Hindi Antarvasana:
लैब असिस्टेंट का अकेलापन चुदाई से दूर किया
हिंदी चुदाई कहानी में मेरे साथ एक लड़की काम करती थी. उसका उसके पति से झगड़ा हो गया तो उसे सेक्स की कमी लगने लगी. तब हम दोनों ने आपस में सेक्स करके मजा किया.
दोस्तो, मैं राजेंद्र कोटा से!
मेरी पिछली कहानी थी:
भाई की साली को मां बनाया
आज मैं फिर से आपके लिए अपने जीवन की एक सच्ची सेक्स कहानी लेकर आया हूँ.
यह देशी चुदाई कहानी करीब 10 साल पुरानी है.
उस समय मैं एक कॉलेज में लैब असिस्टेंट था.
मेरे साथ एक मैडम थी, वह भी लैब असिस्टेंट थी.
उस मैडम का नाम सीमा था.
हम दोनों का काम स्टूडेंट्स को मदद करना होता था.
वह मैडम देखने में बड़ी हॉट थी और स्कूल के कई टीचर्स उसकी लेने की फिराक में रहते थे.
लेकिन वह किसी को भाव ही नहीं देती थी.
जबकि वह हंसमुख बहुत ही ज्यादा थी.
उसकी इसी आदत के चलते मैं उससे काफी मजाक करता रहता था.
मेरी हमेशा मज़ाक करने की आदत भी थी, इसी वजह से मैं हमेशा कह देता था कि मैडम क्या डेट पर चलोगी?
वह मुस्करा देती थी.
उसने मुझसे कभी कुछ नहीं कहा कि आप मुझसे ऐसी बात नहीं किया करो या कुछ भी गुस्सा वाली बात नहीं दिखाई दी थी.
यदि वह मुझसे एक बार भी कह देती कि आप मुझसे यह सब नहीं कहा करो तो मेरी उसके साथ मजाक करने की कभी हिम्मत ही न होती.
हालांकि मेरे मन में कुछ गलत नहीं था, बस इतना कहने का मन करता था और मैं हमेशा ही ऐसा कहकर उसको छेड़ देता था.
जब स्टूडेंट्स की और टीचर्स की छुट्टियां भी हो जाती थीं, तब भी हम दोनों की ड्यूटी होती थी क्योंकि हम दोनों टीचिंग स्टाफ में नहीं थे.
धीरे धीरे हम दोनों काफी नजदीक आते गए.
साथ में टिफिन शेयर करना, एक दूसरे के काम कर देना, यही सब चलता रहता था.
वह मेरे खाने की बड़ी तारीफ करती थी और मैं उसके हाथ के बने खाने की तारीफ करता था.
मैं रोजाना उसकी आदतों को लेकर तारीफ करता रहता था तो वह कहती- आप झूठे हो, मुझे यूं ही बनाते हो.
मैं भी कह देता- चलो झूठ को ही सच मान लो, क्या घट जाएगा!
इस पर वह हंस पड़ती थी.
एक बार उसने मेरे सामने अपना दुखड़ा रोया कि उसके पति ने उसे छोड़ दिया और वह काफी अकेला महसूस कर रही है.
मैं समझ गया कि इसको क्या अकेलापन लग रहा है.
मैंने उसे दिलासा देते हुए कहा- तुम मुझसे अपने दिल की बात कह कर अपना मन हल्का कर लिया करो.
उसने मेरी तरफ देखा और वह मेरे कंधे से सर लगा कर लंबी लंबी सांसें लेने लगी.
इसी तरह से वह मेरे साथ काफी क्लोज हो गई थी.
गर्मी की छुट्टी में हम दोनों रोजाना कॉलेज जाते थे और लैब में ही होते थे.
उस दौरान टाइम निकालना मुश्किल होता था क्योंकि हमारे पास कोई काम तो होता नहीं था, बस यूं ही बैठ कर समय गुजार देते थे.
एक दिन सीमा मैडम ने कहा- सर आप रोज मुझे कहते हो कि डेट पर चलो, डेट पर चलो. आज बोलो कहां चलना है!
मैं उसकी इस बात को सुन कर एकदम से स्तब्ध रह गया.
मैंने उसकी तरफ सवालिया नजरों से देखा.
तो वह बोली- ये बात किसी से नहीं कहना, मैं सच में आपके साथ चलूँगी.
यह कहती हुई वह मेरे पास आकर बैठ गयी.
वह मेरे काफी करीब बैठी थी, बोली- आपने ही तो कहा था कि अपने दिल की बात मुझसे कह कर अपना मन हल्का कर लिया करो!
मैंने उसकी आंख में आंख डालकर देखा और पूछा- क्या सच में डेट पर चलना है?
वह बोली- हां!
मैंने कहा- मालूम है कि डेट पर चलने का अर्थ क्या होता है?
वह हंस दी और बोली- नहीं मालूम है … आप बताओ कि डेट पर चल कर क्या होता है?
जबाव में मैंने अपना हाथ उसकी जांघ पर रखा, तो उसने भी मेरे हाथ के ऊपर अपना हाथ रख दिया.
मुझे समझ आ गया कि आज यह मुझसे कुछ चाह रही है.
मैंने उसे चूमा, तो वह उठकर गेट के पास गयी और इधर उधर देख कर वापस आ गयी.
आते ही वह मेरी गोद में बैठी और कुछ सेकंड के बाद उठ गयी.
वह वापस दरवाजे के पास चली गयी.
दुबारा से उसने इधर उधर झांक कर देखा और फिर से मेरे पास आकर बैठ गयी.
मैंने उसके गाल पर उंगली फिराई, वह शांत रही.
मैंने उंगली ऊपर से नीचे उसके 36 साइज के मम्मों पर फेरना चालू की, तब भी वह चुप रही.
तब मैंने उसके एक दूध को कसके पकड़ लिया.
उसने एक गहरी सांस ली और हवस भरी निगाहों से मुझे देखने लगी.
अब तक मेरे भी तन बदन में आग लग चुकी थी.
मेरा लंड फनफना रहा था, मेरी भी सांसें तेज हो चुकी थीं.
मैं बार बार लंड पर हाथ रख रहा था.
वह यह नजारा देख रही थी.
फिर मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर ले गया.
जैसे ही उसने मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड पर हाथ रखा, वह ऊपर से नीचे तक सिहर गयी.
उसने अपने होंठों को दांत से काटना शुरू कर दिया और आंख बंद करके लंड को सहलाने लगी.
मैं भी उसकी चूचियों को दबाता हुआ सहला रहा था.
उस दौरान वह अपने होंठों को अपने दांतों से काटती गयी.
उसने कहा- अब मुझसे रहा नहीं जाता!
मैंने कहा- अभी इधर ही डेट पूरी कर लें?
उसने हां में सर हिला दिया.
लैब असिस्टेंट का अकेलापन चुदाई से दूर किया
हिंदी चुदाई कहानी में मेरे साथ एक लड़की काम करती थी. उसका उसके पति से झगड़ा हो गया तो उसे सेक्स की कमी लगने लगी. तब हम दोनों ने आपस में सेक्स करके मजा किया.
दोस्तो, मैं राजेंद्र कोटा से!
मेरी पिछली कहानी थी:
भाई की साली को मां बनाया
आज मैं फिर से आपके लिए अपने जीवन की एक सच्ची सेक्स कहानी लेकर आया हूँ.
यह देशी चुदाई कहानी करीब 10 साल पुरानी है.
उस समय मैं एक कॉलेज में लैब असिस्टेंट था.
मेरे साथ एक मैडम थी, वह भी लैब असिस्टेंट थी.
उस मैडम का नाम सीमा था.
हम दोनों का काम स्टूडेंट्स को मदद करना होता था.
वह मैडम देखने में बड़ी हॉट थी और स्कूल के कई टीचर्स उसकी लेने की फिराक में रहते थे.
लेकिन वह किसी को भाव ही नहीं देती थी.
जबकि वह हंसमुख बहुत ही ज्यादा थी.
उसकी इसी आदत के चलते मैं उससे काफी मजाक करता रहता था.
मेरी हमेशा मज़ाक करने की आदत भी थी, इसी वजह से मैं हमेशा कह देता था कि मैडम क्या डेट पर चलोगी?
वह मुस्करा देती थी.
उसने मुझसे कभी कुछ नहीं कहा कि आप मुझसे ऐसी बात नहीं किया करो या कुछ भी गुस्सा वाली बात नहीं दिखाई दी थी.
यदि वह मुझसे एक बार भी कह देती कि आप मुझसे यह सब नहीं कहा करो तो मेरी उसके साथ मजाक करने की कभी हिम्मत ही न होती.
हालांकि मेरे मन में कुछ गलत नहीं था, बस इतना कहने का मन करता था और मैं हमेशा ही ऐसा कहकर उसको छेड़ देता था.
जब स्टूडेंट्स की और टीचर्स की छुट्टियां भी हो जाती थीं, तब भी हम दोनों की ड्यूटी होती थी क्योंकि हम दोनों टीचिंग स्टाफ में नहीं थे.
धीरे धीरे हम दोनों काफी नजदीक आते गए.
साथ में टिफिन शेयर करना, एक दूसरे के काम कर देना, यही सब चलता रहता था.
वह मेरे खाने की बड़ी तारीफ करती थी और मैं उसके हाथ के बने खाने की तारीफ करता था.
मैं रोजाना उसकी आदतों को लेकर तारीफ करता रहता था तो वह कहती- आप झूठे हो, मुझे यूं ही बनाते हो.
मैं भी कह देता- चलो झूठ को ही सच मान लो, क्या घट जाएगा!
इस पर वह हंस पड़ती थी.
एक बार उसने मेरे सामने अपना दुखड़ा रोया कि उसके पति ने उसे छोड़ दिया और वह काफी अकेला महसूस कर रही है.
मैं समझ गया कि इसको क्या अकेलापन लग रहा है.
मैंने उसे दिलासा देते हुए कहा- तुम मुझसे अपने दिल की बात कह कर अपना मन हल्का कर लिया करो.
उसने मेरी तरफ देखा और वह मेरे कंधे से सर लगा कर लंबी लंबी सांसें लेने लगी.
इसी तरह से वह मेरे साथ काफी क्लोज हो गई थी.
गर्मी की छुट्टी में हम दोनों रोजाना कॉलेज जाते थे और लैब में ही होते थे.
उस दौरान टाइम निकालना मुश्किल होता था क्योंकि हमारे पास कोई काम तो होता नहीं था, बस यूं ही बैठ कर समय गुजार देते थे.
एक दिन सीमा मैडम ने कहा- सर आप रोज मुझे कहते हो कि डेट पर चलो, डेट पर चलो. आज बोलो कहां चलना है!
मैं उसकी इस बात को सुन कर एकदम से स्तब्ध रह गया.
मैंने उसकी तरफ सवालिया नजरों से देखा.
तो वह बोली- ये बात किसी से नहीं कहना, मैं सच में आपके साथ चलूँगी.
यह कहती हुई वह मेरे पास आकर बैठ गयी.
वह मेरे काफी करीब बैठी थी, बोली- आपने ही तो कहा था कि अपने दिल की बात मुझसे कह कर अपना मन हल्का कर लिया करो!
मैंने उसकी आंख में आंख डालकर देखा और पूछा- क्या सच में डेट पर चलना है?
वह बोली- हां!
मैंने कहा- मालूम है कि डेट पर चलने का अर्थ क्या होता है?
वह हंस दी और बोली- नहीं मालूम है … आप बताओ कि डेट पर चल कर क्या होता है?
जबाव में मैंने अपना हाथ उसकी जांघ पर रखा, तो उसने भी मेरे हाथ के ऊपर अपना हाथ रख दिया.
मुझे समझ आ गया कि आज यह मुझसे कुछ चाह रही है.
मैंने उसे चूमा, तो वह उठकर गेट के पास गयी और इधर उधर देख कर वापस आ गयी.
आते ही वह मेरी गोद में बैठी और कुछ सेकंड के बाद उठ गयी.
वह वापस दरवाजे के पास चली गयी.
दुबारा से उसने इधर उधर झांक कर देखा और फिर से मेरे पास आकर बैठ गयी.
मैंने उसके गाल पर उंगली फिराई, वह शांत रही.
मैंने उंगली ऊपर से नीचे उसके 36 साइज के मम्मों पर फेरना चालू की, तब भी वह चुप रही.
तब मैंने उसके एक दूध को कसके पकड़ लिया.
उसने एक गहरी सांस ली और हवस भरी निगाहों से मुझे देखने लगी.
अब तक मेरे भी तन बदन में आग लग चुकी थी.
मेरा लंड फनफना रहा था, मेरी भी सांसें तेज हो चुकी थीं.
मैं बार बार लंड पर हाथ रख रहा था.
वह यह नजारा देख रही थी.
फिर मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर ले गया.
जैसे ही उसने मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड पर हाथ रखा, वह ऊपर से नीचे तक सिहर गयी.
उसने अपने होंठों को दांत से काटना शुरू कर दिया और आंख बंद करके लंड को सहलाने लगी.
मैं भी उसकी चूचियों को दबाता हुआ सहला रहा था.
उस दौरान वह अपने होंठों को अपने दांतों से काटती गयी.
उसने कहा- अब मुझसे रहा नहीं जाता!
मैंने कहा- अभी इधर ही डेट पूरी कर लें?
उसने हां में सर हिला दिया.
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मैं झट से उठ कर फिर से दरवाजे पर आया और देखा कि बाहर कोई है तो नहीं.
उधर कोई नहीं था.
मैं वापस आया.
वह खड़ी थी.
मैंने पीछे से उसे पकड़ा और उसकी दोनों चूचियों को कस कसके दबाने लगा.
उसका हाथ मेरे हाथ के ऊपर था.
जब जब मैं उसकी मस्त चूचियों को दबा रहा था, वह इस्स्स आह की आवाज़ निकाल रही थी.
फिर वह झटके से मेरी तरफ घूम गयी और मुझे पकड़ कर मेरे होंठों पर अपने होंठ ले आयी.
वह मुझे किस करने लगी.
उसका किस एकदम वाइल्ड किस था.
वह अपनी जीभ मेरे मुँह में घुसा रही थी, तो कभी हल्के से दांतों से काट रही थी.
उसके दोनों हाथ मेरे गाल पर आ गए थे और वह चुंबन का मजा ले रही थी.
मैंने भी अपने हाथ उसके पीछे किए और उसके दोनों उभरे हुए चूतड़ों को पकड़ कर जोर से दबाया. ताकि उसकी चूत मेरे लंड के करीब आ जाए.
जैसे ही वह मेरे लौड़े से चूत रगड़ने लगी, मैं जोर जोर से धक्का लगाने लगा.
हम दोनों की बेचैनी बढ़ रही थी, क्योंकि अभी तक हमारे जिस्म से जिस्म मिले नहीं थे. कपड़ों के ऊपर से ही ये सब हो रहा था.
उसने कहा- अब आगे बढ़ो न!
मैंने कहा- आगे बढ़ने के लिए कपड़े हटाने पड़ेंगे … हटा दूँ?
वह कुछ कहती कि तभी कोई कॉरीडोर में आता दिखाई दिया.
मैंने उससे अलग होते हुए कहा- यहां कुछ भी करना ठीक नहीं है.
वह भी अपने कपड़े ठीक करने लगी.
हम दोनों अलग अलग होकर बैठ गए और वह कुछ करने लगी, मैं किताब पढ़ने लगा.
थोड़ी देर बाद ही छुट्टी हो गयी थी.
उस दिन इससे अधिक कुछ भी नहीं हो पाया था.
बस यह था कि वह अपनी प्यास मुझसे बुझवाना चाहती थी, यह बात खुल कर सामने आ गई थी.
उसके बाद शाम को करीब 5 बजे सीमा का फ़ोन आया- सर, क्या कल आप छुट्टी कर सकते हो, मैं भी कल ऑफिस नहीं जाऊंगी … दोनों मिलकर कहीं चलते हैं.
मैंने कहा- हां ठीक है. मैं ऑफिस के लिए ही निकलूंगा, पर ऑफिस नहीं आऊंगा.
सीमा बोली- ठीक है, मैं भी वही करूंगी.
हम दोनों ने प्लान बनाया और एक जगह पर मिलने का तय किया.
मैं बाइक से उसी जगह पर पहुंच गया.
वह वहीं पर दुपट्टा से चेहरा ढक कर खड़ी थी.
फिर हम दोनों एनसीआर में एक होटल में गए.
उधर करीब 11 बजे पहुंच गए थे.
कमरा बुक किया.
हम दोनों जैसे ही कमरे के अन्दर पहुंचे, पागलों की तरह एक दूसरे को चाटने लगे.
एक एक करके सारे कपड़े उतार दिए.
अब वह सिर्फ पैंटी में थी और बेड पर लेटी नशीली आंखों से मुझे निहार रही थी.
क्या खूब लग रही थी.
फिर मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसके मम्मों को मसलने लगा, उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा.
हम दोनों के होंठ और गाल लाल हो गए थे.
मैंने उसके होंठों पर जीभ को फिराना शुरू किया और मम्मों से होते हुए नाभि पर, फिर पैंटी के पास पहुंच गया.
फिर एक गहरी सांस लेकर मैंने पैंटी को सूंघा तो मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी.
मेरा तो लंड खड़ा हो गया था, लौड़े के ऊपर से थोड़ा लसलसा सा पानी भी निकलने लगा था.
मैंने उसकी पैंटी खोली तो देखा उसकी चूत भी पानी पानी हो चुकी थी.
उसकी चूत को मैंने थोड़ा फैला कर देखा तो एकदम टाइट चूत थी.
अन्दर का रंग एकदम गुलाबी था.
मैंने जीभ को लगाया तो वह सिहर गयी और गांड हिलाने लगी.
मैं उसकी चूत पर अपनी जीभ फिराने लगा.
वह अपने दोनों हाथ ऊपर करके तकिए को अपनी मुट्ठी में पकड़ने की कोशिश कर रही थी.
फिर कुछ देर बाद वह अपनी चूत को उछालने लगी.
मैं एक उंगली डाल कर अन्दर बाहर करने लगा.
वह काफी ज्यादा कामुक हो चुकी थी, उसके माथे से पसीना निकलने लगा था.
वह कहने लगी- अब बर्दाश्त के बाहर है, मुझे चोद दो … मेरी वासना की पूर्ति कर दो … मेरा मन भर दो … चोद दो मुझे … आज मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ.
तब वह मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.
वह ऐसे लंड चूस रही थी कि न जाने कितनी प्यासी हो.
मेरे भी तन बदन में आग लग चुकी थी.
मैं उसकी ज्वाला को शांत करने के लिए तैयार था.
जैसे ही उसने मेरा लंड अपने मुँह से निकाला, मैंने उसकी दोनों टांगों को फैला कर उसकी चूत पर लंड का सुपाड़ा रख दिया और एक ही झटके में अन्दर घुसा दिया.
वह ‘आआ अह मर गई …’ की आवाज़ निकालने लगी.
मैं झटके पर झटके दे रहा था और कुछ ही देर में वह भी मजा लेने लगी.
वह कभी अपने बूब मसलती तो कभी मेरे बालों में उंगली फिराती.
इस तरह से मैंने उसे काफी देर तक चोदा और झड़ कर हम दोनों निढाल होकर सो गए.
करीब एक घंटा बाद जब हम दोनों उठे तो एक दूसरे को चूम कर मुस्कुराने लगे.
बहुत तेज भूख लग आई थी.
फिर नीचे जाकर हम दोनों ने खाना खाया और मैंने वहीं मेडिकल स्टोर से सेक्स समय बढ़ाने वाली दवा ले ली.
अब तो हमारे बीच सेक्स और भी ज्यादा वाइल्ड और हार्डकोर हो गया था.
मैंने उसे हचक कर चोदा. उसकी चूत का सत्यानाश कर दिया.
शाम को ऑफिस के टाइम पर ही होटल से अपने अपने घरों को निकल गए.
उसके बाद मैंने कई बार सीमा को चोदा. कई बार उसके घर जाकर भी उसे चोदा.
उधर कोई नहीं था.
मैं वापस आया.
वह खड़ी थी.
मैंने पीछे से उसे पकड़ा और उसकी दोनों चूचियों को कस कसके दबाने लगा.
उसका हाथ मेरे हाथ के ऊपर था.
जब जब मैं उसकी मस्त चूचियों को दबा रहा था, वह इस्स्स आह की आवाज़ निकाल रही थी.
फिर वह झटके से मेरी तरफ घूम गयी और मुझे पकड़ कर मेरे होंठों पर अपने होंठ ले आयी.
वह मुझे किस करने लगी.
उसका किस एकदम वाइल्ड किस था.
वह अपनी जीभ मेरे मुँह में घुसा रही थी, तो कभी हल्के से दांतों से काट रही थी.
उसके दोनों हाथ मेरे गाल पर आ गए थे और वह चुंबन का मजा ले रही थी.
मैंने भी अपने हाथ उसके पीछे किए और उसके दोनों उभरे हुए चूतड़ों को पकड़ कर जोर से दबाया. ताकि उसकी चूत मेरे लंड के करीब आ जाए.
जैसे ही वह मेरे लौड़े से चूत रगड़ने लगी, मैं जोर जोर से धक्का लगाने लगा.
हम दोनों की बेचैनी बढ़ रही थी, क्योंकि अभी तक हमारे जिस्म से जिस्म मिले नहीं थे. कपड़ों के ऊपर से ही ये सब हो रहा था.
उसने कहा- अब आगे बढ़ो न!
मैंने कहा- आगे बढ़ने के लिए कपड़े हटाने पड़ेंगे … हटा दूँ?
वह कुछ कहती कि तभी कोई कॉरीडोर में आता दिखाई दिया.
मैंने उससे अलग होते हुए कहा- यहां कुछ भी करना ठीक नहीं है.
वह भी अपने कपड़े ठीक करने लगी.
हम दोनों अलग अलग होकर बैठ गए और वह कुछ करने लगी, मैं किताब पढ़ने लगा.
थोड़ी देर बाद ही छुट्टी हो गयी थी.
उस दिन इससे अधिक कुछ भी नहीं हो पाया था.
बस यह था कि वह अपनी प्यास मुझसे बुझवाना चाहती थी, यह बात खुल कर सामने आ गई थी.
उसके बाद शाम को करीब 5 बजे सीमा का फ़ोन आया- सर, क्या कल आप छुट्टी कर सकते हो, मैं भी कल ऑफिस नहीं जाऊंगी … दोनों मिलकर कहीं चलते हैं.
मैंने कहा- हां ठीक है. मैं ऑफिस के लिए ही निकलूंगा, पर ऑफिस नहीं आऊंगा.
सीमा बोली- ठीक है, मैं भी वही करूंगी.
हम दोनों ने प्लान बनाया और एक जगह पर मिलने का तय किया.
मैं बाइक से उसी जगह पर पहुंच गया.
वह वहीं पर दुपट्टा से चेहरा ढक कर खड़ी थी.
फिर हम दोनों एनसीआर में एक होटल में गए.
उधर करीब 11 बजे पहुंच गए थे.
कमरा बुक किया.
हम दोनों जैसे ही कमरे के अन्दर पहुंचे, पागलों की तरह एक दूसरे को चाटने लगे.
एक एक करके सारे कपड़े उतार दिए.
अब वह सिर्फ पैंटी में थी और बेड पर लेटी नशीली आंखों से मुझे निहार रही थी.
क्या खूब लग रही थी.
फिर मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसके मम्मों को मसलने लगा, उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा.
हम दोनों के होंठ और गाल लाल हो गए थे.
मैंने उसके होंठों पर जीभ को फिराना शुरू किया और मम्मों से होते हुए नाभि पर, फिर पैंटी के पास पहुंच गया.
फिर एक गहरी सांस लेकर मैंने पैंटी को सूंघा तो मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी.
मेरा तो लंड खड़ा हो गया था, लौड़े के ऊपर से थोड़ा लसलसा सा पानी भी निकलने लगा था.
मैंने उसकी पैंटी खोली तो देखा उसकी चूत भी पानी पानी हो चुकी थी.
उसकी चूत को मैंने थोड़ा फैला कर देखा तो एकदम टाइट चूत थी.
अन्दर का रंग एकदम गुलाबी था.
मैंने जीभ को लगाया तो वह सिहर गयी और गांड हिलाने लगी.
मैं उसकी चूत पर अपनी जीभ फिराने लगा.
वह अपने दोनों हाथ ऊपर करके तकिए को अपनी मुट्ठी में पकड़ने की कोशिश कर रही थी.
फिर कुछ देर बाद वह अपनी चूत को उछालने लगी.
मैं एक उंगली डाल कर अन्दर बाहर करने लगा.
वह काफी ज्यादा कामुक हो चुकी थी, उसके माथे से पसीना निकलने लगा था.
वह कहने लगी- अब बर्दाश्त के बाहर है, मुझे चोद दो … मेरी वासना की पूर्ति कर दो … मेरा मन भर दो … चोद दो मुझे … आज मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ.
तब वह मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.
वह ऐसे लंड चूस रही थी कि न जाने कितनी प्यासी हो.
मेरे भी तन बदन में आग लग चुकी थी.
मैं उसकी ज्वाला को शांत करने के लिए तैयार था.
जैसे ही उसने मेरा लंड अपने मुँह से निकाला, मैंने उसकी दोनों टांगों को फैला कर उसकी चूत पर लंड का सुपाड़ा रख दिया और एक ही झटके में अन्दर घुसा दिया.
वह ‘आआ अह मर गई …’ की आवाज़ निकालने लगी.
मैं झटके पर झटके दे रहा था और कुछ ही देर में वह भी मजा लेने लगी.
वह कभी अपने बूब मसलती तो कभी मेरे बालों में उंगली फिराती.
इस तरह से मैंने उसे काफी देर तक चोदा और झड़ कर हम दोनों निढाल होकर सो गए.
करीब एक घंटा बाद जब हम दोनों उठे तो एक दूसरे को चूम कर मुस्कुराने लगे.
बहुत तेज भूख लग आई थी.
फिर नीचे जाकर हम दोनों ने खाना खाया और मैंने वहीं मेडिकल स्टोर से सेक्स समय बढ़ाने वाली दवा ले ली.
अब तो हमारे बीच सेक्स और भी ज्यादा वाइल्ड और हार्डकोर हो गया था.
मैंने उसे हचक कर चोदा. उसकी चूत का सत्यानाश कर दिया.
शाम को ऑफिस के टाइम पर ही होटल से अपने अपने घरों को निकल गए.
उसके बाद मैंने कई बार सीमा को चोदा. कई बार उसके घर जाकर भी उसे चोदा.
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Antarvasana story:
फेसबुक पर मिली लड़की को होटल में XX....
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम अमोल है और मैं अहमदनगर शहर का निवासी हूं।
मेरी उम्र 28 साल है. मेरा रंग गोरा है और मेरी हाइट 5 फीट 6 इंच है. मेरे लंड का साइज 7 इंच है और इसकी मोटाई भी अच्छी है.
दोस्तो, यह कहानी है जब मे फेसबुक पर सेक्स कहानियाँ लिखता हु तब मुझे फेसबुक पर एक लड़की मिली जिसे मेरी कहानियाँ पसंद आयी थी जिसको मैंने उसके शहर में जाकर सेक्स का मजा दिया.
वैसे तो मेरी गर्लफ्रेंड से रह चुकी हैं और मैंने बहुत बार चुदाई की है पर यह लड़की मुझे लॉकडाउन के समय फेसबुक पर मिली जिसको मैंने होटल में चोदा !
दोस्तो, मैंने लॉकडाउन में भारी अंतर के चलते फेसबुक पर कहानियाँ लिखना शुरु किया।वहां मैंने अपनी सुंदर सुंदर फोटो लगा दी ताकि मेरी प्रोफाइल अच्छी लगे और अपने बारे में लिख दिया।
उसके बाद मेरी बहुत लड़कियों से बात हुई.
परंतु एक लड़की से बात हुई जोकि पुणे में रहती थी।
लड़की का नाम श्रेया था.
शुरू शुरू में हमारी नॉर्मल बातें हुई जैसे कि आप क्या करते हैं कहां रहते हैं।यह सब एक महीने तक चलता रहा.
उसके बाद हमारी थोड़ी बहुत नॉनवेज बातें होने लग गई और 1 महीने तक हम चुदाई की बातें भी करने लगे।
वह बहुत टाइम से सिंगल थी और लगभग 1 साल से चुदी नहीं थी.
पर मैंने तो मार्च में ही चुदाई की थी और मन तो मेरा भी बहुत कर रहा था किसी की चूत चोदने के लिए!
मेरा लंड हमेशा तैयार रहता था.
श्रेया का रंग गोरा था. उसकी हाइट 5 फुट 7 इंच के करीब थी, शरीर भरा हुआ था. उसके बूब्ज़ 36 इंच के थे और उसकी गांड उससे भी बड़ी 40 इंच की थी।
काम के चलते हम मिल नहीं सकते थे तो वह वीडियो कॉल कर मुझे अपनी चूची और अपनी गांड दिखाया करती थी और मैं उसे देखकर अपना लंड हिलाता था।
श्रेया शुरू से ही हॉट थी वह वीडियो कॉल पर भी अपनी चूत में उंगली करके मुझे दिखाती थी और अपनी चूत में उंगली करते हुए मुझे वीडियो भेजती थी।
हम दोनों एक दूसरे से चुदाई की बातें करके गर्म हो जाते थे और इंतजार कर रहे थे कि कब मिलकर एक दूसरे की आग बुझायें।
और बहुत सब्र करने के बाद वह दिन आया हम दोनों को मिलने का मौका मिला।
उसने उसके ही शहर में पुणे में एक होटल में रूम बुक किया.वह अपनी सहेली के घर रुकने का बहाना लगाकर मुझसे मिलने आई।उसे पता था कि आज हम पूरी रात चुदाई करने वाले हैं.
हमने होटल में एंट्री की और रूम में चले गए। अब हमारे पास पूरी रात थी।वहां जाकर हम ने चेंज किया और अपने नाइट सूट पहन लिए।वह अपने घर से ही पीने के लिए फ्लेवर्ड हुक्का लेकर आई थी। उसने सुलगाया और उसमें फ्लेवर डालकर करके कश लगाने लगी।फिर उसने एक बीयर मंगवाई और पूरी बीयर खत्म कर गई।
उसके बाद हमने खाना खाया और थोड़ी बहुत बातें की.
उसके बाद उसने एक बीयर और खत्म कर दी जिससे उसे नशा हो गया।और फिर उसने मुझे अपनी बांहों में ले लिया, मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर चूसने लगी।10 से 15 मिनट तक हम दोनों एक दूसरे के होंठ चूसते रहे और मैं उसकी गांड से खेलता रहा.हम दोनों गर्म होने लगे थे।
उससे बीयर चढ़ गई थी, उसने मेरी गर्दन पर अपने होंठ रख कर चूसना शुरू कर दिया और मैंने भी उसके गर्दन पर अपनी जीभ फेरने शुरू कर दी।गर्दन चूमते चूमते मेरे हाथ उसकी गर्दन पर चल रहे थे और मैं उसकी गांड दबा रहा था।इतने में मैंने उसे उल्टा घुमा कर उसकी गर्दन के पीछे किस करनी शुरू कर दी और दोनों हाथों से उसकी चूचियां दबाने शुरू कर दी.वो आहें भरने लगी और मेरा लंड टाइट होने लगा।उसने अपना हाथ पीछे करके मेरा लंड पकड़ लिया और मेरे लंड से खेलने लगी।उसके बाद वह वापस घूम गई और उसने मेरे होंठ चूसने शुरू कर दिये।
10 मिनट तक हमारी किस चली और उसके बाद मैंने उसकी चूचियां जोर जोर से दबाने शुरू कर दी.फिर मैंने उसकी टी-शर्ट को ऊपर कर दिया और ब्रा में से उसकी चूचियां दबाने लगा।उसके हाथ मेरी गर्दन पर थे और मैंने उसकी ब्रा उतार कर उसकी बाई तरफ वाली वाली चुची को अपने मुंह में भर लिया और उसके निप्पल चूसने लगा और साथ में अपने हाथ से दाईं तरफ वाली चूची को दबाने लगा।उसके मुंह से सिसकारियां निकल रही थी- आह अआह!
अभी तक हमें यह सब खड़े होकर कर रहे थे पर तब मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया. उसकी दोनों चूचियों को अपने मुंह में लेकर खेलने लगा. कभी मैं उसकी बायीं तरफ वाली वाली चूची को चूस रहा था और कभी दायीं तरफ वाली।फिर मैंने उसके पेट पर किस करना शुरू कर दिया और उसकी नाभि में जीभ डालने लगा.वो पागलों की तरह मेरे बालों में हाथ से रही थी।उसके पेट को चूमते हुए मैं उसकी नाभि में जीभ डालकर चाटने लगा और फिर दोबारा से मैंने उसकी चूचियां मुंह में डाल दी।
फेसबुक पर मिली लड़की को होटल में XX....
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम अमोल है और मैं अहमदनगर शहर का निवासी हूं।
मेरी उम्र 28 साल है. मेरा रंग गोरा है और मेरी हाइट 5 फीट 6 इंच है. मेरे लंड का साइज 7 इंच है और इसकी मोटाई भी अच्छी है.
दोस्तो, यह कहानी है जब मे फेसबुक पर सेक्स कहानियाँ लिखता हु तब मुझे फेसबुक पर एक लड़की मिली जिसे मेरी कहानियाँ पसंद आयी थी जिसको मैंने उसके शहर में जाकर सेक्स का मजा दिया.
वैसे तो मेरी गर्लफ्रेंड से रह चुकी हैं और मैंने बहुत बार चुदाई की है पर यह लड़की मुझे लॉकडाउन के समय फेसबुक पर मिली जिसको मैंने होटल में चोदा !
दोस्तो, मैंने लॉकडाउन में भारी अंतर के चलते फेसबुक पर कहानियाँ लिखना शुरु किया।वहां मैंने अपनी सुंदर सुंदर फोटो लगा दी ताकि मेरी प्रोफाइल अच्छी लगे और अपने बारे में लिख दिया।
उसके बाद मेरी बहुत लड़कियों से बात हुई.
परंतु एक लड़की से बात हुई जोकि पुणे में रहती थी।
लड़की का नाम श्रेया था.
शुरू शुरू में हमारी नॉर्मल बातें हुई जैसे कि आप क्या करते हैं कहां रहते हैं।यह सब एक महीने तक चलता रहा.
उसके बाद हमारी थोड़ी बहुत नॉनवेज बातें होने लग गई और 1 महीने तक हम चुदाई की बातें भी करने लगे।
वह बहुत टाइम से सिंगल थी और लगभग 1 साल से चुदी नहीं थी.
पर मैंने तो मार्च में ही चुदाई की थी और मन तो मेरा भी बहुत कर रहा था किसी की चूत चोदने के लिए!
मेरा लंड हमेशा तैयार रहता था.
श्रेया का रंग गोरा था. उसकी हाइट 5 फुट 7 इंच के करीब थी, शरीर भरा हुआ था. उसके बूब्ज़ 36 इंच के थे और उसकी गांड उससे भी बड़ी 40 इंच की थी।
काम के चलते हम मिल नहीं सकते थे तो वह वीडियो कॉल कर मुझे अपनी चूची और अपनी गांड दिखाया करती थी और मैं उसे देखकर अपना लंड हिलाता था।
श्रेया शुरू से ही हॉट थी वह वीडियो कॉल पर भी अपनी चूत में उंगली करके मुझे दिखाती थी और अपनी चूत में उंगली करते हुए मुझे वीडियो भेजती थी।
हम दोनों एक दूसरे से चुदाई की बातें करके गर्म हो जाते थे और इंतजार कर रहे थे कि कब मिलकर एक दूसरे की आग बुझायें।
और बहुत सब्र करने के बाद वह दिन आया हम दोनों को मिलने का मौका मिला।
उसने उसके ही शहर में पुणे में एक होटल में रूम बुक किया.वह अपनी सहेली के घर रुकने का बहाना लगाकर मुझसे मिलने आई।उसे पता था कि आज हम पूरी रात चुदाई करने वाले हैं.
हमने होटल में एंट्री की और रूम में चले गए। अब हमारे पास पूरी रात थी।वहां जाकर हम ने चेंज किया और अपने नाइट सूट पहन लिए।वह अपने घर से ही पीने के लिए फ्लेवर्ड हुक्का लेकर आई थी। उसने सुलगाया और उसमें फ्लेवर डालकर करके कश लगाने लगी।फिर उसने एक बीयर मंगवाई और पूरी बीयर खत्म कर गई।
उसके बाद हमने खाना खाया और थोड़ी बहुत बातें की.
उसके बाद उसने एक बीयर और खत्म कर दी जिससे उसे नशा हो गया।और फिर उसने मुझे अपनी बांहों में ले लिया, मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर चूसने लगी।10 से 15 मिनट तक हम दोनों एक दूसरे के होंठ चूसते रहे और मैं उसकी गांड से खेलता रहा.हम दोनों गर्म होने लगे थे।
उससे बीयर चढ़ गई थी, उसने मेरी गर्दन पर अपने होंठ रख कर चूसना शुरू कर दिया और मैंने भी उसके गर्दन पर अपनी जीभ फेरने शुरू कर दी।गर्दन चूमते चूमते मेरे हाथ उसकी गर्दन पर चल रहे थे और मैं उसकी गांड दबा रहा था।इतने में मैंने उसे उल्टा घुमा कर उसकी गर्दन के पीछे किस करनी शुरू कर दी और दोनों हाथों से उसकी चूचियां दबाने शुरू कर दी.वो आहें भरने लगी और मेरा लंड टाइट होने लगा।उसने अपना हाथ पीछे करके मेरा लंड पकड़ लिया और मेरे लंड से खेलने लगी।उसके बाद वह वापस घूम गई और उसने मेरे होंठ चूसने शुरू कर दिये।
10 मिनट तक हमारी किस चली और उसके बाद मैंने उसकी चूचियां जोर जोर से दबाने शुरू कर दी.फिर मैंने उसकी टी-शर्ट को ऊपर कर दिया और ब्रा में से उसकी चूचियां दबाने लगा।उसके हाथ मेरी गर्दन पर थे और मैंने उसकी ब्रा उतार कर उसकी बाई तरफ वाली वाली चुची को अपने मुंह में भर लिया और उसके निप्पल चूसने लगा और साथ में अपने हाथ से दाईं तरफ वाली चूची को दबाने लगा।उसके मुंह से सिसकारियां निकल रही थी- आह अआह!
अभी तक हमें यह सब खड़े होकर कर रहे थे पर तब मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया. उसकी दोनों चूचियों को अपने मुंह में लेकर खेलने लगा. कभी मैं उसकी बायीं तरफ वाली वाली चूची को चूस रहा था और कभी दायीं तरफ वाली।फिर मैंने उसके पेट पर किस करना शुरू कर दिया और उसकी नाभि में जीभ डालने लगा.वो पागलों की तरह मेरे बालों में हाथ से रही थी।उसके पेट को चूमते हुए मैं उसकी नाभि में जीभ डालकर चाटने लगा और फिर दोबारा से मैंने उसकी चूचियां मुंह में डाल दी।
फिर मैंने नीचे जाकर उसका पजामा उतारा और उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को चूमने लगा।
उसकी चूत की खुशबू मुझे पागल कर रही थी।मैंने उसकी पैंटी उतारी और उसकी चूत को ऊपर से चाटने लगा।
वो पागल हो गई और सिसकारियां भरने लगी- आह आह आह!उसने अपना मेरा मुंह अपनी चूत पर दबा दिया और अपनी कमर हिला कर अपनी चूत चटवाने लगी।उसके बाद हम 69 पोजीशन में आ गए और मैंने घूम कर अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया।
उसकी चूत चाटने में मुझे बहुत मजा आ रहा था और उसने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया।
वह बिल्कुल आइसक्रीम की तरह लंड चूस रही थी और पूरा लंड मुंह में अंदर बाहर कर रही थी।फिर उसने मेरे टट्टों पर जीभ फेरनी शुरू कर दी.मुझे बहुत मजा आने लगा और मैं उसके मुंह में झटके मारने लगा।
5 मिनट तक यही सब चलता रहा और वह झड़ गई.
मैं उसका सारा माल पी गया और उसके मुंह में अपने लंड के झटके मारता रहा।वो मस्ती में मेरा लंड चूस रही थी.
मेरा एक बार भी नहीं निकला था.5 मिनट और लंड चुसवाने के बाद मैं उसके ऊपर आ गया अब मैं अपना लंड उसकी चूत पर घिसने लगा.वह पागलों की तरह सिसकारियां ले रही थी।
तभी उसने मुझे बोला- जानू अब लंड अंदर डाल दो! मेरा बहुत मन कर रहा है.और उसने अपने आप से मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुंह पर रख दिया क्योंकि वह 1 साल से चुदी नहीं थी।मैंने धीरे से लंड अंदर डाला और उसके मुंह से आह निकल गई.उसने मुझे बोला- बेबी धीरे धीरे डालना।
मैंने उसकी दोनों टाँगों को खोलकर धीरे-धीरे लंड डालना शुरू किया आधा लंड डालकर मैंने झटके मारने शुरू किए।उसकी चूत गीली होने के कारण आधा लंड अंदर चला गया.लगभग 2 मिनट बाद थोड़ा सा दर्द होने के बाद वह पूरा लंड ले गई।एकदम से पूरा लंड अंदर जाते ही उसके मुंह से चीख निकली.
मैंने धीरे-धीरे अपनी कमर चलानी शुरू कर दी.
उसे मजा आने लगा और वह आह आह करने लगी.
मैंने अपनी कमर तेज तेज चलानी शुरू कर दी और हमारी ताबड़तोड़ चुदाई की शुरुआत हो चुकी थी।उसकी आवाज सुनकर मुझे जोश चढने लगा और मैंने जोर जोर से अपना लंड उसकी चूत में पेलना शुरू कर दिया।
अब उसके मुंह में से हल्की-हल्की चीख निकलने लगी।
मैंने उसकी दोनों टांगें उठा कर अपने कंधों पर रख ली और और पैरों के भार बैठकर कर उसकी चूत में अपना लंड पेलने लगा.साथ में मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियां दबानी शुरू कर दी।उसे और मजा आने लगा.
10 मिनट तक ऐसे चुदाई करने के बाद मैंने उसको घोड़ी बना दिया और पीछे से लंड डाला और साथ में उसकी चूचियां पकड़ ली उसको पीछे से चोदना शुरू कर दिया।
मैं बहुत तेज धक्के लगा रहा था जिस वजह से उसकी चीखें निकल रही थी.5 मिनट बाद वो झड़ गयी।पर मेरा माल अभी नहीं निकला था तो मैंने उसे चोदना जारी रखा.2 मिनट बाद वो बोली- मुझे दर्द हो रहा है।
इसलिए मैं नीचे आ गया और मैंने उसको अपने ऊपर बैठा लिया उसने ऊपर आकर अपनी चूत में लंड डाल लिया और ऊपर नीचे होने लगी।मैंने दोनों हाथों से उसकी चूचियां पकड़ ली और दबाने लगा।वह अपनी चूत मेरे लंड पर मार रही थी और मैंने नीचे से झटके मारने लगा।
5 मिनट मेरे लंड पर कूदने के बाद उसने आगे पीछे होकर लंड को लेना शुरू कर दिया।इस पोज में हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था.
थोड़ी देर ऐसे ही चुदाई करने के बाद मैंने उसे बेड से नीचे उतारा और उसको बेड पर झुका दिया और पीछे से लंड डालकर उसकी चुदाई शुरू कर दी।पांच मिनट बाद जब मेरा माल गिरने को आया तो मैंने उसको घुमा कर अपना लौड़ा उसके मुंह में दे दिया और अपनी कमर हिलाने लगा।एक-दो मिनट बाद मेरा सारा माल उसके मुंह में झड़ गया।वह मेरा लंड अपने मुंह से बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी पर मैंने पूरा लंड उसके मुंह में दे रखा था।इस वजह से मेरा सारा माल उसके गले से नीचे उतर गया।मैं संतुष्ट होकर बेड पर लेट गया।
वह बाथरूम में गई और जाकर अपनी चूत और मुंह को धोकर आई और आकर मुझे गले लगा कर कर लेट गई।
उसके बाद सारी रात हमने 4 बार और चुदाई की जिसमें से हमने एक बार सुबह जब वह वापस जाने लगी तो नहाते हुए चुदाई की।
उसे मेरे साथ चुदाई कर कर बहुत मजा आया.
एक बार मेरी सहेलियों ने गोवा जाने का प्लान बनाया.
हमारा तीन दिन का प्लान था और हम लोग ट्रेन से जाने वाले थे.
तय किये गए दिन पर मैं घर से अम्मी अब्बू की इजाजत लेकर स्टेशन की तरफ निकली.
लेकिन रास्ते में मेरी टैक्सी खराब हो गई और स्टेशन तक पहुँचते पहुँचते मुझे देर हो गई.
जैसे ही मैं स्टेशन पहुंची, वैसे ही मेरी ट्रेन छूट गई और मैं उदास मन से उधर खड़ी खड़ी जाती हुई ट्रेन को देखती रही और मेरे आंसू निकल आये.
जितना दुःख मुझे ट्रेन छूटने का था उससे ज्यादा दुःख इस बात का था कि मेरी सहेलियां गोवा में मजे करने वाली हैं.
उसकी चूत की खुशबू मुझे पागल कर रही थी।मैंने उसकी पैंटी उतारी और उसकी चूत को ऊपर से चाटने लगा।
वो पागल हो गई और सिसकारियां भरने लगी- आह आह आह!उसने अपना मेरा मुंह अपनी चूत पर दबा दिया और अपनी कमर हिला कर अपनी चूत चटवाने लगी।उसके बाद हम 69 पोजीशन में आ गए और मैंने घूम कर अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया।
उसकी चूत चाटने में मुझे बहुत मजा आ रहा था और उसने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया।
वह बिल्कुल आइसक्रीम की तरह लंड चूस रही थी और पूरा लंड मुंह में अंदर बाहर कर रही थी।फिर उसने मेरे टट्टों पर जीभ फेरनी शुरू कर दी.मुझे बहुत मजा आने लगा और मैं उसके मुंह में झटके मारने लगा।
5 मिनट तक यही सब चलता रहा और वह झड़ गई.
मैं उसका सारा माल पी गया और उसके मुंह में अपने लंड के झटके मारता रहा।वो मस्ती में मेरा लंड चूस रही थी.
मेरा एक बार भी नहीं निकला था.5 मिनट और लंड चुसवाने के बाद मैं उसके ऊपर आ गया अब मैं अपना लंड उसकी चूत पर घिसने लगा.वह पागलों की तरह सिसकारियां ले रही थी।
तभी उसने मुझे बोला- जानू अब लंड अंदर डाल दो! मेरा बहुत मन कर रहा है.और उसने अपने आप से मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुंह पर रख दिया क्योंकि वह 1 साल से चुदी नहीं थी।मैंने धीरे से लंड अंदर डाला और उसके मुंह से आह निकल गई.उसने मुझे बोला- बेबी धीरे धीरे डालना।
मैंने उसकी दोनों टाँगों को खोलकर धीरे-धीरे लंड डालना शुरू किया आधा लंड डालकर मैंने झटके मारने शुरू किए।उसकी चूत गीली होने के कारण आधा लंड अंदर चला गया.लगभग 2 मिनट बाद थोड़ा सा दर्द होने के बाद वह पूरा लंड ले गई।एकदम से पूरा लंड अंदर जाते ही उसके मुंह से चीख निकली.
मैंने धीरे-धीरे अपनी कमर चलानी शुरू कर दी.
उसे मजा आने लगा और वह आह आह करने लगी.
मैंने अपनी कमर तेज तेज चलानी शुरू कर दी और हमारी ताबड़तोड़ चुदाई की शुरुआत हो चुकी थी।उसकी आवाज सुनकर मुझे जोश चढने लगा और मैंने जोर जोर से अपना लंड उसकी चूत में पेलना शुरू कर दिया।
अब उसके मुंह में से हल्की-हल्की चीख निकलने लगी।
मैंने उसकी दोनों टांगें उठा कर अपने कंधों पर रख ली और और पैरों के भार बैठकर कर उसकी चूत में अपना लंड पेलने लगा.साथ में मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियां दबानी शुरू कर दी।उसे और मजा आने लगा.
10 मिनट तक ऐसे चुदाई करने के बाद मैंने उसको घोड़ी बना दिया और पीछे से लंड डाला और साथ में उसकी चूचियां पकड़ ली उसको पीछे से चोदना शुरू कर दिया।
मैं बहुत तेज धक्के लगा रहा था जिस वजह से उसकी चीखें निकल रही थी.5 मिनट बाद वो झड़ गयी।पर मेरा माल अभी नहीं निकला था तो मैंने उसे चोदना जारी रखा.2 मिनट बाद वो बोली- मुझे दर्द हो रहा है।
इसलिए मैं नीचे आ गया और मैंने उसको अपने ऊपर बैठा लिया उसने ऊपर आकर अपनी चूत में लंड डाल लिया और ऊपर नीचे होने लगी।मैंने दोनों हाथों से उसकी चूचियां पकड़ ली और दबाने लगा।वह अपनी चूत मेरे लंड पर मार रही थी और मैंने नीचे से झटके मारने लगा।
5 मिनट मेरे लंड पर कूदने के बाद उसने आगे पीछे होकर लंड को लेना शुरू कर दिया।इस पोज में हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था.
थोड़ी देर ऐसे ही चुदाई करने के बाद मैंने उसे बेड से नीचे उतारा और उसको बेड पर झुका दिया और पीछे से लंड डालकर उसकी चुदाई शुरू कर दी।पांच मिनट बाद जब मेरा माल गिरने को आया तो मैंने उसको घुमा कर अपना लौड़ा उसके मुंह में दे दिया और अपनी कमर हिलाने लगा।एक-दो मिनट बाद मेरा सारा माल उसके मुंह में झड़ गया।वह मेरा लंड अपने मुंह से बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी पर मैंने पूरा लंड उसके मुंह में दे रखा था।इस वजह से मेरा सारा माल उसके गले से नीचे उतर गया।मैं संतुष्ट होकर बेड पर लेट गया।
वह बाथरूम में गई और जाकर अपनी चूत और मुंह को धोकर आई और आकर मुझे गले लगा कर कर लेट गई।
उसके बाद सारी रात हमने 4 बार और चुदाई की जिसमें से हमने एक बार सुबह जब वह वापस जाने लगी तो नहाते हुए चुदाई की।
उसे मेरे साथ चुदाई कर कर बहुत मजा आया.
एक बार मेरी सहेलियों ने गोवा जाने का प्लान बनाया.
हमारा तीन दिन का प्लान था और हम लोग ट्रेन से जाने वाले थे.
तय किये गए दिन पर मैं घर से अम्मी अब्बू की इजाजत लेकर स्टेशन की तरफ निकली.
लेकिन रास्ते में मेरी टैक्सी खराब हो गई और स्टेशन तक पहुँचते पहुँचते मुझे देर हो गई.
जैसे ही मैं स्टेशन पहुंची, वैसे ही मेरी ट्रेन छूट गई और मैं उदास मन से उधर खड़ी खड़ी जाती हुई ट्रेन को देखती रही और मेरे आंसू निकल आये.
जितना दुःख मुझे ट्रेन छूटने का था उससे ज्यादा दुःख इस बात का था कि मेरी सहेलियां गोवा में मजे करने वाली हैं.
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तभी एक हट्टा-कट्टा बांका सजीला नौजवान भी कंधे पर बैग टाँगे दौड़ता हुआ आया और सामने से निकलती ट्रेन को देख कर जोर से हाँफते हुए बोला- बाप रे, ट्रेन तो निकल गई. अब मेरे गोवा ट्रिप का क्या होगा.
मैं समझ गई कि इस बन्दे की ट्रेन भी छूट गई है.
तभी उस लड़के ने मेरी तरफ देखा तो मैंने रोते रोते ही कहा- मेरी ट्रेन भी छूट गई, मैं भी छुट्टियां मनाने गोवा जा रही थी. अब तो घर लौटना पड़ेगा.
वह लड़का बोला- घर क्यों? मैं तो टैक्सी बुक कर रहा हूँ, सुबह तक गोवा पहुँच जाऊंगा और अपने दोस्तों से मिल लूंगा.
मैं बोली- काश मैं भी टेक्सी से जा पाती! लेकिन इतना लम्बा सफर अकेले तय करना मेरे बस में नहीं है.
वह लड़का बोला- अरे आप मेरे साथ चलो, कोई परेशानी नहीं होगी. आपको किराया भी नहीं देना पड़ेगा.
मुफ्त में गोवा जाने की बात पर मेरे मन में लालच आ गया और मैं राजी हो गई.
उस लड़के ने टैक्सी बुक की और जब हम लोग टैक्सी तक पहुंचे तो उसने मुस्कुराते हुए कहा- हेलो, मेरा नाम शेखर है.
मैंने भी मुस्कुराते हुए कहा- लो, मैंने तो आपका नाम भी नहीं पूछा था. मेरा नाम शबनम है.
अब हम दोनों अपना सामान चढ़ा कर टैक्सी में बैठ गए और टैक्सी गोवा की तरफ चल पड़ी.
शेखर बहुत मस्त दिखता था इसलिए मेरी नजर बार बार उसकी तरफ उठ जाती थी.
मैं बार बार सोच रही थी कि काश ये मेरा बॉयफ्रेंड होता.
तभी शेखर बोला- शबनम, तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है क्या?
मैं बोली- नहीं तो.
शेखर बोला- ऐसा कैसे हो सकता है? तुम तो इतनी स्मार्ट और सुन्दर हो, फिर तुम्हारा बॉयफ्रेंड कैसे नहीं है?
मैंने कहा- मैं लड़कियों के स्कूल में पढ़ती थी और इसी साल कॉलेज में आई हूँ इसलिए कभी लड़कों से घुलने मिलने का समय ही नहीं मिला.
फिर मैंने पूछा- क्या आपकी कोई गर्लफ्रेंड है?
शेखर बोला- आज तक तुम्हारे जैसी खूबसूरत कोई मिली नहीं, इसलिए कोई गर्लफ्रेंड बनी नहीं.
यह सुन कर शर्म के मारे मेरे गाल लाल हो गए और मैंने अपनी नजरें झुका लीं.
कुछ देर में बात करते करते शेखर का हाथ मेरे हाथ को छूने लगा.
मुझे भी अच्छा लग रहा था तो मैंने कोई आपत्ति नहीं की.
बल्कि मैं भी अपना हाथ शेखर की तरफ बढ़ाने लगी.
कुछ देर में ही मेरा हाथ शेखर के हाथ में था.
शेखर ने पूछा- तुम मुझे बहुत पसंद हो, क्या मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी?
मैंने कहा- हाँ शेखर, तुम भी मुझे बहुत पसंद हो.
यह सुनकर शेखर ने मेरा हाथ चूम लिया और मैं खिसक कर शेखर के करीब आ गई.
मैंने अपना सर शेखर के कंधे पर रख लिया और हसीं सपनों में खो गई.
शेखर भी बड़े प्यार से मेरे बाल सहलाता रहा.
थोड़ी देर में मुझे महसूस हुआ कि शेखर के हाथ मेरे स्तनों तक पहुँच गए हैं; शेखर बड़े ही प्यार से मेरे स्तन सहला रहा था.
यह पहली बार था जब कोई मेरे दूध दबा रहा था तो मुझे बहुत ही अजीब सा मजा आ रहा था.
मैंने भी बड़े प्यार से शेखर के सीने पर हाथ फेरना शुरू कर दिया.
अब शेखर का एक हाथ मेरी जांघ पर आ गया और शेखर मेरी जांघों पर हाथ फेरने लगा.
जांघों पर हाथ फेरते फेरते शेखर का हाथ मेरी चूत तक आ गया और वो सलवार के ऊपर से ही मेरी चूत सहलाने लगा.
शेखर ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया.
मैंने शेखर का लंड उसके पेंट के ऊपर से ही सहलाना शुरू कर दिया.
तभी शेखर ने अपने पेंट की ज़िप खोल दी और उसका बड़ा सा लंड मेरी आँखों के सामने नाचने लगा.
मुझे लंड छूने का अनुभव नहीं था फिर भी ऐसे माहौल में लंड पकड़ने पर मुझे कोई परेशानी नहीं हुई.
मेरे अंदर हवस उठने लगी तो मैंने भी अपनी सलवार खोल दी और शेखर ने अपना हाथ अंदर डाल दिया.
शेखर ने मेरी चूत में अपनी एक उंगली डाल दी और अंदर बाहर करने लगा.
मेरे अंदर आग भड़कने लगी जिसको शांत करने के लिए मेरी चूत से पानी निकलने लगा.
शेखर मेरी चूत को उंगली से चोद रहा था और मेरे अंदर ऊँची ऊँची लहरें उठ रही थीं.
अचानक मेरा शरीर अकड़ने लगा, मेरी चूत कटी मुर्गी की तरह फड़फड़ाने लगी और अचानक उसने ढेर सारा पानी छोड दिया.
इसी के साथ मैं ठंडी पड़ गई.
मैं चरम सुख का मजा ले चुकी थी किन्तु शेखर अभी भी प्यासा था तो मैं हाथ से उसका लंड हिलाने लगी.
कुछ ही देर में शेखर का शरीर अकड़ने लगा और तभी उसके लंड ने पिचकारियां छोड दी.
सामने वाली सीट पर उसका वीर्य उछल कर फ़ैल गया और शेखर भी ठंडा पड़ गया.
हम लोगों ने खिड़की के बाहर देखा तो अँधेरा हो चुका था और हमारी टेक्सी जंगल के बीच से गुजर रही थी.
अभी हमारी आँख लगी ही थी कि एक झटके से हमारी नींद खुल गई.
हमने देखा कि टेक्सी एक पत्थर से टकरा गई थी और बंद पड़ गई थी.
ड्राइवर ने टेक्सी से उतर कर देखा तो परेशान होकर बोला- लगता है पाइप फट गया है, मैकेनिक को बुलाना पड़ेगा.
मैं समझ गई कि इस बन्दे की ट्रेन भी छूट गई है.
तभी उस लड़के ने मेरी तरफ देखा तो मैंने रोते रोते ही कहा- मेरी ट्रेन भी छूट गई, मैं भी छुट्टियां मनाने गोवा जा रही थी. अब तो घर लौटना पड़ेगा.
वह लड़का बोला- घर क्यों? मैं तो टैक्सी बुक कर रहा हूँ, सुबह तक गोवा पहुँच जाऊंगा और अपने दोस्तों से मिल लूंगा.
मैं बोली- काश मैं भी टेक्सी से जा पाती! लेकिन इतना लम्बा सफर अकेले तय करना मेरे बस में नहीं है.
वह लड़का बोला- अरे आप मेरे साथ चलो, कोई परेशानी नहीं होगी. आपको किराया भी नहीं देना पड़ेगा.
मुफ्त में गोवा जाने की बात पर मेरे मन में लालच आ गया और मैं राजी हो गई.
उस लड़के ने टैक्सी बुक की और जब हम लोग टैक्सी तक पहुंचे तो उसने मुस्कुराते हुए कहा- हेलो, मेरा नाम शेखर है.
मैंने भी मुस्कुराते हुए कहा- लो, मैंने तो आपका नाम भी नहीं पूछा था. मेरा नाम शबनम है.
अब हम दोनों अपना सामान चढ़ा कर टैक्सी में बैठ गए और टैक्सी गोवा की तरफ चल पड़ी.
शेखर बहुत मस्त दिखता था इसलिए मेरी नजर बार बार उसकी तरफ उठ जाती थी.
मैं बार बार सोच रही थी कि काश ये मेरा बॉयफ्रेंड होता.
तभी शेखर बोला- शबनम, तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है क्या?
मैं बोली- नहीं तो.
शेखर बोला- ऐसा कैसे हो सकता है? तुम तो इतनी स्मार्ट और सुन्दर हो, फिर तुम्हारा बॉयफ्रेंड कैसे नहीं है?
मैंने कहा- मैं लड़कियों के स्कूल में पढ़ती थी और इसी साल कॉलेज में आई हूँ इसलिए कभी लड़कों से घुलने मिलने का समय ही नहीं मिला.
फिर मैंने पूछा- क्या आपकी कोई गर्लफ्रेंड है?
शेखर बोला- आज तक तुम्हारे जैसी खूबसूरत कोई मिली नहीं, इसलिए कोई गर्लफ्रेंड बनी नहीं.
यह सुन कर शर्म के मारे मेरे गाल लाल हो गए और मैंने अपनी नजरें झुका लीं.
कुछ देर में बात करते करते शेखर का हाथ मेरे हाथ को छूने लगा.
मुझे भी अच्छा लग रहा था तो मैंने कोई आपत्ति नहीं की.
बल्कि मैं भी अपना हाथ शेखर की तरफ बढ़ाने लगी.
कुछ देर में ही मेरा हाथ शेखर के हाथ में था.
शेखर ने पूछा- तुम मुझे बहुत पसंद हो, क्या मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी?
मैंने कहा- हाँ शेखर, तुम भी मुझे बहुत पसंद हो.
यह सुनकर शेखर ने मेरा हाथ चूम लिया और मैं खिसक कर शेखर के करीब आ गई.
मैंने अपना सर शेखर के कंधे पर रख लिया और हसीं सपनों में खो गई.
शेखर भी बड़े प्यार से मेरे बाल सहलाता रहा.
थोड़ी देर में मुझे महसूस हुआ कि शेखर के हाथ मेरे स्तनों तक पहुँच गए हैं; शेखर बड़े ही प्यार से मेरे स्तन सहला रहा था.
यह पहली बार था जब कोई मेरे दूध दबा रहा था तो मुझे बहुत ही अजीब सा मजा आ रहा था.
मैंने भी बड़े प्यार से शेखर के सीने पर हाथ फेरना शुरू कर दिया.
अब शेखर का एक हाथ मेरी जांघ पर आ गया और शेखर मेरी जांघों पर हाथ फेरने लगा.
जांघों पर हाथ फेरते फेरते शेखर का हाथ मेरी चूत तक आ गया और वो सलवार के ऊपर से ही मेरी चूत सहलाने लगा.
शेखर ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया.
मैंने शेखर का लंड उसके पेंट के ऊपर से ही सहलाना शुरू कर दिया.
तभी शेखर ने अपने पेंट की ज़िप खोल दी और उसका बड़ा सा लंड मेरी आँखों के सामने नाचने लगा.
मुझे लंड छूने का अनुभव नहीं था फिर भी ऐसे माहौल में लंड पकड़ने पर मुझे कोई परेशानी नहीं हुई.
मेरे अंदर हवस उठने लगी तो मैंने भी अपनी सलवार खोल दी और शेखर ने अपना हाथ अंदर डाल दिया.
शेखर ने मेरी चूत में अपनी एक उंगली डाल दी और अंदर बाहर करने लगा.
मेरे अंदर आग भड़कने लगी जिसको शांत करने के लिए मेरी चूत से पानी निकलने लगा.
शेखर मेरी चूत को उंगली से चोद रहा था और मेरे अंदर ऊँची ऊँची लहरें उठ रही थीं.
अचानक मेरा शरीर अकड़ने लगा, मेरी चूत कटी मुर्गी की तरह फड़फड़ाने लगी और अचानक उसने ढेर सारा पानी छोड दिया.
इसी के साथ मैं ठंडी पड़ गई.
मैं चरम सुख का मजा ले चुकी थी किन्तु शेखर अभी भी प्यासा था तो मैं हाथ से उसका लंड हिलाने लगी.
कुछ ही देर में शेखर का शरीर अकड़ने लगा और तभी उसके लंड ने पिचकारियां छोड दी.
सामने वाली सीट पर उसका वीर्य उछल कर फ़ैल गया और शेखर भी ठंडा पड़ गया.
हम लोगों ने खिड़की के बाहर देखा तो अँधेरा हो चुका था और हमारी टेक्सी जंगल के बीच से गुजर रही थी.
अभी हमारी आँख लगी ही थी कि एक झटके से हमारी नींद खुल गई.
हमने देखा कि टेक्सी एक पत्थर से टकरा गई थी और बंद पड़ गई थी.
ड्राइवर ने टेक्सी से उतर कर देखा तो परेशान होकर बोला- लगता है पाइप फट गया है, मैकेनिक को बुलाना पड़ेगा.
हम लोग भी परेशान हो गए तो ड्राइवर बोला- घबराइए नहीं, पीछे एक किलोमीटर पर गाँव में एक मैकेनिक की दूकान थी. मैं आधे घंटे में उसको लेकर आता हूँ तब तक आप लोग टेक्सी के अंदर आराम करिये.
ड्राइवर पैदल चला गया तो मैं और शेखर जंगल में घूमने लगे.
चांदनी रात थी और चारों तरफ चन्द्रमा की दूधिया रोशनी फैली थी.
मैं और शेखर एक दूसरे को साफ़ साफ़ देख पा रहे थे.
तभी शेखर ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपनी तरफ खींचा और मेरे होठों पर अपने होंठ रख दिए.
मैं भी शेखर के चौड़े सीने से लिपट गई और उसके होंठ चूसने लगी.
अब मैं कुछ ज्यादा ही गरम होने लगी थी तो मैंने शेखर की शर्ट उतार दी और उसके बदन को चूमने लगी.
शेखर ने भी मेरी कुर्ती उतार दी और मेरे बदन से खेलने लगा.
अब शेखर ने अपनी पैन्ट उतार दी और मेरी सलवार का नाड़ा भी खोल दिया.
अपने हाथ मेरी पीठ पर ले जाकर शेखर ने मेरी ब्रा का हुक खोल दिया और मेरे स्तनों को कैद से आजाद कर दिया.
मेरी महकती जवानी देखकर शेखर पागल हो उठा और मेरे दूध पीने लगा.
मैं भी साथ देते हुए उसके बदन से खेलती रही.
अब शेखर घुटनों पर आया और उसने मेरी चड्डी उतार दी.
मेरी चड्डी उतार कर वो मेरी पनियाई हुई चूत को चाटने लगा.
मुझे बहुत मजा आ रहा था और मैं जोर जोर से सिसकारियां ले रही थी.
इस घने जंगल में हमारी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था तो मुझे आवाजें निकालने में कोई डर भी नहीं था.
मेरी चूत की जीभ से सफाई कर के शेखर उठा तो मैं घुटने पर आ गई और शेखर की चड्डी उतारने लगी.
जैसे ही मैंने चड्डी उतारी तो शेखर का बड़ा सा लंड मेरे मुंह से टकरा गया.
शेखर ने मेरा सर पकड़ा और अपना लंड मेरे मुंह में घुसाने लगा.
मैं रोकने का प्रयास कर रही थी फिर भी जैसे तैसे शेखर ने अपना सुपारा मेरे मुंह में पेल दिया.
मुझे कुछ गन्दा सा लग रहा था फिर भी वासना में मैं शेखर के लंड को चूसने लगी.
कुछ देर चूसने पर मुझे मजा आने लगा और मैं जोर जोर से लंड अपने मुंह में अंदर बाहर करने लगी.
लंड चूसते समय मेरी चूत में अजीब सी सिहरन हो रही थी तो मैं शेखर से बोली- मेरी चूत में अजीब सी चूल उठ रही है, प्लीज इसको शांत करो.
यह सुनकर शेखर ने टेक्सी में से एक मोटा कम्बल निकाल कर घास पर बिछाया और मुझे लेटा दिया.
अब शेखर मेरे ऊपर आ गया और उसने अपना लंड मेरी चूत की दरार पर रख दिया.
शेखर ने हौले से धक्का लगाया तो उसका लंड थोड़ा सा मेरे अंदर घुस गया.
मेरी चीख निकल गई- हाय अम्मी, बाहर निकालो, दुःख रहा है.
लेकिन शेखर ने मेरी बात नहीं सुनी और एक जोर का झटका देकर अपना सारा लंड मेरी चूत में पेल दिया.
दर्द के मारे मेरा बुरा हाल हो गया था और मेरे आंसू निकल आये थे.
शेखर ने अपना लंड आगे पीछे करना शुरू किया और मेरी चीखें निकाल डालीं.
वो धक्के मार रहा था और मैं चिल्ला रही थी- रुक जाओ प्लीज, मेरी बुर फट रही है. प्लीज थोड़ा धीरे चोद लो.
लेकिन इस हवस के मारे आदमी पर कोई असर नहीं हो रहा था; वो बिना रुके मुझे पेले जा रहा था.
कुछ देर में मेरी चूत की नसें ढीली हुईं तो मेरा दर्द कुछ कम हुआ.
अब मैं भी मजे लेने लगी और अपनी गांड उछालने लगी.
शेखर के होंठ मेरे होंठों पर थे, जीभ मेरे मुंह के अंदर थी और हाथ मेरे दोनों स्तनों पर थे.
मेरे हाथ शेखर की पीठ पर थे.
अब शेखर की स्पीड तेज होने लगी और उत्तेजना के मारे मेरे हाथ भी शेखर के चारों तरफ कसने लगे.
जंगल की इस शांति में बस मेरी आहें गूँज रही थी और साथ में शेखर के धक्कों के साथ साथ फट्ट फट्ट की आवाजें गूँज रही थीं.
शेखर गुर्राते हुए पूरी ताकत से धक्के मार रहा था मानो आज मुझे जमीन में ही धंसा देगा.
मैं भी हर तरीके से उसका साथ दे रही थी.
देगा मेरा लंड.
सच में मुझे ऐसा लग रहा था मानो छोटू का लंड मेरा गाला फाड़ते हुए मेरे पेट तक चला जाएगा.
अब ड्राइवर ने मेरी चूत से लंड निकाला और मेरे स्तनों के बीच में फंसा दिया और मेरे दूध चोदने लगा.
ड्राइवर मेरे दूध चोदते हुए बोला- क्या मस्त मम्मे हैं रंडी के. लगता है दो बच्चों की मां है साली!
अब्दुल बोला- जिस तरीके से हम इसको चोद रहे हैं, लगता है आज ही ये चालीस पचास बच्चों की मां बन जाएगी.
यह बोलकर अब्दुल ने मेरी चूत में अपना लंड पेल दिया और घपाघप धक्के मारने लगा.
अब मेरा मुंह, दूध और चूत एक साथ चुद रहे थे और मैं चुदाई के सागर में लंड की नाव पर बैठ कर गोते मार रही थी.
हवस की आग में जलते हुए मैंने छोटू के लंड को बुरी तरह चूसना शुरू कर दिया, ड्राइवर के लंड पर अपने स्तन जोर से दबा दिए और अब्दुल को अपनी टांगों में जकड लिया ताकि उसका लंड मेरे और अंदर तक समा सके.
ड्राइवर पैदल चला गया तो मैं और शेखर जंगल में घूमने लगे.
चांदनी रात थी और चारों तरफ चन्द्रमा की दूधिया रोशनी फैली थी.
मैं और शेखर एक दूसरे को साफ़ साफ़ देख पा रहे थे.
तभी शेखर ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपनी तरफ खींचा और मेरे होठों पर अपने होंठ रख दिए.
मैं भी शेखर के चौड़े सीने से लिपट गई और उसके होंठ चूसने लगी.
अब मैं कुछ ज्यादा ही गरम होने लगी थी तो मैंने शेखर की शर्ट उतार दी और उसके बदन को चूमने लगी.
शेखर ने भी मेरी कुर्ती उतार दी और मेरे बदन से खेलने लगा.
अब शेखर ने अपनी पैन्ट उतार दी और मेरी सलवार का नाड़ा भी खोल दिया.
अपने हाथ मेरी पीठ पर ले जाकर शेखर ने मेरी ब्रा का हुक खोल दिया और मेरे स्तनों को कैद से आजाद कर दिया.
मेरी महकती जवानी देखकर शेखर पागल हो उठा और मेरे दूध पीने लगा.
मैं भी साथ देते हुए उसके बदन से खेलती रही.
अब शेखर घुटनों पर आया और उसने मेरी चड्डी उतार दी.
मेरी चड्डी उतार कर वो मेरी पनियाई हुई चूत को चाटने लगा.
मुझे बहुत मजा आ रहा था और मैं जोर जोर से सिसकारियां ले रही थी.
इस घने जंगल में हमारी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था तो मुझे आवाजें निकालने में कोई डर भी नहीं था.
मेरी चूत की जीभ से सफाई कर के शेखर उठा तो मैं घुटने पर आ गई और शेखर की चड्डी उतारने लगी.
जैसे ही मैंने चड्डी उतारी तो शेखर का बड़ा सा लंड मेरे मुंह से टकरा गया.
शेखर ने मेरा सर पकड़ा और अपना लंड मेरे मुंह में घुसाने लगा.
मैं रोकने का प्रयास कर रही थी फिर भी जैसे तैसे शेखर ने अपना सुपारा मेरे मुंह में पेल दिया.
मुझे कुछ गन्दा सा लग रहा था फिर भी वासना में मैं शेखर के लंड को चूसने लगी.
कुछ देर चूसने पर मुझे मजा आने लगा और मैं जोर जोर से लंड अपने मुंह में अंदर बाहर करने लगी.
लंड चूसते समय मेरी चूत में अजीब सी सिहरन हो रही थी तो मैं शेखर से बोली- मेरी चूत में अजीब सी चूल उठ रही है, प्लीज इसको शांत करो.
यह सुनकर शेखर ने टेक्सी में से एक मोटा कम्बल निकाल कर घास पर बिछाया और मुझे लेटा दिया.
अब शेखर मेरे ऊपर आ गया और उसने अपना लंड मेरी चूत की दरार पर रख दिया.
शेखर ने हौले से धक्का लगाया तो उसका लंड थोड़ा सा मेरे अंदर घुस गया.
मेरी चीख निकल गई- हाय अम्मी, बाहर निकालो, दुःख रहा है.
लेकिन शेखर ने मेरी बात नहीं सुनी और एक जोर का झटका देकर अपना सारा लंड मेरी चूत में पेल दिया.
दर्द के मारे मेरा बुरा हाल हो गया था और मेरे आंसू निकल आये थे.
शेखर ने अपना लंड आगे पीछे करना शुरू किया और मेरी चीखें निकाल डालीं.
वो धक्के मार रहा था और मैं चिल्ला रही थी- रुक जाओ प्लीज, मेरी बुर फट रही है. प्लीज थोड़ा धीरे चोद लो.
लेकिन इस हवस के मारे आदमी पर कोई असर नहीं हो रहा था; वो बिना रुके मुझे पेले जा रहा था.
कुछ देर में मेरी चूत की नसें ढीली हुईं तो मेरा दर्द कुछ कम हुआ.
अब मैं भी मजे लेने लगी और अपनी गांड उछालने लगी.
शेखर के होंठ मेरे होंठों पर थे, जीभ मेरे मुंह के अंदर थी और हाथ मेरे दोनों स्तनों पर थे.
मेरे हाथ शेखर की पीठ पर थे.
अब शेखर की स्पीड तेज होने लगी और उत्तेजना के मारे मेरे हाथ भी शेखर के चारों तरफ कसने लगे.
जंगल की इस शांति में बस मेरी आहें गूँज रही थी और साथ में शेखर के धक्कों के साथ साथ फट्ट फट्ट की आवाजें गूँज रही थीं.
शेखर गुर्राते हुए पूरी ताकत से धक्के मार रहा था मानो आज मुझे जमीन में ही धंसा देगा.
मैं भी हर तरीके से उसका साथ दे रही थी.
देगा मेरा लंड.
सच में मुझे ऐसा लग रहा था मानो छोटू का लंड मेरा गाला फाड़ते हुए मेरे पेट तक चला जाएगा.
अब ड्राइवर ने मेरी चूत से लंड निकाला और मेरे स्तनों के बीच में फंसा दिया और मेरे दूध चोदने लगा.
ड्राइवर मेरे दूध चोदते हुए बोला- क्या मस्त मम्मे हैं रंडी के. लगता है दो बच्चों की मां है साली!
अब्दुल बोला- जिस तरीके से हम इसको चोद रहे हैं, लगता है आज ही ये चालीस पचास बच्चों की मां बन जाएगी.
यह बोलकर अब्दुल ने मेरी चूत में अपना लंड पेल दिया और घपाघप धक्के मारने लगा.
अब मेरा मुंह, दूध और चूत एक साथ चुद रहे थे और मैं चुदाई के सागर में लंड की नाव पर बैठ कर गोते मार रही थी.
हवस की आग में जलते हुए मैंने छोटू के लंड को बुरी तरह चूसना शुरू कर दिया, ड्राइवर के लंड पर अपने स्तन जोर से दबा दिए और अब्दुल को अपनी टांगों में जकड लिया ताकि उसका लंड मेरे और अंदर तक समा सके.
इस समय मेरी चुदाई का घमासान खेल चल रहा था और मेरे शरीर का अंग अंग चोदा जा रहा था लेकिन फिर भी कोई हार मानने को तैयार नहीं था.
अब छोटू का शरीर अकड़ने लगा और मैं समझ गई कि उसका पानी निकलने वाला है.
मैं उसका लंड मुंह से निकालने लगी तो छोटू ने मेरे हाथ पकड़ लिए और जोर जोर से मेरा मुंह चोदने लगा.
अचानक ही उसका पानी छूट गया और उसने अपने गरमागरम वीर्य की ना जाने कितनी पिचकारियां मेरे गले के अंदर उतार दीं.
मुझे उसका सारा वीर्य पीना पड़ा.
छोटू के हटते ही ड्राइवर और अब्दुल उठ गए और उन्होंने पोजीशन बदल ली.
ड्राइवर नीचे लेट गया और उसने मुझे अपने लंड पर बैठने को कहा.
मैं ड्राइवर के लंड पर बैठी तो गपाक से मेरी चूत ने ड्राइवर का सारा लंड निगल लिया.
अब मैं ड्राइवर के ऊपर उछलने लगी.
ड्राइवर का लंड मेरी बच्चेदानी से टकरा रहा था और मुझे गजब का मजा आ रहा था.
मैं हवस भरी आवाज में चिल्लाई- मेरी चूत को अपने वीर्य से भर दे सूअर. उतार दे अपना माल मेरे भोसड़े में.
तभी ड्राइवर का सफर भी पूरा होने को आया और उसका शरीर अकड़ने लगा.
उसका लंड फूल गया और मेरी चूत में एकदम गर्म लगने लगा.
मैं उसके गरमागरम लंड का मजा अपनी चूत में ले ही रही थी कि तभी ड्राइवर के लंड ने वीर्य की पिचकारियां मेरी चूत में छोड़ दीं.
मुझे इतना मजा आया कि मैं एक बार फिर चिल्ला उठी- आह, मजा आ गया. तेरे गर्म गर्म वीर्य ने मेरी चूत का बजा बजा कर रख दिया. और डाल साले, मुझे और वीर्य चाहिए अपनी चूत में.
फचाक फचाक करके ना जाने कितनी पिचकारियां उसके लंड से निकलीं और मेरी चूत को उसने वीर्य का तालाब बना दिया.
मैं ड्राइवर के लंड से उठी तो मेरी चूत से बहते हुए उसके वीर्य ने मेरी दोनों जांघों को गीला कर दिया.
मैंने देखा कि मेरी चूत का मुंह तो खुला का खुला रह गया था.
इस हरामजादे ने मेरी चूत का भोसड़ा बना कर रख दिया था.
अब्दुल हँसते हुए बोला- जब चुदाई शुरू की थी तो चूत थी लेकिन अब साली भोसड़ा बन चुकी है.
मैं बोली- सालों रंडी की औलादों, ऐसे भी कोई चोदता है क्या? अब मेरे बॉयफ्रैंड को क्या मुंह दिखाऊँगी?
अभी मैं उठ ही रही थी कि अब्दुल ने मुझे गर्दन पकड़ कर दबा दिया और घोड़ी बना दिया.
वो अपना लंड मेरी गांड पर फेरने लगा तो मैं घबरा उठी. मैंने उससे कहा- प्लीज चूत जितनी मारनी हो मार लो लेकिन गांड को बक्श दो.
लेकिन वो नहीं माना- शबनम जान, चूत तो भोसड़ा बन चुकी है. अब तो तेरी गांड मारकर ही मजा लेना पड़ेगा.
उसने अपनी एक उंगली थूक से गीली की और मेरी गांड में घुसा दी.
फिर उसने मेरी गांड में ढेर सारा थूका और अपनी दो उँगलियाँ अंदर घुसा दीं.
मुझे तेज दर्द हुआ पर अब्दुल ने अपनी उँगलियाँ मेरी गांड से निकाल कर उधर अपना लंड फंसा दिया.
अब धीरे धीरे उसने दबाव बनाया और घच्च से अपने लंड मेरी गांड में पेल दिया.
दर्द के मारे मेरी रुलाई छूट गई लेकिन उस हरामजादे पर कोई असर नहीं पड़ा. मेरे आंसुओं को नजरअंदाज करके वो मेरी गांड में अपना लंड हिलाता रहा.
कुछ देर उसने अपना लंड आगे पीछे किया तो मेरी गांड का छेद ढीला होने लगा और मेरा दर्द कुछ कम होने लगा.
अब उसने मेरी गांड चोदना शुरू किया और जोर जोर से धक्के मारने लगा.
अब मैं भी उसका साथ देने लगी थी.
वो धक्के मारता तो मैं भी अपनी गांड आगे पीछे करके जंगल सेक्स के मजे ले रही थी.
कुछ देर मुझे कुतिया की तरह चोदने के बाद उसने अपने धक्के तेज कर दिए.
मैं समझ गई कि इसका पानी छूटने वाला है.
मैकेनिक ने अपने धक्के तेज किये और जोरदार ताकत के साथ मेरी गांड में अपने गर्म गर्म वीर्य की पिचकारी छोड़ दी.
जैसे ही उसने अपना लंड बाहर निकाला तो मेरी गांड से वीर्य के साथ साथ खून का फव्वारा छूट गया.
इस रंडी के बच्चे ने सच में मेरी गांड फाड़ कर रख दी थी.
अब्दुल हँसते हुए बोला- अरे बाप रे, इसकी गांड में तो कुआं खुद गया है.
मैं रोते हुए उसको कोसने लगी- साले रंडी के बच्चे, तेरी अम्मी को सूअर चोदे, तेरी बहन को सारा बम्बई चोदे.
ड्राइवर हँसते हुए बोला- अरे शबनम जान, इसकी अम्मी और बहन तो कमाठीपुरा की टॉप की रंडियां हैं. चालीस पचास लोग रोज चोदते हैं उन दोनों को.
मेरी जबरदस्त चुदाई के बाद मैं बुरी तरह पस्त हो चुकी थी और मुझमें उठकर कपड़े पहनने की हिम्मत भी नहीं बची थी.
उन लोगों ने ही मुझे उठाया, साफ़ किया और कपड़े पहना कर टेक्सी की पिछली सीट पर बैठा दिया.
मेरी गांड दुःख रही थी लेकिन इस घमासान चुदाई में बहुत जबरदस्त मजा भी आया था और मेरे हर छेद में वीर्य के दरिये बह चुके थे जिसके बारे में सोच सोच कर मुझे बहुत मजा आ रहा था.
मैं मुस्कुराते हुए ड्राइवर से बोली- सोच रही हूँ लौटते समय भी ट्रैन की जगह टेक्सी ही कर लूँ. सफर का मजा तो टेक्सी में ही है.
अब छोटू का शरीर अकड़ने लगा और मैं समझ गई कि उसका पानी निकलने वाला है.
मैं उसका लंड मुंह से निकालने लगी तो छोटू ने मेरे हाथ पकड़ लिए और जोर जोर से मेरा मुंह चोदने लगा.
अचानक ही उसका पानी छूट गया और उसने अपने गरमागरम वीर्य की ना जाने कितनी पिचकारियां मेरे गले के अंदर उतार दीं.
मुझे उसका सारा वीर्य पीना पड़ा.
छोटू के हटते ही ड्राइवर और अब्दुल उठ गए और उन्होंने पोजीशन बदल ली.
ड्राइवर नीचे लेट गया और उसने मुझे अपने लंड पर बैठने को कहा.
मैं ड्राइवर के लंड पर बैठी तो गपाक से मेरी चूत ने ड्राइवर का सारा लंड निगल लिया.
अब मैं ड्राइवर के ऊपर उछलने लगी.
ड्राइवर का लंड मेरी बच्चेदानी से टकरा रहा था और मुझे गजब का मजा आ रहा था.
मैं हवस भरी आवाज में चिल्लाई- मेरी चूत को अपने वीर्य से भर दे सूअर. उतार दे अपना माल मेरे भोसड़े में.
तभी ड्राइवर का सफर भी पूरा होने को आया और उसका शरीर अकड़ने लगा.
उसका लंड फूल गया और मेरी चूत में एकदम गर्म लगने लगा.
मैं उसके गरमागरम लंड का मजा अपनी चूत में ले ही रही थी कि तभी ड्राइवर के लंड ने वीर्य की पिचकारियां मेरी चूत में छोड़ दीं.
मुझे इतना मजा आया कि मैं एक बार फिर चिल्ला उठी- आह, मजा आ गया. तेरे गर्म गर्म वीर्य ने मेरी चूत का बजा बजा कर रख दिया. और डाल साले, मुझे और वीर्य चाहिए अपनी चूत में.
फचाक फचाक करके ना जाने कितनी पिचकारियां उसके लंड से निकलीं और मेरी चूत को उसने वीर्य का तालाब बना दिया.
मैं ड्राइवर के लंड से उठी तो मेरी चूत से बहते हुए उसके वीर्य ने मेरी दोनों जांघों को गीला कर दिया.
मैंने देखा कि मेरी चूत का मुंह तो खुला का खुला रह गया था.
इस हरामजादे ने मेरी चूत का भोसड़ा बना कर रख दिया था.
अब्दुल हँसते हुए बोला- जब चुदाई शुरू की थी तो चूत थी लेकिन अब साली भोसड़ा बन चुकी है.
मैं बोली- सालों रंडी की औलादों, ऐसे भी कोई चोदता है क्या? अब मेरे बॉयफ्रैंड को क्या मुंह दिखाऊँगी?
अभी मैं उठ ही रही थी कि अब्दुल ने मुझे गर्दन पकड़ कर दबा दिया और घोड़ी बना दिया.
वो अपना लंड मेरी गांड पर फेरने लगा तो मैं घबरा उठी. मैंने उससे कहा- प्लीज चूत जितनी मारनी हो मार लो लेकिन गांड को बक्श दो.
लेकिन वो नहीं माना- शबनम जान, चूत तो भोसड़ा बन चुकी है. अब तो तेरी गांड मारकर ही मजा लेना पड़ेगा.
उसने अपनी एक उंगली थूक से गीली की और मेरी गांड में घुसा दी.
फिर उसने मेरी गांड में ढेर सारा थूका और अपनी दो उँगलियाँ अंदर घुसा दीं.
मुझे तेज दर्द हुआ पर अब्दुल ने अपनी उँगलियाँ मेरी गांड से निकाल कर उधर अपना लंड फंसा दिया.
अब धीरे धीरे उसने दबाव बनाया और घच्च से अपने लंड मेरी गांड में पेल दिया.
दर्द के मारे मेरी रुलाई छूट गई लेकिन उस हरामजादे पर कोई असर नहीं पड़ा. मेरे आंसुओं को नजरअंदाज करके वो मेरी गांड में अपना लंड हिलाता रहा.
कुछ देर उसने अपना लंड आगे पीछे किया तो मेरी गांड का छेद ढीला होने लगा और मेरा दर्द कुछ कम होने लगा.
अब उसने मेरी गांड चोदना शुरू किया और जोर जोर से धक्के मारने लगा.
अब मैं भी उसका साथ देने लगी थी.
वो धक्के मारता तो मैं भी अपनी गांड आगे पीछे करके जंगल सेक्स के मजे ले रही थी.
कुछ देर मुझे कुतिया की तरह चोदने के बाद उसने अपने धक्के तेज कर दिए.
मैं समझ गई कि इसका पानी छूटने वाला है.
मैकेनिक ने अपने धक्के तेज किये और जोरदार ताकत के साथ मेरी गांड में अपने गर्म गर्म वीर्य की पिचकारी छोड़ दी.
जैसे ही उसने अपना लंड बाहर निकाला तो मेरी गांड से वीर्य के साथ साथ खून का फव्वारा छूट गया.
इस रंडी के बच्चे ने सच में मेरी गांड फाड़ कर रख दी थी.
अब्दुल हँसते हुए बोला- अरे बाप रे, इसकी गांड में तो कुआं खुद गया है.
मैं रोते हुए उसको कोसने लगी- साले रंडी के बच्चे, तेरी अम्मी को सूअर चोदे, तेरी बहन को सारा बम्बई चोदे.
ड्राइवर हँसते हुए बोला- अरे शबनम जान, इसकी अम्मी और बहन तो कमाठीपुरा की टॉप की रंडियां हैं. चालीस पचास लोग रोज चोदते हैं उन दोनों को.
मेरी जबरदस्त चुदाई के बाद मैं बुरी तरह पस्त हो चुकी थी और मुझमें उठकर कपड़े पहनने की हिम्मत भी नहीं बची थी.
उन लोगों ने ही मुझे उठाया, साफ़ किया और कपड़े पहना कर टेक्सी की पिछली सीट पर बैठा दिया.
मेरी गांड दुःख रही थी लेकिन इस घमासान चुदाई में बहुत जबरदस्त मजा भी आया था और मेरे हर छेद में वीर्य के दरिये बह चुके थे जिसके बारे में सोच सोच कर मुझे बहुत मजा आ रहा था.
मैं मुस्कुराते हुए ड्राइवर से बोली- सोच रही हूँ लौटते समय भी ट्रैन की जगह टेक्सी ही कर लूँ. सफर का मजा तो टेक्सी में ही है.
अब उजाला होने लगा था और सूरज निकल आया था.
मुझे अहसास हुआ कि आज तो मैं सारी रात ही चुदती रही हूँ.
अब्दुल और छोटू लौटने लगे तो मैंने ड्राइवर से कहा- टेक्सी का क्या होगा?
ड्राइवर ने चाबी लगा कर घुमाई और टेक्सी स्टार्ट हो गई.
वह हँसते हुए बोला- शबनम जान, ये तो सब तुमको चोदने का बहाना था. चलो गोवा चलते हैं.
मैंने कहा- शेखर को तो आने दो.
ड्राइवर बोला- उसको भाड़ में जाने दो.
फिर हम लोग शेखर का इन्तजार किये बगैर ही गोवा की तरफ चल दिए.
तो ये थी मेरी मुंबई से गोवा तक की चुदाई भरी यात्रा जिसमें मैंने जंगल सेक्स का मजा लिया.
मुझे अहसास हुआ कि आज तो मैं सारी रात ही चुदती रही हूँ.
अब्दुल और छोटू लौटने लगे तो मैंने ड्राइवर से कहा- टेक्सी का क्या होगा?
ड्राइवर ने चाबी लगा कर घुमाई और टेक्सी स्टार्ट हो गई.
वह हँसते हुए बोला- शबनम जान, ये तो सब तुमको चोदने का बहाना था. चलो गोवा चलते हैं.
मैंने कहा- शेखर को तो आने दो.
ड्राइवर बोला- उसको भाड़ में जाने दो.
फिर हम लोग शेखर का इन्तजार किये बगैर ही गोवा की तरफ चल दिए.
तो ये थी मेरी मुंबई से गोवा तक की चुदाई भरी यात्रा जिसमें मैंने जंगल सेक्स का मजा लिया.
antarvasna:
फेसबुक पर मिली लड़की को होटल में XX....
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम अमोल है और मैं अहमदनगर शहर का निवासी हूं।
मेरी उम्र 28 साल है. मेरा रंग गोरा है और मेरी हाइट 5 फीट 6 इंच है. मेरे लंड का साइज 7 इंच है और इसकी मोटाई भी अच्छी है.
दोस्तो, यह कहानी है जब मे फेसबुक पर सेक्स कहानियाँ लिखता हु तब मुझे फेसबुक पर एक लड़की मिली जिसे मेरी कहानियाँ पसंद आयी थी जिसको मैंने उसके शहर में जाकर सेक्स का मजा दिया.
वैसे तो मेरी गर्लफ्रेंड से रह चुकी हैं और मैंने बहुत बार चुदाई की है पर यह लड़की मुझे लॉकडाउन के समय फेसबुक पर मिली जिसको मैंने होटल में चोदा !
दोस्तो, मैंने लॉकडाउन में भारी अंतर के चलते फेसबुक पर कहानियाँ लिखना शुरु किया।वहां मैंने अपनी सुंदर सुंदर फोटो लगा दी ताकि मेरी प्रोफाइल अच्छी लगे और अपने बारे में लिख दिया।
उसके बाद मेरी बहुत लड़कियों से बात हुई.
परंतु एक लड़की से बात हुई जोकि पुणे में रहती थी।
लड़की का नाम श्रेया था.
शुरू शुरू में हमारी नॉर्मल बातें हुई जैसे कि आप क्या करते हैं कहां रहते हैं।यह सब एक महीने तक चलता रहा.
उसके बाद हमारी थोड़ी बहुत नॉनवेज बातें होने लग गई और 1 महीने तक हम चुदाई की बातें भी करने लगे।
वह बहुत टाइम से सिंगल थी और लगभग 1 साल से चुदी नहीं थी.
पर मैंने तो मार्च में ही चुदाई की थी और मन तो मेरा भी बहुत कर रहा था किसी की चूत चोदने के लिए!
मेरा लंड हमेशा तैयार रहता था.
श्रेया का रंग गोरा था. उसकी हाइट 5 फुट 7 इंच के करीब थी, शरीर भरा हुआ था. उसके बूब्ज़ 36 इंच के थे और उसकी गांड उससे भी बड़ी 40 इंच की थी।
काम के चलते हम मिल नहीं सकते थे तो वह वीडियो कॉल कर मुझे अपनी चूची और अपनी गांड दिखाया करती थी और मैं उसे देखकर अपना लंड हिलाता था।
श्रेया शुरू से ही हॉट थी वह वीडियो कॉल पर भी अपनी चूत में उंगली करके मुझे दिखाती थी और अपनी चूत में उंगली करते हुए मुझे वीडियो भेजती थी।
हम दोनों एक दूसरे से चुदाई की बातें करके गर्म हो जाते थे और इंतजार कर रहे थे कि कब मिलकर एक दूसरे की आग बुझायें।
और बहुत सब्र करने के बाद वह दिन आया हम दोनों को मिलने का मौका मिला।
उसने उसके ही शहर में पुणे में एक होटल में रूम बुक किया.वह अपनी सहेली के घर रुकने का बहाना लगाकर मुझसे मिलने आई।उसे पता था कि आज हम पूरी रात चुदाई करने वाले हैं.
हमने होटल में एंट्री की और रूम में चले गए। अब हमारे पास पूरी रात थी।वहां जाकर हम ने चेंज किया और अपने नाइट सूट पहन लिए।वह अपने घर से ही पीने के लिए फ्लेवर्ड हुक्का लेकर आई थी। उसने सुलगाया और उसमें फ्लेवर डालकर करके कश लगाने लगी।फिर उसने एक बीयर मंगवाई और पूरी बीयर खत्म कर गई।
उसके बाद हमने खाना खाया और थोड़ी बहुत बातें की.
उसके बाद उसने एक बीयर और खत्म कर दी जिससे उसे नशा हो गया।और फिर उसने मुझे अपनी बांहों में ले लिया, मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर चूसने लगी।10 से 15 मिनट तक हम दोनों एक दूसरे के होंठ चूसते रहे और मैं उसकी गांड से खेलता रहा.हम दोनों गर्म होने लगे थे।
उससे बीयर चढ़ गई थी, उसने मेरी गर्दन पर अपने होंठ रख कर चूसना शुरू कर दिया और मैंने भी उसके गर्दन पर अपनी जीभ फेरने शुरू कर दी।गर्दन चूमते चूमते मेरे हाथ उसकी गर्दन पर चल रहे थे और मैं उसकी गांड दबा रहा था।इतने में मैंने उसे उल्टा घुमा कर उसकी गर्दन के पीछे किस करनी शुरू कर दी और दोनों हाथों से उसकी चूचियां दबाने शुरू कर दी.वो आहें भरने लगी और मेरा लंड टाइट होने लगा।उसने अपना हाथ पीछे करके मेरा लंड पकड़ लिया और मेरे लंड से खेलने लगी।उसके बाद वह वापस घूम गई और उसने मेरे होंठ चूसने शुरू कर दिये।
10 मिनट तक हमारी किस चली और उसके बाद मैंने उसकी चूचियां जोर जोर से दबाने शुरू कर दी.फिर मैंने उसकी टी-शर्ट को ऊपर कर दिया और ब्रा में से उसकी चूचियां दबाने लगा।उसके हाथ मेरी गर्दन पर थे और मैंने उसकी ब्रा उतार कर उसकी बाई तरफ वाली वाली चुची को अपने मुंह में भर लिया और उसके निप्पल चूसने लगा और साथ में अपने हाथ से दाईं तरफ वाली चूची को दबाने लगा।उसके मुंह से सिसकारियां निकल रही थी- आह अआह!
अभी तक हमें यह सब खड़े होकर कर रहे थे पर तब मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया. उसकी दोनों चूचियों को अपने मुंह में लेकर खेलने लगा. कभी मैं उसकी बायीं तरफ वाली वाली चूची को चूस रहा था और कभी दायीं तरफ वाली।फिर मैंने उसके पेट पर किस करना शुरू कर दिया और उसकी नाभि में जीभ डालने लगा.वो पागलों की तरह मेरे बालों में हाथ से रही थी।उसके पेट को चूमते हुए मैं उसकी नाभि में जीभ डालकर चाटने लगा और फिर दोबारा से मैंने उसकी चूचियां मुंह में डाल दी।
फिर मैंने नीचे जाकर उसका पजामा उतारा और उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को चूमने लगा।
उसकी चूत की खुशबू मुझे पागल कर रही थी।मैंने उसकी पैंटी उतारी और उसकी चूत को ऊपर से चाटने लगा।
फेसबुक पर मिली लड़की को होटल में XX....
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम अमोल है और मैं अहमदनगर शहर का निवासी हूं।
मेरी उम्र 28 साल है. मेरा रंग गोरा है और मेरी हाइट 5 फीट 6 इंच है. मेरे लंड का साइज 7 इंच है और इसकी मोटाई भी अच्छी है.
दोस्तो, यह कहानी है जब मे फेसबुक पर सेक्स कहानियाँ लिखता हु तब मुझे फेसबुक पर एक लड़की मिली जिसे मेरी कहानियाँ पसंद आयी थी जिसको मैंने उसके शहर में जाकर सेक्स का मजा दिया.
वैसे तो मेरी गर्लफ्रेंड से रह चुकी हैं और मैंने बहुत बार चुदाई की है पर यह लड़की मुझे लॉकडाउन के समय फेसबुक पर मिली जिसको मैंने होटल में चोदा !
दोस्तो, मैंने लॉकडाउन में भारी अंतर के चलते फेसबुक पर कहानियाँ लिखना शुरु किया।वहां मैंने अपनी सुंदर सुंदर फोटो लगा दी ताकि मेरी प्रोफाइल अच्छी लगे और अपने बारे में लिख दिया।
उसके बाद मेरी बहुत लड़कियों से बात हुई.
परंतु एक लड़की से बात हुई जोकि पुणे में रहती थी।
लड़की का नाम श्रेया था.
शुरू शुरू में हमारी नॉर्मल बातें हुई जैसे कि आप क्या करते हैं कहां रहते हैं।यह सब एक महीने तक चलता रहा.
उसके बाद हमारी थोड़ी बहुत नॉनवेज बातें होने लग गई और 1 महीने तक हम चुदाई की बातें भी करने लगे।
वह बहुत टाइम से सिंगल थी और लगभग 1 साल से चुदी नहीं थी.
पर मैंने तो मार्च में ही चुदाई की थी और मन तो मेरा भी बहुत कर रहा था किसी की चूत चोदने के लिए!
मेरा लंड हमेशा तैयार रहता था.
श्रेया का रंग गोरा था. उसकी हाइट 5 फुट 7 इंच के करीब थी, शरीर भरा हुआ था. उसके बूब्ज़ 36 इंच के थे और उसकी गांड उससे भी बड़ी 40 इंच की थी।
काम के चलते हम मिल नहीं सकते थे तो वह वीडियो कॉल कर मुझे अपनी चूची और अपनी गांड दिखाया करती थी और मैं उसे देखकर अपना लंड हिलाता था।
श्रेया शुरू से ही हॉट थी वह वीडियो कॉल पर भी अपनी चूत में उंगली करके मुझे दिखाती थी और अपनी चूत में उंगली करते हुए मुझे वीडियो भेजती थी।
हम दोनों एक दूसरे से चुदाई की बातें करके गर्म हो जाते थे और इंतजार कर रहे थे कि कब मिलकर एक दूसरे की आग बुझायें।
और बहुत सब्र करने के बाद वह दिन आया हम दोनों को मिलने का मौका मिला।
उसने उसके ही शहर में पुणे में एक होटल में रूम बुक किया.वह अपनी सहेली के घर रुकने का बहाना लगाकर मुझसे मिलने आई।उसे पता था कि आज हम पूरी रात चुदाई करने वाले हैं.
हमने होटल में एंट्री की और रूम में चले गए। अब हमारे पास पूरी रात थी।वहां जाकर हम ने चेंज किया और अपने नाइट सूट पहन लिए।वह अपने घर से ही पीने के लिए फ्लेवर्ड हुक्का लेकर आई थी। उसने सुलगाया और उसमें फ्लेवर डालकर करके कश लगाने लगी।फिर उसने एक बीयर मंगवाई और पूरी बीयर खत्म कर गई।
उसके बाद हमने खाना खाया और थोड़ी बहुत बातें की.
उसके बाद उसने एक बीयर और खत्म कर दी जिससे उसे नशा हो गया।और फिर उसने मुझे अपनी बांहों में ले लिया, मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर चूसने लगी।10 से 15 मिनट तक हम दोनों एक दूसरे के होंठ चूसते रहे और मैं उसकी गांड से खेलता रहा.हम दोनों गर्म होने लगे थे।
उससे बीयर चढ़ गई थी, उसने मेरी गर्दन पर अपने होंठ रख कर चूसना शुरू कर दिया और मैंने भी उसके गर्दन पर अपनी जीभ फेरने शुरू कर दी।गर्दन चूमते चूमते मेरे हाथ उसकी गर्दन पर चल रहे थे और मैं उसकी गांड दबा रहा था।इतने में मैंने उसे उल्टा घुमा कर उसकी गर्दन के पीछे किस करनी शुरू कर दी और दोनों हाथों से उसकी चूचियां दबाने शुरू कर दी.वो आहें भरने लगी और मेरा लंड टाइट होने लगा।उसने अपना हाथ पीछे करके मेरा लंड पकड़ लिया और मेरे लंड से खेलने लगी।उसके बाद वह वापस घूम गई और उसने मेरे होंठ चूसने शुरू कर दिये।
10 मिनट तक हमारी किस चली और उसके बाद मैंने उसकी चूचियां जोर जोर से दबाने शुरू कर दी.फिर मैंने उसकी टी-शर्ट को ऊपर कर दिया और ब्रा में से उसकी चूचियां दबाने लगा।उसके हाथ मेरी गर्दन पर थे और मैंने उसकी ब्रा उतार कर उसकी बाई तरफ वाली वाली चुची को अपने मुंह में भर लिया और उसके निप्पल चूसने लगा और साथ में अपने हाथ से दाईं तरफ वाली चूची को दबाने लगा।उसके मुंह से सिसकारियां निकल रही थी- आह अआह!
अभी तक हमें यह सब खड़े होकर कर रहे थे पर तब मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया. उसकी दोनों चूचियों को अपने मुंह में लेकर खेलने लगा. कभी मैं उसकी बायीं तरफ वाली वाली चूची को चूस रहा था और कभी दायीं तरफ वाली।फिर मैंने उसके पेट पर किस करना शुरू कर दिया और उसकी नाभि में जीभ डालने लगा.वो पागलों की तरह मेरे बालों में हाथ से रही थी।उसके पेट को चूमते हुए मैं उसकी नाभि में जीभ डालकर चाटने लगा और फिर दोबारा से मैंने उसकी चूचियां मुंह में डाल दी।
फिर मैंने नीचे जाकर उसका पजामा उतारा और उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को चूमने लगा।
उसकी चूत की खुशबू मुझे पागल कर रही थी।मैंने उसकी पैंटी उतारी और उसकी चूत को ऊपर से चाटने लगा।
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वो पागल हो गई और सिसकारियां भरने लगी- आह आह आह!उसने अपना मेरा मुंह अपनी चूत पर दबा दिया और अपनी कमर हिला कर अपनी चूत चटवाने लगी।उसके बाद हम 69 पोजीशन में आ गए और मैंने घूम कर अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया।
उसकी चूत चाटने में मुझे बहुत मजा आ रहा था और उसने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया।
वह बिल्कुल आइसक्रीम की तरह लंड चूस रही थी और पूरा लंड मुंह में अंदर बाहर कर रही थी।फिर उसने मेरे टट्टों पर जीभ फेरनी शुरू कर दी.मुझे बहुत मजा आने लगा और मैं उसके मुंह में झटके मारने लगा।
5 मिनट तक यही सब चलता रहा और वह झड़ गई.
मैं उसका सारा माल पी गया और उसके मुंह में अपने लंड के झटके मारता रहा।वो मस्ती में मेरा लंड चूस रही थी.
मेरा एक बार भी नहीं निकला था.5 मिनट और लंड चुसवाने के बाद मैं उसके ऊपर आ गया अब मैं अपना लंड उसकी चूत पर घिसने लगा.वह पागलों की तरह सिसकारियां ले रही थी।
तभी उसने मुझे बोला- जानू अब लंड अंदर डाल दो! मेरा बहुत मन कर रहा है.और उसने अपने आप से मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुंह पर रख दिया क्योंकि वह 1 साल से चुदी नहीं थी।मैंने धीरे से लंड अंदर डाला और उसके मुंह से आह निकल गई.उसने मुझे बोला- बेबी धीरे धीरे डालना।
मैंने उसकी दोनों टाँगों को खोलकर धीरे-धीरे लंड डालना शुरू किया आधा लंड डालकर मैंने झटके मारने शुरू किए।उसकी चूत गीली होने के कारण आधा लंड अंदर चला गया.लगभग 2 मिनट बाद थोड़ा सा दर्द होने के बाद वह पूरा लंड ले गई।एकदम से पूरा लंड अंदर जाते ही उसके मुंह से चीख निकली.
मैंने धीरे-धीरे अपनी कमर चलानी शुरू कर दी.
उसे मजा आने लगा और वह आह आह करने लगी.
मैंने अपनी कमर तेज तेज चलानी शुरू कर दी और हमारी ताबड़तोड़ चुदाई की शुरुआत हो चुकी थी।उसकी आवाज सुनकर मुझे जोश चढने लगा और मैंने जोर जोर से अपना लंड उसकी चूत में पेलना शुरू कर दिया।
अब उसके मुंह में से हल्की-हल्की चीख निकलने लगी।
मैंने उसकी दोनों टांगें उठा कर अपने कंधों पर रख ली और और पैरों के भार बैठकर कर उसकी चूत में अपना लंड पेलने लगा.साथ में मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियां दबानी शुरू कर दी।उसे और मजा आने लगा.
10 मिनट तक ऐसे चुदाई करने के बाद मैंने उसको घोड़ी बना दिया और पीछे से लंड डाला और साथ में उसकी चूचियां पकड़ ली उसको पीछे से चोदना शुरू कर दिया।
मैं बहुत तेज धक्के लगा रहा था जिस वजह से उसकी चीखें निकल रही थी.5 मिनट बाद वो झड़ गयी।पर मेरा माल अभी नहीं निकला था तो मैंने उसे चोदना जारी रखा.2 मिनट बाद वो बोली- मुझे दर्द हो रहा है।
इसलिए मैं नीचे आ गया और मैंने उसको अपने ऊपर बैठा लिया उसने ऊपर आकर अपनी चूत में लंड डाल लिया और ऊपर नीचे होने लगी।मैंने दोनों हाथों से उसकी चूचियां पकड़ ली और दबाने लगा।वह अपनी चूत मेरे लंड पर मार रही थी और मैंने नीचे से झटके मारने लगा।
5 मिनट मेरे लंड पर कूदने के बाद उसने आगे पीछे होकर लंड को लेना शुरू कर दिया।इस पोज में हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था.
थोड़ी देर ऐसे ही चुदाई करने के बाद मैंने उसे बेड से नीचे उतारा और उसको बेड पर झुका दिया और पीछे से लंड डालकर उसकी चुदाई शुरू कर दी।पांच मिनट बाद जब मेरा माल गिरने को आया तो मैंने उसको घुमा कर अपना लौड़ा उसके मुंह में दे दिया और अपनी कमर हिलाने लगा।एक-दो मिनट बाद मेरा सारा माल उसके मुंह में झड़ गया।वह मेरा लंड अपने मुंह से बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी पर मैंने पूरा लंड उसके मुंह में दे रखा था।इस वजह से मेरा सारा माल उसके गले से नीचे उतर गया।मैं संतुष्ट होकर बेड पर लेट गया।
वह बाथरूम में गई और जाकर अपनी चूत और मुंह को धोकर आई और आकर मुझे गले लगा कर कर लेट गई।
उसके बाद सारी रात हमने 4 बार और चुदाई की जिसमें से हमने एक बार सुबह जब वह वापस जाने लगी तो नहाते हुए चुदाई की।
उसे मेरे साथ चुदाई कर कर बहुत मजा आया.
उसकी चूत चाटने में मुझे बहुत मजा आ रहा था और उसने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया।
वह बिल्कुल आइसक्रीम की तरह लंड चूस रही थी और पूरा लंड मुंह में अंदर बाहर कर रही थी।फिर उसने मेरे टट्टों पर जीभ फेरनी शुरू कर दी.मुझे बहुत मजा आने लगा और मैं उसके मुंह में झटके मारने लगा।
5 मिनट तक यही सब चलता रहा और वह झड़ गई.
मैं उसका सारा माल पी गया और उसके मुंह में अपने लंड के झटके मारता रहा।वो मस्ती में मेरा लंड चूस रही थी.
मेरा एक बार भी नहीं निकला था.5 मिनट और लंड चुसवाने के बाद मैं उसके ऊपर आ गया अब मैं अपना लंड उसकी चूत पर घिसने लगा.वह पागलों की तरह सिसकारियां ले रही थी।
तभी उसने मुझे बोला- जानू अब लंड अंदर डाल दो! मेरा बहुत मन कर रहा है.और उसने अपने आप से मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुंह पर रख दिया क्योंकि वह 1 साल से चुदी नहीं थी।मैंने धीरे से लंड अंदर डाला और उसके मुंह से आह निकल गई.उसने मुझे बोला- बेबी धीरे धीरे डालना।
मैंने उसकी दोनों टाँगों को खोलकर धीरे-धीरे लंड डालना शुरू किया आधा लंड डालकर मैंने झटके मारने शुरू किए।उसकी चूत गीली होने के कारण आधा लंड अंदर चला गया.लगभग 2 मिनट बाद थोड़ा सा दर्द होने के बाद वह पूरा लंड ले गई।एकदम से पूरा लंड अंदर जाते ही उसके मुंह से चीख निकली.
मैंने धीरे-धीरे अपनी कमर चलानी शुरू कर दी.
उसे मजा आने लगा और वह आह आह करने लगी.
मैंने अपनी कमर तेज तेज चलानी शुरू कर दी और हमारी ताबड़तोड़ चुदाई की शुरुआत हो चुकी थी।उसकी आवाज सुनकर मुझे जोश चढने लगा और मैंने जोर जोर से अपना लंड उसकी चूत में पेलना शुरू कर दिया।
अब उसके मुंह में से हल्की-हल्की चीख निकलने लगी।
मैंने उसकी दोनों टांगें उठा कर अपने कंधों पर रख ली और और पैरों के भार बैठकर कर उसकी चूत में अपना लंड पेलने लगा.साथ में मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियां दबानी शुरू कर दी।उसे और मजा आने लगा.
10 मिनट तक ऐसे चुदाई करने के बाद मैंने उसको घोड़ी बना दिया और पीछे से लंड डाला और साथ में उसकी चूचियां पकड़ ली उसको पीछे से चोदना शुरू कर दिया।
मैं बहुत तेज धक्के लगा रहा था जिस वजह से उसकी चीखें निकल रही थी.5 मिनट बाद वो झड़ गयी।पर मेरा माल अभी नहीं निकला था तो मैंने उसे चोदना जारी रखा.2 मिनट बाद वो बोली- मुझे दर्द हो रहा है।
इसलिए मैं नीचे आ गया और मैंने उसको अपने ऊपर बैठा लिया उसने ऊपर आकर अपनी चूत में लंड डाल लिया और ऊपर नीचे होने लगी।मैंने दोनों हाथों से उसकी चूचियां पकड़ ली और दबाने लगा।वह अपनी चूत मेरे लंड पर मार रही थी और मैंने नीचे से झटके मारने लगा।
5 मिनट मेरे लंड पर कूदने के बाद उसने आगे पीछे होकर लंड को लेना शुरू कर दिया।इस पोज में हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था.
थोड़ी देर ऐसे ही चुदाई करने के बाद मैंने उसे बेड से नीचे उतारा और उसको बेड पर झुका दिया और पीछे से लंड डालकर उसकी चुदाई शुरू कर दी।पांच मिनट बाद जब मेरा माल गिरने को आया तो मैंने उसको घुमा कर अपना लौड़ा उसके मुंह में दे दिया और अपनी कमर हिलाने लगा।एक-दो मिनट बाद मेरा सारा माल उसके मुंह में झड़ गया।वह मेरा लंड अपने मुंह से बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी पर मैंने पूरा लंड उसके मुंह में दे रखा था।इस वजह से मेरा सारा माल उसके गले से नीचे उतर गया।मैं संतुष्ट होकर बेड पर लेट गया।
वह बाथरूम में गई और जाकर अपनी चूत और मुंह को धोकर आई और आकर मुझे गले लगा कर कर लेट गई।
उसके बाद सारी रात हमने 4 बार और चुदाई की जिसमें से हमने एक बार सुबह जब वह वापस जाने लगी तो नहाते हुए चुदाई की।
उसे मेरे साथ चुदाई कर कर बहुत मजा आया.
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Antarvasana story:
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम मधु है और वर्तमान में मेरी उम्र 46 साल की है.
मैं अपनी जो कहानी बताने जा रही हूं, वो आज से लगभग 27 साल पुरानी है.
उस वक्त मैं 19 साल की थी.
अभी तो मैं लखनऊ में रह रही हूं मगर शादी के पहले मैं एक छोटे से गांव में रहा करती थी.
जिंदगी में कोई भी व्यक्ति अपनी पहली चुदाई को कभी नहीं भूल सकता … चाहे वो मर्द हो या औरत.
वैसा ही मेरा भी हाल है. चाहकर भी मैं अपनी पहली चुदाई कभी नहीं भूल पाती.
वो मेरी चूतकी सील का टूटना और बेइंतहा दर्द, आज भी मुझे अच्छे से याद है.
जब मैं 22 साल की थी, तब मेरी शादी हुई थी. मगर उससे पहले मैंने चुदाई का इतना मजा लिया था कि शायद ही शादी के बाद वैसा मजा मिला हो.
शादी के बाद मैं लखनऊ में अपनी ससुराल में आ गई.
आज आप मेरी जिंदगी के उस हिस्से में चलिए, जब मैं गांव में अपने माता पिता के साथ रहा करती थी.
मेरे घर पर मेरे माता-पिता, मेरा बड़ा भाई, मेरी भाभी और मैं रहा करते थे.
मेरे पिता और भाई दोनों खेती का काम किया करते थे.
गांव में हम लोग काफी संपन्न लोगों में से थे.
मेरे भाई ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे मगर मेरी पढ़ाई के प्रति रुचि देख घर के लोग मुझे आगे पढ़ाना चाहते थे.
गांव में मेरी कुछ ही सहेलियां थीं, जिनकी पढ़ाई जारी थी.
हमारे गांव में केवल 10 वीं तक की शिक्षा के लिए स्कूल था. आगे की पढ़ाई के लिए हमें दूसरे गांव जाना पड़ता था, जो 5 किलोमीटर दूर था.
जब मैं 10 वीं में थी, तभी से मेरा बदन काफी भर गया था और गदराया हुआ दिखने लगा था.
उस समय के दीवाने मेरे पीछे लाइन लगा कर खड़े रहते थे.
गांव में जब मैं निकलती, तो चाहे मेरी उम्र के लड़के हों या शादीशुदा अधेड़ उम्र के आदमी हों, सभी की निगाह मेरे तने हुए बड़े बड़े चूचों पर … और मेरी उभरी हुई गांड पर टिक जाती थी.
मैं भी उस समय तक सब जानने समझने लगी थी कि वो लोग ऐसा क्या देखते थे.
औरत मर्द के बीच क्या संबंध बनाए जाते हैं, इन सबकी जानकारी मुझे हो गई थी.
घर में मेरे कमरे के बगल में ही मेरे भइया भाभी का कमरा था और अक्सर रात में मेरी भाभी की जोश से भरी हुई आहें मुझे सुनाई दिया करती थीं.
मेरे और भाभी के बीच हंसी मजाक चलता रहता था और उनके द्वारा ही मुझे काफी कुछ सीखने और जानने को मिला था.
उसके अलावा भी मेरी कुछ सहेलियां थीं, जिन्होंने चुदाई का खेल खेला हुआ था.
उनके द्वारा भी मुझे सब पता चलता रहता था.
रात में अक्सर मेरे दोनों हाथ मेरी चूत को सहलाया करते क्योंकि कहीं न कहीं अब मुझे भी किसी साथी की जरूरत महसूस होने लगी थी.
मैं दिखने में काफी सुंदर गोरी और भरे बदन की लड़की थी.
गांव के कई लड़के मेरे दीवाने थे मगर मुझे कोई पसंद नहीं आता था और गांव में जो मुझे अच्छा लगता था, उसकी शादी हो चुकी थी.
उसकी शादी हो जाने के बाद भी वो मुझे तिरछी नजरों से देखा करता था.
उस वक्त मैं अन्दर तक कामुक हो जाती थी और मेरी चूतमें चींटियां रेंगने लगती थीं.
उम्र में वो मुझसे करीब 15 साल बड़ा जरूर था मगर मन ही मन में वो मुझे काफी पसंद था.
उसका नाम किशोर था.
एक बार की बात है. वो होली का दिन था और हम सब सहेलियां होली खेलने के बाद नदी में नहाने के लिए गई हुई थीं.
हम लोगों ने थोड़ी बहुत भांग भी पी हुई थी. सब मस्ती कर रही थीं.
नदी में नहाने के बाद मेरी बाकी सहेलियां तो अपने घर चली गईं मगर मैं और मेरी एक अन्य सहेली ने कुछ और देर तक नदी में रुकने का मन बनाया.
नहाने के बाद हम दोनों वैसे ही गीले और भीगे हुए कपड़ों में नदी के किनारे रेत पर लेट गईं.
हमारे गीले कपड़े बदन से कुछ ऐसे चिपके हुए थे कि अन्दर का हर एक अंग साफ साफ झलक रहा था.
वैसे ही लेटे लेटे हम दोनों की आंख लग गई.
कुछ समय बाद अचानक से मेरी आंख खुली तो मैंने देखा कि मेरे सामने किशोर खड़ा हुआ था और मेरे बदन को निहार रहा था.
मैंने जल्दी से अपनी सहेली को उठाया और हम दोनों वहां से वापस घर की तरफ चल दिए.
आधे रास्ते पर मुझे याद आया कि मैं अपने सूखे कपड़े वहीं भूल आई थी.
मैंने अपनी सहेली को साथ चलने के लिए कहा, मगर वो नहीं गई.
मैं अकेली वापस नदी पर गई और देखा कि किशोर नहा रहा था.
मुझे दूर से ही देखकर वो नदी से निकल कर बाहर आ गया.
उस वक्त उसने केवल एक चड्डी पहनी हुई थी.
मेरी तिरछी नजर चड्डी में उसके तने हुए लंड पर जा रही थी.
मैंने चुपचाप अपने कपड़े उठाए और आने लगी.
तभी किशोर की आवाज आई- अरे कोई हमारे साथ भी तो नहा ले.
मैंने अपनी गर्दन पीछे की तरफ घुमाई और मुस्कुराते हुए उसे देखा और वहां से भाग आई.
किसी को पता नहीं चलेगा. ये बात केवल हम दोनों तक ही रहेगी. फिर तुमसे ज्यादा डर तो मुझे है. मेरी पहले से ही बीवी बच्चे हैं.
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम मधु है और वर्तमान में मेरी उम्र 46 साल की है.
मैं अपनी जो कहानी बताने जा रही हूं, वो आज से लगभग 27 साल पुरानी है.
उस वक्त मैं 19 साल की थी.
अभी तो मैं लखनऊ में रह रही हूं मगर शादी के पहले मैं एक छोटे से गांव में रहा करती थी.
जिंदगी में कोई भी व्यक्ति अपनी पहली चुदाई को कभी नहीं भूल सकता … चाहे वो मर्द हो या औरत.
वैसा ही मेरा भी हाल है. चाहकर भी मैं अपनी पहली चुदाई कभी नहीं भूल पाती.
वो मेरी चूतकी सील का टूटना और बेइंतहा दर्द, आज भी मुझे अच्छे से याद है.
जब मैं 22 साल की थी, तब मेरी शादी हुई थी. मगर उससे पहले मैंने चुदाई का इतना मजा लिया था कि शायद ही शादी के बाद वैसा मजा मिला हो.
शादी के बाद मैं लखनऊ में अपनी ससुराल में आ गई.
आज आप मेरी जिंदगी के उस हिस्से में चलिए, जब मैं गांव में अपने माता पिता के साथ रहा करती थी.
मेरे घर पर मेरे माता-पिता, मेरा बड़ा भाई, मेरी भाभी और मैं रहा करते थे.
मेरे पिता और भाई दोनों खेती का काम किया करते थे.
गांव में हम लोग काफी संपन्न लोगों में से थे.
मेरे भाई ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे मगर मेरी पढ़ाई के प्रति रुचि देख घर के लोग मुझे आगे पढ़ाना चाहते थे.
गांव में मेरी कुछ ही सहेलियां थीं, जिनकी पढ़ाई जारी थी.
हमारे गांव में केवल 10 वीं तक की शिक्षा के लिए स्कूल था. आगे की पढ़ाई के लिए हमें दूसरे गांव जाना पड़ता था, जो 5 किलोमीटर दूर था.
जब मैं 10 वीं में थी, तभी से मेरा बदन काफी भर गया था और गदराया हुआ दिखने लगा था.
उस समय के दीवाने मेरे पीछे लाइन लगा कर खड़े रहते थे.
गांव में जब मैं निकलती, तो चाहे मेरी उम्र के लड़के हों या शादीशुदा अधेड़ उम्र के आदमी हों, सभी की निगाह मेरे तने हुए बड़े बड़े चूचों पर … और मेरी उभरी हुई गांड पर टिक जाती थी.
मैं भी उस समय तक सब जानने समझने लगी थी कि वो लोग ऐसा क्या देखते थे.
औरत मर्द के बीच क्या संबंध बनाए जाते हैं, इन सबकी जानकारी मुझे हो गई थी.
घर में मेरे कमरे के बगल में ही मेरे भइया भाभी का कमरा था और अक्सर रात में मेरी भाभी की जोश से भरी हुई आहें मुझे सुनाई दिया करती थीं.
मेरे और भाभी के बीच हंसी मजाक चलता रहता था और उनके द्वारा ही मुझे काफी कुछ सीखने और जानने को मिला था.
उसके अलावा भी मेरी कुछ सहेलियां थीं, जिन्होंने चुदाई का खेल खेला हुआ था.
उनके द्वारा भी मुझे सब पता चलता रहता था.
रात में अक्सर मेरे दोनों हाथ मेरी चूत को सहलाया करते क्योंकि कहीं न कहीं अब मुझे भी किसी साथी की जरूरत महसूस होने लगी थी.
मैं दिखने में काफी सुंदर गोरी और भरे बदन की लड़की थी.
गांव के कई लड़के मेरे दीवाने थे मगर मुझे कोई पसंद नहीं आता था और गांव में जो मुझे अच्छा लगता था, उसकी शादी हो चुकी थी.
उसकी शादी हो जाने के बाद भी वो मुझे तिरछी नजरों से देखा करता था.
उस वक्त मैं अन्दर तक कामुक हो जाती थी और मेरी चूतमें चींटियां रेंगने लगती थीं.
उम्र में वो मुझसे करीब 15 साल बड़ा जरूर था मगर मन ही मन में वो मुझे काफी पसंद था.
उसका नाम किशोर था.
एक बार की बात है. वो होली का दिन था और हम सब सहेलियां होली खेलने के बाद नदी में नहाने के लिए गई हुई थीं.
हम लोगों ने थोड़ी बहुत भांग भी पी हुई थी. सब मस्ती कर रही थीं.
नदी में नहाने के बाद मेरी बाकी सहेलियां तो अपने घर चली गईं मगर मैं और मेरी एक अन्य सहेली ने कुछ और देर तक नदी में रुकने का मन बनाया.
नहाने के बाद हम दोनों वैसे ही गीले और भीगे हुए कपड़ों में नदी के किनारे रेत पर लेट गईं.
हमारे गीले कपड़े बदन से कुछ ऐसे चिपके हुए थे कि अन्दर का हर एक अंग साफ साफ झलक रहा था.
वैसे ही लेटे लेटे हम दोनों की आंख लग गई.
कुछ समय बाद अचानक से मेरी आंख खुली तो मैंने देखा कि मेरे सामने किशोर खड़ा हुआ था और मेरे बदन को निहार रहा था.
मैंने जल्दी से अपनी सहेली को उठाया और हम दोनों वहां से वापस घर की तरफ चल दिए.
आधे रास्ते पर मुझे याद आया कि मैं अपने सूखे कपड़े वहीं भूल आई थी.
मैंने अपनी सहेली को साथ चलने के लिए कहा, मगर वो नहीं गई.
मैं अकेली वापस नदी पर गई और देखा कि किशोर नहा रहा था.
मुझे दूर से ही देखकर वो नदी से निकल कर बाहर आ गया.
उस वक्त उसने केवल एक चड्डी पहनी हुई थी.
मेरी तिरछी नजर चड्डी में उसके तने हुए लंड पर जा रही थी.
मैंने चुपचाप अपने कपड़े उठाए और आने लगी.
तभी किशोर की आवाज आई- अरे कोई हमारे साथ भी तो नहा ले.
मैंने अपनी गर्दन पीछे की तरफ घुमाई और मुस्कुराते हुए उसे देखा और वहां से भाग आई.
किसी को पता नहीं चलेगा. ये बात केवल हम दोनों तक ही रहेगी. फिर तुमसे ज्यादा डर तो मुझे है. मेरी पहले से ही बीवी बच्चे हैं.
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मैंने उसकी तरफ मुस्कुरा कर देखा और अपना हाथ छुड़ाती हुई बोली- कल नदी के पास मिलना, तब मैं अपना जवाब बताऊंगी.
बस इतना कह कर मैं वहां से दौड़ती हुई भाग आई.
सारी रात मैं करवटें बदलती रही और उसकी बातों को सोचती रही कि क्या मैं सही कर रही हूँ या गलत.
मगर मेरी कुंवारी जवानी ने शायद मुझे बहका दिया और मैंने उसे हां करने का फैसला कर लिया.
अगले दिन स्कूल की छुट्टी थी और मैं घर पर ही थी.
घर के काम से फुर्सत होकर दोपहर करीब 3 बजे मैं अकेली ही नदी की तरफ चल दी.
किशोर पहले से ही वहां मौजूद था.
उस वक्त नदी के आसपास कोई भी नजर नहीं आ रहा था.
मुझे देखते ही किशोर मेरे पास आ गया और बोला- बताओ क्या सोचा तुमने?
मैं- सोचना क्या है, तुम भी मुझे पसंद हो … मगर ये बात कभी किसी को पता नहीं चलनी चाहिए.
वो- कभी नहीं चलेगी. मैं कभी किसी को नहीं बताऊंगा.
इतने में ही हमें किसी की आहट सुनाई दी.
किशोर ने झट से मेरा हाथ पकड़ा और मुझे नदी के किनारे टीले के बीच ले गया.
टीले के बीच एक दरार थी.
वहीं झाड़ियों में हम दोनों छुप गए. हमें वहां कोई नहीं देख सकता था.
उस वक्त किशोर मुझे अपने सीने से लगाए हुए था क्योंकि वो जगह काफी संकरी थी.
मैं भी किशोर से चिपकी हुई थी.
मेरे उभरे हुए दोनों दूध उसके सीने पर दबे जा रहे थे, मेरी सांस काफी तेज रफ्तार से चल रही थी.
हम दोनों बिल्कुल शांत होकर एक दूसरे की आंखों में देखे जा रहे थे.
मुझे काफी डर भी लग रहा था कि कहीं कोई देख न ले.
किशोर का चेहरा मेरे चेहरे के पास आता गया और ऐसे ही करते हुए उसने मेरे गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
वो मेरी जिंदगी का पहला चुम्बन था.
मेरे हाथ भी किशोर के बालों पर चलने लगे.
हम दोनों के बदन एक दूसरे से चिपक गए.
मेरे पेट के पास कुछ कठोर सा चीज चुभ रहा था. मैंने ध्यान दिया तो वो किशोर का तना हुआ लंड था.
मैंने कभी भी किसी मर्द का लंड नहीं देखा था.
उस वक्त भी उसका लंड उसके पैंट के अन्दर था, बस उसके पेट से छूने से लंड का अहसास हो रहा था.
देखते ही देखते किशोर का एक हाथ मेरी कमर से होता हुआ मेरे पिछवाड़े तक चला गया और वो मेरे चूतड़ों को सहलाने लगा.
मैंने तुरंत ही उसका हाथ पकड़ कर अलग कर दिया और उससे अलग हो गई.
मैं उस वक्त वो सब नहीं करना चाहती थी और उसने भी इस बात को समझते हुए कुछ नहीं किया.
उसके बाद कुछ समय बाद जब वहां कोई नहीं था तो हम लोग अपने अपने घर की तरफ चल दिए.
रात भर मेरे आंखों से नींद गायब थी और मैं अपने पहले चुम्बन के अहसास को याद करते हुए जागती रही.
दोस्तो, अब विलेज देसी सेक्स की कहानी के अगले भाग में आप मेरी पहली चुदाई पढ़ेंगे.
इसके अलावा भी मैंने किन किन लोगों के साथ बिस्तर पर चुदाई के मजे किए, ये सब कहानी के आने वाले भाग में आप पढ़ेंगे.
दोस्तो, मैं मधु एक बार फिर से आप सभी का अपनी सेक्स कहानी के अगले भाग में स्वागत करती हूँ.
कहानी के पहले भाग
में अभी तक आपने पढ़ा था कि जवानी में कदम रखते ही कैसे मैं अपने आप पर काबू नहीं रख पाई.
अपने बदन की गर्मी को शांत करने के लिए मैं किशोर के नजदीक आ गई थी.
किशोर मुझसे उम्र में 15 साल बड़ा होने के साथ साथ शादीशुदा मर्द था, मेरे तो अंकल जैसा था. और मैं अभी नई उम्र की गदराई हुई जवान लड़की थी.
उस दिन नदी के पास किशोर ने मेरे होंठों को चूमा था और मेरी गांड सहलाने लगा था. उसने में ही मैं उससे अपना हाथ छुड़ा कर अलग हो गई थी.
किशोर ने भी मेरी भावनाओं को समझा था और हम दोनों कुछ देर रुकने के बाद उधर से चले आए थे.
अब देसी बुर की पहली चुदाई में आगे चलते हैं और जानते हैं कि किस तरह से किशोर ने आपकी मधु की जवानी की प्यास बुझाई और किस तरह आपकी मधु चुदाई की इतनी दीवानी हो गई कि वो कई लोगों के साथ बिस्तर गर्म करने लगी.
दोस्तो, मैं जबसे किशोर से मिलकर आई और जबसे उसने मुझे चूमा था, तब से उस वक्त को याद करते हुए मेरी चड्डी से पानी निकल जाया करता.
मेरी चड्डी दिन में कई बार अपने आप ही गीली हो जाती थी.
उस चुम्बन वाली घटना को काफी दिन हो गए थे मगर मुझे किशोर से मिलने का कोई मौका नहीं मिल रहा था.
स्कूल जाते समय भी मेरी सहेलियां साथ में होती थीं. स्कूल के रास्ते में ही उसका खेत पड़ता था, जहां पर हम दोनों एक दूसरे को देख लिया करते थे.
दिन ऐसे ही गुजर रहे थे और करीब एक महीने बाद मेरी दोनों सहेलियों ने कुछ दिन के लिए स्कूल से छुट्टी ले ली.
बस यही मौका मुझे मिल गया और मैंने एक खत के माध्यम से किशोर को बताया कि मैं स्कूल अकेली जाऊंगी, इसलिए रास्ते में मुझसे मिल लेना.
वो भी शायद ऐसे ही मौके के इंतजार में था.
बस इतना कह कर मैं वहां से दौड़ती हुई भाग आई.
सारी रात मैं करवटें बदलती रही और उसकी बातों को सोचती रही कि क्या मैं सही कर रही हूँ या गलत.
मगर मेरी कुंवारी जवानी ने शायद मुझे बहका दिया और मैंने उसे हां करने का फैसला कर लिया.
अगले दिन स्कूल की छुट्टी थी और मैं घर पर ही थी.
घर के काम से फुर्सत होकर दोपहर करीब 3 बजे मैं अकेली ही नदी की तरफ चल दी.
किशोर पहले से ही वहां मौजूद था.
उस वक्त नदी के आसपास कोई भी नजर नहीं आ रहा था.
मुझे देखते ही किशोर मेरे पास आ गया और बोला- बताओ क्या सोचा तुमने?
मैं- सोचना क्या है, तुम भी मुझे पसंद हो … मगर ये बात कभी किसी को पता नहीं चलनी चाहिए.
वो- कभी नहीं चलेगी. मैं कभी किसी को नहीं बताऊंगा.
इतने में ही हमें किसी की आहट सुनाई दी.
किशोर ने झट से मेरा हाथ पकड़ा और मुझे नदी के किनारे टीले के बीच ले गया.
टीले के बीच एक दरार थी.
वहीं झाड़ियों में हम दोनों छुप गए. हमें वहां कोई नहीं देख सकता था.
उस वक्त किशोर मुझे अपने सीने से लगाए हुए था क्योंकि वो जगह काफी संकरी थी.
मैं भी किशोर से चिपकी हुई थी.
मेरे उभरे हुए दोनों दूध उसके सीने पर दबे जा रहे थे, मेरी सांस काफी तेज रफ्तार से चल रही थी.
हम दोनों बिल्कुल शांत होकर एक दूसरे की आंखों में देखे जा रहे थे.
मुझे काफी डर भी लग रहा था कि कहीं कोई देख न ले.
किशोर का चेहरा मेरे चेहरे के पास आता गया और ऐसे ही करते हुए उसने मेरे गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
वो मेरी जिंदगी का पहला चुम्बन था.
मेरे हाथ भी किशोर के बालों पर चलने लगे.
हम दोनों के बदन एक दूसरे से चिपक गए.
मेरे पेट के पास कुछ कठोर सा चीज चुभ रहा था. मैंने ध्यान दिया तो वो किशोर का तना हुआ लंड था.
मैंने कभी भी किसी मर्द का लंड नहीं देखा था.
उस वक्त भी उसका लंड उसके पैंट के अन्दर था, बस उसके पेट से छूने से लंड का अहसास हो रहा था.
देखते ही देखते किशोर का एक हाथ मेरी कमर से होता हुआ मेरे पिछवाड़े तक चला गया और वो मेरे चूतड़ों को सहलाने लगा.
मैंने तुरंत ही उसका हाथ पकड़ कर अलग कर दिया और उससे अलग हो गई.
मैं उस वक्त वो सब नहीं करना चाहती थी और उसने भी इस बात को समझते हुए कुछ नहीं किया.
उसके बाद कुछ समय बाद जब वहां कोई नहीं था तो हम लोग अपने अपने घर की तरफ चल दिए.
रात भर मेरे आंखों से नींद गायब थी और मैं अपने पहले चुम्बन के अहसास को याद करते हुए जागती रही.
दोस्तो, अब विलेज देसी सेक्स की कहानी के अगले भाग में आप मेरी पहली चुदाई पढ़ेंगे.
इसके अलावा भी मैंने किन किन लोगों के साथ बिस्तर पर चुदाई के मजे किए, ये सब कहानी के आने वाले भाग में आप पढ़ेंगे.
दोस्तो, मैं मधु एक बार फिर से आप सभी का अपनी सेक्स कहानी के अगले भाग में स्वागत करती हूँ.
कहानी के पहले भाग
में अभी तक आपने पढ़ा था कि जवानी में कदम रखते ही कैसे मैं अपने आप पर काबू नहीं रख पाई.
अपने बदन की गर्मी को शांत करने के लिए मैं किशोर के नजदीक आ गई थी.
किशोर मुझसे उम्र में 15 साल बड़ा होने के साथ साथ शादीशुदा मर्द था, मेरे तो अंकल जैसा था. और मैं अभी नई उम्र की गदराई हुई जवान लड़की थी.
उस दिन नदी के पास किशोर ने मेरे होंठों को चूमा था और मेरी गांड सहलाने लगा था. उसने में ही मैं उससे अपना हाथ छुड़ा कर अलग हो गई थी.
किशोर ने भी मेरी भावनाओं को समझा था और हम दोनों कुछ देर रुकने के बाद उधर से चले आए थे.
अब देसी बुर की पहली चुदाई में आगे चलते हैं और जानते हैं कि किस तरह से किशोर ने आपकी मधु की जवानी की प्यास बुझाई और किस तरह आपकी मधु चुदाई की इतनी दीवानी हो गई कि वो कई लोगों के साथ बिस्तर गर्म करने लगी.
दोस्तो, मैं जबसे किशोर से मिलकर आई और जबसे उसने मुझे चूमा था, तब से उस वक्त को याद करते हुए मेरी चड्डी से पानी निकल जाया करता.
मेरी चड्डी दिन में कई बार अपने आप ही गीली हो जाती थी.
उस चुम्बन वाली घटना को काफी दिन हो गए थे मगर मुझे किशोर से मिलने का कोई मौका नहीं मिल रहा था.
स्कूल जाते समय भी मेरी सहेलियां साथ में होती थीं. स्कूल के रास्ते में ही उसका खेत पड़ता था, जहां पर हम दोनों एक दूसरे को देख लिया करते थे.
दिन ऐसे ही गुजर रहे थे और करीब एक महीने बाद मेरी दोनों सहेलियों ने कुछ दिन के लिए स्कूल से छुट्टी ले ली.
बस यही मौका मुझे मिल गया और मैंने एक खत के माध्यम से किशोर को बताया कि मैं स्कूल अकेली जाऊंगी, इसलिए रास्ते में मुझसे मिल लेना.
वो भी शायद ऐसे ही मौके के इंतजार में था.
अगले दिन मैं स्कूल के लिए तैयार हुई और घर से सुबह सुबह निकल गई.
गांव के बाहर रास्ते में किशोर अपनी साईकल लेकर खड़ा हुआ था, उसने मुझे अपनी साईकल पर बैठाया और अपने खेत की तरफ चल दिया.
उसके खेत में एक घर बना हुआ था और हम दोनों वहीं चले गए.
कमरे के अन्दर एक बिस्तर बिछा हुआ था और उस घर के आगे और पीछे दोनों तरफ दरवाजा था.
किशोर ने आगे की तरफ ताला लगा दिया और पीछे के दरवाजे से अन्दर आ गया.
ऐसा उसने इसलिए किया ताकि किसी को पता न चले कि हम लोग घर के अन्दर थे.
किशोर ने मुझसे मेरा स्कूल बैग लेकर किनारे रख दिया और मेरा हाथ पकड़कर मुझे अपनी बांहों में खींच लिया.
मैं भी उसके सीने से चिपक गई और किशोर बिना रुके मेरे होंठों को चूमने लगा. मैं भी उसका साथ देते हुए अपनी जीभ निकालने लगी.
मुझे चूमते हुए उसने मेरी सलवार कमीज दोनों ही निकाल दीं और अपने भी कपड़े निकाल दिए.
मैं बस ब्रा और चड्डी में ही थी और किशोर भी केवल चड्डी में.
खड़े खड़े ही हम दोनों एक दूसरे के बदन से चिपक कर एक दूसरे को चूमते सहलाते रहे.
किशोर मेरी चड्डी के अन्दर हाथ डालकर मेरे बड़े बड़े चूतड़ों को सहलाता और दबाता जा रहा था.
मेरे उभरे और कठोर दूध किशोर के सीने से चिपक कर दबे जा रहे थे.
धीरे धीरे मैं गर्म होती जा रही थी और मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था.
किशोर भी मुझे बेइंतहा चूमता जा रहा था.
आज मेरे अन्दर शर्म, जैसे बची ही नहीं थी. मैं अपने आप को किशोर को सौंप चुकी थी.
किशोर का लंड भी चड्डी के अन्दर तनकर खड़ा हो गया था और मेरे पेट में नाभि को सहला रहा था.
लंबाई में मैं किशोर से कम ही थी और किशोर मुझसे लंबा होने के साथ साथ काफी हट्टा-कट्टा मर्द था.
किशोर अपने दोनों हाथों से मेरी पीठ, कमर के साथ साथ चूतड़ों को सहलाए जा रहा था.
फिर धीरे से उसने मेरी ब्रा के हुक को खोल दिया और मेरी ब्रा निकाल कर अलग कर दी.
मेरे दोनों दूध अब आजाद हो गए थे.
किशोर ने झुककर मेरे एक निप्पल को अपने मुँह में भर लिया और दूसरे दूध को अपने हाथों से सहलाते हुए हल्के हल्के दबाने लगा.
मुझे जिंदगी में पहली बार ऐसा मजा मिल रहा था.
मेरे मुँह से अपने आप ही आवाज निकलने लगी ‘ऊफ़्फ़ … ऊऊईई … उम्म … आह …’
उसके हाथों में मेरा एक दूध पूरी तरह से समा नहीं रहा था. उसके कठोर हाथों से दबते हुए मेरा दूध दर्द करने लगा और दूसरे दूध को वो अपनी खुरदरी जीभ से ऐसे चाट रहा था कि निप्पल बिल्कुल तन गया था.
मेरे गोरे गोरे दूध पर उसके मुँह की लार फैल गई थी.
उसने बारी बारी से दोनों निप्पल को बड़े प्यार से चूमते हुए दोनों ही चूचों को जमकर दबाया.
उसको शायद मेरे बड़े बड़े दूध ज्यादा ही पसंद आ रहे थे.
मैं भी उसके सर को अपने दोनों हाथों से जकड़ कर अपने दूध पर दबाती जा रही थी.
मेरा पूरा बदन उसके चूमने से कांपने लगा था. मुझे बेइंतहा मजा आ रहा था.
पहली बार किसी मर्द का स्पर्श पाकर मेरा रोम रोम खिल उठा था.
मेरे जिस अंग पर उसका हाथ पड़ता, वहां के रोम अपने आप खड़े होते जा रहे थे.
उसे मेरे दूध चूमने और मसलने में इतना मजा आ रहा था और वो इतने जोश में आ गया था कि मेरी गांड पकड़ कर मुझे अपनी तरफ खींच रहा था.
तभी उसने मुझे इतनी जोर से दबा लिया था कि मुझे दर्द होने लगा.
काफी देर तक वो मेरे दोनों मम्मों के साथ मजे लेता रहा.
मैं बहुत ज्यादा गर्म और जोश में आ गई थी. मेरी चड्डी आगे की तरफ से पूरी तरह से गीली हो चुकी थी.
आज इतने दिनों की मेरी मुराद पूरी हो रही थी. जिस चुदाई के बारे में मैं सोचा करती थी, आज वो मुझे मिलने वाली थी.
मेरा पहला अनुभव ही था मगर मेरे अन्दर की प्यासी औरत पूरी तरह से जाग उठी थी.
मैं इतनी गर्म हो गई थी कि पूरा कमरा मेरी कामुक आवाजों से गूंज रहा था.
करीब आधा घंटा तक मेरे मम्मे निचोड़ने के बाद किशोर ने मुझे अलग कर दिया.
उसने मुझे पास में बिछे बिस्तर पर लेटा दिया और तुरंत मेरे ऊपर चढ़ गया.
मेरे ऊपर आते ही उसने मेरी जांघों की तरफ से मुझे चूमना शुरू कर दिया.
मेरी मोटी मोटी चिकनी जांघों को सहलाते और चूमते हुए मेरी चड्डी के ऊपर से ही उसने मेरी चूत को चूमा और फिर मेरे पेट के पास आकर मेरी गहरी नाभि में अपना जीभ डालकर चूमने लगा.
वो सच में चुदाई का एक माहिर खिलाड़ी था.
उसने अपनी चड्डी निकाल दी और पहली बार मैंने किसी मर्द के लंड के दर्शन किए.
बिल्कुल काला मोटा और करीब 6 इंच लंबा किसी काले नाग की तरह उसका लंड मेरी आंखों के सामने लहरा रहा था.
किशोर ने अपने लंड को सहलाते हुए आगे पीछे किया और उसका बड़ा सा गहरे गुलाबी रंग का सुपारा बाहर निकल आया.
मैं बड़े गौर से उसके लंड को देखे जा रही थी.
गांव के बाहर रास्ते में किशोर अपनी साईकल लेकर खड़ा हुआ था, उसने मुझे अपनी साईकल पर बैठाया और अपने खेत की तरफ चल दिया.
उसके खेत में एक घर बना हुआ था और हम दोनों वहीं चले गए.
कमरे के अन्दर एक बिस्तर बिछा हुआ था और उस घर के आगे और पीछे दोनों तरफ दरवाजा था.
किशोर ने आगे की तरफ ताला लगा दिया और पीछे के दरवाजे से अन्दर आ गया.
ऐसा उसने इसलिए किया ताकि किसी को पता न चले कि हम लोग घर के अन्दर थे.
किशोर ने मुझसे मेरा स्कूल बैग लेकर किनारे रख दिया और मेरा हाथ पकड़कर मुझे अपनी बांहों में खींच लिया.
मैं भी उसके सीने से चिपक गई और किशोर बिना रुके मेरे होंठों को चूमने लगा. मैं भी उसका साथ देते हुए अपनी जीभ निकालने लगी.
मुझे चूमते हुए उसने मेरी सलवार कमीज दोनों ही निकाल दीं और अपने भी कपड़े निकाल दिए.
मैं बस ब्रा और चड्डी में ही थी और किशोर भी केवल चड्डी में.
खड़े खड़े ही हम दोनों एक दूसरे के बदन से चिपक कर एक दूसरे को चूमते सहलाते रहे.
किशोर मेरी चड्डी के अन्दर हाथ डालकर मेरे बड़े बड़े चूतड़ों को सहलाता और दबाता जा रहा था.
मेरे उभरे और कठोर दूध किशोर के सीने से चिपक कर दबे जा रहे थे.
धीरे धीरे मैं गर्म होती जा रही थी और मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था.
किशोर भी मुझे बेइंतहा चूमता जा रहा था.
आज मेरे अन्दर शर्म, जैसे बची ही नहीं थी. मैं अपने आप को किशोर को सौंप चुकी थी.
किशोर का लंड भी चड्डी के अन्दर तनकर खड़ा हो गया था और मेरे पेट में नाभि को सहला रहा था.
लंबाई में मैं किशोर से कम ही थी और किशोर मुझसे लंबा होने के साथ साथ काफी हट्टा-कट्टा मर्द था.
किशोर अपने दोनों हाथों से मेरी पीठ, कमर के साथ साथ चूतड़ों को सहलाए जा रहा था.
फिर धीरे से उसने मेरी ब्रा के हुक को खोल दिया और मेरी ब्रा निकाल कर अलग कर दी.
मेरे दोनों दूध अब आजाद हो गए थे.
किशोर ने झुककर मेरे एक निप्पल को अपने मुँह में भर लिया और दूसरे दूध को अपने हाथों से सहलाते हुए हल्के हल्के दबाने लगा.
मुझे जिंदगी में पहली बार ऐसा मजा मिल रहा था.
मेरे मुँह से अपने आप ही आवाज निकलने लगी ‘ऊफ़्फ़ … ऊऊईई … उम्म … आह …’
उसके हाथों में मेरा एक दूध पूरी तरह से समा नहीं रहा था. उसके कठोर हाथों से दबते हुए मेरा दूध दर्द करने लगा और दूसरे दूध को वो अपनी खुरदरी जीभ से ऐसे चाट रहा था कि निप्पल बिल्कुल तन गया था.
मेरे गोरे गोरे दूध पर उसके मुँह की लार फैल गई थी.
उसने बारी बारी से दोनों निप्पल को बड़े प्यार से चूमते हुए दोनों ही चूचों को जमकर दबाया.
उसको शायद मेरे बड़े बड़े दूध ज्यादा ही पसंद आ रहे थे.
मैं भी उसके सर को अपने दोनों हाथों से जकड़ कर अपने दूध पर दबाती जा रही थी.
मेरा पूरा बदन उसके चूमने से कांपने लगा था. मुझे बेइंतहा मजा आ रहा था.
पहली बार किसी मर्द का स्पर्श पाकर मेरा रोम रोम खिल उठा था.
मेरे जिस अंग पर उसका हाथ पड़ता, वहां के रोम अपने आप खड़े होते जा रहे थे.
उसे मेरे दूध चूमने और मसलने में इतना मजा आ रहा था और वो इतने जोश में आ गया था कि मेरी गांड पकड़ कर मुझे अपनी तरफ खींच रहा था.
तभी उसने मुझे इतनी जोर से दबा लिया था कि मुझे दर्द होने लगा.
काफी देर तक वो मेरे दोनों मम्मों के साथ मजे लेता रहा.
मैं बहुत ज्यादा गर्म और जोश में आ गई थी. मेरी चड्डी आगे की तरफ से पूरी तरह से गीली हो चुकी थी.
आज इतने दिनों की मेरी मुराद पूरी हो रही थी. जिस चुदाई के बारे में मैं सोचा करती थी, आज वो मुझे मिलने वाली थी.
मेरा पहला अनुभव ही था मगर मेरे अन्दर की प्यासी औरत पूरी तरह से जाग उठी थी.
मैं इतनी गर्म हो गई थी कि पूरा कमरा मेरी कामुक आवाजों से गूंज रहा था.
करीब आधा घंटा तक मेरे मम्मे निचोड़ने के बाद किशोर ने मुझे अलग कर दिया.
उसने मुझे पास में बिछे बिस्तर पर लेटा दिया और तुरंत मेरे ऊपर चढ़ गया.
मेरे ऊपर आते ही उसने मेरी जांघों की तरफ से मुझे चूमना शुरू कर दिया.
मेरी मोटी मोटी चिकनी जांघों को सहलाते और चूमते हुए मेरी चड्डी के ऊपर से ही उसने मेरी चूत को चूमा और फिर मेरे पेट के पास आकर मेरी गहरी नाभि में अपना जीभ डालकर चूमने लगा.
वो सच में चुदाई का एक माहिर खिलाड़ी था.
उसने अपनी चड्डी निकाल दी और पहली बार मैंने किसी मर्द के लंड के दर्शन किए.
बिल्कुल काला मोटा और करीब 6 इंच लंबा किसी काले नाग की तरह उसका लंड मेरी आंखों के सामने लहरा रहा था.
किशोर ने अपने लंड को सहलाते हुए आगे पीछे किया और उसका बड़ा सा गहरे गुलाबी रंग का सुपारा बाहर निकल आया.
मैं बड़े गौर से उसके लंड को देखे जा रही थी.
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उसने मेरे दोनों घुटनों को पकड़ा और मेरे पैर फैलाते हुए मेरे ऊपर लेट गया.
उसका लंड बिल्कुल मेरी चूत के ऊपर आ गया.
मैं किशोर से लंबाई में कम थी इसलिए मेरा चेहरा उसके सीने से चिपक गया.
किशोर ने अपने एक हाथ से लंड को चूत पर सैट किया और दोनों हाथों को मेरी पीठ के नीचे ले जाकर मुझे कसकर जकड़ लिया.
अब किशोर ने अपनी कमर से हल्का हल्का दवाब देना शुरू कर दिया था.
मुझे पूरा अहसास हो रहा था कि लंड का सुपारा मेरी चूत की लाइन को फैला रहा है और अब वो चूत के छेद के पास आ गया था.
उसके बाद जैसे ही सुपारा छेद में जाने को हुआ, मुझे ऐसा लगा जैसे कोई रेजर ब्लेड से मेरी चूत को खोल रहा हो. बड़ा अजीब सा दर्द हुआ.
किशोर बहुत ही आराम से लंड डाल रहा था.
धीरे धीरे मेरी चूत का छेद खुलना शुरू हो गया था.
जैसे ही सुपारा छेद में घुसा, मेरा दर्द बढ़ने लगा और मेरे पैर कांपने लगे.
किशोर भी जोर लगा रहा था मगर लंड अन्दर नहीं जा रहा था.
फिर किशोर अपने सुपारे को ही अन्दर बाहर करने लगा.
कुछ समय बाद जब मेरी चूत ज्यादा गीली हो गई, तब उसने मेरे कान में कहा- थोड़ा दर्द सहना मेरी जान … उसके बाद मजा ही मजा आएगा.
इतना कहने के बाद उसने मेरी पीठ दोनों हाथ से थाम ली और मुझे जकड़कर एक जोरदार धक्का लगा दिया.
‘ऊऊईई ईईईई मांआआ मर गईई …. उई ईईई … मेर फट गई … आह छोड़ दे मुझे … आह मुझे नहीं करना …’
इतना दर्द हो रहा था कि बयान करना मुश्किल है.
उधर उसका लंड चूत को चीरता हुआ मेरे अन्दर तक चला गया था.
चूत में लंड पूरी तरह से धंस गया था, हवा तक नहीं जा सकती थी.
मैं उठी और अपनी चड्डी तलाश करने लगी.
मैंने भी बैठे बैठे अपनी चूत देखी, उसमें भी बहुत सारा झाग और उसमे हल्का खून लगा हुआ था.
मैंने अपनी चड्डी से चूत को साफ किया और जैसे ही मैंने अपनी चड्डी पहननी चाही, किशोर ने मेरा हाथ पकड़ लिया और लेटे लेटे ही मुझे अपनी बांहों में खींच लिया.
उसने मुझे अपने ऊपर लिटा लिया और मेरी पीठ सहलाते हुए बोला- अभी इतनी जल्दी क्या है तुमको? आज तो स्कूल भी नहीं जाना है. अब तो शाम तक तुम मेरे पास ही रहोगी, फ़िर कपड़े पहनने की जरूरत क्या है?
ऐसा बोलते हुए उसने मेरे चूतड़ को दोनों हाथों से दबाना शुरू कर दिया.
उसने मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया और दोनों हाथों से मेरी गांड फैला कर अपनी एक उंगली से मेरी गांड के छेद को रगड़ने लगा.
उसके बाद वैसे ही मुझे अपने ऊपर लिटाए हुए अपनी उंगली मेरी चूत में डाल दी और हल्के हल्के अन्दर बाहर करने लगा.
कुछ ही पल में मैं एक बार फिर से गर्म हो चुकी थी और उसका लंड भी दुबारा खड़ा हो गया था.
वैसे ही मुझे अपने ऊपर लिटाए हुए उसने अपना पूरा लंड मेरी चूत में पेल दिया और नीचे से धक्के लगाने लगा.
बहुत देर तक ऐसे ही चोदने के बाद उसने मुझे घुटनों पर आने के लिए कहा और मैं अपने घुटनों पर होकर घोड़ी बन गई.
उसने मेरे पीछे आकर मेरी चूत में अपना पूरा लंड डाल दिया.
उस पोजिशन में मेरी चूत और भी टाइट लग रही थी.
उसने दनादन धक्के लगाना शुरू कर दिए और उसके धक्के लगाने से मेरे चूतड़ से फट फट की जोरदार आवाज आने लगी.
सारा कमरा हमारी चुदाई की आवाज से गूंज उठा.
मैं झुकी हुई चुदाई करवा रही थी और उस पोजीशन में मेरे दोनों दूध नीचे लटक रहे थे.
उसने अपने दोनों हाथ आगे करते हुए मेरे दोनों मम्मों को अपने हाथों में भर लिए और जोर से दबाते हुए मेरी जोरदार चुदाई करने लगा.
उसके बाद उसने मुझे अपनी गोद में लेकर मेरी चुदाई की.
उस बार हमारी चुदाई करीब आधा घंटा तक चली.
फिर हम दोनों ही झड़ कर बिस्तर पर लेट गए.
इसी तरह शाम के 4 बजे तक उसने मुझे 4 बार चोदा और स्कूल के बंद होने के समय के साथ ही मैं वहां से निकलकर घर आ गई.
मैं अपनी पहली चुदाई से इतना थक चुकी थी कि घर आकर मैंने खाना खाया और चुपचाप सो गई.
अगली सुबह जब मेरी नींद खुली तो मेरी चूत में काफी दर्द था.
मुझे हल्का बुखार भी था.
बाथरूम में जाकर जब मैंने देखा तो चूत काफी सूजी हुई थी.
उस दिन मैं स्कूल भी नहीं गई और सारा दिन आराम करती रही.
उसके बाद दोस्तो, हम दोनों का मिलना जारी रहा.
जब भी हम दोनों को मौका मिलता, हम चुदाई का पूरा मजा लेते.
वो मुझे गर्भनिरोधक दवा भी देता रहा, जिससे मैं हमल से न हो जाऊं.
मुझे चुदाई का ऐसा नशा चढ़ गया था कि अगर हम दोनों को कुछ देर का भी समय मिल जाता, जैसे नदी के पास या स्कूल जाते या आते समय तो जल्दी से नीचे से चड्डी सरका कर चुदाई कर लेते.
कुछ ही दिन में मैं चुदाई की इतनी आदी हो गई थी कि रात में घर वालों के सोने के बाद मैं अकेली ही छुपते हुए उसके खेत में चली जाती और रात भर उसके साथ रहती.
उसका लंड बिल्कुल मेरी चूत के ऊपर आ गया.
मैं किशोर से लंबाई में कम थी इसलिए मेरा चेहरा उसके सीने से चिपक गया.
किशोर ने अपने एक हाथ से लंड को चूत पर सैट किया और दोनों हाथों को मेरी पीठ के नीचे ले जाकर मुझे कसकर जकड़ लिया.
अब किशोर ने अपनी कमर से हल्का हल्का दवाब देना शुरू कर दिया था.
मुझे पूरा अहसास हो रहा था कि लंड का सुपारा मेरी चूत की लाइन को फैला रहा है और अब वो चूत के छेद के पास आ गया था.
उसके बाद जैसे ही सुपारा छेद में जाने को हुआ, मुझे ऐसा लगा जैसे कोई रेजर ब्लेड से मेरी चूत को खोल रहा हो. बड़ा अजीब सा दर्द हुआ.
किशोर बहुत ही आराम से लंड डाल रहा था.
धीरे धीरे मेरी चूत का छेद खुलना शुरू हो गया था.
जैसे ही सुपारा छेद में घुसा, मेरा दर्द बढ़ने लगा और मेरे पैर कांपने लगे.
किशोर भी जोर लगा रहा था मगर लंड अन्दर नहीं जा रहा था.
फिर किशोर अपने सुपारे को ही अन्दर बाहर करने लगा.
कुछ समय बाद जब मेरी चूत ज्यादा गीली हो गई, तब उसने मेरे कान में कहा- थोड़ा दर्द सहना मेरी जान … उसके बाद मजा ही मजा आएगा.
इतना कहने के बाद उसने मेरी पीठ दोनों हाथ से थाम ली और मुझे जकड़कर एक जोरदार धक्का लगा दिया.
‘ऊऊईई ईईईई मांआआ मर गईई …. उई ईईई … मेर फट गई … आह छोड़ दे मुझे … आह मुझे नहीं करना …’
इतना दर्द हो रहा था कि बयान करना मुश्किल है.
उधर उसका लंड चूत को चीरता हुआ मेरे अन्दर तक चला गया था.
चूत में लंड पूरी तरह से धंस गया था, हवा तक नहीं जा सकती थी.
मैं उठी और अपनी चड्डी तलाश करने लगी.
मैंने भी बैठे बैठे अपनी चूत देखी, उसमें भी बहुत सारा झाग और उसमे हल्का खून लगा हुआ था.
मैंने अपनी चड्डी से चूत को साफ किया और जैसे ही मैंने अपनी चड्डी पहननी चाही, किशोर ने मेरा हाथ पकड़ लिया और लेटे लेटे ही मुझे अपनी बांहों में खींच लिया.
उसने मुझे अपने ऊपर लिटा लिया और मेरी पीठ सहलाते हुए बोला- अभी इतनी जल्दी क्या है तुमको? आज तो स्कूल भी नहीं जाना है. अब तो शाम तक तुम मेरे पास ही रहोगी, फ़िर कपड़े पहनने की जरूरत क्या है?
ऐसा बोलते हुए उसने मेरे चूतड़ को दोनों हाथों से दबाना शुरू कर दिया.
उसने मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया और दोनों हाथों से मेरी गांड फैला कर अपनी एक उंगली से मेरी गांड के छेद को रगड़ने लगा.
उसके बाद वैसे ही मुझे अपने ऊपर लिटाए हुए अपनी उंगली मेरी चूत में डाल दी और हल्के हल्के अन्दर बाहर करने लगा.
कुछ ही पल में मैं एक बार फिर से गर्म हो चुकी थी और उसका लंड भी दुबारा खड़ा हो गया था.
वैसे ही मुझे अपने ऊपर लिटाए हुए उसने अपना पूरा लंड मेरी चूत में पेल दिया और नीचे से धक्के लगाने लगा.
बहुत देर तक ऐसे ही चोदने के बाद उसने मुझे घुटनों पर आने के लिए कहा और मैं अपने घुटनों पर होकर घोड़ी बन गई.
उसने मेरे पीछे आकर मेरी चूत में अपना पूरा लंड डाल दिया.
उस पोजिशन में मेरी चूत और भी टाइट लग रही थी.
उसने दनादन धक्के लगाना शुरू कर दिए और उसके धक्के लगाने से मेरे चूतड़ से फट फट की जोरदार आवाज आने लगी.
सारा कमरा हमारी चुदाई की आवाज से गूंज उठा.
मैं झुकी हुई चुदाई करवा रही थी और उस पोजीशन में मेरे दोनों दूध नीचे लटक रहे थे.
उसने अपने दोनों हाथ आगे करते हुए मेरे दोनों मम्मों को अपने हाथों में भर लिए और जोर से दबाते हुए मेरी जोरदार चुदाई करने लगा.
उसके बाद उसने मुझे अपनी गोद में लेकर मेरी चुदाई की.
उस बार हमारी चुदाई करीब आधा घंटा तक चली.
फिर हम दोनों ही झड़ कर बिस्तर पर लेट गए.
इसी तरह शाम के 4 बजे तक उसने मुझे 4 बार चोदा और स्कूल के बंद होने के समय के साथ ही मैं वहां से निकलकर घर आ गई.
मैं अपनी पहली चुदाई से इतना थक चुकी थी कि घर आकर मैंने खाना खाया और चुपचाप सो गई.
अगली सुबह जब मेरी नींद खुली तो मेरी चूत में काफी दर्द था.
मुझे हल्का बुखार भी था.
बाथरूम में जाकर जब मैंने देखा तो चूत काफी सूजी हुई थी.
उस दिन मैं स्कूल भी नहीं गई और सारा दिन आराम करती रही.
उसके बाद दोस्तो, हम दोनों का मिलना जारी रहा.
जब भी हम दोनों को मौका मिलता, हम चुदाई का पूरा मजा लेते.
वो मुझे गर्भनिरोधक दवा भी देता रहा, जिससे मैं हमल से न हो जाऊं.
मुझे चुदाई का ऐसा नशा चढ़ गया था कि अगर हम दोनों को कुछ देर का भी समय मिल जाता, जैसे नदी के पास या स्कूल जाते या आते समय तो जल्दी से नीचे से चड्डी सरका कर चुदाई कर लेते.
कुछ ही दिन में मैं चुदाई की इतनी आदी हो गई थी कि रात में घर वालों के सोने के बाद मैं अकेली ही छुपते हुए उसके खेत में चली जाती और रात भर उसके साथ रहती.
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सुबह होने के पहले वापस घर आ जाती.
हम दोनों का प्यार बस चुदाई तक ही सीमित रह गया था. हम दोनों एक दूसरे से चुदाई के लिए बेताब रहते थे.
फिर जल्द ही उसने मेरी गांड भी चोद डाली.
शायद ही ऐसा कोई आसन बचा होगा, जिसमें हम लोगों ने चुदाई न की हो.
किशोर ने मुझे बताया कि उसकी बीवी चुदाई में बिल्कुल ठंडी थी और उसको चुदाई में कोई भी दिलचस्पी नहीं थी इसलिए उसे मैं ही पसंद आती थी क्योंकि मैं उसका भरपूर सहयोग करती हूँ.
दोस्तो, ये थी मेरी देसी बुर की पहली चुदाईपहली चुदाई की कहानी!
मगर अभी कहानी खत्म नहीं हुई है. किशोर से चुदाई करवाने की मुझे इतनी बुरी लत लग गई थी कि उसके कारण ही मेरे साथ एक बार ऐसी घटना घट गई कि मुझे दूसरे लोगों से भी चुदना पड़ गया.
वो मैं आपको अगली कहानी में बताऊंगी.
कैसे मेरी जिंदगी में वो घटना घटी कि मुझे एक साथ तीन लोगों ने मिलकर चोदा … और उसके बाद जब तक मेरी शादी नहीं हुई, तब तक मैं लगभग रोज किसी न किसी से चुदती ही रही.
हम दोनों का प्यार बस चुदाई तक ही सीमित रह गया था. हम दोनों एक दूसरे से चुदाई के लिए बेताब रहते थे.
फिर जल्द ही उसने मेरी गांड भी चोद डाली.
शायद ही ऐसा कोई आसन बचा होगा, जिसमें हम लोगों ने चुदाई न की हो.
किशोर ने मुझे बताया कि उसकी बीवी चुदाई में बिल्कुल ठंडी थी और उसको चुदाई में कोई भी दिलचस्पी नहीं थी इसलिए उसे मैं ही पसंद आती थी क्योंकि मैं उसका भरपूर सहयोग करती हूँ.
दोस्तो, ये थी मेरी देसी बुर की पहली चुदाईपहली चुदाई की कहानी!
मगर अभी कहानी खत्म नहीं हुई है. किशोर से चुदाई करवाने की मुझे इतनी बुरी लत लग गई थी कि उसके कारण ही मेरे साथ एक बार ऐसी घटना घट गई कि मुझे दूसरे लोगों से भी चुदना पड़ गया.
वो मैं आपको अगली कहानी में बताऊंगी.
कैसे मेरी जिंदगी में वो घटना घटी कि मुझे एक साथ तीन लोगों ने मिलकर चोदा … और उसके बाद जब तक मेरी शादी नहीं हुई, तब तक मैं लगभग रोज किसी न किसी से चुदती ही रही.
Antarvasna hindi hot chudai kahani 2024:
स्कूल में लड़के का लड़कियों ने किया गैंगबैंग
Xxx स्कूल स्टूडेंट्स सेक्स कहानी में एक लड़के ने दो जवान लड़कियों को आपस में लेस्बो करती देख लिया. लड़के को मौक़ा मिल गया तो लडकियां भी ख़ुशी ख़ुशी उससे चुद गयी.
दोस्तो, कैसे हैं आप सब लोग!
उम्मीद करता हूँ कि ठीक ही होंगे.
मेरा नाम प्रिंस (बदला हुआ नाम) है.
मैंने अभी हाल ही में ओ लेवल कंप्यूटर कोर्स कंप्लीट किया है और इसके पहले 2019 में मैं CCC का कोर्स भी पूरा कर चुका हूँ.
खैर … ये तो हुई मेरी बात.
अब मैं Xxx स्कूल स्टूडेंट्स सेक्स कहानी पर आता हूँ.
यह बात उन दिनों की है जब मैं 19 साल का था और स्कूल में 12वीं कक्षा में पढ़ता था.
मेरी क्लास में गिनती की बस 4 ही लड़कियां थीं जो मेरी हमउम्र थी.
उन दिनों बारिश का मौसम था और बारिश की वजह से पूरे स्कूल में गिनती के बस 5-6 ही छात्र आए थे क्योंकि बारिश बहुत तेज हो रही थी.
हमारी क्लास ऊपर की फ्लोर पर लगती थी.
उस दिन मेरी क्लास में बस दो ही लड़कियां थीं.
हमारी क्लास ऊपर की फ्लोर पर लगती थी.
उस दिन मेरी क्लास में बस दो ही लड़कियां थीं.
जब मैं क्लास में गया तो वे दोनों मुझे देख कर चौंक गईं और थोड़ी सी डर भी गई थीं क्योंकि उस वक्त वे दोनों एक दूसरे को फ्रेंच किस कर रही थीं.
इधर मैं उन दोनों लड़कियों के नाम बताना चाहूँगा.
उन दोनों के बदले हुए नाम अंशु और सौम्या थे.
सूनी क्लास में वे दोनों बैठ कर एक दूसरे की टांगों में टांगें डालकर बैठी हुई थीं और होंठों से होंठों को जोड़ कर फ्रेंच किस कर रही थीं.
पहले तो मैं भी उन्हें इस पोजीशन में देख कर थोड़ा डर गया और यह सोच कर कुछ ज्यादा ही भयभीत हो गया कि कहीं वे दोनों चिल्ला ना दें.
लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.
पहले तो मैंने खुद को संभाला और पूछा- तुम दोनों अभी यह क्या कर रही थीं? बोलो क्या टीचर को बताऊं?
वे दोनों और ज्यादा डर गईं और दोनों ही एक दूसरे से अलग होकर मुझसे रिक्वेस्ट करने लगीं- प्लीज किसी को कुछ मत बताना, तुम जो बोलोगे … वह हम दोनों करने के लिए तैयार हैं. बस प्लीज इस बारे में किसी से कुछ मत कहना!
तभी मेरे दिमाग में घंटी बजी कि यह तो मेरे लिए सुनहरा मौका हाथ आ गया है.
मैंने उनसे कहा- ठीक है अगर ऐसा है तो फिर जो अभी तुम दोनों कर रही थीं, वह तुम मेरे साथ भी करो. हम तीनों मिलकर एंजॉय करते हैं … यूँ अकेले-अकेले करने में क्या मज़ा!
पहले तो वे दोनों नखरे करने लगीं लेकिन बाद में वे दोनों भी मान गईं क्योंकि उनकी बुर में भी चुल्ल उठ रही थी.
अब तक आप लोग समझ ही गए होंगे कि मैंने इस मौके का पूरा फायदा उठाया.
वह एक सरकारी स्कूल था, जिसमें मैं पढ़ता था.
सरकारी स्कूलों का हाल तो आप सब जानते ही हैं.
उस दिन बारिश के कारण ज़्यादातर टीचर्स छुट्टी पर थीं.
चौथे पीरियड के बाद हमारा लंच होता था.
मज़े की बात तो यह थी दोस्तो … कि चारों पीरियड्स हमारे खाली ही गुजरे.
ऊपर से हम सब स्कूल भी कुछ जल्दी ही आ गए थे.
कहानी का सबसे मजेदार हिस्सा अब शुरू हुआ.
पहले अंशु मुझे लिप किस करने लगी और सौम्या पीछे से मेरे लंड को पैंट के ऊपर से सहलाने लगी थी.
मैं शर्ट के ऊपर से ही अंशु के बूब्स को सहलाने में लगा था.
करीब 10 मिनट तक किस करने के बाद सौम्या ने मेरी पैंट की जिप खोल दी और लंड बाहर निकाल कर उसकी मुठ मारना शुरू कर दी.
थोड़ी देर के बाद अंशु ने घुटनों के बल बैठ कर मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और वह मुझे एक अच्छा सा ब्लोजॉब देने लगी थी.
इस सबके बीच हम लोग क्लास के गेट की तरफ भी देख रहे थे ताकि कोई आकर हमें देख ना ले.
क्या बताऊं दोस्तो, जितना मज़ा हमें उस समय आ रहा था, उतना ही हमें डर भी लग रहा था.
लेकिन खुशकिस्मती से हमें किसी ने भी नहीं देखा क्योंकि बारिश ही इतनी तेज हो रही थी.
कोई भी टीचर स्कूल में नहीं आ पाई थी.
एक दो जो आई भी थीं, वे स्टाफ रूम में नीचे ही रह गई थीं.
जहां हमारी क्लास लगती थी, वहां खुली छत से होकर आना पड़ता था तो ऊपर आने से वे टीचर्स भीगने के कारण आना ही नहीं चाहती थीं और शायद उन्हें यह भी लगा था कि आज स्कूल में कोई छात्र नहीं आया है, तो ऊपर क्यों जाना!
इधर हम तीनों ऐसे ही लंच तक सेक्स का मजा लेते रहे.
हालांकि हम तीनों पूरे नंगे नहीं हुए थे.
बस मैंने अपनी पैंट थोड़ी सी नीचे कर रखी थी और अंशु और सौम्या ने स्कर्ट के नीचे से अपनी-अपनी पैंटी नीचे कर खिसका रखी थीं.
लगभग एक घंटा तक मजा करने के बाद मैं अंशु के मुँह में ही झड़ गया और हम सब कुछ देर के लिए रुक गए.
लंड वापस खड़ा होने के बाद सौम्या ने भी मेरा लंड चूसा और उसने भी मेरे लौड़े के रस को पिया.
उसके बाद मैंने बारी बारी से दोनों की चूत चूसीं और उन दोनों का माल पिया.
स्कूल में लड़के का लड़कियों ने किया गैंगबैंग
Xxx स्कूल स्टूडेंट्स सेक्स कहानी में एक लड़के ने दो जवान लड़कियों को आपस में लेस्बो करती देख लिया. लड़के को मौक़ा मिल गया तो लडकियां भी ख़ुशी ख़ुशी उससे चुद गयी.
दोस्तो, कैसे हैं आप सब लोग!
उम्मीद करता हूँ कि ठीक ही होंगे.
मेरा नाम प्रिंस (बदला हुआ नाम) है.
मैंने अभी हाल ही में ओ लेवल कंप्यूटर कोर्स कंप्लीट किया है और इसके पहले 2019 में मैं CCC का कोर्स भी पूरा कर चुका हूँ.
खैर … ये तो हुई मेरी बात.
अब मैं Xxx स्कूल स्टूडेंट्स सेक्स कहानी पर आता हूँ.
यह बात उन दिनों की है जब मैं 19 साल का था और स्कूल में 12वीं कक्षा में पढ़ता था.
मेरी क्लास में गिनती की बस 4 ही लड़कियां थीं जो मेरी हमउम्र थी.
उन दिनों बारिश का मौसम था और बारिश की वजह से पूरे स्कूल में गिनती के बस 5-6 ही छात्र आए थे क्योंकि बारिश बहुत तेज हो रही थी.
हमारी क्लास ऊपर की फ्लोर पर लगती थी.
उस दिन मेरी क्लास में बस दो ही लड़कियां थीं.
हमारी क्लास ऊपर की फ्लोर पर लगती थी.
उस दिन मेरी क्लास में बस दो ही लड़कियां थीं.
जब मैं क्लास में गया तो वे दोनों मुझे देख कर चौंक गईं और थोड़ी सी डर भी गई थीं क्योंकि उस वक्त वे दोनों एक दूसरे को फ्रेंच किस कर रही थीं.
इधर मैं उन दोनों लड़कियों के नाम बताना चाहूँगा.
उन दोनों के बदले हुए नाम अंशु और सौम्या थे.
सूनी क्लास में वे दोनों बैठ कर एक दूसरे की टांगों में टांगें डालकर बैठी हुई थीं और होंठों से होंठों को जोड़ कर फ्रेंच किस कर रही थीं.
पहले तो मैं भी उन्हें इस पोजीशन में देख कर थोड़ा डर गया और यह सोच कर कुछ ज्यादा ही भयभीत हो गया कि कहीं वे दोनों चिल्ला ना दें.
लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.
पहले तो मैंने खुद को संभाला और पूछा- तुम दोनों अभी यह क्या कर रही थीं? बोलो क्या टीचर को बताऊं?
वे दोनों और ज्यादा डर गईं और दोनों ही एक दूसरे से अलग होकर मुझसे रिक्वेस्ट करने लगीं- प्लीज किसी को कुछ मत बताना, तुम जो बोलोगे … वह हम दोनों करने के लिए तैयार हैं. बस प्लीज इस बारे में किसी से कुछ मत कहना!
तभी मेरे दिमाग में घंटी बजी कि यह तो मेरे लिए सुनहरा मौका हाथ आ गया है.
मैंने उनसे कहा- ठीक है अगर ऐसा है तो फिर जो अभी तुम दोनों कर रही थीं, वह तुम मेरे साथ भी करो. हम तीनों मिलकर एंजॉय करते हैं … यूँ अकेले-अकेले करने में क्या मज़ा!
पहले तो वे दोनों नखरे करने लगीं लेकिन बाद में वे दोनों भी मान गईं क्योंकि उनकी बुर में भी चुल्ल उठ रही थी.
अब तक आप लोग समझ ही गए होंगे कि मैंने इस मौके का पूरा फायदा उठाया.
वह एक सरकारी स्कूल था, जिसमें मैं पढ़ता था.
सरकारी स्कूलों का हाल तो आप सब जानते ही हैं.
उस दिन बारिश के कारण ज़्यादातर टीचर्स छुट्टी पर थीं.
चौथे पीरियड के बाद हमारा लंच होता था.
मज़े की बात तो यह थी दोस्तो … कि चारों पीरियड्स हमारे खाली ही गुजरे.
ऊपर से हम सब स्कूल भी कुछ जल्दी ही आ गए थे.
कहानी का सबसे मजेदार हिस्सा अब शुरू हुआ.
पहले अंशु मुझे लिप किस करने लगी और सौम्या पीछे से मेरे लंड को पैंट के ऊपर से सहलाने लगी थी.
मैं शर्ट के ऊपर से ही अंशु के बूब्स को सहलाने में लगा था.
करीब 10 मिनट तक किस करने के बाद सौम्या ने मेरी पैंट की जिप खोल दी और लंड बाहर निकाल कर उसकी मुठ मारना शुरू कर दी.
थोड़ी देर के बाद अंशु ने घुटनों के बल बैठ कर मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और वह मुझे एक अच्छा सा ब्लोजॉब देने लगी थी.
इस सबके बीच हम लोग क्लास के गेट की तरफ भी देख रहे थे ताकि कोई आकर हमें देख ना ले.
क्या बताऊं दोस्तो, जितना मज़ा हमें उस समय आ रहा था, उतना ही हमें डर भी लग रहा था.
लेकिन खुशकिस्मती से हमें किसी ने भी नहीं देखा क्योंकि बारिश ही इतनी तेज हो रही थी.
कोई भी टीचर स्कूल में नहीं आ पाई थी.
एक दो जो आई भी थीं, वे स्टाफ रूम में नीचे ही रह गई थीं.
जहां हमारी क्लास लगती थी, वहां खुली छत से होकर आना पड़ता था तो ऊपर आने से वे टीचर्स भीगने के कारण आना ही नहीं चाहती थीं और शायद उन्हें यह भी लगा था कि आज स्कूल में कोई छात्र नहीं आया है, तो ऊपर क्यों जाना!
इधर हम तीनों ऐसे ही लंच तक सेक्स का मजा लेते रहे.
हालांकि हम तीनों पूरे नंगे नहीं हुए थे.
बस मैंने अपनी पैंट थोड़ी सी नीचे कर रखी थी और अंशु और सौम्या ने स्कर्ट के नीचे से अपनी-अपनी पैंटी नीचे कर खिसका रखी थीं.
लगभग एक घंटा तक मजा करने के बाद मैं अंशु के मुँह में ही झड़ गया और हम सब कुछ देर के लिए रुक गए.
लंड वापस खड़ा होने के बाद सौम्या ने भी मेरा लंड चूसा और उसने भी मेरे लौड़े के रस को पिया.
उसके बाद मैंने बारी बारी से दोनों की चूत चूसीं और उन दोनों का माल पिया.
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इधर मैं एक बात तो बताना भूल ही गया कि वे दोनों वर्जिन नहीं थीं क्योंकि उन दोनों की चूत थोड़ी ढीली सी थी.
उस वक्त तक स्कूल में किसी को नहीं पता था कि ऊपर की क्लास में भी कोई है क्योंकि लंच में हम तीनों मतलब मैं, अंशु और सौम्या अपने-अपने बैग लेकर टॉयलेट में चले गए थे.
अब आप लोग ये सोच रहे होंगे कि मैं तो एक लड़का हूँ तो फिर मैं गर्ल्स टॉयलेट में कैसे गया?
दरअसल बात ये है कि लड़कों के टॉयलेट के नाम पर बस एक नाली और पीछे की तरफ एक दीवार है, जो कि चारों तरफ से खुली हुई हैं. उन्हें लेट्रिन के लिए गर्ल्स टॉयलेट में ही जाना पड़ता है.
इसी बात का मैंने फायदा उठाया कि मुझसे कोई पूछता कि तुम गर्ल्स वाले टॉयलेट में क्या कर रहे थे तो मैं कह सकता था कि मुझे लेट्रिन आई हुई थी … इसलिए मैं इधर आया हुआ था.
लड़कियां अपनी समस्या खुद बतातीं कि वे क्यों टॉयलेट आई हुई थीं.
छुट्टी तक हम तीनों टॉयलेट के अन्दर ही रहे और वहीं पर थ्री-सम मजा करते रहे.
टॉयलेट में अन्दर कुल छह केबिन बने थे.
हम तीनों आखिरी वाले में थे.
अब हम तीनों ने अपने अपने कपड़े उतार कर अपने अपने बैग में डाल लिए थे और तीनों एक दूसरे के सामने बिल्कुल नंगे हो गए थे.
उन दोनों को नंगी देखकर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया था.
मेरा तना हुआ लंड देख कर अंशु मुझसे कहने लगी- अरे प्रिन्स ये क्या? तुम्हारा लंड तो फिर से खड़ा हो गया?
मैं- तो फिर तुम इसे फिर से शांत कर दो!
अंशु- अच्छा जी ऐसी बात है … तो अभी लो!
अंशु नीचे बैठकर मेरा लंड चूसने लगी और सौम्या खड़ी होकर मुझे लिप किस करने लगी.
साथ ही मैं उसके बूब्स भी दबाने लगा.
सौम्या के दूध अंशु के चूचों से थोड़े ज्यादा कड़क थे और उसके निप्पल हल्के भूरे रंग के थे.
जबकि अंशु के दूध बड़े थे और उसके मम्मों की तो मैं क्या ही बात करूँ यार … साली चूचों से लंडखोर लग रही थी.
उसके चूचे एकदम रूई की तरह मुलायम और निप्पल गुलाबी रंग के थे.
मैं बारी बारी से उन दोनों की चूचियों को चूस रहा था, दबा रहा था.
थोड़ी देर के बाद मैंने अंशु की चूत में अपना लंड घुसेड़ दिया और जम कर उसकी चुदाई की.
Xxx स्कूल स्टूडेंट्स सेक्स करीब आधा घंटा तक करने के बाद मुझे नहीं पता कि मैं कब उसकी चूत में ही झड़ गया.
मैं बहुत ज़्यादा डर गया था कि कहीं वह प्रेग्नेंट ना हो जाए लेकिन कुतिया के पास सब इंतजाम था.
बहन की लौड़ी के पास गर्भनिरोधक गोलियां भी थीं.
यह देख कर मैं चौंक गया.
मैंने उससे पूछा कि इन गोलियों का तुम्हारे पास क्या काम?
तो उसने मुझे बताया कि उसका एक ब्वॉयफ्रेंड है, उसी ने उसकी चूत की सील तोड़ी थी.
उसी ने बताया कि सौम्या की चूत भी उसके ब्वॉयफ्रेंड ने ही फाड़ी थी.
हालांकि सौम्या अब तक सिर्फ तीन बार ही चुदी थी.
जबकि अंशु की चुत ने अपने चोदू का लंड बीसियों बार लिया था.
उसकी हरकतों से साफ समझ आ रहा था कि शायद उसने एक से ज्यादा लंड लीले थे.
मुझे लगा कि उसकी तो गांड भी चालू थी.
इसके बाद मैं बिना डरे स्कूल की छुट्टी होने तक उन दोनों की चूत और गांड मारता रहा.
हम लोग छुट्टी होने के एक घंटे के बाद वहां से निकले ताकि कोई हमें देख ना ले.
सरकारी स्कूल से बाहर निकलने के लिए कई रास्ते थे, जिससे अंशु वाकिफ थी.
शायद उसने स्कूल की बिल्डिंग में ही अपनी बुर को चूत में कन्वर्ट करवाया था.
अब जब भी हमें मौका मिलता, हम रोज चूत चुदाई वाला खेल खेल लेते और एक दूसरे को पूरा मज़ा देते.
हमारा लंच ब्रेक का पूरा आधा घंटा टॉयलेट में चुदाई करते हुए ही निकलता था.
एक दिन सक्सेना मैडम ने मुझे गर्ल्स टॉयलेट में जाते हुए देख लिया.
पूछने पर मैंने बहाना बनाया कि मेरा पेट खराब है और बाय्स टॉयलेट के नाम पर यह खुला मैदान है. इसीलिए मुझे अन्दर जाने दो!
सच पूछो तो मुझे डर लग रहा था कि कहीं मेरा मेडिकल टेस्ट ना करवा दिया जाए.
लेकिन यह सब सरकारी स्कूलों में होना संभव नहीं था तो मेरे साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.
मैं अंशु और सौम्या के साथ सेक्स वाली मस्ती करता रहा.
उस स्कूल में मैं दो साल तक पढ़ा और ये तीनों साल सेक्स भरी मस्ती करते-करते गुजरे.
फिर एक दिन स्कूल छोड़ने का समय आ गया.
उस दिन हमारी फेयरवेल पार्टी थी.
वह दिन उस स्कूल में हमारा आखिरी दिन था.
उस दिन सुबह 8 बजे हमारा प्रोग्राम शुरू हुआ और दोपहर 12 बजे तक चला.
समारोह के दौरान अंशु ने मुझे बताया कि उसके पेरेंट्स कुछ दिनों के लिए बाहर गए हुए हैं और उसने मुझे अपने घर आने के लिए भी कहा.
मैं स्कूल के बाद अंशु के साथ उसके घर आ गया.
वहां जाकर मैंने देखा कि वहां पर सौम्या भी आई हुई थी.
उनके साथ अंशु और सौम्या की 6 सहेलियां और थीं.
वहां कुल मिलकर आठ लड़कियां थीं.
मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था.
तब सौम्या ने मुझे बताया कि ये सब भी तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहती हैं.
उस दिन मेरा जन्मदिन भी था.
उस वक्त तक स्कूल में किसी को नहीं पता था कि ऊपर की क्लास में भी कोई है क्योंकि लंच में हम तीनों मतलब मैं, अंशु और सौम्या अपने-अपने बैग लेकर टॉयलेट में चले गए थे.
अब आप लोग ये सोच रहे होंगे कि मैं तो एक लड़का हूँ तो फिर मैं गर्ल्स टॉयलेट में कैसे गया?
दरअसल बात ये है कि लड़कों के टॉयलेट के नाम पर बस एक नाली और पीछे की तरफ एक दीवार है, जो कि चारों तरफ से खुली हुई हैं. उन्हें लेट्रिन के लिए गर्ल्स टॉयलेट में ही जाना पड़ता है.
इसी बात का मैंने फायदा उठाया कि मुझसे कोई पूछता कि तुम गर्ल्स वाले टॉयलेट में क्या कर रहे थे तो मैं कह सकता था कि मुझे लेट्रिन आई हुई थी … इसलिए मैं इधर आया हुआ था.
लड़कियां अपनी समस्या खुद बतातीं कि वे क्यों टॉयलेट आई हुई थीं.
छुट्टी तक हम तीनों टॉयलेट के अन्दर ही रहे और वहीं पर थ्री-सम मजा करते रहे.
टॉयलेट में अन्दर कुल छह केबिन बने थे.
हम तीनों आखिरी वाले में थे.
अब हम तीनों ने अपने अपने कपड़े उतार कर अपने अपने बैग में डाल लिए थे और तीनों एक दूसरे के सामने बिल्कुल नंगे हो गए थे.
उन दोनों को नंगी देखकर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया था.
मेरा तना हुआ लंड देख कर अंशु मुझसे कहने लगी- अरे प्रिन्स ये क्या? तुम्हारा लंड तो फिर से खड़ा हो गया?
मैं- तो फिर तुम इसे फिर से शांत कर दो!
अंशु- अच्छा जी ऐसी बात है … तो अभी लो!
अंशु नीचे बैठकर मेरा लंड चूसने लगी और सौम्या खड़ी होकर मुझे लिप किस करने लगी.
साथ ही मैं उसके बूब्स भी दबाने लगा.
सौम्या के दूध अंशु के चूचों से थोड़े ज्यादा कड़क थे और उसके निप्पल हल्के भूरे रंग के थे.
जबकि अंशु के दूध बड़े थे और उसके मम्मों की तो मैं क्या ही बात करूँ यार … साली चूचों से लंडखोर लग रही थी.
उसके चूचे एकदम रूई की तरह मुलायम और निप्पल गुलाबी रंग के थे.
मैं बारी बारी से उन दोनों की चूचियों को चूस रहा था, दबा रहा था.
थोड़ी देर के बाद मैंने अंशु की चूत में अपना लंड घुसेड़ दिया और जम कर उसकी चुदाई की.
Xxx स्कूल स्टूडेंट्स सेक्स करीब आधा घंटा तक करने के बाद मुझे नहीं पता कि मैं कब उसकी चूत में ही झड़ गया.
मैं बहुत ज़्यादा डर गया था कि कहीं वह प्रेग्नेंट ना हो जाए लेकिन कुतिया के पास सब इंतजाम था.
बहन की लौड़ी के पास गर्भनिरोधक गोलियां भी थीं.
यह देख कर मैं चौंक गया.
मैंने उससे पूछा कि इन गोलियों का तुम्हारे पास क्या काम?
तो उसने मुझे बताया कि उसका एक ब्वॉयफ्रेंड है, उसी ने उसकी चूत की सील तोड़ी थी.
उसी ने बताया कि सौम्या की चूत भी उसके ब्वॉयफ्रेंड ने ही फाड़ी थी.
हालांकि सौम्या अब तक सिर्फ तीन बार ही चुदी थी.
जबकि अंशु की चुत ने अपने चोदू का लंड बीसियों बार लिया था.
उसकी हरकतों से साफ समझ आ रहा था कि शायद उसने एक से ज्यादा लंड लीले थे.
मुझे लगा कि उसकी तो गांड भी चालू थी.
इसके बाद मैं बिना डरे स्कूल की छुट्टी होने तक उन दोनों की चूत और गांड मारता रहा.
हम लोग छुट्टी होने के एक घंटे के बाद वहां से निकले ताकि कोई हमें देख ना ले.
सरकारी स्कूल से बाहर निकलने के लिए कई रास्ते थे, जिससे अंशु वाकिफ थी.
शायद उसने स्कूल की बिल्डिंग में ही अपनी बुर को चूत में कन्वर्ट करवाया था.
अब जब भी हमें मौका मिलता, हम रोज चूत चुदाई वाला खेल खेल लेते और एक दूसरे को पूरा मज़ा देते.
हमारा लंच ब्रेक का पूरा आधा घंटा टॉयलेट में चुदाई करते हुए ही निकलता था.
एक दिन सक्सेना मैडम ने मुझे गर्ल्स टॉयलेट में जाते हुए देख लिया.
पूछने पर मैंने बहाना बनाया कि मेरा पेट खराब है और बाय्स टॉयलेट के नाम पर यह खुला मैदान है. इसीलिए मुझे अन्दर जाने दो!
सच पूछो तो मुझे डर लग रहा था कि कहीं मेरा मेडिकल टेस्ट ना करवा दिया जाए.
लेकिन यह सब सरकारी स्कूलों में होना संभव नहीं था तो मेरे साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.
मैं अंशु और सौम्या के साथ सेक्स वाली मस्ती करता रहा.
उस स्कूल में मैं दो साल तक पढ़ा और ये तीनों साल सेक्स भरी मस्ती करते-करते गुजरे.
फिर एक दिन स्कूल छोड़ने का समय आ गया.
उस दिन हमारी फेयरवेल पार्टी थी.
वह दिन उस स्कूल में हमारा आखिरी दिन था.
उस दिन सुबह 8 बजे हमारा प्रोग्राम शुरू हुआ और दोपहर 12 बजे तक चला.
समारोह के दौरान अंशु ने मुझे बताया कि उसके पेरेंट्स कुछ दिनों के लिए बाहर गए हुए हैं और उसने मुझे अपने घर आने के लिए भी कहा.
मैं स्कूल के बाद अंशु के साथ उसके घर आ गया.
वहां जाकर मैंने देखा कि वहां पर सौम्या भी आई हुई थी.
उनके साथ अंशु और सौम्या की 6 सहेलियां और थीं.
वहां कुल मिलकर आठ लड़कियां थीं.
मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था.
तब सौम्या ने मुझे बताया कि ये सब भी तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहती हैं.
उस दिन मेरा जन्मदिन भी था.
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अंशु ने मुझे बताया कि ये मेरा जन्मदिन का तोहफा बन कर आई हैं.
उस दिन मैंने उन आठों लड़कियों को एक एक करके चोदा.
मैंने अपने घर पर फोन करके कह दिया था कि मुझे घर आने में देरी हो जाएगी.
अंशु के पास गर्भ निरोधक और कामोत्तेजक दवाओं का भंडार रहता था. कुतिया ने मुझे एक साथ दो दो गोलियां खिला कर सबके साथ चुदाई के लिए कड़क लंड वाला बनाए रखा.
उन सबको चोदने के बाद हम बाथरूम में एक साथ नहाने के लिए चले गए.
अंशु के घर में बाथटब था.
पता नहीं उन लड़कियों को क्या सूझा, उन्होंने मुझे चारों तरफ से घेर लिया और मेरे सामने अपनी-अपनी चूत में उंगलियां करने लगीं.
मैंने उनसे कहा- अब बस, अब मैं और नहीं कर पाऊंगा!
तभी अंशु एक और गोली लेकर आई और उसने मुझे उसे खाने के लिए बोला.
उसे खाते ही पता नहीं मुझे क्या हुआ, मैं एकदम से गामा पहलवान सा उत्तेजित हो गया.
मैंने फिर से उन लड़कियों की चूत में उंगली करना शुरू कर दिया और उनकी चुत की मुठ मारता हुआ उनकी चूत चाटने लगा.
एक घंटा के बाद वे सब एक-एक करके मेरे ऊपर झड़ गईं.
उन्होंने मुझे पूरी तरह से अपने माल से ऐसे लथपथ कर दिया मानो जैसे मैं दूध से भरे हुए बाथटब में सर से लेकर पांव तक पूरा डूब गया हूँ.
थोड़ी देर के बाद मैं भी झड़ गया और उन लड़कियों ने मुझे चाट चाट कर साफ कर दिया.
अब हम सबने नहाकर अपने-अपने कपड़े पहने और एक-एक फ्रेंच किस करने के बाद अपने घर चले गए.
हम सबके जाने के बाद अंशु ने अपने ब्वॉयफ्रेंड को अपने घर बुलाया और वे दोनों दो दिन तक नंगे रह कर चुदाई करते रहे, जब तक कि अंशु के पेरेंट्स के आने का फोन नहीं आ गया.
आगे आप सब को पता हैं कि उन दोनों ने 2 दिनों तक लगातार किस तरह से सेक्स किया किया होगा.
दोस्तो, आपको मेरी यह Xxx स्कूल स्टूडेंट्स सेक्स कहानी कैसी लगी, मुझे जरूर बताएं.
आप मुझे मेरी मेल आईडी पर मेल कर सकते हैं.
उस दिन मैंने उन आठों लड़कियों को एक एक करके चोदा.
मैंने अपने घर पर फोन करके कह दिया था कि मुझे घर आने में देरी हो जाएगी.
अंशु के पास गर्भ निरोधक और कामोत्तेजक दवाओं का भंडार रहता था. कुतिया ने मुझे एक साथ दो दो गोलियां खिला कर सबके साथ चुदाई के लिए कड़क लंड वाला बनाए रखा.
उन सबको चोदने के बाद हम बाथरूम में एक साथ नहाने के लिए चले गए.
अंशु के घर में बाथटब था.
पता नहीं उन लड़कियों को क्या सूझा, उन्होंने मुझे चारों तरफ से घेर लिया और मेरे सामने अपनी-अपनी चूत में उंगलियां करने लगीं.
मैंने उनसे कहा- अब बस, अब मैं और नहीं कर पाऊंगा!
तभी अंशु एक और गोली लेकर आई और उसने मुझे उसे खाने के लिए बोला.
उसे खाते ही पता नहीं मुझे क्या हुआ, मैं एकदम से गामा पहलवान सा उत्तेजित हो गया.
मैंने फिर से उन लड़कियों की चूत में उंगली करना शुरू कर दिया और उनकी चुत की मुठ मारता हुआ उनकी चूत चाटने लगा.
एक घंटा के बाद वे सब एक-एक करके मेरे ऊपर झड़ गईं.
उन्होंने मुझे पूरी तरह से अपने माल से ऐसे लथपथ कर दिया मानो जैसे मैं दूध से भरे हुए बाथटब में सर से लेकर पांव तक पूरा डूब गया हूँ.
थोड़ी देर के बाद मैं भी झड़ गया और उन लड़कियों ने मुझे चाट चाट कर साफ कर दिया.
अब हम सबने नहाकर अपने-अपने कपड़े पहने और एक-एक फ्रेंच किस करने के बाद अपने घर चले गए.
हम सबके जाने के बाद अंशु ने अपने ब्वॉयफ्रेंड को अपने घर बुलाया और वे दोनों दो दिन तक नंगे रह कर चुदाई करते रहे, जब तक कि अंशु के पेरेंट्स के आने का फोन नहीं आ गया.
आगे आप सब को पता हैं कि उन दोनों ने 2 दिनों तक लगातार किस तरह से सेक्स किया किया होगा.
दोस्तो, आपको मेरी यह Xxx स्कूल स्टूडेंट्स सेक्स कहानी कैसी लगी, मुझे जरूर बताएं.
आप मुझे मेरी मेल आईडी पर मेल कर सकते हैं.
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ANTARVASANA KAHANIYAN:
💦💦💦💦💦💦💦
पति ने मुझे बुलाकर अपनी पत्नी की चूत चुदवाई
💦💦💦💦💦💦💦
Xxx ककोल्ड हसबैंड स्टोरी में एक अनजान आदमी ने मुझसे संपर्क किया और खुद से अपनी बीवी की चुदाई की बात की. मैंने सोचा कि कोई मजाक होगा. लेकिन बात आगे बढ़ी तो …
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम राहुल है, मैं उत्तर प्रदेश के लखनऊ में रहता हूं.
मैं पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट टाइम जॉब भी करता हूं.
मेरी उम्र 21 साल है. दिखने में मैं लंबा और पतला हूं लेकिन अच्छा दिखता हूं।
यह Xxx ककोल्ड हसबैंड स्टोरी पिछले साल दिसंबर की है जब मैं ऑफिस की छुट्टी होने की वजह से घर पर था और धूप खा रहा था.
तभी मेरे फोन पर एक अंजान नंबर से मैसेज आया.
उस मैसेज में लिखा था- मुझे आपका नंबर सोशियल मीडिया से मिला है!
मैंने भी हैलो कहा और पूछा- जी बताइए, क्या काम है?
उन्होंने अपना नाम शिखा बताया और कहा- मुझे आपसे एक काम है!
तो मैंने पूछा- क्या काम है?
उन्होंने कहा- मैंने आपकी फोटो देखी है और आप काफ़ी अच्छे लगते हो!
मैंने शुक्रिया कहा और उनके अगले मैसेज का इंतजार करने लगा.
अब उन्होंने आप से तुम पर आते हुए लिखा- मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करना है और बदले में मैं तुम्हें पैसे भी दूँगी!
ये सब सुनकर पहले तो मैं हक्का बक्का रह गया, फिर मैंने सोचा कि कोई मज़ाक कर रहा है.
मैंने कहा- आज सुबह से कोई मिला नहीं क्या? मुझे क्यों परेशान कर रहे हो भाई?
तो उन्होंने कहा- नहीं, मैं सीरियसली बात कर रही हूँ. मेरे पति एकदम ओपन माइंडेड हैं और सब कुछ जानते हैं.
अब मुझे कुछ शक हुआ और मैंने लिखा- भाई अगर आप लड़के हो तो बताओ तो पहले … और सच क्या है … ये भी बताओ? यदि तुम अपनी बीवी को मेरे लौड़े से चुदवाना चाहते हो तो भी साफ बताओ या तुम खुद अपनी गांड मरवाना चाहते हो तो भी साफ साफ बताओ!
मेरी इस बात पर उधर से मैसेज नहीं आया.
मैं समझ गया कि शायद कुछ सोचा जा रहा है.
फिर मैसेज आया- क्या तुम मुझे अपना लंड दिखा सकते हो?
मैंने कहा- दिखा तो सकता हूँ पर पहले कुछ गर्म दिखाओ तो लंड कड़क हो सकेगा, फिर दिखा भी दूंगा!
उसने एक नंगी लड़की के दूध व चूत दिखती हुई वीडियो दिखाई, चेहरा अभी भी नहीं दिखाया गया था.
उसने कहा- यह मेरी बीवी की वीडियो है.
मैंने कहा- बीवी की वीडियो है तो सच में बहुत ही सेक्सी लेडी तुम्हारी बीवी है.
उसने कहा- अब अपना लंड दिखाओ!
मैंने एक पल को सोचा और अपना लंड दिखा दिया.
उस तरफ से बात करने वाला मेरा लंड देख कर संतुष्ट हो गया था.
अगले ही पल उन्होंने कहा- हां मेरा नाम राज है … और सच यह है कि मुझे कुछ नया ट्राइ करने का मन है. इसी लिए किसी ऐसे लड़के की तलाश कर रहा हूँ जो मेरी वाइफ के साथ सेक्स कर सके, वह भी मेरी आंखों के सामने!
उन्होंने बताया कि वे लखनऊ में ही राजाजीपुरम में रहते हैं, जो मेरे घर से ज्यादा दूर नहीं है.
उन्होंने कहा कि वे ऐसे ही किसी को नहीं बुला सकते हैं. घर की इज़्ज़त की बात है!
मैंने पूछा- इतने लोगों में आपने मुझे ही क्यों चूज किया?
तो उन्होंने कहा- तुम देखने में अच्छे लगे इसलिए मैसेज किया.
मैंने उनसे कॉल करने के लिए कहा और हमारी बात हो गई.
उसके बाद उन्होंने कहा- दिन में आ जाओ घर में, सिर्फ़ वह और उनकी वाइफ हैं और उनका छोटा सा बेटा!
मैंने उनसे उनकी वाइफ की फोटो मांगी.
उन्होंने भेज दी.
सच में बड़ी गजब की कांटा माल थी यार … उसकी औसत लंबाई थी.
वह गोरी सी 32-30-34 की एकदम जहर थी.
मेरा उनसे टाइम फिक्स हुआ और मैं दिए हुए अड्रेस पर पहुंच गया.
उनके Xxx ककोल्ड हसबैंड ने आकर गेट खोला तो मैंने नमस्ते किया.
उन्होंने भी हाथ मिलाया और मुझे रूम में ले गए.
अपनी वाइफ को नाश्ता लाने के लिए भेजा.
फिर मुझसे कहा- मेरी बीवी की चुदाई देखने के लिए मैंने एक हिडन कैमरा लगाया है.
मैं दीवार पर इधर उधर देखने लगा.
वे बोले- तुम परेशान न हो, उससे तुम्हें जब तक खतरा नहीं है क्योंकि बीवी मेरी चुद रही है और तुम उसे चोदने वाले हो!
मैं हंस दिया.
मैंने कहा- इस सबका सबब क्या है?
वे बोले- तृप्ति!
मैंने कहा- ठीक है. बस एक आखिरी बात और?
वे मेरी तरफ देखने लगे.
मैंने कहा- लंड देखने का क्या मतलब था?
वे हंस कर बोले- मेरा तुमसे आधा है.
मैंने कहा- बड़े छोटे से बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है, टाइमिंग से फर्क पड़ता है!
वे बोले- तुम कितना टाइम लगाते हो!
मैंने कहा- मूड पर डिपेंड करता है. यदि मैडम ने सहयोग किया तो मजा देर तक चल सकता है!
वे हंस दिए और बोले- वह तुम्हें पूरा सहयोग करेगी और यदि वह तुमसे खुश हुई तो दुबारा चुदने के लिए भी बुला सकती है.
यह सुनकर मैं चुप हो गया.
अगले कुछ पल हम दोनों शांत रहे.
और उसी दरमियान वे हॉल में अन्दर आईं तो मैं तो उन्हें बस देखता ही रह गया.
थोड़ी देर बात हुई.
उसके बाद वे मुझे अपने बेडरूम में ले गए.
फिर वाइफ को लेकर आए और उन्हें मेरे बगल में बैठा दिया.
💦💦💦💦💦💦💦
पति ने मुझे बुलाकर अपनी पत्नी की चूत चुदवाई
💦💦💦💦💦💦💦
Xxx ककोल्ड हसबैंड स्टोरी में एक अनजान आदमी ने मुझसे संपर्क किया और खुद से अपनी बीवी की चुदाई की बात की. मैंने सोचा कि कोई मजाक होगा. लेकिन बात आगे बढ़ी तो …
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम राहुल है, मैं उत्तर प्रदेश के लखनऊ में रहता हूं.
मैं पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट टाइम जॉब भी करता हूं.
मेरी उम्र 21 साल है. दिखने में मैं लंबा और पतला हूं लेकिन अच्छा दिखता हूं।
यह Xxx ककोल्ड हसबैंड स्टोरी पिछले साल दिसंबर की है जब मैं ऑफिस की छुट्टी होने की वजह से घर पर था और धूप खा रहा था.
तभी मेरे फोन पर एक अंजान नंबर से मैसेज आया.
उस मैसेज में लिखा था- मुझे आपका नंबर सोशियल मीडिया से मिला है!
मैंने भी हैलो कहा और पूछा- जी बताइए, क्या काम है?
उन्होंने अपना नाम शिखा बताया और कहा- मुझे आपसे एक काम है!
तो मैंने पूछा- क्या काम है?
उन्होंने कहा- मैंने आपकी फोटो देखी है और आप काफ़ी अच्छे लगते हो!
मैंने शुक्रिया कहा और उनके अगले मैसेज का इंतजार करने लगा.
अब उन्होंने आप से तुम पर आते हुए लिखा- मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करना है और बदले में मैं तुम्हें पैसे भी दूँगी!
ये सब सुनकर पहले तो मैं हक्का बक्का रह गया, फिर मैंने सोचा कि कोई मज़ाक कर रहा है.
मैंने कहा- आज सुबह से कोई मिला नहीं क्या? मुझे क्यों परेशान कर रहे हो भाई?
तो उन्होंने कहा- नहीं, मैं सीरियसली बात कर रही हूँ. मेरे पति एकदम ओपन माइंडेड हैं और सब कुछ जानते हैं.
अब मुझे कुछ शक हुआ और मैंने लिखा- भाई अगर आप लड़के हो तो बताओ तो पहले … और सच क्या है … ये भी बताओ? यदि तुम अपनी बीवी को मेरे लौड़े से चुदवाना चाहते हो तो भी साफ बताओ या तुम खुद अपनी गांड मरवाना चाहते हो तो भी साफ साफ बताओ!
मेरी इस बात पर उधर से मैसेज नहीं आया.
मैं समझ गया कि शायद कुछ सोचा जा रहा है.
फिर मैसेज आया- क्या तुम मुझे अपना लंड दिखा सकते हो?
मैंने कहा- दिखा तो सकता हूँ पर पहले कुछ गर्म दिखाओ तो लंड कड़क हो सकेगा, फिर दिखा भी दूंगा!
उसने एक नंगी लड़की के दूध व चूत दिखती हुई वीडियो दिखाई, चेहरा अभी भी नहीं दिखाया गया था.
उसने कहा- यह मेरी बीवी की वीडियो है.
मैंने कहा- बीवी की वीडियो है तो सच में बहुत ही सेक्सी लेडी तुम्हारी बीवी है.
उसने कहा- अब अपना लंड दिखाओ!
मैंने एक पल को सोचा और अपना लंड दिखा दिया.
उस तरफ से बात करने वाला मेरा लंड देख कर संतुष्ट हो गया था.
अगले ही पल उन्होंने कहा- हां मेरा नाम राज है … और सच यह है कि मुझे कुछ नया ट्राइ करने का मन है. इसी लिए किसी ऐसे लड़के की तलाश कर रहा हूँ जो मेरी वाइफ के साथ सेक्स कर सके, वह भी मेरी आंखों के सामने!
उन्होंने बताया कि वे लखनऊ में ही राजाजीपुरम में रहते हैं, जो मेरे घर से ज्यादा दूर नहीं है.
उन्होंने कहा कि वे ऐसे ही किसी को नहीं बुला सकते हैं. घर की इज़्ज़त की बात है!
मैंने पूछा- इतने लोगों में आपने मुझे ही क्यों चूज किया?
तो उन्होंने कहा- तुम देखने में अच्छे लगे इसलिए मैसेज किया.
मैंने उनसे कॉल करने के लिए कहा और हमारी बात हो गई.
उसके बाद उन्होंने कहा- दिन में आ जाओ घर में, सिर्फ़ वह और उनकी वाइफ हैं और उनका छोटा सा बेटा!
मैंने उनसे उनकी वाइफ की फोटो मांगी.
उन्होंने भेज दी.
सच में बड़ी गजब की कांटा माल थी यार … उसकी औसत लंबाई थी.
वह गोरी सी 32-30-34 की एकदम जहर थी.
मेरा उनसे टाइम फिक्स हुआ और मैं दिए हुए अड्रेस पर पहुंच गया.
उनके Xxx ककोल्ड हसबैंड ने आकर गेट खोला तो मैंने नमस्ते किया.
उन्होंने भी हाथ मिलाया और मुझे रूम में ले गए.
अपनी वाइफ को नाश्ता लाने के लिए भेजा.
फिर मुझसे कहा- मेरी बीवी की चुदाई देखने के लिए मैंने एक हिडन कैमरा लगाया है.
मैं दीवार पर इधर उधर देखने लगा.
वे बोले- तुम परेशान न हो, उससे तुम्हें जब तक खतरा नहीं है क्योंकि बीवी मेरी चुद रही है और तुम उसे चोदने वाले हो!
मैं हंस दिया.
मैंने कहा- इस सबका सबब क्या है?
वे बोले- तृप्ति!
मैंने कहा- ठीक है. बस एक आखिरी बात और?
वे मेरी तरफ देखने लगे.
मैंने कहा- लंड देखने का क्या मतलब था?
वे हंस कर बोले- मेरा तुमसे आधा है.
मैंने कहा- बड़े छोटे से बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है, टाइमिंग से फर्क पड़ता है!
वे बोले- तुम कितना टाइम लगाते हो!
मैंने कहा- मूड पर डिपेंड करता है. यदि मैडम ने सहयोग किया तो मजा देर तक चल सकता है!
वे हंस दिए और बोले- वह तुम्हें पूरा सहयोग करेगी और यदि वह तुमसे खुश हुई तो दुबारा चुदने के लिए भी बुला सकती है.
यह सुनकर मैं चुप हो गया.
अगले कुछ पल हम दोनों शांत रहे.
और उसी दरमियान वे हॉल में अन्दर आईं तो मैं तो उन्हें बस देखता ही रह गया.
थोड़ी देर बात हुई.
उसके बाद वे मुझे अपने बेडरूम में ले गए.
फिर वाइफ को लेकर आए और उन्हें मेरे बगल में बैठा दिया.
❤1
भाभी जी बहुत शर्मा रही थीं.
और सच पूछो तो मुझे भी थोड़ा अजीब लग रहा था क्योंकि पहली बार ऐसा हो रहा था.
फिर वे सज्जन अपने बेटे को लेकर बाहर चले गए.
मैंने मैडम का हाथ पकड़ा और धीरे धीरे बात करना आरंभ की- क्या आप मेरे साथ सहज हैं?
वे- हां, कुछ कुछ सहज हूँ. कुछ देर तक बातें करने से और ज्यादा सहज महसूस करूंगी.
मैंने कहा- क्या आप अपने पति के अलावा किसी दूसरे मर्द से पहली बार सेक्स कर रही हैं?
उन्होंने कहा- हां … पति की जानकारी में पहली बार करने जा रही हूँ!
मैंने कहा- इसका मतलब आप किसी अन्य से भी चुदवा चुकी हैं?
जब मैंने चुदवा चुकी हैं शब्द कहा तो वे मुस्कुरा दीं और बोलीं- शादी के पहले की बात को अभी दुहराने से क्या फायदा!
मैं समझ गया कि यह बात पति कि सुनाई पड़ रही है और वॉइस सेंसर वाले कैमरे से देखा व सुना जा रहा है.
मैंने उनसे कहा- तो अब शुरू करें?
तो उन्होंने अपनी पलकें हिला दीं.
मैंने भी धीरे धीरे उनकी गर्दन पर हाथ फेरा और कहा- अगर कोई प्राब्लम हो तो हम कम्बल के अंदर कर सकते हैं!
उन्होंने कुछ नहीं कहा.
मैंने भी उनकी रजा समझी और कम्बल में आ गया.
चूंकि ठंड का मौसम था तो हम दोनों कम्बल के अन्दर घुस गए.
मैंने उन्हें अपनी ओर खींचा और उनके होंठों पर अपने होंठ लगा दिए.
शुरुआत में मैडम हिचकीं, पर बाद में हम दोनों ने किस करना शुरू कर दिया.
धीरे धीरे वे भी मेरा साथ देने लगीं.
किस करने से गर्मी बढ़ी तो मैंने कम्बल हटा दिया और उनके होंठों का रस पीते हुए ही उनके कपड़े उतार दिए.
उन्होंने भी मेरी टी-शर्ट उतार दी.
मैं उनके बूब्स दबाने लगा और वे आहें भरने लगी थीं.
मैं अब उनके मम्मों पर आ गया और निप्पल को मुँह में भर कर चूसने लगा.
एक को चूसते हुए मैं दूसरे को दबा रहा था.
उन्हें अपने मम्मे चुसवाने में बड़ा मजा आ रहा था तो वे मेरे मुँह में अपने हाथ से अपने निप्पल को दे रही थीं और आह आह करती हुई मेरे हाथ से अपने दूसरे दूध की मां चुदवा रही थीं.
मैंने उनके दूध को मुँह से निकाला और कहा- कैसा लग रहा है?
वे बोलीं- जबरदस्त लग रहा है … आज काफी समय बाद मेरे दूध किसी ने इस तरह से चूसे हैं!
मैंने कहा- तो लेट कर चुसवाने का मन है!
वे राजी हो गईं.
मैंने कहा- जब लंड की सवारी करोगी, तब दूध पिलाना!
उन्होंने ओके कहा.
इसके बाद मैंने उनकी सलवार और पैंटी भी उतार फेंकी.
अब वे मेरे सामने एकदम बिना कपड़ों के थीं.
मैं टूट पड़ा और उन्होंने भी मेरी पैंट व अंडरवियर को हटा दिया.
जैसे ही उन्होंने मेरा लंड देखा, उनकी आंखें फट गईं.
वे हैरानी से लंड को देखती हुई बोलीं- इतना बड़ा!
मैंने भी कहा- हां क्यों … पहले नहीं देखा क्या?
वे मेरी आंखों में आंखें डालकर हंसने लगीं.
अगले ही पल उन्होंने अपना हाथ आगे बढ़ा कर लंड को पकड़ा और उसे आगे पीछे करने लगीं.
मैंने कहा- चूसने का मन है?
वे बोलीं- हां.
मैंने उनके मुँह में लंड दे दिया और उन्होंने लंड को चूस कर गीला कर दिया.
कुछ पल के बाद मैंने भी उनकी चूत पर हाथ फेरा तो वे अपनी गांड उठाने लगीं.
उनका बच्चा ऑपरेशन से हुआ था तो चूत अभी भी टाइट ही थी, ज्यादा ढीली नहीं हुई थी.
फिर मैंने उनके मुँह से लंड निकाला और कहा- अब चुदाई करता हूँ!
उन्होंने गद्दे के नीचे से एक कंडोम निकाल कर मुझे पकड़ा दिया.
मैंने अपने लौड़े को हाथ सहलाया और एक कंडोम चढ़ा लिया.
फिर उनकी गांड के नीचे तकिया लगाया और अपने लंड को उनकी चूत पर सैट कर दिया.
वे अपनी चूत फैलाने के लिए टांगों को कुछ चौड़ा करने लगीं.
उसी पल मैंने हल्का सा धक्का दे दिया तो मेरा आधा लंड चूत के अन्दर घुसता चला गया.
और उनकी हल्की सी चीख निकल गई ‘ऊई मां मर गई …’
फिर मैंने किस करते करते एक और झटका मारा.
जिससे पूरा लंड अन्दर चला गया.
और वे मेरे शरीर को पकड़ कर हल्के से चिल्ला दीं- रुक जा साले … चूत फाड़ेगा क्या?
यह सुनकर मैं थोड़ी देर रुक गया.
फिर जब वे सामान्य हो गईं, उसके बाद मैंने धीरे धीरे आगे पीछे करना आरम्भ किया.
अब उन्हें भी मजा आने लगा था.
फिर ऐसे ही करते करते मैंने 20 मिनट तक ताबड़तोड़ चुदाई की.
उन्हें भी बहुत मजा आया.
मेरा लंड उनकी चूत झड़ने के बाद भी अड़ा हुआ था और वे एकदम ढीली पड़ी हुई थीं.
मेरे जोरदार शॉट लगटे रहने के कारण वे कहने लगीं- आप तो जानवर हो पूरे … आपका कब निकलेगा?
मैंने कहा- बस जब हो जाएगा तो देख लेना!
कुछ देर बाद अब मेरा भी होने वाला था तो मैंने अपने झटके काफी तेज कर दिए थे.
वे चुदाई की अनुभवी थीं तो समझ गई थीं कि मेरा काम तमाम होने वाला है इसलिए वे मुझे झेलती रहीं.
चुदाई करते करते जैसे ही मेरे लंड का काम हो गया, मैं उनके ऊपर गिर गया.
वे मुझे अपनी बांहों में भरकर पड़ी रहीं और मैं अपनी तेज तेज सांसों को नियंत्रित करता हुआ उनके मम्मों पर अपनी छाती को फुलाता पिचकाता रहा.
और सच पूछो तो मुझे भी थोड़ा अजीब लग रहा था क्योंकि पहली बार ऐसा हो रहा था.
फिर वे सज्जन अपने बेटे को लेकर बाहर चले गए.
मैंने मैडम का हाथ पकड़ा और धीरे धीरे बात करना आरंभ की- क्या आप मेरे साथ सहज हैं?
वे- हां, कुछ कुछ सहज हूँ. कुछ देर तक बातें करने से और ज्यादा सहज महसूस करूंगी.
मैंने कहा- क्या आप अपने पति के अलावा किसी दूसरे मर्द से पहली बार सेक्स कर रही हैं?
उन्होंने कहा- हां … पति की जानकारी में पहली बार करने जा रही हूँ!
मैंने कहा- इसका मतलब आप किसी अन्य से भी चुदवा चुकी हैं?
जब मैंने चुदवा चुकी हैं शब्द कहा तो वे मुस्कुरा दीं और बोलीं- शादी के पहले की बात को अभी दुहराने से क्या फायदा!
मैं समझ गया कि यह बात पति कि सुनाई पड़ रही है और वॉइस सेंसर वाले कैमरे से देखा व सुना जा रहा है.
मैंने उनसे कहा- तो अब शुरू करें?
तो उन्होंने अपनी पलकें हिला दीं.
मैंने भी धीरे धीरे उनकी गर्दन पर हाथ फेरा और कहा- अगर कोई प्राब्लम हो तो हम कम्बल के अंदर कर सकते हैं!
उन्होंने कुछ नहीं कहा.
मैंने भी उनकी रजा समझी और कम्बल में आ गया.
चूंकि ठंड का मौसम था तो हम दोनों कम्बल के अन्दर घुस गए.
मैंने उन्हें अपनी ओर खींचा और उनके होंठों पर अपने होंठ लगा दिए.
शुरुआत में मैडम हिचकीं, पर बाद में हम दोनों ने किस करना शुरू कर दिया.
धीरे धीरे वे भी मेरा साथ देने लगीं.
किस करने से गर्मी बढ़ी तो मैंने कम्बल हटा दिया और उनके होंठों का रस पीते हुए ही उनके कपड़े उतार दिए.
उन्होंने भी मेरी टी-शर्ट उतार दी.
मैं उनके बूब्स दबाने लगा और वे आहें भरने लगी थीं.
मैं अब उनके मम्मों पर आ गया और निप्पल को मुँह में भर कर चूसने लगा.
एक को चूसते हुए मैं दूसरे को दबा रहा था.
उन्हें अपने मम्मे चुसवाने में बड़ा मजा आ रहा था तो वे मेरे मुँह में अपने हाथ से अपने निप्पल को दे रही थीं और आह आह करती हुई मेरे हाथ से अपने दूसरे दूध की मां चुदवा रही थीं.
मैंने उनके दूध को मुँह से निकाला और कहा- कैसा लग रहा है?
वे बोलीं- जबरदस्त लग रहा है … आज काफी समय बाद मेरे दूध किसी ने इस तरह से चूसे हैं!
मैंने कहा- तो लेट कर चुसवाने का मन है!
वे राजी हो गईं.
मैंने कहा- जब लंड की सवारी करोगी, तब दूध पिलाना!
उन्होंने ओके कहा.
इसके बाद मैंने उनकी सलवार और पैंटी भी उतार फेंकी.
अब वे मेरे सामने एकदम बिना कपड़ों के थीं.
मैं टूट पड़ा और उन्होंने भी मेरी पैंट व अंडरवियर को हटा दिया.
जैसे ही उन्होंने मेरा लंड देखा, उनकी आंखें फट गईं.
वे हैरानी से लंड को देखती हुई बोलीं- इतना बड़ा!
मैंने भी कहा- हां क्यों … पहले नहीं देखा क्या?
वे मेरी आंखों में आंखें डालकर हंसने लगीं.
अगले ही पल उन्होंने अपना हाथ आगे बढ़ा कर लंड को पकड़ा और उसे आगे पीछे करने लगीं.
मैंने कहा- चूसने का मन है?
वे बोलीं- हां.
मैंने उनके मुँह में लंड दे दिया और उन्होंने लंड को चूस कर गीला कर दिया.
कुछ पल के बाद मैंने भी उनकी चूत पर हाथ फेरा तो वे अपनी गांड उठाने लगीं.
उनका बच्चा ऑपरेशन से हुआ था तो चूत अभी भी टाइट ही थी, ज्यादा ढीली नहीं हुई थी.
फिर मैंने उनके मुँह से लंड निकाला और कहा- अब चुदाई करता हूँ!
उन्होंने गद्दे के नीचे से एक कंडोम निकाल कर मुझे पकड़ा दिया.
मैंने अपने लौड़े को हाथ सहलाया और एक कंडोम चढ़ा लिया.
फिर उनकी गांड के नीचे तकिया लगाया और अपने लंड को उनकी चूत पर सैट कर दिया.
वे अपनी चूत फैलाने के लिए टांगों को कुछ चौड़ा करने लगीं.
उसी पल मैंने हल्का सा धक्का दे दिया तो मेरा आधा लंड चूत के अन्दर घुसता चला गया.
और उनकी हल्की सी चीख निकल गई ‘ऊई मां मर गई …’
फिर मैंने किस करते करते एक और झटका मारा.
जिससे पूरा लंड अन्दर चला गया.
और वे मेरे शरीर को पकड़ कर हल्के से चिल्ला दीं- रुक जा साले … चूत फाड़ेगा क्या?
यह सुनकर मैं थोड़ी देर रुक गया.
फिर जब वे सामान्य हो गईं, उसके बाद मैंने धीरे धीरे आगे पीछे करना आरम्भ किया.
अब उन्हें भी मजा आने लगा था.
फिर ऐसे ही करते करते मैंने 20 मिनट तक ताबड़तोड़ चुदाई की.
उन्हें भी बहुत मजा आया.
मेरा लंड उनकी चूत झड़ने के बाद भी अड़ा हुआ था और वे एकदम ढीली पड़ी हुई थीं.
मेरे जोरदार शॉट लगटे रहने के कारण वे कहने लगीं- आप तो जानवर हो पूरे … आपका कब निकलेगा?
मैंने कहा- बस जब हो जाएगा तो देख लेना!
कुछ देर बाद अब मेरा भी होने वाला था तो मैंने अपने झटके काफी तेज कर दिए थे.
वे चुदाई की अनुभवी थीं तो समझ गई थीं कि मेरा काम तमाम होने वाला है इसलिए वे मुझे झेलती रहीं.
चुदाई करते करते जैसे ही मेरे लंड का काम हो गया, मैं उनके ऊपर गिर गया.
वे मुझे अपनी बांहों में भरकर पड़ी रहीं और मैं अपनी तेज तेज सांसों को नियंत्रित करता हुआ उनके मम्मों पर अपनी छाती को फुलाता पिचकाता रहा.
👍1
शायद उन्हें यह अच्छा लग रहा था. इसलिए हम दोनों काफ़ी देर तक साथ में ही लेटे रहे थे.
उसके बाद हम उठे, बाथरूम गए और अपने आपको साफ किया.
फिर कपड़े पहन कर रूम से बाहर आ गए.
मैंने उनके Xxx ककोल्ड हसबैंड के साथ मिल कर काफ़ी देर तक बात की.
उन्होंने मुझे पैसे दिए और बोले कि जब जरूरत होगी, तो वापस बुलाऊंगा!
मैंने भी कहा- ठीक है सर!
मैं अपने घर आ गया.
थोड़ी देर बाद उनका मैसेज आया- यार, क्या बात है, मेरी वाइफ तुमसे बहुत खुश हुई है. वह तो मुझसे मिलते ही कहने लगी कि अगली बार से यही आएगा, थैंक्स यार.
उसके बाद हमारी काफ़ी बात होती रहती थी और मैंने यह सब बात अभी भी प्राइवेट रखी है.
उसके बाद हम उठे, बाथरूम गए और अपने आपको साफ किया.
फिर कपड़े पहन कर रूम से बाहर आ गए.
मैंने उनके Xxx ककोल्ड हसबैंड के साथ मिल कर काफ़ी देर तक बात की.
उन्होंने मुझे पैसे दिए और बोले कि जब जरूरत होगी, तो वापस बुलाऊंगा!
मैंने भी कहा- ठीक है सर!
मैं अपने घर आ गया.
थोड़ी देर बाद उनका मैसेज आया- यार, क्या बात है, मेरी वाइफ तुमसे बहुत खुश हुई है. वह तो मुझसे मिलते ही कहने लगी कि अगली बार से यही आएगा, थैंक्स यार.
उसके बाद हमारी काफ़ी बात होती रहती थी और मैंने यह सब बात अभी भी प्राइवेट रखी है.