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✅ Learn BASICS OF AYURVEDA with logical approach.

✅ रटना नही है , समझना है ।

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Referring to the issue of harassment of BAMS doctors, the National Commission for Indian System of Medicine (NCISM) has clarified that calling the practitioners of the Indian System of Medicine as "quacks" or "bogus doctors" would be violation of the law. Taking note of the fact that BAMS doctors are taunted to be Quacks in public notices, electronic print and social...

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समान हित के क्षेत्रों में सहयोग के लिए आयुष मंत्रालय, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के बीच त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए
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Candidates who seek admission to undergraduate medical programs in Ayurveda (BAMS) need to clear a newly introduced National Eligibility and Entrance Test (NEET).

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Candidates who seek admission to undergraduate medical programs in Ayurveda (BAMS) need to clear a newly introduced National Eligibility and Entrance Test (NEET). @BAMS_study
Candidates who seek admission to undergraduate medical programs in Ayurveda (BAMS) need to clear a newly introduced National Eligibility and Entrance Test (NEET).


The National Commission for Indian System of Medicine (NCISM) has notified the regulations related to the minimum standards required for admission to the undergraduate Ayurveda courses.

The admission to all the ayurveda medical colleges in the country would now be held via a common entrance test conducted by the NCISM

Currently, the national level admissions to the BAMS courses are done using a special list that has been prepared based on the NEET – UG exam. The registration for AYUSH UG counselling too was conducted. Separate lists were prepared by the states, including Kerala, for admission to the ayurveda undergraduate medical courses.


As per the latest regulations, the aspirants need to appear for the new entrance exam to secure admission for the BAMS course.


The national and state level merit lists would be prepared based on these scores. Candidates who get at least 50th percentile would be eligible for admission in the general category. Meanwhile, it is 40th percentile for the reserved categories.


15% seats would be allotted to the all – India quota while 85% seats are available in the state quota. However, 100% seats come under the all – India quota in the deemed universities.  

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संधि

•सन्धि का मुख्य अर्थ है – जोड़ना । व्याकरण के नियमों के अनुसार स्वर , व्यञ्जन तथा विसर्गों के विकारयुक्त मेल को सन्धि कहते हैं सु – आगतम् स्वागतम् ।

•सन्धि के तीन भेद हैं १. स्वर सन्धि । २. व्यञ्जन सन्धि । ३. विसर्ग सन्धि ।

•स्वरसन्धिः

१. स्वर्णदीर्घसन्धिः

अकः सवर्णे दीर्घः ६ / १ / १०१ ।।

जब अ इ उ ऋ लू के बाद में ये ही स्वर , हस्व या दीर्घ रूप में हों तो दोनो के स्थान पर तदनुरूप दीर्घ हो जाता है ।

उदाहरण
गण + अधिपतिः = गणाधिपतिः ।
सती + ईश : = सतीशः ।

२. गुणसन्धिः

आद्गुणः ६/१/८७ ।।

यदि अ या आ के बाद ऋ य ऋ हो तो दोनो के स्थान पर अर आदेश हो जाता है । लू आता है तो अल् आदेश हो जाता है । इ , ई हो तो ए आदेश हो जाता है । उ , क हो तो ओ आदेश हो जाता है ।
उदाहरण
गण + ईशः = गणेशः ।
सर्व+ उदय : = सर्वोदयः ।

३. वृद्धिसन्धिः

वृद्धिरेचि ६/१/८८ ॥

यदि पूर्व पद के अन्त में अ या आ और उत्तर पद के आदि में ए , ऐ , ओ , औ हो तो ए.ऐ के स्थान पर ऐ आदेश हो जाता है तथा ओ , औ के स्थान पर औ आदेश हो जाता है । ए , ऐ – ऐ , ओ , औ- औ ।

उदाहरण
देव + ऐश्वर्यम् = देवैश्वर्यम् ।
कृष्ण + ऐकत्वम् = कृष्णैकत्वम्।
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४. यण् – सन्धिः

इको यणचि ६/१/७७ ।।

इक् के स्थान पर यण् होता है , अच् प्रत्याहार के परे होने पर ।
अर्थात् जब पूर्व पद के अन्त में इ या ई के बाद उन्हीं स्वरों को छोड़कर कोई अन्य स्वर हो तो इ , ई , के स्थान पर य् हो जाता है ।
यदि पूर्व पद के अन्त में उ या ऊ हो तो उसके बाद उन्हीं स्वरों को छोड़कर कोई अन्य स्वर हो तो उ , या ऊ के स्थान पर व् हो जाता है ।
जब लृ के बाद लृ को छोड़कर अन्य स्वर हो तो लृ के स्थान पर ल् आदेश हो जाता है ।

उदाहरण
सुधी + उपास्ये = सुध्युपास्यः।
मधु + अरिः = मध्वरिः ।

५.अयादिसन्धिः

एचोऽयवायाव : ६/१/७८ ।।

एच के स्थान पर क्रम से अय् , अव् , आय , आव् से आदेश होते हैं अच् के परे होने पर । यह अयादि आदेश विधान करने वाला विधिसूत्र है ।
एच् ( ए , ओ , ऐ , औ ) के बाद जब उत्तर पद के आदि में कोई स्वर आता है तो इनके स्थान पर क्रमश : अय् , अव्, आय् , आव् आदेश होता है ।

उदाहरण
हरे + ए = हरये ।
विष्णो + ए = विष्णवे ।

६.पूर्वरूपसन्धिः

एङः पदान्तादति ६ / १ / १० ९ ।।

पदान्त एङ् से हस्व अकार के परे होने पर पूर्व और पर के स्थान पर पूर्वरूप एकादेश होता है ।

पूर्व पद के अन्त में यदि ए या ओ हो और उत्तर पद के आदि में हत्व अ हो तो वह ए या ओ का रूप धारण कर लेता है । पूर्वरूप होने पर अ का चिन्ह ( ऽ ) होता है ।

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उदाहरण
हरे + अव = हरेऽव ।
विष्णो + अव = विष्णोऽव

व्यंजन संधि

हल् अर्थात् व्यञ्जनों में होने वाली सन्धि। कहीं हल से हल् परे और कहीं पूर्व में हल् किन्तु पर में अच् हो तो भी होने वाली सन्धि हत्सन्धि या व्यञ्जन सन्धि कहलाती है ।

१. श्चुत्वसन्धिः

स्तोः श्चुना श्चुः ८/४/४० ॥

१. सकार और तवर्ग ( त , थ , द , ध , न ) के साथ यदि श और चवर्ग ( च , छ , जद झ , न ) हो तो शकार और चवर्ग ( च , छ , ज , झ , न ) हो जाता है ।
पूर्व पद के अन्त में- स् त् थ् द् ध् न्
उत्तर पद के आदि में -श् च्छ् ज् झ् ञ् – श् च् छ् ज् झ् ल्

उदाहरण

रामस्+ चिनोति = रामश्विनोति ।
रामस् + शेते = रामश्शेते ।

२.ष्टुत्वसन्धिः

ष्टुना ष्टुः ८/४/४१ ।।

पूर्व पद के अन्त में यदि स अथवा तवर्ग ( त , थ , द , ध , न ) का कोई व्यञ्जन हो और उत्तर पद के आदि में ष् हो अथवा टवर्ग ( ट , ठ , ड , ढ , ण ) का व्यञ्जन हो तो उनके स्थान पर प और टवर्ग ( ट , ठ , ड , ढ , ण ) हो जाता है ।

उदाहरण
रामस् + षष्ठः = रामष्षष्ठः ।
कृष्णस् + टीकते = कृष्णष्टीकते ।।

३. पदान्त जश्त्व सन्धि

झलां जशोऽन्ते ८ / ३ / ३ ९ ।।

यदि पूर्व पद के अन्त में कोई झल् प्रत्याहार ( वर्ग के प्रथम , द्वितीय , तृतीय , चतुर्थ ) और ऊष्म वर्ण ( श , ष , स , ह ) हों तो उनके स्थान पर जश् ( ज ब ग ड द ) हो जाता है । ( जश् वर्ण अर्थात् तृतीय वर्ण हो जाता है ) ।

उदाहरण
वाक् + ईशः = वागीशः ।
अच् + अन्त : = अजन्तः ।

४. अपदान्तजश्त्व सन्धि

झलां जश् झशि ८/४/५३ ।।

पूर्व पद में स्थित झल् वर्ग के प्रथम , द्वितीय , तृतीय , चतुर्थ और ऊष्म वर्ण ( स , श , ष , ह ) हों तो उनको जश् अर्थात् अपने वर्ग का तृतीय वर्ण ( ग ज ड द ब ) हो जाता है यह सन्धि पद के बीच में होती है ।

उदाहरण
लभ् + धा = लब्धा ।
सिध् + धिः = सिद्धिः ।

•विसर्गसन्धिः
व्यञ्जनों तथा विभिन्न स्वरों के योग से विसर्गो का परिवर्तन श् , ष् , स् , र् , ह् , य् लोप के रूप में होता है।
स् के रूप में- ” विसर्जनीयस्य सः ८/३/३४ ।।
यदि विसर्गों के आगे प्रत्येक वर्ण के ( प्रथम , द्वितीय , त , थ , श , ष , स , ह ) वर्ण हों तो विसर्गों को स् हो जाता है ।
उदाहरण
विष्णुः + त्राता – विष्णोस्त्राता ।
यशः + काम्यति = यशस्काम्यति ।


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With a view to provide benefits of Indian traditional #Ayurveda System of medicine to a wider clientele, Ministry of Defence has decided to operationalise Ayurveda Centres at 37 Cantonment Hospitals across the country from May 01, 2022.

#Ayush @BAMS_study
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने अंडर ग्रेजुएट मेडिकल प्रोग्राम में योग्यता आधारित मेडिकल एजुकेशन के इम्लिमेंटेशन के लिए एक सर्कुलर जारी किया है, जिसमें कोर्स की शुरुआत में स्टूडेंट्स के लिए महर्षि चरक शपथ की सिफारिश की गई है. इसमें ये भी कहा गया है कि MBBS स्टूडेंट्स को गांव को गोद लेना होगा.

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“महत्वपूर्ण बात यह नहीं है कि हर बच्चे को पढ़ाया जाना चाहिए, बल्कि हर बच्चे को सीखने की इच्छा दी जानी चाहिए।”
– जॉन लुबॉक 
Being the founder of "Iyengar Yoga", B.K.S Iyengar is known for popularising Yoga around the world.