FunyHindistory+18:
Antarvasana story:
साले की दुल्हन मेरे साथ

दोस्तो,
अक्सर रिश्तेदारी में कई ऐसी बातें या घटनाएं हो जाती हैं जो या तो शर्मिंदगी बनती है या फिर कोई नया सुखद अहसास।
तो दोस्तो, मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ जब अपने साले की शादी होने के बाद सुहागरात बनाने का मौका मिला।

मैं अपने बारे में बता देना चाहता हूं, मेरा नाम बबलू है। मैं फरीदाबाद शहर में रहता हूँ
मध्यम और प्रतिभाशाली शरीर, चेहरा साफ और उम्र 28 साल।
अक्सर मेरे सुख की तलाश पूरी होती है तकरीबन हर सप्ताह में 2 बार, अपने अच्छे दोस्तों से या फिर यूं कहें अपनी जानेमन गर्लफ्रैंडों से!

तो अब मैं अपने उस अनुभव को, हॉट बेब सेक्स कहानी को आप सभी दोस्तों के साथ बांटने जा रहा हूँ।

मेरी शादी को हुए 3 साल हुए हैं। मेरी पत्नी शालू एक सुंदर शरीर की मालकिन है; उसका हर अंग एक से बढ़कर एक गजब ढहाता है।

पहले 2 साल तक तो मुझे उसके अलावा फुरसत ही नहीं मिलती थी।
दिन रात बस हम चुदाई ही किया करते थे और वो भी नए नए तरीकों से।

जब तीसरे साल शालू प्रेग्नेंट हुई तो मन में पिता बनने की खुशी भी हुई और एक दुख भी हुआ कि अब अगले डेढ़ दो साल चुदाई का मौका शायद ही मिलेगा।

खैर दिन निकलते गए और मेरे साले की शादी की बात चली जो सर्दियों में होने थी.
और उस समय ही शालू की डिलीवरी भी होनी थी।

शालू का चलना फिरना असम्भव ही था।
तो अब शादी की सभी रसमें मुझे ही निभानी थी।

सबसे पहले मुझे अपने साले के लिए लड़की देखने जाना था।
हम सभी अम्बाला में लड़की देखने पहुंचे।

लड़की के घर पहुंच कर नाश्ता वगैरह लेने के बाद लड़की भी सामने आ गई।

उस लड़की का नाम नवीषा था।
दूध से गोरा रंग, सुंदर और खूबसूरत चेहरा, नशीली आंखें, भर हुआ शरीर, गोल चुचे!
इन्हें देखकर मैं पागल हो गया था।
मुझे लगा जैसे मेरे लिए ही लड़की देखी जा रही हो।

खैर सभी ने उस लड़की को पसंद किया।
मैंने अपने साले अशोक को इशारे से पूछा- लड़की पसन्द है?
तो उसने कहा- क्या अकेले में लड़की से कुछ बात हो पाएगी?

तो मैंने कहा- अभी इंतजाम कर देते हैं।
और लड़के की इच्छा लडक़ी वालों को बताई।
लड़की वाले भी तैयार हो गए।

अब मैं, अशोक, नवीषा और उसकी सहेली रीना एक कमरे में बैठ गये और हल्की हल्की पूछताछ होने लगी।

मैंने इशारे से उसकी सहेली रीना को अलग होने को कहा.
रीना किसी काम का बहाना करके बाहर चली गई।

मैं भी थोड़ा बहाना करके बाहर आ गया।

5 मिनट के बाद जैसे ही अंदर जाने को हुआ तो मादक सिसकारियों की आवाजें सुनाई दी।

मैंने दरवाजे से देखा तो ढंग रह गया।
अशोक और नवीषा एक दूसरे को चूम रहे थे और एक दूसरे से चुपके हुए थे।

मेरे अंदर आते ही दोनों अलग हुए और नवीषा उठकर बाहर चली गई।
तब अशोक ने कहा- मुझे नवीषा पसन्द है।

तो मैंने अशोक की रजामंदी सभी को बता दी।

शादी की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थी और शादी भी बड़े ही धूमधाम से सभी रस्मों के साथ पूरी हुई।

शादी के अगले दिन लगभग सभी मेहमान जाने लगे।
मैं भी अब घर आ गया था।

लेकिन मेरी पत्नी शालू की हालत ज्यादा खराब थी तो मैंने अपनी सास को इस बारे में बताया।
चूंकि मैं ज्यादातर शहर से बाहर ही रहता था तो घर के काम में मदद के लिए मेरे साले अशोक ने अपनी पत्नी नवीषा को हमारे घर एक महीने के लिए भेज दिया।

तो मैंने कहा- अरे अशोक, अभी तो तुम्हारी सुहागरात भी नहीं मनी है।
उसने कहा- कोई बात नहीं, बाद में हो जाएगी अभी दीदी का ख्याल रखना भी जरूरी है।
नवीषा ने भी अपनी रज़ामंदी दिखाई।

10-12 दिन के लिए मैं बाहर टूर पर चला गया।

मेरे घर पर ना होने पर नवीषा ने घर और मेरी पत्नी शालू का काफी अच्छे से ध्यान रखा था।
नवीषा और शालू आपस में अच्छे दोस्त बन गए थे और आपस में अच्छी बन रही थी।

चूंकि अब शालू की डिलीवरी भी नजदीक थी तो मेरा भी घर पर रहना जरूरी हो गया था।
मैंने घर से ही ऑफिस का काम शुरू कर दिया।
अब मैं शालू को ज्यादा समय देने लगा।

नवीषा जो घर में ही थी, सभी कामों को अच्छे से सम्भाल रही थी।
जैसे खाना बनाना कपड़े वगैरा और घर के छोटे-मोटे काम, सब को बड़े ही अच्छे से संभाल रही थी.

क्योंकि मैं भी घर पर ही रहता था तो मेरी भी नवीषा से अक्सर बात हो जाया करती थी।

दो-तीन दिन में मेरी और नवीषा की एक दोस्तों वाली बात हो गई थी.

नवीषा के कामुक शरीर को देखकर मेरा मन डोलने लगा।

2 दिनों में मैंने नवीषा के शरीर के एक-एक अंग को अपनी आँखों से घूर घूर कर महसूस कर लिया था।

गोरे और बड़े ही कोमल, सुन्दर और कड़क चूचों का उसका शरीर जवानी के जोश से भरा पड़ा था और उसके शरीर का हाल बता रहा था कि नवीषा को अपने पति से अभी चुदना चाहिए।
इसी बौखलाहट में उसका शरीर भी उसका साथ नहीं दे रहा था।

मुझसे बात करते हुए उसके हावभाव भी बता रहे थे कि जैसे वह मुझसे ही चुदने वाली हो।

और एक दिन ऐसा मौका भी मिला जब मैंने उसका फायदा उठाया।
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मैं अक्सर शालू के पास ऑफिस का काम करता था और नवीषा दूसरे कमरे में बैठकर अपने काम करती थी।

काम करते हुए मैं कभी-कभी शालू को होंठों पर चूम लिया करता था और उसके चूचों को भी दबा लिया करता था जिससे शालू को भी मजा आता था और मेरे पास लेटी होने की वजह से वह भी अपना एक हाथ मेरे पजामे में से डालकर लंड को मसल रही होती।

मैं भी तब उसकी पायजामी में हाथ डालकर उसकी चूत में उंगली घुसाकर आगे पीछे करता रहता था।

जब उसका जोश ज्यादा हो जाया करता था तो मैं उसकी चूत में तेज़ी से अपनी उंगली अंदर बाहर करते हुए उसका पानी निकाल देता।

शालू भी पूर्ण संतुष्टि के साथ मुझे होंठों पर चूमते हुए मेरे लंड को जोर जोर से हिला कर मेरा भी पानी निकाल देती और इस तरह हम दोनों ही सेक्स से परिपूर्ण हो जाया करते थे।

ऐसा लगभग दो-तीन दिन चला और इन दो-तीन दिनों में मैंने तकरीबन 4 या 5 बार ऐसा किया होगा.

लेकिन शायद मैं यह भूल गया था कि हमारे चरम सुख लेने के समय की मादक आहें नवीषा के कानों में भी पड़ती थी।

जैसे ही हम सो जाते थे तो नवीषा भी अपनी चूत को रगड़ रगड़ कर अपना पानी निकाल देती थी।

2 दिन में नवीषा ने अपनी चूत को रगड़ रगड़ कर बहुत ज्यादा गर्म कर लिया था और उसकी हालत अब किसी भी लंड को अपनी चूत में घुसाने की थी।
और हो भी क्यों ना … अभी तो उसकी सुहागरात भी नहीं मनी थी।
और चूत भी सीलबंद … चूचे अनछुए! नवीषा का अपने पति से मिलन अभी अधूरा था।

मुझे उसकी हवस का पता तब लगा जब एक बार रसोई में पानी लेते समय मेरी और नवीषा की सामने की टक्कर हो गई।

टक्कर दोनों की सामने से हुई जिससे नवीषा ने एकदम से मुझे कस के पकड़ लिया और करीबन 10 सेकंड तक मुझे छोड़ा ही नहीं।

तब मुझे महसूस हुआ कि नवीषा भी अब किसी से भी चुदना चाहती है और फिर वो मैं ही क्यों न हूं।

एक बार तो हद ही हो गई जब उसने बाथरूम में जाते समय मुझे इस तरह से इशारा किया कि जैसे वह मुझसे अभी चुदेगी।
खैर अब मेरा उसके प्रति नजरिया बदल गया था।

मैं भी उसके कामुक अंगों को बाहर से देखकर गर्म हो रहा था और मैंने नवीषा को चोदने का पूरा प्लान कर लिया था।

दिन भर मैं घर पर ही रहता था और शालू जो प्रेग्नेंट थी दिन में आराम करती थी कई बार मैं भी आराम करता था।

मेरे फोन ज्यादा आते थे इसलिए मैं दूसरे कमरे में सो जाया करता था और नवीषा और मेरी बीवी दोनों एक साथ दूसरे कमरे में सो जाती थी।

मैं 3-4 घंटे तक काम करता रहता था और दोपहर में फोन पर बात करने की वजह से नींद भी ज्यादा नहीं आती थी।

नवीषा और शालू यानि मेरी बीवी दोनों एक साथ सोती थी.
लेकिन मैंने भी महसूस किया था कि नवीषा सोने का नाटक ज्यादा करती है और मुझे चुपके-चुपके घूरती रहती है।

एक दिन मैं बहाने से दोपहर के समय कमरे में घुसा तो मैंने देखा मेरी बीवी और नवीषा और दोनों एक साथ सोई हुई थी।
मैंने शालू को पानी देने की कोशिश की और मुझे महसूस हुआ कि नवीषा मुझे चुपचाप देखने की कोशिश कर रही है।

मैं समझ गया आज चाहे कुछ भी हो जाए नवीषा को पकड़ कर रहूंगा।
मैं फुर्ती से घूमता हुआ नवीषा की तरफ देखने लगा तब मैंने नवीषा को अपनी ओर यानि मुझे देखते हुए पाया।
नवीषा समझ चुकी थी कि उसकी चोरी पकड़ी गई है।

वह मुझे देखकर हल्की सी मुस्कुरा दी।
मैं भी थोड़ा सा मुस्कुराया और इशारा में पूछा कि माजरा क्या है।
वह कुछ नहीं बोली तो मैंने उसे कमरे से बाहर बुलाया।

वह उठी और साथ वाले कमरे में आ गई।
तब मैंने नवीषा से पूछा- नवीषा मैं तुम्हें पिछले 3-4 दिनों से देख रहा हूं तुम्हारा मेरी तरफ कुछ ज्यादा ध्यान है क्या बात है, खुल के कहो जो कहना चाहती हो। मैं तुम्हें एक दोस्त की तरह पूछ रहा हूं, कोई भी बात हो मुझे जरूर बता देना। अगर मेरी तरफ से कोई कमी रह गई हो या मुझसे कोई शिकायत हो तो मुझे जरूर बताओ ताकि मैं उसे दूर कर सकूं।

अब नवीषा थोड़ी सी शर्माते हुए बोली- कुछ नहीं … बस उनकी याद आ रही थी।

तो मैं बोला- चलो तुम्हें अशोक के पास छोड़ आते हैं।
इस पर नवीषा बोली- ऐसे समय में शालू दीदी के पास रहना जरूरी है। डिलीवरी होने के बाद चली जाऊँगी।

मैंने कहा- क्या अशोक तुमसे मिला?
नवीषा ने कहा– जी नहीं!
मैंने नवीषा को छेड़ते हुए कहा- अच्छा-अच्छा, अभी तो तुम्हारी और अशोक की सुहागरात भी बाकी है इसलिए ज्यादा याद आ रही है।

इस पर नवीषा मुस्कुरा दी और अपने हाथों से अपने चेहरे को छिपाते हुए दूसरी तरफ घूम गई।

मैंने मज़े लेते हुए कहा- नवीषा, अशोक में ऐसा क्या है जो मुझ में नहीं है?
तो वह खिल खिला कर मुस्कुरा दी।

मैंने अपनी उँगलियाँ एक दूसरे के ऊपर क्रॉस के इशारे में रखते हुए कहा- नवीषा रानी, कहो तो मैं और तुम … !?

इस पर नवीषा ने आश्चर्य से देखा और शालू को देखा और कहा- दीदी अन्दर हैं, सुन लेंगी!
मैंने हैरानी से उसकी बात को समझा।
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अब मैं सब कुछ समझ चुका था।
मैंने तुरंत नवीषा को बांहों से पकड़ कर उसे अपने सीने से चिपका लिया और उसके होठों पर एक प्यारा सा किस किया।

नवीषा मेरी इस अचानक की जकड़न पर हैरान थी।
उसे इस एकदम से जकड़ने और किस करने पर कुछ समझ नहीं आ रहा था।
उसकी सांसें ऊपर नीचे तेजी से हो रही थी.

2 मिनट तक मैंने नवीषा को अपनी बाँहों मेँ जकड़ा हुआ था और उसके होठों को अपने होठों मेँ लेकर चूमा था।
एक पल को तो नवीषा को सब कुछ एक हसीन सपना ही लग रहा था।
नवीषा भी सबकुछ भूलकर रोमांच महसूस कर रही थी।

उसकी नर्म चूची और मादक शरीर पहली बार किसी मर्द की गिरफ़्त में थे।
मेरा लंड भी उसकी चूत के आस पास ही उसे महसूस हो रहा था।

मैं धीरे से बोला- क्या अब तुम्हारी दीदी को पता लगा।

नवीषा मीठी सी मुस्कराई और मेरी ओर देखकर ना में सिर हिलाया और कहा- शालू दीदी को नहीं पता चला!
और फिर से मुस्कुरा कर अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया।

मेरे तो जोश की कोई सीमा ही नहीं थी।
अब मैंने नवीषा को फिर से अपनी बांहों में लेकर चूमना और चूसना शुरू कर दिया।
नवीषा ने भी किसिंग में पूरा साथ दिया।

लगभग 5 मिनट के बाद हम दोनों अलग हुए।
नवीषा का चेहरा जोश में लाल हो चुका था और अब वो चोदने में ज़्यादा इंतज़ार नहीं करना चाहती थी।

हमारे घर के ऊपर तीसरी मंजिल पर एक बड़ा हॉल था जिसमें 1 बेड और सोफा रखा हुआ था वहां पर कोई कभी-कभी जाता था और दोपहर के समय तो शायद ही कोई आता था।

क्योंकि सर्दियों का समय था तो सभी अपनी अपनी रजाई में पड़े हुए थे और छत पर जाने का किसी को समय ही नहीं था।

मैंने नवीषा को चुपके से छत पर आने को कहा तो उसने कहा- दीदी उठ जाएंगी।

मैंने कहा- इसका भी जुगाड़ कर देता हूं।

मैं झट से दूसरे कमरे में गया और एक नींद की गोली शालू के पानी के गिलास में डाल दी और और रसोई में से पानी लेकर ग्लास अपनी बीवी के पास रखा और उसको उठाकर दवाई लेने के लिए कहा।

शालू को एक आयरन की गोली लेनी थी।
मैंने उसको कहा- पहले ये पानी पी लो और उसके 5 मिनट बाद आयरन की गोली खा लेना।

शालू ने वह गिलास का पानी पी लिया और 2 या 3 मिनट के अंदर अंदर उसे नींद आ गई जिससे वो निढाल होकर बिस्तर पर पड़ गई।

फिर मैंने नवीषा को बुलाया और कहा- मैंने तुम्हारी दीदी को नींद की गोली खिला दी है। अब कम से कम 2 घंटे तक वह उठ नहीं पाएगी।

इस पर नवीषा धीरे से मुस्कुराई और अपना चेहरा नीचे कर लिया।

मैंने अब नवीषा की ठोड़ी की अपनी एक उंगली से ऊपर किया और उसे देखकर प्यार से बोला- मेरी नवीषा रानी, अब बताओ कि तुम्हारी सुहागरात इस कमरे में बनाऊं या दूसरे में?
नवीषा ने छत वाले कमरे में चलने को कहा।

मैं भी उसकी बात को समझकर उसके साथ छत वाले कमरे में चला गया।

दरवाजे की कुंडी लगाने के बाद और लाइट जलाने के बाद धीरे से नवीषा को अपनी तरफ खींचा और उसके साथ ही उसके होठों को भी चूमने लगा।
नवीषा ने भी अब फुर्ती से मेरे शरीर से अपने शरीर को चिपका लिया।

वह मुझे पागलों की तरह चूम रही थी।

मेरे शरीर को हर जगह से जकड़ कर मुझे बार बार चूम और चूस रही थी।
मैं भी नवीषा के होठ उसी जोश में उसे जोड़े हुए उसको चूम रहा था।

नवीषा की सांसें तेज हो रही थी। उसकी छातियाँ बहुत तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी और उसका दिल भी तेजी से धड़क रहा था।

मैंने नवीषा को अपनी साड़ी खोलने को कहा।
उसने कहा- आज मैं तुम्हें अपना पति मानती हूं और मेरी सुहागरात भी तुम्हें ही मनानी है तो तुम ही मेरे कपड़े भी खोलोगे!
इतना कहकर वह मुझसे फिर से चिपक गई।

मैंने धीरे से नवीषा को अपने से अलग किया और उसके शरीर से साड़ी को धीरे धीरे निकालना शुरू किया।

साड़ी निकालने के बाद नवीषा अब ब्लाउज़ और पेटिकोट में रह गई जिसमें वह बड़ी ही सुंदर लग रही थी।
सुन्दर … मख़मल सा बदन उस पर मोहक नंगी कमर मुझे पागल कर रही थी।

मैंने नवीषा को कमर में हाथ डालकर अपनी तरफ खींच कर नवीषा को फिर से चूम लिया और उसके कोमल चूचों को बाहर से ही मसलने लगा।

नवीषा ने भी मेरी टीशर्ट को उतारने की कोशिश की।
मैंने उसकी बात को समझते हुए फटाक से अपनी टीशर्ट निकाली और साथ में लोवर भी निकाल दिया।
मैं अब चड्डी और बनियान में था।

मैंने नवीषा के ब्लाउज़ को खोलना शुरू किया और उसकी ब्रा भी खोल दी।

नवीषा की चूचियाँ नुकीली और हल्की सी उठी हुई थी और बिल्कुल आम की तरह ही लग रही थी।
दोनों चूचियों के बीच में से हल्की गहराई थी।

इसे देखकर मेरा लंड भी अकड़ने लगा था।

नवीषा शर्म के मारे अपने चेहरे पर हाथ रखकर उसे छुपाने की कोशिश करने लगी।

मैं तो मस्त होकर अब उसकी चूचियों को मसलने लगा।
मेरा एक हाथ नवीषा की एक चूची को मसल रहा था और दूसरे हाथ से उसके पेटिकोट के नाड़े को खोलने में लग गया।

नवीषा ने पेटिकोट खोलने में मेरी मदद की और थोड़ी ही देर में उसका पेटिकोट खुलकर नीचे फिर गया।
मेरा हाथ नवीषा की पेंटी के अंदर होकर उसकी चूत को छूने और मसलने में लग गया।
हम दोनों एक दूसरे को काफ़ी देर तक चूम रहे थे।

नवीषा भी पागलों की तरह अपने हाथों को यहाँ वहाँ मेरे शरीर पर फिरा रही थी और मेरी चड्डी पर हाथ लगाकर मेरे लंड को मज़े से दबाकर महसूस करने लगी।

मैंने नवीषा का हाथ अपनी चड्डी में डालकर अपना लंड पकड़ाया और फिर से उसकी चूचियों को मसलने लगा।
नवीषा की कामुक आवाजें मेरे कानों में पड़ने लगी- म्म्म्म् स्स्श श्सस उम्म्म मम्म्ह।

नवीषा ने मेरा निक्कर नीचे किया और मेरा लंड बाहर निकालकर उसे सहलाने लगी।
मैंने अपना निक्कर अपनी टांगों से अलग किया और नवीषा की पेंटी भी उतार दी।
साथ ही अपनी बनियान भी निकालकर फेंक दी।

नवीषा और मैं, हम दोनो ही नंगे खड़े थे और लाइट में मस्त लग रहे थे।

मेरा लंड अब पूरी तरह से अकड़ चुका था।
इधर नवीषा की चूत से भी कामरस की कुछ बूँदें निकल रही थीं।

मैंने नवीषा को बिस्तर पर लिटाया और उसकी चूत को मुँह में भरकर चूसने लगा।

नवीषा की मादक सिसकारियाँ निकल रही थीं।
उसने मेरे सिर को अपनी चूत पर कसकर चिपका लिया और तेज तेज कमर उछालने लगी।

वो सिसकारियाँ भर रही थी- म्म्म अम्म आम्म्ह म्मह आह्ह आऊऊ ऊऊऊम्म्म!

लगभग 2-3 मिनट में ही उसकी चूत ने नमकीन पानी निकाल दिया और अब उसका शरीर ढीला हो गया।

अब हॉट बेब सेक्स को तैयार थी।
मैंने भी अब देर ना लगाते हुए उसकी गीली चूत में अपना कड़क लंड लगाकर अंदर की ओर धकेला।
नवीषा की चूत टाइट थी; लंड अंदर नहीं जा रहा था।

मैंने अब उसकी टांगें खोलकर अपना लंड फिर से सेट किया और ज़ोर से झटका मारकर लंड अंदर डाला और उसके होंठों को अपने होंठों से कस लिया।
मेरे लंड का टोपा अंदर घुस चुका था।

नवीषा दर्द के मारे छटपटा रही थी।
उसके मुँह से दबी हुई चीख निकल रही थी- ऊईई मरीईईऽऽऽ ईईई मर गयी उफ़्फ आह …

मैंने नवीषा के शरीर को रगड़ना शुरू किया और उसके होंठों को जोरों से चूसने लगा।
नवीषा कुछ देर तक छटपटाने के बाद धीरे-धीरे सामान्य होकर जोश में आने लगी।

मैंने दूसरा झटका मारा।
उसकी चूत अब फट चुकी थी और मेरा लंड दूसरे झटके मैं काफ़ी अंदर तक जा चुका था।

नवीषा को जलन हो रही थी।
मैंने नवीषा से कहा- बस 2-3 मिनट में सब ठीक हो जाएगा। मुझे चूमना जारी रखो!
कहकर धीरे धीरे लंड अंदर तक घुस दिया।

नवीषा का शरीर अब हरकत में आ गया और झटके लगवाने को तैयार था।
मैंने भी धीरे धीरे नवीषा को चोदना शुरू किया और झटकों की स्पीड बढ़ाने लगा।

नवीषा भी अपनी कमर उचका कर मेरे झटकों का जवाब देने लगी।
अब वह दर्द को भूलकर चुदाई के मज़े ले रही थी; साथ ही कह रही थी- बस मुझे चोदते रहो, मज़ा आ रहा है। आह, क्या मजा है। आज तुमने मुझे औरत बनाया है अब मेरी पूरी ज़िंदगी बस तुम्हारे लिए है। म्म्म्म आह्हऽऽऽ इस्स्स स्स्स्स हाय्य आह्ह उईई माऽऽऽऽ हाय्य।

मेरे झटके अब पूरी स्पीड से नवीषा की चूत में अंदर बाहर हो रहे थे और नवीषा भी पूरा साथ दे रही थी।
7-8 मिनट के बाद मैं और नवीषा एक साथ ही अकड़ कर झड़ने लगे और नवीषा के कहने पर मैंने अपना सारा पानी उसकी चूत में ही निकाला।

नवीषा अब चुदकर तृप्त हो चुकी थी।
उसने मुझे माथे पर चूमा और कहा- आई लव यू!
कहकर वो मेरे सीने से चिपक गयी।

तब से मैं और नवीषा जब भी मौका मिलता था चुदाई कर लेते थे।
जैसे शालू के बाथरूम नहाने जाने पर, सोने पर और रात को!

नवीषा जब तक मेरे घर पर रही, मेरे साथ अपनी चूत की प्यास बुझाई और इस बीच मेरे बच्चे का काम भी सम्भाला।

फिर मेरी बहन भी आ गई थी तो मैंने नवीषा को उसकी ससुराल भेज दिया।

आज भी नवीषा और मैं दोनों मौक़ा मिलने पर चुदाई कर लेते हैं।

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Antarvasna Story:
, मैं रोहित उम्र 21 साल का हूँ और फिलहाल मैं पढ़ रहा हूँ.

मैं आज आपको अपनी सच्ची सेक्स कहानी सुना रहा हूँ.
यह हॉट मौसी सेक्सी कहानी मेरी मम्मी की सहेली के साथ हुई थी.

मम्मी की सखी का नाम नीतू है, मैं उन्हें मौसी कहता था.

वे देखने में बहुत हॉट एंड सेक्सी माल हैं.
उनके दो बच्चे भी हैं.

मौसी के पति कहीं बाहर जॉब करते थे. मौसी और उनके दोनों बच्चे घर पर रहते थे.

नीतू मौसी मेरी मम्मी के पास लगभग रोजाना ही आती थीं.
जिस वक्त वे हमारे घर आती थीं, तब मैं भी घर पर ही रहता था.

एक दिन मेरी मम्मी और पापा दोनों किसी रिश्तेदारी में शहर से बाहर गए थे.
उसी वजह से मेरी मम्मी ने घर की जिम्मेदारी नीतू मौसी को दी और उनसे मेरा ख्याल रखने को बोला.

जब मम्मी पापा घर से बाहर गए थे, उस वक्त मैं स्कूल में था.
स्कूल से जब मैं घर आया तो मौसी मुझे घर में मिलीं.

उन्होंने मुझसे कहा- तुम फ्रेश हो जाओ, मैं तुम्हारे लिए खाना लाती हूँ.

मैंने उनसे अपनी मम्मी के बारे में पूछा तो जानकारी मिली कि किसी अचानक आए कारण से मम्मी पापा को बाहर जाना पड़ा है.

तब मैंने अपने कमरे में जाकर अपने कपड़े निकाले और कुर्सी पर बैठ गया.

अब मैं अपने लंड को रगड़ने लगा था.
आज बहुत दिन बाद मुझे अकेले में रहने का मौका मिला था.

अपना लंड रगड़ते हुए मेरे सामने कुछ कामुक दृश्य याद आने लगे और मेरी आंखें बंद हो गई थीं.
मैं जल्दबाजी में अपने कमरे के दरवाजे बंद करना भूल गया था.

तभी मुझे लगा कि मुझे कोई देख रहा है.
मैंने दरवाजे पर देखा, तो मौसी मुझे देख रही थीं.

मैंने जैसे ही उनको देखा, मैं अपने रूम के बाथरूम में भाग गया.
तब मैंने बाथरूम के दरवाजे की झिरी से झांक कर देखा तो मौसी चली गई थीं.

कुछ समय तक मैंने इंतजार किया.
उसके बाद मैं कपड़े पहन कर हॉल में आ गया.

मौसी उधर मेरा इंतजार कर रही थीं.
मैं बिना कुछ बोले शर्मिंदगी से सर झुकाए आया और चुपचाप बैठ कर खाना खाने लगा.

कुछ देर बाद मौसी मुझे एक स्माइल देकर अपने घर चली गईं.

फिर रात को मौसी ने मुझे फोन किया और उन्होंने मुझे अपने घर खाना खाने के लिए बुलाया.

मैं जब गया तो मौसी के बच्चे सो गए थे और मौसी एक हॉट सी नाइटी पहन कर अपने किचन में खाना बना रही थीं.

मुझे आया देख कर मौसी ने मुझे बैठने के लिए कहा और मुझे खाना परोस दिया.
खाना खाने के बाद मैं मौसी के घर से जाने लगा.

तब मौसी ने कहा- आज तुम यहीं सो जाओ.
मैं भी मान गया.

फिर मैं मौसी के कमरे में बने बाथरूम में फ्रेश होने गया.

उधर मैंने देखा कि मौसी की पैंटी और ब्रा टंगे थे.
मौसी की ब्रा पैंटी देख कर मेरा लंड कड़ा हो गया और मैं लंड को रगड़ने लगा.

तभी मैंने मौसी की ब्रा पैंटी को उठाया और अपने लंड पर लपेट कर लंड की मुठ मारने लगा.

मेरे लौड़े से वीर्य निकला तो मौसी की ब्रा पैंटी पूरी गीली हो गईं.
मैं वह सब देख कर जरा परेशान हो गया कि अब क्या होगा.

पर कुछ नहीं किया जा सकता था तो मैंने सोचा कि अब जो होगा सो देखा जाएगा.
मैं बाथरूम से बाहर निकल आया.

मेरे बाहर आने के बाद मौसी बाथरूम में चली गईं.
मैं अपने बिस्तर पर सोने चला गया.

उस समय रात का एक बजे का समय हो रहा था.
मेरी आंख खुली तो मैंने अपने कमरे की खिड़की की तरफ देखा.

मौसी मुझे ही देख रही थीं.
उस टाइम मेरा लंड खड़ा था.

मैंने मौसी को स्माइल दी और लंड सहला दिया.
मौसी भी मुस्कुरा दीं और लपक कर कमरे में आ गईं.

उन्होंने बिना कुछ कहे मेरा बॉक्सर उतार दिया और मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर सुपारे को चूसने चाटने लगीं.
मैं उनकी इस हरकत से एकदम से अचकचा गया और उनके मुँह से लंड निकालने की कोशिश करने लगा.

मगर मौसी ने मेरा लौड़ा बहुत कसके पकड़ा हुआ था और वे उसे तेजी से रगड़ती हुई अन्दर बाहर कर रही थीं.
मैं उनके मुँह से लंड निकालने की नाकाम कोशिश की, तो वे मुझे देखने लगीं.

उनकी आंखों में वासना का नशा छाया हुआ था.
मैंने कहा- मौसी, यह आप क्या कर रही हैं?

वे बोलीं- वही कर रही हूँ, जो तुम बाथरूम में मेरी ब्रा पैंटी के साथ कर चुके हो.
यह कह कर वे फिर से लंड को चूसने लगीं.

उनकी तेज गति से हो रही लंड चुसाई से मुझे अपने लौड़े में दर्द होने लगा था.
लेकिन मज़ा भी आ रहा था.

मैंने अपना हाथ बढ़ाया और मौसी के एक दूध को पकड़ कर मसकने लगा.

कुछ देर बाद मौसी उठीं और उन्होंने अपने सारे कपड़े निकालना शुरू कर दिए.
मेरा लंड उनकी कामुक जवानी की दुकान की शटर उठते हुए देख रहा था और फनफना रहा था.

मौसी की नजरें मेरे कड़क लंड पर ऐसे जमी हुई थीं मानो वे मेरे लंड को धमकी दे रही हों कि रुक साले तेरी सारी अकड़ अभी निकालती हूँ.

अपने सारे कपड़े निकालने के बाद उन्होंने मेरे कपड़ों को खींचना शुरू कर दिया.
मैंने उनका साथ देते हुए अपने सारे कपड़े उतर जाने दिए.

अब मौसी मेरे मुँह के ऊपर आकर बैठ गईं.
उनकी चूत एकदम गीली थी.
मैं उनकी गीली चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा था और दोनों हाथों से मौसी की चूचियों का भर्ता बनाने लगा था.
तभी अचानक से मौसी मेरे मुँह से उठीं और पलट कर वापस मेरे मुँह पर चूत टिका कर बैठ गईं.

अब वे मेरे लंड को चूसने लगी थीं.

मैंने उनकी चूत के साथ गांड का छेद भी चाटा, तो वे अपनी गांड मेरे मुँह पर घिसने लगीं.

कुछ मिनट तक यह सब मजा लेने के बाद मैंने उनको बेड से नीचे आने का कहा और बैठा दिया.

उनके दोनों हाथों को पकड़ कर उनके मुँह में लंड पेलने लगा, मौसी के मुँह की चुदाई करने लगा.



कुछ ही देर में मौसी के मुँह से फच फच की मधुर ध्वनि आने लगी थी.
मेरा लंड उनके गले तक जा रहा था.

अब मैंने उनको बेड पर लेटा दिया और उनकी दोनों टांगों को फैला कर चूत को चुम्मी करने लगा.

वे मुझसे बोलीं- अब अन्दर डाल दो.

मैंने अपना लंड उनकी चूत पर सैट कर दिया और उनके होंठों पर अपने होंठ जमाते हुए एक ही बार में अपना आधा लंड पेल दिया.
लंड एकदम से घुसता चला गया था तो मौसी की कराह निकल गई- आह मार दिया साले ने … धीरे धीरे पेलो न!

मैंने उनकी एक नहीं सुनी और अपना पूरा हथियार मौसी की चूत में पेलने के बाद ही रुका.
अब तक वे भी लंड को खा गई थीं और दर्द में ‘आह उह … फक मी रोहित’ बोलने लगी थीं.

मगर एक बात अजीब सी हुई, उनकी चूत से खून आने लगा था.
खून देख कर मैंने अपने लंड को वहीं का वहीं रोक दिया.

मैंने देखा कि मौसी रो रही हैं.
तो मैंने उनसे पूछा- क्या हुआ?

मौसी ने कहा- मेरे पति का सामान बहुत छोटा सा है और मैंने दो साल से सेक्स भी नहीं किया है. इसी लिए मुझे बहुत तेज दर्द हो रहा है.
मैं समझ गया कि मौसी का क्या मतलब है.
और मैं धीरे-धीरे अपना लंड अन्दर बाहर करने लगा.

मौसी कुछ ही देर में सामान्य हो गईं और चुदाई का मजा लेने लगीं.

मैंने बीस मिनट तक उनकी चूत को चोदा.
मौसी की बेडशीट पर काफी खून लग गया था.

जब मैं मौसी की चूत चोद रहा था, तो वे ‘अया अयाह’ करके मुझे पकड़ ले रही थीं.

कुछ देर के बाद मैंने मौसी से कहा- मौसी, मैं अब आने वाला हूँ!
तो मौसी ने कहा- हां रोहित, मेरी चूत की प्यास बुझा दो अपना सारा रस मेरे अन्दर ही छोड़ दो.

उनके कहे अनुसार मैंने अपने लंड का रस मौसी की चूत में ही टपका दिया.

मैं जब झड़ने लगा तो मुझे बहुत तेज थकान हुई.
ऐसा लगा मानो मौसी ने मुझे पूरा निचोड़ लिया हो.

मैं उनके ऊपर ही गिर गया और लंबी लंबी सांसें लेने लगा.

मौसी की चूत तृप्त हो गई थी तो वे मुझे अपने मम्मों से चिपकाए हुए लेटी थीं और मेरी पीठ पर प्यार से हाथ फेर रही थीं.

मैं मौसी के साथ उसी अवस्था में सो गया और कब सुबह हुई, कुछ मालूम ही नहीं पड़ा.

जब मैं उठा तो मौसी के बच्चे स्कूल चले गए थे.

मेरी नजरें मौसी को ढूंढ रही थीं, वे मुझे कहीं दिखाई ही नहीं दे रही थीं.

मैंने उठ कर देखा और बाथरूम में देखा तो दरवाजा खुला हुआ था और मौसी अन्दर नंगी खड़ी होकर शॉवर का मजा ले रही थीं.
उनकी गांड दरवाजे की तरफ थी.

मैंने अपना बॉक्सर निकाला और अन्दर जाकर मौसी को पीछे से अपनी बांहों में भर लिया.

मौसी ने मुझे देखा तो मेरे सीने से लग गईं और बोलीं- अभी नहीं!
मैंने उनके दूध मसलटे हुए कहा- अभी क्यों नहीं?

वे कहने लगीं- प्लीज मान जाओ न … अभी नहीं रोहित.
मैंने उनकी कुछ नहीं सुनी और उनके दोनों मम्मों को पकड़ कर मसलने लगा.

उनके निप्पल भी कड़क हो गए.
मैं उनके एक निप्पल को अपने होंठों में दबा कर चूसने लगा था और बीच बीच में होंठों से पकड़ कर खींच दे रहा था जिससे मौसी की मादक आह उन्ह निकल रही थी.

आखिरकार मौसी से भी न रहा गया और उन्होंने भी मेरे लौड़े को हाथ से पकड़ कर सहलाना शुरू कर दिया.

अब वे मेरे कान के पास आकर सिसकारियां भर रही थीं- ऊह ऊह रोहित फक मी हार्ड रोहित … रगड़ दे मुझे आह!

मैंने उनको वहीं बाथरूम के फर्श पर बैठने का कहा.
वे बैठ गईं और मेरे लंड को पकड़ कर अपने मुँह में लेने लगीं.

कुछ देर बाद मैंने उनको उठाया और उधर वाशबेसिन के प्लेटफॉर्म पर मौसी को टिकाया और उनकी एक टांग को अपने कंधे पर रख लिया.
अब मैंने उनकी चूत में लंड पेला और उनकी चुदाई करने लगा.

मौसी- अयाह अया …ऊवू ऊ बेबी … क्या कर रहे हो … आह दर्द हो रहा है स्लो करो यार!
वे मुझे किस भी कर रही थीं और खुद अपनी गांड मटका कर लंड अन्दर बाहर करवा रही थीं.

मैंने उनसे कहा- मौसी, आपकी गांड मारने का मन कर रहा है!
मौसी बोलीं- नहीं रोहित … उधर नहीं. मैंने सुना है कि उधर बहुत दर्द होता है … और तुम्हारा तो इतना मोटा और बड़ा है … नहीं नहीं मैं उधर नहीं लूँगी.

मौसी मना कर रही थीं.

मैं उनकी चूत से लंड खींच कर बाथरूम से बाहर निकल आया.

मौसी मेरे पीछे पीछे आईं और मुझे मनाने लगीं.
जब मैं नहीं माना तो वे अपने रूम में चली गईं.

फिर मुझे मौसी ने अपने रूम में बुलाया.
मैंने जैसे ही गेट खोला तो देखा कि मौसी डॉगी बनी हुई हैं और गांड हिला रही हैं.
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वे मुझे देख कर कुतिया की अपने हाथ पैरों पर चल कर मेरे पास आईं.

मौसी बोलीं- रोहित प्लीज मेरी गांड मार दो.

मैं मौसी की गांड पर चाँटे मारने लगा.
मैंने मौसी की गांड को लाल कर दिया.

फिर मैं उनकी गांड के छेद पर तेल लगाने लगा, थोड़ा तेल अपने लंड पर भी लगा लिया.
उनकी गांड बहुत टाइट थी.

काफी देर तक कोशिश करने के बाद मैंने उनकी गांड में अपना लंड डाल पाया.

लंड लेते ही वे बहुत तेज चिल्ला दीं- आह मर गई मैं तो रोहित … बाहर निकाल … आह तेरा बहुत मोटा है यार!
मैं कुछ नहीं बोला और थोड़ा रुक कर फिर से गांड मारने लगा.

करीब दस मिनट बाद ही जब मौसी की गांड फट गई तब मैंने उन्हें सीधा किया और फव्वारे के नीचे चित लिटा कर उनकी चूत का भोसड़ा बनाना शुरू कर दिया.

वे भी मस्ती से चुदाई का मजा ले रही थीं.
कुछ देर बाद हम दोनों फारिग हो गए और नहा कर बाहर आ गए.

अब मैं जब चाहे सेक्सी मौसी की चुदाई कर लेता हूँ.
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Forwarded from Antarvasana story
बारिश में मिली आंटी की गरमागरम चूत


मैं मध्यप्रदेश का रहने वाला हूँ।

दोस्तो, मेरा एक सपना था कि मैं आंटी और भाभियों के साथ सेक्स करूँ और मुझे मौका मिल गया।

बात दो साल पहले की है मैं उस समय पढ़ता था।

उस समय बारिश का मौसम था।

मैं एक दिन अपने कॉलेज जा रहा था।

मेरा कॉलेज मेरे रूम से दस किलोमीटर दूर है,

एक किमी दूर बचा था कि अचानक बारिश शुरू हो गयी।

मैं गाड़ी सड़क के किनारे लगा कर एक घर के सामने लगे पेड़ के नीचे खड़ा हो गया।

लगभग पंद्रह मिनट खड़े रहने के बाद मैंने पीछे देखा तो एक आंटी मुझे देख रहीं थीं।

जब उन्होंने बारिश और तेज़ होती देखी तो मुझे आवाज़ लगाई तो मैंने पीछे मुड़कर देखा।

मैंने ध्यान नहीं दिया तो उन्होंने दोबारा आवाज़ लगाई – सुनो, भीग जाओगे ,अंदर आ जाओ। बारिश बहुत तेज़ है।

अब मैं गेट खोल कर अंदर आ गया।

जब मैंने पहली बार आंटी को देखा तो मेरे होश उड़ गये।

उनकी उम्र लगभग 35-36 रही होगी और उनके चुचे और गांड तो एक दम मस्त थी।

जब वो चल रही थी तो उनके चूतड़ जबरदस्त हिल रहे थे मानो कह रहे हो कि आ जाओ मुझे दबा दो।

जब उन्होंने टॉवेल लाकर दिया तो मेरा ध्यान भंग हुआ।

मैंने अपना गीला शरीर सूखाया।

फिर उन्होंने मेरा नाम, कॉलेज का नाम पूछा और सोफे पर बैठने को कहा।

मैं सोफे पर बैठ गया।

मैंने उनसे उनका नाम पूछा तो उन्होंने अपना नाम अंजली बताया और वो शादीशुदा थी।

उनके पति बाहर जॉब करते हैं वो यहा एक निजी स्कूल मे शिक्षिका हैं।

बाकी सारा परिवार दूसरे राज्य में है और बच्चे नहीं हैं।

अंकल का दो साल पहले ट्रांसफर शहर से बाहर हो गया।

अब वो हफ्ते पंद्रह दिन मे एक बार शनिवार को आते हैं और रविवार को चले जाते हैं।

यह कहकर वे मायूस सी हो गयी।

मैं उनकी सारी बात समझ गया।

उन्होंने मुझसे चाय या कॉफ़ी लेने को कहा तो मैंने कॉफ़ी के लिए हाँ कर दी।

वो कॉफ़ी बनाकर ले आई फिर उन्होंने मेरे बारे मे पूछा और कहा कि मैं ऐसे मौसम में बिना रैनकोट के कहाँ जा रहा था?

मैं कुछ बोल पता इतने मैं उन्होंने बोल दिया गर्लफ़्रेंड से मिलने?

मैं चौंक गया। फिर मैंने माना कर दिया फिर उनके बार-बार पूछने पर बताया कि एक ही गर्लफ़्रेंड थी और अब ब्रेक अप हो गया है।

मैंने गाड़ी अंकल की तरफ घुमा दी।

आंटी से पूछा कि उन्हें अंकल की याद नहीं आती?

सुनकर वो दुखी हो गयी और कहने लगीं कि अब उन्हें अकेले रहने की आदत सी हो गयी है।

मैं समझ गया की आंटी से जुगाड़ हो सकता है।

अब मैंने सारी बातें की तो उनके आँसू निकल आए तो मैंने उनके आँसू पोंछे और उनके हाथ को पकड़ा।

मैंने उनसे कहा कि में अंकल की कमी तो पूरी नहीं कर सकता पर आपका दुख कम कर सकता हूँ।

उन्होंने पूछा – वो कैसे?

मैंने उन्हें तुरंत गले लगा लिया तो वे तुरंत अलग हो गयी और कहने लगीं कि ये ग़लत है।

मैंने कहा कि भरोसा रखिए और मैंने उनके हाथ मे एक किस कर दिया तो वे दूसरी तरफ मुँह करके खड़ी हो गयीं।

मैंने उन्हें पीछे से गले लगा लिया फिर सीधा करके एक लंबा सा किस किया।

उनके होंठ तो एक दम मलाई थे मुलायम रबड़ी की तरह।

अब मेरा एक हाथ उनकी पीठ को और दूसरा कमर को सहला रहा था।

मैं अपने एक हाथ से उनका एक बुब्स और दूसरे से चूतड़ को सहला रहा था।

अब मैंने उन्हें उठाकर पलंग में लिटा दिया तो उन्होंने मान किया और अंदर बेड रूम की तरफ इशारा किया।

मैंने उन्हें बेड रूम में लिटा दिया।

अब मैं उनको चूमने लगा, बेड में कभी वो मेरे उपर कभी में उनके उपर।

कुछ देर बाद मैंने उनके ब्लाऊज़ से बूब्स दबाने शुरू कर दिए और एक हाथ उनकी साड़ी में डालकर उनकी चूत को सहला रहा था।

फिर मैंने उनके ब्लाऊज़ और पेटी कोट को उतार दिया और उन्होंने मेरे कपड़ों को।

अब वो मेरे सामने गुलाबी रंग की ब्रा और नीले रंग की पैंटी में थीं मानो कोई स्वप्न सुंदरी लग रहीं थी

भाभी की नाइटी उठा के चूत के दर्शन किया
हमने दस मिनिट तक एक-दूसरे के साभी अंगो को चूमा फिर मैंने उनकी ब्रा और पैंटी को उतार दिया।

अब हम दोनों नंगे थे।

उनके चुचे एक दम फूले हुए थे उस पर कड़क निप्पल।

उन्हें मैंने ज़ोर-ज़ोर से पीना शुरू किया तो आंटी की आहह निकल गयी।

अब मैंने उनकी चूत सहलाना शुरू कर दिया।

उसमें मुँह लगाकर सूँघा तो वह पूरी गीली थी और उसमे मादक सुगंध आ रही थी।

मैंने उसका पानी पिया जैसे ही जीभ लगाई आंटी कराह उठी।

मैं उंगली और जीभ को चूत में डालता रहा।

फिर अपना लंड आंटी को पकड़ाया तो उन्होंने लेने से मना कर दिया पर मैंने ज़ोर डाला तो मज़बूरी में लेना पड़ा।

क्या चूस रही थी वो?

कभी-कभी तो मैं जानबूझ कर ज़ोर से मार देता था।

अब मैंने उनके मुँह से निकाल लिया और उन्हें लिटा दिया और खुद उनके उपर आ गया।

दो तकिये मैंने उनकी कमर के नीचे लगा दिए।

वो चिल्लाए जा रही थी जल्दी करो नहीं तो मैं मार जाऊंगी, जान ले लोगे तब डालोगे क्या?
Forwarded from Antarvasana story
उन्होंने अब टाँगे फैला दी और मैंने अपना लंड उनकी चूत की दीवार पर फसाया और एक झटका दिया पर लंड केवल आधा गया।

आंटी चीख उठीं और उनकी आँखों से दर्द के मारे आँसू निकल आए।

मैंने तुरंत उनके होंठो पर अपने होंठ रख दिए फिर पाँच मिनट के बाद उन्होंने कहा तो मैंने झटके देने शुरू कर दिए।

उन्होंने बताया कि तीन महीने से लंड नसीब नहीं हुआ है।

आराम से करो। फिर मैंने झटकों की स्पीड बढ़ानी शुरू की तो आंटी की ईयी आ आ उई माँ मर गयी मैं की आवाज़ें कमरे में गूँज रही थीं।

तीस मिनट हम इसी पोज़िशन में सेक्स करते रहे।

फिर मैं नीचे वो उपर आ गयीं।

दस मिनट तक आंटी उपर और मैं नीचे।

अब मैं झड़ने वाला था तो आंटी से पूछा कहाँ निकालु तो उन्होंने अंदर ही निकालने को कहा और बताया की अंकल का तो एक दम पानी निकलता है।

उनका लंड भी छोटा है और ढंग से खड़ा भी नहीं होता और मेरा निकल गया।


अब हम ऐसे ही नंगे 10 मिनट तक लेटे रहे।

फिर मैंने उनसे एक बार गांड मरवाने के लिए कहा तो उन्होंने उसे गंदा काम कह कर मना कर दिया।

पर मैं कहाँ मानने वाला था।

उन्हें पटा लिया और उन्हें कोहनी के बल घोड़ी बना दिया और टेबल से तेल की शीशी ले आया।

उनकी गांड के छेद पर उंगली लगाई तो उनके सारे शरीर मे फूरफ़ुरी चूत गयी।

मैंने अच्छे तरीके से तेल लगाकर अपनी उंगली डालना शुरू की।

धीरे से दस मिनट बाद मैंने अपना लंड गांड के छेड़ पर लगा कर एक धक्का दिया तो आंटी चिल्ला उठी।

इस बार तो उनकी चीख पहली की सारी चीखों से दो गुणी थी।

मैं रुक गया और वो माना करने लगी।

फिर मैंने 5 मिनट बाद शुरू किया आराम-आराम से।

अब धीरे-धीरे उसका छेद खुलने लगा था और उन्हें मज़ा आने लगा था।

अब मैंने स्पीड बढ़ा दी और लगभग 30-40 मिनट के बाद मेरा निकल गया।

फिर मैं और आंटी लेटे रहे।

कब नींद लग गयी पता ही नहीं चला।

मैंने उठने के बाद आंटी को बताया कि मेरा सपना था कि मैं आंटी और भाभी के साथ सेक्स करूँ, वो आपने पूरा किया।

उन्होंने बताया कि उनकी शादी को 8 साल हो गये हैं और उनके पति ने आज तक उन्हें इतना मज़ा नही दिया।

वे संतुष्ट नहीं हो पाती।

मज़बूरी में उन्हें मूली और बैंगन से काम चलना पड़ता था।

तुमने मेरे दिल ले लिया आज से मैं तुम्हारी हूँ, जो चाहे करो।

उसके बाद उनके साथ नाश्ता किया और मैं वापस चला गया।

आज 2 साल बाद भी मेरा उनके साथ रिश्ता है।

अब हम हफ्ते में 2-3 बार सेक्स करते हैं।

मैंने उनकी सहेली जो डॉक्टर है उसे भी चोद दिया है और उनके बाजू वाली लड़की को भी।
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Forwarded from Sexy girl navya
सोती हुई बहन की चुदाई

अपनी सोती हुई बड़ी बहन के शरीर के साथ खिलवाड़ करने वाला 19 साल का अजय मुंबई के अँधेरी का रहने वाला है। अजय अपनी बहन के शरीर को कामुक नज़रो से देखता था। मौका मिलने पर अजय ने की सोती हुई बहन की चुदाई। अजय ने अपनी चुदाई कहानी में बताया की सोती अवस्था में उसकी बहन हो गई वासना मूलक और जब उसकी नींद खुली तो वो खुद को भी नही रोक पाई।

मैं 12 क्लास में था जब गर्मियों की चुटिया चल रही थी। तेज गर्मी की वजह से मैं घर से बाहर नही निकलता था। मेरी बड़ी बहन किसी शॉपिंग मॉल में काम करती थी।

मेरी बहन काफी नाज़ुक स्वभाव की थी। वो दिल की साफ और अच्छी सोच रखने वाली थी। वो मेरा काफी ख्याल रखती थी जब मम्मी घर पर नही होती थी।

मैं भी अपनी बहन को काफी चाहता था पर उम्र के साथ साथ जवानी भी बढ़ती जा रही थी। मैं कभी कभी अपनी ही बहन के शरीर को देख कामुक हो जाता।

मुझे पता है की अपनी बहन को इस तरह गन्दी नज़रो से देखना कोई अच्छी बात नही पर उम्र और जवानी मेरी ही नही मेरी बहन की भी बढ़ रही थी।

मेरी बहन लम्बी और सुडौल हो चुकी थी साथ ही उसके लहराते खुशबूदार बल उसे और सुंदर बना देते।

सेक्सी तो वो सबसे ज्यादा तब लगती जब वो अपने शॉपिंग मॉल की ड्रेस पहनती।

उसकी काली टाइट जीन्स उसकी जांघो को और निखार देती। उसकी गांड की गोलाई देख मेरा मन करता की वही जा कर चिपक जाऊ।

शॉपिंग मॉल की वो टाइट लाल टीशर्ट मेरी बहन के नरम स्तनों को और बड़ा दिखती।

टीशर्ट से झाकती वो दो मोटी और सख्त चूची देख मेरा अपनी बहन का दूध पिने का मन करता।

जब वो मटक कर अपनी चूचियां और कूल्हे हिलाते हुए घर से बाहर निकलती तो मैं उसे देखता रहता। फिर बाथरूम में जा कर अपनी बहन की कल्पना करके अपने लंड को सहलाता।

एक दिन अचानक मेरी बहन दोपहर को शॉपिंग मॉल से आ गई। जब माँ ने पूछा क्या हुआ तो बहन बोली आज मेने हाफ डे लिया है मैं काफी थक गई थी।

Hindi Sex Story : अपने सगे भाई के बच्चे की माँ बनने बाली हु और खुश हु
मेरी बहन नहाने के बाद गर्मिओ के हलके और छोटे कपडे पहन कर अपने कमरे में आराम करने चली गई।

माँ – अजय बेटा मैं सूट सिलवाने जा रही हूँ घर का ख्याल रखना और अपनी बहन को निम्बू पानी बना कर देना काफी थक गई है वो।

मेने हाँ कहा और माँ घर से बाहर चली गई। घर पर बस मैं और मेरी बड़ी बहन थी।

मेने निम्बू पानी बनाया और बहन के कमरे में चला गया।

मेरी बहन तब तक सो चुकी थी पर मेरा लिंग उसे देख फिर जागने लगा।

मेरी बहन ने एक हलके कपडे की निकर पहनी। मुझे उसके गोरे पर और मोटी गांड साफ दिख रही थी। साथ ही उसने ब्रा भी नही पहनी थी जिसकी वजह से मैं उसके स्तन टीशर्ट से देख पा रहा था।

मेने निम्बू पानी का गिलास टेबल पर रखा और अपनी बहन को करीब से देखने लगा।

उसका शरीर देख मुझे लगा की मेरी बहन सिर्फ और सिर्फ चुदने के लिए बनी है।

मेने धीरे से अपना एक हाथ उसके स्तन पर रखा और उसे हल्का सा मसलने लगा।

हाथो पर वो नरम एहसास मेरे लिंग को और कठोर बना दिया। मेने दूसरा हाथ अपनी बहन की निकर में डाल दिया।

उसकी गांड और स्तन दोनों एक समान नरम थी। उसका शरीर छूते हुए मैं अपना लंड हिलने लगा।

उसके शरीर से आने वाली मीठी खुशबू मेरी अन्तर्वासना को हद से ज्यादा बढ़ा रही थी। मेने उसकी कच्छी में हाथ डाला और उसकी चुत सहलाने लगा।

मेरी बहन ने चुत पर काफी बाल ऊगा रखे थे पर मुझे उनसे कोई फर्क नही पड़ा। मुझे तो बस अपनी काम वासना मिटानी थी।

चुत सहलाते सहलाते मेरी बहन की चुत से निपचिपा तरल निकलने लगा।

उसकी चुत पूरी गीली और मुलायम हो गई। मेने धीरे से अपनी बहन की निकर और कच्छी उतर दी और उसकी चिकनी और मलाई दार चुत में ऊँगली डालने लगा।

जैसे जैसे मैं अपने soti hui bahan ki chudai कर रहा था वैसे वैसे वो नींद में तेज़ सासे लेने लगी।

फिर अचानक उसने करवट बदली और मैं रुक गया।

मैं डर गया और सोचने लगा कही ये जाग गई और मुझे ये सब करता देख लिया और क्या होगा?

Hindi Sex Story : मौसी की बेटी की गर्म चुदाई-2
पर उसकी चुत से टपकता रस मुझे मन मोहित कर दिया। मैं उसकी चुत में दोबारा ऊँगली करने लगा और साथ में अपना लिंग हिलाने लगा।

मेरी बहन नींद में मुस्कुराने लगी और मुझे चुदाई के लिए निमंत्रण देने लगी।

मैं धीरे से अपनी बहन के पीछे लेटा और आराम से अपना लंड उसकी गुलाबी चुत में डालने लगा।

उसकी चुत का गर्म अहसास मुझे मेरे कूल्हे हिलने पर मजबूर कर दिया। मैं धुरे से अपना लंड अंदर बाहर करने लगा और बहन नींद में कराहने लगी “आह ह्म्म्म आह्ह”

मेरा जोश बढ़ा और मेने अपनी बहन के साथ पकड़ लिए और उसे तेज़ी से चोदने लगा।

तभी मेरी बहन के आँखे होली और उसने मेरा हाथ अपने स्तनों पर देख लिया।

मुझे इस बात का पता नही चला की वो जाग गई है और मैं उसे चोदता रहा।

चुदाई का आनंद जो मैं अपनी बहन की चुत को दे रहा था उसकी वजह से मेरी बहन मेरा साथ देने लगी।
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Forwarded from Sexy girl navya
जब वो आगे पीछे हिलने लगी तो मुझे इस बात का पता लगा की वो जाग चुकी है।

ये देख मेने अपने कूल्हे हिलना बंद कर दिए और मेरा दिमाग सुन पड़ गया। मेरे हाथ पर ठन्डे हो गए ये सोच कर की अब मेरी बहन क्या करेगी? और अगर पापा और मम्मी को पता चल गया तो ?

तभी मेरे बहन ने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी टीशर्ट के अंदर डाल कर मुझसे अपने स्तन दबवाने लगी।

उसने धीमी और शर्मीली आवाज में कहा रुक क्यों गए अच्छा लग रहा था।

उस पल मुझे समझ नही आया की क्या करू। तभी मेरी बहन अपनी गांड आगे पीछे हिलाने लगी मेर मेरे लंड को चोदने लगी।

ये सब देख मेरा लंड दोबारा से फूल गया और मेने अपनी बहन से स्तन पकड़ उन्हें जोर से मसलने लगा और चुत चोदने लगा।

चुदाई के दौरान मेरी बहन ने एक बार भी पीछे नही देखा और अपना शरीर बेजान छोड़ कर अपनी रसीली गांड मुझ से चुदवाती रही।

बहन (धीमी आवाज में हफ्ते हुए) – अहह अहम्म्म्म अह्ह्ह्ह।

मेरी बहन के मुँह से अहह के अलावा कोई शब्द नही निकला। वो जानती थी की एक भाई और बहन सेक्स नही कर सकते पर उसे भी उसकी रसीली चुत ने मजबूर कर दिया।

Hindi Sex Story : Munhboli Bahan Ki Choot Dekh Rishta Badal Gaya 2
कुछ 15 मिनट के बाद मेरा झड़ने वाला था। मेने उसकी चुत से अपना लिंग बाहर निकाला और जैसे ही झाड़ने वाला था मेरी बहन ने पीछे हाथ करके उसे पकड़ लिया और हिलने लगी।

मेरे सख्त लंड पे वो बड़ी बड़ी नसे मेरी बहन के हाथो पर ऐसा अहसास दे रही थी जो वो कभी नहीं भूलेगी।

मेरा सारा माल उसकी गांड पे जा चिपका और वो वह हाथ फेरने लगी।

जोश उतरने के बाद मैं होश में आया और मुझे समझ आया की मेने क्या किया।

मैं जल्दी से वह से उठा और अपनी पैंट ऊपर करके वह से चला गया।

मुझे समझ नही आ रहा था की अब मैं क्या करुगा अपनी बहन से कैसे आँखें मिलाऊंगा।

एक घंटे बाद मेरी माँ घर आयी और शाम का नाश्ता बनाने लगी। उनहोने पूछा “क्या तुम्हारी बहन उठ गई ? जा कर देख लो। अगर उठ गई है तो उसे यहाँ भेज देना उसे भूख लगी होगी। “

मैं वह जाते हुए डर रहा था। मेने धीरे से दरवाज़ा खोला तो देखा मेरी बहन वैसी की वैसी लेटी थी जैसा मैं उसे चोद रहा था। उसकी गोरी गांड पर लगा मेरा सारा माल सुख गया था और वो वैसी ही अवस्था में सो रही थी।

कही माँ उसे ऐसा ना देख ले मेने उसकी कच्छी धीरे से ऊपर की और उसे वापस निकर पहना दी और माँ को बोल दिया की वो अभी भी सो रही है।

उस दिन के बाद से मेने और मेरी बहन ने करीब 2 महीने तक बात नही की और ना ही एक दूसरे से नज़रे मिलाई।

आज भी जरूरत पड़ने पर ही हम बात करते है। ये थी मेरी बहन की चुदाई कहानी। अगर मेरी सोती हुई बहन की चुदाई ने आपको कामुक महसूस कराया तो कमेंट में जरूर बताना।
Forwarded from Sexy girl navya
माँ ने अपने पैर मेरी कमर में फंसा लिए और मैं उनकी चूत चोदने लगा.
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सेक्सी आंटी (मेरे दोस्त की माँ) की चुदाई कहानी
by aakash 22-12-2022 29,922
हाय दोस्तो! मेरा नाम सैंडी है. मैं दिल्ली में रहता हूँ. मेरी शादी हो चुकी थी और शादी के चार साल बाद तलाक भी हो गया.

आज मैं आप लोगों को अपनी एक इंडियन आंटी सेक्स स्टोरी बताने जा रहा हूं कि कैसे मैंने दोस्त की मम्मी की चुदाई की. उम्मीद करता हूं कि आपको ये पसंद आयेगी.

ये बात आज से लगभग तीन वर्ष पहले की है जब मेरी उम्र थी 28 साल की थी. तब मेरी शादी को टूटे हुए ज्यादा वक्त नहीं हुआ था. तलाक के बाद मुझे एक अधूरापन काटता रहता था. मैं जिंदगी से ज्यादा कुछ नहीं चाहता था क्योंकि बस दारू और अपने बिज़नेस को छोड़कर मेरे पास ज्यादा कुछ बचा भी नहीं था.

इंडियन आंटी सेक्स स्टोरी की शुरुआत हुई फ़ेसबुक में आए मेरे दोस्त के मेसेज से.

प्रदीप और मैं स्कूल के वक्त में बहुत अच्छे दोस्त हुआ करते थे. जब उसे मेरे तलाक के बारे में पता चला तो उसे बहुत दुख हुआ। उसने बताया कि वो रशिया में रहने लगा है और काम के चलते इंडिया में भी कम ही आता है.

इस तरह से अक्सर हम दोनों बातें करने लगे. हम लोगों की बात बढ़ने लगी.

एक दिन प्रदीप का व्हाट्सएप कॉल आया. उसने बताया कि उसकी माँ की तबियत खराब है और वो दिल्ली में अकेली रहती है. इस कारण प्रदीप बहुत चिंतित था.

प्रदीप ने बताया कि उसके पिता का स्वर्गवास भी 2 वर्ष पूर्व ही हुआ.
मैंने उससे कहा कि मैं उसके घर चला जाता हूँ।
प्रदीप ने थोड़ा रुक कर जाने को कहा ताकि वो अपनी माँ को बता सके।

कुछ देर के बाद प्रदीप का फोन आया और उसने मुझे थोड़ी देर के बाद जाने के लिए कहा.
उसने मुझे अपनी मॉम का नम्बर बता दिया.

मगर मैंने प्रदीप का नया घर तो देखा ही नहीं था. मैंने आंटी का नम्बर लिया और उनको कॉल किया. कॉल पर मैंने उन्हें व्हाट्सएप पर उनकी लोकेशन भेजने को कहा.
आंटी ने वो भेज दी.

मैंने अपने बैग में जरूरत का सामान रखा और अपनी दारू को कोल्ड ड्रिंक की बोतल में भर कर रख लिया. फिर मैंने आंटी के घर जाने के लिए कैब बुक करवा दी.

जब मैं उनके घर के पास पहुंचा तो मैंने दोस्त की मम्मी को फोन किया कि वो बाहर दरवाजे पर खड़ी हो जायें ताकि मैं उनको देख सकूं. आंटी अपने दरवाजे पर मिलीं. मैंने उन्हें देखा तो पहचान लिया.

मैंने कैब वाले को पैसे दिये और फिर आंटी के पास जाकर उनके पैर छुए. आंटी ने मुझे गले लगाया और हम अंदर चले गये.
मैंने आंटी से कहा- आंटी, आपकी तबियत ठीक नहीं है, आप लेट जाओ, मैं सब देख लूंगा.

फिर भी दोस्त की मम्मी मेरे लिये किचन से पानी लेकर आई. मुझे गिलास थमाते हुए बोली- बेटा, तुम बेवहज परेशान हो रहे हो. मैं सब मैनेज कर लूंगी.

मैं- आंटी आप ऐसे ना बोलिये. मुझे क्या परेशानी होगी भला? अगर प्रदीप ने मुझे पहले बता दिया होता तो मैं पहले ही आ जाता. वैसे भी मैं घर में अकेला ही रहता हूं इसलिए वहां पर बोर ही होता रहता हूं. यहां पर आपकी सेवा करने का मौका तो मिल रहा है कम से कम। इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है?

आंटी- बेटा अकेले क्यों? तुम्हारे घर वाले कहाँ हैं? और तुमने तो शादी भी की थी. वाइफ कहाँ है?
मैंने बात को काटा और आंटी को खाने के लिये पूछा.

इस पर उन्होंने कहा कि खाना बनाया हुआ है. अपने लिये उन्होंने खिचड़ी बनायी थी जो वो खा चुकी थी. मैंने उनको आराम करने के लिये कहा और खुद किचन में जाकर अपने लिये खाना निकाला.

मुझे मेरा रूम बता कर आंटी अपने कमरे में चली गयी.

बैठक वाले हॉल में मैंने खाना लगाया और टीवी देखने लगा. खाने के साथ मैंने वो कोल्ड ड्रिंक वाली बोतल भी निकाल ली. मुझे खाने के साथ ही पीने की भी आदत थी.

मैं अपने खाने में और पीने में मस्त होकर टीवी देख रहा था कि दोस्त की मम्मी के रूम से कुछ गिरने की आवाज आई. मैं देखने के लिए उनके रूम की ओर भागा. मैंने पाया कि आंटी कुछ ढूंढ रही थी.

आंटी से पूछा- क्या हुआ आँटी? मैं कुछ मदद कर सकता हूँ?
आंटी- नहीं बेटा, मैं अपना बाम ढूंढ़ रही हूँ. मेरा सिर दर्द से फटा जा रहा है.
मैं- आंटी उसे छोड़िए. मेरे पास बाम है. आप लेट जाइए, मैं लगा देता हूँ.

ये बोलकर मैं अपने बैग से बाम लेकर आँटी के रूम में पहुँचा जहाँ आँटी अपने बिस्तर में लेटी हुई थी.
मैं- आंटी सीधी लेट जाइए. मैं आपका हेड मसाज कर देता हूँ.

आंटी- क्यों परेशान हो रहे हो बेटा?
मैं- प्लीज आंटी, अगर अपना बेटा मानते हो तो मत रोको.

ये बोलते हुए मैंने बाम खोला और उनके सिरहाने के पास पहुँच गया. जैसे ही मैंने बाम उनके माथे पर लगाया मेरे शरीर में एक अजीब सी हरकत हुई और मेरा मन करने लगा कि मैं आँटी के पास चिपक कर सो जाऊँ.

मुझ पर दारू का नशा भी चढ़ गया था। आंटी ने मैक्सी पहनी थी. मैं बिना कुछ बोले उनके पाँव के पास आ गया और दबाने शुरू कर दिए.
आंटी- क्यों परेशान हो रहे हो सैंडी बेटा? तुम सो जाओ.
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मैं जानता था कि आंटी बस इसलिये संकोच कर रही थी क्योंकि मैं काफी अरसे बाद पहली बार उनसे मिला था. मैं बिना कुछ बोले उनके पैर दबाता रहा.
वो भी थोड़ा सा मना करती रहीं पर कुछ नहीं बोलीं।

कुछ देर बाद चुप्पी मैंने तोड़ी. उनसे पूछा- वैसे हुआ क्या है आपको?
दोस्त की मम्मी- कुछ नहीं बस कमजोरी है और पूरा शरीर टूट रहा है. कल चक्कर भी आ गए थे. चार दिनों से कामवाली भी नहीं आ रही है. गलती से ये बात मैंने पिंटू (वो प्यार से प्रदीप को पिंटू कहती थी) की बीवी को बता दी. तब उसने तेरे पास फोन करके तुझे भी परेशान कर दिया.

मैं- कितना लकी है वो और आप भी कि आपको इतनी अच्छी ऐन्ड्रा भाभी मिलीं हैं. विदेशी हैं मगर फिर भी ख्याल पूरा रखती हैं. वो बोल रही थी कि आपको बुला रही हैं मगर आप जा नहीं रहे हो?

बात करते करते मेरे हाथ उनके पैरों को दबा रहे थे. धीरे धीरे मुझे उनके पैरों की मखमली छुअन का अहसास हो रहा था.
आंटी- बस अगले महीने सोच रहीं हूँ मगर मैं इस बीमार शरीर के साथ नहीं जाना चाहती। थोड़ा घुटनों के पास दबा दे बेटा.
ये बोलते हुए उन्होंने करवट ले ली.

आंटी- तेरे हाथों में कुछ बात तो है सैंडी.
मैं- अरे नहीं आंटी, मैं कोई पेशेवर मसाज वाला नहीं हूं. मैं तो बस आपको आराम देने की कोशिश कर रहा हूं.
मानो आंटी कहना चाह रही हो कि उन्हें काफी रिलेक्स फील हो रहा है.

मैं बोला- आंटी अगर बात सिर्फ़ कमज़ोरी और शरीर टूटने की है तो आप मुझ पर छोड़ दो. आपके घर में सरसों का तेल है क्या?
आंटी- हाँ है, पर क्यों?

जैसे आंटी जान गयी थी कि उनको पता है कि मैं उनकी मालिश करने वाला हूं. फिर भी वो पूछ रही थीं.
फिर वो बोली- तेल चाहिए तो किचन में रखा हुआ है. जाकर उठा ले आ.

मैं- ओके, मैं देख लूंगा. आप ब्लॉवर ऑन करो. (जनवरी की ठंड का वक्त था) किस्मत अच्छी थी कि किचन में तेल तो मिला ही, साथ में फ्रिज में बीयर भी थी. क्या फ़र्क पड़ता है कि आंटी की थी या पिछले महीने जब प्रदीप और भाभी आए थे तो उनकी थी.

बस मेरे सामने थी तो मैंने पी ली और तेल गुनगुना करके आंटी के पास पहुंचा. पैरों के पास जाकर उनके तलवों में मालिश शुरू की. बहुत मुलायम तलवे थे उनके.

आंटी को मैंने आज से पहले ऐसी वासना भरी नजर से कभी नहीं देखा था. मेरी नजरें उनके 36-32-34 के फीगर को घूर घूर कर नाप ले रही थीं.

उनकी मैक्सी को मैंने थोड़ा ऊपर किया तो उनकी गोरी गोरी टांगें मेरे सामने निकल आईं. उनकी टांगों पर एक भी बाल नहीं था. मैंने अपने तेल वाले हाथ लगाये तो तेल भी शहद सा चमकने लगा.

मगर आंटी के हाव भाव में अभी कामुकता कहीं दूर दूर तक भी नहीं थी. मेरे लिये अब ये एक चेलेंज बन गया था क्योंकि मैंने आंटी को गर्म करने की ठान ली थी. मेरा आकर्षण आंटी के बदन की ओर बढ़ता ही जा रहा था.

मैंने पूछा- आँटी, कैसा लग रहा है?
आँटी- बहुत अच्छा लग रहा है सैंडी. मैं तो सलाह दूंगी कि तू अपना काम छोड़ कर एक मसाज सेंटर खोल ले.

मैं- अरे आप भी क्या बोल रही हो आंटी … मैं सबको थोड़ी ही करता हूँ? मैं तो बस आपके आराम के लिए ये सब कर रहा हूं. अब आप उल्टा लेट जाओ. मैं घुटने दबा देता हूँ.

आंटी अब उल्टी लेट गयी और मैंने मैक्सी घुटने से ऊपर उठा दी. क्या नज़ारा था मेरी आंखों के सामने, मैं उनके घुटनों की बनावट से अंदाजा लगा सकता था कि आगे की यात्रा अगर मंगलमयी रही तो जन्नत मिलने वाली है.

दोस्त की मम्मी पूछने लगी- अरे तेरी बीवी कहां है? वो तेरे साथ में नहीं रहती क्या?

ये पूछ कर आंटी ने जैसे मेरी दुखती हुई रग पर हाथ रख दिया. मैं कुछ देर तक तो मानो चुप ही रहा. कुछ नहीं बोला.

चूंकि दारू का नशा था और उस नशे में आदमी ज्यादा भावुक और रोमांटिक हो जाता है.

तलाक की बात सोच कर मेरी सारी पुरानी यादें ताजा हो गयीं. मेरी आंखें भर आईं और एक आंसू टप करके आंटी की टांग पर गिर गया. उन्होंने पलट कर देखा तो मैं रो रहा था.

बिना कुछ बोले मैं वहां से उठा और किचन में चला गया. फ्रिज खोला और जो बीयर की दूसरी बोतल थी वो भी खोल कर पीने लगा. ये लास्ट बोतल बची हुई थी. बीयर पीकर मैं दोबारा से आंटी के पास गया.

आंटी बैठी हुई थी.
आंटी- क्या हुआ सैंडी?

अभी भी मेरा गला भर भर आ रहा था. मैं कुछ बोलना चाह रहा था मगर आवाज की जगह आँसू निकल आते थे. मैंने कुछ नहीं सोचा और मैं सीधा आंटी से जाकर लिपट गया.

उन्होंने मुझे अपनी बांहों में ले लिया और मुझे संभाला. मेरे सीने पर आंटी के सीने का स्पर्श हो रहा था. वो मेरे बालों को सहला रही थी. कुछ देर तक इन पलों का आनंद लेने के बाद मैंने खुद को आंटी से अलग किया.

मैं- आंटी, आप इन बातों को छोड़ो. मैं अब अकेला हूं और ऐसे ही खुश हूं.
ये बोलते हुए मैंने आंटी को फिर से लेटने को कहा.

मैं फिर से उनकी मालिश करने लगा. मैंने म्यूजिक ऑन कर दिया. मैंने अपने फोन में बांसुरी की धुन लगा दी और आंटी के पैरों की मालिश करने लग गया.
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मेरे हाथ अब धीरे धीरे ऊपर की तरफ बढ़ते जा रहे थे. हर चक्कर के साथ मेरे हाथ थोड़ा और ऊपर तक चले जाते थे. फिर आंटी अचानक सीधी लेट गयी. मगर मैंने मसाज को जारी रखा.

आंटी सेक्स के लिए तैयार थी.

मैंने उनकी मैक्सी को और ऊपर कर दिया. उन्होंने कोई विरोध नहीं किया. मगर हैरानी इस बात की थी उनकी आंखें खुली हुई थीं. उनमें न तो हवस थी और न ही शर्म. बस प्यार दिखाई दे रहा था.

आंटी की जांघों को मैं दबा दबा कर मसाज कर रहा था. मुझे आंटी की पैंटी साफ दिख रही थी. मेरे हाथ धीरे धीरे उनकी पैंटी की ओर बढ़ रहे थे. एक समय ऐसा आया कि मेरी उंगलियां आंटी की पैंटी छूकर आने लगीं.

मेरा लौड़ा तन गया. आंटी की चूत के बारे में सोच कर ही लंड फनफना गया था.
बहुत कोशिश की रोकने की लेकिन नहीं रुका गया. तो आखिर में मैंने आंटी की पैंटी पर हाथ ही रख दिया. आंटी की चूत मुझे मेरे हाथ के नीचे टच हो गयी.

आंटी ने अब भी कुछ खास प्रतिक्रिया नहीं दी.

मैंने आंटी की चूत को पैंटी के ऊपर से सहला दिया. आंटी ने धीरे से अपनी आंखें बंद कर लीं. ये मेरे लिए हरी झंडी थी कि दोस्त की मम्मी की चुदाई की सहमति मिल गयी है. आंटी सेक्स के लिए तैयार थी.

मैंने नीचे झुक कर आंटी की पैंटी पर ही मुंह रख दिया और आंटी की चूत को पैंटी के ऊपर से ही चाटने लगा. सब कुछ चुपचाप हो रहा था. दो मिनट में ही आंटी की पैंटी से चूत रस की खुशबू आने लगी थी. ऊपर से तो पूरी पैंटी मेरे थूक में गीली हो गयी थी और नीचे उनकी चूत के रस में।

उसके बाद मैंने पैंटी को भी निकाल दिया. दोस्त की मम्मी की चूत नंगी हो गयी. उनकी चूत पर छोटे छोटे बाल थे मानो 4-5 दिन पहले ही ट्रिम किये गये हों.

मैंने आंटी की चूत को चाटना शुरू कर दिया. उन्होंने अब धीरे से आहें लेना शुरू कर दिया. उनकी चूचियां ऊपर नीचे होने लगी थीं और सांसें तेज हो गयी थीं.

तीन-चार मिनट तक मैं आंटी की नंगी चूत को चाटता रहा. उसके बाद मैंने आंटी को उठने के लिए बोला और खुद नीचे लेट गया. मैंने आंटी को अपने होंठों पर आने के लिये कहा. आंटी मेरी छाती के दोनों ओर पैर करके अपनी मैक्सी उठा कर मेरे होंठों के पास अपनी चूत को ले आई.

मैंने आगे बढ़ कर आंटी की चूत में मुंह दे दिया और उसकी चूत को जोर जोर से चूसने और चाटने लगा. मेरे होंठों पर चूत को लगाये हुए ही आंटी ने अपनी मैक्सी और ब्रा भी उतार दी.

आंटी के चेहरे को देख कर लग रहा था कि अब वो एक पल के लिए भी मेरे मुंह से अपनी चूत को अलग नहीं करना चाहती है. अब वो खुद ही मेरे हाथों को अपनी छाती पर ले गयी.

मुझे उम्मीद नहीं थी कि 52 साल की उम्र में भी आंटी के जिस्म में इतना जोश होगा. मैंने उनको सीधी लेटने को बोला. वो लेट गयी. मैंने उनकी चूचियों को दबाना शुरू किया और नाभि को भी चाटने लगा.

धीरे धीरे मैं अपने मुँह को उनकी छाती पर और हाथ को नाभि पर ले गया. मेरा लंड तन कर लोहा हो चुका था. उनके दूध चूसकर मैं उन्हें और गर्म कर रहा था.

अब मैं और नहीं रुक सकता था. अब मैंने अपने कपड़े भी उतार फेंके. जब अंडरवियर उतार रहा था तो आंटी मेरे लंड को हवस भरी नजर से देख रही थी.

मैंने अब फिर से आंटी की चूत को चूसना शुरू कर दिया. जैसे ही मैंने दूध चूसते हुए एक उंगली उनकी चूत में डाली तो वो चिल्ला पड़ी. मैंने उनके मुँह पर हाथ रखा और दोनों टांगें चौड़ी करके लंड को उनकी चूत पर रगड़ना चालू किया.

आखिरकार आंटी सिसकारते हुए बोली- आह्ह सैंडी, स्स्स… अब अंदर डाल.

मगर मैं बिना कॉन्डम के दोस्त की मम्मी की चुदाई नहीं कर सकता था. मैं कॉन्डम लेने गया तो आंटी सिसकारते हुए चूत में लंड डालने के मिन्नत कर रही थी. जल्दी से मैं अपने बैग से कॉन्डम लेकर आया.

वापस आकर कुछ ही पलों में मैंने अपने लंड पर कॉन्डम चढ़ाया और दोबारा आंटी को चूसना शुरू कर दिया.
आंटी फ़िर बोलने लगी- सैंडी प्लीज़ … अब तो डाल अंदर.

मैंने भी देर नहीं की और एक झटके में लंड को अंदर डाल दिया.

आंटी की चूत में लंड देकर मैं आंटी को चोदने लगा. आंटी ने मेरे हाथ अपने चूचों पर रखवा लिये. उनका इशारा था कि मैं उनकी चूचियों को दबा दबा कर उनकी चूत मारूं.

मैंने आंटी के बूब्स को दबाते हुए उनकी चूत में लंड पेलना शुरू कर दिया. आंटी के चेहरे पर चुदाई के आनंद की मदहोशी बिखरने लगी. आंटी जैसे आत्मा तक तृप्त हो रही थी.

मुझे भी बहुत दिनों के बाद चूत मिली थी. चुदी हुई ही सही लेकिन चूत तो चूत ही होती है.

ऊपर से दारू का नशा भी था इसलिए आंटी की चूत चोदने में पूरा मजा आ रहा था. मैं दोस्त की मम्मी की चुदाई करता रहा और आंटी बीच बीच मुझे अपने ऊपर खींच कर मेरे होंठों को चूसने लगती.

पता नहीं कितनी देर तक मैं आंटी की चुदाई करता रहा. नशे में टाइम का ज्यादा कुछ होश नहीं था. मगर मैं एक गर्लफ्रेंड की तरह आंटी को चोदता रहा.
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आंटी को चोदते चोदते मैं स्खलन के करीब पहुंच गया. मैंने तेज तेज धक्के लगाते हुए आंटी की चूत में घुसे कॉन्डम चढ़े लंड से तेज तेज वीर्य की पिचकारी मारी जिसने मेरे कॉन्डम को भर दिया.

उसके बाद मैं आंटी के ऊपर गिर गया. मगर फिर लंड के सिकुड़ने से पहले ही मैंने लंड को चूत से बाहर खींचा और कॉन्डम निकाल कर उसको गांठ मारकर कूड़ेदान में फेंक आया.

वापस आया तो मेरा झूलता हुआ लंड देख कर आंटी मुस्करा रही थी. मैं भी नशे में था इसलिए मैंने ज्यादा कुछ रिएक्ट नहीं किया और हल्का सा मुस्करा कर बेड पर आकर गिर गया.

आंटी की चूचियों पर अपना सिर रख कर मैं सो गया. मुझे नींद लग गयी और फिर शाम को ही आंख खुली. आंटी की तबियत ठीक लग रही थी. उन्होंने मुझे घर जाने के लिए कहा. मगर मैं नहीं गया क्योंकि प्रदीप ने मुझे दो दिन तक वहीं रहने के लिए बोला था.

दो दिन तक मैं आंटी के घर में ही रहा और इस दौरान चार बार दोस्त की मम्मी की चुदाई मुझसे हुई. आंटी से मेरी अच्छी दोस्ती हो गयी. प्रदीप को इस बारे में कुछ नहीं पता था मगर मुझे मेरे अकेलपन की साथ प्रदीप की मॉम के रूप में मिल गयी थी.
मेरा नाम अनामिका है और मेरे भैया का नाम राजवीर है। भैया असम में पढाई करते हैं और मैं लखनऊ में पढ़ती हूँ। वो दीपावली में घर आये था। माँ और पापा दोनों भी अध्यापक है। दिवाली के दिन पूजा पाठ कर के हम दोनों भाई बहन पहले घर के बाहर दीपक जलाये लड़ियाँ लगाई पूरा घर जगमग कर रहा था।

माँ खाना बना रही थी और पापा मामा जी के साथ बैठ कर बात कर रहे थे। माँ बोली दोनों जाओ छत पर भी दीपक जला दो एक भी कोना ऐसा नहीं रहने चाहिए जहाँ प्रकाश नहीं हो। उसके बाद हम लोग खाना खाएंगे। तभी चाचा के लड़की और उनकी तीनो बेटियां भी आ गई।

और कहने लगी चलो बाहर पटाखे चलाते हैं।
तो हम दोनों बोले अभी पहले छत पर लाइट जला लेते हैं उसके बाद हम लोग पटाखे चलाएंगे। तो वो लोग बोले ठीक है तुम दोनों बाद में आ जाना और हम दोनों छत पर चले गए। माँ बोली छत पर जा रहे हो दरवाजा लगा देना बिल्ली आ जाती हैं घर में तो हम दोनों छत पर जाकर छत का दरवाजा लगा दिए।

यानी की अब निचे से कोई नहीं आ सकता था छत पर। उस समय हम दोनों के मन में कुछ भी नहीं था। दिये में तेल डालते डालते मैं बोली भइया आपको असम में मेरी याद नहीं आती है इस बार आप रक्षाबंधन में भी नहीं आये। और आज भी आपने कोई गिफ्ट नहीं दिया। ऐसा लगता है आप मुझे वहां जाकर भूल रहे हो।

वो बोली नहीं पगली ऐसा हो सकता है क्या तू तो मेरी प्यारी बहन हो मैं कैसे भूल सकता तुमको। हां आज मैं गिफ्ट नहीं ला पाया पर भाईदूज के दिन तुमको तुम्हारे पसंद का जीन्स टॉप ख़रीदवाऊँगा ये मेरा वादा है। रही बात आज दिवाली की तो मैं तुम्हे गले लगा सकता हूँ अगर तुम्हारी इजाजत हो तो।

तो मैं बोली प्यार में और वो भी भाई बहन की बिच में इजाजत की क्या जरुरत। मैं खड़ी हो गई और वो भी खड़े हो गए। वो मुझे गले लगा लिए और मेरी पीठ को सहलाने लगे. फिर उन्होंने मेरे गाल पर किस कर लिए। पता नहीं दोस्तों मुझे क्या हुआ आज तक समझ नहीं आया मैं भी उनके गाल पर किश करने लगी और पीठ सहलाने लगी।

वो भी मेरी पीठ सहला रहे थे और मैं भी पीठ सहला रही थी और गाल पर किश कर रही थी। अचानक वो मेरे होठ पर किश करने लगी और मैं अपने आप को रोक नहीं सकी और साथ देने लगी। दोनों की साँसे तेज चलने लगी। एक दूसरे को बाहो में डाले हुए थे। बाहर पटाखे की शोर थी। “

वो बोले अनामिका आज लग रहा है मेरे ज़िंदगी की सबसे अच्छी दिवाली है। मैं बोली हां मेरे लिए भी दोनों के होठ बात करते काँप रहे थे। मेरे शरीर में करंट सी दौड़ गई और मैं पलट गई और अलग खड़ी हो गई। वो तुरंत ही मुझे पीछे से पकड़ लिए। इस बार और जोर से मेरी चूतड़ की उभर उनके लौड़े में सट रही थी।

गोल गोल गांड में अपना लौड़ा रगड़ने लगे थे। और फिर पीछे से हाथ आगे कर के वो मेरी दोनों बूब्स को पकड़ लिए। मेरी चूचियां 34 साइज की है और गोल गोल और तनी हुई है। आप क्रिकेट का बाल समझ सकते हैं। वो धीरे धीरे दबाने लगी। और जैसे कुत्ते कुतिया को चोदते हैं तो कैसे करता है वैसा ही वो पीछे से करने लगा.

मैं पागल होने लगी पुरे शरीर में आग लग रही थी। गला सूखने लगा था साँसे तेज चलने लगी थी। मैं रोक नहीं पा रही थी ना तो अपने आप को ना तो भैया को। जैसे दो नदी जब एक जगह पर मिलती हैं और वहां जाकर एक हो जाती है वैसा ही हुआ था दोनों एक जगह एक हो गए थे।

जो मैं चाह रही थी वही भैया चाह रहे थे। एक नेगेटिव और एक पॉजिटिव एनर्जी एक दूसरे से मिलने को आतुर थी। तभी भैया बोला अनामिका परमिशन दो। तो मैं बोली परमिशन है। और वो तुरंत ही छत पर एक दिवार है जहा कोई नहीं देख सकता। वही चले गए और वो मुझे घोड़ी बना दिए।
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मेरी पेंट निचे कर दी पेंटी भी निचे कर दिए। और पीछे से ही अपना लौड़ा घुसाने लगे मेरी चूत काफी टाइट थी और अँधेरा था कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।

कई बार कोशिश करने के बाद भी मेरी चूत में लंड नहीं घुसा वो बार बार थूक लगा कर लौड़ा सेट कर रहे थे पर हरेक बार लौड़ा मूड जाता था और वो फिर से कोशिश करते थे। “

शायद दोनों ही अनाड़ी थे। मैं खड़ी हो गई और अपना निचे का पेंट अपने पैरों से बाहर कर दिया। और निचे लेट गई और दोनों पैरों को ऊपर कर के फैला दी। वो तुरंत ही घुटने पर बैठ गए।

उसके बाद उन्होंने मोबाइल का जलाकर मेरी चूत को देखा चुत गीली थी उन्होंने मोबाइल की लाइट में ही अपने लौड़े के चुत पर सेट किया और जोर से धक्का दिया मैं कराह उठी।

भैया का लौड़ा मेरी चूत में करीब ४ इंच घुस गया था पर दर्द बहुत हो रहा था। मैंने उनको रोका बोला बहुत दर्द कर रहा है। दोस्तों उन्होंने मेरी चूचियों को सहलाया और मेरे होठ पर किश करने लगी और और लौड़ा उतना हो घुसा था बस वो मेरी चूचियों को दबा रहे थे और और होठ चूस रहे थे।

वो बोले अब दर्द तो नहीं कर रहा है। मैं बोली हां अभी थोड़ा थोड़ा। और उन्होंने थोड़ा निकाला करीब दो इंच उसके बाद उन्होंने फिर से डाला अब उनका लौड़ा ५ इंच के करीब अंदर चला गया मुझे फिर से दर्द हुया। वो फिर रुक गए वो चूमने लगे होठों को और चूचियों को मसलने लगे।

मेरे मुँह से दर्द भरी सिसकारियां निकल रही थी अच्छा भी लग रहा था दर्द भी हो रहा था। फिर उन्होंने लौड़ा थोड़ा बाहर किया और फिर से जोर दिया अब उनका लौड़ा पूरी तरह मेरी चूत में समा गया अब मुझे अच्छा लगने लगा हौले हौले से गांड हिलाने लगी फिर गोल गोल घुमाने लगी।

उसके बाद उन्होंने भी अंदर बाहर करने लगे। अब दोनों ही आह आह कर रहे थे होठ मेरे सुख रहे थे। पर वासना की प्यास के आगे अपने होठ को जीभ से चाट लेती और गांड उठा उठा कर धक्के दे रही थी।

दोस्तों वो अब मुझे जोर जोर से पेलने लगे। हम दोनों ही एक दूसरे को मदद कर रहे थे किश कर रहे थे। करीब वो मुझे 15 मिनट तक अंधरे में चोदते रहे और अचानक वो जोर से अअअअअ आए आए की आवाज निकली और पूरा वीर्य मेरे चूत में गिरा दिया और शांत हो गए।

हम दोनों तुरंत ही उठा गए अपने कपडे पहने और उन्होने मोबाइल की लाइट जलाकर देखा वो निचे फर्श पर वीर्य भी गिरा था जो शायद मेरी चूत से निकला था और उसके साथ खून भी था शायद मेरी सील टूटी थी इस वजह से खून थे।

उन्होंने मुझे गले लगाया और फिर हैप्पी दिवाली बोला और कहा आज की रात हम दोनों लिए सबसे हसीन रात थी। हमेशा ना भूलने वाली रात थी। और दोनों एक दूसरे को दिवाली की बधाई दिए और फिर दीपक जलाने लगे। dirtymindsclubstory@gmail.com
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Sexy girl navya:
शादीशुदा दीदी की मालिश के बाद चुदाई
byमेरी बड़ी बहन की है. वो मैरिड है. मैं उनके घर गया तो दीदी ने मुझसे अपने पैरों की मालिश करवाई. उनकी नंगी टाँगें मुझे अच्छी लगी.

दोस्तो, मेरा नाम राहुल है, मैं कानपुर का रहना वाला हूं. मेरी उम्र 25 वर्ष है।
यह मेरीन्यूड सिस्टर Xxx कहानी मेरी और मेरी दीदी के बीच की है.

मेरी दीदी लखनऊ में रहती हैं काफी समय से जॉब में व्यस्त होने के कारण मैं लखनऊ दीदी के घर नहीं गया था.

दो महीने पहले मेरी नौकरी छूट गयी थी तो मैं घर पर फ्री रहने लगा.
एक दिन दीदी का फोन आया- राहुल, मेरे पास आकर हमारा घर देख जाओ, मै जीजा जी ने तुम्हारे इंटीरियर का काम जबरदस्त कराया है।

मैंने तुरंत अपना बैग पैक किया और बस पकड़कर लखनऊ में आशियाना में दीदी के घर जा पहुँचा।

आपको बताना भूल गया कि मेरी नेहा दीदी की उम्र लगभग 31 साल की है उनका फीगर गजब का है. उनकी चूचियाँ का साइज भी 38 है।
नेहा दीदी घर पर हाफ पैन्ट और टी शर्ट में ही रहती हैं.

मैं जब पहुँचा तो दीदी ने मुझे गले लगा लिया.
मुझे बहुत अच्छा लगा.
घर पर दीदी के अलावा उनके 2 बच्चे हैं जो अभी बहुत छोटे हैं; एक 6 साल है तो दूसरा 4 साल का.
जीजा जी ऑफिस के काम से अधिकतर टूर पर ही रहते हैं।

दोपहर को खाना पीना खाने के बाद मैं और दीदी बात कर रहे थे.
तभी दीदी ने बोला- राहुल मेरे पैर दबा दो!
आपको बता दूं कि मैं दीदी के पैर अक्सर दबाता हूँ.
मैं झट से उठकर दीदी के पैर दबाने लगा।

दीदी की गोरी गोरी टांगें देखकर आज मेरा मन डोल रहा था; मन कर रहा था कि मैं टांगों से भी ऊपर भी पहुँच जाऊं।

खैर 15 मिनट पैर दबाने के बाद दीदी ने बोल दिया- अब बस करो थक गए होंगे, आराम करो।

उसके बाद मैं दीदी एक ही बेड पर सो गए.

थोड़ी देर बाद मैंने देखा तो नेहा दीदी की एक टांग मेरे कमर पर चढ़ी हुई है और उनका एक हाथ भी मेरे ऊपर है.

मुझे बहुत मजा आ रहा था, मन कर रहा था कि मैं भी नेहा दीदी को बांहों में लेकर उनके दूध में हाथ डाल दूं।
ये दीदी की आदत शायद जीजा जी ने डाल दी थी।

ऐसे ही मुझे कब नींद आ गयी पता ही नहीं चला.

दीदी शाम को चाय लेकर आयी तब मेरी नींद टूटी।

अगले दिन सुबह जीजा जी को टूर पर 5 दिनों के लिए दिल्ली जाना था।
घर पर मैं और दीदी और उनके दोनों बच्चे थे।

दोपहर को बच्चे कम्प्यूटर पर गेम खेल रहे थे, मैं और दीदी कमरे में लेट कर बाते कर रहे थे।

दीदी ने आदत अनुसार मुझसे कहा- राहुल पैर दबा दो!
आज दीदी ने स्लीवलेस मैक्सी पहन रखी थी।

मैं झट से पैर दबाने लगा.

थोड़ी देर पैर दबाने के बाद दीदी ने बोला- राहुल मेरे पंजों में दर्द हो रहा है।
मैं ये मौका छोड़ना नहीं चाहता था, मैं चाह रहा था कि दीदी पूरे शरीर की मालिश मुझसे करवायें ताकि मैं उनका सेक्सी बदन देख सकूं।
मैंने दीदी से बोला- दीदी, आपके पैर सूखे सूखे लग रहे हैं. आप बोलो तो तेल से हल्की हल्की मालिश कर दूं?
दीदी ने कहा- कर दो राहुल!

मुझे मसाज पोर्न वीडियो देखने का शौक है जिसे देखकर मैं मसाज करना सीख लिया है.

मैं तेल से दीदी के पैरों के पंजों की मालिश धीरे धीरे कर रहा था.
फिर मैंने दीदी से पूछा- दीदी, कुछ आराम मिला?
तो नेहा दीदी ने कहा- इतनी अच्छी मालिश कहाँ से सीखी तुमने राहुल? बहुत आराम मिल रहा है।

फिर मैं धीरे धीरे दीदी के टांगों पर तेल डालकर अच्छे से मालिश करने लगा।
दीदी ने कहा- राहुल तुम्हारे हाथों में जादू है, बहुत अच्छी मालिश करते हो तुम तो!

मैंने दीदी को पेट के बल लेटने को कहा और उनकी मैक्सी टांगों के ऊपर तक उठा दी.
उनकी गोरी गोरी जांघें मेरे सामने थी.

मेरा लंड पैन्ट के बाहर आने को बेताब था.
मैं हाथों में तेल लेकर दीदी की जांघों पर मालिश करने लगा.

मैक्सी के अंदर हाथ डालकर मैं धीरे धीरे उनके चूतड़ों पर हाथ फेर कर मालिश कर रहा था.
दीदी को भी मजा आ रहा था.
उन्होंने अपनी आँखें बंद कर रखी थी.



मैंने मौके का फायदा उठा कर मैक्सी कमर तक उठा दी तो दीदी की आसमानी रंग की पैंटी मेरे सामने थी.
दीदी के गोरे गोरे चूतड़ों पर आसमानी रंग बहुत जँच रहा था.

मेरा मन तो कर रहा था कि पैंटी को नीचे सरका कर अभी उनकी सेक्सी गांड चाट लूं।
मैंने धीरे से दीदी को आवाज दी- दीदी, कैसी लग रही है मालिश?
दीदी ने बहुत- अच्छी करते हो राहुल, करते रहो।

मैंने कहा- दीदी, आप कहो तो आपके कमर भी कर दूं?
उन्होंने हाँ कर दी.

मैंने झट से उनकी कमर में हाथ डालकर मैक्सी कमर तक कर दी तेल डालकर अच्छे से कमर की मालिश करने लगा.

मुझे उनकी पैंटी मदहोश किये जा रही थी. मैं थोड़ी देर ऐसे ही मालिश करने के बाद उनकी गांड के ऊपर बैठ कर दीदी की कमर की मालिश करने लगा.

धीरे धीरे मेरे दोनों हाथ दीदी की पीठ से होते हुए उनके कंधों पर पहुंचने लगे.
मैंने एक जगह पढ़ा था कि स्त्रियों के कान सहलाने से उन्हें जल्दी सेक्स चढ़ता है.
मैं बिना देर किये दीदी के कान को सहलाने लगा।
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दीदी अपनी आँखें बंद कर मसाज का मजा ले रही थी और मैं उनके कामुक बदन को देखकर वासना से भीगा जा रहा था.

पीठ की मसाज करते समय दीदी के ब्रा का हुक आनंद के रस में अड़चन बन रहा था.
इस बार मैंने दीदी से बिना पूछे ही ब्रा का हुक खोल दिया और मैक्सी पूरी शरीर से निकाल दी।

अब मेरी दीदी मेरे सामने पैंटी में थी और उनकी चिकनी पीठ काली रात में चन्द्रमा की तरह चमक रही थी।

तभी दीदी घूमकर एकदम सीधी लेट गयी और बोली- राहुल, सामने भी तेल से मालिश कर दो।

दीदी के सीने पर आसमानी रंग की ब्रा को हटा कर उनके दूधों को आजाद कर दिया.
इतने बड़े बड़े बूब्स जिंदगी में मैं पहली बार देख रहा था.

जैसे ही तेल की कुछ बूंद दीदी के स्तन पर पड़ी, दीदी की सिसकारियाँ बाहर आने लगी और मैं दीदी के मुलायम स्तनों पर हाथ फेरने लगा।

दीदी की सांसें तेज होती जा रही थी.
और इधर मेरी मैं बिना देर किये उनके निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.
दीदी कुछ नहीं बोली, वे बस उइ उइ आआ की आवाज निकाल रही थी/

तक़रीबन 15 मिनट दीदी के स्तनों से खेलने के बाद मैं दीदी की पैंटी को नीचे सरका कर दीदी की चिकनी चूत को चाटने लगा।

दीदी को भी बहुत मजा आ रहा था.
उन्होंने बोला- बहनचोद … चूत ही चाटेगा या फिर बहन की चूत को चोदेगा भी? चल अपना लंड मेरे मुँह में डाल पहले!
और दीदी ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए.

फिर मुझे बेड पर खड़ा कर दिया और बेड पर बैठ कर मेरा लंड चूसने लगी.
मुझे बहुत मजा आ रहा था.

पहली बार दीदी का नंगा बदन देख कर मेरा लंड जवाब दे रहा था.
दीदी ने बस 5-6 बार ही मेरा लंड मुँह में अंदर बाहर लिया कि मैं उनके मुँह में झड़ गया।

इस पर दीदी हंस पड़ी, बोली- अभी तू कच्चा खिलाड़ी है, तुझे सिखाना पड़ेगा।

मेरी न्यूड सिस्टर बेड पर दोनों टांगें फैला कर लेट गयी और बोली- चलो मेरी चूत चाटो … जब तक तुम्हारा लंड दोबारा खड़ा ना हो जाये!

15 मिनट दीदी की चूत चाटने के बाद मेरा लंड फिर हरकत में आया और मैंने फटाक से दीदी की चूत में अपना लंड डाल दिया।

पहली बार मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं स्वर्ग में हूँ.
5 मिनट के बाद मैं झड़ने वाला था, दीदी से मैंने कहा.

दीदी ने अपना मुँह खोल दिया और मैं फिर से दीदी के मुँह में ही झड़ गया.
इसके बाद रोज मैं मेरी दीदी की मालिश करने लगा, दीदी मालिश के बाद अपनी चूत चुदाई कराने लगी।