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@Helping_Medicos / @goNARAD
There are 57 muscles on the human face and most of them are involved in the formation of emotions. 😇😇
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How a single sperm is selected and injected directly into the egg using a fine glass needle.Method is called - ICSI (Intracytoplasmic sperm injection)
💉 @Helping_Medicos
- प्रो. बनवारी लाल गौड़
(पूर्व निदेशक, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर)
@BAMS_study
श्रीमद्भागवत पुराण में एक प्रसंग में कहा गया है कि देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मन्थन किया, जिसमें मन्दर पर्वत को मथनी के रूप में प्रयुक्त किया और वासुकि नाग को डोरी के रूप में प्रयुक्त कर मन्थन किया। उसमें एक-एक करके अनेक रत्न उत्पन्न हुए, जिनमें अमृतकलश के साथ धन्वंतरि का प्रकट होना एक महत्तवपूर्ण घटना है।
लगभग इसी तरह का वर्णन महाभारत, अग्निपुराण, विष्णुपुराण, हरिवंशपुराण और ब्रह्मवैवर्तपुराण आदि में है। जिनमें वर्णनशैली में थोड़ा-बहुत अन्तर कर दिया गया है। इन सभी में आलंकारिक वर्णन है जो पुराणों की शैली में इनके देवत्व को प्रतिपादित करने की दृष्टि से अतिशयोक्ति पूर्ण स्वरूप को भी प्रकट करता है। समुद्र मन्थन करना और उसमें वासुकि नाग तथा मन्दराचल का प्रयोग करना आलंकारिक है।
मुख्य उद्देश्य तो अमृत का निर्माण और उसके प्रयोग में दक्ष करना ही है। यहां यह भी उल्लेखित कर देना उपयुक्त होगा कि वेदमर्मज्ञ पं. मधुसूदन ओझा ने इन्द्रविजय नामक ग्रन्थ में लिखा है कि देवों और असुरों में अनेक संग्राम हुए। उनमें 12 महासंग्राम अत्यन्त प्रसिद्ध हैं। इन 12 महायुद्धों में एक महायुद्ध का नाम समुद्रमन्थन (जलधिमन्थन) भी है। अत: समुद्रमन्थन के इस प्रसंग का व्यावहारिक अर्थ किया जायेे तो यह कहा जा सकता है कि इस युद्ध का मूल कारण अमृतमन्थन था।
भगवान धन्वंतरि की पूजा सम्पूर्ण भारत में की जाती है, लेकिन उत्तर भारत में इनके बहुत कम मन्दिर देखने को मिलते हैं। वहीं दक्षिण भारत के तमिलनाडु एवं केरल में इनके कई मन्दिर हैं। केरल के नेल्लुवायि में धन्वंतरि भगवान का सर्वाधिक सुन्दर व विशाल मन्दिर है।
केरल के अष्टवैद्यों के वंश में आज भी भगवान धन्वंतरि की पूजा का विशेष महत्व है। इनके अलावा अन्नकाल धन्वंतरि मंदिर( त्रिशूर) धन्वंतरि मंदिर, रामनाथपुरम (कोयम्बटूर), श्रीकृष्ण धन्वंतरि मंदिर(उडुपी) आदि भी प्रसिद्ध हैं। गुजरात के जामनगर व मध्य प्रदेश में भी इनके मंदिर हैं।
धन्वंतरि मंदिर, वालाजपत, तमिलनाडु
तमिलनाडु के वालाजपत में श्री धन्वंतरि आरोग्यपीदम मंदिर स्थापित है। इस आरोग्य मंदिर का निर्माण श्रीमुरलीधर स्वामिगल ने करवाया था। बीमारी के कारण अपने माता-पिता को खो चुके स्वामिगल ने जनसेवा के लिए इस मंदिर की स्थापना की। यहां स्थापित भगवान धन्वंतरि की मूर्ति ग्रेनाइट कला की एक अनुपम कृति है। आरोग्यपीदम की साइट पर लाइव पूजा देख सकते हैं।
तक्षकेश्वर मंदिर, मंदसौर, मध्य प्रदेश
यहां नागराज तक्षक और आरोग्य देव धन्वंतरि की मूर्ति स्थापित है। इस मंदिर के निर्माण के पीछे महाराज परीक्षित की सर्प काटने से मृत्यु और फिर उनके पुत्र जन्मेजय द्वारा नागों से प्रतिशोध की पौराणिक कथा जुड़ी है। माना जाता है कि यहां के स्थानीय वैद्य यहां स्थापित धन्वंतरि देव की प्रतिमा के दर्शन के बाद ही जड़ी-बूटी इकट्ठा करते हैं और इलाज शुरू करते हैं।
आयुर्वेद में कहलाए आरोग्य देव
मद्भागवत पुराण के अष्टम स्कन्ध के छठे अध्याय में स्पष्ट कहा गया है कि क्षीरसागर में तिनके, लताएं आदि जो भी औषधिस्वरूप हों, उन्हें डालकर मन्थन करके अमृत निकालना चाहिए।
यहां यह ध्यान देने योग्य बात है कि विभिन्न औषधियों से अमृत निकालने की विधि उस युग में केवल धन्वंतरि को ही आती थी। अत: धन्वंतरि ने एक विशिष्ट प्रक्रिया से देवों और असुरों के श्रम का सहारा लेकर अमृत निकाला, जिसे होशियारी से केवल देवों ने ही पीया।
बाद में इसी के कारण युद्ध हुआ। जब असुर अमृत प्राप्त न कर सके तो उन्होंने उसी के अनुरूप दूसरा पेय बनाने का प्रयत्न किया जो विशेषज्ञता के अभाव में अमृत न बनकर सुरा स्वरूप पेय बना। इस घटना से धन्वंतरि का महत्तव लोक में प्रतिष्ठित हुआ तथा इसे धन्वंतरि के आविर्भाव से जोड़ा जाने लगा।
यहां यह उल्लेखनीय है कि वेदों में समुद्रमन्थन नामक युद्ध का संकेत है पर धन्वंतरि का कहीं नामोल्लेख नहीं है, इसी तरह पुराणों में समुद्र मन्थन का उल्लेख तो है पर उसे युद्ध न मानकर अमृतमन्थन का क्रियात्मक स्वरूप मान लिया है।
निष्कर्ष रूप में यह कहा जा सकता है कि पुराणों ने अमृत मन्थन के स्वरूप को आलंकारिक शैली में वर्णित किया तथा धन्वंतरि को देवत्व रूप में प्रतिष्ठापित किया। आयुर्वेद में इन्हें आदिदेव धन्वंतरि के रूप में जाना जाता है।
कई स्वरूपों का उल्लेख
हरिवंशपुराण ने समुद्रमन्थन के इस स्वरूप को व्यावहारिकता प्रदान करने का यत्न किया है। इसमें कहा गया है कि समुद्रमन्थन से अब्जदेव (ये धन्वंतरि ही थे) उत्पन्न हुए। ये विष्णु के अंशावतार थे। इनको यज्ञभाग नहीं दिया गया। अत: ये बाद में काश राजा (काशी के राजा) धन्व के पुत्र रूप में उत्पन्न होकर धन्वंतरि कहलाये। ये अष्टांग आयुर्वेद के ज्ञाता थे। ये प्रसिद्ध एवं लोगों के
(पूर्व निदेशक, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर)
@BAMS_study
श्रीमद्भागवत पुराण में एक प्रसंग में कहा गया है कि देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मन्थन किया, जिसमें मन्दर पर्वत को मथनी के रूप में प्रयुक्त किया और वासुकि नाग को डोरी के रूप में प्रयुक्त कर मन्थन किया। उसमें एक-एक करके अनेक रत्न उत्पन्न हुए, जिनमें अमृतकलश के साथ धन्वंतरि का प्रकट होना एक महत्तवपूर्ण घटना है।
लगभग इसी तरह का वर्णन महाभारत, अग्निपुराण, विष्णुपुराण, हरिवंशपुराण और ब्रह्मवैवर्तपुराण आदि में है। जिनमें वर्णनशैली में थोड़ा-बहुत अन्तर कर दिया गया है। इन सभी में आलंकारिक वर्णन है जो पुराणों की शैली में इनके देवत्व को प्रतिपादित करने की दृष्टि से अतिशयोक्ति पूर्ण स्वरूप को भी प्रकट करता है। समुद्र मन्थन करना और उसमें वासुकि नाग तथा मन्दराचल का प्रयोग करना आलंकारिक है।
मुख्य उद्देश्य तो अमृत का निर्माण और उसके प्रयोग में दक्ष करना ही है। यहां यह भी उल्लेखित कर देना उपयुक्त होगा कि वेदमर्मज्ञ पं. मधुसूदन ओझा ने इन्द्रविजय नामक ग्रन्थ में लिखा है कि देवों और असुरों में अनेक संग्राम हुए। उनमें 12 महासंग्राम अत्यन्त प्रसिद्ध हैं। इन 12 महायुद्धों में एक महायुद्ध का नाम समुद्रमन्थन (जलधिमन्थन) भी है। अत: समुद्रमन्थन के इस प्रसंग का व्यावहारिक अर्थ किया जायेे तो यह कहा जा सकता है कि इस युद्ध का मूल कारण अमृतमन्थन था।
भगवान धन्वंतरि की पूजा सम्पूर्ण भारत में की जाती है, लेकिन उत्तर भारत में इनके बहुत कम मन्दिर देखने को मिलते हैं। वहीं दक्षिण भारत के तमिलनाडु एवं केरल में इनके कई मन्दिर हैं। केरल के नेल्लुवायि में धन्वंतरि भगवान का सर्वाधिक सुन्दर व विशाल मन्दिर है।
केरल के अष्टवैद्यों के वंश में आज भी भगवान धन्वंतरि की पूजा का विशेष महत्व है। इनके अलावा अन्नकाल धन्वंतरि मंदिर( त्रिशूर) धन्वंतरि मंदिर, रामनाथपुरम (कोयम्बटूर), श्रीकृष्ण धन्वंतरि मंदिर(उडुपी) आदि भी प्रसिद्ध हैं। गुजरात के जामनगर व मध्य प्रदेश में भी इनके मंदिर हैं।
धन्वंतरि मंदिर, वालाजपत, तमिलनाडु
तमिलनाडु के वालाजपत में श्री धन्वंतरि आरोग्यपीदम मंदिर स्थापित है। इस आरोग्य मंदिर का निर्माण श्रीमुरलीधर स्वामिगल ने करवाया था। बीमारी के कारण अपने माता-पिता को खो चुके स्वामिगल ने जनसेवा के लिए इस मंदिर की स्थापना की। यहां स्थापित भगवान धन्वंतरि की मूर्ति ग्रेनाइट कला की एक अनुपम कृति है। आरोग्यपीदम की साइट पर लाइव पूजा देख सकते हैं।
तक्षकेश्वर मंदिर, मंदसौर, मध्य प्रदेश
यहां नागराज तक्षक और आरोग्य देव धन्वंतरि की मूर्ति स्थापित है। इस मंदिर के निर्माण के पीछे महाराज परीक्षित की सर्प काटने से मृत्यु और फिर उनके पुत्र जन्मेजय द्वारा नागों से प्रतिशोध की पौराणिक कथा जुड़ी है। माना जाता है कि यहां के स्थानीय वैद्य यहां स्थापित धन्वंतरि देव की प्रतिमा के दर्शन के बाद ही जड़ी-बूटी इकट्ठा करते हैं और इलाज शुरू करते हैं।
आयुर्वेद में कहलाए आरोग्य देव
मद्भागवत पुराण के अष्टम स्कन्ध के छठे अध्याय में स्पष्ट कहा गया है कि क्षीरसागर में तिनके, लताएं आदि जो भी औषधिस्वरूप हों, उन्हें डालकर मन्थन करके अमृत निकालना चाहिए।
यहां यह ध्यान देने योग्य बात है कि विभिन्न औषधियों से अमृत निकालने की विधि उस युग में केवल धन्वंतरि को ही आती थी। अत: धन्वंतरि ने एक विशिष्ट प्रक्रिया से देवों और असुरों के श्रम का सहारा लेकर अमृत निकाला, जिसे होशियारी से केवल देवों ने ही पीया।
बाद में इसी के कारण युद्ध हुआ। जब असुर अमृत प्राप्त न कर सके तो उन्होंने उसी के अनुरूप दूसरा पेय बनाने का प्रयत्न किया जो विशेषज्ञता के अभाव में अमृत न बनकर सुरा स्वरूप पेय बना। इस घटना से धन्वंतरि का महत्तव लोक में प्रतिष्ठित हुआ तथा इसे धन्वंतरि के आविर्भाव से जोड़ा जाने लगा।
यहां यह उल्लेखनीय है कि वेदों में समुद्रमन्थन नामक युद्ध का संकेत है पर धन्वंतरि का कहीं नामोल्लेख नहीं है, इसी तरह पुराणों में समुद्र मन्थन का उल्लेख तो है पर उसे युद्ध न मानकर अमृतमन्थन का क्रियात्मक स्वरूप मान लिया है।
निष्कर्ष रूप में यह कहा जा सकता है कि पुराणों ने अमृत मन्थन के स्वरूप को आलंकारिक शैली में वर्णित किया तथा धन्वंतरि को देवत्व रूप में प्रतिष्ठापित किया। आयुर्वेद में इन्हें आदिदेव धन्वंतरि के रूप में जाना जाता है।
कई स्वरूपों का उल्लेख
हरिवंशपुराण ने समुद्रमन्थन के इस स्वरूप को व्यावहारिकता प्रदान करने का यत्न किया है। इसमें कहा गया है कि समुद्रमन्थन से अब्जदेव (ये धन्वंतरि ही थे) उत्पन्न हुए। ये विष्णु के अंशावतार थे। इनको यज्ञभाग नहीं दिया गया। अत: ये बाद में काश राजा (काशी के राजा) धन्व के पुत्र रूप में उत्पन्न होकर धन्वंतरि कहलाये। ये अष्टांग आयुर्वेद के ज्ञाता थे। ये प्रसिद्ध एवं लोगों के
द्वारा पूजनीय रहे। इनके प्रपौत्र दिवोदास नाम के राजा हुए जो आयुर्वेदज्ञ थे तथा विशेष रूप से शल्यशास्त्र के विशेषज्ञ भी थे। आयुर्वेदज्ञ होने के कारण दिवोदास ने अपने प्रपितामह धन्वंतरि का नाम अपने उपनाम के रूप में प्रयुक्त किया।
इन दिवोदास धन्वंतरि ने सुश्रुत, औपधेनव, औरभ्र आदि सात शिष्यों को शल्यप्रधान आयुर्वेद का ज्ञान दिया, जो आज भी प्रतिसंस्कार के बाद उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त एक प्रसंग और भी है जिसमें एक धन्वंतरि, गालव ऋ षि की मन्त्रशक्ति से उत्पन्न हुए थे। इतिहास में विषवैद्य के रूप में भी एक धन्वंतरि का उल्लेख है।
निष्कर्ष रूप में यह कहा जा सकता है कि चार भुजाओं वाले अमृतकलश को धारण करने वाले समुद्र मन्थन से आविर्भूत आदिदेव धन्वंतरि है तथा प्रसिद्ध शल्यशास्त्री आयुर्वेदोपदेष्ता दिवोदास धन्वंतरि सुश्रुत के गुरु और काशी के राजा हुए हैं। दोनों ही पूज्य हैं। धन्वंतरि त्रयोदशी के दिन आदिदेव चतुर्भुज धन्वंतरि की पूजा कर आरोग्य और अमृत की कामना की जाती है।
@BAMS_study
विद्वानों के विभिन्न मत
आयुर्वेद एक जीवन विज्ञान है तथा सृष्टि के प्रारम्भ से ही इसका अस्तित्त्व रहा है। यद्यपि इसके प्रारम्भिक प्रवर्तक के रूप में एकमत से ब्रह्मा को ही स्वीकृत किया गया है। इसके बाद भूतल पर इसके प्रचार प्रसार में किस देवता या ऋषि का योगदान है, इसमें भिन्न-भिन्न मत हैं, पर वर्तमान काल में आयुर्वेद के आराध्य भगवान् धन्वंतरि है, इसमें कहीं भी दो राय नहीं है।
संसार का सबसे प्राचीन ग्रन्थ ऋग्वेद है, जिसमें आयुर्वेद का पर्याप्त वर्णन है, पर इसमें चिकित्सक या आयुर्वेद प्रवर्तक के रूप में कहीं भी धन्वंतरि का नाम नहीं है। विभिन्न पुराणों में धन्वंतरि का आविर्भाव समुद्रमन्थन से ही माना गया है।
@BAMS_study
इन दिवोदास धन्वंतरि ने सुश्रुत, औपधेनव, औरभ्र आदि सात शिष्यों को शल्यप्रधान आयुर्वेद का ज्ञान दिया, जो आज भी प्रतिसंस्कार के बाद उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त एक प्रसंग और भी है जिसमें एक धन्वंतरि, गालव ऋ षि की मन्त्रशक्ति से उत्पन्न हुए थे। इतिहास में विषवैद्य के रूप में भी एक धन्वंतरि का उल्लेख है।
निष्कर्ष रूप में यह कहा जा सकता है कि चार भुजाओं वाले अमृतकलश को धारण करने वाले समुद्र मन्थन से आविर्भूत आदिदेव धन्वंतरि है तथा प्रसिद्ध शल्यशास्त्री आयुर्वेदोपदेष्ता दिवोदास धन्वंतरि सुश्रुत के गुरु और काशी के राजा हुए हैं। दोनों ही पूज्य हैं। धन्वंतरि त्रयोदशी के दिन आदिदेव चतुर्भुज धन्वंतरि की पूजा कर आरोग्य और अमृत की कामना की जाती है।
@BAMS_study
विद्वानों के विभिन्न मत
आयुर्वेद एक जीवन विज्ञान है तथा सृष्टि के प्रारम्भ से ही इसका अस्तित्त्व रहा है। यद्यपि इसके प्रारम्भिक प्रवर्तक के रूप में एकमत से ब्रह्मा को ही स्वीकृत किया गया है। इसके बाद भूतल पर इसके प्रचार प्रसार में किस देवता या ऋषि का योगदान है, इसमें भिन्न-भिन्न मत हैं, पर वर्तमान काल में आयुर्वेद के आराध्य भगवान् धन्वंतरि है, इसमें कहीं भी दो राय नहीं है।
संसार का सबसे प्राचीन ग्रन्थ ऋग्वेद है, जिसमें आयुर्वेद का पर्याप्त वर्णन है, पर इसमें चिकित्सक या आयुर्वेद प्रवर्तक के रूप में कहीं भी धन्वंतरि का नाम नहीं है। विभिन्न पुराणों में धन्वंतरि का आविर्भाव समुद्रमन्थन से ही माना गया है।
@BAMS_study
Question
जो औषधद्रव्य गुरु, शीत, सर, स्निग्ध, मन्द, सूक्ष्म, मृदु एवं द्रव होता है वह प्रायः ......... होता है।
जो औषधद्रव्य गुरु, शीत, सर, स्निग्ध, मन्द, सूक्ष्म, मृदु एवं द्रव होता है वह प्रायः ......... होता है।
Anonymous Quiz
6%
A. रूक्षण
68%
B. स्नेहन
21%
C. Both A and B
4%
D. उपरोक्त सभी
Question
जो द्रव्य रूक्ष, विशद, लघु तथा स्पर्शगुण- प्रधान होता है, वह ............. द्रव्य कहा जाता है।
जो द्रव्य रूक्ष, विशद, लघु तथा स्पर्शगुण- प्रधान होता है, वह ............. द्रव्य कहा जाता है।
Anonymous Quiz
10%
A. आग्नेय
10%
B. आप्य
15%
C. पार्थिव
65%
D. वायव्य
Question
............. refers to the spontaneous arrest or prevention of bleeding from the injured/damaged vessels by the physiological process.
............. refers to the spontaneous arrest or prevention of bleeding from the injured/damaged vessels by the physiological process.
Anonymous Quiz
16%
A. Homeostasis
70%
B. Haemostasis
9%
C. Both A and B
4%
D. None of the above
Question
Enterochromaffin (EC) cells Secrete
Enterochromaffin (EC) cells Secrete
Anonymous Quiz
37%
A. Serotonin
24%
B. Gastrin
15%
C. Mucin
24%
D. All of the above
Question
जो द्रव्य गुरु, स्थूल, स्थिर तथा गन्धगुण - प्रधान होता है, उसे ............ द्रव्य कहते हैं।
जो द्रव्य गुरु, स्थूल, स्थिर तथा गन्धगुण - प्रधान होता है, उसे ............ द्रव्य कहते हैं।
Anonymous Quiz
5%
A. वायव्य
8%
B. आग्नेय
7%
C. आप्य
80%
D. पार्थिव
Question
जो द्रव्य द्रव, शीत, गुरु, स्निग्ध, मन्द, सान्द्र तथा रसगुण प्रधान होता है, उसे ......... द्रव्य कहते हैं।
जो द्रव्य द्रव, शीत, गुरु, स्निग्ध, मन्द, सान्द्र तथा रसगुण प्रधान होता है, उसे ......... द्रव्य कहते हैं।
Anonymous Quiz
16%
A. पार्थिव
3%
B. आग्नेय
78%
C. आप्य
3%
D. वायव्य
Question
Hormones which are secreted by .......... glands are released directly into the blood.
Hormones which are secreted by .......... glands are released directly into the blood.
Anonymous Quiz
27%
A. Exocrine
60%
B. Endocrine
12%
C. Both A and B
0%
D. None of the above
Question
In fetal life, the erythropoiesis occurs in ......... stages:
In fetal life, the erythropoiesis occurs in ......... stages:
Anonymous Quiz
19%
A. One
43%
B. Two
24%
C. Four
14%
D. Three
What is Mechanical Ventilation?
@BAMS_study #medical
Mechanical ventilation is a treatment to help a person breathe when they find it difficult or are unable to breathe on their own. A mechanical ventilator pushes airflow into the patient’s lungs to help them breathe.
Mechanical ventilation may be
• Invasive ventilation with a tube inserted into the patient’s airway, performed in the intensive care unit in the hospital.
• Noninvasive ventilation that can be used at home by people with respiratory difficulties.
Mechanical ventilation first came into use in 1929. The two types of mechanical ventilation are
• Positive-pressure ventilation: pushes the air into the lungs.
• Negative-pressure ventilation: sucks the air into the lungs by making the chest expand and contract.
Negative-pressure ventilation:
The early ventilators were negative-pressure ventilators. Negative pressure ventilation is very little in use now.
• Iron lung: The first mechanical ventilator, a metal cylinder which enveloped the patient completely up to the neck.
• Chest cuirass: A small shell which can be strapped to the patient’s chest to create the negative pressure.
Positive-pressure ventilation:
Positive-pressure ventilators were developed in the early 1950s to treat polio patients with respiratory paralysis. These ventilators blow the air into the patient’s lungs through a tube. They may be invasive or noninvasive.
Invasive ventilation:
• Endotracheal Intubation: the tube is inserted into the patient’s airway (trachea) through the mouth or nose.
• Tracheotomy: the tube is inserted through a hole made into the airway.
Noninvasive ventilation:
Noninvasive mechanical ventilators come with masks and can be used at home. The three kinds are
• Continuous positive airway pressure (CPAL): delivers constant and steady air pressure.
• Autotitrating (adjustable) positive airway pressure (APAP): changes air pressure according to the breathing pattern.
• Bilevel positive airway pressure (BiPAP): delivers air with different pressures for inhalation and exhalation.
@BAMS_study 🍃
@BAMS_study #medical
Mechanical ventilation is a treatment to help a person breathe when they find it difficult or are unable to breathe on their own. A mechanical ventilator pushes airflow into the patient’s lungs to help them breathe.
Mechanical ventilation may be
• Invasive ventilation with a tube inserted into the patient’s airway, performed in the intensive care unit in the hospital.
• Noninvasive ventilation that can be used at home by people with respiratory difficulties.
Mechanical ventilation first came into use in 1929. The two types of mechanical ventilation are
• Positive-pressure ventilation: pushes the air into the lungs.
• Negative-pressure ventilation: sucks the air into the lungs by making the chest expand and contract.
Negative-pressure ventilation:
The early ventilators were negative-pressure ventilators. Negative pressure ventilation is very little in use now.
• Iron lung: The first mechanical ventilator, a metal cylinder which enveloped the patient completely up to the neck.
• Chest cuirass: A small shell which can be strapped to the patient’s chest to create the negative pressure.
Positive-pressure ventilation:
Positive-pressure ventilators were developed in the early 1950s to treat polio patients with respiratory paralysis. These ventilators blow the air into the patient’s lungs through a tube. They may be invasive or noninvasive.
Invasive ventilation:
• Endotracheal Intubation: the tube is inserted into the patient’s airway (trachea) through the mouth or nose.
• Tracheotomy: the tube is inserted through a hole made into the airway.
Noninvasive ventilation:
Noninvasive mechanical ventilators come with masks and can be used at home. The three kinds are
• Continuous positive airway pressure (CPAL): delivers constant and steady air pressure.
• Autotitrating (adjustable) positive airway pressure (APAP): changes air pressure according to the breathing pattern.
• Bilevel positive airway pressure (BiPAP): delivers air with different pressures for inhalation and exhalation.
@BAMS_study 🍃
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Different types of injection:💉🩸
● Intramuscular (IM)
● Subcutaneous (SC)
● Intravenous (IV)
● Intradermal (ID)
@Helping_Medicos
● Intramuscular (IM)
● Subcutaneous (SC)
● Intravenous (IV)
● Intradermal (ID)
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