हो गए थे मगर मुझे किशोर से मिलने का कोई मौका नहीं मिल रहा था.
स्कूल जाते समय भी मेरी सहेलियां साथ में होती थीं. स्कूल के रास्ते में ही उसका खेत पड़ता था, जहां पर हम दोनों एक दूसरे को देख लिया करते थे.
दिन ऐसे ही गुजर रहे थे और करीब एक महीने बाद मेरी दोनों सहेलियों ने कुछ दिन के लिए स्कूल से छुट्टी ले ली.
बस यही मौका मुझे मिल गया और मैंने एक खत के माध्यम से किशोर को बताया कि मैं स्कूल अकेली जाऊंगी, इसलिए रास्ते में मुझसे मिल लेना.
वो भी शायद ऐसे ही मौके के इंतजार में था.
अगले दिन मैं स्कूल के लिए तैयार हुई और घर से सुबह सुबह निकल गई.
गांव के बाहर रास्ते में किशोर अपनी साईकल लेकर खड़ा हुआ था, उसने मुझे अपनी साईकल पर बैठाया और अपने खेत की तरफ चल दिया.
उसके खेत में एक घर बना हुआ था और हम दोनों वहीं चले गए.
कमरे के अन्दर एक बिस्तर बिछा हुआ था और उस घर के आगे और पीछे दोनों तरफ दरवाजा था.
किशोर ने आगे की तरफ ताला लगा दिया और पीछे के दरवाजे से अन्दर आ गया.
ऐसा उसने इसलिए किया ताकि किसी को पता न चले कि हम लोग घर के अन्दर थे.
किशोर ने मुझसे मेरा स्कूल बैग लेकर किनारे रख दिया और मेरा हाथ पकड़कर मुझे अपनी बांहों में खींच लिया.
मैं भी उसके सीने से चिपक गई और किशोर बिना रुके मेरे होंठों को चूमने लगा. मैं भी उसका साथ देते हुए अपनी जीभ निकालने लगी.
मुझे चूमते हुए उसने मेरी सलवार कमीज दोनों ही निकाल दीं और अपने भी कपड़े निकाल दिए.
मैं बस ब्रा और चड्डी में ही थी और किशोर भी केवल चड्डी में.
खड़े खड़े ही हम दोनों एक दूसरे के बदन से चिपक कर एक दूसरे को चूमते सहलाते रहे.
किशोर मेरी चड्डी के अन्दर हाथ डालकर मेरे बड़े बड़े चूतड़ों को सहलाता और दबाता जा रहा था.
मेरे उभरे और कठोर दूध किशोर के सीने से चिपक कर दबे जा रहे थे.
धीरे धीरे मैं गर्म होती जा रही थी और मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था.
किशोर भी मुझे बेइंतहा चूमता जा रहा था.
आज मेरे अन्दर शर्म, जैसे बची ही नहीं थी. मैं अपने आप को किशोर को सौंप चुकी थी.
किशोर का लंड भी चड्डी के अन्दर तनकर खड़ा हो गया था और मेरे पेट में नाभि को सहला रहा था.
लंबाई में मैं किशोर से कम ही थी और किशोर मुझसे लंबा होने के साथ साथ काफी हट्टा-कट्टा मर्द था.
किशोर अपने दोनों हाथों से मेरी पीठ, कमर के साथ साथ चूतड़ों को सहलाए जा रहा था.
फिर धीरे से उसने मेरी ब्रा के हुक को खोल दिया और मेरी ब्रा निकाल कर अलग कर दी.
मेरे दोनों दूध अब आजाद हो गए थे.
किशोर ने झुककर मेरे एक निप्पल को अपने मुँह में भर लिया और दूसरे दूध को अपने हाथों से सहलाते हुए हल्के हल्के दबाने लगा.
मुझे जिंदगी में पहली बार ऐसा मजा मिल रहा था.
मेरे मुँह से अपने आप ही आवाज निकलने लगी ‘ऊफ़्फ़ … ऊऊईई … उम्म … आह …’
उसके हाथों में मेरा एक दूध पूरी तरह से समा नहीं रहा था. उसके कठोर हाथों से दबते हुए मेरा दूध दर्द करने लगा और दूसरे दूध को वो अपनी खुरदरी जीभ से ऐसे चाट रहा था कि निप्पल बिल्कुल तन गया था.
मेरे गोरे गोरे दूध पर उसके मुँह की लार फैल गई थी.
उसने बारी बारी से दोनों निप्पल को बड़े प्यार से चूमते हुए दोनों ही चूचों को जमकर दबाया.
उसको शायद मेरे बड़े बड़े दूध ज्यादा ही पसंद आ रहे थे.
मैं भी उसके सर को अपने दोनों हाथों से जकड़ कर अपने दूध पर दबाती जा रही थी.
मेरा पूरा बदन उसके चूमने से कांपने लगा था. मुझे बेइंतहा मजा आ रहा था.
पहली बार किसी मर्द का स्पर्श पाकर मेरा रोम रोम खिल उठा था.
मेरे जिस अंग पर उसका हाथ पड़ता, वहां के रोम अपने आप खड़े होते जा रहे थे.
उसे मेरे दूध चूमने और मसलने में इतना मजा आ रहा था और वो इतने जोश में आ गया था कि मेरी गांड पकड़ कर मुझे अपनी तरफ खींच रहा था.
तभी उसने मुझे इतनी जोर से दबा लिया था कि मुझे दर्द होने लगा.
काफी देर तक वो मेरे दोनों मम्मों के साथ मजे लेता रहा.
मैं बहुत ज्यादा गर्म और जोश में आ गई थी. मेरी चड्डी आगे की तरफ से पूरी तरह से गीली हो चुकी थी.
आज इतने दिनों की मेरी मुराद पूरी हो रही थी. जिस चुदाई के बारे में मैं सोचा करती थी, आज वो मुझे मिलने वाली थी.
मेरा पहला अनुभव ही था मगर मेरे अन्दर की प्यासी औरत पूरी तरह से जाग उठी थी.
मैं इतनी गर्म हो गई थी कि पूरा कमरा मेरी कामुक आवाजों से गूंज रहा था.
करीब आधा घंटा तक मेरे मम्मे निचोड़ने के बाद किशोर ने मुझे अलग कर दिया.
उसने मुझे पास में बिछे बिस्तर पर लेटा दिया और तुरंत मेरे ऊपर चढ़ गया.
मेरे ऊपर आते ही उसने मेरी जांघों की तरफ से मुझे चूमना शुरू कर दिया.
मेरी मोटी मोटी चिकनी जांघों को सहलाते और चूमते हुए मेरी चड्डी के ऊपर से ही उसने मेरी चूत को चूमा और फिर मेरे पेट के पास आकर मेरी गहरी नाभि में अपना जीभ डालकर चूमने लगा.
वो सच में चुदाई का एक माहिर खिलाड़ी था.
उसने अपनी चड्डी निकाल दी और पहली बार मैंने किसी मर्द के लंड के दर्शन किए.
बिल्कुल काला मोटा और करीब 6 इंच लंबा किसी काले नाग की तरह उसका लंड मेरी आंखों के सामने लहरा रहा था.
किशोर ने अपने लंड को सहलाते हुए आगे पीछे किया और उसका बड़ा सा गहरे गुलाबी रंग का सुपारा बाहर निकल आया.
मैं बड़े गौर से उसके लंड को देखे जा रही थी.
गांव के बाहर रास्ते में किशोर अपनी साईकल लेकर खड़ा हुआ था, उसने मुझे अपनी साईकल पर बैठाया और अपने खेत की तरफ चल दिया.
उसके खेत में एक घर बना हुआ था और हम दोनों वहीं चले गए.
कमरे के अन्दर एक बिस्तर बिछा हुआ था और उस घर के आगे और पीछे दोनों तरफ दरवाजा था.
किशोर ने आगे की तरफ ताला लगा दिया और पीछे के दरवाजे से अन्दर आ गया.
ऐसा उसने इसलिए किया ताकि किसी को पता न चले कि हम लोग घर के अन्दर थे.
किशोर ने मुझसे मेरा स्कूल बैग लेकर किनारे रख दिया और मेरा हाथ पकड़कर मुझे अपनी बांहों में खींच लिया.
मैं भी उसके सीने से चिपक गई और किशोर बिना रुके मेरे होंठों को चूमने लगा. मैं भी उसका साथ देते हुए अपनी जीभ निकालने लगी.
मुझे चूमते हुए उसने मेरी सलवार कमीज दोनों ही निकाल दीं और अपने भी कपड़े निकाल दिए.
मैं बस ब्रा और चड्डी में ही थी और किशोर भी केवल चड्डी में.
खड़े खड़े ही हम दोनों एक दूसरे के बदन से चिपक कर एक दूसरे को चूमते सहलाते रहे.
किशोर मेरी चड्डी के अन्दर हाथ डालकर मेरे बड़े बड़े चूतड़ों को सहलाता और दबाता जा रहा था.
मेरे उभरे और कठोर दूध किशोर के सीने से चिपक कर दबे जा रहे थे.
धीरे धीरे मैं गर्म होती जा रही थी और मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था.
किशोर भी मुझे बेइंतहा चूमता जा रहा था.
आज मेरे अन्दर शर्म, जैसे बची ही नहीं थी. मैं अपने आप को किशोर को सौंप चुकी थी.
किशोर का लंड भी चड्डी के अन्दर तनकर खड़ा हो गया था और मेरे पेट में नाभि को सहला रहा था.
लंबाई में मैं किशोर से कम ही थी और किशोर मुझसे लंबा होने के साथ साथ काफी हट्टा-कट्टा मर्द था.
किशोर अपने दोनों हाथों से मेरी पीठ, कमर के साथ साथ चूतड़ों को सहलाए जा रहा था.
फिर धीरे से उसने मेरी ब्रा के हुक को खोल दिया और मेरी ब्रा निकाल कर अलग कर दी.
मेरे दोनों दूध अब आजाद हो गए थे.
किशोर ने झुककर मेरे एक निप्पल को अपने मुँह में भर लिया और दूसरे दूध को अपने हाथों से सहलाते हुए हल्के हल्के दबाने लगा.
मुझे जिंदगी में पहली बार ऐसा मजा मिल रहा था.
मेरे मुँह से अपने आप ही आवाज निकलने लगी ‘ऊफ़्फ़ … ऊऊईई … उम्म … आह …’
उसके हाथों में मेरा एक दूध पूरी तरह से समा नहीं रहा था. उसके कठोर हाथों से दबते हुए मेरा दूध दर्द करने लगा और दूसरे दूध को वो अपनी खुरदरी जीभ से ऐसे चाट रहा था कि निप्पल बिल्कुल तन गया था.
मेरे गोरे गोरे दूध पर उसके मुँह की लार फैल गई थी.
उसने बारी बारी से दोनों निप्पल को बड़े प्यार से चूमते हुए दोनों ही चूचों को जमकर दबाया.
उसको शायद मेरे बड़े बड़े दूध ज्यादा ही पसंद आ रहे थे.
मैं भी उसके सर को अपने दोनों हाथों से जकड़ कर अपने दूध पर दबाती जा रही थी.
मेरा पूरा बदन उसके चूमने से कांपने लगा था. मुझे बेइंतहा मजा आ रहा था.
पहली बार किसी मर्द का स्पर्श पाकर मेरा रोम रोम खिल उठा था.
मेरे जिस अंग पर उसका हाथ पड़ता, वहां के रोम अपने आप खड़े होते जा रहे थे.
उसे मेरे दूध चूमने और मसलने में इतना मजा आ रहा था और वो इतने जोश में आ गया था कि मेरी गांड पकड़ कर मुझे अपनी तरफ खींच रहा था.
तभी उसने मुझे इतनी जोर से दबा लिया था कि मुझे दर्द होने लगा.
काफी देर तक वो मेरे दोनों मम्मों के साथ मजे लेता रहा.
मैं बहुत ज्यादा गर्म और जोश में आ गई थी. मेरी चड्डी आगे की तरफ से पूरी तरह से गीली हो चुकी थी.
आज इतने दिनों की मेरी मुराद पूरी हो रही थी. जिस चुदाई के बारे में मैं सोचा करती थी, आज वो मुझे मिलने वाली थी.
मेरा पहला अनुभव ही था मगर मेरे अन्दर की प्यासी औरत पूरी तरह से जाग उठी थी.
मैं इतनी गर्म हो गई थी कि पूरा कमरा मेरी कामुक आवाजों से गूंज रहा था.
करीब आधा घंटा तक मेरे मम्मे निचोड़ने के बाद किशोर ने मुझे अलग कर दिया.
उसने मुझे पास में बिछे बिस्तर पर लेटा दिया और तुरंत मेरे ऊपर चढ़ गया.
मेरे ऊपर आते ही उसने मेरी जांघों की तरफ से मुझे चूमना शुरू कर दिया.
मेरी मोटी मोटी चिकनी जांघों को सहलाते और चूमते हुए मेरी चड्डी के ऊपर से ही उसने मेरी चूत को चूमा और फिर मेरे पेट के पास आकर मेरी गहरी नाभि में अपना जीभ डालकर चूमने लगा.
वो सच में चुदाई का एक माहिर खिलाड़ी था.
उसने अपनी चड्डी निकाल दी और पहली बार मैंने किसी मर्द के लंड के दर्शन किए.
बिल्कुल काला मोटा और करीब 6 इंच लंबा किसी काले नाग की तरह उसका लंड मेरी आंखों के सामने लहरा रहा था.
किशोर ने अपने लंड को सहलाते हुए आगे पीछे किया और उसका बड़ा सा गहरे गुलाबी रंग का सुपारा बाहर निकल आया.
मैं बड़े गौर से उसके लंड को देखे जा रही थी.
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उसने मेरे दोनों घुटनों को पकड़ा और मेरे पैर फैलाते हुए मेरे ऊपर लेट गया.
उसका लंड बिल्कुल मेरी चूत के ऊपर आ गया.
मैं किशोर से लंबाई में कम थी इसलिए मेरा चेहरा उसके सीने से चिपक गया.
किशोर ने अपने एक हाथ से लंड को चूत पर सैट किया और दोनों हाथों को मेरी पीठ के नीचे ले जाकर मुझे कसकर जकड़ लिया.
अब किशोर ने अपनी कमर से हल्का हल्का दवाब देना शुरू कर दिया था.
मुझे पूरा अहसास हो रहा था कि लंड का सुपारा मेरी चूत की लाइन को फैला रहा है और अब वो चूत के छेद के पास आ गया था.
उसके बाद जैसे ही सुपारा छेद में जाने को हुआ, मुझे ऐसा लगा जैसे कोई रेजर ब्लेड से मेरी चूत को खोल रहा हो. बड़ा अजीब सा दर्द हुआ.
किशोर बहुत ही आराम से लंड डाल रहा था.
धीरे धीरे मेरी चूत का छेद खुलना शुरू हो गया था.
जैसे ही सुपारा छेद में घुसा, मेरा दर्द बढ़ने लगा और मेरे पैर कांपने लगे.
किशोर भी जोर लगा रहा था मगर लंड अन्दर नहीं जा रहा था.
फिर किशोर अपने सुपारे को ही अन्दर बाहर करने लगा.
कुछ समय बाद जब मेरी चूत ज्यादा गीली हो गई, तब उसने मेरे कान में कहा- थोड़ा दर्द सहना मेरी जान … उसके बाद मजा ही मजा आएगा.
इतना कहने के बाद उसने मेरी पीठ दोनों हाथ से थाम ली और मुझे जकड़कर एक जोरदार धक्का लगा दिया.
‘ऊऊईई ईईईई मांआआ मर गईई …. उई ईईई … मेर फट गई … आह छोड़ दे मुझे … आह मुझे नहीं करना …’
इतना दर्द हो रहा था कि बयान करना मुश्किल है.
उधर उसका लंड चूत को चीरता हुआ मेरे अन्दर तक चला गया था.
चूत में लंड पूरी तरह से धंस गया था, हवा तक नहीं जा सकती थी.
मैं उठी और अपनी चड्डी तलाश करने लगी.
मैंने भी बैठे बैठे अपनी चूत देखी, उसमें भी बहुत सारा झाग और उसमे हल्का खून लगा हुआ था.
मैंने अपनी चड्डी से चूत को साफ किया और जैसे ही मैंने अपनी चड्डी पहननी चाही, किशोर ने मेरा हाथ पकड़ लिया और लेटे लेटे ही मुझे अपनी बांहों में खींच लिया.
उसने मुझे अपने ऊपर लिटा लिया और मेरी पीठ सहलाते हुए बोला- अभी इतनी जल्दी क्या है तुमको? आज तो स्कूल भी नहीं जाना है. अब तो शाम तक तुम मेरे पास ही रहोगी, फ़िर कपड़े पहनने की जरूरत क्या है?
ऐसा बोलते हुए उसने मेरे चूतड़ को दोनों हाथों से दबाना शुरू कर दिया.
उसने मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया और दोनों हाथों से मेरी गांड फैला कर अपनी एक उंगली से मेरी गांड के छेद को रगड़ने लगा.
उसके बाद वैसे ही मुझे अपने ऊपर लिटाए हुए अपनी उंगली मेरी चूत में डाल दी और हल्के हल्के अन्दर बाहर करने लगा.
कुछ ही पल में मैं एक बार फिर से गर्म हो चुकी थी और उसका लंड भी दुबारा खड़ा हो गया था.
वैसे ही मुझे अपने ऊपर लिटाए हुए उसने अपना पूरा लंड मेरी चूत में पेल दिया और नीचे से धक्के लगाने लगा.
बहुत देर तक ऐसे ही चोदने के बाद उसने मुझे घुटनों पर आने के लिए कहा और मैं अपने घुटनों पर होकर घोड़ी बन गई.
उसने मेरे पीछे आकर मेरी चूत में अपना पूरा लंड डाल दिया.
उस पोजिशन में मेरी चूत और भी टाइट लग रही थी.
उसने दनादन धक्के लगाना शुरू कर दिए और उसके धक्के लगाने से मेरे चूतड़ से फट फट की जोरदार आवाज आने लगी.
सारा कमरा हमारी चुदाई की आवाज से गूंज उठा.
मैं झुकी हुई चुदाई करवा रही थी और उस पोजीशन में मेरे दोनों दूध नीचे लटक रहे थे.
उसने अपने दोनों हाथ आगे करते हुए मेरे दोनों मम्मों को अपने हाथों में भर लिए और जोर से दबाते हुए मेरी जोरदार चुदाई करने लगा.
उसके बाद उसने मुझे अपनी गोद में लेकर मेरी चुदाई की.
उस बार हमारी चुदाई करीब आधा घंटा तक चली.
फिर हम दोनों ही झड़ कर बिस्तर पर लेट गए.
इसी तरह शाम के 4 बजे तक उसने मुझे 4 बार चोदा और स्कूल के बंद होने के समय के साथ ही मैं वहां से निकलकर घर आ गई.
मैं अपनी पहली चुदाई से इतना थक चुकी थी कि घर आकर मैंने खाना खाया और चुपचाप सो गई.
अगली सुबह जब मेरी नींद खुली तो मेरी चूत में काफी दर्द था.
मुझे हल्का बुखार भी था.
बाथरूम में जाकर जब मैंने देखा तो चूत काफी सूजी हुई थी.
उस दिन मैं स्कूल भी नहीं गई और सारा दिन आराम करती रही.
उसके बाद दोस्तो, हम दोनों का मिलना जारी रहा.
जब भी हम दोनों को मौका मिलता, हम चुदाई का पूरा मजा लेते.
वो मुझे गर्भनिरोधक दवा भी देता रहा, जिससे मैं हमल से न हो जाऊं.
मुझे चुदाई का ऐसा नशा चढ़ गया था कि अगर हम दोनों को कुछ देर का भी समय मिल जाता, जैसे नदी के पास या स्कूल जाते या आते समय तो जल्दी से नीचे से चड्डी सरका कर चुदाई कर लेते.
कुछ ही दिन में मैं चुदाई की इतनी आदी हो गई थी कि रात में घर वालों के सोने के बाद मैं अकेली ही छुपते हुए उसके खेत में चली जाती और रात भर उसके साथ रहती.
उसका लंड बिल्कुल मेरी चूत के ऊपर आ गया.
मैं किशोर से लंबाई में कम थी इसलिए मेरा चेहरा उसके सीने से चिपक गया.
किशोर ने अपने एक हाथ से लंड को चूत पर सैट किया और दोनों हाथों को मेरी पीठ के नीचे ले जाकर मुझे कसकर जकड़ लिया.
अब किशोर ने अपनी कमर से हल्का हल्का दवाब देना शुरू कर दिया था.
मुझे पूरा अहसास हो रहा था कि लंड का सुपारा मेरी चूत की लाइन को फैला रहा है और अब वो चूत के छेद के पास आ गया था.
उसके बाद जैसे ही सुपारा छेद में जाने को हुआ, मुझे ऐसा लगा जैसे कोई रेजर ब्लेड से मेरी चूत को खोल रहा हो. बड़ा अजीब सा दर्द हुआ.
किशोर बहुत ही आराम से लंड डाल रहा था.
धीरे धीरे मेरी चूत का छेद खुलना शुरू हो गया था.
जैसे ही सुपारा छेद में घुसा, मेरा दर्द बढ़ने लगा और मेरे पैर कांपने लगे.
किशोर भी जोर लगा रहा था मगर लंड अन्दर नहीं जा रहा था.
फिर किशोर अपने सुपारे को ही अन्दर बाहर करने लगा.
कुछ समय बाद जब मेरी चूत ज्यादा गीली हो गई, तब उसने मेरे कान में कहा- थोड़ा दर्द सहना मेरी जान … उसके बाद मजा ही मजा आएगा.
इतना कहने के बाद उसने मेरी पीठ दोनों हाथ से थाम ली और मुझे जकड़कर एक जोरदार धक्का लगा दिया.
‘ऊऊईई ईईईई मांआआ मर गईई …. उई ईईई … मेर फट गई … आह छोड़ दे मुझे … आह मुझे नहीं करना …’
इतना दर्द हो रहा था कि बयान करना मुश्किल है.
उधर उसका लंड चूत को चीरता हुआ मेरे अन्दर तक चला गया था.
चूत में लंड पूरी तरह से धंस गया था, हवा तक नहीं जा सकती थी.
मैं उठी और अपनी चड्डी तलाश करने लगी.
मैंने भी बैठे बैठे अपनी चूत देखी, उसमें भी बहुत सारा झाग और उसमे हल्का खून लगा हुआ था.
मैंने अपनी चड्डी से चूत को साफ किया और जैसे ही मैंने अपनी चड्डी पहननी चाही, किशोर ने मेरा हाथ पकड़ लिया और लेटे लेटे ही मुझे अपनी बांहों में खींच लिया.
उसने मुझे अपने ऊपर लिटा लिया और मेरी पीठ सहलाते हुए बोला- अभी इतनी जल्दी क्या है तुमको? आज तो स्कूल भी नहीं जाना है. अब तो शाम तक तुम मेरे पास ही रहोगी, फ़िर कपड़े पहनने की जरूरत क्या है?
ऐसा बोलते हुए उसने मेरे चूतड़ को दोनों हाथों से दबाना शुरू कर दिया.
उसने मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया और दोनों हाथों से मेरी गांड फैला कर अपनी एक उंगली से मेरी गांड के छेद को रगड़ने लगा.
उसके बाद वैसे ही मुझे अपने ऊपर लिटाए हुए अपनी उंगली मेरी चूत में डाल दी और हल्के हल्के अन्दर बाहर करने लगा.
कुछ ही पल में मैं एक बार फिर से गर्म हो चुकी थी और उसका लंड भी दुबारा खड़ा हो गया था.
वैसे ही मुझे अपने ऊपर लिटाए हुए उसने अपना पूरा लंड मेरी चूत में पेल दिया और नीचे से धक्के लगाने लगा.
बहुत देर तक ऐसे ही चोदने के बाद उसने मुझे घुटनों पर आने के लिए कहा और मैं अपने घुटनों पर होकर घोड़ी बन गई.
उसने मेरे पीछे आकर मेरी चूत में अपना पूरा लंड डाल दिया.
उस पोजिशन में मेरी चूत और भी टाइट लग रही थी.
उसने दनादन धक्के लगाना शुरू कर दिए और उसके धक्के लगाने से मेरे चूतड़ से फट फट की जोरदार आवाज आने लगी.
सारा कमरा हमारी चुदाई की आवाज से गूंज उठा.
मैं झुकी हुई चुदाई करवा रही थी और उस पोजीशन में मेरे दोनों दूध नीचे लटक रहे थे.
उसने अपने दोनों हाथ आगे करते हुए मेरे दोनों मम्मों को अपने हाथों में भर लिए और जोर से दबाते हुए मेरी जोरदार चुदाई करने लगा.
उसके बाद उसने मुझे अपनी गोद में लेकर मेरी चुदाई की.
उस बार हमारी चुदाई करीब आधा घंटा तक चली.
फिर हम दोनों ही झड़ कर बिस्तर पर लेट गए.
इसी तरह शाम के 4 बजे तक उसने मुझे 4 बार चोदा और स्कूल के बंद होने के समय के साथ ही मैं वहां से निकलकर घर आ गई.
मैं अपनी पहली चुदाई से इतना थक चुकी थी कि घर आकर मैंने खाना खाया और चुपचाप सो गई.
अगली सुबह जब मेरी नींद खुली तो मेरी चूत में काफी दर्द था.
मुझे हल्का बुखार भी था.
बाथरूम में जाकर जब मैंने देखा तो चूत काफी सूजी हुई थी.
उस दिन मैं स्कूल भी नहीं गई और सारा दिन आराम करती रही.
उसके बाद दोस्तो, हम दोनों का मिलना जारी रहा.
जब भी हम दोनों को मौका मिलता, हम चुदाई का पूरा मजा लेते.
वो मुझे गर्भनिरोधक दवा भी देता रहा, जिससे मैं हमल से न हो जाऊं.
मुझे चुदाई का ऐसा नशा चढ़ गया था कि अगर हम दोनों को कुछ देर का भी समय मिल जाता, जैसे नदी के पास या स्कूल जाते या आते समय तो जल्दी से नीचे से चड्डी सरका कर चुदाई कर लेते.
कुछ ही दिन में मैं चुदाई की इतनी आदी हो गई थी कि रात में घर वालों के सोने के बाद मैं अकेली ही छुपते हुए उसके खेत में चली जाती और रात भर उसके साथ रहती.
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सुबह होने के पहले वापस घर आ जाती.
हम दोनों का प्यार बस चुदाई तक ही सीमित रह गया था. हम दोनों एक दूसरे से चुदाई के लिए बेताब रहते थे.
फिर जल्द ही उसने मेरी गांड भी चोद डाली.
शायद ही ऐसा कोई आसन बचा होगा, जिसमें हम लोगों ने चुदाई न की हो.
किशोर ने मुझे बताया कि उसकी बीवी चुदाई में बिल्कुल ठंडी थी और उसको चुदाई में कोई भी दिलचस्पी नहीं थी इसलिए उसे मैं ही पसंद आती थी क्योंकि मैं उसका भरपूर सहयोग करती हूँ.
दोस्तो, ये थी मेरी देसी बुर की पहली चुदाईपहली चुदाई की कहानी!
मगर अभी कहानी खत्म नहीं हुई है. किशोर से चुदाई करवाने की मुझे इतनी बुरी लत लग गई थी कि उसके कारण ही मेरे साथ एक बार ऐसी घटना घट गई कि मुझे दूसरे लोगों से भी चुदना पड़ गया.
वो मैं आपको अगली कहानी में बताऊंगी.
कैसे मेरी जिंदगी में वो घटना घटी कि मुझे एक साथ तीन लोगों ने मिलकर चोदा … और उसके बाद जब तक मेरी शादी नहीं हुई, तब तक मैं लगभग रोज किसी न किसी से चुदती ही रही.
हम दोनों का प्यार बस चुदाई तक ही सीमित रह गया था. हम दोनों एक दूसरे से चुदाई के लिए बेताब रहते थे.
फिर जल्द ही उसने मेरी गांड भी चोद डाली.
शायद ही ऐसा कोई आसन बचा होगा, जिसमें हम लोगों ने चुदाई न की हो.
किशोर ने मुझे बताया कि उसकी बीवी चुदाई में बिल्कुल ठंडी थी और उसको चुदाई में कोई भी दिलचस्पी नहीं थी इसलिए उसे मैं ही पसंद आती थी क्योंकि मैं उसका भरपूर सहयोग करती हूँ.
दोस्तो, ये थी मेरी देसी बुर की पहली चुदाईपहली चुदाई की कहानी!
मगर अभी कहानी खत्म नहीं हुई है. किशोर से चुदाई करवाने की मुझे इतनी बुरी लत लग गई थी कि उसके कारण ही मेरे साथ एक बार ऐसी घटना घट गई कि मुझे दूसरे लोगों से भी चुदना पड़ गया.
वो मैं आपको अगली कहानी में बताऊंगी.
कैसे मेरी जिंदगी में वो घटना घटी कि मुझे एक साथ तीन लोगों ने मिलकर चोदा … और उसके बाद जब तक मेरी शादी नहीं हुई, तब तक मैं लगभग रोज किसी न किसी से चुदती ही रही.
Antarvasna hindi hot chudai kahani 2024:
स्कूल में लड़के का लड़कियों ने किया गैंगबैंग
Xxx स्कूल स्टूडेंट्स सेक्स कहानी में एक लड़के ने दो जवान लड़कियों को आपस में लेस्बो करती देख लिया. लड़के को मौक़ा मिल गया तो लडकियां भी ख़ुशी ख़ुशी उससे चुद गयी.
दोस्तो, कैसे हैं आप सब लोग!
उम्मीद करता हूँ कि ठीक ही होंगे.
मेरा नाम प्रिंस (बदला हुआ नाम) है.
मैंने अभी हाल ही में ओ लेवल कंप्यूटर कोर्स कंप्लीट किया है और इसके पहले 2019 में मैं CCC का कोर्स भी पूरा कर चुका हूँ.
खैर … ये तो हुई मेरी बात.
अब मैं Xxx स्कूल स्टूडेंट्स सेक्स कहानी पर आता हूँ.
यह बात उन दिनों की है जब मैं 19 साल का था और स्कूल में 12वीं कक्षा में पढ़ता था.
मेरी क्लास में गिनती की बस 4 ही लड़कियां थीं जो मेरी हमउम्र थी.
उन दिनों बारिश का मौसम था और बारिश की वजह से पूरे स्कूल में गिनती के बस 5-6 ही छात्र आए थे क्योंकि बारिश बहुत तेज हो रही थी.
हमारी क्लास ऊपर की फ्लोर पर लगती थी.
उस दिन मेरी क्लास में बस दो ही लड़कियां थीं.
हमारी क्लास ऊपर की फ्लोर पर लगती थी.
उस दिन मेरी क्लास में बस दो ही लड़कियां थीं.
जब मैं क्लास में गया तो वे दोनों मुझे देख कर चौंक गईं और थोड़ी सी डर भी गई थीं क्योंकि उस वक्त वे दोनों एक दूसरे को फ्रेंच किस कर रही थीं.
इधर मैं उन दोनों लड़कियों के नाम बताना चाहूँगा.
उन दोनों के बदले हुए नाम अंशु और सौम्या थे.
सूनी क्लास में वे दोनों बैठ कर एक दूसरे की टांगों में टांगें डालकर बैठी हुई थीं और होंठों से होंठों को जोड़ कर फ्रेंच किस कर रही थीं.
पहले तो मैं भी उन्हें इस पोजीशन में देख कर थोड़ा डर गया और यह सोच कर कुछ ज्यादा ही भयभीत हो गया कि कहीं वे दोनों चिल्ला ना दें.
लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.
पहले तो मैंने खुद को संभाला और पूछा- तुम दोनों अभी यह क्या कर रही थीं? बोलो क्या टीचर को बताऊं?
वे दोनों और ज्यादा डर गईं और दोनों ही एक दूसरे से अलग होकर मुझसे रिक्वेस्ट करने लगीं- प्लीज किसी को कुछ मत बताना, तुम जो बोलोगे … वह हम दोनों करने के लिए तैयार हैं. बस प्लीज इस बारे में किसी से कुछ मत कहना!
तभी मेरे दिमाग में घंटी बजी कि यह तो मेरे लिए सुनहरा मौका हाथ आ गया है.
मैंने उनसे कहा- ठीक है अगर ऐसा है तो फिर जो अभी तुम दोनों कर रही थीं, वह तुम मेरे साथ भी करो. हम तीनों मिलकर एंजॉय करते हैं … यूँ अकेले-अकेले करने में क्या मज़ा!
पहले तो वे दोनों नखरे करने लगीं लेकिन बाद में वे दोनों भी मान गईं क्योंकि उनकी बुर में भी चुल्ल उठ रही थी.
अब तक आप लोग समझ ही गए होंगे कि मैंने इस मौके का पूरा फायदा उठाया.
वह एक सरकारी स्कूल था, जिसमें मैं पढ़ता था.
सरकारी स्कूलों का हाल तो आप सब जानते ही हैं.
उस दिन बारिश के कारण ज़्यादातर टीचर्स छुट्टी पर थीं.
चौथे पीरियड के बाद हमारा लंच होता था.
मज़े की बात तो यह थी दोस्तो … कि चारों पीरियड्स हमारे खाली ही गुजरे.
ऊपर से हम सब स्कूल भी कुछ जल्दी ही आ गए थे.
कहानी का सबसे मजेदार हिस्सा अब शुरू हुआ.
पहले अंशु मुझे लिप किस करने लगी और सौम्या पीछे से मेरे लंड को पैंट के ऊपर से सहलाने लगी थी.
मैं शर्ट के ऊपर से ही अंशु के बूब्स को सहलाने में लगा था.
करीब 10 मिनट तक किस करने के बाद सौम्या ने मेरी पैंट की जिप खोल दी और लंड बाहर निकाल कर उसकी मुठ मारना शुरू कर दी.
थोड़ी देर के बाद अंशु ने घुटनों के बल बैठ कर मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और वह मुझे एक अच्छा सा ब्लोजॉब देने लगी थी.
इस सबके बीच हम लोग क्लास के गेट की तरफ भी देख रहे थे ताकि कोई आकर हमें देख ना ले.
क्या बताऊं दोस्तो, जितना मज़ा हमें उस समय आ रहा था, उतना ही हमें डर भी लग रहा था.
लेकिन खुशकिस्मती से हमें किसी ने भी नहीं देखा क्योंकि बारिश ही इतनी तेज हो रही थी.
कोई भी टीचर स्कूल में नहीं आ पाई थी.
एक दो जो आई भी थीं, वे स्टाफ रूम में नीचे ही रह गई थीं.
जहां हमारी क्लास लगती थी, वहां खुली छत से होकर आना पड़ता था तो ऊपर आने से वे टीचर्स भीगने के कारण आना ही नहीं चाहती थीं और शायद उन्हें यह भी लगा था कि आज स्कूल में कोई छात्र नहीं आया है, तो ऊपर क्यों जाना!
इधर हम तीनों ऐसे ही लंच तक सेक्स का मजा लेते रहे.
हालांकि हम तीनों पूरे नंगे नहीं हुए थे.
बस मैंने अपनी पैंट थोड़ी सी नीचे कर रखी थी और अंशु और सौम्या ने स्कर्ट के नीचे से अपनी-अपनी पैंटी नीचे कर खिसका रखी थीं.
लगभग एक घंटा तक मजा करने के बाद मैं अंशु के मुँह में ही झड़ गया और हम सब कुछ देर के लिए रुक गए.
लंड वापस खड़ा होने के बाद सौम्या ने भी मेरा लंड चूसा और उसने भी मेरे लौड़े के रस को पिया.
उसके बाद मैंने बारी बारी से दोनों की चूत चूसीं और उन दोनों का माल पिया.
स्कूल में लड़के का लड़कियों ने किया गैंगबैंग
Xxx स्कूल स्टूडेंट्स सेक्स कहानी में एक लड़के ने दो जवान लड़कियों को आपस में लेस्बो करती देख लिया. लड़के को मौक़ा मिल गया तो लडकियां भी ख़ुशी ख़ुशी उससे चुद गयी.
दोस्तो, कैसे हैं आप सब लोग!
उम्मीद करता हूँ कि ठीक ही होंगे.
मेरा नाम प्रिंस (बदला हुआ नाम) है.
मैंने अभी हाल ही में ओ लेवल कंप्यूटर कोर्स कंप्लीट किया है और इसके पहले 2019 में मैं CCC का कोर्स भी पूरा कर चुका हूँ.
खैर … ये तो हुई मेरी बात.
अब मैं Xxx स्कूल स्टूडेंट्स सेक्स कहानी पर आता हूँ.
यह बात उन दिनों की है जब मैं 19 साल का था और स्कूल में 12वीं कक्षा में पढ़ता था.
मेरी क्लास में गिनती की बस 4 ही लड़कियां थीं जो मेरी हमउम्र थी.
उन दिनों बारिश का मौसम था और बारिश की वजह से पूरे स्कूल में गिनती के बस 5-6 ही छात्र आए थे क्योंकि बारिश बहुत तेज हो रही थी.
हमारी क्लास ऊपर की फ्लोर पर लगती थी.
उस दिन मेरी क्लास में बस दो ही लड़कियां थीं.
हमारी क्लास ऊपर की फ्लोर पर लगती थी.
उस दिन मेरी क्लास में बस दो ही लड़कियां थीं.
जब मैं क्लास में गया तो वे दोनों मुझे देख कर चौंक गईं और थोड़ी सी डर भी गई थीं क्योंकि उस वक्त वे दोनों एक दूसरे को फ्रेंच किस कर रही थीं.
इधर मैं उन दोनों लड़कियों के नाम बताना चाहूँगा.
उन दोनों के बदले हुए नाम अंशु और सौम्या थे.
सूनी क्लास में वे दोनों बैठ कर एक दूसरे की टांगों में टांगें डालकर बैठी हुई थीं और होंठों से होंठों को जोड़ कर फ्रेंच किस कर रही थीं.
पहले तो मैं भी उन्हें इस पोजीशन में देख कर थोड़ा डर गया और यह सोच कर कुछ ज्यादा ही भयभीत हो गया कि कहीं वे दोनों चिल्ला ना दें.
लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.
पहले तो मैंने खुद को संभाला और पूछा- तुम दोनों अभी यह क्या कर रही थीं? बोलो क्या टीचर को बताऊं?
वे दोनों और ज्यादा डर गईं और दोनों ही एक दूसरे से अलग होकर मुझसे रिक्वेस्ट करने लगीं- प्लीज किसी को कुछ मत बताना, तुम जो बोलोगे … वह हम दोनों करने के लिए तैयार हैं. बस प्लीज इस बारे में किसी से कुछ मत कहना!
तभी मेरे दिमाग में घंटी बजी कि यह तो मेरे लिए सुनहरा मौका हाथ आ गया है.
मैंने उनसे कहा- ठीक है अगर ऐसा है तो फिर जो अभी तुम दोनों कर रही थीं, वह तुम मेरे साथ भी करो. हम तीनों मिलकर एंजॉय करते हैं … यूँ अकेले-अकेले करने में क्या मज़ा!
पहले तो वे दोनों नखरे करने लगीं लेकिन बाद में वे दोनों भी मान गईं क्योंकि उनकी बुर में भी चुल्ल उठ रही थी.
अब तक आप लोग समझ ही गए होंगे कि मैंने इस मौके का पूरा फायदा उठाया.
वह एक सरकारी स्कूल था, जिसमें मैं पढ़ता था.
सरकारी स्कूलों का हाल तो आप सब जानते ही हैं.
उस दिन बारिश के कारण ज़्यादातर टीचर्स छुट्टी पर थीं.
चौथे पीरियड के बाद हमारा लंच होता था.
मज़े की बात तो यह थी दोस्तो … कि चारों पीरियड्स हमारे खाली ही गुजरे.
ऊपर से हम सब स्कूल भी कुछ जल्दी ही आ गए थे.
कहानी का सबसे मजेदार हिस्सा अब शुरू हुआ.
पहले अंशु मुझे लिप किस करने लगी और सौम्या पीछे से मेरे लंड को पैंट के ऊपर से सहलाने लगी थी.
मैं शर्ट के ऊपर से ही अंशु के बूब्स को सहलाने में लगा था.
करीब 10 मिनट तक किस करने के बाद सौम्या ने मेरी पैंट की जिप खोल दी और लंड बाहर निकाल कर उसकी मुठ मारना शुरू कर दी.
थोड़ी देर के बाद अंशु ने घुटनों के बल बैठ कर मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और वह मुझे एक अच्छा सा ब्लोजॉब देने लगी थी.
इस सबके बीच हम लोग क्लास के गेट की तरफ भी देख रहे थे ताकि कोई आकर हमें देख ना ले.
क्या बताऊं दोस्तो, जितना मज़ा हमें उस समय आ रहा था, उतना ही हमें डर भी लग रहा था.
लेकिन खुशकिस्मती से हमें किसी ने भी नहीं देखा क्योंकि बारिश ही इतनी तेज हो रही थी.
कोई भी टीचर स्कूल में नहीं आ पाई थी.
एक दो जो आई भी थीं, वे स्टाफ रूम में नीचे ही रह गई थीं.
जहां हमारी क्लास लगती थी, वहां खुली छत से होकर आना पड़ता था तो ऊपर आने से वे टीचर्स भीगने के कारण आना ही नहीं चाहती थीं और शायद उन्हें यह भी लगा था कि आज स्कूल में कोई छात्र नहीं आया है, तो ऊपर क्यों जाना!
इधर हम तीनों ऐसे ही लंच तक सेक्स का मजा लेते रहे.
हालांकि हम तीनों पूरे नंगे नहीं हुए थे.
बस मैंने अपनी पैंट थोड़ी सी नीचे कर रखी थी और अंशु और सौम्या ने स्कर्ट के नीचे से अपनी-अपनी पैंटी नीचे कर खिसका रखी थीं.
लगभग एक घंटा तक मजा करने के बाद मैं अंशु के मुँह में ही झड़ गया और हम सब कुछ देर के लिए रुक गए.
लंड वापस खड़ा होने के बाद सौम्या ने भी मेरा लंड चूसा और उसने भी मेरे लौड़े के रस को पिया.
उसके बाद मैंने बारी बारी से दोनों की चूत चूसीं और उन दोनों का माल पिया.
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इधर मैं एक बात तो बताना भूल ही गया कि वे दोनों वर्जिन नहीं थीं क्योंकि उन दोनों की चूत थोड़ी ढीली सी थी.
उस वक्त तक स्कूल में किसी को नहीं पता था कि ऊपर की क्लास में भी कोई है क्योंकि लंच में हम तीनों मतलब मैं, अंशु और सौम्या अपने-अपने बैग लेकर टॉयलेट में चले गए थे.
अब आप लोग ये सोच रहे होंगे कि मैं तो एक लड़का हूँ तो फिर मैं गर्ल्स टॉयलेट में कैसे गया?
दरअसल बात ये है कि लड़कों के टॉयलेट के नाम पर बस एक नाली और पीछे की तरफ एक दीवार है, जो कि चारों तरफ से खुली हुई हैं. उन्हें लेट्रिन के लिए गर्ल्स टॉयलेट में ही जाना पड़ता है.
इसी बात का मैंने फायदा उठाया कि मुझसे कोई पूछता कि तुम गर्ल्स वाले टॉयलेट में क्या कर रहे थे तो मैं कह सकता था कि मुझे लेट्रिन आई हुई थी … इसलिए मैं इधर आया हुआ था.
लड़कियां अपनी समस्या खुद बतातीं कि वे क्यों टॉयलेट आई हुई थीं.
छुट्टी तक हम तीनों टॉयलेट के अन्दर ही रहे और वहीं पर थ्री-सम मजा करते रहे.
टॉयलेट में अन्दर कुल छह केबिन बने थे.
हम तीनों आखिरी वाले में थे.
अब हम तीनों ने अपने अपने कपड़े उतार कर अपने अपने बैग में डाल लिए थे और तीनों एक दूसरे के सामने बिल्कुल नंगे हो गए थे.
उन दोनों को नंगी देखकर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया था.
मेरा तना हुआ लंड देख कर अंशु मुझसे कहने लगी- अरे प्रिन्स ये क्या? तुम्हारा लंड तो फिर से खड़ा हो गया?
मैं- तो फिर तुम इसे फिर से शांत कर दो!
अंशु- अच्छा जी ऐसी बात है … तो अभी लो!
अंशु नीचे बैठकर मेरा लंड चूसने लगी और सौम्या खड़ी होकर मुझे लिप किस करने लगी.
साथ ही मैं उसके बूब्स भी दबाने लगा.
सौम्या के दूध अंशु के चूचों से थोड़े ज्यादा कड़क थे और उसके निप्पल हल्के भूरे रंग के थे.
जबकि अंशु के दूध बड़े थे और उसके मम्मों की तो मैं क्या ही बात करूँ यार … साली चूचों से लंडखोर लग रही थी.
उसके चूचे एकदम रूई की तरह मुलायम और निप्पल गुलाबी रंग के थे.
मैं बारी बारी से उन दोनों की चूचियों को चूस रहा था, दबा रहा था.
थोड़ी देर के बाद मैंने अंशु की चूत में अपना लंड घुसेड़ दिया और जम कर उसकी चुदाई की.
Xxx स्कूल स्टूडेंट्स सेक्स करीब आधा घंटा तक करने के बाद मुझे नहीं पता कि मैं कब उसकी चूत में ही झड़ गया.
मैं बहुत ज़्यादा डर गया था कि कहीं वह प्रेग्नेंट ना हो जाए लेकिन कुतिया के पास सब इंतजाम था.
बहन की लौड़ी के पास गर्भनिरोधक गोलियां भी थीं.
यह देख कर मैं चौंक गया.
मैंने उससे पूछा कि इन गोलियों का तुम्हारे पास क्या काम?
तो उसने मुझे बताया कि उसका एक ब्वॉयफ्रेंड है, उसी ने उसकी चूत की सील तोड़ी थी.
उसी ने बताया कि सौम्या की चूत भी उसके ब्वॉयफ्रेंड ने ही फाड़ी थी.
हालांकि सौम्या अब तक सिर्फ तीन बार ही चुदी थी.
जबकि अंशु की चुत ने अपने चोदू का लंड बीसियों बार लिया था.
उसकी हरकतों से साफ समझ आ रहा था कि शायद उसने एक से ज्यादा लंड लीले थे.
मुझे लगा कि उसकी तो गांड भी चालू थी.
इसके बाद मैं बिना डरे स्कूल की छुट्टी होने तक उन दोनों की चूत और गांड मारता रहा.
हम लोग छुट्टी होने के एक घंटे के बाद वहां से निकले ताकि कोई हमें देख ना ले.
सरकारी स्कूल से बाहर निकलने के लिए कई रास्ते थे, जिससे अंशु वाकिफ थी.
शायद उसने स्कूल की बिल्डिंग में ही अपनी बुर को चूत में कन्वर्ट करवाया था.
अब जब भी हमें मौका मिलता, हम रोज चूत चुदाई वाला खेल खेल लेते और एक दूसरे को पूरा मज़ा देते.
हमारा लंच ब्रेक का पूरा आधा घंटा टॉयलेट में चुदाई करते हुए ही निकलता था.
एक दिन सक्सेना मैडम ने मुझे गर्ल्स टॉयलेट में जाते हुए देख लिया.
पूछने पर मैंने बहाना बनाया कि मेरा पेट खराब है और बाय्स टॉयलेट के नाम पर यह खुला मैदान है. इसीलिए मुझे अन्दर जाने दो!
सच पूछो तो मुझे डर लग रहा था कि कहीं मेरा मेडिकल टेस्ट ना करवा दिया जाए.
लेकिन यह सब सरकारी स्कूलों में होना संभव नहीं था तो मेरे साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.
मैं अंशु और सौम्या के साथ सेक्स वाली मस्ती करता रहा.
उस स्कूल में मैं दो साल तक पढ़ा और ये तीनों साल सेक्स भरी मस्ती करते-करते गुजरे.
फिर एक दिन स्कूल छोड़ने का समय आ गया.
उस दिन हमारी फेयरवेल पार्टी थी.
वह दिन उस स्कूल में हमारा आखिरी दिन था.
उस दिन सुबह 8 बजे हमारा प्रोग्राम शुरू हुआ और दोपहर 12 बजे तक चला.
समारोह के दौरान अंशु ने मुझे बताया कि उसके पेरेंट्स कुछ दिनों के लिए बाहर गए हुए हैं और उसने मुझे अपने घर आने के लिए भी कहा.
मैं स्कूल के बाद अंशु के साथ उसके घर आ गया.
वहां जाकर मैंने देखा कि वहां पर सौम्या भी आई हुई थी.
उनके साथ अंशु और सौम्या की 6 सहेलियां और थीं.
वहां कुल मिलकर आठ लड़कियां थीं.
मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था.
तब सौम्या ने मुझे बताया कि ये सब भी तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहती हैं.
उस दिन मेरा जन्मदिन भी था.
उस वक्त तक स्कूल में किसी को नहीं पता था कि ऊपर की क्लास में भी कोई है क्योंकि लंच में हम तीनों मतलब मैं, अंशु और सौम्या अपने-अपने बैग लेकर टॉयलेट में चले गए थे.
अब आप लोग ये सोच रहे होंगे कि मैं तो एक लड़का हूँ तो फिर मैं गर्ल्स टॉयलेट में कैसे गया?
दरअसल बात ये है कि लड़कों के टॉयलेट के नाम पर बस एक नाली और पीछे की तरफ एक दीवार है, जो कि चारों तरफ से खुली हुई हैं. उन्हें लेट्रिन के लिए गर्ल्स टॉयलेट में ही जाना पड़ता है.
इसी बात का मैंने फायदा उठाया कि मुझसे कोई पूछता कि तुम गर्ल्स वाले टॉयलेट में क्या कर रहे थे तो मैं कह सकता था कि मुझे लेट्रिन आई हुई थी … इसलिए मैं इधर आया हुआ था.
लड़कियां अपनी समस्या खुद बतातीं कि वे क्यों टॉयलेट आई हुई थीं.
छुट्टी तक हम तीनों टॉयलेट के अन्दर ही रहे और वहीं पर थ्री-सम मजा करते रहे.
टॉयलेट में अन्दर कुल छह केबिन बने थे.
हम तीनों आखिरी वाले में थे.
अब हम तीनों ने अपने अपने कपड़े उतार कर अपने अपने बैग में डाल लिए थे और तीनों एक दूसरे के सामने बिल्कुल नंगे हो गए थे.
उन दोनों को नंगी देखकर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया था.
मेरा तना हुआ लंड देख कर अंशु मुझसे कहने लगी- अरे प्रिन्स ये क्या? तुम्हारा लंड तो फिर से खड़ा हो गया?
मैं- तो फिर तुम इसे फिर से शांत कर दो!
अंशु- अच्छा जी ऐसी बात है … तो अभी लो!
अंशु नीचे बैठकर मेरा लंड चूसने लगी और सौम्या खड़ी होकर मुझे लिप किस करने लगी.
साथ ही मैं उसके बूब्स भी दबाने लगा.
सौम्या के दूध अंशु के चूचों से थोड़े ज्यादा कड़क थे और उसके निप्पल हल्के भूरे रंग के थे.
जबकि अंशु के दूध बड़े थे और उसके मम्मों की तो मैं क्या ही बात करूँ यार … साली चूचों से लंडखोर लग रही थी.
उसके चूचे एकदम रूई की तरह मुलायम और निप्पल गुलाबी रंग के थे.
मैं बारी बारी से उन दोनों की चूचियों को चूस रहा था, दबा रहा था.
थोड़ी देर के बाद मैंने अंशु की चूत में अपना लंड घुसेड़ दिया और जम कर उसकी चुदाई की.
Xxx स्कूल स्टूडेंट्स सेक्स करीब आधा घंटा तक करने के बाद मुझे नहीं पता कि मैं कब उसकी चूत में ही झड़ गया.
मैं बहुत ज़्यादा डर गया था कि कहीं वह प्रेग्नेंट ना हो जाए लेकिन कुतिया के पास सब इंतजाम था.
बहन की लौड़ी के पास गर्भनिरोधक गोलियां भी थीं.
यह देख कर मैं चौंक गया.
मैंने उससे पूछा कि इन गोलियों का तुम्हारे पास क्या काम?
तो उसने मुझे बताया कि उसका एक ब्वॉयफ्रेंड है, उसी ने उसकी चूत की सील तोड़ी थी.
उसी ने बताया कि सौम्या की चूत भी उसके ब्वॉयफ्रेंड ने ही फाड़ी थी.
हालांकि सौम्या अब तक सिर्फ तीन बार ही चुदी थी.
जबकि अंशु की चुत ने अपने चोदू का लंड बीसियों बार लिया था.
उसकी हरकतों से साफ समझ आ रहा था कि शायद उसने एक से ज्यादा लंड लीले थे.
मुझे लगा कि उसकी तो गांड भी चालू थी.
इसके बाद मैं बिना डरे स्कूल की छुट्टी होने तक उन दोनों की चूत और गांड मारता रहा.
हम लोग छुट्टी होने के एक घंटे के बाद वहां से निकले ताकि कोई हमें देख ना ले.
सरकारी स्कूल से बाहर निकलने के लिए कई रास्ते थे, जिससे अंशु वाकिफ थी.
शायद उसने स्कूल की बिल्डिंग में ही अपनी बुर को चूत में कन्वर्ट करवाया था.
अब जब भी हमें मौका मिलता, हम रोज चूत चुदाई वाला खेल खेल लेते और एक दूसरे को पूरा मज़ा देते.
हमारा लंच ब्रेक का पूरा आधा घंटा टॉयलेट में चुदाई करते हुए ही निकलता था.
एक दिन सक्सेना मैडम ने मुझे गर्ल्स टॉयलेट में जाते हुए देख लिया.
पूछने पर मैंने बहाना बनाया कि मेरा पेट खराब है और बाय्स टॉयलेट के नाम पर यह खुला मैदान है. इसीलिए मुझे अन्दर जाने दो!
सच पूछो तो मुझे डर लग रहा था कि कहीं मेरा मेडिकल टेस्ट ना करवा दिया जाए.
लेकिन यह सब सरकारी स्कूलों में होना संभव नहीं था तो मेरे साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.
मैं अंशु और सौम्या के साथ सेक्स वाली मस्ती करता रहा.
उस स्कूल में मैं दो साल तक पढ़ा और ये तीनों साल सेक्स भरी मस्ती करते-करते गुजरे.
फिर एक दिन स्कूल छोड़ने का समय आ गया.
उस दिन हमारी फेयरवेल पार्टी थी.
वह दिन उस स्कूल में हमारा आखिरी दिन था.
उस दिन सुबह 8 बजे हमारा प्रोग्राम शुरू हुआ और दोपहर 12 बजे तक चला.
समारोह के दौरान अंशु ने मुझे बताया कि उसके पेरेंट्स कुछ दिनों के लिए बाहर गए हुए हैं और उसने मुझे अपने घर आने के लिए भी कहा.
मैं स्कूल के बाद अंशु के साथ उसके घर आ गया.
वहां जाकर मैंने देखा कि वहां पर सौम्या भी आई हुई थी.
उनके साथ अंशु और सौम्या की 6 सहेलियां और थीं.
वहां कुल मिलकर आठ लड़कियां थीं.
मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था.
तब सौम्या ने मुझे बताया कि ये सब भी तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहती हैं.
उस दिन मेरा जन्मदिन भी था.
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अंशु ने मुझे बताया कि ये मेरा जन्मदिन का तोहफा बन कर आई हैं.
उस दिन मैंने उन आठों लड़कियों को एक एक करके चोदा.
मैंने अपने घर पर फोन करके कह दिया था कि मुझे घर आने में देरी हो जाएगी.
अंशु के पास गर्भ निरोधक और कामोत्तेजक दवाओं का भंडार रहता था. कुतिया ने मुझे एक साथ दो दो गोलियां खिला कर सबके साथ चुदाई के लिए कड़क लंड वाला बनाए रखा.
उन सबको चोदने के बाद हम बाथरूम में एक साथ नहाने के लिए चले गए.
अंशु के घर में बाथटब था.
पता नहीं उन लड़कियों को क्या सूझा, उन्होंने मुझे चारों तरफ से घेर लिया और मेरे सामने अपनी-अपनी चूत में उंगलियां करने लगीं.
मैंने उनसे कहा- अब बस, अब मैं और नहीं कर पाऊंगा!
तभी अंशु एक और गोली लेकर आई और उसने मुझे उसे खाने के लिए बोला.
उसे खाते ही पता नहीं मुझे क्या हुआ, मैं एकदम से गामा पहलवान सा उत्तेजित हो गया.
मैंने फिर से उन लड़कियों की चूत में उंगली करना शुरू कर दिया और उनकी चुत की मुठ मारता हुआ उनकी चूत चाटने लगा.
एक घंटा के बाद वे सब एक-एक करके मेरे ऊपर झड़ गईं.
उन्होंने मुझे पूरी तरह से अपने माल से ऐसे लथपथ कर दिया मानो जैसे मैं दूध से भरे हुए बाथटब में सर से लेकर पांव तक पूरा डूब गया हूँ.
थोड़ी देर के बाद मैं भी झड़ गया और उन लड़कियों ने मुझे चाट चाट कर साफ कर दिया.
अब हम सबने नहाकर अपने-अपने कपड़े पहने और एक-एक फ्रेंच किस करने के बाद अपने घर चले गए.
हम सबके जाने के बाद अंशु ने अपने ब्वॉयफ्रेंड को अपने घर बुलाया और वे दोनों दो दिन तक नंगे रह कर चुदाई करते रहे, जब तक कि अंशु के पेरेंट्स के आने का फोन नहीं आ गया.
आगे आप सब को पता हैं कि उन दोनों ने 2 दिनों तक लगातार किस तरह से सेक्स किया किया होगा.
दोस्तो, आपको मेरी यह Xxx स्कूल स्टूडेंट्स सेक्स कहानी कैसी लगी, मुझे जरूर बताएं.
आप मुझे मेरी मेल आईडी पर मेल कर सकते हैं.
उस दिन मैंने उन आठों लड़कियों को एक एक करके चोदा.
मैंने अपने घर पर फोन करके कह दिया था कि मुझे घर आने में देरी हो जाएगी.
अंशु के पास गर्भ निरोधक और कामोत्तेजक दवाओं का भंडार रहता था. कुतिया ने मुझे एक साथ दो दो गोलियां खिला कर सबके साथ चुदाई के लिए कड़क लंड वाला बनाए रखा.
उन सबको चोदने के बाद हम बाथरूम में एक साथ नहाने के लिए चले गए.
अंशु के घर में बाथटब था.
पता नहीं उन लड़कियों को क्या सूझा, उन्होंने मुझे चारों तरफ से घेर लिया और मेरे सामने अपनी-अपनी चूत में उंगलियां करने लगीं.
मैंने उनसे कहा- अब बस, अब मैं और नहीं कर पाऊंगा!
तभी अंशु एक और गोली लेकर आई और उसने मुझे उसे खाने के लिए बोला.
उसे खाते ही पता नहीं मुझे क्या हुआ, मैं एकदम से गामा पहलवान सा उत्तेजित हो गया.
मैंने फिर से उन लड़कियों की चूत में उंगली करना शुरू कर दिया और उनकी चुत की मुठ मारता हुआ उनकी चूत चाटने लगा.
एक घंटा के बाद वे सब एक-एक करके मेरे ऊपर झड़ गईं.
उन्होंने मुझे पूरी तरह से अपने माल से ऐसे लथपथ कर दिया मानो जैसे मैं दूध से भरे हुए बाथटब में सर से लेकर पांव तक पूरा डूब गया हूँ.
थोड़ी देर के बाद मैं भी झड़ गया और उन लड़कियों ने मुझे चाट चाट कर साफ कर दिया.
अब हम सबने नहाकर अपने-अपने कपड़े पहने और एक-एक फ्रेंच किस करने के बाद अपने घर चले गए.
हम सबके जाने के बाद अंशु ने अपने ब्वॉयफ्रेंड को अपने घर बुलाया और वे दोनों दो दिन तक नंगे रह कर चुदाई करते रहे, जब तक कि अंशु के पेरेंट्स के आने का फोन नहीं आ गया.
आगे आप सब को पता हैं कि उन दोनों ने 2 दिनों तक लगातार किस तरह से सेक्स किया किया होगा.
दोस्तो, आपको मेरी यह Xxx स्कूल स्टूडेंट्स सेक्स कहानी कैसी लगी, मुझे जरूर बताएं.
आप मुझे मेरी मेल आईडी पर मेल कर सकते हैं.
👍4
ANTARVASANA KAHANIYAN:
💦💦💦💦💦💦💦
पति ने मुझे बुलाकर अपनी पत्नी की चूत चुदवाई
💦💦💦💦💦💦💦
Xxx ककोल्ड हसबैंड स्टोरी में एक अनजान आदमी ने मुझसे संपर्क किया और खुद से अपनी बीवी की चुदाई की बात की. मैंने सोचा कि कोई मजाक होगा. लेकिन बात आगे बढ़ी तो …
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम राहुल है, मैं उत्तर प्रदेश के लखनऊ में रहता हूं.
मैं पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट टाइम जॉब भी करता हूं.
मेरी उम्र 21 साल है. दिखने में मैं लंबा और पतला हूं लेकिन अच्छा दिखता हूं।
यह Xxx ककोल्ड हसबैंड स्टोरी पिछले साल दिसंबर की है जब मैं ऑफिस की छुट्टी होने की वजह से घर पर था और धूप खा रहा था.
तभी मेरे फोन पर एक अंजान नंबर से मैसेज आया.
उस मैसेज में लिखा था- मुझे आपका नंबर सोशियल मीडिया से मिला है!
मैंने भी हैलो कहा और पूछा- जी बताइए, क्या काम है?
उन्होंने अपना नाम शिखा बताया और कहा- मुझे आपसे एक काम है!
तो मैंने पूछा- क्या काम है?
उन्होंने कहा- मैंने आपकी फोटो देखी है और आप काफ़ी अच्छे लगते हो!
मैंने शुक्रिया कहा और उनके अगले मैसेज का इंतजार करने लगा.
अब उन्होंने आप से तुम पर आते हुए लिखा- मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करना है और बदले में मैं तुम्हें पैसे भी दूँगी!
ये सब सुनकर पहले तो मैं हक्का बक्का रह गया, फिर मैंने सोचा कि कोई मज़ाक कर रहा है.
मैंने कहा- आज सुबह से कोई मिला नहीं क्या? मुझे क्यों परेशान कर रहे हो भाई?
तो उन्होंने कहा- नहीं, मैं सीरियसली बात कर रही हूँ. मेरे पति एकदम ओपन माइंडेड हैं और सब कुछ जानते हैं.
अब मुझे कुछ शक हुआ और मैंने लिखा- भाई अगर आप लड़के हो तो बताओ तो पहले … और सच क्या है … ये भी बताओ? यदि तुम अपनी बीवी को मेरे लौड़े से चुदवाना चाहते हो तो भी साफ बताओ या तुम खुद अपनी गांड मरवाना चाहते हो तो भी साफ साफ बताओ!
मेरी इस बात पर उधर से मैसेज नहीं आया.
मैं समझ गया कि शायद कुछ सोचा जा रहा है.
फिर मैसेज आया- क्या तुम मुझे अपना लंड दिखा सकते हो?
मैंने कहा- दिखा तो सकता हूँ पर पहले कुछ गर्म दिखाओ तो लंड कड़क हो सकेगा, फिर दिखा भी दूंगा!
उसने एक नंगी लड़की के दूध व चूत दिखती हुई वीडियो दिखाई, चेहरा अभी भी नहीं दिखाया गया था.
उसने कहा- यह मेरी बीवी की वीडियो है.
मैंने कहा- बीवी की वीडियो है तो सच में बहुत ही सेक्सी लेडी तुम्हारी बीवी है.
उसने कहा- अब अपना लंड दिखाओ!
मैंने एक पल को सोचा और अपना लंड दिखा दिया.
उस तरफ से बात करने वाला मेरा लंड देख कर संतुष्ट हो गया था.
अगले ही पल उन्होंने कहा- हां मेरा नाम राज है … और सच यह है कि मुझे कुछ नया ट्राइ करने का मन है. इसी लिए किसी ऐसे लड़के की तलाश कर रहा हूँ जो मेरी वाइफ के साथ सेक्स कर सके, वह भी मेरी आंखों के सामने!
उन्होंने बताया कि वे लखनऊ में ही राजाजीपुरम में रहते हैं, जो मेरे घर से ज्यादा दूर नहीं है.
उन्होंने कहा कि वे ऐसे ही किसी को नहीं बुला सकते हैं. घर की इज़्ज़त की बात है!
मैंने पूछा- इतने लोगों में आपने मुझे ही क्यों चूज किया?
तो उन्होंने कहा- तुम देखने में अच्छे लगे इसलिए मैसेज किया.
मैंने उनसे कॉल करने के लिए कहा और हमारी बात हो गई.
उसके बाद उन्होंने कहा- दिन में आ जाओ घर में, सिर्फ़ वह और उनकी वाइफ हैं और उनका छोटा सा बेटा!
मैंने उनसे उनकी वाइफ की फोटो मांगी.
उन्होंने भेज दी.
सच में बड़ी गजब की कांटा माल थी यार … उसकी औसत लंबाई थी.
वह गोरी सी 32-30-34 की एकदम जहर थी.
मेरा उनसे टाइम फिक्स हुआ और मैं दिए हुए अड्रेस पर पहुंच गया.
उनके Xxx ककोल्ड हसबैंड ने आकर गेट खोला तो मैंने नमस्ते किया.
उन्होंने भी हाथ मिलाया और मुझे रूम में ले गए.
अपनी वाइफ को नाश्ता लाने के लिए भेजा.
फिर मुझसे कहा- मेरी बीवी की चुदाई देखने के लिए मैंने एक हिडन कैमरा लगाया है.
मैं दीवार पर इधर उधर देखने लगा.
वे बोले- तुम परेशान न हो, उससे तुम्हें जब तक खतरा नहीं है क्योंकि बीवी मेरी चुद रही है और तुम उसे चोदने वाले हो!
मैं हंस दिया.
मैंने कहा- इस सबका सबब क्या है?
वे बोले- तृप्ति!
मैंने कहा- ठीक है. बस एक आखिरी बात और?
वे मेरी तरफ देखने लगे.
मैंने कहा- लंड देखने का क्या मतलब था?
वे हंस कर बोले- मेरा तुमसे आधा है.
मैंने कहा- बड़े छोटे से बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है, टाइमिंग से फर्क पड़ता है!
वे बोले- तुम कितना टाइम लगाते हो!
मैंने कहा- मूड पर डिपेंड करता है. यदि मैडम ने सहयोग किया तो मजा देर तक चल सकता है!
वे हंस दिए और बोले- वह तुम्हें पूरा सहयोग करेगी और यदि वह तुमसे खुश हुई तो दुबारा चुदने के लिए भी बुला सकती है.
यह सुनकर मैं चुप हो गया.
अगले कुछ पल हम दोनों शांत रहे.
और उसी दरमियान वे हॉल में अन्दर आईं तो मैं तो उन्हें बस देखता ही रह गया.
थोड़ी देर बात हुई.
उसके बाद वे मुझे अपने बेडरूम में ले गए.
फिर वाइफ को लेकर आए और उन्हें मेरे बगल में बैठा दिया.
💦💦💦💦💦💦💦
पति ने मुझे बुलाकर अपनी पत्नी की चूत चुदवाई
💦💦💦💦💦💦💦
Xxx ककोल्ड हसबैंड स्टोरी में एक अनजान आदमी ने मुझसे संपर्क किया और खुद से अपनी बीवी की चुदाई की बात की. मैंने सोचा कि कोई मजाक होगा. लेकिन बात आगे बढ़ी तो …
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम राहुल है, मैं उत्तर प्रदेश के लखनऊ में रहता हूं.
मैं पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट टाइम जॉब भी करता हूं.
मेरी उम्र 21 साल है. दिखने में मैं लंबा और पतला हूं लेकिन अच्छा दिखता हूं।
यह Xxx ककोल्ड हसबैंड स्टोरी पिछले साल दिसंबर की है जब मैं ऑफिस की छुट्टी होने की वजह से घर पर था और धूप खा रहा था.
तभी मेरे फोन पर एक अंजान नंबर से मैसेज आया.
उस मैसेज में लिखा था- मुझे आपका नंबर सोशियल मीडिया से मिला है!
मैंने भी हैलो कहा और पूछा- जी बताइए, क्या काम है?
उन्होंने अपना नाम शिखा बताया और कहा- मुझे आपसे एक काम है!
तो मैंने पूछा- क्या काम है?
उन्होंने कहा- मैंने आपकी फोटो देखी है और आप काफ़ी अच्छे लगते हो!
मैंने शुक्रिया कहा और उनके अगले मैसेज का इंतजार करने लगा.
अब उन्होंने आप से तुम पर आते हुए लिखा- मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करना है और बदले में मैं तुम्हें पैसे भी दूँगी!
ये सब सुनकर पहले तो मैं हक्का बक्का रह गया, फिर मैंने सोचा कि कोई मज़ाक कर रहा है.
मैंने कहा- आज सुबह से कोई मिला नहीं क्या? मुझे क्यों परेशान कर रहे हो भाई?
तो उन्होंने कहा- नहीं, मैं सीरियसली बात कर रही हूँ. मेरे पति एकदम ओपन माइंडेड हैं और सब कुछ जानते हैं.
अब मुझे कुछ शक हुआ और मैंने लिखा- भाई अगर आप लड़के हो तो बताओ तो पहले … और सच क्या है … ये भी बताओ? यदि तुम अपनी बीवी को मेरे लौड़े से चुदवाना चाहते हो तो भी साफ बताओ या तुम खुद अपनी गांड मरवाना चाहते हो तो भी साफ साफ बताओ!
मेरी इस बात पर उधर से मैसेज नहीं आया.
मैं समझ गया कि शायद कुछ सोचा जा रहा है.
फिर मैसेज आया- क्या तुम मुझे अपना लंड दिखा सकते हो?
मैंने कहा- दिखा तो सकता हूँ पर पहले कुछ गर्म दिखाओ तो लंड कड़क हो सकेगा, फिर दिखा भी दूंगा!
उसने एक नंगी लड़की के दूध व चूत दिखती हुई वीडियो दिखाई, चेहरा अभी भी नहीं दिखाया गया था.
उसने कहा- यह मेरी बीवी की वीडियो है.
मैंने कहा- बीवी की वीडियो है तो सच में बहुत ही सेक्सी लेडी तुम्हारी बीवी है.
उसने कहा- अब अपना लंड दिखाओ!
मैंने एक पल को सोचा और अपना लंड दिखा दिया.
उस तरफ से बात करने वाला मेरा लंड देख कर संतुष्ट हो गया था.
अगले ही पल उन्होंने कहा- हां मेरा नाम राज है … और सच यह है कि मुझे कुछ नया ट्राइ करने का मन है. इसी लिए किसी ऐसे लड़के की तलाश कर रहा हूँ जो मेरी वाइफ के साथ सेक्स कर सके, वह भी मेरी आंखों के सामने!
उन्होंने बताया कि वे लखनऊ में ही राजाजीपुरम में रहते हैं, जो मेरे घर से ज्यादा दूर नहीं है.
उन्होंने कहा कि वे ऐसे ही किसी को नहीं बुला सकते हैं. घर की इज़्ज़त की बात है!
मैंने पूछा- इतने लोगों में आपने मुझे ही क्यों चूज किया?
तो उन्होंने कहा- तुम देखने में अच्छे लगे इसलिए मैसेज किया.
मैंने उनसे कॉल करने के लिए कहा और हमारी बात हो गई.
उसके बाद उन्होंने कहा- दिन में आ जाओ घर में, सिर्फ़ वह और उनकी वाइफ हैं और उनका छोटा सा बेटा!
मैंने उनसे उनकी वाइफ की फोटो मांगी.
उन्होंने भेज दी.
सच में बड़ी गजब की कांटा माल थी यार … उसकी औसत लंबाई थी.
वह गोरी सी 32-30-34 की एकदम जहर थी.
मेरा उनसे टाइम फिक्स हुआ और मैं दिए हुए अड्रेस पर पहुंच गया.
उनके Xxx ककोल्ड हसबैंड ने आकर गेट खोला तो मैंने नमस्ते किया.
उन्होंने भी हाथ मिलाया और मुझे रूम में ले गए.
अपनी वाइफ को नाश्ता लाने के लिए भेजा.
फिर मुझसे कहा- मेरी बीवी की चुदाई देखने के लिए मैंने एक हिडन कैमरा लगाया है.
मैं दीवार पर इधर उधर देखने लगा.
वे बोले- तुम परेशान न हो, उससे तुम्हें जब तक खतरा नहीं है क्योंकि बीवी मेरी चुद रही है और तुम उसे चोदने वाले हो!
मैं हंस दिया.
मैंने कहा- इस सबका सबब क्या है?
वे बोले- तृप्ति!
मैंने कहा- ठीक है. बस एक आखिरी बात और?
वे मेरी तरफ देखने लगे.
मैंने कहा- लंड देखने का क्या मतलब था?
वे हंस कर बोले- मेरा तुमसे आधा है.
मैंने कहा- बड़े छोटे से बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है, टाइमिंग से फर्क पड़ता है!
वे बोले- तुम कितना टाइम लगाते हो!
मैंने कहा- मूड पर डिपेंड करता है. यदि मैडम ने सहयोग किया तो मजा देर तक चल सकता है!
वे हंस दिए और बोले- वह तुम्हें पूरा सहयोग करेगी और यदि वह तुमसे खुश हुई तो दुबारा चुदने के लिए भी बुला सकती है.
यह सुनकर मैं चुप हो गया.
अगले कुछ पल हम दोनों शांत रहे.
और उसी दरमियान वे हॉल में अन्दर आईं तो मैं तो उन्हें बस देखता ही रह गया.
थोड़ी देर बात हुई.
उसके बाद वे मुझे अपने बेडरूम में ले गए.
फिर वाइफ को लेकर आए और उन्हें मेरे बगल में बैठा दिया.
❤1
भाभी जी बहुत शर्मा रही थीं.
और सच पूछो तो मुझे भी थोड़ा अजीब लग रहा था क्योंकि पहली बार ऐसा हो रहा था.
फिर वे सज्जन अपने बेटे को लेकर बाहर चले गए.
मैंने मैडम का हाथ पकड़ा और धीरे धीरे बात करना आरंभ की- क्या आप मेरे साथ सहज हैं?
वे- हां, कुछ कुछ सहज हूँ. कुछ देर तक बातें करने से और ज्यादा सहज महसूस करूंगी.
मैंने कहा- क्या आप अपने पति के अलावा किसी दूसरे मर्द से पहली बार सेक्स कर रही हैं?
उन्होंने कहा- हां … पति की जानकारी में पहली बार करने जा रही हूँ!
मैंने कहा- इसका मतलब आप किसी अन्य से भी चुदवा चुकी हैं?
जब मैंने चुदवा चुकी हैं शब्द कहा तो वे मुस्कुरा दीं और बोलीं- शादी के पहले की बात को अभी दुहराने से क्या फायदा!
मैं समझ गया कि यह बात पति कि सुनाई पड़ रही है और वॉइस सेंसर वाले कैमरे से देखा व सुना जा रहा है.
मैंने उनसे कहा- तो अब शुरू करें?
तो उन्होंने अपनी पलकें हिला दीं.
मैंने भी धीरे धीरे उनकी गर्दन पर हाथ फेरा और कहा- अगर कोई प्राब्लम हो तो हम कम्बल के अंदर कर सकते हैं!
उन्होंने कुछ नहीं कहा.
मैंने भी उनकी रजा समझी और कम्बल में आ गया.
चूंकि ठंड का मौसम था तो हम दोनों कम्बल के अन्दर घुस गए.
मैंने उन्हें अपनी ओर खींचा और उनके होंठों पर अपने होंठ लगा दिए.
शुरुआत में मैडम हिचकीं, पर बाद में हम दोनों ने किस करना शुरू कर दिया.
धीरे धीरे वे भी मेरा साथ देने लगीं.
किस करने से गर्मी बढ़ी तो मैंने कम्बल हटा दिया और उनके होंठों का रस पीते हुए ही उनके कपड़े उतार दिए.
उन्होंने भी मेरी टी-शर्ट उतार दी.
मैं उनके बूब्स दबाने लगा और वे आहें भरने लगी थीं.
मैं अब उनके मम्मों पर आ गया और निप्पल को मुँह में भर कर चूसने लगा.
एक को चूसते हुए मैं दूसरे को दबा रहा था.
उन्हें अपने मम्मे चुसवाने में बड़ा मजा आ रहा था तो वे मेरे मुँह में अपने हाथ से अपने निप्पल को दे रही थीं और आह आह करती हुई मेरे हाथ से अपने दूसरे दूध की मां चुदवा रही थीं.
मैंने उनके दूध को मुँह से निकाला और कहा- कैसा लग रहा है?
वे बोलीं- जबरदस्त लग रहा है … आज काफी समय बाद मेरे दूध किसी ने इस तरह से चूसे हैं!
मैंने कहा- तो लेट कर चुसवाने का मन है!
वे राजी हो गईं.
मैंने कहा- जब लंड की सवारी करोगी, तब दूध पिलाना!
उन्होंने ओके कहा.
इसके बाद मैंने उनकी सलवार और पैंटी भी उतार फेंकी.
अब वे मेरे सामने एकदम बिना कपड़ों के थीं.
मैं टूट पड़ा और उन्होंने भी मेरी पैंट व अंडरवियर को हटा दिया.
जैसे ही उन्होंने मेरा लंड देखा, उनकी आंखें फट गईं.
वे हैरानी से लंड को देखती हुई बोलीं- इतना बड़ा!
मैंने भी कहा- हां क्यों … पहले नहीं देखा क्या?
वे मेरी आंखों में आंखें डालकर हंसने लगीं.
अगले ही पल उन्होंने अपना हाथ आगे बढ़ा कर लंड को पकड़ा और उसे आगे पीछे करने लगीं.
मैंने कहा- चूसने का मन है?
वे बोलीं- हां.
मैंने उनके मुँह में लंड दे दिया और उन्होंने लंड को चूस कर गीला कर दिया.
कुछ पल के बाद मैंने भी उनकी चूत पर हाथ फेरा तो वे अपनी गांड उठाने लगीं.
उनका बच्चा ऑपरेशन से हुआ था तो चूत अभी भी टाइट ही थी, ज्यादा ढीली नहीं हुई थी.
फिर मैंने उनके मुँह से लंड निकाला और कहा- अब चुदाई करता हूँ!
उन्होंने गद्दे के नीचे से एक कंडोम निकाल कर मुझे पकड़ा दिया.
मैंने अपने लौड़े को हाथ सहलाया और एक कंडोम चढ़ा लिया.
फिर उनकी गांड के नीचे तकिया लगाया और अपने लंड को उनकी चूत पर सैट कर दिया.
वे अपनी चूत फैलाने के लिए टांगों को कुछ चौड़ा करने लगीं.
उसी पल मैंने हल्का सा धक्का दे दिया तो मेरा आधा लंड चूत के अन्दर घुसता चला गया.
और उनकी हल्की सी चीख निकल गई ‘ऊई मां मर गई …’
फिर मैंने किस करते करते एक और झटका मारा.
जिससे पूरा लंड अन्दर चला गया.
और वे मेरे शरीर को पकड़ कर हल्के से चिल्ला दीं- रुक जा साले … चूत फाड़ेगा क्या?
यह सुनकर मैं थोड़ी देर रुक गया.
फिर जब वे सामान्य हो गईं, उसके बाद मैंने धीरे धीरे आगे पीछे करना आरम्भ किया.
अब उन्हें भी मजा आने लगा था.
फिर ऐसे ही करते करते मैंने 20 मिनट तक ताबड़तोड़ चुदाई की.
उन्हें भी बहुत मजा आया.
मेरा लंड उनकी चूत झड़ने के बाद भी अड़ा हुआ था और वे एकदम ढीली पड़ी हुई थीं.
मेरे जोरदार शॉट लगटे रहने के कारण वे कहने लगीं- आप तो जानवर हो पूरे … आपका कब निकलेगा?
मैंने कहा- बस जब हो जाएगा तो देख लेना!
कुछ देर बाद अब मेरा भी होने वाला था तो मैंने अपने झटके काफी तेज कर दिए थे.
वे चुदाई की अनुभवी थीं तो समझ गई थीं कि मेरा काम तमाम होने वाला है इसलिए वे मुझे झेलती रहीं.
चुदाई करते करते जैसे ही मेरे लंड का काम हो गया, मैं उनके ऊपर गिर गया.
वे मुझे अपनी बांहों में भरकर पड़ी रहीं और मैं अपनी तेज तेज सांसों को नियंत्रित करता हुआ उनके मम्मों पर अपनी छाती को फुलाता पिचकाता रहा.
और सच पूछो तो मुझे भी थोड़ा अजीब लग रहा था क्योंकि पहली बार ऐसा हो रहा था.
फिर वे सज्जन अपने बेटे को लेकर बाहर चले गए.
मैंने मैडम का हाथ पकड़ा और धीरे धीरे बात करना आरंभ की- क्या आप मेरे साथ सहज हैं?
वे- हां, कुछ कुछ सहज हूँ. कुछ देर तक बातें करने से और ज्यादा सहज महसूस करूंगी.
मैंने कहा- क्या आप अपने पति के अलावा किसी दूसरे मर्द से पहली बार सेक्स कर रही हैं?
उन्होंने कहा- हां … पति की जानकारी में पहली बार करने जा रही हूँ!
मैंने कहा- इसका मतलब आप किसी अन्य से भी चुदवा चुकी हैं?
जब मैंने चुदवा चुकी हैं शब्द कहा तो वे मुस्कुरा दीं और बोलीं- शादी के पहले की बात को अभी दुहराने से क्या फायदा!
मैं समझ गया कि यह बात पति कि सुनाई पड़ रही है और वॉइस सेंसर वाले कैमरे से देखा व सुना जा रहा है.
मैंने उनसे कहा- तो अब शुरू करें?
तो उन्होंने अपनी पलकें हिला दीं.
मैंने भी धीरे धीरे उनकी गर्दन पर हाथ फेरा और कहा- अगर कोई प्राब्लम हो तो हम कम्बल के अंदर कर सकते हैं!
उन्होंने कुछ नहीं कहा.
मैंने भी उनकी रजा समझी और कम्बल में आ गया.
चूंकि ठंड का मौसम था तो हम दोनों कम्बल के अन्दर घुस गए.
मैंने उन्हें अपनी ओर खींचा और उनके होंठों पर अपने होंठ लगा दिए.
शुरुआत में मैडम हिचकीं, पर बाद में हम दोनों ने किस करना शुरू कर दिया.
धीरे धीरे वे भी मेरा साथ देने लगीं.
किस करने से गर्मी बढ़ी तो मैंने कम्बल हटा दिया और उनके होंठों का रस पीते हुए ही उनके कपड़े उतार दिए.
उन्होंने भी मेरी टी-शर्ट उतार दी.
मैं उनके बूब्स दबाने लगा और वे आहें भरने लगी थीं.
मैं अब उनके मम्मों पर आ गया और निप्पल को मुँह में भर कर चूसने लगा.
एक को चूसते हुए मैं दूसरे को दबा रहा था.
उन्हें अपने मम्मे चुसवाने में बड़ा मजा आ रहा था तो वे मेरे मुँह में अपने हाथ से अपने निप्पल को दे रही थीं और आह आह करती हुई मेरे हाथ से अपने दूसरे दूध की मां चुदवा रही थीं.
मैंने उनके दूध को मुँह से निकाला और कहा- कैसा लग रहा है?
वे बोलीं- जबरदस्त लग रहा है … आज काफी समय बाद मेरे दूध किसी ने इस तरह से चूसे हैं!
मैंने कहा- तो लेट कर चुसवाने का मन है!
वे राजी हो गईं.
मैंने कहा- जब लंड की सवारी करोगी, तब दूध पिलाना!
उन्होंने ओके कहा.
इसके बाद मैंने उनकी सलवार और पैंटी भी उतार फेंकी.
अब वे मेरे सामने एकदम बिना कपड़ों के थीं.
मैं टूट पड़ा और उन्होंने भी मेरी पैंट व अंडरवियर को हटा दिया.
जैसे ही उन्होंने मेरा लंड देखा, उनकी आंखें फट गईं.
वे हैरानी से लंड को देखती हुई बोलीं- इतना बड़ा!
मैंने भी कहा- हां क्यों … पहले नहीं देखा क्या?
वे मेरी आंखों में आंखें डालकर हंसने लगीं.
अगले ही पल उन्होंने अपना हाथ आगे बढ़ा कर लंड को पकड़ा और उसे आगे पीछे करने लगीं.
मैंने कहा- चूसने का मन है?
वे बोलीं- हां.
मैंने उनके मुँह में लंड दे दिया और उन्होंने लंड को चूस कर गीला कर दिया.
कुछ पल के बाद मैंने भी उनकी चूत पर हाथ फेरा तो वे अपनी गांड उठाने लगीं.
उनका बच्चा ऑपरेशन से हुआ था तो चूत अभी भी टाइट ही थी, ज्यादा ढीली नहीं हुई थी.
फिर मैंने उनके मुँह से लंड निकाला और कहा- अब चुदाई करता हूँ!
उन्होंने गद्दे के नीचे से एक कंडोम निकाल कर मुझे पकड़ा दिया.
मैंने अपने लौड़े को हाथ सहलाया और एक कंडोम चढ़ा लिया.
फिर उनकी गांड के नीचे तकिया लगाया और अपने लंड को उनकी चूत पर सैट कर दिया.
वे अपनी चूत फैलाने के लिए टांगों को कुछ चौड़ा करने लगीं.
उसी पल मैंने हल्का सा धक्का दे दिया तो मेरा आधा लंड चूत के अन्दर घुसता चला गया.
और उनकी हल्की सी चीख निकल गई ‘ऊई मां मर गई …’
फिर मैंने किस करते करते एक और झटका मारा.
जिससे पूरा लंड अन्दर चला गया.
और वे मेरे शरीर को पकड़ कर हल्के से चिल्ला दीं- रुक जा साले … चूत फाड़ेगा क्या?
यह सुनकर मैं थोड़ी देर रुक गया.
फिर जब वे सामान्य हो गईं, उसके बाद मैंने धीरे धीरे आगे पीछे करना आरम्भ किया.
अब उन्हें भी मजा आने लगा था.
फिर ऐसे ही करते करते मैंने 20 मिनट तक ताबड़तोड़ चुदाई की.
उन्हें भी बहुत मजा आया.
मेरा लंड उनकी चूत झड़ने के बाद भी अड़ा हुआ था और वे एकदम ढीली पड़ी हुई थीं.
मेरे जोरदार शॉट लगटे रहने के कारण वे कहने लगीं- आप तो जानवर हो पूरे … आपका कब निकलेगा?
मैंने कहा- बस जब हो जाएगा तो देख लेना!
कुछ देर बाद अब मेरा भी होने वाला था तो मैंने अपने झटके काफी तेज कर दिए थे.
वे चुदाई की अनुभवी थीं तो समझ गई थीं कि मेरा काम तमाम होने वाला है इसलिए वे मुझे झेलती रहीं.
चुदाई करते करते जैसे ही मेरे लंड का काम हो गया, मैं उनके ऊपर गिर गया.
वे मुझे अपनी बांहों में भरकर पड़ी रहीं और मैं अपनी तेज तेज सांसों को नियंत्रित करता हुआ उनके मम्मों पर अपनी छाती को फुलाता पिचकाता रहा.
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शायद उन्हें यह अच्छा लग रहा था. इसलिए हम दोनों काफ़ी देर तक साथ में ही लेटे रहे थे.
उसके बाद हम उठे, बाथरूम गए और अपने आपको साफ किया.
फिर कपड़े पहन कर रूम से बाहर आ गए.
मैंने उनके Xxx ककोल्ड हसबैंड के साथ मिल कर काफ़ी देर तक बात की.
उन्होंने मुझे पैसे दिए और बोले कि जब जरूरत होगी, तो वापस बुलाऊंगा!
मैंने भी कहा- ठीक है सर!
मैं अपने घर आ गया.
थोड़ी देर बाद उनका मैसेज आया- यार, क्या बात है, मेरी वाइफ तुमसे बहुत खुश हुई है. वह तो मुझसे मिलते ही कहने लगी कि अगली बार से यही आएगा, थैंक्स यार.
उसके बाद हमारी काफ़ी बात होती रहती थी और मैंने यह सब बात अभी भी प्राइवेट रखी है.
उसके बाद हम उठे, बाथरूम गए और अपने आपको साफ किया.
फिर कपड़े पहन कर रूम से बाहर आ गए.
मैंने उनके Xxx ककोल्ड हसबैंड के साथ मिल कर काफ़ी देर तक बात की.
उन्होंने मुझे पैसे दिए और बोले कि जब जरूरत होगी, तो वापस बुलाऊंगा!
मैंने भी कहा- ठीक है सर!
मैं अपने घर आ गया.
थोड़ी देर बाद उनका मैसेज आया- यार, क्या बात है, मेरी वाइफ तुमसे बहुत खुश हुई है. वह तो मुझसे मिलते ही कहने लगी कि अगली बार से यही आएगा, थैंक्स यार.
उसके बाद हमारी काफ़ी बात होती रहती थी और मैंने यह सब बात अभी भी प्राइवेट रखी है.
ANTARVASANA KAHANIYAN:
💦💦💦💦💦💦
अनजान लड़की की चुत चुदाई का मजा
💦💦💦💦💦💦
सेक्स की कहानी में पढ़ें कि कैसे ऑटो में एक सेक्सी भाभी मेरे साथ जाती थी.एक दिन बारिश में मैं कार ले गया तो भाभी को लिफ्ट दे दी. उसके बाद क्या हुआ?
दोस्तो, कैसे है आप सभी लोग!
मेरा नाम सागर है और मैं 28 साल का हूँ. मेरा लंड 8 इंच लंबा और काफी मोटा है.
आज मैं आप लोगों के सामने अपनी एक सच्ची सेक्स की कहानी पेश कर रहा हूँ.
मुझे पूरा यकीन है कि मेरी ये सेक्स कहानी पढ़ने के बाद लड़कियों और भाभियों की चूत में खुजली शुरू हो जाएगी और लड़के दो बार मुठ जरूर मारेंगे.
वैसे मैं आप लोगों को बता दूँ कि मुझे भाभियों को चोदना बहुत अच्छा लगता है.
खासकर उन भाभियों के साथ चुदाई का मजा ज्यादा आता है, जिनके एक या दो बच्चे हों.
उनके साथ चुदाई में किसी भी तरह की कोई प्रॉब्लम नहीं होती है.
उनको जैसे चाहो, वैसे चोद लो. होटल में, रूम में … उनकी लेने में, कहीं कोई दिक्कत नहीं होती है.
सेक्स की कहानी आज से 2 साल पहले की उन भाभी की है जो दो बच्चों की मां थीं लेकिन भाभी को देखकर कोई भी ये नहीं बोल सकता था कि इनके दो बच्चे होंगे.
मैं रोज की तरह अपने आफिस ऑटो से जा रहा था.
तभी मेरे पास एक भाभी आकर बैठ गईं.
वो थोड़ा जल्दी में दिख रही थीं और उनके चेहरे पर एक अजीब सी उदासी भी दिख रही थी.
मैंने भाभी को ताड़ना शुरू किया तो वो मुझे एक मस्त माल लग रही थीं.
मैं बस उनको देखता रहा. फिर जहां भाभी को जाना था, वो वहां उतर कर चली गईं.
उनके जाने के बाद मैं अब भी उनकी ही यादों में खोया था.
उस दिन मेरा मन काम में जरा भी नहीं लगा और न आफिस में किसी और से बात करने में मन लगा.
मेरे दिल और दिमाग बस वो ऑटो वाली भाभी छाई हुई थीं.
अगले दिन नसीब से फिर से वही भाभी अपनी उसी हालत में मेरे ऑटो में आकर बैठ गई थीं.
आज जब भाभी ऑटो में बैठ रही थीं, तब अचानक से मेरा एक हाथ भाभी के नरम बूब से टकरा गया.
मुझे एकदम से झटका सा लगा.
आज वो मेरे बिल्कुल पास बैठ गई थीं. भाभी की टांगें मेरी टांगों से चिपकी हुई थीं.
भाभी ने आज कुर्ती और स्लैक्स पहनी थी.
जब उनकी टांगें मुझसे चिपकीं, तो मेरे तो तनबदन में मानो आग सी लग गई.
भाभी एकदम अप्सरा सी लग रही थीं, लेकिन न जाने वो क्यों गुमसुम सी रहती थीं.
अब भाभी लगभग रोज ही मेरे साथ ऑटो में जाने लगी थीं.
एक दिन सुबह से ही बारिश हो रही थी तो मैं उस दिन अपनी कार लेकर गया था.
जब उधर से वापस आ रहा था तब वो ऑटो के इन्तजार में खड़ी थीं और बारिश में भीग रही थीं.
मेरी नजर भाभी पर पड़ी तो मैं कार रोक कर उनको देखने लगा.
भाभी बड़ी मस्त माल लग रही थीं.
उस दिन भाभी ने ब्लू कलर की कुर्ती पहनी थी और सफेद रंग की स्लैक्स पहनी थी.
बारिश में भीगने की वजह से उनकी कुर्ती और स्लैक्स उनके बदन से चिपक गए थे और उनकी लाल ब्रा और काली पैंटी का रंग एकदम साफ दिख रहा था.
भाभी के मोटे मोटे बूब्स साफ़ नजर आ रहे थे और बारिश में भीग कर उनकी कुर्ती उसकी गांड से बिल्कुल चिपक गयी थी, जिससे उनकी मस्त गांड का आकार एकदम साफ दिख रहा था.
उनके गीले बाल जब उनके गालों पर आ रहे थे, तब वो और ज्यादा खूबसूरत दिख रही थीं.
मैंने कार उनके पास रोकी और उनसे कहा- अरे आप तो पूरी भीग रही हैं. कार में आ जाओ भाभी जी, मैं आपको आपके घर तक ड्रॉप कर देता हूं.
पहले तो वो बोलीं- मैं आपको पहचानती नहीं हूँ.
उनकी आवाज़ इतनी मीठी थी कि क्या बताऊं.
मैंने कहा- भाभी आप रोज जिस ऑटो से जाती हो, मैं भी उसी से जाता हूं और अब आप ज्यादा सवाल मत करो. अगर आप ज्यादा भीग गईं, तो बीमार हो जाएंगी.
भाभी के मना करने पर भी मैंने उनको अपनी कार में बैठा लिया.
वो ठंड से कांप रही थीं.
मैंने कार का हीटर चालू कर दिया जिससे उनको थोड़ा आराम मिलता दिखने लगा.
मैंने भाभी से उनका नाम पूछा, तो उन्होंने अपना नाम रूही बताया.
मैंने कहा- मैं रोज आपको देखता हूं, आप किसी आफिस में काम करती हैं न!
वो बोलीं- हां, मैं पास ही एक आफिस में काम करती हूं.
फिर मैंने उनसे उनके परिवार के बारे पूछा.
तो उन्होंने बताया कि मेरे दो बच्चे हैं और मेरे हस्बैंड बाहर जॉब करते हैं.
जब मैं अपनी कार के गेयर बदल रहा था तो मेरा हाथ बार बार उनकी जांघों को छू रहा था.
उनका वो स्पर्श मेरे अन्दर काम वासना को उत्तेजित कर रहा था.
बस मैं ये ही सोच रहा था कि कैसे मैं इस भाभी की मदमस्त जवानी का रसपान कर पाऊं.
भाभी मुझे अपने घर का रास्ता बताती जा रही थीं और मैं उनके बताए रास्ते पर कार दौड़ाए चला जा रहा था.
तभी भाभी ने एक घर के सामने कार रुकवाई और मुझसे कहा- आप अन्दर आ जाओ, चाय पीकर जाना.
मैंने कहा- ओके.
उन्होंने घर का गेट खोला तो अन्दर उनके दोनों बच्चे थे, जो 4 साल और 2 साल के थे.
भाभी के बच्चे एक आया के पास रहते थे. भाभी के आने पर वो आया बच्चों को लेकर अन्दर के कमरे में चली गई.
💦💦💦💦💦💦
अनजान लड़की की चुत चुदाई का मजा
💦💦💦💦💦💦
सेक्स की कहानी में पढ़ें कि कैसे ऑटो में एक सेक्सी भाभी मेरे साथ जाती थी.एक दिन बारिश में मैं कार ले गया तो भाभी को लिफ्ट दे दी. उसके बाद क्या हुआ?
दोस्तो, कैसे है आप सभी लोग!
मेरा नाम सागर है और मैं 28 साल का हूँ. मेरा लंड 8 इंच लंबा और काफी मोटा है.
आज मैं आप लोगों के सामने अपनी एक सच्ची सेक्स की कहानी पेश कर रहा हूँ.
मुझे पूरा यकीन है कि मेरी ये सेक्स कहानी पढ़ने के बाद लड़कियों और भाभियों की चूत में खुजली शुरू हो जाएगी और लड़के दो बार मुठ जरूर मारेंगे.
वैसे मैं आप लोगों को बता दूँ कि मुझे भाभियों को चोदना बहुत अच्छा लगता है.
खासकर उन भाभियों के साथ चुदाई का मजा ज्यादा आता है, जिनके एक या दो बच्चे हों.
उनके साथ चुदाई में किसी भी तरह की कोई प्रॉब्लम नहीं होती है.
उनको जैसे चाहो, वैसे चोद लो. होटल में, रूम में … उनकी लेने में, कहीं कोई दिक्कत नहीं होती है.
सेक्स की कहानी आज से 2 साल पहले की उन भाभी की है जो दो बच्चों की मां थीं लेकिन भाभी को देखकर कोई भी ये नहीं बोल सकता था कि इनके दो बच्चे होंगे.
मैं रोज की तरह अपने आफिस ऑटो से जा रहा था.
तभी मेरे पास एक भाभी आकर बैठ गईं.
वो थोड़ा जल्दी में दिख रही थीं और उनके चेहरे पर एक अजीब सी उदासी भी दिख रही थी.
मैंने भाभी को ताड़ना शुरू किया तो वो मुझे एक मस्त माल लग रही थीं.
मैं बस उनको देखता रहा. फिर जहां भाभी को जाना था, वो वहां उतर कर चली गईं.
उनके जाने के बाद मैं अब भी उनकी ही यादों में खोया था.
उस दिन मेरा मन काम में जरा भी नहीं लगा और न आफिस में किसी और से बात करने में मन लगा.
मेरे दिल और दिमाग बस वो ऑटो वाली भाभी छाई हुई थीं.
अगले दिन नसीब से फिर से वही भाभी अपनी उसी हालत में मेरे ऑटो में आकर बैठ गई थीं.
आज जब भाभी ऑटो में बैठ रही थीं, तब अचानक से मेरा एक हाथ भाभी के नरम बूब से टकरा गया.
मुझे एकदम से झटका सा लगा.
आज वो मेरे बिल्कुल पास बैठ गई थीं. भाभी की टांगें मेरी टांगों से चिपकी हुई थीं.
भाभी ने आज कुर्ती और स्लैक्स पहनी थी.
जब उनकी टांगें मुझसे चिपकीं, तो मेरे तो तनबदन में मानो आग सी लग गई.
भाभी एकदम अप्सरा सी लग रही थीं, लेकिन न जाने वो क्यों गुमसुम सी रहती थीं.
अब भाभी लगभग रोज ही मेरे साथ ऑटो में जाने लगी थीं.
एक दिन सुबह से ही बारिश हो रही थी तो मैं उस दिन अपनी कार लेकर गया था.
जब उधर से वापस आ रहा था तब वो ऑटो के इन्तजार में खड़ी थीं और बारिश में भीग रही थीं.
मेरी नजर भाभी पर पड़ी तो मैं कार रोक कर उनको देखने लगा.
भाभी बड़ी मस्त माल लग रही थीं.
उस दिन भाभी ने ब्लू कलर की कुर्ती पहनी थी और सफेद रंग की स्लैक्स पहनी थी.
बारिश में भीगने की वजह से उनकी कुर्ती और स्लैक्स उनके बदन से चिपक गए थे और उनकी लाल ब्रा और काली पैंटी का रंग एकदम साफ दिख रहा था.
भाभी के मोटे मोटे बूब्स साफ़ नजर आ रहे थे और बारिश में भीग कर उनकी कुर्ती उसकी गांड से बिल्कुल चिपक गयी थी, जिससे उनकी मस्त गांड का आकार एकदम साफ दिख रहा था.
उनके गीले बाल जब उनके गालों पर आ रहे थे, तब वो और ज्यादा खूबसूरत दिख रही थीं.
मैंने कार उनके पास रोकी और उनसे कहा- अरे आप तो पूरी भीग रही हैं. कार में आ जाओ भाभी जी, मैं आपको आपके घर तक ड्रॉप कर देता हूं.
पहले तो वो बोलीं- मैं आपको पहचानती नहीं हूँ.
उनकी आवाज़ इतनी मीठी थी कि क्या बताऊं.
मैंने कहा- भाभी आप रोज जिस ऑटो से जाती हो, मैं भी उसी से जाता हूं और अब आप ज्यादा सवाल मत करो. अगर आप ज्यादा भीग गईं, तो बीमार हो जाएंगी.
भाभी के मना करने पर भी मैंने उनको अपनी कार में बैठा लिया.
वो ठंड से कांप रही थीं.
मैंने कार का हीटर चालू कर दिया जिससे उनको थोड़ा आराम मिलता दिखने लगा.
मैंने भाभी से उनका नाम पूछा, तो उन्होंने अपना नाम रूही बताया.
मैंने कहा- मैं रोज आपको देखता हूं, आप किसी आफिस में काम करती हैं न!
वो बोलीं- हां, मैं पास ही एक आफिस में काम करती हूं.
फिर मैंने उनसे उनके परिवार के बारे पूछा.
तो उन्होंने बताया कि मेरे दो बच्चे हैं और मेरे हस्बैंड बाहर जॉब करते हैं.
जब मैं अपनी कार के गेयर बदल रहा था तो मेरा हाथ बार बार उनकी जांघों को छू रहा था.
उनका वो स्पर्श मेरे अन्दर काम वासना को उत्तेजित कर रहा था.
बस मैं ये ही सोच रहा था कि कैसे मैं इस भाभी की मदमस्त जवानी का रसपान कर पाऊं.
भाभी मुझे अपने घर का रास्ता बताती जा रही थीं और मैं उनके बताए रास्ते पर कार दौड़ाए चला जा रहा था.
तभी भाभी ने एक घर के सामने कार रुकवाई और मुझसे कहा- आप अन्दर आ जाओ, चाय पीकर जाना.
मैंने कहा- ओके.
उन्होंने घर का गेट खोला तो अन्दर उनके दोनों बच्चे थे, जो 4 साल और 2 साल के थे.
भाभी के बच्चे एक आया के पास रहते थे. भाभी के आने पर वो आया बच्चों को लेकर अन्दर के कमरे में चली गई.
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मैं वहीं सोफे पर बैठ गया और वो बाथरूम में चेंज करने चली गईं.
मेरे दिमाग में बस अब रूही भाभी की चुदाई का भूत सवार हो गया था.
मैं उठा और चुपचाप उनके बाथरूम की तरफ चला गया. वहां एक होल से उनको देखने लगा.
अन्दर का नज़ारा देख कर मैं चौंक गया. रूही भाभी सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं, उनके मोटे मोटे बूब्स उनकी ब्रा को फाड़ कर बाहर आना चाह रहे थे.
उन्होंने भी अपने मम्मों को अपनी ब्रा से आज़ाद कर दिया और बूब्स बाहर फुदकने लगे.
भाभी के दूध एकदम गोल टाइट थे और निप्पल एकदम सुर्ख लाल थे.
वो अपने मम्मों को बड़े प्यार से एक तौलिए से पौंछने लगीं.
तभी मेरी नजर उनकी टांगों के बीच में पड़ी, उनकी जांघें एकदम चिकनी थीं. तभी भाभी ने अपनी पैंटी भी उतार दी.
आह क्या मस्त चुत थी उनकी … एकदम चिकनी.
भाभी की चुत पर एक भी बाल नहीं था.
वो उधर अपनी चुत को साफ करने लगीं, इधर मेरा लंड मेरी पैंट को फाड़कर बाहर आने लगा था.
भाभी ने अब एक गाउन पहना और मैं वापस अपनी जगह आकर बैठ गया.
वो जब बाहर आईं, तो ब्रा न पहनने के कारण उनके बूब्स इधर उधर हो रहे थे.
गाउन का गला बड़ा होने की वजह से उनके बूब्स की घाटी साफ दिख रही थी.
मुझसे अब और कंट्रोल नहीं हो रहा था. मेरा मन कर रहा था कि मैं अभी रूही भाभी को चोद दूँ.
रूही भाभी मुझसे बोलीं- आप बैठो … मैं चाय बनाकर लाती हूँ.
वो रसोई में चली गईं.
मैं अपने लंड को सहलाने लगा. अब बस मैं ये सोच रहा था कि कैसे रूही भाभी की चुत चोद लूं.
फिर मुझे पता नहीं क्या हुआ और मैं उनके पीछे पीछे रसोई में चला गया.
मैंने उनको पीछे से पकड़ लिया.
भाभी मेरी इस हरकत से एकदम चौंक गईं और मुझसे बोलीं- ये क्या बदतमीजी है.
उन्होंने मुझे एक धक्का दे दिया.
मैं वहां से जाने को हुआ.
फिर पता नहीं अचानक से मुझे क्या हुआ और मैं फिर रूही भाभी के गाउन को पीछे से उठा कर उनकी कमर और गांड पर पागलों की तरह किस करने लगा.
मेरे इस तरह से किस करने की वजह से भाभी भी शायद गर्म हो गयी थीं.
भाभी मेरी तरफ घूम कर मुझे देखने लगीं और वो भी मुझे किस करने लगीं.
मैंने उनको वहीं रसोई की स्लैब पर बैठा दिया और उनकी टांगें खोल दीं.
अपने होंठों को मैंने उनके नर्म होंठों पर रख दिया और उनके मम्मों को सहलाने लगा.
वो बोलीं- मैं उसी समय से तुमसे चुदना चाह रही थी, जब तुम मेरी जांघों को टच कर रहे थे.
मैंने कहा- फिर आपने मुझे धक्का क्यों दिया?
भाभी मुस्कुराने लगीं और बोलीं- तुम्हारा दम चैक कर रही थी कि तुम्हारे अन्दर कितनी हिम्मत है कि तुम मुझे चोद सको.
मैं भाभी को वासना से देखने लगा.
भाभी और ज्यादा हॉट हो गई थीं.
फिर वो मुझको होंठों पर किस करते करते मुझे अपने बेडरूम में ले गईं.
वहां उन्होंने मुझको बेड पर बैठा दिया.
मैंने उनका गाउन ऊपर किया और उनके पेट और नाभि पर किस करने लगा.
वो मेरे बालों को खींचती रहीं.
फिर मैंने भाभी को बेड पर लेटा दिया और उनकी टांगें खोलकर उनके पेट और बूब्स दबाकर किस करने लगा.
मैंने उनका जल्दी से गाउन उतार दिया. अब वो मेरे सामने एकदम नंगी थीं.
मैं पागलों की तरह भाभी के मम्मों को अपने होंठों से चूसने लगा और उनके बदन को मसलने लगा.
कभी मैं भाभी की जांघों पर किस करने लगता … तो कभी उनके पेट पर चूमने लगता.
मैंने भाभी की चुत पर अपनी जीभ रख दी और उनकी चुत के दाने को सहलाने लगा.
इससे भाभी वासना में तड़पने लगीं.
फिर मैंने भाभी को उल्टा लेटाया और उनके बाल आगे करके कमर से पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया.
भाभी की गांड मेरे सामने आ गई थी तो मैं उनकी गांड के छेद को पागलों की तरह चाटने लगा.
कुछ देर बाद भाभी ने मेरी टी-शर्ट और पैंट उतार दी. मेरा फौलादी लंड उनके सामने हिल रहा था.
मेरा कड़क लंड देख कर वो चौंक गईं लेकिन कुछ बोली नहीं.
फिर मैंने भाभी को सीधा लेटाया और उनकी चुत पर अपना लंड रख दिया.
भाभी ने चुत उठाई तो मैंने एक तेज धक्का दे मारा जिससे मेरा आधा लंड चुत के अन्दर घुस गया.
एकदम से भाभी की चीख निकली और साथ में आंखों से आंसू भी निकल गए.
मैं भाभी के आंसुओं को पी गया.
आप लोगों को मैं क्या बताऊं … जब मेरा लंड उनकी चुत में घुसा तब मुझे कैसा फील हुआ.
वो आनन्द मैं आपको शब्दों में नहीं बता सकता हूँ.
थोड़ी देर बाद मैंने एक धक्का और मार दिया. इस बार मेरा समूचा लंड भाभी की चुत में समा गया.
मैं जोर जोर से रूही भाभी की चूत को चोदने लगा.
मैं इस समय भाभी को इतनी तेज रफ्तार से चोद रहा था कि पूरा बेड हिल रहा था.
मैंने रूही से पूछा- कैसा लग रहा है?
वो कुछ नहीं बोलीं और मुझसे कस कर चिपक गईं.
भाभी ने अपनी दोनों टांगें मेरे कमर में फंसा दीं.
मैं और जोर से रूही भाभी की चुदाई करने लगा.
कुछ मिनट बाद मैंने रूही भाभी की चूत को अपने लंड के गर्म माल से भर दिया और उनके ऊपर ही लेट गया.
मेरे दिमाग में बस अब रूही भाभी की चुदाई का भूत सवार हो गया था.
मैं उठा और चुपचाप उनके बाथरूम की तरफ चला गया. वहां एक होल से उनको देखने लगा.
अन्दर का नज़ारा देख कर मैं चौंक गया. रूही भाभी सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं, उनके मोटे मोटे बूब्स उनकी ब्रा को फाड़ कर बाहर आना चाह रहे थे.
उन्होंने भी अपने मम्मों को अपनी ब्रा से आज़ाद कर दिया और बूब्स बाहर फुदकने लगे.
भाभी के दूध एकदम गोल टाइट थे और निप्पल एकदम सुर्ख लाल थे.
वो अपने मम्मों को बड़े प्यार से एक तौलिए से पौंछने लगीं.
तभी मेरी नजर उनकी टांगों के बीच में पड़ी, उनकी जांघें एकदम चिकनी थीं. तभी भाभी ने अपनी पैंटी भी उतार दी.
आह क्या मस्त चुत थी उनकी … एकदम चिकनी.
भाभी की चुत पर एक भी बाल नहीं था.
वो उधर अपनी चुत को साफ करने लगीं, इधर मेरा लंड मेरी पैंट को फाड़कर बाहर आने लगा था.
भाभी ने अब एक गाउन पहना और मैं वापस अपनी जगह आकर बैठ गया.
वो जब बाहर आईं, तो ब्रा न पहनने के कारण उनके बूब्स इधर उधर हो रहे थे.
गाउन का गला बड़ा होने की वजह से उनके बूब्स की घाटी साफ दिख रही थी.
मुझसे अब और कंट्रोल नहीं हो रहा था. मेरा मन कर रहा था कि मैं अभी रूही भाभी को चोद दूँ.
रूही भाभी मुझसे बोलीं- आप बैठो … मैं चाय बनाकर लाती हूँ.
वो रसोई में चली गईं.
मैं अपने लंड को सहलाने लगा. अब बस मैं ये सोच रहा था कि कैसे रूही भाभी की चुत चोद लूं.
फिर मुझे पता नहीं क्या हुआ और मैं उनके पीछे पीछे रसोई में चला गया.
मैंने उनको पीछे से पकड़ लिया.
भाभी मेरी इस हरकत से एकदम चौंक गईं और मुझसे बोलीं- ये क्या बदतमीजी है.
उन्होंने मुझे एक धक्का दे दिया.
मैं वहां से जाने को हुआ.
फिर पता नहीं अचानक से मुझे क्या हुआ और मैं फिर रूही भाभी के गाउन को पीछे से उठा कर उनकी कमर और गांड पर पागलों की तरह किस करने लगा.
मेरे इस तरह से किस करने की वजह से भाभी भी शायद गर्म हो गयी थीं.
भाभी मेरी तरफ घूम कर मुझे देखने लगीं और वो भी मुझे किस करने लगीं.
मैंने उनको वहीं रसोई की स्लैब पर बैठा दिया और उनकी टांगें खोल दीं.
अपने होंठों को मैंने उनके नर्म होंठों पर रख दिया और उनके मम्मों को सहलाने लगा.
वो बोलीं- मैं उसी समय से तुमसे चुदना चाह रही थी, जब तुम मेरी जांघों को टच कर रहे थे.
मैंने कहा- फिर आपने मुझे धक्का क्यों दिया?
भाभी मुस्कुराने लगीं और बोलीं- तुम्हारा दम चैक कर रही थी कि तुम्हारे अन्दर कितनी हिम्मत है कि तुम मुझे चोद सको.
मैं भाभी को वासना से देखने लगा.
भाभी और ज्यादा हॉट हो गई थीं.
फिर वो मुझको होंठों पर किस करते करते मुझे अपने बेडरूम में ले गईं.
वहां उन्होंने मुझको बेड पर बैठा दिया.
मैंने उनका गाउन ऊपर किया और उनके पेट और नाभि पर किस करने लगा.
वो मेरे बालों को खींचती रहीं.
फिर मैंने भाभी को बेड पर लेटा दिया और उनकी टांगें खोलकर उनके पेट और बूब्स दबाकर किस करने लगा.
मैंने उनका जल्दी से गाउन उतार दिया. अब वो मेरे सामने एकदम नंगी थीं.
मैं पागलों की तरह भाभी के मम्मों को अपने होंठों से चूसने लगा और उनके बदन को मसलने लगा.
कभी मैं भाभी की जांघों पर किस करने लगता … तो कभी उनके पेट पर चूमने लगता.
मैंने भाभी की चुत पर अपनी जीभ रख दी और उनकी चुत के दाने को सहलाने लगा.
इससे भाभी वासना में तड़पने लगीं.
फिर मैंने भाभी को उल्टा लेटाया और उनके बाल आगे करके कमर से पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया.
भाभी की गांड मेरे सामने आ गई थी तो मैं उनकी गांड के छेद को पागलों की तरह चाटने लगा.
कुछ देर बाद भाभी ने मेरी टी-शर्ट और पैंट उतार दी. मेरा फौलादी लंड उनके सामने हिल रहा था.
मेरा कड़क लंड देख कर वो चौंक गईं लेकिन कुछ बोली नहीं.
फिर मैंने भाभी को सीधा लेटाया और उनकी चुत पर अपना लंड रख दिया.
भाभी ने चुत उठाई तो मैंने एक तेज धक्का दे मारा जिससे मेरा आधा लंड चुत के अन्दर घुस गया.
एकदम से भाभी की चीख निकली और साथ में आंखों से आंसू भी निकल गए.
मैं भाभी के आंसुओं को पी गया.
आप लोगों को मैं क्या बताऊं … जब मेरा लंड उनकी चुत में घुसा तब मुझे कैसा फील हुआ.
वो आनन्द मैं आपको शब्दों में नहीं बता सकता हूँ.
थोड़ी देर बाद मैंने एक धक्का और मार दिया. इस बार मेरा समूचा लंड भाभी की चुत में समा गया.
मैं जोर जोर से रूही भाभी की चूत को चोदने लगा.
मैं इस समय भाभी को इतनी तेज रफ्तार से चोद रहा था कि पूरा बेड हिल रहा था.
मैंने रूही से पूछा- कैसा लग रहा है?
वो कुछ नहीं बोलीं और मुझसे कस कर चिपक गईं.
भाभी ने अपनी दोनों टांगें मेरे कमर में फंसा दीं.
मैं और जोर से रूही भाभी की चुदाई करने लगा.
कुछ मिनट बाद मैंने रूही भाभी की चूत को अपने लंड के गर्म माल से भर दिया और उनके ऊपर ही लेट गया.
👍2
थोड़ी देर बाद हम दोनों उठे और एक साथ बाथरूम में आ गए.
वहां मैंने फिर से एक बार रूही भाभी की चुदाई की.
फिर मैंने कपड़े पहने और जाने को हुआ तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझसे बोलीं- मुझे तुमसे कुछ बात करनी है.
मैंने पूछा तो उन्होंने मुझे बताया- मेरे हस्बैंड महीने में 3 बार आते हैं और उनका लंड तुम्हारे जितना बड़ा नहीं है. आज तुमने मेरी चुत की प्यास मिटा दी है.
मैंने रूही भाभी से कहा- अब आप जब भी चाहो, मुझसे अपनी प्यास मिटवा सकती हो.
रूही भाभी बोलीं- आज तुम यहीं रुक जाओ और पूरी रात मुझे चोद कर मेरी प्यास मिटा दो.
मैंने कहा- जैसा आपका हुक्म भाभी, पर आपके बच्चे?
भाभी मुस्कुरा कर बोलीं- वो तुम चिंता मत करो. मेरी आया सब जानती है. वो बच्चों को कमरे में ही रखेगी.
मैंने कहा- आया को सब मालूम है, इसका क्या मतलब है भाभी?
भाभी ने हल्की सी स्माइल देते हुए कहा- वो ही मेरी सहारा है.
मैं समझ गया कि भाभी उसके साथ लेस्बियन सेक्स करती होंगी.
उस रात रूही भाभी को मैंने फुल नाईट चोदा.
सुबह तक भाभी की हालत उठने लायक नहीं थी.
अब भाभी मुझसे हर तीसरे दिन चुदती हैं.
अगली कहानी में मैं आपको बताऊंगा कि कैसे मैंने रूही भाभी को उनके घर पर उनके पति की मौजूदगी में चोदा और उनकी आया को भी पेल दिया.
💦💦💦💦💦
पति के बेस्ट फ्रेंड ने मौके का फायदा उठा के चोदा
💦💦💦💦💦
सेक्स प्ले विद ब्यूटीफुल भाभी का मजा मेरे पति के ख़ास दोस्त ने मेरे साथ किया. एक रात मुझे उनके घर में रुकना था पर सोने की जगह की तंगी के कारण मैं अपने पति के दोस्त के साथ सो गयी.
दोस्तो, मेरा नाम सुशीला है. मेरी उम्र 28 साल है।
मेरी शादी मेरे घर वालों ने 20 की उम्र में ही करा दी थी।
मेरे पति का नाम रवि है.
रवि एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं और महीनों महीनों के लिए घर से बाहर रहते हैं।
आज मैं आपके समक्ष एक ऐसी कहानी लाई हूँ जिसे पढ़कर आप लोग अपने हाथों को अपने कंट्रोल में नहीं रख पाएंगे।
यह कहानी मेरे और मेरे पति के बचपन के दोस्त के साथ हुई घटना पर आधारित है।
मैं आपको अपने बारे में बता दूँ कि मेरा रंग एकदम गोरा है और मेरा 36-32-40 का फिगर बहुत ही कातिलाना है.
ऐसा मेरा नहीं मेरे चाहने वालों का कहना है.
रूप रंग की बात खत्म करके सीधे सेक्स प्ले विद ब्यूटीफुल भाभी कहानी पर आती हूँ.
उस दिन मैं अपनी साड़ी लपेट चुकी थी और बालों को आखिरी स्वरूप दे रही थी कि तभी सासु माँ की आवाज़ आयी- तैयार हुई या नहीं? सब लोग आ चुके होंगे. ज्यादा देर नहीं करते अब!
मैं तुरंत कंघा नीचे रखते हुए बोली- हो गया बस!
और कमरे से बाहर निकल गयी।
सासु जी तैयार थी पड़ोसी के यहाँ एक रात्रि जागरण में जाने के लिए।
मैंने तुरंत कमरे को ताला लगाया और सासुजी के साथ पैदल घर से निकल पड़ी।
सासु जी कुछ बोलती हुई चल रही थी पर मैं किन्ही और ख्यालों में थी.
पति को दूसरे शहर गए 4 महीने हो चुके थे और मुझे उनकी बहुत याद आ रही थी, विरह के कुछ महीने काट रही थी।
दस मिनट के बाद ही हम पड़ोस के मकान के सामने खड़े थे.
अंदर काफी चहल पहल थी, रात्रि जागरण का माहौल बन चुका था।
एक बड़े हाल में सारे पुरुष लोगों के लिए व्यवस्था थी।
वहाँ की मेरी भाभी, सहेलियां दूसरे थोड़े छोटे कमरे में थी अपने पीहर और घनिष्ट सहेलियों के साथ!
इसलिए थोड़े अभिवादन के बाद मैंने उनको डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा।
अंदर एक बड़े कमरे में सारी औरतें बैठी बातों में मशगूल थी.
हमारे आते ही उन्होंने स्वागत किया और हम लोग बैठ गए।
कुछ औरतें बातों में मग्न थी, कुछ ने सोने की तैयारी कर ली थी।
पता चला कि पूजा आरती का कार्यक्रम सुबह 5 बजे होने वाला है।
मैं अपने पुराने दिनों और विचारों में खो गयी और अब मध्य रात्रि होने वाली थी.
अब तक सारी औरतें और पुरुष सो चुके थे।
शायद सुबह 5 बजे उठने की तैयारी में!
मगर मेरी आँखों में नींद नहीं थी, भीड़ भरा माहौल देख कर मेरी नींद वैसे भी जा चुकी थी।
मैं कमरे से बाहर लघु शंका के बहाने किसी तरह औरतों के पाँव बचाते हुए बाहर निकली।
तभी सामने मोहित दिखाई दिया, जिसका यह घर था।
एक हंसमुख और मुखर स्वभाव का युवक मेरे पति का हम उम्र!
जब भी किसी फंक्शन में जाता … अपनी बातों से वह समां बाँध लेता।
मुझे ऐसे व्यक्तित्व हमेशा आकर्षित करते हैं।
पिछली बार जब कुछ महीने अपने पति से दूर थी तब जब भी वह मिलता, मेरी कुशलक्षेम जरुर पूछता और मदद के लिए पूछता।
मगर कभी उसे मदद का मौका नहीं दिया।
मुझे देखते ही उसने हँसते हुए सवाल दाग दिया कि मेरे पति कब आने वाले हैं।
मुझे भी पक्का पता नहीं था पर बोल दिया- कुछ और महीने लगेंगे।
फिर उसने पूछा कि मैं अब तक सोई क्यों नहीं जबकि सारे लोग सो चुके थे।
उसने मुझे सुबह 5 बजे के प्रोग्राम के बारे में बताया।
मैंने उसे समझाया- इस भीड़ में मैं नहीं सो सकती।
उसको मुझ पर दया आयी और कुछ सोचने लगा।
वहां मैंने फिर से एक बार रूही भाभी की चुदाई की.
फिर मैंने कपड़े पहने और जाने को हुआ तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझसे बोलीं- मुझे तुमसे कुछ बात करनी है.
मैंने पूछा तो उन्होंने मुझे बताया- मेरे हस्बैंड महीने में 3 बार आते हैं और उनका लंड तुम्हारे जितना बड़ा नहीं है. आज तुमने मेरी चुत की प्यास मिटा दी है.
मैंने रूही भाभी से कहा- अब आप जब भी चाहो, मुझसे अपनी प्यास मिटवा सकती हो.
रूही भाभी बोलीं- आज तुम यहीं रुक जाओ और पूरी रात मुझे चोद कर मेरी प्यास मिटा दो.
मैंने कहा- जैसा आपका हुक्म भाभी, पर आपके बच्चे?
भाभी मुस्कुरा कर बोलीं- वो तुम चिंता मत करो. मेरी आया सब जानती है. वो बच्चों को कमरे में ही रखेगी.
मैंने कहा- आया को सब मालूम है, इसका क्या मतलब है भाभी?
भाभी ने हल्की सी स्माइल देते हुए कहा- वो ही मेरी सहारा है.
मैं समझ गया कि भाभी उसके साथ लेस्बियन सेक्स करती होंगी.
उस रात रूही भाभी को मैंने फुल नाईट चोदा.
सुबह तक भाभी की हालत उठने लायक नहीं थी.
अब भाभी मुझसे हर तीसरे दिन चुदती हैं.
अगली कहानी में मैं आपको बताऊंगा कि कैसे मैंने रूही भाभी को उनके घर पर उनके पति की मौजूदगी में चोदा और उनकी आया को भी पेल दिया.
💦💦💦💦💦
पति के बेस्ट फ्रेंड ने मौके का फायदा उठा के चोदा
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सेक्स प्ले विद ब्यूटीफुल भाभी का मजा मेरे पति के ख़ास दोस्त ने मेरे साथ किया. एक रात मुझे उनके घर में रुकना था पर सोने की जगह की तंगी के कारण मैं अपने पति के दोस्त के साथ सो गयी.
दोस्तो, मेरा नाम सुशीला है. मेरी उम्र 28 साल है।
मेरी शादी मेरे घर वालों ने 20 की उम्र में ही करा दी थी।
मेरे पति का नाम रवि है.
रवि एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं और महीनों महीनों के लिए घर से बाहर रहते हैं।
आज मैं आपके समक्ष एक ऐसी कहानी लाई हूँ जिसे पढ़कर आप लोग अपने हाथों को अपने कंट्रोल में नहीं रख पाएंगे।
यह कहानी मेरे और मेरे पति के बचपन के दोस्त के साथ हुई घटना पर आधारित है।
मैं आपको अपने बारे में बता दूँ कि मेरा रंग एकदम गोरा है और मेरा 36-32-40 का फिगर बहुत ही कातिलाना है.
ऐसा मेरा नहीं मेरे चाहने वालों का कहना है.
रूप रंग की बात खत्म करके सीधे सेक्स प्ले विद ब्यूटीफुल भाभी कहानी पर आती हूँ.
उस दिन मैं अपनी साड़ी लपेट चुकी थी और बालों को आखिरी स्वरूप दे रही थी कि तभी सासु माँ की आवाज़ आयी- तैयार हुई या नहीं? सब लोग आ चुके होंगे. ज्यादा देर नहीं करते अब!
मैं तुरंत कंघा नीचे रखते हुए बोली- हो गया बस!
और कमरे से बाहर निकल गयी।
सासु जी तैयार थी पड़ोसी के यहाँ एक रात्रि जागरण में जाने के लिए।
मैंने तुरंत कमरे को ताला लगाया और सासुजी के साथ पैदल घर से निकल पड़ी।
सासु जी कुछ बोलती हुई चल रही थी पर मैं किन्ही और ख्यालों में थी.
पति को दूसरे शहर गए 4 महीने हो चुके थे और मुझे उनकी बहुत याद आ रही थी, विरह के कुछ महीने काट रही थी।
दस मिनट के बाद ही हम पड़ोस के मकान के सामने खड़े थे.
अंदर काफी चहल पहल थी, रात्रि जागरण का माहौल बन चुका था।
एक बड़े हाल में सारे पुरुष लोगों के लिए व्यवस्था थी।
वहाँ की मेरी भाभी, सहेलियां दूसरे थोड़े छोटे कमरे में थी अपने पीहर और घनिष्ट सहेलियों के साथ!
इसलिए थोड़े अभिवादन के बाद मैंने उनको डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा।
अंदर एक बड़े कमरे में सारी औरतें बैठी बातों में मशगूल थी.
हमारे आते ही उन्होंने स्वागत किया और हम लोग बैठ गए।
कुछ औरतें बातों में मग्न थी, कुछ ने सोने की तैयारी कर ली थी।
पता चला कि पूजा आरती का कार्यक्रम सुबह 5 बजे होने वाला है।
मैं अपने पुराने दिनों और विचारों में खो गयी और अब मध्य रात्रि होने वाली थी.
अब तक सारी औरतें और पुरुष सो चुके थे।
शायद सुबह 5 बजे उठने की तैयारी में!
मगर मेरी आँखों में नींद नहीं थी, भीड़ भरा माहौल देख कर मेरी नींद वैसे भी जा चुकी थी।
मैं कमरे से बाहर लघु शंका के बहाने किसी तरह औरतों के पाँव बचाते हुए बाहर निकली।
तभी सामने मोहित दिखाई दिया, जिसका यह घर था।
एक हंसमुख और मुखर स्वभाव का युवक मेरे पति का हम उम्र!
जब भी किसी फंक्शन में जाता … अपनी बातों से वह समां बाँध लेता।
मुझे ऐसे व्यक्तित्व हमेशा आकर्षित करते हैं।
पिछली बार जब कुछ महीने अपने पति से दूर थी तब जब भी वह मिलता, मेरी कुशलक्षेम जरुर पूछता और मदद के लिए पूछता।
मगर कभी उसे मदद का मौका नहीं दिया।
मुझे देखते ही उसने हँसते हुए सवाल दाग दिया कि मेरे पति कब आने वाले हैं।
मुझे भी पक्का पता नहीं था पर बोल दिया- कुछ और महीने लगेंगे।
फिर उसने पूछा कि मैं अब तक सोई क्यों नहीं जबकि सारे लोग सो चुके थे।
उसने मुझे सुबह 5 बजे के प्रोग्राम के बारे में बताया।
मैंने उसे समझाया- इस भीड़ में मैं नहीं सो सकती।
उसको मुझ पर दया आयी और कुछ सोचने लगा।
उसकी इस उधेड़बुन को देखते हुए मैंने एक सवाल दाग दिया- आप अब तक क्यों नहीं सोये?
उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान तैर गयी और हाथ में पकड़ी कम्बल को थोड़ा उठाते हुए बोला कि उसने अपने सोने का एक विशेष प्रबंध किया है … घर की छत पर!
मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ और पूछा- छत पर तो बहुत मच्छर होंगे. और सुबह होने तक ठण्ड भी बढ़ जाएगी।
वह मेरे सवालों के जवाब के साथ तुरंत तैयार था।
उसने बताया कि उसने एक मच्छरदानी का इंतज़ाम पहले से कर लिया है और ठण्ड के लिए कम्बल लेने ही आया था।
यह कम्बल भी उसने किसी और सोते हुए व्यक्ति के सिरहाने से निकाल कर लिया है।
मैं उसकी इस शरारत पर खिलखिला पड़ी।
मेरे चेहरे पर हंसी देख कर उसको अच्छा लगा और मुझे मदद के रास्ते सोचने लगा।
मैंने मजाक करते हुए कहा- आपके लिए अच्छा है कि विशेष इंतज़ाम है, पर हमारा क्या?
यह बात उसकी दिल को लगी।
उसने मुझे सुझाव दिया कि मैं छत पर मच्छरदानी में सो जाऊं।
मुझे लगा कि वह मजाक कर रहा है.
पर वह इस बात पर गंभीर था।
उसने अब और ज्यादा आग्रह किया तो मैंने उसको टालने के लिए बोल दिया- फिर आप कहाँ सोएंगे?
उसने बोला कि वह नीचे ही सो जायेगा पुरुषों के कमरे में!
मैंने उसका प्रस्ताव यह कहते हुए ठुकरा दिया- यह नहीं हो सकता, सारी महिलाये यहाँ हैं, मैं वहां अकेली जाऊंगी. और किसी को पता लगा तो अच्छा नहीं होगा।
उसने बताया कि छत पर कोई नहीं हैं और मैं छत पर लगे दरवाज़े को अंदर से बंद करके सो सकती हूँ. किसी को पता नहीं चलेगा और सुबह सबके जागने तक वापिस नीचे आ सकती हूँ।
मुझे कुछ और नहीं सूझा तो बहाना मार दिया- मैं वहाँ अकेले नहीं सो सकती, डर लगता है।
कुछ सोचने के बाद वह बोला कि वह मेरे साथ सो जायेगा।
उसके यह कहते ही एक चुप्पी सी छा गयी।
उसे अहसास हुआ कि उसने क्या बोल दिया.
और तुरंत अपनी बात सुधारते हुए बोला कि वह पास में ही दूसरा बिस्तर लगा कर सो जाएगा।
मैंने तुरंत मना कर दिया कि मेरी वजह से मैं उसको मच्छरों का भोजन नहीं बना सकती।
वह अपने आप को लाचार महसूस करने लगा।
हमेशा मदद के लिए ऑफर करने वाला आज मदद मांगने पर नहीं कर पा रहा था।
उसने अपना आखिरी प्रस्ताव रखा- मच्छरदानी पलंग के साइज की हैं जिसमें दो लोग आसानी से सो सकते हैं. और अगर मुझे आपत्ति ना हो तो हम दोनों वहां सो सकते हैं।
मेरे हां कहने का तो कोई सवाल ही पैदा नहीं होता था.
पर अब उसने एक ब्रह्मास्त्र छोड़ा कि अगर मैं उस पर थोड़ा सा भी भरोसा करती हूँ तो हां कर दूँ।
अब मैं बुरी तरह फंस चुकी थी।
न हां कह सकती और न ही ना कह सकती।
एक तरफ कुआं दूसरी तरफ खाई।
ऐसा नहीं था कि मैं उस पर भरोसा नहीं करती।
परन्तु यह समाज … अगर किसी को पता चल गया तो कुछ ना होते हुए भी मुझे बहुत कुछ होने वाला था।
अपने पति को मैं क्या जवाब दूंगी।
मैं हां या ना कुछ कह पाती … उसके पहले ही उसने मुझे निर्देश दिया कि मैं अपनी सासुजी को बोल दूँ कि मैं दूसरे कमरे में भाभी (उसकी पत्नी) के साथ सो रही हूँ. और फिर मैं छत पर आ जाऊं … वह मेरा इंतज़ार करेगा।
यह कहते हुए वह सीढ़ियाँ चढ़ते हुए चला गया।
मेरे पाँव अब जम गए.
फिर मैं औरतों वाले कमरे की तरफ गयी.
सासुजी दूसरे कोने में सो रही थी और उन तक पहुंचने के लिए काफी लोगों को लांघ कर जाना था.
मैंने सासुजी की नींद ख़राब करना ठीक नहीं समझा।
मैं मुड़ कर सीढ़ियों की तरफ भारी कदमों से बढ़ने लगी।
किसी तरह बेमन से मैं छत पर पहुंची.
वहाँ वो मेरा इंतज़ार कर रहा था।
उसने छत के दरवाज़े पर कुण्डी लगाते हुए मुझे आश्वासन दिया- चिंता ना करो, किसी को पता नहीं चलेगा।
उसने अच्छे से गद्दा लगा रखा था और मच्छरदानी के अंदर दो तकिये लगे हुए थे।
कहीं से उसने मेरे लिए दूसरे तकिये का इंतज़ाम कर लिया था … शायद फिर किसी के सिर के नीचे से खींच कर!
अब हम दोनों एक ही बिस्तर पर आस पास लेटे आसमान को निहार रहे थे।
चांदनी रात थी, आसमान साफ़ था तारों से भरा हुआ!
बहुत खुशनुमा रात का मौसम था।
हल्की सी हवा चल रही थी पर ठण्ड शुरू नहीं हुई थी इसलिए कम्बल एक कोने में पड़ा था।
थोड़ी देर हम ऐसे ही बातें करते रहे.
फिर थोड़ी ख़ामोशी … और पता ही नहीं चला कब मेरी आँख लग गयी।
अचानक मैंने अपने सीने पर कुछ हलचल महसूस की और मेरी नींद टूट गयी.
पर आँखें अभी भी बंद ही थी।
मैंने महसूस किया कि कुछ उंगलियां मेरे ब्लाउज के हुक को खोल रही थी।
मैं डर से काँप उठी … क्या यह उसी की हरकत है?
अब मैं क्या कर सकती थी … अगर चिल्लाई तो लोग पूछेंगे कि मैं यहाँ अकेले क्यों आयी और मुझ पर ही शक करेंगे।
मैंने आँखें बंद किये हुए ही कुछ इंतज़ार करना ठीक समझा।
तब तक सारे हुक खुल चुके थे और मेरे खुले ब्लाउज के अंदर कुछ हवा प्रवेश कर गयी।
मैं फिर से कांप उठी और एक अनिष्ट की आशंका से गिर गयी।
अब मैं इंतज़ार करने लगी कि आगे क्या गलत होने वाला है।
उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान तैर गयी और हाथ में पकड़ी कम्बल को थोड़ा उठाते हुए बोला कि उसने अपने सोने का एक विशेष प्रबंध किया है … घर की छत पर!
मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ और पूछा- छत पर तो बहुत मच्छर होंगे. और सुबह होने तक ठण्ड भी बढ़ जाएगी।
वह मेरे सवालों के जवाब के साथ तुरंत तैयार था।
उसने बताया कि उसने एक मच्छरदानी का इंतज़ाम पहले से कर लिया है और ठण्ड के लिए कम्बल लेने ही आया था।
यह कम्बल भी उसने किसी और सोते हुए व्यक्ति के सिरहाने से निकाल कर लिया है।
मैं उसकी इस शरारत पर खिलखिला पड़ी।
मेरे चेहरे पर हंसी देख कर उसको अच्छा लगा और मुझे मदद के रास्ते सोचने लगा।
मैंने मजाक करते हुए कहा- आपके लिए अच्छा है कि विशेष इंतज़ाम है, पर हमारा क्या?
यह बात उसकी दिल को लगी।
उसने मुझे सुझाव दिया कि मैं छत पर मच्छरदानी में सो जाऊं।
मुझे लगा कि वह मजाक कर रहा है.
पर वह इस बात पर गंभीर था।
उसने अब और ज्यादा आग्रह किया तो मैंने उसको टालने के लिए बोल दिया- फिर आप कहाँ सोएंगे?
उसने बोला कि वह नीचे ही सो जायेगा पुरुषों के कमरे में!
मैंने उसका प्रस्ताव यह कहते हुए ठुकरा दिया- यह नहीं हो सकता, सारी महिलाये यहाँ हैं, मैं वहां अकेली जाऊंगी. और किसी को पता लगा तो अच्छा नहीं होगा।
उसने बताया कि छत पर कोई नहीं हैं और मैं छत पर लगे दरवाज़े को अंदर से बंद करके सो सकती हूँ. किसी को पता नहीं चलेगा और सुबह सबके जागने तक वापिस नीचे आ सकती हूँ।
मुझे कुछ और नहीं सूझा तो बहाना मार दिया- मैं वहाँ अकेले नहीं सो सकती, डर लगता है।
कुछ सोचने के बाद वह बोला कि वह मेरे साथ सो जायेगा।
उसके यह कहते ही एक चुप्पी सी छा गयी।
उसे अहसास हुआ कि उसने क्या बोल दिया.
और तुरंत अपनी बात सुधारते हुए बोला कि वह पास में ही दूसरा बिस्तर लगा कर सो जाएगा।
मैंने तुरंत मना कर दिया कि मेरी वजह से मैं उसको मच्छरों का भोजन नहीं बना सकती।
वह अपने आप को लाचार महसूस करने लगा।
हमेशा मदद के लिए ऑफर करने वाला आज मदद मांगने पर नहीं कर पा रहा था।
उसने अपना आखिरी प्रस्ताव रखा- मच्छरदानी पलंग के साइज की हैं जिसमें दो लोग आसानी से सो सकते हैं. और अगर मुझे आपत्ति ना हो तो हम दोनों वहां सो सकते हैं।
मेरे हां कहने का तो कोई सवाल ही पैदा नहीं होता था.
पर अब उसने एक ब्रह्मास्त्र छोड़ा कि अगर मैं उस पर थोड़ा सा भी भरोसा करती हूँ तो हां कर दूँ।
अब मैं बुरी तरह फंस चुकी थी।
न हां कह सकती और न ही ना कह सकती।
एक तरफ कुआं दूसरी तरफ खाई।
ऐसा नहीं था कि मैं उस पर भरोसा नहीं करती।
परन्तु यह समाज … अगर किसी को पता चल गया तो कुछ ना होते हुए भी मुझे बहुत कुछ होने वाला था।
अपने पति को मैं क्या जवाब दूंगी।
मैं हां या ना कुछ कह पाती … उसके पहले ही उसने मुझे निर्देश दिया कि मैं अपनी सासुजी को बोल दूँ कि मैं दूसरे कमरे में भाभी (उसकी पत्नी) के साथ सो रही हूँ. और फिर मैं छत पर आ जाऊं … वह मेरा इंतज़ार करेगा।
यह कहते हुए वह सीढ़ियाँ चढ़ते हुए चला गया।
मेरे पाँव अब जम गए.
फिर मैं औरतों वाले कमरे की तरफ गयी.
सासुजी दूसरे कोने में सो रही थी और उन तक पहुंचने के लिए काफी लोगों को लांघ कर जाना था.
मैंने सासुजी की नींद ख़राब करना ठीक नहीं समझा।
मैं मुड़ कर सीढ़ियों की तरफ भारी कदमों से बढ़ने लगी।
किसी तरह बेमन से मैं छत पर पहुंची.
वहाँ वो मेरा इंतज़ार कर रहा था।
उसने छत के दरवाज़े पर कुण्डी लगाते हुए मुझे आश्वासन दिया- चिंता ना करो, किसी को पता नहीं चलेगा।
उसने अच्छे से गद्दा लगा रखा था और मच्छरदानी के अंदर दो तकिये लगे हुए थे।
कहीं से उसने मेरे लिए दूसरे तकिये का इंतज़ाम कर लिया था … शायद फिर किसी के सिर के नीचे से खींच कर!
अब हम दोनों एक ही बिस्तर पर आस पास लेटे आसमान को निहार रहे थे।
चांदनी रात थी, आसमान साफ़ था तारों से भरा हुआ!
बहुत खुशनुमा रात का मौसम था।
हल्की सी हवा चल रही थी पर ठण्ड शुरू नहीं हुई थी इसलिए कम्बल एक कोने में पड़ा था।
थोड़ी देर हम ऐसे ही बातें करते रहे.
फिर थोड़ी ख़ामोशी … और पता ही नहीं चला कब मेरी आँख लग गयी।
अचानक मैंने अपने सीने पर कुछ हलचल महसूस की और मेरी नींद टूट गयी.
पर आँखें अभी भी बंद ही थी।
मैंने महसूस किया कि कुछ उंगलियां मेरे ब्लाउज के हुक को खोल रही थी।
मैं डर से काँप उठी … क्या यह उसी की हरकत है?
अब मैं क्या कर सकती थी … अगर चिल्लाई तो लोग पूछेंगे कि मैं यहाँ अकेले क्यों आयी और मुझ पर ही शक करेंगे।
मैंने आँखें बंद किये हुए ही कुछ इंतज़ार करना ठीक समझा।
तब तक सारे हुक खुल चुके थे और मेरे खुले ब्लाउज के अंदर कुछ हवा प्रवेश कर गयी।
मैं फिर से कांप उठी और एक अनिष्ट की आशंका से गिर गयी।
अब मैं इंतज़ार करने लगी कि आगे क्या गलत होने वाला है।
अब उसका हाथ मेरे पेट पर था.
पूरे 4 महीने बाद किसी पुरुष ने मुझे छुआ था, पूरे शरीर में एक तरंग सी दौड़ गयी।
कुछ मजा भी आ रहा था पर डर ज्यादा था।
उसने अब मेरे पेटीकोट से साड़ी की पटली निकालने की कोशिश की जिसमें वह कामयाब नहीं हुआ.
शायद मेरे जाग जाने के डर से उसने ज्यादा ताकत नहीं लगाई।
मैंने चैन की सांस ली।
अब उसने मेरा ब्लाउज सामने से और खुला कर दिया.
शायद वह मेरे स्तन देखना चाहता था.
पर कसी हुई ब्रा की वजह से कुछ हो नहीं पाया।
ब्रा का हुक पीठ पर था और मैं पीठ के बल ही सोई थी.
इस बात की मुझे ख़ुशी थी।
वह चाहते हुए भी ब्रा नहीं खोल सकता था।
कुछ मिनट ऐसे ही निकल गए और वह मेरी कमर और ऊपरी सीने पर ऐसे ही हाथ मलता रहा.
फिर जब उसे अहसास हुआ कि कुछ होने वाला नहीं तो उसने मेरे ब्लाउज के हुक वापिस लगा दिए।
मैंने चैन की लम्बी सांस ली और थोड़ी देर बाद कब फिर आँख लग गयी पता ही नहीं चला।
मेरी नींद में दूसरी बार व्यवधान आया.
इस बार मैं करवट लेकर उसकी और पीठ करके सोई हुई थी इसलिए आँखें खोली.
अभी भी गहरी चांदनी रात थी और नींद खुलने का कारण वही था।
पर थोड़ी देर हो चुकी थी, ब्लाउज के सारे हुक खुल चुके थे।
फिर से मेरे अंदर डर की लहर कौंध गयी कि इस बार कैसे बचूंगी क्योंकि मैं करवट लेकर सोई थी और ब्रा का हुक उसकी तरफ था।
कुछ सोच पाती, उसके पहले ही खट की आवाज़ से ब्रा का हुक खुल चुका था और अचानक सीने पर कस के बाँधा हुआ प्रोटेक्शन ढीला हो चुका था।
मैंने एक साये को अपने चेहरे की तरफ आते महसूस किया और तुरंत अपनी आँखें बंद कर ली।
उसके हाथों ने अब मेरी ब्रा, मेरे शरीर के एक महत्पूर्ण अंग से उठा दिया और हवा की लहरें अब मेरे स्तनों को छू रही थी।
उस साये में मैंने महसूस किया कि अब वह मेरे शरीर के उस भाग को घूर रहा हैं जिसे देखने की असफल कोशिश उसने कुछ देर पहले ही की थी.
पर अब वो कामयाब हो चुका था।
मैं अपने आप को कोसने लगी कि क्यों मैंने करवट ली।
और उससे भी पहले क्यों मैं उसको ना नहीं बोल पाई छत पर आने के लिए।
पर अब क्या हो सकता था … या अब भी बहुत कुछ रोका जा सकता था।
अगले कुछ क्षणों के बाद उसने एक हाथ से मेरे स्तन को दबोच लिया था.
मैं अंदर से पूरी तरह सिहर गयी थी।
पर मैं कुछ बोलने या करने की हिम्मत नहीं जुटा पायी और यह प्रार्थना करने लगी कि इससे बुरा कुछ न हो.
या शायद अंदर ही अंदर कहीं से यह चाहती थी कि 4 महीने के एकांतवास को टूटने दिया जाये।
शायद मैं कुछ निर्णय नहीं ले पा रही थी और खुद को भाग्य के हाथों छोड़ दिया था।
कुछ देर ऐसे खेलने के बाद उसके हाथ फिर मेरी साड़ी की पटली की तरफ बढ़े और कुछ सेकंड की जद्दोजहद के बाद पटली पेटीकोट के बाहर थी और अगले कुछ मिनटों में मेरी पूरी साड़ी पेटीकोट से अलग हो चुकी थी।
अब मैं एक अबला की नारी तरह पड़ी थी जिसके शरीर पर सिर्फ पेटीकोट था, ऊपर के वस्त्र सामने से खुले थे।
फिर से एक खट की आवाज़ हुई और मेरे पेटीकोट का नाड़ा खुल चूका था और उसने मेरा पेटीकोट कमर से नीचे खिसकाना शुरू कर दिया।
मैंने आंखें खोली तो पेटीकोट पूरा निकल कर मेरी आँखों के सामने पड़ा चिढ़ा रहा था।
और कुछ सोचने के पहले ही मेरे नीचे के अंगवस्त्र भी निकल कर पेटीकोट का साथ पड़े थे।
अब मुझे अहसास हो चुका था कि बचने का कोई रास्ता नहीं हैं और आत्मसमर्पण कर देना चाहिए या तुरंत उठ कर फटकार लगा देनी चाहिये कि उसकी यह हिम्मत कैसे हुई।
फिर किसी डर की आशंका से या काफी समय से शरीर की जरूरत पूरी नहीं होने की वजह से मैं चुपचाप लेटी रही।
मेरे नग्न शरीर को देख कर अब शायद उसका अपने आप पर नियंत्रण नहीं रहा था और पीछे से उसका शरीर मुझसे चिपका हुआ था और रह रह कर ऊपर नीचे रगड़ रहा था।
उसका एक हाथ मेरे कमर, कूल्हों और स्तनों पर फिर रहा था।
फिर उसने अपना शरीर मुझसे अलग कर लिया.
मुझे लगा कि उसका इरादा बदल गया लगता है और मैं सुरक्षित हूं.
पर मैं गलत थी।
फिर कुछ कपडे निकलने की आवाज़ आयी।
अब मैंने अपने पीछे के निचले हिस्से में एक गर्म बदन का स्पर्श महसूस किया.
मुझे समझते देर नहीं लगी कि उसने क्या किया है।
अब वह पूरा नग्न मुझसे पीछे से फिर चिपक गया।
इस बार शायद कुछ ज्यादा ही जोर से, शायद नग्नावस्था में उसकी इन्द्रियां और सक्रिय हो गयी थी।
उसका लचीला अंग मेरे पुट्ठों को छू गया।
अब शायद कहीं न कहीं मैं अपने आप को तैयार कर चुकी थी एक अनपेक्षित मिलन के लिए।
उसका शरीर बराबर मुझे पीछे से रगड़ रहा था।
मैं महसूस कर पा रही थी कि उसका लचीला अंग धीरे धीरे कठोर होता जा रहा था।
अब वह जोर जोर से मेरे स्तनों को दबाते हुए कुचलने लगा.
पर अब मुझे बुरा नहीं लग रहा था।
कुछ देर बार उसने हाथ स्तनों से हटा लिया।
उसका कठोर अंग अब मेरे दोनों टांगों के बीच खोजी कुत्ते तरह कुछ ढूंढ रहा था।
शायद अंदर प्रवेश का मार्ग … पर मिल नहीं रहा था।
पूरे 4 महीने बाद किसी पुरुष ने मुझे छुआ था, पूरे शरीर में एक तरंग सी दौड़ गयी।
कुछ मजा भी आ रहा था पर डर ज्यादा था।
उसने अब मेरे पेटीकोट से साड़ी की पटली निकालने की कोशिश की जिसमें वह कामयाब नहीं हुआ.
शायद मेरे जाग जाने के डर से उसने ज्यादा ताकत नहीं लगाई।
मैंने चैन की सांस ली।
अब उसने मेरा ब्लाउज सामने से और खुला कर दिया.
शायद वह मेरे स्तन देखना चाहता था.
पर कसी हुई ब्रा की वजह से कुछ हो नहीं पाया।
ब्रा का हुक पीठ पर था और मैं पीठ के बल ही सोई थी.
इस बात की मुझे ख़ुशी थी।
वह चाहते हुए भी ब्रा नहीं खोल सकता था।
कुछ मिनट ऐसे ही निकल गए और वह मेरी कमर और ऊपरी सीने पर ऐसे ही हाथ मलता रहा.
फिर जब उसे अहसास हुआ कि कुछ होने वाला नहीं तो उसने मेरे ब्लाउज के हुक वापिस लगा दिए।
मैंने चैन की लम्बी सांस ली और थोड़ी देर बाद कब फिर आँख लग गयी पता ही नहीं चला।
मेरी नींद में दूसरी बार व्यवधान आया.
इस बार मैं करवट लेकर उसकी और पीठ करके सोई हुई थी इसलिए आँखें खोली.
अभी भी गहरी चांदनी रात थी और नींद खुलने का कारण वही था।
पर थोड़ी देर हो चुकी थी, ब्लाउज के सारे हुक खुल चुके थे।
फिर से मेरे अंदर डर की लहर कौंध गयी कि इस बार कैसे बचूंगी क्योंकि मैं करवट लेकर सोई थी और ब्रा का हुक उसकी तरफ था।
कुछ सोच पाती, उसके पहले ही खट की आवाज़ से ब्रा का हुक खुल चुका था और अचानक सीने पर कस के बाँधा हुआ प्रोटेक्शन ढीला हो चुका था।
मैंने एक साये को अपने चेहरे की तरफ आते महसूस किया और तुरंत अपनी आँखें बंद कर ली।
उसके हाथों ने अब मेरी ब्रा, मेरे शरीर के एक महत्पूर्ण अंग से उठा दिया और हवा की लहरें अब मेरे स्तनों को छू रही थी।
उस साये में मैंने महसूस किया कि अब वह मेरे शरीर के उस भाग को घूर रहा हैं जिसे देखने की असफल कोशिश उसने कुछ देर पहले ही की थी.
पर अब वो कामयाब हो चुका था।
मैं अपने आप को कोसने लगी कि क्यों मैंने करवट ली।
और उससे भी पहले क्यों मैं उसको ना नहीं बोल पाई छत पर आने के लिए।
पर अब क्या हो सकता था … या अब भी बहुत कुछ रोका जा सकता था।
अगले कुछ क्षणों के बाद उसने एक हाथ से मेरे स्तन को दबोच लिया था.
मैं अंदर से पूरी तरह सिहर गयी थी।
पर मैं कुछ बोलने या करने की हिम्मत नहीं जुटा पायी और यह प्रार्थना करने लगी कि इससे बुरा कुछ न हो.
या शायद अंदर ही अंदर कहीं से यह चाहती थी कि 4 महीने के एकांतवास को टूटने दिया जाये।
शायद मैं कुछ निर्णय नहीं ले पा रही थी और खुद को भाग्य के हाथों छोड़ दिया था।
कुछ देर ऐसे खेलने के बाद उसके हाथ फिर मेरी साड़ी की पटली की तरफ बढ़े और कुछ सेकंड की जद्दोजहद के बाद पटली पेटीकोट के बाहर थी और अगले कुछ मिनटों में मेरी पूरी साड़ी पेटीकोट से अलग हो चुकी थी।
अब मैं एक अबला की नारी तरह पड़ी थी जिसके शरीर पर सिर्फ पेटीकोट था, ऊपर के वस्त्र सामने से खुले थे।
फिर से एक खट की आवाज़ हुई और मेरे पेटीकोट का नाड़ा खुल चूका था और उसने मेरा पेटीकोट कमर से नीचे खिसकाना शुरू कर दिया।
मैंने आंखें खोली तो पेटीकोट पूरा निकल कर मेरी आँखों के सामने पड़ा चिढ़ा रहा था।
और कुछ सोचने के पहले ही मेरे नीचे के अंगवस्त्र भी निकल कर पेटीकोट का साथ पड़े थे।
अब मुझे अहसास हो चुका था कि बचने का कोई रास्ता नहीं हैं और आत्मसमर्पण कर देना चाहिए या तुरंत उठ कर फटकार लगा देनी चाहिये कि उसकी यह हिम्मत कैसे हुई।
फिर किसी डर की आशंका से या काफी समय से शरीर की जरूरत पूरी नहीं होने की वजह से मैं चुपचाप लेटी रही।
मेरे नग्न शरीर को देख कर अब शायद उसका अपने आप पर नियंत्रण नहीं रहा था और पीछे से उसका शरीर मुझसे चिपका हुआ था और रह रह कर ऊपर नीचे रगड़ रहा था।
उसका एक हाथ मेरे कमर, कूल्हों और स्तनों पर फिर रहा था।
फिर उसने अपना शरीर मुझसे अलग कर लिया.
मुझे लगा कि उसका इरादा बदल गया लगता है और मैं सुरक्षित हूं.
पर मैं गलत थी।
फिर कुछ कपडे निकलने की आवाज़ आयी।
अब मैंने अपने पीछे के निचले हिस्से में एक गर्म बदन का स्पर्श महसूस किया.
मुझे समझते देर नहीं लगी कि उसने क्या किया है।
अब वह पूरा नग्न मुझसे पीछे से फिर चिपक गया।
इस बार शायद कुछ ज्यादा ही जोर से, शायद नग्नावस्था में उसकी इन्द्रियां और सक्रिय हो गयी थी।
उसका लचीला अंग मेरे पुट्ठों को छू गया।
अब शायद कहीं न कहीं मैं अपने आप को तैयार कर चुकी थी एक अनपेक्षित मिलन के लिए।
उसका शरीर बराबर मुझे पीछे से रगड़ रहा था।
मैं महसूस कर पा रही थी कि उसका लचीला अंग धीरे धीरे कठोर होता जा रहा था।
अब वह जोर जोर से मेरे स्तनों को दबाते हुए कुचलने लगा.
पर अब मुझे बुरा नहीं लग रहा था।
कुछ देर बार उसने हाथ स्तनों से हटा लिया।
उसका कठोर अंग अब मेरे दोनों टांगों के बीच खोजी कुत्ते तरह कुछ ढूंढ रहा था।
शायद अंदर प्रवेश का मार्ग … पर मिल नहीं रहा था।
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