Forwarded from Sexy girl navya
सोती हुई बहन की चुदाई
अपनी सोती हुई बड़ी बहन के शरीर के साथ खिलवाड़ करने वाला 19 साल का अजय मुंबई के अँधेरी का रहने वाला है। अजय अपनी बहन के शरीर को कामुक नज़रो से देखता था। मौका मिलने पर अजय ने की सोती हुई बहन की चुदाई। अजय ने अपनी चुदाई कहानी में बताया की सोती अवस्था में उसकी बहन हो गई वासना मूलक और जब उसकी नींद खुली तो वो खुद को भी नही रोक पाई।
मैं 12 क्लास में था जब गर्मियों की चुटिया चल रही थी। तेज गर्मी की वजह से मैं घर से बाहर नही निकलता था। मेरी बड़ी बहन किसी शॉपिंग मॉल में काम करती थी।
मेरी बहन काफी नाज़ुक स्वभाव की थी। वो दिल की साफ और अच्छी सोच रखने वाली थी। वो मेरा काफी ख्याल रखती थी जब मम्मी घर पर नही होती थी।
मैं भी अपनी बहन को काफी चाहता था पर उम्र के साथ साथ जवानी भी बढ़ती जा रही थी। मैं कभी कभी अपनी ही बहन के शरीर को देख कामुक हो जाता।
मुझे पता है की अपनी बहन को इस तरह गन्दी नज़रो से देखना कोई अच्छी बात नही पर उम्र और जवानी मेरी ही नही मेरी बहन की भी बढ़ रही थी।
मेरी बहन लम्बी और सुडौल हो चुकी थी साथ ही उसके लहराते खुशबूदार बल उसे और सुंदर बना देते।
सेक्सी तो वो सबसे ज्यादा तब लगती जब वो अपने शॉपिंग मॉल की ड्रेस पहनती।
उसकी काली टाइट जीन्स उसकी जांघो को और निखार देती। उसकी गांड की गोलाई देख मेरा मन करता की वही जा कर चिपक जाऊ।
शॉपिंग मॉल की वो टाइट लाल टीशर्ट मेरी बहन के नरम स्तनों को और बड़ा दिखती।
टीशर्ट से झाकती वो दो मोटी और सख्त चूची देख मेरा अपनी बहन का दूध पिने का मन करता।
जब वो मटक कर अपनी चूचियां और कूल्हे हिलाते हुए घर से बाहर निकलती तो मैं उसे देखता रहता। फिर बाथरूम में जा कर अपनी बहन की कल्पना करके अपने लंड को सहलाता।
एक दिन अचानक मेरी बहन दोपहर को शॉपिंग मॉल से आ गई। जब माँ ने पूछा क्या हुआ तो बहन बोली आज मेने हाफ डे लिया है मैं काफी थक गई थी।
Hindi Sex Story : अपने सगे भाई के बच्चे की माँ बनने बाली हु और खुश हु
मेरी बहन नहाने के बाद गर्मिओ के हलके और छोटे कपडे पहन कर अपने कमरे में आराम करने चली गई।
माँ – अजय बेटा मैं सूट सिलवाने जा रही हूँ घर का ख्याल रखना और अपनी बहन को निम्बू पानी बना कर देना काफी थक गई है वो।
मेने हाँ कहा और माँ घर से बाहर चली गई। घर पर बस मैं और मेरी बड़ी बहन थी।
मेने निम्बू पानी बनाया और बहन के कमरे में चला गया।
मेरी बहन तब तक सो चुकी थी पर मेरा लिंग उसे देख फिर जागने लगा।
मेरी बहन ने एक हलके कपडे की निकर पहनी। मुझे उसके गोरे पर और मोटी गांड साफ दिख रही थी। साथ ही उसने ब्रा भी नही पहनी थी जिसकी वजह से मैं उसके स्तन टीशर्ट से देख पा रहा था।
मेने निम्बू पानी का गिलास टेबल पर रखा और अपनी बहन को करीब से देखने लगा।
उसका शरीर देख मुझे लगा की मेरी बहन सिर्फ और सिर्फ चुदने के लिए बनी है।
मेने धीरे से अपना एक हाथ उसके स्तन पर रखा और उसे हल्का सा मसलने लगा।
हाथो पर वो नरम एहसास मेरे लिंग को और कठोर बना दिया। मेने दूसरा हाथ अपनी बहन की निकर में डाल दिया।
उसकी गांड और स्तन दोनों एक समान नरम थी। उसका शरीर छूते हुए मैं अपना लंड हिलने लगा।
उसके शरीर से आने वाली मीठी खुशबू मेरी अन्तर्वासना को हद से ज्यादा बढ़ा रही थी। मेने उसकी कच्छी में हाथ डाला और उसकी चुत सहलाने लगा।
मेरी बहन ने चुत पर काफी बाल ऊगा रखे थे पर मुझे उनसे कोई फर्क नही पड़ा। मुझे तो बस अपनी काम वासना मिटानी थी।
चुत सहलाते सहलाते मेरी बहन की चुत से निपचिपा तरल निकलने लगा।
उसकी चुत पूरी गीली और मुलायम हो गई। मेने धीरे से अपनी बहन की निकर और कच्छी उतर दी और उसकी चिकनी और मलाई दार चुत में ऊँगली डालने लगा।
जैसे जैसे मैं अपने soti hui bahan ki chudai कर रहा था वैसे वैसे वो नींद में तेज़ सासे लेने लगी।
फिर अचानक उसने करवट बदली और मैं रुक गया।
मैं डर गया और सोचने लगा कही ये जाग गई और मुझे ये सब करता देख लिया और क्या होगा?
Hindi Sex Story : मौसी की बेटी की गर्म चुदाई-2
पर उसकी चुत से टपकता रस मुझे मन मोहित कर दिया। मैं उसकी चुत में दोबारा ऊँगली करने लगा और साथ में अपना लिंग हिलाने लगा।
मेरी बहन नींद में मुस्कुराने लगी और मुझे चुदाई के लिए निमंत्रण देने लगी।
मैं धीरे से अपनी बहन के पीछे लेटा और आराम से अपना लंड उसकी गुलाबी चुत में डालने लगा।
उसकी चुत का गर्म अहसास मुझे मेरे कूल्हे हिलने पर मजबूर कर दिया। मैं धुरे से अपना लंड अंदर बाहर करने लगा और बहन नींद में कराहने लगी “आह ह्म्म्म आह्ह”
मेरा जोश बढ़ा और मेने अपनी बहन के साथ पकड़ लिए और उसे तेज़ी से चोदने लगा।
तभी मेरी बहन के आँखे होली और उसने मेरा हाथ अपने स्तनों पर देख लिया।
मुझे इस बात का पता नही चला की वो जाग गई है और मैं उसे चोदता रहा।
चुदाई का आनंद जो मैं अपनी बहन की चुत को दे रहा था उसकी वजह से मेरी बहन मेरा साथ देने लगी।
अपनी सोती हुई बड़ी बहन के शरीर के साथ खिलवाड़ करने वाला 19 साल का अजय मुंबई के अँधेरी का रहने वाला है। अजय अपनी बहन के शरीर को कामुक नज़रो से देखता था। मौका मिलने पर अजय ने की सोती हुई बहन की चुदाई। अजय ने अपनी चुदाई कहानी में बताया की सोती अवस्था में उसकी बहन हो गई वासना मूलक और जब उसकी नींद खुली तो वो खुद को भी नही रोक पाई।
मैं 12 क्लास में था जब गर्मियों की चुटिया चल रही थी। तेज गर्मी की वजह से मैं घर से बाहर नही निकलता था। मेरी बड़ी बहन किसी शॉपिंग मॉल में काम करती थी।
मेरी बहन काफी नाज़ुक स्वभाव की थी। वो दिल की साफ और अच्छी सोच रखने वाली थी। वो मेरा काफी ख्याल रखती थी जब मम्मी घर पर नही होती थी।
मैं भी अपनी बहन को काफी चाहता था पर उम्र के साथ साथ जवानी भी बढ़ती जा रही थी। मैं कभी कभी अपनी ही बहन के शरीर को देख कामुक हो जाता।
मुझे पता है की अपनी बहन को इस तरह गन्दी नज़रो से देखना कोई अच्छी बात नही पर उम्र और जवानी मेरी ही नही मेरी बहन की भी बढ़ रही थी।
मेरी बहन लम्बी और सुडौल हो चुकी थी साथ ही उसके लहराते खुशबूदार बल उसे और सुंदर बना देते।
सेक्सी तो वो सबसे ज्यादा तब लगती जब वो अपने शॉपिंग मॉल की ड्रेस पहनती।
उसकी काली टाइट जीन्स उसकी जांघो को और निखार देती। उसकी गांड की गोलाई देख मेरा मन करता की वही जा कर चिपक जाऊ।
शॉपिंग मॉल की वो टाइट लाल टीशर्ट मेरी बहन के नरम स्तनों को और बड़ा दिखती।
टीशर्ट से झाकती वो दो मोटी और सख्त चूची देख मेरा अपनी बहन का दूध पिने का मन करता।
जब वो मटक कर अपनी चूचियां और कूल्हे हिलाते हुए घर से बाहर निकलती तो मैं उसे देखता रहता। फिर बाथरूम में जा कर अपनी बहन की कल्पना करके अपने लंड को सहलाता।
एक दिन अचानक मेरी बहन दोपहर को शॉपिंग मॉल से आ गई। जब माँ ने पूछा क्या हुआ तो बहन बोली आज मेने हाफ डे लिया है मैं काफी थक गई थी।
Hindi Sex Story : अपने सगे भाई के बच्चे की माँ बनने बाली हु और खुश हु
मेरी बहन नहाने के बाद गर्मिओ के हलके और छोटे कपडे पहन कर अपने कमरे में आराम करने चली गई।
माँ – अजय बेटा मैं सूट सिलवाने जा रही हूँ घर का ख्याल रखना और अपनी बहन को निम्बू पानी बना कर देना काफी थक गई है वो।
मेने हाँ कहा और माँ घर से बाहर चली गई। घर पर बस मैं और मेरी बड़ी बहन थी।
मेने निम्बू पानी बनाया और बहन के कमरे में चला गया।
मेरी बहन तब तक सो चुकी थी पर मेरा लिंग उसे देख फिर जागने लगा।
मेरी बहन ने एक हलके कपडे की निकर पहनी। मुझे उसके गोरे पर और मोटी गांड साफ दिख रही थी। साथ ही उसने ब्रा भी नही पहनी थी जिसकी वजह से मैं उसके स्तन टीशर्ट से देख पा रहा था।
मेने निम्बू पानी का गिलास टेबल पर रखा और अपनी बहन को करीब से देखने लगा।
उसका शरीर देख मुझे लगा की मेरी बहन सिर्फ और सिर्फ चुदने के लिए बनी है।
मेने धीरे से अपना एक हाथ उसके स्तन पर रखा और उसे हल्का सा मसलने लगा।
हाथो पर वो नरम एहसास मेरे लिंग को और कठोर बना दिया। मेने दूसरा हाथ अपनी बहन की निकर में डाल दिया।
उसकी गांड और स्तन दोनों एक समान नरम थी। उसका शरीर छूते हुए मैं अपना लंड हिलने लगा।
उसके शरीर से आने वाली मीठी खुशबू मेरी अन्तर्वासना को हद से ज्यादा बढ़ा रही थी। मेने उसकी कच्छी में हाथ डाला और उसकी चुत सहलाने लगा।
मेरी बहन ने चुत पर काफी बाल ऊगा रखे थे पर मुझे उनसे कोई फर्क नही पड़ा। मुझे तो बस अपनी काम वासना मिटानी थी।
चुत सहलाते सहलाते मेरी बहन की चुत से निपचिपा तरल निकलने लगा।
उसकी चुत पूरी गीली और मुलायम हो गई। मेने धीरे से अपनी बहन की निकर और कच्छी उतर दी और उसकी चिकनी और मलाई दार चुत में ऊँगली डालने लगा।
जैसे जैसे मैं अपने soti hui bahan ki chudai कर रहा था वैसे वैसे वो नींद में तेज़ सासे लेने लगी।
फिर अचानक उसने करवट बदली और मैं रुक गया।
मैं डर गया और सोचने लगा कही ये जाग गई और मुझे ये सब करता देख लिया और क्या होगा?
Hindi Sex Story : मौसी की बेटी की गर्म चुदाई-2
पर उसकी चुत से टपकता रस मुझे मन मोहित कर दिया। मैं उसकी चुत में दोबारा ऊँगली करने लगा और साथ में अपना लिंग हिलाने लगा।
मेरी बहन नींद में मुस्कुराने लगी और मुझे चुदाई के लिए निमंत्रण देने लगी।
मैं धीरे से अपनी बहन के पीछे लेटा और आराम से अपना लंड उसकी गुलाबी चुत में डालने लगा।
उसकी चुत का गर्म अहसास मुझे मेरे कूल्हे हिलने पर मजबूर कर दिया। मैं धुरे से अपना लंड अंदर बाहर करने लगा और बहन नींद में कराहने लगी “आह ह्म्म्म आह्ह”
मेरा जोश बढ़ा और मेने अपनी बहन के साथ पकड़ लिए और उसे तेज़ी से चोदने लगा।
तभी मेरी बहन के आँखे होली और उसने मेरा हाथ अपने स्तनों पर देख लिया।
मुझे इस बात का पता नही चला की वो जाग गई है और मैं उसे चोदता रहा।
चुदाई का आनंद जो मैं अपनी बहन की चुत को दे रहा था उसकी वजह से मेरी बहन मेरा साथ देने लगी।
❤2
Forwarded from Sexy girl navya
जब वो आगे पीछे हिलने लगी तो मुझे इस बात का पता लगा की वो जाग चुकी है।
ये देख मेने अपने कूल्हे हिलना बंद कर दिए और मेरा दिमाग सुन पड़ गया। मेरे हाथ पर ठन्डे हो गए ये सोच कर की अब मेरी बहन क्या करेगी? और अगर पापा और मम्मी को पता चल गया तो ?
तभी मेरे बहन ने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी टीशर्ट के अंदर डाल कर मुझसे अपने स्तन दबवाने लगी।
उसने धीमी और शर्मीली आवाज में कहा रुक क्यों गए अच्छा लग रहा था।
उस पल मुझे समझ नही आया की क्या करू। तभी मेरी बहन अपनी गांड आगे पीछे हिलाने लगी मेर मेरे लंड को चोदने लगी।
ये सब देख मेरा लंड दोबारा से फूल गया और मेने अपनी बहन से स्तन पकड़ उन्हें जोर से मसलने लगा और चुत चोदने लगा।
चुदाई के दौरान मेरी बहन ने एक बार भी पीछे नही देखा और अपना शरीर बेजान छोड़ कर अपनी रसीली गांड मुझ से चुदवाती रही।
बहन (धीमी आवाज में हफ्ते हुए) – अहह अहम्म्म्म अह्ह्ह्ह।
मेरी बहन के मुँह से अहह के अलावा कोई शब्द नही निकला। वो जानती थी की एक भाई और बहन सेक्स नही कर सकते पर उसे भी उसकी रसीली चुत ने मजबूर कर दिया।
Hindi Sex Story : Munhboli Bahan Ki Choot Dekh Rishta Badal Gaya 2
कुछ 15 मिनट के बाद मेरा झड़ने वाला था। मेने उसकी चुत से अपना लिंग बाहर निकाला और जैसे ही झाड़ने वाला था मेरी बहन ने पीछे हाथ करके उसे पकड़ लिया और हिलने लगी।
मेरे सख्त लंड पे वो बड़ी बड़ी नसे मेरी बहन के हाथो पर ऐसा अहसास दे रही थी जो वो कभी नहीं भूलेगी।
मेरा सारा माल उसकी गांड पे जा चिपका और वो वह हाथ फेरने लगी।
जोश उतरने के बाद मैं होश में आया और मुझे समझ आया की मेने क्या किया।
मैं जल्दी से वह से उठा और अपनी पैंट ऊपर करके वह से चला गया।
मुझे समझ नही आ रहा था की अब मैं क्या करुगा अपनी बहन से कैसे आँखें मिलाऊंगा।
एक घंटे बाद मेरी माँ घर आयी और शाम का नाश्ता बनाने लगी। उनहोने पूछा “क्या तुम्हारी बहन उठ गई ? जा कर देख लो। अगर उठ गई है तो उसे यहाँ भेज देना उसे भूख लगी होगी। “
मैं वह जाते हुए डर रहा था। मेने धीरे से दरवाज़ा खोला तो देखा मेरी बहन वैसी की वैसी लेटी थी जैसा मैं उसे चोद रहा था। उसकी गोरी गांड पर लगा मेरा सारा माल सुख गया था और वो वैसी ही अवस्था में सो रही थी।
कही माँ उसे ऐसा ना देख ले मेने उसकी कच्छी धीरे से ऊपर की और उसे वापस निकर पहना दी और माँ को बोल दिया की वो अभी भी सो रही है।
उस दिन के बाद से मेने और मेरी बहन ने करीब 2 महीने तक बात नही की और ना ही एक दूसरे से नज़रे मिलाई।
आज भी जरूरत पड़ने पर ही हम बात करते है। ये थी मेरी बहन की चुदाई कहानी। अगर मेरी सोती हुई बहन की चुदाई ने आपको कामुक महसूस कराया तो कमेंट में जरूर बताना।
ये देख मेने अपने कूल्हे हिलना बंद कर दिए और मेरा दिमाग सुन पड़ गया। मेरे हाथ पर ठन्डे हो गए ये सोच कर की अब मेरी बहन क्या करेगी? और अगर पापा और मम्मी को पता चल गया तो ?
तभी मेरे बहन ने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी टीशर्ट के अंदर डाल कर मुझसे अपने स्तन दबवाने लगी।
उसने धीमी और शर्मीली आवाज में कहा रुक क्यों गए अच्छा लग रहा था।
उस पल मुझे समझ नही आया की क्या करू। तभी मेरी बहन अपनी गांड आगे पीछे हिलाने लगी मेर मेरे लंड को चोदने लगी।
ये सब देख मेरा लंड दोबारा से फूल गया और मेने अपनी बहन से स्तन पकड़ उन्हें जोर से मसलने लगा और चुत चोदने लगा।
चुदाई के दौरान मेरी बहन ने एक बार भी पीछे नही देखा और अपना शरीर बेजान छोड़ कर अपनी रसीली गांड मुझ से चुदवाती रही।
बहन (धीमी आवाज में हफ्ते हुए) – अहह अहम्म्म्म अह्ह्ह्ह।
मेरी बहन के मुँह से अहह के अलावा कोई शब्द नही निकला। वो जानती थी की एक भाई और बहन सेक्स नही कर सकते पर उसे भी उसकी रसीली चुत ने मजबूर कर दिया।
Hindi Sex Story : Munhboli Bahan Ki Choot Dekh Rishta Badal Gaya 2
कुछ 15 मिनट के बाद मेरा झड़ने वाला था। मेने उसकी चुत से अपना लिंग बाहर निकाला और जैसे ही झाड़ने वाला था मेरी बहन ने पीछे हाथ करके उसे पकड़ लिया और हिलने लगी।
मेरे सख्त लंड पे वो बड़ी बड़ी नसे मेरी बहन के हाथो पर ऐसा अहसास दे रही थी जो वो कभी नहीं भूलेगी।
मेरा सारा माल उसकी गांड पे जा चिपका और वो वह हाथ फेरने लगी।
जोश उतरने के बाद मैं होश में आया और मुझे समझ आया की मेने क्या किया।
मैं जल्दी से वह से उठा और अपनी पैंट ऊपर करके वह से चला गया।
मुझे समझ नही आ रहा था की अब मैं क्या करुगा अपनी बहन से कैसे आँखें मिलाऊंगा।
एक घंटे बाद मेरी माँ घर आयी और शाम का नाश्ता बनाने लगी। उनहोने पूछा “क्या तुम्हारी बहन उठ गई ? जा कर देख लो। अगर उठ गई है तो उसे यहाँ भेज देना उसे भूख लगी होगी। “
मैं वह जाते हुए डर रहा था। मेने धीरे से दरवाज़ा खोला तो देखा मेरी बहन वैसी की वैसी लेटी थी जैसा मैं उसे चोद रहा था। उसकी गोरी गांड पर लगा मेरा सारा माल सुख गया था और वो वैसी ही अवस्था में सो रही थी।
कही माँ उसे ऐसा ना देख ले मेने उसकी कच्छी धीरे से ऊपर की और उसे वापस निकर पहना दी और माँ को बोल दिया की वो अभी भी सो रही है।
उस दिन के बाद से मेने और मेरी बहन ने करीब 2 महीने तक बात नही की और ना ही एक दूसरे से नज़रे मिलाई।
आज भी जरूरत पड़ने पर ही हम बात करते है। ये थी मेरी बहन की चुदाई कहानी। अगर मेरी सोती हुई बहन की चुदाई ने आपको कामुक महसूस कराया तो कमेंट में जरूर बताना।
Forwarded from Sexy girl navya
सेक्सी आंटी (मेरे दोस्त की माँ) की चुदाई कहानी
by aakash 22-12-2022 29,922
हाय दोस्तो! मेरा नाम सैंडी है. मैं दिल्ली में रहता हूँ. मेरी शादी हो चुकी थी और शादी के चार साल बाद तलाक भी हो गया.
आज मैं आप लोगों को अपनी एक इंडियन आंटी सेक्स स्टोरी बताने जा रहा हूं कि कैसे मैंने दोस्त की मम्मी की चुदाई की. उम्मीद करता हूं कि आपको ये पसंद आयेगी.
ये बात आज से लगभग तीन वर्ष पहले की है जब मेरी उम्र थी 28 साल की थी. तब मेरी शादी को टूटे हुए ज्यादा वक्त नहीं हुआ था. तलाक के बाद मुझे एक अधूरापन काटता रहता था. मैं जिंदगी से ज्यादा कुछ नहीं चाहता था क्योंकि बस दारू और अपने बिज़नेस को छोड़कर मेरे पास ज्यादा कुछ बचा भी नहीं था.
इंडियन आंटी सेक्स स्टोरी की शुरुआत हुई फ़ेसबुक में आए मेरे दोस्त के मेसेज से.
प्रदीप और मैं स्कूल के वक्त में बहुत अच्छे दोस्त हुआ करते थे. जब उसे मेरे तलाक के बारे में पता चला तो उसे बहुत दुख हुआ। उसने बताया कि वो रशिया में रहने लगा है और काम के चलते इंडिया में भी कम ही आता है.
इस तरह से अक्सर हम दोनों बातें करने लगे. हम लोगों की बात बढ़ने लगी.
एक दिन प्रदीप का व्हाट्सएप कॉल आया. उसने बताया कि उसकी माँ की तबियत खराब है और वो दिल्ली में अकेली रहती है. इस कारण प्रदीप बहुत चिंतित था.
प्रदीप ने बताया कि उसके पिता का स्वर्गवास भी 2 वर्ष पूर्व ही हुआ.
मैंने उससे कहा कि मैं उसके घर चला जाता हूँ।
प्रदीप ने थोड़ा रुक कर जाने को कहा ताकि वो अपनी माँ को बता सके।
कुछ देर के बाद प्रदीप का फोन आया और उसने मुझे थोड़ी देर के बाद जाने के लिए कहा.
उसने मुझे अपनी मॉम का नम्बर बता दिया.
मगर मैंने प्रदीप का नया घर तो देखा ही नहीं था. मैंने आंटी का नम्बर लिया और उनको कॉल किया. कॉल पर मैंने उन्हें व्हाट्सएप पर उनकी लोकेशन भेजने को कहा.
आंटी ने वो भेज दी.
मैंने अपने बैग में जरूरत का सामान रखा और अपनी दारू को कोल्ड ड्रिंक की बोतल में भर कर रख लिया. फिर मैंने आंटी के घर जाने के लिए कैब बुक करवा दी.
जब मैं उनके घर के पास पहुंचा तो मैंने दोस्त की मम्मी को फोन किया कि वो बाहर दरवाजे पर खड़ी हो जायें ताकि मैं उनको देख सकूं. आंटी अपने दरवाजे पर मिलीं. मैंने उन्हें देखा तो पहचान लिया.
मैंने कैब वाले को पैसे दिये और फिर आंटी के पास जाकर उनके पैर छुए. आंटी ने मुझे गले लगाया और हम अंदर चले गये.
मैंने आंटी से कहा- आंटी, आपकी तबियत ठीक नहीं है, आप लेट जाओ, मैं सब देख लूंगा.
फिर भी दोस्त की मम्मी मेरे लिये किचन से पानी लेकर आई. मुझे गिलास थमाते हुए बोली- बेटा, तुम बेवहज परेशान हो रहे हो. मैं सब मैनेज कर लूंगी.
मैं- आंटी आप ऐसे ना बोलिये. मुझे क्या परेशानी होगी भला? अगर प्रदीप ने मुझे पहले बता दिया होता तो मैं पहले ही आ जाता. वैसे भी मैं घर में अकेला ही रहता हूं इसलिए वहां पर बोर ही होता रहता हूं. यहां पर आपकी सेवा करने का मौका तो मिल रहा है कम से कम। इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है?
आंटी- बेटा अकेले क्यों? तुम्हारे घर वाले कहाँ हैं? और तुमने तो शादी भी की थी. वाइफ कहाँ है?
मैंने बात को काटा और आंटी को खाने के लिये पूछा.
इस पर उन्होंने कहा कि खाना बनाया हुआ है. अपने लिये उन्होंने खिचड़ी बनायी थी जो वो खा चुकी थी. मैंने उनको आराम करने के लिये कहा और खुद किचन में जाकर अपने लिये खाना निकाला.
मुझे मेरा रूम बता कर आंटी अपने कमरे में चली गयी.
बैठक वाले हॉल में मैंने खाना लगाया और टीवी देखने लगा. खाने के साथ मैंने वो कोल्ड ड्रिंक वाली बोतल भी निकाल ली. मुझे खाने के साथ ही पीने की भी आदत थी.
मैं अपने खाने में और पीने में मस्त होकर टीवी देख रहा था कि दोस्त की मम्मी के रूम से कुछ गिरने की आवाज आई. मैं देखने के लिए उनके रूम की ओर भागा. मैंने पाया कि आंटी कुछ ढूंढ रही थी.
आंटी से पूछा- क्या हुआ आँटी? मैं कुछ मदद कर सकता हूँ?
आंटी- नहीं बेटा, मैं अपना बाम ढूंढ़ रही हूँ. मेरा सिर दर्द से फटा जा रहा है.
मैं- आंटी उसे छोड़िए. मेरे पास बाम है. आप लेट जाइए, मैं लगा देता हूँ.
ये बोलकर मैं अपने बैग से बाम लेकर आँटी के रूम में पहुँचा जहाँ आँटी अपने बिस्तर में लेटी हुई थी.
मैं- आंटी सीधी लेट जाइए. मैं आपका हेड मसाज कर देता हूँ.
आंटी- क्यों परेशान हो रहे हो बेटा?
मैं- प्लीज आंटी, अगर अपना बेटा मानते हो तो मत रोको.
ये बोलते हुए मैंने बाम खोला और उनके सिरहाने के पास पहुँच गया. जैसे ही मैंने बाम उनके माथे पर लगाया मेरे शरीर में एक अजीब सी हरकत हुई और मेरा मन करने लगा कि मैं आँटी के पास चिपक कर सो जाऊँ.
मुझ पर दारू का नशा भी चढ़ गया था। आंटी ने मैक्सी पहनी थी. मैं बिना कुछ बोले उनके पाँव के पास आ गया और दबाने शुरू कर दिए.
आंटी- क्यों परेशान हो रहे हो सैंडी बेटा? तुम सो जाओ.
by aakash 22-12-2022 29,922
हाय दोस्तो! मेरा नाम सैंडी है. मैं दिल्ली में रहता हूँ. मेरी शादी हो चुकी थी और शादी के चार साल बाद तलाक भी हो गया.
आज मैं आप लोगों को अपनी एक इंडियन आंटी सेक्स स्टोरी बताने जा रहा हूं कि कैसे मैंने दोस्त की मम्मी की चुदाई की. उम्मीद करता हूं कि आपको ये पसंद आयेगी.
ये बात आज से लगभग तीन वर्ष पहले की है जब मेरी उम्र थी 28 साल की थी. तब मेरी शादी को टूटे हुए ज्यादा वक्त नहीं हुआ था. तलाक के बाद मुझे एक अधूरापन काटता रहता था. मैं जिंदगी से ज्यादा कुछ नहीं चाहता था क्योंकि बस दारू और अपने बिज़नेस को छोड़कर मेरे पास ज्यादा कुछ बचा भी नहीं था.
इंडियन आंटी सेक्स स्टोरी की शुरुआत हुई फ़ेसबुक में आए मेरे दोस्त के मेसेज से.
प्रदीप और मैं स्कूल के वक्त में बहुत अच्छे दोस्त हुआ करते थे. जब उसे मेरे तलाक के बारे में पता चला तो उसे बहुत दुख हुआ। उसने बताया कि वो रशिया में रहने लगा है और काम के चलते इंडिया में भी कम ही आता है.
इस तरह से अक्सर हम दोनों बातें करने लगे. हम लोगों की बात बढ़ने लगी.
एक दिन प्रदीप का व्हाट्सएप कॉल आया. उसने बताया कि उसकी माँ की तबियत खराब है और वो दिल्ली में अकेली रहती है. इस कारण प्रदीप बहुत चिंतित था.
प्रदीप ने बताया कि उसके पिता का स्वर्गवास भी 2 वर्ष पूर्व ही हुआ.
मैंने उससे कहा कि मैं उसके घर चला जाता हूँ।
प्रदीप ने थोड़ा रुक कर जाने को कहा ताकि वो अपनी माँ को बता सके।
कुछ देर के बाद प्रदीप का फोन आया और उसने मुझे थोड़ी देर के बाद जाने के लिए कहा.
उसने मुझे अपनी मॉम का नम्बर बता दिया.
मगर मैंने प्रदीप का नया घर तो देखा ही नहीं था. मैंने आंटी का नम्बर लिया और उनको कॉल किया. कॉल पर मैंने उन्हें व्हाट्सएप पर उनकी लोकेशन भेजने को कहा.
आंटी ने वो भेज दी.
मैंने अपने बैग में जरूरत का सामान रखा और अपनी दारू को कोल्ड ड्रिंक की बोतल में भर कर रख लिया. फिर मैंने आंटी के घर जाने के लिए कैब बुक करवा दी.
जब मैं उनके घर के पास पहुंचा तो मैंने दोस्त की मम्मी को फोन किया कि वो बाहर दरवाजे पर खड़ी हो जायें ताकि मैं उनको देख सकूं. आंटी अपने दरवाजे पर मिलीं. मैंने उन्हें देखा तो पहचान लिया.
मैंने कैब वाले को पैसे दिये और फिर आंटी के पास जाकर उनके पैर छुए. आंटी ने मुझे गले लगाया और हम अंदर चले गये.
मैंने आंटी से कहा- आंटी, आपकी तबियत ठीक नहीं है, आप लेट जाओ, मैं सब देख लूंगा.
फिर भी दोस्त की मम्मी मेरे लिये किचन से पानी लेकर आई. मुझे गिलास थमाते हुए बोली- बेटा, तुम बेवहज परेशान हो रहे हो. मैं सब मैनेज कर लूंगी.
मैं- आंटी आप ऐसे ना बोलिये. मुझे क्या परेशानी होगी भला? अगर प्रदीप ने मुझे पहले बता दिया होता तो मैं पहले ही आ जाता. वैसे भी मैं घर में अकेला ही रहता हूं इसलिए वहां पर बोर ही होता रहता हूं. यहां पर आपकी सेवा करने का मौका तो मिल रहा है कम से कम। इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है?
आंटी- बेटा अकेले क्यों? तुम्हारे घर वाले कहाँ हैं? और तुमने तो शादी भी की थी. वाइफ कहाँ है?
मैंने बात को काटा और आंटी को खाने के लिये पूछा.
इस पर उन्होंने कहा कि खाना बनाया हुआ है. अपने लिये उन्होंने खिचड़ी बनायी थी जो वो खा चुकी थी. मैंने उनको आराम करने के लिये कहा और खुद किचन में जाकर अपने लिये खाना निकाला.
मुझे मेरा रूम बता कर आंटी अपने कमरे में चली गयी.
बैठक वाले हॉल में मैंने खाना लगाया और टीवी देखने लगा. खाने के साथ मैंने वो कोल्ड ड्रिंक वाली बोतल भी निकाल ली. मुझे खाने के साथ ही पीने की भी आदत थी.
मैं अपने खाने में और पीने में मस्त होकर टीवी देख रहा था कि दोस्त की मम्मी के रूम से कुछ गिरने की आवाज आई. मैं देखने के लिए उनके रूम की ओर भागा. मैंने पाया कि आंटी कुछ ढूंढ रही थी.
आंटी से पूछा- क्या हुआ आँटी? मैं कुछ मदद कर सकता हूँ?
आंटी- नहीं बेटा, मैं अपना बाम ढूंढ़ रही हूँ. मेरा सिर दर्द से फटा जा रहा है.
मैं- आंटी उसे छोड़िए. मेरे पास बाम है. आप लेट जाइए, मैं लगा देता हूँ.
ये बोलकर मैं अपने बैग से बाम लेकर आँटी के रूम में पहुँचा जहाँ आँटी अपने बिस्तर में लेटी हुई थी.
मैं- आंटी सीधी लेट जाइए. मैं आपका हेड मसाज कर देता हूँ.
आंटी- क्यों परेशान हो रहे हो बेटा?
मैं- प्लीज आंटी, अगर अपना बेटा मानते हो तो मत रोको.
ये बोलते हुए मैंने बाम खोला और उनके सिरहाने के पास पहुँच गया. जैसे ही मैंने बाम उनके माथे पर लगाया मेरे शरीर में एक अजीब सी हरकत हुई और मेरा मन करने लगा कि मैं आँटी के पास चिपक कर सो जाऊँ.
मुझ पर दारू का नशा भी चढ़ गया था। आंटी ने मैक्सी पहनी थी. मैं बिना कुछ बोले उनके पाँव के पास आ गया और दबाने शुरू कर दिए.
आंटी- क्यों परेशान हो रहे हो सैंडी बेटा? तुम सो जाओ.
Forwarded from Sexy girl navya
मैं जानता था कि आंटी बस इसलिये संकोच कर रही थी क्योंकि मैं काफी अरसे बाद पहली बार उनसे मिला था. मैं बिना कुछ बोले उनके पैर दबाता रहा.
वो भी थोड़ा सा मना करती रहीं पर कुछ नहीं बोलीं।
कुछ देर बाद चुप्पी मैंने तोड़ी. उनसे पूछा- वैसे हुआ क्या है आपको?
दोस्त की मम्मी- कुछ नहीं बस कमजोरी है और पूरा शरीर टूट रहा है. कल चक्कर भी आ गए थे. चार दिनों से कामवाली भी नहीं आ रही है. गलती से ये बात मैंने पिंटू (वो प्यार से प्रदीप को पिंटू कहती थी) की बीवी को बता दी. तब उसने तेरे पास फोन करके तुझे भी परेशान कर दिया.
मैं- कितना लकी है वो और आप भी कि आपको इतनी अच्छी ऐन्ड्रा भाभी मिलीं हैं. विदेशी हैं मगर फिर भी ख्याल पूरा रखती हैं. वो बोल रही थी कि आपको बुला रही हैं मगर आप जा नहीं रहे हो?
बात करते करते मेरे हाथ उनके पैरों को दबा रहे थे. धीरे धीरे मुझे उनके पैरों की मखमली छुअन का अहसास हो रहा था.
आंटी- बस अगले महीने सोच रहीं हूँ मगर मैं इस बीमार शरीर के साथ नहीं जाना चाहती। थोड़ा घुटनों के पास दबा दे बेटा.
ये बोलते हुए उन्होंने करवट ले ली.
आंटी- तेरे हाथों में कुछ बात तो है सैंडी.
मैं- अरे नहीं आंटी, मैं कोई पेशेवर मसाज वाला नहीं हूं. मैं तो बस आपको आराम देने की कोशिश कर रहा हूं.
मानो आंटी कहना चाह रही हो कि उन्हें काफी रिलेक्स फील हो रहा है.
मैं बोला- आंटी अगर बात सिर्फ़ कमज़ोरी और शरीर टूटने की है तो आप मुझ पर छोड़ दो. आपके घर में सरसों का तेल है क्या?
आंटी- हाँ है, पर क्यों?
जैसे आंटी जान गयी थी कि उनको पता है कि मैं उनकी मालिश करने वाला हूं. फिर भी वो पूछ रही थीं.
फिर वो बोली- तेल चाहिए तो किचन में रखा हुआ है. जाकर उठा ले आ.
मैं- ओके, मैं देख लूंगा. आप ब्लॉवर ऑन करो. (जनवरी की ठंड का वक्त था) किस्मत अच्छी थी कि किचन में तेल तो मिला ही, साथ में फ्रिज में बीयर भी थी. क्या फ़र्क पड़ता है कि आंटी की थी या पिछले महीने जब प्रदीप और भाभी आए थे तो उनकी थी.
बस मेरे सामने थी तो मैंने पी ली और तेल गुनगुना करके आंटी के पास पहुंचा. पैरों के पास जाकर उनके तलवों में मालिश शुरू की. बहुत मुलायम तलवे थे उनके.
आंटी को मैंने आज से पहले ऐसी वासना भरी नजर से कभी नहीं देखा था. मेरी नजरें उनके 36-32-34 के फीगर को घूर घूर कर नाप ले रही थीं.
उनकी मैक्सी को मैंने थोड़ा ऊपर किया तो उनकी गोरी गोरी टांगें मेरे सामने निकल आईं. उनकी टांगों पर एक भी बाल नहीं था. मैंने अपने तेल वाले हाथ लगाये तो तेल भी शहद सा चमकने लगा.
मगर आंटी के हाव भाव में अभी कामुकता कहीं दूर दूर तक भी नहीं थी. मेरे लिये अब ये एक चेलेंज बन गया था क्योंकि मैंने आंटी को गर्म करने की ठान ली थी. मेरा आकर्षण आंटी के बदन की ओर बढ़ता ही जा रहा था.
मैंने पूछा- आँटी, कैसा लग रहा है?
आँटी- बहुत अच्छा लग रहा है सैंडी. मैं तो सलाह दूंगी कि तू अपना काम छोड़ कर एक मसाज सेंटर खोल ले.
मैं- अरे आप भी क्या बोल रही हो आंटी … मैं सबको थोड़ी ही करता हूँ? मैं तो बस आपके आराम के लिए ये सब कर रहा हूं. अब आप उल्टा लेट जाओ. मैं घुटने दबा देता हूँ.
आंटी अब उल्टी लेट गयी और मैंने मैक्सी घुटने से ऊपर उठा दी. क्या नज़ारा था मेरी आंखों के सामने, मैं उनके घुटनों की बनावट से अंदाजा लगा सकता था कि आगे की यात्रा अगर मंगलमयी रही तो जन्नत मिलने वाली है.
दोस्त की मम्मी पूछने लगी- अरे तेरी बीवी कहां है? वो तेरे साथ में नहीं रहती क्या?
ये पूछ कर आंटी ने जैसे मेरी दुखती हुई रग पर हाथ रख दिया. मैं कुछ देर तक तो मानो चुप ही रहा. कुछ नहीं बोला.
चूंकि दारू का नशा था और उस नशे में आदमी ज्यादा भावुक और रोमांटिक हो जाता है.
तलाक की बात सोच कर मेरी सारी पुरानी यादें ताजा हो गयीं. मेरी आंखें भर आईं और एक आंसू टप करके आंटी की टांग पर गिर गया. उन्होंने पलट कर देखा तो मैं रो रहा था.
बिना कुछ बोले मैं वहां से उठा और किचन में चला गया. फ्रिज खोला और जो बीयर की दूसरी बोतल थी वो भी खोल कर पीने लगा. ये लास्ट बोतल बची हुई थी. बीयर पीकर मैं दोबारा से आंटी के पास गया.
आंटी बैठी हुई थी.
आंटी- क्या हुआ सैंडी?
अभी भी मेरा गला भर भर आ रहा था. मैं कुछ बोलना चाह रहा था मगर आवाज की जगह आँसू निकल आते थे. मैंने कुछ नहीं सोचा और मैं सीधा आंटी से जाकर लिपट गया.
उन्होंने मुझे अपनी बांहों में ले लिया और मुझे संभाला. मेरे सीने पर आंटी के सीने का स्पर्श हो रहा था. वो मेरे बालों को सहला रही थी. कुछ देर तक इन पलों का आनंद लेने के बाद मैंने खुद को आंटी से अलग किया.
मैं- आंटी, आप इन बातों को छोड़ो. मैं अब अकेला हूं और ऐसे ही खुश हूं.
ये बोलते हुए मैंने आंटी को फिर से लेटने को कहा.
मैं फिर से उनकी मालिश करने लगा. मैंने म्यूजिक ऑन कर दिया. मैंने अपने फोन में बांसुरी की धुन लगा दी और आंटी के पैरों की मालिश करने लग गया.
वो भी थोड़ा सा मना करती रहीं पर कुछ नहीं बोलीं।
कुछ देर बाद चुप्पी मैंने तोड़ी. उनसे पूछा- वैसे हुआ क्या है आपको?
दोस्त की मम्मी- कुछ नहीं बस कमजोरी है और पूरा शरीर टूट रहा है. कल चक्कर भी आ गए थे. चार दिनों से कामवाली भी नहीं आ रही है. गलती से ये बात मैंने पिंटू (वो प्यार से प्रदीप को पिंटू कहती थी) की बीवी को बता दी. तब उसने तेरे पास फोन करके तुझे भी परेशान कर दिया.
मैं- कितना लकी है वो और आप भी कि आपको इतनी अच्छी ऐन्ड्रा भाभी मिलीं हैं. विदेशी हैं मगर फिर भी ख्याल पूरा रखती हैं. वो बोल रही थी कि आपको बुला रही हैं मगर आप जा नहीं रहे हो?
बात करते करते मेरे हाथ उनके पैरों को दबा रहे थे. धीरे धीरे मुझे उनके पैरों की मखमली छुअन का अहसास हो रहा था.
आंटी- बस अगले महीने सोच रहीं हूँ मगर मैं इस बीमार शरीर के साथ नहीं जाना चाहती। थोड़ा घुटनों के पास दबा दे बेटा.
ये बोलते हुए उन्होंने करवट ले ली.
आंटी- तेरे हाथों में कुछ बात तो है सैंडी.
मैं- अरे नहीं आंटी, मैं कोई पेशेवर मसाज वाला नहीं हूं. मैं तो बस आपको आराम देने की कोशिश कर रहा हूं.
मानो आंटी कहना चाह रही हो कि उन्हें काफी रिलेक्स फील हो रहा है.
मैं बोला- आंटी अगर बात सिर्फ़ कमज़ोरी और शरीर टूटने की है तो आप मुझ पर छोड़ दो. आपके घर में सरसों का तेल है क्या?
आंटी- हाँ है, पर क्यों?
जैसे आंटी जान गयी थी कि उनको पता है कि मैं उनकी मालिश करने वाला हूं. फिर भी वो पूछ रही थीं.
फिर वो बोली- तेल चाहिए तो किचन में रखा हुआ है. जाकर उठा ले आ.
मैं- ओके, मैं देख लूंगा. आप ब्लॉवर ऑन करो. (जनवरी की ठंड का वक्त था) किस्मत अच्छी थी कि किचन में तेल तो मिला ही, साथ में फ्रिज में बीयर भी थी. क्या फ़र्क पड़ता है कि आंटी की थी या पिछले महीने जब प्रदीप और भाभी आए थे तो उनकी थी.
बस मेरे सामने थी तो मैंने पी ली और तेल गुनगुना करके आंटी के पास पहुंचा. पैरों के पास जाकर उनके तलवों में मालिश शुरू की. बहुत मुलायम तलवे थे उनके.
आंटी को मैंने आज से पहले ऐसी वासना भरी नजर से कभी नहीं देखा था. मेरी नजरें उनके 36-32-34 के फीगर को घूर घूर कर नाप ले रही थीं.
उनकी मैक्सी को मैंने थोड़ा ऊपर किया तो उनकी गोरी गोरी टांगें मेरे सामने निकल आईं. उनकी टांगों पर एक भी बाल नहीं था. मैंने अपने तेल वाले हाथ लगाये तो तेल भी शहद सा चमकने लगा.
मगर आंटी के हाव भाव में अभी कामुकता कहीं दूर दूर तक भी नहीं थी. मेरे लिये अब ये एक चेलेंज बन गया था क्योंकि मैंने आंटी को गर्म करने की ठान ली थी. मेरा आकर्षण आंटी के बदन की ओर बढ़ता ही जा रहा था.
मैंने पूछा- आँटी, कैसा लग रहा है?
आँटी- बहुत अच्छा लग रहा है सैंडी. मैं तो सलाह दूंगी कि तू अपना काम छोड़ कर एक मसाज सेंटर खोल ले.
मैं- अरे आप भी क्या बोल रही हो आंटी … मैं सबको थोड़ी ही करता हूँ? मैं तो बस आपके आराम के लिए ये सब कर रहा हूं. अब आप उल्टा लेट जाओ. मैं घुटने दबा देता हूँ.
आंटी अब उल्टी लेट गयी और मैंने मैक्सी घुटने से ऊपर उठा दी. क्या नज़ारा था मेरी आंखों के सामने, मैं उनके घुटनों की बनावट से अंदाजा लगा सकता था कि आगे की यात्रा अगर मंगलमयी रही तो जन्नत मिलने वाली है.
दोस्त की मम्मी पूछने लगी- अरे तेरी बीवी कहां है? वो तेरे साथ में नहीं रहती क्या?
ये पूछ कर आंटी ने जैसे मेरी दुखती हुई रग पर हाथ रख दिया. मैं कुछ देर तक तो मानो चुप ही रहा. कुछ नहीं बोला.
चूंकि दारू का नशा था और उस नशे में आदमी ज्यादा भावुक और रोमांटिक हो जाता है.
तलाक की बात सोच कर मेरी सारी पुरानी यादें ताजा हो गयीं. मेरी आंखें भर आईं और एक आंसू टप करके आंटी की टांग पर गिर गया. उन्होंने पलट कर देखा तो मैं रो रहा था.
बिना कुछ बोले मैं वहां से उठा और किचन में चला गया. फ्रिज खोला और जो बीयर की दूसरी बोतल थी वो भी खोल कर पीने लगा. ये लास्ट बोतल बची हुई थी. बीयर पीकर मैं दोबारा से आंटी के पास गया.
आंटी बैठी हुई थी.
आंटी- क्या हुआ सैंडी?
अभी भी मेरा गला भर भर आ रहा था. मैं कुछ बोलना चाह रहा था मगर आवाज की जगह आँसू निकल आते थे. मैंने कुछ नहीं सोचा और मैं सीधा आंटी से जाकर लिपट गया.
उन्होंने मुझे अपनी बांहों में ले लिया और मुझे संभाला. मेरे सीने पर आंटी के सीने का स्पर्श हो रहा था. वो मेरे बालों को सहला रही थी. कुछ देर तक इन पलों का आनंद लेने के बाद मैंने खुद को आंटी से अलग किया.
मैं- आंटी, आप इन बातों को छोड़ो. मैं अब अकेला हूं और ऐसे ही खुश हूं.
ये बोलते हुए मैंने आंटी को फिर से लेटने को कहा.
मैं फिर से उनकी मालिश करने लगा. मैंने म्यूजिक ऑन कर दिया. मैंने अपने फोन में बांसुरी की धुन लगा दी और आंटी के पैरों की मालिश करने लग गया.
❤1👍1
Forwarded from Sexy girl navya
मेरे हाथ अब धीरे धीरे ऊपर की तरफ बढ़ते जा रहे थे. हर चक्कर के साथ मेरे हाथ थोड़ा और ऊपर तक चले जाते थे. फिर आंटी अचानक सीधी लेट गयी. मगर मैंने मसाज को जारी रखा.
आंटी सेक्स के लिए तैयार थी.
मैंने उनकी मैक्सी को और ऊपर कर दिया. उन्होंने कोई विरोध नहीं किया. मगर हैरानी इस बात की थी उनकी आंखें खुली हुई थीं. उनमें न तो हवस थी और न ही शर्म. बस प्यार दिखाई दे रहा था.
आंटी की जांघों को मैं दबा दबा कर मसाज कर रहा था. मुझे आंटी की पैंटी साफ दिख रही थी. मेरे हाथ धीरे धीरे उनकी पैंटी की ओर बढ़ रहे थे. एक समय ऐसा आया कि मेरी उंगलियां आंटी की पैंटी छूकर आने लगीं.
मेरा लौड़ा तन गया. आंटी की चूत के बारे में सोच कर ही लंड फनफना गया था.
बहुत कोशिश की रोकने की लेकिन नहीं रुका गया. तो आखिर में मैंने आंटी की पैंटी पर हाथ ही रख दिया. आंटी की चूत मुझे मेरे हाथ के नीचे टच हो गयी.
आंटी ने अब भी कुछ खास प्रतिक्रिया नहीं दी.
मैंने आंटी की चूत को पैंटी के ऊपर से सहला दिया. आंटी ने धीरे से अपनी आंखें बंद कर लीं. ये मेरे लिए हरी झंडी थी कि दोस्त की मम्मी की चुदाई की सहमति मिल गयी है. आंटी सेक्स के लिए तैयार थी.
मैंने नीचे झुक कर आंटी की पैंटी पर ही मुंह रख दिया और आंटी की चूत को पैंटी के ऊपर से ही चाटने लगा. सब कुछ चुपचाप हो रहा था. दो मिनट में ही आंटी की पैंटी से चूत रस की खुशबू आने लगी थी. ऊपर से तो पूरी पैंटी मेरे थूक में गीली हो गयी थी और नीचे उनकी चूत के रस में।
उसके बाद मैंने पैंटी को भी निकाल दिया. दोस्त की मम्मी की चूत नंगी हो गयी. उनकी चूत पर छोटे छोटे बाल थे मानो 4-5 दिन पहले ही ट्रिम किये गये हों.
मैंने आंटी की चूत को चाटना शुरू कर दिया. उन्होंने अब धीरे से आहें लेना शुरू कर दिया. उनकी चूचियां ऊपर नीचे होने लगी थीं और सांसें तेज हो गयी थीं.
तीन-चार मिनट तक मैं आंटी की नंगी चूत को चाटता रहा. उसके बाद मैंने आंटी को उठने के लिए बोला और खुद नीचे लेट गया. मैंने आंटी को अपने होंठों पर आने के लिये कहा. आंटी मेरी छाती के दोनों ओर पैर करके अपनी मैक्सी उठा कर मेरे होंठों के पास अपनी चूत को ले आई.
मैंने आगे बढ़ कर आंटी की चूत में मुंह दे दिया और उसकी चूत को जोर जोर से चूसने और चाटने लगा. मेरे होंठों पर चूत को लगाये हुए ही आंटी ने अपनी मैक्सी और ब्रा भी उतार दी.
आंटी के चेहरे को देख कर लग रहा था कि अब वो एक पल के लिए भी मेरे मुंह से अपनी चूत को अलग नहीं करना चाहती है. अब वो खुद ही मेरे हाथों को अपनी छाती पर ले गयी.
मुझे उम्मीद नहीं थी कि 52 साल की उम्र में भी आंटी के जिस्म में इतना जोश होगा. मैंने उनको सीधी लेटने को बोला. वो लेट गयी. मैंने उनकी चूचियों को दबाना शुरू किया और नाभि को भी चाटने लगा.
धीरे धीरे मैं अपने मुँह को उनकी छाती पर और हाथ को नाभि पर ले गया. मेरा लंड तन कर लोहा हो चुका था. उनके दूध चूसकर मैं उन्हें और गर्म कर रहा था.
अब मैं और नहीं रुक सकता था. अब मैंने अपने कपड़े भी उतार फेंके. जब अंडरवियर उतार रहा था तो आंटी मेरे लंड को हवस भरी नजर से देख रही थी.
मैंने अब फिर से आंटी की चूत को चूसना शुरू कर दिया. जैसे ही मैंने दूध चूसते हुए एक उंगली उनकी चूत में डाली तो वो चिल्ला पड़ी. मैंने उनके मुँह पर हाथ रखा और दोनों टांगें चौड़ी करके लंड को उनकी चूत पर रगड़ना चालू किया.
आखिरकार आंटी सिसकारते हुए बोली- आह्ह सैंडी, स्स्स… अब अंदर डाल.
मगर मैं बिना कॉन्डम के दोस्त की मम्मी की चुदाई नहीं कर सकता था. मैं कॉन्डम लेने गया तो आंटी सिसकारते हुए चूत में लंड डालने के मिन्नत कर रही थी. जल्दी से मैं अपने बैग से कॉन्डम लेकर आया.
वापस आकर कुछ ही पलों में मैंने अपने लंड पर कॉन्डम चढ़ाया और दोबारा आंटी को चूसना शुरू कर दिया.
आंटी फ़िर बोलने लगी- सैंडी प्लीज़ … अब तो डाल अंदर.
मैंने भी देर नहीं की और एक झटके में लंड को अंदर डाल दिया.
आंटी की चूत में लंड देकर मैं आंटी को चोदने लगा. आंटी ने मेरे हाथ अपने चूचों पर रखवा लिये. उनका इशारा था कि मैं उनकी चूचियों को दबा दबा कर उनकी चूत मारूं.
मैंने आंटी के बूब्स को दबाते हुए उनकी चूत में लंड पेलना शुरू कर दिया. आंटी के चेहरे पर चुदाई के आनंद की मदहोशी बिखरने लगी. आंटी जैसे आत्मा तक तृप्त हो रही थी.
मुझे भी बहुत दिनों के बाद चूत मिली थी. चुदी हुई ही सही लेकिन चूत तो चूत ही होती है.
ऊपर से दारू का नशा भी था इसलिए आंटी की चूत चोदने में पूरा मजा आ रहा था. मैं दोस्त की मम्मी की चुदाई करता रहा और आंटी बीच बीच मुझे अपने ऊपर खींच कर मेरे होंठों को चूसने लगती.
पता नहीं कितनी देर तक मैं आंटी की चुदाई करता रहा. नशे में टाइम का ज्यादा कुछ होश नहीं था. मगर मैं एक गर्लफ्रेंड की तरह आंटी को चोदता रहा.
आंटी सेक्स के लिए तैयार थी.
मैंने उनकी मैक्सी को और ऊपर कर दिया. उन्होंने कोई विरोध नहीं किया. मगर हैरानी इस बात की थी उनकी आंखें खुली हुई थीं. उनमें न तो हवस थी और न ही शर्म. बस प्यार दिखाई दे रहा था.
आंटी की जांघों को मैं दबा दबा कर मसाज कर रहा था. मुझे आंटी की पैंटी साफ दिख रही थी. मेरे हाथ धीरे धीरे उनकी पैंटी की ओर बढ़ रहे थे. एक समय ऐसा आया कि मेरी उंगलियां आंटी की पैंटी छूकर आने लगीं.
मेरा लौड़ा तन गया. आंटी की चूत के बारे में सोच कर ही लंड फनफना गया था.
बहुत कोशिश की रोकने की लेकिन नहीं रुका गया. तो आखिर में मैंने आंटी की पैंटी पर हाथ ही रख दिया. आंटी की चूत मुझे मेरे हाथ के नीचे टच हो गयी.
आंटी ने अब भी कुछ खास प्रतिक्रिया नहीं दी.
मैंने आंटी की चूत को पैंटी के ऊपर से सहला दिया. आंटी ने धीरे से अपनी आंखें बंद कर लीं. ये मेरे लिए हरी झंडी थी कि दोस्त की मम्मी की चुदाई की सहमति मिल गयी है. आंटी सेक्स के लिए तैयार थी.
मैंने नीचे झुक कर आंटी की पैंटी पर ही मुंह रख दिया और आंटी की चूत को पैंटी के ऊपर से ही चाटने लगा. सब कुछ चुपचाप हो रहा था. दो मिनट में ही आंटी की पैंटी से चूत रस की खुशबू आने लगी थी. ऊपर से तो पूरी पैंटी मेरे थूक में गीली हो गयी थी और नीचे उनकी चूत के रस में।
उसके बाद मैंने पैंटी को भी निकाल दिया. दोस्त की मम्मी की चूत नंगी हो गयी. उनकी चूत पर छोटे छोटे बाल थे मानो 4-5 दिन पहले ही ट्रिम किये गये हों.
मैंने आंटी की चूत को चाटना शुरू कर दिया. उन्होंने अब धीरे से आहें लेना शुरू कर दिया. उनकी चूचियां ऊपर नीचे होने लगी थीं और सांसें तेज हो गयी थीं.
तीन-चार मिनट तक मैं आंटी की नंगी चूत को चाटता रहा. उसके बाद मैंने आंटी को उठने के लिए बोला और खुद नीचे लेट गया. मैंने आंटी को अपने होंठों पर आने के लिये कहा. आंटी मेरी छाती के दोनों ओर पैर करके अपनी मैक्सी उठा कर मेरे होंठों के पास अपनी चूत को ले आई.
मैंने आगे बढ़ कर आंटी की चूत में मुंह दे दिया और उसकी चूत को जोर जोर से चूसने और चाटने लगा. मेरे होंठों पर चूत को लगाये हुए ही आंटी ने अपनी मैक्सी और ब्रा भी उतार दी.
आंटी के चेहरे को देख कर लग रहा था कि अब वो एक पल के लिए भी मेरे मुंह से अपनी चूत को अलग नहीं करना चाहती है. अब वो खुद ही मेरे हाथों को अपनी छाती पर ले गयी.
मुझे उम्मीद नहीं थी कि 52 साल की उम्र में भी आंटी के जिस्म में इतना जोश होगा. मैंने उनको सीधी लेटने को बोला. वो लेट गयी. मैंने उनकी चूचियों को दबाना शुरू किया और नाभि को भी चाटने लगा.
धीरे धीरे मैं अपने मुँह को उनकी छाती पर और हाथ को नाभि पर ले गया. मेरा लंड तन कर लोहा हो चुका था. उनके दूध चूसकर मैं उन्हें और गर्म कर रहा था.
अब मैं और नहीं रुक सकता था. अब मैंने अपने कपड़े भी उतार फेंके. जब अंडरवियर उतार रहा था तो आंटी मेरे लंड को हवस भरी नजर से देख रही थी.
मैंने अब फिर से आंटी की चूत को चूसना शुरू कर दिया. जैसे ही मैंने दूध चूसते हुए एक उंगली उनकी चूत में डाली तो वो चिल्ला पड़ी. मैंने उनके मुँह पर हाथ रखा और दोनों टांगें चौड़ी करके लंड को उनकी चूत पर रगड़ना चालू किया.
आखिरकार आंटी सिसकारते हुए बोली- आह्ह सैंडी, स्स्स… अब अंदर डाल.
मगर मैं बिना कॉन्डम के दोस्त की मम्मी की चुदाई नहीं कर सकता था. मैं कॉन्डम लेने गया तो आंटी सिसकारते हुए चूत में लंड डालने के मिन्नत कर रही थी. जल्दी से मैं अपने बैग से कॉन्डम लेकर आया.
वापस आकर कुछ ही पलों में मैंने अपने लंड पर कॉन्डम चढ़ाया और दोबारा आंटी को चूसना शुरू कर दिया.
आंटी फ़िर बोलने लगी- सैंडी प्लीज़ … अब तो डाल अंदर.
मैंने भी देर नहीं की और एक झटके में लंड को अंदर डाल दिया.
आंटी की चूत में लंड देकर मैं आंटी को चोदने लगा. आंटी ने मेरे हाथ अपने चूचों पर रखवा लिये. उनका इशारा था कि मैं उनकी चूचियों को दबा दबा कर उनकी चूत मारूं.
मैंने आंटी के बूब्स को दबाते हुए उनकी चूत में लंड पेलना शुरू कर दिया. आंटी के चेहरे पर चुदाई के आनंद की मदहोशी बिखरने लगी. आंटी जैसे आत्मा तक तृप्त हो रही थी.
मुझे भी बहुत दिनों के बाद चूत मिली थी. चुदी हुई ही सही लेकिन चूत तो चूत ही होती है.
ऊपर से दारू का नशा भी था इसलिए आंटी की चूत चोदने में पूरा मजा आ रहा था. मैं दोस्त की मम्मी की चुदाई करता रहा और आंटी बीच बीच मुझे अपने ऊपर खींच कर मेरे होंठों को चूसने लगती.
पता नहीं कितनी देर तक मैं आंटी की चुदाई करता रहा. नशे में टाइम का ज्यादा कुछ होश नहीं था. मगर मैं एक गर्लफ्रेंड की तरह आंटी को चोदता रहा.
❤2👍2
Forwarded from Sexy girl navya
आंटी को चोदते चोदते मैं स्खलन के करीब पहुंच गया. मैंने तेज तेज धक्के लगाते हुए आंटी की चूत में घुसे कॉन्डम चढ़े लंड से तेज तेज वीर्य की पिचकारी मारी जिसने मेरे कॉन्डम को भर दिया.
उसके बाद मैं आंटी के ऊपर गिर गया. मगर फिर लंड के सिकुड़ने से पहले ही मैंने लंड को चूत से बाहर खींचा और कॉन्डम निकाल कर उसको गांठ मारकर कूड़ेदान में फेंक आया.
वापस आया तो मेरा झूलता हुआ लंड देख कर आंटी मुस्करा रही थी. मैं भी नशे में था इसलिए मैंने ज्यादा कुछ रिएक्ट नहीं किया और हल्का सा मुस्करा कर बेड पर आकर गिर गया.
आंटी की चूचियों पर अपना सिर रख कर मैं सो गया. मुझे नींद लग गयी और फिर शाम को ही आंख खुली. आंटी की तबियत ठीक लग रही थी. उन्होंने मुझे घर जाने के लिए कहा. मगर मैं नहीं गया क्योंकि प्रदीप ने मुझे दो दिन तक वहीं रहने के लिए बोला था.
दो दिन तक मैं आंटी के घर में ही रहा और इस दौरान चार बार दोस्त की मम्मी की चुदाई मुझसे हुई. आंटी से मेरी अच्छी दोस्ती हो गयी. प्रदीप को इस बारे में कुछ नहीं पता था मगर मुझे मेरे अकेलपन की साथ प्रदीप की मॉम के रूप में मिल गयी थी.
उसके बाद मैं आंटी के ऊपर गिर गया. मगर फिर लंड के सिकुड़ने से पहले ही मैंने लंड को चूत से बाहर खींचा और कॉन्डम निकाल कर उसको गांठ मारकर कूड़ेदान में फेंक आया.
वापस आया तो मेरा झूलता हुआ लंड देख कर आंटी मुस्करा रही थी. मैं भी नशे में था इसलिए मैंने ज्यादा कुछ रिएक्ट नहीं किया और हल्का सा मुस्करा कर बेड पर आकर गिर गया.
आंटी की चूचियों पर अपना सिर रख कर मैं सो गया. मुझे नींद लग गयी और फिर शाम को ही आंख खुली. आंटी की तबियत ठीक लग रही थी. उन्होंने मुझे घर जाने के लिए कहा. मगर मैं नहीं गया क्योंकि प्रदीप ने मुझे दो दिन तक वहीं रहने के लिए बोला था.
दो दिन तक मैं आंटी के घर में ही रहा और इस दौरान चार बार दोस्त की मम्मी की चुदाई मुझसे हुई. आंटी से मेरी अच्छी दोस्ती हो गयी. प्रदीप को इस बारे में कुछ नहीं पता था मगर मुझे मेरे अकेलपन की साथ प्रदीप की मॉम के रूप में मिल गयी थी.
Forwarded from Mastram ki anokhi kahaniya
मेरा नाम अनामिका है और मेरे भैया का नाम राजवीर है। भैया असम में पढाई करते हैं और मैं लखनऊ में पढ़ती हूँ। वो दीपावली में घर आये था। माँ और पापा दोनों भी अध्यापक है। दिवाली के दिन पूजा पाठ कर के हम दोनों भाई बहन पहले घर के बाहर दीपक जलाये लड़ियाँ लगाई पूरा घर जगमग कर रहा था।
माँ खाना बना रही थी और पापा मामा जी के साथ बैठ कर बात कर रहे थे। माँ बोली दोनों जाओ छत पर भी दीपक जला दो एक भी कोना ऐसा नहीं रहने चाहिए जहाँ प्रकाश नहीं हो। उसके बाद हम लोग खाना खाएंगे। तभी चाचा के लड़की और उनकी तीनो बेटियां भी आ गई।
और कहने लगी चलो बाहर पटाखे चलाते हैं।
तो हम दोनों बोले अभी पहले छत पर लाइट जला लेते हैं उसके बाद हम लोग पटाखे चलाएंगे। तो वो लोग बोले ठीक है तुम दोनों बाद में आ जाना और हम दोनों छत पर चले गए। माँ बोली छत पर जा रहे हो दरवाजा लगा देना बिल्ली आ जाती हैं घर में तो हम दोनों छत पर जाकर छत का दरवाजा लगा दिए।
यानी की अब निचे से कोई नहीं आ सकता था छत पर। उस समय हम दोनों के मन में कुछ भी नहीं था। दिये में तेल डालते डालते मैं बोली भइया आपको असम में मेरी याद नहीं आती है इस बार आप रक्षाबंधन में भी नहीं आये। और आज भी आपने कोई गिफ्ट नहीं दिया। ऐसा लगता है आप मुझे वहां जाकर भूल रहे हो।
वो बोली नहीं पगली ऐसा हो सकता है क्या तू तो मेरी प्यारी बहन हो मैं कैसे भूल सकता तुमको। हां आज मैं गिफ्ट नहीं ला पाया पर भाईदूज के दिन तुमको तुम्हारे पसंद का जीन्स टॉप ख़रीदवाऊँगा ये मेरा वादा है। रही बात आज दिवाली की तो मैं तुम्हे गले लगा सकता हूँ अगर तुम्हारी इजाजत हो तो।
तो मैं बोली प्यार में और वो भी भाई बहन की बिच में इजाजत की क्या जरुरत। मैं खड़ी हो गई और वो भी खड़े हो गए। वो मुझे गले लगा लिए और मेरी पीठ को सहलाने लगे. फिर उन्होंने मेरे गाल पर किस कर लिए। पता नहीं दोस्तों मुझे क्या हुआ आज तक समझ नहीं आया मैं भी उनके गाल पर किश करने लगी और पीठ सहलाने लगी।
वो भी मेरी पीठ सहला रहे थे और मैं भी पीठ सहला रही थी और गाल पर किश कर रही थी। अचानक वो मेरे होठ पर किश करने लगी और मैं अपने आप को रोक नहीं सकी और साथ देने लगी। दोनों की साँसे तेज चलने लगी। एक दूसरे को बाहो में डाले हुए थे। बाहर पटाखे की शोर थी। “
वो बोले अनामिका आज लग रहा है मेरे ज़िंदगी की सबसे अच्छी दिवाली है। मैं बोली हां मेरे लिए भी दोनों के होठ बात करते काँप रहे थे। मेरे शरीर में करंट सी दौड़ गई और मैं पलट गई और अलग खड़ी हो गई। वो तुरंत ही मुझे पीछे से पकड़ लिए। इस बार और जोर से मेरी चूतड़ की उभर उनके लौड़े में सट रही थी।
गोल गोल गांड में अपना लौड़ा रगड़ने लगे थे। और फिर पीछे से हाथ आगे कर के वो मेरी दोनों बूब्स को पकड़ लिए। मेरी चूचियां 34 साइज की है और गोल गोल और तनी हुई है। आप क्रिकेट का बाल समझ सकते हैं। वो धीरे धीरे दबाने लगी। और जैसे कुत्ते कुतिया को चोदते हैं तो कैसे करता है वैसा ही वो पीछे से करने लगा.
मैं पागल होने लगी पुरे शरीर में आग लग रही थी। गला सूखने लगा था साँसे तेज चलने लगी थी। मैं रोक नहीं पा रही थी ना तो अपने आप को ना तो भैया को। जैसे दो नदी जब एक जगह पर मिलती हैं और वहां जाकर एक हो जाती है वैसा ही हुआ था दोनों एक जगह एक हो गए थे।
जो मैं चाह रही थी वही भैया चाह रहे थे। एक नेगेटिव और एक पॉजिटिव एनर्जी एक दूसरे से मिलने को आतुर थी। तभी भैया बोला अनामिका परमिशन दो। तो मैं बोली परमिशन है। और वो तुरंत ही छत पर एक दिवार है जहा कोई नहीं देख सकता। वही चले गए और वो मुझे घोड़ी बना दिए।
माँ खाना बना रही थी और पापा मामा जी के साथ बैठ कर बात कर रहे थे। माँ बोली दोनों जाओ छत पर भी दीपक जला दो एक भी कोना ऐसा नहीं रहने चाहिए जहाँ प्रकाश नहीं हो। उसके बाद हम लोग खाना खाएंगे। तभी चाचा के लड़की और उनकी तीनो बेटियां भी आ गई।
और कहने लगी चलो बाहर पटाखे चलाते हैं।
तो हम दोनों बोले अभी पहले छत पर लाइट जला लेते हैं उसके बाद हम लोग पटाखे चलाएंगे। तो वो लोग बोले ठीक है तुम दोनों बाद में आ जाना और हम दोनों छत पर चले गए। माँ बोली छत पर जा रहे हो दरवाजा लगा देना बिल्ली आ जाती हैं घर में तो हम दोनों छत पर जाकर छत का दरवाजा लगा दिए।
यानी की अब निचे से कोई नहीं आ सकता था छत पर। उस समय हम दोनों के मन में कुछ भी नहीं था। दिये में तेल डालते डालते मैं बोली भइया आपको असम में मेरी याद नहीं आती है इस बार आप रक्षाबंधन में भी नहीं आये। और आज भी आपने कोई गिफ्ट नहीं दिया। ऐसा लगता है आप मुझे वहां जाकर भूल रहे हो।
वो बोली नहीं पगली ऐसा हो सकता है क्या तू तो मेरी प्यारी बहन हो मैं कैसे भूल सकता तुमको। हां आज मैं गिफ्ट नहीं ला पाया पर भाईदूज के दिन तुमको तुम्हारे पसंद का जीन्स टॉप ख़रीदवाऊँगा ये मेरा वादा है। रही बात आज दिवाली की तो मैं तुम्हे गले लगा सकता हूँ अगर तुम्हारी इजाजत हो तो।
तो मैं बोली प्यार में और वो भी भाई बहन की बिच में इजाजत की क्या जरुरत। मैं खड़ी हो गई और वो भी खड़े हो गए। वो मुझे गले लगा लिए और मेरी पीठ को सहलाने लगे. फिर उन्होंने मेरे गाल पर किस कर लिए। पता नहीं दोस्तों मुझे क्या हुआ आज तक समझ नहीं आया मैं भी उनके गाल पर किश करने लगी और पीठ सहलाने लगी।
वो भी मेरी पीठ सहला रहे थे और मैं भी पीठ सहला रही थी और गाल पर किश कर रही थी। अचानक वो मेरे होठ पर किश करने लगी और मैं अपने आप को रोक नहीं सकी और साथ देने लगी। दोनों की साँसे तेज चलने लगी। एक दूसरे को बाहो में डाले हुए थे। बाहर पटाखे की शोर थी। “
वो बोले अनामिका आज लग रहा है मेरे ज़िंदगी की सबसे अच्छी दिवाली है। मैं बोली हां मेरे लिए भी दोनों के होठ बात करते काँप रहे थे। मेरे शरीर में करंट सी दौड़ गई और मैं पलट गई और अलग खड़ी हो गई। वो तुरंत ही मुझे पीछे से पकड़ लिए। इस बार और जोर से मेरी चूतड़ की उभर उनके लौड़े में सट रही थी।
गोल गोल गांड में अपना लौड़ा रगड़ने लगे थे। और फिर पीछे से हाथ आगे कर के वो मेरी दोनों बूब्स को पकड़ लिए। मेरी चूचियां 34 साइज की है और गोल गोल और तनी हुई है। आप क्रिकेट का बाल समझ सकते हैं। वो धीरे धीरे दबाने लगी। और जैसे कुत्ते कुतिया को चोदते हैं तो कैसे करता है वैसा ही वो पीछे से करने लगा.
मैं पागल होने लगी पुरे शरीर में आग लग रही थी। गला सूखने लगा था साँसे तेज चलने लगी थी। मैं रोक नहीं पा रही थी ना तो अपने आप को ना तो भैया को। जैसे दो नदी जब एक जगह पर मिलती हैं और वहां जाकर एक हो जाती है वैसा ही हुआ था दोनों एक जगह एक हो गए थे।
जो मैं चाह रही थी वही भैया चाह रहे थे। एक नेगेटिव और एक पॉजिटिव एनर्जी एक दूसरे से मिलने को आतुर थी। तभी भैया बोला अनामिका परमिशन दो। तो मैं बोली परमिशन है। और वो तुरंत ही छत पर एक दिवार है जहा कोई नहीं देख सकता। वही चले गए और वो मुझे घोड़ी बना दिए।
❤2
Forwarded from Mastram ki anokhi kahaniya
मेरी पेंट निचे कर दी पेंटी भी निचे कर दिए। और पीछे से ही अपना लौड़ा घुसाने लगे मेरी चूत काफी टाइट थी और अँधेरा था कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।
कई बार कोशिश करने के बाद भी मेरी चूत में लंड नहीं घुसा वो बार बार थूक लगा कर लौड़ा सेट कर रहे थे पर हरेक बार लौड़ा मूड जाता था और वो फिर से कोशिश करते थे। “
शायद दोनों ही अनाड़ी थे। मैं खड़ी हो गई और अपना निचे का पेंट अपने पैरों से बाहर कर दिया। और निचे लेट गई और दोनों पैरों को ऊपर कर के फैला दी। वो तुरंत ही घुटने पर बैठ गए।
उसके बाद उन्होंने मोबाइल का जलाकर मेरी चूत को देखा चुत गीली थी उन्होंने मोबाइल की लाइट में ही अपने लौड़े के चुत पर सेट किया और जोर से धक्का दिया मैं कराह उठी।
भैया का लौड़ा मेरी चूत में करीब ४ इंच घुस गया था पर दर्द बहुत हो रहा था। मैंने उनको रोका बोला बहुत दर्द कर रहा है। दोस्तों उन्होंने मेरी चूचियों को सहलाया और मेरे होठ पर किश करने लगी और और लौड़ा उतना हो घुसा था बस वो मेरी चूचियों को दबा रहे थे और और होठ चूस रहे थे।
वो बोले अब दर्द तो नहीं कर रहा है। मैं बोली हां अभी थोड़ा थोड़ा। और उन्होंने थोड़ा निकाला करीब दो इंच उसके बाद उन्होंने फिर से डाला अब उनका लौड़ा ५ इंच के करीब अंदर चला गया मुझे फिर से दर्द हुया। वो फिर रुक गए वो चूमने लगे होठों को और चूचियों को मसलने लगे।
मेरे मुँह से दर्द भरी सिसकारियां निकल रही थी अच्छा भी लग रहा था दर्द भी हो रहा था। फिर उन्होंने लौड़ा थोड़ा बाहर किया और फिर से जोर दिया अब उनका लौड़ा पूरी तरह मेरी चूत में समा गया अब मुझे अच्छा लगने लगा हौले हौले से गांड हिलाने लगी फिर गोल गोल घुमाने लगी।
उसके बाद उन्होंने भी अंदर बाहर करने लगे। अब दोनों ही आह आह कर रहे थे होठ मेरे सुख रहे थे। पर वासना की प्यास के आगे अपने होठ को जीभ से चाट लेती और गांड उठा उठा कर धक्के दे रही थी।
दोस्तों वो अब मुझे जोर जोर से पेलने लगे। हम दोनों ही एक दूसरे को मदद कर रहे थे किश कर रहे थे। करीब वो मुझे 15 मिनट तक अंधरे में चोदते रहे और अचानक वो जोर से अअअअअ आए आए की आवाज निकली और पूरा वीर्य मेरे चूत में गिरा दिया और शांत हो गए।
हम दोनों तुरंत ही उठा गए अपने कपडे पहने और उन्होने मोबाइल की लाइट जलाकर देखा वो निचे फर्श पर वीर्य भी गिरा था जो शायद मेरी चूत से निकला था और उसके साथ खून भी था शायद मेरी सील टूटी थी इस वजह से खून थे।
उन्होंने मुझे गले लगाया और फिर हैप्पी दिवाली बोला और कहा आज की रात हम दोनों लिए सबसे हसीन रात थी। हमेशा ना भूलने वाली रात थी। और दोनों एक दूसरे को दिवाली की बधाई दिए और फिर दीपक जलाने लगे। dirtymindsclubstory@gmail.com
कई बार कोशिश करने के बाद भी मेरी चूत में लंड नहीं घुसा वो बार बार थूक लगा कर लौड़ा सेट कर रहे थे पर हरेक बार लौड़ा मूड जाता था और वो फिर से कोशिश करते थे। “
शायद दोनों ही अनाड़ी थे। मैं खड़ी हो गई और अपना निचे का पेंट अपने पैरों से बाहर कर दिया। और निचे लेट गई और दोनों पैरों को ऊपर कर के फैला दी। वो तुरंत ही घुटने पर बैठ गए।
उसके बाद उन्होंने मोबाइल का जलाकर मेरी चूत को देखा चुत गीली थी उन्होंने मोबाइल की लाइट में ही अपने लौड़े के चुत पर सेट किया और जोर से धक्का दिया मैं कराह उठी।
भैया का लौड़ा मेरी चूत में करीब ४ इंच घुस गया था पर दर्द बहुत हो रहा था। मैंने उनको रोका बोला बहुत दर्द कर रहा है। दोस्तों उन्होंने मेरी चूचियों को सहलाया और मेरे होठ पर किश करने लगी और और लौड़ा उतना हो घुसा था बस वो मेरी चूचियों को दबा रहे थे और और होठ चूस रहे थे।
वो बोले अब दर्द तो नहीं कर रहा है। मैं बोली हां अभी थोड़ा थोड़ा। और उन्होंने थोड़ा निकाला करीब दो इंच उसके बाद उन्होंने फिर से डाला अब उनका लौड़ा ५ इंच के करीब अंदर चला गया मुझे फिर से दर्द हुया। वो फिर रुक गए वो चूमने लगे होठों को और चूचियों को मसलने लगे।
मेरे मुँह से दर्द भरी सिसकारियां निकल रही थी अच्छा भी लग रहा था दर्द भी हो रहा था। फिर उन्होंने लौड़ा थोड़ा बाहर किया और फिर से जोर दिया अब उनका लौड़ा पूरी तरह मेरी चूत में समा गया अब मुझे अच्छा लगने लगा हौले हौले से गांड हिलाने लगी फिर गोल गोल घुमाने लगी।
उसके बाद उन्होंने भी अंदर बाहर करने लगे। अब दोनों ही आह आह कर रहे थे होठ मेरे सुख रहे थे। पर वासना की प्यास के आगे अपने होठ को जीभ से चाट लेती और गांड उठा उठा कर धक्के दे रही थी।
दोस्तों वो अब मुझे जोर जोर से पेलने लगे। हम दोनों ही एक दूसरे को मदद कर रहे थे किश कर रहे थे। करीब वो मुझे 15 मिनट तक अंधरे में चोदते रहे और अचानक वो जोर से अअअअअ आए आए की आवाज निकली और पूरा वीर्य मेरे चूत में गिरा दिया और शांत हो गए।
हम दोनों तुरंत ही उठा गए अपने कपडे पहने और उन्होने मोबाइल की लाइट जलाकर देखा वो निचे फर्श पर वीर्य भी गिरा था जो शायद मेरी चूत से निकला था और उसके साथ खून भी था शायद मेरी सील टूटी थी इस वजह से खून थे।
उन्होंने मुझे गले लगाया और फिर हैप्पी दिवाली बोला और कहा आज की रात हम दोनों लिए सबसे हसीन रात थी। हमेशा ना भूलने वाली रात थी। और दोनों एक दूसरे को दिवाली की बधाई दिए और फिर दीपक जलाने लगे। dirtymindsclubstory@gmail.com
❤1
Sexy girl navya:
शादीशुदा दीदी की मालिश के बाद चुदाई
byमेरी बड़ी बहन की है. वो मैरिड है. मैं उनके घर गया तो दीदी ने मुझसे अपने पैरों की मालिश करवाई. उनकी नंगी टाँगें मुझे अच्छी लगी.
दोस्तो, मेरा नाम राहुल है, मैं कानपुर का रहना वाला हूं. मेरी उम्र 25 वर्ष है।
यह मेरीन्यूड सिस्टर Xxx कहानी मेरी और मेरी दीदी के बीच की है.
मेरी दीदी लखनऊ में रहती हैं काफी समय से जॉब में व्यस्त होने के कारण मैं लखनऊ दीदी के घर नहीं गया था.
दो महीने पहले मेरी नौकरी छूट गयी थी तो मैं घर पर फ्री रहने लगा.
एक दिन दीदी का फोन आया- राहुल, मेरे पास आकर हमारा घर देख जाओ, मै जीजा जी ने तुम्हारे इंटीरियर का काम जबरदस्त कराया है।
मैंने तुरंत अपना बैग पैक किया और बस पकड़कर लखनऊ में आशियाना में दीदी के घर जा पहुँचा।
आपको बताना भूल गया कि मेरी नेहा दीदी की उम्र लगभग 31 साल की है उनका फीगर गजब का है. उनकी चूचियाँ का साइज भी 38 है।
नेहा दीदी घर पर हाफ पैन्ट और टी शर्ट में ही रहती हैं.
मैं जब पहुँचा तो दीदी ने मुझे गले लगा लिया.
मुझे बहुत अच्छा लगा.
घर पर दीदी के अलावा उनके 2 बच्चे हैं जो अभी बहुत छोटे हैं; एक 6 साल है तो दूसरा 4 साल का.
जीजा जी ऑफिस के काम से अधिकतर टूर पर ही रहते हैं।
दोपहर को खाना पीना खाने के बाद मैं और दीदी बात कर रहे थे.
तभी दीदी ने बोला- राहुल मेरे पैर दबा दो!
आपको बता दूं कि मैं दीदी के पैर अक्सर दबाता हूँ.
मैं झट से उठकर दीदी के पैर दबाने लगा।
दीदी की गोरी गोरी टांगें देखकर आज मेरा मन डोल रहा था; मन कर रहा था कि मैं टांगों से भी ऊपर भी पहुँच जाऊं।
खैर 15 मिनट पैर दबाने के बाद दीदी ने बोल दिया- अब बस करो थक गए होंगे, आराम करो।
उसके बाद मैं दीदी एक ही बेड पर सो गए.
थोड़ी देर बाद मैंने देखा तो नेहा दीदी की एक टांग मेरे कमर पर चढ़ी हुई है और उनका एक हाथ भी मेरे ऊपर है.
मुझे बहुत मजा आ रहा था, मन कर रहा था कि मैं भी नेहा दीदी को बांहों में लेकर उनके दूध में हाथ डाल दूं।
ये दीदी की आदत शायद जीजा जी ने डाल दी थी।
ऐसे ही मुझे कब नींद आ गयी पता ही नहीं चला.
दीदी शाम को चाय लेकर आयी तब मेरी नींद टूटी।
अगले दिन सुबह जीजा जी को टूर पर 5 दिनों के लिए दिल्ली जाना था।
घर पर मैं और दीदी और उनके दोनों बच्चे थे।
दोपहर को बच्चे कम्प्यूटर पर गेम खेल रहे थे, मैं और दीदी कमरे में लेट कर बाते कर रहे थे।
दीदी ने आदत अनुसार मुझसे कहा- राहुल पैर दबा दो!
आज दीदी ने स्लीवलेस मैक्सी पहन रखी थी।
मैं झट से पैर दबाने लगा.
थोड़ी देर पैर दबाने के बाद दीदी ने बोला- राहुल मेरे पंजों में दर्द हो रहा है।
मैं ये मौका छोड़ना नहीं चाहता था, मैं चाह रहा था कि दीदी पूरे शरीर की मालिश मुझसे करवायें ताकि मैं उनका सेक्सी बदन देख सकूं।
मैंने दीदी से बोला- दीदी, आपके पैर सूखे सूखे लग रहे हैं. आप बोलो तो तेल से हल्की हल्की मालिश कर दूं?
दीदी ने कहा- कर दो राहुल!
मुझे मसाज पोर्न वीडियो देखने का शौक है जिसे देखकर मैं मसाज करना सीख लिया है.
मैं तेल से दीदी के पैरों के पंजों की मालिश धीरे धीरे कर रहा था.
फिर मैंने दीदी से पूछा- दीदी, कुछ आराम मिला?
तो नेहा दीदी ने कहा- इतनी अच्छी मालिश कहाँ से सीखी तुमने राहुल? बहुत आराम मिल रहा है।
फिर मैं धीरे धीरे दीदी के टांगों पर तेल डालकर अच्छे से मालिश करने लगा।
दीदी ने कहा- राहुल तुम्हारे हाथों में जादू है, बहुत अच्छी मालिश करते हो तुम तो!
मैंने दीदी को पेट के बल लेटने को कहा और उनकी मैक्सी टांगों के ऊपर तक उठा दी.
उनकी गोरी गोरी जांघें मेरे सामने थी.
मेरा लंड पैन्ट के बाहर आने को बेताब था.
मैं हाथों में तेल लेकर दीदी की जांघों पर मालिश करने लगा.
मैक्सी के अंदर हाथ डालकर मैं धीरे धीरे उनके चूतड़ों पर हाथ फेर कर मालिश कर रहा था.
दीदी को भी मजा आ रहा था.
उन्होंने अपनी आँखें बंद कर रखी थी.
मैंने मौके का फायदा उठा कर मैक्सी कमर तक उठा दी तो दीदी की आसमानी रंग की पैंटी मेरे सामने थी.
दीदी के गोरे गोरे चूतड़ों पर आसमानी रंग बहुत जँच रहा था.
मेरा मन तो कर रहा था कि पैंटी को नीचे सरका कर अभी उनकी सेक्सी गांड चाट लूं।
मैंने धीरे से दीदी को आवाज दी- दीदी, कैसी लग रही है मालिश?
दीदी ने बहुत- अच्छी करते हो राहुल, करते रहो।
मैंने कहा- दीदी, आप कहो तो आपके कमर भी कर दूं?
उन्होंने हाँ कर दी.
मैंने झट से उनकी कमर में हाथ डालकर मैक्सी कमर तक कर दी तेल डालकर अच्छे से कमर की मालिश करने लगा.
मुझे उनकी पैंटी मदहोश किये जा रही थी. मैं थोड़ी देर ऐसे ही मालिश करने के बाद उनकी गांड के ऊपर बैठ कर दीदी की कमर की मालिश करने लगा.
धीरे धीरे मेरे दोनों हाथ दीदी की पीठ से होते हुए उनके कंधों पर पहुंचने लगे.
मैंने एक जगह पढ़ा था कि स्त्रियों के कान सहलाने से उन्हें जल्दी सेक्स चढ़ता है.
मैं बिना देर किये दीदी के कान को सहलाने लगा।
शादीशुदा दीदी की मालिश के बाद चुदाई
byमेरी बड़ी बहन की है. वो मैरिड है. मैं उनके घर गया तो दीदी ने मुझसे अपने पैरों की मालिश करवाई. उनकी नंगी टाँगें मुझे अच्छी लगी.
दोस्तो, मेरा नाम राहुल है, मैं कानपुर का रहना वाला हूं. मेरी उम्र 25 वर्ष है।
यह मेरीन्यूड सिस्टर Xxx कहानी मेरी और मेरी दीदी के बीच की है.
मेरी दीदी लखनऊ में रहती हैं काफी समय से जॉब में व्यस्त होने के कारण मैं लखनऊ दीदी के घर नहीं गया था.
दो महीने पहले मेरी नौकरी छूट गयी थी तो मैं घर पर फ्री रहने लगा.
एक दिन दीदी का फोन आया- राहुल, मेरे पास आकर हमारा घर देख जाओ, मै जीजा जी ने तुम्हारे इंटीरियर का काम जबरदस्त कराया है।
मैंने तुरंत अपना बैग पैक किया और बस पकड़कर लखनऊ में आशियाना में दीदी के घर जा पहुँचा।
आपको बताना भूल गया कि मेरी नेहा दीदी की उम्र लगभग 31 साल की है उनका फीगर गजब का है. उनकी चूचियाँ का साइज भी 38 है।
नेहा दीदी घर पर हाफ पैन्ट और टी शर्ट में ही रहती हैं.
मैं जब पहुँचा तो दीदी ने मुझे गले लगा लिया.
मुझे बहुत अच्छा लगा.
घर पर दीदी के अलावा उनके 2 बच्चे हैं जो अभी बहुत छोटे हैं; एक 6 साल है तो दूसरा 4 साल का.
जीजा जी ऑफिस के काम से अधिकतर टूर पर ही रहते हैं।
दोपहर को खाना पीना खाने के बाद मैं और दीदी बात कर रहे थे.
तभी दीदी ने बोला- राहुल मेरे पैर दबा दो!
आपको बता दूं कि मैं दीदी के पैर अक्सर दबाता हूँ.
मैं झट से उठकर दीदी के पैर दबाने लगा।
दीदी की गोरी गोरी टांगें देखकर आज मेरा मन डोल रहा था; मन कर रहा था कि मैं टांगों से भी ऊपर भी पहुँच जाऊं।
खैर 15 मिनट पैर दबाने के बाद दीदी ने बोल दिया- अब बस करो थक गए होंगे, आराम करो।
उसके बाद मैं दीदी एक ही बेड पर सो गए.
थोड़ी देर बाद मैंने देखा तो नेहा दीदी की एक टांग मेरे कमर पर चढ़ी हुई है और उनका एक हाथ भी मेरे ऊपर है.
मुझे बहुत मजा आ रहा था, मन कर रहा था कि मैं भी नेहा दीदी को बांहों में लेकर उनके दूध में हाथ डाल दूं।
ये दीदी की आदत शायद जीजा जी ने डाल दी थी।
ऐसे ही मुझे कब नींद आ गयी पता ही नहीं चला.
दीदी शाम को चाय लेकर आयी तब मेरी नींद टूटी।
अगले दिन सुबह जीजा जी को टूर पर 5 दिनों के लिए दिल्ली जाना था।
घर पर मैं और दीदी और उनके दोनों बच्चे थे।
दोपहर को बच्चे कम्प्यूटर पर गेम खेल रहे थे, मैं और दीदी कमरे में लेट कर बाते कर रहे थे।
दीदी ने आदत अनुसार मुझसे कहा- राहुल पैर दबा दो!
आज दीदी ने स्लीवलेस मैक्सी पहन रखी थी।
मैं झट से पैर दबाने लगा.
थोड़ी देर पैर दबाने के बाद दीदी ने बोला- राहुल मेरे पंजों में दर्द हो रहा है।
मैं ये मौका छोड़ना नहीं चाहता था, मैं चाह रहा था कि दीदी पूरे शरीर की मालिश मुझसे करवायें ताकि मैं उनका सेक्सी बदन देख सकूं।
मैंने दीदी से बोला- दीदी, आपके पैर सूखे सूखे लग रहे हैं. आप बोलो तो तेल से हल्की हल्की मालिश कर दूं?
दीदी ने कहा- कर दो राहुल!
मुझे मसाज पोर्न वीडियो देखने का शौक है जिसे देखकर मैं मसाज करना सीख लिया है.
मैं तेल से दीदी के पैरों के पंजों की मालिश धीरे धीरे कर रहा था.
फिर मैंने दीदी से पूछा- दीदी, कुछ आराम मिला?
तो नेहा दीदी ने कहा- इतनी अच्छी मालिश कहाँ से सीखी तुमने राहुल? बहुत आराम मिल रहा है।
फिर मैं धीरे धीरे दीदी के टांगों पर तेल डालकर अच्छे से मालिश करने लगा।
दीदी ने कहा- राहुल तुम्हारे हाथों में जादू है, बहुत अच्छी मालिश करते हो तुम तो!
मैंने दीदी को पेट के बल लेटने को कहा और उनकी मैक्सी टांगों के ऊपर तक उठा दी.
उनकी गोरी गोरी जांघें मेरे सामने थी.
मेरा लंड पैन्ट के बाहर आने को बेताब था.
मैं हाथों में तेल लेकर दीदी की जांघों पर मालिश करने लगा.
मैक्सी के अंदर हाथ डालकर मैं धीरे धीरे उनके चूतड़ों पर हाथ फेर कर मालिश कर रहा था.
दीदी को भी मजा आ रहा था.
उन्होंने अपनी आँखें बंद कर रखी थी.
मैंने मौके का फायदा उठा कर मैक्सी कमर तक उठा दी तो दीदी की आसमानी रंग की पैंटी मेरे सामने थी.
दीदी के गोरे गोरे चूतड़ों पर आसमानी रंग बहुत जँच रहा था.
मेरा मन तो कर रहा था कि पैंटी को नीचे सरका कर अभी उनकी सेक्सी गांड चाट लूं।
मैंने धीरे से दीदी को आवाज दी- दीदी, कैसी लग रही है मालिश?
दीदी ने बहुत- अच्छी करते हो राहुल, करते रहो।
मैंने कहा- दीदी, आप कहो तो आपके कमर भी कर दूं?
उन्होंने हाँ कर दी.
मैंने झट से उनकी कमर में हाथ डालकर मैक्सी कमर तक कर दी तेल डालकर अच्छे से कमर की मालिश करने लगा.
मुझे उनकी पैंटी मदहोश किये जा रही थी. मैं थोड़ी देर ऐसे ही मालिश करने के बाद उनकी गांड के ऊपर बैठ कर दीदी की कमर की मालिश करने लगा.
धीरे धीरे मेरे दोनों हाथ दीदी की पीठ से होते हुए उनके कंधों पर पहुंचने लगे.
मैंने एक जगह पढ़ा था कि स्त्रियों के कान सहलाने से उन्हें जल्दी सेक्स चढ़ता है.
मैं बिना देर किये दीदी के कान को सहलाने लगा।
👍3
दीदी अपनी आँखें बंद कर मसाज का मजा ले रही थी और मैं उनके कामुक बदन को देखकर वासना से भीगा जा रहा था.
पीठ की मसाज करते समय दीदी के ब्रा का हुक आनंद के रस में अड़चन बन रहा था.
इस बार मैंने दीदी से बिना पूछे ही ब्रा का हुक खोल दिया और मैक्सी पूरी शरीर से निकाल दी।
अब मेरी दीदी मेरे सामने पैंटी में थी और उनकी चिकनी पीठ काली रात में चन्द्रमा की तरह चमक रही थी।
तभी दीदी घूमकर एकदम सीधी लेट गयी और बोली- राहुल, सामने भी तेल से मालिश कर दो।
दीदी के सीने पर आसमानी रंग की ब्रा को हटा कर उनके दूधों को आजाद कर दिया.
इतने बड़े बड़े बूब्स जिंदगी में मैं पहली बार देख रहा था.
जैसे ही तेल की कुछ बूंद दीदी के स्तन पर पड़ी, दीदी की सिसकारियाँ बाहर आने लगी और मैं दीदी के मुलायम स्तनों पर हाथ फेरने लगा।
दीदी की सांसें तेज होती जा रही थी.
और इधर मेरी मैं बिना देर किये उनके निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.
दीदी कुछ नहीं बोली, वे बस उइ उइ आआ की आवाज निकाल रही थी/
तक़रीबन 15 मिनट दीदी के स्तनों से खेलने के बाद मैं दीदी की पैंटी को नीचे सरका कर दीदी की चिकनी चूत को चाटने लगा।
दीदी को भी बहुत मजा आ रहा था.
उन्होंने बोला- बहनचोद … चूत ही चाटेगा या फिर बहन की चूत को चोदेगा भी? चल अपना लंड मेरे मुँह में डाल पहले!
और दीदी ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए.
फिर मुझे बेड पर खड़ा कर दिया और बेड पर बैठ कर मेरा लंड चूसने लगी.
मुझे बहुत मजा आ रहा था.
पहली बार दीदी का नंगा बदन देख कर मेरा लंड जवाब दे रहा था.
दीदी ने बस 5-6 बार ही मेरा लंड मुँह में अंदर बाहर लिया कि मैं उनके मुँह में झड़ गया।
इस पर दीदी हंस पड़ी, बोली- अभी तू कच्चा खिलाड़ी है, तुझे सिखाना पड़ेगा।
मेरी न्यूड सिस्टर बेड पर दोनों टांगें फैला कर लेट गयी और बोली- चलो मेरी चूत चाटो … जब तक तुम्हारा लंड दोबारा खड़ा ना हो जाये!
15 मिनट दीदी की चूत चाटने के बाद मेरा लंड फिर हरकत में आया और मैंने फटाक से दीदी की चूत में अपना लंड डाल दिया।
पहली बार मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं स्वर्ग में हूँ.
5 मिनट के बाद मैं झड़ने वाला था, दीदी से मैंने कहा.
दीदी ने अपना मुँह खोल दिया और मैं फिर से दीदी के मुँह में ही झड़ गया.
इसके बाद रोज मैं मेरी दीदी की मालिश करने लगा, दीदी मालिश के बाद अपनी चूत चुदाई कराने लगी।
पीठ की मसाज करते समय दीदी के ब्रा का हुक आनंद के रस में अड़चन बन रहा था.
इस बार मैंने दीदी से बिना पूछे ही ब्रा का हुक खोल दिया और मैक्सी पूरी शरीर से निकाल दी।
अब मेरी दीदी मेरे सामने पैंटी में थी और उनकी चिकनी पीठ काली रात में चन्द्रमा की तरह चमक रही थी।
तभी दीदी घूमकर एकदम सीधी लेट गयी और बोली- राहुल, सामने भी तेल से मालिश कर दो।
दीदी के सीने पर आसमानी रंग की ब्रा को हटा कर उनके दूधों को आजाद कर दिया.
इतने बड़े बड़े बूब्स जिंदगी में मैं पहली बार देख रहा था.
जैसे ही तेल की कुछ बूंद दीदी के स्तन पर पड़ी, दीदी की सिसकारियाँ बाहर आने लगी और मैं दीदी के मुलायम स्तनों पर हाथ फेरने लगा।
दीदी की सांसें तेज होती जा रही थी.
और इधर मेरी मैं बिना देर किये उनके निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.
दीदी कुछ नहीं बोली, वे बस उइ उइ आआ की आवाज निकाल रही थी/
तक़रीबन 15 मिनट दीदी के स्तनों से खेलने के बाद मैं दीदी की पैंटी को नीचे सरका कर दीदी की चिकनी चूत को चाटने लगा।
दीदी को भी बहुत मजा आ रहा था.
उन्होंने बोला- बहनचोद … चूत ही चाटेगा या फिर बहन की चूत को चोदेगा भी? चल अपना लंड मेरे मुँह में डाल पहले!
और दीदी ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए.
फिर मुझे बेड पर खड़ा कर दिया और बेड पर बैठ कर मेरा लंड चूसने लगी.
मुझे बहुत मजा आ रहा था.
पहली बार दीदी का नंगा बदन देख कर मेरा लंड जवाब दे रहा था.
दीदी ने बस 5-6 बार ही मेरा लंड मुँह में अंदर बाहर लिया कि मैं उनके मुँह में झड़ गया।
इस पर दीदी हंस पड़ी, बोली- अभी तू कच्चा खिलाड़ी है, तुझे सिखाना पड़ेगा।
मेरी न्यूड सिस्टर बेड पर दोनों टांगें फैला कर लेट गयी और बोली- चलो मेरी चूत चाटो … जब तक तुम्हारा लंड दोबारा खड़ा ना हो जाये!
15 मिनट दीदी की चूत चाटने के बाद मेरा लंड फिर हरकत में आया और मैंने फटाक से दीदी की चूत में अपना लंड डाल दिया।
पहली बार मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं स्वर्ग में हूँ.
5 मिनट के बाद मैं झड़ने वाला था, दीदी से मैंने कहा.
दीदी ने अपना मुँह खोल दिया और मैं फिर से दीदी के मुँह में ही झड़ गया.
इसके बाद रोज मैं मेरी दीदी की मालिश करने लगा, दीदी मालिश के बाद अपनी चूत चुदाई कराने लगी।
Antarvasana story:
पड़ोस की भाभी की चूत चुदाई उनके मायके में
पड़ोसन भाभी मेरे घर आई तो भाभी की गांड को देख मेरे मन में हलचल होने लगी. मैंने भाभी की गांड पर लंड लगा दिया. क्या मैं भाभी की चूत चुदाई कर पाया?
दोस्तो, मेरा नाम देवा है. मैं मध्य प्रदेश राज्य का रहने वाला हूं. यह हिन्दी सेक्स स्टोरी मेरी व मेरे पड़ोस में रहने वाली भाभी के बारे में है. मैं अंतर्वासना का नियमित पाठक हूं और मेरी कहानी करीबन आज से 5 साल पहले की है.
उस समय मेरी उम्र 21 साल की थी. मेरे लंड का साइज़ 6 इंच है. दिखने में भी ठीक हूं और बॉडी भी सही है. ज्यादा हैंडसम तो नहीं मगर औरतों व लड़कियों को पसंद आ जाता हूं. अब आपका ज्यादा समय न लेते हुए मैं अपनी कहानी शुरू करना चाहता हूं.
मेरी पड़ोसन भाभी का नाम सोनी (बदला हुआ) है. वो देखने में एकदम से मस्त माल है. मेरी भाभी की शादी 18 वर्ष की उम्र में ही हो गयी थी. उस वक्त मेरे मन में मेरी भाभी को लेकर सेक्स वाले विचार नहीं आते थे क्योंकि तब मेरी उम्र बहुत कम थी. मगर उस वक्त मेरा लंड खड़ा होना शुरू चुका था.
जैसे जैसे मैं जवान होता गया तो मेरे मन में भी औरत के जिस्म की तरफ आकर्षण प्रबल हो रहा था. फिर मैंने इंडियन सेक्स गर्ल की नंगी पिक्स देखना शुरू कर दिया.
मैं रोज उनको देख कर मुठ मारता था. अन्तर्वासना पर हिन्दी सेक्स कहानी पढ़ते हुए भी हस्तमैथुन का मजा लेता था. मगर फिर मेरा लंड चुदाई के लिए तड़पने लगा था. मुझे अब किसी की चूत चाहिए थी. धीरे धीरे मेरे मन में भाभी के जिस्म की तरफ भी वही आकर्षण आ रहा था.
उस वक्त भाभी से मेरी थोड़ी बहुत बात होती थी.
फिर एक दिन ऐसा हुआ कि मेरे घर पर कोई नहीं था. मैं अपने घर में बिल्कुल अकेला था. पापा तो काम से बाहर गये थे और मां कहीं रिश्तेदारी में गयी हुई थी. जाते समय मेरी मां ने मेरी भाभी को मेरे लिये खाना बनाने के लिए कह दिया था.
मां और पापा के जाने के घंटे भर बाद भाभी मेरे घर आ गयी. उसने मुझसे कुछ बातें कीं और फिर रसोई में मेरे लिये खाने बनाने गयी.
चूंकि उसको हमारे रसोई के बारे में ज्यादा पता नहीं था इसलिए वो बार बार मुझसे ही पूछ रही थी. मैं उनकी मदद कर रहा था. उनको बता रहा था कि कौन सा सामान कहां पर रखा हुआ है.
उनको घर में अकेली पाकर मेरे मन में सेक्स के ख्याल आने शुरू हो गये थे. भाभी की गांड काफी मस्त थी. मैं उसकी चूचियों में झांकने की कोशिश कर रहा था. मैंने उनको बहाने से छूना शुरू कर दिया. कभी भाभी की गांड पर हाथ लग जाता था तो कभी उनके कंधे को सहला देता था.
ये सब मैं जानबूझकर कर रहा था. भाभी भी मेरे इशारों को समझ चुकी थी लेकिन शायद कुछ बोलना नहीं चाह रही थी. जब मैंने देखा कि भाभी कुछ नहीं बोल रही है तो मैंने उनके पीछे आकर बहाने से अपने लंड को उनकी गांड पर टच करवा दिया.
मेरा लंड पहले से ही तना हुआ था. मैंने भाभी की गांड पर लंड लगाया तब भी भाभी ने कुछ नहीं कहा. बल्कि वो थोड़ी सी पीछे होकर अपनी गांड को मेरे लंड पर दबाने लगी.
यह मेरे लिये ग्रीन सिग्नल के जैसा था. मैंने अपने लंड को भाभी की गांड पर सटा दिया. भाभी ने तब भी कुछ नहीं कहा. मेरी हिम्मत और बढ़ गयी.
मैंने भाभी को अपनी बांहों में जकड़ लिया तो भाभी भी मेरी तरफ घूम गयी. उन्होंने मुझे देखा और मैंने उनको देखा. मैंने उनके होंठों को चूसने के लिए आगे गर्दन की तो उन्होंने मुझे रोक दिया.
एक बार तो मैं समझ नहीं पाया.
वो बोली- आज नहीं, ये सब अभी करना ठीक नहीं है. यहां पर किसी के आने का डर है. वैसे भी ये तुम्हारा घर है. अगर किसी ने देख लिया तो बेवजह बदनामी होगी.
भाभी बोली- कल मैं अपने मायके में जा रही हूं. यहां से मेरा मायका ज्यादा दूर नहीं है. तुम भी वहीं आ जाना. वहां पर आगे का काम करेंगे. वहां मैं अपने घर में तुम्हें बुला लूंगी.
इतना बोलकर भाभी ने मुझे अपना नम्बर दे दिया.
उसके बाद वो खाना बना कर चली गयी.
मैं भी खुश हो गया कि भाभी पट गयी है. रात हुई तो मेरे लंड ने मुझे परेशान करना शुरू कर दिया. मेरा लौड़ा खड़ा हो गया. मैंने अंडरवियर में हाथ डाल कर उसको सहलाना और हिलाना शुरू कर दिया. फिर उस रात को मैं भाभी के नाम की मुठ मार कर सो गया. अगले दिन मैं उठा और भाभी के फोन का इंतजार करने लगा.
भाभी ने बताया था कि उनका मायका यहां से 20 किलोमीटर दूर है. दोपहर 2 बजे के करीब भाभी का फोन आया. वो मुझे अपने मायके में बुला रही थी.
आधे घंटे के अंदर मैं उनके वहां पहुंच गया. वहां जाकर देखा तो उनके घर में कोई नहीं था.
उसने सब कुछ पहले से ही प्लान कर लिया था. मेरे जाने के बाद वो मेरे लिये पानी लेकर आई. फिर मेरे साथ ही आकर बैठ गयी. मेरा लंड तो पहले से ही उत्तेजना में था.
पड़ोस की भाभी की चूत चुदाई उनके मायके में
पड़ोसन भाभी मेरे घर आई तो भाभी की गांड को देख मेरे मन में हलचल होने लगी. मैंने भाभी की गांड पर लंड लगा दिया. क्या मैं भाभी की चूत चुदाई कर पाया?
दोस्तो, मेरा नाम देवा है. मैं मध्य प्रदेश राज्य का रहने वाला हूं. यह हिन्दी सेक्स स्टोरी मेरी व मेरे पड़ोस में रहने वाली भाभी के बारे में है. मैं अंतर्वासना का नियमित पाठक हूं और मेरी कहानी करीबन आज से 5 साल पहले की है.
उस समय मेरी उम्र 21 साल की थी. मेरे लंड का साइज़ 6 इंच है. दिखने में भी ठीक हूं और बॉडी भी सही है. ज्यादा हैंडसम तो नहीं मगर औरतों व लड़कियों को पसंद आ जाता हूं. अब आपका ज्यादा समय न लेते हुए मैं अपनी कहानी शुरू करना चाहता हूं.
मेरी पड़ोसन भाभी का नाम सोनी (बदला हुआ) है. वो देखने में एकदम से मस्त माल है. मेरी भाभी की शादी 18 वर्ष की उम्र में ही हो गयी थी. उस वक्त मेरे मन में मेरी भाभी को लेकर सेक्स वाले विचार नहीं आते थे क्योंकि तब मेरी उम्र बहुत कम थी. मगर उस वक्त मेरा लंड खड़ा होना शुरू चुका था.
जैसे जैसे मैं जवान होता गया तो मेरे मन में भी औरत के जिस्म की तरफ आकर्षण प्रबल हो रहा था. फिर मैंने इंडियन सेक्स गर्ल की नंगी पिक्स देखना शुरू कर दिया.
मैं रोज उनको देख कर मुठ मारता था. अन्तर्वासना पर हिन्दी सेक्स कहानी पढ़ते हुए भी हस्तमैथुन का मजा लेता था. मगर फिर मेरा लंड चुदाई के लिए तड़पने लगा था. मुझे अब किसी की चूत चाहिए थी. धीरे धीरे मेरे मन में भाभी के जिस्म की तरफ भी वही आकर्षण आ रहा था.
उस वक्त भाभी से मेरी थोड़ी बहुत बात होती थी.
फिर एक दिन ऐसा हुआ कि मेरे घर पर कोई नहीं था. मैं अपने घर में बिल्कुल अकेला था. पापा तो काम से बाहर गये थे और मां कहीं रिश्तेदारी में गयी हुई थी. जाते समय मेरी मां ने मेरी भाभी को मेरे लिये खाना बनाने के लिए कह दिया था.
मां और पापा के जाने के घंटे भर बाद भाभी मेरे घर आ गयी. उसने मुझसे कुछ बातें कीं और फिर रसोई में मेरे लिये खाने बनाने गयी.
चूंकि उसको हमारे रसोई के बारे में ज्यादा पता नहीं था इसलिए वो बार बार मुझसे ही पूछ रही थी. मैं उनकी मदद कर रहा था. उनको बता रहा था कि कौन सा सामान कहां पर रखा हुआ है.
उनको घर में अकेली पाकर मेरे मन में सेक्स के ख्याल आने शुरू हो गये थे. भाभी की गांड काफी मस्त थी. मैं उसकी चूचियों में झांकने की कोशिश कर रहा था. मैंने उनको बहाने से छूना शुरू कर दिया. कभी भाभी की गांड पर हाथ लग जाता था तो कभी उनके कंधे को सहला देता था.
ये सब मैं जानबूझकर कर रहा था. भाभी भी मेरे इशारों को समझ चुकी थी लेकिन शायद कुछ बोलना नहीं चाह रही थी. जब मैंने देखा कि भाभी कुछ नहीं बोल रही है तो मैंने उनके पीछे आकर बहाने से अपने लंड को उनकी गांड पर टच करवा दिया.
मेरा लंड पहले से ही तना हुआ था. मैंने भाभी की गांड पर लंड लगाया तब भी भाभी ने कुछ नहीं कहा. बल्कि वो थोड़ी सी पीछे होकर अपनी गांड को मेरे लंड पर दबाने लगी.
यह मेरे लिये ग्रीन सिग्नल के जैसा था. मैंने अपने लंड को भाभी की गांड पर सटा दिया. भाभी ने तब भी कुछ नहीं कहा. मेरी हिम्मत और बढ़ गयी.
मैंने भाभी को अपनी बांहों में जकड़ लिया तो भाभी भी मेरी तरफ घूम गयी. उन्होंने मुझे देखा और मैंने उनको देखा. मैंने उनके होंठों को चूसने के लिए आगे गर्दन की तो उन्होंने मुझे रोक दिया.
एक बार तो मैं समझ नहीं पाया.
वो बोली- आज नहीं, ये सब अभी करना ठीक नहीं है. यहां पर किसी के आने का डर है. वैसे भी ये तुम्हारा घर है. अगर किसी ने देख लिया तो बेवजह बदनामी होगी.
भाभी बोली- कल मैं अपने मायके में जा रही हूं. यहां से मेरा मायका ज्यादा दूर नहीं है. तुम भी वहीं आ जाना. वहां पर आगे का काम करेंगे. वहां मैं अपने घर में तुम्हें बुला लूंगी.
इतना बोलकर भाभी ने मुझे अपना नम्बर दे दिया.
उसके बाद वो खाना बना कर चली गयी.
मैं भी खुश हो गया कि भाभी पट गयी है. रात हुई तो मेरे लंड ने मुझे परेशान करना शुरू कर दिया. मेरा लौड़ा खड़ा हो गया. मैंने अंडरवियर में हाथ डाल कर उसको सहलाना और हिलाना शुरू कर दिया. फिर उस रात को मैं भाभी के नाम की मुठ मार कर सो गया. अगले दिन मैं उठा और भाभी के फोन का इंतजार करने लगा.
भाभी ने बताया था कि उनका मायका यहां से 20 किलोमीटर दूर है. दोपहर 2 बजे के करीब भाभी का फोन आया. वो मुझे अपने मायके में बुला रही थी.
आधे घंटे के अंदर मैं उनके वहां पहुंच गया. वहां जाकर देखा तो उनके घर में कोई नहीं था.
उसने सब कुछ पहले से ही प्लान कर लिया था. मेरे जाने के बाद वो मेरे लिये पानी लेकर आई. फिर मेरे साथ ही आकर बैठ गयी. मेरा लंड तो पहले से ही उत्तेजना में था.
👍2❤1
मैंने भाभी को किस करना शुरू कर दिया और वो भी मेरा साथ देने लगी. काफी देर तक हम दोनों एक दूसरे को किस करते रहे. मैं भाभी के बूब्स को दबाने लगा. उनके होंठों को चूसते हुए मुझे भाभी के मीडियम साइज के बूब्स दबाने में काफी मजा आ रहा था.
फिर मैंने भाभी की साड़ी को उतारना शुरू कर दिया. उनकी साड़ी का पल्लू उतरते ही उनके बूब्स की गहराईयां मुझे दिखने लगीं. मैंने जोर से उसके बूब्स को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया.
भाभी अब गर्म होने लगी थी. वो मेरी पैंट के ऊपर से मेरे लंड पर हाथ रख कर उसको दबा रही थी. भाभी मेरे लंड को सहलाने लगी और मैं उनकी चूचियों को दबाने लगा.
कुछ देर तक ऐसे ही चूमा चाटी चलती रही. उसके बाद मैंने उनको ब्लाउज उतारने के लिए कहा. जैसे ही भाभी ने ब्लाउज उतारा उनकी मस्त सी चूचियां मेरे सामने नंगी हो गयीं.
मैं उनकी नंगी चूचियों पर झपट पड़ा. पहले तो मैंने भाभी के बूब्स को हाथों में भरा और जोर से उनको भींच कर देखा. उनके नर्म मुलायम बूब्स को दबाते हुए मुझे बहुत मजा आ रहा था. भाभी इस बीच में मेरी गर्दन को चूम रही थी.
फिर मैंने भाभी को लिटा दिया और उनकी साड़ी को खोल दिया. भाभी अब केवल पेटीकोट में रह गयी थी. उसके बाद मैंने उनके पेटीकोट भी उतार दिया. नीचे से भाभी ने लाल रंग की पैंटी पहनी हुई थी.
भाभी की पैंटी उसकी गोरी जांघों पर बहुत मस्त लग रही थी. उसके बाद मैंने उसकी पैंटी पर किस कर दिया. मैं भाभी की पैंटी को चाटने लगा. भाभी की चूत गर्म हो चुकी थी. उसकी चूत से भीनी भीनी खुशबू आ रही थी.
Padosan Bhabhi Ki Chut Chudai
Padosan Bhabhi Ki Chut Chudai
मैंने भाभी की पैंटी को खींच कर उतार दिया. भाभी की चूत नंगी हो गयी. मैंने उसकी चूत पर हाथ से सहला कर देखा. चुदासी हो चुकी भाभी की चूत गीली हो गयी थी. बाहर से देखने पर चूत का रंग सांवला दिख रहा था.
फिर मैंने उसकी चूत की फांकों को खोल कर देखा. उसकी चूत अंदर से बिल्कुल लाल दिखाई दे रही थी. मैंने चूत की फांकों को अपनी उंगलियों से अलग कर लिया और अपनी जीभ को उसकी चूत के अंदर चलाने लगा.
भाभी कसमसाने लगी. मैंने भाभी की चूत में जीभ से चोदना शुरू कर दिया. उसके बाद मैंने जोर से काफी देर भाभी की चूत को चूसा और भाभी सिसकारियां लेने लगी.
वो बोली- आह्ह .. देवा, तुमने इस तरह से चूत को चाटना कहां से सीखा है?
मैं बोली- बस भाभी ऐसे ही पोर्न सेक्स वीडियो देख कर सीखा है.
वो बोली- मेरे पति ने मेरी चूत को कभी इस तरह से नहीं चाटा. मेरी चूत को और जोर से चाटो. मुझे बहुत मजा आ रहा है.
मैं तेजी के साथ भाभी की चूत में जीभ को चलाने लगा. भाभी जोर जोर से सिसकारियां लेने लगी. वो मेरे मुंह को अपनी चूत में दबाने लगी. वो इतनी जोर से मेरे मुंह को चूत में दबा रही थी कि मुझसे सांस नहीं लिया जा रहा था.
भाभी बहुत कामुक हो गयी. मैं अभी भी उसकी चूत में जीभ को चला रहा था. फिर मैंने हांफते हुए जीभ को बाहर निकाल लिया. मेरे लंड का हाल बुरा हो गया था.
मैं उठा और अपने कपड़े निकालने लगा. मैंने शर्ट उतार दी. उसके बाद बनियान भी उतार दी. जैसे ही मैं पैंट को खोलने लगा तो भाभी उठी और मेरे लंड को पैंट के ऊपर से पकड़ने लगी.
मेरे लंड को सहलाते हुए उसने मेरी पैंट खोल दी. मैंने फिर पैंट को टांगों से अलग कर दिया. मेरा लंड मेरी अंडरवियर में तना हुआ था. भाभी ने मेरी अंडरवियर को नीचे कर दिया और मेरा लंड उसके मुंह के सामने उछल कर आ गया.
भाभी ने मेरे लंड को हाथ में लेकर पकड़ लिया. उसको दबा कर देखने लगी. ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लंड फटने वाला है. मैंने भाभी को लंड चूसने के लिए इशारा किया तो भाभी मुंह बनाने लगी.
मैंने भाभी को रिक्वेस्ट की. वो आनाकानी करती रही. मेरे लंड से पानी छूटने लगा था जिससे लंड का टोपा गीला हो गया था. फिर मैंने उनके होंठों पर लंड को रगड़ दिया. उसने मेरी तरफ देखा और उसके बाद भाभी ने मेरे लंड को एकदम से मुंह में ले लिया और मैं जैसे स्वर्ग की सैर करने लगा.
मेरे लंड पर मुंह चलाते हुए भाभी मेरा लंड चूसने लगी. वो मेरे लंड को चूसती रही. मैं भी लंड चुसवाने के मजे लेता रहा.
जब मुझसे रहा न गया तो मैंने भाभी को लिटा दिया और उसकी टांगों को फैला दिया. मैंने उसकी चूत में उंगली डाल दी और तेजी के साथ भाभी की चूत में उंगली करने लगा.
भाभी की चूत पानी छोड़ छोड़ कर बिल्कुल चिकनी हो चुकी थी. ऐसा लग रहा था जैसे मैं किसी गर्म भट्टी में हाथ दे रहा हूं.
मैंने भाभी की चूत को कुरेदा तो भाभी सिसकारने लगी. वो बोली- बस … आ्हह … अब डाल दे. मेरी चूत को चोद दे. मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है.
मैंने तेजी के साथ भाभी की चूत में उंगली को चलाना शुरू कर दिया.
भाभी पागल सी हो उठी और मुझे अपने ऊपर खींचने लगी.
फिर मैंने भाभी की साड़ी को उतारना शुरू कर दिया. उनकी साड़ी का पल्लू उतरते ही उनके बूब्स की गहराईयां मुझे दिखने लगीं. मैंने जोर से उसके बूब्स को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया.
भाभी अब गर्म होने लगी थी. वो मेरी पैंट के ऊपर से मेरे लंड पर हाथ रख कर उसको दबा रही थी. भाभी मेरे लंड को सहलाने लगी और मैं उनकी चूचियों को दबाने लगा.
कुछ देर तक ऐसे ही चूमा चाटी चलती रही. उसके बाद मैंने उनको ब्लाउज उतारने के लिए कहा. जैसे ही भाभी ने ब्लाउज उतारा उनकी मस्त सी चूचियां मेरे सामने नंगी हो गयीं.
मैं उनकी नंगी चूचियों पर झपट पड़ा. पहले तो मैंने भाभी के बूब्स को हाथों में भरा और जोर से उनको भींच कर देखा. उनके नर्म मुलायम बूब्स को दबाते हुए मुझे बहुत मजा आ रहा था. भाभी इस बीच में मेरी गर्दन को चूम रही थी.
फिर मैंने भाभी को लिटा दिया और उनकी साड़ी को खोल दिया. भाभी अब केवल पेटीकोट में रह गयी थी. उसके बाद मैंने उनके पेटीकोट भी उतार दिया. नीचे से भाभी ने लाल रंग की पैंटी पहनी हुई थी.
भाभी की पैंटी उसकी गोरी जांघों पर बहुत मस्त लग रही थी. उसके बाद मैंने उसकी पैंटी पर किस कर दिया. मैं भाभी की पैंटी को चाटने लगा. भाभी की चूत गर्म हो चुकी थी. उसकी चूत से भीनी भीनी खुशबू आ रही थी.
Padosan Bhabhi Ki Chut Chudai
Padosan Bhabhi Ki Chut Chudai
मैंने भाभी की पैंटी को खींच कर उतार दिया. भाभी की चूत नंगी हो गयी. मैंने उसकी चूत पर हाथ से सहला कर देखा. चुदासी हो चुकी भाभी की चूत गीली हो गयी थी. बाहर से देखने पर चूत का रंग सांवला दिख रहा था.
फिर मैंने उसकी चूत की फांकों को खोल कर देखा. उसकी चूत अंदर से बिल्कुल लाल दिखाई दे रही थी. मैंने चूत की फांकों को अपनी उंगलियों से अलग कर लिया और अपनी जीभ को उसकी चूत के अंदर चलाने लगा.
भाभी कसमसाने लगी. मैंने भाभी की चूत में जीभ से चोदना शुरू कर दिया. उसके बाद मैंने जोर से काफी देर भाभी की चूत को चूसा और भाभी सिसकारियां लेने लगी.
वो बोली- आह्ह .. देवा, तुमने इस तरह से चूत को चाटना कहां से सीखा है?
मैं बोली- बस भाभी ऐसे ही पोर्न सेक्स वीडियो देख कर सीखा है.
वो बोली- मेरे पति ने मेरी चूत को कभी इस तरह से नहीं चाटा. मेरी चूत को और जोर से चाटो. मुझे बहुत मजा आ रहा है.
मैं तेजी के साथ भाभी की चूत में जीभ को चलाने लगा. भाभी जोर जोर से सिसकारियां लेने लगी. वो मेरे मुंह को अपनी चूत में दबाने लगी. वो इतनी जोर से मेरे मुंह को चूत में दबा रही थी कि मुझसे सांस नहीं लिया जा रहा था.
भाभी बहुत कामुक हो गयी. मैं अभी भी उसकी चूत में जीभ को चला रहा था. फिर मैंने हांफते हुए जीभ को बाहर निकाल लिया. मेरे लंड का हाल बुरा हो गया था.
मैं उठा और अपने कपड़े निकालने लगा. मैंने शर्ट उतार दी. उसके बाद बनियान भी उतार दी. जैसे ही मैं पैंट को खोलने लगा तो भाभी उठी और मेरे लंड को पैंट के ऊपर से पकड़ने लगी.
मेरे लंड को सहलाते हुए उसने मेरी पैंट खोल दी. मैंने फिर पैंट को टांगों से अलग कर दिया. मेरा लंड मेरी अंडरवियर में तना हुआ था. भाभी ने मेरी अंडरवियर को नीचे कर दिया और मेरा लंड उसके मुंह के सामने उछल कर आ गया.
भाभी ने मेरे लंड को हाथ में लेकर पकड़ लिया. उसको दबा कर देखने लगी. ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लंड फटने वाला है. मैंने भाभी को लंड चूसने के लिए इशारा किया तो भाभी मुंह बनाने लगी.
मैंने भाभी को रिक्वेस्ट की. वो आनाकानी करती रही. मेरे लंड से पानी छूटने लगा था जिससे लंड का टोपा गीला हो गया था. फिर मैंने उनके होंठों पर लंड को रगड़ दिया. उसने मेरी तरफ देखा और उसके बाद भाभी ने मेरे लंड को एकदम से मुंह में ले लिया और मैं जैसे स्वर्ग की सैर करने लगा.
मेरे लंड पर मुंह चलाते हुए भाभी मेरा लंड चूसने लगी. वो मेरे लंड को चूसती रही. मैं भी लंड चुसवाने के मजे लेता रहा.
जब मुझसे रहा न गया तो मैंने भाभी को लिटा दिया और उसकी टांगों को फैला दिया. मैंने उसकी चूत में उंगली डाल दी और तेजी के साथ भाभी की चूत में उंगली करने लगा.
भाभी की चूत पानी छोड़ छोड़ कर बिल्कुल चिकनी हो चुकी थी. ऐसा लग रहा था जैसे मैं किसी गर्म भट्टी में हाथ दे रहा हूं.
मैंने भाभी की चूत को कुरेदा तो भाभी सिसकारने लगी. वो बोली- बस … आ्हह … अब डाल दे. मेरी चूत को चोद दे. मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है.
मैंने तेजी के साथ भाभी की चूत में उंगली को चलाना शुरू कर दिया.
भाभी पागल सी हो उठी और मुझे अपने ऊपर खींचने लगी.
उसके बाद मैंने भाभी के बूब्स को जोर से दबाया और उसके होंठों को चूसने लगा. फिर हम 69 की पोजीशन में आ गये. भाभी ने मेरे लंड को मुंह में ले लिया और उसे जोर से चूसने लगी.
मैं भी भाभी की चूत को जीभ से ही चोदने लगा. मैं अपनी गांड को उठा उठा कर भाभी के मुंह में लंड को धकेल रहा था. भाभी भी मेरे लंड को चूस-चाट रही थी. दोनों ही पागल से हो गये थे.
ऐसे ही चूसते हुए मैंने भाभी के मुंह में ही माल छोड़ दिया क्योंकि मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ. भाभी के मुंह में मेरा सारा वीर्य निकल गया. भाभी ने भी चूत का पानी छोड़ दिया. मैंने उसकी चूत को चाट लिया. उसकी चूत का सारा पानी पी लिया.
फिर भाभी उठी और मेरे माल को उसने बाहर थूक दिया. कुछ देर के लिए हम शांत हो गये. मगर फिर दोबारा से मैंने भाभी की चूत को सहलाना शुरू कर दिया. वो भी मेरे लंड को पकड़ कर हाथ से सहलाने लगी.
कुछ ही देर के बाद हम दोनों फिर से गर्म हो गये. मैंने भाभी की चूत में दो उंगली डाल दी. कुछ ही देर के बाद भाभी के मुंह से फिर से सिसकारियां निकलने लगीं. वो अपनी टांगों को फैलाने लगी. मेरा लंड भी अब खड़ा हो चुका था.
भाभी बोली- अब चोद दो मुझे. मेरी चूत को फाड़ दो.
मैंने भाभी की चूत को हथेली से रगड़ दिया और उसकी टांगों को चौड़ी कर दिया.
उसको नीचे लिटा कर मैंने अपने लंड को भाभी की चूत पर सेट कर दिया.
मैंने भाभी की चूत पर अपने लंड को सेट कर दिया और धक्का लगाने लगा. मगर मेरा लंड उसकी चूत पर से फिसल गया. भाभी की चूत काफी चिकनी हो चुकी थी. फिर भी मैंने लंड पर थोड़ी सी क्रीम लगाई और दोबारा से उसकी चूत पर लंड सेट कर दिया. भाभी ने मेरे लंड को पकड़ कर खुद अपनी चूत के छेद पर सेट करवा लिया.
लौड़े को चूत पर रख कर मैंने जोर से एक धक्का दिया तो फिसल कर आधा लंड भाभी की चूत में उतर गया. चूत में लंड जाते ही भाभी के मुंह से आह्ह … करके एक चीख सी निकल गयी.
वो बोली- ऐसे नहीं बोला था कुत्ते … वापस निकाल इसको मादरचोद. फाड़ दी मेरी चूत आह्ह … बहुत दर्द हो रहा है. इसे निकाल बाहर!
भाभी कराहने लगी मगर मैंने भाभी की एक न सुनी और दोबारा से एक शॉट उसकी चूत में लगा दिया. मैंने पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया.
उसकी चूत दर्द से कुलबुला उठी और भाभी मुझे पीछे धकेलने लगी. उसके बाद मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया. होंठों को चूसते हुए मैं भाभी के नंगे जिस्म पर लेट गया.
कुछ देर के बाद जब उसको थोड़ी राहत मिली तो मैंने धीरे धीरे करके उसकी चूत में लंड को चलाना शुरू कर दिया.
जब मैंने स्पीड बढ़ाई तो भाभी के मुंह से हल्की दर्द भरी आवाजें निकलने लगीं- आह्ह उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओह्ह … आराम से।
मैं धीरे धीरे उसकी चूत को चोदने लगा.
थोड़ी ही देर के बाद भाभी की चूत को मैंने तेजी के साथ चोदना शुरू कर दिया. मैं अब जोर से उसकी चूत में धक्के लगा रहा था. भाभी के मुंह से अब मादक सिसकारियां निकल रही थीं.
वो अब मेरा पूरा साथ दे रही थी. उसके मुंह से कामुक आवाजें निकलने लगीं- आह्ह … और तेज … आह्ह … मजा आ रहा है … चोदो … देवा … और तेजी से … ओह्सश् मसल दो मेरी चूत को.
मैं भी भाभी की चूत को मस्ती में पेलने लगा. अब वो गांड उठा उठा कर मेरे लंड को अपनी चूत में लेने लगी. मैं उसकी चूत में धक्के लगा रहा था और चुदक्कड़ भाभी नीचे से अपनी गांड उठा कर मेरे लंड की तरफ चूत को धकेल रही थी. दोनों ही आनंद में डूब गये थे.
बीस मिनट तक भाभी की चूत को पेलने के बाद वो एकदम से झड़ने लगी. उसकी चूत ने ढेर सारा पानी छोड़ दिया. मेरा लंड अभी भी उसकी चूत में अंदर बाहर रहा था. चुदाई के कारण चूत से पच पच की आवाज होने लगी. मैं चोदता रहा और भाभी बेसुध सी होकर चुदती रही.
फिर मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी. मैंने तेजी के साथ फच-फच करते हुए भाभी की चूत में लंड को पेलना शुरू कर दिया. मैं जोर से उसकी चिकनी चूत को पेलने लगा. उसके बाद मेरा भी वीर्य निकलने को हो गया. 15-20 शॉट जोर से लगाने के बाद मैंने भाभी की चूत में ही वीर्य छोड़ना शुरू कर दिया.
मेरा पूरा बदन अकड़ गया. मैंने सारा वीर्य चूत में छोड़ दिया और भाभी के ऊपर हांफते हुए गिर गया. वो मेरी पीठ को सहलाने लगी. दो मिनट तक हम ऐसे ही एक दूसरे के ऊपर पड़े रहे.
उसके बाद हम दोनों उठ गये. हमने एक दूसरे को साफ किया. फिर हम अपने अपने कपड़े पहनने लगे.
भाभी बोली- अब मेरी मां आने वाली होंगी. अब तुम्हें निकल जाना चाहिए.
फिर मैंने भाभी को हग किया और उन्होंने मुझे किस किया. भाभी के चेहरे पर खुशी अलग से ही दिखाई दे रही थी. फिर मैं उनको बाय बोल कर वहां से निकल आया. भाभी ने अपने ही घर में अपनी चूत चुदवा ली. मुझे बहुत मजा आया.
यह घटना होने के कुछ दिन के बाद फिर मैं मुंबई चला गया. मुंबई में मैं जॉब करने लगा और कभी कभार ही घर जाता था. मगर इस दौरान मैं भाभी से मिल कर ही जाता था.
मैं भी भाभी की चूत को जीभ से ही चोदने लगा. मैं अपनी गांड को उठा उठा कर भाभी के मुंह में लंड को धकेल रहा था. भाभी भी मेरे लंड को चूस-चाट रही थी. दोनों ही पागल से हो गये थे.
ऐसे ही चूसते हुए मैंने भाभी के मुंह में ही माल छोड़ दिया क्योंकि मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ. भाभी के मुंह में मेरा सारा वीर्य निकल गया. भाभी ने भी चूत का पानी छोड़ दिया. मैंने उसकी चूत को चाट लिया. उसकी चूत का सारा पानी पी लिया.
फिर भाभी उठी और मेरे माल को उसने बाहर थूक दिया. कुछ देर के लिए हम शांत हो गये. मगर फिर दोबारा से मैंने भाभी की चूत को सहलाना शुरू कर दिया. वो भी मेरे लंड को पकड़ कर हाथ से सहलाने लगी.
कुछ ही देर के बाद हम दोनों फिर से गर्म हो गये. मैंने भाभी की चूत में दो उंगली डाल दी. कुछ ही देर के बाद भाभी के मुंह से फिर से सिसकारियां निकलने लगीं. वो अपनी टांगों को फैलाने लगी. मेरा लंड भी अब खड़ा हो चुका था.
भाभी बोली- अब चोद दो मुझे. मेरी चूत को फाड़ दो.
मैंने भाभी की चूत को हथेली से रगड़ दिया और उसकी टांगों को चौड़ी कर दिया.
उसको नीचे लिटा कर मैंने अपने लंड को भाभी की चूत पर सेट कर दिया.
मैंने भाभी की चूत पर अपने लंड को सेट कर दिया और धक्का लगाने लगा. मगर मेरा लंड उसकी चूत पर से फिसल गया. भाभी की चूत काफी चिकनी हो चुकी थी. फिर भी मैंने लंड पर थोड़ी सी क्रीम लगाई और दोबारा से उसकी चूत पर लंड सेट कर दिया. भाभी ने मेरे लंड को पकड़ कर खुद अपनी चूत के छेद पर सेट करवा लिया.
लौड़े को चूत पर रख कर मैंने जोर से एक धक्का दिया तो फिसल कर आधा लंड भाभी की चूत में उतर गया. चूत में लंड जाते ही भाभी के मुंह से आह्ह … करके एक चीख सी निकल गयी.
वो बोली- ऐसे नहीं बोला था कुत्ते … वापस निकाल इसको मादरचोद. फाड़ दी मेरी चूत आह्ह … बहुत दर्द हो रहा है. इसे निकाल बाहर!
भाभी कराहने लगी मगर मैंने भाभी की एक न सुनी और दोबारा से एक शॉट उसकी चूत में लगा दिया. मैंने पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया.
उसकी चूत दर्द से कुलबुला उठी और भाभी मुझे पीछे धकेलने लगी. उसके बाद मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया. होंठों को चूसते हुए मैं भाभी के नंगे जिस्म पर लेट गया.
कुछ देर के बाद जब उसको थोड़ी राहत मिली तो मैंने धीरे धीरे करके उसकी चूत में लंड को चलाना शुरू कर दिया.
जब मैंने स्पीड बढ़ाई तो भाभी के मुंह से हल्की दर्द भरी आवाजें निकलने लगीं- आह्ह उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओह्ह … आराम से।
मैं धीरे धीरे उसकी चूत को चोदने लगा.
थोड़ी ही देर के बाद भाभी की चूत को मैंने तेजी के साथ चोदना शुरू कर दिया. मैं अब जोर से उसकी चूत में धक्के लगा रहा था. भाभी के मुंह से अब मादक सिसकारियां निकल रही थीं.
वो अब मेरा पूरा साथ दे रही थी. उसके मुंह से कामुक आवाजें निकलने लगीं- आह्ह … और तेज … आह्ह … मजा आ रहा है … चोदो … देवा … और तेजी से … ओह्सश् मसल दो मेरी चूत को.
मैं भी भाभी की चूत को मस्ती में पेलने लगा. अब वो गांड उठा उठा कर मेरे लंड को अपनी चूत में लेने लगी. मैं उसकी चूत में धक्के लगा रहा था और चुदक्कड़ भाभी नीचे से अपनी गांड उठा कर मेरे लंड की तरफ चूत को धकेल रही थी. दोनों ही आनंद में डूब गये थे.
बीस मिनट तक भाभी की चूत को पेलने के बाद वो एकदम से झड़ने लगी. उसकी चूत ने ढेर सारा पानी छोड़ दिया. मेरा लंड अभी भी उसकी चूत में अंदर बाहर रहा था. चुदाई के कारण चूत से पच पच की आवाज होने लगी. मैं चोदता रहा और भाभी बेसुध सी होकर चुदती रही.
फिर मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी. मैंने तेजी के साथ फच-फच करते हुए भाभी की चूत में लंड को पेलना शुरू कर दिया. मैं जोर से उसकी चिकनी चूत को पेलने लगा. उसके बाद मेरा भी वीर्य निकलने को हो गया. 15-20 शॉट जोर से लगाने के बाद मैंने भाभी की चूत में ही वीर्य छोड़ना शुरू कर दिया.
मेरा पूरा बदन अकड़ गया. मैंने सारा वीर्य चूत में छोड़ दिया और भाभी के ऊपर हांफते हुए गिर गया. वो मेरी पीठ को सहलाने लगी. दो मिनट तक हम ऐसे ही एक दूसरे के ऊपर पड़े रहे.
उसके बाद हम दोनों उठ गये. हमने एक दूसरे को साफ किया. फिर हम अपने अपने कपड़े पहनने लगे.
भाभी बोली- अब मेरी मां आने वाली होंगी. अब तुम्हें निकल जाना चाहिए.
फिर मैंने भाभी को हग किया और उन्होंने मुझे किस किया. भाभी के चेहरे पर खुशी अलग से ही दिखाई दे रही थी. फिर मैं उनको बाय बोल कर वहां से निकल आया. भाभी ने अपने ही घर में अपनी चूत चुदवा ली. मुझे बहुत मजा आया.
यह घटना होने के कुछ दिन के बाद फिर मैं मुंबई चला गया. मुंबई में मैं जॉब करने लगा और कभी कभार ही घर जाता था. मगर इस दौरान मैं भाभी से मिल कर ही जाता था.
❤1👍1
हमें मौका मिलता था तो हम चुदाई भी कर लिया करते थे. अभी भी यह सिलसिला चल रहा है. मुझे भाभी के साथ सेक्स का पूरा मजा मिलता है. मैंने कई लड़कियों की चूत मारी है लेकिन भाभी के साथ जो मजा आता है वो किसी के साथ नहीं आया मुझे.
Hindi Antarvasana:
लैब असिस्टेंट का अकेलापन चुदाई से दूर किया
हिंदी चुदाई कहानी में मेरे साथ एक लड़की काम करती थी. उसका उसके पति से झगड़ा हो गया तो उसे सेक्स की कमी लगने लगी. तब हम दोनों ने आपस में सेक्स करके मजा किया.
दोस्तो, मैं राजेंद्र कोटा से!
मेरी पिछली कहानी थी:
भाई की साली को मां बनाया
आज मैं फिर से आपके लिए अपने जीवन की एक सच्ची सेक्स कहानी लेकर आया हूँ.
यह देशी चुदाई कहानी करीब 10 साल पुरानी है.
उस समय मैं एक कॉलेज में लैब असिस्टेंट था.
मेरे साथ एक मैडम थी, वह भी लैब असिस्टेंट थी.
उस मैडम का नाम सीमा था.
हम दोनों का काम स्टूडेंट्स को मदद करना होता था.
वह मैडम देखने में बड़ी हॉट थी और स्कूल के कई टीचर्स उसकी लेने की फिराक में रहते थे.
लेकिन वह किसी को भाव ही नहीं देती थी.
जबकि वह हंसमुख बहुत ही ज्यादा थी.
उसकी इसी आदत के चलते मैं उससे काफी मजाक करता रहता था.
मेरी हमेशा मज़ाक करने की आदत भी थी, इसी वजह से मैं हमेशा कह देता था कि मैडम क्या डेट पर चलोगी?
वह मुस्करा देती थी.
उसने मुझसे कभी कुछ नहीं कहा कि आप मुझसे ऐसी बात नहीं किया करो या कुछ भी गुस्सा वाली बात नहीं दिखाई दी थी.
यदि वह मुझसे एक बार भी कह देती कि आप मुझसे यह सब नहीं कहा करो तो मेरी उसके साथ मजाक करने की कभी हिम्मत ही न होती.
हालांकि मेरे मन में कुछ गलत नहीं था, बस इतना कहने का मन करता था और मैं हमेशा ही ऐसा कहकर उसको छेड़ देता था.
जब स्टूडेंट्स की और टीचर्स की छुट्टियां भी हो जाती थीं, तब भी हम दोनों की ड्यूटी होती थी क्योंकि हम दोनों टीचिंग स्टाफ में नहीं थे.
धीरे धीरे हम दोनों काफी नजदीक आते गए.
साथ में टिफिन शेयर करना, एक दूसरे के काम कर देना, यही सब चलता रहता था.
वह मेरे खाने की बड़ी तारीफ करती थी और मैं उसके हाथ के बने खाने की तारीफ करता था.
मैं रोजाना उसकी आदतों को लेकर तारीफ करता रहता था तो वह कहती- आप झूठे हो, मुझे यूं ही बनाते हो.
मैं भी कह देता- चलो झूठ को ही सच मान लो, क्या घट जाएगा!
इस पर वह हंस पड़ती थी.
एक बार उसने मेरे सामने अपना दुखड़ा रोया कि उसके पति ने उसे छोड़ दिया और वह काफी अकेला महसूस कर रही है.
मैं समझ गया कि इसको क्या अकेलापन लग रहा है.
मैंने उसे दिलासा देते हुए कहा- तुम मुझसे अपने दिल की बात कह कर अपना मन हल्का कर लिया करो.
उसने मेरी तरफ देखा और वह मेरे कंधे से सर लगा कर लंबी लंबी सांसें लेने लगी.
इसी तरह से वह मेरे साथ काफी क्लोज हो गई थी.
गर्मी की छुट्टी में हम दोनों रोजाना कॉलेज जाते थे और लैब में ही होते थे.
उस दौरान टाइम निकालना मुश्किल होता था क्योंकि हमारे पास कोई काम तो होता नहीं था, बस यूं ही बैठ कर समय गुजार देते थे.
एक दिन सीमा मैडम ने कहा- सर आप रोज मुझे कहते हो कि डेट पर चलो, डेट पर चलो. आज बोलो कहां चलना है!
मैं उसकी इस बात को सुन कर एकदम से स्तब्ध रह गया.
मैंने उसकी तरफ सवालिया नजरों से देखा.
तो वह बोली- ये बात किसी से नहीं कहना, मैं सच में आपके साथ चलूँगी.
यह कहती हुई वह मेरे पास आकर बैठ गयी.
वह मेरे काफी करीब बैठी थी, बोली- आपने ही तो कहा था कि अपने दिल की बात मुझसे कह कर अपना मन हल्का कर लिया करो!
मैंने उसकी आंख में आंख डालकर देखा और पूछा- क्या सच में डेट पर चलना है?
वह बोली- हां!
मैंने कहा- मालूम है कि डेट पर चलने का अर्थ क्या होता है?
वह हंस दी और बोली- नहीं मालूम है … आप बताओ कि डेट पर चल कर क्या होता है?
जबाव में मैंने अपना हाथ उसकी जांघ पर रखा, तो उसने भी मेरे हाथ के ऊपर अपना हाथ रख दिया.
मुझे समझ आ गया कि आज यह मुझसे कुछ चाह रही है.
मैंने उसे चूमा, तो वह उठकर गेट के पास गयी और इधर उधर देख कर वापस आ गयी.
आते ही वह मेरी गोद में बैठी और कुछ सेकंड के बाद उठ गयी.
वह वापस दरवाजे के पास चली गयी.
दुबारा से उसने इधर उधर झांक कर देखा और फिर से मेरे पास आकर बैठ गयी.
मैंने उसके गाल पर उंगली फिराई, वह शांत रही.
मैंने उंगली ऊपर से नीचे उसके 36 साइज के मम्मों पर फेरना चालू की, तब भी वह चुप रही.
तब मैंने उसके एक दूध को कसके पकड़ लिया.
उसने एक गहरी सांस ली और हवस भरी निगाहों से मुझे देखने लगी.
अब तक मेरे भी तन बदन में आग लग चुकी थी.
मेरा लंड फनफना रहा था, मेरी भी सांसें तेज हो चुकी थीं.
मैं बार बार लंड पर हाथ रख रहा था.
वह यह नजारा देख रही थी.
फिर मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर ले गया.
जैसे ही उसने मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड पर हाथ रखा, वह ऊपर से नीचे तक सिहर गयी.
उसने अपने होंठों को दांत से काटना शुरू कर दिया और आंख बंद करके लंड को सहलाने लगी.
मैं भी उसकी चूचियों को दबाता हुआ सहला रहा था.
उस दौरान वह अपने होंठों को अपने दांतों से काटती गयी.
उसने कहा- अब मुझसे रहा नहीं जाता!
मैंने कहा- अभी इधर ही डेट पूरी कर लें?
उसने हां में सर हिला दिया.
लैब असिस्टेंट का अकेलापन चुदाई से दूर किया
हिंदी चुदाई कहानी में मेरे साथ एक लड़की काम करती थी. उसका उसके पति से झगड़ा हो गया तो उसे सेक्स की कमी लगने लगी. तब हम दोनों ने आपस में सेक्स करके मजा किया.
दोस्तो, मैं राजेंद्र कोटा से!
मेरी पिछली कहानी थी:
भाई की साली को मां बनाया
आज मैं फिर से आपके लिए अपने जीवन की एक सच्ची सेक्स कहानी लेकर आया हूँ.
यह देशी चुदाई कहानी करीब 10 साल पुरानी है.
उस समय मैं एक कॉलेज में लैब असिस्टेंट था.
मेरे साथ एक मैडम थी, वह भी लैब असिस्टेंट थी.
उस मैडम का नाम सीमा था.
हम दोनों का काम स्टूडेंट्स को मदद करना होता था.
वह मैडम देखने में बड़ी हॉट थी और स्कूल के कई टीचर्स उसकी लेने की फिराक में रहते थे.
लेकिन वह किसी को भाव ही नहीं देती थी.
जबकि वह हंसमुख बहुत ही ज्यादा थी.
उसकी इसी आदत के चलते मैं उससे काफी मजाक करता रहता था.
मेरी हमेशा मज़ाक करने की आदत भी थी, इसी वजह से मैं हमेशा कह देता था कि मैडम क्या डेट पर चलोगी?
वह मुस्करा देती थी.
उसने मुझसे कभी कुछ नहीं कहा कि आप मुझसे ऐसी बात नहीं किया करो या कुछ भी गुस्सा वाली बात नहीं दिखाई दी थी.
यदि वह मुझसे एक बार भी कह देती कि आप मुझसे यह सब नहीं कहा करो तो मेरी उसके साथ मजाक करने की कभी हिम्मत ही न होती.
हालांकि मेरे मन में कुछ गलत नहीं था, बस इतना कहने का मन करता था और मैं हमेशा ही ऐसा कहकर उसको छेड़ देता था.
जब स्टूडेंट्स की और टीचर्स की छुट्टियां भी हो जाती थीं, तब भी हम दोनों की ड्यूटी होती थी क्योंकि हम दोनों टीचिंग स्टाफ में नहीं थे.
धीरे धीरे हम दोनों काफी नजदीक आते गए.
साथ में टिफिन शेयर करना, एक दूसरे के काम कर देना, यही सब चलता रहता था.
वह मेरे खाने की बड़ी तारीफ करती थी और मैं उसके हाथ के बने खाने की तारीफ करता था.
मैं रोजाना उसकी आदतों को लेकर तारीफ करता रहता था तो वह कहती- आप झूठे हो, मुझे यूं ही बनाते हो.
मैं भी कह देता- चलो झूठ को ही सच मान लो, क्या घट जाएगा!
इस पर वह हंस पड़ती थी.
एक बार उसने मेरे सामने अपना दुखड़ा रोया कि उसके पति ने उसे छोड़ दिया और वह काफी अकेला महसूस कर रही है.
मैं समझ गया कि इसको क्या अकेलापन लग रहा है.
मैंने उसे दिलासा देते हुए कहा- तुम मुझसे अपने दिल की बात कह कर अपना मन हल्का कर लिया करो.
उसने मेरी तरफ देखा और वह मेरे कंधे से सर लगा कर लंबी लंबी सांसें लेने लगी.
इसी तरह से वह मेरे साथ काफी क्लोज हो गई थी.
गर्मी की छुट्टी में हम दोनों रोजाना कॉलेज जाते थे और लैब में ही होते थे.
उस दौरान टाइम निकालना मुश्किल होता था क्योंकि हमारे पास कोई काम तो होता नहीं था, बस यूं ही बैठ कर समय गुजार देते थे.
एक दिन सीमा मैडम ने कहा- सर आप रोज मुझे कहते हो कि डेट पर चलो, डेट पर चलो. आज बोलो कहां चलना है!
मैं उसकी इस बात को सुन कर एकदम से स्तब्ध रह गया.
मैंने उसकी तरफ सवालिया नजरों से देखा.
तो वह बोली- ये बात किसी से नहीं कहना, मैं सच में आपके साथ चलूँगी.
यह कहती हुई वह मेरे पास आकर बैठ गयी.
वह मेरे काफी करीब बैठी थी, बोली- आपने ही तो कहा था कि अपने दिल की बात मुझसे कह कर अपना मन हल्का कर लिया करो!
मैंने उसकी आंख में आंख डालकर देखा और पूछा- क्या सच में डेट पर चलना है?
वह बोली- हां!
मैंने कहा- मालूम है कि डेट पर चलने का अर्थ क्या होता है?
वह हंस दी और बोली- नहीं मालूम है … आप बताओ कि डेट पर चल कर क्या होता है?
जबाव में मैंने अपना हाथ उसकी जांघ पर रखा, तो उसने भी मेरे हाथ के ऊपर अपना हाथ रख दिया.
मुझे समझ आ गया कि आज यह मुझसे कुछ चाह रही है.
मैंने उसे चूमा, तो वह उठकर गेट के पास गयी और इधर उधर देख कर वापस आ गयी.
आते ही वह मेरी गोद में बैठी और कुछ सेकंड के बाद उठ गयी.
वह वापस दरवाजे के पास चली गयी.
दुबारा से उसने इधर उधर झांक कर देखा और फिर से मेरे पास आकर बैठ गयी.
मैंने उसके गाल पर उंगली फिराई, वह शांत रही.
मैंने उंगली ऊपर से नीचे उसके 36 साइज के मम्मों पर फेरना चालू की, तब भी वह चुप रही.
तब मैंने उसके एक दूध को कसके पकड़ लिया.
उसने एक गहरी सांस ली और हवस भरी निगाहों से मुझे देखने लगी.
अब तक मेरे भी तन बदन में आग लग चुकी थी.
मेरा लंड फनफना रहा था, मेरी भी सांसें तेज हो चुकी थीं.
मैं बार बार लंड पर हाथ रख रहा था.
वह यह नजारा देख रही थी.
फिर मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर ले गया.
जैसे ही उसने मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड पर हाथ रखा, वह ऊपर से नीचे तक सिहर गयी.
उसने अपने होंठों को दांत से काटना शुरू कर दिया और आंख बंद करके लंड को सहलाने लगी.
मैं भी उसकी चूचियों को दबाता हुआ सहला रहा था.
उस दौरान वह अपने होंठों को अपने दांतों से काटती गयी.
उसने कहा- अब मुझसे रहा नहीं जाता!
मैंने कहा- अभी इधर ही डेट पूरी कर लें?
उसने हां में सर हिला दिया.
👍2
मैं झट से उठ कर फिर से दरवाजे पर आया और देखा कि बाहर कोई है तो नहीं.
उधर कोई नहीं था.
मैं वापस आया.
वह खड़ी थी.
मैंने पीछे से उसे पकड़ा और उसकी दोनों चूचियों को कस कसके दबाने लगा.
उसका हाथ मेरे हाथ के ऊपर था.
जब जब मैं उसकी मस्त चूचियों को दबा रहा था, वह इस्स्स आह की आवाज़ निकाल रही थी.
फिर वह झटके से मेरी तरफ घूम गयी और मुझे पकड़ कर मेरे होंठों पर अपने होंठ ले आयी.
वह मुझे किस करने लगी.
उसका किस एकदम वाइल्ड किस था.
वह अपनी जीभ मेरे मुँह में घुसा रही थी, तो कभी हल्के से दांतों से काट रही थी.
उसके दोनों हाथ मेरे गाल पर आ गए थे और वह चुंबन का मजा ले रही थी.
मैंने भी अपने हाथ उसके पीछे किए और उसके दोनों उभरे हुए चूतड़ों को पकड़ कर जोर से दबाया. ताकि उसकी चूत मेरे लंड के करीब आ जाए.
जैसे ही वह मेरे लौड़े से चूत रगड़ने लगी, मैं जोर जोर से धक्का लगाने लगा.
हम दोनों की बेचैनी बढ़ रही थी, क्योंकि अभी तक हमारे जिस्म से जिस्म मिले नहीं थे. कपड़ों के ऊपर से ही ये सब हो रहा था.
उसने कहा- अब आगे बढ़ो न!
मैंने कहा- आगे बढ़ने के लिए कपड़े हटाने पड़ेंगे … हटा दूँ?
वह कुछ कहती कि तभी कोई कॉरीडोर में आता दिखाई दिया.
मैंने उससे अलग होते हुए कहा- यहां कुछ भी करना ठीक नहीं है.
वह भी अपने कपड़े ठीक करने लगी.
हम दोनों अलग अलग होकर बैठ गए और वह कुछ करने लगी, मैं किताब पढ़ने लगा.
थोड़ी देर बाद ही छुट्टी हो गयी थी.
उस दिन इससे अधिक कुछ भी नहीं हो पाया था.
बस यह था कि वह अपनी प्यास मुझसे बुझवाना चाहती थी, यह बात खुल कर सामने आ गई थी.
उसके बाद शाम को करीब 5 बजे सीमा का फ़ोन आया- सर, क्या कल आप छुट्टी कर सकते हो, मैं भी कल ऑफिस नहीं जाऊंगी … दोनों मिलकर कहीं चलते हैं.
मैंने कहा- हां ठीक है. मैं ऑफिस के लिए ही निकलूंगा, पर ऑफिस नहीं आऊंगा.
सीमा बोली- ठीक है, मैं भी वही करूंगी.
हम दोनों ने प्लान बनाया और एक जगह पर मिलने का तय किया.
मैं बाइक से उसी जगह पर पहुंच गया.
वह वहीं पर दुपट्टा से चेहरा ढक कर खड़ी थी.
फिर हम दोनों एनसीआर में एक होटल में गए.
उधर करीब 11 बजे पहुंच गए थे.
कमरा बुक किया.
हम दोनों जैसे ही कमरे के अन्दर पहुंचे, पागलों की तरह एक दूसरे को चाटने लगे.
एक एक करके सारे कपड़े उतार दिए.
अब वह सिर्फ पैंटी में थी और बेड पर लेटी नशीली आंखों से मुझे निहार रही थी.
क्या खूब लग रही थी.
फिर मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसके मम्मों को मसलने लगा, उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा.
हम दोनों के होंठ और गाल लाल हो गए थे.
मैंने उसके होंठों पर जीभ को फिराना शुरू किया और मम्मों से होते हुए नाभि पर, फिर पैंटी के पास पहुंच गया.
फिर एक गहरी सांस लेकर मैंने पैंटी को सूंघा तो मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी.
मेरा तो लंड खड़ा हो गया था, लौड़े के ऊपर से थोड़ा लसलसा सा पानी भी निकलने लगा था.
मैंने उसकी पैंटी खोली तो देखा उसकी चूत भी पानी पानी हो चुकी थी.
उसकी चूत को मैंने थोड़ा फैला कर देखा तो एकदम टाइट चूत थी.
अन्दर का रंग एकदम गुलाबी था.
मैंने जीभ को लगाया तो वह सिहर गयी और गांड हिलाने लगी.
मैं उसकी चूत पर अपनी जीभ फिराने लगा.
वह अपने दोनों हाथ ऊपर करके तकिए को अपनी मुट्ठी में पकड़ने की कोशिश कर रही थी.
फिर कुछ देर बाद वह अपनी चूत को उछालने लगी.
मैं एक उंगली डाल कर अन्दर बाहर करने लगा.
वह काफी ज्यादा कामुक हो चुकी थी, उसके माथे से पसीना निकलने लगा था.
वह कहने लगी- अब बर्दाश्त के बाहर है, मुझे चोद दो … मेरी वासना की पूर्ति कर दो … मेरा मन भर दो … चोद दो मुझे … आज मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ.
तब वह मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.
वह ऐसे लंड चूस रही थी कि न जाने कितनी प्यासी हो.
मेरे भी तन बदन में आग लग चुकी थी.
मैं उसकी ज्वाला को शांत करने के लिए तैयार था.
जैसे ही उसने मेरा लंड अपने मुँह से निकाला, मैंने उसकी दोनों टांगों को फैला कर उसकी चूत पर लंड का सुपाड़ा रख दिया और एक ही झटके में अन्दर घुसा दिया.
वह ‘आआ अह मर गई …’ की आवाज़ निकालने लगी.
मैं झटके पर झटके दे रहा था और कुछ ही देर में वह भी मजा लेने लगी.
वह कभी अपने बूब मसलती तो कभी मेरे बालों में उंगली फिराती.
इस तरह से मैंने उसे काफी देर तक चोदा और झड़ कर हम दोनों निढाल होकर सो गए.
करीब एक घंटा बाद जब हम दोनों उठे तो एक दूसरे को चूम कर मुस्कुराने लगे.
बहुत तेज भूख लग आई थी.
फिर नीचे जाकर हम दोनों ने खाना खाया और मैंने वहीं मेडिकल स्टोर से सेक्स समय बढ़ाने वाली दवा ले ली.
अब तो हमारे बीच सेक्स और भी ज्यादा वाइल्ड और हार्डकोर हो गया था.
मैंने उसे हचक कर चोदा. उसकी चूत का सत्यानाश कर दिया.
शाम को ऑफिस के टाइम पर ही होटल से अपने अपने घरों को निकल गए.
उसके बाद मैंने कई बार सीमा को चोदा. कई बार उसके घर जाकर भी उसे चोदा.
उधर कोई नहीं था.
मैं वापस आया.
वह खड़ी थी.
मैंने पीछे से उसे पकड़ा और उसकी दोनों चूचियों को कस कसके दबाने लगा.
उसका हाथ मेरे हाथ के ऊपर था.
जब जब मैं उसकी मस्त चूचियों को दबा रहा था, वह इस्स्स आह की आवाज़ निकाल रही थी.
फिर वह झटके से मेरी तरफ घूम गयी और मुझे पकड़ कर मेरे होंठों पर अपने होंठ ले आयी.
वह मुझे किस करने लगी.
उसका किस एकदम वाइल्ड किस था.
वह अपनी जीभ मेरे मुँह में घुसा रही थी, तो कभी हल्के से दांतों से काट रही थी.
उसके दोनों हाथ मेरे गाल पर आ गए थे और वह चुंबन का मजा ले रही थी.
मैंने भी अपने हाथ उसके पीछे किए और उसके दोनों उभरे हुए चूतड़ों को पकड़ कर जोर से दबाया. ताकि उसकी चूत मेरे लंड के करीब आ जाए.
जैसे ही वह मेरे लौड़े से चूत रगड़ने लगी, मैं जोर जोर से धक्का लगाने लगा.
हम दोनों की बेचैनी बढ़ रही थी, क्योंकि अभी तक हमारे जिस्म से जिस्म मिले नहीं थे. कपड़ों के ऊपर से ही ये सब हो रहा था.
उसने कहा- अब आगे बढ़ो न!
मैंने कहा- आगे बढ़ने के लिए कपड़े हटाने पड़ेंगे … हटा दूँ?
वह कुछ कहती कि तभी कोई कॉरीडोर में आता दिखाई दिया.
मैंने उससे अलग होते हुए कहा- यहां कुछ भी करना ठीक नहीं है.
वह भी अपने कपड़े ठीक करने लगी.
हम दोनों अलग अलग होकर बैठ गए और वह कुछ करने लगी, मैं किताब पढ़ने लगा.
थोड़ी देर बाद ही छुट्टी हो गयी थी.
उस दिन इससे अधिक कुछ भी नहीं हो पाया था.
बस यह था कि वह अपनी प्यास मुझसे बुझवाना चाहती थी, यह बात खुल कर सामने आ गई थी.
उसके बाद शाम को करीब 5 बजे सीमा का फ़ोन आया- सर, क्या कल आप छुट्टी कर सकते हो, मैं भी कल ऑफिस नहीं जाऊंगी … दोनों मिलकर कहीं चलते हैं.
मैंने कहा- हां ठीक है. मैं ऑफिस के लिए ही निकलूंगा, पर ऑफिस नहीं आऊंगा.
सीमा बोली- ठीक है, मैं भी वही करूंगी.
हम दोनों ने प्लान बनाया और एक जगह पर मिलने का तय किया.
मैं बाइक से उसी जगह पर पहुंच गया.
वह वहीं पर दुपट्टा से चेहरा ढक कर खड़ी थी.
फिर हम दोनों एनसीआर में एक होटल में गए.
उधर करीब 11 बजे पहुंच गए थे.
कमरा बुक किया.
हम दोनों जैसे ही कमरे के अन्दर पहुंचे, पागलों की तरह एक दूसरे को चाटने लगे.
एक एक करके सारे कपड़े उतार दिए.
अब वह सिर्फ पैंटी में थी और बेड पर लेटी नशीली आंखों से मुझे निहार रही थी.
क्या खूब लग रही थी.
फिर मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसके मम्मों को मसलने लगा, उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा.
हम दोनों के होंठ और गाल लाल हो गए थे.
मैंने उसके होंठों पर जीभ को फिराना शुरू किया और मम्मों से होते हुए नाभि पर, फिर पैंटी के पास पहुंच गया.
फिर एक गहरी सांस लेकर मैंने पैंटी को सूंघा तो मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी.
मेरा तो लंड खड़ा हो गया था, लौड़े के ऊपर से थोड़ा लसलसा सा पानी भी निकलने लगा था.
मैंने उसकी पैंटी खोली तो देखा उसकी चूत भी पानी पानी हो चुकी थी.
उसकी चूत को मैंने थोड़ा फैला कर देखा तो एकदम टाइट चूत थी.
अन्दर का रंग एकदम गुलाबी था.
मैंने जीभ को लगाया तो वह सिहर गयी और गांड हिलाने लगी.
मैं उसकी चूत पर अपनी जीभ फिराने लगा.
वह अपने दोनों हाथ ऊपर करके तकिए को अपनी मुट्ठी में पकड़ने की कोशिश कर रही थी.
फिर कुछ देर बाद वह अपनी चूत को उछालने लगी.
मैं एक उंगली डाल कर अन्दर बाहर करने लगा.
वह काफी ज्यादा कामुक हो चुकी थी, उसके माथे से पसीना निकलने लगा था.
वह कहने लगी- अब बर्दाश्त के बाहर है, मुझे चोद दो … मेरी वासना की पूर्ति कर दो … मेरा मन भर दो … चोद दो मुझे … आज मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ.
तब वह मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.
वह ऐसे लंड चूस रही थी कि न जाने कितनी प्यासी हो.
मेरे भी तन बदन में आग लग चुकी थी.
मैं उसकी ज्वाला को शांत करने के लिए तैयार था.
जैसे ही उसने मेरा लंड अपने मुँह से निकाला, मैंने उसकी दोनों टांगों को फैला कर उसकी चूत पर लंड का सुपाड़ा रख दिया और एक ही झटके में अन्दर घुसा दिया.
वह ‘आआ अह मर गई …’ की आवाज़ निकालने लगी.
मैं झटके पर झटके दे रहा था और कुछ ही देर में वह भी मजा लेने लगी.
वह कभी अपने बूब मसलती तो कभी मेरे बालों में उंगली फिराती.
इस तरह से मैंने उसे काफी देर तक चोदा और झड़ कर हम दोनों निढाल होकर सो गए.
करीब एक घंटा बाद जब हम दोनों उठे तो एक दूसरे को चूम कर मुस्कुराने लगे.
बहुत तेज भूख लग आई थी.
फिर नीचे जाकर हम दोनों ने खाना खाया और मैंने वहीं मेडिकल स्टोर से सेक्स समय बढ़ाने वाली दवा ले ली.
अब तो हमारे बीच सेक्स और भी ज्यादा वाइल्ड और हार्डकोर हो गया था.
मैंने उसे हचक कर चोदा. उसकी चूत का सत्यानाश कर दिया.
शाम को ऑफिस के टाइम पर ही होटल से अपने अपने घरों को निकल गए.
उसके बाद मैंने कई बार सीमा को चोदा. कई बार उसके घर जाकर भी उसे चोदा.
👍1
Antarvasana story:
फेसबुक पर मिली लड़की को होटल में XX....
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम अमोल है और मैं अहमदनगर शहर का निवासी हूं।
मेरी उम्र 28 साल है. मेरा रंग गोरा है और मेरी हाइट 5 फीट 6 इंच है. मेरे लंड का साइज 7 इंच है और इसकी मोटाई भी अच्छी है.
दोस्तो, यह कहानी है जब मे फेसबुक पर सेक्स कहानियाँ लिखता हु तब मुझे फेसबुक पर एक लड़की मिली जिसे मेरी कहानियाँ पसंद आयी थी जिसको मैंने उसके शहर में जाकर सेक्स का मजा दिया.
वैसे तो मेरी गर्लफ्रेंड से रह चुकी हैं और मैंने बहुत बार चुदाई की है पर यह लड़की मुझे लॉकडाउन के समय फेसबुक पर मिली जिसको मैंने होटल में चोदा !
दोस्तो, मैंने लॉकडाउन में भारी अंतर के चलते फेसबुक पर कहानियाँ लिखना शुरु किया।वहां मैंने अपनी सुंदर सुंदर फोटो लगा दी ताकि मेरी प्रोफाइल अच्छी लगे और अपने बारे में लिख दिया।
उसके बाद मेरी बहुत लड़कियों से बात हुई.
परंतु एक लड़की से बात हुई जोकि पुणे में रहती थी।
लड़की का नाम श्रेया था.
शुरू शुरू में हमारी नॉर्मल बातें हुई जैसे कि आप क्या करते हैं कहां रहते हैं।यह सब एक महीने तक चलता रहा.
उसके बाद हमारी थोड़ी बहुत नॉनवेज बातें होने लग गई और 1 महीने तक हम चुदाई की बातें भी करने लगे।
वह बहुत टाइम से सिंगल थी और लगभग 1 साल से चुदी नहीं थी.
पर मैंने तो मार्च में ही चुदाई की थी और मन तो मेरा भी बहुत कर रहा था किसी की चूत चोदने के लिए!
मेरा लंड हमेशा तैयार रहता था.
श्रेया का रंग गोरा था. उसकी हाइट 5 फुट 7 इंच के करीब थी, शरीर भरा हुआ था. उसके बूब्ज़ 36 इंच के थे और उसकी गांड उससे भी बड़ी 40 इंच की थी।
काम के चलते हम मिल नहीं सकते थे तो वह वीडियो कॉल कर मुझे अपनी चूची और अपनी गांड दिखाया करती थी और मैं उसे देखकर अपना लंड हिलाता था।
श्रेया शुरू से ही हॉट थी वह वीडियो कॉल पर भी अपनी चूत में उंगली करके मुझे दिखाती थी और अपनी चूत में उंगली करते हुए मुझे वीडियो भेजती थी।
हम दोनों एक दूसरे से चुदाई की बातें करके गर्म हो जाते थे और इंतजार कर रहे थे कि कब मिलकर एक दूसरे की आग बुझायें।
और बहुत सब्र करने के बाद वह दिन आया हम दोनों को मिलने का मौका मिला।
उसने उसके ही शहर में पुणे में एक होटल में रूम बुक किया.वह अपनी सहेली के घर रुकने का बहाना लगाकर मुझसे मिलने आई।उसे पता था कि आज हम पूरी रात चुदाई करने वाले हैं.
हमने होटल में एंट्री की और रूम में चले गए। अब हमारे पास पूरी रात थी।वहां जाकर हम ने चेंज किया और अपने नाइट सूट पहन लिए।वह अपने घर से ही पीने के लिए फ्लेवर्ड हुक्का लेकर आई थी। उसने सुलगाया और उसमें फ्लेवर डालकर करके कश लगाने लगी।फिर उसने एक बीयर मंगवाई और पूरी बीयर खत्म कर गई।
उसके बाद हमने खाना खाया और थोड़ी बहुत बातें की.
उसके बाद उसने एक बीयर और खत्म कर दी जिससे उसे नशा हो गया।और फिर उसने मुझे अपनी बांहों में ले लिया, मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर चूसने लगी।10 से 15 मिनट तक हम दोनों एक दूसरे के होंठ चूसते रहे और मैं उसकी गांड से खेलता रहा.हम दोनों गर्म होने लगे थे।
उससे बीयर चढ़ गई थी, उसने मेरी गर्दन पर अपने होंठ रख कर चूसना शुरू कर दिया और मैंने भी उसके गर्दन पर अपनी जीभ फेरने शुरू कर दी।गर्दन चूमते चूमते मेरे हाथ उसकी गर्दन पर चल रहे थे और मैं उसकी गांड दबा रहा था।इतने में मैंने उसे उल्टा घुमा कर उसकी गर्दन के पीछे किस करनी शुरू कर दी और दोनों हाथों से उसकी चूचियां दबाने शुरू कर दी.वो आहें भरने लगी और मेरा लंड टाइट होने लगा।उसने अपना हाथ पीछे करके मेरा लंड पकड़ लिया और मेरे लंड से खेलने लगी।उसके बाद वह वापस घूम गई और उसने मेरे होंठ चूसने शुरू कर दिये।
10 मिनट तक हमारी किस चली और उसके बाद मैंने उसकी चूचियां जोर जोर से दबाने शुरू कर दी.फिर मैंने उसकी टी-शर्ट को ऊपर कर दिया और ब्रा में से उसकी चूचियां दबाने लगा।उसके हाथ मेरी गर्दन पर थे और मैंने उसकी ब्रा उतार कर उसकी बाई तरफ वाली वाली चुची को अपने मुंह में भर लिया और उसके निप्पल चूसने लगा और साथ में अपने हाथ से दाईं तरफ वाली चूची को दबाने लगा।उसके मुंह से सिसकारियां निकल रही थी- आह अआह!
अभी तक हमें यह सब खड़े होकर कर रहे थे पर तब मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया. उसकी दोनों चूचियों को अपने मुंह में लेकर खेलने लगा. कभी मैं उसकी बायीं तरफ वाली वाली चूची को चूस रहा था और कभी दायीं तरफ वाली।फिर मैंने उसके पेट पर किस करना शुरू कर दिया और उसकी नाभि में जीभ डालने लगा.वो पागलों की तरह मेरे बालों में हाथ से रही थी।उसके पेट को चूमते हुए मैं उसकी नाभि में जीभ डालकर चाटने लगा और फिर दोबारा से मैंने उसकी चूचियां मुंह में डाल दी।
फेसबुक पर मिली लड़की को होटल में XX....
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम अमोल है और मैं अहमदनगर शहर का निवासी हूं।
मेरी उम्र 28 साल है. मेरा रंग गोरा है और मेरी हाइट 5 फीट 6 इंच है. मेरे लंड का साइज 7 इंच है और इसकी मोटाई भी अच्छी है.
दोस्तो, यह कहानी है जब मे फेसबुक पर सेक्स कहानियाँ लिखता हु तब मुझे फेसबुक पर एक लड़की मिली जिसे मेरी कहानियाँ पसंद आयी थी जिसको मैंने उसके शहर में जाकर सेक्स का मजा दिया.
वैसे तो मेरी गर्लफ्रेंड से रह चुकी हैं और मैंने बहुत बार चुदाई की है पर यह लड़की मुझे लॉकडाउन के समय फेसबुक पर मिली जिसको मैंने होटल में चोदा !
दोस्तो, मैंने लॉकडाउन में भारी अंतर के चलते फेसबुक पर कहानियाँ लिखना शुरु किया।वहां मैंने अपनी सुंदर सुंदर फोटो लगा दी ताकि मेरी प्रोफाइल अच्छी लगे और अपने बारे में लिख दिया।
उसके बाद मेरी बहुत लड़कियों से बात हुई.
परंतु एक लड़की से बात हुई जोकि पुणे में रहती थी।
लड़की का नाम श्रेया था.
शुरू शुरू में हमारी नॉर्मल बातें हुई जैसे कि आप क्या करते हैं कहां रहते हैं।यह सब एक महीने तक चलता रहा.
उसके बाद हमारी थोड़ी बहुत नॉनवेज बातें होने लग गई और 1 महीने तक हम चुदाई की बातें भी करने लगे।
वह बहुत टाइम से सिंगल थी और लगभग 1 साल से चुदी नहीं थी.
पर मैंने तो मार्च में ही चुदाई की थी और मन तो मेरा भी बहुत कर रहा था किसी की चूत चोदने के लिए!
मेरा लंड हमेशा तैयार रहता था.
श्रेया का रंग गोरा था. उसकी हाइट 5 फुट 7 इंच के करीब थी, शरीर भरा हुआ था. उसके बूब्ज़ 36 इंच के थे और उसकी गांड उससे भी बड़ी 40 इंच की थी।
काम के चलते हम मिल नहीं सकते थे तो वह वीडियो कॉल कर मुझे अपनी चूची और अपनी गांड दिखाया करती थी और मैं उसे देखकर अपना लंड हिलाता था।
श्रेया शुरू से ही हॉट थी वह वीडियो कॉल पर भी अपनी चूत में उंगली करके मुझे दिखाती थी और अपनी चूत में उंगली करते हुए मुझे वीडियो भेजती थी।
हम दोनों एक दूसरे से चुदाई की बातें करके गर्म हो जाते थे और इंतजार कर रहे थे कि कब मिलकर एक दूसरे की आग बुझायें।
और बहुत सब्र करने के बाद वह दिन आया हम दोनों को मिलने का मौका मिला।
उसने उसके ही शहर में पुणे में एक होटल में रूम बुक किया.वह अपनी सहेली के घर रुकने का बहाना लगाकर मुझसे मिलने आई।उसे पता था कि आज हम पूरी रात चुदाई करने वाले हैं.
हमने होटल में एंट्री की और रूम में चले गए। अब हमारे पास पूरी रात थी।वहां जाकर हम ने चेंज किया और अपने नाइट सूट पहन लिए।वह अपने घर से ही पीने के लिए फ्लेवर्ड हुक्का लेकर आई थी। उसने सुलगाया और उसमें फ्लेवर डालकर करके कश लगाने लगी।फिर उसने एक बीयर मंगवाई और पूरी बीयर खत्म कर गई।
उसके बाद हमने खाना खाया और थोड़ी बहुत बातें की.
उसके बाद उसने एक बीयर और खत्म कर दी जिससे उसे नशा हो गया।और फिर उसने मुझे अपनी बांहों में ले लिया, मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर चूसने लगी।10 से 15 मिनट तक हम दोनों एक दूसरे के होंठ चूसते रहे और मैं उसकी गांड से खेलता रहा.हम दोनों गर्म होने लगे थे।
उससे बीयर चढ़ गई थी, उसने मेरी गर्दन पर अपने होंठ रख कर चूसना शुरू कर दिया और मैंने भी उसके गर्दन पर अपनी जीभ फेरने शुरू कर दी।गर्दन चूमते चूमते मेरे हाथ उसकी गर्दन पर चल रहे थे और मैं उसकी गांड दबा रहा था।इतने में मैंने उसे उल्टा घुमा कर उसकी गर्दन के पीछे किस करनी शुरू कर दी और दोनों हाथों से उसकी चूचियां दबाने शुरू कर दी.वो आहें भरने लगी और मेरा लंड टाइट होने लगा।उसने अपना हाथ पीछे करके मेरा लंड पकड़ लिया और मेरे लंड से खेलने लगी।उसके बाद वह वापस घूम गई और उसने मेरे होंठ चूसने शुरू कर दिये।
10 मिनट तक हमारी किस चली और उसके बाद मैंने उसकी चूचियां जोर जोर से दबाने शुरू कर दी.फिर मैंने उसकी टी-शर्ट को ऊपर कर दिया और ब्रा में से उसकी चूचियां दबाने लगा।उसके हाथ मेरी गर्दन पर थे और मैंने उसकी ब्रा उतार कर उसकी बाई तरफ वाली वाली चुची को अपने मुंह में भर लिया और उसके निप्पल चूसने लगा और साथ में अपने हाथ से दाईं तरफ वाली चूची को दबाने लगा।उसके मुंह से सिसकारियां निकल रही थी- आह अआह!
अभी तक हमें यह सब खड़े होकर कर रहे थे पर तब मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया. उसकी दोनों चूचियों को अपने मुंह में लेकर खेलने लगा. कभी मैं उसकी बायीं तरफ वाली वाली चूची को चूस रहा था और कभी दायीं तरफ वाली।फिर मैंने उसके पेट पर किस करना शुरू कर दिया और उसकी नाभि में जीभ डालने लगा.वो पागलों की तरह मेरे बालों में हाथ से रही थी।उसके पेट को चूमते हुए मैं उसकी नाभि में जीभ डालकर चाटने लगा और फिर दोबारा से मैंने उसकी चूचियां मुंह में डाल दी।
फिर मैंने नीचे जाकर उसका पजामा उतारा और उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को चूमने लगा।
उसकी चूत की खुशबू मुझे पागल कर रही थी।मैंने उसकी पैंटी उतारी और उसकी चूत को ऊपर से चाटने लगा।
वो पागल हो गई और सिसकारियां भरने लगी- आह आह आह!उसने अपना मेरा मुंह अपनी चूत पर दबा दिया और अपनी कमर हिला कर अपनी चूत चटवाने लगी।उसके बाद हम 69 पोजीशन में आ गए और मैंने घूम कर अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया।
उसकी चूत चाटने में मुझे बहुत मजा आ रहा था और उसने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया।
वह बिल्कुल आइसक्रीम की तरह लंड चूस रही थी और पूरा लंड मुंह में अंदर बाहर कर रही थी।फिर उसने मेरे टट्टों पर जीभ फेरनी शुरू कर दी.मुझे बहुत मजा आने लगा और मैं उसके मुंह में झटके मारने लगा।
5 मिनट तक यही सब चलता रहा और वह झड़ गई.
मैं उसका सारा माल पी गया और उसके मुंह में अपने लंड के झटके मारता रहा।वो मस्ती में मेरा लंड चूस रही थी.
मेरा एक बार भी नहीं निकला था.5 मिनट और लंड चुसवाने के बाद मैं उसके ऊपर आ गया अब मैं अपना लंड उसकी चूत पर घिसने लगा.वह पागलों की तरह सिसकारियां ले रही थी।
तभी उसने मुझे बोला- जानू अब लंड अंदर डाल दो! मेरा बहुत मन कर रहा है.और उसने अपने आप से मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुंह पर रख दिया क्योंकि वह 1 साल से चुदी नहीं थी।मैंने धीरे से लंड अंदर डाला और उसके मुंह से आह निकल गई.उसने मुझे बोला- बेबी धीरे धीरे डालना।
मैंने उसकी दोनों टाँगों को खोलकर धीरे-धीरे लंड डालना शुरू किया आधा लंड डालकर मैंने झटके मारने शुरू किए।उसकी चूत गीली होने के कारण आधा लंड अंदर चला गया.लगभग 2 मिनट बाद थोड़ा सा दर्द होने के बाद वह पूरा लंड ले गई।एकदम से पूरा लंड अंदर जाते ही उसके मुंह से चीख निकली.
मैंने धीरे-धीरे अपनी कमर चलानी शुरू कर दी.
उसे मजा आने लगा और वह आह आह करने लगी.
मैंने अपनी कमर तेज तेज चलानी शुरू कर दी और हमारी ताबड़तोड़ चुदाई की शुरुआत हो चुकी थी।उसकी आवाज सुनकर मुझे जोश चढने लगा और मैंने जोर जोर से अपना लंड उसकी चूत में पेलना शुरू कर दिया।
अब उसके मुंह में से हल्की-हल्की चीख निकलने लगी।
मैंने उसकी दोनों टांगें उठा कर अपने कंधों पर रख ली और और पैरों के भार बैठकर कर उसकी चूत में अपना लंड पेलने लगा.साथ में मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियां दबानी शुरू कर दी।उसे और मजा आने लगा.
10 मिनट तक ऐसे चुदाई करने के बाद मैंने उसको घोड़ी बना दिया और पीछे से लंड डाला और साथ में उसकी चूचियां पकड़ ली उसको पीछे से चोदना शुरू कर दिया।
मैं बहुत तेज धक्के लगा रहा था जिस वजह से उसकी चीखें निकल रही थी.5 मिनट बाद वो झड़ गयी।पर मेरा माल अभी नहीं निकला था तो मैंने उसे चोदना जारी रखा.2 मिनट बाद वो बोली- मुझे दर्द हो रहा है।
इसलिए मैं नीचे आ गया और मैंने उसको अपने ऊपर बैठा लिया उसने ऊपर आकर अपनी चूत में लंड डाल लिया और ऊपर नीचे होने लगी।मैंने दोनों हाथों से उसकी चूचियां पकड़ ली और दबाने लगा।वह अपनी चूत मेरे लंड पर मार रही थी और मैंने नीचे से झटके मारने लगा।
5 मिनट मेरे लंड पर कूदने के बाद उसने आगे पीछे होकर लंड को लेना शुरू कर दिया।इस पोज में हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था.
थोड़ी देर ऐसे ही चुदाई करने के बाद मैंने उसे बेड से नीचे उतारा और उसको बेड पर झुका दिया और पीछे से लंड डालकर उसकी चुदाई शुरू कर दी।पांच मिनट बाद जब मेरा माल गिरने को आया तो मैंने उसको घुमा कर अपना लौड़ा उसके मुंह में दे दिया और अपनी कमर हिलाने लगा।एक-दो मिनट बाद मेरा सारा माल उसके मुंह में झड़ गया।वह मेरा लंड अपने मुंह से बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी पर मैंने पूरा लंड उसके मुंह में दे रखा था।इस वजह से मेरा सारा माल उसके गले से नीचे उतर गया।मैं संतुष्ट होकर बेड पर लेट गया।
वह बाथरूम में गई और जाकर अपनी चूत और मुंह को धोकर आई और आकर मुझे गले लगा कर कर लेट गई।
उसके बाद सारी रात हमने 4 बार और चुदाई की जिसमें से हमने एक बार सुबह जब वह वापस जाने लगी तो नहाते हुए चुदाई की।
उसे मेरे साथ चुदाई कर कर बहुत मजा आया.
एक बार मेरी सहेलियों ने गोवा जाने का प्लान बनाया.
हमारा तीन दिन का प्लान था और हम लोग ट्रेन से जाने वाले थे.
तय किये गए दिन पर मैं घर से अम्मी अब्बू की इजाजत लेकर स्टेशन की तरफ निकली.
लेकिन रास्ते में मेरी टैक्सी खराब हो गई और स्टेशन तक पहुँचते पहुँचते मुझे देर हो गई.
जैसे ही मैं स्टेशन पहुंची, वैसे ही मेरी ट्रेन छूट गई और मैं उदास मन से उधर खड़ी खड़ी जाती हुई ट्रेन को देखती रही और मेरे आंसू निकल आये.
जितना दुःख मुझे ट्रेन छूटने का था उससे ज्यादा दुःख इस बात का था कि मेरी सहेलियां गोवा में मजे करने वाली हैं.
उसकी चूत की खुशबू मुझे पागल कर रही थी।मैंने उसकी पैंटी उतारी और उसकी चूत को ऊपर से चाटने लगा।
वो पागल हो गई और सिसकारियां भरने लगी- आह आह आह!उसने अपना मेरा मुंह अपनी चूत पर दबा दिया और अपनी कमर हिला कर अपनी चूत चटवाने लगी।उसके बाद हम 69 पोजीशन में आ गए और मैंने घूम कर अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया।
उसकी चूत चाटने में मुझे बहुत मजा आ रहा था और उसने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया।
वह बिल्कुल आइसक्रीम की तरह लंड चूस रही थी और पूरा लंड मुंह में अंदर बाहर कर रही थी।फिर उसने मेरे टट्टों पर जीभ फेरनी शुरू कर दी.मुझे बहुत मजा आने लगा और मैं उसके मुंह में झटके मारने लगा।
5 मिनट तक यही सब चलता रहा और वह झड़ गई.
मैं उसका सारा माल पी गया और उसके मुंह में अपने लंड के झटके मारता रहा।वो मस्ती में मेरा लंड चूस रही थी.
मेरा एक बार भी नहीं निकला था.5 मिनट और लंड चुसवाने के बाद मैं उसके ऊपर आ गया अब मैं अपना लंड उसकी चूत पर घिसने लगा.वह पागलों की तरह सिसकारियां ले रही थी।
तभी उसने मुझे बोला- जानू अब लंड अंदर डाल दो! मेरा बहुत मन कर रहा है.और उसने अपने आप से मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुंह पर रख दिया क्योंकि वह 1 साल से चुदी नहीं थी।मैंने धीरे से लंड अंदर डाला और उसके मुंह से आह निकल गई.उसने मुझे बोला- बेबी धीरे धीरे डालना।
मैंने उसकी दोनों टाँगों को खोलकर धीरे-धीरे लंड डालना शुरू किया आधा लंड डालकर मैंने झटके मारने शुरू किए।उसकी चूत गीली होने के कारण आधा लंड अंदर चला गया.लगभग 2 मिनट बाद थोड़ा सा दर्द होने के बाद वह पूरा लंड ले गई।एकदम से पूरा लंड अंदर जाते ही उसके मुंह से चीख निकली.
मैंने धीरे-धीरे अपनी कमर चलानी शुरू कर दी.
उसे मजा आने लगा और वह आह आह करने लगी.
मैंने अपनी कमर तेज तेज चलानी शुरू कर दी और हमारी ताबड़तोड़ चुदाई की शुरुआत हो चुकी थी।उसकी आवाज सुनकर मुझे जोश चढने लगा और मैंने जोर जोर से अपना लंड उसकी चूत में पेलना शुरू कर दिया।
अब उसके मुंह में से हल्की-हल्की चीख निकलने लगी।
मैंने उसकी दोनों टांगें उठा कर अपने कंधों पर रख ली और और पैरों के भार बैठकर कर उसकी चूत में अपना लंड पेलने लगा.साथ में मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियां दबानी शुरू कर दी।उसे और मजा आने लगा.
10 मिनट तक ऐसे चुदाई करने के बाद मैंने उसको घोड़ी बना दिया और पीछे से लंड डाला और साथ में उसकी चूचियां पकड़ ली उसको पीछे से चोदना शुरू कर दिया।
मैं बहुत तेज धक्के लगा रहा था जिस वजह से उसकी चीखें निकल रही थी.5 मिनट बाद वो झड़ गयी।पर मेरा माल अभी नहीं निकला था तो मैंने उसे चोदना जारी रखा.2 मिनट बाद वो बोली- मुझे दर्द हो रहा है।
इसलिए मैं नीचे आ गया और मैंने उसको अपने ऊपर बैठा लिया उसने ऊपर आकर अपनी चूत में लंड डाल लिया और ऊपर नीचे होने लगी।मैंने दोनों हाथों से उसकी चूचियां पकड़ ली और दबाने लगा।वह अपनी चूत मेरे लंड पर मार रही थी और मैंने नीचे से झटके मारने लगा।
5 मिनट मेरे लंड पर कूदने के बाद उसने आगे पीछे होकर लंड को लेना शुरू कर दिया।इस पोज में हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था.
थोड़ी देर ऐसे ही चुदाई करने के बाद मैंने उसे बेड से नीचे उतारा और उसको बेड पर झुका दिया और पीछे से लंड डालकर उसकी चुदाई शुरू कर दी।पांच मिनट बाद जब मेरा माल गिरने को आया तो मैंने उसको घुमा कर अपना लौड़ा उसके मुंह में दे दिया और अपनी कमर हिलाने लगा।एक-दो मिनट बाद मेरा सारा माल उसके मुंह में झड़ गया।वह मेरा लंड अपने मुंह से बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी पर मैंने पूरा लंड उसके मुंह में दे रखा था।इस वजह से मेरा सारा माल उसके गले से नीचे उतर गया।मैं संतुष्ट होकर बेड पर लेट गया।
वह बाथरूम में गई और जाकर अपनी चूत और मुंह को धोकर आई और आकर मुझे गले लगा कर कर लेट गई।
उसके बाद सारी रात हमने 4 बार और चुदाई की जिसमें से हमने एक बार सुबह जब वह वापस जाने लगी तो नहाते हुए चुदाई की।
उसे मेरे साथ चुदाई कर कर बहुत मजा आया.
एक बार मेरी सहेलियों ने गोवा जाने का प्लान बनाया.
हमारा तीन दिन का प्लान था और हम लोग ट्रेन से जाने वाले थे.
तय किये गए दिन पर मैं घर से अम्मी अब्बू की इजाजत लेकर स्टेशन की तरफ निकली.
लेकिन रास्ते में मेरी टैक्सी खराब हो गई और स्टेशन तक पहुँचते पहुँचते मुझे देर हो गई.
जैसे ही मैं स्टेशन पहुंची, वैसे ही मेरी ट्रेन छूट गई और मैं उदास मन से उधर खड़ी खड़ी जाती हुई ट्रेन को देखती रही और मेरे आंसू निकल आये.
जितना दुःख मुझे ट्रेन छूटने का था उससे ज्यादा दुःख इस बात का था कि मेरी सहेलियां गोवा में मजे करने वाली हैं.
👍1
तभी एक हट्टा-कट्टा बांका सजीला नौजवान भी कंधे पर बैग टाँगे दौड़ता हुआ आया और सामने से निकलती ट्रेन को देख कर जोर से हाँफते हुए बोला- बाप रे, ट्रेन तो निकल गई. अब मेरे गोवा ट्रिप का क्या होगा.
मैं समझ गई कि इस बन्दे की ट्रेन भी छूट गई है.
तभी उस लड़के ने मेरी तरफ देखा तो मैंने रोते रोते ही कहा- मेरी ट्रेन भी छूट गई, मैं भी छुट्टियां मनाने गोवा जा रही थी. अब तो घर लौटना पड़ेगा.
वह लड़का बोला- घर क्यों? मैं तो टैक्सी बुक कर रहा हूँ, सुबह तक गोवा पहुँच जाऊंगा और अपने दोस्तों से मिल लूंगा.
मैं बोली- काश मैं भी टेक्सी से जा पाती! लेकिन इतना लम्बा सफर अकेले तय करना मेरे बस में नहीं है.
वह लड़का बोला- अरे आप मेरे साथ चलो, कोई परेशानी नहीं होगी. आपको किराया भी नहीं देना पड़ेगा.
मुफ्त में गोवा जाने की बात पर मेरे मन में लालच आ गया और मैं राजी हो गई.
उस लड़के ने टैक्सी बुक की और जब हम लोग टैक्सी तक पहुंचे तो उसने मुस्कुराते हुए कहा- हेलो, मेरा नाम शेखर है.
मैंने भी मुस्कुराते हुए कहा- लो, मैंने तो आपका नाम भी नहीं पूछा था. मेरा नाम शबनम है.
अब हम दोनों अपना सामान चढ़ा कर टैक्सी में बैठ गए और टैक्सी गोवा की तरफ चल पड़ी.
शेखर बहुत मस्त दिखता था इसलिए मेरी नजर बार बार उसकी तरफ उठ जाती थी.
मैं बार बार सोच रही थी कि काश ये मेरा बॉयफ्रेंड होता.
तभी शेखर बोला- शबनम, तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है क्या?
मैं बोली- नहीं तो.
शेखर बोला- ऐसा कैसे हो सकता है? तुम तो इतनी स्मार्ट और सुन्दर हो, फिर तुम्हारा बॉयफ्रेंड कैसे नहीं है?
मैंने कहा- मैं लड़कियों के स्कूल में पढ़ती थी और इसी साल कॉलेज में आई हूँ इसलिए कभी लड़कों से घुलने मिलने का समय ही नहीं मिला.
फिर मैंने पूछा- क्या आपकी कोई गर्लफ्रेंड है?
शेखर बोला- आज तक तुम्हारे जैसी खूबसूरत कोई मिली नहीं, इसलिए कोई गर्लफ्रेंड बनी नहीं.
यह सुन कर शर्म के मारे मेरे गाल लाल हो गए और मैंने अपनी नजरें झुका लीं.
कुछ देर में बात करते करते शेखर का हाथ मेरे हाथ को छूने लगा.
मुझे भी अच्छा लग रहा था तो मैंने कोई आपत्ति नहीं की.
बल्कि मैं भी अपना हाथ शेखर की तरफ बढ़ाने लगी.
कुछ देर में ही मेरा हाथ शेखर के हाथ में था.
शेखर ने पूछा- तुम मुझे बहुत पसंद हो, क्या मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी?
मैंने कहा- हाँ शेखर, तुम भी मुझे बहुत पसंद हो.
यह सुनकर शेखर ने मेरा हाथ चूम लिया और मैं खिसक कर शेखर के करीब आ गई.
मैंने अपना सर शेखर के कंधे पर रख लिया और हसीं सपनों में खो गई.
शेखर भी बड़े प्यार से मेरे बाल सहलाता रहा.
थोड़ी देर में मुझे महसूस हुआ कि शेखर के हाथ मेरे स्तनों तक पहुँच गए हैं; शेखर बड़े ही प्यार से मेरे स्तन सहला रहा था.
यह पहली बार था जब कोई मेरे दूध दबा रहा था तो मुझे बहुत ही अजीब सा मजा आ रहा था.
मैंने भी बड़े प्यार से शेखर के सीने पर हाथ फेरना शुरू कर दिया.
अब शेखर का एक हाथ मेरी जांघ पर आ गया और शेखर मेरी जांघों पर हाथ फेरने लगा.
जांघों पर हाथ फेरते फेरते शेखर का हाथ मेरी चूत तक आ गया और वो सलवार के ऊपर से ही मेरी चूत सहलाने लगा.
शेखर ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया.
मैंने शेखर का लंड उसके पेंट के ऊपर से ही सहलाना शुरू कर दिया.
तभी शेखर ने अपने पेंट की ज़िप खोल दी और उसका बड़ा सा लंड मेरी आँखों के सामने नाचने लगा.
मुझे लंड छूने का अनुभव नहीं था फिर भी ऐसे माहौल में लंड पकड़ने पर मुझे कोई परेशानी नहीं हुई.
मेरे अंदर हवस उठने लगी तो मैंने भी अपनी सलवार खोल दी और शेखर ने अपना हाथ अंदर डाल दिया.
शेखर ने मेरी चूत में अपनी एक उंगली डाल दी और अंदर बाहर करने लगा.
मेरे अंदर आग भड़कने लगी जिसको शांत करने के लिए मेरी चूत से पानी निकलने लगा.
शेखर मेरी चूत को उंगली से चोद रहा था और मेरे अंदर ऊँची ऊँची लहरें उठ रही थीं.
अचानक मेरा शरीर अकड़ने लगा, मेरी चूत कटी मुर्गी की तरह फड़फड़ाने लगी और अचानक उसने ढेर सारा पानी छोड दिया.
इसी के साथ मैं ठंडी पड़ गई.
मैं चरम सुख का मजा ले चुकी थी किन्तु शेखर अभी भी प्यासा था तो मैं हाथ से उसका लंड हिलाने लगी.
कुछ ही देर में शेखर का शरीर अकड़ने लगा और तभी उसके लंड ने पिचकारियां छोड दी.
सामने वाली सीट पर उसका वीर्य उछल कर फ़ैल गया और शेखर भी ठंडा पड़ गया.
हम लोगों ने खिड़की के बाहर देखा तो अँधेरा हो चुका था और हमारी टेक्सी जंगल के बीच से गुजर रही थी.
अभी हमारी आँख लगी ही थी कि एक झटके से हमारी नींद खुल गई.
हमने देखा कि टेक्सी एक पत्थर से टकरा गई थी और बंद पड़ गई थी.
ड्राइवर ने टेक्सी से उतर कर देखा तो परेशान होकर बोला- लगता है पाइप फट गया है, मैकेनिक को बुलाना पड़ेगा.
मैं समझ गई कि इस बन्दे की ट्रेन भी छूट गई है.
तभी उस लड़के ने मेरी तरफ देखा तो मैंने रोते रोते ही कहा- मेरी ट्रेन भी छूट गई, मैं भी छुट्टियां मनाने गोवा जा रही थी. अब तो घर लौटना पड़ेगा.
वह लड़का बोला- घर क्यों? मैं तो टैक्सी बुक कर रहा हूँ, सुबह तक गोवा पहुँच जाऊंगा और अपने दोस्तों से मिल लूंगा.
मैं बोली- काश मैं भी टेक्सी से जा पाती! लेकिन इतना लम्बा सफर अकेले तय करना मेरे बस में नहीं है.
वह लड़का बोला- अरे आप मेरे साथ चलो, कोई परेशानी नहीं होगी. आपको किराया भी नहीं देना पड़ेगा.
मुफ्त में गोवा जाने की बात पर मेरे मन में लालच आ गया और मैं राजी हो गई.
उस लड़के ने टैक्सी बुक की और जब हम लोग टैक्सी तक पहुंचे तो उसने मुस्कुराते हुए कहा- हेलो, मेरा नाम शेखर है.
मैंने भी मुस्कुराते हुए कहा- लो, मैंने तो आपका नाम भी नहीं पूछा था. मेरा नाम शबनम है.
अब हम दोनों अपना सामान चढ़ा कर टैक्सी में बैठ गए और टैक्सी गोवा की तरफ चल पड़ी.
शेखर बहुत मस्त दिखता था इसलिए मेरी नजर बार बार उसकी तरफ उठ जाती थी.
मैं बार बार सोच रही थी कि काश ये मेरा बॉयफ्रेंड होता.
तभी शेखर बोला- शबनम, तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है क्या?
मैं बोली- नहीं तो.
शेखर बोला- ऐसा कैसे हो सकता है? तुम तो इतनी स्मार्ट और सुन्दर हो, फिर तुम्हारा बॉयफ्रेंड कैसे नहीं है?
मैंने कहा- मैं लड़कियों के स्कूल में पढ़ती थी और इसी साल कॉलेज में आई हूँ इसलिए कभी लड़कों से घुलने मिलने का समय ही नहीं मिला.
फिर मैंने पूछा- क्या आपकी कोई गर्लफ्रेंड है?
शेखर बोला- आज तक तुम्हारे जैसी खूबसूरत कोई मिली नहीं, इसलिए कोई गर्लफ्रेंड बनी नहीं.
यह सुन कर शर्म के मारे मेरे गाल लाल हो गए और मैंने अपनी नजरें झुका लीं.
कुछ देर में बात करते करते शेखर का हाथ मेरे हाथ को छूने लगा.
मुझे भी अच्छा लग रहा था तो मैंने कोई आपत्ति नहीं की.
बल्कि मैं भी अपना हाथ शेखर की तरफ बढ़ाने लगी.
कुछ देर में ही मेरा हाथ शेखर के हाथ में था.
शेखर ने पूछा- तुम मुझे बहुत पसंद हो, क्या मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी?
मैंने कहा- हाँ शेखर, तुम भी मुझे बहुत पसंद हो.
यह सुनकर शेखर ने मेरा हाथ चूम लिया और मैं खिसक कर शेखर के करीब आ गई.
मैंने अपना सर शेखर के कंधे पर रख लिया और हसीं सपनों में खो गई.
शेखर भी बड़े प्यार से मेरे बाल सहलाता रहा.
थोड़ी देर में मुझे महसूस हुआ कि शेखर के हाथ मेरे स्तनों तक पहुँच गए हैं; शेखर बड़े ही प्यार से मेरे स्तन सहला रहा था.
यह पहली बार था जब कोई मेरे दूध दबा रहा था तो मुझे बहुत ही अजीब सा मजा आ रहा था.
मैंने भी बड़े प्यार से शेखर के सीने पर हाथ फेरना शुरू कर दिया.
अब शेखर का एक हाथ मेरी जांघ पर आ गया और शेखर मेरी जांघों पर हाथ फेरने लगा.
जांघों पर हाथ फेरते फेरते शेखर का हाथ मेरी चूत तक आ गया और वो सलवार के ऊपर से ही मेरी चूत सहलाने लगा.
शेखर ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया.
मैंने शेखर का लंड उसके पेंट के ऊपर से ही सहलाना शुरू कर दिया.
तभी शेखर ने अपने पेंट की ज़िप खोल दी और उसका बड़ा सा लंड मेरी आँखों के सामने नाचने लगा.
मुझे लंड छूने का अनुभव नहीं था फिर भी ऐसे माहौल में लंड पकड़ने पर मुझे कोई परेशानी नहीं हुई.
मेरे अंदर हवस उठने लगी तो मैंने भी अपनी सलवार खोल दी और शेखर ने अपना हाथ अंदर डाल दिया.
शेखर ने मेरी चूत में अपनी एक उंगली डाल दी और अंदर बाहर करने लगा.
मेरे अंदर आग भड़कने लगी जिसको शांत करने के लिए मेरी चूत से पानी निकलने लगा.
शेखर मेरी चूत को उंगली से चोद रहा था और मेरे अंदर ऊँची ऊँची लहरें उठ रही थीं.
अचानक मेरा शरीर अकड़ने लगा, मेरी चूत कटी मुर्गी की तरह फड़फड़ाने लगी और अचानक उसने ढेर सारा पानी छोड दिया.
इसी के साथ मैं ठंडी पड़ गई.
मैं चरम सुख का मजा ले चुकी थी किन्तु शेखर अभी भी प्यासा था तो मैं हाथ से उसका लंड हिलाने लगी.
कुछ ही देर में शेखर का शरीर अकड़ने लगा और तभी उसके लंड ने पिचकारियां छोड दी.
सामने वाली सीट पर उसका वीर्य उछल कर फ़ैल गया और शेखर भी ठंडा पड़ गया.
हम लोगों ने खिड़की के बाहर देखा तो अँधेरा हो चुका था और हमारी टेक्सी जंगल के बीच से गुजर रही थी.
अभी हमारी आँख लगी ही थी कि एक झटके से हमारी नींद खुल गई.
हमने देखा कि टेक्सी एक पत्थर से टकरा गई थी और बंद पड़ गई थी.
ड्राइवर ने टेक्सी से उतर कर देखा तो परेशान होकर बोला- लगता है पाइप फट गया है, मैकेनिक को बुलाना पड़ेगा.