बिहार सरकार ने हाल ही में 16 जून 2025 को राजगीर में शेर प्रजनन केंद्र स्थापित किए जाने की घोषणा की है।
यह गुजरात (जूनागढ़, सूरत), उत्तर प्रदेश (इटावा), राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (नेशनल जूलॉजिकल पार्क) के बाद देश का चौथा शेर प्रजनन केंद्र होगा।
हालांकि यह बिहार का पहला शेर प्रजनन केंद्र होगा।
इसका उद्देश्य बिहार में वन्यजीवों के संरक्षण, विशेषतः एशियाई शेरों के संरक्षण को मजबूत करना और साथ ही इको-टूरिज्म को बढ़ावा देना है।
बिहार का एकमात्र टाइगर रिजर्व, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व है, जो पश्चिमी चंपारण जिले में अवस्थित है।
रिजर्व प्रोजेक्ट टाइगर योजना के अंतर्गत इसकी स्थापना वर्ष 1990 में की गई थी।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की सीमा नेपाल के चितवन नेशनल पार्क से लगती है।
यह रिजर्व वाल्मीकि नगर में गंडक नदी के किनारे तराई क्षेत्र में फैला हुआ है।
यह गुजरात (जूनागढ़, सूरत), उत्तर प्रदेश (इटावा), राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (नेशनल जूलॉजिकल पार्क) के बाद देश का चौथा शेर प्रजनन केंद्र होगा।
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सोने से पहले : करेंट अफेयर्स का क्विज #954
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जजुआर मध्य पंचायत, बिहार के मुज़फ्फरपुर ज़िले (कटरा प्रखंड) की एक अग्रणी पंचायत है, जिसे हाल ही में 2 जून 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के द्वारा “राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार” (National Panchayat Award) से सम्मानित किया गया।
इस पंचायत को "स्मार्ट पंचायत" का यह दर्जा इसलिए मिला क्योंकि यहां आधुनिक सुविधाओं का सफलतापूर्वक प्रयोग किया गया है, जैसे: CCTV कैमरे, फ्री वाई-फाई ज़ोन, आरओ पेयजल संयंत्र, सोलर स्ट्रीट लाइट्स, 24×7 एम्बुलेंस सेवा, पंचायत भवन में डिजिटल स्क्रीन एवं सूचना केंद्र आदि।
इस पंचायत को "स्मार्ट पंचायत" का रूप देने और पंचायती राज के सपने को पूरा करने का श्रेय दूसरी बार बने यहां के मुखिया सुमन नाथ ठाकुर को जाता है।
बलवंतराय मेहता समिति (1957) की रिपोर्ट के आधार पर 2 अक्टूबर 1959 को नागौर जिला, राजस्थान में प्रथम त्रिस्तरीय पंचायत प्रणाली की शुरुआत हुई थी।
ग्राम पंचायत → पंचायत समिति (ब्लॉक स्तर) → जिला परिषद
तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसकी शुरुआत की थी।
इस पंचायत को "स्मार्ट पंचायत" का यह दर्जा इसलिए मिला क्योंकि यहां आधुनिक सुविधाओं का सफलतापूर्वक प्रयोग किया गया है, जैसे: CCTV कैमरे, फ्री वाई-फाई ज़ोन, आरओ पेयजल संयंत्र, सोलर स्ट्रीट लाइट्स, 24×7 एम्बुलेंस सेवा, पंचायत भवन में डिजिटल स्क्रीन एवं सूचना केंद्र आदि।
इस पंचायत को "स्मार्ट पंचायत" का रूप देने और पंचायती राज के सपने को पूरा करने का श्रेय दूसरी बार बने यहां के मुखिया सुमन नाथ ठाकुर को जाता है।
बलवंतराय मेहता समिति (1957) की रिपोर्ट के आधार पर 2 अक्टूबर 1959 को नागौर जिला, राजस्थान में प्रथम त्रिस्तरीय पंचायत प्रणाली की शुरुआत हुई थी।
ग्राम पंचायत → पंचायत समिति (ब्लॉक स्तर) → जिला परिषद
तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसकी शुरुआत की थी।
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सोने से पहले : करेंट अफेयर्स का क्विज #956
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